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करीना कपूर जल्द शुरू करेंगी शूटिंग, दे रही हैं फिटनेस पर ध्यान

साल 2017 अप्रैल में, फिल्म ‘वीरे दी वैडिंग’ की शूटिंग शुरु की जाने वाली है. शशांक घोष निर्देशित इस फिल्म की जानकारी पिछले साल के अंत में ही दी जा चुकी थी. बेटे तैमूर के जन्म के कुछ महीनों बाद ही, इस फिल्म में करीना कपूर लीड रोल में नजर आने वाली हैं. इस फिल्म में करीना के साथ सोनम कपूर, स्वरा भास्कर और शिखा तलसानिया भी काम करेंगी. अभिनेता जावेद शेख भी इस फिल्म में अभिनय करने वाले हैं.

एक्ट्रेस करीना कपूर बेटे तैमूर के जन्म के बाद फिर अपनी फिटनेस पर ध्यान दे रही है. प्रेग्नेंसी के दौरान अपने बढ़े हुए वजन को वे काफी हद तक घटा भी चुकी हैं. हाल ही में ​करीना कपूर को योगा क्लास के बाहर देखा गया था, जहां वे वाकई बहुत फिट दिखाई दे रही है. यहां ली गई कुछ तस्वीरों में बॉलीवुड एक्ट्रेस करीना कपूर खान, ब्लैक कलर की टी शर्ट और एक लूज पैट में क्लास के बाहर अपनी गाड़ी में बैठती नजर आ रही हैं.

हमेशा से फिटनेस फ्रीक रही करीना हैं, अब पहले से भी ज्यादा फिट होने की तैयारी में हैं. ये बात तो हर कोई जानता है कि पिछले ही साल दिसंबर में करीना ने बेटे तैमूर को जन्म दिया है. अब हम आपको बता दें कि करीना कपूर जल्द ही अपनी आने वाली फिल्म वीरे दी वेडिंग में नजर आएंगी और जल्द ही वे इस फिल्म की शूटिंग भी शुरू करने वाली हैं.

इस फिल्म में करीना के साथ सोनम कपूर, स्वरा भास्कर और शिखा तलसानिया भी लीड रोल में अभिनय करने वाली हैं. तो इसी फिल्म को लेकर ही करीना, अपने आप को फिट करने में लगी हुई हैं. कुछ समय पहले ही मां बनी करीना की लेटेस्ट फोटोस् देखकर यही बातें सामने आ रही हैं कि करीना अपने काम को लेकर काफी सीरियस हैं और फिर आगे बढ़ने की तैयारी में आ गई हैं.

यह तो इंसानी फितरत है

अभिनेता के साथ-साथ लेखक व निर्देशक के तौर पर भी सौरभ शुक्ला ने अपनी एक अलग पहचान बनायी है. उन्होंने कई सफलतम फिल्में दी है. अब एक तरफ अपनी फिल्म ‘‘जॉली एलएलबी 2’’ को लेकर उत्साहित हैं, तो दूसरी तरफ वह नाटक ‘‘बर्फ’’ को लेकर चर्चा में हैं. पूरे 18 साल बाद सौरभ शुक्ला ने थिएटर में वापसी करते हुए 2015 में पहला नाटक ‘‘टू टू टैंगो थ्री टू जाइव’’ किया था. अब वह दूसरे नाटक ‘बर्फ’ में अभिनय कर रहे हैं. जिसके वह लेखक व निर्देशक भी हैं.

आपके करियर में जो पड़ाव व मोड़ आए हैं, उनसे आपकी निजी जिंदगी व कैरियर पर क्या क्या असर हुए?

मेरे करियर में बहुत मोड़ आए हैं और बहुत से मोड़ चलते रहते हैं. पर कोई नाटकीय मोड़ नहीं लगता. मैं राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में था. वहां नौकरी कर रहा था, यह मेरे करियर का पहला मोड़ था.  उससे पहले मैं अमैच्योर थिएटर किया करता था. उसके बाद शेखर कपूर के निर्देशन में फिल्म ‘‘बैंडिट क्वीन” की, तो मैं मुंबई आ गया. फिर शेखर कपूर ने मुझे टीवी सीरियल करने के लिए बुलाया. फिर सुधीर मिश्रा ने मुझे ‘इस रात की सुबह नहीं’ नामक फिल्म में काम करने का अवसर दिया. इसी फिल्म के अवार्ड के लिए मुझे नॉमीनेशन मिला. ‘बैंडिट क्वीन’ रिलीज होने के बाद लोगों ने मुझे अलग तरह से देखना शुरू किया. मैं शुरू से ही मोटा था. तो मेरे पास एक ही तरह के किरदार आते थे, पर लोगों ने मुझे मोटापे के लिए नहीं, बल्कि एक किरदार के लिए याद किया. चीजें बदलती रहीं, पर मेरा बुरा वक्त कभी नहीं आया. क्योंकि मैं हमेशा लिखता रहा.

