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आखिर जिज्ञासा सिंह चाहती क्या हैं?

जयपुर से मुंबई आकर सीरियल ‘थपकी प्यार की’ में थपकी का किरदार निभा रही अदाकारा जिज्ञासा सिंह आखिर क्या चाहती हैं? यह किसी की समझ में नही आ रहा है. मगर सूत्रों की मानें तो जिज्ञासा की वजह से सीरियल ‘थपकी प्यार की’ में अभिनय कर रहे दो कलाकारों सेहबान अजीम और मनीष गोपलानी के बीच ठन गयी है. जबकि इसी सीरियल से जुड़े लोग जिज्ञासा को एक रहस्यमयी लड़की की संज्ञा दे रहे हैं.

वास्तव में सीरियल ‘थपकी प्यार की’ के सेट से जो खबरें आती रही हैं, उन पर यकीन किया जाए, तो जयपुर से मुंबई पहुंचकर सीरियल ‘थपकी प्यार की’ में अभिनय कर रही जिज्ञासा सिंह ने सबसे पहले इसी सीरियल के कलाकार अंकित भाटिया को अपने प्यार के जाल में फांसाया था. कुछ समय बाद जिज्ञासा ने अंकित भाटिया को ‘दूध की मक्खी’ की तरह अपनी जिंदगी से निकाल फेंका.

उसके बाद जिज्ञासा सिंह और मनीष गोपलानी के बीच रोमांस की खबरें सार्वजनिक हो गयी. सूत्र दावा कर रहे हैं कि मनीष गोपलानी तो सच्चे दिल से जिज्ञासा से प्यार करते हैं. मगर जब से कबीर के किरदार में इस सीरियल से सेहबान अजीम जुड़े हैं, तब से सारा खेल बिगड़ चुका है. सूत्रों के अनुसार अब जिज्ञासा सिंह, मनीष गोपलानी को नजरंदाज करते हुए सेहबान अजीम से नजदीकियां बढ़ाती हुई नजर आती हैं. इससे सेहबान अजीम काफी परेशान हैं. क्योंकि सेहबान अजीम तो टीवी कलाकार जेनीफर विंगेट के संग अपने प्यार की पेंगे बढ़ा रहे हैं. मगर सेट पर जिस तरह वह हमेशा सेहबान अजीम से चिपकती रहती हैं, उससे मनीष गोपलानी के सीने पर सांप लोटने लगा है.

सूत्र दावा करते हैं कि मनीष गोपलानी ने तो सेहबान अजीम को धमकी दे दी है कि वह उनकी प्रेमिका जिज्ञासा से दूरी बनाकर रखे अन्यथा ठीक नहीं होगा. इतना ही नहीं जब हमने जिज्ञासा से बात की, तो जिज्ञासा ने कहा कि सेहबान और मनीष गोपलानी दोनों उसके अच्छे दोस्त हैं. दोस्ती के अलावा इनमें से किसी के भी संग उसका कोई रिश्ता नहीं है. जिज्ञासा ने हमसे बात करते हुए यहां तक कह दिया कि सेहबान तो उनके भाई जैसे हैं.

जब हमने यही बात सेहबान से कही, तो सेहबान ने कहा कि यह तो अच्छी बात है. पर यदि वह भाई की तरह मानती हैं, तो फिर सेट पर एक प्रेमिका के अंदाज में चिपकने का प्रयास वह क्यों करती हैं? बेचारे सेहबान के सिर पर तिहरी मुसबीत आ पड़ी है. एक तरफ जिज्ञासा उनसे चिपकने का प्रयास कर रही है, दूसरी तरफ मनीष गोपलानी उसे धमका रहे हैं और तीसरी तरफ सेहबान को डर सता रहा है कि कहीं इस चक्कर में उनकी प्रेमिका जेनीफर विंगेट उनसे दूर न हो जाए?

सूत्रों की माने तो जिज्ञासा सिंह सेट पर हमेशा सेहबान के बगल में ही बैठती हैं. इतना ही नहीं सेट पर नाश्ता करना हो या भोजन, वह सेहबान अजीम के साथ ही करती हैं. इससे एक तरफ मनीष गोपलानी परेशान हैं, तो दूसरी तरफ खुद सेहबान अजीम परेशान हैं. जबकि सीरियल ‘थपकी प्यार की’ से जुड़े युनिट के लोगों की समझ में नही आ रहा है कि आखिर जिज्ञासा के मन में क्या है?

यूज करें ‘ओला मनी’

कैब एग्रीगेटर ओला की मोबाइल वॉलेट ‘ओला मनी’ अब हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कोर्पोरेशन और इंडियन ऑयल कोर्पोरेशन के देश भर के 20,000 से अधिक पेट्रोल पंपों पर स्वीकार किए जाएंगे. ओला ने पेट्रोलियम कंपनी हिंदुस्तान पेट्रोलियम (एचपीसीएल) और इंडियन आयल (आईओसीएल) के साथ गठजोड़ किया है. उपभोक्ता वन-स्टेप मोबाइल वेरिफिकेशन प्रक्रिया के माध्यम से इन कंपनियों के किसी भी पेट्रोल पंप पर भुगतान कर पाएंगे. ये भुगतान पीओएस डिवाइस के माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे.

