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बिना सॉफ्टवेयर पेन ड्राइव में ऐसे लगाएं पासवर्ड

पेन ड्राइव में ऐसा कंटेंट सेव करके रखा जाता है जो महत्वपूर्ण होता है. साथ ही कोशिश की जाती है कि उसका डाटा किसी अनजान व्यक्ति के हाथ न लगे. अगर आप भी ऐसा ही चाहते हैं तो बिना किसी सॉफ्टेवयर की मदद लिए अपनी पेन ड्राइव पर पासवर्ड का सुरक्षा कवच लगा सकते हैं. वहीं फोन में बिना किसी सॉफ्टवेयर के फोल्डर भी छिपाया जा सकता है.

ऐसे करें लॉक

– कंप्यूटर या लैपटॉप में ‘स्टार्ट’ पर क्लिक करते हुए ‘कंप्यूटर पैनल’ में जाएं. यहां दाईं तरफ ऊपर की ओर ‘व्यू बाई’ लिखा मिलेगा, उस पर क्लिक करके ‘लार्ज आइकन’ का चुनाव करें. इसके बाद BitLocker Drive Encryption पर क्लिक करें.

– नई स्क्रीन खुलने के बाद उसमें कंप्यूटर से जुड़ी हुई ड्राइव दिखाई देंगी. इसमें ‘पेन ड्राइव’ का विकल्प भी होगा जिसके सामने bit locker लिखा मिलेगा, उस पर क्लिक करें.

– इसके बाद नई विंडो स्क्रीन खुलेगी जिसमें पेन ड्राइव के लिए पासवर्ड टाइप करना होगा. इसके बाद उस स्क्रीन पर ‘नेक्स्ट’ का विकल्प दिखाई देगा उस पर क्लिक कर दें और आगे बढ़ें.

– अब स्क्रीन पर दो विकल्प आएंगे जिसमें से ऊपर की ओर save the password लिखा मिलेगा उसे चुनें. इससे पेन ड्राइव सुरक्षित हो जाएगी.

महंगाई ने उड़ाई आम आदमी की नींद

सब्जियों के दाम में बढ़ोतरी के चलते खुदरा महंगाई जून में 22 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. हालांकि, मई में औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि दर अप्रत्याशित तरीके से रिकवर करती हुई पॉजिटिव जोन में 1.2% पर आ गई है. महंगाई के मामूली तौर पर बढ़ने वाली खबर ने अगस्त में रेट कट की संभावना कम कर दी है, लेकिन अब तक हुई मॉनसून की बारिश ने महंगाई घटने के संकेत दे दिए हैं.

महंगाई के मोर्चे पर मुश्किलें बनी हुई हैं. मंगलवार को स्टैटिस्टिक्स ऑफिस की तरफ से डेटा जारी किए गए. डेटा के अनुसार, जून में कन्जयूमर प्राइस इंडेक्स 5.77% पर रहा, जबकि मई में यह 5.76% पर था. इसके मुताबिक रूरल इन्फ्लेशन जून में 6.2% रही, जबकि अर्बन एरिया में यह 5.26% दर्ज की गई थी. महंगाई का अनुमान लगाने वालों ने उसके मामूली कमी के साथ 5.7% रहने की बात कही थी. रघुराम राजन रिजर्व बैंक के गवर्नर का अपना कार्यकाल खत्म होने से पहले 9 अगस्त को अंतिम बार मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू करेंगे. उनका टर्म 4 सितंबर को खत्म हो रहा है.

राजन ने मॉनसून पर हालात स्पष्ट होने तक इंतजार करने का मन बनाते हुए जून के रिव्यू में पॉलिसी रेट को जस का तस रहने दिया था. कोटक महिंद्रा बैंक की इकॉनमिस्ट उपासना भारद्वाज ने कहा कि इस साल 25 बेसिस प्वाइंट का रेट कट हो सकता है, लेकिन यह तुरंत नहीं होगा. उन्होंने कहा, 'अगस्त की पॉलिसी में रेट कट की सीमित गुंजाइश है क्योंकि आरबीआई की नजर मॉनसून की रफ्तार के साथ सब्जियों के दाम में मौसमी उछाल पर होगी. 'आरबीआई ने मार्च 2017 तक कन्जयूमर इन्फ्लेशन के लिए 5% का टारगेट फिक्स किया है, लेकिन मॉनिटरी पॉलिसी कमिटी की तरफ से इंट्रेस्ट रेट पर जल्द फैसला किए जाने से इसमें बदलाव आ सकता है. कमिटी सरकार के इन्फ्लेशन टारगेट हासिल करने के लिहाज से रेट तय करेगी.

