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बदल सकता है बल्ला!

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान रिकी पोंटिंग के बल्ले के आकार को लेकर दिए बयान के बाद अब संभव है कि बल्ले के आकार में बड़े बदलाव देखने को मिले. बल्लेबाजों के बढ़ते प्रभाव के बीच मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) की विश्व क्रिकेट समिति ने मंगलवार को बल्ले की लंबाई और चौड़ाई को सीमित करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं.

क्रिकेट की नियामक संस्था एमसीसी की 2014 में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि पिछली शताब्दी के मुकाबले बल्ले की चौड़ाई में 300 प्रतिशत का इजाफा हुआ है जिसका मतलब है कि गलत शॉट भी सीमारेखा तक पहुंच सकता है.

अगर नियम बदले जाते हैं तो अक्टूबर 2017 से बदले हुए बल्ले के साथ बल्लेबाज मैदान में उतरे.

क्या कहते हैं नियम

अब तक क्रिकेट में बल्ले की लंबाई और चौड़ाई के ही नियम थे जिसके चलते कई बल्लेबाजों के बल्ले का एज और पीछे की तरफ से काफी चौड़े होने लगे थे. वार्नर का बल्ला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है. इसी को देखते हुए पोंटिंग ने वार्नर की आलोचना भी की थी.

क्या है नया नियम

अब नए नियम में बैट की पूरी बनावट (overall depth ) को 60mm से 65mm के बीच निर्धारित किया जा सकता है. वहीं बल्ले के एज को 35mm से 40mm के बीच निर्धारित किया जा सकता है.

जहां तक बल्ले के आकार (overall depth ) की बात करें तो यह 1980 के 18 mm से पहुंच कर यह 80mm तक पहुंच चुकी है, जिसके कारण अब करारे शॉट देखने को मिलते हैं.

इन्हीं बदलाव को देखते हुए एमसीसी के सदस्यों ने (जिसमें रिकी पोंटिंग भी शामिल हैं) बल्ले को लेकर नए नियम की सिफारिश की है.

वार्नर के समर्थन में सचिन

वार्नर ने पिछले सप्ताह कहा था कि चौड़े बल्ले की अपेक्षा सपाट बल्ले के कारण बल्लेबाजों को पिच पर ज्यादा फायदा हो रहा है. तेंदुलकर ने ऑस्ट्रेलिया के इस सलामी बल्लेबाज का समर्थन किया है.

तेंदुलकर ने कहा, “पिचों को बदलने की जरूरत है. वह गेंदबाजों के लिए मददगार होनी चाहिए. टी-20 क्रिकेट में महान गेंदबाज पर भी बल्लेबाज रिवर्स स्वीप शॉट खेलते हैं. एकदिवसीय में तीन सौ रन भी जीत के लिए काफी नहीं हैं.”

उन्होंने कहा, “इसलिए कम से कम खेल का एक प्रारूप ऐसा होना चाहिए जहां गेंदबाजों को अपना कौशल दिखाने का मौका मिले.”

तेंदुलकर ने कहा, “किसी के लिए भी पांच दिनों तक टेस्ट मैच देखना मुश्किल है, इसलिए आपको पिच में बदलाव करना होगा. मुझे नहीं लगता है कि इसका बल्ले से कोई लेना देना है. मुझे भरोसा है कि पैनल इस बारे में विचार करेगा.”

बैंकों में 29 जुलाई को हड़ताल

सरकारी और प्राइवेट सेक्टर के बैंक कर्मचारियों ने 29 जुलाई को हड़ताल करने का फैसला किया है. ये बैंककर्मी केंद्र सरकार द्वारा बैंकिंग सुधार नीति में 'जनविरोधी' बदलावों का विरोध कर रहे हैं. बैंककर्मियों के संघ (एआईबीईए) ने इसकी जानकारी दी.

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) देश के नौ ट्रेड यूनियनों से मिलकर बना है और 10 लाख बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है. इसकी अगुवाई में ही हड़ताल बुलाई गई है. बैंक कर्मी की तरह की मांगें रख रहे हैं जिनमें सरकारी बैंकों का निजीकरण नहीं करने और ऐसे बैंकों में निजी पूंजी बढ़ाने जैसी मांगें शामिल हैं. ये बैंकिंग सेक्टर में एफडीआई का भी विरोध कर रहे हैं.

ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉयीज असोसिएशन (एआईबीईए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने एक बयान में कहा कि इन मुद्दों के अलावा यूनियन्स क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों एवं कोऑपरेटिव बैंकों के निजीकरण तथा बैंकों का एक-दूसरे में कॉन्सॉलिडेशन और मर्जर का विरोध कर रहे हैं. इन्हीं मुद्दों पर (यूएफबीयू) की ओर से आयोजित बैठक में एक दिन की हड़ताल पर जाने का फैसला लिया गया है.

क्या अनिल शर्मा इतिहास को दोहरा पाएंगे?

14 जुलाई 2016 को एक नया इतिहास रचा जा रहा है.14 जुलाई 1980 को गीता दत्त के अति चहेते ज्योतिषी व फिल्म निर्माता के.सी शर्मा ने अपने 21 वर्षीय बेटे अनिल शर्मा को बतौर निर्देषक फिल्म ‘श्रृद्धांजली’ से लाँच किया था. फिर जब 1981 में फिल्म ‘श्रृद्धांजली’ रिलीज हुई, तो इस फिल्म ने सफलता के नए रिकार्ड बनाए थे.

उसके बाद बतौर निर्देषक अनिल शर्मा की दूसरी फिल्म ‘बंधन कच्चे धागों की’ अफसल रही. मगर ‘हुकूमत’ से वह फिर से चर्चा में आए. उसके बाद उन्होने 2001 में ‘गदरःएक प्रेम कथा’ जैसी फिल्म का निर्देषन कर नया इतिहास रचा था.

‘गदरःएक प्रेम कथा’ और ‘लगान’ एक साथ एक ही दिन रिलीज हुई थी. इन दोनों फिल्मों ने ही बॉलीवुड में सिनेमा को नयी राह दी थी. इस फिल्म में अनिल शर्मा ने अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा से छोटे बच्चे जीत का किरदार निभवाया था.

ज्ञातब्य है कि उत्कर्ष शर्मा, के सी शर्मा का पोता है. बहरहाल, जीत लोगों के दिलो दिमाग में बस गया था. अब जबकि ‘गदरःएक प्रेम कथा’ के रिलीज के 15 साल पूरे हो चुके है. इसी के साथ जीत का किरदार निभाने वाले अभिनेता उत्कर्ष शर्मा 21 साल के हो गए हैं. तो अब इतिहास दोहराने जा रहा है.

14 जुलाई1980 के बाद अब 14 जुलाई 2016 को के.सी शर्मा अपने पोते और अनिल शर्मा अपने बेटे उत्कर्ष शर्मा को बतौर हीरो लांच कर रहे हैं. इसके लिए अनिल शर्मा बतौर निर्देषक फिल्म ‘जीनियस’ की घोषणा कर रहे हैं, जिसमें उत्कर्ष शर्मा मुख्य भूमिका निभाएंगे. इस फिल्म के लिए हीरोईन की तलाश जारी है. यानी कि 14 जुलाई 2016 को नया इतिहास रचा जाएगा.

अनिल शर्मा ने ‘सरिता’ से खास बातचीत में कहा-‘‘जब में 21 वर्ष का था, तब मेरे पिता ने मुझे बॉलीवुड में लाँच किया था. अब मैं अपने पिता के कहने पर 14 जुलाई को ही अपने बेटे उत्कर्ष को बतौर हीरो बॉलीवुड में लांच कर रहा हूं. मुझे अपने बेटे में उसके बचपन में रही अभिनय के गुण नजर आ गए थे. इसीलिए मैंने उससे फिल्म ‘गदरः एक प्रेम कथा’ में अभिनय करवाया था. अब वह 21 वर्ष का हो गया है. पिछले पांच वर्ष से वह अमरीका में रहते हुए फिल्म मेकिंग की ट्रेनिंग ले रहा था. उसने अमरीका में कुछ लघु फिल्में निर्देषित की हैं. वह एक बेहतरीन अभिनेता है. उसी के लिए मैं 14 जुलाई को फिल्म ‘जीनियस’ शुरू कर रहा हं. वैसे बाद में उत्कर्ष अभिनय के साथ-साथ निर्देषन में भी कदम रखेगा.’’