ओला के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘हमें खुशी है कि भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक उपक्रमों में शुमार एचपीसीएल और आईओसीएल हमारे साथ मिलकर कैशलेस भारत के मिशन को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं. ओला मनी को नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड (मास्टर कार्ड, वीसा, अमेरिकन एक्सप्रेस और रूपे समेत) से रिचार्ज किया जा सकता है.’

ओला ने एक नोटीफिकेशन जारी करते हुए बताया, ‘ओला मनी के उपभोक्ता अब इन पेट्रोल पंपों से डीजल पेट्रोल खरीदने पर उसका भुगतान विशिष्ट पीओएस डिवाइस के जरिए कर सकेंगे. ओला मनी इस समय देश भर में 500 से अधिक ऑनलाइन व ऑफलाइन मर्चेंट द्वारा स्वीकार की जा रही है. इसके साथ ही बिजली, पानी सहित 25 प्रमुख सेवाओं के बिलों का भुगतान इसके जरिए किया जा सकता है.

आइएएएफ ने रूस पर डोपिंग प्रतिबंध बढ़ाया

अंतरराष्ट्रीय एथलेटिक्स महासंघ (आइएएएफ) ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में रूस के डोपिंग प्रतिबंध को फरवरी तक बढ़ा दिया है. विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) द्वारा बड़े पैमाने पर हो रहे डोपिंग और भ्रष्टाचार के मामले के रहस्योद्घाटन के बाद आइएएएफ ने रूस को पिछले साल नवंबर से प्रतिबंधित कर दिया था, जिसके कारण उसके एथलीट रियो ओलंपिक में हिस्सा नहीं ले पाए थे.

आइएएएफ टास्कफोर्स के प्रमुख रून एंडरसन के अनुसार, रूस के एथलेटिक्स महासंघ ने बहाली की ओर संतोषजनक प्रगति की है. हालांकि, 207वीं आइएएएफ परिषद बैठक में कहा गया कि वो अब भी प्रतियोगिताओं में वापसी के लिए तैयार नहीं है.

इस बीच, रूस के एथलीटों को यह अनुमति है कि वह आइएएएफ डोपिंग समीक्षा बोर्ड में व्यक्तिगत रूप से प्रतिस्पर्धा के लिए आवेदन दे सकते हैं. रूस के एथलीटों के लिए दूसरी फील्ड एंड ट्रैक प्रतियोगिता यूरोपियन इंडोर चैंपियनशिप है, जिसका आयोजन अगले साल तीन से पांच मार्च तक सर्बिया के बेलग्रेड में होगा.

रिलायंस जियो पर जुर्माना

रिलायंस जियो भले ही सस्ते 4जी ऑफर से ग्राहकों को लुभाने की कोशिश कर रही हो पर जल्द ही कंपनी पर जुर्माना लग सकता है. अपने विज्ञापनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर बिना इजाजत इस्तेमाल करने के लिए मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो पर जुर्माना लगाया जा सकता है.

सितंबर में रिलायंस जियो सेवा की शुरुआत करते हुए कंपनी ने अपने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक विज्ञापनों में मोदी की तस्वीर का इस्तेमाल किया था. तब सोशल मीडिया पर इस विज्ञापन को लेकर काफी हंगामा हुआ था. कई राजनेताओं और राजनीतिक दलों ने इस पर सवाल खड़े किए थे. किसी निजी कंपनी के विज्ञापन में बिना अनुमति के प्रधानमंत्री की तस्वीर छापे जाने को राजनीतिक दलों ने असंवैधानिक बताते हुए विरोध जताया था.

रिलायंस और कई नया निजी कंपनियों द्वारा पीएम नरेंद्र मोदी का विज्ञापन में इस्तेमाल किए जाने के सवाल के जवाब में सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने लोकसभा में बताया कि सरकार या पीएम मोदी ने इसके लिए अपनी अनुमति नहीं दी थी. राठौड़ ने आगे कहा कि कंज्यूमर अफेयर्स, फूड ऐंड पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन मिनिस्ट्री की ओर से राष्ट्रीय प्रतीक चिह्नों और नामों के गलत इस्तेमाल के मामलों की निगरानी की जाती है.

 

मकाऊ ओपनः भारतीय चुनौती खत्म

शीर्ष वरीयता प्राप्त साइना नेहवाल और बी साई प्रणीथ अपना-अपना क्वार्टर फाइनल मुकाबले गंवा बैठें, जिससे भारत की मकाऊ ओपन ग्रा प्री गोल्ड बैडमिंटन टूर्नामेंट में चुनौती समाप्त हो गयी.

साइना और साई प्रणीथ को क्रमश: महिला और पुरूष एकल क्वार्टरफाइनल में चीनी प्रतिद्वंद्वियों से सीधे गेम में पराजय झेलनी पड़ी और दोनों गेम से बाहर हो गए.

