Download App

37 देशों में रिलीज की गई ‘नाम शबाना’

बीते महीने की आखरी तारीख को रिलीज हुई फिल्म ‘नाम शबाना’ को दर्शकों से एक मिश्रित प्रतिक्रिया मिली है. लेकिन फिल्म दुनिया भर के विभिन्न देशों में प्रदर्शित की जा रही है. जी हां! फिल्म ‘नाम शबाना’ ने दुनिया भर के सिनेमा घरों में 350 से ज्यादा स्क्रीन हासिल कर एक कीर्तिमान स्थापित कर लिया है.

खबरों के मुताबिक 31 मार्च यानि की शुक्रवार को रिलीज की गई और भारतीय स्क्रीन पर आने वाली फिल्म ‘नाम शबाना’ को दुनिया भर के 37 देशों में 354 स्क्रीन पर रिलीज किया गया है.

फिल्म की कहानी, शबाना के एक गुप्त एजेंट बनने की यात्रा को दिखाती है. यह फिल्म, अमेरिका में 82 स्क्रीन्स, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में यह 43 स्क्रीन्स में तथा ब्रिटेन में 28 और ऑस्ट्रेलिया में 21 स्क्रीन्स में रिलीज की गई. इसके अलावा हिन्दी सिनेमा के लिए अब तक गैर-पारंपरिक रहने वाले देशों के बाजारों जैसे इटली, किर्गिजस्तान, स्विट्ज़रलैंड, यूक्रेन, पोलैंड, चेक गणराज्य (सेन्ट्रल यूरोप), मालदीव, जर्मनी, बेल्जियम और सूरीनाम में फिल्म ‘नाम शबाना’ रिलीज की गई.

इस फिल्म में अभिनेत्री तापसी के अलावा, हिन्दी फिल्मों के सुपरस्टार अक्षय कुमार और अनुपम खेर, डैनी, मनोज वाजपेयी और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे सितारों ने काम किया है. यह दुर्लभ है कि भारतीय फिल्मों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इतना स्थान प्राप्त होता है. अब फिल्म ‘नाम शबाना’ ने, दुनिया भर के 37 देशों में रिलीज होने का अभिभूत अपने नाम कर लिया है.

किसी महिला-उन्मुख भारतीय फिल्म का इस तरह के बड़े पैमाने पर प्रदर्शन एक बेंचमार्क अथवा कीर्तिमान स्थापित करने से भारतीय सिनेमा जगत के लिए यकीनन खुशी की बात है.

जब बचना हो पर्सनल लोन से…

अगर आपने पहले से ही होम लोन लिया हुआ है और भुगतान के कुछ वर्षों बाद आपको दोबारा कुछ अतिरिक्‍त लोन की जरूरत पड़ी तो आप क्‍या करेंगे? जाहिर है कि आप एक नए लोन के लिए आवेदन करने की सोचेंगे और आपको यह आसानी से मिल भी जाएगा, लेकिन यदि आपके पास होम लोन है तो यहां अतिरिक्‍त लोन हासिल करने का एक आसान और तेज विकल्‍प भी है, वह है टॉप-अप लोन.

कैसे काम करता है टॉप अप लोन

जब आप पहली बार होम लोन लेते हैं, तो आपकी कुछ होम लोन योग्यता सीमा होती है, जिसके तहत आप उतना लोन ले सकते हैं. यदि आप इस पूरी सीमा का उपयोग कर लेते हैं तो आपको तुरंत अतिरिक्त लोन नहीं मिलेगा. लेकिन कुछ वर्षों के बाद, जब आप अपने मौजूदा लोन की कुछ किस्‍तों का भुगतान कर देते हैं और आपकी सैलरी भी बढ़ जाती है तो यह हो सकता है कि आपकी लोन योग्‍यता भी बढ़ जाए. इस समय आप टॉपअप लोन लेने के योग्‍य होंगे, जो कि आपके मौजूदा होम लोन के बराबर हो सकता है. अधिकांश बैंकों का नियम है कि मौजूदा लोन का 6-12 किस्‍तों का भुगतान करने के बाद ही कोई टॉपअप लोन के लिए योग्‍यता हासिल कर सकता है.

जानिए टॉपअप लोन से जुड़ी पांच जरूरी बातें

1. टॉप अप लोन पर टैक्स बैनेफि‍ट

टॉपअप लोन पर टैक्स बैनेफि‍ट केवल उस स्थिति में मिलेगा अगर लोन की राशि का इस्तेमाल घर खरीदने या फिर रेनोवेशन के लिए किया जाए. इसके अतिरिक्त किसी अन्य काम के लिए लोन पर बैनेफिट नहीं दिया जाएगा.

2. टॉप अप के लिए इंटरेस्ट रेट

बैंक की ओर से दिए जाने वाले होम लोन के ब्याज का 1.5 से 2 फीसदी ज्यादा इंटरेस्ट रेट लगाया जाता है. मसलन, इंटरेस्ट रेट 11.5 फीसदी से 14 फीसदी तक का हो सकता है.

3. किसी सिक्योरिटी की जरूरत नहीं

टॉपअप लोन के लिए किसी भी एसेट को गिरवी रखने की जरूरत नहीं होती क्योंकि यह मौजूदा लिए गए होम लोन के आधार पर दिया जाता है. इसमें एक चीज का ध्यान रखें कि बैंक से अपने ओरिजनल हाउस पेपर्स मांगने से पहले होम लोन के साथ-साथ टॉपअप लोन को भी बंद कराएं.

4. अप लोन की राशि

सामान्य तौर पर टॉपअप लोन की राशि असल होम लोन की राशि से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. साथ ही टॉपअप लोन के लिए बैंक एक अपर लिमिट तय करता है जो 15 लाख रुपए से 40 लाख रुपए के बीच में होता है. अगर आपने 30 लाख रुपए का होम लोन लिया हुआ है तो आप अधिकतम 30 लाख रुपए तक का टॉपअप लोन ले सकते हैं.

5. प्रोसेसिंग फीस

अधिकांश बैंक टॉपअप लोन अप्रूव करने से पहले प्रोसेसिंग फीस चार्ज करते हैं. यह चार्जेस होम लोन प्रोसेसिंग चार्जेस के बराबर होते हैं. यह चार्जेस 0.75 फीसदी या फिर 2000 रुपए इनमें से, जो भी ज्यादा होता है, बैंक प्रोसेसिंग फीस के तौर पर आप से ले लेता है.

बेहतर विकल्‍प है टॉपअप लोन

टॉपअप लोन, पर्सनल लोन का एक बेहतर विकल्प है, ऐसा इसलिए क्योंकि होम लोन लेने के बाद टॉपअप लोन मिलने की संभावना ज्यादा होती है. साथ ही अगर आपका रि-पेमेंट रिकॉर्ड अच्छा है और होम लोन रिपेमेंट के 3 से 4 वर्ष हो गए हैं तो आपको एक अच्छी राशि का टॉपअप लोन आसानी से मिल जाता है.

ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान ​​​​​ऐसे सेव करें पैसे

ये जमाना ऑनलाइन शॉपिंग का जमाना है. हम घर बैठे ही अपनी सारी जरूरत की चीजें मंगवा लेते हैं. खाने के लिए फल-सब्जियों से लेकर लेटेस्ट फैशन ट्रेन्ड के कपड़ों तक, हम आराम से घर पर बैठकर ही मंगवा सकते हैं. पर कई बार हम डिस्काउंट पाने से चूक जाते हैं. अगर आप भी ऑनलाइन शॉपिंग पर जबरदस्त डिस्काउंट लेने की फिराक में हो और आपको सफलता नहीं मिल रही है तो हताश होने की जरूरत नहीं है. हम लेकर आए हैं ट्रिक्स जिनसे आप अपना काफी पैसा बचा सकेंगे.

