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रिलायंस जियो से सस्ता है बीएसएनएल

बीएसएनएल अपने टैरिफ्स में कटौती करने जा रही है ताकि वह रिलायंस जियो से भी बढ़िया ऑफर्स दे सके. कंपनी के एक टॉप अधिकारी ने बुधवार को इसकी जानकारी दी. मतलब साफ है कि देश के विशाल मोबाइल टेलिकॉम मार्केट में प्राइस वॉर के लिए अखाड़ा तैयार हो गया है.

रिलायंस जियो के फ्री वॉइस कॉल ऑफर से मुकाबले के लिए बीएसएनल भी अपने नेटवर्क पर मुफ्त में कॉल करने की सुविधा दिए जाने की तैयारी में है. साथ ही वह ऐसे प्लान्स पर विचार कर रहा है जो जियो से भी सस्ता साबित होंगे. खास बात यह है कि जियो के ऑफर सिर्फ 4G यूजर्स ही इस्तेमाल कर पाएंगे, लेकिन बीएसएनएल के प्लान्स 2G और 3G यूजर्स के लिए भी होंगे जिनकी तादाद ज्यादा है.

बीएसएनएल का केरल, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, ओडिशा, पंजाब और उत्तर प्रदेश जैसे टेलिकॉम मार्केट्स में अच्छी पकड़ है. हालांकि, मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों में वह पिछड़ा हुआ है जहां एमटीएनएल की सेवाएं मुहैया की जाती हैं. बीएसएनएल जनवरी से मुफ्त में कॉल करने की सुविधा देने जा रहा है जिसके लिए जियो के न्यूनतम 149 रुपये से भी कम पैसे खर्च करने होंगे.

बीएसएनएल के सस्ते प्लान उन मोबाइल कस्टमर्स के लिए होंगे जिनके घरों में ब्रॉडबैंड कनेक्शन भी होंगे. सब्सक्राइबर्स घर से बाहर भी होंगे तब भी उन्हें फ्री वॉइस कॉल की सुविधा दी जाएगी.एक्सपर्ट्स का मानना है कि बीएसएनएल के इस ऑफर से एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया जैसे टेलिकॉम ऑपरेटरों पर टैरिफ्स में कटौती का और ज्यादा दबाव बनेगा.

अब लद्दाख तक दौड़ेगी ट्रेन

लद्दाख के लिए मनाली होते हुए बिलासपुर तक रेलवे लाइन से जोड़ने के काम को तेजी से आगे बढ़ाने को रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने हरी झंडी दिखा दी है. इसी के मद्देनजर लद्दाख को रेलवे लाइन से जोड़ने के काम में तेजी एक बार फिर से दिखाई देनी शुरू हो गई है. लद्दाख ऑटोनामस हिल डेवलपमेंट काउंसिल यानी एलएएचडीसी से रेलवे ने जमीन का आवंटन करने की गुजारिश की है ताकि लेह में कैंप ऑफिस बनाया जा सके.

सबसे ऊंचे इलाकों से गुजरेगी रेल

बिलासपुर से मनाली और फिर लेह तक की दूरी तकरीबन 500 किलोमीटर है. हिमालय की ऊंची-ऊंची चोटियों को पार करती हुई ये रेलवे लाइन दूनिया के सबसे ऊंचे इलाकों से होकर गुजरेगी. इस परियोजना पर तकरीबन 50,000 करोड़ रुपये का खर्च का अनुमान है. बिलासपुर मंडी मनाली लेह रेलवे लाइन की फीजिबिलिटी रिपोर्ट पहले ही तैयार हो चुकी है. 

भारत दौरे पर नहीं आना चाहते एंडरसन!

इंग्लैंड क्रिकेट टीम को आने वाले दो महीनों में बांग्लादेश और भारत का दौरा करना है. लेकिन इस दौरे से पहले टीम को एक बड़ा झटका लगा है. इंग्लैंड के तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन इन दोनों दौरों से बाहर हो सकते हैं.

इंग्लैंड की ओर से सबसे ज्यादा टेस्ट विकेट लेने वाले एंडरसन को अगले महीने बांग्लादेश के खिलाफ होने वाली टेस्ट सीरीज के लिए टीम में शामिल किया गया है और उसके बाद उन्हें इस साल नवंबर में भारत के खिलाफ होने वाली पांच मैचों में टेस्ट सीरीज के लिए भी संभावित टीम में रखा गया है.

34 वर्षीय एंडरसन ने कहा, 'एक खिलाड़ी के रूप में यह एक मुश्किल काम है क्योंकि जब आप फिट होते हैं तभी आप खेलना चाहते हैं. इस सयम मैं 34 वर्ष का हूं फ्यूचर में इसी फिटनेस स्तर को बरकरार रख पाना आसान काम नहीं है. अगर संभव होता है तभी आप सभी टेस्ट मैच खेलना चाहते हैं. लेकिन बांग्लादेश दौरे के बाद लगातार पांच टेस्ट मैच खेलना किसी भी गेंदबाज के लिए मुश्किल है.'

