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घटाटोप अंधियारा

सर्दियों में दिन छोटे और रातें लंबी हो जाती हैं. दिख यह रहा है कि इस बार देश में रातें काफी दिनों तक काली ही रहेंगी और दिन भी चमचमाएंगे नहीं कि गुनगुनाती धूप का मजा ले सको. दिन में बैंकों के आगे लाइनों में लगना पड़ेगा और रातों को जाग कर सोचना होगा कि अब क्या होगा. पहले सोचा था कि नोट बदलने का काम 2-3 दिन में पूरा हो जाएगा पर अब लगता है कि यह कई सप्ताह तो चलेगा ही. किशोर जिस जीवनशैली के आदी हो चुके थे वह काफी दिनों तक लौटने वाली नहीं, क्योंकि सरकार ने एक हठधर्मी कदम उठा कर हर जेब में घुस कर डकैती मार ली और मातापिता का ही नहीं बल्कि किशोरों का भी पैसा छीन लिया है. बच्चों की गोलकों को खाली कर दिया गया है, किशोरों का जेबखर्च बंद हो गया है, कोचिंग कक्षाएं रोक दी गई हैं और हो सकता है अगली पहली तारीख के बाद हर स्कूल में फीस न देने के सवाल पर विवाद खड़े होने लगें.

स्कूलों के बाहर मुर्दनी का सा वातावरण है मानो एक अंधियारा छाने वाला हो और सब को घर जाने की जल्दी हो.  अब बाहर खर्च करना कम हो गया है, क्योंकि कम के पास ही 100 रुपए के नोट हैं और पुराने 500 व 1000 के नोट बेकार हो गए हैं. घरों में सब को जेब संभालनी पड़ रही है, इसलिए नहीं कि कमाने वाला बीमार है बल्कि इसलिए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिना बख्शे देश की हर जेब पर सर्जिकल स्ट्राइक कर के सब का पैसा लूट लिया है और अब मुआवजा ऐसे मिल रहा है मानो भिखारियों को बैंकों से लोन लेने दिया जा रहा हो. यह पाठ है सरकार की असीम शक्ति का, जो कोई किशोर अपनी किसी पाठ्यपुस्तक में नहीं पढ़ पाया. इस तरह की लूट इतिहास में कभीकभार ही होती है और होती है तो भी एकसाथ पूरे देश में नहीं होती. कालेधन, नकली मुद्रा, आतंकवाद की आड़ में हर सामान्य घर को बहाना बना कर हर किशोर के घर में घटाटोप अंधियारा कर दिया गया है. मौसम को सर्द नहीं, बर्फीला बना दिया गया है, जिस में हर नस जकड़ गई है. हाथ जेबें टटोलते रह जाते हैं कि कहीं कुछ रह तो नहीं गया.

यह हमला सिखा गया है कि इस देश की जनता कितनी डरपोक और बिना रीढ़ की हड्डी की है. यहां आतंकवादी भी आराम से आ कर अपना काम कर सकते हैं, स्कूलों में बुली मनमानी कर सकते हैं, सड़कों पर शोहदे लड़कियों को छेड़ सकते हैं, सरकार जेबों से पैसा छीन सकती है पर जनता को चूं तक करने की आदत नहीं है. किशोरों को पाठ पढ़ा दिया गया है कि यह देश सर्द जमे लोगों का है. उलटे किशोरों को पाठ पढ़ाया जा रहा है कि यह उन के भविष्य के लिए भला करेगा. अब यह भविष्य कब आएगा, 2 माह बाद, 2 साल बाद या 2 दशक बाद, किसी को नहीं पता. हैप्पी जेब खाली सर्दी.

अब मोबाईल पर ओटीपी से खुलेगा बैंक अकाउंट

आरबीआई ने अपने नो योर कस्टमर (केवाईसी) नियमों में बदलाव किए हैं. इससे बैंक मोबाइल फोन पर वन टाइम पिन (ओटीपी) का इस्तेमाल करके नए अकाउंट खोल सकेंगे. आरबीआई के इस कदम से बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया में तेजी आ सकती है. आरबीआई ने अपनी वेबसाइट पर एक नोटिफिकेशन में कहा है कि बैंक अपने केवाईसी प्रोसिजर को इलेक्ट्रॉनिक तरीके से पूरा करने के लिए ओटीपी मुहैया करा सकते हैं. हालांकि इसके लिए उन्हें ग्राहकों की सहमति लेनी होगी.

नोटिफिकेशन के मुताबिक, इन अकाउंट्स में कुल एक लाख रुपये से ज्यादा रकम नहीं रखी जा सकेगी. आरबीआई के मुताबिक, ऐसे खातों में किसी एक फाइनैंशल ईयर में कुल 2 लाख रुपये से ज्यादा रकम क्रेडिट नहीं होनी चाहिए.

