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गांव जहां हर लड़की खेलती है हॉकी

जीतन देवी झारखंड के हेसेल गांव में अपने खपरैल के घर में अकेली रहती हैं. उनके पति सोमा प्रधान झाझा (बिहार) में नौकरी करते हैं. दो बेटियां रांची में हैं और एक के सिंगापुर से घर लौटने का इंतजार है. तीनों हॉकी खेलती हैं. इनमें से एक निक्की प्रधान ओलंपिक खेलने ब्राजील गईं थी.

वे उस विजेता टीम का भी हिस्सा थीं, जिसने सिंगापुर में चीन को हराकर एशियाई चैंपियंस ट्रॉफी पर कब्जा जमाया है. भारतीय टीम में शामिल निक्की झारखंड की वैसी पहली महिला हॉकी खिलाड़ी हैं, जिन्हें ओलंपिक खेलने का मौका मिला. निक्की प्रधान को हेसेल गांव की लड़कियां अपना आदर्श मानती हैं.

इसी गांव की पुष्पा प्रधान अपने जमाने की मशहूर हॉकी खिलाड़ी रह चुकी हैं. वे साल 2004 के एशिया कप हॉकी टूर्नामेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय महिला हॉकी टीम की सदस्य थीं. उन्होंने 2002 में जोहांसबर्ग में हुए चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी टूर्नामेंट में भी अच्छा प्रदर्शन किया था.

हेसेल झारखंड के नक्सल प्रभावित खूंटी जिले का हिस्सा है. मुरहू प्रखंड के हेसा पंचायत के इस गांव में 70 घर हैं. इनमें करीब 375 लोग रहते हैं. इनमें से सिर्फ एक परिवार को छोड़ कर बाकी सभी घर आदिवासियों के हैं. यहां हर घर में कोई न कोई हॉकी खेलती है. गांव की आदिवासी लड़कियों में हॉकी का जबरदस्त क्रेज है.

यहां के कृष्णा मुंडु बिजनेस करते हैं. उन्होंने बताया कि यहां लड़कियों के हाथ में स्लेट से पहले हॉकी स्टिक पकड़ा दी जाती है. हेसेल की दर्जन भर लड़कियों ने राष्ट्रीय स्तर पर किसी न किसी हॉकी प्रतियोगिता में हिस्सा लिया है. इसी तरह 25-30 लड़कियों ने राज्य स्तरीय टूर्नामेंट खेला है.

तो, पुष्पा प्रधान और निक्की प्रधान जैसी गांव की लड़कियों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धाओं के लिए जोहांसबर्ग, रियो, सिंगापुर, बैंकॉक जैसे शहरों में हॉकी खेलकर झारखंड और देश का नाम रोशन किया है.

इंटरनेशनल हॉकी खिलाड़ी पुष्पा प्रधान के पिता सोमरा प्रधान ने कहा, "मरुआ की रोटी और साग खिलाकर बेटी को बड़ा किए हैं. उन्होंने बताया कि पेलोल स्कूल के मास्टर दशरथ महतो ने पुष्पा और निक्की प्रधान समेत तमाम लड़कियों को हॉकी खेलना सिखाया."

ओलंपियन निक्की प्रधान की मां जीतन देवी ने बताया कि गांव में प्रैक्टिस के लिए ग्राउंड नहीं है. सभी लड़कियां पेलोल स्कूल के ग्राउंड में ही प्रैक्टिस करती हैं. उनसे हमारी बातचीत के वक्त मौजूद हॉकी खिलाड़ी बिरसी मुंडा ने कहा कि सरकार को इस गांव में एक ग्राउंड बनवा देना चाहिए. ताकि हमलोग नियमित प्रैक्टिस कर सकें.

उन्होंने बताया कि जब स्टिक नहीं मिलती थी, तो गांव की लड़कियां बांस से बनी स्टिक से हॉकी की प्रैक्टिस करती थीं.

भारतीय महिला हॉकी टीम की ओर से निक्की प्रधान ने कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट खेले हैं. निक्की प्रधान और इन लड़कियों के कोच दशरथ महतो ने बताया, "वे खुद इंटरनेशनल मैच नहीं खेल पाए. फिर, उन्होंने अपने सपने की मंजिल हेसेल की लड़कियों में खोज ली. इसके बाद इन्हें हॉकी की ट्रेनिंग देनी शुरू की.

उन्होंने बताया कि पुष्पा और निक्की प्रधान की सफलता से गांव की दूसरी लड़कियां प्रभावित हैं. इनमें से कई आने वाले दिनों में इंटरनेशनल खेलने की योग्यता रखती हैं.

वहीं ओलंपियन निक्की प्रधान ने कहा, "हमने अभाव में हॉकी खेलना सीखा है. हॉकी ने हेसेल को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी है. मुझे पूरा विश्वास है कि मेरे गांव की लड़कियां इस परंपरा को और आगे ले जाएंगी. बस उन्हें अपना लक्ष्य तय करना पड़ेगा."

38 साल बाद फिर बंद हुए बड़े नोट

काले धन के खिलाफ ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाते हुए पीएम मोदी ने मंगलवार आधी रात से 500 और 1000 रुपए के बंद होने की घोषणा की. हालांकि, पीएम ने इस निर्णय के कारण उत्पन्न स्थितियों को देखते हुए 11 नवंबर की मध्यरात्रि तक कुछ विशेष व्यवस्थाएं भी की है.

इसके तहत अस्पतालों, सार्वजनिक क्षेत्र के पेट्रोल एवं सीएनजी गैस स्टेशनों, रेल यात्रा टिकट काउंटरों, शवदाह गृहों, अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों को 11 नवंबर की मध्यरात्रि तक छूट रहेगी. दुग्ध बिक्री केंद्रों, पेट्रोल एवं सीएनजी स्टेशनों आदि को स्टाक एवं ब्रिकी का रजिस्टर रखना होगा. उन्होंने कहा कि 100 रुपये, 50 रुपये, 20 रुपये, 10 रुपये, 5 रुपये, एक रुपये के नोट और सभी सिक्के प्रचलन में रहेंगे और वैध होंगे.

मोदी ने 2000 रुपये और 500 रुपये के नये नोट जारी किये जाने की घोषणा की.

