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खराब फॉर्म के लिए झड़ते बाल जिम्मेदार

एक समय में अपनी किफायती और सधी हुई गेंदबाजी के कारण चर्चा में रहे भारतीय तेज गेंदबाज मोहित शर्मा पिछले काफी समय से टीम से बाहर चल रहे हैं. वर्ल्ड कप 2015 में उमेश यादव और मोहम्मद शमी के साथ मिलकर भारत को सेमीफाइनल तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाने वाले मोहित शर्मा आउट ऑफ फॉर्म हैं और उनके टीम से बाहर होने का कारण भी यही है.

इस बीच मोहित शर्मा ने अपनी खराब फॉर्म के लिए अपने खेल और एकाग्रता की जगह किसी और ही चीज को जिम्मेदार ठहराया है. मोहित शर्मा ने कहा कि उनके फॉर्म पर उनके झड़ते बालों ने काफी असर डाला है.

उन्होंने कहा कि लगातार बाल झड़ने के कारण उनके आत्मविश्वास पर असर पड़ा है और विश्वास में कमी के कारण उन्हें अपनी फॉर्म संवारने में मदद नहीं मिल पा रही है. हरियाणा के इस तेज गेंदबाज ने कहा, ‘मैंने महसूस किया कि मेरे बाल झड़ रहे थे और इससे मेरे आत्मविश्वास पर बहुत नकारात्मक असर पड़ा. इसका असर मेरी गेंदबाजी पर पड़ा.’

आईपीएल में हरियाणा के तेज गेंदबाज मोहित ने एक समय में शानदार प्रदर्शन किया था और उसके बाद मोहित को राष्ट्रीय टीम में शामिल किया गया था. 28 वर्षीय मोहित ने 2013 में वनडे क्रिकेट में डेब्यू किया था. मोहित ने भारत के लिए 26 वनडे मैच खेले हैं और इस दौरान उनके नाम पर 31 विकेट दर्ज हैं. इस सीजन में उन्होंने रणजी में पांच मैचों में 16 विकेट झटके हैं, जिसमें दो बार पांच-पांच विकेट भी लिए हैं.

मोहित साल 2015 में आस्ट्रेलिया में हुए विश्व कप में भारतीय टीम का हिस्सा थे. मोहित ने टूर्नामेंट में 8 मैचों में 13 विकेट हासिल किये थे. मोहित ने पिछले साल दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुंबई में हुए वनडे मैच में 7 ओवर में 84 रन लुटाए थे और इसके बाद से टीम से बाहर ही हैं. उसके बाद से ही मोहित अपनी फॉर्म से लगातार लड़ रहे हैं.

इस साल की शुरुआत में आयोजित टी20 विश्व कप में मोहित शर्मा टीम इंडिया का हिस्सा थे, लेकिन उनको खेलने का मौका नहीं मिला. ऐसा नहीं है कि मोहित शर्मा इकलौते ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने अपने बाल गवांए हैं.

टीम इंडिया के पूर्व ओपनर वीरेंद्र सहवाग, गौतम गंभीर और पूर्व कप्तान सौरव गांगुली ने भी अपने करियर के दौरान बाल गंवाए, लेकिन उन्होंने कभी भी अपने खराब प्रदर्शन के लिए बाल झड़ने को वजह नहीं बताया.

फिल्मकारों की मुश्किल

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने क्या सेना के वैलफेयर का ठेका महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के राज ठाकरे जैसों को दे दिया है? करण जौहर की फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ में पाकिस्तानी कलाकारों को लेने की कीमत राज ठाकरे ने सैनिक कल्याण कोष के लिए जबरन धन वसूलने की सफल कोशिश की है. राज्य में शांति बनी रहे और फिल्म चल जाए, इस के लिए भाजपाई मुख्यमंत्री ने इसे अपना आशीर्वाद भी दे दिया है.

