Download App

हिंदुत्व के सहारे हरीश

देवभूमि कहे जाने वाले राज्य उत्तराखंड में कांग्रेस से उम्मीद है तो उस की इकलौती वजह मुख्यमंत्री हरीश रावत की भाजपा से उधार ली गई हिंदूवादी राजनीति है जिस के तहत वे पूजापाठ ही करते रहे और तो और, एक हैरतअंगेज काम संजीवनी बूटी को खोज निकालने का कर डाला. इस मुहिम पर करोड़ों रुपए वे फूंक रहे हैं और संजीवनी ढूंढ़ने के लिए गठित टीम कड़कड़ाती ठंड में हिमालय की तराइयों में खाक छान रही है कि जैसे भी हो, मतदान से पहले संजीवनी ढूंढ़ ली जाए ताकि कांग्रेस में नई जान फूंकी जा सके. अंदरूनी कलह से जूझ रही उत्तराखंड कांग्रेस को एक बड़ा सहारा हरीश रावत की हिंदूवादी छवि और पहाड़ी वोट हैं. कुल मिला कर बात मुद्दों की नहीं, बल्कि घासफूस की हो रही है.

फिर टूटेगा छींका

बसपा प्रमुख मायावती खुश होंगी कि उन्होंने कभी सपने में भी उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री बन जाने का सपना नहीं देखा होगा पर बसपा के संस्थापक कांशीराम की कृपा कुछ ऐसी हुई कि वे इस मुकाम तक पहुंची और अब वे दोबारा पुराना सपना देख रही हैं. मुलायमअखिलेश की लड़ाई में ज्यादा फायदा किसे होगा बसपा को या भाजपा को, इस सवाल का सटीक जवाब अच्छेअच्छे विश्लेषक नहीं ढूंढ़ पा रहे पर मायावती को हक है कि वे रोज रात को सोने से पहले हिसाब लगाएं कि दलित वोट तो सारे के सारे उन के हैं ही, अब कुछ अतिपिछड़े भी मिल जाएंगे और पूरे न सही आधे ही सही मुसलिम वोट भी मिल गए तो किस की मजाल जो उन्हें सीएम बनने से रोक पाए. यह दीगर बात है कि आजकल का वोटर भी बड़ा हिसाबीकिताबी हो गया है जो सिर्फ यह देखता है कि उस के सपने कौन पूरे कर पाएगा. मायावती को इस पैमाने पर दूसरे से पहले नंबर पर आने के लिए अभी और कड़ी मेहनत करने व वोटरों की मेहरबानी हासिल करने की जरूरत है क्योंकि दूसरों की तरह उन के लिए भी यह आखिरी मौका है.

सपा में अहं सर्वोपरि

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के पारिवारिक विवाद में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने पिता मुलायम सिंह यादव से जीतें या नहीं, पर यह पक्का है कि समाजवादी पार्टी अंदर से खोखली हो गई है. एक व्यक्ति या परिवार पर चलने वाली राजनीतिक पार्टियों के साथ ऐसा होना स्वाभाविक ही है. जब व्यक्ति कमजोर हो या परिवार में विवाद हो तो मामला नीतियों का नहीं, अहं व स्वार्थों का शुरू हो जाता है.

राजनीति आजकल एक व्यवसाय की तरह है, यह अपनेआप में पूर्ण सत्य है. उस का सेवा से बहुत कम लेनादेना है. यह संभव है कि जब नेता राजनीति में कूदा था तो उस के मन में जनसेवा का कोई भाव रहा हो और वह जनता को बेहतर जीवन देने की सोच रहा हो पर शीघ्र ही उसे समझ आ जाती है कि जनसेवा के लिए न केवल सरकार, समाज, धर्म, व्यापार, कौर्पाेरेटों से लड़ना होता है, अपने साथियों से भी लड़ना होता है. आपसी संघर्ष आमतौर पर ज्यादा गंभीर व हानिकारक होते हैं. सत्ताधारी चाहे जितनी कोशिश कर लें, वे जनता की समस्याओं को पूरी तरह नकार नहीं सकते और उन के लिए खड़े व्यक्ति को पूरी तरह हमेशा के लिए दबा भी नहीं सकते. पर जब यही संघर्ष अपने साथियों या परिवार से हो तो संकट ज्यादा गंभीर होता है खासतौर पर जब मतभेद नीतियों को न ले कर मात्र अहं या किस की चलेगी को ले कर हो.

समाजवादी पार्टी का वर्तमान संकट परिवार में किस की चलेगी को ले कर है और यह पारिवारिक सासबहू, जेठजेठानियों जैसा है कि रसोई किस के इशारे पर चलेगी और घर की रोजमर्रा रस्मों या फैसलों पर किस की मुहर लगेगी. अखिलेश यादव व मुलायम सिंह यादव या दूसरे भाईचाचा सत्ता की चाशनी के लिए लड़ रहे हैं, किसी नीति विशेष के लिए नहीं. समाजवादी नेता हमेशा से पिछड़ों के विकास का नारा लगाते रहे हैं. उन्हें यह तो स्पष्ट हो गया था कि सदियों से उन्हें शूद्र कहा गया, उन्हें जम कर लूटा गया है, उन्हें गुलाम सा बना कर रखा गया है और उन्हें अशिक्षित बनाए रख कर उन से खेती का व मजदूरी का काम करा के राज्य, शासक, सेठ मौज करते रहे हैं.

