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पिता-पुत्री के सहज होते रिश्ते

परिवार में पिता की भूमिका पुत्री के लिये सहज होने लगी है. पिता अब पुरानी रूढिवादी, दकियानूसी सोच और मूछों की चिंता छोड़कर पुत्री को आगे बढ़ाने के लिये पूरी तरह से प्रयास करने लगा है. यही वजह है कि आज लड़कियों को करियर बनाने के लिये पहले से अधिक अवसर मिलने लगे हैं. यही नहीं कल तक सास बहू और परिवार का ड्रामा दिखाने वाले टीवी सीरियल भी अब अपनी सोच बदल कर पिता-पुत्री के सहज होते रिश्ते की कहानियों पर बने शो दिखाने लगे हैं. स्टार प्लस के टीवी शो ‘मेरी दुर्गा’ के लीड आर्टिस्ट विकी अहूजा कहते हैं ‘समाज की सोच बदल रही है. यह बात और है कि अभी इसको व्यापक स्तर पर बदलना बाकी है. सबसे अच्छी बात यह है कि आम परिवारों में यह सोच बदल रही है. खेतों में काम करने वाले लोग तक अपनी बेटी को पढ़ाने के लिये स्कूल भेजने का प्रयास करता है.’

बेटी के लिये पिता का सहारा बहुत अहम होता है. ‘मेरी दुर्गा’ में बेटी दुर्गा की भूमिका निभा रही अनन्या अग्रवाल कहती हैं ‘केवल पिता ही नहीं बदली बेटी भी पिता को सबसे अधिक चाहने लगी है. आज समाज में डौटर डे के साथ ही साथ फादर डे मनाने का भी प्रचलन बढ़ा है. बेटियों के लिये केवल पिता ही नहीं पिता के सपने को पूरा करना भी बहुत खास हो गया है.’ मुम्बई में पली बढ़ी अनन्या हरियाणा की रहने वाली लड़की दुर्गा की भूमिका निभा रही है. कक्षा 7 में पढ़ने वाली 12 साल की अनन्या ने अपने एक्टिंग कैरियर की शुरुआत विज्ञापन फिल्मों से की थी. उस समय वह जूनियर केजी में पढती थी.

अनन्या कहती है ‘मेरे लिये स्कूल के साथ एक्टिंग करने को काम बहुत मेहनत का नहीं लगता. मैं बड़ी आसानी से अपने काम को कर लेती हूं.’ अनन्या की मां रिंकू अग्रवाल गृहणी है और पिता रजत अग्रवाल जौब में हैं. माता पिता की अकेली बेटी अनन्या कहती हैं ‘मुझे मम्मी पापा दोनो का पूरा सहयोग मिलता है. पर मम्मी मेरे साथ शूटिंग पर भी जाती है. मेरा पूरा ख्याल रखती है.’ ड्राइंग और स्वीमिंग पसंद करने वाली अनन्या कहती है ‘मै दोस्तों के बीच वैसे ही हूं जैसे आम दोस्त होते हैं. एक्टिंग और पढ़ाई के बीच जो समय बचता है उसमें खेलते हैं’ अनन्या को दूसरे बच्चों की ही तरह चाकलेट खाने में बहुत पसंद है.       

दादा बन सकते हैं बीसीसीआई अध्यक्ष लेकिन..

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली बीसीसीआई अध्यक्ष बन सकते हैं, पर गांगुली को इसमें ज्यादा रुचि नहीं है. गांगुली इस समय बंगाल क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसीडेंट हैं. उन्होंने कहा कि मैंने अभी किसी भी चीज के बारे में नहीं सोचा है. देखेंगे कि क्या करना है.

साथ ही पूर्व भारतीय कप्तान ने उन रिपोर्टों को भी खारिज कर दिया कि उन्होंने कैब के पद से इस्तीफा दे दिया है.

सिर्फ कुछ महीने के लिए गांगुली बन सकते हैं अध्यक्ष

लोढा पैनल ने साफ कर दिया है कि गांगुली को अगर बीसीसीआई या स्टेट लेवल का मेंबर बनना है तो उन्हें जून के बाद तीन साल का कंपलसरी ब्रेक लेना होगा. बीते दिनों ही लोढ़ा समिति ने प्रशासनिक सुधारों को लेकर पूछे गए सवालों पर सात बिंदू बोर्ड में से सातवां और सबसे अहम था.

यह सातवां बिंदू प्रत्यक्ष रूप से गांगुली से जुड़ा था, जिनके नाम की अध्यक्ष पद के लिए अटकलें लगाई जा रही हैं. लेकिन अगर लोढा समिति के जवाब को सही तरह से समझा जाए तो वह बीसीसीआई अध्यक्ष बन सकते हैं लेकिन सिर्फ कुछ महीने के लिए.

मीटिंग में शामिल नहीं हो सकते शिर्के

लोढ़ा पैनल ने स्पष्ट किया कि बीसीसीआई के बर्खास्त सचिव अजय शिर्के बीसीसीआई की मीटिंग में महाराष्ट्र क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से शामिल नहीं हो सकते हैं.

9 साल का होगा पूरा कार्यकाल

बीसीसीआई ने ये भी कहा कि क्रिकेट बोर्ड में पीरा कार्यकाल (स्टेट और बीसीसीआई) नौ साल का होगा न कि 18 साल का जैसा कि पहले कहा गया था.

तो इस वजह से टूटी करण जोहर और काजोल की दोस्ती

वक्त के साथ रिश्ते भी बदल जाते हैं. करण जोहर और काजोल की दोस्ती 25 साल तक चलती रही. पर अब दोनों एक दूसरे के लिए अजनबी बन चुके हैं. करण जोहर  बतौर सहायक निर्देशक फिल्म ‘‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’’ से जुड़े हुए थे, जिसमें शाहरुख खान व काजोल ने अभिनय किया था. इस फिल्म के बाद काजोल ने करण जोहर की कंपनी ‘‘धर्मा प्रोडक्शन’’ के लिए ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘माई नेम इज खान’, ‘कभी अलविदा न कहना’ व‘स्टूडेंट आफ द ईयर’ सहित कई फिल्में की. काजोल व करण जोहर के बीच ऐसी दोस्ती रही है कि काजोल अक्सर उनके आफिस पहुंच जाया करती थीं. लेकिन अब उनकी दोस्ती नहीं रही. यह खुलासा एक वेब साइट पर करण जोहर की बायोग्राफी के कुछ पन्नों के उजागर होने से हुआ है.