ज्ञातब्य है कि मथुरा के मशहूर ज्योतिषी रहे स्व.पं. दयालचंद जोशी के घर सिनेमा वालों का तांता लगा रहता था. मथुरा में पं. दयालचंद जोशी से मिलने के बाद वह अपने साथ प. दयालचंद जोशी के बेटे व ज्योतिषी के. सी शर्मा को मुंबई लेकर आयी थीं.

लंबे समय तक के सी शर्मा बॉलीवुड की हस्तियों को ज्योतिषी के रूप में सलाह देते रहे और फिर 14 जुलाई 1980 को उन्होंने अपने 21 वर्षीय बेटे अनिल शर्मा को बॉलीवुड में फिल्म निर्देषक के रूप में लाँच किया था. अब 21 जुलाई 2016 को वह अपने पोते उत्कर्ष शर्मा को बतौर हीरो बॉलीवुड में लांच कर रहे हैं.

जमीनी लड़ाई में फिल्मी चेहरा

कांग्रेस के लिये उत्तर प्रदेश की लड़ाई कितनी कठिन है यह कांग्रेस की चुनावी टीम को देखकर लगने लगा है. कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की अगुवाई करने वाला जमीनी जनाधार वाला कोई नेता नहीं मिल रहा. यही वजह है कि प्रदेश प्रभारी के रूप में उसे गुलाम नबी आजाद को आगे लाना पड़ा जो जम्मू कश्मीर की लड़ाई हार चुके हैं. प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस ने राज बब्बर को मैदान में उतारा है.

राज बब्बर फिल्मी चेहरा हैं. उत्तर प्रदेश में उनकी न तो कोई जातिगत पहचान है और न ही कोई जमीनी जनाधार. वह उत्तर प्रदेश से लोकसभा का चुनाव जीत चुके है. समाजवादी पार्टी की नेता डिंपल यादव को उपचुनाव में हरा चुके हैं.यही एक उनकी छवि है. समझने वाली बात यह है कि अब हालात बदल चुके है. तब से अब में बहुत बदलाव आ चुका है. समाजवादी पार्टी अब सत्ता में है. कांग्रेस पूरे देश से करीब करीब सत्ता से बाहर हो चुकी है.

राज बब्बर को केवल एक क्षेत्र नहीं जीतना पूरा उत्तर प्रदेश उनके सामने है. राज बब्बर के रूप में कांग्रेस ने अपने नेता में एक धर्म निरपेक्ष छवि दिखाने की कोशिश की है. राज बब्बर का राजनीतिक सफर जनता दल के साथ उस समय के नेता वीपी सिंह से शुरू हुआ जब समाजवादी पार्टी में कोई फिल्मी चेहरा नहीं होता था जब राज बब्बर सपा में रहे. मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह से उनके करीबी रिश्ते रहे है.

1996 में वह अटल बिहारी वाजपाई के खिलाफ सपा से ही लोकसभा का चुनाव लड़ा. अमर सिंह के साथ खटपट होने के बाद वह 2006 में सपा से बाहर चले गये. वहां से वह कांग्रेस गये. 2014 में वह गाजियाबाद से लोकसभा का चुनाव लड़े और हार गये. अब 2017 के लिये वह कांग्रेस के सेनापति के रूप में उत्तर प्रदेश भेजे गये है.

