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कामुक तांत्रिक और शातिर बेगम: भाग 1

मध्य प्रदेश के जिला देवास की एक तहसील है खातेगांव, जहां से 5-7 किलोमीटर दूर स्थित है गांव सिराल्या. इसी गांव में रूप सिंह पत्नी मीराबाई और एकलौती बेटी सत्यवती के साथ झोपड़ी बना कर रहता था. रूप सिंह को कैंसर होने की वजह से उस के इलाज से ले कर पेट भरने और तन ढकने तक की जिम्मेदारी मीराबाई उठा रही थी.

आदमी कितना भी गरीब क्यों न हो, जान पर बन आती है तो सब कुछ दांव पर लगा कर जान बचाने की कोशिश करता है. मीराबाई भी खानेपहनने से जो बच रहा था, पति रूप सिंह के इलाज पर खर्च कर रही थी. लेकिन उस की बीमारी मीराबाई की कमाई लील कर भी कम होने के बजाय बढ़ती जा रही थी.

जब सारी जमापूंजी खर्च हो गई और कोई फायदा नहीं हुआ तो रूप सिंह दवा बंद कर के तंत्रमंत्र से अपनी जीवन की बुझती ज्योति को जलाने की कोशिश करने लगा. वह एक मुसीबत से जूझ ही रहा था कि अचानक एक और मुसीबत उस समय आ खड़ी हुई, जब जुलाई, 2016 के आखिरी सप्ताह में एक दिन उस की 16 साल की बेटी सत्यवती अचानक गायब हो गई. एकलौती होने की वजह से सत्यवती ही मीराबाई और रूप सिंह के लिए सब कुछ थी.

उस के अलावा पतिपत्नी के पास और कुछ नहीं था. इसलिए बेटी के गायब होने से दोनों परेशान हो उठे. रूप सिंह बीमारी की वजह से लाचार था, इसलिए मीराबाई अकेली ही बेटी की तलाश में भटकने लगी. जब बेटी का कहीं कुछ पता नहीं चला तो आधी रात के आसपास वह रोतीबिलखती थाना खातेगांव जा पहुंची.

मीराबाई ने पूरी बात ड्यूटी अफसर को बताई तो उन्होंने तुरंत इस बात की जानकारी थानाप्रभारी तहजीब काजी को दे दी. वह तुरंत थाने आ पहुंचे और मीराबाई को शांत करा कर पूरी बात बताने को कहा.

मीराबाई ने जवानी की दहलीज पर खड़ी अपनी बेटी सत्यवती के लापता होने की पूरी बात तहजीब काजी को बताई तो उन्हें समझते देर नहीं लगी कि सत्यवती भले ही नाबालिग थी, लेकिन इतनी छोटी भी नहीं थी कि उस के गायब होने के पीछे किसी बुरी घटना की आशंका न हो, जबकि आजकल तो लोग दूधपीती बच्चियों को भी नहीं छोड़ रहे हैं.

तहजीब काजी को प्रेमप्रसंग को ले कर सत्यवती के भाग जाने की आंशका थी. लेकिन जब इस बारे में उन्होंने मीराबाई से पूछताछ की तो उन की यह आशंका निराधार साबित हुई, क्योंकि मीराबाई का कहना था कि सत्यवती की न तो गांव के किसी लड़के से दोस्ती थी और न ही किसी लड़के का उस के घर आनाजाना था.

बस, एक राशिद बाबा का उस के घर आनाजाना था. यही वजह थी कि गांव वालों ने उस के परिवार का सामाजिक बहिष्कार कर रखा था. लेकिन नेमावर के रहने वाले राशिद बाबा पांचों वक्त नमाजी और पक्के मजहबी हैं, इसलिए उन पर शंका नहीं की जा सकती. फिर वह सत्यवती के दादा की उम्र के भी हैं. इसलिए मासूम बच्ची पर नीयत खराब कर के वह अपना बुढ़ापा क्यों बेकार करेंगे.

बहरहाल, सत्यवती की उम्र को देखते हुए उस की तलाश करना जरूरी था. इसलिए तहजीब काजी पूछताछ करने के लिए रात में ही मीराबाई के गांव जा पहुंचे, जहां उन्हें चौकाने वाली बात यह पता चली कि राशिद बाबा के आनेजाने से लगभग पूरा गांव रूप सिंह से नाराज था. इस की वजह यह थी कि एक तो वह दूसरे मजहब का था, जो गांव वालों को पसंद नहीं था, इस के अलावा वह तंत्रमंत्र करता था, जिस से गांव वाले उस से डरते थे.

राशिद के तांत्रिक होने की जानकारी होते ही तहजीब काजी को उसी पर शक हुआ. क्योंकि पुलिस की अब तक की नौकरी से उन्हें यह अच्छी तरह पता चल चुका था कि तंत्रमंत्र कुछ नहीं है, सिर्फ मन का वहम है. इसलिए जो लोग खुद को तांत्रिक होने का दावा करते हैं, सीधी सी बात है कि वे बहुत ही शातिर किस्म के होते हैं.

तांत्रिकों द्वारा महिलाओं और मासूम लड़कियों के यौनशोषण की घटनाएं आए दिन सामने आती रहती हैं. यही सब सोच कर तहजीब काजी को राशिद बाबा पर शक हुआ. उन्होंने तुरंत एसपी शशिकांत शुक्ला और एएसपी राजेश रघुवंशी को घटना के बारे में बता कर दिशानिर्देश मांगे.

अधिकारियों के आदेश पर समय गंवाए बगैर वह 15 किलोमीटर दूर स्थित राशिद के घर जा पहुंचे, लेकिन वह घर पर नहीं मिला. इस से उन का शक और बढ़ गया. घर वालों से पूछताछ कर के वह वापस आ गए.

तहजीब काजी सत्यवती की तलाश में तत्परता से जुट गए थे. उन्होंने अपने मुखबिरों को भी राशिद बाबा की तलाश में लगा दिया था. उन की इस सक्रियता का ही नतीजा था कि अगले दिन नेमावर की ही रहने वाली कमला सत्यवती को ले कर थाने आ पहुंची.

कमला ने बताया कि किसी बात को ले कर कल मीराबाई ने सत्यवती को डांट दिया था, जिस से नाराज हो कर यह उस के पास आ गई थी. सुबह उसे पता चला कि इसे पुलिस खोज रही है तो वह इसे ले कर इस के घर पहुंचाने आ गई.

