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आमंत्रण टूर्नामेंट: मलेशिया को हरा भारत ने जीता कांस्य पदक

भारतीय पुरूष हॉकी टीम ने चार देशों के आमंत्रण टूर्नामेंट में मलेशिया के खिलाफ कांस्य पदक के प्ले ऑफ मुकाबले में दबदबा बनाते हुए 4-1 से जीत दर्ज कर तीसरा स्थान अपने नाम किया. भारत ने टूर्नामेंट के अपने पहले मैच में भी मलेशिया को मात दिया था और अब यहां भी तीसरे और चौथे स्थान के लिए हुए मुकाबले में उसने उसी प्रदर्शन को दोहराते हुए मलेशिया को 4-1 से धो दिया.

भारत की ओर से आकाशदीप सिंह ने दूसरे, वीआर रघुनाथ ने 45वें, तलविंदर सिंह ने 52वें और रुपिंदर पाल सिंह ने 58वें मिनट में गोल किए.

भारतीय टीम ने मैच के शुरुआत से ही अच्छा खेल दिखाया और इसका फायदा भी उसे जल्दी ही देखने को मिला जब आकाशदीप सिंह ने मैच के दूसरे ही मिनट में गोल दागकर स्कोर 1-0 कर दिया.  भारत की आरे से मैच के 45वें मिनट में वीआर रघुनाथ ने पेनल्टी कार्नर को गोल में तबदील करके स्कोर 2-0 कर दिया.

दूसरे क्वार्टर में भारतीय फॉरवर्ड अफान यूसुफ मलेशिया के तीन डिफेंडरों को पछाड़ते हुए गोल की ओर बढ़े, उन्होंने गोल की ओर रिवर्स हिट शॉट लगाया लेकिन मलेशियाई गोलकीपर कुमार सुब्रमण्यम ने इसका बढ़िया बचाव किया. मलेशिया ने मौके बनाने के प्रयास किये लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली.

हाफ टाइम तक भारत ने 1-0 की बढ़त बनायी हुई थी. तीसरे क्वॉर्टर में दोनों टीमों ने मौके बनाये. कई बार सर्कल में घुसने के बावजूद किसी भी टीम को तीसरे क्वॉर्टर के अंत तक गोल करने का सही मौका नहीं मिला. हालांकि अंतिम मिनट में वीआर रघुनाथ ने दो पेनल्टी कॉर्नर में से एक को गोल में तब्दील कर भारत की बढ़त दोगुनी कर दी.

हालांकि मलेशिया ने अपने खेल सुधारते करते हुए रघुनाथ के गोल कुछ सेकेंड बाद ही जोल वान ह्यूजेन के बेहतरीन गोल की बदौलत स्कोर 2-1 कर दिया. लेकिन इसके 7 मिनट बाद ही एक बार फिर से भारत ने 52वें मिनट में तलविंदर सिंह की बदौलत स्कोर 3-1 कर दिया. तलविंदर के गोल के बाद ही रुपिन्दर पाल सिंह ने भी 58वें मिनट में एक और पेनल्टी कार्नर को गोल में तब्दील करके गेम 4-1 से भारत के नाम कर दिया.

भारतीय महिला हाकी टीम ने अपना आस्ट्रेलियाई दौरा तीसरे और अंतिम मैच में 1-3 से हारकर समाप्त किया जिससे उन्होंने सीरीज 1-2 से गंवा दी. भारत की दीपिका को सीरीज में शानदार प्रदर्शन के लिये ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ चुना गया. भारतीय महिला खिलाड़ियों ने आज अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. मैदान में हुई टक्कर के बाद कप्तान वंदना पूरे मैच के लिये बाहर हो गई.

गूगल अब नहीं देगा अपनी ये 8 सेवाएं

गूगल ने इस साल कई सारी नई सेवाएं शुरु की लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस साल गूगल ने अपनी कई सारी सेवाएं बंद भी कर दीं. जानिए कौन सी हैं वो सेवाएं.

गूगल कम्पेयर

गूगल ने सबसे पहली सेवा जो बंद की वो थी गूगल कंपेयर. गूगल का यह प्रोडक्ट आपको बीमा, ऑटो समेत कई सारे उत्पादों के बीच तुलना उपलब्ध करवाता था. बता दें कि गूगल ने यह सेवा 2015 में ही शुरू की थी.