समाजवादियों ने कम्यूनिस्टों से अलग बराबरी का सपना देखा था पर यह सपना राममनोहर लोहिया और कर्पूरी ठाकुर के साथ समाप्त हो गया. उस के बाद पिछड़े, जो स्वयं को शूद्र भी नहीं कहलाना चाहते, मंडल आयोग की सिफारिशों से पहले और बाद में भी सत्ता पर सवार हो कर राज करने लगे. लेकिन वे इस दौरान समाजवाद को भूल गए और उत्तर प्रदेश व बिहार, जहां वे ज्यादा चमके, में परिवारों के चुंगल में फंस गए. अखिलेश बनाम मुलायम विवाद में कौन सही या गलत का नहीं, कौन पार्टी चलाएगा, का मामला है. मुलायम सिंह ने 2012 में अखिलेश के नन्हें हाथों में उत्तर प्रदेश की सरकार सौंप दी ताकि वे खुद केंद्र में सरकार बनाने का सपना पूरा कर सकें. पर जब केंद्र में भारतीय जनता पार्टी ने उन सपनों को चकनाचूर कर दिया तो वे उत्तर प्रदेश में अखिलेश को कमजोर करने में लग गए. मौजूदा विवाद का असली यही कारण है. यह विवाद समाजवादी पार्टी का चाहे विघटन न कर पाए पर समाजवादी सोच व समाजवादी उद्देश्य को दफन अवश्य कर देगा. देश की प्रगति के लिए जरूरी है कि देश की आबादी का 50-60 प्रतिशत पिछड़ा वर्ग तेजी से उन्नति करे. इस के लिए उसे सही मार्गदर्शन की जरूरत है क्योंकि धर्मजनित सामाजिक नियम उसे कमजोर और दबा कर रखते हैं. ये पिछड़े मजदूर, किसान और माय (मुसलिम-यादव) लठैत न बने रहें, यह आवश्यक है पर अखिलेश और मुलायम परिवार में एकदूसरे पर वार करते हैं तो ऐसे में ये चमकीले उद्देश्य कहीं नहीं दिख रहे. समाजवादी पार्टी के सहारे पिछड़ों को जो थोड़ाबहुत आत्मसम्मान मिला था वह भी इस विवाद के चलते गंगायमुनागोमती में बह चला है.

स्त्री एक अपरिचिता

मैं हर रात तुम्हारे कमरे में

आने से पहले सिहरती हूं कि

तुम्हारा वही डरावना प्रश्न

मुझे दुष्टता से निहारेगा पूछेगा

मेरे शरीर से आज नया क्या है?

मैं जन्मों से तुम्हारे लिए

शरीर ही बनी रही

ताकि तुम्हारे काम आ सकूं

तुम्हारा घर कभी मेरा घर

न बन सका

तुम्हारा कमरा

संभोग की अनुभूति के लिए

रह गया है सिर्फ

जिस में सिर्फ मेरा शरीर ही

शामिल होता है मैं नहीं

सिर्फ तन को ही जाना है तुम ने

मेरे मन को नहीं जाना

एक स्त्री का मन, क्या होता है

तुम जान न सके

शरीर की अनुभूतियों से आगे

बढ़ न सके

मन में होती है एक स्त्री

जो कभी मां बनती है

देखभाल करती है

तुम्हारी रोगी काया की

कभी प्रेमिका भी बनती है

तुम्हारे बारे में वो

बिना स्वार्थ के सोचती है

और वो सब से प्यारा सा संबंध

हमारी मित्रता का

तुम भूल ही गए

अकसर न चाहते हुए भी

मैं तुम्हें अपना शरीर

पत्नी के रूप में समर्पित करती हूं

लेकिन तुम सिर्फ

भोगने के सुख को ढूंढ़ते हो

और तब मेरे शरीर का

पत्नीरूप मर जाता है

जीवन की अंतिम गलियों में

जब तुम मेरे साथ रहोगे

तब भी मैं भीतर की स्त्री के

सारे रूपों को समर्पित करूंगी

उन सारे रूपों की तब तुम्हें

ज्यादा जरूरत होगी

क्योंकि तुम मेरे तन को

भोगने में असमर्थ होंगे

तुम तब मेरे साथ संभोग करोगे

मेरी इच्छाओं के साथ

मेरी आस्थाओं के साथ

मेरे सपनों के साथ

मेरे जीवन की अंतिम सांसों के साथ

पर हां, तुम मुझे भले

जान न सके

फिर भी मैं तुम्हारी ही रही

एक स्त्री जो हूं…

– विजय कुमार

ग्रीन टी का चस्का

जो लोग टी नहीं पीते, उन में से ज्यादातर आजकल ग्रीन टी पीते हैं. और इस बात को गर्व व उत्तेजना के साथ बताते हुए उन के भाव कुछ ऐसे रहते हैं कि ‘पी रहे हैं ग्रीन टी, चाय मत समझ लेना.’ पीने से ज्यादा इस फिक्र में जीते हैं, हाय, दुनिया को खबर कैसे हो. ग्रीन टी पीने की पड़ोसी, साथीसहयोगी और फेसबुक फ्रैंड्स को खबर न हो, तो इस के बड़े साइड इफैक्ट होने लगते हैं. पी कर स्लिम होते हैं और बताने की उधेड़बुन में दुबलाते हैं. यहांवहां बताते रहते हैं कि हम चायवाय नहीं पीते, ग्रीन टी पीते हैं. बहुत फायदे हैं इस के. इन की बातें सुन कर साधारण चायपेयक खुद को हेय, बीपीएल, एपीएल टाइप महसूस करने लगते हैं.