राष्ट्र के नाम अपने पहले टेलीविजन संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आज रात 12 बजे से 1000 रुपये और 500 रुपये की रकम वैध नहीं होगी. 1000 रुपये और 500 रुपये के नोट कागज के टुकड़े रह जाएंगे और उनका कोई मूल्य नहीं होगा.’ प्रधानमंत्री ने कहा, ‘लोग 10 नवंबर से 30 दिसंबर 2016 तक अपने-अपने बैंकों में 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोट जमा करा सकेंगे. कुछ कारणों से जो लोग 1,000 रुपये और 500 रुपये के नोट 30 दिसंबर तक जमा नहीं करा सकेंगे, वे लोग पहचान पत्र दिखाकर 31 मार्च 2017 तक नोट बदलवा सकेंगे.

पहली बार नहीं हुआ बैन

लेकिन यह पहली बार नहीं है. 38 साल पहले मोरार जी देसाई ने भी यह 1000, 5000 और 10,000 के नोट को बैन करने का फैसला लिया था. यह इत्तेफाक ही है कि इस बार भी गुजरात से ही आने वाले पीएम नरेंद्र मोदी ने यह फैसला लिया. उस समय आरबीआई गवर्नर आईजी पटेल थे और इस बार उर्जित पटेल हैं.

हालांकि 2000 का नोट लाने वाले नरेंद्र मोदी पहले पीएम हैं. 1000 के नोट दोबारा अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में वापस आए. उस समय भी यह फैसला काले धन और उससे चल रही समांनतर अर्थव्यवस्था को रोकने के लिए किया गया था. इस फैसले को हाई डेमोमिनेशन बैंक नोट ऐक्ट 1978 के तहत लागू किया गया था.

इस कानून के तहत 16 जनवरी 1978 के बाद इन नोटों की मान्यता समाप्त कर दी गई. बड़ी कीमत वाले नोटों को ट्रांसफर या रिसीव करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया. इसके साथ ही सभी बैंकों और सरकारी संस्थानों को रिजर्व बैंक को अपने पास मौजूद बड़े नोटों की जानकारी देनी थी, जिन लोगों के पास ये बड़े नोट थे वे बैंक में जाकर 24 जनवरी 1978 तक इन नोटों को बदलवा सकते थे.

अगडे वोट बैंक पर भाजपा को कांग्रेस की लंगडी

दो दशकों से उत्तर प्रदेश की राजनीति दलित-पिछड़े और मुसलिम वोट बैंक के आसपास घमूती रही है. पहली बार अगडे वोट बैंक के लिये कांग्रेस और भाजपा के बीच रस्साकशी शुरू हुई है. ब्राहमणों के बाद कांग्रेस ने अब ठाकुर नेताओं पर ध्यान देना शुरू किया है. इस तोडफोड के क्रम में चार बार विधायक और बसपा सरकार में मंत्री रहे बादशाह सिंह ने भाजपा को छोड कर कांग्रेस का दामन थाम लिया. बादशाह सिंह के साथ उनकी पत्नी रत्ना सिंह ने भी कांग्रेस की सदस्यता ले ली है.

असल में कांग्रेस का गेम प्लान अगडी जातियों को पार्टी से जोडने का है. कांग्रेस को लगता है कि अगडी जातियों का उसका पुराना वोटबैंक अगर उसके साथ एकजुट हो गया तो मुसलिम, दलित और पिछडा भी उसके साथ खड़ा होगा. कांग्रेस की चुनावी रणनीति में 160 ऐसी सीटे हैं, जहां वह जीत के लिये लड़ेगी. इस प्लान के तहत वह ऐसे जिताऊ प्रत्याशियों का चयन कर रही है जो खुद की बदौलत जीत हासिल करने की ताकत रखते हो.

बादशाह सिंह जैसे कई नाम एकएक कर सामने आयेंगे. इनमें ज्यादातर अगडी जातियों के वह लोग हैं जो भाजपा के साथ थे, पर वहां तवज्जों नहीं मिलने से खुद को दबा कुचला समझ रहे थे. अगडी जातियां भाजपा का सबसे मजबूत वोटबैंक रही हैं. लोकसभा चुनाव के समय से भाजपा दूसरी पार्टियों की तरह ही तरह दलित और पिछडा वर्ग की तरफ बढ़ने लगी. ऐसे लोगों को पार्टी में महत्व मिलने से पार्टी को स्वाभाविक अगडा वोटर भाजपा में घुटन का अनुभव कर रहा है.

अगडी जातियों को यह लग रहा था कि केन्द्र की सत्ता में आने के बाद भाजपा अगडी जातियों के लिये कुछ सुधार के काम करेगी. इनमें आरक्षण प्रमुख मुद्दा था. भाजपा आरक्षण के आर्थिक आधार की पक्षधर रही है. बिहार विधानसभा चुनाव के समय भाजपा ने यह मुद्दा उठाया था. बिहार विधानसभा में हार के बाद भाजपा ने अगडी जातियों के बजाये दलित और पिछड़ों को आगे करना शुरू किया. ऐसे में नाराज अगडी जातियों को कांग्रेस में सहारा मिलने लगा है.

कांग्रेस यह बात जानती है कि बिहार और उत्तर प्रदेश के जातीय समीकरण अलग अलग है. बिहार में पिछड़ी जातियों के मुकाबले अगडों की संख्या बहुत कम है जबकि उत्तर प्रदेश में अगडी जातियां ज्यादा तादाद में हैं. दलित और पिछडी जातियां बसपा और सपा के साथ लामबंद हैं. ऐसे में अब तक अगडी जातियां भाजपा के साथ रही हैं. अब पार्टी में दलित-पिछड़ा को महत्व मिलने से अगडी जातियां नाराज हैं. वह कांग्रेस में अपना भविष्य तलाश रही हैं. कांग्रेस ने शीला दीक्षित को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी बनाकर ब्राहमणों को अपने साथ लिया.

अब ठाकुर और बनिया का साथ जोडने के लिये कदम उठा रही है. केन्द्र में जीएसटी बिल का विरोध कर कांग्रेस बनिया बिरादरी को जोड़ने का काम रही है. इसके पहले गहना कारोबारियों पर टैक्स का विरोध कांग्रेस ने किया था. ऐसे में कांग्रेस ठाकुर, बामन और बनिया समीकरण को अपने प़क्ष में लाकर भाजपा को लंगडी मारने की पूरी तैयारी में है. यह समीकरण कांग्रेस को चुनी हुई सीटों पर जीत हासिल करने में मदद भी करेगा.                           