गूगल हैंगआउट ऑन एयर

गूगल ने अपनी एक और अहम सेवा को इसी साल बंद कर दिया और वो है गूगल हैंगआउट. अब आप गूगल हैंगआउट की बजाए लाइव के लिए यू-ट्यूब का इस्तेमाल कर सकते हैं.

 गूगल नेक्सस

गूगल ने तीसरा जो प्रोडक्ट बंद किया वो है नेक्सस. गूगल ने नेक्सस सेवा साल 2010 में शुरू की थी. इसके बाद गूगल ने पिक्सल फोन लॉन्च किया और इस तरह नेक्सस सेवा बंद कर दी गई.

गूगल पिकासा

गूगल ने साल की शुरूआत में मार्च में अपने बहुत अहम प्रोडक्ट पिकासा को भी बंद कर दिया. इसे बंद करते हुए गूगल ने कहा कि अब हम गूगल फोटोज में ही एकीकृत सेवा उपलब्ध करवाएंगे.

पैनारेमियो

गूगल ने एक और सेवा जो बंद कर दी वो है पैनारेमियो. इसे गूगल ने साल 2007 में शुरू किया था. गूगल ने इसे साल 2014 में भी बंद करने की कोशिश की थी. इसे बंद करने के के लिए भी गूगल ने इसे फोटोज में जोड़ने की बात कही.

प्रोजेक्ट आरा

गूगल ने इस साल जो सबसे महत्वपूर्ण चीज बंद की वो है 'प्रोजेक्ट आरा'. यह एक मॉड्यूलर स्मार्टफोन पर काम कर रहा था. मगर किन्हीं कारणों से गूगल ने इस प्रोजेक्ट से अपने हाथ वापस खींच लिए.

मैक, विंडो और लाइनक्स पर क्रोम की सपोर्ट

क्या आपको पता है गूगल ने इंटरनेट ब्राउजर क्रोम को भी इस साल बंद कर दिया. गूगल ने इस साल से मैक, विंडो और लाइनक्स पर क्रोम की सपोर्ट बंद कर दी है.

माई ट्रैक्स

गूगल ने एक और महत्वपूर्ण सेवा इस साल बंद कर दी. वो है गूगल ट्रैक. गूगल की यह सेवा एथलीट्स के लिए खासी मददगार साबित होती थी. इसके जरिए वे अपनी दौड़, दूरी और समय का हिसाब किताब रखते थे.

तो ये है देश की नई आर्थिक राजधानी

अब तक मुंबई को देश की आर्थिक राजधानी का दर्जा प्राप्त था. पर देश की राजधानी ने मुंबई से यह पदवी छीन ली है. एक अंग्रेजी अखबार के अनुसार मुंबईकरों के लिए यह बुरी खबर हो सकती है क्‍योंकि सपनों के शहर ने अपना आर्थिक राजधानी होने का तमगा दिल्‍ली के हाथों गवां दिया है.

ऑक्सफर्ड इकनॉमिक्स की ओर से कराए गए एक सर्वे में दुनिया के 50 मेट्रोपोलिटन इकॉनमिक शहरों में दिल्ली को 30वां स्थान मिला है, जबकि मुंबई एक पायदान नीचे यानी 31वें नंबर पर है. सर्वे की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली ने अपने शहरी क्षेत्र का विस्तार किया है. गुड़गांव, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद जैसे शहरों को मिलाकर दिल्ली-एनसीआर की जीडीपी 370 अरब डॉलर यानी करीब 25,164 अरब रुपये है.

रिपोर्ट में मुंबई के फिर से फाइनेंशियल कैपिटल बनने की संभावना भी जताई गई. एडवाइजरी फर्म ने यह भी बताया की है कि 2030 तक यह दोनों शहर लिस्‍ट में उपर चढ़ेंगे और जहां दिल्‍ली 11वें नंबर पर पहुंच जाएगी वहीं मुंबई 14वें नंबर पर रहेगी. इसके साथ ही यह दोनों दुनिया के बड़े आर्थिक केंद्र बन जाएंगे.

गौरतलब है कि मुंबई की आबादी एनसीआर की तुलना में कम है, इस लिहाज से प्रति व्यक्ति आय के मामले में मुंबई दिल्ली से आगे है. 