घुटने के ऑपरेशन के बाद वापसी की कोशिश में जुटी दुनिया की पूर्व नंबर एक खिलाड़ी साइना को महिला एकल में निचली रैंकिंग वाली चीन की क्षांग यिमान ने 35 मिनट में 21-17, 21-17 से हराया.

इसके बाद साई प्रणीथ को जुन पेंग क्षाओ से 19-21, 9-21 से हारने से पहले एक घंटे तक मशक्कत करनी पड़ी. विश्व रैंकिंग में 10वें स्थान पर पहुंची साइना को पिछले दो दौर में तीन गेम के मुकाबले खेलने पड़े.

विश्व रैंकिंग में 226वें स्थान पर काबिज 19 साल की क्षांग ने 4-2 की बढ़त बना ली थी. एक समय यह बढ़त 9-8 की रह गई लेकिन चीनी खिलाड़ी ने लगातार पांच अंक लेकर 14-8 की बढ़त ले ली. साइना इसके बाद वापसी नहीं कर सकीं.

पिछले दो मैचों में पहला गेम हारने के बाद वापसी करने वाली साइना ने दूसरे गेम में 6-0 की बढ़त बना ली लेकिन क्षांग ने वापसी करके स्कोर 7-7 से बराबर कर लिया. उसने फिर 11-9 से बढ़त बनाई और एक समय यह बढ़त 14-12 की हो गई. साइना ने चार अंक लेकर अंतर कम करने की कोशिश की लेकिन क्षांग ने फिर वापसी करके मैच जीत लिया.

बैटरी लाइफ बढ़ाने के आसान तरीके

आज की तारीख में ज्यादातर स्मार्टफोन हाई-रिजॉल्यूशन वाले बड़े डिस्प्ले, पावरफुल प्रोसेसर और ज्यादा मैमोरी के साथ आते हैं. इनका मकसद मल्टी-टास्किंग और मुश्किल काम को भी आसानी से पूरा करने का होता है.  हालांकि, इसका मतलब यह भी है कि ऐसे में फोन की बैटरी को पूरे दिन चलने में परेशनी होगी और इस कारण से ही पावर बैंक मजबूरी बन गए हैं.

ऐसा ही लैपटॉप के बारे में भी कहा जा सकता है. जैसे-जैसे इसकी बैटरी पुरानी होती जाती है, बार-बार पावर प्लग इस्तेमाल करने की जरूरत भी बढ़ती जाएगी.  हमारे द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ज्यादातर इलेक्ट्रॉनिक्स डिवाइस लिथियम इयॉन और लिथियम पॉली बैटरी के साथ आते हैं. ये क्विक  चार्ज  फ़ीचर से तो लैस होते हैं लेकिन जरूरी नहीं है कि आपको लंबी बैटरी लाइफ मिले. बैटरी की उम्र को ध्यान में रखते हुए लैपटॉप को अपग्रेड करने से बेहतर बैटरी बदलना होता है.

चाहे आप स्मार्टफोन, टैबलेट या फिर लैपटॉप इस्तेमाल करते हों. ये टिप्स आपके डिवाइस की बैटरी लाइफ बढ़ाने में मदद करेंगे.

तापमान का रखें ध्यान    

बैटरी को ऊंचे तापमान में इस्तेमाल करना, इसकी साइकलिंग से भी ज्यादा परेशान करने वाला हो सकता है.  ज्यादा तापमान और बढ़ती उम्र धीरे-धीरे बैटरी की परफॉर्मेंस को कम कर देते हैं.  कम तापमान (30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापमान को ज्यादा माना जाता है) में डिवाइस का इस्तेमाल करने से उसकी लाइफ साइकल बेहतर होगी.

स्मार्टफोन के ज्यादा गर्म होने की समस्या से परेशान होना वाजिब है, क्योंकि बीतते समय के साथ बैटरी लाइफ बहुत ज्यादा कमज़ोर हो जाती है.  लैपटॉप में इस बात का ध्यान रखें कि आप कूलिंग पैड का इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि सीपीयू वेंट से गर्म हवा आसानी से निकल जाए.  धूल के कारण अक्सर लैपटॉप का वेंट बंद होने लगता है जिस कारण से उसमें बने पंखों को ज्यादा काम करना पड़ता था, धीरे-धीरे यह भी आपके लिए खर्च बढ़ाने का काम करता है.  इसलिए सफाई रखें, खासकर धूल को ज़रूर हटाएं.

मुफ्त ऐप से बचें, ऐप्स खरीदना शुरू करें

विज्ञापन के साथ आने वाले ऐप्स आपके डिवाइस की बैटरी लाइफ औसतन 2.5 से 2.1 घंटे तक कम कर सकते हैं.  अध्ययन के मुताबिक, फोन का प्रोसेसर उसके दिमाग की तरह होता है.  विज्ञापन भी इस दिमाग के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल करता है जिस कारण से यह धीमा पड़ जाता है.

ऐसा नहीं है कि सभी फ्री ऐप्स आपकी बैटरी पर असर डाल रहे हैं, लेकिन अगर आपको उस पर कोई विज्ञापन नजर आए तो समझ लीजिए कि यह बैंडविथ और प्रोसेसर पर असर डालेगा ही.  ऐप्स के लिए पैसे चुकाने पर आपको कई फायदे होंगे.  

