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ऑनलाइन काम करते समय इन बातों का रखें ध्यान

ऑनलाइन पैसे कमाने के कई तरीके हैं. आजकल घर पर रहते हुए भी हर महीने हजारों रुपए कमाए जा सकते हैं. ब्लॉगिंग से लेकर ऑनलाइन ट्यूशन देने जैसे कई तरीके हैं जिससे आप आसानी से पैसे कमा सकते हैं. पर काम जितना आसान लगता है उतना है नहीं, जरा सी असावधानी से आपको अपनी मेहनत की कमाई से हाथ धोना पड़ सकता है.

ऑनलाइन काम करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है-

1. फर्स्ट इंप्रेशन ही है लास्ट इंप्रेशन

चाहे आप किसी भी ऑनलाइन कार्य को करने के लिए प्रयास कर रहे हैं पर पहला प्रभाव अच्छा बनाना बहुत जरूरी है. अगर आपका पहला प्रभाव ही सही नहीं होगा तो कंपनी आपको काम पर नहीं रखेगी.

अगर आप ब्लॉगिंग या यूट्यूब चैनेल के जरिए पैसे कमाना चाहते हैं, तो कुछ अलग करने की सोचें. ध्यान रखें कि आपकी तरह सैंकड़ों लोग हैं जो अपनी किस्मत आजमाना चाह रहे हैं.

2. अपना कौशल दिखाएं

हो सकता है कि आप बहुत अच्छे लेखक या ग्राफिक डिजाइनर हों पर अगर आपको खुद को बेचना नहीं आता है तो आपका कौशल और टेलेंट को कोई महत्व नहीं देगा. आप बिना कुछ हासिल किए ही सालों बीता देंगे. इसलिए ये बहुत जरूरी है कि आप खुद को बेचने की कला विकसित करें.

3. पार्ट टाइम को भी वक्त देना जरूरी

आप अगर पार्ट टाइम में ही ऑनलाइन काम कर रहे हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि आप इसे दरकिनार कर दें. आपको अपने ऑनलाइन काम को भी जरूरत के अनुसार वक्त देना होगा. वक्त की कमी से आपका काम चौपट हो सकता है.

4. आर्थिक जरूरतों पर ध्यान दें

पहले तय करें कि आप ऐकस्ट्रा पैसे क्यों कमाना चाहते हैं. क्या आप यूं ही थोड़े से ज्यादा पैसे कमाना चाहते हैं या फिर आप किसी खास वजह से जल्द से जल्द ज्यादा पैसे कमाना चाहते हैं. जरूरत के हिसाब से ही आप अपने पार्ट टाइम काम में पैसे और समय लगाएं.

5. ईमानदारी है बहुत जरूरी

माना कि हम उस देश के वासी जिस देश में पैसा बोलता है. पर ईमानदारी बरतने से आपको नुकसान नहीं, उलटे फायदा होगा. अपने काम के प्रति ईमानदार रहें. किसे दूसरे के काम को खुद के नाम से प्रकाशित न करें. अगर आप घर पर काम कर रहे हैं यानि आपका कोई बॉस नहीं है, अपनी मर्जी के मालिक हैं आप. पर इसका मतलब यह नहीं कि आप अपने काम से ही जी चुराने लगें. ध्यान रहे कि आप कुछ अतिरिक्त कमाई के लिए ऑनलाइन काम कर रहे हैं. 

“जिफ” फाइल बनाने के बेहतरीन ऐप

“जिफ” ग्राफिक्स इंटरचेंज फॉर्मेट सोशल मीडिया पर शॉर्ट फनी क्लिप शेयर करने का अच्छा जरिया बन गया है. यह तेजी से लोकप्रिय भी होता जा रहा है. अगर आप भी जिफ इमेज तैयार करना चाहते हैं, तो यह बेहद आसान है. 6 सेकंड के जिफ के जरिए न सिर्फ अपनी भावनाओं को व्यक्त किया जा सकता है, बल्कि बड़ी सूचनाओं को साझा किया जा सकता है.

पहले इस फॉर्मेट का इस्तेमाल ब्लॉगिंग साइट टम्बलर पर किया गया था, लेकिन अब यह फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम आदि के लिए भी यह आइडियल है. यह यूजर्स के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसमें कोई भी सब्जेक्ट एक ही प्रक्रिया को बार-बार दोहराता है.

अगर आपके पास तस्वीर और वीडियोज हैं, तो उसे आप आसानी से जिफ में बदल सकते हैं. इसके लिए पहले से फोन में मौजूद तस्वीरों और वीडियो से जिफ बना सकते हैं या फिर आप चाहें, तो लाइव वीडियो से भी जिफ तैयार कर सकते हैं.

कुछ ऐप्स ऐसे हैं जिनकी मदद से आप किसी भी फोटो या वीडियो को “जिफ” फाइल में बदल सकते हैं.

1.पिक्सल एनिमेटर

यह एक तरह का यूनिक जिफ क्रिएटर ऐप है, इसमें आप जिफ को अपने हाथों से तैयार कर सकते हैं. आप किसी कैरेक्टर को तैयार कर उसे पिक्सल आर्ट की मदद से छोटे जिफ बना सकते हैं. इसमें पिक्सल आर्ट पर बहुत ज्यादा फोकस किया गया है, जिससे बेहतरीन जिफ तैयार किए जा सकते हैं. फ्री वर्जन में आप 15 फ्रेम में जिफ बना सकते हैं, और प्रो वर्जन में आपको अनलिमिटेड फ्रेम मिलेगा. इसमें एनिमेशन को जिफ फॉर्मेट में एक्सपोर्ट करने की भी सुविधा दी गई है. अगर आप चाहें, तो जिफ फाइल को एडिट भी कर सकते हैं. इसमें पेंट बकेट यूजफुल टूल है. इसकी मदद से जिफ में लाइन के रंग को बदल सकते हैं. यह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है.

2. जिफ मेकर कैमरा

जिफ मेकर कैमरा एप्लिकेशन के जरिए दिलचस्प और फनी एनिमेटेड जिफ तैयार किए जा सकते हैं. इस ऐप में जिफ तैयार करने के लिए कम से कम 10 और अधिकतम 50 फोटो होने चाहिए. यहां आप 5 से 25 सेकंड के जिफ तैयार कर सकते हैं. साथ ही, इसमें आपको जिफ को एडिट करने का विकल्प भी मिलेगा. इसके लिए आप अपने एलबम के फोटो का इस्तेमाल कर सकते हैं.

अगर आप अपनी तस्वीरों से कोलाज की तरह तैयार करना चाहते हैं, तो इसकी भी सुविधा ऐप में मौजूद है. यहां पर आप अधिकतम 9 फोटोज की मदद से कोलाज तैयार कर सकते हैं. इसमें एक सुविधा और है, जिसकी मदद से लाइव मोमेंट्स को जिफ में बदल सकते हैं. यह ऐप हिंदी समेत 24 भाषाओं को सपोर्ट करती है. इसे गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है.