अक्सर ऐसा होता है कि आप नया स्मार्टफोन खरीदने के लिए ऑनलाइन शॉपिंग साइट्स पर ब्राउज करते हैं लेकिन पता चलता है कि इन पर कोर्इ सेल नहीं चल रही है या फिर सेल कुछ सेकंड में ही खत्म हो चुकी है. कई बार आप मोबाईलफोन बुक करने में असफल हो जाते हैं.

अगर आप ऑनलाइन शॉपिंग पर जबरदस्त डिस्काउंट लेने की फिराक में हो और आपको इसमें सफलता नहीं मिल पा रही है तो हताश होने की जरूरत नहीं है. हम आपके लिए लेकर आए हैं ट्रिक्स जिससे आप अपना काफी पैसा बचा सकेंगे.

साइन अप अलर्ट

अपनी फेवरेट शॉपिंग साइट के न्यूजलैटर के लिए साइन अप करें. इससे आपको साइट पर आने वाली सेल के बारे में पहले ही पता चल जाएगा. इसके अलावा रजिस्टर्ड यूजर्स को ये साइट्स प्रिफरेंस देती है.

क्लोजिंग डाउन सेल

शॉपिंग वेबसाइट्स पर क्लोजिंग डाउन सेल पर निगाह रखें और तलाशें कि क्या इसमें आपकी जरूरत का कोर्इ सामान मिल रहा है या नहीं.

र्इबे शॉपिंग वेबसाइट पर आपको थोक भावों में जरूरत का सामान कम कीमत में उपलब्ध हो सकता है. ऐसा इसलिए कि अक्सर रिटेलर्स अपना बचा हुआ स्टॉक र्इबे वेबसाइट पर ट्रांसफर कर देते हैं. इसलिए थोक में सामान खरीदते समय आप अपना काफी पैसा बचा सकते हैं.

ऑनलाइन वेयरहाउस क्लियरेंस

फैशन के शौकीनों के बीच इस तरह की सेल काफी पॉपूलर होती है. यहां आपको कपड़ों और एसेसरीज पर अच्छा खासा डिस्काउंट मिल जाता है. इसके लिए आप या तो इन वेयराहाउस के न्यूजलैटर्स के लिए साइन अप करें या फिर कोर्इ अलर्ट सेट कर दें. इससे आप लाइन में पहले नंबर पर होंगे.

पे टू बिड ऑक्शन

यहां नए प्रोडक्ट्स जबरदस्त डिस्काउंट पर आसानी से मिल जाते हैं. इनकी खास बात यह है कि यहां पर कम कीमत में महंगे प्रोडक्ट शामिल किए जाते हैं. यहां पर आपको प्रोडक्ट्स खरीदने के लिए बोली लगानी पड़ती है. यहां पर आपको प्रोडक्ट्स पर अच्छा खासा डिस्काउंट मिल सकता है. खास बात यह है कि यहां प्रोडक्ट की कीमत आप खुद तय करते हैं.

अब मोबाइल ऐप से मिलेंगी नागरिक सेवाएं

संपत्ति कर देने, कचरा संबंधी शिकायत दर्ज करने से लेकर अन्य 370 से अधिक नागरिक निकायों या नगर निगम की सेवाएं अब एक नये मोबाइल ऐप के माध्यम से मध्यप्रदेश में ऑनलाइन उपलब्ध होंगी. मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के नागरिकों को नगरीय निकायों की सेवाएं आसानी से और समय पर उपलब्ध कराने के लिये ऑनलाइन मोबाइल ऐप लॉन्च कर दिया है. इस ऐप का नाम 'एमपी ई-नगरपालिका' रखा गया है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अप्रैल की पहली तारीख को प्रदेश की राजधानी भोपाल में इस ऐप का शुभारंभ किया. अब मध्यप्रदेश में कूड़े की समस्या से लेकर प्रॉपर्टी टैक्स जमा करने तक के सारे काम ऑनलाइन किए जा सकेंगे. यह ऐप एमपी की 225 करोड़ रुपये ई-नगरपालिका परियोजना का हिस्सा है, जिसके तहत सभी नगरपालिका सेवाओं को एक एकीकृत वेब प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा.

प्रदेश के मुख्यमन्त्री ने नगर पालिकाओं के प्रतिनिधियों से कहा कि वे नगरों को सबसे सुंदर और व्यवस्थित बनायें और ई-सेवाओं के द्वारा ऐसी व्यवस्था करें कि प्रदेश का हर नागरिक गर्व से यह कह सकें कि उसे नगर निगम की सेवाएं आसानी से और समय पर मिल रही हैं. शिवराज ने कहा कि आने वाले तीन-चार सालों में नगरीय निकायों में 83,000 करोड़ रुपये खर्च किए जायेंगे. मुख्यमंत्री अधोसंरचना के दूसरे चरण में 1800 करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है.

प्रदेश के नगरीय विकास विभाग के प्रमुख सचिव मलय श्रीवास्तव ने कहा कि नई व्यवस्था से नगदी रहित लेनदेन बढ़ेगा. नागरिकों को ऑनलाइन भुगतान की सुविधा से टैक्स एकत्रित करना भी बेहतर होगा. प्रदेश के नगरीय विकास आयुक्त विवेक अग्रवाल ने बताया कि नगरीय निकायों की नागरिक सेवाएं मोबाइल की इस ऐप पर सातों दिन और 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी.

शहर की, सभी नगरपालिका लगभग 378 सेवाएं इस ऐप पर उपलब्ध रहेंगी. इस ऐप के जरिए पेश की गईं 378 सेवाओं में संपत्ति कर के ऑनलाइन भुगतान, निर्माण की अनुमति, जन्म, विवाह या मृत्यु प्रमाण पत्र आदि की मांग, और भी कई नागरिक सेवाएं शामिल हैं. यह ऐप कचरा, पानी, स्ट्रीट लाइट आदि से संबंधित शिकायतों का भी पंजीकरण करेगा. ऑनलाइन भुगतान गेटवे भी इस ऐप पर उपलब्ध रहेगा.

जानिए गूगल के इन 7 ऐप्स के बारे में

चाहे आपके पास ऐंड्रॉयड फोन हो या आईओएस, यह तो तय है कि आप रोजाना कुछ गूगल ऐप्स यूज करते होंगे. लेकिन क्या आप इन गूगल ऐप्स के बारे में जानते हैं, जो आपके बड़े काम के हैं.

ऐंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर

अगर आपका ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन कहीं खो गया है तो ऐंड्रॉयड डिवाइस मैनेजर उसे ढूंढने में आपकी मदद करेगा. यह ऐप आपके फोन को ट्रैक करता है और खोए या चोरी हुए फोन को वापस पाने में आपकी मदद कर सकता है. इतना ही नहीं, इसके जरिए आप दूर से भी अपने हैंडसेट को फैक्टरी रीसेट कर सकते हैं अगर आपने पहले से ही इस फंक्शनैलिटी को कॉनफिगर कर रखा हो.

