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ब्यूटी पार्लर से निकली सैक्सी डौल

अब वे दिन लद गए जब युवतियों को सैक्सुअली अट्रैक्शन के लिए वार्डरोब से ले कर मेकअप तक की खाक छाननी पड़ती थी और भारीभरकम खर्च करना पड़ता था. आज तो जमाना मेकओवर का है और इस से भी बढ़ कर सैक्सुअल रिप्रैजैंटेशन का. हुस्न के बाजार में जो बेहतर दिखेगा वही कौंप्लिमैंट पाने का हकदार भी होगा. यदि आप खूबसूरत नहीं भी हैं तब भी कोई बात नहीं, बाजार में आप को सैक्सी डौल बनाने वाली पूरी रेंज भरी पड़ी है. बस, थोड़ा सा ग्लैमर और ब्यूटी प्रोडक्ट्स का तड़का चाहिए फिर देखिए कैसे आप भी ग्लैमरस और हौट लुक पाती हैं.

सर्वे बताते हैं कि देश की 30-32% महिलाएं जो औसत रंगरूप की हैं सैक्सी व अट्रैक्टिव लुक पाने के लिए अपनी इनकम का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा इस पर खर्च करती रही हैं. यह तो छोटे शहरों की कहानी है, बड़े शहरों और महानगरों में तो यह आंकड़े और भी बड़े हैं. सैक्सी लुक पाने के लिए जहां अधिकतर महिलाएं अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च कर रही हैं वहीं वे नामी ब्यूटी प्रोडक्ट्स और उम्दा ब्यूटी पार्लर्स में जा कर अपना वक्त भी जाया कर रही हैं. शोध बताते हैं कि दिल्ली, कोलकाता, मुंबई और बेंगलुरु जैसे महानगरों में जहां महिलाएं महीने में 2-3 बार पार्लर जाती हैं वहीं छोटे शहरों में महिलाएं महीने में एकदो बार और जिलाकसबों में कम से कम एक बार तो ब्यूटी पार्लर जरूर जाती हैं.

सैक्सी लुक पाने वालों की चाहत में खासा इजाफा हुआ है और इसे भुनाने के लिए बाजार भी बाहें फैला कर खड़ा है. खूबसूरत और सैक्सी दिखने का अधिकार अब सिर्फ गोरी और सुंदर युवतियों का ही नहीं है. अब ब्यूटी सैलून साधारण और औसत दरजे की युवतियों को भी सैक्सी मेकओवर के जरिए कामुक बना रहे हैं. जाहिर है कि ऐसे में साधारण कदकाठी व औसत रंगरूप वाली युवतियों के लिए इन ब्यूटी सैलूनों ने ग्लैमर वर्ल्ड से ले कर मौडलिंग और फिल्मों में जाने तक के दरवाजे खोल दिए हैं. यदि आप की सांवली सूरत है तो घबराएं नहीं उस का भी इंतजाम इन सैलूनों में बखूबी किया जाता है.

अट्रैक्टिव लुक पाने के हौट टिप्स

–       मार्केट में जो फैशन चल रहा हो उसे एक बार खुद पर ट्राई जरूर करें.

–       हौट व सैक्सी लुक पाने के लिए अपने बालों के साथ तरहतरह का ऐक्सपैरिमैंट करती रहें.

–       ट्रैडिशनल मेकअप से हट कर मौडर्न मेकअप से हौट व इरोटिक लुक आसानी से पाया जा सकता है.

– हमेशा अच्छी क्वालिटी के ब्यूटी प्रोडक्ट्स का ही इस्तेमाल करें, क्योंकि इन से स्किन को कोई नुकसान नहीं पहुंचता.

–       जहां तक संभव हो प्रचलित व फेमस ब्रैंड्स का ही इस्तेमाल करें.

–       मेकअप के साथसाथ जूलरी भी आप को बेहतर लुक दिलाने में मदद कर सकती है. आजकल पेपर जूलरी फैशन में है इसे ट्राई कर सकती हैं.

–       यदि कोई ब्यूटी सैलून आप को कोई ब्यूटी प्रोडक्ट यूज करने के लिए औफर करे तो एक बार सोचें जरूर.

–       अपनी फिगर व हाइट के हिसाब से ही आउटफिट चूज करें.

–       फुटवियर व हैंडबैग भी आप की सैक्सी फिगर में इजाफा करते हैं, इसलिए सोचसमझ कर इन का चयन करें.

–       बाहरी खूबसूरती से बढ़ कर आंतरिक खूबसूरती होती है, अत: इसे उभारने के लिए खूब पानी पीएं. फल खाएं और खुश रहें. जब आप भीतर से खुश होंगी तो बाहर से खुद ही अट्रैक्टिव दिखेंगी.          

कुछ ब्यूटी ऐक्सपर्ट्स की राय

वीएलसीसी मेकअप स्टूडियो व ट्रैनिंग इंस्टिट्यूट, गुड़गांव में बतौर मेकअप आर्टिस्ट छवि चौहान, जो जीटीबी नगर, दिल्ली में रहती है, का कहना है, ‘‘समय के साथसाथ कस्टमर की रेंज भी पूरी तरह चेंज हुई है. वे अब पहले से कहीं अधिक बोल्ड डिमांड और फैंसी डिजायर के साथ मेकअप स्टूडियो आ रही हैं. ओकेजन, इवैंट्स या शादीत्योहारों के अलावा वे और्डिनरी दिनों में भी गुडलुक पाना चाहती हैं. इस में एक बड़ा वर्ग ऐवरेज ऐपीयरैस वाली युवतियों का है.’’

इसी तरह मिसेज ज्योति अरोड़ा नक्यांश ब्यूटी पार्लर, मुखर्जी नगर, दिल्ली, मेकअप स्टूडियो व ब्यूटी पार्लर की ओनर कहती हैं, ‘‘यकीन नहीं होता कि कस्टमर मेकअप आर्टिस्ट से भी दो कदम आगे निकल सकते हैं. उन के पास ब्यूटी, फिटनैस और मेकओवर को ले कर इतने सुझाव व टिप्स होते हैं कि एक बारगी यकीन करना मुश्किल होता है. मेरे पार्लर में तो युवतियां इस चाहत के साथ आती हैं कि उन्हें बस सैक्सी डौल बन के निकलना है और इस के लिए वे हेयर डै्रसिंग व मेकअप के साथ न्यू ऐक्सपैरिमैंट्स करने से भी नहीं चूकतीं. मैं भी अपनी टीम के साथ पूरी शिद्दत से उन की हर इच्छा पूरी करती हूं. कई बार हमें ये कौंप्लिमैंट मिलते हैं कि मैडम, आप के हाथों ने तो कमाल कर दिया.

‘‘सैक्सी और अटै्रक्टिव दिखने की उस की चाहत पूरी करने के लिए हमें मार्केट की छानबीन करनी पड़ती है. फैशन स्टेटमैंट से ले कर ब्यूटी ट्रेंड पर नजर रखनी पड़ती है, क्योंकि कस्टमर की वैराइटी औफ डिमांड होती है, इसलिए खुद को अपडेट रखना बहुत जरूरी होता.

दूसरियों की ब्रैस्ट से ईर्ष्या

ब्रिटेन की सब से सैक्सी और हौट बिकिनी मौडल केट अपटन ने खुलासा किया है कि कभी उन्हें अन्य युवतियों की उन्नत और आकर्षक ब्रैस्ट देख कर जलन महसूस होती थी. केट ने एक इंटरव्यू में बताया कि किशोरावस्था में उन की ब्रैस्ट लगभग सपाट थी और इस के लिए उन की फ्रैंड्स उन का मजाक उड़ाया करती थी. केट का मानना है कि टीनऐज में मिले इस सबक ने उन्हें सुपरमौडल बनने का रास्ता दिखा दिया. केट ने ब्रैस्ट इंप्लांट करवाया और आज केट ब्रिटेन की हौट मौडल हैं.

सिर्फ केट ही नहीं बल्कि बहुत सी युवतियां अपनी ब्रैस्ट साइज को ले कर बहुत टैंशन में रहती हैं. खासकर वे युवतियां जिन की ब्रैस्ट ज्यादा छोटी या ज्यादा बड़ी है. कुछ युवतियों की परफैक्ट ब्रैस्ट न होने के कारण उन्हें चिढ़ाया भी जाता है जिस वजह से अन्य युवतियों की परफैक्ट ब्रैस्ट देख कर वे जलन महसूस करने लगती हैं.