लोकेशन ट्रैकिंग बंद कर दें

हाल ही में आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फेसबुक ऐप आईफोन की बैटरी को जल्दी खत्म कर देता है क्योंकि यह बार-बार जीपीएस मॉड्यूल का इस्तेमाल करके यूजर की लोकेशन जानता रहता है.  ऐसे में जिन ऐप को आपके लोकेशन की जरूरत नहीं है, उनके लोकेशन ट्रैकिंग को ऑफ कर देने से जरूर मदद मिलेगी.

ज्यादा एंड्रॉयड डिवाइस पर आप सेटिंग्स के बाद लोकेशन में जाकर लोकेशन ट्रैकिंग को पूरी तरह से ऑफ कर सकते हैं.  वैसे, ऐप के स्तर पर यह तय करने का विकल्प फिलहाल सिर्फ एंड्रॉयड मार्शमैलो में दिया गया है.

आईओएस 9 में आप सेटिंग्स में जाएं, फिर प्राइवेसी चुनें और उसके बाद लोकेशन सर्विसेज़.  इसके बाद आप हर ऐप के हिसाब से इसको डिसेबल कर सकते हैं.  उन्हीं ऐप के लिए लोकेशन ऐक्सस ऑन रखिए जिन्हें इनकी ज़रूरत हो.

पूरी तरह से  चार्ज  करने से बेहतर है थोड़ा-थोड़ा  चार्ज

बैटरी यूनिवर्सिटी के द्वारा दिए गए एक शानदार सुझाव को मैराथन के उदाहरण से समझा जा सकता है.  बैटरी को 100 फीसदी से सीधे ले जाकर शून्य पर खत्म करने से बेहतर है कि आप इसे 50 फीसदी तक ही  डिस्चार्ज  होने दें.  30 से 80 फीसदी के बीच का क्रम बनाए रखें.  ऐसा करने से आपके बैटरी की  डिस्चार्ज  साइकिल तीन गुनी बढ़ जाएगी.

डिस्प्ले की ब्राइटनेस कम करें

यह सुझाव लैपटॉप और मोबाइल डिवाइस पर लागू होता है.  ज्यादातर डिवाइस में ब्राइटनेस सेटिंग्स को आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं या फिर स्क्रीन की ब्राइटनेस को लक्स जैसे थर्ड-पार्टी ऐप्स से कम कर सकते हैं.  यह डिस्प्ले की ब्राइटनेस कम करने के अलावा स्क्रीन का कलर कास्ट को भी बदल देता है.  हालांकि, एक सॉफ्टवेयर लेयर के जरिए ही ओलेड स्क्रीन पर पावर बचाया जा सकता है जबकि एलसीडी में इसके लिए बैकलाइट ब्राइटनेस को कम करना होगा.

वाई-फाई पर ऐप अपडेट करें या बैटरी चार्ज करते वक्त

आमतौर पर कोई भी एक्शन जिससे प्रोसेसर या बैंडविथ पर दबाव पड़ता है, वह ज्यादा ही सीपीयू पावर लेगा.  सबसे बेहतर यही होगा कि यह एक्शन आम तौर पर स्थिर रहे और मोबाइल डेटा इंटरनेट के बजाय वाई-फाई का इस्तेमाल करे.  ऐसे मे सबसे सही फैसला यही होगा कि आप अपने ऐप्स अपडेट को सिर्फ वाई-फाई पर शेड्यूल करें.  अगर आपके डिवाइस में विकल्प मौजूद है तो सिर्फ  चार्ज  होते वक्त इसे शेड्यूल कर सकते हैं.

 लो पावर मोड को ऑन करें

सभी एंड्रॉयड फोन में बैटरी सेवर मोड मौजूद नहीं है.  अगर आप एंड्रॉयड 5.0 या उसके बाद के वर्ज़न को इस्तेमाल कर रहें तो आपके डिवाइस पर इस मोड के मौजूद रहने की संभावना ज्यादा है.  जैसे ही आपके फोन की बैटरी 15 फीसदी पर पहुंचती है, यह अपने आप एक्टिव हो जाता है.  यह बैकग्राउंड ऐप रिफ्रेश, लोकेशन ट्रैकिंग और सिंक एक्टिविटी को बंद कर देता है, ताकि बैटरी लाइफ बचाई जा सके.  

अगर आप पुराना एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल कर रहे हैं तो संभव है आपके फोन पर निर्माता कंपनी ने अपना लो पावर मोड दिया हो.  उदाहरण के तौर पर, सोनी के फोन पर इसे स्टेमिना मोड के नाम से जाना जाता है और एचटीसी में एक्सट्रीम पावर मोड के नाम से. वैसे, आप कई थर्ड-पार्टी ऐप्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.  हालांकि, हमारा अनुभव बताता है कि बिल्ट-इन ऐप्स ज्यादा कारगर होते हैं.