गूगल अथॉन्टिकेटर

अगर आप टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यूज करते हैं तो आपके लिए यह ऐप जरूरी है. इस ऐप के जरिए टू फैक्टर ऑथेंटिफिकेशन वाले अकाउंट्स को आसानी से लॉगइन किया जा सकता है. इसके बारे में सबसे खास बात यह है कि कई गूगल डिवाइसेस के लिए यह ऑफलाइन भी काम करता है.

जेस्चर सर्च

इस ऐप की मदद से आप ऐप्स से लेकर सेटिंग्स को स्कीन जेस्चर के जरिए ऐकसेस कर सकते हैं. आपकी सर्च और रिफाइन होती जाएगी जब आप ज्यादा जेस्चर ऐड करेंगे. तो अगर आपको टाइपिंग से नफरत है तो जेस्चर काम कर जाएगा.

गूगल कीप

इस ऐप के जरिए आप कहीं भी चलते-फिरते नोट्स बना सकते हैं. इसमें कलर कोडेड नोट, क्विक टु-डु लिस्ट, रिमाइंडर बहुत कुछ है. और ये सभी आपके गूगल अकाउंट से सिंक्ड हैं, ये आपकी सभी डिवाइसेस पर मौजूद मिलेंगे.

गूगल इनबॉक्स

जीमेल आपके मेल्स को बहुत अच्छी तरह हैंडल करता है, लेकिन गूगल इनबॉक्स में कुछ अलग फीचर्स हैं. फ्लाइट चेक-इन्स, ट्रांजैक्शन रिसीट्स आदि के साथ इसमें कई एक जैसे मेसेजेस का बंडल बनाकर स्नूज करने का फीचर भी है.

गूगल माय बिजनेस

माय बिजनेस ऐप बिजनेस इंफॉर्मेशन को वेरिफाइ करने, कस्टमर रिव्यू मैनेज करने और ब्रैंड बिल्डिंग में मदद करता है. यह आपको न सिर्फ इस बारे में जानकारी रखने में मदद करता है कि आपके बिजनेस में क्या चल रहा है बल्कि कस्टमर्स के बीच चर्चा के बारे में भी बताता है.

आर्ट ऐंड कल्चर

आर्ट ऐंड कल्चर के इस्तेमाल के लिए आपको आर्ट लवर होने की जरूरत नहीं. इसके लिए ऐप है. अपने नाम के मुताबिक आर्ट ऐंड कल्चर आर्ट ऐंड आर्ट फैक्ट्स से जुड़े दुनियाभर के करीब 1000 म्यजियम्स की जानकारी आपको देता है. आप इस ऐप के जरिए कला के बारे में काफी जानकारी हासिल कर सकते हैं.

किन्नर अखाड़े की पीठाधीश पुष्पा माई का संघर्ष

‘पिंक सिटी’ जयपुर की रेलवे कालोनी के पास ही बने पौश इलाके बनिपास में रहने वाले बालक प्रदीप को डांस का बड़ा शौक था. 80 के  दशक में बाल प्रतिभाओं को निखारने के लिए स्कूलों में बाल सभाएं हुआ करती थीं और तीसरे दर्जे में पढ़ने वाले प्रदीप का घाघराचुन्नी में राजस्थान का पारंपरिक डांस खूब पसंद किया जाता था.

प्रदीप को अपनी बहन के कपड़े पहनने में खास दिलचस्पी होती थी और स्कूल से लौट कर वह अपनी मां की साड़ी शरीर पर लपेट कर कालोनी में मस्ती करने चला जाया करता था.

कालोनी के बच्चे प्रदीप को छेड़ते, पर बचपन की हंसीठिठोली में सबकुछ सामान्य रहता. 5वें दर्जे में प्रदीप ने गृह विज्ञान को विषय के रूप में चुना. उस के हाथों का बना खाना इतना स्वादिष्ठ और लाजवाब होता था कि टीचर भी वाहवाह करते थे.

प्रदीप अपने खेल टीचर को बहुत पसंद करता था. उस ने मां से जिद की कि वह अपने खेल टीचर के यहां पढ़ने जाएगा. दरअसल, खेल टीचर का उस को सहलाना बहुत पसंद आता था.

एक दिन कालोनी के एक लड़के ने, जो प्रदीप से 3-4 साल बड़ा था, चुपके से प्रदीप को पकड़ लिया और उस के अंगों को सहलाने लगा. कालोनी के ही किसी लड़के ने यह बात प्रदीप के घर जा कर बता दी. प्रदीप की बहन ने अपने भाई का बचाव किया, लेकिन प्रदीप चुपके से छत पर आ कर रोने लगा. उस की मां और बहन उस के पास गईं.

मां ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘जैसे भी हो, तुम मेरे जिगर का टुकड़ा हो. देशी घी का लड्डू टेढ़ा ही सही, मेरा है. तू हमारा दीप नहीं, घर को महकाने वाला पुष्प है.’’ मां का अपार स्नेह प्रदीप पर बरस रहा था, लेकिन वे यह जान गई थीं कि उन के जिगर का टुकड़ा प्रदीप नहीं पुष्पा है.

प्रदीप को परिवार के समर्थन और दुलार में कभी कोई कमी नहीं आई. डांस का शौकीन वह बेपरवाह हो कर परिवार और रिश्तेदारों के यहां शादियों में लड़कियों की ड्रेस में कमाल का डांस करता था.

पिता के स्नेह और मां के हमसाए में प्रदीप की पढ़ाईलिखाई तो हो गई, लेकिन उन का साया उठते ही सबकुछ बदल गया. अब प्रदीप का अकेलापन उसे खाने लगा और उसे दोहरी जिंदगी सालने लगी. राजस्थान यूनिवर्सिटी से बीए और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से संगीत में एमए करने वाले प्रदीप ने साल 2005 में खुल कर समाज का सामना करने का फैसला किया और यह बता दिया कि वह किन्नर है. प्रदीप, जो अब पुष्पा था, का मकसद साफ था, लेकिन उसे किन्नर समाज के विरोध का सामना करना पड़ा.

पुष्पा को हाईकोर्ट से नोटिस भी मिला, लेकिन उस की ईमानदारी और सचाई ही थी, जो अनेक परेशानियों के बावजूद एक नई राह बनती चली गई. पुष्पा ने साल 2007 में अपनी संस्था ‘नई भोर’ की शुरुआत की. पुष्पा ने किन्नर समुदाय की अच्छी सेहत पर भी काम किया. साल 2011 में सरकार के ‘पहचान’ प्रोजैक्ट से पुष्पा जुड़ी और खुल कर काम किया. ‘नई भोर’ ने राजस्थान में लगातार बेहतर काम किए हैं, लेकिन सरकारी इमदाद अब तक उसे नहीं मिल पाई है.

किन्नर समाज के साथ ही समूचे ट्रांसजैंडर कल्याण के लिए पुष्पा ने अपने समुदाय के हक के लिए लगातार कोशिश करते हुए 4 मई, 2015 को राजस्थान सरकार से ट्रांसजैंडर के मानव अधिकारों की रक्षा और उन के कल्याण के लिए एक बोर्ड बनाने की मांग रखी. पुष्पा की यह कोशिश रंग लाई और 18 महीने की कोशिश के बाद सरकार ने आखिरकार इसे हरी झंडी दे दी.

राजस्थान में ट्रांसजैंडर समुदाय के कल्याण के लिए अलग बोर्ड बनाया गया है, ऐसा करने वाला राजस्थान देश का चौथा राज्य है. यह बोर्ड ट्रांसजैंडरों की सेहत, पढ़ाईलिखाई और रोजगार के लिए काम करेगा.

