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वायरल हुआ शाहरुख खान की पहली फिल्म का वीडियो

बिलकुल ज्यादा बात नहीं. सीधे वीडियो तक आपको ले जाएंगे. लेकिन उससे पहले इस वीडियो के बारे में 5 बातें, जो आपको जान लेनी चाहिए. ताकि जब आप वीडियो देखो तब आपको एहसास हो जाए आपके सामने क्या चल रहा है? जो आप देख रहे हैं ये कोई ऐरा-गैरा वीडियो नहीं है. ये वो शॉर्ट फिल्म है जिसके बारे में ऐसा दावा किया जा रहा है कि शायद शाहरुख़ खान को भी अपनी ये फिल्म याद न हो.

मुद्दे की बात:

1. ये वीडियो एक शॉर्ट फिल्म है. जिसे शाहरुख़ के थिएटर के टाइम के एक दोस्त दिनेश लखनपाल ने बनाई है.

2. ये फिल्म तब बनी थी जब आज से 25 साल पहले शाहरुख़ ने बॉलीवुड की शुरुआत की थी.

3. वैसे तो शाहरुख ने बॉलीवुड में जो अपनी पहली फिल्म साइन की थी, वो ‘दिल आसना है’ थी. लेकिन किन्हीं कारणों से दिल आसना है रिलीज़ नहीं हो पाई थी. और उनकी पहली फिल्म रही दीवाना. जिसमें शाहरुख़ ने दिव्या भारती के साथ काम किया था.

4. जिस आदमी ने ये वीडियो लगाया है. और जो बातें यू-ट्यूब पर लिखी हैं. वो जिस अंदाज़ में लिखी गई हैं. ये आदमी दिनेश लखनपाल का कोई करीबी है.

5. एक और बात जो वीडियो के साथ लिखी गई है. वो ये कि इस फिल्म को करने के लिए शाहरुख को 3000 रुपये मिले थे. और आज वही शाहरुख़ खान अपनी एक फिल्म के लिए लाख-दो लाख नहीं करोड़ों लेते हैं.

आप वीडियो देखिए. ये ऐसे वीडियो हैं जो आसानी से नहीं मिलते. ऐसे ही किसी आर्काइव में पड़े-पड़े बर्बाद हो जाते हैं. लेकिन खुशकिस्मती से ये वीडियो सामने आया है.

इस शॉर्ट फिल्म का नाम है- महान कर्ज

कम्प्यूटर वायरस को कैसे पहचानें

ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं चलता, कि कब उनके Computer में कोई Virus या स्पाईवेयर आ गया है. स्पाईवेयर एक तरह का Virus है, जो आपके Computer में चुपचाप रहते हुए आपके सीक्रेट डेटा पर नजर रखता है और जरूरी सूचनाओं को अपने निर्माता हैकर्स के पास भेज देता है. आपके Computer में Virus इन्फेक्शन महीनों तक रहता है और Virus या स्पाईवेयर आदि मजे से अपना काम करते रहते हैं. पता तब लगता है, जब Hard Disk क्रैश या डेटा लॉस जैसा कोई बड़ा नुकसान हो जाता है. Virus या स्पाईवेयर इन्फेक्शन को पहचानना बहुत मुश्किल नहीं है. Virus इन्फेक्शन के गंभीर रूप लेने से पहले Computer में उनके संकेत दिखाई देते हैं.

कंप्यूटर बहुत धीमा

कंप्यूटर बहुत धीमा हो गया है और किसी भी Software को खोलने में ज्यादा समय ले रहा है, तो इसका मतलब है कि Computer की मेमोरी और सीपीयू का एक बड़ा हिस्सा Virus या स्पाईवेयर की प्रोसेसिंग में व्यस्त है. ऐसे में कंप्यूटर शुरू होने और इंटरनेट एक्सप्लोरर पर वेब पेज खुलने में देर लगती है.

ब्राउजर सेटिंग्स में बदलाव

आपके ब्राउजर का होमपेज अपने आप बदल गया है, तो बहुत संभव है कि आपके Computer में किसी स्पाईवेयर का हमला हो चुका है. होमपेज उस वेबसाइट या वेब पेज को कहते हैं, जो इंटरनेट ब्राउजर को चालू करने पर अपने आप खुल जाता है. आमतौर पर हम Tools मेन्यू में जाकर अपना होमपेज सेट करते हैं, जो अमूमन आपकी पसंदीदा वेबसाइट, सर्च इंजन या ज्यादा इस्तेमाल की जाने वाली सविर्स जैसे ई-मेल आदि होता है. पीसी में घुसा स्पाईवेयर आपको किसी खास वेबसाइट पर ले जाने के लिए इसे बदल देता है.