लोन अकाउंट्स के मामले में केवल टर्म लोन ही इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी का इस्तेमाल करते हुए मंजूर किए जा सकते हैं और मंजूर किए जाने वाले टर्म लोन की मात्रा किसी एक साल में 60,000 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. हालांकि आरबीआई ने कहा कि बैंकों को ये खाते खोलने के सालभर के भीतर इनसे जुड़े कस्टमर्स के बारे में जांच-पड़ताल करनी होगी और ऐसा न करने पर इन खातों को बंद कर दिया जाएगा.

 

बिग बैंग के साथ रिलीज हुआ ‘रईस’ का ट्रेलर

‘रईस’ फिल्म के ट्रेलर लौंच के अवसर पर अभिनेता शाहरुख खान अपने अलग अंदाज में अपनी टीम से सबसे पहले स्टेज पर नज़र आये और उत्साहित होकर शाहरुख़ खान ने कहा कि 25 साल से मैं इस इंडस्ट्री में काम कर रहा हूं, हमेशा एक अलग और नई फिल्म देने की कोशिश करता हूं. मैं अपने आप को रईस तब महसूस करता हूं जब मेरे बच्चे मेरी फिल्म की तारीफ करते है या फिर मैं उनके साथ समय बिताता हूं. इसके अलावा जो प्यार बिना शर्तों के मिलता है फिर चाहे वह दोस्त या परिवार मैं रईसी का अनुभव करता हूं. इसमें मैं ‘बेड बॉय’ की भूमिका कर रहा हूं पर रियल लाइफ में ऐसा नहीं हूं.

फिल्म में नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी शाहरुख़ खान के साथ पहली बार पुलिस की भूमिका में हैं और उनकी जबरदस्त परफॉरमेंस ट्रेलर में भी दिखी. शाहरुख़ खान के साथ पाकिस्तानी अभिनेत्री माहिर खान हैं. लैला ओ लैला…सांग के रीमिक्स वर्जन में सनी लिओनी का शाहरुख़ खान के साथ अच्छा तालमेल दिखा. शाहरुख़ को फिल्म से काफी उम्मीद है. फिल्म 25 जनवरी को सिनेमाघरों में होगी. बॉक्स ऑफिस पर फिल्म कितनी सफल होगी ये तो फिल्म के रिलीज के बाद ही पता चलेगा.

आपके हुक्म फरमाते ही हो जाएंगे ये सारे काम

तकनीक के इस दौर में कुछ भी असंभव नहीं रह गया है, कुछ साल पहले तक हम जिसकी कल्पना तक नहीं कर सकते थे आज वो हमारे सामने हाजिर है. क्या आपने कभी सोचा था कि आप कुछ बोलें और वो चीज आपके सामने हाजिर हो जाए. नहीं न! पर वॉइस असिस्टेंट्स के जरिए ये मुमकिन हो सका है.

कुछ साल पहले के मुकाबले वॉइस असिस्टेंट्स काफी बेहतर हुए हैं. रिकॉग्निशन, मल्टीपल लैंग्वेज, नॉलेज ग्राफ और नैचरल लैंग्वेज एनालिसिस इसकी सफलता की वजहें हैं. आप बोलकर ही Siri या Google सर्च की मदद से अपने स्मार्टफोन पर बहुत कुछ कर सकते हैं. हम बता रहे हैं कि आप अपने फोन के वॉइस असिस्टेंट का किन-किन कामों में इस्तेमाल कर सकते हैं…

सर्च

वॉइस असिस्टेंट का फोन के कॉन्टेंट तक ऐक्सेस रहता है. इसका कंट्रोल इंटरनेट पर भी होता है. आप कोई कीवर्ड बोलकर किसी ईमेल को सर्च कर सकते हैं, ब्राउजर में वेबसाइट ओपन कर सकते हैं और यहां तक कि वॉइस के जरिए आप सोशल नेटवर्क पर किसी पोस्ट को सर्च भी कर सकते हैं. इसके अलावा, आप परिभाषाएं, पर्यायवाची शब्द, मैथ की प्रॉब्लम सॉल्व करने जैसे काम भी इसके जरिए कर सकते हैं.

अपना फोन कंट्रोल कीजिए

वॉइस असिस्टेंट का बेसिक इस्तेमाल किसी इंस्टॉल्ड ऐप को ओपन करना है. वॉइस असिस्टेंट को बोलिए 'ओपन' और इसके बाद ऐप का नाम बताइए. आप वाईफाई, डेटा, एयरप्लेन मोड और अन्य सेटिंग्स को भी असिस्टेंट की मदद से बदल सकते हैं. कुछ डिवाइसेज में तो फोटो खींचने या वीडियो रिकॉर्ड करने का काम भी वॉइस असिस्टेंट से करवाया जा सकता है.