‘महिलाओं में सेल्फ अवेयरनेस जरुरी है’

उम्र के 5 दशक पार कर चुके मिलिंद सोमन एक सुपर मॉडल, अभिनेता, फिल्म निर्माता, स्पोर्टस पर्सन हैं और फिटनेस को प्रमोट करते हैं. महाराष्ट्र के मिलिंद सोमन को फिल्मों के अलावा स्पोर्ट्स भी काफी पसंद हैं. 10 साल की उम्र से ही उन्होंने महाराष्ट्र को राष्ट्रीय स्तर पर रिप्रेजेंट करना शुरू कर दिया था. उन्होंने 4 साल तक लगातार नेशनल सीनियर स्विमिंग चैम्पियनशिप जीती है. 30 दिनों में 1500 किलोमीटर दौड़कर उन्होंने अपना नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज करवाया है. इसके अलावा उन्होंने ‘आयरन मैन’ चैलेंज को पहली ही कोशिश में 15 घंटे और 19 मिनट में पूरा किया है. इसमें साइकिलिंग, स्विमिंग और रनिंग शामिल हैं.

समय मिलने पर वे आज भी 10 से 12 किलोमीटर दौड़ते हैं और फिटनेस के लिए सबको प्रोत्साहित भी करते हैं. इस समय वे महिलाओं की मैराथन दौड़ ‘पिंकाथन’ के ब्रांड एम्बेसेडर हैं. ये उनका 5वां सत्र है जो 18 दिसम्बर को होने वाला है. हर बार मैराथन में भाग लेने वाली महिलाओं की बढ़ती संख्या को देखकर वे काफी खुश हैं. उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश.

प्र. अच्छी हेल्थ के लिए फिटनेस कितनी जरुरी है?

फिट रहने से केवल शरीर ही नहीं बल्कि मानसिक अवस्था भी अच्छी रहती है. आमतौर पर महिलाएं कुछ न कुछ बहाना बनाकर फिटनेस से भागती हैं. ऐसे में इस तरह की दौड़ उनके लिए काफी आकर्षक होती है. हमारे समाज में कुछ पुरुषों का ही कहना है कि महिलायें दौड़ नहीं सकती, यही वजह है कि मैं ‘पिंकाथन’ से जुड़ा हूं. अधिकतर महिलायें घरेलू होती हैं और उन्हें इसकी जानकारी नहीं है इसलिए आज मैं महिलाओं को अपने लिए, अपने हेल्थ के लिए दौड़ने के लिए कह रहा हूं. मेरे ख्याल से एक महिला जो सोचती है वह कर सकती है. कुछ महिलायें तो ऐसी हैं कि शादी से पहले अपने लिए सबकुछ करती हैं और शादी के बाद सब छोड़ कर घर परिवार में जुट जाती हैं, ऐसे में वे एक अच्छी सेहत को जी नहीं पाती. उनका स्ट्रेस लेवेल भी बढ़ता रहता है.

प्र. इतने सालों में महिलाओं का झुकाव इस ओर कितना बढ़ा है?

महिलाओं में अवेयरनेस बढ़ रहा है. पहले हम केवल 8 शहरों में इस दौड़ का आयोजन करते थे. अब छोटे-बड़े अनेक शहरों जैसे विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, नागपुर आदि जगहों से भी लोग हमें बुला रहे हैं. मैंने इन छोटे-बड़े शहरों के लिए एक दूसरा इवेंट ‘इंडिया गोईंग पिंक’ भी ऑरगेनाइज किया है, इस इवेंट से जुड़े लोग सबको गाइड करते हैं और दौड़ का आयोजन करते हैं. इस बार 14 शहरों में ये दौड़ होगी. मुंबई के पहले मैराथन में केवल दो हजार महिलाओं ने भाग लिया था. पिछले साल 11 हजार महिलाओं ने भाग लिया और इस बार तो ये संख्या लाखों में होने की संभावना है.

प्र. दौड़ या फिटनेस से महिला के जीवन में कौन से खास बदलाव आते हैं?