आजकल ग्रीन टी का नया हल्ला है. टी बैग स्टेटस सिंबल है. गरम पानी में डुबोना एक क्रिया है, जिस से एक क्लास की गमक उठती है, जो क्लासिकल सा आनंद देती है. सेल्समैन बताते हैं, ये फायदे, वो फायदे, फायदे ही फायदे, एक बार पी कर तो देखें. जिस ने भी एक बार पी कर देखा, फिर सेल्समैन के जरिए कंपनी को फायदा ही फायदा है. पीने वाले को फायदा हो न हो, बताने का सुख जरूर हासिल हो जाता है कि ‘क्या है कि चायवाय सूट नहीं करती हमें, इसलिए ग्रीन टी पीते हैं.’ ऐसा बताते हुए वे सामने वाले पर अपना रोब सा जमा लेते हैं.

बहुत से लोग इन दिनों ग्रीन टी के औनलाइन बागानों में टहलते पाए जाते हैं. इन्हें किसी खास ब्रैंड की तलाश रहती है. ऐसे लोग बिना पिए भी यह बताने के लिए उत्तेजित सी अवस्था में रहते हैं कि उन के दिन की शुरुआत ग्रीन टी से होती है और जब से ग्रीन टी पीने लगे हैं, सारा आलस व थकान गायब सी हो गई है. दिनभर स्फूर्तिताजगी उन के आगेपीछे टहलती रहती है. यह अलग बात है कि पत्नी के ताने भी उन्हें पार्क तक टहलने को मजबूर नहीं कर पाते.

साधारण चायपेयकों के लिए चाय का मतलब पत्ती, दूध, अदरक, इलायची का मिलाजुला अटूट गठबंधन होता है, जिस की चुस्कियों के साथ वे डोनाल्ड ट्रंप, बलूचिस्तान, कश्मीर, पैलेटगन, ओलिंपिक, वाडा, नाडा, पुरस्कार वापसी, असहिष्णुता, गाय, कालाधन, जुमले, अच्छे दिनों से गुजरते हुए समूचा ब्रह्मांड घूम आते हैं. ग्रीन टी वाले कप से बाहर निकलते ही कुम्हलाने लगते हैं. किसी दिन ग्लोबल वार्मिंग के लिए भी वे लोग दूध वाली चाय को जिम्मेदार ठहरा दें तो कोई आश्चर्य नहीं. कालेज के दिनों की एक दोस्त है, जबतब फेसबुक पर ग्रीन टी पीते हुए सैल्फी शेयर करती रहती है. एक दिन पारदर्शी मग के साथ अपारदर्शी फीलिंग्स शेयर की, ‘ड्रिंकिंग ग्रीन टी विद लिस्ंिनग चार बोतल वोदका.’ मैं ने शेयर किया, कमाल है, ग्रीन टी के साथ चार बोतल वोदका और उस से भी तगड़ा कमाल यह कि ‘चार बोतल वोदका’ के साथ ग्रीन टी. कैसे कर लेती हो यह सब. कहने लगी, ‘तुम औलटाइम बैकवर्ड ही रहोगे, यह कंट्रास्ट का दौर है, लाइफ में स्टाइल, ड्रैस, आइडियाज, अंडरगारमैंट्स तक सबकुछ कंट्रास्ट में चाहिए. इस से कम में कुछ स्वीकार नहीं.’ पढ़ कर मैं चौंक उठा. मुझे डर लगा, कहीं यह कंट्रास्ट हस्बैंडवाइफ के रिश्तों तक न खींच बैठे. क्या पता उत्तेजना का आधिक्य कहां तक ले जाए.

आजकल मेरे घर में भी कइयों को ग्रीन टी का चस्का लगा है. सुबह तब तक आलस्य से आलिंगनबद्ध पाए जाते हैं जब तक कि कोई उन्हें एक कप ग्रीन टी नहीं बना दे. फिर लंबा लैक्चर इस के फायदों के साथ मेरी दूध वाली चाय में उड़ेलते हैं. उफ, ग्रीन टी का इतना कड़वा स्वाद, उस समय कोई मेरे से पूछे. ऐसेऐसे परमआलसी देखता हूं जो संस्कार चैनल भी तब बदलते हैं जब पत्नी रिमोट ढूंढ़ कर देती है और दिनभर अपनी स्फूर्ति का सारा श्रेय ग्रीन टी को देते नहीं थकते हैं. मेरे एक सहकर्मी हैं, जो कभी टाइम से औफिस नहीं आते और ऊपर से तुर्रा यह कि जब से ग्रीन टी पीने लगे हैं, हर काम वक्त पर निबटाने लगे हैं. ‘अरे, आप ग्रीन टी नहीं पीते, पी कर देखिए न.’ साथ में पुरजोर तरीके से यह सलाह जरूर नत्थी करेंगे. इतना दबाव तो भारत भी पाकिस्तान पर वार्त्ता के लिए नहीं डाल पाता, जितना ग्रीन टी वाले मेरे जैसे साधारण चायपेयकों पर डालते रहते हैं.