लोकतंत्र का इस से ज्यादा बड़ा मखौल नहीं हो सकता. पाकिस्तान अभी शत्रु देश घोषित नहीं हुआ है और हमारी सेनाएं उस से लड़ नहीं रही हैं. ऐसे में कुछ गुट उड़ी में हुए आतंकवादी हमले की आड़ में आम लोगों के फैसलों पर अपनी राय थोपने लगें, यह गलत होगा. अगर उस को भारतीय जनता पार्टी सरकार परोक्ष रूप में समर्थन दे रही है तो यह निरर्थक है. देश महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना जैसे तत्त्वों को कैसे स्वीकार कर सकता है जो खुलेआम एक फिल्म के प्रदर्शन पर रोक लगाने के लिए हिंसा व तोड़फोड़ की धमकी दें और देश की सरकार व कानून मुंह देखते रह जाएं.

पाकिस्तानी कलाकार यदि आतंकवादियों के साथ मिले होते तो यहां की सरकार भारत में कदम रखते ही उन्हें गिरफ्तार कर लेती. जब उन्हें फिल्म में काम करने की पूरी इजाजत मिली हुई है और उस से मिले पैसों को अपने साथ ले जाने की इजाजत मिली हुई है तो किसी भी तरह उन का विरोध नाजायज ही नहीं, लोकतंत्र की मृत्यु की उलटी गिनती गिनना भी माना जाएगा.

पाकिस्तान के गायक, विचारक, लेखक, फिल्मी कलाकार आदि भारत न आएं तो देश पर उड़ी जैसे हमले नहीं होंगे, ऐसा मानने की गलती तो मूर्ख ही करेंगे. आतंकवादी तो पाकिस्तान के विचारकों और कलाकारों के उतने ही खिलाफ हैं जितने वे भारत के खिलाफ हैं. वे तो देशों की सीमाएं ही नहीं मानते. उन्हें तो इसलाम धर्म का प्रचार करना है मानो वे 8वीं सदी में जी रहे हों जब धर्म को फैलाना हर धर्मभक्त का पहला काम हुआ करता था.

आतंकवादी तो अपना काम करेंगे ही, चाहे ‘ऐ दिल है मुश्किल’ सिनेमाघरों में चले या न चले. अफसोस यह है यदि सोशल मीडिया पर नजर डाली जाए तो बहुत से शिक्षित लगने वाले लोग भी इस बेवकूफी की मांग का समर्थन करते नजर आते हैं.

हमेशा अपनी राह चलती है राजनीति

अब जबकि यह लगभग तय हो चुका है कि राहुल गांधी ही कांग्रेस के अगले अध्यक्ष होंगे, तो इसे आश्चर्य से नहीं लिया जाना चाहिए. राजनीति में अनिश्चय और अनिर्णय बहुत लंबे समय तक नहीं चला करते. वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में जब राजनीति खासकर कांग्रेस को लेकर कयासबाजियों का दौर हो, तब यह एक जरूरी निर्णय है. बदलते वक्त के साथ कदम मिलाकर चलने वाला लेकिन देर से लिया गया निर्णय. फिलहाल यह फैसला कांग्रेस के निचले स्तर के कार्यकर्ता को उत्साहित करने वाला है.

130 साल पुरानी कांग्रेस में यह पहली बार हुआ जब वर्किंग कमेटी ने एक स्वर से शीर्ष नेतृत्व के लिए किसी नाम की सिफारिश की. जिस तरह पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने राहुल गांधी के नाम का प्रस्ताव किया, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अनुमोदन किया और सभी प्रमुख बड़े नेताओं ने समर्थन किया उसके संकेत और संदेश काफी स्पष्ट हैं. यह भी स्पष्ट है कि यह फैसला अप्रत्याशित नहीं है. इसके पीछे सुचिंतित रणनीति है. कांग्रेस जैसे संगठन में ऐसे फैसले अनायास नहीं हुआ करते.

हालांकि फिलहाल कांग्रेस की असल समस्या नेतृत्व की नहीं है. यह शायद कभी रही भी नहीं. राजनीति में सवाल तो उठते ही हैं. तब भी उठे थे जब राजीव गांधी ने विपरीत हालात में नेतृत्व संभाला था. तब भी उठे थे जब सोनिया गांधी ने कमान संभाली थी. यहां असल सवाल कांग्रेस की अपनी साख और खोई जमीन की वापसी का है. ऐसे समय में, जब उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड और गोवा के चुनाव सामने हों यह बड़ा फैसला है. इसके संकेत भी साफ हैं. संदेश भी.