अपनी बायोग्राफी ‘‘ऐन अनसुटेबल ब्वाय’’ में इस बात का खुलासा खुद करण जोहर ने किया है. करण जोहर ने इस बायोग्राफी में लिखा है-‘‘काजोल से मेरे कोई रिश्ते नहीं हैं. हमारे बीच दूरियां बढ़ चुकी हैं. कुछ ऐसा हुआ है, जिसकी मैं यहां चर्चा नहीं करना चाहता. क्योंकि वह मेरे या उनके, दोनों के लिए अच्छा नहीं होगा. 25 साल की दोस्ती के बाद अब हालात यह हैं कि मैं और काजोल बात भी नहीं करते. हम सामने आने पर ‘हैलो’ कहकर आगे बढ़ जाते हैं. मेरे व उनके बीच कभी कोई समस्या नहीं रही. समस्या मेरे व उनके पति अजय देवगन के बीच है. यह कुछ ऐसा मसला है, जिसे वह जानती हैं और मैं जानता हूं. मैं इसे फैलाना नहीं चाहता. पर मैं यह भी चाहता हूं कि जो उन्होंने नहीं किया है, उसके लिए उन्हे माफी मांगनी चाहिए. मुझे लगा कि यदि वह 25 साल की दोसती को नजरंदाज कर अपने पति का साथ देना चाहती हैं, तो यह उनका अपना विशेषाधिकार है. मैं इस बात को समझता हूं. पर मै खुद को उनकी जिंदगी में कहीं नहीं पाता. कई माह हो गए, हमारे बीच बात नहीं हुई….’’

करण जोहर ने आगे लिखा है- ‘‘फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ के प्रदर्शन से पहले मेरे खिलाफ बहुत कुछ कहा गया. कहा गया कि मैं उनके पति की फिल्म ‘शिवाय’ को बर्बाद करने पर लगा हूं. पर मैं चुप रहा. मैंने यह भी नहीं कहा कि इससे मुझे तकलीफ हुई. पर जब काजोल ने इस प्रकरण पर ट्वीट किया- ‘शॉक्ड’, तो मुझे लगा कि सब कुछ खत्म हो गया. उसने इस ट्वीट से यह जाहिर कर दिया कि उसे लगता है कि मैं किसी को घूस दे सकता हूं. उसके बाद मैने अपनी मां से कह दिया कि वह काजोल से अपना रिश्ता रखना चाहती हैं या काजोल उनसे रखना चाहती हैं, तो मुझे कोई एतराज नहीं, पर मेरे लिए काजोल से दोस्ती अतीत हो गया. कितनी अजीब बात है कि 25 वर्ष तक उसको लेकर मेरी जो भावनाएं थी, उसके उसने टुकडे टुकडे कर दिए….’’

करण ने आगे लिखा है-‘‘मैं उनके पति को लेकर कुछ नहीं कहना चाहता. क्योंकि वह मेरी जिंदगी में कोई अहमियत नहीं रखते. कभी नहीं रखते थे. मैं अपने इतिहास और काजोल के साथ अतीत में रहे रिश्तों की कद्र करते हुए आज भी उनके पति को लेकर कुछ नहीं कहना चाहता…..मेरे कुछ करीबी आज भी काजोल से जुड़े हुए हैं. निजी स्तर पर मैं ऐसा नहीं चाहता. पर मैं उन्हें मना भी नही कर सकता. पर जब वह मेरे सामने काजोल की बात करते हैं, तो मुझे गुस्सा आता है.’’

यानी कि करण जोहर ने अपने अंदर का दर्द और गुस्सा बयां किया है. अपनी भावनाओं को उजागर किया है.

तो क्या अब करण जोहर ने सलमान खान व अक्षय कुमार के के साथ हाथ मिलाते हुए अपरोक्ष रूप से अजय देवगन के खिलाफ मोर्चा खोला है, वह उनके गुस्से की वजह से है. क्योंकि बौलीवुड में चर्चाएं हैं कि अजय देवगन सारागढ़ी पर फिल्म बना रहे हैं, जिसे मात देने के लिए करण जोहर, सलमान खान के साथ मिलकर सारागढ़ी पर ही फिल्म बना रहे हैं, जिसमें अक्षय कुमार सरदार की भूमिका में रहेंगे.

करण जोहर की बायोग्राफी बीस जनवरी को बाजार में आनी है. हर किसी की नजर उस पर है. देखना है कि तब क्या क्या सामने आता है.

जब पहली बार कर रहें हों निवेश

सही समय पर अगर सही निवेश किया जाए तो तो आपका भविष्य सुनहरा हो सकता है. यहां निवेश से जुड़े कुछ ऐसे टिप्स हैं जो भविष्य के लिए बनाई जा रही निवेश रणनीति को बेहतर बनाने में मददगार होंगे.

क्या है निवेश?

निवेश या विनियोग (investment) का सामान्य आशय ऐसे खर्चों से है जो आपकी आर्थिक स्थिती को सुधारे. निवेश शब्द का कई मिलते जुलते अर्थों में अर्थशास्त्र, वित्त तथा व्यापार-प्रबन्धन आदि क्षेत्रों में प्रयोग किया जाता है. यह पद बचत करने और उपभोग में कटौती या देरी के संदर्भ में प्रयुक्त होता है. एक व्यक्ति कई तरह से निवेश कर सकता है जैसे- किसी बैंक में पूंजी जमा करके, ऐसेट्स खरीदकर, किसी कंपनी में निवेश कर के भविष्य में लाभ कमाया जा सकता है.

निवेश करें, पर जरा ध्यान से

1. बचत से करें शुरुआत

निवेश करने से पहले आप बचत करने की आदत डालें. कम से कम बचत भी मुश्किल घड़ी में बहुत काम आती है. छोटी बचत से भी बड़ा फायदा होगा, ये सोचकर बचत करें. अगर आप इक्विटी फंड में हर महीने 8 वर्षों तक 500-1000 रुपए भी निवेश करते हैं तो आप लगभग 1 लाख रुपए की टैक्स फ्री रकम जमा कर सकते हैं.

2. सही जानकारी से बचायें टैक्स

आजकल 22-23 साल की उम्र से ही लोग कमाने लगते हैं. और इस उम्र में कोई भी सेविंग और निवेश को लेकर सीरियस नहीं होते. रेंट रिसिप्ट के जरिए मामूली टैक्स सेविंग के अलावा कोई बड़ी बचत या निवेश रणनीति युवाओं के दिमाग में नहीं आती. लेकिन उम्र के इस पड़ाव में अगर हम ELSS (Equity Linked Savings Scheme) जैसे निवेश विकल्पों में निवेश कर जहां एक ओर हम टैक्स की बचत कर सकते हैं वहीं दूसरी ओर लंबी अवधि में अच्छे रिटर्न भी संभव हैं.