अब राजनीति में धूम मचाएंगे बूम बूम अफरीदी

क्रिकेट के मैदान पर अपने गगनचुंबी छक्कों से लोगों को एंटरटेन करने वाले पाकिस्तान क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने राजनीति के पिच पर उतरने की इच्छा जताई है. अफरीदी ने कहा कि वे राजनीति में आकर लोगों की सेवा करना चाहते है. उन्होंने कहा कि लोगों से जुड़े रहने का यह एक बेहतर मंच है.

36 वर्षीय पाक क्रिकेटरों ने कहा कि क्रिकेट से संन्यास के बाद राजनीति में आना चाहता हूं. हालांकि साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उनके शुभचिंतक यह चाहते है कि मैं राजनीति में कदम न रखूं. उन्होंने कहा मेरी नजर में राजनेता जनता का सबसे अच्छा सेवक होता है और उसे पूरी ईमानदारी से जनता की सेवा करनी चाहिए.

आफरीदी ने कहा कि मैं लोगों की सेवा अपने चैरिटी और सोशल वर्क के द्वारा भी कर सकता हूं. उन्होंने कहा, गरीब बच्चों की शिक्षा के लिए मैं शाहिद आफरीदी फाउंडेशन के जरिए एक स्कूल की स्थापना करना चाहता हूं.

आफरीदी ने अपने रिटायरमेंच की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि वह पाकिस्तान के लिए टी-20 में खेलना जारी रखेंगे. उन्होंने कहा, मैं सीमित ओवर के क्रिकेट में खेलना जारी रखना चाहता हूं. चाहे या राष्ट्रीय स्तर पर हो या फिर घरेलू क्रिकेट या फिर लीग. मैं मानता हूं कि मैं खेलने के लिए पूरी तरह से फिट हूं.

गौर हो अफरीदी ने पिछले साल ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में हुए वर्ल्ड कप के बाद वनडे क्रिकेट से संन्यास लिया था.

वैसे आपको बता दें अफरीदी से पहले पाकिस्तान को क्रिकेट में अपनी कप्तानी में पहली बार वर्ल्ड चैंपियन बनाने वाले इमरान खान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद राजनीति में कदम रखा और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी का गठन किया. शुरुआत में उनकी पार्टी कमजोर रही लेकिन आज उनकी पीटीआई नवाज शरीफ सरकार की प्रमुख प्रतिद्वंद्वी पार्टी है.

प्रभु देवाः असफल फिल्म का असर

बॉक्स आफिस पर फिल्म का सफल होना बहुत जरुरी होता है. यदि फिल्म असफल हो जाए, तो कलाकार व निर्देशक की प्रतिभा कोई मायने नहीं रखती. इसका सबसे बड़ा उदाहरण नृत्य निर्देशक से निर्देशक बने प्रभु देवा हैं.
प्रभु देवा की 2014 में प्रदर्शित फिल्म ‘‘एक्शन जैक्शन’’ ने बॉक्स आफिस पर पानी भी नहीं मगां था.

इस फिल्म की असफलता के कारण प्रभु देवा की दूसरी फिल्म शुरू होने से पहले ही बंद हो गयी. मजेदार बात यह है कि मशहूर फिल्म निर्माता गोवर्धन तनवानी ने प्रभु देवा को अपने बैनर ‘‘बाबा फिल्म्स’’ की दो फिल्मों के निर्देशन के लिए अनुबंधित किया था. जिसमें से पहली फिल्म ‘‘एक्शन जैक्शन’’ थी, जिसमें प्रभु देवा के चहेते हीरो अजय देवगन थे. इस फिल्म के असफल होते ही गोवर्धन तनवानी, प्रभु देवा को भूल गए.

यह एक अलग बात है कि गोवर्धन तनवानी इस बात को स्वीकार नहीं करते.वह कहते हैं- ‘‘फिल्म की सफलता असफलता  से रिश्ते नहीं बदलते. हम प्रभु देवा के निर्देशन में दूसरी फिल्म जल्द शुरू करना चाहते हैं. मगर हमें अच्छी कहानी की तलाश है.’’

