सरकारी खजाने से लैपटौप और स्मार्टफोन बांटना आसान है और अरबों रुपए डकारने वाले विजय माल्या को बाइज्जत विदेश भागने देना भी सरल है. ऐसे में कुछ सौहजार खाटें राहुल गांधी ने बजाय बांटने के लुटवा दीं तो कोई अजूबा नहीं हो गया है. इस बहाने कम से कम शहरी पीढ़ी खाट से परिचित तो हुई.

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