3. जिफ क्रिएटर

इस ऐप की मदद से आप अपने मोबाइल के कैमरे से या फिर मोबाइल के एलबम में उपलब्ध फोटो से जिफ इमेज तैयार कर सकते हैं. इसमें 30 सेकंड तक के जिफ तैयार करने की सुविधा है. साथ ही, 10 फिल्टर्स, एनिमेशन एडिटिंग, एनिमेशन रिवर्टिंग जैसे फीचर्स दिए गए हैं. इसकी मदद से जिफ तैयार करना आसान है. यहां आप दूसरे यूजर्स द्वारा तैयार किए गए एनिमेशन्स को भी देख सकते हैं. साथ ही, अपने तैयार किए गए एनिमेशन को मेमोरी कार्ड में सेव कर सकते हैं. यह ऐप गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है.

4. जिफ मी कैमरा

एनिमेटेड जिफ तैयार करना हो तो इस ऐप की मदद ले सकते हैं. इस ऐप की मदद से मोबाइल फोन के कैमरे से कुछ सेकंड के वीडियो तैयार कर उसे जिफ में बदला जा सकता है. आप यहां पर 14 सेकंड का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे जिफ में बदल सकते हैं. साथ ही, ऐप में कई तरह के कलर फिल्टर भी दिए गए हैं, जिनका इस्तेमाल जिफ के साथ कर सकते हैं. अगर आप इसका प्रो वर्जन इंस्टॉल करते हैं, तो आप वाटर मार्क को हटा सकते हैं. प्रो वर्जन में आपको स्लो मोशन वीडियो रिकॉर्डिंग, स्टॉप मोशन रिकॉर्डिंग, टाइम लैप्स रिकॉर्डिंग जैसे कई और फीचर्स भी मिलेंगे.

5. वीडियो को बनाएं जिफ

अगर आपके पास वीडियो क्लिप्स हैं और उसे जिफ में बदलना चाहते हैं, तो वीडियो पैड फ्री वीडियो एडिटर टूल की मदद ले सकते हैं. इंटरनेट से इसे फ्री में डाउनलोड किया जा सकता है. टूल को डाउनलोड करने के बाद प्रोग्राम को स्टार्ट करने पर ओपन प्रोजेक्ट का बटन दिखाई देगा. उसके बाद जिस वीडियो को एनिमेटेड जिफ में बदलना चाहते हैं, उसे सिलेक्ट कर ओपन कर लें. फिर स्क्रीन के नीचे दी गई टाइमलाइन विंडोज में क्लिप्स को ड्रैग कर लें. फिर जिस हिस्से को जिफ में बदलना चाहते हैं, उसे सिलेक्ट कर लें. इसके बाद सिक्वेन्स प्रीव्यू में देख सकते हैं कि यह देखने में कैसा लग रहा है.

अगर आप चाहें, तो इसमें स्पेशल इफेक्ट का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. ऐप में आप जिफ की स्पीड को भी कंट्रोल कर सकते हैं.

विवेक ओबरॉय बनेंगे खलनायक

विवेक ओबरॉय फिल्म ‘कंपनी’, ‘शूट आउट एट लोकखंडवाला’ में एक डॉन के रूप में नजर आयें. तो वहीं फिल्म ‘रक्तचरित्र’ में गैंगस्टर से पॉलिटिशियन प्रताप रवि का किरादर निभाया और फिल्म ‘क्रिश 3’ में सुपरविलेन ‘काल’ का किरादर. विवेक के इन सब किरदारों में एक ग्रे शेड थी जिसे उन्होंने अपनी बेहतरीन अदाकारी से और प्रभावी बनाया.

​विवेक ओबरॉय इस साल सबसे बड़ी तमिल फिल्म ​में अभिनेता अजित कुमार संग नजर आएंगे. साथ ही वे एक्सेल एंटरटेनमेंट के वेब सीरीज ‘पावर प्ले’ से डिजिटल प्लैटफॉर्म पर भी डेब्यू करेंगे.

इस वेब सीरीज में भी विवेक बहुत ही महत्वपूर्ण किरदार में नजर आएंगे. विवेक एक गरीब लड़के के किरदार में नजर आएंगे जो क्रिकेट में सट्टा लगाते लगाते अमीर हो जाता है और फिर एक टीम का मालिक बन जाता है.

अब तक विवेक को विरोधी नायक भूमिकाओं के लिए अच्छी प्रतिक्रिया मिली है वह अभूतपूर्व है. विवेक को कॉमेडी करना भी पसंद है पर वे मानते है की, नेगेटिव तथा ग्रे शेड किरदार अलग और चैलेंजिंग होते है, वह वास्तविक जीवन में फिल्म के ग्रे शेड किरादर से काफी अलग है.

धर्म डराता क्यों है

दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कालेज की छात्रा गुरमेहर कौर की दिलेरी की तारीफ करनी होगी. उस ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को चुनौती दे कर साबित कर दिया है कि 20 वर्षीय अनजान युवती भी कट्टर, हिंसक, कानून की परवाह न करने वाले शासकों से नहीं डरती जबकि बड़ेबड़े उद्योगपति, ऊंचे ओहदों पर बैठे अफसर, समाचारपत्रों के मालिक, लेखक, विचारक, छोटे दलों के नेता सरकार से डर कर दुबक जाते हैं. यह दूसरी बात है कि गुरमेहर कौर अंतत: डर सी गई और फेसबुक व सोशल मीडिया पर अपना वीडियो वापस लेते हुए ट्वीट कर जालंधर लौट गई. उसे अपने गृहनगर में तंग नहीं किया जाएगा इस की गारंटी नहीं पर उस के पिता कैप्टन मंदीप सिंह का करगिल युद्ध में शहीद होने का कवच उस के काम आया वरना भगवाई ताकतें उसे जिंदा लाश बना देतीं.

हिंदू धर्म की रक्षा करने का अधिकार संवैधानिक अधिकार है पर यही अधिकार दूसरों का भी है कि वे सच को सच कहें. सच को कुचल कर एक छद्म समाज बना कर हलवापूरी और अपने लिए धन व सुविधाओं को जमा करना न तो राजनीतिक अधिकार है और न ही संवैधानिक अधिकार.