मैं तो सबको लेकर दौड़ता हूं. अंदर जो बदलाव आते हैं यह उन्हें ही पता चलता है. उनके अंदर आत्मविश्वास बढ़ता है कि वह जो चाहे वो कर सकती हैं. वे अच्छा फील करती हैं. हमारे देश में पिछले कुछ सालों से ही महिलाएं दौड़ती हैं, जबकि अमेरिका में 40-45 साल पहले ही यह ट्रेंड शुरू हो गया था. लेकिन तब केवल प्रतियोगिता के लिए ही लोग दौड़ते थे. जिनमें अधिकतर पुरुष ही होते थे. हेल्थ या रिक्रिएशन के लिए कोई भी नहीं दौड़ता था. अभी अमेरिका में हर सप्ताह 30 मिलियन लोग दौड़ते हैं, क्योंकि उन्हें इसके फायदे पता चल चुके हैं. वहां स्पोर्ट्स कल्चर है. पर अपने देश में ऐसा नहीं है.

महिलायें तो स्पोर्ट्स के मामले में और भी पीछे हैं. लेकिन अब हर स्कूल, गांव, शहर, क्लब आदि जगहों पर रनिंग के इवेंट कराये जा रहे हैं. लोग भाग भी ले रहे हैं. इस तरह सभी एक दूसरे से प्रेरित हो रहे हैं, यह एक अच्छी बात है. महिलाओं को लगता है कि हम अगर मन बना ले तो कुछ भी कर सकते हैं. उनकी झिझक दूर हो रही है उनके भाव खुल रहे हैं. अब उन्हें फिटनेस की गुणवत्ता समझ में आ रही है. इससे उनका स्ट्रेस दूर होता है और साथ ही कई सारी बिमारियां भी कम हो रही हैं.

स्ट्रेस को भगाना मुश्किल नहीं अगर हम अपने दैनिक रूटीन में दौड़, टहलना, व्यायाम आदि को शामिल करें. बड़े शहरों में महिलाएं सुबह से शाम तक दौड़ती रहती हैं, फिर भी बीमार रहती हैं. उन्हें लगता है कि वे काफी कसरत कर रही हैं. लेकिन वे सारा काम स्ट्रेस के साथ करती हैं. उन्हें अपने लिए थोड़ा समय निकाल कर व्यायाम या जो भी अच्छा लगे करना चाहिए. महिलाओं को अपने व्यायाम की समय सीमा खुद ही तय करनी चाहिए कि कितना वर्कआउट करने से वे अच्छा फील करती हैं. महिलाओं का सेल्फ अवेयर होना बहुत जरूरी है. 

लालू के ‘अंकल पोजर’ बन गए मोदी

राजद सुप्रीमो लालू यादव नोटबंदी के बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कुछ ज्यादा ही खफा हो गए हैं. वैसे तो लालू अकसर मोदी के खिलाफ बयानबाजी करते रहते हैं और उनकी खिल्ली उड़ाते रहते हैं. अब उन्होंने मोदी को नया नाम दिया है, ‘अंकल पोजर’.

लालू ने ट्वीट के जरिए कहा है कि प्रधानमंत्री अंकल पोजर की तरह काम करते हैं. किसी काम को शुरू करके उसे बिगाड़ कर रख देते हैं और उसके बाद अपनी गलती का ठीकरा दूसरे के सिर फोड़ देते हैं. अपने कारनामों से उन्होंने जनता, किसान, सरकार और खुद अपनी पार्टी भाजपा का भी नुकसान कर रहे हैं.

गौरतलब है कि ‘अंकल पोजर हैंग्स द पिक्चर’ की कहानी सभी ने स्कूली दिनों में पढ़ी होगी. उस कहानी में लिखा गया है कि दीवार पर फोटो टांगने के लिए अंकल पोजर ने समूची दीवार को ही तहस-नहस कर डाला. एक कील ठोंकने के लिए उसने पूरी दीवार में सैंकड़ो छेद कर दिया. उसके बाद एक कील ठोंकने में कामयाबी मिली भी तो तस्वीर टेढी लगा दी. लालू कहते हैं कि अंकल पोजर की तरह मोदी हर घर और कारोबार में घुस कर सबका नुकसान कर रहे हैं और खुद इस मुगालते में हैं कि उन्होंने बहुत अच्छा काम कर डाला.

लालू के मोदी की खिल्ली उड़ाने का सिलसिला यहीं नहीं थमता है. लालू कहते हैं कि नरेंद्र मोदी तो गजबे, गजबद्ध आदमी हैं. चुनाव आते ही वह हर प्रांत से अपनी रिश्तेदारी जोड़ने लगते हैं. पिछले दिनों पंजाब में चुनाव प्रचार करने गए तो कह दिया कि पंजाब से उनका खून का रिश्ता है. इसके बाद वह मजाकिया लहजे में मोदी से सवाल पूछते हैं कि क्या मोदी का बाकी राज्यों से पानी का रिश्ता है?