कंप्यूटर हैंग

Computer बार-बार जाम या अचानक हेंग होने लगा है, तो यह इन्फेक्शन के कारण हो सकता है. खासकर तब, जब आपने Computer में कोई नया Software या हार्डवेयर भी इंस्टॉल न किया हो.

पॉप अप विंडोज

इंटरनेट ब्राउजर को चालू करते ही उसमें एक के बाद एक कई तरह की पॉप अप विंडोज खुलने लगती हैं, तो हो सकता है कि इनमें से कुछ में किसी खास चीज या वेबसाइट का विज्ञापन किया गया हो या फिर वे अश्लील वेबसाइट्स के लिंक्स से भरी पड़ी हों.

चेतावनियां (थ्रेट्स)

स्क्रीन पर ऐसे मेसेज बॉक्स दिखाई देने लगें जिनमें कहा गया हो कि Computer पर Virus या स्पाईवेयर का हमला हो चुका है, साथ ही आपको किसी फ्री स्पाईवेयर स्कैनिंग वेबसाइट पर जाने की सलाह दी जाए.

अजीब से आइकन

आपके डेस्कटॉप या सिस्टम ट्रे में अजीब किस्म के आइकन आ गए हों, जबकि आपने ऐसा कोई Software भी इंस्टॉल नहीं किया है. क्लिक करने पर वे तेजी से अश्लील वेबसाइट्स को खोलना शुरू कर देते हैं.

अनजाने फोल्डर और फाइलें

आपके Computer की किसी ड्राइव या डेस्कटॉप पर कुछ ऐसे फोल्डर दिखाई देते हैं जिन्हें आपने नहीं बनाया. उनके अंदर कुछ ऐसी फाइलें भी हैं, जिन्हें न तो आपने बनाया और न ही वे किसी Software के इंस्टॉलेशन से बनीं. इसके अलावा उन्हें डिलीट करने के बाद भी वे कुछ समय बाद फिर से आ जाती हैं.

– आपके ई-मेल क्लाइंट के Sent फोल्डर में ऐसे ई-मेल मेसेज दिखाई देते हैं, जिन्हें आपने कभी नहीं भेजा.

– इंटरनेट ब्राउजर में कुछ-नए टूलबार आ गए हों. आप इन्हें हटाने की कोशिश करते हैं लेकिन वे या तो हटते ही नहीं या फिर कुछ देर बाद फिर आ जाते हैं.

– Computer शांत है लेकिन Hard Disk में फिर भी घूमने की आवाजें आ रही हों.

गोल्ड में नहीं बदलेगा योगेश्वर का ब्रॉन्ज

योगेश्वर दत्त का लंदन ओलंपिक खेलों का कांस्य पदक स्वर्ण पदक में नहीं बदलेगा क्योंकि यूनाईटेड विश्व कुश्ती (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) ने स्पष्ट किया कि पुरुष 60 किग्रा फ्रीस्टाइल में शीर्ष पर रहे तोग्रुल असगारोव कभी प्रतिबंधित पदार्थ के लिए पॉजीटिव नहीं पाए गए.

वैश्विक संस्था ने अपने आधिकारिक टि्वटर हैंडल से ट्वीट किया, “खबरों के विपरीत, 2012 ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता तोग्रुल असगारोव ने कभी यूडब्ल्यूडब्ल्यू की डोपिंग रोधी नीति का उल्लंघन नहीं किया है.”

इससे पहले इस तरह की रिपोर्ट आई थी कि अजरबैजान के असगारोव को शक्तिवर्धक दवाओं के लिए पॉजीटिव पाया गया है. लेकिन वैश्विक संस्था ने पुष्टि की कि अजरबैजान के पहलवान ने कोई डोप अपराध नहीं किया है.

पुरुष 60 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग के रजत पदक विजेता रूस के बेसिक कुदुखोव को प्रतिबंधित पदार्थों के सेवन का दोषी पाया गया था जिसके बाद चार बार के विश्व चैम्पियन और दो बार के ओलंपिक पदक विजेता कुदुखोव का पदक कांस्य पदक विजेता योगेश्वर को मिलने की संभवना थी. कुदुखोव की 2013 में दक्षिण रूस में कार दुर्घटना में मौत हो गई थी.