उत्तर प्रदेश की चुनावी लड़ाई में कांग्रेस को जनाधार वाले नेता की तलाश थी. उसने राज बब्बर के रूप मे जनता के बीच एक फिल्मी चेहरा उतारा है. जिसके बल पर वोट हासिल करना बहुत मुश्किल काम है. ऐसे में राज बब्बर कांग्रेस का कितना भला कर पायेंगे यह तो बाद में पता चल सकेगा. राज बब्बर को चुनावी कमान देकर कांग्रेस ने जता दिया कि उसने अपने स्थानीय नेताओं पर भरोसा नहीं है.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस मुख्यमंत्री के चेहरे के रूप में जिन नामों की चर्चा कर रही है वह भी उत्तर प्रदेश के बाहर के हैं. जब तक कांग्रेस स्थानीय नेताओं पर भरोसा नहीं करेगी तब तक उत्तर प्रदेश में चुनाव जीतना बहुत मुश्किल होगा.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के पास प्रमोद तिवारी जैसा जनाधार वाला नेता है. जो लगातार विधानसभा के चुनाव जीतता आ रहा है. उनका प्रदेश में नाम है और वह कांग्रेस संगठन को तेजी दे सकते हैं. कांग्रेस के गुटबाजी के चलते प्रमोद तिवारी के नाम पर विचार नहीं किया जाता है.

प्रमोद तिवारी कांग्रेस को चुनावी मैदान में मजबूती से खड़ा कर सकते हैं. उनका संपर्क पूरे उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के नेताओं से है. कांग्रेस के रणनीतिकार चाहते हैं कि पार्टी विधानसभा चुनाव के पहले अपने मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा करे. कांग्रेस के लिये यह करना मुश्किल काम है. उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की जीत की उम्मीद न के बराबर है. अगर कांग्रेस किसी तरह से मुख्य लड़ाई में शामिल हो जाये यही बड़ी उपलब्धि हो सकती है. प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कांग्रेस ने फिल्मी चेहरे पर दांव लगाकर अपनी कमजोरी उजागर कर दी है. कांग्रेस के पास नये चेहरों का अभाव है.

डा डा डिंग: खेल से बदलें जिंदगी का रुख

क्या आपने अभिनेत्री दीपिका पादुकोण का एक नया विज्ञापन वीडियो ‘डा डा डिंग’ देखा, जिसमें वे महिला खिलाड़ियों को प्रेरित करती नजर आ रही हैं. यह वीडियो  खेल में  महिलाओं  को प्रतिभागिता  बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहा है.

तीन मिनट के इस विज्ञापन में राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी रानी रामपाल हैं, जो 2010 में केवल 15 वर्ष की थीं, सबसे कम उम्र की भारतीय हॉकी टीम की खिलाड़ी बनीं और  खेल  ने  जहां  एक ओर उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया और वहीं उनके सपनों को भी विस्तार रूप प्रदान किया.

एक छोटे गांव से आने वाली रानी रामपाल  ने इसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा और हर जीत  के साथ उनका आत्मविश्वास और बढ़ता चला गया और आज  वह दुनिया की हर चुनौती का सामना करने  के लिए तैयार हैं.

रानी रामपाल के अलावा फुटबॉलर ज्योति आन बुरेट और क्रिकेटर हरमनप्रीत कौर, स्मृति मंधाना और शुभलक्ष्मी शर्मा भी  आपको इस वीडियो में नजर आएंगी. जहां शुभलक्ष्मी शर्मा एक भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी हैं, वहीं स्मृति भारतीय महिला क्रिकेट टीम के लिए खेलती हैं. अगस्त 2014 में उन्होंने अपना पहला मैच इंग्लैंड की टीम के खिलाफ खेला. इस पहले मैच में ही उन्होंने अर्धशतक बनाकर भारतीय टीम को जीत दिलाने में मदद की.

इसी तरह ज्योति आन बुरेट फुटबॉल खिलाड़ी हैं, यूनिवर्सिटी ऑफ़ एक्सेटर, इंग्लैंड से हेल्थ तथा स्पोर्ट्स में मास्टर करने के बाद ज्योति ने कॉर्पोरेट जगत को तवज्जो न देकर फुटबॉल को कॅरियर बनाया.

हरमनप्रीत कौर भी एक अन्य  महिला  क्रिकेटर हैं, जो  भारत की ओर से दो टेस्ट मैच, 49 वनडे इंटरनेशनल और 53 टी-20 मैच खेल चुकी हैं और कई मैच में भारतीय टीम की कप्तानी भी  कर चुकी है.