बड़े से बड़े सियासी मामलों पर मजाक उड़ाना और उसे हवा में उड़ा देना लालू यादव की फितरत रही है. पिछले दिनों बिहार में महागठबंधन में शामिल दलों के बीच जुबानी लठ्ठ चलने से भड़की सियासी आग को ठंडा करने की कोशिश करते हुए राजद सुप्रीमो अपने मसखरी के पुराने रंग में दिखे थे. उन्होंने महागठबंधन और नीतीश के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले अपने नेताओं को नसीहत दिया कि वह अपनी जुबान पर काबू रखें. उन्होंने सीरियस लहजे में कहा कि नीतीश कुमार महागठबंधन के नेता हैं और उसके बाद चुटकी लेते हुए कहा कि वह महागठबंधन के फायर ब्रिगेड हैं. महागठबंधन में आग लगाने की कोशिशों पर वह तुरंत ही ठंडा पानी डाल कर ठंडा कर देते हैं.

खिल्ली उड़ाने के मामले में वह अपनी पार्टी के नेताओं को भी नहीं बख्शते हैं. पिछले महीने जेल से बाहर आने के बाद राजद के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद शहाबुद्दीन ने कहा था कि वह नीतीश को नहीं बल्कि लालू को अपना नेता मानते हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि नीतीश तो हालात की वजह से मुख्यमंत्री बन गए.

इस मामले में राजद के थिंक टैंक माने जाने वाले रघुवंश प्रसाद सिहं ने शहाबुद्दीन को कटघरे में खड़ा कर दिया था. इतना ही नहीं रघुवंश ने यह कह कर भी नया तूफान खड़ा कर डाला था कि मुझे गाली देने के लिए नीतीश कुमार ने 2-2 मंत्रियों को लगा रखा है, वह लालू जी को नजर नहीं आ रहा है. नीतीश के कई मंत्री महागठबंधन को तोड़ रहे हैं. इसके बाद उन्होंने लालू को चुनौती देने के मूड में कह डाला था कि वह बोलना नहीं छोड़ेंगे. अगर वह चुप रहेंगे तो डेमोक्रेसी नहीं बचेगी?

रघुवंश और शहाबुद्दीन के बयानबाजी से राजद में उठे तूफान को लालू ने यह कह कर ठंडा कर दिया था कि रघुवंश बाबू तो हमेशा पिच पर खड़े रहते हैं. बॉल मिलते ही वह बैट घुमाने लगते हैं. उन्हें कई बार समझाया है कि चुट्टी, चिकोटी नहीं काटें, पर वह सुनते ही नहीं हैं.

अदालत पहुंचा अभिनेत्री नंदा की वसीयत का मसला

बौलीवुड में जिन कलाकारों की अपनी संताने नहीं होती हैं, उनकी मौत के बाद उनकी संपत्ति को लेकर कई तरह की वसीयतें सामने आती हैं और फिर उस कलाकार के परिवार के सदस्यों को अदालत के दरवाजे पर दस्तक देनी पड़ती है.

पिछले दिनों अदालत ने अभिनेत्री परवीन बॉबी की वसीयत का मसला हल किया था. अब अपने जमाने की चर्चित अदाकारा रही नंदा की मौत के बाद उनके परिजनों को भी नंदा की करोड़ों की संपत्ति के लिए अदालत जाना पड़ा है.

नंदा का 25 मार्च 2014 को मुंबई में देहांत हो गया था. पर एक चार्टेड एकाउंटेंट रजनीकांत और नंदा के कभी बिजनेस भागीदार रही नरगिस हीरजी ने वसीयत पेश की है, जिसके अनुसार यह दोनों नंदा की संपत्ति पर अपना हक जता रहे हैं.

इनका दावा है कि नंदा ने अपनी मौत से तीन वर्ष पहले 2011 में इन दोनों को अपनी संपत्ति की देखरेख करने की जिम्मेदारी सौंपी थी. परिणामतः नंदा के पारिवारिक सदस्यो को मुंबई उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा है.

सूत्रों के अनुसार संपत्ति की इस कानूनी लड़ाई में मुंबई के वर्सोवा इलाके मे स्थित त्रिपलेक्स अपार्टमेंट, चार बंगला में बहुत बड़ा ऑफिस, ठाणे जिले के शहापुर में जमीन, जेवरात, चांदी के बर्तन, शेयर, नगद, बैंक में जमा राशि और अन्य बीस करोड़ की चल संपत्ति है. नंदा के पारिवारिक सदस्यों का आरोप है कि रजनीकांत व नरगिस हीरजी उन्हें नंदा की वसीयत दिखाने को तैयार नहीं हैं. जबकि नरगिस हीरजी का दावा है कि नंदा अपनी बहन जयमाला और उनके करीब थी. बहन जयमाला की 2007 में मौत के बाद वह बुरी तरह से टूट गयी थीं, तब बिजनेस भागीदार होने की वजह से नरगिस ने ही उनका साथ दिया था. जबकि नंदा के परिवार के सदस्यों ने कहा कि चार्टेड एकांउटेट का दावा गलत है कि नंदा ने संपत्ति की देखरेख के लिए उन्हें नियुक्त किया था. क्योंकि नंदा हमेशा अपने भाई बहनों व उनके बच्चों के करीब थी.

अपने जमाने के प्रसिद्ध अभिनेता, फिल्म निर्माता व निर्देशक विनायक कर्नाटकी की बेटी नंदा तीन बहनें और तीन भाई थे. इनमें से एक भाई और तीन बहनों की मौत हो चुकी है,मगर इनके बच्चे हैं.नंदा के दो भाई जयप्रकाश कर्नाटकी और सुभाष कर्नाटकी ने अपने भाई व बहनां के बच्चों के साथ मिलकर अदालत का दरवाजा खटखटाया है. जयप्रकाश कर्नाटकी ने अभिनेत्री जयश्री टी के साथ विवाह रचाया है. जय प्रकाश कर्नाटकी ने कुछ फिल्में निर्देशित की हैं. उनके परिवार के सदस्यों को जानने वालों का मानना है कि नंदा अपने परिवार के दूसरे सदस्यों व उनके बच्चों के काफी करीब थी. पर नरगिस हीरजी व रजनीकांत शाह ने अदालत में कहा है कि नंदा का अपने परिवार के सदस्यों से संबंध नहीं था. जब वह बीमार थीं, तो उनके भाई ने उनकी देखरेख नहीं की.

फिल्म में नजर आयेंगे रितिक और जैकलीन

साहिल संघा के निर्देशन में रितिक रोशन व जैकलीन फर्नांडिस ने एक विज्ञापन फिल्म में अभिनय कर जबरदस्त चर्चा बटोर ली है. हर जगह इस विज्ञापन फिल्म में इन दोनों कलाकारों की सिजलिंग केमिस्ट्री की ही चर्चा है और अब तो चर्चाएं गर्म हो चुकी हैं कि साहिल संघा के निर्देशन में ही रितिक रोशन और जैकलीन फर्नांडिस फीचर फिल्म करने वाले हैं.

मगर इस बारे में रितिक रोशन और जैकलीन फर्नांडिश कुछ भी कहने को तैयार नहीं है. जबकि साहिल संघा इस संभावना से इंकार नहीं करते. साहिल संघा ने खुद मीडिया को बताया,‘‘रितिक रोशन और जैकलीन फर्नांडिश के साथ फिल्म बना सकता हूं, हमें एक अच्छी कहानी की तलाश है. वैसे फिल्म के कुछ विषयों पर रितिक रोशन के साथ हमारी बातचीत हुई है. जैसे ही कोई ऐसा विषय या ऐसी कहानी मिलेगी, जो हम दोनों को उत्साहित करे, तो हम एक साथ फिल्म करेंगे.  रितिक रोशन और जैकलीन दोनों हमारे साथ फीचर फिल्म करने को तैयार हैं. दोनों बेहतरीन कलाकार हैं.’

क्या सायशा फैला रही हैं झूठी खबरें?