छोटी उम्र में संचिती के बड़े कारनामे

मुंबई के रुइया कालेज की 16 वर्षीया छात्रा संचिती की तमन्ना मशहूर गायिका श्रेया घोषाल के साथ गीत गाने की है. संचिती ने महज तेरह साल की उम्र में अपनी आवाज में स्वरबद्ध गीतों का अपना पहला अलबम ‘‘आमीची मुंबई’’ बाजार में लाकर तहलका मचा दिया था. इस अलबम की सारी कमाई संचिती ने नाना पाटेकर के एनजीओ ‘नाम’ को देकर किसानों की भलाई में लगाने के लिए कहा है.

उसके बाद महज तीन वर्ष के अंतराल में वह हिंदी, मराठी, अंग्रेजी, गुजराती व पंजाबी भाषा के 12 अलबमों में गा चुकी हैं. इतना ही नहीं वह सोनू निगम के साथ ‘इन द लव’ अलबम के गीत गाए हैं. संचिती ने  ‘ढूंढ़ लेंगी मंजिले हमें’, ‘फिल्मसिटी मुंबई नगरी’, ‘कीप सेफ डिस्टेंस’ जैसी हिंदी फिल्मों के अलावा ‘नृत्यांगना’, ‘ग्रहण’ व ‘जिद्द’ मराठी भाषी फिल्मों के लिए भी पार्श्वगायन किया है. 

अमीर प्रेमिका की गुलामी

आज के दौर में हिंदी फिल्म ‘ब्लफमास्टर’ का यह गीत ‘बाप बड़ा न भैया सब से बड़ा रुपया…’ वास्तव में हमारे समाज के आईने को प्रदर्शित करता है. खासकर अब युवावर्ग पैसे को अधिक अहमियत देने लगा है. एक आम धारणा बन चुकी है कि जिस के पास जितना अधिक पैसा होगा वह उतना ही सुखी होगा. ऐसे में अकसर युवक अमीर प्रेमिका को पसंद करते हैं और उस की गुलामी करने से भी नहीं कतराते. आखिर युवक क्यों करते हैं अमीर प्रेमिका की गुलामी? आइए जानें :

दिल नहीं, जेब देखते हैं

वैसे प्रेम संबंध आर्थिक हालात पर निर्भर नहीं हैं, लेकिन आज का युवा धनदौलत को प्रमुखता देने लगा है. निजी डेटिंग और मैट्रिमोनियल वैबसाइट के संयुक्त सर्वेक्षण के दौरान 80 फीसदी युवाओं ने यह बात स्वीकार की है कि उन्हें अमीर प्रेमिका ही चाहिए. अच्छी आय के अलावा घर और बैंक बैलेंस भी उन के पास होना चाहिए, जिस से उन का भविष्य संवर सके.

पैसों का अभाव नहीं रहता

रवि काफी होशियार था लेकिन पैसों के अभाव के कारण वह अपने लिए किताबें नहीं खरीद पाता था. जब उस की दोस्ती अमीर घर की लड़की जूही से हुई तब से उस के समक्ष आने वाली सभी आर्थिक बाधाएं दूर होने लगीं, क्योंकि जूही उस की पैसों से हर संभव मदद करती थी. फिर दोनों के बीच दोस्ती इतनी गंभीर हो गई कि उन के बीच संबंध तक बन गए.

साइकोलौजिस्ट डा. दिनेश वर्मा के अनुसार, ‘‘अकसर युवा पैसों और सैक्स के लिए अपने से बड़ी उम्र की युवती से संबंध ही नहीं बनाते बल्कि उस की हर बात को मानते भी हैं और यदि प्रेमिका अमीर हो तो फिर तो बात ही कुछ और हो जाती है.’’

अमीर प्रेमिका से ज्यादा पैसे को महत्त्व

एक अध्ययन की मानें तो पैसे और परिवार की जंग में जीत पैसों की होती है. ऐसे में अमीर प्रेमिका की गुलामी करना लाजिमी हो जाता है. धन की बदौलत आप दुनिया की हर खुशी खरीद सकते हैं. यदि धन आप के पास नहीं है तो आप न तो अपनी प्रेमिका को खुश रख सकते हैं और न ही परिवार के किसी सदस्य को. आज का युवा अमीर प्रेमिका की तलाश करता है. ब्रिटिश मीडिया के अनुसार पूरी दुनिया के 126 देशों के आंकड़ों की पड़ताल से यह निष्कर्ष निकला है कि प्रेम से ज्यादा पैसों का महत्त्व होता है.

स्टेटस का जलवा

युवाओं को लगता है कि अमीर प्रेमिका से उन का स्टेटस तय होता है. इसलिए वे अपनी गर्लफ्रैंड ऐसी युवती को बनाना चाहते हैं जिस के पिता का अच्छाखासा बिजनैस हो, युवती के पास गाड़ी हो, अच्छाखासा बैंकबैलेंस होने के अलावा वह स्वतंत्र रूप से घूमनेफिरने में विश्वास रखती हो. इस से अच्छा रहनसहन, अच्छे महंगे कपड़े, परफ्यूम आदि की समस्या भी खत्म हो जाती है.

रोमांस घटाता है पैसा

एक शोध के अनुसार, संबंध विशेषज्ञ टेवर सिलवेस्टर का मानना है कि ब्रिटिश लोगों के जीवन में हो या हिंदुस्तान में लोगों के जीवन में घटते रोमांस का सब से बड़ा कारण आर्थिक अभाव है. ऐसे में अकसर युवा  अमीर घर की प्रेमिका को चुनता है, उस की गुलामी करता है. आजकल प्रेम को भावनाओं से नहीं बल्कि प्रपोज करने के तरीके और अंदाज से मापा जाता है.

सम्मान का अभाव नहीं रहता

साइकोलौजिस्ट डा. दिनेश कुमार के मुताबिक, ‘‘मध्यम वर्ग के युवाओं को अकसर लगता है कि यदि अमीर प्रेमिका का साथ मिलेगा तो उन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से देखा जाएगा. सभी रिश्तेदार उस की बढ़ाई करेंगे और अमीर प्रेमिका के संबंधों को नहीं नकारेंगे.’’

मनीमाइंडेड ध्यान दें

–       अमीर प्रेमिका की गुलामी को प्राथमिकता देने के बजाय उस के गुणों व अच्छाइयों को महत्त्व दें. अपनी मेहनत के बल पर पैसा कमाएं.