3. इक्विटी में करें निवेश

इक्विटी में निवेश से आपको बेहतर रिटर्न मिल सकता है. पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सेंसेक्स से करीब 15 फीसदी रिटर्न मिल सकता है. अगर आप लंबे समय तक इंडेक्स फंड में ही SIP के माध्यम से निवेश करते हैं लंबे समय में आपको बड़ा रिटर्न मिलने की संभावनायें हैं.

4. बेस्ट में करें इनवेस्ट

घर के बड़े-बुजुर्ग टैक्स सेव करने की सलाह तो देते हैं, पर कैसे करना है ये कोई नहीं बता पाता. असल में इस मामले में सबको ज्यादा जानकारी नहीं होती. पर आजकल इंटरनेट पर हर जानकारी उपलब्ध है. आप ऑनलाइन जानकारी हासिल करें, और जहां निवेश करने से सबसे ज्यादा रिटर्न मिले, वहां निवेश करें. 

लड़कियां बोली, इसलिए पहनती हैं हम टाइट कपड़े, देखिए वीडियो

लड़कों के दिमाग में लड़कियों को लेकर कई सवाल चलते रहते हैं. कभी उन्हें अपनी गर्लफ्रेंड से कुछ सवाल करने होते हैं, तो कभी वो अपनी पत्नी से कुछ पूछना चाहते हैं. लेकिन अधिकतर मामलों में वे हिम्मत नहीं जुटा पाते हैं. वहीं कुछ सवाल तो ऐसे होते हैं जो लड़के हर एक लड़की से पूछना चाहते हैं. जिनमें से एक सवाल यह है कि लड़कियां इतने टाइट कपड़े क्यों पहनती हैं? वैसे ये सवाल कुछ लड़कियों के दिमाग में भी आता है.

इस सवाल के जवाब में कई कुछ लड़कियों ने कहा कि वे अपना खुद का फिगर देखना चाहती हैं. वहीं कई लड़कियों ने बताया कि फिगर अच्छा लगता है और बॉडी की शेप पता चलता है. कई लड़कियों ने बताया कि वे खुद को मोटीवेट करना चाहती हैं इसलिए टाइट कपड़े पहनती हैं, ताकि वजन कम कर सकें. कुछ लड़कियों ने बताया कि लड़कों का अटेंशन पाने के लिए वे टाइट कपड़ों का सहारा लेती हैं, क्योंकि टाइट कपड़ों में सेक्सी लुक आता है. वहीं जब लड़कों से पूछा गया कि लड़कियां टाइट कपड़े क्यों पहनती हैं तो उन्होंने बताया कि ऐसा वे अपना फिगर दिखाने और सेक्सी लुक के लिए करती हैं.

आप भी इस वीडियो में देखिए लड़किया क्या कह रही हैं…

नोटबदली से नोटबंदी

8 नवंबर, 2016 को शाम 8 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब ऐलान किया था कि रात 12 बजे के बाद 500 रुपए और 1,000 रुपए के नोट लीगल टैंडर नहीं रह जाएंगे और नए नोट मिलने शुरू हो जाएंगे, तो उन के कदम को विमुद्रीकरण कहा गया, जो गलत था. उन का मतलब उस समय केवल नोटबदली था ताकि जिस के पास पुराने नोटों का भंडार हो, जिसे सरकार कालाधन कहती है, बाहर इस तरह निकल सकें जैसे जहरीली गैस छोड़ने के बाद चूहे निकलते हैं. पर असल में, नोटबंदी ही हो गई.

चूहों की तरह नोट तो नहीं निकले पर जो निकले वे इस देश के नागरिक हैं जिन्हें लगातार बैंकों के बाहर कतारों में खड़ा होने की सजा दे दी गई. बेगुनाह लोगों, कुछ सौ ही नहीं बल्कि करोड़ों, को बारबार कतारों में घंटों खड़ा होने को मजबूर होना पड़ा. सरकार नोट बदलने का अपना वादा पूरा न कर पाई क्योंकि उतना पैसा सरकार के पास नहीं था जितना जनता को चाहिए था. सरकार ने जनता के नोट छीन लिए और लगता है अब लौटाने का उस का मन नहीं है.

वित्त मंत्री तो अब खुलेआम कहने लगे हैं कि जितने नोट वापस बैंकों में गए हैं, उतने मिलेंगे नहीं. यानी बैंकों में जमा धन अब सरकार का हो गया चाहे वह गरीब का है या अमीर का. चोरों, कालाबाजारियों, धन्ना सेठों का धन तो वह है ही नहीं, क्योंकि 8 नवंबर के बाद कोई भी ढाई लाख से ज्यादा जमा भी नहीं करा सकता था और जिस ने ज्यादा कराया उसे हिसाब देना पड़ा.

मतलब साफ है कि जो भी पैसा जमा हुआ है वह आम नागरिकों का है, गरीबों का, व्यापारियों का है, औरतों का है, युवाओं का है, मजदूरों का है. सरकार, जो हिंदू धर्म की चाबी घुमा कर जीत कर सत्ता में आई थी, सब से बड़ी डाकूचोर बन गई और जबरन अरबों दान में मिले रुपयों को जनकल्याण व गरीबउत्थान में खर्च करने की बातें कर रही है.

अफसोस यह है कि जनता का एक बहुत बड़ा अंश वैसे ही देवताओं की बेईमानियों, धूर्तताओं, पंडों की लूटखसोट, मंदिरों की बदइंतजामी, बाबाओं की चरित्रहीनता का आदी है और उसे इस बेईमानी में केवल नारे दिख रहे हैं कि सिर्फ 50 दिन रुको, 5 महीने रुको, 50 महीने रुको, सब ठीक हो जाएगा.

किसी भी समाज को गुलाम बनाने में सब बड़ी शर्त वहां के नागरिकों की ‘जो है जैसा है’ को मान लेने की है. भारत की जनता आज से नहीं, सदियों से इस की आदी है. उसे पुराणों के चमत्कारों के बारे में पता है पर इतिहास की घटनाओं का नहीं, जिन के कारण यह विशाल देश गुलाम रहा.

आज सरकार ने 1975 से 1979 तक की तरह पूरी जनता को गुलाम बना दिया है. कांग्रेस ने अभिव्यक्ति की आजादी छीनी थी. इस सरकार ने उस की मेहनत की कमाई छीन ली है क्योंकि सरकार के साथ समाज का संपन्न वर्ग है जो इस लूट का हिस्सेदार है. जनता के पास नए नोट न आने का मतलब है सरकार के टैक्सों में कमी और अमीरों के मुनाफों में वृद्घि. तभी हर दूसरे रोज कोई अंबानी, कोई रांका, कोई अग्रवाल नोटबंदी के साहसिक कदम का प्रमाण दे देता है. राजा के दरबार में तो चाटुकार होंगे ही, जो राजा की जय ही बोलेंगे.