वीडियो की मेन हाईलाइट बॉलीवुड दीवा दीपिका पादुकोण, जो पहले राष्ट्रीय स्तर की बैडमिंटन खिलाड़ी रह चुकी हैं, उनका मानना है कि मैं आज जो कुछ भी हूं, जो कुछ भी मैंने हासिल किया है उस सबके पीछे खेल का बहुत बड़ा योगदान है. मैंने कड़ी मेहनत,  प्रतिबद्धता, ध्यान, समर्पण, अनुशासन,  सब खेल के माध्यम से ही सीखा है. स्पोर्ट्स ने मुझे सफलता और विफलता दोनों को सम्भालना सिखाया है. यह खेल ही है जिसकी वजह से मैंने लड़ना सीखा है. इसकी वजह से ही आज मैं अजेय हूं.

इस म्यूजिक वीडियो में आने वाली पीढ़ी से अपील की गई है कि वे पुरानी परंपराओं को तोड़कर अपने जीवन में खेल को जोड़ते हुए सफलता की नई कहानी लिखें. दीपिका पादुकोण महिला खिलाड़ियों की सराहना करती नजर आ रहीं हैं.

जोश से भरा यह विज्ञापन देश की युवतियों को कुछ कर दिखाने का जज़्बा अपने भीतर पैदा करने के लिए प्रेरित कर रहा है. साथ ही यह भी बता रहा है कि फिटनेस की ओर पहला कदम हमेशा ही कठिन होता है, लेकिन अगर एक बार ठान लिया जाए तो कोई मंजिल दूर नहीं.

इस वीडियो में प्रेरित करने वाली इन सभी महिलाओं की ज़िन्दगी भले ही एक दूसरे से काफी अलग हो परन्तु सफलता तक पहुंचने का उनका रास्ता एक ही था और वह था खेल. इनमें से प्रत्येक खिलाड़ी  ने काफी छोटी उम्र में पुरुषों के वर्चस्व वाले खेल  में कदम रखा और अंततः जीत हासिल की.

इन सभी खिलाडियों की आज की सफलता बयां कर रही है कि  जब कोई लडक़ी या महिला किसी खेल को अपनाती है तो वह खेल कैसे उसकी पूरी जिंदगी बदल देता है और वह कैसे अपनी कमजोरियों पर नियंत्रण पाने के साथ साथ  इच्छा शक्ति पर भी विजय पा लेती है.

महिलाऐं हमारे देश की आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं और  ऐतिहासिक तौर पर भारतीय महिलाओं  की भूमिका में काफ़ी अंतर आया है पहले जहाँ  परम्परागत तौर  पर नारी की भूमिका घरेलू कामों से जुडी़ रहती थी  और उन्हें  खेल कूद से दूर रखा जाता था लेकिन आज की महिलाओं ने इस क्षेत्र में भी अपना लोहा मनवा लिया है. 

पांच बार ‍विश्व मुक्केबाजी प्रतियोगिता की जेता मैरी कॉम,  दुनिया की शीर्ष वरीयता प्राप्त महिला बैडमिंटन खिलाड़ी साइना नेहवाल, भारत की पहली विकलांग महिला खिलाड़ी अरुणिमा सिन्हा जिन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई एक कृत्रिम पैर के साथ की. भले ही खेलों में महिलाएं लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं.

लेकिन आज भी हमारे देश में जब सामान्य परिवार की एक लड़की खेल को अपना कॅरियर बनाने को सोचती है तो उसे  घर परिवार के सामने अपनी काबिलियत साबित करनी पड़ती है, तमाम बाधाओं से लड़ना पड़ता है.

 किसी तरह अगर वह घर वालो शादी से पूर्व घर वालों को मना भी ले तो ज़रूरी नहीं कि विवाह के बाद उसका पति या उसके ससुराल वाले उसके इस पैशन को आगे बढाने में उसकी मदद करें.