कांग्रेस यह करके उन सभी अटकलों पर विराम लगा देना चाहती है जो बार-बार कभी उस पर हमले के रूप में तो कभी संशय के रूप में उछाले जाते हैं. राहुल गांधी को कमान सौंपने की मांग पहले भी हुई है, लेकिन इस बार जिस तरह वर्किंग कमेटी में सोनिया गांधी की अनुपस्थिति दर्ज हुई, राहुल ने पहली बार पूर्णकालिक तौर पर इसकी अध्यक्षता की, और नेताओं की व्यक्तिगत मांग से ऊपर जाकर जिस तरह वर्किंग कमेटी ने उनका नाम आगे बढ़ाया, यह सब अनायास तो नहीं था. 130 साल में पहली बार वर्किंग कमेटी ने नेतृत्व को लेकर ऐसा कोई सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किया. उस प्रस्ताव को वहीं तक सीमित न रखकर वर्तमान अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजा.

कांग्रेस इस वक्त जिन हालात से गुजर रही है उसमें यह फैसला पुरानी मांग को औपचारिक रूप देने की शुरुआत मात्र है. यह किसी के नेतृत्व संभालने, न संभालने का मामला भी नहीं है. कांग्रेस को भी इसे इसी रूप में देखना होगा. इसे अपने खोए जनाधार की वापसी के प्रस्थान बिंदु के रूप में प्रचारित और स्थापित करना होगा. इसके लिए उसे उत्तर प्रदेश की कठिन परिस्थितियों वाली पथरीली जमीन से अच्छी खासी फसल उगने की गारंटी लेनी होगी. यानी 2017 की जमीन पर 2019 की फसल बोनी होगी.

राहुल गांधी अपनी खाट सभाओं से शुरुआत कर चुके हैं. इसे मिले समर्थन से उत्साहित भी हैं. अगर जमीनी चर्चाओं को सही मानें तो कांग्रेस का निचले स्तर का कार्यकर्ता इसे संगठन की अजगरी मुद्रा से बाहर निकलने की राह के रूप में देख रहा है. और ऐसे में राहुल गांधी और कांग्रेस दोनों की चुनौती खासी बढ़ जाती है. सिर्फ यूपी के संदर्भ से देखें तो कांग्रेस के कई फैसले देर से सामने आए माने जाएंगे. चाहे राजबब्बर का प्रदेश अध्यक्ष बनने का फैसला हो या अब राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने का. लेकिन यह भी सच है कि राजनीति में कभी भी, कुछ भी देर से नहीं होता. राजनीति हमेशा अपनी राह चलती है.

माउस की स्पीड अब आपकी मुट्ठी में

कंप्यूटर पर काम करने के दौरान कई यूजर को महसूस होता है कि उनके माउस की स्पीड कम है जबकि बहुत से यूजर को यह स्पीड ज्यादा भी लगती है. ऐसी स्थिति में कंप्यूटर की सेटिंग में बदलाव कर माउस की स्पीड अपने मनमुताबिक सेट की जा सकती है.

कंप्यूटर पैनल में है सेटिंग

इसके लिए पहले कंप्यूटर के स्टार्ट बटन पर जाएं जो बाईं ओर नीचे की तरफ मिलेगा, उस पर क्लिक करने के बाद ‘कंप्यूटर पैनल’ में जाएं. इसके अंदर हार्डवेयर का विकल्प मिलेगा, उसपर क्लिक करें. हालांकि विंडोज-7 यूजर को माउस वाले विकल्प पर जाना होगा. इसके बाद माउस का डायलॉग बॉक्स खुलेगा. माउस की स्पीड कम या ज्यादा करने के लिए ‘प्वाइंटर ऑप्शन’ के विकल्प को खोलें, उसके अंदर यूजर को ‘सिलेक्ट प्वाइंटर स्पीड’ मिलेगी. ‘स्लो’ की तरफ करने से माउस का प्वाइंटर (कर्सर) धीमा हो जाएगा जबकि ‘फास्ट’ की तरफ बढ़ाने से माउस का प्वाइंटर तेजी से काम करने लगेगा. साथ ही टाइपिंग के दौरान प्वाइंटर नहीं देखना चाहते हैं तो बॉक्स में नीचे की तरफ दिए गए ‘हाइड प्वाइंटर व्हाइल टाइपिंग’ के बॉक्स को अनचेक कर दें. नहीं तो माउस का प्वाइंटर दिखता रहेगा.