17 लेटैस्ट फैशन ऐक्सैसरीज

स्टाइल की दुनिया से आउट नहीं होना चाहती हैं, तो ये ऐक्सैसरीज इस साल रखें अपनी लुक लिस्ट में इन.

चोकर लेयर्ड नैकलैस

चोकर लेयर्ड नैकलैस टिपिकल चोकर का सेमी इंडियन लुक है, जो वजनदार टिपिकल चोकर से काफी हलका है. इसे आप इंडियन वियर में साड़ी के साथ खासकर तब जब ब्लाउज की नैक डीप हो और वैस्टर्न वियर में औफशोल्डर टौप और ट्यूब ड्रैस के साथ पहन सकती हैं.

हैड चेन

शादीविवाह जैसे खास मौकों पर इंडियन वियर जैसे साड़ी, साड़ीलहंगा, लहंगाचोली, अनारकली के साथ टिपिकल मांगटीका पहनने के बजाय हैड चेन ट्राई करें.

टैसल इयररिंग्स

2017 की लौंग टैसल इयररिंग्स वैस्टर्र्न और इंडियन दोनों वियर के साथ पहनी जा सकती हैं. इन का लुक थोड़ा हैवी होता है, इसलिए इन्हें रैग्युलर नहीं पहन सकते.

हैंड हार्नेस

अगर आप अपने हाथों की खूबसूरती बढ़ाने के लिए रिंग और ब्रैसलेट के अलावा कुछ नया ट्राई करना चाहती हैं, तो हैंड हार्नेस को अपने ज्वैलरी बौक्स में खास जगह दे सकती हैं.

लैदर कोटर्स

अपने कौन्फिडैंस को बूस्ट करने के लिए अगर आप भी हाई हील सैंडल पहनती हैं, तो इस बार पार्टी जैसे मौके के लिए अपने शू रैक में लैदर कोटर्स का कलैक्शन जरूर रखें.

करमा बैंगल्स

इस साल अपने वैनिटी बौक्स में रैग्युलर बैंगल्स को जगह देने के बजाय करमा बैंगल्स को दें. ये बैंगल्स वैस्टर्न वियर के साथसाथ फौर्मल वियर जैसे थ्री फोर्थ स्लीव शर्ट, टौप और हाई वेस्ट स्कर्ट पर भी सूट करती हैं.

डल सिल्वर हैंड कफ

वैस्टर्न वियर के साथ बैंगल्स या ब्रैसलेट से हट कर कुछ नया पहनना चाहती हैं, तो कफ ट्राई करें.

क्लासिक प्लेटफौर्म

औफिसगोइंग वूमन के लिए रैग्युलर फौर्मल फुटवियर की जगह इस साल क्लासिक प्लेटफौर्म फैशन में होगा, जो काफी कंफर्टेबल होने के साथसाथ क्लासी लुक भी देता है.

औक्सिडाइज रिंग

इस सीजन में गोल्ड या सिल्वर नहीं, औक्सिडाइज रिंग को अब अपनी पहली पसंद बनाएं. यह इंडियन कुरता, अनारकली के साथ ही वैस्टर्न टौप, मैक्सी ड्रैस  पर भी मैच करेगी.

बोहो नैकपीस

बोहो नैकपीस एक तरह की इंडोवैस्टर्न ज्वैलरी है. इसे इंडियन, वैस्टर्न आउटफिट के साथसाथ इंडोवैस्टर्न वियर के साथ भी पहना जा सकता है.

चांद बाली

अगर आप चांद बाली पहनने की शौकीन हैं, तो खुश हो जाइए, क्योंकि इस का फैशन फिर लौट आया है. फुल के साथ ही हाफ चांद बाली भी डिमांड में होगी.

ट्रैंडी बैकपैक

फैशनेबल वियर के साथ स्टाइलिश ज्वैलरी पहनने के बाद बेशक आप सुपर कूल नजर आती होंगी, लेकिन जैसे ही आप के हाथ में सिंपल सा लैपटौप बैग आता होगा. आप की पर्सनैलिटी फीकी पड़ जाती होगी, इसलिए अब लैपटौप के लिए इस्तेमाल करें ट्रैंडी बैगपैक.

कौलर चोकर

हमेशा इंडियन वियर के साथ पहने जाने वाले चोकर को अब आप वैस्टर्न वियर के साथ भी पहन सकती हैं. सुपर स्टाइलिश लुक के लिए इसे वैस्टर्न ट्यूब और औफशोल्डर टौप, ड्रैस या गाउन के साथ पहनें.

हैड गियर

मांगटीका और हैडचेन के बीच का कुछ ट्राई करना चाहती हैं, तो हैड गियर को अपने वैनिटी बौक्स में रख सकती हैं. यह न तो मांगटीका की तरह बहुत ज्यादा हैवी होता है और न ही हैडचेन की तरह लाइट वेट.

कलरफुल कफ

इंडियन वियर के साथ पहने जाने वाले बहुत कम कफ हैं. इस बात को ध्यान में रख कर कलरफुल थिन कफ को 2017 की ऐक्सैसरीज में खास जगह दी गई है.

ट्रैंडी झुमके

हमेशा फैशन में इन रहने वाले झुमके 2017 में भी ट्रैंड में होंगे. लेकिन इस बार इन की खासीयत इन का मैटल मैटीरियल और कलरफुल लुक होगा.

बिग क्लच

क्लच का क्यूट लुक आप को परफैक्ट पार्टी लुक देता है, लेकिन छोटे साइज के चलते जरूरी सामान इस में आ नहीं पाता. इसलिए 2017 में आप को बिग साइज के क्लच खूब मिलेंगे, जिन में आप अपना पूरा सामान रख कर पार्टी में जा सकती हैं.

 

(फैशन डिजाइनर सोनल जैन व मिनल बाजोरिया से पूनम पांडेय की बातचीत पर आधारित

17 जगहें जिन का दीदार बन जाए यादगार

दुनिया में कुछ ऐसी रोमांटिक जगहें हैं जहां की आबोहवा में ही इश्क बसता है और अगर इन जगहों पर आप अपने पार्टनर के साथ जाएंगे तो आशिकी के नए रंगों में नहा जाएंगे. आइए, हम आप को बताते हैं कुछ ऐसी ही जगहों के बारे में जहां जा कर आप और आप का साथी एकदूजे में कुछ यों खो जाएंगे कि वापस आने का मन ही नहीं करेगा.