–       अपने संस्कारों और नैतिक मूल्यों को न भूलें.

–       रिश्तों को जोड़ कर रखें, बिखरने न दें.

करामात (अंतिम किस्त)

पिछले अंक में आप ने पढ़ा था:

सनीचरी की तेरहवीं कराने के चक्कर में सुखदेव एक तांत्रिक बाबा के हत्थे चढ़ गया. बाबा ने उसे भूतप्रेत का डर दिखाया. सुखदेव का बेटा कार्तिक इस अंधविश्वास को नहीं मानता था. उसे पता था कि उस की मां को कैंसर है, पर सुखदेव उसे डाक्टर के बजाय तांत्रिक बाबा के पास ले गया. कार्तिक को अपने पिता को धूर्त बाबा से बचाना था. वह अपनी मौसी के गांव गया, जो एक बिंदास औरत थी.

अब पढि़ए आगे…

‘‘हां मौसी, पहले मुझे बैठ तो लेने दे, थक गया हूं,’’ कार्तिक बोला. नानी भी अब तक दालान में आ गई थीं. कार्तिक का यहां बड़ा मन लगता है. मौसी के दालान के एक किनारे मुरगियों के दड़बे और कुएं के पास बकरियों के रहने के ठिकाने हैं. कुल 7 बकरियां हैं. मौसी इन्हें बेचती भी है. दालान से ऊपर चबूतरा और उस से लगे 2 बड़े हवादार कमरे हैं. पलंग, कुरसी, बड़ा शीशा, पंखा, टैलीविजन सबकुछ है मौसी के पास. मोपैड भी है, जो अब मौसी ही चलाती है. कार्तिक ने मौसी को ढोंगी बाबा और अपने बापू की सारी बातें बताईं. मौसी ने कहा, ‘‘देख बेटा, तेरा भविष्य तो जीजा के पास एकदम चौपट है. कहीं तांत्रिक तेरे बापू से तुझे ही न मांग ले.

‘‘नशा इनसान का दिमाग खराब कर देता है. वह ढोंगी गांव वालों को नशे का आदी इसलिए बनाता होगा, ताकि अपनी मनमानी करता रहे.

‘‘तू अब हमारे पास ही रुक जा. मैं तुझे कसबे के बड़े वाले स्कूल में भरती करवा दूंगी.’’

‘‘मौसी, आप ने मेरे लिए जो सोचा है, वह तो अच्छी बात है, मगर गुनेसर बाबा को हमारे गांव से भगाओ न आप. किसी की भी हिम्मत नहीं कि उस से लड़े. वह मेरे बापू को नशे के चक्कर में एक दिन खत्म ही न कर दे.’’ कार्तिक की बात सुन कर राजेश्वरी पसीज गई थी. सुबह होते ही वह अकेले ही उमाशंकर पहलवान से मिलने जा पहुंची. उन से सारी बातें तय कर के राजेश्वरी पहले खेत और फिर घर पहुंची. वहां जीजा को दालान में बैठा देख राजेश्वरी चौंक गई. वह कार्तिक को डांटफटकार रहा था. राजेश्वरी खीझ गई और पूछा, ‘‘ऐसे कैसे चले आए जीजा? कार्तिक की फिक्र में…’’

‘‘कुछ होश भी है तुम को? लड़का चुपचाप बैठा लिया, कोई खोजखबर नहीं दी,’’ सुखदेव बोला.

‘‘जीजा, तुम ने बेटे को ऐसा लाचार कर दिया कि भागा आया इधर. जिस बाप का खुद का ठिकाना नहीं, उसे खबर कैसे दूं? बाप हो तो सलीके से क्यों न रहते बेटे के साथ?’’

सुखदेव उस बाबा के डर के साए में रह कर नशेड़ी हो कर अपनी सोचने की ताकत खो बैठा था. वह थोड़ी सी धमक पर ही डर कर बैठ गया और अपना सिर खुजाने लगा. नानी ने कार्तिक को दोपहर का खाना खिलाया और वापस जाने को कहा. लेकिन राजेश्वरी ने दोटूक कहा, ‘‘कार्तिक को कब भेजना है, मैं सोचूंगी. बेचारा खानेपीने को तरस गया है. यह जीजा के साथ नहीं जाएगा.’’ नानी चुप हो गईं. कार्तिक हफ्ताभर और वहां रहा, फिर अपने घर लौट गया. उधर उमाशंकर ने पहलवान छात्रों को कुछ निर्देश दिए और अपने भतीजे रंजन के घर नारायणपुरा में ही आ गए. इधर कार्तिक के गांव वालों के रंगढंग देख कर राजेश्वरी दंग रह गई. सभी गांव वाले बिना कोई पूछताछ किए बाबा के कदमों में लोटे रहते थे.

आज की रात दिल की धड़कन बढ़ाने वाली थी. राजेश्वरी मंदिर के पीछे बने मकान के कमरे तक पहुंच चुकी थी. खिड़की खुली थी. उस ने भीतर झांका. गुनेसर भूरे, सफेद पाउडर के पैकेट के बदले 3 लोगों से रुपयों की गड्डी ले रहा था. उस का चेहरा ठीक सामने था. राजेश्वरी हटने को हुई, तो बाबा की नजर उस पर पड़ी. बाबा चिल्लाया, ‘‘पकड़ो इसे.’’

उन में से एक दौड़ कर जैसे ही उसे पकड़ने को हुआ, राजेश्वरी उसे धक्का दे कर भाग खड़ी हुई. बाबा ने कहा, ‘‘यह तो सुखदेव की साली है. मंदिर के आसपास 2 दिन से घूम रही थी. गांव वालों से पता किया है. पहलवानी करती है. औरत जात पर कलंक है. यहां जासूसी करने आई थी. ‘‘यह कुछ खुराफात करे, इस से पहले अभी अपने आदमियों से कह दो कि रातोंरात इस की चिता सजा दें. ‘‘लोगों की फसल में जगहजगह आग लगा दो, लोगों के मवेशी चुरा लो, कई घरों में सेंधमारी करो और फिर सुबह से ही बात फैलाओ कि यह पहलवान टोनही है, जो जादूटोना कर के सब का नाश कर रही है. देखो, कैसे मेरी बात मान कर सब गांव वाले इस का क्रियाकर्म करते हैं.’’ तीनों हुक्म के गुलाम चल दिए. इधर भोर होने तक राजेश्वरी अपनी मोपैड से उमाशंकर के भतीजे रंजन के घर पहुंची. उमाशंकर सुबह की कसरत कर रहे थे. उन का 30 साला भतीजा रंजन अपनी चाय की दुकान खोलने की तैयारी में था. राजेश्वरी ने बताया, ‘‘मैं ने आते वक्त खेतों को जलते देखा है. यह निश्चित ही उस गुनेसर का काम है, जो अब यह इलजाम मुझ पर लगाने वाला है.’’