वैश्विक स्तर पर खेलों में भारतीय महिलाओं की सफलता के बावजूद देश में लड़कियों को खेलों के क्षेत्र में जाने देने को लेकर उत्साह में कमी है. लड़कियों को अभी काफी लम्बा रास्ता तय करना है. हम उम्मीद करते हैं कि ‘डा डा डिंग ‘जैसे वीडियो रुपी ये छोटे छोटे प्रयास भविष्य में अधिक से अधिक लड़कियों को खेल में आगे आने के प्रेरित करेंगे.

तो इतना पैसा है भारत के अमीरों के पास

भारत में मिल्यनेर्स (बाजार में छह-सात करोड़ रुपए से अधिक की व्यक्तिगत हैसियत वाले अमीरों) की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. साल 2015 के अंत तक देश में ऐसे उच्च नेट वर्थ वाले व्यक्तियों (एचएनडब्ल्यूआई) की संख्या 2,36,000 थी और उनकी सम्मिलित संपत्ति 1,500 अरब डॉलर (लगभग 10 लाख करोड़ रुपए) थी. यह जानकारी न्यू वर्ल्ड वेल्थ की 'इंडिया 2016 वेल्थ रिपोर्ट' में दी गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2007 से विश्व के अधिकतर देश जहां मंदी या नगण्य वृद्धि से परेशान है वहीं भारत ने संपत्ति सृजन के हिसाब से 'बहुत अच्छा' प्रदर्शन किया है. रिपोर्ट में कहा गया है, 'हमारी समीक्षा अवधि में भारतीय एचएनडब्ल्यूआई की संख्या 55 प्रतिशत बढ़ी है, 2007 में इनकी संख्या 1,52,000 थी जो 2015 में 2,36,000 हो गई. इस दौरान ऐसे अमीरों की संपत्ति में 67 प्रतिशत का इजाफा हुआ जो 2007 की 900 अरब डॉलर से बढ़कर 2015 में 1,500 अरब डॉलर हो गई.'

गौरतलब है कि एचएनडब्ल्यूआई में उन व्यक्तियों को शामिल किया जाता है जिनकी शुद्ध संपत्ति 10 लाख डॉलर या उससे अधिक होती है. रिपोर्ट में अगले दस सालों में भारतीय एचएनडब्ल्यूआई की संख्या और संपत्ति में और वृद्धि होने का अनुमान जताया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 तक एचएनडब्ल्यूआई की संख्या 135 प्रतिशत बढ़कर 5,54,000 होने का अनुमान है.

अब इन स्मार्टफोन्स पर नहीं चलेगा व्हॉट्सऐप

फेसबुक के स्वामित्व वाली व्हॉट्सऐप एप्लिकेशन ने आखिर अपनी सर्विस कुछ स्मार्टफोन पर बंद करने की घोषणा कर दी है. 31 ‌दिसंबर, 2016 के बाद सिंबियन स्मार्टफोन यूजर्स व्हॉट्सऐप का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे. व्हॉट्सऐप ने ऐसे सभी यूजर्स को सूचित करना शूरू कर दिया है कि यह ऐप 31 दिसंबर के बाद इस प्लेटफॉर्म पर काम करना बंद कर देगा.

फरवरी में व्हॉट्सऐप ने घोषणा की थी कि वह अब नोकिया एस40, नोकिया सिंबियन एस60, एंड्रॉयड 2.1 और 2.2, ब्लैकबेरी डिवाइस के साथ विंडोज फोन 7 ऑपरेटिंग सिस्टम के लिए सपोर्ट मुहैया नहीं कराएगी.

सपोर्ट खत्म करने के कारण का हवाला देते हुए, व्हॉट्सऐप ने अपने आधिकारिक ब्लॉग में कहा "ये फोन (प्लेटफॉर्म) भविष्य में व्हॉट्सऐप के नए फीचर्स सपोर्ट करने में सक्षम नहीं हैं."

व्हॉट्सऐप ने अपने ऐप में जिफ इमेज की टेस्टिंग शुरू कर दी है. कंपनी जल्द ही यूजर्स का यह नया फीचर देने वाली है. आईओएस पर व्हॉट्सऐप बीटा उपयोगकर्ताओं के लिए नई अपडेट में ऑटो प्ले इमेज  GIFs को शामिल किया गया है.

