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मुंगेरी लाल मोदी और उनके हसीन सपने

सैद्धांतिक रूप से यह बात सही लगती है कि पुराने नोट हटाकर आप नए नोट चलन में लाएं तो अर्थव्यवस्था से कालाधन निकाल सकते हैं, लेकिन हिन्दुस्तान एक जटिल अर्थव्यवस्था है, जहां छोटे कारोबारी हैं, गांव में किसान लोग हैं, उनका क्या होगा. आप अस्पताल जाएं तो कैश लेकर जाते हैं. छोटे स्तर पर नकदी अर्थव्यवस्था ही चलती है. उनको बड़ी असुविधा हो जाएगी.

बड़े उद्योगों के पास तो सारी सुविधाएं होती हैं, वे इससे निपटने के लिए रास्ता निकाल लेंगे. उन्हें जो भी हेरा-फेरी करनी होगी, कर लेंगे. अगले दो-तीन महीने में हर तरफ अफरा-तफरी का माहौल होगा.

एक ऐसे समय में जब अर्थव्यवस्था सुस्त है, लोग कम खर्च करेंगे, उपभोग पर असर पड़ेगा. इस फैसले को अमल में लाना इतना आसान नहीं है. राजस्व सचिव खुद कह रहे हैं कि 20-25 दिन लोगों को दिक्कत होगी. इससे उपजी असुविधा कम से कम तीन महीने तक जारी रह सकती है.

जो नोट लिए जाने हैं और लोगों को जो समय-सीमा दी गई है, लगता है कि इसे लागू करने के लिए कोई तैयारी नहीं की गई है. बड़ा अचंभा यह कि उन्होंने कहा एक आदमी के बदले 10 आदमी उसकी नकदी को बदल सकता है. मसलन किसी के पास एक करोड़ नकदी कालाधन है तो वह हजार लड़कों को इकट्ठा करके कहेगा आप बैंक जाकर इसे बदल लाओ. छोटी-छोटी रकम के जरिए ये किया जा सकता है. यह एक तरह से बिना टैक्स लिए पिछले दरवाजे से छूट देने का रास्ता भी हो सकता है. हिंदुस्तान में लोग ऐसे पैंतरे अपना सकते हैं.

इसका मतलब यह नहीं है कि इसे ब्लैक मनी की समस्या खत्म हो जाएगी और सरकार को टैक्स मिल जाएगा. सरकार की कोशिश लोगों को बैंकों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करने की है. भारत में बहुत से लोग नकदी का लेन-देन करते हैं. सरकार ने जन-धन योजना में करोड़ों लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा है, लेकिन इन खातों का लगभग 20 फीसदी ही ऑपरेशनल है. हो सकता है कि इससे लोगों को बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने का रुझान बढ़ेगा. लोग अपनी नगदी बैंकों में जमा करेंगे. दिक्कत ये है कि इसे बिना तैयारी के लागू किया जा रहा है.

यह फैसला लोगों के लिए चौंकाने वाला है. यह शादियों का सीजन है. गांवों में सीमित आमदनी वाले लोग भी इस सीजन में 8-10 लाख रुपये खर्च कर देते हैं. ये रकम नकद खर्च की जाती है और ऐसा करने वाले किसान लोग हैं. उनके लिए भाग-दौड़ बढ़ जाएगी. ग्रामीण भारत में लोग अस्पताल भी कैश लेकर ही जाते हैं. छोटे स्तरों पर लोगों के लिए बड़ी मुसीबत होने वाली है. बड़े कारोबारियों को कोई दिक्कत नहीं होने वाली है, उन्हें कभी कोई दिक्कत होती भी नहीं है. राजनीतिक दलों से उनके ताल्लुकात अच्छे होते हैं.

थोड़े के समय के लिहाज से देखें तो लोग कम खर्च करेंगे और खपत गिरेगी, उपभोग कम होगा. ब्लैक मनी के पीछे बड़े लोग हैं, इसके अपने नुकसान हैं, लेकिन छोटे-मोटे कारोबार में लगे लोग, जिनका सारा बिजनेस नकद में होता है, उन्हें बहुत दिक्कत होने वाली है. उसे बैंक जाने की आदत नहीं रही. आदत बनाने में वक्त लगता है. उन्हें शिक्षित किए जाने की जरूरत है. यह रातोंरात नहीं होने वाला है, सरकार की यही दिक्कत है, वह सब कुछ रातोंरात करना चाहती है.

परेशान ना हों, इन 10 बातों का रखें ध्यान

नरेंद्र मोदी की सरकार ने आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया के तहत 500 और 1000 रुपये के नोटों के लेन देन पर मंगलवार देर रात से रोक लगा दी है. सरकार के इस फ़ैसले का आप पर कितना असर होगा, और आपको क्या क्या करने की जरूरत है.

1. पहली बात तो यही है कि आपके पास काला धन नहीं हो तो परेशान नहीं हो. आपके पास 30 दिसंबर तक का वक्त है अपने पैसों को बैंक और पोस्ट ऑफ़िस में जमा कराने के लिए. आप बैंक में इसे जमा कराके नए नोट हासिल कर सकते हैं.

2. आपातकालीन परिस्थितियों के लिए सरकार की ओर से राहत भी दी गई है. मेडिकल जरूरतों के लिए आप पुराने नोट का इस्तेमाल कर सकते हैं. 8 नवंबर से लेकर 11 नवंबर के मध्यरात्रि तक अस्पतालों में पुराने नोट मान्य रहेंगे. इन 72 घंटों तक पेट्रोल पंप, डीज़ल पंप और सीएनजी स्टेशनों सहित कई जरूरी जगहों पर आप पुराने नोट इस्तेमाल कर सकते हैं.

3. आप अपने डेबिट कॉर्ड और क्रेडिट कॉर्ड के अलावा इलेक्ट्रॉनिक भुगतान भी कर सकते हैं. इसमें कोई सीमा नहीं है.