कानपुर में घिरे मोहन भागवत

गंगा किनारे सभाएं और सत्संग करने के पौराणिक रिवाज को निभाने का आनंद ही कुछ और है. यह आनंद आरएसएस के मुखिया मोहन भागवत कानपुर में उठा रहे हैं, मौका है संघ के प्रांत प्रचारकों की सालाना बैठक का, जो पांच दिन चलती है. यह बैठक लगभग गोपनीय है, जिसमे खास खास लोगों को ही जाने का सौभाग्य मिल रहा है. बगैर किसी अनौपचारिक /औपचारिक घोषणा के ही लगाने वालों ने अंदाजे लगा लिए कि हो न हो जरूर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के मद्देनजर रणनीति बन रही है, क्योकि वहां भाजपा अच्छी स्थिति में नहीं है और अगर कोई चेहरा पेश कर ही सपा बसपा को टक्कर दी जाना जरूरी हो गया है, तो वह नाम इस मीटिंग में तय किया जा सकता है (यह और बात है कि अभी तक कोई बलि का बकरा बनने तैयार नहीं हुआ है).

6 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर सहित सब कुछ ठीक ठाक चल रहा था कि आल इंडिया सुन्नी उलेमा काउंसिल ने मोहन भागवत से मिलने समय मांग लिया. यह समय बाकायदा संघ का प्रोटोकाल निभाते एक चिट्ठी के जरिये संघ प्रतिनिधियों से मांगा गया. कहीं भागवत मिलने से इंकार न कर दें, इसलिए 6 सवाल भी इसमे नत्थी कर दिये गए, जिससे सनद रहे और संघ व भागवत को वक्त जरूरत घेरा जा सके. ये सवाल हैं…

1 – क्या आरएसएस देश को हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहता है

2 – आरएसएस भारत को हिन्दू राष्ट्र मानता है तो क्या वह हिन्दू धर्म ग्रंथो के अनुसार देश चलाना चाहता है

3 – आप यानि संघ व भागवत हम मुसलमानो से कैसा राष्ट्र प्रेम चाहते हैं

4 – धर्म परिवर्तन पर आरएसएस के क्या विचार हैं

5 – इस्लाम से संघ क्या चाहता है

6 – आप इस्लाम के बारे में क्या जानते हैं.

ये ऐसी पहेलियां हैं जिन्हें भागवत बूझेंगे तो भी और न बूझें तो भी दिक्कत में पड़ने वाले हैं, क्योकि इनमे से कुछ सवालों के जबाब तो बड़े पैमाने पर हिन्दू भी संघ से साफ साफ सुनने की उम्मीद रखते हैं. भागवत चुप रहें या जवाब दें या हाल फिलहाल सवाल टरका दें, देखना दिलचस्प होगा, क्योकि उनके जबाब कुछ भी हों नुकसान तो भाजपा को ही पहुंचाएंगे.

यूपी में मुस्लिम वोट भाजपा को न मिलें, यह चिंता की बात संघ के लिए नहीं है. उसकी कोशिश यह है कि ये वोट सपा, बसपा और कांग्रेस में बंट जाएं तो ही 200 सीटों के बारे में सोचा जाना चाहिए. उधर मुल्ला उलेमा भी कम नहीं हैं, इसलिए उन्होने इस दफा बड़ी शराफत दिखाते मोहन भागवत से ईदी में चंद ऐसे सवालों के जबाब मांगे हैं, जिन्हें दिया गया तो दिवाली फीकी पड़ जाएगी.

पर्सनैलिटी बनाएं परफैक्ट

हर व्यक्ति का अपना व्यक्तित्व होता है और यही व्यक्ति की पहचान होती है. जिस से वो जाना जाता है. कुछ लोग जन्म से अट्रैक्टिव होते हैं तो कुछ अपने नेचर से लोगों को अट्रैक्ट करते हैं. व्यक्ति चाहे कितना भी सुंदर हो अगर उस के बोलने के ढंग में बनावटीपन व रूखापन है तो वह कभी भी किसी को अपनी ओर आकर्षित नहीं कर पाएगा. हर कोई आकर्षक व्यक्तित्व पा सकता है. बस कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है, जिस से व्यक्तित्व का विकास हो और यही सफलता की कुंजी भी है.