महल्ले में कई तो इस कदर कुख्यात हो चुके हैं कि हरदम ग्रीन टी की पिनक में रहते हैं और ग्रीन टी के चलतेफिरते पौधे से नजर आते हैं. पास से निकलो, तो हराभरा सा एहसास छोड़ते रहते हैं. जरा सा छेड़ दो, ‘विपिन, बड़े तंदुरुस्त से, स्लिम से, हैंडसम से नजर आ रहे हो, किस चक्की का आटा खाते हो आजकल.’ सुन कर विपिन का जायका बिगड़ जाता है, ‘खाते नहीं हैं, पीते हैं आजकल, ग्रीन टी पीते हैं. हम और हम ग्रीन टी पीने वालों की बात ही कुछ और है.’ और इतना कह कर वे अपनी बात कह कर आगे निकल जाते है. हम जैसे लोग वहीं खड़े रह जाते हैं.

मेरी पड़ोसिन सुबहसुबह बालकनी में आ कर अपने भीगे बालों को झटकते हुए आवाज लगाती है, ‘अजी, मेरी ग्रीन टी तैयार हुई.’ इस झटके की फुहार अड़ोसीपड़ोसी, राह गुजरते लोगों तक पहुंच जाती है और वे ठिठक कर जायजा सा लेने लगते हैं कि देखें, तैयार हुई कि नहीं. उन की ज्यादा जिज्ञासा इस बात में रहती है कि ग्रीन टी तैयार नहीं हुई, तो देखें क्या होता है. कुछ यहांवहां फूलपत्ती सी ढूंढ़ने लगते हैं. कुछ को अचानक कोई अर्जेंट कौल याद आ जाती है और स्मार्टफोन में झांकने के बहाने कान इधर खींच कर लंबे कर देते हैं. यह माजरा देख भीतर ‘अजी’ कुढ़ते रहते हैं, रिक्वैस्ट करते रहते हैं कि तुम ये सब को सुना कर फरमाइश मत किया करो.

‘हायहाय, क्यों न करूं, ग्रीन टी जो पीती हूं, तुम्हारी तरह कोई चायपियक्कड़ थोड़े ही हूं. पूरे जहान को सुनाऊंगी, समझे.’

सच, साइडइफैक्ट तो इधर भी कम नहीं दिखते. सुबहसुबह यह दृश्य राहगीरों के लिए खासा रसदार होता है और वे बिन पिए ही हरे से हो जाते हैं. कुछ के लिए यहीं प्रात:भ्रमण का उद्देश्य पूरा हो जाता है. सुबहसुबह पार्क में कई मोहतरमाओं के वार्त्तालाप का मुख्य विषय भी ग्रीन टी होता है. मैं चाल धीमी कर, कान लगा कर सुनता हूं. ‘हायहाय, सुबह जब तक एक बड़ा कप ग्रीन टी नहीं ले लेती, कुछ करने का मन ही नहीं करता है.’‘अरे, मैं ने तो बैड टी को ग्रीन टी से रीप्लेस कर दिया है. बौडी से सारे टौक्ंिसस निकल जाते हैं.’

‘वैसे, दफ्तर से आते ही मेरे को एक कप ग्रीन टी जरूर चाहिए ही चाहिए. थकान यों भागती है जैसे दफ्तर से हम.’

यों, पता इन की उम्र का भी नहीं चलता. चाहें तो इस का श्रेय ग्रीन टी को आप दे सकते हैं, लेकिन सिर्फ अपने रिस्क पर, क्योंकि न पीने वालों के लिए ग्रीन टी के साइड इफैक्ट कुछ ज्यादा ही होते हैं. फिर समापन इस रिसर्च की घोषणा के साथ होता है कि ग्रीन टी के बड़े फायदे हैं. अब तो ग्रीन टी कैंसर तक को ठीक करने लगी है. सुनते ही एकाएक मेरी चाल तेज हो जाती है. क्या पता, उन्हें आसपास मेरी उपस्थिति कैंसर की तरह खटक रही हो. वैसे भी, कुछ खास लोगों की नजर में हम जैसे आम लोग कैंसर जैसे ही हैं.

पंखुड़ी

समझते हैं क्या वो मुझे

एक पंखुड़ी गुलाब की

अब तो मैं हो ही चुकी

अपने हुस्ने जनाब की

प्यार तो मैं ने किया है

इजहार करना है उन को

बाग में खिली थी मैं जब

देख मुसकराए वो मुझे

करीब वो जब आए मेरे

खुशबू बन लिपट गई उन से

रेशम सी नाजुक त्वचा

स्पर्श मखमल का

होंठों से होंठ लगें

तो आ जाता है

प्यार का सैलाब

फिर दिल मेरा आंहें भरता है

डूब जाते हैं वो निगाहों में

करार दिल को तब मेरे आता है

एक पंखुड़ी गुलाब की

हो ही चुकी

हुस्ने जनाब की.

– सुंदर चौहान

जेटली के ‘आम’ बजट में बहुत कुछ है ‘खास’

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोक सभा में आम बजट पेश किया. लोक सभा के सदस्य ई अहमद के देहांत के बाद अटकलें लगाई जा रही थी कि आम बजट आज पेश नहीं होगा. पर स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सांविधानिक गरिमा को बनाए रखने के लिए आम बजट पेश करने की अनुमति दी. बीते कुछ महीनों में देश की अर्थव्यवस्था में इतने बड़े बदलाव किए गए हैं कि आम बजट को लेकर बहुत सी आशंकायें जताई जा रही थी.