4. अगर आपके घर में 500 और 1000 के नोट हैं, तो उन्हें जमा कर लीजिए. नौ नवंबर को बैंक बंद हैं. इसके बाद 10 नवंबर से बैंकों में लंबी कतार में खड़ा होना पड़ सकता है.

5. पुराने नोट 10 नवंबर से 30 दिसंबर तक बैंक और पोस्ट ऑफ़िस में जमा कराए जा सकते हैं.

6. 10 नवंबर से 24 नवंबर तक आप 4000 रुपये तक बैंकों में एक्सचेंज कर सकते हैं. 25 नवंबर के बाद लिमिट बढ़ाई जाएगी, लेकिन आपको पहचान पत्र के साथ बैंक जाना होगा.

7. शुरुआती दिनों में आप 10000 रुपये के नए नोट प्रतिदिन के हिसाब से निकाल सकते हैं और प्रति सप्ताह 20000 रुपये. इसलिए ख़रीददारी के लिए क्रेडिट और डेबिट कॉर्ड का इस्तेमाल करें.

8. अगर आप 30 दिसंबर तक पुराने नोट जमा नहीं करा पाते हैं, तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है. रिजर्व बैंक की शाखाओं में घोषणा पत्र और आईडी कॉर्ड के साथ आप 31 मार्च, 2017 तक अपने पैसे जमा करा सकते हैं.

9. बैंक में जो पैसा जमा कराएं या फिर एक्सचेंज करें, उनके सीरियल नंबर नोट रखें क्योंकि बैंक इस पर नज़र रखेगा कि कौन सा आदमी कितना पैसा जमा करा रहा है. ऐसे में ज़ाहिर है कि इनकम टैक्स विभाग की भी नज़र रहेंगी,

10. बैंक में सभी जमा निकासी वीडियो कैमरा के दायरे में होंगे, रिजर्व बैंक ने लोगों को सावधानीपूर्वक वैध पैसे जमा कराने की सलाह दी है.

सोने की कीमत में भारी उछाल

कालेधन पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए मंगलवार आधी रात से 500 और 1000 रुपये के नोट बंद कर दिए हैं. इसके बाद सोने के दाम में उछाल आया है. आधी रात से सोने की कीमत में भी भारी उछाल आया है. सोने का भाव प्रति तोला 4000 रुपया बढ़ गया है. मुंबई में प्रति 10 ग्राम सोने की कीमत में 4000 रुपये का इजाफा हुआ है.

छिटपुट सौदों के बीच दिल्ली सर्राफा बाजार में में कल सोना 30,850 रुपये प्रति 10 ग्राम पर स्थिर रहा जबकि चांदी 250 रुपये के सुधार के साथ 43,850 रुपये प्रति किलो पर पहुंची. बाजार सूत्रों के अनुसार विदेशों में मजबूती के रख के अलावा स्थानीय हाजिर बाजार में औद्योगिक इकाइयों और सिक्का निर्माताओं की उठान बढ़ने से चांदी में सुधार दर्ज हुआ.

नरेंद्र मोदी: फैसला बड़ा, पर दिक्कतें कई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि भारत में 500 और 1000 रूपए के पुराने नोटों का मंगलवार मध्यरात्रि से इस्तेमाल नहीं हो पाएगा. इस घोषणा से पूरे देश में, ख़ास तौर से शहरों और कस्बों में व्यापक असर हुआ है. लोग घबराए भी हुए हैं कि यदि इन नोटों को इस्तेमाल नहीं कर सकते तो फिर लेन-देन कैसे होगा?

गौरतलब है कि पूरी दुनिया में काले धन का ट्रांज़ैक्शन ज़्यादातर बड़े नोटों में होता है. दिल्ली या किसी भी बड़े शहर में घरों की डील हमेशा काले धन में होती है. प्रापर्टी का रेट जितना होता है, वो पूरा चेक से नहीं होता है. जो पैसा नगद दिया जाता है वो बड़े नोटों में ही होता है.

अगर उदाहरण लें कि दो करोड़ की डील है और चेक से एक करोड़ दिए जा रहे हैं तो बाकी का एक करोड़ सौ रूपए में तो नहीं दिया जाएगा. वो तो पांच सौ या हज़ार में ही होगा. अब प्रधानमंत्री की घोषणा से काले धन पर नियंत्रण हो सकता है. वैसे ऐसा फैसला पहली बार नहीं हुआ है. मोरारजी देसाई जब वित्त मंत्री थे साठ के दशक में तब ऐसा फैसला किया गया था. ऐसा माना जा रहा है कि 500 और 1000 के पुराने नोट जब सर्कुलेशन से निकल जाएंगे, तो फिर नए नोट आ जाएंगे. इससे उम्मीद ये है कि काले धन का एक बड़ा हिस्सा खत्म हो जाएगा.

इस तरह के फैसले की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि भारत जैसे देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र का है. जैसे कामवाली बाई है जो हमारे आपके घर आती है. उसे आप हज़ार रूपए दे देते हैं लेकिन उसके पास खाता नहीं है. तो वो क्या करेगी. ये सोचिए. उनके लिए दिक्कत है जिनके पास बैंक खाते नहीं हैं. ये एक बड़ा झटका है. अगर पैसे जितने भी हों लेकिन उसका हिसाब किताब हो, तब कोई दिक्कत नहीं है. दिक्कत वहां है जहां आपके पास पैसे का हिसाब नहीं हैं.

सरकार को लोगों को भरोसा दिलाना चाहिए कि जिनके पास काला धन नहीं है उन्हें कोई दिक्कत नहीं होगी. रिज़र्व बैंक और वित्त मंत्रालय अगले कुछ दिनों में क्या कदम उठाते हैं ये देखने वाली बात होगी.