वेदर चेक करना

वेदर अपडेट्स के लिए आप कई अलग-अलग चीजें वॉइस असिस्टेंट से पूछ सकते हैं. आप आउटसाइड टेंपरेचर (आज का तापमान) और किसी खास इलाके के लिए किसी खास दिन का वेदर फोरकास्ट भी हासिल कर सकते हैं. मसलन, आप पूछ सकते हैं कि गुरुवार को पुणे में क्या तापमान रहेगा?

टाइमर्स और अलार्म सेट करना     

कई लोग रोज अलार्म सेट करते हैं. वॉइस असिस्टेंट से आप अलार्म सेट करने और इसे कैंसल करने या अलार्म का टाइम चेंज करने जैसे काम कर सकते हैं.

लिस्टेड कॉन्टैक्ट्स को कॉल करना

किसी नाम के लिए अपनी कॉन्टैक्ट लिस्ट को सर्च करने की अब जरूरत नहीं है. केवल वॉयस असिस्टेंट को बोलिए 'कॉल' और इसके बाद कॉन्टैक्ट नाम बताइए, असिस्टेंट तुरंत एक वॉइस कॉल शुरू करेगा. अगर एक नाम वाले कई लोग हैं तो यह आपसे पूछेगा कि आपको इनमें से किसे फोन करना चाहते हैं. आप किसी रिलेशनशिप से भी कॉन्टैक्ट को सेट कर सकते हैं और असिस्टेंट से इन्हें कॉल करने के लिए कह सकते हैं.

हैंड्स फ्री म्यूजिक कंट्रोल

आप वॉइस असिस्टेंट्स के जरिए मल्टीमीडिया प्लेबैक को भी कंट्रोल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए डिफॉल्ट या कंपैटिबल ऐप्स का इस्तेमाल जरूरी है. आप प्ले, पॉज, स्टॉप, स्किप, नेक्स्ट ट्रैक जैसे बेसिक टास्क भी कर सकते हैं और साथ ही किसी खास ट्रैक को भी बजा सकते हैं.

ट्रैवल के दौरान

वॉक, ड्राइविंग करते वक्त आप असिस्टेंट से डायरेक्शन पूछ सकते हैं. पास के रेस्तरां, बैंक या दूसरे स्टोर्स के बारे में भी उससे जानकारी मांगी जा सकती है. वॉइस असिस्टेंट से आप अपने फ्लाइट स्टेटस के बारे में भी जान सकते हैं.

आनंद एल राय की फिल्म ‘मनमर्जिया’ नहीं बनेगी

शायद अब चर्चित फिल्म निर्देशक आनंद एल राय उस दिन को कोस रहे हैं, जब उन्होंने फिल्म निर्माता बनकर दूसरे प्रतिभाशाली निर्देशकों को एक मंच देने का निर्णय लिया था. आनंद एल राय ने समीर शर्मा के निर्देशन में आयुष्मान खुराना और भूमि पेडणेकर को लेकर फिल्म ‘‘मनमर्जिया’’ बनाने का निर्णय लिया था. लेकिन यह फिल्म दो साल से नहीं बन पायी. समीर शर्मा के निर्देशन में इस फिल्म के कुछ हिस्से दो बार फिल्माए जा चुके हैं. जिससे असंतुष्ट होने पर आनंद एल राय ने समीर शर्मा को हटाकर अश्विनी अय्यर तिवारी को ‘मनर्जिया’ का निर्देशक बनाया. मगर अश्विनी अय्यर तिवारी कुछ समय यूं ही टरकाती रही.

फिर वह ‘मनमर्जिया’ की बजाय लखनऊ जाकर ‘‘जंगली पिक्चर्स’’ की फिल्म ‘बरेली की बर्फी’ की शूटिंग करने लगी और उन्होंने कह दिया कि वह अब ‘मनमर्जिया’ का निर्देशन नहीं करेंगी. तब आनंद एल राय ने इस फिल्म के निर्देशन के लिए अनुराग कश्यप से बात की. अनुराग तैयार भी हुए. मगर सूत्रों के अनुसार फिर अनुराग कश्यप ने कुछ ऐसी शर्तें रख दी, जो कि आनंद एल राय को पसंद नही आयी. इसलिए मामला लटक गया. उधर आयुष्मान खुराना ‘बरेली की बर्फी’ में व्यस्त हैं. जबकि भूमि पेडणेकर ‘टायलेट एक प्रेम कथा’ में व्यस्त हैं.

तो दूसरी तरफ कोई दूसरा निर्देशक ‘मनमर्जिया’ निर्देशित करने के लिए तैयार नहीं है. जबकि खुद आनंद एल राय अपनी शाहरुख खान के साथ वाली फिल्म की तैयारी में व्यस्त हैं. इसलिए सूत्र दावा कर रहे हैं कि अब ‘‘मनमर्जिया’’ नहीं बनने वाली है.

गुजरात में बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा स्टेडियम

गुजरात के मोटेरा स्थित सरदार पटेल क्रिकेट स्टेडियम पुनर्निर्माण के बाद दर्शकों की क्षमता के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बन जाएगा. गुजरात क्रिकेट असोसिएशन (जीसीए) ने इसकी जिम्मेदारी लार्सन ऐंड टर्बो (एलऐंडटी) को सौंपी है. जीसीए के उपाध्यक्ष परिमल नाथवानी ने एलऐंडटी को स्वीकृति पत्र सौंपा.

यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जीसीए चीफ अमित शाह का ड्रीम प्रॉजेक्ट है. स्टेडियम का पुराना ढांचा पहले से मौजूद है, यहीं नया स्टेडियम तैयार किया जाएगा, जिसमें 1,10,000 दर्शकों के बैठने की क्षमता होगी. अभी तक सर्वाधिक दर्शक क्षमता ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (एमसीजी) की है, यहां 100,0024 दर्शक बैठकर मैच देख सकते हैं.

जीसीए ने बयान जारी कर कहा है, 'ग्राउंड कंस्ट्रक्शन कंपनी के हवाले किए जाने को तैयार है. जब काम पूरा होगा तो यह दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम होगा. यह लेटेस्ट और अंतरराष्ट्रीय स्टैंडर्ड का होगा.' नए स्टेडियम में दर्शकों के लिए बेहतर ढांचागत सुविधाएं होंगी और एसी बॉक्सेस की संख्या बढ़ाई जाएगी. पार्किंग की भी बेहतर सुविधा होगी.

जीसीए के सचिव राजेश पटेल ने बताया, 'स्टेडियम के अंदर आने और बाहर निकलने के रास्ते को और सुगम बनाया जाएगा. खाने पीने, फैन जोन्स के अलावा अच्छे वॉशरूम की भी सुविधा मिलेगी. नया स्टेडियम अगले दो साल में तैयार हो जाएगा.' फिलहाल इस स्टेडियम में 6 पविलियन हैं और 54,000 दर्शकों के बैठने की क्षमता है.

कैसी होगी ‘बुनियाद’ और ‘चंद्रकांता’ की वापसी

लगता है कि बौलीवुड और टीवी इंडस्ट्री में कहानियों और अच्छे लेखकों का वास्तव में अकाल पड़ गया है. तभी तो बौलीवुड में पुरानी सफल फिल्मों के रीमेक या उनके सिक्वअल बन रहे हैं. तो दूसरी तरफ अब टीवी इंडस्ट्री से जुड़े निर्माता निर्देशक पुराने सफलतम सीरियलों को पुनः नए ढंग से लेकर आने जा रहे हैं.

फिलहाल खबर यह है कि दूरदर्शन पर नब्बे के दशक में प्रसारित अति लोकप्रिय सीरियल ‘‘चंद्रकांता’’ पर दो सीरियल बन रहे हैं, एक सीरियल ‘‘लाइफ ओ के’’ चैनल पर प्रसारित होगा, तो दूसरा सीरियल ‘‘कलर्स’’ चैनल पर प्रसारित होगा. वहीं दूरदर्शन के ही अति लोकप्रिय सीरियल ‘बुनियाद’ की नए रंग में वापसी दूरदर्शन पर ही होने वाली है.

1986 में दूरदर्शन पर रमेश सिप्पी निर्देशित देश के बंटवारे की पृष्ठभूमि पर आधारित सीरियल ‘‘बुनियाद’’ प्रसारित हुआ था. अब पूरे 30 वर्ष बाद इस सीरियल की वापसी दूरदर्शन पर ‘‘बुनियाद 2’’ के नाम से होगी. जिसे रमेश सिप्पी ही निर्देशित कर रहे हैं. मगर इसकी कहानी वर्तमान समय की होगी.

इस संबंध में प्रसार भारती बोर्ड की कंटेंट कमेटी के चेअरमैन अनूप जलोटा कहते हैं- ‘‘हम दूरदर्शन को चमकाने का प्रयास कर रहे हैं. बहुत जल्द कई बदलाव नजर आएंगे. कई नए कार्यक्रम आएंगे. रमेश सिप्पी निर्देशित सीरियल को हम ‘बुनियाद 2’ के नाम से लेकर आ रहे हैं. जिसमें आजकल के जमाने की कहानी होगी. पूरी नई कहानी होगी.’’