अजय देवगन की फिल्म ‘शिवाय’ से अभिनय में कदम रखने वाली दिलीप कुमार व सायरा बानों की रिश्तेदार सायशा सहगल की परेशानी समझी जा सकती है. सायशा सहगल ने अपने करियर को बनाने के लिए फिल्म ‘शिवाय’ में बेवजह बाथ टब में स्नान का दृष्य कर खुद को ग्लैमरस व हर तरह के किरदार करने को तैयार होने का संदेश निर्माताओं तक पहुंचाया. जबकि उनके इस कृत्य की काफी आलोचना भी हुई. इसके बावजूद उन्हें किसी भी निर्माता ने याद नहीं किया. आज की तारीख में उनके पास एक भी फिल्म नहीं है.

मगर जैसे ही खबर आयी कि संजय दत्त की वापसी फिल्म ‘भूमि’ से होने वाली है, वैसे ही सायशा सहगल का दिमाग चल पड़ा और सायशा की तरफ से मीडिया में खबर फैला दी गयी कि संजय दत्त की फिल्म ‘भूमि’ में संजय दत्त का किरदार निभाने के लिए सायशा सहगल को अनुबंधित किया गया है. जबकि यह सरासर गलत है.

वास्तव में फिल्म के निर्माता मनीष सिंह तो इस फिल्म के लिए आलिया भट्ट से बात कर रहे हैं. सायशा सहगल के झूठ पर से परदा उठाते हुए मनीष सिंह ने मीडिया में आकर साफ साफ कहा है, ‘‘हमने अपनी फिल्म ‘भूमि’ में अभिनय करने के लिए अभी तक संजय दत्त के अलावा किसी को भी अनुबंधित नहीं किया है. हमें एक अच्छी अदाकारा की तलाश है, जो कि फिल्म में संजय दत्त की बेटी की भूमिका निभा सके. यह किरदार हमारी फिल्म की नायिका का है, इसलिए हम काफी सोच विचार कर अभिनेत्री का चयन करने वाले हैं. हमने अपनी फिल्म के लिए आलिया भट्ट का नाम सोचा है, मगर सुना है कि वह अगले दो साल तक काफी व्यस्त हैं. जबकि हम 2017 में अपनी फिल्म की शूटिंग करना चाहते हैं.’’

क्या शाहरुख ने मिलाया रणवीर-दीपिका को…?

दो दिन पहले मुकेश अंबानी के घर पर हुई विशाल पार्टी से बाहर निकलते समय रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण एक दूसरे के हाथ में हाथ डाले बाहर निकले. और तब से रणवीर सिंह की पीआर टीम खबर फैला रही है कि ‘गॉसिप लिखने वालों ये देखो, रणवीर और दीपिका अलग नहीं हुए हैं.’’

वास्तव में ‘‘बाजीराव मस्तानी’’ के प्रदर्शन के बाद से ही रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण के रिश्ते में दरार आने और इनके बीच हमेशा के लिए अलगाव हो जाने की खबरें गर्म रही हैं. यहां तक यह दोनों एक साथ किसी समारोह में नहीं जा रहे थे. यहां तक कि मुकेश अंबानी के घर आयोजित पार्टी में भी दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह अलग अलग और कुछ समय के अंतराल से गए थे,पर बाहर निकलते समय दोनो साथ में निकले, जिसे लेकर अब उनके अलगाव की खबरों को गॉसिप करार दिया जा रहा है. मगर सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुकेश अंबानी के घर के अंदर ऐसा क्या घटित हुआ कि दीपिका पादुकोण व रणवीर सिंह सारे गिले शिकवे मिटाकर एक साथ बाहर निकले.

मुकेश अंबानी की इस पार्टी में मौजूद सूत्रों पर यकीन किया जाए, तो यह सारा खेल शाहरुख खान ने किया. सूत्र का दावा है कि मुकेश अंबानी के घर पर मौजूद सभी लोग नृत्य कर रहे थे, रणवीर सिंह और दीपिका अलग अलग कोने में खड़े हुए थे. पर शाहरुख खान ने इन दोनों को एक साथ लाकर एक दूसरे का हाथ एक दूसरे के हाथ में देते हुए एक साथ नृत्य करने के लिए कहा. रणवीर व दीपिका एक साथ काफी देर तक नृत्य करते रहे, इस नृत्य के दौरान इनके बीच क्या बात हुई,किसी को नहीं पता.मगर दोनों बाद में हाथ डाले एक साथ बाहर निकले.क्या अब माना जाए कि सही मायनों में दोनों के बीच सारे गिले शिकवे मिट गए हैं और दोनों हमेशा के लिए एक साथ हो गए हैं? अथवा यह महज कुछ समय के लिए युद्ध विराम की स्थिति है? अथवा आने वाले किसी बड़े तूफान के पहले की खामोशी है? सवाल कई हैं, जिनका जवाब तो वक्त ही देगा.. 