उमाशंकर बोले, ‘‘राजेश्वरी, अब वह वक्त आ चुका है, जिस का हम इंतजार कर रहे थे. कार्तिक पर भी हमला हो सकता है, इसलिए अभी सीधे तुम उस के पास जाओ. मैं सगुणा को अपने गांव फोन कर देता हूं, वह तैयार हो जाएगा. दूसरे छात्रों को भी अब बुलवा लेता हूं.

‘‘मैं बस पकड़ कर सीधे शहर पहुंच रहा हूं. वहां से मैं अपने एक पत्रकार दोस्त को ले कर जल्दी लौटूंगा. फोन पर उस को इत्तिला कर देता हूं कि वह मेरे साथ चलने को तैयार रहे.’’ इधर तांत्रिक गांव वालों को इकट्ठा कर चुका था और मंदिर के सामने पीपल के पेड़ के नीचे बने चबूतरे पर खड़ा हो कर भाषण झाड़ रहा था, ‘‘हमारे गांव में टोनही घुस आई है. सुखदेव की साली. कब से जानता हूं मैं इसे. उस ने तुम लोगों के खेत जला डाले, बकरियां गायब कर दीं…’’

‘‘मेरी मुरगियां भी बाबा,’’ एक गांव वाले ने कहा.

‘‘खाती है सब. जादूटोना करने वाले उन्हें कच्चा खा जाते हैं…’’ बाबा ने बताया, ‘‘वह तुम लोगों के पास आ कर यह कहे कि बाबा चोर है, तुम लोगों को ठग रहा है, उस से पहले तुम सब उसे यहां पकड़ लाओ.’’

‘हां बाबा, अभी लाते हैं,’ कई गांव वाले एकसाथ बोले.

‘‘सुखदेव मिले तो उसे भी ले आओ,’’ बाबा ने कहा.

सुखदेव के घर में राजेश्वरी तो नहीं मिली, अलबत्ता सुखदेव को ही लोग घसीटते हुए ले गए. सुखदेव को देखते ही बाबा ने हुंकार भरी, ‘‘क्यों रे सुखदेव, बहुत मचल रहा था. जो पहलवान साली घर में बिठा ली? और कोई औरत नहीं मिली तुझे?’’ एक औरत ने तांत्रिक को खुली चुनौती दी थी. उस की चोरी पकड़ी गई थी. वह तिलमिला उठा था. चरसगांजे की मारी जनता ‘हेहे’ कर के हंस पड़ी. सुखदेव डर के मारे बाबा के पैरों में लोट गया और कहा, ‘‘उस औरत से मेरा कोई नाता नहीं है. बेटे को खिलानेपिलाने की खातिर जबरदस्ती इधर पहुंच गई. हमें क्या पता, वह गांव में क्या कर रही है.’’ ‘‘टोनही है वह. टोनाटोटका कर के मेरे रहते गांव वालों का इतना नुकसान कर दिया. गांव वालों की ओर जो आंख उठा कर देखेगा, मैं उस की बलि कालभैरव के सामने चढ़ा दूंगा.’’

‘‘आप राजेश्वरी को ला कर जो करना है करो, मुझे कोई मतलब नहीं. मेरे बेटे और मुझे छोड़ दो बाबा,’’ सुखदेव ने कहा.

‘‘जा, फिर ढूंढ़ कर ला उसे गांव वालों के साथ जा कर.’’

इधर गांव वाले गांव छानते रहे, उधर कार्तिक को ले कर राजेश्वरी गांव के बाहर अपने पहलवान गुरुभाई के घर छिप कर बैठी रही. जब तक तांत्रिक का इलाज नहीं हो जाता, उस के हिलनेडुलने से बात बिगड़ सकती थी. रात के वक्त मंदिर के पास पत्रकार और उमाशंकर छिप गए. अंदर गुनेसर के कमरे में कुछ बातचीत चल रही थी.

‘‘बाबा, मैं आप के पैर पड़ता हूं. सामान है मेरे पास… आप दे दो.’’

‘‘चलचल, यह सब यहां नहीं है. तुझे गलत बात पता चली है.’’

सगुना उठ खड़ा हुआ और बोला, ‘‘बाबा, बड़ी मुश्किल से मां की 2 पायल उठा कर लाया हूं.’’

‘‘ठीक है, देखता हूं,’’ बाबा ने अपने मन की कूदफांद को काबू में रखते हुए कहा.

लेकिन अचानक बाबा सतर्क हो गया और पूछा, ‘‘तू कहीं जासूस तो नहीं है? क्या नाम है तेरा?’’ ‘‘नहीं बाबा, आप तो अंतर्यामी हैं. सब समझ सकते हैं. ये पायल मां की ही हैं. मैं उन्हें चुरा कर लाया था कि पुडि़या मिल जाए. कहीं पकड़ा गया तो पुलिस जो न करेगी, उस से ज्यादा घर वाले मेरा कर देंगे. आप दे दो बाबा, तो मैं निकल जाऊं जल्दी.’’ बाबा को विश्वास हो चला था. उन्होंने ड्रग का एक पैकेट निकाला. उस में चरस थी.

‘‘बाबा, हेरोइन की भी एक छोटी पुडि़या दे दो न.’’

‘‘पाकिस्तान बौर्डर पर लड़ाई चल रही है. अफगानिस्तान का सारा माल रुका हुआ है. इसी पर संतोष कर और चल भाग यहां से. फिर कभी दोबारा इधर दिखना मत, वरना जिंदा जमीन में गड़वा दूंगा.’’ ‘‘जा रहा हूं बाबा, मगर एक बात रह गई.’’

‘‘क्या…? जल्दी बोल?’’

‘‘बाबा, हमारे गांव की एक लड़की थी. मैं उस से शादी करना चाहता था, मगर उस के बाप ने मुझे निकम्मा और चरसखोर कह कर बहुत पिटवाया. अब लड़की को बहला कर मैं आप के पास छोड़ देना चाहता हूं. आप उस का पूजन करते रहना.’’