योगेश्वर क्वार्टर फाइनल में कुदुखोव से हार गए थे लेकिन बाद में उन्होंने रेपेचेज के जरिये कांस्य पदक जीता था.

अब चंद घंटों में मिलेगा लोन

2013 में सिद्धार्थ रविंद्रन को अपने फैमिली में एक मेडिकल इमर्जेंसी का सामना करना पड़ा. अगर उनके पास अपनी सेविंग्स और मेडिकल इंश्योरेंस नहीं होता तो उनके लिए इस स्थिति से निपटना आसान नहीं होता. हालांकि, उन्होंने किसी तरह से चीजों को मैनेज किया. रविंद्रन बताते हैं, 'मैंने जिस स्थिति का सामना किया वह उन लोगों के मुकाबले कहीं बेहतर थी, जिन्हें तत्काल लोन की जरूरत पड़ती है. लेकिन पेचीदा प्रक्रिया के कारण अक्सर उन्हें दिक्कत झेलनी पड़ती है. मैं ऐसी स्थिति से बाल-बाल बचा हूं.'

छोटी अवधि के लिए नकदी की किल्लत के अनुभव ने उन पर गहरा असर डाला. साथ ही, इससे उन्हें एक ऐसा वेंचर शुरू करने की प्रेरणा मिली, जो लोगों को ऐसी स्थिति से निपटने में मदद कर सके. दो साल बाद अगस्त 2015 में रविंद्रन ने कस्टमर्स को शॉर्ट टर्म क्रेडिट मुहैया कराने के लिए रुपीलेंड नाम की डिजिटल फाइनेंस कंपनी लॉन्च की. स्टार्टअप के फाउंडर और सीईओ रविंद्रन का कहना है, 'बैंक नए कस्टमर्स को लोन देने के लिए आमतौर पर 7-10 दिनों का वक्त लेते हैं.

हमने लोन डिस्बर्समेंट के लिए लगने वाले समय को घटाने के लिए Rupeelend की शुरुआत की.' स्टार्टअप नए कस्टमर्स को दो घंटे में लोन देती है. वहीं, रिटर्निंग कस्टमर को 10 मिनट में ही लोन मिल जाता है. रविंद्रन ने अपनी फैमिली और दोस्तों से पैसे लेकर 1.3 करोड़ रुपये के इनवेस्टमेंट से Rupeelend की शुरुआत की. Rupeelend कस्टमर एक्विजिशन, सेल्स, कस्टमर एक्सपीरियंस मैनेजमेंट और ऑपरेशनल एफिशिएंसी सुधारने के लिए क्लाउड बेस्ड सिस्टम का इस्तेमाल करती है.

रविंद्रन का कहना है, 'हमारा कस्टमर एक्विजिशन और सभी तरह के वेरिफिकेशन 100 फीसदी ऑनलाइन हैं. हमारे पास आर्टिफिशल इंटेलिजेंस आधारित डिसीजन मेकिंग सिस्टम्स है.' स्टार्टअप ने चार एनबीएफसी के साथ टाई-अप किया है और पिछले 12 महीनों में 3 करोड़ रुपये से ज्यादा के शॉर्ट टर्म लोन बांटे हैं. जब Rupeelend की शुरुआत हुई तो इसकी राह में कई अड़चनें आईं. रविंद्रन बताते हैं कि लोग कॉस्ट मॉडल को लेकर आशंकित थे. स्टार्टअप फिलहाल 30 दिनों के लिए 10,000-1 लाख रुपये तक के लोन देती है.

वह नए कस्टमर्स से रोजाना का 1 फीसदी इंटरेस्ट और रिपीट कस्टमर्स से 0.1 फीसदी का ब्याज लेती है. हालांकि, यह लोन के साइज और उसकी अवधि पर निर्भर करता है. रविंद्रन का कहना है कि Rupeelend का फोकस लोन जल्द देने पर है. फिलहाल Rupeelend एनसीआर, मुंबई और बेंगलुरु में ऑपरेट कर रही है और अब वह अपने बिजनस को पुणे, चेन्नई, हैदराबाद, अहमदाबाद और कोलकाता में बढ़ाना चाहती है. Rupeelend में अभी 50 लोग काम कर रहे हैं. इसने सालाना 62 लाख रुपये का रेवेन्यू जेनरेट किया है और अब यह एसएमई सेक्टर के लिए फाइनेंशियल मैनेजमेंट सॉल्यूशंस डिवेलप करना चाहती है.