फिल्म ‘सत्या’ मैंने अनुराग कश्यप के साथ मिलकर लिखी थी. इसमें कल्लू मामा का किरदार निभाया था. मेरा किरदार हिट हो गया, फिल्म हिट हो गयी, पर पूरे 6 साल तक मैं घर पर खाली बैठा रहा. मुझे कोई काम नही मिला. लोगों के फोन आते थे कि सर एक दिन का छोटा सा कैमियो रोल है. एक दिन के कैमियो रोल के लिए ना तो पैसे मिलते थे ना कलाकार के तौर पर पहचान और ना ही कलाकार के रूप में संतुष्टि. छह साल तक यही सिलसिला चला. एक दिन मैंने सोचा था कि मेरे अंदर वास्तव में प्रतिभा है या सिर्फ मुझे ही लगता है? उसके बाद मुझे अनुराग बसु की फिल्म ‘‘बर्फी मिली’’. फिर ‘‘जॉली एलएलबी’’ व ‘‘लाहौर” मिली. चीजें बदलती चली गयी. अब कोई फोन करके मुझसे नही कहता कि सर एक दिन का कैमियो रोल है. अब बड़ा रोल मिल रहा है, अच्छे पैसे मिल रहे हैं. कुल मिलाकर सफर अच्छा जा रहा है. फिर यह तो हम पर निर्भर करता है कि हम अपने सफर को किस नजरिए से देखते हैं. आप चाहें तो कुढ़ सकते हैं, पर कुढ़ने से सिर्फ नुकसान होता है. कुढ़ने से पैसा भी नही आता. अब 10 फरवरी को मेरी नई फिल्म ‘‘जॉली एलएलबी 2’’ प्रदर्शित होगी. जो कि ‘जॉली एलएलबी’’ का सिक्वअल है.

पिछले चार-पांच वर्ष से मेरी समझ में आ गया है कि अंततः यह कोई निर्णय नहीं लेने वाला है कि आप कहां जा रहे हैं. किस मोड़ पर पहुंचे हैं. आपको किसको साबित करना है. मुद्दा इतना है कि आप कितनी बार हंसे, कितनी बार रोए. आपने खुद कितनी बार अपने कैरियर में उथान महसूस किया. इसलिए मैं फिल्में अपनी पसंद की ही कर रहा हूं. बीच में मैं सेमीनार में चला जाता हूं.

‘‘जॉली एलएलबी’’ और ‘‘जॉली एलएलबी 2’’ में कितना फर्क है?

दोनों अच्छी फिल्में हैं. पर यह सवाल गलत है. दोनों फिल्मों का विषय एक नहीं है, सिर्फ प्रिमायसेस एक है. दोनों अलग-अलग कहानियां हैं. दो अलग अलग मुद्दे हैं. दोनों फिल्मों की कहानी का आधार कानून व्यवस्था ही है. मगर कहानी अलग है. किरदार अलग है.

पर आपका किरदार वही है. पिछली बार इसी किरदार के लिए आपको राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था. तो इस बार भी?

मैं कैसे तय करुंगा कि मुझे राष्ट्रीय पुरस्कार मिलना चाहिए. मैं न कमेटी में हूं. मैं बहुत अच्छा टेबल टेनिस खेलता हूं और फिल्मों में अभिनय करता हूं. हम लिखते या अभिनय करते समय इंज्वॉय करते हैं, उस वक्त हम अवार्ड आदि को लेकर नहीं सोचते. हमें उस किरदार को जीना होता है. सारा ध्यान उसी पर होता है. यह बहुत व्यावहारिक बात है.

तो फिर हर पुरस्कार के बाद विवाद जन्म क्यों लेते हैं?

यह तो इंसानी फितरत है. यह दुनिया ठीक है. दुनिया में कुछ बुरा नही है. पुरानी कहावत है-‘जो हुआ अच्छा हुआ, जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है, जो होगा, अच्छा ही होगा.’ जो होता है, उस पर सवाल नहीं कर सकते? मैं यह नहीं कहता कि मुझे ईर्ष्या या चिढ़न नहीं होती है. मैं भी इंसान हूं. इस संसार में ईर्ष्या बहुत महत्वपूर्ण है.

आपको किस बात ईर्ष्या होती है?

कई बार बेवकूफी वाली बातों पर भी ईर्ष्या होती है. जिस बात से मुझे ईर्ष्या होती है, वह दूसरे का अच्छा काम देखकर होती है कि मैंने इतना अच्छा काम क्यों नहीं किया. मैंने पहले ऐसा क्यों नहीं किया. यह अच्छी ईष्र्या है.इस ईष्र्या ने जीवन भर मेरे अंदर ललक रखी. इसने मुझे असंतोष नहीं दिया. 

‘‘जॉली एलएलबी’’ में आपके साथ अरशद वारसी थे. इस बार ‘‘जॉली एलएल बी 2’’ में आपके साथ अक्षय कुमार हैं?

दोनों से मैं सह कलाकार के रूप में ही मिला हूं. दोनों के साथ मेरा अनुभव बहुत अच्छा रहा. मैंने जितने कलाकारों के साथ काम किया, आज तक किसी के भी साथ मेरा अनुभव गलत नहीं रहा. मेरा मूल अनुभव फिल्म के साथ रहता है. जब अच्छी फिल्म बनती है, तो सब कुछ अच्छा ही होता है. अरशद वारसी बहुत कर्मठ इंसान हैं. अक्षय कुमार भी मेहनती हैं. वह सुबह चार, साढ़े चार बजे उठते हैं. वह सुबह सात बजे सेट पर पहुंच जाते थे. वह कभी लेट नहीं होते थे. आप उनकी फिल्मोग्राफी देखेंगे, तो पाएंगे कि उन्होंने हर तरह की फिल्में की हैं. ‘एअरलिफ्ट’ व ‘रूस्तम’ की. ‘जॉली एलएल बी 2’’ की है. उनके अंदर संभावनाएं हैं. वह उन्हीं संभावनाओं को अपनी जिंदगी में पाना चाहते हैं. वह किस शिद्दत से काम करता है. ‘जॉली एलएल बी 2’ के सेट पर अक्षय कुमार का भी काम अच्छा है. अक्षय कुमार ने इससे पहले ‘स्पेशल छब्बीस’ सहित दूसरी फिल्मों में उस तरह का काम नहीं किया है, जिस तरह का बेहतरीन काम उन्होंने ‘जॉली एलएलबी 2’ में किया है. ‘एअरलिफ्ट’ का आदमी अलग है. ‘स्पेशल छब्बीस’ का आदमी अलग है. वह बहुत अच्छे कलाकार हैं. उन्हें पता है कि अपना स्टार पॉवर किस तरह बरकरार रखना है. यह बहुत बड़ी बात है. वह अपनी फिल्म को बड़े प्लेटफार्म पर ले आते हैं. मसलन, आमीर खान ने ‘दंगल’ जैसी फिल्म को बड़ा स्केल दे दिया.