गौरतलब है कि राजस्थान सरकार ने ऊंची तालीम पाने के लिए शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश/आवेदनपत्रों में ट्रांसजैंडरों के लिए अलग कौलम का प्रावधान किया है और उन के लिए सीटें भी आरक्षित की गई हैं.

लेकिन अभी भी पुष्पा और उस के समुदाय के सामने कई चुनौतियां हैं, क्योंकि इस समुदाय के पास गानेबजाने के अलावा दूसरा कोई रोजगार का जरीया नहीं है.

किन्नरों के पास खुद का कोई पहचानपत्र नहीं होता है. इस वजह से उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन अब राजस्थान में ‘राजस्थान ट्रांसजैंडर कल्याण बोर्ड’ के तहत ट्रांसजैंडर आईडी बनाए जाएंगे.

इस बोर्ड के एक सदस्य के मुताबिक, एक किन्नर को पहले शपथपत्र पेश करना होगा, जिसे हर जिले के विशेषज्ञ को देना होगा. कमेटी के कार्यकर्ता पहचानपत्र के लिए फार्म मुहैया कराएंगे.

पुष्पा कहती है कि इस के लिए विभिन्न जिलों में 2 से 3 दिन के लिए कैंप लगाए जाएंगे, जिस से एक ही छत के नीचे ट्रांसजैंडर परिचयपत्र बनाए जा सकेंगे. ये परिचयपत्र जिला कलक्टर के दस्तखत से जारी होंगे और इन्हें नैशनल लैवल पर मंजूर किया जाएगा.

ट्रांसजैंडर आईडी मिलने के बाद किन्नरों को बैंक अकांउट खोलने, चिकित्सा सुविधा के अलावा और भी तमाम कामों में सहूलियत होगी. ‘ट्रांसजैंडर कल्याण बोर्ड’ समुदाय के लिए कम्यूनिटी हाल बनाना, आवास योजना, बीपीएल कार्ड, पैंशन योजना, शिक्षा, प्रौढ़ शिक्षा, सांस्कृतिक, खेलकूद, बच्चे गोद लेने की प्रक्रिया को आसान बनाना, सेहत संबंधित समस्याएं, सैक्स संबंधी मामले वगैरह के लिए भी काम करेगा.

हालांकि पुष्पा को इस बात का मलाल है कि राजस्थान में ‘ट्रांसजैंडर कल्याण बोर्ड’ का अध्यक्ष मंत्री है और वह किन्नर समुदाय से नहीं है. बोर्ड की पहली मीटिंग में पुष्पा ने बड़ी बेबाकी से कहा कि बोर्ड का अध्यक्ष भी किन्नर बिरादरी से ही हो.

मार्च, 2015 में किन्नर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को पुष्पा ने अपना गुरु बनाया. उस के बाद वे पुष्पा माई कहलाने लगीं. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी अब किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर भी हैं.

पुष्पा माई कहती हैं कि किन्नर अखाड़ा ट्रांसजैंडर समुदाय की धार्मिक और सामाजिक स्वीकार्यता के लिए मील का पत्थर साबित होगा.

बहरहाल, किन्नरों की सामाजिक इंसाफ की लड़ाई लंबी है, लेकिन पुष्पा माई ने मतदाता परिचयपत्र में अपना नाम प्रदीप, पुष्पा दर्ज करा कर किन्नर समुदाय के लिए पहचान के क्रांतिकारी तरीके अपनाए हैं और अपने जज्बे से यह साबित भी किया है कि जमाने को जो चाहे कहने दो, कोशिश करने वालों की हार नहीं होती.

सिरफिरा आशिक बन गया वहशी कातिल

भोपाल, मध्य प्रदेश के तकरीबन 32 साला उदयन दास को ऐयाशी करने के लिए दौलत नहीं कमानी पड़ी थी, क्योंकि उस के मांबाप इतना कमा कर रख गए थे कि अगर वह कुछ काम नहीं करता, तो भी जिंदगी में कभी भूखा नहीं सोता. उदयन दास की कई माशूकाएं थीं. उन में से एक थी कोलकाता की रहने वाली 26 साला आकांक्षा शर्मा, जो एमएससी पास थी. उस के पिता शिवेंद्र शर्मा पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के एक बैंक में चीफ मैनेजर थे.

अब से तकरीबन 8 साल पहले आकांक्षा शर्मा की दोस्ती फेसबुक के जरीए उदयन दास से हुई थी. फेसबुक चैटिंग में उदयन दास ने खुद को आईएफएस अफसर बताया था, जो अमेरिका में रहता है और अकसर भारत आया करता है. अपने पिता बीके दास को उस ने भेल, भोपाल का अफसर बताया था, जो रिटायरमैंट के बाद रायपुर में खुद की फैक्टरी चला रहे हैं और मां इंद्राणी दास को पुलिस महकमे से रिटायर्ड डीएसपी बताया था. उस ने मां का भी अमेरिका में रहना बताया था.

उदयन दास ने आकांक्षा शर्मा को यह भी बताया था कि वह आईआईटी, दिल्ली से ग्रेजुएट है. आजकल जैसा कि आमतौर पर फेसबुक चैटिंग में होता है, वह आकांक्षा शर्मा और उदयन दास के मामले में भी हुआ. पहले जानपहचान, फिर दोस्ती और उस के बाद प्यार. जल्द ही दोनों ने मिलनाजुलना शुरू कर दिया. उदयन दास भले ही भोपाल में रह रहा था, पर आकांक्षा शर्मा के लिए तो वह अमेरिका में था, इसलिए जल्द ही उदयन दास ने उसे बताया कि वह दिल्ली आ रहा है.

दोनों दिल्ली में मिले और कुछ दिन साथ गुजारे. उदयन दास की रईसी का आकांक्षा शर्मा पर खासा असर पड़ा. वे दोनों एकसाथ हरिद्वार, मसूरी और देहरादून भी घूमने गए और एक ही होटल में एकसाथ एक कमरे में रुके. फिर उदयन दास अमेरिका यानी भोपाल लौट गया, इस वादे के साथ कि जल्द ही वह फिर भारत आएगा और अब वे दोनों भोपाल में मिलेंगे, जहां उस के 2 मकान हैं. उदयन दास ने आकांक्षा शर्मा को बताया था कि उस का भोपाल वाला मकान काफी बड़ा है और उस का नीचे वाला हिस्सा किराए पर ब्रह्मकुमारी आश्रम को दे रखा है. इन 2-3 मुलाकातों में आकांक्षा शर्मा सोचने लगी कि उदयन दास वैसा ही लड़का है, जैसा वह चाहती थी. वह तो शादी के बाद अमेरिका में नौकरी करने के सपने देखने लगी थी. लिहाजा, उन दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया.

शादी, कत्ल और कब्र

एक दिन उदयन दास ने आकांक्षा शर्मा को बताया कि उस का मन अब अमेरिका में नहीं लग रहा है और वह उस से शादी कर भोपाल में ही बस जाना चाहता है. इस से अमेरिका जा कर नौकरी करने की आकांक्षा शर्मा की ख्वाहिश मिट्टी में मिल गई, क्योंकि अब तक वह अपने घर वालों को बता चुकी थी कि वह नौकरी करने अमेरिका जा रही है.

आकांक्षा शर्मा उदयन दास को चाहने लगी थी, इसलिए राजी हो गई. आज नहीं तो कल उसे अमेरिका जाने का मौका मिल सकता है, इसलिए वह उदयन की बताई तारीख पर बीते साल जून महीने में भोपाल आ गई. मांबाप से हकीकत छिपाने के लिए उस ने यह झूठ बोला कि वह नौकरी करने न्यूयौर्क जा रही है.

आकांक्षा शर्मा ने भोपाल के ही पिपलानी के काली बाड़ी मंदिर में उदयन दास के साथ शादी भी कर ली. इस दौरान वह फोन पर घर वालों से भी बात करती रही, लेकिन खुद को अमेरिका में होने का झूठ बोलती रही. यह जून, 2016 की बात है.

कुछ दिन उदयन दास के साथ बीवी की तरह गुजारने के बाद आकांक्षा शर्मा को मालूम हुआ कि उस के शौहर ने उस से कई झूठ बोले हैं, क्योंकि न तो वह कभी अपने मां बाप से फोन पर बात करता था और न ही उन के बारे में पूछने पर कुछ बताता था.

हद तो उस वक्त हो गई, जब आकांक्षा शर्मा को यह पता चला कि उदयन दास अव्वल दर्जे का नशेड़ी है और दूसरी कई लड़कियों से उस के नाजायज ताल्लुकात हैं.

जुलाई, 2016 तक तो आकांक्षा शर्मा ने अपने घर वालों से फोन पर बात की, लेकिन अब वह उन से कम ही बात करती थी. लेकिन फिर धीरेधीरे वह एसएमएस के जरीए उन से बात करने लगी थी.

14 जुलाई, 2016 का दिन आकांक्षा शर्मा पर कहर बन कर टूटा. अगर उदयन दास ने उस से कई झूठ बोले थे, तो एक झूठ उस ने भी उदयन से बोला था. दरअसल, आकांक्षा शर्मा का एक बौयफ्रैंड और था, जिस ने उस के कुछ फोटो, जो कम कपड़ों में थे, ह्वाट्सऐप पर डाल दिए थे. ये फोटो उदयन दास की निगाह में आए, तो वह भड़क उठा. पूछने पर आकांक्षा ने कुछ सच्ची और कुछ झूठी बातें उसे बताईं, तो उदयन को लगा कि आकांक्षा ने उस से झूठ तो बोला ही है, साथ ही उस के नाजायज ताल्लुकात पुराने बौयफ्रैंड से हैं और वह उसे पैसे भी देती रहती है.

रात को लड़झगड़ कर आकांक्षा तो सो गई, पर उदयन की आंखों में नींद नहीं थी. साथ में सो रही बीवी उसे धोखेबाज लगने लगी थी. रातभर जाग कर उदयन दास आकांक्षा शर्मा के कत्ल की योजना बनाता रहा और सुबह के 5 बजते बजते उस ने उस की हत्या भी कर डाली.

उदयन ने पहले गहरी नींद में सोती हुई आकांक्षा का चेहरा तकिए से दबाया. जब उस के मर जाने की पूरी तरह से तसल्ली हो गई, तब तकिया हटाया और उस का गला घोंट डाला, जिस से आकांक्षा के गले की हड्डी चटक गई.

अब समस्या आकांक्षा की लाश को ठिकाने लगाने की थी. सुबह नजदीक की दुकान से उदयन दास ने 14 बोरी सीमेंट खरीदा और आकांक्षा की लाश एक पुराने बक्से में डाल दी और तकरीबन 10 बोरी सीमेंट घोल कर उस में भर दिया, जिस से लाश जम जाए. बक्से से बदबू न आए, इसलिए उस के चारों तरफ उस ने सैलो टेप लगा दी. दोपहर को उस ने अपने एक पहचान वाले मिस्त्री रवि को बुलाया और कमरे में चबूतरा बनाने की बात कही. इस बाबत उदयन ने बहाना यह बनाया कि वह मंदिर बनवाना चाहता है. रवि ने चबूतरा बनाने के लिए कमरा खोदा, पर चूंकि उस के सामने लाश वाला बक्सा नहीं रखा जा सकता था, इसलिए उदयन ने चतुराई से उसे बातों में उलझाया और तगड़ा मेहनताना दे कर चलता कर दिया. इस के बाद उस ने बक्सा गड्ढे में डाला और उस पर चबूतरा बना दिया. खूबसूरती बढ़ाने के लिए उस पर मार्बल भी जड़ दिया.

यों पकड़ा गया

आकांक्षा शर्मा के मां बाप बांकुरा में परेशान थे, क्योंकि धीरे धीरे उन की बेटी ने एसएमएस के जरीए भी बात करना कम कर दिया था. कुछ दिनों तक तो उन्होंने सब्र रखा, लेकिन किसी अनहोनी का शक उन्हें हुआ, तो उन्होंने आकांक्षा की गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज करा दी. बांकुरा क्राइम ब्रांच ने जब आकांक्षा के मोबाइल फोन की लोकेशन ट्रेस की, तो वह साकेत नगर, भोपाल की निकली. आकांक्षा के पिता शिवेंद्र शर्मा भोपाल आए और उदयन से मिले, क्योंकि आकांक्षा उन्हें उस के बारे में पहले बता चुकी थी.

उदयन ने उन्हें गोलमोल बातें बनाते हुए चलता कर दिया कि आकांक्षा तो न्यूयौर्क में नौकरी कर रही है. शिवेंद्र शर्मा के हावभाव देख कर समझ तो गए कि दाल में कुछ काला जरूर है, पर कुछ कहने की हालत में नहीं थे. बांकुरा जा कर उन्होंने फिर पुलिस पर दबाव बनाया, तो क्राइम ब्रांच के टीआई अमिताभ कुमार 30 जनवरी, 2017 को अपनी टीम समेत भोपाल आए और गोविंदपुरा इलाके के सीएसपी वीरेंद्र कुमार मिश्रा से मिल कर उन्हें सारी बात बताई. इस पुलिस टीम के साथ आकांक्षा का छोटा भाई आयुष सत्यम भी था, जो बहन की चिंता में घुला जा रहा था.

पुलिस वालों ने योजना बना कर उदयन की निगरानी की, तो उस की तमाम हरकतें रहस्यमय निकलीं. 31 जनवरी, 2017 और 1 फरवरी, 2017 को पुलिस उदयन की निगरानी करती रही. इस से ज्यादा कुछ और हासिल नहीं हुआ, तो उन्होंने 2 फरवरी को उदयन के घर एमआईजी 62, सैक्टर 3-ए, साकेत नगर पर दबिश डाल दी. उस वक्त उदयन दरवाजे पर ताला लगा कर अंदर बैठा था. गोविंदपुरा थाने के एएसआई सत्येंद्र सिंह कुशवाह छत के रास्ते अंदर गए और उदयन से मेन गेट का ताला खुलवाया, फिर तमाम पुलिस वाले अंदर दाखिल हुए. अंदर का नजारा अजीबोगरीब था. उदयन का सारा घर धूल और गंदगी से भरा पड़ा था. तीनों कमरों में तकरीबन 10 हजार सिगरेट के ठूंठ बिखरे पड़े थे और शराब की खाली बोतलें भी लुढ़की पड़ी थीं. खाने की बासी प्लेटें भी पाई गईं, जिन से बदबू आ रही थी.

पर सब से ज्यादा हैरान कर देने वाली बात दूसरे कमरे में बना एक चबूतरा था, जिस के ऊपर फांसी का फंदा लटक रहा था और कमरों की दीवारों पर जगहजगह प्यारभरी बातें लिखी हुई थीं.

चबूतरे के बाबत पुलिस वालों ने सवालजवाब शुरू किए, तो पहले तो उदयन खामोश रहा, पर थोड़ी देर बाद ही उस ने फिल्मी स्टाइल में कहा कि उस ने आकांक्षा का कत्ल कर दिया है और उस की लाश इस चबूतरे के नीचे दफन है. इतना सुनते ही पुलिस वालों के होश फाख्ता हो गए. उन्होंने तुरंत चबूतरे की खुदाई के लिए मजदूर बुला लिए. चबूतरा इतना पक्का था कि मजदूरों से नहीं खुदा, तो पुलिस वालों ने उसे जेसीबी मशीनों से खुदवाया. थोड़ी खुदाई के बाद निकला वह बक्सा, जिस में आकांक्षा की लाश 2 महीनों से पड़ी थी. बक्सा खोला गया, तो उस में से आकांक्षा की मुड़ीतुड़ी हड्डियां निकलीं, जिन्हें पहले पोस्टमार्टम और फिर डीएनए टैस्ट के लिए भेज दिया गया.

खुली एक और कहानी

उदयन दास के मां बाप कहां हैं, यह सवाल भी अहम हो चला था. पुलिस वालों ने जब उन के बारे में पूछा, तो पहले तो उस ने उन्हें टरकाने की कोशिश की, पर जैसे ही पुलिस ने उस पर थर्ड डिगरी का इस्तेमाल किया, तो उस ने पूरा सच उगल दिया कि उस ने अपने मां बाप की हत्या अब से तकरीबन 5 साल पहले रायपुर वाले मकान में की थी और उन्हें लान में दफना दिया था. मामला कुछ यों था. भोपाल में जब उदयन दास 7वीं जमात में था, तब उस ने एक दोस्त का स्कूल की दीवार पर सिर मारमार कर फोड़ दिया था. रायपुर आ कर भी उस की बेजा हरकतें कम नहीं हुई थीं. पढ़ाईलिखाई में तो वह शुरू से ही फिसड्डी था, पर रायपुर आ कर नशा भी करने लगा था.

मां बाप चूंकि उसे पढ़ाईलिखाई के बाबत डांटते रहते थे, इसलिए वह उन से नफरत करने लगा था. जब कालेज की डिगरी पूरी होने का वक्त आया, तो उस ने मांबाप से झूठ बोल दिया कि वह पास हो गया है. इस पर मांबाप ने उसे नौकरी करने को कहा, तो उसे लगा कि झूठ पकड़ा जाने वाला है. लिहाजा, उस ने मां बाप को ही ठिकाने लगाने का फैसला ले डाला.

एक रात जब पिता चिकन लेने बाजार गए हुए थे और मां ऊपर की मंजिल पर कमरे में कपड़े रख रही थीं, तो उस ने गला घोंट कर उन का कत्ल कर डाला. पिता जब बाजार से आए, तो उन की चाय में उस ने नींद की गोलियां मिला दीं और उन के गहरी नींद में चले जाने पर उन का भी गला घोंट दिया. मां बाप की लाशें ठिकाने लगाने से उस ने मजदूर बुला कर लान में 2 बड़े गड्ढे खुदवाए और देर रात लाशें घसीट कर उन में डाल दीं और सीमेंट से उन्हें चुन दिया. मांबाप की हत्या करने के बाद उदयन ने रायपुर वाला मकान 30 लाख रुपए में बेच दिया और भोपाल आ कर साकेत नगर वाले घर में ऐशोआराम की जिंदगी जीने लगा.

निकम्मा और ऐयाश उदयन चालाक भी कम नहीं था. उस ने इंदौर से पिता का और इटारसी नगरपालिका से मां की मौत का झूठा सर्टिफिकेट बनवाया और उन की बिना पर सारी जायदाद अपने नाम करा ली. मां की पैंशन के लिए जरूरी था कि उन के जिंदा होने का सर्टिफिकेट बनवाया जाए, जो उस ने साल 2012 में दिल्ली की डिफैंस कालोनी के एक डाक्टर से बनवाया और बैंक मुलाजिमों को घूस दे कर हर महीने पैंशन निकालने लगा. वैसे, उदयन दास के मामले से एक सबक लड़कियों को जरूर मिलता है कि फेसबुक की दोस्ती उस वक्त जानलेवा हो जाती है, जब वे उदयन दास जैसे जालसाज और फरेबियों के चंगुल में फंस कर घर वालों से झूठ बोलने लगती हैं और एक अनजान आदमी से चोरीछिपे शादी कर लेती हैं, इसलिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल उन्हें सोचसमझ कर करना चाहिए.

सैक्स और सिर्फ सैक्स

गिरफ्तारी के बाद भोपाल से रायपुर और रायपुर से बांकुरा ले जाए गए उदयन दास को जब 20 फरवरी, 2017 को भोपाल लाया गया, तब पता चला कि शादी के बाद अपनी बीवी आकांक्षा शर्मा के साथ वह खानेपीने के अलावा सिर्फ सैक्स ही करता रहा था. लगता ऐसा है कि सैक्स उस के लिए जरूरत नहीं, बल्कि एक खास किस्म की बीमारी बन गई थी. लगातार सैक्स करने में वह थकता इसलिए नहीं था कि हमेशा नशे में रहता था. मुमकिन है कि आकांक्षा शर्मा को उस की इस आदत पर भी शक हुआ हो और उस ने एतराज जताया हो, लेकिन चूंकि वह एक तरह से उस की कैदी सी हो कर रह गई थी, इसलिए जीतेजी किसी से इस बरताव का जिक्र नहीं कर पाई और पूछने पर उदयन ने पुलिस वालों को बताया कि वह जब 8वीं जमात में था, तब जेब में कंडोम रख कर चलता था कि क्या पता कब कोई लड़की सैक्स करने के लिए राजी हो जाए. 

रिश्तों की आड़ में सेक्स का खेल

हमारे समाज में ऐसी औरतें या लड़कियां कम नहीं हैं, जो अपने किसी न किसी हथकंडे से मर्दों को पा कर ही रहती हैं. ऐसी औरतें सोचती हैं कि अगर वे किसी को अपना जिस्म सौंप कर उन्हें मजे दे देंगी, तो इस से उन का बिगड़ेगा भी क्या? 24 साला सुचित्रा अंगरेजी में एमए और फिर बीऐड करने के बाद भी सरकारी टीचर नहीं बन पाई, तो उस ने तमाम प्राइवेट स्कूलों में टीचर की नौकरी के लिए आवेदन देना शुरू कर दिया. सुचित्रा पिछड़ी जाति की थी, इसलिए उसे बहुत सी जगह रखा ही नहीं गया. जब उसे अपने शहर के स्कूलों में नौकरी नहीं मिल पाई, तो उस ने गांवों के निजी स्कूलों में आवेदन भेजना शुरू कर दिया था. वहां ऊंची जाति की औरतें नौकरी के लिए नहीं जाती थीं.

