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पुलिस, पत्रकार और हसीनाएं

9 नवंबर, 2016 को पवन कुमार अपने औफिस में था, तभी उस के मोबाइल पर किसी का फोन आया. वह दिल्ली के रोहिणी सैक्टर-15 स्थित ईएसआई अस्पताल में असिस्टैंट था. वह दिल्ली से सटे हरियाणा के जिला सोनीपत के गांव खेड़ी मानाजात का रहने वाला था. पवन ने फोन रिसीव किया तो दूसरी ओर से किसी लड़की ने कहा, ‘‘मेरा नाम प्रिया है, मैं रोहित से बात करना चाहती हूं.’’

‘‘रोहित, यहां तो कोई रोहित नहीं है और न ही मैं किसी रोहित को जानता हूं.’’ पवन ने कहा.

‘‘सौरी, रौंग नंबर लग गया.’’ कह कर प्रिया ने फोन काट दिया.

पवन ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया, उस ने सोचा गलती से फोन लग गया होगा.  लेकिन 2-3 दिन बाद प्रिया का फोन फिर आया तो आवाज पहचान कर पवन ने कहा, ‘‘मैडम, मैं ने तो उसी दिन बता दिया था कि यहां कोई रोहित नहीं है.’’

‘‘कोई बात नहीं सर, आप तो हैं. क्या मैं आप से बात नहीं कर सकती?’’ प्रिया ने कहा.

‘‘मुझ से..?’’ पवन ने हैरान हो कर कहा, ‘‘मेरी तो आप से कोई जानपहचान भी नहीं है, फिर आप मुझ से क्यों बात करेंगी?’’

‘‘बात करने के लिए जानपहचान जरूरी है क्या? पहले तो सभी अपरिचित होते हैं, बातचीत के बाद ही जानपहचान होती है.’’ प्रिया ने कहा.

‘‘शायद आप ठीक कह रही हैं. बताइए, आप क्या चाहती हैं मुझ से?’’ पवन ने पूछा.

‘‘मैं ने तो आप को अपना नाम बता ही दिया है. मैं दिल्ली में उत्तमनगर में रहती हूं. वैसे रहने वाली यूपी के शाहजहांपुर की हूं. आप अपने बारे में बताइए.’’ प्रिया ने अपने बारे में बता कर पवन के बारे में पूछा.

‘‘मेरा नाम पवन कुमार है. मैं हरियाणा के सोनीपत के एक गांव का रहने वाला हूं और दिल्ली में रोहिणी सैक्टर-15 स्थित ईएसआई अस्पताल में नौकरी करता हूं.’’ पवन ने अपने बारे में बताया.

‘‘पवनजी, आप से इतनी बातें कर के ही लग गया कि आप बहुत अच्छे और भले आदमी हैं.’’ पवन की तारीफ करते हुए प्रिया ने कहा.

‘‘धन्यवाद मैडम.’’

‘‘मैडम नहीं, आप मेरा नाम ले सकते हैं.’’ प्रिया ने कहा.

इस तरह पवन और प्रिया की बातचीत की शुरुआत हुई तो वह पवन को रोज फोन कर के बातें करने लगी. पवन को भी उस से बातें करना अच्छा लगता था. लेकिन जब प्रिया ने उस से मिलने की इच्छा जाहिर की तो वह बहाने करने लगा. वह उस से मिलना नहीं चाहता था.

17 नवंबर को भी प्रिया ने पवन को फोन कर के इधरउधर की बातें करते हुए उस से मिलने के लिए कहा तो पवन ने उसे टालना चाहा. तब प्रिया ने कहा, ‘‘देखिए पवनजी, मैं आज अपने घर शाहजहांपुर जा रही हूं. पता नहीं फिर कब लौटूं. इसलिए जाने से पहले मैं एक बार आप से मिलना चाहती हूं.’’

प्रिया की इस बात पर पवन ने कहा, ‘‘बताइए प्रियाजी, आप कहां मिलना चाहती हैं?’’

‘‘ऐसा कीजिए, आप बुराड़ी चौक पर आ जाइए. आप से मिलने के बाद मैं वहां से नई दिल्ली स्टेशन चली जाऊंगी.’’ प्रिया ने कहा.

पवन ने मोटरसाइकिल से बुराड़ी चौक पर पहुंच कर प्रिया को फोन किया तो उस ने कहा, ‘‘आप वहीं रुकिए, मैं अपनी दोस्त पूजा को भेज रही हूं. वह आप को यहां ले आएगी.’’

पवन ने प्रिया को अपनी मोटरसाइकिल का नंबर बता दिया था. कुछ देर बाद पूजा आई और उसे बुराड़ी की बंगाली कालोनी स्थित एक मकान में ले गई. वह प्रिया से मिला तो उस के मन में प्रिया की जो तसवीर थी, वह उस से कहीं ज्यादा खूबसूरत थी. थोड़ी बातचीत के बाद पवन ने कहा, ‘‘प्रिया, हम किसी रेस्टोरेंट में चलते हैं. वहीं बैठ कर बातें करेंगे.’’

‘‘मैं अभी बाहर नहीं जा सकती, क्योंकि कुछ देर में मुझे घर के लिए निकलना है.’’ प्रिया ने कहा.

पूजा चायपानी लाने की बात कह कर चली गई तो प्रिया ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और पवन के नजदीक बैठ कर बातें करने लगी. प्रिया की बातें पवन को अच्छी लग रही थीं. बातचीत करते हुए अभी कुछ ही देर हुई थी कि किसी ने दरवाजा खटखटाया. प्रिया फुसफुसाई कि पता नहीं कौन आ गया तो पवन ने कहा, ‘‘तुम रहने दो, मैं दरवाजा खोलता हूं.’’

पवन ने जैसे ही दरवाजा खोला 2 आदमी और एक मोटी सी औरत अंदर आ गई. उस के हाथ में कैमरा था. वह पवन और प्रिया के फोटो खींचने लगी. जो 2 आदमी थे, उन्होंने पवन से कहा, ‘‘यहां सैक्स रैकेट चलाता है न?’’

‘‘सैक्स रैकेट…यह क्या कह रहे हैं आप लोग?’’ पवन ने कहा, ‘‘पहले तो यह बताइए कि आप लोग हैं कौन?’’

‘‘हम दिल्ली पुलिस से हैं और हमारे साथ यह महिला प्रैस रिपोर्टर है.’’ उन में से एक व्यक्ति ने कहा, ‘‘हमें सूचना मिली है कि यहां धंधा होता है.’’