अपना आंकलन स्वयं करें: अपनी परख खुद करें बिना, आंकलन के अपनी शक्ति का एहसास नहीं होता, अपनी कमजोरियों और दुर्बलताओं को सुधार कर अपने कर्तव्यों और सिद्धांतों के प्रति अडिग रहें.

खुद को संपूर्ण बनाएं: व्यक्तित्व, व्यक्ति की उस संपूर्ण छवि का नाम होता है, जो वह दूसरों के सामने बनाता है. किसी भी व्यक्ति की खूबियां जैसे ज्ञान, अभिव्यक्ति, सहनशीलता, गंभीरता, प्रस्तुतीकरण आदि होते हैं जिस से वह सर्वगुण संपन्न और परिपूर्ण बनता है.

आत्मविश्वास है जरूरीः व्यक्तितव को बनाने में आत्मविश्वास होना बहुत जरूरी है, अगर आप अपने आप को खुश रखेंगे और पसंद करेंगे तभी आप दूसरों का पसंद कर सकते हैं.

सकारात्मक बनें: हमेशा पौजिटिव सोच और एनर्जी रखें, अपने आप को न खोए, अपनी सारी समस्याओं को समझाने की कोशिश करें, समस्याएं सब के साथ होती हैं, उस के हल का इंतजार करें.

दूसरों को भी महत्त्व दें: आप जब भी किसी व्यक्ति से बात करें तो उसे भी यह एहसास कराएं कि वह व्यक्ति कितना इंर्पोटे्रट है, उसे कंफर्टेबल फील कराएं किसी से बात करते समय कभी भी आप की बातों में घमंड या अभिमान नहीं झलकना चाहिए.

एक अच्छे श्रोता बनें: हमेशा अपनी ही बातों को व्यक्त न करें दूसरे की बातें भी ध्यानपूर्वक सुनें, जब कोई आप से बात कर रहा हो तो कहीं और ध्यान लगा कर या उस की बातों को नजरअंदाज करना अच्छी बात नहीं. ऐसे में आप के व्यक्तित्व की छवि खराब हो सकती है.

विश्वास बनाएं: हमेशा प्रासंगिक रहें, कई बार अपने जीवन की बातों को बांटें पर ध्यान रहे इस दौरान ऐसा कुछ न कहें जिस से आप की छवि खराब हो.

बहस न करें: अपनी गलत बात को सही साबित करने के लिए बहस न करें और न ही दूसरे से बात करते हुए चिल्ला कर बोलें.

अपशब्दों का प्रयोग न करें: अपने से बड़े या छोटे किसी भी व्यक्ति से अपशब्दों का प्रयोग न करें. खास कर किसी के पीठ पीछे उस के बारे में तो बिलकुल नहीं, नहीं तो बेकार में बात दूसरा और गलत रूप धारण कर सकती है.

किसी को छोटा न समझें: अगर आप किसी बड़े पद पर कार्यरत है तो अपने पद का मान रखते हुए अपने से नीचे कार्य करने वालों को छोटा न समझें. अपने पद की गरिमा बनाएं रखें व ऐसी स्थिति से बचें कि आप को छोटा व्यक्ति जवाब दे जाएं.

मजाक मत उड़ाएं: किसी के लुक्स और बातों का कभी भी मजाक न उड़ाएं. हर व्यक्ति के बात करने का ढंग और लुक्स अलग होता है और हर व्यक्ति में कोई न कोई विशेषता होती है उस पर ध्यान दें.

मुसकुराहट रखें बरकरार: व्यक्तित्व को निखारने में मुसकान का बहुत बड़ा रोल है मुसकान वो मनोहर चाबी है जोकि हर दरवाजे का ताला खोल सकती है. किसी के पास जाएं तो मुसकरा के जाएं. बशर्ते मुसकुराहट नकली न हो. इस तरह मुसकान पर लोग ध्यान देंगे, लेकिन कुछ भी ओवर न करें.

बौडी लैंग्वेज हो खास: आप की बौडी लैंग्वेज सौफ्ट और ग्रेसफुल होनी चाहिए, आप की प्रेजेंस बोलती है. अगर आप भी इन सब बातों का ध्यान रखेंगे तो आप कभी भी अपने पर्सनैलिटी को परफैक्ट बना सब के चहेते बन सकते हैं क्योंकि हम अच्छे व्यक्तित्व के साथ पैदा नहीं होते बल्कि हम इसे कई तरीकों से बनाते हैं.