यह वही हिंदू धर्म है, जो औरतों की रक्षा न करने पर उन्हें जिंदा जलने को जौहर कह कर उन्हें मरने को उकसाता रहा है. यह वही धर्म है जिस में कैकेयी को खलनायक बना डाला जबकि दशरथ उस के पुत्रों को राज्य के बाहर भेज कर राम का राज्याभिषेक कराना चाह रहे थे. यह वही धर्म है जिस ने कुंती को मजबूर किया कि उसे पति से नहीं औरों से पुत्र पैदा करने पड़े. इस तरह की बेईमानियों से हिंदू धर्म भरा पड़ा है. इस हिंदू धर्म को अब देशभक्ति का बुरका पहना कर जेहादीपन अपने लोगों पर ही थोपना और वह भी औरतों पर, धर्म की असलियत की पोल खोलता है. हर धर्म असल में सच से डरता है और गुरमेहर कौर ने यही कहने की कोशिश की है. चूंकि धर्म के ग्राहकों में औरतों की गिनती ज्यादा है, चाहे मलाला हो, वृंदा करात, अरुंधति रौय या गुरमेहर कौर, धर्म के दुकानदार अपनी आमदनी कम होते देख उन के पीछे पड़ जाते हैं.

गुरमेहर कौर ने हिम्मत दिखाई है. चाहे अब वह फिर घर में दुबक जाना चाहती है पर वह जता गई कि राज्य गृहमंत्री तक एक अदना 20 वर्षीय लड़की को कुचलने में किस तरह साजिश का हिस्सा बन सकते हैं. देश की सत्ता आज से ही नहीं, 1947 से ही हिंदू समाज के सुधारों का विरोध करती रही है. गुरमेहर कौर चाहे कुछ दिनों के लिए चर्चा में रहे पर उस ने बता दिया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तभी तक जिंदा है जब तक उसे इस्तेमाल करा जाए.

यों करें व्हाइट आईलाइनर का प्रयोग

आई मेकअप को मिनटों में अट्रैक्टिव लुक देने के लिए आईलाइनर से उम्दा मेकअप प्रोडक्ट और कोई नहीं. इसलिए महिलाएं अपनी खूबसूरती में चार चांद लगाने के लिए ब्लैक से ले कर कलरफुल आईलाइनर भी बिंदास लगाती हैं. लेकिन बात जब व्हाइट आईलाइनर यूज करने की आती है तब वे थोड़ा झिझक महसूस करती हैं. उन्हें लगता है कि व्हाइट आईलाइनर उन के लुक को बिगाड़ सकता है. अगर आप भी कुछ ऐसी ही सोच रखती हैं तो इसे बदल दें, क्योंकि व्हाइट आईलाइनर आंखों की खूबसूरती बढ़ाने के साथसाथ आईब्रो बोन, लिप्स जैसे फेशियल फीचर को भी हाईलाइट करता है. कैसे, आइए जानते हैं:

ब्राइट लुक

अगर आप की आंखें छोटी हैं, तो आई मेकअप की शुरुआत पैंसिल व्हाइट आईलाइनर से करें. आंखों की निचली आईलिड पर व्हाइट आईलाइनर का सिंगल कोट लगाएं. उस के बाद (उस के ऊपर नहीं, उस के पीछे) काजल, ब्लैक या फिर दूसरे किसी कलर का आईलाइनर लगाएं. इस से आप की छोटी आंखें बड़ी नजर आएंगी.

विंटेज लुक

अगर आप अपने आई मेकअप को विंटेज लुक देना चाहती हैं, तो लिक्विड व्हाइट आईलाइनर को अपने वैनिटी बौक्स में खास जगह दें. पलकों पर पहले ब्लैक आईलाइनर का डबल कोट लगाएं. सूख जाने पर उस से सटा कर व्हाइट आईलाइनर का डबल कोट लगाएं. ब्लैक ऐंड व्हाइट आईलाइनर का कौंबिनेशन आप को विंटेज लुक देगा.

कैट लुक

कैट आई लुक के लिए पलकों पर लिक्विक ब्लैक आईलाइनर का डबल कोट लगाएं. आईलाइनर को आखिरी छोर पर ला कर ऊपर की तरफ ले जाएं. अब निचली आईलिड के सिर्फ कौर्नर पर लिक्विड व्हाइट आईलाइनर लगा कर उसे नीचे की तरफ ले जा कर मोड़ दें.

वी लुक

वी लुक के लिए आई कौर्नर (आगे के) पर पैंसिल व्हाइट आईलाइनर से वी का शेप बनाएं. उस के बाद ब्लैक, ब्राउन जैसा चाहे वैसा आईलाइनर लगाएं. व्हाइट आईलाइनर से आई कौर्नर को जितना नुकीला बना सकती हैं बनाएं. इस से आंखें और भी आकर्षक नजर आएंगी.

कूल लुक

मिस कूल नजर आना चाहती हैं तो अपने आई मेकअप को भी कूल लुक दें. इस के लिए पहले पलकों पर ब्लैक कलर का लिक्विड आईलाइनर लगाएं. उस के बाद पैंसिल शिमरी व्हाइट आईलाइनर लगा कर हलके से स्मज करें. इस से आई मेकअप को आइसी (बर्फ  की तरह) इफैक्ट मिलेगा और आप कूल गर्ल नजर आएंगी.

ब्लैक ऐंड व्हाइट लुक

अगर आप ब्लैक ऐंड व्हाइट आउटफिट पहन रही हैं, तो उस के साथ में ब्लैक ऐंड व्हाइट ऐक्सैसरीज कैरी करने के साथसाथ आई मेकअप को भी ब्लैक ऐंड व्हाइट लुक दें. इस के लिए पलकों पर ब्लैक लिक्विड आईलाइनर और निचली आईलिड पर व्हाइट लिक्विड आईलाइनर लगाएं. आप चाहें तो ऊपर व्हाइट नीचे ब्लैक आईलाइनर भी लगा सकती हैं.

ड्रामैटिक लुक

पार्टी या फंक्शन में ड्रामा क्वीन का खिताब पाने के लिए सब से पहले पलकों पर ब्लैक या ब्राउन कलर का सिंगल कोट आईलाइनर लगाएं. उस के  बाद लिक्विड व्हाइट आईलाइनर लगाएं. फिर ब्लू, ग्रीन या पर्पल शेड का आईलाइनर लगा कर ग्लिटर आईलाइनर लगा लें. लोगों की निगाहें आप के आई मेकअप पर थम सी जाएंगी.

डिफरैंट आई लुक देने के साथसाथ व्हाइट आईलाइनर चेहरे की कुछ कमियों को छिपाने का भी काम करता है. चलिए जानते हैं किस तरह आप व्हाइट आईलाइनर का इस्तेमाल कर अपनी खूबसूरती में चार चांद लगा सकती हैं.

आईलाइनर कम आईशैडो

पैंसिल व्हाइट आईलाइनर का इस्तेमाल आप बतौर व्हाइट आईशैडो भी कर सकती हैं. अगर आप व्हाइट आईलाइनर आईशैडो की तरह लगा कर किसी भी रंग का आईशैडो उस के ऊपर लगाती हैं तो उस का शेड और भी गहरा नजर आता है और आईशैडो लंबे समय तक टिका भी रहता है.

