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रोनाल्डो बने यूरोप के बेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर

स्पेनिश क्लब रियल मेड्रिड के लिए खेलने वाले पुर्तगाल के कप्तान और स्टार स्ट्राइकर क्रिस्टियानो रोनाल्डो को यूरोप का साल का बेस्ट फुटबॉलर चुना गया. उन्हें 'UEFA बेस्ट प्लेयर ऑफ द ईयर' से सम्मानित किया गया.

इससे पहले चैम्पियंस लीग के आने वाले सीजन के लिए ड्रॉ की घोषणा की गई, जिसके बाद UEFA बेस्ट प्लेयर के अवॉर्ड की घोषणा हुई. रोनाल्डो के धारदार प्रदर्शन के दम पर रियल मेड्रिड 2015-16 सीजन में जहां चैम्पियंस लीग खिताब जीतने में सफल रहा, वहीं रोनाल्डो की अगुवाई में पुर्तगाल ने पहली बार यूरो कप 2016 हासिल किया.

रोनाल्डो ने दूसरी बार यह अवॉर्ड जीता है. रोनाल्डो के साथ अवॉर्ड की दौड़ में अंतिम तीन खिलाड़ियों में उन्हीं के क्लब के गैरेथ बेल और एक अन्य स्पेनिश क्लब एटलेटिको मेड्रिड के स्ट्राइकर एंटोइने ग्रीजमैन शामिल थे. रोनाल्डो इससे पहले 2014 में यह अवॉर्ड जीत चुके हैं, जिसके बाद 2015 का अवॉर्ड उनके प्रतिद्वंद्वी क्लब बार्सिलोना के करिश्माई स्ट्राइकर लियोनेल मेसी ने जीता था.

ए फ्लाइंग जट्टः स्तरहीन पटकथा ने किया गुड़गोबर

सिनेमा मनोरंजन का साधन है. सिनेमा के माध्यम से मनोरंजन के साथ सीख देना एक फिल्मकार के लिए आसान कभी नहीं होता है. यही प्रयास नृत्य निर्देशक से फिल्म निर्देशक बने रेमो डिसूजा ने अपनी चौथी फिल्म ‘‘ए फ्लाइंग जट’’ में की है, जिसमें वह पूरी तरह से सफल नहीं रहे.

सुपर हीरो वाली फैंटसी फिल्म की कहानी के केंद्र में एक पेड़ को बचाने की कवायद है. पर कहानी ज्यों ज्यों आगे बढ़ती है, त्यों त्यों यह मसला पूरी तरह से प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई बन जाती है. अब एक तरफ प्रदूषण से शक्ति पाने वाला राका (नाथन जोंस) है, तो दूसरी तरफ अच्छी शक्तियों व नेक इरादे से युक्त फ्लाइंग जट (टाइगर श्राफ) है.

कहानी पंजाब के एक शहर की है. इस शहर की नदी किनारे करतार सिंह कालोनी है. नदी किनारे एक पेड़ है, जिसकी काफी मान्यताएं हैं. करतार सिंह कालोनी के लोग इस पेड़ को भगवान की तरह पूजते हैं. लोगों की हर मनोकामना यह पेड़ पूरा कर देता है. पता चलता है कि यह पेड़ अमन उर्फ फ्लाइंग जट (टाइगर श्राफ) के पिता करतार सिंह ने लगवाया था, जिनकी कैंसर से मौत हो गयी थी. अमन अपनी मां और भाई रोहित (गौरव पांडेय) के साथ इसी कालोनी में रहता है. अमन की मां इस पेड़ की रक्षा करने के लिए किसी से भी लड़ जाती है, जबकि वह शराबी भी है. अमन एक स्कूल में मार्शल आर्ट शिक्षक है, मगर बहुत डरपोक है. उसे उंचाई से डर लगता है. अमन उसी स्कूल की शिक्षक कीर्ति (जैकलीन फर्नांडिज) से प्यार करता है. कीर्ति भी अमन से प्यार करती है.

शहर के उद्योगपति मल्होत्रा (केके मेनन) चाहते हैं कि इस नदी पर पुल बन जाए, तो उनके व्यापार के लिए बहुत फायदेमंद हो जाएगा. इसके लिए पेड़ का कटना जरुरी है. उसकी कंपनी के लोग इस पेड़ की जगह खरीदने के लिए अमन की मां से बात करने पहुंचते हैं, पर वह उनकी पिटाई कर भगा देती है. तब मल्होत्रा खुद जाते हैं और वह बाजार भाव से दुगनी कीमत देने को तैयार हैं, पर बात नहीं जमती है. तब मल्होत्रा धमकी देकर चला जाता है.

दूसरे दिन मल्होत्रा अपने घर पर अमन को बुलाकर समझाता है कि हर इंसान के लिए मां से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता. उसे अपनी मां की सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए. उसके बाद मल्होत्रा एक खूंखार अपराधी राका को बुलाकर उसे पेड़ को काटने का आदेश देता है.

इधर मल्होत्रा के घर से वापस आने के बाद रात में अमन पेड़ के पास अपनी मां की सुरक्षा की मन्नत मांगने जाता है, वहां राका उस पेड़ को काटने पहुंचता है. राका और अमन में लड़ाई होती है. ताकतवर राका, अमन को अधमरा कर देता है और उसे पेड़ की तरफ धक्का देता है. अमन की पीठ पेड़ पर बने सिख धर्म के चिन्ह से जाकर टिकती है. अमन की पीठ पर भी वह चिन्ह अंकित हो जाता है. फिर अचानक अमन को दैविक शक्ति मिल जाती है. वह राका को मारते हुए गंदे नाले में फेंक देता है. इधर वह हैरान है. उसके शरीर पर चोट के निशान नहीं है. दूसरे दिन वह अपने भाई रोहित के सामने ही कई गुंडो से भिड़ जाता है. गुंडों की गोलियों का भी उस पर असर नहीं होता. सब कुछ जानकर अमन की मां उसके लिए एक खास तरह की पोशाक सिलकर देती है और उसे फ्लाइंग जट नाम देती है, इसी नाम से लोग अमन के पिता को भी बुलाया करते थे. फिर फ्लाइंग जट कई कारनामे करता है. अमन उर्फ फ्लाइंग जट के कारनामों की वजह से मल्होत्रा का व्यापार ठप हो जाता है.

एक दिन राका बहुत गंदे नाले से निकल कर मल्होत्रा के पास पहुंचता है. उसकी हालत देखकर मल्होत्रा अपने अस्पताल के डाक्टर के पास उसे ले जाते हैं. डाक्टर जांच करने के बाद बताते हैं कि राका का खून पूरा काला हो गया है. पता चलता है कि गंदगी, सिगरेट व फैक्टरियों के निकलने वाले धुंएं से अब उसे ताकत मिलती है. फिर फ्लाइंग जट व राका के बीच युद्ध शुरू हो जाता है. एक दिन राका, फ्लाइंग जट को अधमरा कर देता है. उस वक्त मल्होत्रा सभी से कहते हैं कि उन लोगों ने उनकी जीत आसान कर दी. वह जो गंदगी व प्रदूषण फैलाते हैं, वही राका की ताकत बन गयी. इसी बीच मल्होत्रा की छोटी बेटी प्रदूषण की ही वजह से मौत के मुंह में समा जाती है. रोहित भी राका के हाथों मारा जाता है. उसके बाद फ्लाइंग जट व राका लड़ते लड़ते अंतरिक्ष में पहुंच जाते हैं. अंतरिक्ष में प्रदूषण न होने से राका की ताकत कम होती जाती है और वह मारा जाता है.

अंततः फ्लाइंग जट सकुशल अपने घर आ जाता है. उसके बाद सभी बच्चे व नागरिक ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की मुहिम शुरू कर देते हैं.

एक स्तरहीन कहानी व स्तरहीन पटकथा पर बनी फिल्म ‘‘ए फ्लाइंग जट’’ जिस मकसद से बनायी गयी है, उस मकसद को भी सही ढंग से पूरा नही कर पाती. इंटरवल के बाद फिल्म इतनी उबाउ हो जाती है कि दर्शक सोचने लगता है कि यह फिल्म कब खत्म होगी. इसके लिए पूरी तरह से फिल्म के लेखक आकाश कौशिक व मधुर शर्मा ही ही दोषी हैं. लेखक यह स्थापित करने में भी विफल रहे हैं कि अमन व रोहित भाई हैं. फिल्म में पेड़ बचाओ व प्रदूषण के खिलाफ जो बाते कही गयी हैं, उनका असर भी सही ढंग से नहीं हो पाता है. जिन लोगों ने हृतिक रोशन वाली फिल्म ‘‘कृष’’ देख रखी है, उन्हे भी यह फिल्म पसंद नहीं आएगी. इसमें फ्लाइंग जट जो कुछ करता है, वह सब कृष पहले ही कर चुका है. कृष में सब कुछ वैज्ञानिक शोध के इर्दगिर्द था, यहां देसीपना है कि सब कुछ आज की समस्या प्रदूषण को लेकर है. पर कहानी में कोई नवीनता नहीं है.