दुनिया के नंबर दो गेंदबाज ने कहा, 'बहुत जल्द ही किसी फैसले पर पहुंचने की उम्मीद है और हो सकता है कि मैं इन दौरों से हट भी सकता हूं.'

पनामा लीक के बाद ‘बहामास लीक’

पनामा पेपर्स लीक के महज पांच महीने बाद ही अब बहामास लीक सामने आया है. इसके मुताबिक कर चोरी के लिए दुनियाभर की 1 लाख 75 हजार से ज्यादा कंपनियां, ट्रस्ट और फाउंडेशन कैरेबियाई टैक्स हेवन 'बहामास' में रजिस्टर्ड हैं. ये नए दस्तावेज एक जर्मन अखबार के हाथ लगे हैं. अखबार ने ये डॉक्यूमेंट्स इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट से साझा किए हैं.

एक अंग्रेजी अखबार के खबर के मुताबिक, जिन कंपनियों के नाम का खुलासा हुआ है वे साल 1990 से 2016 के बीच इस कैरिबियाई टैक्स हेवन से जुड़ी हैं.

भारत की 475 कंपनियों के नाम

एक लाख 75 हजार कंपनियों में से बहामास में भारत की 475 कंपनियों के नाम हैं. ये कंपनियां माइन्स एंड मेटल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, रियल इस्टेट, फैशन मीडिया और एंटरटेनमेंट से जुड़ी हैं. इनमें से कुछ कंपनियों का नाम पनामा पेपर्स लीक में भी आ चुका है. इनमें देश के बड़े-बड़े घरानों के मालिकों का भी नाम शामिल है.

बहामास लीक 30 सितंबर से कुछ दिन पहले ही सामने आया है. बता दें कि 30 सितंबर भारत सरकार की इनकम टैक्स डिस्क्लोजर स्कीम की आखिरी तारीख है. इस स्कीम के तहत लोगों को अपनी छुपी हुई आय का खुलासा करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है. साथ ही पेनल्टी के तौर पर 45 प्रतिशत टैक्स चुकाकर इस ब्लैक मनी को सफेद में बदला जा सकता है.

सौदे के लिए 500 से ज्यादा बिचौलिए

नए खुलासे से पता लगता है कि बहामास टैक्स कंपनी के कुल 539 रजिस्टर्ड एजेंट्स हैं. ये कॉर्पोरेट बिचौलिए बहामास अथॉरिटी और अन्य देशों के क्लाइंट्स के बीच सौदा करवाने में मदद करते हैं. इन दस्तावेजों में कई देशों के राजनेताओं का भी नाम शामिल है. जिनमें कोलंबिया के कोयला और ऊर्जा मंत्री कार्लोस कबालेरो अरगेज का भी नाम है. दस्तावेजों में उन्हें बहामास कंपनी का अध्यक्ष और सेक्रेटरी बताया गया है. इसके अलावा यूरोपियन यूनियन कमिशनर नीली क्रोस का भी नाम डॉक्यूमेंट में आया है.

खतरे में Yahoo यूजर्स की सिक्योरिटी

अमेरिकी इंटरनेट कंपनी Yahoo के करोड़ों यूजर्स को इन दिनों परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. क्योंकि हैकर्स ने याहू के करीब 50 करोड़ यूजर्स के अकाउंट हैक कर लिए हैं. इस बात की पुष्टि याहू ने रात को ट्विटर पर की.

आपको बता दें कि हैक किए गए डाटा में यूजर्स के नाम के अलावा, ईमेल के एड्रेस, फोन नंबर, DOB और हैश पासवर्ड सहित कई तरह जानकारियां शामिल हैं. हालांकि याहू ने यह भी कहा है हैकर्स ने अनप्रोटेक्टेड पासवर्ड्स, पेमेंट कार्ड डाटा या बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी नहीं चोरी नहीं की.

इतने बड़े साईबर अटैक के बाद याहू ने बताया कि अकाउंट से जानकारी चोरी होने के मामले में वह अब कानूनी एजेंसियों के  साथ मिलकर जांच कर रही है. हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि अनप्रोटेक्टेड पासवर्ड्स, पेमेंट कार्ड डाटा या बैंक अकाउंट से जुड़ी जानकारी नहीं चोरी हुई.

याहू के मुताबिक 2014 में हुई यह हैकिंग राष्ट्र-समर्थित थी. याहू ने अपने सभी यूजर्स को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि उन्होंने साल 2014 से अपने पासवर्ड नहीं बदले हैं तो वो तुरंत अपने पासवर्ड बदल लें. याहू का कहना है कि तकनीकी जगत में राष्ट्र समर्थित ऑनलाइन हैकिंग और चोरी आम बात हो गई है.