प्योर शेड

जब भी ब्लू, ग्रीन, पर्पल जैसा कोई भी कलरफुल आईलाइनर लगाना हो, उस से पहले लिक्विड व्हाइट आईलाइनर लगाएं. फिर उस के ऊपर कलरफुल लिक्विड आईलाइनर लगाएं. व्हाइट बेस होने की वजह से आप को कलरफुल आईलाइनर का प्योर शेड मिलेगा.

हाइड डार्क सर्कल्स

अगर आप की आंखों के नीचे डार्क सर्कल्स हैं तो उन्हें छिपाने के लिए पैंसिल व्हाइट आईलाइनर लगा कर उसे हलके से स्मज करते हुए फैला दें. जब आईलाइनर से डार्क  सर्कल्स पूरी तरह कवर और सैट हो जाएं, तब मेकअप की शुरुआत करें.

हाईलाइट आईब्रोज

अपनी आईब्रोज को हाईलाइट करने के लिए आईब्रो बोन पर पैंसिल व्हाइट आईलाइनर लगाएं. इसे अच्छी तरह स्मज करें. इस से आंखों और आईब्रोज के बीच का गैप बढ़ेगा और आईब्रोज और भी आकर्षक नजर आएंगी.

करैक्ट आईब्रोज

अगर आप की आईब्रोज बहुत पतली या शेप में नहीं हैं तो पैंसिल व्हाइट आईलाइनर का इस्तेमाल करते हुए आईब्रोज को करैक्ट शेप दें, फिर उन के अंदर ब्लैक या ब्राउन शेड का आईशैडो लगा कर आईब्रोज को फुलर लुक दें.

फुलर लिप्स

अगर आप के लिप्स पतले हैं, तो आप पैंसिल व्हाइट आईलाइनर का इस्तेमाल लिप लाइनर की तरह भी कर सकती हैं. व्हाइट आईलाइनर से पहले अपने लिप्स को परफैक्ट शेप दें. उस के बाद लिपस्टिक लगा लें. इस से आप के लिप्स को फुलर लुक मिलेगा. 

भाजपा को आई मुस्लिमों की याद

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भाजपा इस बात का प्रचार करती रही कि उसने एक भी मुस्लिम प्रत्याशी को विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं दिया है. इस प्रचार से सारे वोटर का धुव्रीकरण किया गया.

विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने के बाद अब भाजपा अपना मुस्लिम विरोधी चेहरा बदलना चाहती है. इसके लिये उसने मंत्रीमंडल में मोहसिन रजा को मंत्री के रूप में शामिल किया. यह बात और है कि मोहसिन रजा विधानसभा या विधान परिषद के सदस्य नहीं हैं. मंत्री बनने के 6 माह के अंदर मोहसिन रजा को विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य बनाना जरूरी है.

ऐसे में अब भाजपा मोहसिन रजा को विधान परिषद के जरीये स्थायी रूप से सदन में लाया जायेगा. विधानसभा चुनाव में जिस तरह से भाजपा ने किसी मुस्लिम चेहरे को चुनाव मैदान में नहीं उतारा उसको लेकर पार्टी को आलोचना का शिकार भी होना पड़ा. अब भाजपा इस आलोचना से खुद को दूर रखना चाहती है.

चुनाव बाद उसे इस बात का ख्याल आया कि सदन में समाजिक संतुलन बनाने के लिये मुस्लिम चेहरे का होना भी जरूरी है. ऐसे में उसने मोहसिन रजा को मंत्री बना दिया. यही नहीं भाजपा इस बात का भी दावा कर रही है कि बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं ने तीन तलाक के मुद्दे पर उन्हें वोट दिया है. भाजपा ने कट्टर छवि वाले योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया तो मुलायम छवि वाले डॉक्टर दिनेश शर्मा को उपमुख्यमंत्री बनाया है. डॉक्टर दिनेश शर्मा लखनऊ के मेयर रहे हैं. मुस्लिम मतदाताओं में उनकी छवि बहुत मुलायम मानी जाती है. चुनाव जीत के बाद अब भाजपा इस बात का प्रयास कर रही है कि उसकी छवि को सुधारा जाये जिससे सबका साथ सबका विकास का दावा सही साबित हो सके.

भाजपा की जीत के साथ प्रदेश में हिन्दुत्व पूरी तरह से उभार पर है. जिससे उत्तर प्रदेश की गंगा जमुनी सभ्यता खतरे में दिख रही थी. भाजपा ने इस संतुलन को बनाये रखने के लिये न केवल एक मुस्लिम चेहरे को मंत्रिमंडल में शामिल किया बल्कि इस बात को भी बता रही है कि खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर स्थित मंदिर में मुस्लिमों को संरक्षण मिलता रहा है.

वहां पर तमाम मुस्लिम दुकानें चलाते हैं. भाजपा बारबार इस बात को दोहराती है कि वह देश के हर नागरिक को एक नजर से देखती है. उसके लिये सभी बराबर है. वह इस सवाल का जवाब नहीं देती कि विधानसभा चुनाव में एक भी टिकट न देना और जीत के बाद मुस्लिम कोटे से एक मंत्री बनाना किस रणनीति का हिस्सा था.

एक “हिट” फिल्म को तरस रहे सितारे

बॉलीवुड ऐसी जगह जहां अगर हर फिल्म हिट ना हो तो लोग एक्टर्स को भूलने लगते हैं. ऐसे में उनके दिल में जगह बनाने के लिए जरूरी है कि एक्टर्स अच्छी फिल्में देते रहें. अब बॉलीवुड में कुछ सितारें ऐसे हैं कि धीरे-धीरे निर्देशक और निर्माता उन्हें भूलने लगे है. इनकी की फ्लॉप फिल्मों का नबंर इतना बढ़ता जा रहा है कि करियर डूबने की कगार पर पहुंच गया है.

रणबीर कपूर

रणबीर कपूर की 'ये जवानी है दीवानी' के बाद एक भी हिट फिल्म नहीं आई है. उनकी 'रॉय', 'बेशर्म', 'बॉम्बे वेलवेट' और 'तमाशा' बॉक्स आफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रहीं थी. पिछले साल आई 'ऐ दिल है मुश्किल' भी कोई खास कमाल नहीं कर सकी.

कटरीना कैफ

एक वक्त बॉलीवुड की टॉप हीरोइन रही कटरीना के पास अब ज्यादा फिल्में भी नहीं हैं. 'फितूर', 'फैंटम' और 'बार बार देखो' के पिटने के बाद कटरीना को भी एक हिट फिल्म की सख्त जरूरत है.

शाहिद कपूर

शाहिद कपूर का करियर हमेशा उतार-चढ़ाव भरा रहा है. अगर उनकी एक फिल्म हिट होती है तो दूसरी उतनी ही बड़ी फ्लॉप साबित होती है. जैसे 'हैदर' के बाद 'शानदार' आई और 'उड़ता पंजाब' के बाद 'रंगून'.