नोटबंदी की मार, बढ़ रहा उधार

नोटबंदी की मार सबसे अधिक दुकानदार झेल रहा है. ग्राहक के पास पैसे नहीं है. वह केवल बहुत जरूरी चीजों पर ही पैसा खर्च कर रहा है. ऐसे में होटल, जनरल मर्चेन्ट, चाटपूरी के ठेले वाले, पत्रिकाओं और मिठाईयों सबका कारोबार ठप्प है.

नकदी की कमी से नोटबंदी के बाद लोगों की खरीदारी काफी प्रभावित हुई है. बड़े दुकानदारों का भी कारोबार प्रभावित हुआ है. इसमें ज्वेलरी कारोबार, साड़ी, कपड़े और जूतों की दुकाने प्रमुख हैं. लखनऊ सर्राफा एसोसिएशन के विनोद माहेश्वरी कहतें है, जो कारोबार प्रभावित हुआ है उसे पटरी पर आने में देर लगेगा. यह जरूरी नहीं है कि पूरा कारोबार पहले जैसा हो जाये. यह पूरे देश के सर्राफा कारोबार की हालत है. शादी के सीजन के समय भी आभूषण की खरीदारी नहीं हो सकी.

आमतौर पर शादी के सीजन में ज्वेलरी, साड़ी और दूसरे उससे जुड़े कारोबार में तेजी आ जाती थी. नोटबंदी के असर के चलते इस बार पूरा कारोबार ठप्प पड़ा रहा. लखनऊ के चिकन कारोबार, मेरठ का सर्राफा कारोबार, वाराणसी का बनारसी साड़ी और आगरा का जूता कारोबार शादी के सीजन के बाद भी तेजी नहीं पकड़ सका. लखनऊ में सितम्बर माह में चिकन कारोबार में करीब 12 करोड़ का कारोबार हुआ था. नोटबंदी के बाद पूरे माह में 1 करोड़ का कारोबार भी नहीं हो पाया है. यही हाल वाराणसी के बनारसी साड़ी कारोबार का हुआ है. शादी के सीजन के बाद भी साड़ी कारोबार में 70 फीसदी की कमी आई है.

असल में इन कारोबार के ठप्प होने का असर दुकानदारों से ज्यादा मजदूरी करने वालों पर पड़ा है. उत्तर प्रदेश के कुछ शहर अलग अलग कारोबार के लिये मशहूर हैं. मुरादाबाद का पीतल उद्योग, आगरा का जूता और पेठा, फिरोजाबाद की चूड़ी उद्योग, बनारस की साड़ी, मेरठ का सर्राफा और गजक, नोएडा का कपड़ा उ़द्योग प्रमुख है. यहां बड़ी तादाद में दैनिक मजदूर काम करते है. इन कारोबार के प्रभावित होने से यह मजदूर बेकार हो गये हैं. इनके घर परिवार अब अपनी जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहे हैं.

कारोबारी कहते हैं बाजार में छोटे नोटों की कमी है. जिससे छोटी खरीददारी कम हो रही है. बैंक ग्राहकों को बड़े नोट दे रहे हैं. जिनसे छोटी दुकानों पर भुगतान नहीं हो पा रहा. सरकार हर बात के जवाब में यही तर्क देती है कि चेक से भुगतान करें. 200-300 की खरीददारी करने वाले चेक से कैसे भुगतान करे यह व्यवहारिक नहीं है. ऐसे में दुकानदार उधार बेचने को मजबूर हैं.

लखनऊ के गुरूनानक मार्केट में पिछले 50 साल से किताबों, पत्रिकाओं, की दुकान चलाने वाले सुभाष पुस्तक भंडार के राजकुमार छाबड़ा कहते हैं, इतने समय में पहली बार दुकानदारी में इस तरह की गिरावट देखी है. बहुत बार अलग अलग तरह की परेशानियां आई पर पहली बार ग्राहकों की बेहद कमी दिख रही है. उधार बेचने के बाद भी कारोबार को पटरी पर लाना संभव नहीं दिख रहा है.

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