कंपनी के मुताबिक, जब 2009 में व्हॉट्सऐप लॉन्च हुआ था तब बाजार अलग था. उस समय बाजार में गूगल, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट पर चलने वाली डिवाइस सिर्फ 25 प्रतिशत थी, जबकि 70 प्रतिशत मार्केट पर ब्लैकबेरी और नोकिया का कब्जा था. आज 99.5 फीसदी ‌डिवाइस की बिक्री गूगल, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट के खाते में जाती है.

कुंबले के तेवर तल्ख

टीम इंडिया इन दिनों चार टेस्ट मैचों की सीरीज खेलने के लिए वेस्टइंडीज में है. इस सीरीज के शुरू होने से पहले टीम इंडिया के हेड कोच अनिल कुंबले पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उनकी टीम पूरी तरह से ऊर्जावान, अनुशासन में और फिट रहे.

इसी कारण उन्होंने कुछ सख्त नियम भी बना दिये है जिसका पालन करना हर सदस्य को जरूरी होगा. कुंबले ने टीम से कहा है कि अगर वो बस के लिए लेट हुए तो उन्हें 50 डॉलर का फाइन देना होगा.

इसके अलावा वो हर चार दिन में मीटिंग करेंगे जिसमें टीम के सभी खिलाड़ी को उपस्थित होना जरूरी होगा. इन सबके अलावा अगर कोई खिलाड़ी कुंबले से मिलना चाहता है या अपनी कोई समस्या शेयर करना चाहता है तो उनसे डायरेक्टली मिल सकता है.

कुंबले की पूरी कोशिश है कि कोहली की सेना पूरी तरह खुश और टीम भावना के साथ वेस्टइंडीज में प्रदर्शन करे क्योंकि इन टेस्ट मैचों का रिजल्ट टीम के आने वाले भविष्य को तय करेगा.

आपको बता दें कि टीम इंडिया अपने 49 दिन के कैरेबियाई दौरे पर दो प्रैक्टिस मैच और चार टेस्ट मैच खेलेगी. 21 जुलाई को टीम का पहला टेस्ट मैच होगा और आखिरी टेस्ट 18 अगस्त को खेला जायेगा. टीम 23 अगस्त को इंडिया वापस आयेगी.

शुरुआर्ट: बनारस की कहानी चितेरों की जुबानी

बीएचयू के कुछ छात्रों ने स्टार्टअप के जरिए 'शुरुआर्ट' नाम से ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी बनाने के बाद युवा कलाकारों के हुनर को दुनिया के बाजार में पहुंचाने के साथ मुंह मांगी कीमत पर बेचने का काम प्रारंभ किया. चंद महीने पहले साइबर दुनिया में पहुंचे 'शुरुआर्ट' के जरिए अब तक सौ से ज्यादा पेटिंग्स बिक चुकी है. बीएचयू के दृश्यकला संकाय में पढ़ने वाले छात्रों के कैनवास पर बिखरे हुनर के कद्रदान देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में मिल रहे हैं.

आईआईटी बीएचयू के टेक्नॉलजी बिजनस इंक्यूवेटर के सहयोग से सना सबा,उदिता टिकमानी,नेहा वशिष्ठ व गौरव तिवारी ने सबसे पहले 'शुरुआर्ट' नाम से कंपनी बनाई. इसका मकसद बीएचयू के साथ महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के दृश्यकला संकाय से जुड़े छात्र-छात्राओं की पेटिंग्स को ऑनलाइन बेचना था ताकि युवा कलाकारों को अपनी कला का उचित दाम मिल सके. छात्रों द्वारा मिलकर बनायी गयी इस कंपनी की सीईओ सना सबा एक महीने के भीतर दुनिया के कई देशों से मिले रिस्पॉन्स को लेकर काफी उत्साहित हैं. वह कहती है इस वेबसाइट को कला से जुड़े छात्रों के लिए बनाने का आइडिया हिट रहा. अब तक सौ से ज्यादा कलाकृतियां दुनिया के बाजार में बिक चुकी है.