फ्लाइट मोड का इस्तेमाल करें

अगर आपका फोन सेलुलर टावर के नजदीक नहीं है तो इसका असर स्टैंडबाय टाइम पर भी पड़ेगा.  अगर आप ऐसी जगह पर हैं जहां कोई नेटवर्क नहीं है तो बेहतर होगा कि फोन में एयरप्लेन मोड (फ्लाइट मोड) एक्टिव कर लें. आपका फोन ऐसी जगहों पर बार-बार नेटवर्क तलाश करेगा जिसका असर बैटरी लाइफ पर पड़ेगा.

इन सुझावों का पालन करने पर आप पाएंगे कि आपका फोन पहले की तुलना में ज्यादा बेहतर बैटरी लाइफ दे रहा है.

आपका आधार कार्ड बन जाएगा डेबिट कार्ड

जल्‍द ही आपका आधार कार्ड बन जाएगा डेबिट कार्ड. सरकार अब आधार कार्ड के जरिए पेमेंट शुरू करने की तैयारी कर रही है. यदि यह योजना सफल हो गई तो आप आधार कार्ड का इस्तेमाल डेबिट कार्ड की तरह ही पेमेंट करने में कर सकेंगे. कैशलेस इकॉनमी की ओर अग्रसर सरकार इस संबंध में पूरी कोशिश कर रही है. सरकार अब कैशलैस इकोनॉमी को बढ़ावा देने के बारे में विचार कर रही है.

सरकार एक ऐसा मोबाइल फोन ऐप बनाने पर काम कर रही है जिसका इस्तेमाल करते हुए दुकानदार और कारोबारी आधार-आधारित भुगतान हासिल कर सकेंगे. इस तरह से वे क्रेडिट या डेबिड कार्ड, पिन और पासवर्ड जैसी प्रक्रियाओं से बच जाएंगे.

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकार (यूआईडीएआई) की योजना आधार के जरिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन क्षमता को बढाकर 40 करोड़ प्रतिदिन करना है. यदि ऐसा हो गया तो सरकार कैशलेस समाज के लक्ष्य को हासिल करने में इस प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा सके. 8 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1000 रुपए के नोटों को अमान्य घोषित कर दिया था. इसके बाद से सरकार द्वारा कैशलेस इकॉनमी की ओर जाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं.

F1 वर्ल्ड चैंपियन निको रोसबर्ग ने लिया संन्यास

फॉर्मूला वन वर्ल्ड चैंपियन निको रोजबर्ग ने 2 दिसंबर को अचानक रिटायरमेंट की घोषणा करके सबको चौंका दिया है. उन्होंने कहा कि वर्ल्ड चैंपियन बनने के साथ ही मैं एवरेस्ट चढ़ गया हूं. मर्सिडीज के ड्राइवर निको रोसबर्ग तीन बार के चैंपियन लुइस हैमिल्टन को पछाड़कर 26 नवंबर को ही फॉर्मूला वन वर्ल्ड चैंपियन बने थें.

31 वर्षीय जर्मनी के रोसबर्ग 1993 में एलेन प्रोस्ट के बाद पहले ऐसे खिलाड़ी बने, जिन्होंने मौजूदा चैंपियन रहते हुए संन्यास लिया. रोसबर्ग ने इंटरनेशनल ऑटोमोबाइल फेडरेशन (एफआइए) के वार्षिक पुरस्कार समारोह से पूर्व विएना में यह बड़ी घोषणा की.

निको रोसबर्ग ने अपने फेसबुक पर लिखा है 'रेसिंग के 25 सालों में यह खिताब मेरा सपना था, मेरा एक ही सपना था फॉर्मूला रेस का विश्व चैंपियन बनना. कड़ी मेहनत, कई मुश्किलों और त्याग के बाद मैंने इसे हासिल किया है. मैंने अपना एवरेस्ट चढ़ लिया है. अब मैं अच्छा अनुभव कर रहा हूं. मैं उन सबका शुक्रिया करना चाहूंगा जिन्होंने मेरा साथ दिया और मेरे सपोर्ट में खड़े रहें.'

रोसबर्ग ने बताया कि 'सुजुका' में जीत हासिल करने के बाद से ही मैं रिटारयमेंट के बारे में सोचने लगा था. इस जीत के बाद से ही मेरे सामने बड़ा दवाब बनने लगा था और मैंने उसी समय सोच लिया था जैसे ही मैं विश्व खिताब जीत लूंगा मैं अपना करियर वहीं खत्म कर दूंगा.

मर्सिडीज टीम के मालिक टोटो वोल्फ ने कहा, ‘टीम के लिहाज से यह अप्रत्याशित और रोमांचक स्थिति है. निको ने साहसिक फैसला किया और इससे उनके जज्बे का पता चलता है. उन्होंने अपने करियर के शिखर पर रहते हुए एक विश्व चैंपियन के रूप में अलविदा कहने का फैसला किया है. उन्होंने अपने बचपन का सपना पूरा करने के बाद संन्यास लिया.’

ममता सरकार के ‘तख्तापलट’ की कोशिश!