वैसे तो किसी दूसरी को देख कर जलना अच्छी बात नहीं है, लेकिन कई बार यह जलन अपने लिए ही अच्छी साबित होती है. किसी दूसरी से जलन से मन में कंपीटिशन की भावना आती है कि अगर उस की ब्रैस्ट अच्छी है तो मेरी क्यों नहीं हो सकती और अपनी इसी सोच के चलते युवतियां अच्छी ब्रैस्ट पाने के लिए काफी मेहनत करती हैं.

आज लगभग हर युवती अपनी ब्रैस्ट के आकार को ले कर जागरूक है. बहुत कम ऐसी युवतियां हैं जो अपनी ब्रैस्ट के आकार से संतुष्ट हैं. कुछ युवतियों ने अपनी ब्रैस्ट कम करने की कोशिश में कड़ी मेहनत की है तो दूसरी तरफ कुछ युवतियां इंटरनैट पर अपनी ब्रैस्ट कैसे बढ़ाएं? जैसे सवालों का हल जानने को उत्सुक रहती हैं.

अपनी ब्रैस्ट परफैक्ट बनाने के पीछे एक वजह यह भी है कि युवक अकसर युवतियों की ब्रैस्ट देख कर ही उन की तरफ आकर्षित होते हैं और युवतियों को लगता है कि अगर उन की ब्रैस्ट उन्नत नहीं है तो युवक उन की तरफ नहीं देखेंगे. लेकिन सवाल यह है कि युवतियों को ऐसा क्यों लगता है कि उन की ब्रैस्ट को देख कर युवक आकर्षित होते हैं?

ब्रैस्ट की तरफ क्यों अट्रैक्ट होते हैं युवक

युवक युवतियों की ब्रैस्ट की तरफ आकर्षित क्यों होते हैं, इस का जवाब अकसर युवतियां खोजती रहती हैं, लेकिन इस पर हुए अध्ययन में कई कारण सामने आए हैं. आमतौर पर जब युवक युवतियों से बात करना शुरू करते हैं तो उन की निगाहें सीधी आंखों से टकराने के बजाय पहले उन की ब्रैस्ट पर जाती हैं. इस के बाद गरदन की ओर देखते हैं और फिर आंखों से आंखें मिलती हैं.

खास बात यह है कि ऐसी बौडी लैंग्वेज को युवतियां तुरंत समझ जाती हैं और उन्हें उस व्यक्ति की सोच के बारे में भी अंदाजा हो जाता है. लेकिन ऐसे में हर बार पुरुष की मानसिकता गलत नहीं होती. अध्ययन के मुताबिक युवक बातचीत की शुरुआत करते वक्त सब से पहले ब्रैस्ट की ओर देखते हैं. असल में युवकों को लगता है कि युवती की अट्रैक्टिव बै्रस्ट उस में सैक्स की फीलिंग बढ़ाती है.

अध्ययन के मुताबिक अगर ब्रैस्ट ज्यादा छोटी या बड़ी है तो युवक ज्यादा देर तक ब्रैस्ट की तरफ नहीं देखते. उन की नजर सैकंड से भी कम समय में ब्रैस्ट से हट जाती हैं. बात करते वक्त युवक की नजर तभी ब्रैस्ट की तरफ ज्यादा बार जाती है जब ब्रैस्ट सैक्सी और सुडौल हो. इसलिए युवतियां को यह बात बुरी लगती है कि वे अट्रैक्टिव नहीं हैं और कोई युवक उन के सामने उन की दोस्त को देखे वह भी सिर्फ अच्छी ब्रैस्ट की वजह से, तो ऐसे में जलन होना स्वाभाविक है.

यदि कपड़ों के बाहर से हलकी झलक दिख रही है तब भी बात करते वक्त युवक की नजर युवती की ब्रैस्ट पर एक से अधिक बार जाती है. ब्रैस्ट के आकर्षक होने पर युवक ठीक से संचार स्थापित नहीं कर पाते. उन का मन सिर्फ और सिर्फ ब्रैस्ट की ओर देखने को करता है.

अध्ययन में पाया गया कि यदि युवती दूर खड़ी है या फिर युवक की ओर नहीं देख रही है, तब भी 95त्न से ज्यादा युवकों की पहली नजर उस की ब्रैस्ट पर ही पड़ती है. पास आने पर भले ही नजर हट जाए. अध्ययन के मुताबिक 69त्न युवतियां अपनी ब्रैस्ट को उभरा हुआ बनाने की जुगत में लगी रहती हैं. वह भी सिर्फ इसलिए कि युवक उन की तरफ आकर्षित हो सकें.

गाइनोकोलोजिस्ट अंजली वैश्य का इस बारे में कहना है कि सच तो यह है कि वजह चाहे कुछ भी हो, लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ब्रैस्ट युवती का सब से आकर्षक अंग है जो न सिर्फ सुंदरता में चारचांद लगाता है, बल्कि युवती को सैक्सी लुक भी प्रदान करती है. लेकिन युवतियों में अकसर अपनी ब्रैस्ट के साइज को ले कर शिकायत रहती है और उस वजह से वे परेशान रहती हैं.

अगर आप भी अपनी ब्रैस्ट के साइज से खुश नहीं हैं तो ब्रैस्ट की सर्जरी करा सकती हैं, लेकिन अगर आप ऐसा नहीं चाहतीं तो अपनी ब्रैस्ट को इन नैचुरल तरीकों से भी बड़ा या छोटा कर सकती हैं वह भी बिना किसी सर्जरी के. आइए, जानें कैसे :

ब्रैस्ट बढ़ाने और सुडौल करने के लिए

ब्रैस्ट ऐक्सरसाइज करें

अगर ब्रैस्ट छोटी है और उस का आकार बढ़ाना है तो ब्रैस्ट मांसपेशियों को बढ़ाने के लिए पुशअप, डंबल से ब्रैस्ट प्रैस, वाल प्रैस, स्विंगिंग आर्म्स के साथसाथ घर पर गोमुखासन, वृक्षासन आदि ऐक्सरसाइज कर सकते हैं, क्योंकि इस से ब्रैस्ट बढ़ती है और सुडौल भी बनती है.

इस के अलावा ब्रैस्ट बढ़ाने के लिए आप दोनों हाथों में 5 किलो वजन लें और एक कुरसी पर बैठ जाएं, इसे लिफ्ट करें. ध्यान रखें कि हाथ आप के कंधों के बराबर हों. 5 से 10 सैकंड तक लगातार ऐसा करें. फिर शुरू की स्थिति में आएं और वापस ऐसा करें. हर दिन इस व्यायाम को करने की कोशिश करें.

सही ब्रा का चुनाव करें

अपनी ब्रैस्ट के अनुसार ही ब्रा का चुनाव करना चाहिए. गलत साइज की ब्रा ब्रैस्ट के लिए बहुत हानिकारक है. अगर ब्रैस्ट छोटी है तो उस के लिए पैडेड ब्रा पहनी जा सकती है और यदि ब्रैस्ट का साइज बड़ा है तो प्लेन ब्रा पहनें.

ब्रैस्ट की मसाज करें

ब्रैस्ट बढ़ाने के लिए आप घर पर ही मसाज कर के उस का आकार बढ़ा सकती हैं. ब्रैस्ट बढ़ाने वाले तेल की सहायता से भी मसाज करें या फिर सूखे हाथों से मसाज की जा सकती है. जैसे कि हाथ की हथेलियों को 6-10 मिनट तक आपस में रगड़ कर पहले हथेलियों में गरमी पैदा कर लें, उस के बाद ब्रैस्ट को ऊपर उठाते हुए चारों तरफ से मसाज करें. ऐसा कई महीने तक करें. इस से ब्रैस्ट के रक्त प्रवाह में और प्रोलिक्टन के उत्पादन में वृद्धि होगी, जिस के कारण ब्रैस्ट विस्तार हारमोन को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी और ब्रैस्ट स्वाभाविक रूप से बढ़ेगी.

खानपान का खयाल रखें

ब्रैस्ट छोटी होने का एक कारण शरीर में एस्ट्रोजन की कमी होना और टैस्टोस्टेरौन का अधिक मात्रा में होना भी है. ऐसे में आप को हारमोन संतुलित करना जरूरी है. आप अपने भोजन में चिकन, मछली, सोया से बने पदार्थ, सूप, सब्जियां, फलियां, अंडे, नट्स, तिल और सन के बीज भी शामिल कर सकती हैं. एस्ट्रोजन बै्रस्ट विकास में मदद करता है. प्रोटीनयुक्त फल खाने से मसल्स बिल्डअप होते हैं और फेमनिन कर्व साइज में आ कर सुगठित होते हैं.

