पिछले करीब 16 महीनों से बेटी सोनिया की शादी की तैयारियों में जुटे भोपाल सैंट्रल जेल में प्रधान आरक्षक रमाशंकर यादव की ड्यूटी जब दिवाली की रात भी लगा दी गई, तो वह ज्यादा परेशान नहीं हुए. इस की वजह यह थी कि दूसरे ही दिन यानी 1 नवंबर से उन की डेढ़ महीने की छुट्टी मंजूर हो गई थी.

रमाशंकर यादव मिलनसार और हंसमुख स्वभाव के व्यक्ति थे. इसी के चलते जल्द ही भोपाल जेल और पुलिस विभाग में उन की एक अलग पहचान बन गई थी. करीब एक साल पहले उन का तबादला सारंगपुर से भोपाल हुआ था. भोपाल आते ही उन्होंने सोच लिया था कि रहने के लिए इस से बेहतर कोई शहर नहीं हो सकता. रमाशंकर दिल के मरीज थे, इसलिए बहुत नियम करम से रहते थे. भोपाल में हर तरह की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध थी, यह उन के लिए और भी अच्छी बात थी.

रमाशंकर ने अपनी पूरी जिंदगी जेल विभाग की नौकरी में खपा दी थी. उन की उम्र 57 साल हो चुकी थी, सेवानिवृत्ति के केवल 3 साल बचे थे. उन्होंने केवल भोपाल में ही रहने का फैसला कर लिया था, बल्कि वहीं पर अपना मकान भी बनवा लिया था. चूंकि इस नए मकान में उन की पहली दिवाली थी, इसलिए यादव परिवार ने अपने इस आशियाने को पूरे तनमन से सजाया था.

मूलत: उत्तर प्रदेश के बलिया जिले से मध्य प्रदेश आ कर बसे रमाशंकर यादव में देशभक्ति का जज्बा किस तरह कूटकूट कर भरा था, इस का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने दोनों बेटों को सेना की नौकरी के लिए खुद प्रशिक्षित और प्रोत्साहित किया था. बेटे भी पिता की तरह मेहनत कर के उन की उम्मीदों पर खरे उतरे तो उन की छाती और चौड़ी हो गई. उन का बड़ा बेटा शुभनाथ यादव असम में और छोटा बेटा प्रभुनाथ हिसार में पदस्थ है.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

25% की बचत

डिजिटल

USD99 USD49 /Year
सब्सक्राइब करें
फायदे ▼
  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
Best Value - 26% की बचत

24 प्रिंट मैगजीन + फ्री डिजिटल

USD200 USD149 /Year
सब्सक्राइब करें
फायदे ▼
  • 24 प्रिंट मैगजीन + डिजिटल एक्सेस + ऐप
  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...