फोल्डर खोलने वाला डबल क्लिक भी करें सेट

फोल्डर खोलने के लिए उस पर ‘डबल क्लिक’ करते हैं उन दोनों क्लिक के बीच का समय कम व ज्यादा भी किया जा सकता है. घर के बुजुर्ग कंप्यूटर के किसी फोल्डर को खोलने के लिए उस पर तेजी से ‘डबल क्लिक’ नहीं कर पाते हैं, उनके फायदे के लिए डबल क्लिक की स्पीड को घटाया जा सकता है. इसे नियंत्रित करने के लिए माउस के डायलॉग बॉक्स के अंदर ‘बटन्स’ कैटेगरी का चयन करें. इसमें ‘स्लो’ की तरफ करने से फोल्डर पर धीरे-धीरे दो बार क्लिक करने से फोल्डर खोला जा सकता है वहीं ‘फास्ट’ की तरफ बढ़ाने से फोल्डर खोलने के लिए उस पर तेजी से लगातार दो बार क्लिक करना जरूरी होगा.

डबल क्लिक से बंद करें वर्ड फाइल

एमएस वर्ड की फाइल को झट से बंद करने के लिए वर्ड फाइल में ऊपर की ओर बाईं तरफ दिए गए आइकन पर दो बार क्लिक करने से वह तुरंत बंद हो जाएगा. अक्सर लोग वर्ड फाइल बंद करने के लिए ‘क्लोज’ के बटन पर क्लिक करके बंद करते हैं.

कर्सर का निशान बदलें

माउस का प्वाइंटर तीर के ऊपरी भाग की तरह होता है मगर यूजर चाहें तो उसे बदल सकते हैं. विंडोज-7 यूजर इसके लिए पहले कंप्यूटर पैनल में जाएं, वहां दिए गए माउस के विकल्प पर क्लिक करें. ऐसा करने से नई विंडो खुलेगी जिसमें ऊपर प्वाइंटर का विकल्प मिलेगा उस पर क्लिक करें. इसके बाद कई चिन्ह दिखाई देंगे जो कंप्यूटर के हैंग होने की स्थिति बताते हैं. प्वाइंटर के तीर का निशान बदलने के लिए उसमें नीचे दी गई सूची में किसी एक का चयन करें और अप्लाई पर क्लिक कर दें. इसके अलावा भी और चिन्ह के विकल्प हैं जो ब्राउज पर क्लिक करने के बाद मिलेंगे.

हमें आता है मैच ड्रॉ करानाः कोहली

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने मैच के बाद कहा कि आलोचक अब उनकी टीम की कड़ी परिस्थितियों में मैच ड्रॉ कराने की क्षमता पर सवाल नहीं उठा सकते हैं. उनकी अगुवाई में भारत नेइंग्लैंड के खिलाफ पहला मैच ड्रॉ कराया.

कोहली ने नाबाद 49 रन की जुझारू पारी और रविंद्र जडेजा (32) ने मैच ड्रॉ कराने में अहम भूमिका निभायी. उन्होंने कहा कि कम से कम हमें यह पता चला कि मैच कैसे ड्रॉ कराये जाते हैं. इससे पहले कुछ लोग निश्चित तौर पर इस बारे में आशंकित रहे होंगे कि क्या हमारी टीम जानती है कि मैच ड्रॉ कैसे कराने हैं. हमने या तो मैच जीते हैं या हमने मैच गंवाये.

कोहली ने कहा कि मैंने वहां पर रविंद्र जडेजा से कहा कि यह हम दोनों के पास अपने खेल के एक अन्य पहलू में सुधार करने का मौका है. हो सकता है कि भविष्य में टेस्ट मैचों में हम फिर से इस स्थिति में आएंगे. हमें फिर से अपना जज्बा दिखाना पड़ सकता है. यह चुनौतीपूर्ण स्थिति थी लेकिन कई मायनों में यह अच्छी भी थी.