जबकि दूरदर्शन पर मशहूर उपन्यास ‘‘चंद्रकांता संतति’’ पर आधरित सीरियल ‘‘चंद्रकांता’’ प्रसारित हुआ था. इसी उपन्यास पर आधारित सीरियल ‘‘चंद्रकांता’’ का निर्माण निखिल सिन्हा कर रहे हैं, जिसका प्रसारण ‘‘लाइफ ओ के’’ चैनल पर होगा. निखिल सिन्हा इससे पहले ‘‘स्टार प्लस’’ के लिए ‘‘सिया के राम’’ जैसा सीरियल बना चुके हैं. जबकि इसी उपन्यास पर ‘‘चंद्रकांता’’ नाम से ही नया सीरियल एकता कपूर की कंपनी ‘‘बालाजी टेलीफिल्मस’’ कर रही है. यानी कि एक बार फिर एक ही विषय पर दो सीरियल दो प्रतिद्वंदी चैनलों पर प्रसरित होंगे. जिसके चलते चैनल की प्रतिद्वंदिता साफ नजर आ रही है.

मगर निखिल सिन्हा किसी भी तरह की प्रतिद्वंदिता से इंकार करते हुए कहते हैं-‘‘कहीं कोई प्रतिद्वंदिता नही है. हमारे सीरियल का ट्रेलर ‘लाइफ ओ के’ पर प्रसारित होने लगा है. हम पायलट एपीसोड भी फिल्मा चुके हैं. हम पहले फरवरी माह में इस सीरियल को लेकर आने वाले थे. लेकिन हमारे सीरियल का ट्रेलर प्रोमा आने के बाद ‘कलर्स’ पर भी इसी तरह के सीरियल का प्रोमो आया है, तो अब ‘लाइफ ओ के’ चैनल प्रसारण की तारीख को लेकर नए सिरे से सोच रहा है.’’

मेरा करियर हमेशा चुनौतियों से भरा रहा है : सुरेंद्र पाल

बौलीवुड में बतौर हीरो अभिनय करियर की शुरुआत करने वाले अभिनेता सुरेंद्र पाल के पास उपलब्धियों की कमी नहीं है. वह सौ से अधिक फिल्मों के अलावा छोटे परदे पर ग्यारह हजार से अधिक एपीसोडों में अभिनय कर चुके हैं. टीवी सीरियलों में वह गुरु द्रोणाचार्य, अमात्य राक्षस, रावण, रावण के पिता, राजा दक्ष प्रजापति सहित कई पौराणिक व एैतिहासिक किरदार निभा चुके हैं. तो वहीं उन्होंने कुछ सामाजिक सीरियलों मे भी बेहतरीन किरदार निभाए. इन दिनों वह ‘‘स्टार प्लस’’ पर प्रसारित हो रहे सीरियल ‘‘जाना ना दिल से दूर’’ में आर्मी के अवकाशप्राप्त ब्रिगेडियर वशिष्ठ के किरदार में नजर आ रहे हैं. कहा जा रहा है कि सुरेंद्र पाल द्वारा निभाए गए किरदारों में से यह सबसे कमजोर किरदार है. तो क्या अब सुरेंद पाल को भी असुरक्षा का डर सताने लगा है?

लगता है कि आप खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं, इसी के चलते आपने ‘‘जाना ना दिल से दूर’’ में एक कमजोर किरदार निभाना स्वीकार कर लिया?

– ऐसा न कहें. मैं खुद को असुरक्षित कलाकार नहीं मानता. आज से अट्ठाइस वर्ष पहले जब मैने बौलीवुड में कदम रखा था, उस वक्त भी मैंने अपने आपको असुरक्षित नहीं महसूस किया था और आज भी असुरक्षित महसूस नही करता. मेरा मानना है कि मेरे अंदर अभिनय क्षमता व योग्यता न होती, तो मैं इतनी लंबी पारी नहीं खेल सकता था. मैं तो सचिन तेंदुलकर की तरह हूं. सचिन तेंदुलकर एक अच्छे खिलाड़ी हैं. 16 साल की उम्र से दसवीं फेल होने के बावजूद वह एक अच्छे क्रिकेटर की तरह खेलते रहे. पिच पर डटे रहे. वही उनकी योग्यता व क्षमता थी. उन्होंने कई रिकार्ड भी बनाए. पर यह नहीं कह सकते कि उन्होंने हर मैच में रिकार्ड बनाया. सुरेंद्र पाल भी ही कहते हैं कि मैं हर सीरियल में रिकार्ड नहीं बना सकता हूं. लेकिन जहां जहां मेरी प्रतिभा व क्षमता को दर्शाया जाएगा, वहां वहां मैं अपना सिक्का जमाकर ही रहूंगा. अपनी छाप छोड़कर जाउंगा, जो कि अभी तक बहुत कम कलाकार कर पाए हैं. मैं यह मानता हूं कि ‘‘जाना ना दिल से दूर’’ जैसे सीरियलों में एक अच्छे कलाकार को जोड़कर उसे जाया किया जाता है.

हमने इस बारे में प्रोडक्शन हाउस से बात की है. उन्होंने हमें असश्वस्त किया है कि आगे कहानी विकसित होने वाली है. कई नई शाखाएं विकसित होंगी. तो हम इसी उम्मीद में काम कर रहे हैं कि आगे हमारे किरदार को कुछ करने का अवसर मिलेगा. फिर मैं तो यह भी मानता हूं कि जैसा देश वैसा भेष पकड़ लेना चाहिए. अगर हम समय के साथ नहीं चलेंगे, तो समय हमें कहीं न कहीं छोड़ देगा.

तो फिर आपने ‘‘जाना ना दिल से दूर’’ में अभिनय करना क्यों स्वीकार किया?

– जब हमारे पास किसी भी सीरियल का आफर आता है, तो वह हमसे यही दावा करता है कि मेरा किरदार सीरियल में बहुत अहमियत वाला है. मेरे अपने जो अनुभव हैं, उसके अनुसार शुरुआत में पता नहीं होता है कि वह किरदार आगे किस तरह से बढ़ेगा, उसका क्या रूप होगा. कहानी किस करवट बैठेगी. टीआरपी के नाम पर चैनल व सीरियल के निर्माता कभी भी सीरियल की कहानी को मोड़ देते हैं. वह ऐसा इसलिए करते रहते हैं क्योंकि अच्छे लेखकों की कमी है.

आप कहना क्या चाहते हैं?

– मैं खुलकर यह बात कह रहा हूं कि रमेश सिप्पी के सीरियल ‘‘बुनियाद’’ या बी आर चोपड़ा के सीरियल ‘‘महाभारत’’ या डॉ. चंद्र प्रकाश द्विवेदी के सीरियल ‘‘चाणक्य’’ का लेखन करने वाले लोग अब रहे नहीं. आज की तारीख में डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी और डॉ. राही मासूम रजा जैसे लेखकों की कमी हो गयी है. मैं तो यह कहूंगा कि इससे अच्छा सीरियल तो ‘‘शक्तिमान’’ था. कम से कम उसमें यह कह कर तो दिखाया गया कि यह फैंटसी है. जबकि अब जो सीरियल आ रहे हैं, वह सब चूंचूं का मुरब्बा हैं. देसी घी के डिब्बे में केमीकल भरे होने जैसे हालात हैं.

28 वर्ष के करियर में फिल्म व टीवी इंडस्ट्री में जो बदलाव आए, उन्हें आप किस तरह से देखते हैं?

– मैं हमेशा समय के साथ चलता रहा हूं. समय के साथ जिस तरह से से नई नई तकनीक आती गयी, उसका मैंने भी उपयोग करना शुरू किया. पहले मोबाइल नहीं थे. फिर कम्प्यूटर आया. अब तो लोग घर से बाहर हाथ में छोटा सा लैपटाप लेकर घूमते हैं और कहीं किसी काफी शॉप में बैठकर भी काम कर लेते हैं. यह वैज्ञानिक प्रगति का दौर है. इसी तरह टीवी इंडस्ट्री में भी बदलाव आ रहा है. दर्शकों का भी मूड़ बदल रहा है. हमारे माता पिता भारतीय संस्कृति को अहमियत देते थे. जिसके चलते उन दिनों ‘महाभारत’, ‘रामायण’, ‘चाणक्य’, ‘चंद्रकांता’, जैसे सीरियलों को काफी लोकप्रियता मिली, दर्शक मिले. उन दिनों एकमात्र दूरदर्शन था. दर्शकों के पास भी ज्यादा चुनने के अवसर नहीं थे. अब सैकड़ो चैनल हो गए हैं. इसके चलते दर्शक बंट गया है. दर्शक भी तय कर लेता है कि हमें यही सीरियल देखना है, फिर चाहे चैनल व सीरियल निर्माता उस सीरियल को किसी भी अनुपात इधर उधर खींचता रहे. इसके चलते भी कई सीरियल कहानी से भटक कर कुछ भी परोसने लगते हैं.

हर दिन छह सौ सीरियल प्रसारित होते हैं. ऐसे में दर्शक इन सभी सीरियलों को तो वैसे भी नहीं देख सकता. इसी के चलते कलाकारों में बदलाव आ रहा है. पहले के कलाकार अपनी अभिनय क्षमता के बल पर परदे पर जमे या टिके रहते थे. पर अब टिके रहने वाली बात कम नजर आती है. कलाकार तभी तक याद किया जाता है, जब तक वह सीरियल हिट होता है. सीरियल का प्रसारण खत्म होते ही उससे जुड़ा कलाकार गुमनामी की जिंदगी जीने लगता है. आज यह कलाकार खुद को असुरक्षित मानने लगे हैं. मेरे साथ या मेरे बाद आए 99 प्रतिशत कलाकार आज की तारीख में कहीं नहीं हैं. यह कलाकार यदा कदा ही नजर आते हैं अन्यथा गुमनामी की जिंदगी जी रहे हैं. पर मैं यह नही मानता कि इसकी वजह उनके अंदर योग्यता या अभिनय क्षमता की कमी है. उनके अंदर क्षमता आज भी उतनी ही है, जितनी तब थी, जब वह इस इंडस्ट्री का हिस्सा बने थे. पर समय बदला और वह इस समय के बदलाव के साथ खुद के अंदर बदलाव नहीं ला सके.