‘‘बहुत होशियार है रे तू चल, ले आना. कितनी उम्र है उस की?’’ उस हवस के भूखे भेडि़ए ने कुटिल मुसकान के साथ पूछा.

‘‘24 साल की होगी. बहुत खूबसूरत है वह.’’

‘‘कब लाएगा?’’

‘‘हफ्तेभर बाद.’’

‘‘भूलना मत.’’

सगुना ने बहुत बड़ा खतरा मोल लिया था. छिपतेछिपते उस ने उमाशंकर और पत्रकार को इशारा कर दिया. वे तीनों वहां से निकल लिए.

सगुना अपने गांव चला गया. उमाशंकर और पत्रकार शहर पुलिस को यह स्टिंग वीडियो दिखाने चले गए, जो सगुना की कमीज के बटन में लगालगा सबकुछ कैद कर रहा था. उमाशंकर ने फोन पर राजेश्वरी को अब सब के सामने आने को कह दिया था, क्योंकि उन के हिसाब से तांत्रिक के पापों का आज आखिरी दिन था. पुलिस सादा लिबास में उमाशंकर और पत्रकार के साथ नारायणपुरा गांव पहुंची. राजेश्वरी गांव वालों की पकड़ में आ चुकी थी. उसे ‘टोनही’ पुकारते हुए लोग उस पर कीचड़ मल रहे थे. राजेश्वरी चाहती, तो उन्हें अपने ‘धोबी पछाड़’ से पटकनी दे देती, लेकिन वह चाहती थी कि तांत्रिक का कियाधरा पुलिस की नजर में आ जाए. इधर राजेश्वरी के साथ भीड़ मंदिर के सामने पीपल के पेड़ तक चली आ रही थी, उधर बाबा की धरपकड़ के बाद उस के कमरे की तलाशी में सैकड़ों की तादाद में गंदी फिल्मों के वीडियो, लड़कियों के फोटो, चरसगांजा और रुपयों की अनगिनत गड्डियां पुलिस को मिल चुकी थीं.

‘‘सब पीपल पेड़ के पास इकट्ठा हो चुके थे. इतने में उमाशंकर तलाशी लेने वाले अफसर के सामने आए और कहा, ‘‘सर, राजेश्वरी राज्यस्तरीय कुश्ती चैंपियन है. हमारे कुछ छात्र भी यहां मौजूद हैं, जो पहलवानी करते हैं. राजेश्वरी भी हम से कुश्ती सीखती है. इसे टोनही कह कर बदनाम करने वाले ठग बाबा का भंडाफोड़ कराने में राजेश्वरी और उस के भांजे कार्तिक का बड़ा हाथ है. सर, आप इजाजत दें, तो इस का स्टिंग वीडियो चलाया जाए.’’

बाबा वहां मुंह लटकाए खड़ा था. लोगों में कानाफूसी चल रही थी. अफसर ने कहा, ‘‘पुलिस को इस गुनेसर के घर से काफी सुबूत मिले हैं, जिन से साफ जाहिर है कि वह गलत धंधा कर के पैसे कमा रहा था और आप सब को ठग रहा था. हमारे पास छिप कर बनाया गया वीडियो है, जिस से सच का पता लगा है. ये महाशय जेल जाने वाले हैं. आगे से आप लोग ऐसे किसी करामाती बाबा के चंगुल में मत फंसिएगा.’’ कार्तिक, राजेश्वरी और उमाशंकर सुखदेव के घर पहुंचे. राजेश्वरी अपना सामान बांध रही थी. उमाशंकर के साथ वह सुबह ही निकल जाने वाली थी. कार्तिक सुखदेव से नजरें चुरा रहा था. उमाशंकर ने कहा, ‘‘सुखदेव, अब तो सारा सच तुम्हारे सामने है. बाबा की पोलपट्टी खुल चुकी है. तुम्हारे गहने, रुपए मवेशी सब गए. बीवी भी गई. अब बेटे को कैसे पालोगे?’’ सुखदेव सिर खुजाते हुए बोला, ‘‘क्या करूंगा? जैसे पहले जाता था स्कूल, जाएगा.’’

कार्तिक के मन को पढ़ते हुए राजेश्वरी ने कहा, ‘‘जीजा, मैं तुम्हें जितना समझती हूं, लगता नहीं कि इसे पाल पाओगे. जी लेना और जिंदगी बनाने में बड़ा फर्क है. होनहार बच्चा है. मैं इसे पालूंगी. ले जाती हूं अपने साथ.’’ सुखदेव कसमसाता सा बोला, ‘‘तू इधर ही रह जा.’’ राजेश्वरी को तरस भी आया और गुस्सा भी. फिर भी वह संभल कर बोली, ‘‘देखो जीजा, मैं तुम्हारी घरवाली बन कर तो रह नहीं सकती… तेरी अक्ल क्या चरस और भांग चरने गई है?’’ कार्तिक हंस पड़ा.

‘‘अपने जीजा की देखभाल की नहीं सोच रही है,’’ कुढ़ता हुआ सुखदेव फिर भी बोल पड़ा.

‘‘अरे जीजा, ज्यादा बोला तो दूंगी पटक के… तू कर ले न दूसरी औरत. मेरे पीछे क्यों पड़ गया? ‘‘मेरे लिए बहुत काम पड़े हैं. तू अपना रास्ता देख और कभी बेटे से लाड़ करने का मन करे, तो हमारे घर का दरवाजा खुला है, आ जाना,’’ राजेश्वरी बोली. उमाशंकर अपनी साइकिल पर, कार्तिक अपनी छोटी सी पोटली के साथ राजेश्वरी की मोपैड पर अपनी मौसी के गांव की ओर चल दिया.

तीन तलाक पर बवाल

शादी के कानूनों पर लंबीचौड़ी बहस चल रही है. हिंदू आदमी औरतों के मन में अचानक मुसलिम औरतों पर मेहरबानी होने लगी है और वे ‘तलाक तलाक तलाक’ को बेहूदा, औरतों के खिलाफ मान कर देशभर में हल्ला मचा रहे हैं. ज्यादा हल्ला सोशल मीडिया में मोबाइलों पर हो रहा है और सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से इस तिहरे तलाक पर कहा है कि यह गलत है, क्योंकि यह औरतों के खिलाफ है. यह सही हो सकता है कि सिर्फ ‘तलाक तलाक तलाक’ कह कर छुटकारा पाना गलत हो और अगर इसलाम धर्म इसे कानून मानता है, तो गलत है, पर सवाल है कि उसे भलाबुरा कहने वाले औरतों के हमदर्द हैं क्या और क्या वे वाकई मुसलिम औरतों के दुख को समझ रहे हैं? इस समय तो लगता है कि इस बहाने एक धर्म की कट्टरता की पोल खोलने का बहाना मिला है, और सरकार का साथ मिला है, इसलिए जितनी चाहे बातें बना लो.