विद्या बालन

नेशनल अवॉर्ड विनर और लेडी खान कही जाने वाली विद्या को हिट फिल्म दिए एक अरसा हो गया है. 2012 में आई उनकी फिल्म 'कहानी' के बाद उनकी सभी फिल्में बुरी तरह से फ्लॉप हुईं. उनकी आने वाली फिल्म 'बेगम जान' से ना ही सिर्फ उन्हें, बल्कि उनके फैंस को भी काफी उम्मीदें हैं.

अर्जुन कपूर

अर्जुन कपूर की पिछले साल आई फिल्म 'की एंड का' को वैसे तो तारीफें मिलीं थीं लेकिन दर्शकों ने इस फिल्म को ज्यादा पसंद नहीं किया था. '2 स्टेट्स' के बाद उनकी एक भी हिट फिल्म नहीं आई है. और अब अर्जुन को एक हिट फिल्म की बहुत जरूरत है.

परिणीती चोपड़ा

परिणीती चोपड़ा अपनी पहली ही फिल्म से हिट हो गई थीं. लेकिन कहीं ऐसा ना हो कि परिणीती वन हिट वंडर बन कर रह जाएं. 'इश्कजादे' के बाद आई उनकी फिल्में बड़े पर्दे पर ज्यादा दिन टिक नहीं पाई.

फरहान अख्तर

'भाग मिल्खा भाग' में फरहान अख्तर ने जो कमाल किया था, वैसा कमाल वो बाकी फिल्मों में करने में नाकाम रहे. 'शादी के साइड अफेक्ट्स' और 'वजीर' अच्छी स्टार कास्ट होने के बावजूद भी फ्लॉप रहीं.

सोनाक्षी सिन्हा

दबंग गर्ल सोनाक्षी सिन्हा का करियर डूबने की कगार पर है. उनकी हाल ही में रिलीज हुई फिल्में 'फोर्स 2' और 'अकीरा' को ज्यादा दर्शक नहीं मिले थे. और अभी फिलहाल में सोनाक्षी के पास कोई फिल्म है भी नहीं.

जैकलीन फर्नांडिस

जैकलीन फर्नांडिस ने एक फ्लॉप से अपने करियर की शुरुआत की थी. उनकी कुछ फिल्में हिट हुई लेकिन अब उनका करियर वापस उसी जगह पर पहुंच गया है. काफी समय से जैकलीन नजर भी नहीं आ रही हैं.

सिद्धार्थ मल्होत्रा

'स्टूडेंट ऑफ दी इयर' से जब सिद्धार्थ मल्होत्रा ने अपने करियर की शुरुआत की थी तब लगा था कि बॉलीवुड में नए स्टार की एंट्री हो गई है. लेकिन सिद्धार्थ तो वन हिट वंडर बन के रह गए. उसके बाद आई उनकी सभी फिल्में फ्लॉप हुईं.

आदित्य रॉय कपूर

आदित्य रॉय कपूर को इस समय किसी काम की बहुत जरूरत है. वे काफी समय से घर पर बैठ है. आदित्य रॉय कपूर ने साइड एक्टर बन कर अपना करियर शुरू किया था. उनकी फिल्म 'आशिकी 2' जबरदस्त हिट हुई थी लेकिन वही उनकी बाकी फिल्में फ्लॉप रहीं. फिलहाल उनके पास कोई प्रोजेक्ट नहीं है.

अर्जुन रामपाल

अर्जुन रामपाल की पिछले कुछ समय में आई सभी फिल्में फ्लॉप रही हैं. हाल ही में विद्या बालन के साथ आई 'कहानी 2' भी कोई कमाल नहीं कर सकी थी. अगर 'डैडी' भी फ्लॉप होती है तो कहीं उनका करियर खत्म ना हो जाए.

इमरान हाशमी

बॉलीवुड के किशर किंग इमरान हाशमी ने अपने लंबे करियर में कई हिट फिल्में दी हैं. लेकिन लगता है कि पिछले कुछ समय से उनका बुरा वक्त चल रहा है. तभी तो एक हिट फिल्म दिए उन्हें सालों हो गए हैं.

बिहार के गांव का लड़का : भारत रत्न बिस्मिल्लाह खां

क्या आप जानते हैं कि 22 मार्च को साल 1912 में बिहार एक प्रदेश के रूप में स्थापित किया गया था. हर साल की तरह इस बार भी, इस समय बिहार की राजधानी पटना तीन दिनों के लिए किसी उत्सव की तरह 105 वें बिहार दिवस समारोह के तैयार हो चुकी है.

आज हम आपको बिहार से ही जुड़े एक ऐसे महान व्यक्तित्व और संगीतकार के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्हें संपूर्ण विश्व में ख्याति प्राप्त है.

साल 2001 में उस्ताद बिस्मिल्ला खां को भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था. वे तीसरे भारतीय संगीतकार हैं जिन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया. बिस्मिल्ला खां का जन्म बिहार के एक मुस्लिम परिवार में पैगम्बर खां और मिट्ठन बाई के यहां हुआ था.

हम आपको बता देना जाहते हैं कि कि खान साहब का जन्म 21 मार्च 1916 को बिहार के डुमरांव में हुआ था, यानि कि बीते हुए दिन यानि कि कल बिस्मिल्लाह खान का जन्म दिन था. संगीतकार बिस्मिल्लाह खान के नाम "बिस्मिल्लाह!" का मतलब होता है "अच्छी शुरुआत या श्रीगणेश".

उस्ताद बिस्मिल्ला खां से जुड़े हम आपको ऐसे राज बताएंगे जिनसे आप अभी तक अनजान होंगे..

1. मशहूर संगीतकार और शहनाई वादक "बिस्मिल्ला खां" के खानदान के लोग दरबारी राग बजाने में माहिर थे, जो बिहार की भोजपुर रियासत में अपने संगीत का हुनर दिखाने के लिये अक्सर जाया करते थे. उनके पिता बिहार की डुमरांव के महाराजा केशव प्रसाद सिंह के दरबार में शहनाई बजाया करते थे.

2. 6 साल की उम्र में ही बिस्मिल्ला खां अपने पिता के साथ बनारस आ गये, जहां उन्होंने अपने चाचा अली बख्श 'विलायती' से शहनाई बजाना सीखा.

3. बिस्मिल्ला और उनके परिवार को लेकर सबसे रोचक बात यह है कि वे मुस्लिम होने के बावजूद काशी विश्वनाथ मंदिर में जाकर शहनाई बजाया करते थे. उनके उस्ताद चाचा 'विलायती' विश्वनाथ मन्दिर में स्थायी रूप से शहनाई-वादन का काम करते थे.

4. बिस्मिल्ला खां देश के चुनिंदा उन कलाकारों में से एक हैं जिन्हें साल 1947 में आजादी के मौके पर लाल किले में शहनाई बजाने का मौका मिला था.