देश में खुलेगा इस्लामिक बैंक

केंद्रीय रिजर्व बैंक ने ब्याज मुक्त बैंकिंग शुरू करने के लिए सरकार से साथ मिलकर काम करने का प्रस्ताव दिया है. आरबीआई के रुख में इस बदलाव के पीछे की वजह धार्मिक कारणों से वित्तीय सेवाओं से अलग-थलग पड़े समूहों को भी बैंकिंग की मुख्यधारा में शामिल करना है. इस प्रक्रिया के बाद खासकर मुस्लिमों के लिए इस्लामिक फाइनैंस के रास्ते खुल जाएंगे.

आरबीआई ने पिछले सप्ताह जारी अपनी वार्षिक रिपोर्ट में इसके लिए प्रस्ताव दिया है. इसे आरबीआई के रुख में एक बड़े बदलाव की तरह लिया जा रहा है. पहले आरबीआई ने इस्लामिक फाइनैंस को लेकर अलग रुख अपनाया था. आरबीआई ने कहा था कि इस्लामिक फाइनैंस को नॉन-बैंक चैनल्स जैसे इन्वेस्टमेंट फंड्स या को-ऑपरेटिव्स के जरिये प्रभावी किया जा सकता है.

आरबीआई के पूर्ववर्ती रुख से एक बात तो तय थी कि भारत का दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समूह यानी मुस्लिम इस्लामिक बैंकिंग का फायदा नहीं उठा पाएंगे. धार्मिक वजहों से इस्लाम में ब्याज आधारित बैंकिंग की मनाही है. अब आरबीआई ने कहा है कि वह सरकार के साथ मिलकर इंट्रेस्ट फ्री बैंकिंग शुरू करने की संभावनाओं पर काम करेगा.

इस्लामिक फाइनैंस के एक्सपर्ट और बेंगलुरु की इनफिनिटी कंसल्टेंट के मैनेजिंग पार्टनर सैफ अहमद ने इसे काफी महत्वपूर्ण कदम माना है. सैफ अहमद का कहना है कि यह बहुत ही महत्वपूर्ण बदलाव है. पहली बार आरबीआई ने कहा है कि वह इस्लामिक बैंकिंग की दिशा में सरकार के साथ मिलकर काम करेगी.

पाकिस्तान: आतंकवाद की बदलती प्रकृति

पाकिस्तान में साल 2014-15 की आतंकी घटनाओं से जुड़ी अमेरिकी विदेश मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट में जिन आंकड़ों के खुलासे हुए हैं, उनसे कई सारे पाकिस्तानी पहले से वाकिफ हैं. आतंकी हमलों की तादाद घट रही है, मगर उनका रूप ज्यादा खतरनाक हो रहा है. अमेरिकी अध्ययन के मुताबिक, साल 2015 में 1,009 आतंकी घटनाएं हुईं, जबकि 2014 में 1,823 वारदात हुई थीं. 45 फीसदी की कमी. साल 2015 के आतंकी हमलों में 1,081 लोग मारे गए, जबकि 2014 में मरने वालों की संख्या 1,761 थी. मरने वालों की संख्या में 39 प्रतिशत की कमी.

लेकिन साल 2015 में मौत की दर जहां प्रति वारदात 1.10 रही, तो वहीं 2014 में यह 0.99 थी. यह बढ़ोतरी यूं तो मामूली-सी लगती है, मगर यदि हम इसी दौरान की पेशावर आर्मी पब्लिक स्कूल व क्वेटा नेशनल हॉस्पिटल जैसी घटनाओं के नुकसान पर गौर करें, तो शायद हम देश के भीतर आतंकवाद की बदलती प्रकृति को समझ सकेंगे.

जब कबाइली इलाके दहशतगर्दों और उनसे गुर्गों के प्रभाव में थे, तब आतंकी हमलों के पीछे का मकसद अपने उस दबदबे को बनाए रखना था, इसलिए आतंकी निशाने पर फौजी लोग व प्रतिष्ठान होते थे. कुछ संप्रदायों को निशाना बनाने वाली छिटपुट घटनाएं भी घटती थीं, ताकि वैचारिक कट्टरपंथ का मुखौटा कायम रहे. जब से कबाइली इलाकों में फौज ने अपना अभियान छेड़ा है, और दहशतगर्दों को वहां से भागने या छिपने को मजबूर किया है, वे या तो अफगानिस्तान की सरहद से लगे इलाकों की तरफ जा रहे हैं या फिर कराची व लाहौर जैसे बडे़ शहरों को अपना घर बना रहे हैं.

