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बैटरी बचाने के साथ ही इस ब्राउजर से होगी कमाई

सॉफ्टवेयर की दिग्गज कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने लोगों के बीच अपने एज (Edge) ब्राउजर की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नई स्कीम निकाली है. कंपीन ने दावा किया है कि उनका ब्राउजर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले प्रतिद्वंदी Google Chrome, Mozilla Firefox और Opera ब्राउजर से कम बैटरी लेता है. कंपनी के मुताबिक एज ब्राउजर के इस्तेमाल से 36-53 फीसदी तक बैटरी बचाई जा सकती है. इतना ही नहीं कंपनी इसका इस्तेमाल करने वाले लोगों को पैसा भी देगी.

माइक्रोसॉफ्ट के मुताबिक एज ब्राउजर के जो यूजर्स माइक्रोसॉफ्ट रिवार्ड्स के लिए साइनअप करेंगे, उन्हें यह ब्राउजर इस्तेमाल करने पर प्वाइंट्स दिए जाएंगे. इससे पहले माइक्रोसॉफ्ट अपने सर्च इंजन बिंग के इस्तेमाल करने पर इस तरह के रिवॉर्ड्स देती थी.

माइक्रोसॉफ्ट रिवॉर्ड्स को पहले बिंग रिवॉर्ड्स के नाम से जाना जाता था. हाल ही में इसका नाम बदला गया है और वही रणनीति एज ब्राउजर को लेकर अपनाई जा रही है. इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट स्टोर से शॉपिंग करने पर भी लोगों के रिवॉर्ड प्वाइंट्स दिए जाएंगे.

इस ऑफर के तहत प्वाइंट्स कमाने के लिए आपको माइक्रोसॉफ्ट के सर्च इंजन बिंग को अपना डिफॉल्ट सर्च इंजन बनाना होगा. माइक्रोसॉफ्ट यह भी मॉनिटर करेगा कि यूजर ने एक महीने में 30 घंटों तक एज इस्तेमाल किया या नहीं. बाद में माइक्रोसॉफ्ट यूजर्स को पॉइंट्स देगा, जिन्हें वाउचर्स या क्रेडिट के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है. इन प्वाइंट्स को आप अमेजन, स्टारवक्स, स्काइप और Outlook.com के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

महज एक तस्वीर से गंदगी होगी साफ!

स्वच्छ भारत अभियान को साकार करने के लिए कैंपेन, टीवी एड जागरुकता के साथ ही टेक्नोलॉजी का भी सहारा लिया जा रहा है. हाल ही में स्वच्छ भारत एप लॉन्च किया गया है जिसके जरिए आप अपने आस-पास की जगहों को बस एक क्लिक के जरिए साफ करवा सकते हैं.

अगर आपके मुहल्ले या घर के आस-पास गंदगी है तो आपको परेशान होने की जरुरत नहीं होगी. आप गंदगी की तस्वीर ले कर स्वच्छ भारत एप में अपलोड कर सकते हैं ऐसा करने पर सिस्टम को इस बात की जानकारी हो जाएगी और जल्द से जल्द इस गंदगी को साफ किया जाएगा. सफाई के बाद प्रभारी को इसकी तस्वीर एप पर अपलोड करके नगर निगम अधिकारी को रिर्पोर्ट देनी होगी.

इस एप से शहर की नगर निगम ईकाई भी जुड़ी होगीं और तस्वीर अपलोड होते ही जीपीएस की मदद से उस क्षेत्र के नगर निगम कार्यालय को भी गंदगी की तस्वीर प्राप्त हो जाएगी. आपके फोटो अपलोड करने के 12 घंटे के अंदर समस्या का समाधान किया जाएगा.

वहीं अगर मरे हुए जानवर को लेकर आपने गुहार लगाई है तो इस परिस्थिति में 48 घंटे के अंदर समाधान किया जाएगा. कई नगर निगम में इस एप को लेकर ट्रेनिंग दी जा रही है.

इस एप का इस्तेमाल कर आप भी देश और अपने आस-पास के वातावरण को बेहद आसानी से साफ रख सकते हैं.

सहवाग ने की पियर्स मॉर्गन की बोलती बंद

वीरेंद्र सहवाग क्रिकेट करियर में अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं लेकिन दूसरी इनिंग में सहवाग कहीं और ही विस्फोट कर रहे हैं. अब सहवाग क्रिकेट के मैदान में नहीं सोशल मीडिया साइट ट्वीटर पर ताबड़तोड़ ट्वीट कर विरोधियों का मुंहतोड़ जवाब दे रहे हैं.

सहवाग का अंदाज बिल्कुल नहीं बदला है वो निराले अंदाज में ही जवाब देते हैं. सहवाग अपने अलग स्टाइल में किसी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देकर ट्रॉल करवा देते हैं. लेकिन इस बार बात कुछ अलग हैं. एक ब्रिटिश पत्रकार ने सीधे-सीधे पंगा ले लिया फिर क्या था वीरु ने भी कर दिया ऐसा धमाका.

ब्रिटिश पत्रकार पियर्स मॉर्गन ने ओलंपिक में भारत के प्रदर्शन पर निशाने साधते हुए ट्वीट किया कि 120 करोड़ की आबादी वाला देश ओलंपिक में 2 हारे हुए पदक पर कितना जश्न मना रहा हैं. यह बहुत ही शर्मनाक हैं.

सहवाग ने मॉर्गन के ट्वीट का जवाब देते हुए लिखा कि हम हर छोटी खुशी का जश्न मनाते हैं लेकिन इंग्लैंड क्रिकेट का जन्मदाता है फिर भी वर्ल्ड कप नहीं जीत पाया. अब भी क्रिकेट खेल रहा है क्या यह शर्मनाक है?

सहवाग के ट्वीट का जवाब देते हुए मॉर्गन ने ट्वीट किया “बहुत शर्मनाक महान, अगर केविन पीटरसन खेल रहे होते तो इंग्लैंड वर्ल्ड कप जरुर जीत गया होता. जैसा कि हमने टी-20 वर्ल्ड कप जीता था और पीटरसन मैन ऑफ द सीरीज थे.”

सहवाग भी रुके नहीं और फिर रिप्लाई करते हुए लिखा कि इसमें काई शक नहीं है कि केविन पीटरसन महान खिलाड़ी हैं लेकिन वे इंग्लैंड नहीं दक्षिण अफ्रीकी मूल के हैं और आपके तर्क के हिसाब से तो इंग्लैंड को 2007 में ही वर्ल्ड कप जीत जाना चाहिए था. आप लोगों को हम से क्या परेशानी है, हमारे जश्न से क्या परेशानी है.

मॉर्गन ने सहवाग को फिर जवाब देते हुए लिखा कि मुझे लगता हैं हमें सिर्फ जीत का ही जश्न मनाना चाहिए, दूसरे और तीसरे नंबर पर आने का नहीं. क्या यह हार नहीं है?

सोशल मीडिया पर अब चर्चा हो रही है कि ट्रॉल अकाउंट को बंद किया जाना चाहिए क्योंकि सहवाग अब अकेले ही ट्रॉल करने के लिए काफी है.

वहीं कुछ फेक यूजर ट्रॉल केजरी जैसे अकाउंट उन्हें ट्रॉलू एसोशिएसन का अध्यक्ष बनाना चाहते हैं. ट्वीटर पर सहवाग की यह इंनिग उनके प्रशंसकों को काफी पसंद आ रही है, सहवाग के ट्वीट को ट्रेंड कर उनका हौसला अफजाई कर रहें हैं.

आपकी अगली चाय कड़वी कर देगी ये खबर

टाटा ग्लोबल बेवरेजेज के चेयरमैन साइरस मिस्त्री का मानना है कि जीएसटी लागू करने का इन्फ्लेशन पर असर होगा और इससे चाय की कीमतों में बढ़ोतरी होगी. मिस्त्री टाटा ग्लोबल बेवरेजेज की 53वीं वार्षिक जनरल मीटिंग को संबोधित करने कोलकाता पहुंचे थे. उन्होंने कहा, ‘जीएसटी से चाय और कॉफी इंडस्ट्री में महंगाई बढ़ेगी क्योंकि फिलहाल इस पर टैक्स कम है. इंडस्ट्री बॉडी अनुकूल रेट की मांग कर रही है क्योंकि चाय की खपत हर तबके के लोगों में है.’

हालांकि, उनका यह भी कहना था कि जीएसटी को व्यापक नजरिये से देखने की जरूरत है और लॉन्ग टर्म में यह इंडस्ट्री और ग्राहकों दोनों के लिए फायदेमंद होगा. जीएसटी से चाय की कीमतों में बढ़ोतरी के आसार हैं. टाटा ग्लोबल बेवरेजेज के चेयरमैन ने कहा कि यूरोपीय यूनियन से ब्रिटेन की विदाई के कारण चाय की ट्रेडिंग और खरीदारी में कुछ जोखिम पैदा होने की आशंका है और इस वजह से भी इसकी कीमत बढ़ सकती है. टाटा ग्लोबल बेवरेजेज ने ग्लोबल स्तर पर तीन ट्रेंड्स की पहचान की है, जिससे कंपनी के लिए ग्रोथ के मौके बन रहे हैं.

मिस्त्री ने बताया, ‘पहला ट्रेंड यह है कि लोगों का हेल्थ, लाइफस्टाइल आदि पर फोकस बढ़ रहा है. दूसरी बात यह है कि सहूलियत और आराम को प्रमुखता दी जा रही है. कंज्यूमर्स अब प्रॉडक्ट ऑफर में सहूलियत देख रहे हैं. तीसरा ट्रेंड यह है कि कंज्यूमर्स बेवरेज में नया एक्सपीरियंस ढूंढ रहे हैं और अपने हिसाब से ऑफर चाहते हैं.’

ऐंड्रॉयड 7.0 नॉगट के 10 मुख्य फीचर

गूगल ने अपना लेस्ट्स ऐंड्रॉयड वर्जन 7.0 नॉगट लॉन्च कर दिया है. यह नेक्सस डिवाइसेज को मिलना शुरू हो गया है और बाद में यह अन्य डिवाइसेज पर भी आएगा. इस OS के बीटा वर्जन को मार्च में ऐंड्रॉयड N के तौर पर पेश किया गया था.

ऐंड्रॉयड 7.0 नॉगट में कई सारे नए फीचर्स हैं. यह ओएस परफॉर्मेंस, बैटरी, डेटा समेत कई चीजों में सुधार लाया है. आगे जानें, क्या हैं ऐंड्रॉयड 7.0 नॉगट के 10 खास फीचर….

1. मल्टीटास्किंग सपॉर्ट

सैमसंग और LG के कुछ डिवाइसेज पर एक ही विंडो पर कई सारे ऐप्स खोले जा सकते थे. अब यह ऐंड्रॉयड OS का बेसिक फीचर बन गया है. यूजर्स स्प्लिट स्क्रीन मोड में 2 ऐप्स एकसाथ खोल सकते हैं. यह फीचर ऐंड्रॉयड नॉगट वाले हर स्मार्टफोन में मिलेगा. यानी यूजर्स अब यूट्यूब पर विडियो देखते हुए ट्वीट्स भी पोस्ट कर सकते हैं.

2. क्विक सेटिंग्स ऑप्शंस

अगर आप नोटिफिकेशंस पेन को स्लाइड डाउन करेंगे तो आपको ज्यादा क्विक सेटिंग्स ऑप्शंस मिलेंगे. आप एक क्विक सेटिंग्स स्क्रीन में 9 टॉगल्स रख सकते हैं. राइट स्वाइप करके आप अन्य ऑप्शंस भी ऐक्सेस कर सकते हैं.

3. बेहतर गूगल कीबोर्ड

गूगल कीबोर्ड को भी नए फीचर मिले हैं. इसके लिए नई थीम्स बनाई गई हैं, जिन्हें कस्टमाइज किया जा सकता है. इसमें यूनीकोड 9 द्वारा सर्टिफाइड 72 नए इमोजी ऐड किए गए हैं.

4. नोटिफिकेशंस नए अंदाज में

यह इस OS का सबसे बड़ा अपडेट है. इसमें नोटिफिकेशन पैनल से ही चैट्स का जवाब दिया जा सकेगा. अभी मार्शमैलो में भी ऐसा फीचर है, मगर नॉगट में इसे और बेहतर किया गया है.

5. बेहतर बैटरी लाइफ

Doze फीचर को गूगल ने ऐंड्रॉयड मार्शमैलो के साथ पेश किया था. अब इसमें भी सुधार किया गया है. डोज न सिर्फ उस वक्त काम करेगा, जब आप फोन इस्तेमाल न कर रहे हों, बल्कि स्क्रीन ऑफ होने पर भी यह काम करता रहेगा. यह बैटरी लाइफ बढ़ाएगा.

6. रीसेंट ऐप्स बटन पर बदलाव

रीसेंट ऐप्स बटन पर टैप करने पर अभी वे ऐप खुलते हैं, जो हाल ही में यूज किए गए होते हैं. मगर ऐंड्रॉयड नॉगट में जब आप इस बटन पर दो बार टैप करेंगे, वह ऐप खुल जाएगा, जिसे आपने हाल ही में यूज किया है. आप रीसेंट ऐप्स बटन को एक बार टैप करेंगे तो सारे रीसेंट ऐप्स नजर आएंगे. टैप करते रहने से बारी-बारी से वे ऐप स्क्रीन पर आते जाएंगे. जैसे ही आप टैप करना बंद करेंगे, जो ऐप सामने होगा, खुल जाएगा.

7. बेहतर फाइल मैनेजर

ऐंड्रॉयड मार्शमैलो के साथ ही फाइल मैनेजर मिल गया था, मगर वह बहुत बेसिक सा है. इसमें फाइल कॉपी करने और देखने के अलावा कुछ खास नहीं किया जा सकता. मगर नॉगट में मैनेजर में कई नए फीचर हैं. इसमें गूगल ड्राइव इंटिग्रेशन, शेयर फाइल्स जैसे कई फीचर्स ऐड किए गए हैं. आप एक ही वक्त पर कई फाइल्स खोल सकते हैं.

8. सिस्टम लेवल पर ब्लॉक होंगे फोन नंबर

ऐंड्रॉयड नॉगट पर यूजर्स फोन नंबरों को सिस्टम लेवल पर ब्लॉक कर पाएंगे. यह काम डायलर, हैंगाउट्स और मेसेंजल जैसे ऐप्स से किया जा सकेगा. अगर कोई नंबर सिस्टम लेवल पर ब्लॉक होगा, अन्य ऐप्स भी उसे बिना किसी और ऐक्शन के ब्लॉक कर देंगे. थर्ड पार्टी ऐप्स भी इन नंबर्स को अपने आप ब्लॉक कर देंगे. यानी डायलर ऐप से ब्लॉक नंबर मेसेंजर या वॉट्सऐप पर भी ब्लॉक हो जाएगा.

9. लॉकस्क्रीन पर इमर्जेंसी डीटेल्स

यह एक बहुत काम का फीचर है, जो गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए बहुत काम है. इसमें उनकी मेडिकल कंडिशन की जानकारी लिखी स्क्रीन के लॉक रहते हुए भी डिस्प्ले होगी. इसके अलावा अन्य जानकारियां भी ऐड की जा सकती हैं, जैसे कि गुम होने पर मिले फोन को किसे लौटाया जा सकता है

10. सेटिंग्स में बदलाव

ऐंड्रॉयड नॉगट में सेटिंग्स ऐप में भी कुछ बदलाव हैं. इसमें नाइट थीम, डेटा सेवर और ब्लॉक बैकग्राउंड डेटा कंजंप्शन जैसे ऑप्शन ऐड किए गए हैं.

दीपिका पादुकोण की फीस का आखिर क्या है सच

इन दिनों मीडिया में एक ही खबर सुर्खियों में है कि दीपिका पादुकोण ने बौलीवुड की सबसे अधिक पारिश्रमिक राशि पाने वाली अभिनेत्री बनते हुए अभिनेत्री कंगना रानौट को भी पीछे छोड़ दिया है. आखिर ऐसी क्या वजह है कि पिछले एक माह से मीडिया में सिर्फ दीपिका पादुकोण की पारिश्रमिक राशि की ही चर्चा हो रही है. जबकि सभी को पता है कि हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि 2016 की शुरुआत के साथ ही कई कलाकारों को अपनी पारिश्रमिक राशि एक तिहाई से लेकर आधी तक कम करनी पड़ी है. कई फिल्में महज इसलिए नहीं बन पा रही हैं कि उनका बजट ज्यादा है. ऐसे में दीपिका पादुकोण की पारिश्रमिक राशि की खबरों को लेकर बौलीवुड में कई तरह की चर्चाएं गर्म हो गयी हैं. बौलीवुड के कुछ सूत्र इसे महज दीपिका पादुकोण के मीडिया मैनेजरों का काम मान रहे हैं.

फिल्म ‘‘बाजीराव मस्तानी’’ को मिली अपार सफलता के बाद भी दीपिका पादुकोण के पास बालीवुड में कोई काम नहीं है. उन्होंने एक हालीवुड फिल्म ‘‘XXX: द रिटर्न आफ जेंडर केज’’ में जरूर अभिनय किया है. यह एक अलग बात है कि पिछले कुछ माह से यह चर्चाएं हो रही हैं कि संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘‘पद्मावती’’ में दीपिका पादुकोण अभिनय कर रही हैं या नहीं कर रही हैं?

अब खबर फैली हुई है कि फिल्म ‘‘पद्मावती’’ के लिए पारिश्रमिक राशि के तौर पर दीपिका पादुकोण 12 करोड़ 65 लाख रूपए ले रही हैं. इस तरह वह बालीवुड की सर्वाधिक पारिश्रमिक राशि लेने वाली पहली अदाकारा बन गयी हैं. लगभग दो साल पहले कंगना रानौट द्वारा एक फिल्म के लिए 11 करोड़ रूपए पारिश्रमिक राशि लेने की बात सामने आयी थी. कंगना रानौट से पहले बौलीवुड में कुछ अभिनेत्रियों को करोड़ रूपए मिले, मगर उनकी करोड़ों की पारिश्रमिक राशि दो अंकों में नहीं पहुंची थी.

पर बौलीवुड में दीपिका पादुकोण को फिल्म ‘‘पद्मावती’’ के लिए 12 करोड 65 लाख मिलने को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं. लोग सवाल उठा रहे हैं कि दीपिका पादुकोण की अभिनय क्षमता या उन्हें नई फिल्में क्यों नहीं मिल रही हैं या उन्हें किन फिल्मों के आफर मिल रहे हैं और वह नहीं कर रही हैं, आदि की चर्चाओं  बजाय महज सर्वाधिक पारिश्रमिक राशि की ही चर्चाएं हो रही हैं?

इस तरह की चर्चा को लेकर संशय की स्थिति इसलिए भी पैदा हुई है, क्योंकि संजय लीला भंसाली की तरफ से अभी तक यह बात साफ नहीं की गयी है कि उनकी फिल्म ‘‘पद्मावती’’ का निर्माण कब शुरू होगा और इस फिल्म में कौन से कलाकार अभिनय कर रहे हैं. यहां तक कि दीपिका पादुकोण को ‘पद्मावती’ के लिए दी जाने वाली पारिश्रमिक राशि के मुद्दे पर भी संजय लीला भंसाली चुप हैं. तो दूसरी तरफ इस पारिश्रमिक राशि को लेकर दीपिका पादुकोण की तरफ से अभी तक कुछ भी आधिकारिक रूप से नहीं कहा गया है. इन दोनों की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है?

बौलीवुड के सूत्रों की माने तो फिल्म ‘‘बाजीराव मस्तानी’’ के दौरान ही दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा के बीच मतभेद की खबरें गर्म हो गयी थीं. सूत्रों के अनुसार इस फिल्म के रिलीज होते होते दीपिका पादुकोण ने प्रियंका को मात देने के लिए ही प्रियंका की ही तर्ज पर हालीवुड की फिल्म स्वीकार कर ली थी. अब दीपिका और प्रियंका दोनों ही हॅालीवुड में काम कर रही हैं. जबकि इन दोनों के ही पास बौलीवुड में कोई फिल्म नही है. मगर चर्चाएं हैं कि फिल्म ‘‘पद्मावती’’ में यह दोनों ही अभिनेत्रियां नजर आएंगी. बौलीवुड के सूत्रो के अनुसार दीपिका पादुकोण के इशारे पर प्रियंका चोपड़ा के मुकाबले दीपिका पादुकोण का पलड़ा भारी होने का संदेश ही दिया जा रहा है. अब इसके पीछे किसका दिमाग काम कर रहा है, यह तो दीपिका पादुकोण ही बेहतर बता सकती हैं?

सूत्रों के अनुसार प्रियंका से अपना पलड़ा भारी साबित करने के बाद दीपिका पादुकोण ने सर्वाधिक पारिश्रमिक राशि पाने वाली अदाकारा की खबर फैला कर एक तीर से कई शिकार करने की कोशिश की है. कंगना रानौट के साथ दीपिका पादुकोण की दुश्मनी किसी से छिपी नही है. बौलीवुड के सूत्रों की माने तो दीपिका पादुकोण ने अपने आपको कंगना से बेहतर पारिश्रमिक राशि पाने वाली अदाकारा होने की बात फैला कर कंगना रानौट के साथ साथ प्रियंका चोपड़ा को भी मात देने की कोशिश की है. सूत्रों के अनुसार इस तरह दीपिका पादुकोण को लगता है कि वह ना सिर्फ इन दोनों अभिनेत्रियों को पछाड़ रही हैं, बल्कि खुद को हर दिन सुर्खियों में रखने में भी सफल हो रही हैं. यानी कि बिना कुछ काम किए खबरों में बनी हुई हैं. इतना ही नहीं सबसे ज्यादा पारिश्रमिक राशि पाने का दावा करते हुए वह लोगों का ध्यान इस बात से हटाने में सफल रही हैं कि उनके पास बौलीवुड में कोई काम नहीं है.

बौलीवुड में अब यह मांग भी जोर पकड़ रही हैं कि यदि पारिश्रमिक राशि की बात सच है, तो इसे दीपका पादुकोण के साथ साथ संजय लीला भंसाली को खुलकर स्वीकार करना चाहिए. उनके इस सच को स्वीकार करने से इन दोनो का मान सम्मान बढ़ने के साथ ही महिला कलाकारों का मान सम्मान भी बढ़ेगा.

जी हां! दीपिका पादुकोण को पारिश्रमिक राशि के तौर पर 12 करोड़ 65 लाख रूपए मिलने की खबर सच होने का अर्थ हर भारतीय अभिनेत्री के एक अच्छी खबर है. यह तो धीरे धीरे बौलीवुड में महिलाओं को अच्छा स्थान मिलने का परिचायक है. बहरहाल, हमें उस दिन का इंतजार है जब दीपिका पादुकोण व संजय लीला भंसाली 12 करोड़ 65 लाख की राशि को खुलकर स्वीकार करेंगे.

नौकरियों की भरमार, यहां करें एप्लाई

क्या आप नरेंद्र मोदी सरकार के लिए काम करना चाहते हैं? अगर हां, तो आपके लिए मौका है. केंद्र सरकार अब आम नागरिकों से रेज्युमे मांग रही है. इन्हें केंद्रीय मंत्रालयों में अलग-अलग पोजिशंस में 'एक्सपर्ट' के तौर पर काम करने के लिए जोड़ा जा सकता है. फिलहाल सरकार को एडिटोरियल राइटर्स, सीनियर मैनेजमेंट प्रफेशनल्स, सॉफ्टवेयर डिवेलपर, रिसर्चर, डेटा साइंटिस्ट, ग्राफिक डिजाइनर्स, डिजिटल कॉन्टेंट स्क्रिप्ट राइटर, ऐड प्रफेशनल, अकैडमिक एक्सपर्ट, सोशल मीडिया एक्सपर्ट और ऐप्लिकेशन डिवेलपर्स की जरूरत है. यह गवर्नंस के साथ लोगों को जोड़ने की अपनी तरह की पहली कवायद है.

प्रधानमंत्री के MyGov पोर्टल ने सरकार और नागरिकों के इंटरफेस को आगे बढ़ाने के लिए यह प्रयोग शुरू किया है. MyGov पोर्टल ने मंगलवार की एक पोस्ट में कहा है, 'MyGov का अलग-अलग वरिष्ठता क्रम और विशेषज्ञता वाले रेज्युमे का डेटा बैंक तैयार करने का प्रस्ताव है. सरकार मंत्रालयों, विभागों, संस्थानों और विशेषज्ञ इकाइयों में अलग-अलग पदों पर कॉन्ट्रैक्ट सर्विस के तहत सिटिजन एक्सपर्ट्स को जोड़ने की खातिर समय-समय पर इस डेटा बैंक का इस्तेमाल कर सकती है.

MyGov पोर्टल ने पोस्ट में कहा है, 'MyGov की तरफ से रेज्युमे की स्क्रूटनी की जाएगी और शॉर्टलिस्ट लोगों को आगे विचार-विमर्श और इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा. इसमें पे-पैकेज पर भी बातचीत होगी. हालांकि, इस फोरम में रेज्युमे दाखिल करना रोजगार या आपसे काम लेने की गारंटी नहीं है. एडिटोरियल राइटर्स के लिए सरकार को मास कम्युनिकेशन-जर्नलिजम या इकनॉमिक्स या सोशल साइंसेज में मास्टर्स डिग्री रखने वालों की जरूरत है. उनके पास प्रमुख मीडिया प्लैटफॉर्म पर लिखने का भी अनुभव होना चाहिए.

वहीं सीनियर मैनेजमेंट पोस्ट के लिए सरकार को सीनियर लेवल के प्रफेशनल्स मसलन यूनिवर्सिटी, हॉस्पिटल्स, आर्म्ड फोर्सेज, सिविल सर्विसेज और पुलिस से रिटायर्ड लोगों की जरूरत है, जिन्हें प्रफेशनल्स की बड़ी टीमों को संभालने का अनुभव हो. अकैडमिक एक्सपर्ट्स के लिए पीएचडी होना जरूरी है. साथ ही, उन्हें यूनिवर्सिटीज, कॉलेजों में पढ़ाने का अनुभव हो या वे अंतरराष्ट्रीय ख्याति वाली यूनिवर्सिटीज के रिटायर्ड प्रफेसर हों. सोशल मीडिया एक्सपर्ट्स की जॉब के लिए सरकार को ऐसे लोगों की तलाश है, जिन्हें टि्वटर, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, लिंक्डइन और वॉट्सऐप में कॉन्टेंट तैयार करने और सोशल मीडिया प्रोफाइल्स को सफलतापूर्वक चलाने का अनुभव हो. साथ ही, वे ब्लॉग साइट चला रहे हों.

साल का सबसे बड़ा वेडिंग सॉन्ग ‘नच दे ने सारे’ रिलीज

फिल्म ‘बार-बार देखो’ के मेकर्स ने एक और नया  गाना “नच दे ने सारे” रिलीज किया है. पंजाबी-हिंदी बोल के इस गाने को शानदार तरीके से फिल्माया गया है. शादी के माहौल सा यह गाना शादी के सेट पर ही शूट किया गया है. एक टिपिकल इंडियन वेडिंग में शादी के पहले जितने भी रूप होते हैं, उन्हें इस गाने ने जस्टिफाइ किया है. चाहे वो मस्ती हो, हल्की-फुल्की छेड़छाड़, पैग का दौर या फिर लेडीज संगीत. गाने को मस्ती के मूड में गाया और फिल्माया गया है और इसके स्टेप्स तो वाकई टिपिकल शादी वाले ही हैं.

‘बार-बार देखो’ की जोड़ी कैट्रीना कैफ-सिद्दार्थ मल्होत्रा के साथ सहायक कलाकर रोहन जोशी, सयानी, राम कपूर, ताह शाह और सारिका ने नच ने सारे…में जमकर ठुमका लगाया है और स्क्रीन पर इस गाने को जिया है.

जब किसी मौके पे नाचने का माहौल बनाना होता है, तो आपको सही गीत-संगीत चाहिए होता है. नच दे ने सारे, यही माहौली गाना है जो आपके कदमों  को थिरकने के लिए मजबूर कर देगा. यकीन मानिए इस साल का यह सबसे बड़ा वेडिंग सॉन्ग है.

“नच दे ने सारे” गाने के बारे में एक बात और बता दें कि यह फिल्म में तब आता है जब जय और दिया ( सिद्दार्थ-कैट्रीना ) की शादी हो रही होती है और उससे पहले परिवार के सारे लोग शादी के माहौल में मशगूल रहते हैं. गाने को जैसलीन रॉयल, हर्षदीप कौर और सिद्दार्थ महादेवानंद ने गाया है. कलाकारों को इस गाने पर गणेश आचार्या ने थिरकाया है.

तेरा काला चश्मा…पार्टी गाने से दर्शकों को झकझोर देने के बाद रोमांटिक सॉन्ग सौ आसमां और अब नच दे ने सारे… फिल्म मेकर्स ने यह बता दिया है कि फिल्म अपने गीत-संगीत से भी भरपूर है. बार-बार देखो के ट्रेलर को दर्शकों ने हाथोंहाथ लिया है. इस फिल्म में कैट्रीना और सिद्दार्थ के कैमेस्ट्री और उनके फ्रेशनेस की चर्चा बी-टॉउन से लेकर सभी जगह है.

9 सितंबर को रिलीज होनी वाली फिल्म बार-बार देखो का निर्माण एक्सेल एंटरटेंमेंट व धर्मा प्रोडक्शन ने किया है और नित्या मेहरा ने निर्देशित किया है.

रियो: मेडल से चूके, अब मिलेगी सजा!

नॉर्थ कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन रियो ओलंपिक में अपने खिलाड़ियों के प्रदर्शन से खुश नही हैं. खबर है कि जोंग मेडल से चूकने वाले खिलाड़ियों को सजा भी दे सकते हैं. सूत्रों की मानें तो जोंग की अपेक्षा थी कि उनके देश के खाते में कम से कम 5 गोल्ड समेत 17 मेडल्स आएं, लेकिन ऐसा नहीं हो सका. इस ओलंपिक में नॉर्थ कोरिया के खाते में 7 मेडल्स ही आ सके.

नॉर्थ कोरिया ने रियो ओलंपिक में कुल 31 ऐथलीट्स को भेजा था. रियो ओलंपिक में नॉर्थ कोरिया के खाते में कुल 7 मेडल ही आ सके, जिनमें 2 गोल्ड, 3 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज मेडल शामिल हैं. नॉर्थ कोरिया का प्रदर्शन इससे पहले लंदन ओलंपिक में रियो से बेहतर था. लंदन ओलंपिक में नॉर्थ कोरिया ने 4 गोल्ड मेडल जीते थे.

नॉर्थ कोरिया के खिलाड़ी ओलंपिक के दौरान काफी दबाव में थे. उन्हें डर था कि किम जोंग उन की अपेक्षा के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने पर उन्हें रहने की अच्छी सुविधा, पर्याप्त राशन से हाथ धोना पड़ेगा और यहां तक कि उन्हें कोयले की खदानों में काम करने भी भेजा जा सकता है. वहीं दूसरी ओर मेडल जीतने वालों को ये सभी सुविधाएं बेहतर ढंग से मुहैया कराई जाएंगी और पुरस्कृत भी किया जाएगा.

इससे पहले भी इस तरह की खबरें आ चुकी हैं कि नॉर्थ कोरिया की फुटबॉल टीम को लाइव टीवी पर सजा दी गई थी. उन्हें यह सजा 2010 वर्ल्ड कप में पुर्तगाल से 7-0 के स्कोर से हारने की वजह से दी गई थी. उस दौरान भी कुछ खिलाड़ियों को सजा के तौर पर खदानों में काम करने के लिए भेज दिया गया था.

सूत्रों के मुताबिक, इस ओलंपिक में बेहतर प्रदर्शन न कर पाने वाले खिलाड़ियों के साथ भी ऐसा हो सकता है. हालांकि, अनाधिकारिक सूत्रों का कहना है कि ऐथलीट्स का देश वापसी पर स्वागत होगा. मेडल जीतने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा, लेकिन अन्य को किसी प्रकार की सजा नहीं दी जाएगी.

गांव में स्मार्टफोन से बदल रही है जिंदगी

पिछले 10 सालों में गांवदेहातों में रहने वालों की जिंदगी में सब से बड़ा बदलाव पहले मोबाइल फोन, फिर स्मार्टफोन के रूप में सामने आया है. साल 2011 की जनगणना के सामाजिक और माली आंकडे़ इस बात के गवाह हैं. तमाम तरह की परेशानियों और गरीबी के बाद भी गांवदेहात में तेजी से मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ा है. गरीब प्रदेशों में गिने जाने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के गांवों में रहने वाले 88 फीसदी और 84 फीसदी घरों में आज मोबाइल फोन का इस्तेमाल होने लगा है. ये प्रदेश राष्ट्रीय औसत 68 फीसदी से कहीं आगे हैं. गांवों में इस्तेमाल होने वाले दूसरे संसाधनों से भी तुलना करें, तो मोबाइल फोन का इस्तेमाल सब से ज्यादा किया जा रहा है. कच्चे घरों और झोंपडि़यों में रहने वाले लोग भी मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने लगे हैं. एक ओर गांवों में बिजली न आने से वहां बिजली से चलने वाले उपकरणों का इस्तेमाल घट रहा है, तो दूसरी ओर बिजली से चार्ज होने वाले मोबाइल फोन पर बिजली न होने का कोई ज्यादा असर नहीं हो रहा है.

आज के समय में मोबाइल फोन केवल बात करने तक सीमित नहीं रह गया है. स्मार्टफोन आने के बाद मोबाइल फोन मनोरंजन का सब से बड़ा साधन बन गया है. स्मार्टफोन में मनपसंद गानों के वीडियो देखे जा सकते हैं. इस के जरीए फेसबुक और ह्वाट्सएप जैसे सोशल मीडिया के साधनों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. आज 2 हजार रुपए तक की कीमत से स्मार्टफोन मिलना शुरू हो जाता है. गांव के लोगों को स्मार्टफोन में सब से ज्यादा 2 चीजें पसंद आती हैं, वीडियो पर गाने देखना और सुनना. वे चाहते हैं कि फोन का म्यूजिक सिस्टम तेज हो, जिस से आवाज को दूर तक सुना जा सके. वे अब अपनी जिंदगी के हसीन पलों को कैमरे में कैद करना चाहते हैं, इसलिए कैमरा वाला फोन पसंद करते हैं.

गांवों के बाजार में कम कीमत वाले स्मार्टफोन की मांग है, इसलिए ज्यादातर कंपनियां गांव के बाजार को ध्यान में रख कर फोन बनाने लगी हैं. पहले नोकिया और अब माइक्रोसौफ्ट और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियां गांव के बाजार में अपना कब्जा जमाने में केवल इसलिए पीछे रह गईं, क्योंकि इन के स्मार्टफोन महंगे थे. इन कंपनियों ने पहले गांव के लिए सस्ते मोबाइल फोन बनाए थे, जिन में रेडियो बजता था, पर गांव के लोग अपने मनपसंद गाने या वीडियो डाउनलोड कर के नहीं सुन सकते थे.  सस्ते फोन बनाने वाली कंपनियों ने गांव के बाजार की बदलती पसंद को पकड़ लिया और कम कीमत पर स्मार्टफोन बना कर गांव के बाजार से बड़ी कंपनियों को बाहर कर दिया. गांव देहात के बाजार में बिकने वाले 70 फीसदी फोन सस्ते किस्म के लोकल ब्रांड वाली कंपनियों के होते हैं. बड़ी कंपनियों के पुराने मोबाइल फोन ही यहां खरीदे जाते हैं. ब्रांडेड कंपनियों के मोबाइल फोन इसलिए भी नहीं पसंद किए जाते, क्योंकि इन में गाने धीमी आवाज में सुनाई देते हैं. इन का म्यूजिक सिस्टम तेज आवाज वाला नहीं होता है.  

बदलाव की हकीकत

गांव में रोजीरोजगार की कमी है. ऐसे में बहुत सारे लोग कामधंधे की तलाश में दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों और विदेशों तक में मेहनतमजदूरी करने जाते हैं. ये लोग स्मार्टफोन से अपने घरपरिवार और करीबी लोगों से जुड़े रहना चाहते हैं. स्मार्टफोन इस में सब से बड़ा रोल अदा कर रहा है. अब रेल का टिकट लेना हो या ट्रेन का टाइम पता करना हो, इंटरनैट के जरीए यह आसान काम हो गया है, खासकर ट्रेन में टिकट का रिजर्वेशन कराना फोन के जरीए आसान हो गया है.

कई गांवों में यह रोजगार का साधन बन गया है. इस के अलावा स्मार्टफोन मनोरंजन का सब से बड़ा साधन बन गया है. इस में वीडियो डाउनलोड कर के मनपसंद गानों व फिल्मों को देखा और सुना जा सकता है. स्मार्टफोन में लगने वाले मैमोरी कार्ड में गाने और फिल्म को बाजार से भी डाउनलोड कराया जा सकता है. इस के जरीए कम पैसे में गानों और फिल्मों का मजा लिया जा सकता है. यही नहीं, शादी और दूसरे मौकों के वीडियो तक इस स्मार्टफोन के जरीए बनाए जाने लगे हैं. गंदी फिल्मों का शौक रखने वाले लोगों के लिए स्मार्टफोन वरदान जैसा हो गया है. वे गुपचुप तरीके से इन का भरपूर मजा लेने लगे हैं. यही वजह है कि गांव के बाजारों में बिकने वाली बेहूदा और कहानी टाइप की किताबों की बिक्री बंद हो गई है. 20 से 25 रुपए खर्च कर के मैमोरी कार्ड में 3 से 5 फिल्में लोड हो जाती हैं. इतना खर्च कर के केवल 1 या 2 किताबें ही मिल पाती थीं. ऐसी किताबों को दूसरों की नजरों से छिपाना मुश्किल काम होता था, जबकि मोबाइल फोन में कैद इन फिल्मों को छिपाना मुश्किल नहीं है.

स्मार्टफोन के बढ़ने से गांव के मनोरंजन में प्रयोग होने वाले दूसरे साधन भी बंद हो गए हैं. आज मनोरंजन के बाजार में गानों के कैसेट और टेपरैकौर्डर गायब हो गए हैं. इसी तरह से रेडियो भी गांव के बाजार से गायब हो गया है. कुलमिला कर देखा जाए, तो स्मार्टफोन गांव में बातचीत करने के साथसाथ मनोरंजन का भी बड़ा साधन बन कर उभरा है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने गांवगांव अपनी बात को पहुंचाने के लिए मोबाइल फोन का सहारा लिया था. उस ने बड़ी तादाद में एसएमएस के जरीए अपना प्रचार किया. उत्तर प्रदेश में अगले साल विधानसभा के चुनाव आ रहे हैं. चुनाव लड़ने वाले लोग स्मार्टफोन के जरीए अपनी बात ज्यादा से ज्यादा लोगों तक कम समय में पहुंचाने की तैयारी कर रहे हैं.  कई जुझारू किस्म के नौजवानों ने स्मार्टफोन का सहारा ले कर ऐसी वीडियो क्लिप बनाईं, जिन्हें देख कर पुलिस और प्रशासन को कार्यवाही करने के लिए मजबूर होना पड़ा. थाना और तहसील की हकीकत को मोबाइल फोन में कैद कर के शहर के बडे़ अफसरों तक पहुंचाने का काम भी गांव के लोग करने लगे हैं, जिस से वहां के सरकारी नौकर गलत काम करने से पहले सौ बार सोचने पर मजबूर होने लगे हैं. अगर सरकारी लैवल पर इन साधनों को बढ़ावा दिया जाए और इस तरह से मिलने वाली शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए, तो ये फोन गांव के लोगों के लिए बड़े मददगार साबित हो सकते हैं.                    

मोबाइल फोन पर इन की राय

जिस तरीके से सरकारी व्यवस्था कंप्यूटर के हवाले हो रही है, सरकार ईगवर्नैंस पर जोर दे रही है, उस से आने वाले दिनों में स्मार्टफोन का इस्तेमाल बढ़ने ही वाला है. इस से गांव के लोग अपनी शिकायत ऊपर के अफसरों तक पहुंचाने में कामयाब हो रहे हैं. वे इसे मनोरंजन का बेहतर साधन बना रहे हैं. इस के जरीए वे सीधे तमाम लोगों से जुडे़ रहते हैं. जिन लोगों के पास पैसा कम है, गरीब हैं, वे भी मिस काल मार कर अपनी बात को पहुंचाने का जरीया खोज ही लेते हैं. परिवार के लोग भी नातेरिश्तेदारों के संपर्क में पहले से ज्यादा रहने लगे हैं. स्मार्टफोन के चलन में आने के बाद गांव में चिट्ठी से खबरों का आदानप्रदान बंद सा हो गया है. आज लोगों में पढ़ाईलिखाई का लैवल भी बढ़ रहा है. गांव के बच्चे भी मोबाइल फोन चलाना सीख चुके हैं.

– शशिभूषण, समाजसेवी, पानी संस्थान.

पहले मेरे गाने कैसेट पर आते थे. लोगों को सुनने के लिए टेपरैकौर्डर रखना पड़ता था. जब से मोबाइल फोन में गानों को डाउनलोड कर सुनने का तरीका आ गया है, लोग मेरे गानों को मोबाइल फोन पर डाउनलोड कर लेते हैं. इस तरह से लोग जब चाहे गानों को सुन सकते हैं. कुछ समय से लोगों की यह डिमांड होने लगी कि गाने यूट्यूब पर डाले जाएं. जिस से वहां से फोन पर सीधे डाउनलोड किए जा सकें. कई गानों को वीडियो के साथ देखा जाता है.

स्मार्टफोन आने के बाद से गांव के लोगों की मनोरंजन की दुनिया ही बदल गई है. जब हम कहीं जाते हैं, तो लोग हमारे फोटो अपने मोबाइल फोन से ही लेना चाहते हैं. कुछ लोग तो पूरा वीडियो शूट कर लेते हैं. गांव के लोगों में स्मार्टफोन के प्रति लगाव बढ़ा है. यह अब इन के लिए जरूरत की चीज बन गई है. यह बात गांव में रहने वालों को समझ आ चुकी है.                        

– खुशबू उत्तम, भोजपुरी गायिका

जरूरत एक की, मिलते एक हजार

मोबाइल फोन के बाजार में भी शहर और गांव का अंतर देखने को मिलता है. गांव के लोगों को केवल एक मोबाइल फोन की जरूरत होती है. इस के बावजूद गांव के बाजार में एक हजार किस्म के मोबाइल फोन मिलते हैं. अलगअलग नामों से बिकने वाले ये फोन करीबकरीब एकजैसी कीमत और फीचर्स वाले होते हैं. ज्यादातर फोन चाइनीज ब्रांड के सस्ते होते हैं. कुछ लोकल फोन भी गांव के बाजार में अपना प्रचारप्रसार करते हैं. सब से ज्यादा फोन उसी कंपनी के बिकते हैं, जो कंपनी दुकानदार को ज्यादा सुविधाएं और कमीशन देती है. गांव के लोग जब मोबाइल फोन खरीदने दुकानदार के पास जाते हैं, तो दुकानदार अपनी बातों से उन को वही मोबाइल खरीदने के लिए मजबूर कर देता है, जो वह बेचना चाहता है. अगर ग्राहक किसी दूसरे ब्रांड का मोबाइल फोन मांगता भी है, तो दुकानदार कहता है कि इस फोन की जिम्मेदारी उस की नहीं है.

ऐसे में ग्राहक वही मोबाइल लेता है, जो दुकानदार कहता है. अगर मोबाइल कंपनियां अपने ब्रांड का सही प्रचारप्रसार गांव के लोगों के बीच कर सकें, तो ग्राहक को अपनी जरूरत के हिसाब वाला मोबाइल फोन लेने में सुविधा हो सकेगी. गांव के लोगों को मोबाइल फोन ऐसा चाहिए, जिस से सही तरीके से बात हो सके. इस के लिए जरूरी है कि मोबाइल फोन नैटवर्क को ठीक से पकड़े. गांव में बिजली की परेशानी रहती है, इसलिए मोबाइल फोन की बैटरी लंबे समय तक चलने वाली हो. यह जल्द चार्ज होने वाली होनी चाहिए. मोबाइल फोन में अब इंटरनैट का प्रयोग बढ़ रहा है. ऐसे में मोबाइल फोन पर इंटरनैट सही से चलना चाहिए. मोबाइल फोन में कीपैड होना चाहिए. क्योंकि टच स्क्रीन चलना थोड़ा मुश्किल होता है. वीडियो फिल्म और गानों को पसंद करने वाले लोग मोबाइल फोन की बड़ी स्क्रीन पसंद करते हैं. ये लोग चाहते हैं कि मोबाइल फोन में पड़ने वाला मैमोरी कार्ड ज्यादा कैपेसिटी का हो, जिस से ज्यादा से ज्यादा गाने और वीडियो लोड हो सकें

दुकानदार पर निर्भर हैं ग्राहक

बाजार में जरूरत से ज्यादा मोबाइल फोन मुहैया होने से ग्राहक दुकानदार पर निर्भर हो गए हैं. इस के अलावा गांव के बाजार में बिकने वाले मोबाइल फोन अपना प्रचारप्रसार नहीं करते, जिस से ग्राहक उन के फोन की खासीयत को समझ सकें. गांव के ग्राहकों को मोबाइल फोन के संबंध में बहुत जानकारी नहीं होती है. ऐसे में वे दुकानदार की बताई बात को मानने को मजबूर होते हैं. कई बार वे अपने आसपास के लोगों के फोन को देख कर फोन खरीदने की कोशिश भी करते हैं, तो दुकानदार उन्हें गारंटी न देने का डर दिखा कर रोक देते हैं. ग्राहकों को चाहिए कि वे मोबाइल फोन खरीदने से पहले अपनी जरूरतों को समझ लें. मोबाइल फोन की कीमत उस में मौजूद फीचर्स से घटतीबढ़ती है. केवल एक दुकान पर देख कर ही मोबाइल फोन न खरीदें.  मोबाइल फोन को खरीदने के पहले आसपास की दुकानों को देख लें. अगर गांव से शहर ज्यादा दूर न हो, तो शहर की दुकान से मोबाइल फोन खरीद सकते हैं. हर मोबाइल कंपनी अपने फोन की वारंटी देती है. फोन लेने से पहले उस की वारंटी जरूर देख लें. फोन का पक्का बिल भी लें. कई बार पक्का बिल न होने की दशा में दुकानदार अपनी कही बात से मुकर जाता है. मोबाइल फोन लेने के बाद उस की सिक्योरिटी का खास ध्यान रखें, खासकर स्मार्टफोन पानी वगैरह में गिर जाने से जल्दी खराब हो जाते हैं. इन की स्क्रीन जल्दी खराब हो सकती है. कई बार स्क्रीन पर कुछ लगने से वह टूट जाती है. स्क्रीन को महफूज रखने के लिए स्क्रीन गार्ड जरूर लगवा लें.

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