5. बिस्मिल्ला खां ने कई फिल्मों में अपनी शहनाई का संगीत दिया था. साल 2001 में बिस्मिल्ला खां को देश के सबसे बड़े अवार्ड भारत रत्न से सम्मानित किया गया. बिस्मिल्ला खां हमेशा से ही पंडित नेहरू के पसंदीदा रहे.

6. 21 अगस्त 2006 को बिस्मिल्ला खां ने दुनिया को अलविदा कह दिया. वे पिछले चार सालों से ह्रदय रोग से परेशान थे. भारत सरकार ने उनके निधन को एक राष्ट्रीय शोक घोषित किया था और उन्हें 21 तोपों की सलामी दी गई थी.

7. साल 2004 में आई शाहरुख खान अभिनीत फिल्म 'स्वदेश' का सबसे लोकप्रिय साउंडट्रैक या गाना 'ये जो देश है मेरा' के संगीत के लिए उस्ताद बिस्मिल्ला खां ने बहुत ही खूबसूरत ढ़ंग से शहनाई वादन किया था.

8. ये बात आप में से बहुत कम लोग जानते होंगे कि बिस्मिल्ला खां साहब अपनी बेगमजान की म्रत्यु के बाद अपनी शहनाई को ही बेगम बुलाया करते थे.

बुझ गई रोशनी

11 नवंबर, 2016 की बात है. रामदुरेश के मंझले बेटे पवन कुमार की 4 दिनों बाद शादी थी. घर में शादी की तैयारियां जोरों पर चल रही थीं. चूंकि वह मूलरूप से बिहार के रहने वाले थे, इसलिए वहां से भी उन के तमाम रिश्तेदार आ चुके थे. पवन का बड़ा भाई रंजन राजेश, जो दुबई में नौकरी करता था, वह भी आ चुका था.

दोपहर के करीब 3 बजे रामदुरेश अपनी दोनों पोतियों, रिधिमा और रौशनी को स्टालर पर बैठा कर सड़क पर घुमा रहे थे. उन्हें आए अभी 10 मिनट हुए होंगे कि मोटरसाइकिल से आए 3 युवकों ने उन्हें रोक लिया. उन्होंने मुंह पर कपड़ा बांध रखा था, इसलिए रामदुरेश उन्हें पहचान नहीं सके.

मोटरसाइकिल से आए युवकों में से 2 नीचे उतरे और रामदुरेश को धक्का मार कर गिरा दिया. उन के गिरते ही वे युवक स्टालर से 2 साल की रौशनी को उठा कर फगवाड़ा की ओर भाग गए. यह सब इतनी जल्दी में हुआ था कि रामदुरेश कुछ सोचसमझ ही नहीं पाए. जब तक वह उठ कर खड़े हुए, मोटरसाइकिल सवार काफी दूर जा चुके थे. वह मोटरसाइकिल का नंबर भी नहीं देख पाए.

रामदुरेश ने शोर मचाया तो तमाम लोग इकट्ठा हो गए. घर वाले भी बाहर आ गए. उन्होंने उन से युवकों का पीछा करने को कहा. कई लोग मोटरसाइकिलों से फगवाड़ा की ओर गए, लेकिन किसी को वे युवक दिखाई नहीं दिए. रामदुरेश काफी घबराए हुए थे. उन्हें पानी पिलाया गया. जब वह कुछ सामान्य हुए तो उन्होंने पूरी घटना कह सुनाई

घटना की सूचना पुलिस कंट्रोल रूम और थाना बहराम पुलिस को फोन द्वारा दी गई. अपहरण की सूचना मिलते ही थाना बहराम के थानाप्रभारी सुरेश चांद दलबल के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. दिनदहाड़े बच्ची के अपहरण की बात सुन कर सभी हैरान थे. कुछ ही देर में डीएसपी बगां हरविंदर सिंह, डीएसपी (आई) राजपाल सिंह, सीआईए प्रभारी सुखजीत सिंह, थाना सदर बगां के थानाप्रभारी रमनदीप सिंह भी घटनास्थल पर आ पहुंचे. आधे घंटे बाद एसएसपी नवीन सिंगला भी आ गए थे.

रामदुरेश ने पुलिस अधिकारियों को अपनी पोती रौशनी के अपरहण की बात बता दी. एसएसपी नवीन सिंगला के निर्देश पर 2 जिलों कपूरथला और नवांशहर की पुलिस अपहृत बच्ची की तलाश में जुट गई. थानाप्रभारी सुरेश चांद ने रामदुरेश के बयान के आधार पर अज्ञात अपहर्त्ताओं के खिलाफ रौशनी के अपहरण का मुकदमा दर्ज करा दिया था.

सुरेश चांद ने रामदुरेश और उन के परिवार वालों से पूछताछ की. उन्होंने बताया कि उन का किसी से कोई लेनादेना या झगड़ा आदि नहीं था. सभी अपने काम से काम रखते थे.

उन्होंने यह भी बताया कि 4 दिनों बाद उन के यहां लड़के की शादी है. उस का पहला रिश्ता 3 महीने पहले फगवाड़ा के एक परिवार में तय हुआ था, जो बाद में किन्हीं कारणों से उन्होंने तोड़ दिया था. रिश्ता टूटने के बाद उन लोगों ने खूब झगड़ा किया था और देख लेने की धमकी दी थी.

रामदुरेश ने जिन लोगों पर शक जाहिर किया था, सुरेश चांद ने उन लोगों को थाने बुला कर पूछताछ की. लेकिन उन्हें वे लोग बेकसूर लगे. उन का इस वारदात से कोई लेनादेना नहीं था.

डीएसपी हरविंदर सिंह के आदेश पर इलाके के सभी सीसीटीवी कैमरों को खंगाला गया. घटनास्थल के निकट एक कैमरा लगा था, जो काफी समय से खराब था. अन्य जगहों पर लगे कैमरों से भी कोई सुराग नहीं मिला. दोनों जिलों की पुलिस टीमें बच्ची की तलाश में जुटी थीं. लेकिन देर रात तक कोई सुराग नहीं मिला.

रामदुरेश के घर में जो खुशी का माहौल था, वह उदासी में बदल चुका था. रौशनी की मां नेहा का रोरो कर बुरा हाल था.

अगले दिन अपहर्त्ता का फोन आया. उस ने कहा कि बच्ची उस के कब्जे में है और अगर बच्ची चाहिए तो 50 लाख रुपए का इंतजाम कर लो. पैसे कब और कहां पहुंचाने हैं, यह बाद में बता दिया जाएगा. रामदुरेश ने यह बात पुलिस को बता दी. अपहर्त्ताओं के फोन नंबर से पुलिस को उन के पास तक पहुंचने की राह मिल गई थी.