चूंकि पुरानी जगहों को फिर से जीत पाना उनके लिए मुमकिन नहीं रहा, इसलिए उनके हमलों ने अब बदले की शक्ल अख्तियार कर ली है. अब हमलों के पीछे किसी रणनीतिक फायदे की सोच नहीं होती, बल्कि मुमकिन मनोवैज्ञानिक नुकसान पहुंचाना है. प्रति वारदात मरने वालों की दर में वृद्धि इसीलिए हुई, क्योंकि घनी आबादी वाले इलाके हमलों के लिए चुने गए. पाकिस्तान को रणनीति भी अब बदलनी चाहिए, क्योंकि दहशत से जंग का मैदान अब ये शहर दिख रहे हैं.

Motorola ने पेश किए वायरलेस इयरबड्स

अमरीकी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Motorola ने नए VerveOnes+ वायरलेस इयरबड्स पेश किए हैं जिन्हें खास तौर पर कानों के अंदर फिट होने के लिए बनाया गया है. इनकी कीमत $250 (करीब 16785 रुपए) है. इनके साथ कंपनी एक चार्जिंग केस भी देगी जिसमें इन्हें रखने से ये चार्ज होने लगेंगे.

इन्हें आप आसानी से iOS और एंड्रॉयड डिवाइसेस के साथ अटैच कर यूज कर सकते हैं. ब्लैक डिजाइन और आकर्षक लुक के कारण इन वाटरप्रूफ इयरबड्स को आप जॉगिंग के समय भी पहन सकते हैं. इनमें 6.8mm डायनामिक ड्राइवर्स लगे हैं जो डीप, रिच HD साऊंड क्वालिटी आउटपुट देते हैं. इनमें कंपनी ने 6 प्री-सेट EQ प्रोफाइल्स दिए हैं जो अलग-अलग साऊंड इफेक्ट देते हैं. इस सेट में दो बैटरीज लगी है जिसमें से 72 mAh की बैटरी वायरलेस इयरबड्स को बैकअप देगी और 600 mAh की बैटरी चार्जिंग केस की मदद से रास्ते में चार्ज करने में मदद करेगी.

टी 20 का सबसे बड़ा स्कोर ऑस्ट्रेलिया के नाम

सलामी बल्लेबाज ग्लेन मैक्सवेल के नाबाद 145 रन की बदौलत ऑस्ट्रेलिया ने पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में श्रीलंका को 85 रन से हराकर दो मैचों की श्रृंखला में 1-0 की बढ़त बना ली.

मैक्सवेल ने 65 गेंद में 14 चौकों और नौ छक्कों की मदद से टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दूसरी सर्वश्रेष्ठ पारी खेली जिससे ऑस्ट्रेलिया ने तीन विकेट पर रिकॉर्ड 263 रन बनाए. इससे पहले सर्वाधिक स्कोर का रिकार्ड श्रीलंका के नाम था जिसने 2007 में कीनिया के खिलाफ छह विकेट पर 260 रन बनाए थे.

इसके जवाब में श्रीलंका की टीम की ओर से सिर्फ दिनेश चांदीमल (58) और चामरा कपुगेदारा (43) ही टिककर बल्लेबाजी कर पाए जिससे टीम नौ विकेट पर 178 रन ही बना सकी और उसे टी20 क्रिकेट की अपनी सबसे बड़ी हार झेलनी पड़ी.

इससे पहले उसे ऑस्ट्रेलिया ने ही मई 2010 में ब्रिजटाउन में 81 रन से हराया था. ऑस्ट्रेलिया की ओर से तेज गेंदबाज स्काट बोलैंड और मिशेल स्टार्क ने 26-26 रन देकर तीन-तीन विकेट चटकाए.

इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के कप्तान डेविड वार्नर (12 गेंद में 28 रन) ने मैक्सवेल के साथ पहले विकेट के लिए 57 रन जोड़कर टीम को शानदार शुरुआत दिलाई. ऑफ स्पिनर सचित्र सेनानायके ने वार्नर को बोल्ड करके इस साझेदारी को तोड़ा.