अरशद वारसी बहुत अच्छे कलाकार हैं. बहुत प्रतिभाशाली हैं. किस्मत की बात है कि उन्हें वह जगह नहीं मिली, जिसके वह हकदार हैं. इस बात से कोई इंकार नहीं कर सकता कि अरशद वारसी जाने माने कलाकार हैं और उनके साथ काम करने से कोई इंकार नहीं करता. फिल्म निर्माण सिर्फ कला नहीं,  बल्कि व्यवसाय भी है.

देखिए, सभी कहते हैं कि सौरभ शुक्ला अच्छे कलाकार हैं. सौरभ शुक्ला को राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला, मगर कोई सौरभ शुक्ला को लेकर फिल्म नहीं बनाता. यह जरुरी भी नहीं है.

जब आपने अभिनय के क्षेत्र में कदम रखा था. तब टीवी उभर रहा था. अब टीवी बहुत बड़ा माध्यम बन गया है. टीवी में आए बदलाव को लेकर क्या सोचते हैं?

कुछ नहीं सोचता. मैं टीवी नही देखता. मुझे टीवी की प्रोग्रामिंग व टीवी के कार्यक्रम बनाने के तरीकों से निजी स्तर पर सख्त नफरत है. क्योंकि टीवी पर मार्केटिंग वालों ने यह पाया कि सौरभ शुक्ला, तो पैसे ज्यादा मांगते हैं. बल्कि कुछ लोग तो मुफ्त में काम करने को तैयार हैं. तो उन्होंने पूरी प्रोग्रामिंग ही बदल दी. मेरा मानना है कि मेरा बचपन गलत नहीं हो सकता. मुझे बचपन में जो पढ़ाया गया था, वह अलग है. यह जरूरी नहीं है कि जिसे मैं पसंद ना करूं, उससे जुडू. इसलिए मैंने टीवी से दूरी बना ली. अंग्रेजी मेरी भाषा नही है. पर मैंने अंग्रेजी सीरियल ज्यादा देखे, वहां विविधतापूर्ण चीजें देखने को मिली. वैसे वहां भी बुरा काम हो रहा है. टीवी में पिछले 25 वर्षों से सास बहू चल रहा है. कलाकारों के चेहरों पर भाव नजर नहीं आते. मैं टीवी के बारे में सोचता भी नहीं. टीवी देखता भी नही. टीवी को खुद ही अपने बारे में सोचना चाहिए. अब वह जाने. जैसा कर्म करेगा, भगवान वैसा फल देगा.

सिनेमा में हास्य की स्थिति कितनी बनती या बिगड़ती रही है?

सिनेमा में हास्य हमेशा अच्छा रहा है. आज भी अच्छा है.‘‘चुपके चुपके’’ में किस तरह से अपने ऊपर ही किरदार हंसे. कहानीकार किस तरह अपनी ही विसंगतियों पर हंसा है.

हास्य जीवन में हर क्षण, हर वक्त रहता है, दुःख के वक्त भी रहता है. हास्य की वजह से ही हम जी सकते हैं. जब दर्द या गम हद से ज्यादा बढ़ जाता है, तो इंसान रोते हुए नहीं, हंसते हुए नजर आता है. मेरा इतना मानना है कि हास्य या कॉमेडी दो प्रकार का होता है. अपने आप पर हंस लूं या आप पर हंस लूं. आप पर हंस लेना ज्यादा आसान है. पर यह मुझे नीच दरजे की हरकत लगती है. मैं अपने आप पर हंस लेता हूं, वही हास्य मुझे पसंद है. मैं इसी तरह का हास्य पढ़ना या देखना पसंद करता हूं. जब आप अपने आप पर हंस लेते हैं, तब आप दुनिया पर हंस सकते हैं.  

2017 में आपकी दूसरी कौन सी फिल्में आएंगी?

‘जग्गा जासूस ’आएगी. यह मेरी पसंदीदा फिल्म भी है. इसके बाद कमल हासन की फिल्म ‘शाबाश गुल्लू’ आएगी. इसके लेखक कमल हासन हैं, मगर हिंदी रूपांतरण मैंने किया है. मैं अभिनय भी कर रहा हूं. सुधीर मिश्रा की फिल्म और ‘‘और देवदास’’ में मेरी मुख्य खलनायक की बहुत बड़ी भूमिका है. इस फिल्म को लेकर बहुत उत्साहित हूं. इसे हमने लखनऊ में फिल्माया था. एक फिल्म ‘‘लाली की शादी में लड्डू दीवाना’’ की है, जिसमें नसिरूद्दीन शाह के बेटे विवान शाह व कमल हासन की बेटी अक्षरा हासन हैं.

बैंकिंग की 10 बातें महिलाओं के लिए

हर महिला के लिए यह आवश्यक है कि उसे अपने धन के बारे में पूरी जानकारी होने के साथसाथ उस पर पूरा नियंत्रण भी हो. धन और निजी फाइनैंस की बात की जाए तो ये बातें हर महिला को हमेशा याद रखनी चाहिए:

क्या आप के पास अपना बैंक खाता है ?

यदि आप पहले कामकाजी थीं अथवा अभी भी काम कर रही हैं, तो अपने नाम का बैंक खाता होना चाहिए. इस खाते में आप अपनी बचत को सुरक्षित रख सकती हैं और अपने परिवार की आर्थिक मदद कर सकती हैं. इसी तरह यदि आप क्रैडिट कार्ड ले रही हैं तो उसे अपने नाम पर लीजिए. इस से आप का क्रैडिट स्कोर बेहतर होगा और किसी स्थिति में कर्ज लेने के वक्त यह आप के क्रैडिट का तीव्र रिकौर्ड उपलब्ध कराने में सहायता करेगा.

बडे़ निर्णयों में दें योगदान

महिलाओं की प्रवृत्ति होती है कि वे धन एवं निवेश संबंधी सभी मामलों को अपने पार्टनर या परिवार के कंधों पर डाल देती हैं. यदि आप इस कार्य के लिए किसी दूसरे को चुनती हैं तो आप को यह मालूम होना चाहिए कि आप के पैसे के साथ क्या हो रहा है. भरोसा अच्छी बात है, लेकिन जागरूक होना भी आवश्यक है. फिर चाहे घर खरीदना हो या बीमा पौलिसी लेनी हो, अपने वित्तीय सलाहकार अथवा औडिटर से बात करें. सुनिश्चित करें कि आप इन सभी बैठकों के दौरान अपने पार्टनर के साथ उपस्थित रहेंगी और उन के सामने अपने विचार भी रखेंगी.

अपनी आय-व्यय की जानकारी रखें

आप के लिए अपनी आमदनी एवं खर्चों के बारे में जानना बहुत महत्त्वपूर्ण है. अपने खर्च पर लगाम कसने के लिए हर महीने अपने धन पर पूरी नजर रखें. इस से आप को यह जानने में मदद मिलेगी कि आप कितना बचत कर सकती हैं. अपने खर्चों पर भी पूरी निगरानी रखें खासतौर से तब जब ये आप के औसत मासिक खर्च से काफी ज्यादा हो रहे हों.

बच्चों के लिए जल्द शुरू करें बचत

यदि आप का पार्टनर ऐसा नहीं कर रहा है, तो आप को अपने बच्चे की शिक्षा के लिए बचत करने के बारे में उन से बात करनी चाहिए और इस की जल्द से जल्द शुरुआत करनी चाहिए. इस बचत को नियमित रूप से करना चाहिए. अपने बच्चे की उच्च शिक्षा के लिए  बचत के बारे में भी विचार करें. जब वह 15-16 साल का हो जाएगा तब बचत आरंभ करने में बहुत देर हो चुकी होगी, तब आप कम बचत कर पाएंगी.

रिटायरमैंट को न भूलें

आप घरेलू खर्च में व्यस्त हैं, लेकिन इस सब के बीच आप को यह नहीं भूलना चाहिए कि एक दिन आप भी आराम करेंगी. इसलिए सुनिश्चित करें कि आप और आप का पार्टनर अपनी सेवानिवृत्ति के लिए पर्याप्त बचत कर रहा है. रिटायरमैंट के लिए आप को कितनी बचत करनी होगी, इस बारे में सलाहकार से परामर्श लें. यह कतई न भूलें कि आप को मुद्रास्फीति का भी सामना करना होगा, इसलिए पर्याप्त बचत करें ताकि आप बिना किसी की मदद के पूरी आजादी के साथ अपने सेवानिवृत्त जीवन में रहनसहन के बढ़ते खर्च को पूरा करने में सक्षम हों.

बचत करना काफी नहीं, निवेश पर भी दें ध्यान महिलाएं अच्छी बचतकर्त्ता हो सकती हैं और हर महीने का खर्च पूरा करने के बाद भी कुछ न कुछ रुपए बचा सकती हैं. लेकिन आप का धन तब तक नहीं बढ़ेगा जब तक कि आप उसे बेहतरीन कर दक्ष निधि निर्माण विकल्पों में निवेश नहीं करेंगी.

आधुनिक निवेश उत्पादों के बारे में जानें

पारंपरिक बैंक जमा और डाकघर योजनाएं अथवा गोल्ड आप के लिए निवेश के पसंदीदा विकल्प हो सकते हैं पर याद रखें कि बाजार में पैसा बनाने के लिए और अधिक आधुनिक, नियमित एवं बेहद दक्ष विकल्प भी मौजूद हैं. इन में म्यूचुअल फंड, बौंड और इक्विटीज शामिल हैं जोकि आप के धन को कई गुणा बढ़ाने में मददगार हैं. इन से आप पर कर का अधिक बोझ भी नहीं पड़ेगा. इन के बारे में वैब पर पर्याप्त जानकारी उपलब्ध है. अपना होमवर्क करने के लिए इन का उपयोग करें और अपने निवेश विकल्पों को विविधीकृत करने के लिए इन उत्पादों के बारे में विस्तारपूर्वक पढ़ें.

घर खरीदने में न करें जल्दबाजी

अधिकांश लोगों का मानना है कि घर खरीदना जिंदगी पटरी पर आने का संकेत है और इसलिए वे घर खरीदना चाहते हैं. हालांकि उन्हें उन की जरूरतों के अनुसार घर मिल जाता है और वे अगले 10-15 सालों के लिए आसानी से लोन अदा कर सकते हैं, लेकिन यह उचित नहीं है. इस बात का भी ध्यान रखें कि आप कैरियर में ब्रेक ले सकते हैं और परिवार की आय कम हो सकती है. साथ ही सुनिश्चित करें कि आप का शादीशुदा जीवन भी स्थिर होना चाहिए ताकि आप अपने जीवनसाथी के साथ मिल कर घर खरीदने का फैसला कर सकें.

बीमा कराएं

परिवार के प्रत्येक सदस्य के साथ ही गृहिणी के पास भी बेसिक टर्म कवर होना चाहिए. अपने जीवनसाथी के टर्म कवर को देखें और सुनिश्चित करें कि आप भी पर्याप्त रूप से बीमित हैं. पौलिसी के नियमशर्तों की जानकारी रखें और सुनिश्चित करें कि आप की 8 वर्ष की आय कवर्ड हो, इस से किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से उबरने में मदद मिलेगी.

अपने फाइनैंस को औनलाइन मैनेज करें

जब आप के पास देखभाल के लिए एक परिवार है, तो आप का हमेशा यही बहाना रहता है कि अपने धन को मैनेज करने के लिए आप के पास समय नहीं है. अपने धन के निवेश, उस पर निगरानी रखने और उसे रिडीम कराने के लिए औनलाइन तरीकों का उपयोग करें और अपनी निवेश जिंदगी को झंझटरहित बनाएं. ऐसे औनलाइन तरीकों को अपनाएं जो मेल/चैट अथवा काल्स के जरीए सलाह के साथ आते हैं. इस से आप का परिश्रम कम हो सकता है और आप खुद से बेहद स्मार्ट तरीके से निवेश में बनी रह सकती हैं.

..तो सहवाग ने पांडा से की गांगुली की तुलना

भारत के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग अपने ट्वीट के कारण लगातार सुर्खियों में रहते हैं. वे किसी न किसी को ट्वीट के जरिए अपने निशाने पर लेते हैं. इस बार उन्होंने पूर्व भारतीय कप्तान सौरव गांगुली को भी नहीं बख्शा. उन्होंने दादा की आंखें मिचकाने की आदत को लेकर खिंचाई की. वीरू ने सबसे पहले दो पांडा की तस्वीरों को पोस्ट किया और बाद में इसे दादा के छक्के मारने वाले अंदाज से जोड़ दिया. सहवाग ने लिखा- जब आपका कोई परिचित अपने चश्मे को उतार देता है.

दरअसल पहली तस्वीर में पांडा की आंखें ज्यादा खुली हुई हैं और उनके आसपास काले घेरे भी हैं, जो चश्मे जैसे लग सकते हैं. दूसरी तस्वीर में पांडा की आंखें छोटी हैं और काले घेरे भी नहीं हैं. गांगुली ने क्रिकेट करियर की शुरुआत चश्मा लगाकर खेलते हुए की थी. इसके बाद उन्होंने कॉन्टैक्ट लेंस लगा लिया था, लेकिन लगातार आंखें झपकाते रहते थे. जो उनकी आदत-सी बन गयी थी. क्रिकेट को अलविदा करने के बाद सहवाग इन दिनों सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा सक्रिय हैं. उनके चटकदार ट्वीट्स से उनके फैंस का खूब मनोरंजन हो रहा है.

मीडिया से दूरी सोशल मीडिया से नजदीकी

मीडिया और बसपा का साथ कभी बहुत अच्छा नहीं रहा. मीडिया में कुछ खास चेहरों पर ही बसपा भरोसा करती है. विधानसभा चुनाव के समय बसपा ने अपने लोकल स्तर तक के नेताओं को मीडिया से दूर रहने का फरमान दिया है. बसपा सोचती है कि मीडिया में उसके पक्ष को सही तरह से नहीं रखा जाता.

बसपा प्रमुख मायावती जब प्रेस कॉंन्फ्रेंस करती हैं तो चुने गये मुद्दे पर अपनी बात रखती है. वे ज्यादातर सवालों के जवाब नहीं देती हैं. प्रदेश स्तर पर दूसरे नेता भी मीडिया में अपनी बात नहीं रखते. अभी तक बसपा के लोकल स्तर के नेता लोकल मीडिया के संपर्क में आ जाते थे. लोकल मीडिया की रिपोर्ट और जानकारी के आधार पर अधिकतर रिपोर्ट तयार होती रही है. अब बसपा ने अपने लोकल नेताओं और विधानसभा चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों को भी मीडिया से दूरी बना कर रखने के लिए कहा है.

मीडिया से दूरी रखने वाली बसपा सोशल मीडिया पर पूरी तरह से सक्रिय हो

गयी है. सोशल मीडिया पर पार्टी के प्रचार में पंपलेट जारी किये गये है. बसपा के कई दूसरे नेताओं के भी सोशल मीडिया पर अपने एकांउट बन गये है. उसके जरीये यह प्रचार चल रहा है. मीडिया से दूर रहने वाली बसपा को सोशल मीडिया पर भरोसा कैसे जगा ? असल में बसपा आर उसके नेताओं को मीडिया से कोई परहेज नहीं है. बसपा नेताओं का असल परहेज मीडिया के सवालों से है. वह इन सवालों से बचने के लिये मीडिया से दूरी बना कर रखती है. कई बार बसपा नेताओे के बयान उनकी नीतियों से अलग होते हैं. ऐसे सवालों पर वह कोई जवाब नहीं देना चाहते. नापंसद सवाल पूछने वाले को विरोधी दल से मिला हुआ तक कह दिया जाता है.

आज के दौर में मीडिया प्रचार का बड़ा साधन है. मीडिया की इस कमी को पूरा करने के लिये बसपा ने मीडिया से दूरी रखते हुये सोशल मीडिया पर खुद को एक्टिव कर लिया है. सोशल मीडिया के जरीये बसपा अपनी बात कह भी ले रही है और उसको किसी भी तरह के सवाल को जवाब भी नहीं देना पड़ता. बात केवल बसपा की ही नहीं है. अब ज्यादातर नेता अपनी पंसद की मीडिया को ही महत्व देने लगे हैं. हर नेता कठिन सवालों से बचने की कोशिश में लगे हैं. ऐसे में यह लोग सोशल मडिया के जरीये अपनी बात कह कर निकल जाते हैं.

इसे एक तरह से नेताओं में बढ़ती हठधर्मिता के रूप में देखा जा सकता है. अब नेताओं को चुभते हुये सवाल अच्छे नहीं लगते. कई दलों के नेता विपक्ष में रहते हुये मीडिया के साथ अच्छे संबंध रखते हैं पर सत्ता में आते ही मीडिया से दूरी बना लेते हैं. बसपा इस मामले में ज्यादा बदनाम है. अब मीडिया की कमी को पूरा करने के लिये सोशल मीडिया को जरिया बनाकर उसके जरीये अपनी बात कह कर बाकी सवालों से बचने का रास्ता मिल जाता है. मीडिया से दूरी के कारण ही मीडिया में बसपा की बात नहीं आती जिसे बसपा इस तरह पेश करती है जैसे पूरी मीडिया दलितों के खिलाफ हो.

टिकट वितरण में खुली राज बब्बर की पोल

राहुल गांधी के तमाम प्रयासों के बाद उत्तर प्रदेश में कांग्रेस संगठन कितना सक्रिय है विधानसभा चुनाव में इसकी पोल प्रत्याशियों के टिकट वितरण में खुल कर सामने आ गई. कांग्रेस के लिये पूरे उत्तर प्रदेश में 105 सीटों पर अपने प्रत्याशियों का चयन मुश्किल काम हो गया. सवाल उठाता है कि अगर कांग्रेस को सभी 402 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ना होता तो पार्टी कैसे प्रत्याशी खड़े कर पाती.

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा का गठबंधन चुनाव लड़ रहा है. कांग्रेस के हिस्से में 105 विधानसभा की सीटें आई है. वैसे तो कांग्रेस इतनी पुरानी पार्टी है कि उसके लिये यह कोई मुश्किल काम नहीं था. कांग्रेस प्रदेश कार्यालय, केन्द्रीय संगठन और चुनाव संचालन में लगे नेताओं के बीच आपस में किसी तरह का संवाद नजर नहीं आया. जिसकी वजह से कांग्रेस कई सीटों पर अपने प्रत्याशी समय से तय नहीं कर पाई तो सपा को अपना प्रत्याशी संयुक्त उम्मीदवार के रूप मे चुनाव में उतारना पड़ा.

प्रदेश की राजधानी लखनऊ पूर्वी विधानसभा की सीट इसकी सबसे प्रमुख उदाहरण है. लखनऊ में कांग्रेस ने 2012 के विधानसभा चुनाव में कैंट विधानसभा की सीट जीती थी. यहां से कांग्रेस की विधायक रीता बहुगुणा जोशी दलबदल कर भाजपा के टिकट से चुनाव मैदान में हैं. सपा ने इस सीट से मुलायम सिह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को टिकट दे दिया. सपा ने इस सीट के बदले कांग्रेस को लखनऊ पूर्वी की सीट दे दी. चुनाव आयोग में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने यह बता भी दिया कि लखनऊ पूर्वी से कांग्रेस अपना प्रत्याशी उतारेगी. नामांकन के आखिरी समय तक कांग्रेस के पास इस सीट से लड़ने के लिये कोई नाम सामने नहीं था. यह जानकारी जब सपा नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पता चली तो उन्होंने सपा के नेता अनुराग भदौरिया को यहां से चुनाव लड़ने के लिये कहा.

अनुराग भदौरिया सपा से राज्यमंत्री का दर्जा पाये थे. कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में वह चुनाव कैसे लड़ते ऐसे में रातोरात अनुराग को कांग्रेस की सदस्यता लेनी पड़ी. अनुराग भदौरिया ने इसके बाद अपना नामांकन दाखिल किया. अब वह कांग्रेस-सपा के संयुक्त प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं. अनुराग के रातोरात कांग्रेस का सदस्य बनने के संबंध में जब उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेताओं से सवाल किया गया तो वह गोलमोल जवाब देते बच निकले. बात केवल लखनऊ पूर्वी सीट की नहीं है. प्रदेश की कई अन्य सीटों पर भी कांग्रेस की यह कमजोरी दिखी. जहां पर कांग्रेस अंत तक अपने प्रत्याशी के नाम को लेकर उहापोह की हालत में रही.

असल में इसकी वजह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजबब्बर और बाकी नेताओं में सवांद की कमी है. राजबब्बर के प्रदेश अध्यक्ष बनाये जाने का फैसला प्रियंका गांधी की सहमति से हुआ था. इस कारण राजबब्बर हाईब्रांड नेता के रूप में यहां जाने जाते हैं. राजबब्बर और प्रशांत किशोर के बीच भी कोई समन्वय नहीं था. राजबब्बर लगातार प्रशांत किशोर का विरोध करते रहे. ऐसे में कांग्रेस ने प्रशांत किशोर को अपने कदम पीछे हटाने के लिये कहा और प्रशांत किशोर को पीछे कर योजनायें बनाने के लिये मजबूर होना पडा.

प्रदेश अध्यक्ष के रूप में राजबब्बर बहुत चतुर नेता साबित नहीं हुये. वह बहुत ही खास लोगों से मिलने के लिये ही वह उपलब्ध होते हैं. जिससे कांग्रेस के बाकी लोगों से कोई संपर्क नहीं हो पाता. इस कारण उनके पास जमीनी जानकारियां नहीं हो पाती. यही वजह है कि राजबब्बर को इस बात की खबर ही नहीं लगी कि लखनऊ पूर्वी में कांग्रेस का कोई प्रत्याशी नहीं है.

कांग्रेस सपा के साथ गंठबधन के समय एकएक सीट पर सौदेबाजी और दबाव बनाये थी. सपा कांग्रेस को 80 सीटे देना चाहती थी और 20 सीटे लोकदल को दे रही थी. सपा 300 सीटों पर खुद चुनाव लड़ना चाहती थी. जब कांग्रेस 100 सीटों से कम पर राजी नहीं हुई तो सपा ने लोकदल को दरकिनार कर कांग्रेस को 105 सीटे दे दी. इसके बाद भी कांग्रेस 105 सीटों पर चुनाव प्रबंधन करने में असफल रही. इसकी भरपाई कांग्रेस को चुनाव परिणाम में करनी पड़ेगी.

अपने फोन को खराब होने से बचाऐं

आजकल हर कोई स्‍मार्टफोन का इस्‍तेमाल कर रहा है. स्‍मार्टफोन की वजह से हम सभी की लाइफ में बहुत से परिवर्तन हुए हैं. आप में से कई लोग ऐसे भी होंगे हैं जो अपनी जरूरत के हिसाब से या आपके फोन के बार बार खराब हो जाने के कारण एक साल में दो से चार बार या दो तीन सालों में फोन को बदलते रहते होंगे. कई बार ऐसा भी होता है कि फोन बहुत ज्‍यादा खराब होने लगते हैं ऐसे में आपको खुद भी ये नहीं समझ आता होगा कि आखिर ऐसा क्‍यूँ होता है.

अगर आपका स्‍मार्टफोन बार बार खराब हो जाता है तो इसके खराब हो जाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं फोन के खराब होने की वजह हमेशा उसमें पानी चले जाना या फोन का हाथ से छूटकर नीचे गिर जाना नहीं होता. जब आप समय समय पर आपके फोन की तकनीकी को अपडेट करते रहते हैं या ऐसा करना भूल जाते हैं. तो कई बार इसमें तकनीकी रूप से गड़बड़ आने लगती है,इन कारणों भी फोन खराब हो जाता है.

आइए हम आपको बताते हैं आपके स्‍मार्टफोन खराब होने के कुछ खास कारणों के बारे में :

ओवर चार्जिंग

अगर आप रात को अपने फोन को चार्जिंग पर लगाकर छोड़ देते हैं तो इससे भी आपके फोन के खराब होने की संभावना बहुत ज्‍यादा बढ़ जाती है. फोन को ओवर चार्ज करने से बैटरी खराब होकर कई बार फट भी जाती है.

मालवेयर इंस्‍टॉल करना

कई बार टेकनोलॉजी के बारे में ज्यादा जानकारी न होने के कारण, आप जाने-अनजाने में आपके फोन के लिए हानिकारक मालवेयर को इंस्‍टॉल कर लेते हैं. बाद में आप उसे, न ही फॉर्मेट कर पाते हैं और न ही किसी एंटी-वायरस की मदद से रिमूव कर पाते हैं. ऐसे में आपके फोन की जानकारी भी हैक होने का खतरा होता है. इसलिए आपको सोच-समझ कर ही कोई ऐप अपने फोन में डाउनलोड करना चाहिए. किसी भी विज्ञापन को देखकर, किसी भी प्रकार की ऐप को इंस्‍टॉल करने से आपको बचना चाहिए.

ज्‍यादा धूप पड़ना

अगर आपके फोन में बहुत ज्‍यादा धूप पड़ जाती है तो भी फोन खराब हो जाता है. इसीलिए फोन को ठण्डे और ड्राई प्‍लेस पर रखने के लिए कहा जाता है. जिन लोगों का काम ज्यादातर फील्‍ड में होता है, उनके फोन की धूप पड़ने की वजह से खराब होने की संभावना ज्यादा बढ़ जाती है.

फोन गिरना

फोन का गिरना तो एक सामान्‍य सी बात है. ये बात जानकर आपको कोई हैरानी नहीं होगी है कि खराब हुए 10 स्‍मार्टफोन्स में से 8 फोन्स के खराब होने का कारण ऊंचाई से गिरना या पानी में गिर जाना होता है. इन कारणों से आपके फोन की स्‍क्रीन भी टूट जाती है. अपने फोन को इस्‍तेमाल कर लेने के बाद उसे हाथ में लेकर चलने से बेहतर है आप उसे अंदर रखें ताकि आपका फोन गिरने से बचा रहे और इसीलिए फोन को हमेशा अंदर की पॉकेट में ही रखे.

फोन में कम स्‍पेस होना

अगर आपके फोन डिवाइस में स्‍पेस कम होगा और तब भी आप उसे बिना खाली किए ही इस्‍तेमाल करते रहेंगे तो फोन में खराबी आ सकती है. इसीलिए बेहतर यही होता है कि आप फोन को समय समय पर फॉर्मेट करते रहें.

8 फरवरी से जीमेल का इस्तेमाल होगा मुश्किल

यदि आप विंडोज एक्सपी या विंडोज विस्ता ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल कर रहे हैं तो आप  सावधान हो जाइए. गूगल ने कहा है कि 8 फरवरी 2017 से जीमेल, क्रोम ब्राउजर के 53वें और उससे नीचे के वर्जन पर काम करना बंद कर देगा. इसका मतलब यह है कि जो यूजर्स अभी भी अपने डेस्कटॉप और लैपटॉप पर विंडोज एक्सपी या विंडोज विस्ता में क्रोम ब्राउजर का उपयोग कर रहे हैं, तो वो जीमेल की सुविधा से वंचित हो जाएंगे.

 गूगल ने अपने ब्लॉग पर लिखा है कि “माइक्रोसॉफ्ट ने अपने ऑपरेटिंग सिस्टम विंडोज एक्सपी और विस्ता पर सपोर्ट करना बंद कर दिया है, जिसकी वजह से क्रोम ब्राउजर के 53वें और उससे नीचे के वर्जन सुरक्षित नहीं है”.

गूगल ने अपने ब्लॉग में यह भी लिखा है कि, “जीमेल के यूजर्स जो अभी भी माइक्रोसॉफ्ट विंडोज एक्सपी और विस्ता वर्जन का इस्तेमाल कर रहे हैं, उनके प्रभावित होने की संभावना है, क्योंकि क्रोम की तरफ से रिलीज 49वां वर्जन ही जीमेल को विंडोज के ऑपरेटिंग सिस्टम पर सपोर्ट करता है.

पहले अप्रैल 2015 और नवंबर 2015 में घोषणा की गई थी कि ये ऑपरेटिंग सिस्टम माइक्रोसॉफ्ट की तरह अब मेंटेन नहीं किया जा रहा हैं. इस वजह से विंडोज एक्सपी और विस्ता वर्जन इस्तेमाल करने वाले यूजर्स को इसके अपग्रेडेड वर्जन का इस्तेमाल करना चाहिए जो सिक्योर हो और जीमेल को सपोर्ट करता हो.”

इसलिए अगर आप अब भी अपने कंप्यूटर और लैपटॉप में माइक्रोसॉफ्ट विंडोज एक्सपी और विस्ता ऑपरेटिंग सिस्टम इस्तेमाल करते हैं और आपका क्रोम ब्राउजर 53वें और उससे नीचे के वर्जन का है तो जल्दी उसे अपग्रेड कर लीजिए.

अभी इसके लिए क्रोम ने दिसंबर 2017 तक का समय अपने यूजर्स को दिया है.

शमा सिकंदर की ये तस्वीरें करा रही हैं सर्दी में गर्मी का अहसास

शॉर्ट फिल्म ‘सेक्सोहॉलिक’ में आखिरी बार नजर आईं टीवी एक्ट्रेस शमा सिकंदर साल की शुरुआत में ही छुट्टियां मनाने साउथ अफ्रीका चली गई थीं. शमा ने छुट्टियों के दौरान क्लिक की हुई अपनी बेहद हॉट तस्वीरों को फोटो शेयरिंग साइट इंस्टाग्राम पर शेयर किया है.

बता दें कि शमा को टीवी सीरियल ‘ये है लाइफ’ से फेम मिला था. इस सीरियल में शमा सिंपल से किरदार में नजर आईं थी. कुछ दिनों पहले शमा ने ये खुलासा भी किया था कि वो डिप्रेशन में चली गई थीं. इतना ही नहीं डिप्रेशन में होने की वजह से शमा पांच साल पहले सुसाइड करने की भी कोशिश कर चुकी थीं.

खैर ये सब छोड़िए और देखिए शमा सिकंदर की ये हॉट तस्वीरें.

65 लाख लोगों ने देखा ये हॉट वायरल वीडियो

भोजपुरी फिल्म ‘भोजपुरिया राजा’ का हॉट गाना ‘सॉरी-सॉरी कहा तारू जान’ सोशल मीडिया पर वायरल है और इसे अबतक 65 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका है. इस गाने के वीडियो को लोग खूब पसंद कर रहे हैं. इस वीडियो में भोजपुरी स्टार पवन सिंह और भोजपुरी एक्ट्रेस काजल राघवानी हैं.

ये म्यूजिकल वीडियो दोनों स्टार के हॉट डांस की वजह से चर्चा में है. इस गाने के बोल हैं 'सॉरी-सॉरी कहा तारू जान’ जो खूब देखा जा रहा है. पवन सिंह और काजल राघवानी का ये वीडियो फिल्म 'भोजपुरिया राजा' का है.

इस वीडियो को Worldwide Records Bhojpuri के नाम से सोशल मीडिया साइट यूट्यूब पर अपलोड किया गया है. 2016 में 19 फरवरी को रिलीज हुई इस फिल्म के डायरेक्टर सुजीत कुमार हैं. वसुंधरा मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बनी इस फिल्म को सुधीर सिंह ने प्रोड्यूस किया था. फिल्म की शूटिंग बिहार और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों पर की गई थी.

क्या है वीडियो में

सोशल मीडिया पर वायरल इस म्यूजिक वीडियो में पवन सिंह और काजल राघवानी का हॉट डांस है. इस म्यूजिकल वीडियो में दोनों के डांस को लोगों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है. इस गाने को फिल्म के हीरो पवन सिंह ने ही आवाज दी है. इससे पहले काजल राघवानी और पवन सिंह प्रतिज्ञा 2, बाज गइल डंका फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं.

गाने के साथ अभिनय भी पवन सिंह की है पहचान

छह मार्च 1986 को जन्मे पवन सिंह बिहार के आरा जिला के रहने वाले हैं. पवन सिंह भोजपुरी फिल्मों में आने से पहले भोजपुरी सिंगर थे. फेमस भोजपुरी सॉन्ग 'लालीपॉप लागे लू' से उन्हें जबर्दस्त ख्याति मिली थी. साल 2007 में उन्होंने भोजपुरी इंडस्ट्री में डेब्यू किया था. उनकी पहली फिल्म का नाम था 'रंग ली चुनरिया तोहरे नाम'.

चुलबुली और हॉट एक्ट्रेस हैं काजल राघवानी

काजल का जन्म 20 जुलाई 1990 को बिहार के तेगहर गांव में हुआ था. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से ग्रैजुएशन की पढ़ाई की है. काजल ने साल 2013 में 'सबसे बड़ा मुजरिम' से डेब्यू किया था. वे एक फिल्म के लिए छह से सात लाख रुपए लेती हैं. उनकी फेमस फिल्म है 'देवरा भईल दीवाना'. इसमें उनके को-स्टार प्रदीप आर पांडेय थे. काजल भोजपुरी स्टार पवन सिंह, खेसारी लाल यादव के साथ भी काम कर चुकी हैं.

खैर ये सब आप छोड़िए और देखें ये हॉट वीडियो.

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