पुलिस का नाम सुन कर पवन के होश उड़ गए. उस ने कहा, ‘‘सर, मैं ईएसआई अस्पताल में नौकरी करता हूं. यहां मैं पहली बार प्रिया से मिलने आया था. मैं ने कोई गलत काम नहीं किया. आप प्रिया से पूछ सकते हैं.’’

‘‘सरकारी नौकरी करते हुए यह गैरकानूनी काम करने में तुझे शरम नहीं आई?’’ उसी आदमी ने डांटते हुए कहा.

‘‘सर, मैं ने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया.’’ पवन ने कहा.

‘‘एक तो गलत काम करता है, ऊपर से बहस करता है.’’ कह कर उस ने पवन की पिटाई शुरू कर दी.

पवन लाख सफाई देता रहा, लेकिन उन लोगों ने उस की एक नहीं सुनी. प्रिया बोली तो उसे भी डांट दिया. इस के बाद उस ने कहा, ‘‘जब जेल जाएगा तो तेरी हकीकत सब के सामने आएगी.’’

‘‘सर, मुझे यह किस गलती की सजा दी जा रही  है?’’ पवन ने कहा.

‘‘अब तू रेप के मामले में अंदर जाएगा, तब पता चलेगा.’’ उसी आदमी ने कहा. पवन फंस चुका था. उस की समझ में नहीं आ रहा था कि अब वह क्या करे. प्रिया को दूसरे कमरे में भेज कर उन्होंने पवन से कहा, ‘‘देख, जेल जाने के बाद तेरी नौकरी तो जाएगी ही, जब यह न्यूज टीवी पर चलेगी तो समाज में तेरी जो बदनामी होगी, वह अलग से. अगर तू इस मामले को यहीं निपटाना चाहता है तो तुझे 25 लाख रुपए की व्यवस्था करनी होगी.’’

‘‘25 लाख तो बहुत ज्यादा हैं, कहां से लाऊंगा मैं इतने रुपए. अगर 2 लाख में काम हो जाए तो मैं इंतजाम कर दूं.’’ पवन ने कहा.

‘‘कोई बात नहीं, फिर सालोंसाल तक कोर्ट के चक्कर लगाते रहना.’’ उन्होंने कहा, ‘‘जानता है, तेरे ऊपर जो केस बन रहा है, उस में तेरी जमानत भी नहीं होगी.’’

‘‘नहीं सर, ऐसा मत करो. मैं बरबाद हो जाऊंगा. मामले को यहीं रफादफा कर दो.’’ पवन गिड़गिड़ाया.

‘‘यह मामला फोकट में थोड़े ही न निबटेगा,’’ उस व्यक्ति ने अपने कब्जे में लिया गया पवन का फोन उस के हवाले करते हुए कहा, ‘‘ले फोन और पैसे का इंतजाम कर.’’

पवन ने अपने दोस्तों को फोन करने शुरू किए. काफी देर तक इधरउधर बातें करने के बाद 15 लाख रुपए का इंतजाम हो पाया. यह बात पवन ने उन्हें बताई तो रुपए कहां मंगाए जाएं, इस बारे में सलाह करने लगे. अंत में उन्होंने रुपए मुकुंदपुर मेनरोड पर लाने को कहा. पवन ने दोस्त की गाड़ी का नंबर और फोन नंबर बता दिया था. इस के बाद वे मोटी महिला को साथ ले जा कर पैसे ले आए.

जाते समय वे पवन का मोबाइल फोन अपने साथ ले गए थे. उन्होंने उसे धमकी भी दी थी कि अगर पैसे लेने वाली बात उस ने किसी को बताई तो उस के खिलाफ काररवाई की जा सकती है. पवन पछता रहा था कि वह प्रिया की बातों में फंस कर यहां न आया होता तो यह सब न होता. जिस लड़की ने उसे बुलाया था, वह वहां से जा चुकी थी. पवन को प्रिया पर शक हो रहा था. जो लोग 15 लाख रुपए लेने गए थे, उन पर भी संशय हो रहा था. पर अब वह क्या कर सकता था.

बदनामी के डर से वह अपने साथ घटी इस घटना को किसी से बताने की हिम्मत भी नहीं कर पा रहा था. लेकिन जिस दोस्त से पवन ने 15 लाख रुपए मंगाए थे, उसे उस ने अपने साथ घटी घटना बता दी. दोस्त समझ गया कि उसे साजिश के तहत फंसाया गया था. उस ने पुलिस से शिकायत करने की सलाह दी.

पवन को दोस्त की सलाह सही लगी, पर वह किसी काम में व्यस्त हो गया, जिस से पुलिस के पास नहीं जा सका. 4-5 दिनों बाद पवन को फोन कर के फिर 10 लाख रुपए और मांगे गए, साथ ही पैसे न देने पर उसे बदनाम करने की धमकी दी गई. पवन ने जब कहा कि उस दिन जब बात निपट गई थी तो अब 10 लाख रुपए किस बात के मांगे जा रहे हैं?

दूसरी ओर से कहा गया कि बात 25 लाख रुपए की हुई थी, जिस में से तुम ने 15 लाख दे दिए थे, 10 लाख बाकी रह गए थे, इसलिए 10 लाख रुपए का जल्दी इंतजाम कर के दे दो, वरना अंजाम तुम समझते ही हो.

परेशान पवन ने दोस्त से बात की तो वह उसे पुलिस मुख्यालय ले गया. वहां क्राइम ब्रांच के संयुक्त पुलिस आयुक्त रविंद्र यादव को शिकायतीपत्र दे कर पवन ने उन्हें अपने साथ घटी घटना विस्तार से बता दी. रविंद्र यादव ने पवन को क्राइम ब्रांच दरियागंज भेज दिया, जहां उन की मुलाकात एसीपी संदीप लांबा से हुई. उस की शिकायत थाना क्राइम ब्रांच में दर्ज कर ली गई.

एसीपी संदीप लांबा ने इस केस को सुलझाने के लिए एक पुलिस टीम गठित की, जिस में इंसपेक्टर आशीष कुमार दुबे, एसआई विनीत कुमार, एएसआई विजय कुमार, अजीत सिंह, जोगेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, राकेश कुमार, हैडकांस्टेबल सुधीर कुमार, प्रवीण कुमार, राजीव त्यागी, मूलचंद्र, साहिल खान, प्रवीण कुमार रमाला, कांस्टेबल कर्नल यादव, निशांत, परवीन कुमार, महिला कांस्टेबल कोमल को शामिल किया.

जिस फोन नंबर से पवन को फोन किया गया था, वह नंबर इंसपेक्टर आशीष दुबे को दिया गया. पुलिस ने उस नंबर के बारे में पता किया तो वह बंद मिला. पुलिस टीम उस मकान पर भी गई, जहां पवन के साथ घटना घटी थी.

पुलिस को मुखबिर द्वारा पता चला कि बुराड़ी के उस मकान में निधि रहती थी. उस के पास अकसर आराधना और तबस्सुम उर्फ टीना आती थीं, जो यूपी के शाहजहांपुर जिले की रहने वाली थीं. उस ने यह भी बताया कि तबस्सुम 18 दिसंबर, 2016 को काशी विश्वनाथ एक्सप्रैस से शाहजहांपुर जाएगी.

पुलिस पवन को साथ ले कर 11 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंच गई. पवन को वहां प्रिया दिखाई दे गई तो उस ने पुलिस को उस की ओर इशारा कर दिया. पुलिस ने प्रिया से उस का नाम पूछा तो उस ने अपना नाम तबस्सुम बताया. जबकि पवन को उस ने अपना नाम प्रिया बताया था.

पुलिस उसे पकड़ कर औफिस ले आई, जहां एसीपी संदीप लांबा के सामने उस से पूछताछ की गई तो उस ने न सिर्फ अपना जुर्म कबूल कर लिया, बल्कि उस ने उन साथियों के नाम भी बता दिए, जो उस के साथ ब्लैकमेलिंग के धंधे में शामिल थे.

तबस्सुम पुलिस टीम को बुराड़ी की बाबा कालोनी स्थित एक अखबार के औफिस ले गई, जो कृष्णनंद भट्ट के साप्ताहिक अखबार का था. वहां पुलिस टीम ने कृष्णनंद भट्ट, आराधना उर्फ अंकिता और निधि को हिरासत में लिया. इन की निशानदेही पर पुलिस ने 28 दिसंबर को ही जितेंद्र और प्रदीप को भी हिरासत में लिया. प्रदीप दिल्ली पुलिस का सिपाही था. उस की पोस्टिंग थाना बुराड़ी की झड़ौदा पुलिस चौकी में थी.

ये सभी मिल कर जिस तरह शातिराना तरीके से हनीट्रैप का धंधा चला रहे थे, उसे जान कर क्राइम ब्रांच की टीम हैरान रह गई.

उत्तरी दिल्ली के बुराड़ी के प्रधान एनक्लेव का रहने वाला 48 साल का कृष्णनंद भट्ट ‘आदर्श भारत टाइम्स’ नाम का साप्ताहिक हिंदी समाचारपत्र निकालता था. उस के यहां निधि नौकरी करती थी, जो उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले की रहने वाली थी. लेकिन उस की पढ़ाईलिखाई दिल्ली में ही हुई थी. उस की शादी हो चुकी थी, लेकिन शादी के कुछ सालों बाद उस की किसी वजह से पति से अनबन हो गई थी, जिस के बाद वह पत्रकार कृष्णनंद भट्ट के संपर्क में आई और उस के साथ काम करने लगी.

वह आंगनवाड़ी में भी काम करती थी. बाद में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं तो वे लिवइन रिलेशन में रहने लगे.

कृष्णनंद ने उसे बुराड़ी की बंगाली कालोनी में 2 कमरों का सेट किराए पर दिलवा दिया था. पत्रकार होने की वजह से कृष्णनंद का थाने में आनाजाना लगा रहता था, जिस से उस के कई पुलिसकर्मियों से अच्छे संबंध बन गए थे. थाना बुराड़ी की झड़ौदा पुलिस चौकी में तैनात कांस्टेबल प्रदीप से भी उस की गहरी दोस्ती हो गई थी. प्रदीप सन 2010 में दिल्ली पुलिस में कांस्टेबल के रूप में भरती हुआ था.

निधि की आराधना शर्मा उर्फ अंकिता से दोस्ती थी. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक अंकिता बुराड़ी में ही टाइपिंग और शौर्टहैंड सिखाने का इंस्टीट्यूट चलाती थी. वह रहने वाली करावलनगर के प्रकाश विहार की थी. उस के पिता एमटीएनएल में नौकरी करते थे, जो अब रिटायर हो चुके हैं.

जल्दी और ज्यादा पैसे कमाने के लिए कृष्णनंद भट्ट ने एक योजना बनाई. अखबारों में आए दिन हनीट्रैप के जरिए मोटी रकम वसूले जाने की खबरें वह पढ़ता और छापता रहता था. पुलिस वालों के साथ रह कर वह पुलिस के बात और व्यवहार से अच्छी तरह वाकिफ हो चुका था. इस बारे में उस ने निधि से बात की तो वह तैयार हो गई.

बिना किसी रिस्क के उसे इस काम में मोटी कमाई दिखाई दे रही थी. उस ने अपनी सहेली अंकिता और तबस्सुम उर्फ रीना से बात की तो पैसे के लालच में वे भी तैयार हो गईं.

तबस्सुम मूलरूप से उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले की रहने वाली थी. वह दिल्ली की एक प्रिंटिंग प्रैस में काम करती थी. तबस्सुम को जिम्मेदारी दी गई कि वह शिकार को फोन कर के अपनी मीठीमीठी बातों में फांस कर कमरे पर बुलाएगी. पत्रकार कृष्णनंद ने फरजी पुलिस वाला बनने का फैसला किया.

कृष्णनंद ने अपने दोस्त बाबा कालोनी बुराड़ी के 28 वर्षीय जितेंद्र उर्फ जीत  से संपर्क किया. उसे उस के साथ केवल पुलिस वाला बन कर रहना था. निधि का रोल कृष्णनंद और जितेंद्र के साथ पत्रकार बन कर जाने का था. इस तरह इन्होंने योजना के तहत लोगों को फांस कर अपना धंधा शुरू कर दिया.

कृष्णनंद ही तबस्सुम को ऐसे लोगों के फोन नंबर उपलब्ध कराता था. उस के बाद तबस्सुम प्रिया बन कर शिकार फांसती थी.

शिकार बंगाली कालोनी स्थित निधि के कमरे पर आ जाता था तो कृष्णनंद, जितेंद्र उर्फ जीतू और निधि वहां पहुंच जाते और तबस्सुम के साथ बैठे व्यक्ति को रेप के आरोप में बंद करने की धमकी दे कर उस से लाखों रुपए ऐंठ लेते थे. बाद में कृष्णनंद ने दोस्त प्रदीप, जो दिल्ली में सिपाही था, को भी इस धंधे में शामिल कर लिया गया.

प्रदीप भले ही उन लोगों के साथ मौके पर नहीं जाता था, पर वह उन्हें ऐसे मोटे आसामी के फोन नंबर दे देता था, जिन से मोटी रकम ऐंठी जा सके. प्रदीप ने ही कृष्णनंद को पवन कुमार का नंबर दिया था. वह प्रदीप का दूर के रिश्ते का बहनोई था.

पुलिस ने प्रदीप की निशानदेही पर उस के घर से 6 लाख रुपए बरामद कर लिए थे. इस के अलावा इन लोगों से एक कैमरा, जिस मोबाइल फोन से पवन से बात की गई थी, वह मोबाइल फोन भी बरामद कर लिया गया था.

पुलिस ने आरोपी कृष्णनंद भट्ट, जितेंद्र उर्फ जीत, प्रदीप, निधि, तबस्सुम उर्फ टीना उर्फ प्रिया, आराधना उर्फ अंकिता को गिरफ्तार कर तीसहजारी कोर्ट में चीफ मैट्रोपौलिटन मजिस्ट्रैट सौरभ कुलश्रेष्ठ की कोर्ट में पेश कर एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में पर्याप्त साक्ष्य जुटाने के बाद इन लोगों को फिर से कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया. केस की तफ्तीश एसआई विनीत कुमार कर रहे हैं.

– कथा पुलिस सूत्रों और जनचर्चा पर आधारित

चमड़ी से दमड़ी

मध्य प्रदेश के शहर ग्वालियर के एसपी हरिनारायण चारी मिश्र को अपने मुखबिरों से सूचना मिली थी कि शहर में सैक्स की आड़ में रईस लोगों को ब्लैकमेल करने का कारोबार तेजी से फलफूल रहा है. चूंकि मामला बड़े लोगों से जुड़ा था, इसलिए उन्होंने थाना मुरार के थानाप्रभारी रविंद्र सिंह गुर्जर को अपने औफिस में बुला कर इस मामले की जांच कर के तुरंत काररवाई करने का निर्देश दिया.

मामला गंभीर और काफी संवेदनशील था, इसलिए जांच की जिम्मेदारी मिलते ही रविंद्र सिंह गुर्जर ने अपने मुखबिरों को सतर्क कर दिया. इस के अलावा खुद भी मामले पर नजर रखे हुए थे. इस का उन्हें मनचाहा परिणाम भी मिला.

24 सितंबर, 2016 को रविंद्र सिंह गुर्जर को एक मुखबिर ने सूचना दी कि सैक्स की आड़ में रईसों को ब्लैकमेल करने वाले गिरोह ने वार्ड 25 की पार्षद सपना नरवरिया के पति सुजीत नरवरिया को अपने जाल में फांस रखा है. वह आज पिंटो पार्क के पास गिरोह के सरगना की मांग पर मोटी रकम देने आने वाला है.

रविंद्र सिंह गुर्जर ने इस जानकारी से एसपी हरिनारायण चारी मिश्र को अवगत कराया और उन के निर्देश पर अपने नेतृत्व में पुलिस की एक टीम बनाई, जिस में एएसआई एस.एस. सोमवंशी, हवलदार प्रकाश कौरव, जयहिंद, हिम्मत सिंह, मनोज आदि को शामिल किया.

पुलिस टीम मुखबिर द्वारा बताई जगह पर पहुंची तो सुजीत नरवरिया वहां पहले से मौजूद दिखाई दिया. कुछ देर बाद वहां 2 युवक आए तो सुजीत नरवरिया ने जैसे ही अपनी जेब से नोटों की गड्डी निकाल कर उन युवकों के हाथ में रखा, सादे कपड़ों में आई पुलिस टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया.

दोनों युवकों ने खुद को पुलिस वालों से घिरा पाया तो उन के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगीं. पुलिस ने दोनों को दबोच लिया.

दोनों को थाने ला कर पूछताछ की गई तो उन्होंने अपने नाम राम गुर्जर और पंकज कुशवाह बताए. उन्होंने आगे बताया कि उन के इस गैंग की सरगना डौली तोमर और उस का प्रेमी पवन है. पंकज और राम की निशानदेही पर रविंद्र सिंह गुर्जर ने डौली के अलावा गैंग के अन्य 5 युवकों को एक आई20 कार, 2 पिस्टल, एक तमंचा और जीवित कारतूसों के साथ गिरफ्तार कर लिया. पूछताछ में इन लोगों ने देह के जाल में फांस कर रईसों को लूटने की जो कहानी सुनाई, वह इस प्रकार थी—

डौली और पवन के बीच प्यार की शुरुआत शहर की सरहद पर बने एक प्राचीन मंदिर में हुई थी.  दोनों अलगअलग जाति के थे. इस के बावजूद उन्होंने तय कर लिया था कि वे जिंदगी भर साथसाथ रहेंगे. दुनिया की कोई भी ताकत उन्हें जुदा नहीं कर सकेगी.

डौली तोमर के घर वालों को जब किसी तरह पता चला कि वह किसी लड़के के साथ घूमतीफिरती है तो उन्होंने इस बारे में उस से बात की. डौली ने बेझिझक बता दिया कि पवन नाम के जिस लड़के से उस की दोस्ती है, वह बेहद शरीफ है और शादीपार्टी में बिजली सजावट का काम करता है.

जब घर वालों ने पवन की जाति पूछी तो डौली ने कहा कि वह जाटव है. इस पर घर वालों ने दोटूक कह दिया कि वे उस की शादी पवन से हरगिज नहीं कर सकते, साथ ही उन्होंने डौली को हिदायत दी कि वह पवन को भूल जाए. डौली पवन को अपने दिल में बसा चुकी थी. उसे भुलाना उस के लिए इतना आसान नहीं था.

घर वालों की हिदायत को दरकिनार कर उस ने पवन से मेलजोल जारी रखा. घर वालों को जब पता चला कि डौली नहीं मान रही है तो उन्होंने उस से नाता तोड़ लिया. अगले ही दिन डौली ने पवन के साथ कोर्टमैरिज कर ली.

पवन का एक परिचित था अवधेश राणा. उस ने पवन को मोटी रकम कमाने की तरकीब बताई, जो उसे पसंद आ गई. उस ने अपनी पत्नी डौली से उस के बारे में बात की तो वह भी उस का साथ देने को तैयार हो गई. इस के बाद उन्होंने अपना एक गैंग बनाया, जिस में लवली, ललित, लक्ष्मण, राज को भी शामिल कर लिया गया. इस तरह आपत्तिजनक फोटो खींच कर उसे ब्लैकमेल करने वाले गैंग की नींव पड़ गई.

इस गैंग का सरगना अवधेश बड़ी चालाकी से नामीगिरामी मर्द को ढूंढता था. इस के बाद लवली और डौली उस धनाढ्य को किसी भी तरह अपने जाल में फांसती थीं. ये दोनों शिकार को पूरी तरह फांसने के लिए फोन पर खुल कर बातें करती थीं और अपने अश्लील फोटो तक उस के मोबाइल पर वाट्सऐप कर देती थीं. इस के बाद योजना को अंजाम देने के लिए शिकार को अपने बैडरूम में ले आती थीं और उस के कपड़े उतारते ही उस से अर्धनग्न अवस्था में लिपट जाती थीं.

तभी इस गैंग के अन्य सदस्य खुद को पुलिस और पत्रकार बता कर बैडरूम में घुस आते और टीवी न्यूज चैनल का कैमरा और चैनल का माइक लिए आपत्तिजनक स्थिति की वीडियो बना लेते. इस के बाद धमकी दे कर वे शिकार से मोटी रकम ऐंठते थे. इस तरह इन्होंने तमाम लोगों को अपने जाल में फांस कर मोटी रकम ऐंठी थी. अवधेश ने इस बार शहर की एक पार्षद के पति सुजीत नरवरिया को अपना निशाना बनाया. सुजीत नरवरिया ठेकेदारी करता था. कुछ समय पहले ही उस की मुलाकात अवधेश राणा ने जडेरुआ डैम के निकट पानी के टैंकर की ठेकेदारी के संबंध में डौली तोमर से कराई थी. पहली ही मुलाकात में सुजीत डौली से बहुत प्रभावित हुआ था. बाद में दोनों के बीच दोस्ती हो गई. डौली ने उसे भी अपने रूपजाल में फांस लिया.

डौली ने सुजीत नरवरिया को जडेरुआ के निकट बुलाया और बड़े ही सुनियोजित ढंग से अपने और लवली के साथ सुजीत के अर्धनग्न हालत में आपत्तिजनक फोटो खिंचवा लिए. इस के बाद गैंग के अन्य सदस्यों ने खुद को पुलिसकर्मी बता कर सुजीत की जेब से 7 हजार रुपए निकाल लिए.

इस के बाद अवधेश, ललित, लक्ष्मण, राज, पवन और दोनों लड़कियां उसे कार में बैठा कर हाईवे पर ले गई, जहां सुजीत को धमका कर उस से 10 लाख रुपए की मांग की. उसे धमकी दी कि अगर उस ने रुपए नहीं दिए तो उस के खिलाफ रेप का केस दर्ज करा दिया जाएगा. बाद में मामला एक लाख रुपए में तय हो गया. गैंग ने 40 हजार रुपए तो सुजीत से तत्काल एटीम से निकलवा लिए थे, बाकी की रकम बाद में देने को कहा था. 2-3 दिनों बाद तक सुजीत ने पैसे नहीं दिए तो वे बारबार फोन कर के उस के फोटो वायरल करने की धमकी देने लगे. इस पर परेशान हो कर सुजीत नरवरिया ने किसी से यह बात कही तो उस ने यह बात एसपी हरिनारायण चारी मिश्र तक पहुंचा दी.

तब एसपी ने तत्काल इस मामले पर काररवाई करते हुए गैंग के ज्यादातर सदस्यों को पकड़वा लिया. गैंग का सरगना अवधेश राणा और डौली का प्रेमी पवन फरार है. पकड़े गए लोगों को पुलिस ने अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया है. 

आईटीआर भरने के लिए आधार भी जरूरी

अब इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने के लिए इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना अनिवार्य कर दिया गया है. अब तक आईटीआर फाइल करने के लिए सिर्फ पर्मानेंट अकाउंट नंबर (पैन) कार्ड ही अनिवार्य था, पर जल्द ही इसके साथ आधार को भी अनिवार्य कर दिया जाएगा. इस नियम को 1 जुलाई से लागु कर दिया जाएगा.

केंद्र सरकार द्वारा इस नियम को वित्त संशोधन विधेयक प्रस्ताव के रूप में लोकसभा में पेश किया जाएगा. प्रस्ताव के मुताबिक टैक्स रिटर्न फाइल करने के अलावा पैन कार्ड के आवेदन के लिए भी आधार कार्ड अनिवार्य होगा. विशेषज्ञों के अनुसार ज्यादा से ज्यादा लोगों को टैक्स के दायरे में लाने के लिए सरकार द्वारा यह प्रस्ताव रखा जाएगा.

इसके अलावा सरकार ने कैश ट्रांजेक्शन लिमिट को भी कम करने का प्रस्ताव रखा है. वित्त मंत्री ने बजट में घोषणा की थी की 3 लाख तक कैश ट्रांजैक्शन किया जा सकेगा, जिसे अब घटाकर 2 लाख करने की बात कही जा रही है.

सूत्रों के अनुसार इस बारे में निर्णय पिछले साल ही ले लिया गया था. हालांकि सरकार के इस प्रस्ताव का कई संगठनों द्वारा विरोध भी किया जा सकता है, जिनकी मांग है कि इसे स्वैच्छ‍िक बनाया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल सितंबर में अपने एक आदेश में ऐसा निर्देश भी दिया था.

अब करें एक्सप्रेस ट्रेन के टिकट पर राजधानी में सफर

प्रभू के राज में हमने कई लीलायें (स्कीम) देखीं. अब इसी कड़ी में एक और स्कीम जुड़ गया है. अब आप एक्सप्रेस के किराए में राजधानी का सफर कर सकते हैं. रेलवे की नई स्कीम से आप एक्सप्रेस/मेल के किराए पर भी राजधानी या शताब्दी ट्रेन में सफर कर सकेंगे.

1 अप्रैल से शुरु होगी स्कीम                   

रेलवे ने ‘विकल्प स्कीम’ को 1 अप्रैल से लॉन्च करने की घोषणा की है. इस स्कीम के तहत अगर आपने किसी ट्रेन में वेटिंग टिकट लिया है तो उसी रूट पर किसी दूसरे ट्रेन में कंफर्म सीट दी जाएगी. यह विकल्प उन यात्रियों के लिए उपलब्ध होगा, जो बुकिंग के वक्त वैकल्पिक ट्रेन में सफर के ऑप्शन को चुनेंगे. ऑनलाइन टिकट बुक करने वालों से इस स्कीम की शुरुआत होगी. इसके बाद विंडो टिकट लेने वालों को इस स्कीम का फायदा उठाने का मौका मिलेगा.

इस सुविधा को लेने से पहले कुछ बातों को जानना जरूरी है-

1. इस स्कीम के तहत अगर आपको ऑप्शन के तौर पर दिए गए ट्रेन में सफर नहीं करना है तो आपके पास टिकट कैंसेल कराने का विकल्प होगा पर यह कन्फर्म टिकट का कैंसलेशन ही माना जाएगा. रिफंड के नियमों के अनुसार ही, कैंसलेशन चार्ज काटने के बाद ही आपको पैसे रिफंड किए जाएंगे.

पर शायद ही इसकी नौबत आए क्योंकि टिकट बुक कराने के वक्त ही आपको ऑप्शनल ट्रेन के बारे जानकारी दे दी जाएगी.

2. 1 अप्रैल से रेलवे के 6 सेक्टर में ई-टिकट कराने वालों को ही विकल्प स्कीम सेलेक्ट करने का मौका दिया जाएगा.

3. अगर आपने राजधानी का टिकट कराया है और आपको विकल्प के तौर पर कोई एक्सप्रेस का टिकट दिया जाए, तो आपके पैसे वापस नहीं होंगे.

वहीं अगर आपने ऐक्सप्रेस ट्रेन का टिकट लिया है और आपको राजधानी या शताब्दी ट्रेन में विकल्प के तौर पर सीट दी जाती है तो आपसे अतिरिक्त शुल्क भी नहीं लिया जाएगा.

4. स्कीम के तहत ऐसा भी हो सकता है कि यात्री ने राजधानी या शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन का टिकट लिया हो लेकिन सफर मेल/एक्सप्रेस ट्रेन में करना पड़े. साथ ही मेल/एक्सप्रेस ट्रेन के टिकट वाले यात्रियों को राजधानी में भी सफर करने का मौका मिल सकता है.

तो इस लिए लॉन्च हुई विकल्प स्कीम

प्रीमियम ट्रेनों में फ्लेक्सी-फेयर सिस्टम के तहत अंतिम समय में टिकट बुकिंग पर किराया बढ़ने के चलते सीटें खाली रह जा रही हैं. ऐसे में इन लोगों को दूसरी ट्रेनों में सुविधा मिल सकेगी और अधिक किराये से भी राहत मिल सकेगी.

“खेलों के डोनाल्ड ट्रंप हैं विराट कोहली”

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली जा रही चार टेस्ट मैचों की बॉर्डर-गावसकर ट्रॉफी में एक के बाद एक विवाद बढ़ते ही जा रहा है. दोनों टीमों के बीच शुरू हुई बयानबाजी रुकने का नाम नहीं ले रही है. अब ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने भारतीय कप्तान विराट कोहली की तुलना अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से कर दी है.

ऑस्ट्रेलिया की न्यूज वेबसाइट 'द डेली टेलिग्राफ' के मुताबिक जैसे अमेरिका के राष्ट्रपति अपने विवादों के लिए अक्सर मीडिया को दोषी ठहराते हैं. ठीक वैसे ही भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली करते हैं.

इससे पहले सीरीज में बढ़ रहे विवादों में ऑस्ट्रेलिया के चोटिल तेज गेंदबाज ने अश्विन को लेकर एक नए विवाद को तूल दिया. स्टार्क ने कहा कि जब अश्विन ऑस्ट्रेलिया में खेलने आएंगे, तो वह उनकी बैटिंग के दौरान उनके माथे पर बाउंसर फेंककर अश्विन को सबक सिखाएंगे. इसके कुछ घंटे बाद ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने कोहली की तुलना अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप से कर दी. इससे सीरीज में एक नए विवाद को तूल मिल गया.

ऑस्ट्रेलियाई अखबार ‘द डेली टेलिग्राफ’ ने विराट कोहली द्वारा ऑस्ट्रेलियाई कैप्टन स्टीव स्मिथ पर उनकी चोट का झूठा मजाक उड़ाने के आरोप में आड़े हाथों लिया. रांची टेस्ट खत्म होने के बाद विराट ने मीडिया में बयान दिया था कि स्टीव स्मिथ ने उनके आउट होने पर अपने कंधे पर हाथ रखकर उनकी चोट का मजाक उड़ाया था. बाद में स्टीव स्मिथ से जब इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि उन्हें बिल्कुल भी नहीं पता कि विराट किस बारे में बोल रहे थे

उन्होंने (स्मिथ) ने विराट की चोट का कोई मजाक नहीं उड़ाया. विराट के इस झूठे आरोप से उन्हें (स्मिथ को) निराशा हुई है. इसके बाद जब मीडिया ने पड़ताल की तो विडियो देखकर मालूम चला कि विराट के आउट होने के दौरान स्मिथ के कंधे पर उनका हाथ नहीं था, बल्कि उनके साथी खिलाड़ी का हाथ था. जो विराट का विकेट गिरने के दौरान बिना किसी प्लान के आ गया.

विराट ने इसी फुटेज पर स्मिथ द्वारा अपनी चोट का मजाक मान लिया. सोशल मीडिया में यह तस्वीरें इसी झूठे फैक्ट के साथ वायरल हो रही थीं, जैसे स्मिथ विराट की कंधे में लगी चोट का मजाक बना रहे हों. हालांकि भारत की पारी में ग्लेन मैक्सवेल ने फील्डिंग के दौरान विराट की चोट का मजाक जरूर उड़ाया था.

एयर इंडिया अपने प्लेन में दे सकती है वाई-फाई

हो सकता है कि आप इस साल जुलाई के बाद एयर इंडिया से सफर करते वक्त ई-मेल भेज पाएं या सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर पाएं.

खबर के मुताबिक, एयर इंडिया अपने एयरबस A-320 फ्लाइट में फ्री वाई-फाई सेवा देने की तैयारी कर रहा है. ये सेवा खास तौर पर घरेलु उड़ानों के लिए ही होगी.

एयर इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी अपने प्लेन में वाई-फाई सेवा लाने की तैयारी कर रही है. जल्द ही एयरक्राफ्ट मैनुफैक्चरर्स से वाई-फाई डिवाइसेस इंस्टाल करने के लिए संपर्क किया जाएगा. हालांकी इस सेवा को शुरू करने के लिए कोई निश्चत तारीख नहीं दी गई है. लेकिन जून या जुलाई से इसके शुरु होने की संभावना बताई जा रही है. अगर एक बार इस फ्री वाई-फाई सेवा को एयर इंडिया ने शुरू कर दिया तो बाकी एयरलाइन्स भी इसे फॉलो करेंगे.

हालांकी कंपनी ने अभी इसके स्पीड या डेटा प्लान की कीमत के बारे में कोई जानकारी साझा नहीं की है. वैसे सूत्रों के मुताबिक ये सेवा मुफ्त होगी, इसलिए इसकी शुरुआत फ्री बेसिक पैक से की जाएगी फिर बाद में पेड डेटा पैक पेश किए जाएंगे. फ्री बेसिक पैक से केवल मेल भेजना रिसीव करना और व्हाट्सऐप चेट ही मुमकिन हो पाएगा. बाद में यात्रियों के रिसपॉन्स के हिसाब से एयर इंडिया बड़े डेटा पैक पेश कर सकती है.

ग्लोबल एयरलाइन्स भी इसी तरह की फ्री डेटा पैक उपलब्ध कराती हैं फिर लिमिट खत्म होने के बाद यात्रियों को एक्स्ट्रा डेटा के लिए भुगतान करना होता है.

इमेज के जरिये ऐसे करें गूगल सर्च

गूगल का सर्च मैकेनिज्म यानि कि गूगल पर कुछ भी ढ़ूढ लेने वाली सुविधा वाकई काबिल-ए-तारीफ है और बहुत अच्छी बात ये है कि इसकी मदद लेने के लिए अब आपको टाइप करने की भी जरूरत नहीं है.

क्या आप जानते हैं कि आप किसी भी इमेज या फोटो को गूगल पर खोज सकते हैं. आप इस सर्च मैकेनिज्म टूल का इस्तेमाल बहुत से कामों में कर सकते हैं. गूगल इमेज सर्च करने के दो प्रकार के होते हैं :

1. अपलोड फाइल

2. ड्रैग एण्ड ड्रॉप फाइल

गूगल सर्च में अपलोड फाइल का कैसे करें इस्तेमाल : अपलोड फाइल ऑप्शन का इस्तेमाल करने के लिए सबसे पहले आपको images.google.com पर जाना होगा और यहां सर्च बॉक्स पर बने कैमरे वाले आइकॉन पर क्लिक करना होगा. अब इसके बाद आपको अपलोड इमेज ऑप्शन पर जाकर, ब्राउज करके अपने सिस्टम यानि कि कंप्यूटर से कोई भी इमेज फाइल ओपेन या सिलेक्ट करना होगा.

उपर दिए गए इन स्टेप्स को फॉलो करते ही आपको अपलोड की गई इमेज से संबंधित कई सारे परिणाम मिल जाएंगे.

गूगल सर्च में ड्रैग और ड्रॉप फाइल ऑप्शन का इस्तेमाल : इस ऑप्शन को इस्तेमाल करने के लिए पुन: images.google.com वेबसाइट पर जाएं और आपके डेस्कटॉप पर पड़ी किसी भी इमेज को लेकर सर्च बॉक्स में रख दीजिए. इससे गूगल आपकी इस इमेज या तस्वीर से मिलती-जुलती सभी प्रकार की इमेज और इससे संबंधित जितनी हो सके आपको जानकारी परिणाम में दिखा देगा.

इलाकाई संतुलन के लिये बने 3 मुख्यमंत्री

उत्तर प्रदेश बड़ा प्रदेश है. उत्तराखंड विभाजन के बाद भी पूरे प्रदेश को संभालना मुश्किल काम है. ऐसे में भाजपा ने इलाकाई संतुलन को साधने के लिये एक मुख्यमंत्री और 2 उप मुख्यमंत्री बनाये हैं. संगठन स्तर पर भाजपा अब प्रदेश अध्यक्ष के रूप में एक और पावर सेंटर बनायेगी जिससे पूरे प्रदेश को 4 हिस्सों में बांट कर काम किया जा सके.

चतुराई वाली बात यह है कि भाजपा ने इलाके के साथ जातीय संतुलन को भी सामने रखा है. मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ सबसे प्रभावी रहे. उनको मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने जाति, धर्म और क्षेत्र तीनों का सतुंलन बना लिया. योगी उत्तर प्रदेश के पूर्वाचंल इलाके से आते हैं. जाति से ठाकुर हैं. योगी की छवि हिन्दुत्व वाली है. जिसका भाजपा को लाभ होगा.

राममंदिर को लेकर योगी सबसे प्रभावी नेताओ में हैं. योगी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की पहली पसंद थे. कोई एक नेता मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठ कर प्रभावी न हो सके इसलिये पावर सेंटर का विभाजन कर दिया गया है.

पहले उप मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्य को तरजीह दी गई. उनके जरीये भाजपा उत्तर प्रदेश के बुन्देलखंड इलाके में अपने प्रभाव को बनाये रखने का प्रयास करेगी. केशव मौर्य इलाहाबाद से आते हैं. इलाहाबाद की फूलपुर लोकसभा से सांसद हैं. फूलपुर देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की लोकसभा सीट रह चुकी है. प्रदेश अध्यक्ष के रूप में केशव मौर्य ने भाजपा संगठन पर पकड़ बनाई है. यह पकड़ योगी या दूसरे उप मुख्यमंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा की नहीं है. जातीय समीकरण में केशव मौर्य पिछड़ी जाति से आते हैं. यादवों और कुर्मी बिरादरी के बाद उत्तर प्रदेश में सबसे प्रभावी पिछड़ी जाति है. भाजपा ने केशव मौर्य के जरीये जाति, क्षेत्र, संगठन के फैक्टर को साधने का काम किया है. सरकार और संगठन के बीच संतुलन का काम केशव मौर्य को संभालना होगा.

दूसरे उप मुख्यमंत्री के रूप में डॉक्टर दिनेश शर्मा का चुनाव मध्य उत्तर प्रदेश जिसमें राजधानी लखनऊ शामिल है उसको सामने रखकर किया गया है. दिनेश शर्मा लंबे समय से लखनऊ नगर निगम के मेयर रहे हैं. पढ़ा लिखा सौम्य चेहरा है. वह लखनऊ में शिक्षक हैं. राजधानी में रहने के कारण यहां के सभी लोगों से भलीभांति परिचित हैं.

जहां योगी और केशव मौर्य पर कई अपराधिक मुकदमें है दिनेश शर्मा की साफसुथरी छवि है. भाजपा में छात्र राजनीति से लेकर युवाओं तक में अच्छा प्रभाव है. जातीय समीकरण को देखें तो वह ब्राहमण वर्ग से हैं जो राजनीति और ब्यूरोक्रेसी में सबसे अधिक मुखर हैं.

भाजपा के इलाकाई संगठन में पश्चिम उत्तर प्रदेश और दलित बिरादरी को कोई प्रतिनिधित्व नहीं दिखा है. असल में इसके लिये भाजपा की अलग रणनीति है. केशव मौर्य के प्रदेश अध्यक्ष पद छोड़ने के बाद नया प्रदेश अध्यक्ष पश्चिमी उत्तर प्रदेश से होगा और दलित बिरादरी को इसमें आगे रखा जा सकता है. असल में भाजपा छोटे राज्यों की पक्षधर रही है. उसको लगता है कि प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था को चलाने के लिये छोटे राज्य जरूरी होते हैं. पिछली बार जब भाजपा की केन्द्र में सरकार थी उसी में उत्तराखंड, झारखंड और छत्तीसगढ राज्य बने थे.

इस समय केन्द्र और प्रदेश दोनो में भाजपा की सरकार है. ऐसे में अगर उत्तर प्रदेश का विभाजन होता है तो कोई बाधा नहीं होगी. राज्य के नेतृत्व के हिसाब से देखें तो यह भाजपा के लिये लाभ का कदम होगा. उत्तर प्रदेश को जीतने की चुनौती खत्म हो जायेगी. भाजपा की सरकार में राज्य का पुर्नगठन होने से उसके मुख्यमंत्री नये राज्यों में बन सकेंगे. राष्ट्रीय दल के रूप में भाजपा करीब 25 साल बाद और कांग्रेस 27 साल के बाद भी उत्तर प्रदेश को जीत नहीं पाई है. ऐसे में उत्तर प्रदेश के विभाजन से ही राष्ट्रीय दलो की मुसीबत खत्म हो सकती है.

पहले प्यार, अब तकरार

अभी हाल ही में उपेन पटेल के ट्वीट ने साफ कर दिया है कि एक्टर उपेन पटेल और करिश्मा तन्ना अलग हो गए है. उपेन ने सोशल मीडिया पर एक्स-गर्लफ्रैंड करिश्मा तन्ना पर चौंकाने वाला आरोप लगाया है. उपेन के ताजा ट्वीट से साफ है कि करिश्मा को अब उनसे कोई मतलब नहीं है. वैसे टीवी पर ये कोई नई बात नहीं ऐसा तो रोज होता ही रहता है. टीवी पर काम करने वाले ऐसे बहुत से एक्स-कपल्स हैं, जिनके बीच बहुत प्यार था लेकिन अब एक-दूसरे को वे लोग देखना तक पसंद नहीं करते. 

दिव्यंका त्रिपाठी-शरद मल्होत्रा

एक्ट्रैस दिव्यंका त्रिपाठी और उनके एक्स-ब्वॉयफ्रैंड शरद मल्होत्रा को ही देख लीजिए. एक वक्त था, जब वे एक-दूसरे से इतना प्यार करते थे कि लिव इन रिलेशनशिप में तक रहने लगे थे. हालांकि, 2015 में उनका ब्रेकअप हो गया.

करण सिंह ग्रोवर-जेनिफर

करण और जेनिफर को टीवी की सबसे खूबसूरत जोड़ियों में गिना जाता था. स्टार वन के धारावाहिक “दिल मिल गए” से अपने दिलों को मिलेने वाले करण और जेनिफर ने 2012 में शादी की थी और 2014 में उनका सेपरेशन हो गया. 2015 में उनका तलाक हो गया. और करण ने बिपाशा बसु से शादी कर ली.

कुशाल टंडन-गौहर खान

कुशाल और गौहर का अफेयर 'बिग बॉस 7' के दौरान शुरू हुआ था. शो से बाहर आने के बाद कुछ समय तक दोनों साथ रहे. लेकिन बाद में अलग हो गए.

करण-काम्या पंजाबी

करण और काम्या टीवी के सबसे चर्चित कपल्स में से एक रहे हैं. 2015 में दोनों का ब्रेकअप हुआ. दरअसल, काम्या को करण से कम ही उम्मीद थी कि वे उन्हें और पहली शादी से उनकी बेटी को हमेशा के लिए अपनाएंगे.

अंकित गोर-रुपल त्यागी

अंकित और रूपल की लव स्टोरी धारावाहिक 'सपने सुहाने लड़कपन' के सेट पर शुरू हुई थी. कहा जाता है कि अंकित, रूपल त्यागी और अदा खान को एक साथ डेट कर रहे थे. हालांकि, कभी किसी ने इस फैक्ट को खुलकर स्वीकार नहीं किया. लेकिन रूपल और अंकित ने ब्रेकअप के बाद कभी एक-दूसरे से खुलकर बात नहीं की.

शालीन-दलजीत

नच बलिए 4 के विजेता शालीन और दलजीत की टीवी शो 'कुलवधू' के सेट पर शालीन और दलजीत की पहली मुलाकात हुई. दोनों की दोस्ती प्यार में बदली और 2009 में उनकी शादी हो गई. और 2015 में उनका सेपरेशन हो गया.

आईपीएल 10 से पहले ही ‘दिल्ली डेयरडेविल्स’ को लगा झटका

आईपीएल का दसवां सीजन 5 अप्रैल शुरू होने वाला है. टूर्नामेंट शुरू होने से पहले से ही आईपीएल के इस सीजन को एक और बड़ा झटका लगा है. साउथ अफ्रीकी क्रिकेटर जेपी डुमिनी ने इंडियन प्रीमियर लीग के दसवें सीजन से अपना नाम वापस ले लिया है. वे दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम के स्टार प्लेयर रहे हैं, और टीम के लिए कप्तानी भी कर चुके हैं.

क्यों वापस लिया नाम

डुमिनी ने निजी कारणों का हवाला देते हुए आईपीएल के नए सीजन से नाम वापल ले लिया. दिल्ली डेयरडेविल्स टीम की ओर से जारी स्टेटमेंट में डुमिनी ने बताया, 'अपनी फ्रेंचाइजी से मिली मदद और आपसी समझ के लिए मैं उनका आभारी हूं. इतने टैलेंटेड प्लेयर्स के साथ खेलना और उन्हें लीड करना मेरे लिए सम्मान की बात रही. मुझे उम्मीद है कि मैं आगे में एकबार फिर फ्रेंचाइजी का मेंबर बनूंगा.'

वहीं दूसरी तरफ दिल्ली डेयरडेविल्स टीम के सीईओ हेमंत दुआ ने कहा, 'हम जेपी के फैसले का सम्मान करते हैं, एक फ्रेंचाइजी के रूप में हम उनकी हालत को समझ सकते हैं. हम फिलहाल इस बात को केवल कन्फर्म कर सकते हैं.'

2016 में दिल्ली की टीम से खेलते हुए डुमिनी ने 10 मैचों में 191 रन बनाने के अलावा 2 विकेट भी लिए थे. दिल्ली की टीम ने डुमिनी की जगह पर फिलहाल किसी और प्लेयर को नहीं लिया है. 

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