मैक्सवेल ने उस्मान ख्वाजा (22 गेंद में 36 रन) के साथ दूसरे विकेट के लिए 97 रन जोड़े. मैक्सवेल ने अपने 35वें मैच में पहला टी20 शतक पूरा किया. पदार्पण कर रहे बायें हाथ के स्पिनर सचित पाथिराना ने ख्वाजा को पवेलियन भेजा.

मैक्सवेल ने इसके बाद ट्रेविस हेड (18 गेंद में 45 रन) के साथ 109 रन की साझेदारी करके ऑस्ट्रेलिया को रिकार्ड स्कोर तक पहुंचाया. मैक्सवेल ऑस्ट्रेलियाई टीम के अपने साथी आरोन फिंच के टी20 रिकार्ड 156 रन से सिर्फ 11 रन से पीछे रह गए. उन्हें अंतिम ओवर में सिर्फ एक गेंद खेलने को मिली.

मौत का सामान बेचते फिल्मी सितारे

दानेदाने में केसर का दम : अजय देवगन.

इसे खाओ और थोड़ा करीब आ जाओ : शाहरुख खान.

यह पहचान है कामयाबी की : सैफ अली खान.

आप जैसे शौकीनों के लिए मेरा नजराना : मनोज बाजपेयी.

शानोशौकत का नया अंदाज : गोविंदा.

जो भी खाए दीवाना बन जाए : असरानी.

बौलीवुड के कई बड़े कलाकार मीडिया में इश्तिहारों के जरीए स्वाद का बखान कर लोगों को पान मसाले का शौक फरमाने का औफर दे रहे हैं. देश की सब से बड़ी अदालत द्वारा गुटका (तंबाकू और कई जहरीली चीजों से बने मिश्रण) पर रोक लगाए जाने के बाद पान मसाला बनाने वाली कंपनियों के कारोबार धीमे पड़ने लगे थे. ऐसे में इन कंपनियों ने एक बड़े पैकेट में पान मसाला और उस के साथ में छोटे पैकेट में तंबाकू बेचना शुरू कर दिया. पान मसाला बेचने वाली कंपनियों ने और ज्यादा नोट बटोरने के लिए बौलीवुड के बड़ेबड़े सितारों को अपनी कंपनी का ब्रांड अंबैसडर बना कर उन से अपना प्रचार कराना शुरू कर दिया. देश के ज्यादातर नौजवान बौलीवुड के कलाकारों को अपना रोल मौडल मानते हैं. ऐसे में सितारों द्वारा पान मसाले के इश्तिहार को देख कर वे पान मसाले की ओर भी तेजी से खिंचने लगे हैं. एक हैल्थ सर्वे के मुताबिक, देश की 35 फीसदी आबादी पान मसाले का सेवन करती है. आज पान मसाले का कारोबार 10 हजार करोड़ रुपए से भी ज्यादा का है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, जिस तरह से पान मसाला खाने वालों की तादाद बढ़ी है, उसी तरह देश में मुंह के कैंसर में भी तेजी से इजाफा हुआ है. जानकारों के मुताबिक, मुंह के कैंसर की सब से बड़ी वजह पान मसाले का ज्यादा सेवन मानी गई है. भारत में मुंह का कैंसर बड़ी नाजुक हालत में पहुंच चुका है. अंदाजा यह लगाया जा रहा है कि अगर इसी तरह से मुंह के कैंसर से पीडि़तों की तादाद बढ़ती रही, तो आने वाले दिनों में भारत में मुंह के कैंसर के मरीजों की तादाद सब से ज्यादा होगी.

दिलचस्प बात यह है कि स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा तंबाकू से होने वाले बुरे नतीजों के बारे में जानकारी देने के लिए जनजागृति मुहिम चलाई जाती है, जिस में हर साल करोड़ों रुपए खर्च होते हैं. वहीं दूसरी ओर सरकार इस पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए कदम नहीं उठा रही है. पान मसाले के इश्तिहार किसी मशहूर व ग्लैमरस हस्ती से जोड़ कर तैयार किए जाते हैं. कोई नौजवान जब रंगीन चमकीली पन्नी में भरे पान मसाले को निकाल कर बड़े स्टाइल से हथेली पर डालता है, उस वक्त उस के दिमाग में पूरी तरह से बौलीवुड के बड़े कलाकारों की इमेज छाई होती है. वह इस से होने वाले खतरनाक नतीजों को भूल कर उस का सेवन करता रहता है. पान मसाले का सेवन करने वाले कुछ नौजवानों से पूछा गया कि वे पान मसाला क्यों खाते हैं? इस के जवाब में ज्यादातर नौजवानों का यही कहना था कि जब सुपरस्टार इन्हें खा सकते हैं, तो वे क्यों नहीं?