गौरतलब है कि जुलाई में याहू को अमरीकी टेलीकॉम कंपनी वेरिजॉन ने 480 करोड़ डॉलर में खरीदने की डील की थी. साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस हैकिंग की वजह से याहू की वेरिजॉन कम्युनिकेशन के साथ हुई डील पर भी असर पड़ सकता है.

लेकिन अभी तक इस बात की जानकारी नहीं मिल पाई है कि इस हैंकिग का असर याहू की बिक्री या उसके मूल्यांकन पर होगा या नहीं. गौरतलब है कि Yahoo कंपनी पर साईबर अटैक की बात इस साल अगस्त में तब सामने आई थी जब ‘पीस’ नाम के एक हैकर ने कथित तौर पर 20 करोड़ याहू अकाउंट से संबंधित डेटा बेचने की केशिश की थी.

निहलानी, चौहान और सियासत के बीच फंसी ‘दंगा’

फिल्म का नाम ही दंगा है जिस पर सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष पहलाज निहलानी और एफटीआईआई के मुखिया गजेंद्र चौहान के बीच दिखावे का ही सही दंगल शुरू हो गया है जिससे उत्सुकतावश ज्यादा से ज्यादा लोग इसे देखें. निर्माता मिलन भौमिक की इस फिल्म मे गजेंद्र जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमिका में हैं, फिल्म राजनैतिक ही कही जाएगी जो हिंसा से भरी पड़ी है. हिंसा यानि दंगे जो साल 1946 में कोलकाता में हुये थे, तब मुस्लिम लीग ने अलग पाकिस्तान बनाए जाने का प्रस्ताव रखा था, जिसे कांग्रेस ने खारिज कर दिया था. इस पर  पूरा देश सांप्रदायिक उन्माद मे डूब गया था, कोलकाता में ज्यादा मार काट हुई थी.

भगवा अखाड़े के इन दो पट्ठों के बीच 1946 के दंगों को लेकर मतभेद क्यों हैं, इस सवाल का सटीक और तार्किक  जबाब ढूँढे से किसी को नहीं मिल रहा है. पहलाज निहलानी  की दलील यह है कि फिल्म हिंसा प्रधान है और उसमें सही तथ्यों का अभाव है, इससे देश की कानून व्यवस्था को खतरा हो सकता है (शुक्र है किसी ने तो कानून व्यवस्था का होना माना) अलावा इसके इसमें एक नेता के खिलाफ भद्दे संवाद हैं, जो बाद में देश के प्रधानमंत्री बने. निहलानी सीधे पंडित जवाहरलाल नेहरू का नाम ले देते तो कोई पहाड़ नहीं टूट पड़ना था, क्योकि दंगा नाम की इस फिल्म मे इनके और दूसरे दो चार लोगों के अलावा किसी की दिलचस्पी है नहीं.

गजेंद्र चौहान इस फिल्म में केंद्रीय पात्र श्यामा प्रसाद मुखर्जी की भूमिका में हैं और बड़े उत्साहित होकर बताते हैं कि वे इस किरदार में इतने डूब गए थे कि उन्हे लगता था कि मुखर्जी की आत्मा उनमे आ गई है. बहरहाल निहलानी की दलीलों को खारिज करते वे यह भी कहते हैं कि बिना इतिहासकारों से सलाह-मशविरा किए सेंसर बोर्ड का यह तय करना कि हत्याए नहीं हुईं गलत है. तो फिर सच क्या है,  सच यह है कि बात सूत न कपास जुलाहों में लट्ठम लट्ठा जैसी है, दूसरे नजरिए से यह जंगल में मोर नाचा किसने देखा जैसी भी है. ये दोनों अपनी काबिलियत साबित करने खामोखाह में श्यामा प्रसाद मुखर्जी को महिमामंडित करने की कोशिश में लगे हैं, जिसे सरकार और नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त करना भी कहा जा सकता है.

अधिकांश लोग खासतौर से नई पीढ़ी तो बिलकुल नहीं जानती कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी आखिर थे कौन. निहलानी का बयान बताता है कि वह दंगा का प्रमोशन है जिसमे यह बताया गया है कि अगर मुखर्जी पहल नहीं करते, तो जिन्ना की जिद के चलते पश्चिम बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा होता. अभी कुछ दिन पहले ही भाजपा के अध्यक्ष अमित शाह ने पार्टी के कार्यकर्ताओं से अपील की थी कि वे अपने घरों के पुराने  बक्से तलाशें और ढूँढे, शायद भाजपाइयों का आजादी की लड़ाई में योगदान से ताल्लुक रखता कोई फोटो या पुर्जा मिल जाए, तो उसे पार्टी कार्यालय को भेजें जिससे यह साबित किया जा सके कि भाजपा ने भी आजादी की लड़ाई में योगदान दिया था.