असल में तो किसी भी धर्म का आदमीऔरत की निजी पसंदनापसंद में दखल देना गलत है. औरतें क्या कब पहनें, कैसे चलें, किन रीतिरिवाजों को मानें, यह सब धर्म तय करने वाला कौन होता है? धर्म के खेवनहार तो कहते हैं कि धर्म स्वयं ऊपर वाले ने दिया है, तो उसे आदमीऔरत में फर्क करने की जरूरत ही क्या? बीवी बनेगी तो धर्म के अनुसार, छूटेगी तो धर्म के हिसाब से. क्यों?

अग्नि देवता के समक्ष कन्यादान हो, चर्च में जीसस के सामने आई डू हो या काजी के सामने कबूल है, आखिर इस में धर्म और दुनिया बनाने वाला कहां से टपक पड़ा? शादी का फैसला तो आदमीऔरत खुद करें, मुहर ऊपर वाले का एजेंट लगाए. क्यों? झगड़ा आदमीऔरत करें, पर अलग होना है तो ऊपर वाले के इशारे पर लिखी किताब से होगा. ऐसा क्यों? ईसाई धर्म के तो 2 बड़े टुकड़ों के पीछे एक राजा का अपनी बीवी को न छोड़ देना ही था. धर्म के ठेकेदार अड़ गए कि शादी तो ऊपर वाले ने कराई है और टूट नहीं सकती. हिंदू धर्म में भी ऐसा ही है. ईसाई और हिंदू हमेशा एक ही औरत के साथ रहे हैं, इस का सुबूत तो कहीं नहीं मिलेगा. इसलाम में मर्दों को खास छूट है, पर इस पर थोड़ी जलन हो सकती है, यह गलत भी हो सकता है, पर जब तक लोग धर्म और शादी को जोड़ेंगे, तो गलत होगा ही.

शादी में तो धर्म होना ही नहीं चाहिए. अब तो संसदों में बनाए गए कानूनों के हिसाब से शादियां हों, तलाक हों, तलाक के बाद बच्चों की देखभाल का हिसाब हो. पैसे का बंटवारा हो. हाय मुसलिम औरतें कहने से काम नहीं चलेगा, धर्मों की मारी सारी औरतों की हाय को सुनिए. पर धर्मों के दुकानदार इस शादी के प्रोडक्ट को मुफ्त में सौंपने को तैयार कभी न होंगे. शादियों में धर्म के दखल से पंडे, मुल्ला, पादरी बहुत पैसा बनाते हैं. तिहरे तलाक की बात हो या कन्यादान बंद कराने की, वे कभी मानेंगे नहीं. अपनी मुफ्त की रोजीरोटी क्यों छोड़ें?

एलेना फर्नान्डिस ने करवाया हॉट फोटोशूट

सुपर मॉडल एक्ट्रेस एलेना फर्नान्डिस ने हाल ही में अपने काम के सिलसिले में यूनाइटेड किंगडम की यात्रा की, जहां उन्होंने फोटोशूट करवाये. इस फोटोशूट में एलेना के हॉट अवतार देखने को मिले.

कहा जाता है की यह एलेना  का यह  अब तक का सब से हॉट अवतार रहा है. इस फोटोशूट के दौरान एलेना के अंदर छुपा शैतान बच्चा भी उभर कर बाहर आया. यह फोटोशूट एलेना के होमटाउन में फोटोग्राफर साशा जरीम  द्वारा किया गया, जो दुनिया में सबसे प्रतिष्ठित फैशन स्कूल कोंडे नास्ट पर अध्ययन कर रही है.

वैसे तो एलेना को कई अवतारों में देखा गया है, पर ये हॉट फोटोशूट उनके फैंस के रातो की नींद और चैन दोनों उड़ा देगा.

दीपिका पादुकोण का हौलीवुड करियर हुआ ध्वस्त

कौआ चला हंस की चाल…यह कथा सभी को पता है. इन दिनों दीपिका पादुकोण के साथ जो कुछ हो रहा है, उससे यही बात उभरकर आ रही है कि कौआ (दीपिका पादुकोण) चला हंस (प्रियंका चोपड़ा) की चाल.

प्रियंका चोपड़ा के संगीत के साथ अभिनय के क्षेत्र में हौलीवुड में बढ़ती लोकप्रियता को देखकर दीपिका पादुकोण के मन में ख्याल आया कि उनके अंदर इतनी प्रतिभा है कि वह हौलीवुड में प्रियंका चोपड़ा को मात दे सकती हैं. इसी के चलते संजय लीला भंसाली की पिछली फिल्म ‘‘बाजीराव मस्तानी’’ की शूटिंग के दौरान दीपिका पादुकोण व प्रियंका चोपड़ा के बीच तलवारें खिंच गयी थी. ‘बाजीराव मस्तानी’ की शूटिंग खत्म करते ही दीपिका पादुकोण ने जोर लगाकर हौलीवुड फिल्म ‘‘ट्रिपल एक्सःद रिटर्न आफ जेंडर केज’’ अनुबंधित की और इस बात को जमकर प्रचारित किया. जबकि उन्हे ‘बाजीराव मस्तानी’ के बाद कोई फिल्म नही मिली, कुछ इंडोर्समेंट भी उनके हाथ से चले गए.

मगर दीपिका पादुकोण का पूरा जोर इस बात पर कहा कि वह अपने आपकों हौलीवुड में बहुत बड़ी कामयाबी हासिल करने की वाली अदाकारा के रूप प्रचारित कर सकें. दीपिका पादुकोण और उनकी पीआर टीम ने एड़ी चोटी का जोर लगा डाला. मगर एक सप्ताह के अंदर ही दीपिका पादुकोण को मुंह की खानी पड़ गयी.