गोवा: यहां की स्वच्छंद व उन्मुक्त जीवनशैली पर्यटकों को बरबस ही यहां खींच लाती है. यदि आप भी अपने साथी के साथ कुछ अंतरंग पल गुजारना चाहते हैं, तो इस के लिए गोवा बहुत अच्छी जगह है. वाटर स्पोर्ट्स के लिए भी गोवा बहुत प्रसिद्ध है. समुद्र की लहरों पर आप वाटर सर्फिंग, पैरासेलिंग, वाटर स्कीइंग, स्कूबा डाइविंग, वाटर स्कूटर आदि का लुत्फ उठा सकते हैं. रोमांच चाहने वालों के लिए सागर की छाती को चीर कर चलने वाले वाटर स्कूटर की सवारी बेहद आकर्षित करती है.

गोवा के कुछ प्रसिद्ध बीच डोना पाउला, कोलबा, कलंगूट, मीरामार, अंजुना, बागातोर आदि हैं. पणजी, मपुसा, मडगांव आदि गोवा के कुछ प्रमुख शहर हैं.

पैरिस: पैरिस दुनिया भर के पर्यटकों के लिए सपनों का शहर है. हर साल लगभग डेढ़ करोड़ से अधिक लोग प्रेम की नगरी पैरिस को देखने आते हैं. इसे प्रेम की नगरी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यहां की सीन नदी पर बना सब से पुराना पुल पोंट न्यूफ प्रेमी जोड़ों में खासा लोकप्रिय है. यहां प्रेमी जोड़ों के द्वारा लवलौक लगाया जाता है. वैसे यहां के म्यूजियम भी दुनिया भर में मशहूर हैं जैसेकि वैक्स म्यूजियम आदि.

यही नहीं पैरिस के उत्तर में 130 मीटर ऊंची मोंटमा पहाड़ी पर प्रेम की दीवार है. 40 वर्ग मीटर की इस दीवार पर कलाकारों ने 612 टाइल्स पर 300 भाषाओं में ‘आई लव यू’ लिखा है. इसे देखने के लिए भी पर्यटकों की भारी भीड़ जमा होती है.

सिडनी: सिडनी आस्ट्रेलिया का सब से बड़ा और सब से पुराना शहर है. सिडनी शहर का नाम आते ही सैलानियों के जेहन में शंख की आकृति वाली ओपेरा हाउस की बिल्डिंग जरूर आती है. सिडनी के बेनिलौंग पौइंट पर स्थित यह इमारत अपनी खूबी और खूबसूरती की वजह से यूनैस्को की वर्ल्ड हैरिटेज सूची में भी शामिल है.

ओपेरा हाउस की बगल में सिडनी हार्बर ब्रिज है. इस पर न्यू ईयर सैलिब्रैशन देखते ही बनता है. प्यार से लोग इसे कोट हैंगर के नाम से बुलाते हैं. पूरे विश्व में यह अपने तरह का अकेला पुल है.

थाईलैंड: थाईलैंड का नाम लेते ही पार्टी और बीचेज की याद आने लगती है. लाखों पर्यटक हर साल थाईलैंड की रंगीन रातों का मजा लेने के लिए यहां पहुंचते हैं.

थाईलैंड के बारे में एक बात और भी खास है कि यहां के लोग माथे को सब से ज्यादा पवित्र अंग मानते हैं, दिल से भी ज्यादा. उन का मानना है कि व्यक्तित्व की असली झलक सिर्फ मस्तिष्क से ही मिलती है. इसलिए यहां एक बात और देखने को मिलती है कि यहां आने वाली भारतीय पत्नियां अकसर अपने पति से एक बार माथे पर किस करने की गुजारिश जरूर करती हैं. ऐसा करना उन के लिए रोमांटिक पल तो होता ही है, साथ ही सम्मान की बात भी होती है. इस के अलावा यहां का फीफी आइलैंड मंत्रमुग्ध कर देने वाली जगह है. यहां की प्राकृतिक खूबसूरती में अपने साथी के साथ समय बिताना यादगार बन जाएगा.

मौरीशस: सन ऐंड सैंड के बीच रोमांस करना हो तो इस द्वीप से सुंदर कोई जगह नहीं है. हनीमूनर्स पैराडाइज कहलाने वाले मौरीशस में चप्पेचप्पे पर प्रकृति का सौंदर्य सिर चढ़ कर बोलता है. इसी कारण मौरीशस को ड्रीमलैंड के नाम से भी जाना जाता है. मौरीशस एक ऐसा द्वीप है जहां के सुंदर रेतीले बीच पर्यटकों को सम्मोहित कर लेते हैं. यहां होने वाली मौजमस्ती पर्यटकों को बारबार आने के लिए उत्साहित करती है. मौरीशस में पेरीबेरी, ग्रैंड बाई, ब्लू बे जैसे कई मनमोहक बीच हैं. यहां समुद्र के अंदर छिपी दुनिया का लुत्फ उठाने के लिए ब्लू सफारी पनडुब्बी भी है.

पोर्टलुई मौरीशस की राजधानी है, जोकि देश की कलासंस्कृति की जीतीजागती तसवीर है. यहां के रौनक भरे बाजारों में शौपिंग के लिए बहुत कुछ है. यहां सूखी मछलियों से बने गहने, टीशर्ट, शोपीस आदि कई चीजें मिलती हैं. यहां पैंपलमूज बोटैनिकल गार्डन खास तरह के वाटर लिली के फूलों के लिए मशहूर है.

सिंगापुर: सिंगापुर साउथ ईस्ट एशिया के सब से महंगे शहरों में से एक है. लेकिन यह हनीमून या फिर छुट्टी बिताने के लिए हमेशा पर्यटकों की पहली पसंद रहा है. सिंगापुर के बसकर्स फैस्टिवल, सिंगापुर आर्ट फैस्टिवल, मोजिएक म्यूजिक फैस्टिवल, लूनर न्यू ईयर बेहद खास होते हैं. यहां आप म्यूजिक, आर्ट इंस्टालैशंस और लाइट शोज का मुफ्त में भी आनंद ले सकते हैं. लेकिन इन फैस्टिवल का आनंद उठाने के लिए आप को अपना ट्रिप सिंगापुर के कैलेंडर के हिसाब से प्लान करना होगा.