अब यह दीगर बात है कि पुराने बक्सों में कोई कागज या सबूत कार्यकर्ताओं को अपने पूर्वजों के योगदान का नहीं मिला और बात आई गई हो गई. दंगा कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि सोच समझकर बनाई गई फिल्म है, जिसमे यह साबित करने की कोशिश की गई लगती है कि अगर मुखर्जी एतराज नहीं जताते, तो देश का बड़ा हिस्सा नेहरू पाकिस्तान को थाल में सजाकर दे देते. यह कोशिश जिसे साजिश कहना बेहतर होगा, कामयाब होती दिख नहीं रही, फिर भी दिल को बहलाने प्रयास अच्छा है. साफ दिख रहा है कि इतिहास के पुनर्लेखन का पावन कार्य बेहद कमजोर और नाजानकार लोगों के हाथ मे भज भज मंडली ने थमा दिया है, जिन्हें विवाद पैदा करने की भी समझ और सलीका नहीं.

राहुल का गुस्सा और मोदी का एजेंडा

उरी अटैक से पूरा देश बहुत गुस्से में है. राहुल गांधी का गुस्सा भी स्वाभाविक है. खासकर तब जबकि उन्होंने अरुण जेटली को पहले ही अलर्ट किया था – 'कश्मीर में आपको बड़ी प्रॉब्लम आ रही है.' जिस अरुण जेटली को यही भरोसा नहीं कि ना जाने राहुल गांधी कब सीखेंगे, वो भला उनकी बातों पर कितना ध्यान देते, इसलिए यूं ही कह दिया होगा – 'कश्मीर में कोई प्रॉब्लम नहीं है.' मालूम नहीं, जेटली को ये पक्का यकीन कैसे हुआ कि कोई खुफिया अधिकारी राहुल से मिलकर कुछ बताया नहीं होगा!

जय जवान, जय किसान

अपनी किसान यात्रा में खाट लूटे जाने को स्वाभाविक प्रतिक्रिया मान कर चलने वाले राहुल गांधी को किसानों की हालत देखते ही विजय माल्या की याद आ जाती और फिर वो मोदी सरकार को जीभर कोसते देखे गये. एक तरफ किसान कर्ज में डूबे हुए हैं और दूसरी तरफ माल्या बैंकों का पैसा लेकर भाग जा रहे हैं और सरकार कुछ नहीं कर रही. सच में ये तो अंधेरगर्दी है. अब इसे सूट बूट की सरकार न कहा जाये तो क्या कहा जाये.

अगर राहुल गांधी को लगता है कि सरकार न तो किसानों के लिए कुछ कर रही है और न ही जवानों के लिए तो इसमें गलत कुछ भी नहीं है. उरी का हमला जवानों की सुरक्षा में बड़ी चूक है. दिन रात मुस्तैद रह कर पूरे मुल्क को चैन की नींद सोने का मौका देने वाले जवानों को तो थकान मिटाने का भी मौका नहीं मिला. थोड़ी झपकी क्या ली कि आतंकवादियों ने उन्हें मौत की नींद सुला दिया.

जिस तरह न्यायपालिका में अकाउंटेबिलिटी को लेकर बहस जारी है, उस तरह सेना में भी ऐसी चूकों के लिए बात होनी चाहिये. अगर कारगिल और मुंबई हमले को छोड़ भी दें तो पठानकोट के बाद उरी अटैक क्यों हुआ? जाहिर है सुरक्षा में बड़ी चूक हुई है – और जो भी सैन्य अफसर हों सिर्फ ये कह कर कि मुहंतोड़ जवाब दिया जाएगा जिम्मेदारी से बच नहीं सकते.

जवानों की शहादत के बाद भी सरकारी तौर पर भेदभाव देखने को मिले हैं. पत्रकार नवीन पाल फेसबुक पर लिखते हैं, "किसी ने दस लाख और किसी ने बारह लाख. क्या ये मुमकिन नहीं था कि जिन भी राज्यों ने सहायता राशि का एलान किया वो अपने नागरिकों के साथ बाकी शहीदों को भी बराबर राशि का एलान करते? इससे उनके सरकारी खजाने पर महज पांच सात करोड़ का असर पड़ता पर इससे देश में संदेश बड़ा जाता कि हम एक हैं."

बिहार में तो एक शहीद की पत्नी का गुस्सा फूट ही पड़ा, "मेरा पति शहीद हुआ है. वो शराब पीकर या नाले में गिरकर नहीं मरा." इतना सुनने के बाद बिहार सरकार को समझ आई और तब कहीं जाकर पांच लाख से बढ़ाकर शहीद के परिवार को 11 लाख का चेक दिया गया.

'जय जवान जय किसान'. लगता है सरकारें अब ये नारा भी भूलने लगी हैं – जबकि 2 अक्टूबर आने में ज्यादा दिन बाकी नहीं हैं.

जीत का इवेंट मैनेजमेंट नहीं होता

उरी हमले के बाद प्रधानमंत्री ने देश को भरोसा दिलाया है कि दोषी बख्शे नहीं जाएंगे. प्रधानमंत्री की बातों पर यकीन के साथ उम्मीद की जानी चाहिये कि इस बार पठानकोट से कुछ अलग रिजल्ट होगा. वैसे प्रधानमंत्री को पता होना चाहिये कि देश के लोग बहुत इंतजार के मूड में नहीं दिख रहे. यहां तक कि ‘प्यू रिसर्च सेंटर’ के सर्वे में भी 60 फीसदी से ज्यादा लोगों ने सैन्य बल के इस्तेमाल का सपोर्ट किया है. इसी सर्वे में शामिल आधे से अधिक लोगों ने मोदी की पाकिस्तान नीति को भी नामंजूर कर दिया है.

ये बात अलग है कि सर्वे में शामिल लोग बयान को कार्रवाई का हिस्सा नहीं मानते, जैसा कि केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दावा किया था. ऐसे सर्वे में शामिल लोगों को डिप्लोमैटिक एक्शन की बात भी बहुत समझ में नहीं आती, देश के अंदर के कानून की बात और है – बाहर के लिए उन्हें बस आंख के बदले आंख वाली भाषा ही समझ आती है. वैसे सर्वे में शामिल वे ही लोग होते हैं जो वोट देकर सरकार चुनते हैं.

राहुल गांधी के भाषण में फिलहाल जो तेवर दिख रहा है चुनावों से पहले मोदी की बातें इससे भी धारदार हुआ करती थीं, लेकिन सत्ता की अपनी जिम्मेदारियां और मजबूरियां होती हैं. वैसे पाकिस्तान शुरू से ही मोदी के एजेंडे में दिखा – शपथ के मौके पर सार्क देशों के नेताओं को बुलाने के साथ ही मोदी ने नवाज शरीफ से अलग से खास तौर पर मुलाकात की. शरीफ को बर्थडे विश करने लाहौर भी पहुंचे – और जब भी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर मुमकिन हुआ मोदी और नवाज को साथ साथ देखा गया.

निश्चित रूप से ये इवेंट मैनेजमेंट था. अब राहुल गांधी इन इवेंट्स की बात कर रहे हैं या फिर जो मैडिसन स्क्वायर पर आयोजित हुआ था. या फिर मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान उन कार्यक्रमों को लेकर जिनमें 'मोदी-मोदी' की गूंज सुनाई दे रही थी.

राहुल गांधी को एतराज किस इवेंट से है ये साफ नहीं हो पा रहा है. क्या राहुल गांधी को मोदी का लाहौर दौरा ठीक नहीं लगा? फिर तो उन्हें वाजपेयी की लाहौर यात्रा से भी शिकायत होगी. तो क्या समझा जाए कि राहुल के चलते ही दस साल तक प्रधानमंत्री रहने के बावजूद मनमोहन सिंह एक बार भी लाहौर नहीं जा सके – या फिर उस जगह जहां वो पैदा हुए थे.

क्या राहुल गांधी को सुषमा स्वराज का हरी साड़ी में इस्लामाबाद जाना अच्छा नहीं लगा या राजनाथ सिंह का बगैर लंच किये पाकिस्तान से लौट आना? कहीं ऐसा तो नहीं कि राहुल गांधी भी उन्हीं लोगों की तरह सोच रहे हैं जैसे सर्वे में शामिल लोग. आखिर वे आम लोग ही तो हैं – और राहुल भी तो उन्हीं की बात करते हैं.

अगर राहुल पीएम होते…

अभी अभी की तो बात है ऑल पार्टी मीट में कांग्रेस सहित पूरे विपक्ष ने प्रधानमंत्री को कश्मीर समस्या सुलझाने के लिए पूरा मैंडेट दिया था. बाद में विपक्षी दलों के नेताओं का डेलीगेशन भी कश्मीर गया था – अब अलगाववादियों ने उनसे मिलने से इंकार कर दिया तो उसमें इवेंट मैनेजमेंट जैसा तो कुछ नहीं लगता. राहुल गांधी का आरोप ये भी है कि जब से जम्मू कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी की गठबंधन सरकार बनी है स्थिति बदतर हो गयी है. राहुल गांधी कहते हैं, "मैं पाकिस्तान के कृत्य की निंदा करता हूं. हालांकि, इसके लिए जमीन कश्मीर में एनडीए द्वारा की जा रही राजनीति ने ही तैयार की है. पीएम मोदी ने पीडीपी के साथ गठबंधन कर के कश्मीर में आतंक के लिए रास्ता खोला. हमारे जवान शहीद हुए हैं और मैं इसकी निंदा करता हूं."