समाजशास्त्री और मनोवैज्ञानिक युवराज दुबे का कहना है, ‘‘आज की नौजवान पीढ़ी बौलीवुड के कलाकारों को अपना रोल मौडल मानती है. अपने रोल मौडल द्वारा जिस किसी चीज का गुणगान किया जाता है, वह उन्हें भाने लगता है. वह उन चीजों को खरीदने लगता है. ऐसे में रोल मौडल द्वारा पान मसाले का गुणगान भी उन्हें भाता है. वे अपने रोल मौडल की पसंद को अपनी पसंद बनाने लगते हैं. ‘‘ऐसे इश्तिहारों पर रोक लगनी चाहिए, जिस में बौलीवुड के कलाकार पान मसालों की खूबियां बताते नजर आते हैं. इस वजह से नौजवान इस के प्रति ज्यादा खिंचते हैं, जिस का नतीजा उन्हें बाद में भुगतना पड़ता है.’’

युवा छात्र नेता विनोद सिंह का कहना है, ‘‘बड़े फिल्म कलाकारों द्वारा इश्तिहारों में पान मसालों का गुणगान करते देख मेरे दिमाग में यह बात आती है कि जब शाहरुख खान और अजय देवगन भी पान मसाला खा सकते हैं, तो मैं क्यों नहीं खा सकता?’’

सामाजिक कार्यकर्ता डा. एम. कुमार का कहना है, ‘‘फिल्मी कलाकारों द्वारा पान मसाले का इश्तिहार करने की वजह से नौजवान तेजी से इस ओर खिंचता है. बौलीवुड के कलाकारों को सामाजिक जिम्मेदारी पर भी ध्यान देना चाहिए. उन्हें ऐसे इश्तिहारों से दूर रहना चाहिए.’’

पान मसाला कंपनी के इश्तिहार बनाने वालों का मानना है कि आज की जनता बेवकूफ नहीं है. वह काफी समझदार है. उसे अच्छी और बुरी चीजों के बारे में सबकुछ पता है. पहली बात तो यह है कि उन के इश्तिहार बौलीवुड के बडे़ कलाकार पान मसालों की पब्लिसिटी कर रहे हैं, न कि गुटका या तंबाकू की. पान मसाला एक तरह का माउथ फ्रैशनर है. भारत में खाना खाने के बाद इस का इस्तेमाल किया जाता रहा है. जबकि सच यही है कि इश्तिहार कंपनियों द्वारा उपभोक्ता कानून के साथ खिलवाड़ कर बेहद चालाकी के साथ पान मसालों के इश्तिहार तैयार कर नौजवानों को भरमाया जा रहा है. इस में बौलीवुड इंडस्ट्री के कलाकारों द्वारा भरपूर साथ दिया जा रहा है.

मैं सपने नहीं देखती: इलियाना डिक्रूज

तेलुगु फिल्मों से अपने कैरियर की शुरुआत करने वाली इलियाना डिक्रूज ने अब तक कई इश्तिहारों और फिल्मों में काम किया है. वैसे, उन्होंने मौडलिंग से अपने कैरियर की शुरुआत की थी, जिस की सलाह उन की मां ने दी थी. जब वे इश्तिहारों में काम कर रही थीं, तभी उन्हें तेलुगु फिल्म ‘देवदासु’ में काम करने का मौका मिला था. यह फिल्म ज्यादा नहीं चली थी, पर इस में इलियाना डिक्रूज को ‘बैस्ट डैब्यू’ अवार्ड मिला था. यहीं से उन की गाड़ी दक्षिण भारतीय फिल्मों में चल पड़ी थी. इलियान डिक्रूज के पिता का नाम रोनाल्डो डिक्रूज है और मां का नाम समायरा डिक्रूज है. जब इलियाना 10 साल की थीं, तब उन का परिवार मुंबई से गोवा चला गया था. उन्होंने वहीं रह कर अपनी पढ़ाई पूरी की थी.