ब्रैस्ट क्रीम

मार्केट में आज कई ऐसी क्रीम मौजूद हैं जो ब्रैस्ट के विकास का भरोसा दिलाती हैं. आप को ऐसी क्रीम चुननी चाहिए जो आप की त्वचा के लिए सही हो. यह क्रीम आप की ब्रैस्ट को सुडौल और आकर्षक बनाने में काफी उपयोगी सिद्ध होगी.

ब्रैस्ट पंप

ब्रैस्ट का आकार बढ़ाने के लिए ब्रैस्ट पंप को एक आसान तरीका माना जाता है. इस से धीरेधीरे त्वचा और वैक्यूम दबाव के कारण मुलायम ऊतकों में खिंचाव आता है और आप की ब्रैस्ट में ज्यादा उभार आता है.

ब्रैस्ट कम करने के लिए कार्डियो ऐरोबिक्स करें

आप को ब्रैस्ट कम करने के लिए शरीर से अतिरिक्त वसा कम करनी होगी. सही और सुडौल ब्रैस्ट के लिए एरोबिक्स करें. भारी वजन न उठाएं. यह आप की मांसपेशियों के भारीपन को कम नहीं करता बल्कि मांसपेशियों को टोन करता है. यदि आप जिम नहीं जाना चाहतीं तो घर पर ही कार्डियो ऐक्सरसाइज कर सकती हैं. जौगिंग ब्रैस्ट के आकार को कम करने के लिए अच्छी ऐक्सरसाइज है. तेज चलने से ब्रैस्ट से अतिरिक्त वसा कम होगी. साथ ही 25 मिनट तक ऐरोबिक्स करना भी ब्रैस्ट को कम करने में मददगार साबित होगा.

ऐक्सरसाइज

आप को दौड़ने, साइकिलिंग करने, सीढि़यां चढ़ने और स्विमिंग करने जैसी कैलोरी बर्न करने वाली ऐक्सरसाइज करनी चाहिए.

डांस

डांस स्टैप्स के सही चुनाव से आप ब्रैस्ट को कम कर सकती हैं. उन डांस स्टैप्स पर ध्यान दें जो ब्रैस्ट के हिस्सों में मूवमैंट पैदा करते हों.

अदरक

अदरक फैट को बर्न करने में मदद करता है. साथ ही इस में ज्यादा समय भी नहीं लगता. एक कप गरम पानी में पिसा हुआ अदरक और एक चम्मच शहद मिला कर पीएं. यह छाती के फैट को बर्न करने का सब से कारगर उपाय है.

ग्रीन टी

हर दिन कम से कम 2 बार ग्रीन टी पीने से जहां ब्रैस्ट वजन कम होता है,

वहीं कम करने में भी ग्रीन टी काफी प्रभावी है.

अलसी के बीज

अलसी के बीज में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है. यह शरीर में एस्ट्रोजन के स्तर को कम करने में मदद करता है. अगर आप एक गिलास अलसी के भिगोए हुए बीजों का सेवन करेंगी तो कुछ ही दिन में आप को मनचाहा परिणाम मिल जाएगा.

अंडे की सफेदी

सुडौल ब्रैस्ट के लिए अंडे की सफेदी सब से अच्छा प्राकृतिक उपाय है. एक अंडे की सफेदी में एक चम्मच प्याज का रस मिलाने से ब्रैस्ट में कठोरता आएगी और बै्रस्ट कम दिखने लगेगी.

नीम

नीम के मुट्ठी भर पत्ते उबालें, इन में थोड़ी हलदी और एक चम्मच शहद मिला लें. फिर इस में पानी मिला कर इस का सेवन करने से 2 हफ्ते में ही ब्रैस्ट कम होने लगेगी.

ब्रैस्ट को बड़ा दिखाने वाली ब्रा

ब्रैस्ट को बड़ा दिखाने के लिए मार्केट में पैडेड ब्रा की बहुत सी वैराइटी मिलती हैं जिन्हें पहन आप भी ब्रैस्ट को बड़ा दिखा सकती हैं.

नैकलाइंस को दिखाएं

ब्रैस्ट बड़ी दिखाने के लिए नैकलाइंस का काफी अहम रोल है. ऐसे में आप बड़े गले के टौप पहनें.            

खान नीलामी में हेराफेरी

जिस कोयला घोटाले की आंच में कांग्रेस सरकार भस्म हो गई थी, वह अभी बुझी नहीं है. 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने 204 खानों का पट्टा निरस्त कर दिया था और मोदी सरकार ने फैसला किया था कि अब बोली इंटरनैट से लगाई जाएगी. इंटरनैट भगवा सरकार के लिए एक नए मंत्र, यज्ञ, हवन व शास्त्र की तरह अवतरित हुआ है, जिस की आड़ में हर कुकर्म को भाग्य का फल कह कर करवाया जा सकता है और जिस में दक्ष होने के कारण इंटरनैटी पंडों की एक बड़ी फौज तैयार हो रही है.

कंपट्रोलर ऐंड औडीटर जनरल ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जिन 11 खानों को इंटरनैटी नीलामी के सहारे मोदी सरकार ने 2015 में अलौट किया था, उन में भारी हेराफेरी हुई है. खासतौर पर नियम ही ऐसे बनाए गए थे कि केवल अपने लोग ही इस नीलामी में भाग ले सकें. बड़े समूहों ने अपनी छोटी कंपनियों को एकसाथ बोली लगाने को कह दिया. कुछ बड़े समूहों ने आपसी सांठगांठ कर ली.

यह मामला तूल नहीं पकड़ रहा, क्योंकि भगवा भक्तों को तो इस सरकार में कोई खराबी उसी तरह नजर नहीं आती, जैसे रामायण, महाभारत, पुराणों, स्मृतियों के देवीदेवताओं के कुकर्मों में नजर नहीं आती. जो आराध्य है, वह हर दोष से ऊपर है. वह गलत हो ही नहीं सकता. जो गलती पकड़े, उसे ईशनिंदक या नया शब्द देशद्रोही कह कर चुप करा दो.

यह स्पष्ट है कि सरकार का ढर्रा आज भी वैसा ही है, जैसा 2014 से पहले था. देश में न कोई सामाजिक सुधार हो रहा है, न आर्थिक और न ही राजनीतिक. देश के हर हिस्से में भयंकर धुआं फैल रहा है, कहीं धर्म के नाम पर, कहीं जाति के नाम पर, कहीं गाय के नाम पर, कहीं आरक्षण के नाम पर. ऐसे में कोयले की खानों में भभक रहे भ्रष्टाचार की ओर नजर किस की जाएगी. कांग्रेसी तो बोलेंगे नहीं, क्योंकि उन के तो चेहरे वैसे ही कोयले से काले हैं, दूसरी पार्टियां भी शरीफ नहीं हैं.

कोयले की 34 खानों की अब तक नीलामी हुई है, जिन से 30 सालों में 2.85 लाख करोड़ मिलेगा. यह मिलेगा या नहीं, इस का हिसाब कौन रखेगा? लोगों ने एक पैसा नहीं लगाया है, यह इसी बात से जाहिर है कि 34 में से केवल 10 खानों पर काम शुरू हुआ है. अगर इसे विकास कहते हैं, तो सही है.

चाहत सरकारी नौकरी की

केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर दी हैं. सरकारी साहबों के मजे तो पहले ही थे, अब और ज्यादा हो गए हैं. ठीक है, सरकारी नौकरी के लिए काफी पढ़ाई करनी पड़ती है, काफी दौड़धूप करनी होती, काफी परीक्षाओं में बैठना होता है और न जाने कहांकहां से सिफारिशें लगानी होती हैं: पर फिर भी जो सरकार के बाबुओं से ले कर अफसरों को मिल रहा है, उस से साफ है कि क्यों 3 करोड़ लोग इन नौकरियों के लिए मरे जा रहे हैं.