भारतीय कप्तान ने हालांकि स्पष्ट किया कि वह पिच पर घास देखकर हैरान हुए थे. उन्होंने कहा कि ईमानदारी से कहूं तो इतनी अधिक घास देखकर मुझे हैरानी हुई थी. ऐसा नहीं होना चाहिए था. कोहली ने हालांकि कहा कि पिच बल्लेबाजी के लिए उपयुक्त थी और इसमें ऐसा कुछ नहीं था जैसा भारतीय विकेट गिरने के कारण बाहर से दिख रहा था.

उन्होंने कहा कि हमने तीसरे दिन से ही देखा था. आखिरी घंटे से स्पिनरों को मदद मिल रही थी. चौथे और पांचवें दिन भी पिच ऐसी रही. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि पूरे दिन उसका मिजाज इस तरह का रहा. बीच में कुछ गेंद उछाल ले रही थी और यदि ऑफ स्पिनर हैं तो तीसरे दिन के बाद आपको विकेट लेने के लिए सही क्षेत्रों पर गेंद पिच करानी जरूरी थी. पहले दो दिन बल्लेबाजी के लिए वास्तव में अनुकूल थे.

कोहली ने कहा कि तीसरे दिन के बाद पिच धीमी पड़ती गयी लेकिन इसमें कुछ गड़बड़ नहीं थी. कई बार ऐसी परिस्थितियां बन जाती हैं कि यहां तक कि सपाट विकेट पर भी आप विकेट गंवा देते हो. भारतीय कप्तान से जब पूछा गया कि क्या मेहमान टीम के स्पिनरों ने भारतीय स्पिनरों रविचंद्रन अश्विन, जडेजा और मिश्रा की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया तो उन्होंने तल्ख शब्दों में जवाब दिया.

उन्होंने कहा कि मुझे ऐसा नहीं लगता. उन्होंने अच्छी गेंदबाजी की लेकिन ऐसा नहीं कि उन्होंने हमारे स्पिनरों को पीछे छोड़ दिया. ऐसा नहीं रहा कि उन्होंने पांच विकेट लिए और मैच का रूख बदल दिया. यदि उन्होंने हमारे स्पिनरों से बेहतर प्रदर्शन किया होता तो उन्हें मैच जीतना चाहिए था.

जल्द मिलेगा 500 का नया नोट

करेंसी सिचुएशन को मैनेज करने वाले आला सरकारी अफसरों ने कहा है कि उन्हें बैंकों और एटीएम में गुरुवार तक हालात सामान्य हो जाने की उम्मीद है. सरकार के जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, 9 नवंबर की सुबह से 12 नवंबर की सुबह तक देशभर के बैंकों में 1.67 लाख करोड़ के ट्रांजैक्शंस हो चुके थे. इनमें से 45,000 करोड़ रुपये की पुरानी करंसी तो सिर्फ एसबीआई में जमा कराई गई है. हालांकि, इस बीच लोगों को बैंकों और एटीएम से पैसा निकालने में काफी दिक्कत हो रही है.

अधिकारियों ने बताया कि केंद्र ऐसे कदम उठाने जा रहा है, जिनसे बैंक अगले चार दिनों में हालात को नियंत्रण में कर लेंगे. बैंक अभी रोज 3 करोड़ लोगों को सर्विस दे रहे हैं. इस हफ्ते वे 4-5 करोड़ लोगों को सर्विस देंगे, जिससे अफरातफरी खत्म हो जाएगी. 500 रुपये के नए नोट आने वाले दिनों में जारी होंगे. अगले चार दिनों में 2,000 रुपये के और नोट भी बैंकों के पास भेजे जा सकते हैं. शुरू में कुछ गड़बड़ियां हुईं, लेकिन हालात को काबू में किया जा सकता है. 

गूगल क्रोम से करें सुपर फास्ट सर्फिंग

हममें से हर कोई इंटरनेट वेब ब्राउजर गूगल क्रोम इस्तेमाल करता है. कई बार यूजर्स को अपने पीसी/लैपटॉप में क्रोम की धीमी स्पीड का सामना करना पड़ता है. इस परेशानी से निपटने के लिए हम आपको कुछ टिप्स बताने जा रहे हैं, जिसकी मदद से आप से क्रोम ब्राउजर की स्पीड को बढ़ा सकते हैं.