इस बार का बजट ऐतिहासिक बजट था क्योंकि इस बार से रेल बजट का आम बजट में विलय कर दिया गया है. इस बजट को वित्त मंत्री ने 10 बिंदुओं पर केंद्रित किया था-

1. किसानों का विकास

2. ग्रामीण इलाकों में रोजगार के अवसर बढ़ाना और बुनियादी ढांचे बनाना

3. युवाओं के लिए अच्छी शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अधिक से अधिक अवसर

4. गरीब और बुनियादी सुविधाओं से वंचित लोगों के लिए स्वास्थय सुविधायें, सामाजिक सुरक्षा और आवास सुनिश्चित करना

5. आधारभूत संरचना

6. वित्तीय संस्थाओं का विकास और स्थिरता

7. डिजिटल अर्थव्यवस्था

8. आम आदमी के सहयोग से योजनाओं और पोलिसीयों का प्रभावकारी संचालन

10. ईमानदारी से टैक्स भरने वालों का सम्मान

पढ़िए आम बजट में क्या था खास-

1. किसानों को नई सौगातें

– वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण की शुरुआत किसानों के साथ की. उन्होंने कहा कि नोट बंदी से होने वाले लाभों को किसानों तक पहुंचाया जाएगा. इस बार के बजट में किसानों को 10 लाख दिया जाएगा. जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों पर ज्यादा फोकस किया गया है.

– अगले 5 वर्षों में किसानों की आय दोगुनी हो जाएगी.

– फसल बीमा योजना को 9,000 करोड़ की राशि दी जाएगी.

– कृषि विज्ञान केन्द्रों में मिनी लैब की स्थापना की जाएगी, जहां किसान अपने खेत की मिट्टी की जांच करवा सकेंगे.

– छोटे और सीमांत किसानों की मदद के लिए 1900 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे.

– किसान बीमा योजना के लिए आने वाले वित्तीय वर्ष में 13000 करोड़ उपलब्ध करवाया जाएगा.

‘माइक्रो इरीगेशन फंड’ बनाया जाएगा जिसे 5000 करोड़ रुपए दिए जाएंगे.

– मार्केट रिफोर्म लाए जाएंगे ताकि किसानों को उनके उत्पाद का अधिक से अधिक मुनाफा मिले.

– डेयरी प्रोसेसिंग के लिए नई संरचनायें बनाई जाएंगी जिसके लिए 8000 करोड़ रुपए दिए जाएंगे.

2. ग्रामीण इलाकों का होगा विकास

– मनरेगा को आने वाले वित्तीय वर्ष में 48,000 करोड़ रुपए दिए जाएंगे.

– 50,000 ग्राम पंचायतों को 2019 तक गरीबी मुक्त बनाने के लिए उचित प्रयास किए जाएंगे.

– स्वच्छ भारत मिशन के तहत आरसेनिक वाले इलाकों में स्वच्छ पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए ‘नेशनल रूरल ड्रिंकिंग प्रोग्राम’ चलाया जाएगा.

3. युवा के विकास के लिए तत्पर सरकार

देश में सबसे अधिक आबादी युवाओं की है. पर युवा विकास में पीछे हैं.

– सेकेन्डरी शिक्षा को प्रोत्साहित करने के लिए फंड की व्यवस्था की जाएगी.

‘स्वंय’ नामक एक प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा जहां युवा ऑनलाइन कोर्स के साथ साथ विभिन्न विषयों पर चर्चायें भी कर सकेंगे. बाद में डीटीएच द्वारा स्वंय का दायरा बढ़ाया जाएगा.

–  ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ अब सारी परिक्षायें करवाएगी. जिससे सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड पर दवाब कम हो जाएगा.

– लेदर और फुटवेयर सेक्टर के लिए स्पेशल रोजना स्किम लागू की जाएगी.

– 5 स्पेशल टूरिज्म जोन बनाए जाएंगे जिससे रोजगार के नए अवसर खुलेंगे.

4. गरीबों और महिलाओं का सशक्तिकरण

– आंगनवाड़ी केन्द्रों में महिला शक्ति केन्द्र खोले जाएंगे जिसके लिए 500 करोड़ रुपए दिए जाएंगे.

– गर्भवती महिलाओं के अकाउंट में ही 6000 रुपए ट्रांसफर किए जाएंगे.

– ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य एक गंभीर समस्या है. डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए मास्टर्स में 5000 सीट बढ़ाए जाएंगे. इसके साथ ही झारखंड और गुजरात में एम्स की स्थापना की जाएगी.

– वरिष्ठ नागरिकों के लिए उनकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारीयों के साथ विशेष आधार कार्ड लाए जाएंगे.

5. रेल बजट में यह है नया

वित्त मंत्री ने रेलवे के लिए 1 लाख 31 हजार करोड़ आवंटित किए हैं.

– यात्रियों की सुरक्षा के लिए ‘रेल संरक्षा कोड’ बनाया जाएगा जिसे अगले 5 वर्ष में 1 लाख करोड़ आवंटित किया जाएगा. यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अंतर्रराष्ट्रीय स्तर पर मदद ली जाएगी.

– 3,500 किमी नए रेलवे ट्रेक बिछाए जाएंगे. 2020 तक सारे इंसानों वाले फाटक बंद कर दिए जाएंगे.

– टूरिज्म और तीर्थ यात्रा के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी.

‘कोच मित्र’ पर सारी परेशानियां रजिस्टर की जाएंगी.

– 2019 तक सभी कोचों में बायो टॉयलेट लगाए जाएंगे.

– ई-टिकट करवाने में कोई सर्विस चार्ज नहीं लगेगा.

– नई मेट्रो रेल पॉलिसी बनाई जाएगी. जिससे यात्रा सुगम होगी.

– नेशनल हाईवे को 64000 करोड़ देने का प्रावधान.

6. तो डिजिटल हो जाएगा पूरा देश

– भारत नेट प्रोजेक्ट को 10,000 करोड़ का प्रावधान. इस प्रोजेक्ट के तहत 2018 के अंत तक सभी ग्राम पंचायतों को कम टैरिफ में हाई स्पीड इंटरनेट मिलेगा.

7. आम आदमी को मिली टैक्स में राहत

आयकर में वित्त मंत्री ने मध्यम वर्ग को राहत दी है. 3-5 लाख की सालाना इनकम वाले लोगों को सिर्फ 5% आयकर देना होगा. इसके साथ ही 5 लाख तक की इनकम के आईटीआर फोर्म की भी साइज घटा दी जाएगी.

– वित्त मंत्री ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ 1 अप्रैल को जीएसटी लागू करने की बात कही.

– एमएसएमई सेक्टर की वो कंपनियां जिनकी सालाना आय 50 करोड़ से कम हैं उनके आयकर में कटौती की गई है.

– 3 लाख से ज्यादा का कैश ट्रांसेक्शन बंद कर दिया गया है.

– पहली बार आईटीआर फाइल करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी.

8. राजनीतिक पार्टियों के बीत गए अच्छे दिन

– अब राजनीतिक पार्टियां 2000 से अधिक का कैश डोनेशन नहीं ले सकेंगी.

– सभी पार्टियों को नियत समय में ही आईटीआर फाइल करना होगा.

9. रक्षा क्षेत्र के लिए ये प्रावधान

नए बजट में रक्षा क्षेत्र को 2 लाख 74,114 करोड़ आवंटित किया गया है.

– एक सेन्ट्रलाइज्ड डिफेंस ट्रेवल सिस्टम के तहत टिकट बुक कर सकेंगे देश के रक्षक.

10. गांधी जी के जन्मदिन को मनाने की घोषणा

यूं तो बजट में बहुत कुछ नया था. पर गांधी जी के जन्मदिन के भव्य समारोह की घोषणा समझ के परे है. राष्ट्रपिता के जन्मदिन से भी अधिक महत्वपूर्ण कई चीजें थी जिनका बजट में होना जरूरी था.

2019 में गांधी जी के 150वें जन्मदिन को बड़े स्तर पर मनाया जाएगा.

इन सब के अलावा वित्त मंत्री ने बजट भाषण में कुछ शेर भी पढ़ें. अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले एक साल में ये कागजी बातें कितनी सच होती हैं.

वेटर ने सुधार दी सचिन की बैटिंग

विश्व के महानतम क्रिकेटर्स में से एक सचिन तेंदुलकर के खेल और व्यवहार के बारे में आप कई रोचक बातें जानते होंगे. सूत्रों की मानें तो सचिन को एक वेटर ने उनकी बैटिंग को सुधारने में मदद की. क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले खिलाड़ी की मानें तो हमें हमेशा अपना मस्तिष्क खुला रखना चाहिए.

सचिन की मानें तो चेन्नई में एक बार एक वेटर उनके पास आया और उसने सचिन से कहा कि यदि आप बुरा ना मानें तो मैं आपको कुछ बताना चाहता हूं. जब सचिन ने उन्हें इजाजत दी तो उसने कहा कि आपका एल्बो गार्ड आपके बैट को घूमने से रोक रहा है. इस सलाह पर सतिन ने कहा कि वह (वेटर) 100 फीसदी सही था.

सचिन की मानें तो वह जानते थें कि एल्बो गार्ड सुविधाजनक नहीं है, लेकिन वह इसे नजरअंदाज कर रहे थे, लेकिन वेटर की सलाह के बाद उन्होंने इसके डिजाइन में बदलाव कराया.

गौरतलब है कि करियर के शुरुआती दौर में सचिन एल्बो गार्ड नहीं पहनते थे लेकिन कुछ वर्षों बाद वे इसे पहनने लगे थे. इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया जैसी उछाल वाली पिचों पर सचिन ने इसका उपयोग करना शुरू कर दिया था, चेन्नई के रेस्टोरेन्ट में वेटर से मिली सलाह को गंभीरता से लेते हुए लिटिल मास्टर ने अपने एल्बो गार्ड को फिर से डिजाइन करवाया ताकि वे फ्री होकर बल्लेबाजी कर सकें.

मेरी भाभी मुझ पर आरोप लगाती हैं कि मेरे और भैया के बीच गलत संबंध हैं. समझ नहीं आता क्या करूं.

सवाल

मैं अविवाहित युवती हूं. माता पिता नहीं हैं. मैं भाई भाभी के साथ रहती हूं. समस्या यह है कि मेरी भाभी मुझ पर आरोप लगाती हैं कि मेरे और भैया के बीच गलत संबंध हैं. मुझे उन का यह आरोप बहुत परेशान करता है. समझ नहीं आता कि भैया से इस बारे में बात करूं या नहीं, सलाह दें.

जवाब

लगता है आप की भाभी को आप का उन के साथ रहना अखरता है. वे आप के प्रति अपनी व आप के भैया के जिम्मेदारी से बचने के लिए ऐसा आरोप लगा रही है. भाई से अपनी शादी कराने के लिए कहें. जैसा भी पति मिले, उस के साथ शादी करने को हां कह दें. यह क्लेश सब को भारी पड़ सकता है.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

मोबाइल बैंकिंग : आप का बैंक आप के हाथ

मोबाइल बैंकिंग आज बैंकिंग व्यवस्था का प्रमुख अंग हो गया है. बैंकिंग के क्षेत्र में यह मील का पत्थर है. ग्राहकों को कहीं भी, कभी भी बैंकिंग और व्यवसाय के लिए एक सुरक्षित व सुविधाजनक माध्यम मिल गया है.  मोबाइल बैंकिंग पैसों के भुगतान करने का एक सुरक्षित माध्यम है क्योंकि डैबिट कार्ड नंबर या पिन जैसी जानकारी के कारण यह ग्राहकों को जोखिम में नहीं डालता है. मोबाइल बैंकिंग से बहुत सारी बैंकसेवाएं सुरक्षित तरह से मिल जाती हैं. फं ड ट्रांसफ र से ले कर बहुत सारे लेनदेन इस के जरिए सुलभ तरीके से होने लगे हैं. खाते में बची शेष राशि की और मिनी स्टेटमैंट से ले कर पासवर्ड व अकाउंट संबंधी तमाम जानकारियां मोबाइल से ही मिल जाती हैं.

बैंकिंग की शुद्ध सेवाओं के साथ ही साथ मोबाइल रिचार्ज, हवाईजहाज के टिकट बुक कराना, बिल का भुगतान करना, चैकबुक का अनुरोध करना, चैक भुगतान रोकने जैसी तमाम सुविधाएं भी इस के जरिए हासिल की जा सकती हैं. मोबाइल बैंकिंग में लगातार सुधार किया जा रहा है. मोबाइल बैंकिंग उन ग्राहकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भी सक्षम बनती जा रही है जिन के पास निम्न स्तर के या जावा रहित हैंडसैट हैं. काफी सेवाएं एसएमएस आधारित मोबाइल बैंकिंग सेवा द्वारा भी प्रदान की जाती हैं. 

दुनियाभर में लोकप्रिय

2001 में फिलीपींस में सीमित स्तर पर शुरू हुई मोबाइल बैंकिंग ने दशक के अंत तक तकरीबन सारी दुनिया में बैंक के विकल्प के रूप में अपनी जगह बना ली है. पाकिस्तान में वित्तीय सेवाएं देने वाली अग्रणी कंपनी मोनेट ने अपनी मोबाइल बैंकिंग के दम पर वहां के प्रमुख बैंकों व वित्तीय संस्थानों को पछाड़ दिया है.

ग्लोबल स्तर पर नौर्वे की कंपनी टेलीनौर की गिनती दुनिया के अग्रणी मोबाइल बैंकिंग सेवाप्रदाता के रूप में की जाती है. स्टौकहोम की बर्ग इनसाइट इंडस्ट्री रिसर्च कंपनी के अनुसार, 2009 में ग्लोबल स्तर पर पैर पसारने वाली मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों की संख्या वर्ष 2020 में 40 गुना तक बढ़ जाएगी. उस समय दुनिया में मोबाइल बैंकिंग के 189.4 करोड़ ग्राहक होंगे, जिन में से 78 फीसदी ग्राहक एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के उभरते हुए बाजारों वाले देशों के होंगे.

अफ्रीकी देशों में इंटरनैट और बैंकों की व्यापक पहुंच नहीं होने के कारण वहां मोबाइल बैंकिंग की सेवा खासी लोकप्रिय है और तेजी से बढ़ रही है. मोबाइल बैंकिंग के मौजूदा विस्तार से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह है कि विकसित देशों के मुकाबले विकासशील देशों में मोबाइल फोन औपरेटर वित्तीय सेवाएं देने का प्रमुख जरिया बन रहे हैं.  इस का सब से बड़ा उदाहरण हाल के वर्षों में अफ्रीकी देशों में आई मोबाइल ट्रांसफर की क्रांति है, जिस के चलते भारत की मोबाइल कंपनी एयरटैल सहित दुनिया के कई दिग्गज मोबाइल औपरेटर और वैल्यू एडेड सेवाप्रदाता अफ्रीका का रुख कर रहे हैं.

मोबाइल मनी सर्विसेज का उपयोग करने के मामले में केन्या दुनिया का सब से अग्रणी देश है. कम्यूनिकेशंस कमीशन औफ केन्या के जुलाई 2012 तक के आंकड़ों के अनुसार, केन्या के करीब 2.9 करोड़ मोबाइलधारकों में से 65 फीसदी यानी करीब 1.9 करोड़ यूजर मोबाइल मनी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं. केन्या में मोबाइल मनी सेवाओं के जरिए उपयोगी बिलों का भुगतान, स्कूल फीस भरने, स्टोर पर खरीदारी करने, एमटिकटिंग, फोन टौपअप्स, एटीएम से नकदी निकालने आदि कार्य भी किए जाते हैं. सफारीकौम केन्या में मोबाइल मनी ‘एम पैसा सर्विस’ शुरू करने वाली पहली कंपनी है. करीब 5 साल पहले इस की शुरुआत हुई और फिलहाल एमपैसा के करीब 1.5 करोड़ ग्राहक हैं.

जेब में बचत बैंक

बैंक अपने ग्राहकों को मोबाइल बैंकिंग सेवा के लिए कई सारे विकल्प दे रहे हैं. आप अपने बैंक खाते को मोबाइल नंबर से जोड़ सकते हैं. इस के तहत, बैंक आप को 7 अंकों वाला एमएमआईडी (मोबाइल मनी आईडैंटिफायर) नंबर और मोबाइल पिन (एमपिन) देगा. एमपिन पासवर्ड की तरह इस्तेमाल होगा. इस के जरिए आप अपनी पूंजी को दूसरे खाते में ट्रांसफ र कर सकते हैं, जैसे कि अभी दूसरे खाते में राशि का ट्रांसफर नैटबैंकिंग या बैंक शाखा जा कर करते हैं. इस के अलावा, बैंक अपने मोबाइल एप्लीकेशन सौफ्टवेयर भी देते हैं जिसे आप बैंक को एसएमएस या बैंक जा कर अपने स्मार्टफोन पर डाउनलोड कर सकते हैं.

अब बैंकों ने अलगअलग नामों से अपनी मोबाइल बैंकिंग सेवा भी शुरू कर दी है. भारतीय स्टेट बैंक का एप्लीकेशन एसबीआई फ्रीडम, आईडीबीआई बैंक की गो मोबाइल, और आईसीआईसीआई बैंक का आईमोबाइल नाम से है. इसी तरह से दूसरे तमाम बैंकों की मोबाइल सर्विस के अलगअलग नाम हैं. ऐसे ग्राहक जो नैटबैंकिंग का इस्तेमाल लैपटौप या डैस्कटौप आदि के जरिए करते हैं, बैंक उन्हें मोबाइल बैंकिंग के लिए खुद ही पंजीकृत कर लेते हैं. यानी, ग्राहक अपने स्मार्टफोन पर इंटरनैट के जरिए बैंकिंग सेवाएं प्राप्त कर सकता है. 

मोबाइल बैंकिंग को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुचाने के लिए बैंक मौजूदा ग्राहकों को चुनिंदा एटीएम के जरिए भी रजिस्ट्रेशन की सुविधा दे रहे हैं. इस के अलावा, ग्राहक बैंक की शाखा में जा कर अपने पहचानपत्र के साथ मोबाइल बैंकिंग के लिए रजिस्ट्रेशन भी करा सकते हैं. मोबाइल बैंकिंग का भी दायरा बढ़ा है. बिना बैंक गए और कोई लिखतपढ़त किए बगैर घर बैठे मोबाइल के जरिए बैंकिंग की सहूलियत ने इसे काफी तेजी से लोकप्रिय बनाया है.          

सावधानी जरूरी

मोबाइल बैंकिंग के लोकप्रिय होने के साथ ही साथ इस के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हुए हैं. इन से थोड़ा सतर्क रह कर और कुछ सावधानियां बरत कर बचा जा सकता है. मोबाइल बैंकिंग करने वालों को इन का ध्यान रखना जरूरी होता है.

मोबाइल बैंकिंग ऐक्टिवेट कराने के बाद सब से पहले यह देखें कि आप के फोन का औटोलौक काम कर रहा है या नहीं. यदि यह ऐक्टिवेट नहीं है तो सब से पहले मोबाइल में औटोलौक को चालू करें, ताकि जब फोन यूज में नहीं होगा तो लौक अपनेआप लग जाएगा. लौक खोलने के लिए पासवर्ड ऐसा चुनें जिसे कै्रक कर पाना मुमकिन न हो. इस के लिए 8 या इस से ज्यादा कैरेक्टर वाले पासवर्ड में आप कैरेक्टर (अक्षर), न्यूमेरिकल्स (अंक) और स्पैशल कैरेक्टर्स को यूज कर स्ट्रौंग पासवर्ड तैयार कर सकते हैं.

टैक्स्ट मैसेज द्वारा बैंकिंग संबंधी कोई भी अहम या गोपनीय सूचना, मसलन अकाउंट नंबर, पासवर्ड, पैनकार्ड और जन्मतिथि आदि का खुलासा न करें. हैकर्स इन सूचनाओं का इस्तेमाल आप के बैंक अकाउंट को हैक करने में कर सकते हैं. मोबाइल बैंकिंग संबंधी धोखाधड़ी से बचने के लिए यह भी जरूरी है कि अपने मोबाइल को सिक्योरिटी सौफ्टवेयर से प्रोटैक्ट करें.

मोबाइल में कोई नया एप्लीकेशन, गेम, पिक्चर, म्यूजिक या वीडियो आदि डाउनलोड करते समय ध्यान रखें कि जहां से आप डाउनलोड कर रहे हैं, वह साइट भरोसेमंद हो. कई बार ऐसी फाइलों के जरिए अकसर आप का फोन हैकिंग का शिकार हो जाता है या उस में वायरस भी भेजा जा सकता है. 

अपने स्मार्टफोन को वायरस से बचाए रखने के लिए जरूरी है कि जब आप ब्लूटूथ का इस्तेमाल न करें तो उसे स्विच औफ  कर दें. ब्लूटूथ औन रहने से हैकर्स को आप के मोबाइल तक पहुंचने का मौका मिल सकता है. मोबाइल को हैकिंग और वायरस से बचाए रखने के लिए लगातार फायरबौल व सैफ्टी सौफ्टवेयर को अपडेट करते रहना चाहिए.

मोबाइल फोन बनाने वाली या कुछ सौफ्टवेयर कंपनियां इन का समयसमय पर अपडेटड वर्जन मुहैया कराती रहती हैं, जिन्हें इंस्टौल करते रहना चाहिए. अपने मोबाइल ट्रांजैक्शन को सुरक्षित रखने के लिए रोजाना ब्राउजिंग हिस्ट्री को डिलीट करते रहने की आदत बना लेना अच्छा रहता है. यह आदत आप के लिए फायदेमंद ही रहेगी. 

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें