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जब खिलाड़ी को आया गुस्सा तो अंपायर का..

खेल के मैदान पर कई बार खिलाड़ियों को गुस्सा आ जाता है लेकिन कम ही ऐसा देखा गया है कि किसी अंतरराष्ट्रीय मैच में खिलाड़ी का गुस्सा इस हद तक पहुंच जाए कि वो किसी के लिए घातक साबित हो जाए. डेविस कप में ब्रिटेन और कनाडा के टेनिस मैच के दौरान कुछ ऐसा ही हुआ और खिलाड़ी के गुस्से का शिकार बने मैच के अंपायर.

प्रतिष्ठित डेविस कप के प्री-क्वार्टर फाइनल में ब्रिटेन और कनाडा पुरुष सिंगल्स मुकाबले में आमने-सामने थे. ब्रिटेन की तरफ से काइल एडमंड कोर्ट पर थे जबकि कनाडा की तरफ से डेनिस शापोवलोव खेल रहे थे. डेनिस पहला और दूसरा सेट हार चुके थे और उनकी खीझ बढ़ती जा रही थी. इस खिलाड़ी का गुस्सा इतना बढ़ गया कि एक अंक पर उन्होंने अपने रैकेट से गेंद सीधे चेयर अंपायर अर्नाल्ड गबास के मुंह पर मार दी.

डेनिस की इस हरकत को देख वहां मौजूद सब लोग दंग रह गए. चाहे वो कनाडा के फैंस हों या फिर ब्रिटेन के, सबके चेहरे पर हैरानी साफ नजर आई. डेनिस ने अंपायर के मुंह पर इतनी ताकत से गेंद मारी कि उनकी बाईं आंख में चोट आ गई. उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया और उनका इलाज शुरू किया गया.

आयोजकों ने तुरंत डेनिस को अपात्र घोषित करते हुए कोर्ट से बाहर का रास्ता दिखा दिया और ब्रिटिश खिलाड़ी एडमंड को विजेता घोषित कर दिया. इसके साथ ही ब्रिटेन ने क्वार्टर फाइनल में एंट्री हासिल कर ली.

अब पीडीएस दुकानों में करें डेबिट कार्ड से भुगतान

नोटबैन की घोषणा के बाद से ही सरकार देश को कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाने के लिए तरह तरह के उपाय कर रही है. इसी कड़ी में सरकार ने पीडीएस दुकानों और उर्वरक डिपो में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और आधार कार्ड से भुगतान करने की सुविधा देने का निर्णय लिया है.

वित्त मंत्रालय की और से जारी की गई जानकारी में बताया गया कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) की दुकानों पर 1.7 लाख से अधिक पीओएस मशीनें पहले ही लगाई जा चुकी हैं और अगले कुछ महीनों में और भी ऐसी मशीनें लगाई जाएंगी. खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और उर्वरक विभाग दोनों ने सभी पीडीएस दुकानों और उर्वरक डिपो पर पीओएस मशीनें लगाने के लिए प्रोग्राम बनाए हैं. उन्हें आधार युक्त भी बनाया जाएगा.

राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने हर गांव में 2 पीओएस मशीनें लगाने के लिए वित्तीय समावेश कोष के जरिए बैंकों को समर्थन देने की प्रतिबद्धता जताई है. इसके अंतर्गत टियर 5 और 6 क्षेत्रों के एक लाख गांवों को शामिल किया जाएगा. देश को डिजिटल बनाने की दिशा में बहुत से कदम उठाए जा रहे हैं. भारी संख्या में लोगों ने भीम और यूपीआई तथा दूसरे सेवा प्रदाता के ऐप भी डाउनलोड किए हैं.

धोनी जैसा कोई नहीं, यकीन नहीं आता तो देखिए ये वीडियो

वेसे तो टीम इंडिया के पूर्व स्टार कप्तान एमएस धोनी क्रिकेट के मैदान पर अपनी शांत छवि के लिए जाने जाते हैं. इसके साथ ही धोनी अपनी चुस्ती-फुर्ती के लिए भी काफी सुर्खियां बटोर चुके हैं. टीम इंडिया के कप्तान कूल हमेशा से ही अपने बेहतरीन व्यवहार के साथ-साथ शानदार कप्तानी और विस्फोटक बल्लेबाजी के कारण भी खासे मशहूर रहे हैं.

इसके अलावा पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने हेलिकॉप्टर शॉट को भी अपने क्रिकेट करियर में सबसे बेहतरीन तरीके से इस्तेमाल किया है.