1. अपडेट चेक करें

अपने पीसी/लैपटॉप में अपडेट को चेक करें, अगर अपडेट आया हो तो उसे इंस्टॉल करें. इससे न ही आपका पीसी/लैपटॉप एडवांस चीजों को सपोर्ट करेगा बल्कि ब्राउजर की स्पीड भी फास्ट कर देगा. अपडेट चेक करने के लिए पीसी/लैपटॉप की सेटिंग में जाएं. यहां से आप अपडेट चेक कर सकते हैं.

2. बेकार एक्सेटेंशन को रिमूव करें

पीसी/लैपटॉप में चल रहे बेकार के एक्संटेंशन को हटा दें. ये छोटे-छोटे प्रोग्राम होते हैं जो पीसी/लैपटॉप में रन करते रहते हैं. ये एक्सटेंशन्स ब्राउजर की स्पीड को काफी धीमा कर देते हैं. इन्हें रिमूव करने के लिए क्रोम ओपन करें. फिर राइट साइड ऊपर की तरफ जो तीन डॉट बने होते हैं उनपर क्लिक करें, फिर More tools और फिर एक्सटेंशन्स पर जाएं. इसके बाद आप जिन एक्सटेंशन को रिमूव करना चाहते हैं उन्हें रिमूव कर दें.

3. बेकार प्लगइन को रिमूव करें

ज्यादा प्लगइन्स भी स्पीड पर काफी असर डालते हैं. इन्हें हटाने के लिए एड्रेस बार में chrome://plugins/in टाइप करें. यहां से आप अपने मुताबिक प्लंगइन को ऑफ कर सकते हैं.

4. अनयूज टैब और ब्राउजर को बंद करें

पीसी/लैपटॉप पर काम करते समय हम कई टैब्स को एक साथ खोल लेते हैं. आपको बता दें कि ज्यादा टैब रन करने से ब्राउजर पर लोड पड़ता है. अगर आप कम टैब खोलेंगे तो उतनी ही स्पींड में आपका टैब अच्छे से रन करेगा.

नोट बैन से सस्ता हो सकता है लोन

केंद्र सरकार के नोट-बैन के फैसले से बैंकों में नकदी की मात्रा काफी ज्यादा बढ़ी है. सरकार के इस फैसले से बैंक की कैश राशि में बड़ा इजाफा हुआ है. ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में बैंक ब्याज दरों में कमी कर सकते हैं. गौरतलब है कि इस फैसले के बाद से ही बड़े पैमाने पर लोगों ने नकदी जमा कराई है, इसके चलते वित्तीय संस्थाओं की आर्थिक सेहत में सुधार हुआ है.

बैंकों में जमा हुए इतने रुपए

एक रिपोर्ट के मुताबिक शुक्रवार की शाम तक देश भर में बैंकों में 60,000 करोड़ रुपए जमा हुए. समय के साथ इस राशि में लगातार बड़ा इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है. डोमेस्टिक रेटिंग एजेंसी आईसीआरए ने जमा के ब्याज में 0.3 से लेकर 0.10 पर्सेंट तक की कमी का अनुमान जताया है. जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज में कटौती को बैंक लोन के इंटरेस्ट में कमी करते हुए लोगों को फायदा पहुंचाने पर विचार कर सकते हैं.

वुमंस इंडियन ओपन का खिताब गोल्फर अदिती के नाम

रियो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली गोल्फ खिलाड़ी अदिती अशोक ने हीरो वुमंस इंडियन ओपन का खिताब अपने नाम कर लिया है. डीएलएफ गोल्फ एंड कंट्री क्लब में खेले गए इस टूर्नामेंट के तीसरे एवं अंतिम दिन फाइनल मुकाबले में अदिती ने 72 का स्कोर किया.

तीन दिन खेले गए मुकाबलों में भारतीय गोल्फर्स का शानदार प्रदर्शन रहा. पहले दिन मुकाबलों में पिछड़ने के बाद अदिति ने दूसरे दिन वापसी कर खिताब की दावेदारी मजबूत कर ली थी और अंतिम दिन शानदार गेम जारी रख इतिहास रच दिया.