पुलिस ने उस नंबर की काल डिटेल्स और लोकेशन पता की तो पता चला कि वह नंबर कस्बे के ही एक दुकानदार का था. उस की मोबाइल फोन की दुकान थी. दुकानदार ने बताया कि लगभग 2 महीने पहले यह सिम उस की दुकान से चोरी हो गया था. पुलिस ने जब उस से पूछा कि उस की दुकान पर किनकिन लोगों का ज्यादा आनाजाना है और किन लोगों से उस का दोस्ताना व्यवहार है तो उस ने 8 लोगों के नाम बताए.

उन लोगों के नामपते ले कर पुलिस ने उन के बारे में पता किया तो उन में से 5 युवक तो मिल गए, 3 फरार मिले. पुलिस का सीधा शक उन 3 फरार युवकों पर गया. अगले दिन पुलिस ने शहर के सभी छोटेबड़े रास्तों की नाकेबंदी कर दी, साथ ही अपहर्त्ताओं के फोन का भी इंतजार था, पर फोन नहीं आया.

थाना सदर बगां प्रभारी रमनदीप सिंह पौइंट फराला के नाके पर मौजूद थे. उन्होंने गांव मुन्ना की ओर से एक मोटरसाइकिल पर 3 युवकों को आते देखा. लेकिन पुलिस को देख कर उन युवकों ने मोटरसाइकिल वापस घुमा दी थी. रमनदीप सिंह ने बोलेरो जीप से उन का पीछा किया. कुछ दूरी पर ही ओवरटेक कर के उन्हें दबोच लिया गया. तीनों का हुलिया रामदुरेश द्वारा बताए गए अपहर्त्ताओं के हुलिए से मिल रहा था, इसलिए पूछताछ के लिए पुलिस तीनों को थाने ले आई.

उन्होंने अपने नाम गोयल कुमार उर्फ गोरी, हरमन कुमार उर्फ हैप्पी तथा रिशी बताए. रिशी कुमार जिला होशियारपुर के गांव टोडरपुर का रहने वाला था, जबकि गोयल और हरमन रामदुरेश के ही गांव खोथड़ा के रहने वाले थे. तीनों से जब रौशनी के अपहरण के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि रौशनी का अपहरण उन्होंने ही किया था, लेकिन अब वह जीवित नहीं है. उन्होंने उस की हत्या कर लाश जला दी थी.

यह खबर जब रामदुरेश के घर वालों तक पहुंची तो उन के यहां कोहराम मच गया. जब यह खबर पूरे शहर में फैली तो अपहर्त्ताओं को देखने के लिए थाने के बाहर भीड़ लग गई. लोग अपहर्त्ताओं को अपने हवाले करने की मांग करने लगे, ताकि वे उन्हें खुद सजा दे सकें.

तीनों अपहर्त्ताओं की उम्र 18 से 20 साल थी. थाने पर जनता का जमावड़ा और आक्रोश देख कर अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा. एसएसपी नवीन सिंगला ने आ कर लोगों को समझाया कि कानून के अनुसार दोषियों को सजा दी जाएगी, तब कहीं जा कर भीड़ शांत हुई.

पुलिस ने तीनों अभियुक्तों को अदालत में पेश कर 3 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि के दौरान पुलिस ने अभियुक्तों की निशानदेही पर होशियारपुर के गांव नडालो के पास से गुजरती ड्रेन के नजदीक एक खेत से ड्यूटी मजिस्ट्रैट भूपिंदर सिंह, तहसीलदार गढ़शंकर और एसएसपी नवीन सिंगला की मौजूदगी में रौशनी की अधजली लाश बरामद कर ली.

जरूरी काररवाई निपटाने के बाद लाश को पोस्टमार्टम के लिए बगां के सिविल अस्पताल भिजवा दिया गया. चूंकि शव बुरी तरह से जला हुआ था, इसलिए पोस्टमार्टम में तकनीकी दिक्कतें आने के अंदेशों के चलते वहां के डाक्टरों ने अमृतसर के मैडिकल कालेज में पोस्टमार्टम कराने का सुझाव दिया.

इस के बाद डीसी के आदेश पर शव को अमृतसर मैडिकल कालेज भिजवा दिया गया. पुलिस ने भी एफआईआर में भादंवि की धारा 364 को 364ए, 302, 34, 129 जोड़ दिया. आरोपियों से पूछताछ में रौशनी के अपहरण व हत्या की जो कहानी प्रकाश में आई, वह उन की विकृत मानसिकता और शार्टकट से करोड़पति बनने का नतीजा थी.

रिशी, हैप्पी और गौरी बचपन से ही शातिर और महत्त्वाकांक्षी किस्म के युवक थे. पढ़ाई के दौरान ही वे आवारागर्दी करने लगे थे, जिस से ज्यादा पढ़ नहीं सके. उन के गांव के तमाम युवक विदेशों में रह कर अच्छी कमाई कर रहे थे, जिस से वे भी विदेश जाना चाहते थे, पर पैसे न होने के कारण जा नहीं पा रहे थे. मजबूर हो कर वे घर पर रह कर ही आसानी से मोटी कमाई करने का उपाय खोजने लगे.

गौरी और हैप्पी की ननिहाल रिशी के गांव टोडरपुर में थी, जिस से उन का वहां आनाजाना होता रहता था. इसी वजह से उन की रिशी से दोस्ती भी हो गई थी.

खोथड़ा गांव में ही रामदुरेश का परिवार रहता था. वैसे तो रामदुरेश मूलत: छपरा, बिहार के रहने वाले थे, पर लगभग 35 सालों से वह यहीं रह रहे थे. वह फगवाड़ा की जेसीटी कपड़ा मिल में नौकरी करते थे. उन के 3 बेटे थे, रंजन राजेश, पवन कुमार और पमा कुमार.

रामदुरेश जिस इलाके में रहते थे, वहां शायद ही ऐसा कोई घर होगा, जिस घर का कोई आदमी विदेश में न हो. किसी तरह रामदुरेश ने भी अपने बड़े बेटे राजेश को सन 2005 में दुबई भिजवा दिया था. राजेश की दुबई में नौकरी लगने के बाद रामदुरेश की काया पलट हो गई थी. बेटे द्वारा दुबई से भेजे पैसों से उन्होंने खोथड़ा के सैफर्न एनक्लेव में प्लौट खरीद कर शानदार कोठी बनवाई थी. सन 2010 में उन्होंने उस की शादी कर दी थी.

राजेश 2 बेटियों का पिता बना, जिस में बड़ी बेटी रिधिमा 4 साल की और छोटी रौशनी 2 साल की थी. सन 2014 के अंत में रामदुरेश नौकरी से रिटायर हुए तो उन्हें काफी पैसा मिला. इसी बीच उन का मंझला बेटा पवन भी शादी लायक हो गया.