बेटी को देख कर मीराबाई तो सब भूल गई, लेकिन तहजीब काजी को याद था कि पूछताछ में मीराबाई ने सत्यवती के साथ डांटडपट वाली बात से मना करते हुए कहा था कि वही तो उस की सब कुछ है, इसलिए उस ने या उस के पति ने इसे डांटनेडपटने की कौन कहे, इस की तरफ कभी अंगुली तक उठा कर बात नहीं की.

इसीलिए तहजीब काजी को लगा कि कमला सत्यवती को ले कर आई है, यह तो ठीक है, लेकिन जो बता रही है, वह झूठ है. क्योंकि कमला जिस अंदाज में बात कर रही थी, उस से उन्होंने अनुमान लगाया कि यह काफी शातिर किस्म की औरत है. वह समझ गए कि मामला कुछ और ही है.

तहजीब काजी जानते थे कि यह औरत सच्चाई बता नहीं सकती, इसलिए उन्होंने सत्यवती से सच्चाई जानने की जिम्मेदारी एसआई रविता चौधरी को सौंप दी.

एसआई रविता चौधरी थानाप्रभारी के मकसद को भली प्रकार समझ रही थीं, इसलिए उन्होंने जल्दी ही बातों ही बातों में सत्यवती का विश्वास जीत कर उस से सचसच बताने को कहा तो उस ने कमला और राशिद बाबा की जो सच्चाई बताई, उसे सुन कर सभी हक्केबक्के रह गए.

मीराबाई को तो भरोसा ही नहीं हो रहा था कि जिस राशिद बाबा को वह भला आदमी समझ कर पूज रही थी, वही उस की बेटी को गंदा कर रहा था. सत्यवती के बयान से साफ हो गया था कि राशिद बाबा के जुर्म में कमला भी बराबर की हकदार थी, इसलिए पुलिस ने उसे तो गिरफ्तार कर ही लिया, उस की निशानदेही पर राशिद बाबा को भी गिरफ्तार कर लिया गया.

पकड़े जाने के बाद राशिद ने दीनईमान की बातों में उलझा कर तहजीब काजी को प्रभावित करने की काफी कोशिश की, लेकिन उन्होंने राशिद और कमला के खिलाफ दुष्कर्म एवं धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर उन्हें अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

राशिद, उस की सहयोगी कमला और सत्यवती के बयान के आधार पर तंत्रमंत्र के नाम पर सत्यवती के यौनशोषण की जो कहानी उभर कर सामने आई, वह इस प्रकार थी—

नेमावर के अपने घर में साइकिल सुधारने और छोटीमोटी जरूरत के सामानों की दुकान चलाने वाला राशिद बाबा जवानी की दहलीज पर कदम रखते ही कामुक और शातिर प्रवृत्ति का हो गया था. उस का निकाह जल्दी हो गया था, परंतु बीवी के आ जाने के बाद भी उस की आदत में कोई सुधार नहीं हुआ था.

प्यार का नशा

बलराम ने जल्दीजल्दी इंटरव्यू लैटर, नोट बुक, पैन आदि बैग में रख कर सोनिया को आवाज दी, ‘‘दीदी, जल्दी से मेरा नाश्ता लगा दीजिए, मुझे देर हो रही है.’’

‘‘आ कर नाश्ता कर लो, मैं ने तुम्हारा नाश्ता तैयार कर दिया है.’’ सोनिया ने रसोईघर से ही कहा.

बलराम ने जल्दीजल्दी नाश्ता किया और अपना बैग ले कर मां के पास पहुंचा. शकुंतला देवी चारपाई पर लेटी थीं. बेटे को देख कर उन्होंने कहा, ‘‘जाओ बेटा, सफल हो कर लौटो. लेकिन तुम ने यह तो बताया ही नहीं कि इंटरव्यू देने कहां जा रहे हो?’’

‘‘मां चंडीगढ़ जा रहा हूं, एक बहुत बड़ी कंपनी में. अगर यह नौकरी मिल गई तो जिंदगी सुधर जाएगी.’’

‘‘जैसी प्रभु की इच्छा.’’ शकुंतला देवी ने कहा.

मां के पैर छू कर बलराम घर से निकल गया. यह 5 जून, 2015 की बात है. इंटरव्यू देने के बाद वह शाम के 7, साढ़े 7 बजे घर लौटा तो सोनिया रात का खाना बना रही थी. बैग रख कर बलराम मां के कमरे में पहुंचा तो वहां मां नहीं थी. बाहर आ कर उस ने बहन से मां के बारे में पूछा तो उस ने कहा, ‘‘शाम को कीर्तन करने की बात कह कर गई थीं, पर अभी तक लौटी नहीं हैं.’’

बलराम को पता था कि मां अकसर कीर्तन पर जाती थीं तो देर रात को लौटती थीं. पिताजी के घर छोड़ कर जाने के बाद मां ने खुद को भजनकीर्तन में लगा लिया था. मां की चिंता छोड़ कर उस ने हाथमुंह धोया तो बहन ने उस के लिए खाना परोस दिया.

खाना खा कर बलराम अपने कमरे में आराम करने चला गया. दिन भर का थका होने के कारण लेटते ही उसे नींद आ गई. रात के लगभग 1 बजे उस की आंख खुली तो उठ कर वह मां के कमरे में गया. मां वहां नहीं थी. समय देखा, रात के सवा बज रहे थे. वह बड़बड़ाया, ‘मां अभी तक नहीं आई?’

बलराम को चिंता हुई. उस के मन में बुरे विचार आने लगे. उस की चिंता यह थी कि पिताजी की तरह कहीं मां भी तो उसे छोड़ कर नहीं चली गईं?

पंजाब के जिला खन्ना के थाना जुलकां का एक गांव है मलकपुर कंबोआ. इसी गांव में लाल सिंह अपने परिवार के साथ रहता था. उस के परिवार में पत्नी शकुंतला के अलावा 2 बेटे और एक बेटी थी.

बड़ा बेटा सोहनलाल खेती करने के अलावा दूसरे राज्यों में जा कर कंबाइन मशीन से फसल काटने का काम करता था. उस से छोटी सोनिया थी, जो दसवीं तक पढ़ाई कर के अब घर में रहती थी. सब से छोटा बलराम बारहवीं पास कर के नौकरी की तलाश में था.

लाल सिंह के पास जो जमीन थी, उसी में मेहनत कर के जैसेतैसे तीनों बच्चों को पालापोसा और पढ़ायालिखाया था. बड़ा बेटा सोहन काम करने लगा तो उन्हें थोड़ी राहत मिली. अचानक न जाने ऐसा क्या हुआ कि लाल सिंह के ऊपर काफी कर्ज हो गया, जिस की वजह से उन्हें अपनी कुछ जमीन बेचनी पड़ी.

जमीन बेचने के बाद लाल सिंह गुमसुम रहने लगे. वह ना किसी से बात करते थे और ना किसी मामले में दखलंदाजी करते थे. ऐसे में ही एक दिन वह बिना किसी को कुछ बताए घर से निकले तो लौट कर नहीं आए. यह 5 साल पहले की बात है.

शकुंतला पति के इंतजार में दरवाजे की ओर टकटकी बांधे देखती रहती थी. उस दिन मां के कीर्तन से न लौटने पर बलराम चिंतित हो उठा. उस ने बहन को जगा कर कहा, ‘‘दीदी उठो, अभी तक मां लौट कर नहीं आई है.’’

‘‘क्या कहा, मां अभी तक लौट कर नहीं आई है?’’

‘‘हां दीदी, रात के 2 बज रहे हैं. इस समय कौन सा मंदिर खुला होगा, जो मां कीर्तन कर रही हैं?’’ रुआंसा हो कर बलराम बोला.

सोनिया घबरा कर उठी. उस ने चिंतित हो कर कहा, ‘‘बल्लू, इस समय हम मां को ढूंढने कहां चलेंगे?’’

बात सही भी थी. उस समय रात के 2 बज रहे थे. उतनी रात को वे कहां जाते. लेकिन मां के बारे में पता तो करना ही था. भाईबहन हिम्मत कर के घर से बाहर निकले. पूरे गांव में सन्नाटा पसरा था, सिर्फ कुत्ते भौंक रहे थे. दोनों मंदिर तक गए. वहां घुप्प अंधेरा था. गांव की हर गली में चक्कर लगाया कि शायद किसी के घर कथाकीर्तन हो रही हो, लेकिन गांव में ऐसा कुछ भी आयोजन नहीं था.

सवेरा होने पर बलराम ने मंदिर जा कर पूछा तो पता चला कि शकुंतला तो कल मंदिर आई ही नहीं थी. थोड़ी ही देर में शकुंतला के गायब होने की बात पूरे गांव में फैल गई. हर कोई अफसोस जता रहा था कि 5 साल पहले बच्चों का बाप गायब हो गया और अब मां गायब हो गई. गांव के कुछ लोग भी शकुंतला की तलाश में लग गए.

बलराम ने बड़े भाई सोहन को भी फोन कर के मां के गायब होने की बात बता दी. उस समय वह मध्य प्रदेश में कंबाइन मशीन ले कर फसल की कटाई कर रहा था. छोटे भाई को सांत्वना दे कर उस ने कहा कि वह तुरंत आ रहा है. अगले दिन दोपहर बाद सोहन घर पहुंचा तो कुछ रिश्तेदार एवं गांव वालों के साथ थाना जुलकां जा कर मां की गुमशुदगी दर्ज करा दी.

शकुंतला का फोटो ले कर पुलिस ने इश्तेहार शोरेगोगा छपवा कर सभी थानों, बसअड्डों, रेलवे स्टेशनों तथा प्रमुख स्थानों पर लगवा दिए, साथ ही वायरलैस द्वारा उस का हुलिया भी प्रसारित करवा दिया.

दिन, सप्ताह, महीने बीतने लगे, शकुंतला का कुछ पता नहीं चला. धीरेधीरे साल बीत गया. उस की गुमशुदगी के रहस्य से परदा नहीं उठ सका. सोनिया और सोहन ने तो संतोष कर लिया, पर बलराम, जो मां का चहेता भी था, वह मां के गायब होने के रहस्य को जानना चाहता था. इसलिए मार्च, 2016 में उस ने मां की गुमशुदगी की एक चिट्ठी लिखी और खन्ना जा कर एसपी (डी) जसकरण सिंह तेजा से मिला. उन से उस ने हाथ जोड़ कहा, ‘‘सर, मेरी मां को ढुंढवा दीजिए.’’

जसकरण सिंह तेजा ने बलराम के निवेदन को गंभीरता से लिया और डीएसपी (देहात) हरविंदर सिंह विर्क और डीएसपी (सिटी) हरवंत कौर को बलराम द्वारा दी गई चिट्टी दे कर सख्त आदेश दिया कि जल्द से जल्द वे इस मामले का खुलासा करें.

हरविंदर सिंह और हरवंत कौर ने शकुंतला का पता लगाने के लिए थाना जुलकां के थानाप्रभारी इंसपेक्टर रणवीर सिंह को नियुक्त किया. उन की मदद के लिए इंसपेक्टर जगजीत सिंह को लगा दिया गया.

शकुंतला की गुमशुदगी की फाइल को निकाल कर फिर से जांच शुरू हुई. पुलिस अधिकारियों ने अपने मुखबिरों को भी शकुंतला की गुमशुदगी का रहस्य पता करने को लगा दिया.

शकुंतला के दोनों बेटों, बेटी तथा रिश्तेदारों से भी पूछताछ की गई. सोहन उन दिनों मध्य प्रदेश में था. उस से छोटा बलराम इंटरव्यू देने चंडीगढ़ गया था. सिर्फ बेटी सोनिया ही घर में थी. पूछताछ में पुलिस ने देखा कि सोनिया बारबार बयान बदल रही है.

रणवीर सिंह ने यह बात डीएसपी हरवंत कौर को बताई तो उन्होंने कहा कि वह अपने मुखबिर सोनिया पर नजर रखने के लिए लगा दें, साथ ही उस के बारे में पता करें.

मुखबिरों से पुलिस को पता चला कि सोनिया के गांव के ही कुलविंदर से प्रेमसंबंध थे. जब से पुलिस दोबारा इस मामले की जांच कर रही है, तब से वह काफी बेचैन और परेशान रहती है. अकसर वह गांव से बाहर खेतों में कुलविंदर से सलाहमशविरा करती दिखाई देती है.

रणवीर सिंह और जगजीत सिंह ने समय न गंवाते हुए एएसआई सुरजीत सिंह से कहा कि वह शकुंतला के घर जा कर उस के बेटों सोहन, बलराम और बेटी सोनिया तथा नजदीकी रिश्तेदारों को थाने ले आएं. अगर वे थाने आने की वजह पूछें तो उन्हें बता देना कि शकुंतला का पता चल गया है. सुरजीत सभी को थाने ले आए. जैसा रणवीर सिंह ने सोचा था वैसा ही था.

सोनिया के चेहरे का रंग उड़ा हुआ था. उस के पैर कांप रहे थे. उन्होंने बड़े नाटकीय ढंग से कहा, ‘‘सोहन सिंह, तुम्हारी मां का पता चल गया है. यह मेरे अलावा तुम्हारी बहन सोनिया को भी पता है कि तुम्हारी मां कहां है? इसलिए तुम उस से पूछ लो कि वह कहां हैं, वरना मैं तो तुम्हारी मां से तुम्हें मिलवा ही दूंगा.’’

रणवीर की इस बात पर सोहन सिंह ने हैरानी से बहन की ओर देखा. वह खुद हैरानी से रणवीर सिंह को देख रही थी. उस का चेहरा एकदम सफेद पड़ा हुआ था. टांगें पहले से ज्यादा कांप रही थीं. सोहन सिंह ने जब उस से पूछा कि क्या वह जानती है कि मां कहां हैं तो वह कांपती आवाज में बोली, ‘‘नहीं भैया, मुझे नहीं पता कि मां कहां है.’’

‘‘बताओ न तुम्हारी मां कहां है?’’ रणवीर सिंह ने डांट कर कहा तो सोनिया ने सिर झुका लिया. उस के दोनों भाई और साथ आए रिश्तेदार उसे हैरानी से देख रहे थे.

उन की समझ में नहीं आ रहा था कि जब सोनिया को मां के बारे में पता था तो उस ने अब तक बताया क्यों नहीं. रणवीर सिंह ने जब दोबारा डांट कर पूछा तो उस ने रोते हुए अपनी मां की लगभग 11 महीने की गुमशुदगी के रहस्य से परदा उठाते हुए कहा कि उस ने अपने प्रेमी कुलविंदर के साथ मिल कर उस की हत्या कर दी है.

इस के बाद उस ने शकुंतला की गुमशुदगी के पीछे की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

सोनिया और कुलविंदर कभी साथसाथ पढ़ा करते थे. दसवीं पास कर के सोनिया ने पढ़ाई छोड़ दी तो दोनों अलग हो गए. सालों बाद युवा होने पर जब उन की मुलाकात हुई तो बचपन की यादें ताजा हो उठीं. युवा होने पर उन के शरीरों में जो बदलाव आया था, वह काफी आकर्षक था.

दोनों ही खूबसूरत तो थे ही, कुलविंदर का कसरती बदन काफी लुभावना था, जिस से दोनों ही एकदूसरे के आकर्षण में बंधते गए. परिणामस्वरूप दोनों गांव के बाहर खेतों में मिलने लगे. जब इस बात की जानकारी शकुंतला को हुई तो वह परेशान हो उठी.

उस ने कुलविंदर को देखा था. वैसे तो उस में कोई कमी नहीं थी, लेकिन वह नशा करता था. इस के अलावा वह दूसरी जाति का भी था, यही वजहें थीं कि शकुंतला ने बेटी को मर्यादा में रहने को कहा.

जबकि सोनिया पर तो कुलविंदर के प्यार का ऐसा नशा चढ़ा था कि उस ने मां की एक नहीं सुनी, बल्कि वह खुश थी कि मां को उस के और कुलविंदर के प्यार के बारे में पता चल गया था.

इस के बाद वह कुलविंदर को घर बुलाने लगी. अगर शकुंतला कुछ कहती तो वह कुलविंदर को ले कर अपने कमरे में चली जाती. गायब होने से 2 दिन पहले 3 जून, 2015 को शकुंतला गांव में किसी के यहां गई थी. मां के जाते ही सोनिया ने कुलविंदर को बुला लिया था.

अचानक शकुंतला आ गई और उस ने सोनिया और कुलविंदर को आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया. कुलविंदर तो डर के मारे भाग गया, बेटी को शकुंतला ने खूब खरीखोटी सुनाई. चुप रहने के बजाय सोनिया विद्रोह कर बैठी. उस ने मां को धमकाते हुए कहा, ‘‘सुन मां, अगर मेरे और कुलविंदर के बीच कोई आया तो मैं उसे छोड़ूंगी नहीं.’’

फिर उसी दिन शाम को सोनिया ने कुलविंदर के साथ मिल कर मां को ठिकाने लगाने की योजना बना डाली. उस ने यह योजना कुलविंदर को समझा दी. 5 जून को सोनिया ने दोपहर को खाना बनाया और मां के खाने में नींद की गोलियां मिला दीं. खाना खाने के कुछ देर बाद ही शकुंतला गहरी नींद में सो गई थी. सोनिया ने मां को हिलाडुला कर देखा. जब देखा कि मां होश खो बैठी है तो उस ने फोन कर के कुलविंदर को बुला लिया. कुलविंदर के आने पर सोनिया ने उसे फावड़ा दे कर आंगन में गड्ढा खोदवाया और शकुंतला की गला दबा कर हत्या कर दी.

इस के बाद लाश को उसी गड्ढे में डाल कर मिट्टी भर दी. ऊपर से गोबर का लेप लगा दिया, ताकि किसी को संदेह न हो. सारे काम निपटा कर दोनों ने शकुंतला के कमरे में उसी के बिस्तर पर इच्छा पूरी की. इस के बाद क्या हुआ आप पढ़ ही चुके हैं. सोनिया के अपराध स्वीकार करने के बाद शकुंतला की गुमशुदगी को हत्या में तब्दील कर सोनिया और कुलविंदर को दोषी बनाया गया.

सोनिया की निशानदेही पर मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट बहादुर सिंह, एसपी (डी) जसकरण सिंह तेजा, डीएसपी (देहात) हरविंदर सिंह विर्क, डीएसपी (सिटी) हरवंत कौर, थाना जुलकां के प्रभारी रणवीर सिंह एवं जगजीत सिंह, सोहन, बलराम और गांव के सरपंच की मौजूदगी में आंगन में गड्ढा खोद कर शकुंतला की लाश बरामद की गई, जो कंकाल बन चुकी थी.

लाश का पंचनामा तैयार कर फौरैंसिक लैब भेजा गया. इस के बाद सोनिया को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया. चूंकि कुलविंदर फरार हो चुका था, इसलिए रिमांड खत्म होने पर सोनिया को पुन: अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. पुलिस कुलविंदर की तलाश कर रही है.

– हरमिंदर खोजी

‘मैं’ फ्रैंड से कैसे निपटें

हम सब के फ्रैंड सर्कल में ऐसे फ्रैंड जरूर होते हैं जो हमेशा अपनी तारीफ करते रहते हैं जैसे ‘मेरा फोन सब से अच्छा है, इस में सैल्फी तुम सब के फोन से ज्यादा अच्छी आती है. मेरे पास भी एकदम ऐसी ही ड्रैस है, तुहारी थोड़ी सस्ती क्वालिटी की है लेकिन मैं ने तो काफी मंहगी खरीदी थी, ये तो कुछ भी नहीं है मैं बनाऊंगी तो उंगलियां चाटते रह जाओगे, तुम कह रहे हो इसलिए मैं कर रही हूं वरना तो मैं कभी नहीं करती.’ कोई उन की बात सुने चाहे न सुने लेकिन  वे अपनी बात जरूर कहते हैं. अवसर कोई सा भी हो, पर वे अपने किस्से सुनाना बंद नहीं करते. कई बार तो ऐसा भी होता है कि उन्हें आते देख सब इधरउधर चले जाते हैं कि कौन इस की बात सुन कर बोर हो.

क्या करते हैं ऐसे फ्रैंड

दरअसल हम ऐसे फ्रैंड को ‘मैं’ फ्रैंड कह सकते हैं. सामने वाले की चीज कितनी भी अच्छी क्यों न हो ये उस की तारीफ करने के बजाय अपनी ही तारीफ करते हैं. इन्हें लगता है कि इन के पास जो है वही अच्छा है, वे जो करते हैं, जो सोचते हैं वही सही है. उन का जो करने का मन करता है बाकि लोग भी वही करें. अगर उन के अनुसार नहीं किया जाता तो उस में अपना 100 प्रतिशत नहीं देते, बस कमी निकालते रहते हें. जब उन्हें कोई जरूरी बात बता भी रहा होता है तो सुनते नहीं हैं बीच में ही टोकते रहते हैं.

‘मैं’ फ्रैंड बनना नुकसानदायक

भले ही आप अपने फ्रैंड सर्कल में अपनी बात मनवा कर खुद को श्रेष्ठ महसूस करते होंगे लेकिन ‘मैं’ फ्रैंड बनने के नुकसान भी हैं. आप के फ्रैंड्स आप से बातें शेयर नहीं करते. उन्हें लगता है इस से शेयर कर के क्या फायदा. अगर मैं इस से कुछ कहुंगा तो भी ये सौल्यूशन देने के बजाय अपनी ही तारीफ करेगा. इसलिए वे दूरी बनाने लगते हैं. कुछ कहने के बजाय चुप रहते हैं. आप के साथ समय बिताना पसंद नहीं करते. पार्टी में बुलाने से पहले सोचते हैं कि बुलाऊं या नहीं, मस्ती तो होगी नहीं. बस बोलबोल के बोर करेगा.

अगर आप के सर्कल में भी कोई ‘मैं’ फ्रैंड है तो क्या करें

कटे नहीं फेस करें : अकसर ‘मैं’ फ्रैंड को जानने के बाद हम उस से कटने लगते हैं, उस से अलग रहने की कोशिश करने लगते हैं, सोचते हैं क्यों बोल कर अपना मूड खराब करें. इस से बात करना यानी सिरदर्दी. ऐसा करना गलत है ऐसा कर के आप अपने लिए एक सुरक्षित दायरा बनाने लगते हैं और आप को इस तरह की पर्सनलिटी के साथ एडजस्ट करने में प्रौब्लम होने लगती है इसलिए कटने के बजाय डील करना सीखें. अपने ‘मैं’ फ्रैंड के सामने अपनी बात रखिए. भले ही वे आप की बात को बारबार काटे लेकिन अपनी बात पूरी करें.

पहली ‘मैं’ में सहमति जताएं लेकिन दूसरी में नहीं : अगर आप कहीं बाहर घूमने गए हैं और आप के साथ ‘मैं’ फ्रैंड भी है तो मुह न बनाते रहें कि इसे क्यों साथ ले कर आए हो बल्कि धैर्य से काम लें. किसी बात पर रिएक्ट न करें. अगर वह कहे कि मुझे ये नहीं खाना, मैं यह नहीं खाता तो उस से कहें कि पिछली बार हम ने तुहारी पसंद की डिश खाई थी, इस बार तुम हमारी पसंद की डिश खाओ.

कभीकभी नजरअंदाज करना भी है सही रास्ता : कभीकभी आप अपने ‘मैं’ फ्रैंड की बातों को अनसुना भी करें. वह कुछ कहे तो ऐसे बिहेव करें जैसे कि आप ने कुछ सुना ही नहीं ताकि धीरेधीरे उसे समझ आए कि आप उस की बातों में रूचि नहीं दिखा रहे हैं और वह खुद को बदलने का प्रयास करे.

ग्रुप में न समझाएं : आप अपने ‘मैं’ फ्रैंड से परेशान हैं इस का मतलब यह नहीं है कि आप ग्रुप बना कर समझाएं या ग्रुप में सब के सामने कहें, बल्कि अकेले में मौका देख कर कहें क्योंकि किसी को भी यह अच्छा नहीं लगेगा कि सब के सामने कोई इस तरह से कहे. जरा सोचिए आप के साथ कोई ऐसा करेगा तो आप को कैसा लगेगा, इसलिए अकेले समझाएं.

खुद से पहल कर के बताएं : हम अपने फ्रैंड को उस की कमियों व खराब आदतों के बारे में नहीं बताते, क्योंकि हमें लगता है कि अगर हम बताएंगे तो उसे बुरा लगेगा और हमारी दोस्ती में दरार आ जाएगी. लेकिन इन बातों को सोचने के बजाए पहल कर के अपने फ्रैंड को बताएं ताकि वे इन आदतों को सुधार सके.

मानव श्रृंखला पर एनडीए में फूट

बिहार में शराबबंदी के समर्थन में 21 जनवरी को दुनिया की सबसे बड़ी मानव श्रृंखला बनाने को लेकर राज्य की सियासी दलों के नानुकुर के बाद सभी झक मार कर नीतीश कुमार के साथ हो गए है. वहीं एनडीए के घटक दल हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा के मुखिया जीतनराम मांझी ने मानव श्रृखंला में शांमिल नहीं होने का ऐलान कर भाजना के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. गौरतलब है कि बिहार सरकार द्वारा आयेजित मानव श्रृखंला में भाजपा ने भी शामिल होने का ऐलान कर दिया है.

जीतनराम मांझी ने शराबबंदी को तालिबानी कानून करार देते हुए मानव श्रृंखला से खुद को अलग कर लिया है. मांझी ने बताया कि शराबबंदी कानून की तरह ही मानव श्रृंखला बनाने के नीतीश कुमार का फरामन तालिबानी फरमान की तरह है. शराबबंदी कानून की वजह से करीब 20 हजार लोग जेलों में बंद हैं, जिसमें से 90 फीसदी गरीब लोग हैं. उन्हें पुलिस ने जबरन कानून में फंसा कर जेल में ठूंस रखा है. शराबबंदी कानून की ओट में गरीबों को परेशान किया जा रहा है.

12 हजार 292 किलोमीटर लंबी इस मानव श्रृंखला में 2 करोड़ लोग शांमिल होंगे. इसरो की मदद से सेटेलाइटों के जरिए मानव श्रृंखला की तस्वरें ली जाएंगी. ड्रोन कैमरों से भी तस्वीरें लेने का इंतजाम किया गया है. 21 जनवरी को दोपहर सवा 12 बजे से लेकर एक बजे तक यानि 45 मिनट तक के लिए मानव श्रृंखला बनेगी. उस दौरान सड़कों पर गाड़ियों का चलना बंद रहेगा. इमर्जेंसी गाड़ियों को इससे मुक्त रखा गया है. मानव श्रृंखला में राज्य सरकार के सभी विभागों के अफसर, मुलाजिम, ठेके पर काम करने वाले कर्मचारी, स्कूलों और कौलेजों के शिक्षक, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता समेत गैर सरकारी कर्मचारी शामिल होंगे. पटना के जिलाधीश संजय अग्रवाल ने बताया कि मानव श्रृंखला का सेंटर पटना का गांधी मैदान होगा और वहीं से मानव श्रृंखलाओं की टहनियां निकल कर राज्य की सीमाओं तक जाएगी.

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय ने 9 जनवरी को कहा कि भाजपा भी शराबबंदी की पक्षधर रही है, इसलिए वह भी मानव श्रृंखला में भाग लेने के लिए कमर कस चुकी है. यह एक जन जागरूकता कार्यक्रम है, इससे लोगों के बीच शराबबंदी के बेहतर नतीजों को संदेश जाएगा. गौरतलब है कि पिछले 5 जनवरी को प्रकाश पर्व में हिस्सा लेने पटना पहुंचे प्रधनमंत्री नरेंद्र मोदी खुल कर नीतीश के शराबबंदी के फैसले को सामाजिक  सुधर की दिशा में ठोस कदम करार दे चुके हैं.

राजद सुप्रीमो लालू यादव मानव श्रृंखला का समर्थन करने को लेकर पहले उहापोह की स्थिति में थे, पर उन्होंने ने भी उसमें शामिल होने के लिए अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को तैयार रहने के लिए कहा है. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने मानव श्रृंखला में भाजपा के शामिल होने के फैसले का स्वागत करते हुए कहते हैं कि यह महागठबंधन की जीत है कि सारे विरोधी दल शरबबंदी के मसले पर एक हो रहे हैं.

इससे पहले 11 दिसंबर 2004 को बंगलादेश के तेनकान से लेकर तेंतुलिया तक 1050 किलोमीटर लंबी मानव श्रृंखला बनाई गई थी. उसमें 50 लाख लोगों ने हिस्सा लिया था. 2 अक्टूबर 2009 को केरल के सीपीएम पार्टी की अगुवाई में 40 लाख लोगों ने मिल कर मानव श्रृंखला बनाई थी. 

आज से ही संवारें बच्चों का कल

मातापिता हमेशा अपने बच्चों का भला चाहते हैं. उन की अच्छी शिक्षा, बेहतरीन शादी और सुरक्षित भविष्य की कामना करते हैं. लेकिन जिंदगी में सभी उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए पैसे की जरूरत होती है. प्रतिष्ठित संस्थानों में स्कूलिंग, इंजीनियरिंग अथवा एमबीए करने में लाखों रुपए लगते हैं. यदि समय रहते आप ने अपने बच्चों के भविष्य के लिए बचत नहीं की, निवेश की योजना नहीं बनाई तो आप पर सेवानिवृत्ति के लिए जमा की गई संपत्ति के खत्म होने अथवा कर्ज के बोझ तले दबने का दबाव आ जाता है.

सवाल यह भी उठता है कि क्या आप के द्वारा की गई बचत पर्याप्त है? क्या उन से आप अपने बच्चे के भविष्य के लिए देखे गए सपनों को पूरा कर सकेंगे? कड़वी सचाई है कि अगर आप उचित निवेश मार्गों में अपने बच्चों के लिए सही समय पर निवेश करना प्रारंभ नहीं करते तो उन की भविष्य की आकांक्षाओं पर खतरा मंडराता रहेगा.

जल्द से जल्द शुरुआत करें

बच्चों के भविष्य के लिए निवेश की शुरुआत करने से पूर्व सब से पहले बच्चे की शिक्षा या शादी की अनुमानित लागत निकालें और निश्चित समयसीमा में वित्तीय लक्ष्यों को पंक्तिबद्ध करें. बढ़ती मुद्रास्फीति आप के लक्ष्य के लिए तय किए गए रिटर्न को प्रभावित कर सकती है. उदाहरण के लिए, किसी मशहूर इंजीनियरिंग कालेज में आज शिक्षा का खर्च 5 लाख रुपए सालाना है तो यह 10 वर्ष बाद भी इतना ही नहीं रहेगा. जितनी जल्दी आप शुरुआत करेंगे, आप को पैसा जमा करने का उतना ही अधिक समय मिलेगा और आप कंपाउंडिंग ब्याज की ताकत से लाभान्वित होंगे.

यदि आप 5-10 वर्ष की समयसीमा के साथ निवेश करते हैं तो बच्चों के लिए निवेश का व्यापक हिस्सा इक्विटी में लगाना बेहतर रहता है. छोटी अवधि के दौरान इक्विटीज में अस्थिरता हो सकती है लेकिन दीर्घकालिक अवधि में इन में अन्य परिसंपत्ति वर्गों को पछाड़ने और सर्वोत्कृष्ट रिटर्न प्रदान करने का दमखम रहता है.

सही इंस्ट्रूमैंट का चयन करें

दीर्घकालिक वित्तीय लक्ष्यों की पूर्ति के लिए पोर्टफोलियो में इक्विटी का होना आवश्यक है लेकिन बिना किसी जानकारी और विशेषज्ञता के इक्विटी बाजारों में सीधे प्रवेश करना ठीक नहीं है. इसलिए म्यूचुअल फंड रूट का प्रयोग कम लागत में पेशेवर प्रबंधन का लाभ प्रदान करेगा. इस के लिए बाजार में चाइल्ड केयर म्यूचुअल फंड उतारे गए हैं. ये योजनाएं विशिष्ट रूप से आप के बच्चे की जिंदगी में बेहतर शुरुआत करने के लिए डिजाइन की गई है, जिन में इक्विटी और डेट बाजारों के अवसरों और गतिशीलता का लाभ उठाया जा सकता है.

ऐसे फंड ग्रोथ अवसरों का लाभ उठाने के लिए इक्विटी और इक्विटी संबंधित सिक्युरिटीज में 65 प्रतिशत से अधिक रकम का निवेश करते हैं. शेष राशि आप के निवेश को स्थिरता प्रदान करने के लिए सामान्य तौर पर डेट सिक्युरिटीज में लगाई जाती है. 65 प्रतिशत से अधिक इक्विटी में निवेश और बेहतर रिटर्न की पेशकश के अलावा ये फंड कराधान दक्षता भी सुनिश्चित करते हैं. इन फंडों में 1 वर्ष से अधिक किए गए निवेश पर पूंजीगत लाभ कर नहीं लगता.

उचित परिसंपत्ति का संचयन करें

ये म्यूचुअल फंड प्लान अग्रैसिव के साथसाथ कंजर्वेटिव वैरिएंट में उतारे गए हैं. आप निवेश सीमा के आधार पर इन का चयन कर सकते हैं. यदि आप जल्दी निवेश प्रारंभ करते हैं यानी जब आप का बच्चा किसी खास उपलब्धि से काफी दूर है, तो अग्रैसिव चाइल्ड केयर योजनाओं में निवेश करें. इन योजनाओं में इक्विटीज में अधिक संपदा संचयन किया जाता है. लेकिन यदि आप अपने बच्चे के वित्तीय लक्ष्य के करीब हैं तो स्थिरता प्राप्त करने के लिए कंजर्वेटिव योजनाओं का विकल्प अपनाना बेहतर रहेगा.

कुल मिला कर, बच्चों के लिए निवेश करने के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है. इस के अंतर्गत बच्चे के निर्माणात्मक वर्षों में इक्विटी में अधिक एक्सपोजर होना चाहिए तथा बाद की अवस्था में डेट फंडों में निवेश बढ़ाना चाहिए.    

विक्ट्री पोज में सेल्फी लेना पड़ सकता है आप पर भारी

फिंगरप्रिंट सेंसर न सिर्फ आपके फोन को सुरक्षित रखता है बल्कि यह उसे तुरंत अनलॉक भी करता है. सिर्फ एक खास पोज (V फॉर विक्ट्री का) में सेल्फी लेकर इसे सार्वजनिक करने की वजह से यही फिंगरप्रिंट स्कैनर आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है.

खुशी के पल या जीत को सेलिब्रेट करने के लिए लोग इस पोज में तस्वीरें खिंचवाते हैं. लेकिन, आपको पता होना चाहिए कि यह कभी-कभार बेहद खतरनाक साबित हो सकता है. जी हां, इसके जरिए आपके मोबाइल में सुरक्षित रखे फोटोज, विडियोज और पर्सनल इन्फर्मेशंस चोरी हो सकते हैं.

जापान के नैशनल इंस्टिट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेटिक्स के रिसर्च में यह बात सामने आई है. रिसर्च के अनुसार, दो उंगलियां दिखाकर विक्ट्री पोज वाली सेल्फी को ऑनलाइन पोस्ट करना आपके लिए परेशानी का सबब बन सकता है.

रिसर्च के मुताबिक हाई क्वालिटी वाले कैमरे से लिए गए फोटो को सोशल मीडिया साइट पर डालने से निजी जानकारी लीक होने का खतरा बढ़ रहा है. विक्ट्री पोज में डिजिटल कैमरे से लिए गए इन फोटो से आपके फिंगरप्रिंट को आसानी से कॉपी किया जा सकता है. आपके उंगलियों के निशान चोरी कर आपके फोन से पर्सनल डेटा चुराए जा सकते हैं.

अब सवाल यह है कि इसका उपाय क्या है? आखिर ऐसा क्या किया जाए कि इस पोज में तस्वीर भी ली जा सके और इसका गलत इस्तेमाल भी न हो. इसका फिलहाल तो कोई उपाय नहीं, लेकिन नैशनल इंस्टिट्यूट स्पेशल टाइटेनियम ऑक्साइड का इस्तेमाल करके एक ट्रांसपैरंट फिल्म बना रहा है जिससे आपकी उंगलियों के निशान छिप जाएंगे. लेकिन इसके लिए भी आपको कम-से-कम दो साल इंतजार करना होगा.

क्या आपका भी स्मार्टफोन हो गया है स्लो!

ज्यादातर लोग एंड्रॉयड स्मार्टफोन इस्तेमाल करते हैं. एंड्रॉयड स्मार्टफोन के हैंग होने या फिर धीरे काम करने की वजह हमेशा ही बनी रहती है. जाहिर है कि आपके साथ भी यह परेशानी आई होगी. कुछ टिप्स अपनाकर आप इस परेशानी से निजात पा सकते हैं. जी हां, इन टिप्स के जरिए आपका एंड्रॉयड स्मार्टफोन सुपरफास्ट बन जाएगा.

ब्राउजर बदलें

एंड्रॉयड स्मार्टफोन में गूगल क्रोम ब्राउजर डिफॉल्ट होता है. ये काफी हेवी ब्राउजर होता है. इस वजह से फोन की बैटरी और परफॉर्मेंस पर असर पड़ता है. इसके लिए आप ऑपेरा ब्राउजर का इस्तेमाल कर सकते हैं.

होम स्क्रीन क्लीन रखें

अगर आपका फोन धीरे काम कर रहा है, तो इसके लिए पहला स्टेप ये हो सकता है कि आप अपनी होम स्क्रीन को क्लीयर कर दें. इससे फोन की परफॉर्मेंस बढ़ जाएगी. होम स्क्रीन से लाइव वॉलपेपर और विजेट्स हटा दें.

बेकार एप्स हटा दें

हमारे फोन में कई ऐसी एप्स होती हैं, जो आपके फोन की परफॉर्मेंस पर असर डालती हैं. इन एप्स का आपके फोन में कोई काम नहीं होता और शायद न ही आप इन्हें इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में इन्हें फोन से डिलीट करना बेहतर ऑप्शन है. इससे आपके फोन की स्पीड 15 फीसदी तक बढ़ जाएगी.

एंटी वायरस सॉफ्टवेयर हटा दें

अगर आपके फोन में कोई एंटीवायरस प्रोग्राम है तो इनसे आपका फोन स्लो हो सकता है. ऐसे में इस एप को डिलीट कर दें.

एप्स की ऑटो सीकिंग को बंद कर दें

सोशल मीडिया एप्स, वेदर एप्स तथा कई ऐसे एप्सी जो रिमोट सर्वर से कनेक्ट होकर ऑटो सिंक होते हैं. उनसे भी फोन की परफॉर्मेंस कम होती है. ऐसे एप्स हर 15 मिनट में अपडेट होते हैं.

नियमित रूप से रिबूट करते रहिए

फोन को कुछ दिनों के भीतर रीबूट करता रहना चाहिए. इससे फोन की परफॉर्मेंस ठीक रहती है.

मैं एक युवती से पिछले 2 साल से प्यार करता हूं. मैं उसे कैसे प्रपोज करूं.

सवाल

मैं एक युवती से पिछले 2 साल से प्यार करता हूं, लेकिन मेरा प्यार एकतरफा है, क्योंकि हम सिर्फ दोस्त की तरह बात करते हैं. मैं ने अभी तक उसे अपने दिल की बात नहीं बताई. मैं उसे कैसे प्रपोज करूं?

जवाब

आप की दोस्ती 2 साल पुरानी है, तो आप यह समझते ही होंगे कि उस का मिजाज कैसा है, उस की पसंद क्या है. उस का जन्मदिन आदि भी आप को पता होगा. तो बस, सही मूड देख कर उस की पसंद का उसे कुछ खिलाएं या दें. उन के जन्मदिन को सैलिब्रेट करें और इसी दौरान अपने दिल की बात भी उसे बताएं. इस के अलावा आजकल व्हाट्सऐप, फेसबुक जैसे साधन भी हैं, जो मन की बात उस तक पहुंचा सकते हैं. नहीं तो मिलते रहिए और बातोंबातों में प्यार हो जाने का इंतजार कीजिए.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

अब इंटरनेट आपको जगाएगा नहीं, सुलाएगा

अब तक इंटरनेट सिर्फ आपकी रात की नींद खराब करता था. पर अगर अब आपको रात को नींद न आये, तो इंटरनेट आपकी सहायता करेगा. इंटरनेट पर इंसान की सभी समस्याओं का हल मौजूद है, यह तो हम सब जानते हैं. जो लोग नींद न आने की बीमारी से परेशान हैं, उनके लिए भी इंटरनेट बहुत फायदेमंद साबित हो सकता है. एक स्टडी से खुलासा हुआ है कि अनिद्रा से पीड़ित लोग दवा पर पैसा खर्च किए बगैर अच्छी नींद सो सकते हैं.

बीहेल्थ सल्यूशंस नाम की एक कंपनी ने इंटरनेट आधारित एक प्रोग्राम विकसित किया है, जिसका नाम (स्लीप हेल्थी यूजिंग दी इंटरनेट) या SHUTi (शुति) है. कंपनी के पार्टनर और स्टडी के प्रमुख रिसर्च रिटरबैंड ने बताया, 'जिनलोगों ने इस प्रोग्राम में हिस्सा लिया, उनको नींद न आने की समस्या को दूर करने में काफी मदद मिली.'

6 हफ्ते के इस प्रोग्राम में पहले ऐसे 300 एडल्ट को शामिल किया गया, जो बुरी तरह अनिद्रा की समस्या का शिकार थे. उनके प्रोग्राम में हिस्सा लेने के 9 हफ्ते बाद प्रोग्राम के असर का आकलन किया गया. 1 साल बाद शुति में भाग लेने वाले 10 में से 7 लोगों के सोने के पैटर्न में बड़ा बदलाव आया और 57 फीसदी लोगों की अनिद्रा की समस्या पूरी तरह खत्म हो गई. इस प्रोग्राम में कॉग्निटिव बिहेवियर थेरपी का इस्तेमाल किया गया.

क्या है कॉग्निटिव बिहेवियर थेरपी?

कॉग्निटिव बिहेवियर थेरपी (सीबीटी) में एक इंसान के विचार, भावना और व्यवहार में सुधार लाया जाता है. सीबीटी के दौरान एक थेरपिस्ट सक्रिय रूप से मरीज के सोच, व्यवहार और अहसास के पैटर्न में क्या अस्वस्थ तरीका है, उसका पता लगाता है. उसके बाद थेरपिस्ट उस चीज को दूर करने की दिशा में काम करता है. लेकिन सीबीटी के लिए पर्याप्त संख्या में थेरपिस्ट के मौजूद न होने और इसे ज्यादा महंगा उपचार होने के कारण लोग सीबीटी की मदद नहीं ले पाते हैं.

शुति प्रोग्राम में इस बात को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट पर ही बगैर किसी मदद के सीबीटी की सुविधा मुहैया करा दी गई है यानी मरीज को अलग से थेरपिस्ट की जरूरत नहीं पड़ेगी. इंटरनेट की मदद से समझ सकता है कि उनके साथ क्या गलत है और कैसे दूर किया जाए.

मेरे जीजाजी मुझे टच करने की कोशिश करते हैं. मेरी जांघ पर हाथ फेरते हैं. मैं क्या करूं.

सवाल

मेरे जीजाजी बहुत आशिकमिजाज हैं. पिछले दिनों वे हमारे घर आए हुए थे, तो बारबार बातचीत में मुझे टच करने की कोशिश करते रहे. एक दिन मैं स्कर्टकोटी में बैठी थी कि मेरे पास बैठ गए और बातोंबातों में हंसते हुए मेरी जांघ पर हाथ फेरने लगे, उस समय दीदी भी बाहर गई हुई थीं. मुझे यह अच्छा नहीं लगा. मैं क्या करूं?

जवाब

आप पहले तो दीदी के घर ज्यादा जाना छोड़ें. वजह पूछने पर पेरैंट्स को यह बात बता दें. जब आप वहां जाना छोड़ देंगी तो जीजाजी से भी दूरी बनेगी. इसी तरह जब वे आप के घर आएं तो उन से दूरी बना कर रहें. पेरैंट्स के साथ बैठ कर उन से बात करें, अकेले में न मिलें. कौन्फिडैंस में ले कर दीदी को भी यह बात बताएं ताकि वे भी उन पर नजर रख सकें व आप के बचाव में साथ दें. जीजाजी से अपना व्यवहार भी रिजर्व रखें.

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