बौलीवुड में इलियाना डिक्रूज को पहला ब्रेक अनुराग बासु ने अपनी फिल्म ‘बर्फी’ के लिए दिया था. फिल्म कामयाब रही थी. इस में इलियाना का मासूम चेहरा सब को पसंद आया. उन की ऐक्टिंग को तारीफ मिली. उन्हें ‘बैस्ट डैब्यू’ अवार्ड भी मिला. इस के बाद इलियाना फिल्म ‘मैं तेरा हीरो’ में अपनी अच्छी ऐक्टिंग के लिए सराही गई थीं. उन का नाम दक्षिण भारत के कई फिल्म सुपरस्टारों के साथ जुड़ा. उन के अफेयर के चर्चे भी सुने गए थे. उन्होंने स्वीकारा भी था कि वे एक हीरो के साथ रिलेशनशिप में थीं और उसे छोड़ने की वजह हीरो का वफादार न होना बताया था. इलियाना डिक्रूज की नई फिल्म ‘रुस्तम’ भी ठीकठाक रही. पेश हैं, उन से हुई बातचीत के खास अंश :

हिंदी फिल्मों में आने की वजह?

कोई खास वजह नहीं है. कोई भी कलाकार ज्यादा दिनों तक फिल्मों से दूर नहीं रहना चाहता.  मेरी फिल्म ‘रुस्तम’ बड़े परदे पर आ चुकी है. कई फिल्मों पर काम चल रहा है, क्योंकि फिल्म साइन करने से ले कर सिनेमाघर तक पहुंचने में समय लगता है.

फिल्म ‘रुस्तम’ में आप ने जो किरदार निभाया है, क्या उस का आप की निजी इमेज पर असर पड़ा?

मैं ऐसी नहीं हूं और इस फिल्म में बने हालात निजी जिंदगी में आने पर मैं क्या करूंगी, यह भी पता नहीं, क्योंकि मेरे साथ ऐसा कभी नहीं हुआ. मेरे हिसाब से मैं ने डायरैक्टर की सोच को परदे पर उतारा है. मेरे लिए हर फिल्म नया जोश लाती है.

फिल्म ‘रुस्तम’ करते वक्त आप के सामने क्याक्या मुश्किलें आई थीं?

इस फिल्म में ऐक्टिंग करना मुश्किल था, क्योंकि ऐसे हालात से मैं कभी गुजरी नहीं हूं. मैं इस में ग्लिसरीन ले कर आंसू निकालना नहीं चाहती थी. मैं रियल लगना चाहती थी. अक्षय कुमार की वजह से सब आसान हो गया.

दक्षिण भारत की फिल्मों और बौलीवुड की फिल्मों में काम करने में आप क्या अंतर पाती हैं?

वहां और यहां काफी समानता है, लेकिन कुछ अंतर भी है. वहां मैं ने बिंदास लड़की के किरदार निभाए, जिन्हें लोगों ने पसंद किया. वहां एक हीरो एक घूंसे से कइयों को मार गिराता है. बौलीवुड में ऐसा कम देखने को मिलता है. लेकिन वहां काम अनुशासित ढंग से होता है. समय पर शूटिंग खत्म हो जाती है. मैं ने वहां एक साल में 4 फिल्में भी की हैं. यहां लोग थोड़ा आराम से काम करते हैं. हां, अक्षय कुमार अनुशासित हैं और समय पर काम खत्म करते हैं.

आप का ड्रीम प्रोजैक्ट क्या है?

मैं सपने नहीं देखती. जो मिलता है, उसी में संतुष्ट रहती हूं. मैं कार्टून और कौमेडी फिल्में देखती हूं, इस से मेरा तनाव कम होता है.

तनाव होने पर आप और क्या करती हैं?

मेरा परिवार मुझे पूरी तरह सहयोग देता है. मातापिता, बहन सब का साथ मिलता है. मेरे चारों ओर अच्छे लोग हैं. इस से मुझे ताकत मिलती है.

आप के लिए आजादी का क्या मतलब है?

मेरे लिए आजादी का मतलब है कि जब मैं जो कहना चाहूं, लोगों के दखल के बिना कह पाऊं. मैं मर्द और औरत की समानता पर भरोसा करती हूं. किसी के साथ अगर कुछ गलत हो रहा है, उस बात को कहने की हिम्मत रखती हूं.

नई कौन सी फिल्में कर रही हैं?

अभी मैं फिल्म ‘बादशाहो’ कर रही हूं. इस के अलावा कुछ और फिल्में भी करने वाली हूं.

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