लेकिन राहुल के इस बयान में पीडीपी के साथ बीजेपी के गठबंधन से आतंक के लिए रास्ता खोले जाने की बात नहीं समझ आ रही है. कानून व्यवस्था लागू करना सूबे की सरकार की जिम्मेदारी होती है – और जम्मू कश्मीर में अब तक सबसे लंबा कर्फ्यू लगा रहा है. निश्चित रूप से ये महबूबा सरकार की नाकामी है. मगर, बात सिर्फ इतनी भर ही है या कुछ और भी?

मान लेते हैं कि पीडीपी के सत्ता में आने के बाद ही मसरत आलम की रिहाई हुई थी, लेकिन जल्द ही उसे जेल भी भेज दिया गया. अभी तो ये महबूबा मुफ्ती ही हैं जो अलगाववादियों को अपनी हरकतों से बाज आने की बात कर रही हैं. जो महबूबा कल तक सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में मारे गये लोगों के साथ खड़ी होती रहीं, वो सवाल खड़े कर रही हैं कि पत्थरबाज सड़कों पर दूध-ब्रेड लेने नहीं निकले थे.

क्या बीजेपी और पीडीपी के गठबंधन की सरकार नहीं होती तो महबूबा ऐसे कभी बोल पातीं? कोई भी लड़ाई कैसे जीती जाती है? क्या लड़ाई जीतने का कोई खास तरीका हो सकता है? एक तरीके से एक ही लड़ाई जीती जा सकती है – दूसरी नहीं, ऐसा माना जाता है.

वैसे गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरत सोलंकी का दावा है कि अगर राहुल गांधी देश के प्रधानमंत्री होते तो कश्मीर समस्या इतनी खराब स्थिति में नहीं पहुंचती. अब ये तो किस्मत की बात है – क्योंकि हर कोई नसीबवाला नहीं होता.

ICC ने आचार संहिता और UDRS में किया बदलाव

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आइसीसी) ने खिलाड़ियों और खिलाड़ियों के सहयोगी स्टाफ के लिए आइसीसी आचार संहिता तथा अंपायर निर्णय समीक्षा प्रणाली (यूडीआरएस) में ‘अंपायर की कॉल’ में बदलाव किए हैं.

आचार संहिता के अपराधों की सूची या प्रत्येक अपराध के लिए चेतावनी, जुर्माना, निलंबन आदि में कोई बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन संहिता का उल्लंघन करने वाले खिलाड़ी के नाम पर नकारात्मक अंक जमा होंगे, जिससे लगातार गलतियां करने वाले खिलाड़ी को निलंबित किया जा सकता है.

नकारात्मक अंक किसी भी खिलाड़ी के खाते में दो साल तक जमा रहेंगे और सभी खिलाड़ी 22 सितंबर से शून्य बैलेंस से शुरुआत करेंगे. एलबीडब्ल्यू को लेकर ‘अंपायर की कॉल’ से संबंधित यूडीआरएस का नियम भी 22 सितंबर से ही प्रभावी होगा.

इन नियमों के तहत पहला मैच रविवार को दक्षिण अफ्रीका और आयरलैंड के बीच बेनोनी में खेला जाएगा. इस परिवर्तन के बाद यह माना जा रहा है कि इससे गेंदबाजों को अधिक फायदा मिलेगा तथा मैदानी अंपायर का फैसला तीसरे अंपायर को भेजे जाने पर अधिक बल्लेबाजों को आउट दिया जाएगा.

खुल रही है धीरे-धीरे ‘जियो’ की पोल

रिलायंस जियो की धमाकेदार लॉन्चिंग के बाद अब धीरे-धीरे चुनौतियां सामने आने लगी हैं. अनलिमिटेड वॉयस कॉलिंग और सिर्फ 4जी नेटवर्क पर सबसे सस्‍ता डाटा देने का वादा करने वाली जियो कॉल ड्रॉप की समस्‍या से जूझ रही है. कंपनी द्वारा जारी किए गए एक बयान के मुताबिक, जियो की 80 फीसदी से ज्‍यादा कॉल फेल हो जा रही हैं.

पिछले सप्‍ताह एक बयान में जियो ने कहा, ”पिछले कुछ सप्‍ताह में समस्‍या बेहद गंभीर हो गई है, हर 100 में से 80 कॉल फेल हो रही हैं.” हालांकि जियो ने इसके लिए एयरटेल और वोडाफोन जैसे बड़े ऑपरेटर्स पर आरोप मढ़ा है.

जियो का कहना है कि प्रतिद्वंदी ऑपरेटरों ने पर्याप्‍त इंटरकनेक्‍शन प्‍वाइंट्स नहीं मुहैया कराए. यूजर्स को “सुपीरियर वॉयस टेक्‍नोलॉजी का फायदा” नहीं लेने दिया गया.