यह क्या बोल गए रांझा विक्रम सिंह

सिनेमा का वैश्वीकरण हो गया है. सिनेमा में बदलाव की बातें भी की जा रही हैं. बॉलीवुड से जुड़ा हर शख्स सोशल मीडिया से जुड़ा हुआ है. हर कोई यही दावा कर रहा है कि  सोशल  मीडिया से बॉलीवुड को फायदा हो रहा है. मगर सफलतम फिल्म ‘‘हीरोपंती’’ के मुख्य विलेन का किरदार निभाकर शौहरत बटोर चुके तथा हिंदी व पंजाबी दोनों भाषाओं में बनी फिल्म ‘‘25 किले’’ के अभिनेता रांझा विक्रम सिंह की राय में  सोशल  मीडिया से सिनेमा और कलाकारों को काफी नुकसान हो रहा है.

‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए रांझा विक्रम सिंह ने कहा कि सच कहूं तो  सोशल  मीडिया एक मजाक बन गया है. कलाकारों का स्टारडम कम हुआ है. सोशल  मीडिया की वजह से कलाकार सोच रहा है कि उसकी इमेज चमक रही है, पर  सच यह है कि इससे उनके स्टारडम को बहुत बड़ा नुकसान हुआ है. पहले लोग आपको पसंद करते थे, आपके दर्शन पाने, आपको देखने के लिए दौड़ते थे.

लोग सोचते थे कि मुझे मुंबई शहर फलां अभिनेता को देखने के लिए जाना है. अब यह चार्म खत्म हो गया है. सोशल  मीडिया में जो लाइक्स मिल रही है, उससे कलाकार समझ रहा है कि उसका स्टारडम बढ़ रहा है,जबकि ऐसा नहीं है.अब कलाकार अपनी हर छोटी बड़ी बात  सोशल  मीडिया के द्वारा अपने प्रशंसकों तक पहुंचा रहा है, इससे धीरे धीरे प्रशंसक के मन में उनके प्रति जो आकर्षण होता था, वह कम होता जा रहा है.

अमिताभ बच्चन को महानायक कहा जाता है. पर हमें याद रखना चाहिए कि स्टार, सुपर स्टार या महानायक वह उस वक्त बने, जब  सोशल  मीडिया नहीं था. लोग सिर्फ अमिताभ बच्चन को देखने के लिए भाग कर मुंबई आया करते थे, दो तीन दिन तक उनके घर के सामने खड़ा रहा करते थे.पर जबसे वह भी  सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं, तब से उनसे मिलने की उत्सुकता लोगों में नहीं रही.

तो जो क्रेज पहले उनको लेकर लोगों में था, वह अब नहीं रहा. मैंने देखा है कि जब फिल्म ‘‘बाहुबली’’ की शूटिंग होती थी, तब प्रभास को देखने के लिए लोग किस तरह पेड़ों पर चढ़े रहते थे. प्रभास भी  सोशल  मीडिया पर नही है.

36 साल बाद ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम

भारतीय महिला हॉकी टीम ने पिछले 36 साल में पहली बार ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई किया है. भारतीय महिला हॉकी टीम ने अब तक सिर्फ एक बार 1980 में मास्को में ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया है लेकिन तब क्वालीफिकेशन प्रक्रिया नहीं थी.

डिफेंडर सुशीला चानू, रियो डि जनेरियो में 5 से 21 अगस्त तक होने वाले आगामी ओलंपिक खेलों में 16 सदस्यीय भारतीय महिला हॉकी टीम की अगुआई करेंगी. हॉकी इंडिया ने मंगलवार को सुशीला को रितु रानी की जगह टीम का कप्तान नियुक्त किया. चयनकर्ताओं ने रितु रानी को खराब फॉर्म और रवैये की समस्या के कारण टीम से बाहर कर दिया.

रक्षा पंक्ति में सुशीला की साथी दीपिका खेलों के दौरान उप कप्तान होंगी. टीम में पांच डिफेंडर, पांच मिडफील्डर, पांच फारवर्ड और सिर्फ एक गोलकीपर सविता को शामिल किया गया है. डिफेंस में टीम के पास दीपिका, सुनीता लाकड़ा, नमिता टोप्पो और दीप ग्रेस एक्का जैसी अनुभवी खिलाड़ी हैं.