जिस देश में एमए, बीए चपरासी की नौकरी के लिए अर्जी देते हैं, वहां साफ है कि सरकारी नौकरी के अलावा जीवन सुधारने का कोई तरीका नहीं है. लाखों लड़केलड़कियां हर साल मातापिता का हजारों रुपया कोचिंग क्लासों, अर्जियों के साथ लगने वाली फीस, परीक्षा सैंटरों पर जाने पर खर्च कर देते हैं. इस दौरान वे निठल्ले बैठे रहते हैं, वह अलग है. सब से बड़ी बात है कि हर सरकारी नौकरी में रिश्वत का मौका है. हर सरकारी कर्मचारी के पास ढेरों तरीके होते हैं आम आदमी को लूटने के. हम कहते हैं कि मुगलों ने देश को लूटा, अंगरेजों ने लूटा, पर असल लूट आज चल रही है जब देश का असली खजाना तीनचौथाई तो सरकारी शाहों पर खर्च होता है और एकचौथाई बरबाद होता है.

आम आदमी को लूट कर जमा किया गया टैक्स देश की सेवा कहलाई जाती है. कैसी सेवा? देश कहां से खुश है? न देश में पढ़ाई ठीक है, न शहरों की गलियां, न गांवों की नहरें, न अस्पताल, न अदालतें. देश ठीक है तो किस तरह से? ठीक है, देश चल रहा है, पर इसलिए कि लोग, आम लोग, जो सरकार में नौकर नहीं हैं, काम करने में लगे हैं. किसान, मजदूर, व्यापारी, तकनीकी मेकैनिक, सेवा देने वाले आदि रातदिन मेहनत करते है. उन्हें नहीं मालूम कि उन की मेहनत का कितना हिस्सा सरकार हड़प कर जाती है, पर जो बच जाता है उसी के लिए उन्हें काम करना पड़ता है, क्योंकि उसी से वे पेट भर सकते हैं, घर चला सकते हैं, परिवार को पाल सकते हैं.

सरकारी शाहों को वैसे वेतन आयोग का इंतजार नहीं करना पड़ता. उन का वेतन हर साल भी बढ़ता है और महंगाई होने पर भी बढ़ता है. अगर नहीं बढ़ता तो आम आदमी का नहीं बढ़ता. दशकों से किसानमजदूर का रहनसहन वैसे का वैसा ही है. हां, 2 कमीजें उस के पास आ गई हैं, पर उस के लिए जिम्मेदार नई तकनीक है, जिस ने कपड़ा सस्ता कर दिया. उसे जूते मिल गए, क्योंकि पैट्रो प्रोडक्ट से चप्पलजूते सस्ते हो गए. दवाइयां मिल गईं, क्योंकि तकनीक की वजह से 8-10 रुपए में ठीक हुआ जा सकता है. सरकार की फौज का इस्तेमाल तो सरकार जनता को लूटने के लिए करती है या जमा हुए पैसे को अपनों में बांटने में. सातवें वेतन आयोग की खुशी मनाई जाएगी, पर उन एक करोड़ लोगों का क्या होगा जो इस दीवाली का पैसा देंगे?

वुमन सैफ्टी ऐप्स 24×7

आज समाज चाहे कितना आगे बढ़ गया हो, कितना हाईटैक हो गया हो लेकिन युवतियों की सुरक्षा के मामले में पीछे ही है. आज जब युवतियां मल्टीनैशनल कंपनियों में काम कर देर रात घर लौटती हैं तो मन में डर बना रहता है. समाज में घटित घटनाएं हमें सचेत रहने को भी आगाह करती हैं.

भले ही खुद चाहे सही क्यों न हों या फिर चाहे कितने भी सैफ रास्ते से घर क्यों न लौटें लेकिन गंदी मानसिकता वालों की निगाह से नहीं बच सकती. लेकिन इस कारण घर से बाहर निकलना नहीं छोड़ा जा सकता. ऐसे में युवतियों को चाहिए कि वे खुद की सैफ्टी बरतें.

आज के हाईटैक दौर में वुमन सैफ्टी के लिए काफी उपाय हुए हैं. अब तक युवतियां जिस स्मार्टफोन का इस्तेमाल ऐंटरटैनमैंट के लिए या फिर सैल्फीज क्लिक करने के लिए करती रही हैं, अब उस का इस्तेमाल खुद की सेफ्टी के लिए कर के डर को हमेशा के लिए बाय कह सकती हैं. जिस के लिए जरूरी है आप के फोन में कुछ ऐप्स.

प्रस्तुत हैं सेफ्टी ऐप्स जो आप को हर मौके पर सुरक्षित रखने में कारगर भूमिका निभा सकते हैं.

आई फील सेफ ऐप

आई फील सेफ नामक ऐप युवतियों को सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में अहम रोल अदा करता है. इस ऐप को मोबाइल स्टैंडर्ड एलाइंस औफ इंडिया द्वारा बनाया गया है लेकिन इसे निर्भया ज्योति ट्रस्ट द्वारा संचालित किया जाएगा. हाल ही में एक कार्यक्रम में इस का लोकार्पण निर्भया की मां आशा देवी और पिता बद्रीनाथ सिंह ने किया.

इस ऐप की खासियत यह है कि यह बिना नैटवर्किंग या बिना सिम के भी काम करता है और पूरे भारत में इस का लाभ उठाया जा सकता है. इसे डाउनलोड करने में कोई खर्च भी नहीं आता.

आप को सिर्फ इतना करना है कि पहले इसे अपने प्लेस्टोर से डाउनलोड कर लें, जिस से आप को फोन में एक वर्चुअल बटन मिलेगा, जिसे ‘पावर का सैफ्टी बटन’ कहते हैं, को 5 बार दबा कर अलार्म संचालित करना होगा, जिस से यह ऐप खतरे की स्थिति में खुद ही 100 नंबर पर फोन कर के पीडि़त व्यक्ति की बिलकुल सही जानकारी देगा. सिर्फ एक बार सूचित कर के अपने फर्ज से इतिश्री नहीं करेगा बल्कि हर 30 सैकंड में स्थान को ट्रैक करते हुए इस की सूचना यूजर के इमरजैंसी कौंटैक्ट्स को देने के साथसाथ इमरजैंसी कौल सैंटर टीम को भी देगा जिस से पीडि़त को समय रहते हर संभव मदद पहुंचाई जा सके.

विद यू ऐप

खतरा आप के सामने खड़ा है ऐसे में आप फोन से कौंटैक्ट नंबर निकाल कर किसी को फोन करेंगे तब तक बहुत देर हो जाएगी. ऐसी स्थिति से निबटने के लिए विद यू ऐप आप का साथ निभाएगा. क्योंकि इस का पावर बटन 2 बार दबाने पर अलर्ट मैसिज जैसे ‘आई एम इन डैंजर’ हर 2 मिनट में आप के रजिस्टर्ड इमरजैंसी नंबर्स को मैसिज विद करंट लोकेशन के साथ भेजेगा, जिस से आप खतरे से बच सकती हैं.

स्क्रीम अलर्ट

यह फ्री सैफ्टी ऐप है जो ऐसा कार्य करता है कि सुनने वाला तुरंत अलर्ट हो जाए और पीडि़त व्यक्ति की मदद के लिए हाथपैर दौड़ाने शुरू कर दे. जैसे ही आप इमरजैंसी की स्थिति में इस का पावर बटन दबाएंगी वैसे ही महिला की आवाज में सुनने वाले को चिल्लाने की आवाजें आनी शुरू हो जाएंगी, जो आप खतरे में है का मैसिज देने के लिए काफी है.

स्मार्ट 24×7

स्मार्ट 24×7 ऐप को युवतियों और वृद्धों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया गया है, जिसे कई राज्यों की पुलिस ने भी कारगर माना है. यह ऐप संदिग्ध परिस्थिति में इमरजैंसी कौंटैक्ट्स को पैनिक अलर्ट भेजता है. साथ ही इस में वौइस रिकौर्ड और फोटोज ले कर पुलिस के साथसाथ इमरजैंसी कौल सैंटर को भी भेजने की सुविधा रहती है. इस में यूजर को सिर्फ पैनिक बटन दबा कर उसे कौन सी सर्विस चाहिए उसे चुन कर अपनी सहमति दर्ज करनी होती है.

शेक टू सेफ्टी

भले ही इस ऐप का नाम थोड़ा बड़ा है लेकिन यह इस्तेमाल करनें में उतना ही आसान है. इस में यूजन को सिर्फ अपने स्मार्टफोन को हिलाना या फिर पावर बटन को 4 बार दबाना होगा जिस से एसओएस टैक्स्ट या फिर रजिस्टर्ड नंबर्स पर कौल चली जाएगी. यह स्क्रीन लौक होने पर भी वर्क करेगा. लेकिन इस में आप को फोन को हिलाने या फिर पावर बटन दबाने के औप्शन को चुनना होगा.