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व उनके प्रशंसक जरूर खुश होंगे कि फिल्म में मोदी जी के स्वच्छता अभियान की बात की गयी है. पूरी फिल्म में कहीं भी भावनाएं व संवेदनाएं ठीक से नहीं उभर पायी. फिर चाहे वह मां व बेटे के बीच का संबंध हो या मल्होत्रा की पांच छह साल की बेटी के मौत के मुंह में समाने का सीन हो. यह सारे सीन बहुत मशीनी लगते हैं. यहां पर निर्देशक भी मात खा गए. रोमांस भी ठीक से नहीं दिखा पाए. निर्देशक रेमो डिसूजा मूलतः नृत्य निर्देशक हैं, इसलिए उन्होंने बेवजह गाने भर दिए हैं, जो कि फिल्म को कमजोर करते हैं. एक गीत ‘चल चलिए’ अच्छा है. फिल्म का क्लायमेक्स तो बहुत ही ज्यादा बोर करता है.

राका और फ्लाइंग जट के बीच अंतरिक्ष, चंद्रमा और फिर अंतरिक्ष यान के अंदर युद्ध के दृश्य भले ही सिनेमायी स्वतंत्रता के नाम पर सही ठहराए जाएं, मगर जिस तरह से यह दृश्य विस्तारित किए गए हैं, वह गड़बड़ लगते हैं. फिल्म मनोरंजन का दामन थाम जैसे ही सार्वजनिक हित मे उपदेशात्मक बाते करना शुरू करती है, वैसे ही निर्देशक की फिल्म पर पकड़ कमजोर हो जाती है. फिल्म के कई सीन विदेशी फिल्मों से चुराए गए लगते हैं. फिल्म में सरदार जी के 12 बज गए की असल कथा लोगों का ज्ञानवर्धन करती है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो ‘हीरोपंती’ और ‘बागी’ के बाद इस फिल्म में टाइगर श्राफ कुछ कमतर हो गए हैं. जैकलीन से अभिनय की उम्मीद करना ही बेकार है. वैसे भी टाइगर श्राफ व जैकलीन की जोड़ी परदे पर नहीं जमी. के के मेनन और अमृता सिंह के किरदार छोटे हैं, पर दोनों ने ठीक काम किया है. विलेन राका के किरदार में नाथन जोंस सराहनीय हैं.

अंत में हमारी समझ में यह नहीं आया कि मेहनत की कमाई के पैसे इस फिल्म के देखने में क्यों खर्च किए जाएं. हां! छोटे बच्चों को कुछ दृश्य पंसद आ सकते हैं. अन्यथा टीवी पर जब यह फिल्म आए, तो इसे देखा जा सकता है.

दो घंटे 31 मिनट की फिल्म ‘‘ए फ्लाइंग जट’’ की निर्माता शोभा कपूर व एकता कपूर, कहानी लेखक व निर्देशक रेमो फर्नांडिज, पटकथा लेखक आकाश कौशिक, संवाद मधुर शर्मा, संगीतकार सचिन जिगर, कलाकार हैं- अमृता सिंह, टाइगर श्राफ, जैकलीन फर्नाडिज, के के मेनन, नाथन जोंस, गौरव पांडे व अन्य. 

रियो में खराब प्रदर्शन की होगी समीक्षा, बिंद्रा की अगुवाई में बनेगी कमेटी

भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ (एनआरएआइ) ने पूर्व ओलंपिक चैंपियन अभिनव बिंद्रा की अगुआई में विशेष समिति के गठन का प्रस्ताव रखा है. यह समिति रियो ओलंपिक खेलों में निशानेबाजों के उम्मीद से कमतर प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा करेगी.

रियो ओलंपिक में भारतीय निशानेबाजों का प्रदर्शन काफी खराब रहा और बिंद्रा को छोड़कर 12 सदस्यीय टीम के अन्य सदस्य उम्मीदों पर खरा उतरने में नाकाम रहे.

महासंघ के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि एनआरएआइ रियो ओलंपिक में भारतीय निशानेबाजी टीम के प्रदर्शन के आकलन और जवाबदेही तय करने के लिए जल्द ही एक स्वतंत्र समिति के गठन की घोषणा करेगा. पैनल के साथ ही ऐसे कदमों की सिफारिश करने की उम्मीद है जिससे कि भविष्य में ऐसा नहीं दोहराया जाए.

हीना सिद्धू, मानवजीत सिंह संधू, गगन नारंग, जीतू राय और अपूर्वी चंदेला सहित अन्य निशानेबाजों ने लचर प्रदर्शन करके देश को निराश किया. एनआरएआइ अब निशानेबाजी दल के इस खराब प्रदर्शन के कारणों को जानने की कोशिशों में जुटा है.

पिछले तीन ओलंपिक खेलों में पदक जीतने के बाद इस बार भारतीय का अब तक का सबसे बड़ा दल रियो खेलों से खाली हाथ लौटा था. पैनल के कई मुद्दों की जांच करने की उम्मीद है जिसमें निशानेबाजों के निजी कोचों की सेवाएं लेना, फार्म की जगह ख्याति के आधार पर निशानेबाजों का चयन और ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट, लक्ष्य फाउंडेशन, एंगलियन मेडल हंट और गो स्पोर्ट्स जैसी निजी गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका शामिल है.

सूत्रों का कहना है कि एनआरएआइ चाहता है कि पैनल सिफारिश करे कि सभी निशानेबाजी गतिविधियों का महासंघ के नियंत्रण में केंद्रीयकरण हो. बिंद्रा के अलावा समिति में एनआरएआइ सचिव राजीव भाटिया, पूर्व राष्ट्रीय टेनिस चैंपियन मनीषा मल्होत्रा और दो पत्रकारों को शामिल किया जा सकता है.

जल्द ही काले धन पर लगेगी लगाम

मॉरिशस के बाद अब साइप्रस से आने वाले निवेश पर भारत सरकार कैपिटल गेन टैक्स लगा सकेगी. ये नियम अगले साल पहली अप्रैल या उसके बाद होने वाले निवेश पर ही लागू होगा. दूसरे शब्दों में 31 मार्च तक किए हुए निवेश को पहले की तरह रियायत मिलती रहेगी.

कैबिनेट ने भारत और साइप्रस के बीच संशोधित कर समझौते को मंजूरी दे दी है. उम्मीद की जा रही है कि इसकी बदौलत देश का पैसा साइप्रस के रास्ते यहां वापस आने पर पर लगाम लगेगी. तकनीकी भाषा में इसे राउंड ट्रिपिंग कहते हैं और इसे काले धन का बड़ा जरिया भी माना जाता है. ये भी आरोप लगते रहे कि शेयर बाजार में बड़े निवेश का यही माध्यम है. नए समझौते के बाद साइप्रस भारत सरकार की काली सूची से भी बाहर निकल गया है और ये पहली नवम्बर 2013 से मान्य होगा. वित्तीय जानकारी नहीं साझा करने की वजह से साइप्रस को पिछली सरकार ने नवम्बर 2013 में काली सूची मे डाल दिया था.

कर समझौते में फेरबदल मोदी सरकार की काले धन पर लगाम की मुहिम का एक हिस्सा है. सरकार मॉरिशस के बाद अब सिंगापुर के साथ समझौते को नयी शक्ल देने की तैयारी में है जिससे समझौते के दुरुपयोग, कर की चोरी और यहीं का पैसा विदेश के रास्ते यहां शेयर बाजार में लगाने यानी राउंड ट्रिपिंग पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी. मॉरिशस, सिंगापुर और साइप्रस जैसे देश कर चोरी के लिए महफूज जगह माने जाते हैं और इन्हे ‘टैक्स हेवेन (Tax Heaven)’ भी कहा जाता है.

मॉरिशस के रास्ते कर चोरी पर लगाम

इसके पहले मई में भारत को बड़ी कामयाबी मिली जब मॉरिशस के साथ कर समझौते पर हस्ताक्षर हुए थे जिसके बाद भारत को मॉरिशस के रास्ते आए निवेश पर कैपिटल गेन टैक्स लगाने का अधिकार मिला. नयी व्यवस्था के तहत मॉरिशस में रजिस्टर्ड निवेशक अगर किसी भी भारतीय कंपनी में 1 अप्रैल 2017 के बाद शेयर खरीद कर बेचता है तो उससे हुए मुनाफे पर मौजूदा दर के आधे के हिसाब से कैपिटल गेन टैक्स लगेगा.

मतलब यदि कैपिटेल गेन टैक्स की दर 10 फीसदी है तो मॉरिशस के रास्ते आए निवेशक को 5% की दर से टैक्स देना होगा. समझौते में ये भी तय हुआ है कि 1 अप्रैल 2019 या उसके बाद शेयरों की बिक्री से हुए मुनाफे पर टैक्स की पूरी दर लगेगी. अभी तक की व्यवस्था में जिन 2 देशों में जहां टैक्स की दर कम होती थी, वहीं के हिसाब से टैक्स देना होता है. चूंकि भारत में टैक्स की दर 10% और मॉरिशस में 0% है, लिहाजा मॉरिशस के रास्ते आए निवेशक को एक पैसा भी टैक्स नहीं देना होता है. 0% टैक्स की वजह से मॉरिशस में रजिस्टर्ड कंपनियों के रास्ते सबसे ज्यादा विदेशी निवेश भारत में आता था.

VIDEO: हां, मैंने तुम्हारी मां का रेप किया, तो क्या?

गलत को गलत कहा जाए तो गलत नहीं लगता, लेकिन गलत को सही कहा जाए तो गलत उभर कर सामने आता है. खासकर, अगर बात व्यंग के रूप में कही जाती है तो उसका प्रभाव ज्यादा पड़ता है. मेरिटल रेप जैसे संवेदनशील विषय को कुछ इसी तरह समझाने की कोशिश कुछ महिलाओं ने की है.

महिलाओं का यूट्यूब चैनल 'गर्लियापा', अपने महिला प्रधान, बेहद बिंदास और बोल्ड वीडियोज को लेकर चर्चित रहता है. इस बार गर्लियापा एक वीडियो लेकर आया है जिसका टाइटल है 'how I raped your mother' यानि 'मैंने तुम्हारी मां का रेप कैसे किया'. इस वीडियो में मेरिटल रेप जैसे गंभीर विषय को बड़े ही मजाकिया ढंग से प्रस्तुत करने की कोशिश की गई है, और बताया है कि हमारा समाज घर की चाहरदीवारी में पति द्वारा किए जाने वाले रेप को लेकर कितना उदासीन है. समाज तो इस यौन हिंसा को शादी का ही हिस्सा मानता है. पत्नी के साथ जोर-जबरदस्ती कर बनाए गए शारीरिक संबंध कैसे प्रेम भरे हो सकते हैं. लेकिन जब समाज ही पतियों द्वारा की जाने वाली यौन हिंसा को अपराध मानने को तैयार नहीं, तो फिर कानून को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है.

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हां, मैंने तुम्हारी मां का रेप किया, तो क्या?

इस वीडियो में एक सामान्य भारतीय परिवार को दिखाया गया है जो मायके लौट आई बेटी को समझाने का प्रयास करता दिख रहा है. जब बेटी ने कहा कि उसके साथ हर रोज रेप किया जाता है, तो परिवार वाले खूब हंसते हैं और उसे समझाते हैं कि वो रेप थोड़े ही न होता है, वो तो 'इंटेंस लव मेकिंग' यानि 'अत्यधिक प्रेम' है. परिवार वाले लड़की को विश्वास दिलाने में कामयाब हुए या नहीं, ये इस वीडियो को देखकर पता लगेगा, लेकिन हां, इस बात को जितने दमदार तरीके से दिखाया गया है, ये बात सही जगह चोट भी करती है.

वीडियो के आखिर में लिखा गया है कि अगर आपके साथ भी ऐसा हो तो इन नंबरों पर कॉल कीजिए. लेकिन अफसोस, कोई सुनने वाला हो तब तो कोई नंबर हो. यौन हिंसा की शिकार हुई पत्नी कहीं पर इसकी शिकायत दर्ज नहीं करा सकती. जो बेहद शर्म की बात है. इस चैनल की हेड ट्रेसी डिसूजा का कहना है कि 'लोग इस वीडियो को देखें और सही दिशा में प्रतिकार करें. अपने आप से पूछिए- इस वीडियो में हम वास्तव में सबसे ज्यादा किस से रिलेट करते हैं? यही वो समय है जब महिलाओं को आवाज उठानी चाहिए.'

ये वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर वायरल है. अपलोड होने के एक दिन बाद ही इसपर करीब ढ़ाई लाख व्यूज थे. गर्लियापा तो बड़ी मजबूती के साथ अपनी बात कहने में कामयाब हुआ है. पर क्या आप भी इस वीडियो में दिखाए गए परिवार का एक हिस्सा तो नहीं, इस तरह के रेप पर आपका क्या कहना है?

पति द्वारा किया जाने वाला रेप भारत में पवित्र क्यों?

भारत में पति को परमेश्वर माना जाता है, इस बात की पुष्टि अब सरकार ने भी कर दी है. हाल ही में राज्यसभा में मैरिटल रेप यानि शादीशुदा रेप के बारे में एक सवाल के जवाब में सरकार ने कहा है कि भारत में मैरिटल रेप की अवधारणा को लागू नहीं किया जा सकता है और सरकार का इसे अपराधों की श्रेणी में लाने का कोई इरादा नहीं है.

महिला एंव बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने राज्यसभा में कहा कि भले ही पश्चिमी देशों में मैरिटल रेप की अवधारणा प्रचलित हो लेकिन भारत में गरीबी, शिक्षा के स्तर और धार्मिक मान्यताओं के कारण शादीशुदा रेप की अवधारणा फिट नहीं बैठती, इसलिए इसे भारत में लागू नहीं किया जा सकता है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि एक तरफ तो सरकारें रेप के खिलाफ कड़े कानून बनाने के लिए कमर कसे हुए हैं तो वहीं दूसरी और घर की चाहरदीवारी में किसी अपने द्वारा किए जाने वाले रेप के प्रति सरकार उदासीन क्यों बनीं हुई है? आखिर क्यों सरकार पतियों द्वारा की जाने वाली घरेलू यौन हिंसा को अपराध मानने को तैयार नहीं है?

पति परमेश्वर रेप नहीं करते? भले ही इस देश में सदियों से पतियों को परमेश्वर मानने की धारणा प्रचलित रही हो लेकिन व्यवहारिक तौर पर ये बात पूरी तरह सच नहीं है. बल्कि इससे सिर्फ महिला-पुरुष असमानता को बढ़ावा देने और पुरुष प्रधान समाज द्वारा महिलाओं को दोयम दर्जे का शामिल करने की कोशिशें दिखती हैं. खैर, सरकार इस बात से इत्तेफाक नहीं रखती और इसलिए उसने भारत में शादीशुदा रेप की अवधारणा को मानने से इनकार कर दिया.

सरकार भले ही देश में शादीशुदा रेप की बात से इनकार करके अपना पल्ला झाड़ ले लेकिन इस देश में हर दिन होने वाले वैवाहिक रेप की हकीकत को छुपा पाना उसके वश की बात नहीं है. ऐसा भारत की एजेंसियां नहीं बल्कि खुद संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट कहती है, जिसके मुताबिक भारत में हर वर्ष शादीशुदा रेप के करीब 75 फीसदी मामले होते हैं.

सरकार शादी के जिस रिश्ते को पवित्र करार दे रही है, उसी की आड़ में घर की चाहरदीवारी के अंदर पत्नी के साथ होने वाले रेप के इतने बड़े आकंड़ें सच में डराने वाले हैं. लेकिन हैरानी की बात ये है कि यूएन द्वारा भारत को मैरिटल रेप को क्रिमिनल कैटिगरी में शामिल किए जाने की सलाह के बावजूद सरकार का रवैया जस का तस है. हमारे देश का कानून और संविधान दोनों ही इस मामले में महिलाओं की मदद करने के नाम पर हाथ खड़े कर देते है.

संविधान की धारा 375 अपवाद (2) के मुताबिक, 'किसी आदमी द्वारा अपनी पत्नी, पत्नी के 15 से कम उम्र की न होने पर, के साथ बनाया गया सेक्शुअल इंटरकोर्स रेप नहीं है.' संविधान की इस धारा को लेकर काफी विवाद है और इसे हटाए जाने की मांग उठ रही है. यह बड़ी अजीब बात है कि जिस देश में लड़की की शादी की उम्र 18 साल है और जहां नाबालिग लड़की द्वारा उसकी सहमति होने पर भी बनाया गया संबंध रेप की श्रेणी में आता है, उसी देश में शादी के नाम पर किसी पुरुष को अपनी नाबालिग पत्नी के साथ यौन संबंध बनाने की इजाजत कानून क्यों और कैसे देता है, क्या यह कानून का दोहरा रवैया नहीं है?

पिछले साल अप्रैल में मैरिटल रेप के मामले में राज्यसभा में एक सांसद द्वारा दिए गए आंकड़ें चौंकाने वाला सच सामने लाते हैं. इसके मुताबिक देश के 5 में से एक पुरुष अपनी पत्नी को जबरन सेक्स के लिए मजबूर करते हैं और देश में कुल रेप में से करीब 9-15 फीसदी मैरिटल रेप के कारण होते हैं.

हाल ही में इस मामले में इंदिरा जयसिंह द्वारा दाखिल की गई रिपोर्ट में मैरिटल रेप के अपराधीकरण की सिफारिश की है. इतना ही नहीं जस्टिस वर्मा आयोग द्वारा मैरिटल रेप को अपराधों की श्रेणी में शामिल किए जाने की सिफारिशों के बावजूद सरकार ने इस मामले में अपना रुख नहीं बदला है. यानी सरकार चाहे यूपीए की हो या एनडीए की, मैरिटल रेप से निजात दिलाने में महिलाओं की मदद करने वाला कोई नहीं है.

मतलब आने वाले दिनों में भी शादी की पवित्रता के नाम पर पतियों द्वारा किया जाने वाला रेप पवित्र ही बना रहेगा!

बैटरी बचाने के साथ ही इस ब्राउजर से होगी कमाई

सॉफ्टवेयर की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने लोगों के बीच अपने एज (Edge) ब्राउजर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नई स्कीम निकाली है. कंपीन ने दावा किया है कि उनका ब्राउजर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले प्रतिद्वंदी Google Chrome, Mozilla Firefox और Opera ब्राउजर से कम बैटरी लेता है. कंपनी के मुताबिक एज ब्राउजर के इस्तेमाल से 36-53 फीसदी तक बैटरी बचाई जा सकती है. इतना ही नहीं कंपनी इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों को पैसा भी देगी.

माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक एज ब्राउजर के जो यूजर्स माइक्रोसॉफ्ट रिवार्ड्स के लिए साइनअप करेंगे, उन्हें यह ब्राउजर इस्तेमाल करने पर प्वाइंट्स दिए जाएंगे. इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट अपने सर्च इंजन बिंग के इस्तेमाल करने पर इस तरह के रिवॉर्ड्स देती थी.

माइक्रोसॉफ्ट रिवॉर्ड्स को पहले बिंग रिवॉर्ड्स के नाम से जाना जाता था. हाल ही में इसका नाम बदला गया है और वही रणनीति एज ब्राउजर को लेकर अपनाई जा रही है. इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट स्टोर से शॉपिंग करने पर भी लोगों के रिवॉर्ड प्वाइंट्स दिए जाएंगे.

इस ऑफर के तहत प्वाइंट्स कमाने के लिए आपको माइक्रोसॉफ्ट के सर्च इंजन बिंग को अपना डिफॉल्ट सर्च इंजन बनाना होगा. माइक्रोसॉफ्ट यह भी मॉनिटर करेगा कि यूजर ने एक महीने में 30 घंटों तक एज इस्तेमाल किया या नहीं. बाद में माइक्रोसॉफ्ट यूजर्स को पॉइंट्स देगा, जिन्हें वाउचर्स या क्रेडिट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इन प्वाइंट्स को आप अमेजन, स्टारवक्स, स्काइप और Outlook.com के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

महज एक तस्वीर से गंदगी होगी साफ!

स्वच्छ भारत अभियान को साकार करने के लिए कैंपेन, टीवी एड जागरुकता के साथ ही टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया जा रहा है. हाल ही में स्वच्छ भारत एप लॉन्च किया गया है जिसके जरिए आप अपने आस-पास की जगहों को बस एक क्लिक के जरिए साफ करवा सकते हैं.

अगर आपके मुहल्ले या घर के आस-पास गंदगी है तो आपको परेशान होने की जरुरत नहीं होगी. आप गंदगी की तस्वीर ले कर स्वच्छ भारत एप में अपलोड कर सकते हैं ऐसा करने पर सिस्टम को इस बात की जानकारी हो जाएगी और जल्द से जल्द इस गंदगी को साफ किया जाएगा. सफाई के बाद प्रभारी को इसकी तस्वीर एप पर अपलोड करके नगर निगम अधिकारी को रिर्पोर्ट देनी होगी.

इस एप से शहर की नगर निगम ईकाई भी जुड़ी होगीं और तस्वीर अपलोड होते ही जीपीएस की मदद से उस क्षेत्र के नगर निगम कार्यालय को भी गंदगी की तस्वीर प्राप्त हो जाएगी. आपके फोटो अपलोड करने के 12 घंटे के अंदर समस्या का समाधान किया जाएगा.

वहीं अगर मरे हुए जानवर को लेकर आपने गुहार लगाई है तो इस परिस्थिति में 48 घंटे के अंदर समाधान किया जाएगा. कई नगर निगम में इस एप को लेकर ट्रेनिंग दी जा रही है.

इस एप का इस्तेमाल कर आप भी देश और अपने आस-पास के वातावरण को बेहद आसानी से साफ रख सकते हैं.

सहवाग ने की पियर्स मॉर्गन की बोलती बंद

वीरेंद्र सहवाग क्रिकेट करियर में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं लेकिन दूसरी इनिंग में सहवाग कहीं और ही विस्फोट कर रहे हैं. अब सहवाग क्रिकेट के मैदान में नहीं सोशल मीडिया साइट ट्वीटर पर ताबड़तोड़ ट्वीट कर विरोधियों का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं.

सहवाग का अंदाज बिल्कुल नहीं बदला है वो निराले अंदाज में ही जवाब देते हैं. सहवाग अपने अलग स्टाइल में किसी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देकर ट्रॉल करवा देते हैं. लेकिन इस बार बात कुछ अलग हैं. एक ब्रिटिश पत्रकार ने सीधे-सीधे पंगा ले लिया फिर क्या था वीरु ने भी कर दिया ऐसा धमाका.

ब्रिटिश पत्रकार पियर्स मॉर्गन ने ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन पर निशाने साधते हुए ट्वीट किया कि 120 करोड़ की आबादी वाला देश ओलंपिक में 2 हारे हुए पदक पर कितना जश्न मना रहा हैं. यह बहुत ही शर्मनाक हैं.

सहवाग ने मॉर्गन के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा कि हम हर छोटी खुशी का जश्न मनाते हैं लेकिन इंग्लैंड क्रिकेट का जन्मदाता है फिर भी वर्ल्ड कप नहीं जीत पाया. अब भी क्रिकेट खेल रहा है क्या यह शर्मनाक है?

सहवाग के ट्वीट का जवाब देते हुए मॉर्गन ने ट्वीट किया “बहुत शर्मनाक महान, अगर केविन पीटरसन खेल रहे होते तो इंग्लैंड वर्ल्ड कप जरुर जीत गया होता. जैसा कि हमने टी-20 वर्ल्ड कप जीता था और पीटरसन मैन ऑफ द सीरीज थे.”

सहवाग भी रुके नहीं और फिर रिप्लाई करते हुए लिखा कि इसमें काई शक नहीं है कि केविन पीटरसन महान खिलाड़ी हैं लेकिन वे इंग्लैंड नहीं दक्षिण अफ्रीकी मूल के हैं और आपके तर्क के हिसाब से तो इंग्लैंड को 2007 में ही वर्ल्ड कप जीत जाना चाहिए था. आप लोगों को हम से क्या परेशानी है, हमारे जश्न से क्या परेशानी है.

मॉर्गन ने सहवाग को फिर जवाब देते हुए लिखा कि मुझे लगता हैं हमें सिर्फ जीत का ही जश्न मनाना चाहिए, दूसरे और तीसरे नंबर पर आने का नहीं. क्या यह हार नहीं है?

सोशल मीडिया पर अब चर्चा हो रही है कि ट्रॉल अकाउंट को बंद किया जाना चाहिए क्योंकि सहवाग अब अकेले ही ट्रॉल करने के लिए काफी है.

वहीं कुछ फेक यूजर ट्रॉल केजरी जैसे अकाउंट उन्हें ट्रॉलू एसोशिएसन का अध्यक्ष बनाना चाहते हैं. ट्वीटर पर सहवाग की यह इंनिग उनके प्रशंसकों को काफी पसंद आ रही है, सहवाग के ट्वीट को ट्रेंड कर उनका हौसला अफजाई कर रहें हैं.

आपकी अगली चाय कड़वी कर देगी ये खबर

टाटा ग्लोबल बेवरेजेज के चेयरमैन साइरस मिस्त्री का मानना है कि जीएसटी लागू करने का इन्फ्लेशन पर असर होगा और इससे चाय की कीमतों में बढ़ोतरी होगी. मिस्त्री टाटा ग्लोबल बेवरेजेज की 53वीं वार्षिक जनरल मीटिंग को संबोधित करने कोलकाता पहुंचे थे. उन्होंने कहा, ‘जीएसटी से चाय और कॉफी इंडस्ट्री में महंगाई बढ़ेगी क्योंकि फिलहाल इस पर टैक्स कम है. इंडस्ट्री बॉडी अनुकूल रेट की मांग कर रही है क्योंकि चाय की खपत हर तबके के लोगों में है.’

हालांकि, उनका यह भी कहना था कि जीएसटी को व्यापक नजरिये से देखने की जरूरत है और लॉन्ग टर्म में यह इंडस्ट्री और ग्राहकों दोनों के लिए फायदेमंद होगा. जीएसटी से चाय की कीमतों में बढ़ोतरी के आसार हैं. टाटा ग्लोबल बेवरेजेज के चेयरमैन ने कहा कि यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन की विदाई के कारण चाय की ट्रेडिंग और खरीदारी में कुछ जोखिम पैदा होने की आशंका है और इस वजह से भी इसकी कीमत बढ़ सकती है. टाटा ग्लोबल बेवरेजेज ने ग्लोबल स्तर पर तीन ट्रेंड्स की पहचान की है, जिससे कंपनी के लिए ग्रोथ के मौके बन रहे हैं.

मिस्त्री ने बताया, ‘पहला ट्रेंड यह है कि लोगों का हेल्थ, लाइफस्टाइल आदि पर फोकस बढ़ रहा है. दूसरी बात यह है कि सहूलियत और आराम को प्रमुखता दी जा रही है. कंज्यूमर्स अब प्रॉडक्ट ऑफर में सहूलियत देख रहे हैं. तीसरा ट्रेंड यह है कि कंज्यूमर्स बेवरेज में नया एक्सपीरियंस ढूंढ रहे हैं और अपने हिसाब से ऑफर चाहते हैं.’

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