धीरे धीरे लोग इससे परेशान होने लगे हैं और उनकी शिकायतों की लिस्ट भी लंबी होती जा रही है.

ये हैं यूजर्स की रिलायंस जियो से शिकायत

यूजर्स ने बताया कि उन्हें काफी दिक्कते आ रही हैं. कई लोगों ने यह भी बताया कि इंटरनेट अब पहले जैसा फास्ट नहीं, तो किसी ने कहा कि इंटरनेट तो चल रहा है लेकिन कॉल नहीं हो रही है.

कुछ लोगों ने बताया है कि उन्होंने 20 दिन पहले सिम लिए हैं , लेकिन अभी तक एक्टिवेट नहीं हुआ है. लोगों की यह भी शिकायत है कि कस्टमर सपोर्ट काफी घटिया है. काफी देर के बाद बात भी होती है तो समस्या का समाधान नहीं मिलता.

हालांकि इनमें से कई यूजर्स का यह भी मानना है कि यह फ्री है तो हमें कोई शिकायत नहीं होनी चाहिए, जब पैसे देने होंगे तो शिकायत करेंगे.

अब हम आपको बताते हैं कि आपके पास जियो है तो इन दिक्कतों का सामना कर सकते हैं.

स्टेबल नेटवर्क की प्रॉब्लम: कभी आपको 15Mbps स्पीड मिलेगी और अगले ही पल 100Kbps तक की स्पीड हो जाती है. 5 सितंबर के बाद से नेटवर्क की दिक्कतें बढ़ गई हैं. अगर आप कार में हैं या पैदल चलते हुए नेटवर्क लगातार आता जाता रहता है. ऐसे में इंटरनेट काफी स्लो चलता है.

वॉयस कॉल की समस्या: कई लोग महीने भर से जियो सिम से इंटरनेट तो चला रहे हैं लेकिन उससे एक बार भी कॉल नहीं किया है. वजह ये है कि इससे किसी को कॉल लगती ही नहीं है. कॉल लग जाए तो भी वॉयस क्वालिटी काफी बदतर है. हालांकि एप टु एप कॉलिंग इससे कुछ ठीक है लेकिन इसके लिए दोनों तरफ VoLTE वाला स्मार्टफोन जरूरी है.

सिम कार्ड काम नहीं कर रहा है!

5 सितंबर के बाद से कंपनी के मुताबकि जियो सिम सभी 4G स्मार्टफोन में चलेगा . लेकिन कई लोगों के लिए ऐसा नहीं है. 4G डिवाइस होने के बाद भी सिम काम नहीं कर रहा है. ऐसे मामले ज्यादातर एक साल पुराने स्मार्टफोन में दिख रहे हैं. हालांकि इसके 11 ऐप्स इंस्टॉल करके और सेटिंग्स में बदलाव करके कुछ लोगों के लिए यह काम कर रहा है.

सैक्स करने से बढ़ती है खूबसूरती

क्या सैक्स का सुंदरता से संबंध है? सुनने में भले ही अटपटा लगे पर है सोलह आने सच. कोई महिला अपनी खूबसूरती बढ़ाने व निखारने के लिए भले ही कई तरह के ब्यूटी प्रोड्क्ट्स व जिम में अपना पैसा बहाएं. मगर हम आप से यह कहें कि खूबसूरती बढ़ाने के लिए सैक्स सब से असरकारक है तो गलत नहीं होगा. दरअसल यह बात हम नहीं कह रहे हैं शोध से साबित हुआ है कि सैक्स करने से हारमोन निकलते हैं जिन से त्वचा को लाभ पहुंचता है, रक्त प्रवाह बढ़ता है, जिस से शरीर में निखार आता है, सुंदरता बढ़ती है, पर इसे असरकारक तब माना गया है जब सैक्स को कुदरती तरीके से किया गया हो.

सैक्सः जीवन की गहराई तक जुड़ा है

स्कौटलैंड के रौयल एडिनबर्ग हौस्पीटल के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा नुस्खा बताया है जो मानवीय जीवन का एक अहम हिस्सा है. शोधकर्ताओं ने इस बारे में कुछ दिशानिर्देश भी जारी किए हैं. वे हैं प्रेमपूर्वक सैक्स यानि सिर्फ पति पत्नी के साथ ही सैक्स करने से मनचाहा परिणाम मिलता है. क्योंकि अनसेफ सैक्स से न सिर्फ तमाम तरह की बीमारियों का खतरा रहता है बल्कि स्ट्रैस भी बढ़ता है. इस से मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालता है, नतीजतन एगिंग की प्रक्रिया में तेजी आ जाती है.

बढ़ती उम्र घटाए खूबसूरती बढ़ाए

सैक्स कुदरती रूप से आनंद और उत्साह का संचार करता है. शोधकर्ताओं का कहना है कि कम अंतराल में सैक्स करने से (हफ्ते में कम से कम 3 बार) आदमी की उम्र उस की असली उम्र की तुलना में कम दिखती है, सैक्सुअल एक्टीविटी किसी एक्सरसाइज से कम नहीं है. इस से स्किन को यंग बनोन वोल और खुशी बढ़ाने वाले हार्मोन्स रिलीज होते हैं. इस से आप का चेहरा ग्लो करने लगता है और स्किन में कसाव आता है.

जानिए क्या क्या हैं फायदे

  • सैक्स इंसान की सेहत बनाए रखने में मदद करता है.
  • यह कैलोरी बर्न करने का काम करता है साथ ही दिल और दिमाग को सेहतमंद बनाए रखता है.
  • सैक्स कुदरती रूप से खूबसूरती में इजाफा करता है.
  • यह खूबसूरती बढ़ाने वाले प्रोडक्ट्स और स्टाइल के मुकाबले 20 (बीस) ही नजर आता है.
  • सैक्स कर के अपनी त्वचा की उम्र को 4 साल तक कम कर सकते हैं.
  • सैक्स एक कुदरती उपाय जो खूबसूरती बढ़ाए
  • सैक्स के यह कुदरती उपाय आप के चेहरे की शाइन बढ़ा सकते हैं.

खुशी का एहसास

सैक्स उन एक्टीविटीज में से है. जिस में दिमाग एकसाथ एक्साइट और रिलैक्स होता है. सैक्स के दौरान शरीर में औक्सीजन की मात्रा बढ़ती है और इस से कोशिकाओं को नई एनर्जी मिलती है. इस से आप का मूड बेहतर रहता है.

स्वस्थ बाल

सैक्स के दौरान ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है. इस से बालों को एक नेचुरल मौइश्चराइजर मिलता है. इस से आप के बाल चमकदार बनते हैं.

त्वचा को रखें कोमल और स्थिर

जो महिलाएं नियमित सैक्स करती हैं उन की त्वचा में अहम किरदार निभाने वाले हार्मोन एस्ट्रोजेन का स्राव अधिक होता है. इस के साथ ही त्वचा को कुदरती रूप से कोमल और स्थिर बनाने वाले हार्मोन कोलेजन का स्राव भी अधिक होता है.

झुर्रियों से बचाएं

भले ही आप सूरज की हानिकारक किरणों से दूर रहें लेकिन फिर भी आप को झुर्रियां हो सकती हैं. ये झुर्रियां आप के हृदय तक रक्त पहुंचाने वाली धमनियों को हो सकती हैं. इस से दिल पर बुरा असर पड़ सकता है. दिल और चेहरे पर झुर्रियां पड़ने की प्रक्रिया समान है. सैक्स से आप के शरीर में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ जाता है जिस से चेहरे पर कुदरती चमक आ जाती है.

स्तनों का आकार बढ़ाएं

स्तनों को महिलाओं की खूबसूरती का अहम हिस्सा माना जाता है. सैक्स के दौरान स्तनों का आकार 25 फीसदी तक बढ़ जाता है इसलिए जानकार मानते हैं कि जो महिलाएं अपनी सैक्स लाइफ से अधिक संतुष्ट होती हैं उन का शरीर अधिक सुडौल होता है.

पेट की चर्बी हटाएं

शरीर में अगर कौलेस्ट्रौल का स्तर अधिक हो जाए, तो इस का सीधा असर हमारे पेट पर पड़ता है. यहां अतिरिक्त वसा इकट्ठा होने लगती है. औक्सीटोसिन इस से निजात दिलाता है यानि और्गेज्म से आप के शरीर पर जमा अतिरिक्त चर्बी दूर होती है.

तनाव दूर करें

तनाव से आप के चेहरे पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं. और्गेज्म के दौरान शरीर में बड़ी मात्रा में औक्सीटोसिन का स्राव होता है. यह तनाव के काफी उत्तरदायी माने जाने वाले कौरटिसोल हार्मोन को दूर करता है.

आत्मविश्वास में करें इजाफा

जिन लोगों को अपने जीवन का लक्ष्य पता होता है, वे अधिक आकर्षक होते हैं सैक्स और व्यायाम मस्तिष्क के समान क्षेत्रों पर प्रभाव डालते हैं आप अपने आसपास की दुनिया के बारे में अच्छा महसूस करते. आप मानसिक रूप से अधिक शांति एकाग्र, शक्तीमान और सामर्थ्यवान महसूस करते.

इन उपायों को अपना कर अपनी सैक्स लाइफ को बेहतर बनाने की कोशिश कीजिए इस से सेहतमंद तो होगी ही साथ ही खूबसूरती भी निखर जाएगी.

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