मिड फील्ड में रेणुका, लिलिमा मिंज, मोनिका, नवजोत कौर और युवा निक्की प्रधान को शामिल किया गया है जबकि अग्रिम पंक्ति में रानी रामपाल, पूनम रानी, वंदना कटारिया, अनुराधा देवी थोकचोम और प्रीति दुबे जिम्मेदारी संभालेंगी.

पुरूष टीम की तरह महिला टीम में भी डिफेंडर हनियालुम लाल रूआत फेली और गोलकीपर रजनी एटिमारपू के रूप में दो रिजर्व खिलाड़ियों को शामिल किया गया है.

टीम के बारे में पूछने पर भारतीय महिला हॉकी टीम के मुख्य कोच नील हागुड ने कहा कि उन्होंने योग्यता के आधार पर सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध टीम चुनी है.

यहां टीम की घोषणा के लिए आयोजित समारोह के बाद हागुड ने कहा, ‘हमने शरीरिक और मानसिक रूप से सर्वश्रेष्ठ तैयारी वाली टीम चुनी है.’ उन्होंने कहा, ‘यह लड़कियों के लिए ऐतिहासिक लम्हा है फिर हम चाहे किसी को भी चुने क्योंकि वे कभी ओलंपिक में नहीं खेली. पुरूष टीम को ओलंपिक में खेलने का अनुभव है क्योंकि चुने गए सात खिलाड़ी लंदन खेलों में खेले थे. इसलिए हमें नहीं पता कि हमारा सामना किस चीज से होने वाला है.’

टीम से अनुभवी रितु रानी को बाहर करने पर हागुड ने कहा, ‘हमने ट्रायल के जरिये 16 सदस्यीय प्रतिबद्ध टीम चुनी है. हमने 16 सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुनी है.’ भारतीय महिला टीम की कप्तान सुशीला ने कहा कि उन्हें बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है और वह अपनी सर्वश्रेष्ठ क्षमता के अनुसार इस पर खरा उतरने की कोशिश करेंगी.

सुशीला ने कहा, ‘मैं बेहद खुश हूं लेकिन थोड़ी तनाव में भी हूं क्योंकि ओलंपिक में 36 साल बाद टीम की अगुआई करना बड़ी जिम्मेदारी है.’ भारतीय महिला टीम गुरूवार को अमेरिका के लिए रवाना होगी जहां उसे कनाडा के खिलाफ तीन और अमेरिका के खिलाफ दो अभ्यास मैच खेलने हैं. टीम 29 जुलाई को ओलंपिक खेलों के लिए पहुंचेगी.

टीम

सुशीला चानू (कप्तान), नवजोत कौर, दीप ग्रेस एक्का, मोनिका, निक्की प्रधान, अनुराधा देवी थोकचोम, सविता, पूनम रानी, वंदना कटारिया, दीपिका, नमिता टोप्पो, रेणुका यादव, सुनीता लाकड़ा, रानी, प्रीति दुबे और लिलिमा मिंजा.

स्टैंडबाई

हनियालुम लाल रूआत फेली और रजनी एतिमारपू.

थिएटर की दुनिया चले स्वानंद किरकिरे

राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित मशहूर गीतकार स्वानंद किरकिरे ने बॉक्स ऑफिस पर असफल फिल्म ‘‘क्रेजी कुक्कड़’’ में अभिनय कर अभिनय के क्षेत्र में कदम बढ़ाया था. उसके बाद उन्हें कोई दूसरी फिल्म नहीं मिली. पर अब वह थिएटर की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाने वाले हैं.

जी हां !इन दिनों स्वानंद किरकिरे मशहूर नाट्यकर्मी सलीम आरिफ निर्देशित व गुलजार लिखित नाटक ‘‘चक्कर चलाए घनचक्कर’’ में अभिनय कर रहे हैं.

फिलहाल इस नाटक के लिए वह श्रुति सेठ व लुबना सलीम के साथ रिहर्सल करने में व्यस्त हैं. सूत्रों के अनुसार गुलजार लिखित यह नाटक दो फिल्मों ‘‘अंगूर’’ और ‘‘दो दुनी चार’’ की कहानियों का मिश्रण है.