काला धन के नाम पर हाल ही में हुए नोटबंदी और उसके बाद पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों में सेना की तैनाती से राज्य में लगभग हर स्तर पर बौखलाहट है. इसे आपातकाल जैसी स्थिति मान कर आम जनता में रोष दिख रहा है. आम जनता का एक बड़ा हिस्सा मान रहा है कि नोटबंदी तक तो भी ठीक था, लेकिन बगैर राज्य सरकार की अनुमति के टोल प्लाजा में सेना उतारने को जनता गंभीरता से ले रही है.

जनता में भी आशंका है कि सेना कार्रवाई ममता बनर्जी की तख्तापलट की कोशिश है. लेकिन जनता की मजबूरी है कि महीने के दूसरे दिन लोग बैंकों व एटीएम में कतार में खड़ी है. वरना आज राजभवन तक तृणमूल के मार्च में बड़ी संख्या में जनता शामिल होती.

मोदी के हाल के कदमों के मद्देनजर राज्य में यह धारणा बनती जा रही है कि चूंकि ममता बनर्जी ने नोटबंदी को देश का सबसे बड़ा घोटाला बता कर मोदी को सीधे चुनौती दे दी है. मोदी के राजनीतिक जीवन में विराम लगाने की भी ममता बनर्जी ने कसम खायी है, इसीलिए मोदी सरकार ने राजनीतिक हिंसा और बदले की कार्रवाई के तहत राज्य में सेना की तैनाती कर मुख्यमंत्री को धमकाने की कोशिश की है. जनता के एक बड़े हिस्से का यह भी मानना है कि ढ़ाई सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निरंकुश चेहरा लगातार सामने आ रहा है. इसे किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं किया जा सकता. कम से कम प. बंगाल बर्दाश्त नहीं करेगा.

इससे पहले इंडिगो के प्लेन में ईंधन खत्म हो जाने के मामला को भी राज्य की जनता संदेह की नजर से देख रही थी. राज्य सरकार की अनुमति के बगैर सेना की तैनाती को भी राज्य की जनता इसीसे जोड़ कर देख रही है. गौरतलब है कि जिस विमान से ममता बनर्जी पटना से कोलकाता लौट रही थीं, कोलकाता एयरपोर्ट के ऊपर प्लेन को लगभग आधा घंटे चक्कर लगाते रहना पड़ा. इतने समय में प्लेन में ईंधन खत्म होने को आया, तब जाकर प्लेन को लैंडिंग की अनुमति दी गयी. एयरपोर्ट ने अपनी सफाई में कहा था कि मुख्यमंत्री का प्लेन आठवें नंबर पर था. सात प्लेन की लैंडिंग कराए जाने के बाद मुख्यमंत्री के प्लेन की लैंडिंग करायी गयी. साथ में यह भी कहा गया है कि इससे पहले लैंडिंग कराए गए प्लेन 'लो ऑन फ्यूल' का संकेत दे रहा था इसीलिए इनकी लैंडिंग पहले करायी गयी.

जबकि ममता बनर्जी के साथ प्लेन में मौजूद मंत्री फिरहद हकीम का कहना है कि उस दिन जो कुछ हुआ वह कोई स्वाभाविक बात नहीं थी. खासकर तब जब प्लेन में उसी राज्य की मुख्यमंत्री मौजूद हैं और प्लेन को लो फ्यूल के बावजूद आधा घंटा आसमान में चक्कर लगाना पड़ा और उसके बाद एयरपोर्ट में एंबुलेंस, दमकल को अलर्ट पर रखकर क्रैश लैंडिंग करायी गयी. हो सकता है यह केंद्र का हिस्सा बने माफिया गैंग का यह षडयंत्र हो!

उधर सेना की तैनाती पर ममता बनर्जी ने दो टुक शब्दों में कह दिया है कि राज्य में सेना की तैनाती आपातकाल से भी बदतर स्थिति का सबूत है. केंद्र की यह कार्रवाई पूरी तरह से अलोकतांत्रिक है, असंवैधानिक है, अनैतिक है. बगैर राज्य सरकार की अनुमति के सेना की तैनाती चुनी हुई राज्य सरकार के अधिकार की अनदेखी है. संघीय ढांचे पर चोट है. केवल आपातकाल में ही राज्य सरकार को इत्तिला किए बगैर सेना कार्रवाई हो सकती है. इस समय आपातकाल तो है नहीं, इसका मतलब क्या सेना की कार्रवाई 'कूपिंग' की कोशिश है?

उन्होंने एलान किया कि जब तक राज्य से सेना नहीं हटायी जाएगी, वे सचिवालय से बाहर नहीं निकलेंगी. गौरतलब है कि 1 दिसंबर की सारी रात ममता बनर्जी ने सचिवालय में बिताया और हरेक जिलाधिकारियों से रिपोर्ट तलब की. इससे पहले अगस्त 2015 में राज्य में बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों पर नजर रखने के लिए भी ममता बनर्जी ने सचिवालय में जगराता किया था. मुख्यमंत्री के साथ विभिन्न विभागों के मंत्री और सचिवों ने भी नवान्न में रात बिताया.