पुकार

यह करंट लोकेशन के साथ इमरजैंसी कौंटैक्ट्स को थोड़ीथोड़ी देर बाद एसएमएस अलर्ट भेजता रहता है. और यह भी बताता है कि फोन साइलैंट पर होने के कारण उस अलर्ट मैसिज पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

सेफ्टीपिन

जैसा ऐप का नाम है वैसा ही ऐप का काम है यानी यह ऐप युवतियों को सुरक्षा प्रदान करता है. इस में सभी महत्वपूर्ण फीचर्स जैसे जीपीएस ट्रेकिंग, इमरजैंसी कौंटैक्ट नंबर्स, सेफ जगहों की जानकारी, मानचित्र के माध्यम से पिन्स सेफ और अनसेफ जगहों को दर्शाती है आदि शामिल होते हैं. इस से खतरों को टाला जा सकता है.

सर्किल औफ 6

सर्किल औफ 6 ऐप का मतलब अपने इस सर्किल में 6 विश्वासयोग्य फ्रैंड्स को ऐड करना होगा जो मुसीबत की घड़ी में आप को बाहर निकाल सकें. बस इसे औन करने की देर होगी और यह औटोमैटिकली एसएमएस अलर्ट उन्हें भेज देगा. तो हुआ न यह ऐप बड़े काम का.

आई एम शक्ति ऐप

शक्ति ऐप का खतरे की स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए आप की 2 मिनट के भीतरभीतर 5 बार पावर बटन को प्रैस करना होगा जिस से अलर्ट एसएमएस जीपीएस लोकेशन के साथसाथ आप के इमरजैंसी कौंटैक्ट्स के पास पहुंच जाए.

हिम्मत

हिम्मत से बढ़े चलो चाहे कितनी भी बाधाएं आएं, डरो नहीं. यह बात हिम्मत ऐप के संदर्भ में सटीक बैठती है, क्योंकि जिस युवती के मोबाइल में यह ऐप डाउनलोड होता है वह घबराती नहीं बल्कि मुकाबला करती है.

युवतियों की सुरक्षा के लिए इस ऐप को बनाने की सिफारिश दिल्ली पुलिस ने की थी. इसलिए अगर आप इस ऐप को यूज करना चाहते हैं तो आप को दिल्ली पुलिस की वैबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा और जैसे ही रजिस्ट्रेशन पूरा होगा वैसे ही आप को ओटीपी यानी वनटाइम पासवर्ड मिलेगा जिसे आप को ऐप को डानलोड करने के समय मांगे गए नंबर में भरना होगा.

इस से जेसे ही यूजर मुसीबत की घड़ी में बटन दबाएगा वैसे ही उस की लोकेशन, औडियोवीडियो डायरैक्ट दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी जिस से पुलिस वहां पहुंच पाएगी.

इस तरह इन ऐप्स का यूज कर के आप अपनी सुरक्षा खुद कर सकती हैं.

सब पर चलाएं मैजिक: सनी लियोनी

सफलता के लिए सैक्सुअली आकर्षण का होना जरूरी है. यह बात केवल ग्लैमर वर्ल्ड के लिए ही नहीं बल्कि हर क्षेत्र में इस का असर देखने को मिलता है. हर कोई चाहे वह पुरुष हो या महिला इस की चाहत रखता है. यही सोच फिल्म अभिनेत्री सनी लियोनी भी रखती हैं. 2011 से बौलीवुड में कदम रख चुकी इस अभिनेत्री ने अपनी एक खास जगह बना ली है. उन्हें आज हर तरह की फिल्म और टीवी शो में काम करने का मौका मिल रहा है. वे खुद को धन्य मानती हैं कि आज उन का नाम हर निर्मातानिर्देशक जानता है. उन की इस कामयाबी के पीछे उन का सैक्सी लुक है, जिस की मांग आजकल फिल्मकारों को होती है.

कनाडा के ओंटारिओ में जन्मीं सनी लियोनी का असली नाम करनजीत कौर वोहरा है. सनी के पिता चंडीगढ़ के पंजाबी सिख हैं और मां हिमाचल प्रदेश के सिरमौर की हैं. बचपन से ही सनी चुस्त थीं, हमेशा युवकों के साथ हौकी खेलती थीं. आइस स्केटिंग उन्हें काफी पसंद था. जब करनजीत 13 वर्ष की थीं तब उन के मातापिता अमेरिका के कैलिफोर्निया में जा कर बस गए. उन की पढ़ाई वहीं पूरी हुई. सनी की इच्छा थी कि वे नर्स बनें. डाक्टर के काम से वे नर्स के काम को ज्यादा अहम मानती थीं. इस के लिए उन्होंने नर्सिंग का कोर्स भी किया. कोर्स के दौरान अपनी फ्रैंड के कहने पर वे मौडलिंग के लिए एक फोटोग्राफर से मिलीं और एक मैगजीन के कवर पर भी स्थान प्राप्त कर लिया. यहीं से उन की पोर्न की नींव पड़ी. सनी ने 21 साल की उम्र में पोर्न इंडस्ट्री में कदम रखा. मैगजीन के कवर पेज पर फोटो प्रकाशित होने के बाद सनी के पास औफर्स की भरमार लग गई. अमेरिका के सब से बडे़ पोर्न प्रोडक्शन हाउस से सनी को 3 साल का ऐग्रीमैंट मिला. साथ ही उन्हें पोर्न फिल्म इंडस्ट्री में भी ऐंट्री मिली.

उस दौरान सनी 35 पोर्न फिल्मों की हीरोइन बनीं और 25 पोर्न फिल्मों का उन्होंने निर्देशन किया. शुरूशुरू में वे केवल समलैंगिक पोर्न फिल्में ही किया करती थीं, जिन में वे सिर्फ युवतियों के साथ अभिनय करती थीं, लेकिन बाद में उन की पौपुलैरिटी देख कर उन्हें पुरुषों के साथ भी फिल्में करने के औफर मिलने लगे. अंत में वे पुरुषों के साथ फिल्म करने को राजी हुईं. उस ने मैट एर्रिक्सन के साथ कुछ फिल्में कीं.

मैट काफी दिनों तक उन के मंगेतर भी रहे, लेकिन जब उन्होंने दूसरे पुरुषों के साथ पोर्न फिल्में करनी शुरू कीं तो उन का रिश्ता टूट गया और सनी अब अपना प्रोडक्शन हाउस चला रहे डेनियल वीबर से मिलीं, उन के साथ कई फिल्में कीं और आज वे उन के पति हैं, जो उन का पूरा काम देखते हैं. सनी भारत बिग बौस टीवी शो के जरिए आईं, जहां वे 49 दिन रहीं. वहीं निर्मातानिर्देशक महेश भट्ट ने उन्हें फिल्म ‘जिस्म टू’ का औफर दिया, जिसे उन्होंने तुरंत स्वीकार कर लिया. यहीं से उन का बौलीवुड का सफर शुरू हुआ. इस के बाद ‘रागिनी एमएमएस टू’, ‘एक पहेली लीला’, ‘मस्तीजादे’, ‘वन नाइट स्टैंड’ आदि फिल्मों में काम किया. उन्हें हिंदी बोलना और समझना अच्छी तरह आता है, वे यूथ की पसंदीदा ऐक्टै्रस हैं, इसलिए ‘स्प्लिटविला 9’ में एक बार फिर शो होस्ट कर रही हैं, उन से मिल कर बात करना रोचक था. पेश हैं, सनी से हुई बातचीत के मुख्य अंश :

इस शो से जुड़ने की वजह और आप का सैक्सी लुक कितना आकर्षित करता है?

मुझे इस शो की थीम पसंद आई. मैं अपने सैक्सी लुक पर अधिक ध्यान नहीं देती, लेकिन इसी लुक की वजह से मैं इस शो का हिस्सा बनी हूं. इस शो के सभी युवक और युवतियां गुडलुकिंग हैं. सारे युवक सिक्स पैक वाले हैं. सब की अच्छी बौडी है. युवतियां भी सुंदर हैं.

लव में शारीरिक आकर्षण का होना कितना आवश्यक होता है?

सब से पहले आप उस की पर्सनैलिटी को ही देखते हैं. उस की कदकाठी, चेहरा, हेयरस्टाइल सबकुछ. उस के बाद ही उस से प्यार होता है. अगर वही सही नहीं है तो आकर्षण कैसा?

आप ने हिंदी कैसे सीखी, जबकि आप विदेश में पलीबढ़ीं?

मैं ने हिंदी का टीचर रखा था. मेरे लिए हर कोई ट्यूटर है. स्टाफ से ले कर टीम के सभी लोगों से मैं कुछ न कुछ हमेशा सीखती हूं.

विदेश और इंडिया की फिल्म इंडस्ट्री में क्या अंतर पाती हैं?

बहुत अंतर है. दोनों एकदम अलग हैं. यहां मुझे अधिकतर काम अपनी फिगर पर मिल रहा है, जबकि अमेरिका में मेरी अलग पहचान थी. मैं ने कभी सोचा भी नहीं था कि मुझे यहां इतना काम मिलेगा. मेरे लिए यहां काम करना ‘ड्रीम कम ट्रू’ वाली बात है.

अब तक की जर्नी कैसी रही?

5 साल की इस जर्नी में बहुत सारे उतारचढ़ाव आए, जिन से मैं ने काफी कुछ सीखा. लोग मेरी पिछली जिंदगी के बारे में पूछते हैं. लेकिन उस दौरान मुझे जो काम मिला मैं ने कर्मठता से उसे पूरा किया. तब मुझे वह ठीक लगा. अब नहीं लगता इसलिए कुछ अलग करने की कोशिश कर रही हूं. जब आप सैलिब्रिटी होते हैं तो आप की जिंदगी एक खुली किताब होती है. आप कुछ भी छिपा नहीं सकते. मैं एक बात और कहना चाहती हूं कि सैक्सुअली अट्रैक्टिव होने के साथसाथ अगर आप नौलेज भी अच्छीखासी रखते हैं तो अधिक से अधिक लोग आप के दीवाने बन जाएंगे.

यहां की संस्कृति से आप कैसे सामंजस्य बैठाती हैं?

मैं रियल लाइफ में पंजाबी हूं, मुझे यहां के संस्कार पता हैं. यहां का फूड मैं बहुत पसंद करती हूं. काम के समय कुछ भी खा लेती हूं. पर फ्राइडे व सैटरडे को पिज्जा नाइट या इटालियन फूड का दिन होता है, जबकि संडे को साधारण खाना खाती हूं. मेरे घर का माहौल हमेशा पंजाबी रहा है. मेरे घर में हमेशा मेरी मां पंजाबी खाना बनाती थीं.

एडल्ट फिल्मों से फैमिली फिल्मों में आने की अपनी इमेज को आप कैसे देखती हैं?

मैं ने कभी अपनी इमेज को बदलना नहीं चाहा. मुझे अपने जीवन से प्यार है. मैं जो भी हूं उस में खुश हूं. मैं ने हर तरह के अभिनय किए. अभी मेरी सारी फिल्में सीरियस परफौर्मैंस वाली हैं, एडल्ट नहीं. अगर दर्शकों को वे पसंद आएंगी तो मैं वैसी और भी फिल्में करूंगी.

एडल्ट फिल्मों में धर्म की दखलंदाजी कितनी होती है, फिर चाहे वह फिल्म विदेशी हो या स्वदेशी?

हर जगह सैंसरशिप है. यहां पर सवा अरब लोग हैं, इसलिए आवाज तेज होती है. विदेश में भी लोग हंगामा करते हैं और मैं इसे सही मानती हूं. अगर आप की उम्र 18 वर्ष है तो आप एडल्ट फिल्म अवश्य देखें, क्योंकि लाइफ की नैचुरल चीजों को जानना भी जरूरी है. लेकिन ये फिल्में समाज को गलत राह पर ले जा रही हैं, इसे मैं नहीं मानती, क्योंकि शोर मचाने वाले लोग ही ऐसी फिल्में अधिक देखते हैं.

आप की यंग जनरेशन से कितनी प्रतियोगिता है, जबकि आप की उम्र अब बढ़ रही है?

मैं ने हर काम उलटा किया और अब इंडस्ट्री में आई हूं लेकिन काम मिल रहा है. मेरे हिसाब से महिला को खुद तय करना पड़ता है कि कब वह शादी करे, कब बच्चा पैदा करे और कब काम करे. आज की जनरेशन यही चाहती है और करती भी है. लिमिटेशंस क्यों हों कि हम यह करें और वह न करें. ये सब हम खुद तय करते हैं. मैं ने शादी की और अब फिल्में कर रही हूं. मेरी किसी से कोई प्रतियोगिता नहीं है.

क्या बौलीवुड में आप की कोई फ्रैंड है?

मैं अभी यहां कुछ ऐसे लोगों से मिली हूं, जिन से मैं पहले कभी मिली नहीं थी. इन में प्रियंका चोपड़ा खास हैं.

आप का ड्रीम क्या है?

मेरे फ्रैंड्स व फैमिली स्वस्थ और सुरक्षित रहें और मैं अच्छा काम कर के सब का दिल जीतूं. मेरी निर्देशक संजय लीला भंसाली के साथ काम करने की इच्छा है.

कुछ मलाल रह गया है?

व्यक्तिगत रूप से ऐसा कुछ भी नहीं है. मैं ने जो भी किया अपनी मरजी से किया. मुझे लगा कि उस समय वही सही था. मुझे किसी ने यह नहीं कहा कि आप को यही करना है. मेरी लाइफ बहुत अच्छी है और मैं इस से खुश हूं.

अभी आप को शाहरुख खान के साथ फिल्म ‘रईस’ में एक गाना फिल्माने का मौका मिला. क्या इसे आप अपने कैरियर का अच्छा समय मानती हैं?

अवश्य, क्योंकि मैं न तो फिल्म इंडस्ट्री से थी और न ही यहां कोई मेरा अपना है. ऐसे में जब मुझे शाहरुख खान का फोन आया तो मैं चौंक गई और पूछने लगी कि क्या आप सही में सनी को ही फोन लगा रहे हैं? मुझे उन के साथ काम करने का मौका पा कर अच्छा लगा. अभी अरबाज खान के साथ भी एक फिल्म कर रही हूं.

कोई दूसरी लिसा नहीं बन सकती: लिसा हेडन

अपने बोल्ड अंदाज के लिए मशहूर हीरोइन लिसा हेडन एक मौडल और भरतनाट्यम डांसर हैं. उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत फिल्म ‘आयशा’ से की थी, जिस का औफर अनिल कपूर ने उन्हें एक रैस्टोरैंट में देख कर दिया था. इस के बाद उन्होंने फिल्म ‘क्वीन’ में सिंगल मदर का किरदार निभाया था. इस फिल्म में उन की ऐक्टिंग की खूब तारीफ हुई थी. फिर उन्होंने फिल्म ‘शौकीन’ में काम किया और फिर ‘हाउसफुल 3’ में दिखाई दीं.

पेश हैं, लिसा हेडन से हुई बातचीत के खास अंश:

फिल्म ‘हाउसफुल 3’ में इतने सारे सितारों के साथ काम करने का तजरबा कैसा रहा?

बहुत अच्छा था, लेकिन पहली बार इतने कलाकारों के साथ एक कौमेडी फिल्म में काम करना मेरे लिए बड़ी बात थी. मेरी जिम्मेदारी इस में ज्यादा थी, क्योंकि मुझे सब के साथ सही तालमेल के साथ ऐक्टिंग करनी थी. मैं ने नरगिस और जैकलीन के साथ अच्छा समय बिताया था.

आप को ऐसा नहीं लगा कि इतने बड़े कलाकारों में आप कहीं छिप न जाएं?

मुझे फिल्म की सारी बातें पता थीं. सभी कलाकारों के लिए इस में करने के लिए कुछ न कुछ था, क्योंकि यह 6 कलाकारों की फिल्म थी. यह एक टीम की फिल्म थी, कोई ज्यादा या कोई कम नहीं.

कौमेडी करना आप को कितना पसंद है?

मुझे कौमेडी करना बहुत पसंद है. इसे करने में मजा आता है. मेरे लिए यह एक नया जोनर है. मेरे हिसाब से कौमेडी हर दुखी इनसान को सुकून देती है, उसे हंसा सकती है. आज के माहौल में यह बहुत जरूरी है.

कोई फिल्म आप को आगे बढ़ने में कितना सहयोग देती है?

फिल्म ‘क्वीन’ से पहले लोग यह नहीं समझ पाते थे कि मैं ऐक्टिंग कर पाऊंगी. फिल्म ‘क्वीन’  मेरे लिए एक मौका था यह दिखाने का कि मैं केवल एक मौडल ही नहीं, बल्कि कलाकार भी हूं. फिल्म ‘आयशा’ में मेरा किरदार बहुत छोटा था. इस फिल्म में मुझे अपना हुनर दिखाने का मौका नहीं मिला. वैसे, ‘क्वीन’ ही मेरी ऐसी पहली फिल्म थी, जिस में मैं अपनेआप को साबित कर पाई. उस के बाद लोगों ने यह सोचना बंद कर दिया कि मैं उन की फिल्म में काम कर पाऊंगी या नहीं. आज मैं यह सोचती हूं कि मुझे कोई भी किरदार मिले, मैं अच्छा काम करूंगी.

आप बौलीवुड के कौनकौन से डायरैक्टरों के साथ काम करना चाहती हैं?

लिस्ट बहुत बड़ी है. मेरे हिसाब से एक अच्छा डायरैक्टर एक अच्छे कलाकार को जन्म देता है. मैं करन जौहर, साजिदफरहाद, विशाल भारद्वाज, जोया अख्तर वगैरह के साथ काम करना चाहती हूं.

बौलीवुड में गौडफादर न होने पर काम मिलना कितना मुश्किल होता है?

मेरे हिसाब से अगर आप अच्छा काम करते हैं और अगर वह किरदार आप के ऊपर फिट बैठता है, तो कोई और उस रोल को नहीं कर सकता. कोई दूसरी लिसा हेडन नहीं बन सकती.

आप की खूबसूरती का क्या राज है?

जल्दी सो जाना और खूब पानी पीना. मेरी जिंदगी का मूल मंत्र है कि माइंड को फ्री कर के काम करें.

साल भर लीजिए गन्ने के रस का स्वाद

गन्ने का रस आमतौर पर गन्ने के सीजन में ही मिलता था. सड़कों पर ठेला गाडि़यों पर इस को बेचने का काम होता है. गन्ने का रस निकालने वाली मशीनें कई तरह की होती हैं. इन में कुछ को बिजली की मोटर से चलाया जाता है, तो कुछ को हाथ से भी चलाया जाता है. गन्ने को ठीक तरह से धोने के बाद मशीन में डाला जाता है, जिस से उस का रस निकलता है. गन्ने के रस को और स्वादिष्ठ बनाने के लिए उस में नीबू, पुदीना और काला नमक मिलाया जाता है. अब सड़कों की जगह पर जूस की बड़ीबड़ी दुकानों पर भी गन्ने का रस मिलने लगा है. जूस की बड़ी दुकानों में गन्ने को छील कर उस का जूस निकाला जाता है. अब यह साल भर मिलने लगा है. सड़कों पर जो गन्ने का रस 5 से 10 रुपए प्रति गिलास मिलता है, बड़ी जूस की दुकानों पर वह 40 रुपए प्रति गिलास बिकता है.

कई गन्ना किसान अब अपने खेत में लंबे समय तक गन्ना रखते हैं ताकि बेमौसम गन्ना बेच कर मुनाफा कमा सकें. रसदार प्रजाति के गन्ने की मांग जूस के लिए सब से ज्यादा होती है. गन्ने का जूस बेचने के लिए केवल जूस निकालने की मशीन, गन्ना और एक छोटी अच्छी जगह की जरूरत होती है. लखनऊ में ‘गन्नेवाला’ नाम से जूस की एक दुकान है, जिस में साल भर गन्ने और दूसरी किस्म के जूस मिलते हैं. दरअसल, समय के साथसाथ लोगों को गन्ने के जूस के फायदे पता चलने लगे हैं, जिस की वजह से साल भर गन्ने के जूस की मांग रहती है. केवल एक जगह पर ही नहीं, शहर के दूसरे हिस्सों में भी बेमौसम गन्ने के जूस की खपत होती है. ऐसे में गन्ने के जूस का कारोबार बढ़ने लगा है, जिस से गन्ना किसानों को ज्यादा फायदा होने की संभावना बढ़ गई है. अब गन्ने की खेती केवल चीनी, खांडसारी और गुड़ पर ही निर्भर नहीं रह गई है. गन्ने का जूस नई संभावना के रूप में देखा जा रहा है. जानकार लोगों का कहना है कि गन्ने का जूस जिस तरह से फायदेमंद होता है, उस से इस का प्रचलन दिनोंदिन बढ़ता जाएगा. यह एक अच्छे कारोबार के रूप में उभरेगा. गन्ने के रस को बेचने में दोगुना मुनाफा होता है. ऐसे में इस को बेचने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है.

थकान से भरे दिन में 1 गिलास गन्ने का रस मिल जाए तो आप को स्वाद भरी ताजगी मिल जाती है. गन्ने का रस बहुत ही सेहतमंद और गुणकारी पेय है. इस में कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन, मैग्नीशियम और फास्फोरस जैसे जरूरी पोषक तत्त्व पाए जाते हैं. इन से हड्डियां मजबूत बनती हैं और दांतों की समस्या भी कम होती है. गन्ने के रस के ये पोषक तत्त्व शरीर में खून के बहाव को भी सही रखते हैं. वहीं इस रस में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों से लड़ने की ताकत भी होती है. 

गन्ने का रस पीने के फायदे

गन्ने के रस में मौजूद कैल्शियम, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम की मात्रा इस के स्वाद को क्षारीय मतलब खारा करती है. इस रस में मौजूद ये तत्त्व कैंसर से बचाते हैं. गन्ने का रस कई तरह के कैंसर से लड़ने में मददगार है. प्रोस्टेट और स्तन कैंसर से लड़ने में भी इसे कारगर माना जाता है.

हाजमा ठीक रखता है

गन्ने के रस में पोटैशियम की अधिक मात्रा होने की वजह से यह शरीर के पाचनतंत्र के लिए बहुत फायदेमंद है. यह रस हाजमा सही रखने के साथसाथ पेट में संक्रमण होने से भी बचाता है. गन्ने का रस कब्ज की समस्या को भी दूर करता है.

मक्का थ्रैसर हो या मल्टीक्रौप थ्रैसर गहाई से करें कमाई

फसलों की गहाई में आज थ्रैसर की खास अहमियत है. जो काम आम तरीके से करने में काफी समय लगता था, वही काम अब मशीनों ने आसान कर दिया?है. आज बाजार में कई प्रकार के मल्टीक्रौप थ्रैसर मौजूद हैं, जिन के पुर्जों में हलका सा बदलाव कर के या चलाते समय उन को इस्तेमाल करने की तकनीक को थोड़ा हेरफेर कर के कई अलगअलग फसलों की गहाई आसानी से की जा सकती?है. मक्का, सोयाबीन,?ज्वार, बाजरा, सरसों, मूंग, चना, उड़द वगैरह फसलों की गहाई अच्छी क्वालिटी वाले थ्रैसर से की जा सकती है.

अगर हम अच्छी मशीन इस्तेमाल नहीं करते?हैं, तो हमें अपने अनाज में टूटफूट ज्यादा मिलेगी या साथसुथरा अनाज नहीं मिलेगा, इसलिए अनाज में टूटफूट से बचाव के लिए गहाई मशीन यानी थ्रैसर मशीन का सही चयन करना जरूरी है. कुछ मशीन निर्माता कुछ खास फसलों के लिए खास थ्रैसर भी बनाते हैं. आज तमाम कंपनियां थ्रैसर बना रही हैं, जिन में साइको एग्रोटेक कंपनी योद्धा के नाम से थ्रैसर बना रही है. इस के अलावा अमर मक्का थ्रैसर, ग्रिल एग्रो आदि अनेक कंपनियां मक्का थ्रैसर व मल्टी क्रौस थ्रैसर बना रही हैं. कुछ कृषि यंत्र निर्माता अलगअलग अनाज के लिए खास थ्रैसर भी बनाते हैं. चूंकि ऐसे थ्रैसर किसी खास फसल के लिए ही बनाए जाते हैं, तो जाहिर है कि उन से बेहतर नतीजे मिलेंगे. आइए जानते?हैं मक्का थ्रैसर में बारे में, जिसे खासतौर पर मक्के की गहाई के लिए बनाया गया है.

प्रकाश मक्का थ्रैसर

इस थ्रैसर के बाबत हमारी बात अनिल कुमार गर्ग से हुई जिन्होंने बताया, ‘हम किसानों के लिए कई कृषि यंत्र तैयार कर रहे?हैं. आज के समय में ज्यादातर किसान हमारे द्वारा बनाए गए कृषि यंत्रों का ही इस्तेमाल कर रहे हैं. यह थ्रैसर हम ने खासतौर से मक्के की गहाई के लिए बनाया है. इसे 45 हार्सपावर के किसी भी ट्रैक्टर के साथ जोड़ कर चलाया जा सकता?है. इसे 35 हार्सपावर के ट्रैक्टर के साथ भी चला सकते हैं, लेकिन तब अनाज की गहाई की कूवत कम हो सकती?है.

‘हमारे इस प्रकाश मक्का थ्रैसर की कीमत 1 लाख 20 हजार रुपए से 1 लाख 30 हजार रुपए तक?है. 1-2 साल में ही कमाई कर के यह थ्रैसर अपनी कीमत वसूल कर देत है. ‘हमारे इस थ्रैसर की मांग उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र जैसे तमाम राज्यों में है. कोई भी किसान इस थ्रैसर के बारे में जानने के लिए मोबाइल नंबर 9897591803 पर फोन कर सकता है.’

गणेश राज थ्रैसर

गणेश एग्रो कंपनी के पास  गेहूं, मक्का, ज्वार, जीरा, धनिया, सरसों, चना, सौंफ, अरंड, सोयाबीन, ग्वार व चावल आदि की गहाई के लिए कई मौडल मौजूद हैं. कंपनी का कहना?है कि उस के पास हैवी चैसिस व हैवी फ्लाई व्हील के साथ थ्रैसर मौजूद हैं. दानेदाने की शुद्धता की गारंटी है. आप गणेश एग्रो कंपनी में?टौल फ्री नंबर 18001200313 पर या 912764273442, 267446 पर फोन कर के अधिक जानकारी ले सकते हैं.

अमर मल्टी क्रौप थ्रैसर 

35 से 40 हौर्स पावर और अधिक कूवत वाले ट्रैक्टर से चलने वाले थ्रैसर इस कंपनी में भी मौजूद हैं. प्रोडक्ट क्वालिटी के लिए इस कंपनी को साल 1993 में राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है. कंपनी में कई प्रकार के थ्रैसर मौजूद हैं, जिन की कीमत 20 हजार रुपए से ले कर सवा लाख रुपए तक?है. ये थ्रैसर 5 हौर्स पावर मोटर से ले कर 80 हौर्स पावर तक के ट्रैक्टर के साथ चलाए जा सकते हैं. इस कंपनी के जगदेव सिंह का कहना?है कि उन के मल्टी क्रौप थ्रैसर से धान को छोड़ कर सभी फसलों की गहाई की जा सकती है. थ्रैसर के साथ बुकलेट दी जाती है, जिस में पूरी जानकारी होती?है कि किस अनाज के लिए थ्रैसर से किस तरह से काम लेना है. थ्रैसर में क्याक्या बदलाव करना है, यह जानकारी भी दी होती है. ज्यादा जानकारी के लिए अरविंद सिंह के मोबाइल नंबर 09780000067 और जगदेव सिंह के मोबाइल नंबर 098726579 और बलदेव सिंह के मोबाइल नंबर 09872018040 पर बात की जा सकती है.

पशु बीमा योजना : किसानों का हुआ मोहभंग

सरकार द्वारा दी जा रही छूट कम कर दिए जाने और किस्त पर सर्विस टैक्स लगाने से महंगे पशुओं का बीमा कराने से किसानों व पशुपालकों का मोहभंग हो गया है. इस के चलते सरकार द्वारा पशु अस्पतालों को दिए गए सालाना टारगेट भी कई जगहों पर पूरे होते नजर नहीं आ रहे हैं. पशु सेहत महकमा के अफसरों द्वारा किसानों को योजना के फायदे नहीं बताने से भी पशुपालक व किसान पशुओं का सरकारी बीमा कराने से कतरा रहे हैं.

पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने पशुधन बीमा योजना शुरू की थी. 2 साल पहले तक किस्त की राशि पर 75 फीसदी तक छूट सरकार द्वारा दी जाती थी. छूट ज्यादा होने के कारण किसान अपने पशुओं का बीमा कराने के लिए आसानी से तैयार हो जाते थे. महंगे पशुओं की मौत होने पर क्लेम का पैसा मिलने के कारण किसानों को काफी राहत भी मिलती थी. लेकिन अब सरकार ने किस्त पर मिलने वाली रकम को 75 फीसदी से घटा कर 50 फीसदी कर दिया है.

इस के अलावा किस्त के पैसे पर भी बीमा कंपनी द्वारा 4 फीसदी से बढ़ा कर 14 फीसदी तक सर्विस टैक्स लगा दिया गया है. इतना ही नहीं. बीमा कंपनी द्वारा किसानों से किस्त तो पूरी वसूली जाती है, लेकिन किसानों को बीमा कराने के लिए तैयार पशु चिकित्सकों को ही करना पड़ता है. इस के लिए उन्हें किसी तरह का कमीशन भी बीमा कंपनी की ओर से नहीं दिया जाता है. यही वजह है कि पशु डाक्टर भी अब किसानों व पशुपालकों के पशुओं का बीमा कराने के मामले में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. नतीजा यह है कि इस से बीमा का टारगेट ही पूरा नहीं हो पा रहा है.    

पशुधन बीमा योजना का मकसद

पशुधन बीमा योजना सरकार द्वारा चलाई जा रही एक योजना है, जो 10वीं पंचवर्षीय योजना के साल 2005-06 व 2006-07 में प्रयोग के तौर पर देशभर के 100 जिलों में लागू की गई थी. इस योजना की शुरुआत  किसानों व पशुपालकों को पशुओं की मौत के कारण हुए नुकसान से सुरक्षा मुहैया कराने व पशुधन व उन के उत्पादों के गुणवत्तापूर्ण विकास के लिए की गई थी. योजना के तहत दूध देने वाले मवेशियों का बीमा उन की उस समय की बाजार की कीमत के आधार पर किया जाता है. बीमा का पैसा 50 फीसदी तक दान दिया जाता है. अनुदान का पूरा पैसा केंद्र सरकार देती है.

कीमती पशुओं का नहीं होता है बीमा

ध्यान देने वाली बात तो यह है कि बीमा कंपनी के अनुसार 60000 रुपए कीमत तक के ही पशुओं का बीमा किया जाता है. जबकि वर्तमान में भैंसों की कीमत 60000 रुपए से ले कर 1 लाख रुपए से भी ज्यादा है. सरकारी बीमा कराने से मोहभंग होने का एक बड़ा करण यह भी है. गौरतलब है कि किसान अधिकतर केवल भैंसों का या फिर जर्सी गायों का ही बीमा कराते हैं. देशी गायों व बकरियों वगैरह का बीमा किसान किसी भी कीमत पर कराने को तैयार नहीं होते हैं. 60000 रुपए की कीमत के पशु का बीमा कराने पर प्रीमियम 1800 रुपए बनता है. इस में से 50 फीसदी यानी 900 रुपए किसान को देना होता है. इस पर शासन की ओर से 14 फीसदी सर्विस टैक्स लगा दिए जाने से किसान को 1152 रुपए देने पड़ते हैं. इस के बावजूद क्लेम लेने के लिए किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.

संक्रामक बीमारी से मौत पर नहीं मिलता क्लेम

बेहद दिलचस्प बात तो यह है कि ज्यादातर पशुओं की मौत संक्रामक बीमारियां फैलने के कारण होती है, लेकिन बीमा कंपनी की शर्तों में खुरपका, मुंहपका, गलघोंटू आदि बीमारियों के अलावा भैंस की चोरी हो जाने और करंट से पशु की मौत हो जाने पर भी बीमा हुए पशु का क्लेम देने का नियम नहीं है.

नहीं मिला टारगेट

जयपुर जिले के चाकसू ब्लाक के पशु चिकित्साधिकारी ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि कंपनी की कड़ी शर्तों की वजह से टारगेट पूरा करने में परेशानी आ रही है. पशुओं का बीमा यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी द्वारा किया जाता है, लेकिन इस साल जयपुर जिले के चिकित्साधिकारी व विभाग को बीमा कंपनी की ओर से कोई टारगेट नहीं दिया गया है. ओमप्रकाश ने आगे बताया कि पिछले 2 सालों से जयपुर जिले समेत प्रदेश के तकरीबन सभी इलाकों में यह योजना बंद सी पड़ी है. केवल दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों द्वारा ही पशुओं का बीमा किया जा रहा है. इस से किसान व पशुपालक सरकार द्वारा दी जाने वाली छूट का फायदा नहीं उठा पा रहे हैं. साथ ही दूध देने वाले पशुओं के अलावा दूसरे पशुओं को भी फायदा नहीं मिल पा रहा है.

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