नाटकों की दुनिया से जुड़ने की चर्चा करते हुए स्वानंद किरकिरे कहते हैं- ‘‘जिंदगी के हर रंग व स्वाद का अनुभव हमें लेना चाहिए.’’

पेड़ लगे तो पर बचेंगे कैसे

‘ग्रीन यूपी-क्लीन यूपी’ सोंच को पूरा करने के लिये उत्तर प्रदेश की सरकार ने एक ही दिन में 5 करोड़ पेड़ लगा कर रिकार्ड तो बना लिया है. यह पेड़ कैसे बचेंगे कैसे यह सोचने वाली बात है. प्रदेश में 6166 जगहो पर पेड़ लगाने का यह कार्यक्रम चला.

केवल उत्तर प्रदेश सरकार ने ही नहीं समाजवादी पार्टी के हर नेता और कार्यकर्ता ने इस अभियान में अपना पूरा योगदान दिया. मुख्यमंत्री अखिलेश यादव उनकी पत्नी सांसद डिंपल यादव और सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने खुद इस अभियान में हिस्सा लिया.

ज्यादातर पीपल, नीम और पाकड के पेड़ लगाये गये. इन पेड़ों को जानवर चरे नहीं इसके लिये सुरक्षा की नजर से पेड़ों की ऊंचाई 8 से 12 फिट रखी गई थी.

खुद मुख्यमंत्री ने सभी से कहा कि वह 5 पेड़ लगाये. बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लेकर इस अभियान को सफल बनाने का काम किया.

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि इस अभियान से लोगों में पेड़ लगाने का रूझान बढा है.इससे प्रदेश में मौजूद वनक्षेत्र बढ जायेगा. जिससे पर्यावरण को लाभ मिलेगा. सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने कहा कि आज की पीढ़ी पेड़ लगाने के महत्व को भूल चुकी है.गांव के लोग कम पढ़े जरूर होते थे पर वह यह जानते थे कि पेड़ लगाना लाभकारी होता है. आज लोगों में पेड़ लगाने का चलन खत्म हो चुका है.

मुलायम सिंह ने कहा यह अभियान सरकार ने शुरू किया है पर इसे जनता का अभियान बनाना है. जिस दिन हर आदमी 5-5 पेड़ लगाने का संकल्प ले लेगा उस दिन उत्तर प्रदेश हराभरा हो जायेगा और पर्यावरण को लाभ होगा. सरकार और पार्टी दोनो ही स्तर पर इस अभियान की सफलता के लिये पूरा प्रयास किया गया.

पेड़ लगाने से बडी चुनौती पेड़ की रक्षा की है. सरकार ने पेड़ लगाने के समय इस बात का पूरा ध्यान रखा है. शत-प्रतिशत पेड़ भले ही न लगे पर जितनी ज्यादा संख्या में पेड़ बचे रहेंगे अभियान उतना ही सफल रहेगा.

इसके प्रयास भी होने चाहिये. सरकार की तरफ से वन विभाग इस बात के लिये प्रयास कर रहा है कि पेड़ बचे रहें. जनता को अपने स्तर पर भी प्रयास करने चाहिये. समाजवादी पार्टी की सरकार ने कुछ ऐसे सामाजिक काम जरूर किये हैं जिनकी तरफ  बाकी दलों का कोई ध्यान नहीं था. इनमें पेड़ लगाना और साइकिल से चलने की शुरूआत खासतौर पर उल्लेखनीय है.

यह जरूर है कि सरकार के कहने और करने से यह सब शुरू नहीं होगा. इसके बाद भी जो प्रयास है उससे उस दिशा में बढ़ने की मदद मिलेगी. यह एक सामाजिक शुरूआत है. जिसका असर देर से आयेगा पर अच्छा आयेगा.

इस तरह के प्रयास आने वाली पीढ़ियो के लिये सुखद भविष्य की राह मजबूत करेगी. पेड़ लगाना एक अभियान सा होना चाहिये. हर पेड़ लगाने वाले को कोशिश करनी चाहिये कि उसका लगाया पेड़ जीवित रहे. यह अभियान तभी सफल होगा जब लगाये गये ज्यादा से ज्याद पेड़ जीवित और सुरक्षित रहें. 

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