जब बड़े गलत करें

 

हमेशा बड़े सही ही हों, यह जरूरी नहीं. कई बार वे भी ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो बच्चों को गवारा नहीं होतीं, लेकिन वे सिर्फ इसलिए चुप रहते हैं, क्योंकि वे बड़ों के सामने बोलना ठीक नहीं समझते. उन्हें लगता है कि अगर उन्होंने बड़ों को टोका तो उन पर बदतमीज होने का टैग लग जाएगा. कई बार किशोर देखते हैं कि कैसे उन के रिश्तेदार सिर्फ पैसा ऐंठने के लिए या फिर खानेपीने के लिए ही मम्मीपापा को पूछते हैं और जैसे ही उन का मतलब निकल जाता है वे बात करना छोड़ देते हैं. कई बार पेरैंट्स भी गलती करते हैं, लेकिन किशोर उन्हें कुछ नहीं बोल पाते. ऐसे में किशोरों की यह जिम्मेदारी बनती है कि जब बड़े गलत करें तो उन्हें समझाएं. हो सकता है कि आप की कोशिश रंग लाए और रिश्ते बिगड़ने से बच जाएं.

जब बड़े गलती करें तो कैसे निभाएं भूमिका डरें नहीं, समझदारी से बढ़ें

भले ही आप उम्र में छोटे हैं लेकिन समझ तो पूरी रखते हैं. जैसे जब आप के फ्रैंडसर्किल में कोई गलती कर देता है तो आप उसे समझाते हैं, ठीक उसी तरह अगर आप अपने घर में बड़ों को गलती करते हुए देखें तो उन्हें समझाएं न कि चुप्पी साध लें. यदि मम्मी से कोई गलती होने पर पापा उन पर बरस पडें, तो आप मूकदर्शक बन कर देखते न रहें, बल्कि पापा को समझाएं कि मम्मी की इतनी छोटी सी बात पर आप ने अपना आपा खो दिया. जब आप लोग ऐसी गलती करेंगे तो हम से अच्छे की उम्मीद कैसे कर सकेंगे. इस से आप के पेरैंट्स को लगेगा कि अगर यह सबकुछ ऐसे ही चलता रहा तो बच्चों के हाथ से निकलने में देर नहीं लगेगी. इसलिए वे खुद को सुधारने का प्रयास करेंगे.

गलती में भागीदार न बनें

यदि आप के पेरैंट्स अपने मम्मीपापा यानी आप के दादीदादा से तूतड़ाक करते हों या फिर उन की हर सही बात भी सिर्फ इसलिए काट देते हों कि घर में सिर्फ उन का ही डोमिनेशन रहे तो यह सही नहीं है. ऐसे में अगर आप भी उन की देखादेखी अपने बड़ों की रिस्पैक्ट करना भूल जाएं तो इस का मतलब आप उन को कौपी कर रहे हैं. इसलिए जब पेरैंट्स गलती करें तो हो सके तो उन्हें समझाएं अन्यथा उन्हें कौपी न करें.

बड़ों की गलती से न बिगाड़ें अपना रिलेशन

हो सकता है कि आप के परिवार में पैसों के लेनदेन को ले कर या फिर परिवार का संयुक्त बिजनैस होने के कारण आप के चाचाताऊ में लड़ाई चल रही हो, लेकिन आप के संबंध अपने कजिंस के साथ काफी अच्छे हों. ऐसे में परिस्थितियों को देखते हुए घर से दबाव पड़ रहा हो कि जब उन्हें रिश्तों का लिहाज नहीं है तो तुम्हें भी उन के बच्चों से रिश्ता रखने की कोई जरूरत नहीं है, ऐसे में आप बहकावे में आ कर अपने कजिंस से बात करनी बंद न करें बल्कि उन से अपनी पहले वाली ट्यूनिंग बरकरार रखते हुए मम्मीपापा को भी समझाएं कि रिश्ता तोड़ना आसान है, लेकिन उसे बनाने में वर्षों लगते हैं. इसलिए अपनी तरफ से अच्छा करने की कोशिश करें. हो सकता है आप का पौजिटिव विचार ही सभी प्रौब्लम्स का सौल्यूशन बन जाए.

गैट टू गैदर से जोड़ें तार

बड़ों के मन में दूरियां बन गई हैं, जिस कारण कोई एकदूसरे की शक्ल भी देखना पसंद नहीं करता, तो ऐसे में आप कजिंस की हैल्प से गैट टू गैदर करें. इस में आप का रोल अहम होगा, क्योंकि अगर आप ने बता दिया कि गैट टू गैदर का मकसद परिवार के लोगों के बीच आई दूरियों को खत्म करना है तो कोई भी आने को तैयार नहीं होगा. ऐसे में आप और आप के कजिंस अपनेअपने मम्मीपापा को किसी बहाने से उस तय जगह पर ले आएं जहां आप ने पार्टी की प्लानिंग की है. फिर जब सब वहां एकदूसरे को साथ देखेंगे तो दंग रह जाएंगे. एकदूसरे को अपनी आंखों के सामने देख कर सब का गुस्सा छूमंतर हो जाएगा. अगर फिर भी नाराजगी दिखे तो उन के बीच दोस्ती कराने में आप को महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी.

अपनी स्किल से करें खुश

साइना होशियार तो बहुत थी, लेकिन उस का कौंप्लैक्शन थोड़ा डार्क था जिस कारण सब उसे इग्नोर करते थे. यहां तक कि उस की चाची भी उसे सांवली कह कर बुलाती थीं. यह भी कहने से नहीं कतराती थीं, ‘पता नहीं घर में साइना का रंग किस परगया है, यह कोई भी कपड़ा पहन ले इस पर फबता ही नहीं और देखो तो मेरा राहुल कितना सुंदर है. इस पर हर चीज फबती है.’ ऐसे में साइना का नर्वस होना लाजिमी था, लेकिन राहुल जो साइना का कजिन था, ने चाची को सब के सामने टोकते हुए कहा कि चाची जो अट्रैक्शन सांवले रंग वालों में होता है वह अन्य किसी में नहीं. साइना के फीचर्स तो देखो कितने शार्प हैं और साथ ही जो गुण साइना में हैं उन के बल पर वह नाम रोशन करेगी. उस सुंदरता का क्या फायदा जो दूसरों को सिर्फ पीड़ा ही पहुंचाती हो. राहुल की यह बात सुन कर चाची को अपनी गलती का एहसास हुआ, जिस तरह से राहुल ने अपने स्किल से चाची को उन की गलती का एहसास कराया ठीक उसी तरह आप भी कर सकते हैं.

जब बड़े दिखाएं पैसे का घमंड

आप के रिलेटिव्स पैसे के घमंड के कारण किसी से सीधे मुंह बात नहीं करते हों और हमेशा पैसों की ही ढींगें हांकते हों कि हमारे बच्चे तो हमेशा ब्रैंडेड कपड़े ही पहनते हैं, सब के पास अपनी पर्सनल कारें हैं. हम तो मौल्स के अलावा कहीं से शौपिंगही नहीं करते, अपने बच्चों को हम पढ़ने के लिए विदेश भेजेंगे, जितने स्पेस वाले मकान में तुम रहते हो उतने स्पेस में तो हमारी गाडि़यां ही खड़ी होती हैं. ऐसे में आप उन्हें बताएं कि पैसे से ज्यादा अहमियत रिश्तों की होती है, क्योंकि दुख के समय अपने ही काम आते हैं. ऐसे पैसे का भी क्या फायदा जो इंसान को घमंडी बना दे. खुशी तो उस में है जब परिवार के सभी लोग साथ हों. आप की यह सीख उन्हें सही राह दिखाने के काम आएगी.

समझाएं संयुक्त परिवार का महत्त्व

जब परिवार में एकदूसरे से विचार नहीं मिलते तब बड़े अलग होने में ही समझदारी समझते हैं, जो सही नहीं है. सोच कर देखिए, यदि आप का बच्चा गलती करे तो क्या आप उसे हमेशा के लिए अलग जाने की इजाजत दे देंगे. नहीं न, उसे पहले प्यार से समझाएंगे और सौल्यूशन ढूंढ़ने की कोशिश करेंगे. ठीक इसी तरह अगर परिवार के लोग अलग जाने का मन बना चुके हैं तो उन्हें बताएं कि जो मजा साथ रहने में है वह अलग रहने में नहीं. अलग रहने से दिलों में दूरियां बढ़ जाएंगी और सब से ज्यादा इफैक्टिड होंगे घर के बच्चे, जिन्हें हर बात में बड़ों की राय की जरूरत होती है. इसलिए जिस बात को ले कर परेशानी हो रही है उसे मिलबैठ कर दूर करने की कोशिश करें न कि संयुक्त परिवार से एकल परिवार में जाने की. आप की यह समझदारी परिवार को जोड़ने में सहायक होगी.

जब जबरन थोपें अपना फैसला

आप को अपने कोर्स के दौरान न जाने कब अपनी क्लासमेट से प्यार हो गया आप को पता ही नहीं चला और जब इस बात का जिक्र आप अपनी मम्मी से करें तो वे आप पर बरस पड़ें और जबरदस्ती आप पर अपना फैसला थोपने लग जाएं कि तुम्हें हमारी पसंद की लड़की से ही शादी करनी होगी, तो आप उन्हें समझाएं कि भले ही जोरजबरदस्ती में आ कर मैं आप की पसंद को हां कर दूं, लेकिन मैं जिंदगीभर इस रिश्ते को बोझ समझ कर ही ढोऊंगा. ठीक इसी तरह अगर आप अपनी पसंद का प्रोफैशन चुनना चाहते हैं, लेकिन स्टेटस के लिए आप के पेरैंट्स आप को डाक्टर या इंजीनियर बनाने का दबाव डालें तो उन्हें समझाएं कि ऐसी झूठी शान का क्या फायदा, जिस में मेरी रुचि ही नहीं है. आप की झूठी शान के लिए मैं पढ़ाई कर लूंगा, लेकिन जब मैं उस क्षेत्र में सफल ही नहीं हो पाऊंगा तो क्या फायदा. इस से उन्हें अपनी गलती का एहसास होगा और वे आप पर जबरदस्ती फैसला नहीं थोपेंगे.

जब खुद को समझें सुपीरियर

कुछ रिश्तेदारों में हर चीज में खुद को सुपीरियर दिखाने की आदत होती है. वे अपने व अपने बच्चों के सामने किसी को कुछ नहीं समझते. जैसे अगर उन का बच्चा आईटी सैक्टर में जौब करता हो और दूसरे का टीचिंग सैक्टर में तो हर जगह अपने बच्चे की तारीफ करते हुए दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करने लगते हैं. जब आप अपने परिवार में किसी को ऐसा करते देखें तो उन्हें समझाते हुए बताएं कि अगर बड़े होते हुए आप ऐसी गलतियां करेंगे तो घर में बच्चों को क्या शिक्षा मिलेगी? वे भी आगे चल कर ऐसा ही व्यवहार करेंगे. तब आप को लगेगा कि बच्चे आप को इज्जत नहीं देते, आप का सम्मान नहीं करते, इसलिए खुद को सुपीरियर समझने की हैबिट को छोड़ें, क्योंकि यह आदत आप की पर्सनैलिटी पर गलत प्रभाव डालेगी.

ड्रामेबाज रिश्तेदारों को समझाएं

छोटीछोटी बातों को ले कर ड्रामा क्रिऐट कर के सब का मूड खराब करने की आदत हर घर में कुछ लोगों की होती है. जैसे आप के पेरैंट्स ने खुद सब को फोन कर के इन्वाइट किया हो, लेकिन फिर भी वे सब से यही कहें कि हमें तो फौरमैलिटी के लिए बुलाया गया है, जिसे दिल से बुलाना था उसे तो कई दिन पहले ही इन्विटेशन दे दिया था या फिर खाने को देख कर मुंह बनाने लगें कि इन्होंने तो हमारी बेइज्जती करने के लिए हमारी पसंद की एक भी डिश नहीं बनाई, तो ऐसे में आप छोटे होते हुए भी बड़ों की भूमिका निभाएं और कहें कि आंटी एक बार यह डिश खा कर तो देखिए यह आप की फेवरिट डिश बन जाएगी. एक बार ऐसा कह कर देखिए, वे सब के सामने खुद को अच्छा दिखाने के लिए डिश की तारीफ जरूर करेंगे. इस तरह जब बड़े गलत करें तो आप उन्हें सही राह पर ला सकते हैं.

व्‍हाट्सऐप पर ऐसे भेजें ब्‍लैंक मैसेज

हाल ही में इसमें वीडियो चैट का ऑप्‍शन भी आ गया है जिसकी वजह से ये ज्‍यादा कम्‍फर्टटेबल ऐप हो गई है और लोगों को इसके माध्‍यम से एक दूसरे से जुड़ने का मौका मिल जाता है. इसके यूजर्स की संख्‍या भी दिनों-दिन इसी वजह से बढ़ती जा रही है.

आप इस ऐप में किसी को मैसेज, फोटो या वीडियो भेज सकते हैं. लेकिन क्‍या आपको इसमें किसी को ब्‍लैंक मैसेज भेजना आता है. आइए हम आपको बताते हैं कि आप इस ऐप पर किसी को ब्‍लैंक मैसेज कैसे भेज सकते हैं:

स्‍टेप- 1: डाउनलोड करें ''नो वर्ड'' ऐप

सबसे पहले आपको गूगल प्‍ले स्‍टोर पर जाना होगा और वहां से नो वर्ड नाम का ऐप इंस्‍टॉल करना होगा.

स्‍टेप – 2: एपीके को इंस्‍टॉल करें और अननोन सोर्स को इनेबल करें अब आपको एपीके को इंस्‍टॉल करना होगा और फोल्‍डर को डाउनलोड करना होगा. इसके बाद, आपको अपने फोन में अननोन सोर्स को इनेबल करना होगा. आप ऐसा निम्‍न प्रकार कर सकते हैं:सेटिंग – सिक्‍योरिटी – अननोन सोर्स

स्‍टेप – 3: नो वर्ड ऐप को ओपन करें अब आपको नो वर्ड ऐप को ओपन करना होगा. इस ऐप को खोलने के बाद, आप ऐप के होम पेज पर सेंड बटन को देख सकते हैं.

स्‍टेप – 4: एप्‍लीकेशन का चयन करें आपको जिस भी ऐप पर ब्‍लैंक मैसेज भेजना हो, उसे सेलेक्‍ट कर लें. यहां आपको व्‍हाट्सऐप को सेलेक्‍ट करना होगा. इसके बाद, जिसे मैसेज भेजना हो, उसका चैट बॉक्‍स ओपन करें.

स्‍टेप -5: ब्‍लैंक मैसेज गया आपके द्वारा कॉन्‍टेक्‍ट सेलेक्‍ट करते ही ब्‍लैंक मैसेज उसे चला जाएगा. इस प्रकार, आप किसी को भी ब्‍लैंक मैसेज भेज सकते हैं.

परीक्षा में लेखन की गति का महत्त्व

क्या आप जानते हैं कि आप का परीक्षा परिणाम आप की लेखन गति पर निर्भर करता है? जी हां, यदि आप की लेखन गति तेज है, तो आप निर्धारित समय में सभी प्रश्नों के उत्तर लिख पाएंगे और यदि लेखन गति बहुत धीमी है तो भले ही आप को सभी प्रश्नों के उत्तर याद हों, पर उन में से कुछ प्रश्नों के उत्तर छूट सकते हैं. अत: यदि आप की लेखन गति धीमी है तो उसे तेज बनाने की कोशिश कीजिए. फिर देखिए मनवांछित परीक्षा का परिणाम आता है या नहीं? जिन परीक्षार्थियों की लेखन गति धीमी होती है, उन की शिकायत होती है कि उन्हें समय कम पड़ गया और इस वजह से वे सभी प्रश्नों का उत्तर नहीं लिख पाए. यह आप की व्यक्तिगत समस्या है. बोर्ड या यूनिवर्सिटी के पेपर सैट करते समय पेपर सैटर परीक्षा के 3 घंटे की अवधि को ध्यान में रख कर ही प्रश्नों का चुनाव करता है. जब अन्य परीक्षार्थियों को समय कम नहीं पड़ा तो आप को क्यों? इस का साफ सा कारण है कि आप की लेखन गति धीमी रही, जिस कारण आप निर्धारित समय में उत्तर नहीं लिख पाए. लेखन गति एकदम से नहीं बढ़ सकती. इस के लिए प्रयास करने होंगे अन्यथा गति बढ़ाने के चक्कर में लिखावट बिगड़ जाएगी अथवा अपठनीय हो जाएगी. इस से आप ही का नुकसान होगा, क्योंकि जब परीक्षक उसे पढ़ ही नहीं सकेगा तो अंक कैसे देगा? इसलिए स्पीड बढ़ाने के दौरान अक्षरों की बनावट या सुंदरता न बिगड़े, इस बात का ध्यान भी अवश्य रखें.

जिन परीक्षार्थियों को लिखने की आदत नहीं होती, परीक्षा में उन्हें बहुत परेशानी का सामना करना पड़ता है. दोचार पृष्ठ लिखने में ही उन की उंगलियों में दर्द होने लगता है और लिखने की गति धीमी हो जाती है. इसलिए लिखने की आदत भी डालें, लिखलिख कर अभ्यास करना इस का आसान उपाय है. यदि आप चाह कर भी लेखन गति नहीं बढ़ा पा रहे हैं तो फिर आप को नई रणनीति अपनानी होगी. सभी प्रश्नों को हल करने के लिए प्रत्येक प्रश्न का उत्तर विस्तार से लिखने के बजाय संक्षेप में लिखना होगा. उत्तर को पौइंट बना कर लिखें या महत्त्वपूर्ण बातों को रेखांकित कर दें. प्रत्येक प्रश्न के लिए समय निर्धारित कर लें तथा उत्तर निर्धारित अवधि में पूरा करें ताकि समय की कमी के कारण कोई प्रश्न न छूटे.

परीक्षा में उन लोगों की भी लेखन की गति धीमी होती है, जिन्हें कुछ याद नहीं आता. उन्हें सोचसोच कर लिखना पड़ता है. ऐसी अवस्था में मस्तिष्क में धाराप्रवाह विचार नहीं आ पाते. वे रुकरुक कर या अटकअटक कर लिखते हैं जिस कारण वे सभी प्रश्नों का उत्तर निर्धारित समय में नहीं दे पाते. परीक्षा में लेखन गति आप के प्रश्नों के चुनाव पर भी निर्भर करती है. जो प्रश्न आप को ठीक से याद हैं उन की लेखन गति तेज होती है बजाय उन प्रश्नों के जो आप को ठीक से याद नहीं हैं. इसलिए पहले उन प्रश्नों को प्राथमिकता दें, जो आप को अच्छी तरह याद हों ताकि यदि कोई प्रश्न छूट भी जाए तो आप का अधिक नुकसान न हो. यदि आप की लेखन गति तेज नहीं है तो पहले औब्जैक्टिव टाइप के प्रश्नों को हल करें, उस के बाद लघुउत्तरीय और अंत में दीर्घउत्तरीय या निबंधात्मक प्रश्नों को हल करें.

समय की कद्र करें

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित साहित्यकार अर्नेस्ट हेमिंग्वे बचपन से ही प्रतिभा के धनी थे, किंतु उन की सब से बड़ी कमजोरी थी कि वे किसी भी कार्य को सही समय पर निष्पादित नहीं कर पाते थे. एक बार उन के स्कूल में एक निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया और अपनी आदतवश उन्होंने इस बार भी इस कार्य में काफी विलंब कर दिया. जब निबंध जमा करने की अंतिम तारीख करीब आई तो उन्होंने बड़ी जल्दीबाजी में निबंध पूरा किया और जमा कर दिया.

प्रतियोगिता के परिणाम के दिन सभी इस बात से आश्वस्त थे कि इस प्रतियोगिता के विजेता हेमिंग्वे ही होंगे. लेकिन सभी की आशाओं के विपरीत हेमिंग्वे उस प्रतियोगिता में असफल रहे. अपनी इस हार पर हेमिंग्वे को बहुत दुख हुआ और वे फूटफूट कर रोने लगे. हेमिंग्वे की बड़ी बहन ने उन्हें समझाया कि उस की इस हार का कारण समय की कद्र न करना है. यदि वे निबंध लेखन में देर न करते और समय रहते कुशलता से लेखन करते तो अवश्य जीतते.

हेमिंग्वे की इस हार ने उन्हें जीवन में सफलता के लिए एक महत्त्वपूर्ण सीख दी कि समय एक ऐसा धन है, जिस के गुजरने पर इसे कोई भी कीमत दे कर वापस नहीं खरीदा जा सकता. इस घटना के बाद वे जीवन में हमेशा सभी कार्य समय पर करने लगे.

जीवन में सफल तो हर कोई होना चाहता है किंतु हर व्यक्ति चाह कर भी सफल नहीं हो पाता. सफल होने की कई शर्तें हैं, जिन का हमें पालन करना होता है. समय का सदुपयोग उन में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है.

आधुनिक मैनेजमैंट थ्योरी में टाइम मैनेजमैंट को लाइफ मैनेजमैंट माना जाता है. अपनी दिनचर्या को समय पर निष्पादित करना तथा समय का अपने जीवन में कामयाबी पाने के लिए प्रयोग करना ही समय का निष्ठा के साथ पालन कहलाता है, जिसे ‘टाइम मैनेजमैंट’ कहते हैं.

आखिर समय का पालन कैसे करें कि हमें अपने लक्ष्य तक पहुंचने में कोई परेशानी न हो?

जीवन में एक निश्चित लक्ष्य बनाएं

जब हमारे जीवन में कोई निश्चित लक्ष्य नहीं होता तो हम समय की सब से अधिक बरबादी कर रहे होते हैं, क्योंकि हमें पता नहीं होता कि करना क्या है. लिहाजा, यह आवश्यक है कि हमें निश्चित रूप से अपने जीवन का एक उद्देश्य तय करना चाहिए. इस प्रकार के निश्चित लक्ष्य के अभाव में हम समय का कभी भी सदुपयोग नहीं कर सकते.

अपने कार्यों की प्राथमिकता निर्धारित करें

आशय यह है कि हम अपने दैनिक जीवन में विविध प्रकार के कार्यों को निष्पादित करते हैं तथा उस के लिए योजना भी बनाते हैं. किंतु सभी कार्य समान रूप से महत्त्वपूर्ण नहीं होते. लिहाजा, हमें अपने कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कई श्रेणियों में विभक्त कर लेना चाहिए. यथा कौन सा काम अति आवश्यक है, कौन सा कम आवश्यक तथा कौन सा काम महत्त्वपूर्ण नहीं है.

इस तरह हम समय का सब से अधिक सदुपयोग कर सकेंगे, क्योंकि ऐसी स्थिति में हमें यह पता होगा कि एक निश्चित समय में जीवन के सब से अधिक जरूरी कार्यों को ही निष्पादित करना है. ऐसा कर के हम हमेशा सफल हो सकते हैं.

दुविधा न पालें

मानव जीवन में सफलता पाने की राह में यह सब से बड़ा अवरोध है, जिस के कारण हम अपनी कामयाबी के सफर में बड़ी तेजी से आगे नहीं बढ़ पाते हैं. जिस कार्य को हम कर रहे हैं या फिर करने की योजना बना रहे हैं और उसी के बारे में हमें संदेह है कि वह कार्य करना भी चाहिए या नहीं या फिर यह चिंता सता रही है कि इस कार्य में हम सफल भी होंगे या नहीं, ऐसे में हम केवल अपने अमूल्य समय की ही बरबादी कर रहे होते हैं. इसीलिए यह अति आवश्यक है कि हमें अपने लक्ष्यों तथा सपनों के प्रति पूरी तरह से समर्पित तथा निष्ठावान रहना चाहिए.

हमारे जीवन में दुविधा आत्मविश्वास में कमी के कारण उत्पन्न होती है. जब हमें यह लगता है कि हम जिस लक्ष्य की प्राप्ति की तरफ आगे बढ़ रहे हैं और उस में सफल होना आसान नहीं है, तो हमारे पैर उस राह में डगमगाने लगते हैं. फिर हम उन सपनों को साकार करने की कोशिश तो करते हैं किंतु उस में पूरी तरह से समर्पित नहीं हो पाते. इस प्रकार हमारा बेशकीमती समय बिना किसी उपलब्धि के बरबाद हो जाता है. लिहाजा, यह अनिवार्य है कि हम अपने जीवन का जो भी लक्ष्य एक बार निर्धारित कर लें, उस के प्राप्त होने के बारे में कभी भी मन में किसी प्रकार की दुविधा न पालें. तभी हम आगे बढ़ेंगे और हमारा समय कभी भी बरबाद नहीं होगा.

कार्य करने की समयसीमा तय करें

अकसर हम आज के काम को कल पर तथा कल के काम को परसों पर टालते रहते हैं, जबकि हमें अपने कार्यों को निष्पादित करने के लिए समयसीमा तय करनी चाहिए. याद रखिए, कल कभी नहीं आता. लिहाजा, इस बात को हमेशा सुनिश्चित करें कि किसी कार्य को हमें कब तक पूरा कर लेना है ताकि समय का सदुपयोग हो सके.

कार्य के प्रति सच्ची लगन पैदा करें

एक बार महान दार्शनिक सुकरात के पास एक व्यक्ति आया और उन से जीवन में सफलता का रहस्य पूछा. सुकरात उस व्यक्ति को अगले दिन नदी के बीचोंबीच ले गए और उस की गरदन पकड़ कर उसे नदी में डुबोने लगे. जब नदी का जलस्तर उस व्यक्ति की नाक तक आ पहुंचा तथा उसे सांस लेने में कठिनाई महसूस होने लगी और वह सांस लेने के लिए छटपटाने लगा. किंतु सुकरात तब भी उस की गरदन पकड़ उसे पानी के अंदर डुबोते रहे. अंत में जब उन्हें लगा कि सांस नहीं लेने के कारण उस व्यक्ति की जान जा सकती है, तो उन्होंने उसे नदी से बाहर निकाला.

सुकरात ने उस व्यक्ति से कहा कि वह नदी में सांस लेने के लिए जिस तरीके से तड़प रहा था, वैसी ही तड़प यदि जीवन में सफलता पाने के लिए होगी तो वह सफल हो जाएगा. सुकरात का सफलता पाने का यह दर्शन बड़ा अहम तथा व्यावहारिक है जो अप्रत्यक्ष रूप से समय प्रबंधन के तरीके को भी बता जाता है.

आशय यह है कि यदि हम अपने सपनों को पूरा करने के प्रति हमेशा समर्पित रहें तथा लगनशील हों तो कोई शक नहीं कि हम अपने जीवन तथा समय दोनों का बड़ी अच्छी तरह सदुपयोग कर सकते हैं.                                       

“धोनी नंबर 1 कप्तान, उनका कोई रिप्लेसमेंट नहीं”

महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली की कप्तानी का अंदाज बिल्कुल अलग है. इन दोनों की कप्तानी की तुलना कई दिग्गज कर चुके हैं, किसी को धोनी की कूल कप्तानी पसंद आई है तो कोई विराट के एग्रेशन का फैन है. दोनों की कप्तानी को लेकर हमने विराट कोहली के कोच राजकुमार शर्मा से बात की, उनके मुताबिक धोनी अभी भी भारत के नंबर-1 कप्तान हैं, और क्रिकेट के छोटे फॉरमैट्स (वनडे और टी-20) में अभी भी उनका कोई रिप्लेसमेंट नहीं है.

धोनी ने 2014 अंत में टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया था, तब से विराट कोहली की अगुवाई में टीम इंडिया ने श्रीलंका, वेस्टइंडीज को उनके घर में हराया जबकि दक्षिण अफ्रीका, न्यूजीलैंड के खिलाफ घरेलू सीरीज पर भी कब्जा किया है. कोहली की कप्तानी में टीम इंडिया टेस्ट में फिलहाल बेस्ट है और आईसीसी गदा भी भारत के हाथ में ही है.

वहीं धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया 2015 वर्ल्ड कप और टी-20 वर्ल्ड कप 2016 के सेमीफाइनल तक पहुंची. पिछले कुछ सालों में धोनी की कप्तानी की चमक भले ही थोड़ी फीकी पड़ी हो, लेकिन विराट के कोच का मानना है कि अभी भी कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज के तौर पर धोनी का कोई रिप्लेसमेंट नहीं है.

विराट के कोच राजकुमार ने कहा, 'धोनी और विराट अलग तरह के कप्तान हैं. विराट बहुत एग्रेसिव हैं और बहुत इनवॉल्व्ड रहते हैं. मेरा मानना है कि अभी भी धोनी भारत के नंबर वन कप्तान हैं. वो बहुत सफल कप्तान हैं, उन्होंने जो देश के लिए किया है, उनका योगदान बहुत ज्यादा है, दो वर्ल्ड कप जिताए हैं, टेस्ट में नंबर वन बनाया है. वो बहुत कूल कैप्टन हैं लेकिन दोनों की कप्तानी करने का तरीका बिल्कुल अलग है.'

उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि जो योगदान महेंद्र सिंह धोनी का है और जिस कदर वो फिट हैं और जितनी अच्छी कप्तानी कर रहे हैं, उनके अंडर जैसे टीम खेलती है. तो अगर धोनी 2019 वर्ल्ड कप में कप्तान बने रहना चाहते हैं तो इससे अच्छी कोई बात नहीं होगी हमारे लिए. क्योंकि अभी भी उनका हमारे पास कोई रिप्लेसमेंट नहीं है, ना एक कप्तान के तौर पर, ना विकेटकीपर ना बल्लेबाज के तौर पर.'

जब उबने लगे काम से मन

ऑफिस में ऐंटर करते ही चेहरे पर उदासी छा जाए, किसी भी चीज को ले कर कोई ऐक्साइटमैंट न रहे, जो काम मिले उसे मन मार कर जैसेतैसे पूरा करें, प्रोजैक्ट वर्क को लेकर भी किसी से कोई कम्युनिकेन न करें. खुद कुछ करें नहीं पर दूसरा अच्छा परफौर्म करे तो उस से ईर्ष्या हो. इतना ही नहीं अपने तक ही सीमित रहें. अगर आप के साथ भी ऐसा हो रहा है तो समझ जाएं कि आप ने अपनी लाइफ को उदासीन बना लिया है और यह उदासीनता आप के कैरियर पर भी हावी हो रही है. इसलिए काम से मन उबने न पाए तो इन बातों को फौलो करें.

काम को करें ऐंजौय

जब हम एक औफिस में कई सालों तक काम करते रहते हैं तो हां के वर्क कल्चर से अच्छी तरह वाकिफ हो जाते हैं जिस से रोज वही काम करने के कारण हमें धीरेधीरे बोरियत सी फील होने लगती है. जिस का परिणाम यह होता है कि औफिस में पहुंचते ही हमें नींद आने लगती है, हम बारबार घड़ी देखते हैं कि कब लंच होगा व कब छुट्टी होगी. ऐसे में खुद को औल टाइम फ्रैश रखने के लिए जरूरी है कि आप को जो काम मिले उसे ऐंजौय करें. फिर देखिए पुरानी चीजें भी कितना मजा देती हैं.

हर दिन करें कुछ नया

भले ही वर्क पुराना है लेकिन उस में भी हर दिन कुछ क्रिएटिव करने की सोचें. जब आप काम के प्रति ज्यादा आइडियाज माइंड में ला कर उसे अपने वर्क में अप्लाई करेंगे तो उस से आप की औफिस में क्रिएटिव इमेज  बनेगी जो निश्चय ही आप के कैरियर को नई दिशा देगी.

न्यू वर्क को चैलेंज की तरह ऐक्सैप्ट करें

कई बार सिचुएशन ऐसी भी आती है कि हमें हमारी पोस्ट के विपरीत कोई ऐसा काम दे दिया जाता है जिसे करने में हम सक्षम नहीं होते और इसी कारण मन ही मन किलसते रहते हैं कि बौस ने पता नहीं कैसा सा काम थामा दिया है. इस झुंझलाहट में नए आइडियाज आना तो बहुत दूर की बात है हम काम में मन भी नहीं लगा पाते हैं. ऐसे में खुद को परेशान करने से अच्छा है कि आप को जैसा भी वर्क मिले उसे खुशीखुशी ऐक्सैप्ट करें. हो सकता है कि बौस द्वारा दिया गया यह चैलेंज आप की लाइफ ही बदल दे.

ईर्ष्या न करें

अगर आप और आप की क्लीग ने किसी प्रौजेक्ट पर बराबर मेहनत की हो लेकिन आप की टीम लीडर सारा श्रेय आप की कलीग को दे दे तो ऐसे में आप अपनी कलीग से ईर्ष्या न करें बल्कि आगे से अकेले ही पूरे प्रौजेक्ट को हैंडिल करने की जिम्मेदारी लें जिस से काम के प्रति आप का उत्साह हमेशा बना रहेगा.

काम को सैलरी से नहीं अनुभव से जोड़ें

काम के प्रति उदासीनता आने का एक कारण कम सैलरी भी होता है. जब हम वर्क में अच्छा परफौर्मेंस देते हैं लेकिन उस के बावजूद हमारा इंक्रीमैंट कम होता है तो हम यह सोचते हैं कि जब मेहनत का फल मिलना ही नहीं है तो मेहनत करने का फायदा क्या. हम से तो वही कर्मचारी अच्छे हैं जो मेहनत नहीं करते और फिर भी हमारे बराबर इंक्रीमैंट होता है. जबकि आप का ऐसा सोचना गलत है. भले ही आज आप की मेहनत की कद्र न हो लेकिन इस कंपनी से मिला अनुभव और आप की मेहनत एक दिन जरूर काम आएगी. इसलिए काम को सैलरी से नहीं अनुभव से जोड़े.

पौजिटिव लोगों के बीच रहें

हरदम नैगेटिविटी फैलाने वाले की यह कंपनी तो है ही बेकार, यार तू हतनी मेहनत क्यों करता है तू भी हमारी तरफ ऐश किया कर, इस कंपनी में रह कर तो जिंदगी बरबाद ही हो रही है. ऐसी बातें करने वाले लोगों के बीच रह कर आप कभी बेहतर नहीं सोच पाएंगे. इसलिए पौजिटिव लोगों के बीच ज्यादा रहें ताकि अच्छा सोच कर उसे अप्लाई कर पाएं.

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