अदिति ने पहले दिन 72 का स्कोर किया था तो दूसरे दिन 68 का स्कोर किया. तीसरे दिन होल-टू पर खेलते हुए 3 का कार्ड खेल अदिति ने 72 के स्कोर के साथ कुल 213 का स्कोर किया.

वहीं, इस टूर्नामेंट में रनरअप यूएसए की ब्रिटनी लसीकाम व स्पेन की बेलेन मोजो 214-214 के स्कोर पर संयुक्त रूप से रहीं. चौथे स्थान पर थाइलैंड की कंफनिटन 215 व ब्रिटेन की गोल्फर फ्लोरेंटिना पार्कर ने 216 स्कोर के साथ पांचवे स्थान पर और यूएसए की बेथ एलन, फ्रांस की अलेक्जेंड्रा विलट फर्रेट और आनेलिसे कुदाल संयुक्त रूप से 217-217 स्कोर पर 6वें स्थान पर रहीं. टूर्नामेंट में 30 देशों की 114 गोल्फर्स खेल रही थीं.

अदिती ने कहा कि “अपने दर्शकों के बीच खिताब जीतना अलग खुशी देता है. पिछले वर्ष मेरा बेहतर प्रदर्शन रहा था लेकिन इस वर्ष मैं बड़ा खिताब जीतने में कामयाब रही, जिसकी पूरे देश को खुशी होगी.”

जानें कौन-सी जियो सिम है आपके लिए बेहतर

रिलायंस जिओ को लेकर चर्चाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है. अभी हाल की रिर्पोट के अनुसार दावा किया जा रहा है कि कंपनी जल्दी ही दो नई सिम लेकर आ रही है. यह सिम दो कलर रेड और ग्रीन में मिलेगी. यह नए कलर वाली दोनों सिम 1 जनवरी 2017 से उपलब्ध होगी. इन दोनों के फीचर्स अलग- अलग होंगे. आगे जानिए रेड और ग्रीन सिम में क्या होगा अंतर…

रेड सिम

लाल सिम उन यूजर्स के लिए लाई जा रही है जो डाटा का यूज कम और वॉइस कॉल का यूज ज्यादा करते हैं.  रेड सिम के यूजर्स को वॉइस कॉल की अच्छी क्वालिटी मिलेगी. कॉल के समय नेटवर्क प्रॉब्लम भी नहीं होगी. इसमें 4G डाटा स्पीड भी अच्छी होगी. लेकिन डाटा यूज की लिमिट रहेगी.

ग्रीन सिम

ग्रीन सिम हेवी डाटा यूज करने वाले यूजर्स के लिए होगी. सिम के साथ वीकली बेसिस पर फ्री इंटरनेट दिया जाएगा. इसमें डाटा पर किसी तरह की कोई लिमिट नहीं होगी.

जानिए ओरेंज और ब्लू सिम के बारे में…

अभी रिलायंस जिओ ओरेंज और ब्लू सिम कार्ड दे रही है. ऐसा दावा किया जा रहा है कि वेलकम ऑफर एक्सपायर होने के बाद इन सिम कार्ड्स को इन दो नई सिम कार्ड से बदल दिया जाएगा.

ओरेंज सिम

अभी मार्केट में जिओ की ओरेंज और ब्लू कलर की सिम मिल रही है. ऑरेंज सिम को कंपनी ने प्रीव्यू के वक्त टेस्टिंग के पर्पज से लॉन्च किया था. ये सिम अपने नंबर के साथ आती है जिससे यूजर अपने मौजूदा नंबर के साथ पोर्ट नहीं कर सकते.

ब्लू सिम

ब्लू पैकेट वाला सिम अपने प्री डिसाइडेड MDN नंबर के साथ नहीं आता है. इस सिम का नंबर आधार कार्ड के जरिए होने वाली eKYC प्रोसेस के वक्त सिस्टम द्वारा जेनरेट किया जाता है. इसमें यूजर्स मनपसंद नंबर नहीं पा सकता उसे वही नंबर मिलता है जो रिलायंस कंपनी की ओर से जेनरेट किया जाता है.

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