स्विट्जरलैंड: यहां की सफेद बर्फ से ढकी आल्प्स की पहाडि़यां, चारों तरफ हरियाली, मदहोश कर देने वाली नदियां और झीलें, सुंदर फूल, रंगीन पत्तियों वाले पेड़ हर किसी को आकर्षित करते हैं. यहां मीलों लंबी सुरंगें, प्राकृतिक नजारे भी हैं. टिटलिस पर्वत पर केबल कार के जरीए पूरे ग्लेशियर की खूबसूरती निहारी जा सकती है. यह दुनिया का एकमात्र ऐसा स्थान है जहां घूमती हुई केबल कार है. विश्वप्रसिद्ध कौफी नैसकैफे का मुख्यालय भी यहीं है. यहां प्रेमी जोड़े कौफी का आनंद जरूर लेते हैं और फुरसत के कुछ पल बिताते हैं. यूरोप का सब से ऊंचा रेलवे स्टेशन जंगफ्रा भी देखने वाली जगह है. यहां रेल की 2 नहीं, बल्कि 3 पटरियां हैं. बीच की पटरी साइकिल की चैन जैसी है जिस पर ट्रेन के नीचे लगी गरारी के दांते चलते हैं. यह इसलिए ताकि सीधे ऊंचाई पर जाते हुए भी ट्रेन वापस न खिसके.

टोक्यो: ‘ले गई दिल गुडि़या जापान की…’ यह गीत बहुत पुराना है, लेकिन जापान पर एकदम सटीक बैठता है. जापान की लड़कियां वाकई में गुडि़यों जैसी दिखती हैं और वहां की राजधानी टोक्यो ऐसी जगह है कि जो एक बार जाए उसे वहां से प्यार हो जाए. जापान में ऐसे होटल हैं जो खासतौर पर कपल्स की प्राइवेसी को ध्यान में रख कर बनाए गए हैं. इन होटल्स को लव होटल्स के नाम से जाना जाता है. यहां रुकने वाले लोग एक घंटे के लिए भी रूम बुक करा सकते हैं.

टोक्यो में दुनिया की सब से ऊंची मीनार स्काइटी है. इस मीनार में 312 मीटर तक शौपिंग, रेस्तरां, औफिस, ऐक्वेरियम और प्लानेटोरियम हैं. 350 मीटर की ऊंचाई पर औब्जरवेशन टावर है, जहां से राजधानी टोक्यो और आसपास के इलाकों का दीदार किया जा सकता है.

दुबई: दुनिया की सब से ऊंची इमारत बुर्र्जखलीफा दुबई में ही है. दुबई का जुमेराह बीच दुनिया के सब से बेहतरीन बीचेज में से एक है. यहां की खूबसूरती सब को अपना दीवाना बना लेती है. दुबई क्रीक भी शानदार है. यहां बोटिंग करने का अपना अलग ही मजा है.

हौंगकौंग: चीन के दक्षिणी तट पर बसा यह देश कभी सोता नहीं है. यहां की जगमगाती सड़कें व इमारतें दिनरात का फासला मिटाती हैं. यहां का डिजनीलैंड, क्लौक टौवर, ड्रैगंस बैक टेल व हौंगकौंग म्यूजियम काफी फेमस हैं.

हौंगकौंग की सैर के लिए क्रूज भी लिया जा सकता है. यह कू्रज लाइनर एक तरह से घूमते हुए फाइवस्टार होटल की तरह नजर आता है, जिस में पर्यटकों की जरूरत का सारा सामान होता है.

मालदीव: यहां के समुद्र के गहरे नीले पानी में अंगूठियों की तरह छितराए छोटेछोटे द्वीपों को देख मन उमंग से भर जाता है. यह धरती खूबसूरती के पैमाने पर कुदरत के किसी अजूबे से कम नहीं है. करोड़ों साल से मूंगे के इकट्ठा होते जाने से बने इन द्वीपों जब ऊपर से देखते हैं तो हलके नीले रंग के नजर आते हैं और सफेद रेत वाले इन के किनारे समुद्र में घुलते से नजर आते हैं.

केरल: पानी में रोमांटिक पल गुजारना चाहते हैं तो आप के लिए केरल का बेकवाटर बैस्ट औप्शन है. यहां आप अलपुज्जा, कोल्लम, तिरुवल्लम जैसे डैस्टिनेशन की सैर हाउसबोट के जरीए कर सकते हैं. केरल के बैकवाटर्स में 900 किलोमीटर से भी ज्यादा के क्षेत्र में सैर की जा सकती है. नदी और समुद्र का पानी मिल कर बैकवाटर का एरिया बनाते हैं. यही वजह है कि यहां तमाम तरह के पेड़ों, हरेभरे खेतों के अलावा मरीन लाइफ को भी नजदीक से देखा जा सकता है.

कश्मीर: यहां देवदार और चीड़ के पेड़ों से गिरते बर्फ के टुकड़े एक नई दुनिया में आने का आभास कराते हैं. कश्मीर में घूमने के लिए वैसे तो कईर् जगहें हैं, लेकिन गुलमर्ग, सोनमर्ग, पहलगाम, श्रीनगर जाए बिना कश्मीर घूमना अधूरा है. गुलमर्ग में स्कीइंग, गोल्फ कोर्स, विश्व की सब से ऊंची केबल कार और ट्रैकिंग की सुविधा है. पहलगाम के पास अरू वैली, चंदनवाड़ी और बेताबवैली है जहां कई फिल्मों की शूटिंग भी की गई है.

डलहौजी: 5 पहाड़ों कठलौंग, पोटेन, तेहरा, बकरोटा और बलुन पर स्थित यह पर्वतीय स्थल हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में स्थित है. वैसे डलहौजी शहर उस धौलाधार पर्वत के सामने पड़ता है जो साल भर बर्फ की नईनई परतें ओढ़ता है. चारों ओर बिखरे कुदरती नजारों में दूरदूर तक सन्नाटे में घूमा जा सकता है. यहां भीड़भाड़ के बजाय शांत माहौल होता है. लंबी छुट्टियां गुजारने वाले व एकांतपसंद लोग यहां बड़ी संख्या में आते हैं.

अंडमाननिकोबार द्वीप: अगर आप अपने पार्टनर के साथ शोरगुल से दूर अकेले में सुकून में समय बिताना चाहते हैं तो यह जगह आप के लिए बैस्ट है. आप के लिए इस जगह से अच्छी दूसरी कोई रोमांटिक जगह नहीं होगी.

अंडमान और निकोबार अपने समुद्री तटों और स्कूबा डाइविंग के लिए ही नहीं, बल्कि यहां घने जंगलों में पाए जाने वाले कई प्रजातियों के पक्षियों और सुंदर फूलों के लिए भी जाना जाता है. इन्हें देखने का आनंद ही कुछ और है.

कौसानी: कौसानी को भारत का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है. महात्मा गांधी ने कहा था कि कौसानी धरती का स्वर्ग है. बर्फ से ढकी चोटियों से घिरा कौसानी सूर्योदय व सूर्यास्त के अद्भुत दृश्य के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां से चौखंभा, त्रिशूल, नंदादेवी, पंचचूली एवं नंदाकोट सहित कई अन्य पर्वत चोटियां साफ दिखती हैं.

दार्जिलिंग: दार्जिलिंग खूसबसूरत रोमांटिक पर्यटन स्थल के नाम से जाना जाता है. यहां की खुशनुमा वादियां हनीमून में चार चांद लगा देती हैं. दार्जिलिंग को पहाड़ों की रानी भी कहा जाता है. यहां बर्फ से ढकी वादियां हैं. कलकल करती नदियां, देवदार के वृक्ष और साथ ही प्रकृति के दिलकश नजारे मन को मोह लेते हैं. यहां के सौंदर्य को देख कर लगता है मानो प्रकृति ने अपना सारा सौंदर्य यहीं बिखेर दिया हो.

दार्जिलिंग में सब से दिलकश नजारा है विक्टोरिया झरना, जो लोगों का मन मोह लेता है. इस के अलावा सैंथल झील, रौकगार्डन की खूबसूरती देख भी लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं.                           

सोनपुर मेला है बड़ा अलबेला

साल 2016 के सोनपुर मेले में ज्यादा चहलपहल नहीं दिखी. कारोबारी भी यही मानते हैं कि नोटबंदी का असर मेले पर भी हुआ है.

घोड़े के कारोबारी ओमप्रकाश सिंह कहते हैं कि वे पिछले 12 सालों से इस मेले में आ रहे हैं. मेले के पहले दिन ही 30 से 40 घोडे़ बिक जाते थे, लेकिन इस साल एक भी घोड़ा नहीं बिका.

उद्घाटन के दिन ही तकरीबन 2 सौ गाएं बिक जाती थीं, लेकिन इस बार गाय को खरीदने के लिए कोई खरीदार नहीं पहुंचा.

खिलौनों का कारोबार करने वाले उत्तर प्रदेश के बलिया से पहुंचे परशुराम सिंह कहते हैं कि इस साल रोजाना 300-400 रुपए के ही खिलौने बिक पाए, जबकि पिछले साल वे हर दिन 4-5 हजार रुपए के खिलौने बेच लेते थे.

मेले में स्टाल लगाने वाले कारोबारी एक हजार और 5 सौ के पुराने नोट नहीं ले रहे हैं. जो भी खरीदार मेला पहुंच रहे हैं, उन में से 99 फीसदी लोग पुराने नोट ले कर ही आए.

कम खरीदारों के आने के बाद भी ज्यादातर कारोबारी कहते हैं कि धीरेधीरे ही सही, पर मेले की रौनक लौटी है.

हर साल एक महीने तक चलने वाले एशिया के सब से बड़े पशु मेले में देशी और विदेशी नस्लों के मवेशियों की खरीदबिक्री बड़े पैमाने पर की जाती है. गाय, भैंस, बकरी, कुत्ता, हाथी, घोड़े, ऊंट, सूअर समेत कई तरह के पक्षियों को प्रदर्शन के लिए रखा जाता है.

बता दें कि पिछले साल सोनपुर मेले में 25 हजार पशुओं की बिक्री हुई थी. मवेशियों के अलावा हस्तशिल्प की चीजें, फर्नीचर, खिलौने, खेती के औजार व मशीनें, आर्टिफिशियल गहने, खादी के कपड़े, गलीचे, दरी, चादर, बरतन वगैरह के भी रंगबिरंगे स्टाल बनाए जाते हैं. साथ ही, मनोरंजन के लिए कुएं में मोटरसाइकिल चलाना, साइकिल रेस, घोड़ा और भैंसों की दौड़, मुरगों की लड़ाई का भी इंतजाम किया जाता है.

पटना से महज 25 किलोमीटर की दूरी पर सोनपुर में गंगा और गंडक नदी के संगम पर सोनपुर मेला लगता है. हर साल कार्तिक महीने की पूर्णमासी को सोनपुर मेले की शुरुआत होती है और यह एक महीने तक चलता है.

इस साल मेला 32 दिनों तक यानी 10 दिसंबर, 2016 तक चला. इसे ‘हरिहर क्षेत्र मेला’ और ‘छत्तर मेला’ भी कहा जाता है. इस मेले की खासीयत यह है कि यहां सूई से ले कर हाथी तक खरीदा जा सकता है.

सोनपुर मेले की खासीयत और पहचान वहां का थिएटर भी रहा है. थिएटर में चलने वाले सैक्सी डांस को देखने के लिए लोग दूरदूर से खिंचे चले आते हैं.

थिएटर में होने वाले फूहड़ डांस पर रोक लगाने की मांग हर साल की जाती है, पर तमाम विरोधों के बाद भी थिएटर सोनपुर मेले की खूबसूरती में चार चांद लगाता रहा है.

शोभा सम्राट थिएटर, चांदनी थिएटर और गुलाब थिएटर की रंगीन रोशनियों से नहाए और सजेसजाए तंबू के अंदर का माहौल रात के जवान होने के साथ गरम होता जाता है. ‘चुम्मांचुम्मां दे दे’, ‘भतार बिना गरमाइल बिया’, ‘नीचे के नटबोल्ट खोल द’, ‘लहंगा उठा के’ जैसे भोजपुरी गानों पर थिरकती डांसरों को देख कर थिएटर में मौजूद भीड़ खूब मजे लूटती रहती है.

हर थिएटर में 25-30 डांसरों की फौज होती है. शाम ढलते ही थिएटर के बाहर फूहड़ गाने बजने लगते हैं और जनता का जमावड़ा होने लगता है. सब से आगे की सीट पर बैठ कर थिएटर का मजा लेने के लिए एक हजार रुपए ढीले करने पड़ते हैं. उस के बाद की टिकटों के दाम 5 सौ रुपए, 2 सौ रुपए, सौ रुपए तक हैं. इस के बावजूद भी थिएटर दर्शकों से खचाखच भरा रहता है.

रात के 12 बजते ही थिएटर के अंदर की जनता के चिल्लाने की आवाजें बढ़ जाती हैं. डांसर एकएक कर अपने बदन से कपड़े उतारना चालू करती है. उस समय थिएटर अपने शबाब पर होता है. भोजपुरी गीतों पर डांसरों की फूहड़ हरकतों को देख कर हर कोई अपना आपा खो बैठता है.

इस साल मेला परिसर में 20 स्विस कौटेज लगाए गए. एक कौटेज के अंदर 2 कमरे, बाथरूम और गरम पानी का भी इंतजाम किया गया. हर कौटेज को सौ स्क्वायर फुट में बनाया गया.

एक कौटेज का किराया 5 हजार रुपए रहा और इस के अलावा 950 रुपए टैक्स भी देना था. जैसेजैसे मेले के खत्म होने की तारीख नजदीक आती गई, वैसेवैसे किराए को भी घटाया गया.

बिहार की पर्यटन मंत्री अनीता देवी ने बताया कि सोनपुर मेले को अंतर्राष्ट्रीय रूप देने की तैयारियां चल रही हैं. पुष्कर और सूरजकुंड मेले की तर्ज पर इसे भी विकसित किया जाएगा. पहले दिन आए इटली और जापान के बहुत से पर्यटकों ने इस मेले को देख कर कहा था, ‘वंडरफुल’.                           

गुरु के गांव को भूल गए चेले

सरयू नदी पर बने जयप्रभा पुल को पार करते ही उजाड़ इलाका नजर आने लगता है. कहींकहीं खेतों में हरियाली दिखती है. सिताब दियारा की चांद दियारा पुलिस चैकपोस्ट के बाद जयप्रकाश नारायण के गांव लाला टोला जाने के लिए कच्ची और गड्ढों से भरी सड़कों से पाला पड़ता है. हिचकोले दर हिचकोले खाती गाड़ी को देख कर पता ही नहीं चलता है कि गड्ढे में सड़क है या सड़क में गड्ढा है.

बिहार और उत्तर प्रदेश की सरकारों के तरक्की के दावों का वहां कहीं नामोनिशान नहीं मिलता है. गांव की हालत देख कर मुंह से बरबस यही निकल पड़ता है, ‘यहां तक आतेआते सूख जाती हैं कई नदियां, मुझे मालूम है पानी कहां ठहरा हुआ होगा.’

11 अक्तूबर, 1902 में सिताब दियारा के ही लाला टोला गांव में जयप्रकाश नारायण का जन्म हुआ था. उन के चेले लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार बिहार की सत्ता पर काबिज हैं और हर चुनाव में उन के नाम पर सियासत करते रहे हैं. इस के बाद भी वे दोनों अपने सियासी गुरु के गांव की बदहाली से बेखबर हैं.

जयप्रकाश नारायण का गांव सिताब दियारा हर साल गंगा और सरयू नदी की बाढ़ में डूब जाता है. बारिश के मौसम में हर साल सिताब दियारा के वजूद पर खतरा मंडराता रहता है.

गांव का एक किसान सिपाही राय बताता है कि बाढ़ के समय बालू के कुछ बोरे नदी के किनारे डाल कर सरकार अपना काम पूरा होना मान लेती है, पर गांव के लोग हर पल जानलेवा खतरे से जूझने के लिए मजबूर हैं.

सिताब दियारा की बदहाली की कई वजहें हैं. सब से बड़ी वजह इस का बिहार और उत्तर प्रदेश राज्यों के बीच फंसा होना है.

सिताब दियारा में कुल 37 टोले हैं. 10 टोले बिहार में और 27 टोले उत्तर प्रदेश में पड़ते हैं. इस से दोनों राज्यों की सरकारों और उन के अफसरों के बीच खींचतान चलती रहती है और अपनी जिम्मेदारियों को एकदूसरे पर डाल कर पल्ला झाड़ते रहते हैं.

लाला टोला गांव के हरि लाल गुस्से से कहते हैं कि जेपी के गांव को उन के चेलों ने ही तबाह कर दिया है. आज कई दलों और सरकारों में उन के चेले बैठे मलाई चाट रहे हैं, पर कहीं भी कोई भी जेपी का नामलेवा नहीं है.

लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार, सुशील कुमार मोदी, रामविलास पासवान, नरेंद्र सिंह समेत कई बड़े और ताकतवर नेता जेपी की संपूर्ण क्रांति की ही उपज हैं. उन्हीं लोगों ने जेपी के गांव को ही नहीं, बल्कि उन के सपनों और संपूर्ण क्रांति के मकसद को ही मटियामेट कर के रख दिया है.

गांव में बिजली, पानी, सड़क वगैरह की हालत बदतर है. साल 2011 के बाद वहां बिजली की रोशनी कौंधी, तो गांव वालों की आंखें चुंधिया गई थीं.

बिजली इसलिए नहीं पहुंचाई गई थी, क्योंकि जेपी के चेलों को अचानक जेपी और उन के गांव की याद आ गई हो या उन्होंने अपनी गलती को सुधारने की कोशिश की हो.

गांव में बिजली गांव वालों के लिए नहीं, बल्कि भाजपा के नेता लाल कृष्ण आडवाणी के लिए पहुंची थी. उन्होंने 11 अक्तूबर, 2011 को सिताब दियारा से ही अपनी ‘जनचेतना यात्रा’ की शुरुआत की थी. उस से पहले 9 अक्तूबर को बिहार के तब के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने खुद वहां मौजूद रह कर गांव में बिजली का टांसफार्मर लगवाया था और बिजली का बल्ब जलवाया था.

बिहार बिजली बोर्ड को गांव में बिजली पहुंचाने में दिक्कतें हो रही थीं, तो उत्तर प्रदेश बिजली बोर्ड से करार कर के बिजली की लाइन खींची गई थी.

रामेश्वर टोले का मधु राय कहता है कि जेपी के नाम पर तो आज तक सिताब दियारा में बिजली नहीं पहुंची, पर लाल कृष्ण आडवाणी के 10 मिनट के लिए आने की वजह से ही गांव रोशन हो गया था.

वहीं हरकिशोर बताता है कि मोबाइल फोन चार्ज करने के लिए उसे पड़ोसी राज्य (उत्तर प्रदेश) में जाना पड़ता है. यहां बिजली रहती है, तो उस की आंखमिचौली चलती रहती है.

गंगा और सरयू (घाघरा) नदियों के संगम से घिरे सिताब दियारा में साल 2011 में बिजली तो पहुंचा दी गई थी, पर उस के बाद से रखरखाव करने वाला कोई नहीं है.

गांव का किसान महेश कुमार कहता है कि उत्तर प्रदेश बिजली बोर्ड के भरोसे कितने दिनों तक बिजली मिलती? नेताजी के जाते ही बिजली भी चली गई.

जेपी के गांव तक जाने वाली सड़क का भी वही हाल है, जो संपूर्ण क्रांति का हुआ. सड़कें इतनी खराब हैं कि लाल कृष्ण आडवाणी का रथ वहां तक पहुंच ही नहीं पाया और मजबूरी में उनको अपनी यात्रा छपरा से शुरू करनी पड़ी थी.

लालू प्रसाद यादव, नीतीश कुमार जैसे कई बड़े नेता खुद को जेपी का चेला बता कर इतराते रहते हैं, लेकिन उन्हें जेपी के गांव को बचाने की कोई ललक ही नहीं है.

जेपी के नाम पर स्मारक, लाइब्रेरी, सभागार, म्यूजियम वगैरह बनाने का ऐलान हुआ, पर सारे के सारे ऐलान कागजी बन कर ही रह गए हैं.         

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