उन्होंने उस का रिश्ता फगवाड़ा की ही एक लड़की से तय कर दिया, पर किसी वजह से वह रिश्ता टूट गया तो बाद में दूसरी जगह उस का रिश्ता तय हो गया. 16 नवंबर, 2016 को शादी का दिन भी तय कर दिया गया था.

हैप्पी, रिशी और गौरी रामदुरेश की हैसियत जानते थे. उन्हें पता था कि उन का बड़ा बेटा दुबई से मोटी रकम भेजता है, साथ ही यह भी उम्मीद थी कि उन्हें रिटायरमेंट पर भी अच्छा पैसा मिला होगा. यही सब सोच कर उन्होंने उन के घर लूट की योजना बना डाली.

चूंकि रामदुरेश के बेटे पवन की शादी के कुछ ही दिन बचे थे. घर पर तमाम मेहमान जुट गए थे. उधर हैप्पी, रिशी और गौरी योजनानुसार लूट की घटना को अंजाम देने के लिए रैकी कर रहे थे.

कोठी पर रिश्तेदारों की भीड़भाड़ देख कर उन्हें लूट करना रिस्की लगा, इसलिए उन्होंने योजना बदल दी. रिशी ने उन के परिवार से किसी बच्चे का अपहरण करने की सलाह दी. उस की सलाह हैप्पी और गौरी को पसंद आ गई. फिरौती की रकम मांगने के लिए उन्होंने सिम का इंतजाम भी कर लिया, जो उन में से किसी के नाम पर नहीं था.

वह सिमकार्ड उन्होंने मेहली के ललित जुनेजा से साढ़े 3 सौ रुपए में खरीदा था. ललित जुनेजा की फोन एसेसरीज की दुकान थी. वह चोरी के फोन खरीदनेबेचने का भी काम करता था. ललित ने किसी से चोरी का एक मोबाइल खरीदा था, उस के अंदर जो सिमकार्ड निकला था, वही उस ने हैप्पी को बेच दिया था.

रामदुरेश के घर की रैकी करते हुए तीनों उन की पोती का अपहरण करने का मौका तलाशते रहे. इसी चक्कर में वे 11 नवंबर, 2016 को दोपहर 3 बजे उन की कोठी की तरफ आए थे. उन्होंने रामदुरेश को अपनी दोनों पोतियों के साथ देखा तो उन्हें धक्का दे कर वे उन की 2 साल की पोती रौशनी का अपहरण कर ले गए.

उस बच्ची को ले कर वे टोडरपुर पहुंचे और वहां एक खेत में छिप कर बैठ गए. बीचबीच में रिशी अपने घर और बाजार जा कर खानेपीने की चीजें लाता रहा. वहीं खेत से ही उन्होंने रामदुरेश को फिरौती के लिए फोन किया.

भूख की वजह से रौशनी जोरजोर रोने लगी. तीनों ने उसे चुप कराने की बहुत कोशिश की, पर वह चुप नहीं हुई. आसपास के खेतों में काम करने वालों ने खेत में बच्ची के रोने की आवाज सुनी तो उन्हें संदेह हुआ. लोग उधर आने लगे तो वे बच्ची को ले कर दूसरे खेत में पहुंचे. वहां भी हालात वही रहे. वह लगातार रोए जा रही थी.

बच्ची की वजह से वे पकड़े जा सकते थे, इसलिए उन्होंने रौशनी का गला दबा दिया. कुछ ही पलों में उस मासूम ने दम तोड़ दिया. इस के बाद उन्होंने उस की लाश पर पराली डाल कर जला दिया.

लाश ठिकाने लगाने के बाद सभी टोडरपुर में बैठ कर सोचने लगे कि अब क्या किया जाए. अंत में वे मोटरसाइकिल से यह देखने अपने गांव की ओर जा रहे थे कि रामदुरेश और पुलिस इस मामले में क्या कर रही है. पर उन्होंने नाके पर पुलिस देखी तो वहीं से मोटरसाइकिल मोड़ कर भागे, तभी पुलिस ने पीछा कर के उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

इन की निशानदेही पर पुलिस ने चोरी का सिम बेचने वाले ललित जुनेजा को भी गिरफ्तार कर लिया था. रिमांड अवधि खत्म होने के बाद 14 नवंबर, 2016 को थानाप्रभारी सुरेश चांद ने इस हत्याकांड से जुड़े तीनों अभियुक्तों, गोयल उर्फ गौरी, हेमंत उर्फ हैप्पी और रिशी को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

कथा लिखे जाने तक तीनों अभियुक्त जेल में थे. केस की जांच थानाप्रभारी सुरेश चांद कर रहे थे.       

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

कैशलेश टूर्नामेंट, पुरस्कार में मिली बकरी, मुर्गे और अंडे

आज तक आप क्रिकेट टूर्नामेंट में विजेता और उप विजेता को ट्रॉफी और पुरस्कार राशि मिलते ही देखा होगा, लेकिन महाराष्ट्र के पालघर जिले के जवाहर तालुका का एक वार्षिक क्रिकेट टूर्नामेंट में मामला थोड़ा अलग रहा.

टूर्नामेंट में विजेता टीम को अनोखा पुरस्कार मिला है. इस मैच में जीतने वाली टीम को एक बकरी, रनरअप टीम को 5 मुर्गे और चौके-छक्के मारने वाले खिलाड़ी को अंडे दिए गए. जी हां यह सच है.

यह अनोखा आइडिया कोच उमेश तोमरे के दिमाग की उपज है, जिनके अनुसार पुरस्कार राशि की वजह से तनाव होता है और खिलाड़ियों के बीच झगड़ा भी होता है. इसमें विजेता और रनर अप के अलावा चौके और छक्के जड़ने वाले प्रत्येक खिलाड़ी को हर शॉट पर एक अंडा दिया गया. गेंद कैच करने वाले दर्शकों को भी अंडा दिया गया.

कोच तोमरे ने बताया, 'हर वर्ष टूर्नामेंट में 50 हजार से एक लाख रुपये तक की राशि प्रदान की जाती है. पहले हम पर राशि को लेकर बेईमानी के आरोप लगते थे और मारपीट भी हो जाती थी. लेकिन इस बार सभी खिलाड़ी पुरस्कार लेकर बहुत खुश हैं.'

टूर्नामेंट में शामिल टीम भी इस अनोखे पुरस्कार से खुश दिखीं. विजेता टीम दरया सागर मित्र मंडल ने भी जीत के बाद मिली बकरी के साथ तस्वीर खिंचाई. टीम के कप्तान मनोज प्रभु ने इस पुरस्कार को अनोखा बताया. वहीं रनर-अप रॉयल टीचर 11 को पुरस्कार में मिले मुर्गों को पकड़ना टेढ़ी खीर साबित हुआ. सभी खिलाड़ियों और दर्शकों को लंच में पुलाव और उबले अंडे दिए गए.

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