देखिये धोनी द्वारा उनके क्रिकेट करियर में की गईं 10 सर्वश्रेष्ठ स्टंपिंग.

रणवीर कपूर नहीं बन पाए उधम सिंह

रणवीर कपूर के सितारे गर्दिश से उबरने का नाम ही नहीं ले रहे हैं. कोई भी फिल्मकार उन्हें लेकर फिल्म शुरू नहीं करना चाहता. रणवीर कपूर के सर्वाधिक चहेते फिल्मकार इम्तियाज अली और अयान मुखर्जी ने भी रणवीर कपूर के नाम पर चुप्पी साध रखी है. उधर लंबे समय से चर्चा चल रही थी कि फिल्मकार सुजीत सरकार अपनी “क्रांतिकारी उधम सिंह” पर बन रही फिल्म में उधम सिंह का किरदार निभाने के लिए रणवीर कपूर को अपनी इस फिल्म के साथ जोड़ रहे हैं. मगर अब तो सुजीत सरकार ने खुलकर ऐलान कर दिया है कि वह रणवीर कपूर को उधम सिंह नहीं बना रहे हैं. सुजीत सरकार ने कहा है- ‘‘यह बात मेरी समझ से परे है कि इस तरह की बिना सिर पैर की खबरें कहां से उड़ रही हैं. मैं उधम सिंह के किरदार के लिए रणवीर कपूर के नाम पर विचार ही नहीं कर रहा हूं. इस संबंध में रणवीर कपूर से भी मेरी कोई बात नहीं हुई है.

क्यों सफाई दे रहे हैं शाहरुख खान?

‘दिलवाले’ और ‘फैन’ की बॉक्स ऑफिस पर दुर्गति होने के बाद ‘रईस’ को बॉक्स ऑफिस पर मिली सफलता से शाहरुख खान काफी उत्साहित हैं, तो दूसरी तरफ आनंद एल राय के साथ 21 मार्च से उनकी नई फिल्म ‘‘बंधुआ’’ की शूटिंग शुरु होने वाली है. अब उन्हें अपनी इस नई फिल्म को लेकर सफाई देनी पड़ रही है.

वास्तव में शाहरुख खान पहली बार फिल्मकार आनंद एल राय के निर्देशन में कोई फिल्म करने जा रहे हैं. इस प्रेम प्रधान फिल्म की कहानी में शाहरुख खान एक बौने के किरदार में नजर आने वाले हैं. शाहरुख खान अब तक जिस तरह की फिल्में करते आए हैं, यह फिल्म उससे अलग होगी, क्योंकि आनंद एल राय हमेशा अलग तरह की फिल्में ही बनाते रहे हैं. मगर अब बॉलीवुड में चर्चाएं गर्म हैं कि शाहरुख खान फिल्म ‘‘बंधुआ’’ में 1990 में प्रदर्शित कमल हासन की फिल्म ‘‘अप्पू राजा’’ की नकल करते हुए नजर आएंगे. इस चर्चा से घबराकर अब शाहरुख खान खुद ही सफाई दे रहे हैं कि ऐसा कुछ नहीं है.

शाहरुख खान कहते हैं ‘यह सारी बेवकूफी वाली अफवाहें हैं. लोग बेवजह गलत चर्चाएं कर रहे हैं. हमारी फिल्म और कमल हासन की फिल्म ‘अप्पू राजा’ में कोई समानता नही है. मैंने अपनी फिल्म के लिए लुक भी टेस्ट कर लिया है. कमल हासन की फिल्म ‘अप्पू राजा’ से मेरा लुक बहुत अलग है. हम बहुत जल्द सही ढंग से अपना ‘लुक’ भी लोगों के सामने लेकर आने वाले हैं. हम यही चाहते हैं कि हमारी मेहनत सफल हो और दर्शक उसे पसंद करें. हम संभवतः 21 मार्च से फिल्म की शूटिंग शुरू करने वाले हैं. इसीलिए एक दो दिन में, मैं इस फिल्म के किरदार को लेकर अपनी तैयारी में जुट जाउंगा. मुझे लगता है कि हम पांच छह माह की शूटिंग कर फिल्म पूरी कर लेंगे. यूं तो फिल्म का नाम ‘बंधुआ’ है, पर हो सकता है कि हम इसे नया नाम दें'.

पश्चिमी यूपी में लोकदल बिगाड़ रहा भाजपा का खेल

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में लोकदल ने एकला चलों की राह पकड़ी तो उसको पश्चिम उत्तर प्रदेश में अच्छा समर्थन मिलने लगा है.