बताया जाता है कि कल रात ही जिलाधिकारियों ने अपनी मौखिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री को दे दिया है. और फिर सुबह-सवेरे तैयार लिखित रिपोर्ट सचिवालय में पहुंच गया. वहीं जिला स्तर पर पार्टी ने अपने जिलाध्यक्षों व कार्यकर्त्ताओं को जमीन पर उतार कर 'आर्मी कूपिंग' तस्वीरे इक्ट्ठा की और इन तस्वीरों को सबूत के तौर पर राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी को सौंपा गया.

गौरतलब है कि नवान्न यानि राज्य सचिवालय में कल शाम को मुख्यमंत्री को खबर किया गया कि वर्दवान, हुगली, मुर्शिदाबाद, जलपाईगुड़ी, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना के टोल प्लाजा में भारी वाहनों पर सेना के जवान तलाशी ले रही है और उन पर स्टीकर लगा रही है. यह खबर सुनते ही ममता बनर्जी आग बबूला हो उठी. ममता बनर्जी की पहली प्रतिक्रिया यही थी कि बगैर राज्य सरकार को इत्तिला किए सेना भला ऐसा कर कैसे सकती है!

ममता बनर्जी ने मुख्य सचिव बासुदेव बनर्जी और गृह सचिव मलय दे से इसकी बात की तस्दीक की कि सेना ने इस बारे में राज्य सरकार को इत्तिला किया था क्या? दोनों सचिवों ने ऐसी किसी जानकारी से इंकार करते ही ममता बनर्जी महाराष्ट्र, ओड़ीशा, केरल, झारखंड, छत्तीसगढ़ में भी पता किया कि क्या वहां सेना की ऐसी कोई कार्रवाई चल रही है? इन राज्यों में ऐसी किसी कार्रवाई के न होने की खबर के बाद वे सक्रिय हो उठीं. उसी दम उन्होंने सचिवालय में खुट्टा गाड़ पर बैठ जाने की ठान लिया. इसके बाद उनके निर्देश पर सभी जिलाधिकारी सक्रिय हो गए. शाम तक मौखिक रिपोर्ट सौंप दी गयी और फिर लिखित रिपोर्ट भी.

राज्य के मंत्री शोभन चटर्जी का कहना है कि संविधानिक तौर पर राष्ट्रीय राजमार्ग भले ही केंद्र के जिम्मे है, लेकिन राज्य के सड़क और कानून व शांति व्यवस्था राज्य के जिम्मे हैं. सेना को अगर कोई कार्रवाई करनी है तो राज्य सरकार से इसकी अनुमति लेनी होगी. प्राकृतिक आापदा, अग्निकांड जैसे बड़ी घटना व राजनीतिक आपातकाल में ही सेना कोई कार्रवाई कर सकती है. उन्होंने सवाल उठाया कि आर्थिक आपातकाल के साथ देश में राजनीतिक आपातकाल जारी हो गया है?

विपक्ष भी ममता के साथ

सेना की तैनाती मुद्दे पर ममता बनर्जी को विपक्ष का भी साथ मिल रहा है. वाममोर्चा के घटक दलों ने भी राज्य में सेना की कार्रवाई का विरोध किया है. कांग्रेस के अहमद पटेल ने राहूल गांधी के निर्देश पर ममता बनर्जी से बात कर पार्टी का समर्थन जताया. मायावती ने भी संसद के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए सेना की तैनाती को असंविधानिक बताते हुए कहा कि सेना का यह कहना है कि हर साल यह कार्रवाई पूरे देश में होती है, गलत है. उन्होंने उप्र में अपने चार मुख्य मंत्रित्वकाल का हवाला देते हुए कहा कि अपने कार्यकाल में उन्होंने उत्तरप्रदेश में ऐसा कभी नहीं देखा. इसीलिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आपत्ति उचित है. इस मुद्दे पर आम आदमी पार्टी भी ममता के साथ खड़ी है.

सेना की सफाई

अपनी सफाई में सेना की तरफ से सुनील यादव ने प्रेस सम्मेलन करके कहा कि यह कार्रवाई रूटीन है और पूरे पूर्वोत्तर भारत में भी यह कार्रवाई हो रही है. वहीं पूर्वी कमांड का बयान आया था कि राज्य पुलिस को इत्तिला कर कार्रवाई शुरू की गयी. हालांकि कोलकाता पुलिस और राज्य पुलिस ने सेना से ऐसी किसी तरह की बातचीत से इंकार किया है. इसके अलावा कोलकाता पुलिस ने तो ऐसी कार्रवाई के लिए बाकायदा लिखित तौर पर आपत्ति भी की थी. जहां तक सेना के दावे का सवाल है तो पुलिस विभाग खुद मुख्यमंत्री के जिम्मे है. गौरतलब है कि राज्य में गृह विभाग के अलावा एक पुलिस विभाग भी है और वह ममता बनर्जी के पास है. जाहिर है सेना का बयान निराधार है.

सेना के पूर्वी कमांड की तरफ से यह भी कहा गया कि यह रूटीन सर्वे है और इसका मकसद यह देखने है कि युद्ध की स्थिति में सेना के विभिन्न शिविरों में रसद और पानी पहुंचाने का काम कितनी सुगमता से हो सकता है. रसद पहुंचाने के लिए सेना को भारी वाहनों की जरूरत होती है. सर्वे का उद्देश्य यह भी देखना था कि एक तय समय में जवान कितनी गाडि़यां लेने में सक्षम होंगे. यह सर्वे पूरे पूर्वोत्तर भारत में हो रहा है. सेना के इस बयान को भी सिरे से खारिज किया जा सकता है क्योंकि प. बंगाल पूर्वोत्तर भारत का हिस्सा नहीं है.

वहीं, युद्ध जैसे हालात पूर्वोत्तर के बजाए उत्तर भारत में है. सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी आए दिन जम्मू-कश्मीर में आंतकी वारदातें हो रही हैं. सेना के शिविरों पर आंतकी हमले हो रहे हैं. सीमा पर लगातार गोलीबारी चल रही है. लेकिन ऐसा कोई सर्वे उत्तर भारत के राज्यों में नहीं हो रहा है. न ही देश के किसी और हिस्से में.  

संदेहास्पद स्थिति

विभिन्न संवैधानिक पदों पर आरएसएस-भाजपा सहित ऐसे लोगों को नियुक्त किया जा रहा है और किए जाने की कोशिश की जा रही है जो नरेंद्र मोदी के तानाशाही, 'क्रोनी' पूंजीवाद के समर्थक हैं या होने की संभावना है. ऐसे ही लोगों को विश्वविद्यालयों के पदों पर नियुक्त किया गया है और किया भी जा रहा है. ऐसे ही लोगों को फिल्म सेंसर बोर्ड और पूणे फिल्म संस्थान का प्रमुख नियुक्त किया गया. ऐसे ही लोगों को आईबी और सीबीआई में भरा जा रहा है. ऐसे ही लोगों को चुन-चुन कर न्यायपालिका में भी पदासीन करने की साजिश चल रही है. कोलेजियम सिस्टम को लेकर न्यायपालिका और केंद्र में टकराब इसी बात का सबूत है.

यहां तक कि सेना में भी ऐसे लोगों के 'घुसपैठ' की साजिश हो रही है. कुछ बहुत बड़े-बड़े 'क्रोनी' पूंजीपतियों की मदद से सेना के कुछ बड़े पदाधिकारी को 'खरीदने' की कोशिश चल रही है. इसी सिलसिले में बंगाल में सेना की तैनाती और असंवैधानिक सक्रियता को देखा जा रहा है. 

साइबर अटैक्स रोकने के लिए मोजिला ने जारी किया अपडेट

समय के साथ-साथ ब्राउजर में कई तरह की समस्या आनी शुरू हो जाती है जिसे कंपनी एरर फ्री करने में जुट जाती है. हाल ही में आई रिपोर्ट के अनुसार, मोजिला ने फायरफॉक्स और इसपर आधारित Tor ब्राउजर के लिए एक जरूरी सिक्यॉरिटी पैच जारी किया है. जिसमें Firefox के एक कोड की खामी को दूर किया गया. यह पैच सीक्रेट रूप से ब्राउजिंग करने की सुविधा देने वाले टॉर यूजर्स की पहचान जाहिर करने वाले कोड को ब्लॉक करने के लिए बनाया गया है.

जानकारी के अनुसार,  इस खामी की वजह से एनॉनिमस (बिना पहचान बताए) ब्राउजिंग के लिए टॉर ब्राउजर इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की पहचान को फिर से डी-एनॉनिमाइज किया जा सकता था.

मोजिला के ओपन-सोर्स फायरफॉक्स पर आधारित टॉर ब्राउजर पर एक वेबपेज लोड किया जाता था. खास जावास्क्रिप्ट और कोड्स वाला यह पेज असली आईपी और मैक अड्रेस को सेंट्रल सर्वर मे भेज देता था.

एनॉनिमस ब्राउजिंग को बेकार करने का यह तरीका फायरफॉक्स या टॉर ब्राउजर इस्तेमाल करने वाले विंडोज सिस्टम पर ही काम करता था, मगर Veditz का कहना था कि macOS और Linux पर भी यह खतरा था. मोजिला ने इस समस्या को फिक्स करके नया अपडेट जारी कर दिया है और अपने यूजर्स से गुजारिश की है अपने ब्राउजर्स को अपडेट करें. इस बग की वजह मोजिला का थंडरबर्ड ईमेल क्लाइंट भी प्रभावित हुआ था.

एक्सपर्ट्स का कहना है जिस कोड से इन ब्राउजर्स को इस्तेमाल करने वाले यूजर्स की असली पहचान जाहिर की जाती थी, यह ठीक वैसा ही कोड था, जैसा FBI ने 2013 में चाइल्ड पॉर्न देखने वालों का आईपी पता लगाने के लिए इस्तेमाल किया था.

जिन बग्स के बारे में डिवेलपर को भी पता नहीं होता, उन्हें जीरो डे (Zero day या 0-day) बग कहा जाता है.

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