चैनल कहता है कि हम नए चेहरे लाना चाहते हैं. जिससे हम नई सोच विकसित करते रहें. मगर वह भूल जाते हैं कि नई सोच व नई कहानी होती है, महज नए चेहरों से नई सोच नहीं पैदा की जा सकती. चैनल को चेहरे बदलने की बजाय कहानियां बदलनी चाहिए. हर सीरियल की कहानियां कमोबेश एक जैसी ही लगती है. उनमें नएपन का घोर अभाव नजर आता है.

पर आपने जितने भी पौराणिक या ऐतिहासिक पात्र निभाए, वह लोगों के दिलो दिमाग में छा गए?

– मैं किरदारों को आत्मसात कर लेता हूं. एक समय में एक ही सीरियल करता हूं. यही वजह है कि मेरे निभाए हुए किरदार लोग ज्यादा पसंद करते हैं. भगवान शिव पर कई सीरियल बने हैं, जिसमें राजा दक्ष प्रजापति रहे हैं. मगर किसी भी सीरियल में वह अपनी पहचान नहीं बना पाए, अपनी छाप नहीं छोड़ पाए. मगर जब मैने सीरियल ‘‘देवों के देव महादेव’’ में राजा दक्ष प्रजापति का किरदार निभाया, तो वह लोगों के दिलोदिमाग में बस गया. ‘महाभारत’ में द्रोणाचार्य भी मेरे अलावा दस लोग निभा चुके हैं, मगर वह भी अपनी पहचान नहीं बना पाए. मगर रावण के पिता को लोगों ने पहली बार सीरियल ‘‘सिया के राम’’ में देखा.

पर इस तरह के चुनौतीपूर्ण किरदार निभाने के मौके दूसरे कलाकारों को मिले भी नहीं?

– मेरी जिंदगी कुछ ऐसी रही है कि मुझे मेरे करियर के पहले सीरियल ‘‘महाभारत’’ से आज तक चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं ही मिलती आ रही हैं. जब मैं मात्र 24 वर्ष का था, तब मैंने द्रोणाचार्य का किरदार निभाया था. कहने का अर्थ यह कि मेरा करियर हमेशा चुनौतियों से भरा रहा. मैंने हमेशा चुनौतियों को स्वीकार किया. मैंने हर किरदार को उतनी ही संजीदगी के साथ जिया. दर्शकों ने भी मेरे काम को सराहा और अपने सिर आंखों पर बैठाया.

इसके बाद क्या कर रहे हैं?

– फिलहाल हर माह के 25 दिन ‘‘जाना ना दिल से दूर’’ ही ले जा रहा है. एक बार में मैं दो सीरियल नहीं करना चाहता.

मुंबई टेस्ट: भारतीय क्रिकेट इतिहास में पहली बार हुआ ऐसा

भारत और इंग्लैंड के बीच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में सीरीज का चौथा टेस्ट खेला जा रहा है. इस टेस्ट की मैच की एक खास बात यह है कि ऐसा पहली बार है, जब कोई टेस्ट मुंबई में खेला जा रहा है और टीम इंडिया में मुंबई का ही कोई खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन में नहीं है.

मुंबई से ही शुरू हुए थे टेस्ट मैच

आपको बता दें कि 1933 में पहली बार भारत में टेस्ट मैच खेला गया था और इसकी मेजबानी मुंबई को ही मिली थी. यह मैच बॉम्बे जिमखाना मैदान पर 15 से 18 दिसंबर तक खेला गया था. भारत और इंग्लैंड के बीच हुए इस टेस्ट मैच को इंग्लैंड ने 9 विकेट से जीता था. 1933 में हुए भारत-इंग्लैंड टेस्ट में मुंबई के 4 प्लेयर लक्ष्मीदास जय, विजय मर्चेंट, सोराबजी कोलाह और रुस्तमजी जमशेदजी प्लेइंग इलेवन में शामिल थे.

 लेकिन यह सिलसिला तब टूटा जब इंग्लैंड के खिलाफ विराट कोहली की कप्तानी में उतरी भारतीय टीम में मुंबई का कोई प्लेयर नहीं था.

मुंबई के 43 मैचों में कभी नहीं हुआ ऐसा

भारत-इंग्लैंड के चौथे मैच से पहले मुंबई में 43 टेस्ट मैच खेले गए हैं. इन मैचों में मुंबई का कोई न कोई खिलाड़ी जरूर खेला था. इस मैच में मुंबई के अजिंक्य रहाणे को टीम इंडिया के लिए खेलना था, पर उंगुली में फ्रैक्चर होने के कारण वह इस मैच से बाहर हो गए. चोटिल मोहम्मद शमी की जगह मुंबई के पेसर शर्दुल ठाकुर को बतौर बैकअप बुलाया गया है, पर उन्हें अंतिम 11 में जगह नहीं मिली. शमी की जगह उत्तर प्रदेश के भुवनेश्वर कुमार को मैच खेलने का मौका मिला.

कैशलेस ट्रांजैक्शन करने से होंगे ये फायदे

सरकार के नोटबंदी के फैसले की घोषणा को 1 महीने पूरे हो गए हैं. इस मौके पर केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कुछ बड़े ऐलान किए हैं. उन्होंने डिजिटल ट्रांजैक्शन पर बात करते हुए देश को कैशलेस समाज बनाने पर जोर दिया. डेबिट, क्रेडिट कार्ड अथवा ऐसे ही किसी अन्य डिजिटल तरीके से आप यदि पेट्रोल, डीजल खरीदते हैं या फिर रेलवे टिकट के लिए भुगतान करते हैं तो आपको कुछ छूट दी जायेगी.

सरकार ने 2,000 रुपये के लेनदेन का भुगतान कार्ड के जरिये करने पर सर्विस टैक्स समाप्त कर दिया है. इसी प्रकार पेट्रोल, डीजल खरीदने पर भुगतान यदि क्रेडिट, डेबिट कार्ड, ई-वॉलेट अथवा मोबाइल वॉलेट से किया जाता है तो 0.75% की छूट मिलेगी. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नकदीरहित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए गुरुवार को कई प्रकार की खरीद-फरोख्त पर डिजिटल भुगतान करने पर रियायत और सेवा कर में छूट के सरकार के 11 निर्णयों की घोषणा की.

सार्वजनिक कंपनियों की वेबसाइट के जरिये जीवन बीमा पॉलिसी खरीदने या प्रीमियम भुगतान ऑनलाइन करने पर 8 प्रतिशत छूट दी जायेगी. इसी प्रकार साधारण बीमा पॉलिसी लेने या फिर प्रीमियम भुगतान ऑनलाइन करने पर 10 प्रतिशत की छूट मिलेगी.

वित्त मंत्री जेटली ने डिजिटल तरीके से भुगतान को बढ़ावा देने के फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि उपनगरीय रेलवे यात्रा का मासिक अथवा सीजन टिकट खरीदने पर एक जनवरी से 0.5 प्रतिशत रियायत दी जायेगी. रेल यात्रा का टिकट ऑनलाइन खरीदने पर 10 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा दिया जाएगा. जो लोग रेलवे कैटरिंग, ठहरने के स्थान, विश्रामगृह के लिये भुगतान डिजिटल तरीकों के जरिये करेंगे उन्हें उसमें 5 प्रतिशत छूट मिलेगी.

जेटली ने कहा कि सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों के साथ सार्वजनिक लेनदेन में डिजिटल तरीकों से भुगतान करने पर लेनदेन शुल्क और एमडीआर शुल्क नहीं लिया जायेगा. 

ये फायदे होंगे ऑनलाइन पेमेंट से:

– डिजिटल पेमेंट करने पर पेट्रोल-डीजल 0.75 प्रतिशत सस्ता मिलेगा.

– हर 10,000 की आबादी वाले गांव में दो प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें उपलब्ध करायी जाएंगी. इसके लिए एक लाख गांव चुने जाएंगे.

– रेलवे के मासिक टिकटों की खरीद डिजिटल तरीके से करने पर एक जनवरी से 0.5 प्रतिशत की छूट.

– मुंबई लोकल के यात्रियों को भी टिकट में छूट दी जाएगी.

– ऑनलाइन टिकट खरीदने पर मुफ्त बीमा का प्रावधान होगा.

– रेलवे की खानपान, विश्राम गृह, रिटायरिंग रूम के लिए डिजिटल भुगतान पर 5 प्रतिशत की छूट मिलेगी.

– किसान क्रेडिट कार्ड धारकों को रूपे कार्ड उपलब्ध कराया जाएगा.

– ई-पेमेंट करने पर जीवन बीमा में 8 फीसदी तक की छूट मिलेगी.

– ई-पेमेंट करने पर सामान्य बीमा पर 10 प्रतिशत की छूट दी जाएगी.

– नई पॉलिसी खरीदने वालों को भी छूट मिलेगी.

– टोल नाकों पर ई-पेमेंट पर 10 प्रतिशत की छूट का भी प्रावधान है.

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