मुजफ्फरनगर दंगों के बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम उत्तर प्रदेश में भाजपा को पूरा समर्थन मिला. लोकसभा चुनावों में जीत के बाद भाजपा ने इस इलाके के लिये कुछ नहीं किया. नोटबंदी के कारण इस इलाके का किसान सबसे अधिक परेशान नजर आया. भाजपा ने लोकसभा चुनावों में बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश के लोगों का ध्यान मुद्दे से हटाने के लिये कैराना से लोगों के पलायन को समाने रखने की कोशिश की. इस बहाने इलाके में धार्मिक ध्रुवीकरण का प्रयास भाजपा और सपा दोनों ही तरफ से किया गया. धार्मिक उन्माद से परेशान इलाके के लोगों को लोकदल नेता चौधरी अजित सिंह के रूप में एक मददगार मिला.

विधानसभा चुनावों में लोकदल के सपा-कांग्रेस गठबंधन में शामिल होने की खबरों के बीच भाजपा में शामिल होने की खबरें भी आती रही. अंत में लोकदल खुद के भरोसे ही चुनाव मैदान में उतरा. लोकदल की असल ताकत पश्चिम उत्तर प्रदेश है. सबसे अधिक जागरूक किसान यहीं है. प्रदेश की सबसे बड़ी गुड मंडी यही है. गन्ना यहां की मुख्य फसल है. यहां के गांवगांव में सड़क और बिजली है. शिक्षा के क्षेत्र में भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तुलना बाकी प्रदेश से नहीं हो सकती.

जाट, गुर्जर, त्यागी, ठाकुर और मुस्लिम आबादी यहां है. यहा के प्रमुख नेताओं में चौधरी अजित सिंह के अलावा, भाजपा से संजीव बालियान, हुकुम सिंह, संगीत सोंम, किसान नेता नरेश टिकैत और काजी रसूद मसूद प्रमुख हैं. सभी का प्रभाव अजित सिंह के सामने कम है. यहां पर विधानसभा की 44 सीटे आती हैं.

2012 के विधानसभा चुनाव में बसपा के पास सबसे अधिक 17 सीटें थी. सपा-भाजपा के पास 9-9 सीटें थीं. कांग्रेस के पास 6 और लोकदल के हिस्से में 3 सीटे आई थी. 2014 के लोकसभा चुनावों में सबसे अधिक समर्थन भाजपा को मिला था. प्रदेश के इस इलाके ने बसपा-सपा और भाजपा को बारीबारी से देख लिया है. सभी लोगों को आपस में लडाकर वोट लेने की बात करते हैं. इलाके में लोकदल का बड़ा आधार था. चौधरी अजित सिंह की ढुलमुल नीति के चलते यहां के लोगों ने उनपर यकीन नहीं किया. इस चुनाव में अजित सिंह यहां पर अकेले लोकदल के साथ चुनाव लड़ रहे हैं. वह आपस में सुलह समझौते की बात कर रहे हैं. गन्ना किसानों पर उनको सबसे अधिक फोकस है. इस दवाब में ही भाजपा को अपने घोषणपत्र में गन्ना किसानों के भुगतान की बात को शामिल करना पड़ा है.

कई चुनावों के बाद इस बार जनता का लोकदल में भरोसा वापस लौटता दिख रहा है. यह भाजपा का खेल बिगाड़ सकता है. भाजपा को इस इलाके के लोगों पर बड़ा भरोसा है. नोटबंदी से यहां के लोग भाजपा से सबसे अधिक परेशान हैं. जाति और धर्म के नाम पर हर दल से इस इलाके के लोगों को बरगलाने का काम किया. अब लोकदल के किसानों के मुददों को उठाकर इलाके में अपना समर्थन हासिल करना शुरू किया है. हर दल को आजमा चुके लोगों के लिये लोकदल नई उम्मीद की तरह दिख रहा है. ऐसे में लोकदल भाजपा का यहां खेल बिगाड़ सकता है.

क्यों बदला गया फिल्म ‘द रिंग’ का नाम?

शाहरुख खान और अनुष्का शर्मा, फिल्मकार इम्तियाज अली के निर्देशन में अपनी नई फिल्म ‘द रिंग’ की शूटिंग प्राग में करके खुश थे. पर अंदरूनी सूत्र बार बार इशारा करते आए हैं कि फिल्म के नाम से शाहरुख खान नाखुश हैं. शायद इसी के चलते अब फिल्म ‘द रिंग’ का नाम बदलकर ‘रहनुमा’ रख दिया गया है.

वास्तव में इम्तियाज अली को अपनी फिल्म के नाम में अंग्रेजी शब्द रखने का मोह रहा है. इसके पीछे इम्तियाज अली की अपनी सोच रही है. इम्तियाज अली अपनी हर फिल्म के नाम में अंग्रेजी शब्द रखते आए हैं, फिर चाहे वह ‘जब वी मेट’ हो या ‘लव आज कल’ हो या ‘हाईवे’ हो या ‘रॉक स्टार’ हो. इम्तियाज अली ने अपनी पिछली फिल्म का नाम ‘तमाशा’ रखा था, जिसे बॉक्स ऑफिस पर सफलता नहीं मिली थी. जबकि उनकी अंग्रेजी शब्द युक्त नाम वाली हर फिल्म सफल होती रही है. मगर इस बार शाहरुख खान के साथ साथ दूसरे लोग भी सोच रहे थे कि फिल्म के कथानक से ‘द रिंग’ नाम फिट नहीं बैठता है.

वास्तव में फिल्म की कहानी के अनुसार अनुश्का शर्मा की अंतिम सगाई की रिंग यानी कि अंगूठी खो जाती है, जिसे वह पेरिस में एक गाइड की मदद से तलाशती हैं. इस गाइड की भूमिका में शाहरुख खान है. बहरहाल, अब सूत्र दावा कर रहे हैं कि फिल्म का नाम ‘द रिंग’ से बदलकर ‘रहनुमा’ रखा गया है.‘रहनुमा’ उर्दू शब्द है, जिसका अर्थ होता है सलाहकार या गाइड या राह दिखाने वाला. यह नाम फिल्म में शाहरुख खान के किरदार के अनुसार एकदम सटीक बैठता है. इतना ही नहीं अब शाहरुख खान दावा कर सकते हैं कि उन्होंने इम्तियाज अली की फिल्म ‘रहनुमा’ में शीर्ष भूमिका निभायी है. तो अब फिल्म ‘द रिंग’ का नाम बदलने की असली वजह भी लोग समझ सकते हैं.

एक्ट्रेस बन गई नेशनल जूडो प्लेयर

उत्तराखंड की रहने वाली भावना बर्थवाल जूडो की नेशनल प्लेयर रहीं. पहाड़ पर रहने वाली लडकियां वैसे भी बहुत मजबूत होती हैं. भावना की रूचि खेल के साथ साथ एक्टिंग और फैशन में भी थी. ऐसे में उन्होंने जूडो प्लेयर के बजाय एक्टिंग में करियर बनाने की तैयारी शुरू कर दी.

भावना कहती हैं, मैंने उत्तराखंड की रीजनल फिल्मों और म्यूजिक एलबम में काम करना शुरू किया. सैकडों की संख्या में इसको किया. 9 साल उत्तराखंड में काम करने के बाद मुम्बई की राह पकड़ी. यहां पर डांस शो, टैलेंट हंट, शॉर्ट फिल्मस, विज्ञापन फिल्मों और साउथ फिल्म में काम किया.

भावना का एक्टिंग के क्षेत्र में कोई बैकग्राउंड नहीं है. इसके बाद भी उन्होंने मेहनत करके अपना एक मुकाम हासिल किया. भावना का एक सीरियल सौ करोड़ की बोतलआने वाला है. इससे भावना को बहुत उम्मीद है.

भावना कहती हैं, युवाओं के लिये कोई काम मुश्किल नहीं है. बस उनको मेहनत और लगन से काम करना चाहिये. एक्टिंग के क्षेत्र में काम करने वाले युवाओं को अपने पर भरोसा करके इस क्षेत्र में आना चाहिये.

नये फैशन और ड्रेस के बारे में बात करते हुए भावना ने कहा कि हर वह फैशन किया जा सकता है जिसे आप आसानी से पहन सकें. इसके अलावा यह जरूरी होता है कि वह खुश रहे और अपने आसपास वैसा ही माहौल रखे. खुश रहने से खूबसूरती बढती है.

भावना को घूमने, डांस करने का शौक है. भावना का कहना है कि फिल्मो में सफलता के लिये सही और अच्छे मौके का मिलना जरूरी होता है. सही मौका मिलने से पहचान बन जाती है. अब यह बात मायने नहीं रखती कि आप छोटे या बड़े शहर के रहने वाले हैं. जरूरी यह होता है कि आप हर तरह के काम सही दिशा में करते रहें. इससे कभी निराशा नहीं होती और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती रहती है. पहाडों क रहने वाली बहुत सारी लड़कियों ने फिल्मों में अपनी पहचान बनाई है. ऐसे में मुझे भी कोई परेशानी नहीं है.

होम लोन इंश्योरैंस

जीवन में कई अहम फैसलों में एक घर खरीदने का फैसला भी होता है. घर भी ऐसा, जो हर लिहाज से अपनी पसंद का हो. पिछले 1 दशक में इस अहम फैसले ने कई परिवारों को अपना मनचाहा आशियाना दिया और इसे उपलब्ध कराने में सब से बड़ी भूमिका निभाई होम लोन यानी घर के लिए मिलने वाले कर्ज ने. कर्ज जैसे बोझिल शब्द से लोगों ने नई सदी में पीछा छुड़ा, लोन शब्द को अपनाया. यही लोन हर आमोखास भारतीय के जीवन का हिस्सा बन गया और देश चल पड़ा आर्थिक विकास की ओर. होम लोन के बारे में जब बात होगी तो बैंक क्षेत्र में आए जबरदस्त विकास की बात होगी. लोन के जरिए मिलने और होने वाली सुविधाओं की बात होगी. साथ ही, कर्ज के साथ आने वाले मुफ्त भय को भगाने के लिए होम लोन इंश्योरैंस की बात तो होगी ही.

होम लोन इंश्योरैंस

यह लोन लेने के बाद पहला सही कदम माना जाता है. किसी भी जरूरी चीज का बीमा करा लेने में ही समझदारी मानी जाती है. लेकिन इस कदम को उठाने से पहले कई ऐसे सवाल हैं, जिन्हें आप को खुद से पूछ लेना चाहिए. ऐसा इसलिए, क्योंकि कुछ भी हो यह एक कर्ज है और इस का बीमा कराने का अर्थ होता है थोड़ा और पैसा जेब से निकालना.

इसे कराना क्यों जरूरी

होम लोन लेने का सीधा अर्थ है अपने पास घर की सहूलियत के साथ कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी भी बांध लेना. यह भले ही लेते समय पैरों में पड़ी बेड़ियों जैसा न लगे, मगर किसी अनहोनी के समय जरूर परिवार के सपनों को चकनाचूर कर सकता है. लोने लेने वाला व्यक्ति किसी अनहोनी का शिकार हो भी जाए तो भी कर्ज देने वाला तो अपनी बकाया रकम मांगेगा ही. ऐसे में यदि परिवार में आप ही अकेले कमाने वाले हैं तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती है. इसी समस्या से कम खर्च में छुटकारा दिलाता है होम लोन का इंश्योरैंस. होम लोन का इंश्योरैंस करवा लेने पर लोन चुकाने वाले के साथ किसी भी जानलेवा हादसे के बाद लोन और प्रौपर्टी की रखवाली का जिम्मा बीमा कंपनी का हो जाता है.

क्या है होम लोन इंश्योरैंस ?

इस बीमा पालिसी को लेने के बाद लोन लेने वाले की असमय मृत्यु या उस के अपंग होने के बाद भी लोन पर ली गई प्रौपर्टी और परिवार पर कोई आंच नहीं आती. इस का अर्थ यह हुआ कि आप सालाना थोड़ी राशि अधिक चुका कर अपने लोन, प्रौपर्टी और खुद पर आने वाले संकट के बारे में थोड़ा निश्चिंत हो सकते हैं. मिसाल के तौर पर आप ने 20 लाख रुपए का लोन लिया है और अगले 2 साल में आप ने करीब 2 लाख रुपए लौटा दिए हैं. अब भी 18 लाख रुपए का कर्ज आप के सिर पर है और ऐसे में आप किसी दुर्घटना का शिकार हो जाते हैं. आप के घर में कोई और कमाने वाला नहीं है, जिस से आप लोन की मासिक किस्त चुकता कर सकें. ऐसी स्थिति में यदि आप ने होम लोन का बीमा नहीं करा रखा है, तो आप के घर पर लेनदार बैंक या संस्थान कब्जा कर सकता है. ऐसे में आप के परिवार के सिर पर से छत तो छिनेगी ही, मानसिक आघात भी पहुंचेगा.

कैसे काम करती है यह बीमा पालिसी

होम लोन इंश्योरैंस, टर्म लाइफ इंश्योरैंस पालिसी की तरह होता है, जिस में लाइफ कवर बकाया होम लोन राशि जितना होता है और यह आप के लोन चुकाने की तय समय सीमा के मुताबिक ही होता है. जैसेजैसे आप मासिक किस्तों में लोन चुकता करते रहते हैं, वैसेवैसे आप की बकाया लोन राशि की तरह आप की इंश्योरैंस की राशि भी कम होती चली जाती है.

क्या है इस की कीमत

इस की कीमत लोन लेने वाले व्यक्ति की उम्र, लोन की राशि और लोन की अवधि पर निर्भर करती है. इस की दरें किसी व्यक्ति के लिए की जाने वाली बीमा पालिसी से कम ही होती हैं. आप इस के प्रीमियम का भुगतान मासिक किस्तों में या फिर एकमुश्त कर सकते हैं. कुछ बैंक लोन की मासिक किस्त के साथ ही इस को लेने की सुविधा मुहैया कराते हैं.

कौन ले सकता है इसे

इस तरह की पालिसी के लिए कम से कम 18 वर्ष की आयु और अधिकतम 50 वर्ष तक के लोग उपयुक्त हैं. यह पालिसी व्यक्तिगत या मिलेजुले रूप में ली जा सकती है. इस तरह की पालिसी के लिए अधिकतर मैडिकल जांच की आवश्यकता होती है. यदि लोन लेने वाला व्यक्ति पूरा लोन चुका देता है तो यह पालिसी अपनेआप खत्म हो जाती है.

जानकारों की राय

‘अपना पैसा डौट कौम’ के सीईओ और जानेमाने लोन एक्सपर्ट हर्ष रूंगटा भी होम लोन इंश्योरैंस को प्राथमिकता देते हैं और इसे बेहद जरूरी मानते हैं. साथ ही उन का यह भी कहना है कि यह जरूरी नहीं कि हर कोई होम लोन इंश्योरैंस कराने में कामयाब हो. ऐसा इसलिए कि बीमा कंपनी भी लोन लेने वाले व्यक्ति की हैल्थ के बारे में निश्ंिचत हो जाना चाहती है. इस के लिए इंश्योरैंस देने वाली कंपनी हैल्थ चैकअप कराती है और पूर्णत: फिट होने की स्थिति में ही व्यक्ति को यह बीमा मिल पाता है. उम्र और हैल्थ दोनों का बीमा कराते समय प्रीमियम पर भी इस का असर होता है. हर्ष के मुताबिक होम लोन इंश्योरैंस को अनिवार्य कर देना चाहिए.

निजी निवेश सलाहकार प्रदीप गुप्ता ने बताया कि यदि कोई व्यक्ति 25 लाख रुपए का होम लोन लेता है तो उसे प्रोटैक्ट करने के लिए सभी बीमा कंपनियों के पास टर्म इंश्योरैंस प्लान मौजूद हैं जिन में व्यक्ति की मृत्यु होने की स्थिति में बीमा कंपनी पूरे लोन की भरपाई करती है. साथ ही, यदि व्यक्ति अपंग हो जाता है, तो ऐसे में इंश्योरैंस का किसी भी तरह का प्रीमियम अदा नहीं करना पड़ता और इंश्योरैंस कंपनी हर साल ढाई लाख रुपए मुआवजे के तौर पर लोन देने वाले बैंक को अदा करती है, जिस से होम लोन की किस्तों की भरपाई होती है.

मार्केट में मौजूद लगभग हर बड़ी होम लोन और लाइफ इंश्योरैंस कंपनी जैसे एलआईसी, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी आदि 30 वर्ष की आयु के लिए प्रति वर्ष करीब 6 से 7 हजार रुपए में 25 लाख तक का होम लोन प्रोटैक्शन प्लान मुहैया कराती हैं. उम्र 30 से ऊपर होने पर प्रीमियम की दर भी बढ़ जाती है. एलआईसी यानी भारतीय जीवन बीमा निगम में यह स्कीम 25 लाख रुपए से अधिक की राशि के लिए जीवन अमूल्य के नाम से मौजूद है और 25 लाख रुपए से कम के होम लोन प्रोटैक्शन के लिए जीवन अनमोल के नाम से ग्राहकों के लिए उपलब्ध है.

डीफाल्ट से बचना जरूरी

इन 2 टर्म प्लान्स के अलावा एलआईसी में शुद्ध रूप से होम लोन प्रोटैक्शन के लिए एक और प्लान मौजूद है मार्गेज रिडेंपशन प्लान. इस में यों तो सभी लाभ मौजूद हैं, लेकिन इस में प्रवेश सीमा केवल 50 वर्ष तक ही है और 65 वर्ष के होते ही यह अपनेआप बंद हो जाती है. इस के अलावा एचडीएफसी लाइफ की तरफ से इस प्लान को एचडीएफसी होम लोन प्रोटैक्शन प्लान का नाम दिया गया है. प्लान के फीचर्स लगभग बाकी प्लान के जैसे ही हैं, बस इन में न्यूनतम मासिक प्रीमियम राशि को 2,000 रुपए तक सीमित रखा गया है और इंश्योरैंस की अधिकतम राशि 30 लाख रुपए तक ही रखी गई है.

आईसीआईसीआई प्रूडैंशियल ने अपनी पालिसी का नाम होम एश्योर रखा है. इस में प्रवेश की सीमा 60 वर्ष तक रखी गई है. साथ ही 70 वर्ष की आयु तक लोन पर प्रोटैक्शन मिलता है, लेकिन इंश्योरैंस की समय अवधि 2 साल से ले कर 22 साल तक ही मौजूद है. लोन की सीमा पर इस में कोई बंदिश नहीं है. जिन प्लान्स का यहां जिक्र किया गया है उन सभी पर इनकम टैक्स के सैक्शन 80 सी और 80 डी के तहत टैक्स में राहत का प्रावधान है.

निवेश गुरु और प्योर ग्रोथ के मैनेजिंग डायरैक्टर आकाश जिंदल कहते हैं कि बाजार में इतने प्रौपर्टी डेवैलपर और होम लोन देने वाली कंपनियां मौजूद हैं कि ग्राहक के पास औप्शन की कमी नहीं. एक अच्छा ग्राहक जहां होम लोन से ले कर उस के इंश्योरैंस तक का ध्यान रखता है, वहीं उसे उस डेवैलपर के बारे में भी सचेत रहना चाहिए. आप ने लोन का इंश्योरैंस करा भी रखा हो तो भी डेवैलपर के डीफाल्ट करने की गुंजाइश बनी रहती है और ऐसे में कोई भी इंश्योरैंस मददगार नहीं होता.

यह भी जानें

इस बात का ध्यान रखें कि जितनी अवधि का आप ने लोन लिया है कम से कम उतनी अवधि का बीमा जरूर कराएं और साथ ही जिस कंपनी से आप ने होम लोन लिया है उस के फेवर में उस बीमा पालिसी को एंडोर्स जरूर कराएं. होम लोन देने वाली कंपनी से ही इस तरह का प्लान लेना जरूरी नहीं, बाजार में मौजूद किसी भी इंश्योरैंस कंपनी से ऐसा प्लान लिया जा सकता है.

– सौरभ

दुनिया के सबसे खतरनाक खेल के बारे में जानते हैं आप!

पूरी दुनिया में अलग अलग तरह के खेल खेले जाते हैं.  इन में से कुछ घर के अन्दर ही खेले जाते है जैसे शतरंज तो कुछ बड़े हाल में जैसे बॉक्सिंग तो कुछ खेलो के लिए काफी बड़े मैदान या ट्रैक्स की जरुरत पड़ती है.

लेकिन इन सैकड़ो खेलो में से कुछ खेल ऐसे भी होते है जो बहुत ही खतरनाक और जोखिम भरे होते हैं तो आइए जानते हैं कुछ ऐसे ही खेल के बारे में जो दुनिया के सबसे खतरनाक खेलो में शुमार हैं.

बेस जंपिंग

यह खेल पूरी दुनिया के युवाओं में बहुत लोकप्रिय है, बेस जंपिंग में पैराशूटिंग भी शामिल रहती है और इस खेल में खिलाडी को ऊंचे पर्वत की चोटी या ऊंची बिल्डिंग से जम्प करना होता है. यह खेल सबसे खतरनाक खेलो में शुमार है और कई देशो ने तो इसके ऊपर प्रतिबन्ध भी लगाया हुआ है जिनके अमेरिका भी शामिल है.

पर्वतारोहण

पर्वतारोहण वास्तव में दुनिया के सबसे खतरनाक खेल में से एक है जिसमें अगले ही पल क्या हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता . अगर दूर से देखा जाए तो ऐसा लगता है की पर्वतारोहण में पर्वतारोही सिर्फ पहाड़ पर चढ़ता है लेकिन ऊंचे पहाड़ो पर चढ़ना एक अलग ही जोखिम भरा काम है और अचानक पैर फिसलना, रस्सी का टूटना, रस्सी को फसाने के स्थान का टूट जाना, बीच रास्ते में फंस जाना आदि अनेक जोखिम है.

वाइट-वाटर राफ्टिंग

वाटर राफ्टिंग पानी में खेले जाने वाला खेल है. कहने को तो यह खेल है लेकिन असल में यह बहुत ही जोखिम भरा और खतरनाक खेल है जिसमें थोड़ी सी गलती से बड़ी घटना दो सकती है. क्योंकि यह खेल तेज बहाव वाले पथरीले पानी में खेला जाता है और इसमें एक से एक खतरे लगातार आते ही रहते हैं.

बाइसिकल मोटोक्रॉस (BMX)

बाइसिकल मोटोक्रॉस या BMX दुनिया के खतरनाक खेलों में से एक है. BMX रेसिंग गेम है जिसमें अचानक ही गहरी ढलाने, ब्रेकर्स, जम्प्स आदि होती है और प्रत्येक बाईकर्स अपने अनेक प्रतिद्वन्दियो को हराकर इसमें विजेता बनना चाहता है. बाईकर्स आगे निकलने की होड़ में कई तरह के स्टंट करने से नहीं चुकते जो देखने में तो मनोरंजक लगते है लेकिन वास्तव में बहुत ही खतरनाक होते है .

सर्फिंग

सर्फिंग पानी में खेला जाने वाला शायद सबसे रोमांचक खेल है जिसमें पहले सर्फर को खुद ही सर्फिंग बोर्ड के साथ तैरते हुए बड़ी लहरों तक जाना पड़ता है जो कम से कम 20 फीट की हों. वैसे सर्फिंग का सबसे बड़ा रिकॉर्ड 100 फीट ऊँची लहरों पर सर्फिंग करने का है, जिसकी प्राइज मनी एक लाख डॉलर की थी.

स्ट्रीट ल्युज

स्ट्रीट ल्यूज में राइडर स्लेड के ऊपर लगभग लेटी हुई अवस्था में रहता है जिसे ल्यूज बोर्ड कहते हैं और ऊंची ढलानों से प्रतियोगी तेजी से फिसलते हुए निचे की और आते हैं जिसके कारण यह इस खेल का डेंजर लेवल बहुत ही हाई है. इस खेल में प्रतियोगी को अपने पैर ही ब्रेक की तरह प्रयोग करने पड़ता है जिससे बडी दुर्घटना होने की सम्भावना हमेशा रहती है.

बुल राइडिंग

अमूमन अमेरिका में खेले जाने वाल बुल राइडिंग खेल दुनिया के सबसे खतरनाक खेलो में शुमार है और सिर्फ इसे एक बार देख कर ही कोई भी जान सकता है की यह खेल दुनिया के सबसे खतरनाक खेलो में क्यों शामिल है. इस खेल में राइडर को एक बड़े बुल के ऊपर जितनी देर तक हो सके बैठना होता है और बुल, राइडर के अपने ऊपर बैठते ही उसे नीच गिराने की भरसक कोशिश करता है.

केव डाइविंग (पानी के अन्दर भूमिगत सुरंगों में तैरना)

केव डाइविंग दुनिया के सबसे खतरनाक और संवेदनशील खेलो के अंतर्गत आता है जिसमें भूमिगत जलीय सुरंगों में डाइविंग की जाती है. केव डाइविंग में बहुत ही योग्यता और बेहतरीन स्कूबा उपकरणों की जरूरत पड़ती है तथा इस खेल में और भी कई प्रकार के विशेष उपकरणों की भी जरूरत पड़ती है जो गहरी अंधेरी और पानी से भरी हुई गुफाओं के हालातो से निपटने के काम आते हैं.

हेली स्कीइंग

जैसा की नाम से ही जाहिर है की इस स्कीइंग में हेलीकाप्टर का भी प्रयोग होता है. हेली स्कीइंग में खिलाड़ी हेलीकाप्टर की सहायता से स्कीइंग करता है, जिसमे हेलीकाप्टर खिलाड़ी से एक निश्चित दूरी पर रहता है और उसकी हवा की सहायता से खिलाडी तेजी से स्कीइंग करता है.

स्कूबा डाइविंग

“स्कूबा” शब्द डाइवर द्वारा पानी के निचे सांस लेने वाले उपकरण के लिए प्रयोग किया जाता है. आमतौर पर स्कूबा डाइविंग सुनने में बहुत ही अच्छा लगता है लेकिन कई मायनो में यह बहुत खतरनाक भी है, जैसे अगर डाइवर तेजी से सतह की और आता है तो उसे एक जानलेवा बिमारी हो सकती है जिसे “डीकम्प्रेशन सिकनेस” कहते है जिसमे फेफड़ो का काम करना बंद कर देना, दिमाग का सोचना समझना बंद हो जाना, रीड की हड्डी में परेशानी आदि हो सकती है और इसके अलावा खतरनाक जलीय जन्तुओ का जानलेवा हमला भी एक अलग परेशानी है.

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