छात्रों द्वारा बनाई गई इस वेबसाइट पर कलाकारों की पेटिंग्स के साथ कलाकार का नाम और दाम लिखने के साथ विषय के बारे में प्रकाश डाला गया है. छात्रों ने बताया कि किसी भी कलाकार की पेटिंग जितने में बिकती है उसका 70 प्रतिशत कलाकारों को दिया जाता है. 30 फीसदी पैसा कंपनी को चलाने के लिए खर्च के रूप में अपने पास रखा जाता है. एक हजार से डेढ़ हजार रुपए में इस साइट पर जाकर आप घर बैठे अपनी पसंद की पेटिंग्स को खरीद सकते हैं.

बनारस के घाटों की ज्यादा पेटिंग्स

काशी में कूंची से जुड़े कलाकारों के लिए पेटिंग्स के लिए विषय वस्तु के रूप में पहली पसंद गंगा घाट होते हैं. बीएचयू छात्रों के सामूहिक प्रयास से खड़े हुए 'शुरुआर्ट' में भी बनारस के घाटों की सबसे ज्यादा पेटिंग्स दिखाई पड़ रही है. बीएचयू की छात्रा उदिता टिकमानी बताती है कि गंगाघाट दुनिया के पर्यटकों को जिस तरह लुभाते है उसी तरह पेटिंग्स भी दुनियाभर में कला के कद्रदानों को भाती है,इसलिए सबसे ज्यादा वही हैं.

अब बिना इंटरनेट इस्तेमाल करें मैसेजिंग एप

वॉट्सऐप या किसी भी मैसेजिंग ऐप को इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा नुकसान यही होता है कि जैसे ही आप इंटरनेट से दूर हुए आपकी दुनिया से कनेक्टिविटी भी खत्म हो जाती है. लेकिन अब आपको ज्यादा चिंता करने की जरुरत नहीं है क्योंकि एक ऐसा तरीका भी मौजूद है जिससे आप वॉट्सऐप या किसी भी मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल बिना इंटरनेट के भी कर सकते हैं.

बिना इंटरनेट के भी चलेगा वॉट्सऐप

बाजार में एक ऐसा सिम कार्ड मौजूद है जिसकी मदद से आप बिना इंटरनेट के भी वॉट्सऐप या दूसरे मैसेजिंग एप इस्तेमाल कर सकते हैं. इस सिम का नाम है चैट सिम. इसे फोन में लगाने से आप वॉट्सऐप और अन्य मैसेजिंग ऐप्स को बिना इंटरनेट कनेक्शन के इस्तेमाल कर पाएंगे.

कैसे खरीदें

चैटसिम खरीदने के लिए सबसे पहले कंपनी की ऑफिशियल वेबसाइट www.chatsim.com पर विजिट करें. इसके बाद Buy Sim पर क्लिक करें. स्टेप्स फॉलो करें और ऑर्डर प्लेस करें. ये सिम ई-कॉमर्स वेबसाइट amazon.com पर भी अवेलेबल है. चैटसिम सभी स्मार्टफोन पर काम करता है. इसे माइक्रो और नैनो कार्ड स्लॉट में इस्तेमाल किया जा सकता है. इस कार्ड की मदद से आप बिना इंटरनेट के दुनिया में कहीं भी अपने दोस्तों को मैसेज भेज सकते हैं. डाटा रोमिंग की चिंता करने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी.

क्या है कीमत

भारतीयों के लिए इस सिम की कीमत 950 रुपए सालाना है. इसके अलावा फ्री में मैसेज और इमोजीस यूज करने के लिए 950 रुपए चुकाने होंगे. मल्टीमीडिया रिचार्ज के लिए 950 रुपए और 557 रुपए शिपिंग चार्ज के देने होंगे. कुल मिलाकर आपको लगभग 3407 रुपए खर्च करने पड़ेंगे.

चैटसिम से आप वॉट्सऐप, मैसेंजर, वीचैट, हाइक आदि बिना इंटरनेट कनेक्शन के इस्तेमाल कर सकते हैं. अगर आप अपना ज्यादा समय ट्रैवलिंग में बिताते हैं और वॉट्सऐप जैसे मैसेंजर ऐप्स का इस्तेमाल अक्सर करते हैं तो चैटसिम आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है.

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