यह सच्चाई है. हौलीवुड फिल्म ‘‘ट्रिपल एक्सःद रिटर्न आफ जेंडर केज’’ का ट्रेलर आ चुका है और इसे भारत में भी लोगों ने नकार दिया है. हौलीवुड में भी यही हालत है. इस फिल्म की निर्माण कंपनी अब परेशान है. तो वहीं फिल्म ‘‘टिंपल एक्सःद रिटर्न आफ जेंडर केज’’ के ट्रेलर की तरफ से लोगों का ध्यान हटाने के लिए दीपिका पादुकोण ने अपनी पीआर टीम के माध्यम से इस बात को जमकर प्रचारित कराया कि वह नीदरलैंड में हो रहे एमटीवी के यूरोपीयन संगीत अवार्ड समारोह में रेड कारपेट पर चल कर एक नए इतिहास को रचने वाली हैं.

मगर रविवार को संपन्न इस अवार्ड समारोह में दीपिका पादुकोण का रेड कारपेट पर चलना उन्ही के लिए घातक साबित हो गया. अब तो दीपिका पादुकोण के नजदीकी सूत्र भी मान रहे हैं कि दीपिका पादुकोण ने यह कदम उठाकर बहुत बड़ी गलती की. यदि दीपिका पादुकोण ने पहले से इसे प्रचारित कर इसका हौव्वा न खड़ा किया होता, तो शायद उन्हे कम नुकसान झेलना पड़ता.

रविवार को नीदरलैंड में संपन्न एमटीवी के संगीत अवार्ड समारोह में दीपिका पादुकोण जो पोशाक पहनकर रेड कारपेट पर चली थी, उसकी पूरे विदेशी मीडिया में भी जमकर आलोचना हो रही है. ज्ञातब्य है कि इसके लिए दीपिका पादुकोण ने मशहूर कास्ट्यूम डिजायनर मोनिषा जय सिंह और शालीना नथानी द्वारा डिजाइन की गई आलवी पोशाक पहनी थी. अंतरराष्ट्रीय दैनिक ‘डेली मेल’ ने दीपिका पादुकोण के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रेड कारपेट पर चलने की शुरुआत को उन कलाकारों की श्रेणी में रखा है, जिनका पोशाक पहनने का सलीका व पसंद बहुत खराब है. शायद दीपिका पादुकोण भूल गई थी कि इस अवार्ड समारोह पर पूरी दुनिया की नजरें रहती हैं. और यहां रेड कारपेट पर चलने से कलाकार की लोकप्रियता का ग्राफ बहुत तेजी से उपर या नीचे जाता है.

बहरहाल, दीपिका पादुकोण का ग्राफ इतना नीचे गिर गया है, कि इसे उठाने में उन्हे कई वर्ष लग सकते हैं. ‘डेली मेल’ ने तो दीपिका पादुकोण को ‘‘बौलीवुड ब्लंडर’’ की संज्ञा दी है. डेली मेल के अनुसार दीपिका पादुकोण भले खूबसूरत हों मगर हरे रंग का ब्रालेट और स्कर्ट का काम्बों उनके फिगर को बेहतर नहीं दिखा रहा था.

दीपिका पादुकोण के इस कदम का फायदा अब फिल्म ‘‘ट्रिपल एक्स:द रिटर्न आफ जेंडर केज’’ की दूसरी हीरोईन नीना डोबबरेब को मिलेगा. जानकार मान रहे हैं इसी अवार्ड समारोह में रेड कारपेट पर चलकर नीना ने जबरदस्त वाहवाही बटोरी है. इसलिए फिल्म के निर्माताओं ने अब दीपिका की बजाय नीना को विन के साथ अपनी फिल्म के प्रमोशन का मुख्य चेहरा बनाने का निर्णय कर लिया है. यदि ऐसा होता है तो हौलीवुड में दीपिका का करियर बनने से पहले ही ध्वस्त हो गया.

सिर्फ 501 रुपये में खरीदें 7999 वाला स्मार्टफोन

क्या आप सस्ता स्मार्टफोन खरीदना चाहते हैं? अगर हां, तो हम आपको एक बड़ी खुशखबरी देने जा रहे हैं. दरअसल, ChampOneC1 सिर्फ 501 रुपये में ग्राहकों को 4जी स्मार्टफोन दे रहा है. ये मेड इन इंडिया स्मार्टफोन है. आपको बता दें कि इस स्मार्टफोन की कीमत 7999 रुपये है.

कंपनी की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, ChampOneC1 की पहली फ्लैश सेल 18 नवंबर सुबह 11 बजे की जाएगी. इस फ्लैश सेल का हिस्सा बनने के लिए यूजर्स को एक एप डाउनलोड करनी होगी. इससे संबंधित पूरी जानकारी विस्तार से जानिए.

51 रुपये से करें ऑनलाइन बुकिंग

इसके लिए सबसे पहले आपको 51 रुपये का ChampOneC1 क्लीन मास्टर मोबाइल एप डाउनलोड कर इंस्टॉल करनी होगी.

आपको बता दें कि केवल एप खरीदने वाले एग्जिस्टिंग कस्टमर ही फ्लैश सेल में फोन खरीद पाएंगे.

इस फोन के लिए किसी तरह का प्री-बुकिंग ऑर्डर नहीं लिया जाएगा.

जैसे ही ग्राहक 51 रुपये वाली एप डाउनलोड करेंगे वैसे ही वो फ्लैश सेल का हिस्सा बन जांएगे.

फोन की कीमत यानि 501 रुपये में 51 रुपये को शामिल नहीं किया जाएगा.

अगर ग्राहक 18 नवंबर की फ्लैश में फोन खरीदने में कामयाब होते हैं तो ये फोन केवल कैश ऑन डिलिवरी पर ही दिया जाएगा.

ChampOneC1 के फीचर्स

ये फोन 1.3 गीगाहर्ट्ज क्वाडकोर प्रोसेसर और 2 जीबी रैम से लैस है. इसमें 5 इंच की एचडी डिस्पले दी गई है. इसमें 16जीबी की इंटरनल मेमोरी दी गई है. फोटोग्राफी के लिए इसमें 8 एमपी का रियर और 5 एमपी का फ्रंट फेसिंग कैमरा दिया गया है.

इसके अलावा फोन में 2500 एमएएच की बैटरी लगी है. डुअल सिम सपोर्ट ये स्मार्टफोन एलटीई एनेबल्ड है. इसमें फिंगरप्रिंट स्कैनर भी दी गई हैं.

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