जब अपने शहर से डेढ़ सौ किलामीटर दूर एक कसबेनुमा गांव के निजी स्कूल में नौकरी मिली, तो सुचित्रा ने उसे स्वीकर कर लिया था. स्कूल के मैनेजर ने सुचित्रा के रहने का इंतजाम अपने गांव के सेना एक रिटायर्ड अफसर लाखन सिंह के मकान में कर दिया था. 50 साला मकान मालिक लाखन सिंह अपने मकान में अकेले ही रहते थे. उन का बेटा अपने परिवार के साथ किसी बड़े शहर में रहता था. लाखन सिंह ने अपने मकान के चौक में पानी के लिए बोरिंग लगा रखा था. जब वे नहाते थे, तब उन के गठीले बदन को देख कर सुचित्रा का दिल उन्हें पाने को मचल उठता था. एक रात जब लाखन सिंह शौच के लिए जाने लगे, तो उन्होंने बैड पर सोती हुई सुचित्रा को झीने कपड़ों में देखा. उन का दिल उसे पाने के लिए मचलने लगा. 10 साल पहले उन की बीवी की मौत हो चुकी थी. उस के बाद उन्होंने किसी औरत से जिस्मानी संबंध नहीं बनाए थे. उस समय सुचित्रा भी जागी हुई थी, पर वे सोती समझ बैड के पास खड़े हो कर उस के शरीर को गौर से देखने लगे.

अचानक सुचित्रा ने उन की ओर मुसकराते हुए एक मादक अंगड़ाई ली और अपने बैड पर बिठा लिया. सुचित्रा उन से बोली, ‘‘आप भी प्यासे हैं और मैं भी प्यासी हूं, इसलिए अब हम दोनों अपनीअपनी प्यास बुझा लेते हैं. कोई हम पर शक भी नहीं कर सकता है.’’ यह कहते हुए जब सुचित्रा ने उन्हें अपने ऊपर गिराया, तो वे भी उस समय अपना आपा खो बैठे. वे उस पर बुरी तरह झपट पड़े. प्यार का खेल खेलने के बाद जब वे दोनों एकदूसरे से अलग हुए, तो सुचित्रा उन से बोली, ‘‘अच्छी सेहत के लिए सैक्स करना जरूरी होता है, क्योंकि इस से हमारे शरीर की जकड़ी हुई नसें खुल जाती हैं. आप में तो इतनी ताकत है कि मुझे वाकई मजा आ गया.’’

कुछ दिनों के बाद सुचित्रा की एक 22 साला सहेली प्रमिला उस के पास रहने आई. उसे पता चल गया कि उस की सहेली सुचित्रा और अंकल के बीच क्या संबंध हैं. वह भी उन से मजे लेने के लिए मचल उठी और दूसरे दिन खुद ही उन के पास चली गई. प्रमिला के मादक अंगों को देख कर वे हैरान रह गए थे. उस के बाद वे दोनों सहेलियां उन से खूब मजे लेने लगी थीं. लाखन सिंह ने एक जिगरी दोस्त अमर सिंह को भी अपने पास बुला लिया और उसे भी मजे दिलवाना शुरू कर दिया था.

मजे लेने के बाद वे दोनों ही उन्हें खूब पैसे देने लगे थे. एक बार जब सुचित्रा के मांबाप उस से मिलने गांव आए, तब वे यह जान कर खुश हुए थे कि लाखन सिंह ने उन की बेटी को अपनी धर्म बेटी बना लिया है. लेकिन उन्हें इस बात की भनक तक नहीं थी कि इस रिश्ते की आड़ में उन की बेटी सुचित्रा लाखन सिंह के साथ सैक्स संबंध बना कर मजे ले रही है. सुचित्रा ने जब अपने मांबाप को लाखन सिंह के दिए हुए रुपए थमाए, तो वे उन्हें किसी देवता से कम नहीं समझ रहे थे. यही हाल सुचित्रा की सहेली प्रमिला के मां बाप का भी था. लाखन सिंह ने न सिर्फ उसे जिस्मानी मजे दिए थे, बल्कि एक लाख रुपए देने के साथसाथ अपने गांव के स्कूल में नौकरी भी लगवा दी थी.

ऐसी ही एक और दास्तान शहर में रहने वाले सुनील और उस के मकान में किराए पर रहने वाले मोहन की 20 साला खूबसूरत बीवी हर्षा की थी. शादी के बाद जब हर्षा पहली बार अपने पति मोहन के साथ शहर में आई, तो उसे देख कर उस का मकान मालिक सुनील ऐसा लट्टू हुआ कि वह उसे पाने के लिए बेचैन हो गया. इधर, राधिका अपने पति सुनील से बोर हो चुकी थी. उस का दिल मोहन पर आ गया था. एक दिन वह मोहन के कमरे में जा कर बोली, ‘‘मैं आप की हर्षा को अपनी छोटी बहन बनाना चाहती हूं और आप को अपना जीजा.’’ यह सुन कर मोहन उस से बोला, ‘‘बना लो. इसी बहाने मुझे भी अपनी साली से हंसीठिठोली करने का मौका मिलेगा और हर्षा भी साली बन कर सुनीलजी से हंसीठिठोली कर लेगी.’’

मोहन ने अपनी नईनई बनने वाली 23 साला खूबसूरत साली राधिका को आंख मारी, तो वह खुशी से मुसकरा उठी.  राधिका अपने पति सुनील से बोली, ‘‘जब हर्षा को मैं ने अपनी छोटी बहन बना कर आप की साली बना दिया है, तो आप इसे अपने साथ ले जा कर इस की पसंद की खरीदारी कराओ और इसे कुछ खिलापिला कर शहर में घुमाफिरा कर लाओ. इस पर कुछ पैसे खर्च करो.’’ हर्षा से मजे पा कर सुनील ने उसे खूब खिलायापिलाया और उस की पसंद की खरीदारी कराई. जब वे दोनों घर पहुंचे, तब तक मोहन दफ्तर जा चुका था.

राधिका ने हर्षा से पूछा, ‘‘तुम्हें जीजाजी ने परेशान तो नहीं किया?’’

‘‘परेशान तो काफी किया था, पर मैं उस परेशानी को भूल गई हूं. रात को इन से फिर मिलूंगी.’’

इन झूठे रिश्तों की आड़ में सैक्स संबंध बनाने की दास्तानें बहुत हैं. आजकल सैक्स संबंध बनाने के लिए लोग किसी से भी अपने रिश्ते बना लेते हैं. दिक्कत तब होती है, जब कई मर्दों से संबंध रखने वाली औरत पेट से हो जाती है, तब सारे मर्द उस का साथ छोड़ कर भाग जाते हैं.

सवाल बेटे की अंगरेजी तालीम का

‘‘बच्चे को एलकेजी में भरती करने वाला मुझे फार्म तो दीजिए,’’ मैं ने अंगरेजी स्कूल के क्लर्क से कहा.

पहले तो उस ने मुझे घूरा, फिर पूछा, ‘‘किसे भरती कराना है?’’

‘‘कहा न, बच्चे को,’’ मैं ने जवाब दिया.

‘‘कहां है आप का बच्चा?’’ मेरे आसपास नजर दौड़ाते हुए उस ने पूछा.

‘‘घर में,’’ मैं ने बताया.

‘‘जिसे भरती होना है, उसे घर छोड़ आए. जाइए, उसे ले कर आइए.’’

‘‘भला क्यों…?’’

‘‘पहले मैं  उस बच्चे का इंटरव्यू लूंगा. अगर वह भरती होने लायक होगा, तब फार्म दूंगा. यही प्रिंसिपल साहब का आर्डर है,’’ उस ने खुलासा करते हुए बताया.

‘‘भरती करना है या नहीं, यह फैसला कौन लेगा?’’

‘‘प्रिंसिपल साहब. वे आप का इंटरव्यू ले कर फैसला करेंगे.’’

‘‘बच्चे के इंटरव्यू की बात तो गले उतरती है, लेकिन मेरा इंटरव्यू… बात कुछ जमी नहीं,’’ मैं ने हैरानी जाहिर की.

‘‘देखिए, यह अंगरेजी स्कूल है, कोई खैराती या सरकारी नहीं. हमें बच्चे के साथसाथ स्कूल के भले का खयाल रखना पड़ता है, इसीलिए बच्चे के साथसाथ उस के मातापिता का भी इंटरव्यू लिया जाता है.’’

‘‘बात समझ में आई या नहीं? अब जाइए और बच्चे को ले कर आइए.’’

मैं जातेजाते धड़कते दिल से पूछ बैठा, ‘‘किस भाषा में इंटरव्यू लेते हैं प्रिंसिपल साहब?’’

‘‘अंगरेजी स्कूल में दाखिला कराने आए हो और यह भी नहीं जानते?’’

इतना सुनते ही मेरे दिल की धड़कनें बढ़ गईं. मुझे अंगरेजी नहीं आती थी. आज पता चला कि अंगरेजी स्कूल में बच्चे को भरती कराना कितना मुश्किल काम है, खासतौर पर मेरे लिए.

घर पहुंचा, तो मेरी बीवी ने पूछा, ‘‘हो गई भरती?’’

‘‘अभी नहीं,’’ मैं ने ठंडे दिल से कहा.

‘‘क्यों…’’ बीवी की आवाज में उलझन थी.

‘‘फिर बताऊंगा, फिलहाल तो बच्चे को फटाफट तैयार कर दो. उसे स्कूल ले कर जाना है,’’ मैं ने कहा.

मैं ने भी कहने को तो कह दिया, लेकिन मुझे अंगरेजी न आने का कोई हल नजर नहीं आ रहा था.

अचानक मुझे रास्ता सूझा कि मेरे पड़ोसी को अंगरेजी आती है. क्यों न उस से मदद मांगी जाए.

मैं मदद मांगने के लिए उस के पास चला गया. थोड़ी आनाकानी के बाद उस ने बात मान ली. मैं उसे और बच्चे को ले कर स्कूल पहुंचा.

‘‘क्या पढ़ते हो मुन्ना?’’ दाखिले के पहले दौर में क्लर्क ने पुचकारते हुए बच्चे से जब पूछा, तो मैं ने टोका, ‘‘अरे सरजी, अभी पढ़ कहां रहा है… पढ़ाना तो अब आप लोगों को है.’’

‘‘अरे, एबीसीडी तो पढ़ता होगा?’’ चौंकते हुए उस ने कहा

‘‘जी नहीं,’’ अचानक मेरे मुंह से सच बात निकल गई.

‘‘तो क्या बिना तैयारी के ही दाखिला कराने चले आए?’’

मैं ने बात को बिगड़ते देख कहा, ‘‘मेरे कहने का मतलब है कि अभी स्कूल में नहीं पढ़ रहा. घर में एबीसीडी सिखा रहे हैं.’’

‘‘वही तो मैं पूछ रहा था.’’

‘‘जी हां… जी हां,’’ बात बनती देख मैं ने चैन की सांस ली.

उस ने बच्चे से और भी सवाल पूछे, जिन के माकूल जवाब वह दे नहीं पाया.

बहरहाल, बेहद खुशामद के बाद क्लर्क ने एहसान जताते हुए मुझे फार्म दे दिया. फार्म भरने के बाद हम लोग प्रिंसिपल साहब के पास पहुंचे. पहले उन्होंने 5 मिनट तक भाषण पिलाया, जिस का मतलब यह था कि अंगरेजी स्कूल में पढ़ना कोई हंसीखेल नहीं है. यहां पढ़ाने के लिए घर का माहौल अंगरेजी वाला होना चाहिए. फिर प्रिंसिपल साहब ने इंटरव्यू लेना शुरू किया. अंगरेजी में पूछे गए सवालों के जवाब पड़ोसी देने लगा, इसलिए प्रिंसिपल ने समझा कि बच्चे का पिता वही है. वैसे भी वह इस तरह बनठन कर गया था, जैसा अंगरेजी स्कूल में बच्चे को पढ़ाने वाले पिता का होना चाहिए. प्रिंसिपल साहब बीचबीच में हिंदी में भी कुछ पूछ लेते थे, तब जवाब मैं दे देता था. इस से प्रिंसिपल साहब ने अंदाजा लगाया कि मैं लड़के के पिता का दोस्त हूं, इसीलिए उन्होंने पूछा भी नहीं कि हम दोनों में से लड़के का पिता कौन है?

यही मैं चाहता था, ताकि दाखिला हो जाने के बाद जब इस राज का भंडाफोड़ हो, तो मुझे यह कहने का मौका मिले कि जब पूछा ही नहीं गया, तो बताते कैसे?खैर, किसी तरह से लड़के का दाखिला हो गया.

कुछ दिनों बाद प्रिंसिपल साहब का मेरे नाम नोटिस आया. लड़के की पढ़ाई के सिलसिले में मुझे बुलाया गया था. अब तो मेरी आंखों के आगे सचमुच अंधेरा छाने लगा. मैं फिर पड़ोसी के पास गया, लेकिन इस बार उस ने मेरी मदद करने से साफ इनकार कर दिया. अलबत्ता, मेरी हौसलाअफजाई करते हुए उस ने कहा, ‘‘घबराओ मत, हिम्मत से काम लो. बच्चे का दाखिला हो चुका है. अब कोई कुछ नहीं बिगड़ सकता. ‘‘वैसे भी इतने दिनों बाद प्रिंसिपल साहब यह भूल चुके होंगे कि उस दिन लड़के का बाप बन कर मैं गया था.’’ मैं दिल मजबूत कर के प्रिंसिपल के पास चला गया. उन्होंने मुझ से शिकायत करते हुए पूछा (गनीमत थी कि हिंदी में) कि मैं लड़के को घर में पढ़ाता क्यों नहीं? मगर, मैं कैसे कह देता कि मैं अंगरेजी नहीं पढ़ पाया और उसी कमी को बच्चे के जरीए पूरा करने की कोशिश कर रहा हूं?

खैर, मैं बहाने बनाने लगा. तब वे सोच में पड़ कर बड़बड़ाने लगे कि आखिर आप के लड़के का दाखिला हो कैसे गया?हालांकि प्रिंसिपल साहब ने खूब फटकार लगाई, लेकिन मुझे इस बात की बेहद खुशी थी कि उन की ओर से मुझे मेरे बेटे के पिता के रूप में मंजूरी मिल चुकी थी.  मैं ने मन ही मन पड़ोसी का शुक्रिया अदा किया कि उस ने आज मेरे साथ चलने से इनकार कर के अच्छा ही किया, वरना मैं स्कूल में बेटे का पिता कहलाने का हक खो देता.

70 लाख से ज्यादा बार देखा गया ये गाना

यूट्यूब पर दो हफ्ते पहले स्पीड रिकार्डस ने एक गाना शेयर किया. दो हफ्ते बीत गए. गाना इतना लोकप्रिय हुआ कि उसे अब तक 70 लाख से भी ज्यादा लोग देख चुके हैं. आखिर ऐसा क्या है इस गाने में, तो सब कुछ छोड़िए और इस गाने को देखिए.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें