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इन ऐप्स से हो सकता है स्मार्टफोन को खतरा

बहुत सारे स्मार्टफोन यूजर्स बैटरी जल्दी खत्म होने की समस्या से परेशान रहते हैं. बैटरी कितनी देर तक टिकती है, यह बात फोन के स्पेसिफिकेशंस और इस्तेमाल पर निर्भर करती है. स्मार्टफोन्स के जरिए हम कई सारे काम करते हैं. गाने सुनते हैं, विडियो देखते हैं, गेम्स खेलते हैं और कई तरह के ऐप्स इस्तेमाल करते हैं. जाहिर है कि सब तरह के ऐप्स इस्तेमाल करने से बैटरी खर्च होती है, मगर इस मामले में कुछ ऐप्स का प्रदर्शन ज्यादा ही खराब है.

1. बैटरी सेवर ऐप्स

आपको यह जानकर हैरानी होगी कि रैम क्लीन करने वाले या बैटरी सेव करने वाले ऐप्स भी ज्यादा बैटरी खर्च करते हैं. दरअसल ये ऐप्स बैकग्राउंड पर रन करते रहते हैं. जब आप फोन को इस्तेमाल न कर रहे हों, तब भी ये ऐप्स हेंडसैट को लगातार स्कैन करते रहते हैं और जंक फाइल्स वगैरह को क्लीन करते रहते हैं.

2. सोशल मीडिया ऐप्स

फेसबुक सबसे पॉप्युलर स्मार्टफोन ऐप है, मगर यह बैटरी भी ज्यादा खर्च करता है. यह ऐप बैकग्राउंड में रन करता रहता है, ताकि आपको नोटिफिकेशंस वगैरह भेज सके. फेसबुक ही नहीं, मेसेंजर ऐप भी फोन की बैटरी को खत्म करने में बड़ी भूमिका निभाता है. स्नैपचैट, स्काइप और इंस्टाग्राम जैसे हेवी सोशल मीडिया ऐप्स भी यही करते हैं.

3. ऐंटी वाइरस ऐप्स

बैटरी सेवर और रैम मैनेजमेंट ऐप्स की तरह ऐंटी-वाइरस ऐप्स भी बैकग्राउंड में रन करते रहते हैं, ताकि मोबाइल को खतरों से बचा सकें. स्कैन करने में ये जितना ज्यादा वक्त लेंगे, बैटरी उतनी ही तेजी से खर्च होगी. कुछ ऐंटी वाइरस ऐप्स तो कैमरा का भी ऐक्सेस हासिल कर लेते हैं, ताकि आपका हैंडसेट अनलॉक करने की कोशिश करने वाली की तस्वीर ले सके. यह अच्छा फीचर तो है, मगर बैटरी को जल्दी खत्म करता है.

4. फोटो-एडिटिंग ऐप्स

अगर आपको तस्वीरें लेकर एडिट करने का शौक है तो आपके स्मार्टफोन में जरूर फोटो एडिटिंग ऐप्स होंगे. ये ऐप्स हेवी होते हैं और इमेज वगैरह प्रोसेस करने में बहुत पावर इस्तेमाल करते हैं. इसलिए या तो इन ऐप्स को कम इस्तेमाल करें या फिर पावर बैंक लेकर चलें.

5. इंटरनेट ब्राउजर ऐप्स

अगर आपके स्मार्टफोन में एक्स्ट्रा ब्राउजर ऐप्स हैं तो उन्हें हटा दीजिए. एक ही ब्राउजर ऐप रखिए. कुछ ब्राउजर न्यूज या अन्य तरह की नोटिफिकेशन के लिए नेट से जुड़े रहते हैं, जिस वजह से बैटरी खर्च हो जाती है.

6. गेमिंग ऐप्स

अगर आप गेम्स खेलना पसंद करते हैं तो इन ऐप्स को हटाना शायद आप न पसंद करें. जितने हेवी ऐप्स होंगे, उतनी ही ज्यादा बैटरी खर्च होगी. 3डी ऐनिमेशन वाले ऐप्स बैटरी को जल्दी खत्म करते हैं. अगर आप इंस्टॉल नहीं करना चाहते तो उन्हें फोर्स स्टॉप कर सकते हैं. ये तब तक इनऐक्टिव रहेंगे, जब तक आप इनपर टैप नहीं करेंगे.

लोन शिफ्ट करते समय ध्यान रखे ये बातें

1 अप्रैल से नया लेंडिंग रेट फॉर्मूला लागू हो गया है. इसके बाद कुछ बैंकों ने इंटरेस्ट रेट कम किया है और वे इसका फायदा अपने कस्टमर्स को दे रहे हैं. आप भी इसका फायदा उठाकर अपने लोन को कम इंटरेस्ट रेट लेने वाले बैंकों में शिफ्ट कर सकते हैं. अगर आपके पास किसी बैंक से लोन शिफ्ट करने की कॉल आई है तो लोन शिफ्ट करने से पहले इन 6 बातों को जरूर ध्यान में रखें.

इंटरेस्ट रेट को कंपेयर करें

सस्ती ब्याज दर का लाभ लेने के लिए और लोन को किसी दूसरे बैंक में शिफ्ट करने से पहले बैंकों के ऑफर पर अच्छी तरह से रिसर्च करें. कौन सा बैंक किस रेट पर लोन ऑफर कर रहा है, यह जानकारी बैंक की वेबसाइट से प्राप्‍त करें. अगर इंटरेस्ट रेट में मामूली फर्क है और आपको बहुत कम सेविंग होगी तो लोन शिफ्ट न करें. इससे आपको कोई खास फायदा नहीं मिलेगा क्‍योंकि प्रो‍सेसिंग फीस और दूसरे चार्ज में आपको इससे अधिक खर्च हो जाएंगे.

टोटल आउट-फ्लो कैलकुलेट करें

लोन शिफ्ट करने से पहले लोन के टोटल आउट-फ्लो को कैलकुलेट करें. टोटल आउट-फ्लो से मतलब है कि आप जब लोन दूसरे बैंक में शिफ्ट करेंगे तो उस बैंक में कुल कितना भुगतान करना होगा.

उदाहरण: आपने एचडीएफसी से होम लोन ले रखा है. अब कोई दूसरा बैंक कम इंटरेस्ट पर लोन शिफ्ट करने का ऑफर दे रहा है. साथ में लोन का टेन्योर बढ़ाने को भी विकल्प दे रहा है. ऐसे में आप लोन शिफ्ट करने से पहले यह चेक कर लें कि आप यहां पर पूरे टेन्योर में कुल कितना रकम चुकाएंगे. अगर, लोन शिफ्ट करते हैं तो उस बैंक में कुल अमाउंट देना होगा. ऐसा कर आप यह पता कर लेंगे कि आपको कितने अमाउंट की बचत होगी.

प्रोसेसिंग फीस और दूसरे चार्ज को पता करें

लोन शिफ्ट करने से पहले प्रोसेसिंग फीस, स्टाम्प फीस, लीगल चार्ज, वैल्युएशन फीस, टेक्निकल आदि के बारे में पता करें. कई बैंक सिर्फ प्रोसेसिंग चार्ज करते हैं और उसी के अंदर सभी चार्ज को मिला देते हैं. वहीं, कुछ बैंक अलग-अलग चार्ज लेते हैं. बैंक प्रोसेसिंग फीस टोटल आउटस्टैंडिंग अमाउंट पर लेते हैं.

पेनल्टी के गणित को समझें

लोन शिफ्ट करने पर बैंक ग्राहकों से पेनल्टी भी वसूल करते हैं. उदाहरण: अगर, आप होम लोन टेन्योर पूरी होने से पहले शिफ्ट करते हैं तो इसके एवज में बैंक प्री-पेमेंट पेनल्टी चार्ज वसूल करता है. यह चार्ज लोन की रकम का2 फीसदी तक होता है. यानी, अधिक लोन की रकम बकाया है तो एक बड़ी राशि बैंक को चुकाना पड़ सकता है. हालांकि, यह फ्लोटिंग रेट पर नहीं लगता है. अगर, आपने फि़क्स्ड रेट पर लोन ले रखा है तो फोरक्‍लोजर चार्ज या पेनल्टी देना होगा.

कुल बकाया अमाउंट को देखकर लें फैसला

अगर, आपने पहले ही लोन का बड़ा हिस्‍सा चुका दिया है और थोड़ा सा भाग बचा हुआ है तो लोन शिफ्ट नहीं करें. कम इंटरेस्ट पर लोन तभी शिफ्ट करें जब लोन का टेन्योर लंबा और लोन अमाउंट 60 से 70 फीसदी तक देना हो. अगर, लोन अमाउंट 20 से 25 फीसदी शेष हैं तो लोन शिफ्ट करना फायदे का सौदा नहीं होगा.

ऐसा इसलिए कि आप जितनी प्रोसेसिंग फीस और दूसरे चार्ज देंगे उससे कम का फायदा आपको इंटरेस्ट के तौर पर मिलेगा.

कॉस्‍ट का विश्लेषण जरूर करें

लोन का ट्रांसफर तभी फायदेमंद होगा जब कुल बचत शिफ्टिंग पर आने वाले खर्च से अधिक होगी. इसको ऐसे समझें कि अगर, आप किसी दूसरे बैंक में लोन को शिफ्ट कर रहे हैं तो आपका मौजूदा बैंक शेष रकम पर पेनल्टी वसूल रहा है और जिस बैंक में लोन शिफ्ट करा रहे हैं वह प्रोसेसिंग फीस वसूल कर रहा है. इन दोनों की कॉस्ट अगर आपके लोन की अवधि में कुल बचत से कम है तो क्‍या फायदा मिलेगा. इसलिए लोन शिफ्ट करने से पहले कॉस्ट का विश्लेषण जरूर कर लें.

लोन शिफ्ट का प्रोसेस?

लोन शिफ्ट करने के लिए सबसे पहले आपको मौजूदा बैंक में आवेदन देना होगा. आपके आवेदन पर बैंक आपको अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) और एक स्टेटमेंट इश्यू करेगा. स्टेटमेंट में आपके ऊपर लोन की बकाया राशि का उल्लेख होगा. फिर आप जिस बैंक में लोन ट्रांसफर करना चाह रहे हैं उस बैंक में एनओसी जमा करेंगे. इसके बाद वह बैंक लोन की राशि पुराने बैंक को ट्रांसफर करेगा और पुराने बैंक में अकाउंट क्लोज हो जाएगा. साथ ही आपका उस बैंक में दिया हुआ पोस्‍ट डेटेड चेक/ईसीएस रद्द हो जाएगा.

क्या अपने बैंक के बारे में सबकुछ जानते हैं आप?

आप जानते हैं बैंक को, आपको लुभाकर आपसे राशि वसूलने के कई तरीके आते हैं. आइये हम आपको बताते हैं कि वो 6 बातें जो बैंक आपसे छुपाते हैं या नहीं बताते हैं.

विज्ञापन में कुछ और असल में कुछ और…

आपको कभी भी बैंक विज्ञापन में रेट नहीं दी जाती है. बैंकों को हर आवेदक को विज्ञापन में बताई रेट बताने की आवश्यकता नहीं है. वे हर कस्टमर से अलग-अलग रेट लेते हैं. मसलन अगर आप बैंक से उस ऑफर के बारे में पूछताछ करेंगे तो वह नये खाता धारकों के लिए रहती है.

जल्दी ऋण चुकाना ज्यादा महंगा पड़ता है

आप अतिरिक्त शुल्क से बचने के लिए अपना ऋण समय पर चुकाने की कोशिश करते हैं. लोग अपना लोन और ऋण ये सोचकर जल्दी चुकाते हैं कि ज्यादा चार्ज ना लगे. बहुत से बैंक प्रत्याशित तारीख से पहले चुकाने पर भी फीस चार्ज कर लेते हैं. इसलिए तय वक्त पर ही शुल्क जमा करें. या फिर शुल्क जमा करने से पहले बैंक से इसके चार्जेस के बारे में पूछ लें.

कोई बैंकिंग फ्री नहीं होती

चाहे बैंक आपसे मासिक शुल्क ना ले लेकिन फिर भी बैंकिंग फ्री नहीं है. ओवरड्राफ्ट शुल्क, क्रेडिट बैलेंस पर ब्याज के रूप में हम सभी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बैंक को शुल्क देते हैं. यहां तक कि डेबिट कार्ड के उपयोग का भी शुल्क आपसे ही बैंक लेता है.

स्वाइप चार्ज

जब आप अपनी राशि इस्तेमाल करते हैं तो भी बैंक आपसे चार्ज करता है. आजकल हर कोई डिजिटल हो रहा है. जब आप अपना डेबिट या क्रेडिट कार्ड दुकान पर इस्तेमाल करते हैं तो रिटेलर को इस ट्रांजेक्शन का शुल्क देना होता है. यह फीस मुख्यतः आपके बैंक खाते से ही जाती है.

मेंटेनेंस चार्ज

बहुत से बैंक ग्राहकों से मेंटेनेंस चार्ज लेते हैं. कुछ बैंक इसे माफ कर देते हैं यदि आपके खाते में बैंक द्वारा निर्धारित राशि रहती हैं तो. इसलिए जीरो मेंटेनेंस चार्ज वाला बैंक खाता ही चुनने में फायदा है. कई बार ये नियम रहता है कि खाते में 10 हजार या 5 हजार से कम राशि रहने पर बैंक जुर्माना लगा सकता है. इसलिए अगर आप किसी निजी बैंक में बचत खाता खुलवा रहे हैं तो इस बिंदु पर बैंक से जरूर पूछें.

डेबिट कार्ड फीस

आपको सालाना 100 से 500 रुपए डेबिट कार्ड फीस के रूप में देने होते हैं. यदि कार्ड खो जाता है या खराब हो जाता है तो बैंक नया कार्ड जारी करने का चार्ज लेता है. इसके अलावा एटीएम से निर्धारिक ट्रांजेक्शन से अधिक पैसे निकालने के बाद आपके ही खाते से 20 से 23 रुपए तक काट लिए जाते हैं.

आईपीएल इतिहास में पहली बार हुआ यह अद्भुत कारनामा

दिल्ली के नौजवान खिलाड़ी संजू सैमसन के धुआंधार शतक, अंतिम ओवरों में क्रिस मॉरिस की आतिशी पारी और गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के बूते दिल्ली डेयरडेविल्स ने आइपीएल 10 के नौवें मुकाबले में राइजिंग पुणे सुपरजायंट को 97 रनों के विशाल अंतर से रौंदा.

दिल्ली के बल्लेबाजों के बाद गेंदबाजों ने भी शानदार खेल दिखाया और पुणे के किसी भी बल्लेबाज को टिकने नहीं दिया. पुणे की पारी को 108 रनों पर ही समेटने के दौरान दिल्ली ने एक ऐसा कारनामा कर डाला जो आइपीएल के 10 सालों के इतिहास में कोई भी टीम नहीं कर पाई.

दरअसल दिल्ली ने 16.1 ओवर में ही पुणे की पारी समेट दी. आश्चर्य कि बात ये है कि ये सभी 10 विकेट कैच आउट थे. ये अपने आप में एक अद्भुत रिकॉर्ड है क्योंकि आइपीएल के 10 सालों में दिल्ली ही इकलौती ऐसी टीम रही जिसने अपनी विपक्षी टीम के सारे विकेट कैच आउट द्वार झटकाए हो.

इसके साथ ही इस मुकाबले में दिल्ली की टीम ने पावरप्ले के ओवरों में बेहतरीन बल्लेबाजी करते हुए 5 साल पुराना रिकॉर्ड बदल कर रख दिया. दिल्ली ने पावरप्ले के ओवरों में कुल 62 रन बनाए इससे पहले साल 2012 में दिल्ली की टीम पावरप्ले में इतने रन जोड़ पाई थी.

दिल्ली ने आखिरी 4 ओवर में 76 रन जुटाए जो कि आईपीएल इतिहास का तीसरा सर्वाधिक स्कोर है. पहले और दूसरे पायदान पर आरसीबी की टीम है. जिसने एक बार 4 ओवर्स में 89 रन और दूसरी बार 77 रन जोड़े हैं.

दिल्ली की टीम के लिए पावरप्ले से मैच के अंत तक संजू सैमसन ने धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए 102 रनों की पारी खेली. सैमसन ने 8 चौके और 5 छक्के भी लगाए. संजू ने 15 पारियों के बाद आईपीएल में पहला अर्धशतक लगाया है.

सैमसन की आतिशबाजी पारी

सैमसन ने आईपीएल 10 के पहले शतक के दौरान 63 गेंद का सामना करते हुए आठ चौकों और पांच छक्कों की मदद से 102 रन बनाए जबकि क्रिस मौरिस ने नौ गेंद में चार चौकों और तीन छक्कों की बदौलत नाबाद 38 रन बनाए जिससे टीम चार विकेट पर 205 रन का अपना तीसरा सर्वोच्च स्कोर खड़ा करने में सफल रही.

सैमसन का आईपीएल में सर्वोच्च स्कोर 76 था

इससे पहले सैमसन का आईपीएल में सर्वोच्च स्कोर 76 था जो उन्होंने 2015 के आईपीएल में बनाया था. यह उनके टी-20 करियर का भी सर्वोच्च स्कोर है. इससे पहले टी-20 में उनका सर्वोच्च स्कोर 87 था जो उन्होंने झारखंड के खिलाफ 2015 में सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में बनाया था.

संजू ने इस पारी का श्रेय द्रविड़ को दिया

बता दें कि अप्रैल 2012 के बाद से दिल्ली डेयरडेविल्स ने 200 से ज्यादा रन नहीं बनाए थे. संजू की पारी की बदौलत दिल्ली ने बुरे रिकॉर्ड को भी तोड़ दिया. संजू ने इस पारी के लिए पूर्व क्रिकेटर राहुल द्विड़ को श्रेय दिया है.

कौन हैं संजू सैमसन?

11 नंवबर 1994 को केरल में तिरुवनन्तपुरम के पुलुविला में जन्मे संजू एक शानदार विकेटकीपर भी हैं. उन्हें केरल का एक उभरता हुआ चेहरा माना जा रहा है. संजू बैटिंग और विकेट कीपिंग दोनों में तकनीकी रूप से बढ़िया माने जाते हैं. संजू की फर्स्ट क्लास क्रिकेट में एंट्री 17 साल की उम्र में केरल के लिए विदर्भ के खिलाफ हुई थी.

संजू सैमसन के पहले दिल्ली डेयरडेविल्स के ये क्रिकेटर आईपीएल में जमा चुके हैं शतक

एबी डि'विलियर्स 105 नाबाद

डेविड वॉर्नर 107 नाबाद

वीरेंद्र सहवाग 119

केविन पीटरसन 103 नाबाद

डेविड वॉर्नर 109 नाबाद

क्विंटन डी कॉक 108

संजू सैमसन 102

आईपीएल में भारत के शतकवीर

मनीष पांडे

युसूफ पठान

मुरली विजय

पॉल वल्थाटी

सचिन तेंदुलकर

वीरेंद्र सहवाग (2)

अजिंक्य रहाणे

रोहित शर्मा

सुरेश रैना

रिद्धिमान साहा

विराट कोहली (4)

संजू सैमसन

स्मार्टफोन का करें रिमोट की तरह इस्तेमाल

क्या आप जानते हैं कि अब आप आराम से एंड्रॉयड या आइफोन-आइपैड पर अपने लिए एक रिमोट कंट्रोल बना सकते हैं. फोन पर रिमोट कंट्रोल ऐप बनाने का सिर्फ यही कारण नहीं हैं. इसके जरिए आप आराम से बैठकर अपने फोन से कंप्यूटर पर कुछ फाइलें पढ़ना चाहते हैं या फिर अपने होम थिएटर वाले कंप्यूटर पर गाने सुनना चाहते हैं तो उसमें भी यह आपकी मदद कर सकता है.

कहने का मतलब स्मार्टफोन इस्तेमाल करते करते, अपनी जगह पर बैठे बैठे वहीं से स्मार्टफोन का रिमोट की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है, तो ऐसा करने के लिए आपको ज्यादा कोई मेहनत नहीं करनी होगी.

अगर आप अपने फोन पर क्रोम ब्राउजर इस्तेमाल करते हैं तो बस उसके लिए एक एक्सटेंशन इनस्टॉल करना होगा, उसके बाद आपका फोन रिमोट बन जाएगा. माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम भी विंडोज के लिए रिमोट डेस्कटॉप का विकल्प देता है.

और अच्छी बात ये है कि ज्यादातर इस्तेमाल किया जाने वाले  एंड्रायड के लिए भी ये व्यवस्था दी गई है. चूंकि दुनिया भर में एंड्रॉयड फोन इस्तेमाल करने वाले लोग सबसे ज्यादा हैं, इसलिए एंड्रायड फोन के लिए भी ऐप तैयार किये गए हैं.

एंड्रॉयड फोन पर इनसे संबंधित कई ऐप्स इनस्टॉल करके आपका फोन एक रिमोट माउस बन जाएगा. इसके अलावा कंप्यूटर के लिए फ्री-रिमोट ऐप्स के लिए भी कुछ बेहतर विकल्प हैं. अगर आप पैसे दे कर ऐप खरीदना चाहते हैं तो स्पलैश टॉप या टीम व्यूवर चुन सकते हैं.

ये बात जान लें कि माउस और की-बोर्ड वाला ऐप वीडियो और साउंड ट्रांसमिट नहीं करता है. आप चाहें तो फुल रिमोट डेस्कटॉप ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं. ये ऐप आपके मॉनिटर से, फोन या टैबलेट पर तस्वीरें और साउंड भी ट्रांसमिट कर सकता है. अब आपको तय करना है कि अपनी जरुरत के लिए आप कैसा रिमोट ऐप चाहते हैं. ऐसे कई ऐप्स आपके प्ले स्टोर पर उपलब्ध हैं और आपको फ्री में आसानी से मिल जाएंगे, जो आपको ऐसी सुविधा प्रदान करते हैं.

जब 4 गेंदों में गेंदबाज ने दिया 92 रन

क्रिकेट में आपने एक से एक अनूठे रिकॉर्ड बनते देखा होगा, लेकिन क्रिकेट के इतिहास में शायद ही आपने किसी बॉलर को एक ओवर में 92 रन देते हुए देखा हो.

लेकिन यह अद्भुत कारनामा हुआ है बांग्लादेश में. बांग्लादेश में क्लब क्रिकेट खेलने वाले एक गेंदबाज ने हाल ही में इतने रन महज 4 गेंदें फेंककर ही दे दिए.

ढाका में खेली जा रही सेकेंड डिविजन क्रिकेट लीग में लालमटिया टीम के गेंदबाज सुजोन महमूद ने अपने ओवर में केवल 4 गेंदें ही फेंककर 92 रन लुटाए, जिसमें 65 रन वाइड (13 गेंदों में) और 15 रन तीन नो बॉल फेंककर दिए. यह एग्जोम क्रिकेटर्स की पारी का पहला ही ओवर था और इस टीम ने इस तरह 10 विकेट से जीत अपने नाम कर ली.

ऐसा नहीं है कि इस गेंदबाज से यह कारनामा किसी गलती या भूलवश हुआ हो, महमूद ने ऐसा जानबूझकर किया. महमूद ने अंपायर के विवादास्पद निर्णयों के विरोध में ऐसी बॉलिंग की. ऐसा करने के लिए महमूद को लालमटिया की पूरी टीम का समर्थन प्राप्त था.

ढाका सेकेंड डिविजन क्रिकेट लीग में लालमटिया क्लब और एग्जोम क्रिकेटर्स के बीच यह मैच खेला गया. इस क्रिकेट लीग का आयोजन क्रिकेट कमिटी ऑफ ढाका मेट्रोपोलिस कर रही है. लालमटिया की टीम को इस मैच में पहले बैटिंग करने निमंत्रण मिला. लालमटिया की पूरी टीम 14 ओवर में 88 रन बनाकर ऑलआउट हो गई.

लालमटिया क्लब के महासचिव अदनान रहमान दिपोन ने बताया कि लालमटिया की टीम अंपायरों के गलत डिसिजन से गुस्सा थी और इसके विरोध में ही टीम ने ऐसा किया. अदनान के मुताबिक, मैच की शुरुआत से बेईमानी शुरू हो गई थी. उन्होंने हमारे कैप्टन को टॉस के दौरान सिक्का भी नहीं देखने दिया. हमारे खिलाड़ी 17,18,19 साल के युवा हैं और वे इस बेईमानी को बर्दाश्त नहीं कर पाए. एक के बाद सभी निर्णय हमारे खिलाफ गए थे.

जलन का तेजाबी हमला

5 नवंबर, 2016 की शाम के यही कोई साढ़े 6-7 बजे थे. उत्तर प्रदेश के जिला इलाहाबाद के गंगापार स्थित थाना बहरिया के गांव रामगढ़ कोठारी के रहने वाले श्यामलोदत्त मिश्रा की बेटी रेखा अपनी चचेरी बहनों राधा और श्रेया के साथ खेतों से लौट रही थी. तीनों बहनें गांव के करीब पहुंची थीं कि उन के पास एक पल्सर मोटरसाइकिल आ कर रुकी.

उस पर 2 लोग सवार थे. उन के पहनावे और कदकाठी से लग रहा था कि उन की उम्र ज्यादा नहीं थी.  पास में मोटरसाइकिल रुकने से तीनों बहनें ठिठक कर रुक गईं. मोटरसाइकिल सवार गांव के नहीं थे, इसलिए उन्हें लगा कि शायद वे उन से किसी के घर का रास्ता पूछेंगे.

लेकिन रास्ता पूछने के बजाय मोटरसाइकिल पर पीछे बैठा युवक फुरती से उतरा. उस के हाथ में एक बोतल थी. तीनों बहनें कुछ समझ पातीं, उस के पहले ही उस ने बोतल का ढक्कन खोला और उस में जो भरा था, उसे तीनों बहनों की ओर उछाल दिया. बोतल का तरल जैसे ही उन के चेहरों पर पड़ा, जलन से तीनों बिलबिला उठीं.

मोटरसाइकिल स्टार्ट ही थी. युवक अपना काम कर के मोटरसाइकिल पर जैसे ही बैठा, मोटरसाइकिल एकदम से चल पड़ी. तीनों लड़कियां जलन से चीखनेचिल्लाने लगीं, क्योंकि उन के चेहरों पर फेंका तरल पदार्थ तेजाब था. उन की चीखपुकार पर पूरा गांव इकट्ठा हो गया और टार्च की रोशनी में जब उन के चेहरों को देखा गया तो देखने वालों के रोंगटे खडे़ हो गए.

लड़कियों की स्थिति काफी गंभीर थी. तुरंत सौ नंबर पर फोन कर के घटना की सूचना दी गई. सूचना मिलते ही थाना बहरिया पुलिस के अलावा पुलिस अधिकारी भी एंबुलैंस के साथ गांव कोठारी आ पहुंचे. थानाप्रभारी अश्विनी कुमार सिंह भदौरिया ने तुरंत तीनों लड़कियों को अस्पताल भिजवाया.

घटना की सूचना पा कर आईजी के.एस. प्रताप कुमार, डीआईजी विजय यादव, एसएसपी शलभ माथुर भी तीनों लड़कियों का हालचाल लेने अस्पताल पहुंच गए थे.

अधिकारियों ने पीडि़त बहनों के चेहरों पर नजर डाली तो यह देख कर आश्वस्त हुए कि उन की आंखें सलीसलामत थीं. उन के शरीर पर जहांजहां तेजाब पड़ा था, वहां की त्वचा झुलस गई थी. तीनों बहनों ने जो शाल ओढ़ रखी थी, तेजाब पड़ने से उन में जगहजगह छेद हो गए थे. अगर वे शाल न ओढे होतीं तो शायद और ज्यादा जल सकती थीं.

पुलिस अधिकारियों ने पीडि़त लड़कियों के घर वालों से पूछताछ की, ताकि हमलावरों के बारे में कुछ पता चल सके. इस पूछताछ में पता चला कि श्यामलोदत्त का अपने पड़ोसी से रास्ते को ले कर विवाद चल रहा था. इसी के साथ यह भी पता चला कि तेजाबी हमले से झुलसी श्रेया का पड़ोस की रहने वाली पिंकी मिश्रा से किसी बात को ले कर विवाद हो गया था. श्रेया, पिंकी और रेखा एक ही कालेज में पढ़ती थीं.

आईजी के निर्देश पर इन दोनों बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ाई गई तो दोनों का ही इस घटना से कोई संबंध नहीं निकला. पुलिस अधिकारियों के जेहन में एक ही सवाल कौंध रहा था कि गांव में कोई तो ऐसा होगा, जो इन लड़कियों की हर गतिविधियों पर गिद्धदृष्टि जमाए था.

वही पलपल की जानकारी हमला करने वालों को देता रहा होगा. जिसजिस पर पुलिस को शक हुआ, उस से पूछताछ की गई, लेकिन पुलिस को सफलता नहीं मिली. एसएसपी शलभ माथुर ने मामले को सुलझाने में इंटेलीजेंस विंग के तेजतर्रार इंसपेक्टर अनिरुद्ध कुमार सिंह और एसआई नागेश कुमार सिंह को भी आवश्यक दिशानिर्देश दे कर लगा दिया.

अनिरुद्ध कुमार सिंह ने अस्पताल पहुंच कर तीनों बहनों से एक बार फिर पूछताछ की. श्रेया ने बताया कि उन के ऊपर तेजाब फेंकने के बाद एक हमलावर ने किसी को फोन कर के कहा था कि ‘काम हो गया है.’

इस पूछताछ के बाद उन्होंने अपनी टीम के तेजतर्रार हैडकांस्टेबल इंद्रप्रताप सिंह, जितेंद्र पाल सिंह, कांस्टेबल पवन सिंह, अभय कुमार सिंह, रविसेन सिंह बिसेन व स्वाट टीम प्रभारी नागेश कुमार सिंह, पंकज त्रिपाठी, हेमू पटेल, अनुराग, विजय यादव, दीपक कुमार आदि से इस विषय में गहन मंत्रणा कर सभी को सामान्य कपड़ों में कोठारी गांव के इर्दगिर्द लगा दिया. मुखबिरों को भी सतर्क कर दिया था.

इस के अलावा थाना बहरिया के थानाप्रभारी अश्विनी कुमार भदौरिया भी इस मामले का खुलासा करने में अपनी टीम के साथ लगे हुए थे. पुलिस यह मान कर चल रही थी कि कहीं यह हमला प्रेमप्रसंग को ले कर तो नहीं हुआ. हमलावर एक लड़की को निशाना बनाने आए होंगे, बाकी दोनों लड़कियां साथ होने की वजह से चपेट में आ गई होंगी.

यहां एक बात गौर करने वाली यह थी कि इन में से राधा अपनी ससुराल महेपुरा से कुछ दिनों पहले ही मायके आई थी. इसी साल 11 जुलाई, 2016 को उस का विवाह हुआ था.

इंसपेक्टर अनिरुद्ध कुमार सिंह की सोच यहीं आ कर टिक गई. उन्हें लगा कि हमलावर इन लड़कियों के आसपास रहते होंगे या जिस के इशारे पर यह वारदात की गई है, वह इन के आसपास रहता होगा. क्योंकि उस आदमी को इन बहनों की एकएक पल की जानकारी थी. और उचित मौका देख कर हमलावरों को मोबाइल द्वारा सटीक सूचना दे कर उन पर एसिड अटैक करवा दिया गया था.

इस दिशा में जांच की गई तो पता चला कि श्यामलोदत्त मिश्रा के पड़ोसी रामचंद्र मिश्रा की बेटी पिंकी की शादी सन 2012 में थाना बहरिया के गांव महेपुरा के योगेश तिवारी के साथ हुई थी. उसी गांव में राधा की ससुराल थी. सन 2014 में योगेश ने पिंकी पर बदचलनी और गहनों की चोरी का आरोप लगा कर उसे छोड़ दिया था. तब से वह मायके में ही रह रही थी.

पिंकी नहीं चाहती थी कि उस की ससुराल वाले गांव में राधा की शादी हो. शादी रोकने के लिए उस ने तरहतरह की बातें कहीं, पर उस की सारी कोशिश उस समय बेकार हो गई, जब राधा दुल्हन बन कर उसी गांव में पहुंच गई. पिंकी इस से जलभुन गई. शादी वाले दिन ही पिंकी ने उस से झगड़ा किया था.

इन बातों से पिंकी पुलिस के शक के दायरे में आ गई. पुलिस ने उसे थाने बुला कर पूछताछ शुरू की. पुलिस के सामने अपना दुखड़ा रोते हुए उस ने कहा कि वह तो खुद ही परेशान है. पति ने छोड़ रखा है, जिस का मुकदमा कोर्ट में चल रहा है. पुलिस ने उस की बातों पर विश्वास कर के उसे छोड़ दिया. मगर उस पर पुलिस की पैनी निगाह बराबर जमी रही. क्योंकि वह अभी भी शक के दायरे में थी.

अब तक की जांच में पुलिस को एक नई बात यह पता चली कि शादीशुदा होने के बावजूद पिंकी का थाना बहरिया के गांव राजेपुरा निवासी नफीस अहमद उर्फ जया से प्रेमसंबंध था. यह संबंध पिंकी की शादी से पहले से चला आ रहा था. इस बारे में उस के ससुराल वालों को पता चल गया था.

इस के बाद ही उस के पति योगेश तिवारी ने उस पर बदचलनी और गहनों की चोरी का आरोप लगा कर सन 2014 में उसे छोड़ दिया था. इस के बाद पिंकी के घर वालों ने योगेश और उस के घर वालों पर दहेज एक्ट और उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज करा दिया था, जो माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद में मिडिएशन पर चल रहा है. इस के बावजूद पिंकी और उस के घर वाले गांव के ही जगतनारायण मिश्रा, जिन्होंने पिंकी और योगेश की शादी कराई थी, पर बराबर दबाव बनाए हुए थे कि किसी प्रकार से दोनों पक्षों में समझौता करा दें. जगतनारायण मिश्रा समझौता तो नहीं करा सके, पर उन्होंने पिंकी की ससुराल वाले गांव में राधा का ब्याह जरूर करा दिया था.

यह जानकारी मिलने के बाद इंसपेक्टर अनिरुद्ध कुमार सिंह बिना समय गंवाए पिंकी के प्रेमी नफीस उर्फ जया को उस के घर पर छापा मार कर हिरासत में ले लिया. थाने में उस से पूछताछ की गई तो उस ने कहा, ‘‘साहब, मैं निर्दोष हूं. मेरा इस मामले में कोई लेनादेना नहीं है. मेरे पास बोलेरो गाड़ी है और पिंकी के पिता के पास अरमादा की मार्शल, जिन्हें मैं ही किराए पर चलवाता हूं, इसी वजह से मेरा उन के यहां आनाजाना लगा रहता है. पिंकी से मेरा कोई लेनादेना नहीं है.’’

अनिरुद्ध कुमार सिंह को लग रहा था कि यह झूठ बोल रहा है, इसलिए उन्होंने उस के और पिंकी के फोन नंबरों की जो काल डिटेल्स निकलवाई थी, उसे उस के सामने रखा तो वह सकपका गया. इस से साफ था कि घटना वाले दिन 5 नवंबर, 2016 की शाम साढ़े 7 बजे पिंकी और उस की एसिड अटैक से पहले और बाद में बातें हुई थीं.

इस के बाद नफीस ने अपना गुनाह कबूल करते हुए बताया कि उसी ने अपने साथी के साथ मिल कर तीनों बहनों पर तेजाब फेंका था. इस के बाद उस ने एसिड अटैक के पीछे की जो कहानी बताई, इस प्रकार थी—

पिंकी और नफीस के बीच कालेज समय यानी सन 2008 से ही प्रेमसंबंध चले आ रहे थे. पिंकी ने नफीस पर शादी के लिए कई बार दबाव डाला था, लेकिन नफीस तैयार नहीं हुआ था. वह जानता था कि यह गांवदेहात का मामला है, इसलिए शादी के बाद बवाल हो सकता है.

योगेश से शादी हो जाने के बाद भी पिंकी प्रेमी नफीस से संबंध बनाए रही. इस का नतीजा यह निकला कि ससुराल वालों को उस के प्रेमसंबंधों का पता चल गया और पति ने उसे छोड़ दिया. उस की ससुराल वाले गांव में ब्याही राधा जब भी मायके आती, अपनी चचेरी बहनों से खूब हंसहंस कर बातें करती.

इस से पिंकी को लगता कि तीनों बहनें उसी के बारे में बातें कर के हंस रही हैं और उस का मजाक उड़ा रही हैं. पिंकी के मन में यह बात इस तरह बैठ गई कि वह राधा, रेखा तथा श्रेया को दुश्मन मान बैठी और उन्हें सबक सिखाने के बारे में सोचने लगी. वह उन्हें ऐसा कर देना चाहती थी कि लोग उन के चेहरे को देख कर नफरत करें.

उसी बीच रेखा की शादी प्रतापगढ़ के रानीगंज में तय गई. 2 दिनों बाद लड़के वाले उसे देखने के लिए आने वाले थे. पिंकी किसी भी हाल में तीनों बहनों को खुश नहीं देखना चाहती थी. वह अपने प्रेमी नफीस से मिली और उस के कंधे पर अपना सिर रख कर रोते हुए बोली, ‘‘नफीस, मैं तुम से कितनी बार कह चुकी हूं कि मेरी पड़ोसन दुश्मन उन तीनों बहनों पर तेजाब फेंक कर उन का चेहरा ऐसा कर दो कि जिस तरह मैं विरह की आग में झुलस रही हूं, वही हाल उन का भी हो.’’

‘‘मैं तुम्हारी पीड़ा को अच्छी तरह समझ रहा हूं. लेकिन तुम राधा और उस की बहनों के प्रति जो सोच रही हो, वह गलत है. मैं इस तरह का गलत काम नहीं कर सकता.’’ नफीस ने कहा.

‘‘नफीस, अगर तुम मुझ से सच्ची मोहब्बत करते हो तो तुम्हें मेरा यह काम करना ही पड़ेगा. मेरी खुशी के लिए तुम मेरा यह छोटा सा काम नहीं कर सकते? तुम कैसे मर्द हो, पिछले 8 सालों से मैं तुम्हें अपना सब कुछ सौंपती आ रही हूं और तुम मेरा इतना सा काम कर नहीं कर सकते तो क्या खाक प्यार करते हो?’’ कह कर वह अपनी आंखों में छलके आंसुओं को हथेली से पोंछने लगी.

‘‘नही, ऐसी बात नहीं है पिंकी. मैं तुम्हारी खुशी के लिए कुछ भी कर सकता हूं.’’ नफीस ने कहा.

प्रेमी के मुंह से यह सुन कर पिंकी के चेहरे पर मुसकान आ गई, वह चहकते हुए बोली, ‘‘यह हुई न मर्दों वाली बात. सुनो, इस समय राधा मायके में ही है. रेखा की शादी होने से पहले तुम मेरा काम कर दो, जिस से उस की शादी न हो सके. जिस दिन तुम्हें यह काम करना हो, मुझे बता देना. मैं तुम्हें पलपल की सूचना देती रहूंगी.’’

पूरी योजना तैयार कर के नफीस ने तेजाब खरीद लिया. इस के बाद उस ने राजेपुरा के रहने वाले अपने दोस्त शफीक (परिवर्तित नाम) को अपनी योजना में शामिल कर लिया. शफीक नाबालिग था.

5 नवंबर, 2016 को वह पिंकी के फोन का इंतजार करने लगा. शाम साढ़े 7 बजे पिंकी ने उसे बताया कि रेखा, राधा और श्रेया खेतों की तरफ जा रही हैं. फिर क्या था, नफीस शफीक को मोटरसाइकिल पर बैठा कर चल पड़ा और तीनों बहनों के चेहरों पर तेजाब डाल कर लौट आया.

नफीस की निशानदेही पर पुलिस ने पिंकी, शफीक और तेजाब बेचने वाले दुकानदार रमाकांत यादव को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस ने शफीक को बाल न्यायालय में पेश कर बालसुधार गृह भेज दिया, जबकि पिंकी और नफीस को भादंवि की धारा 326ए, 120बी के तहत अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

– कथा मीडिया व पुलिस सूत्रों पर आधारित

काला धंधा बनती शिक्षा

शिक्षा महंगी होती जा रही है और उस में भरपूर बेईमानी भी घुस रही है. पहले शिक्षा देने वाले अपने धंधों में चाहे बेईमानियां करते हों वे स्कूल, कालेजों को दान भी देते थे और उन के प्रबंध में समय भी. अब उलटा हो गया है और शिक्षा चाहे सरकारी हो या प्राइवेट दोनों में धांधली ही धांधली है. मध्य प्रदेश का व्यापम घोटाला इसी का नतीजा है. दिल्ली के समीप गुड़गांव में अंसल विश्वविद्यालय में आजकल हंगामा मचा हुआ है. अंसल विश्वविद्यालय अंसल बिल्डरों द्वारा चलाया जा रहा है और उन्होंने शिक्षा में भी छात्रों को अट्रैक्ट करने के लिए वे ही गुर अपनाए थे जो वे अपने फ्लैटों और प्लाटों को बेचने में अपनाते हैं : सब्जबाग दिखा कर पैसा वसूल करो.

छात्रों को कहा गया था कि उन्हें स्विमिंग पूल, जिम और स्पोर्ट्स सैंटर दिया जाएगा और उस के लिए मोटा पैसा ले लिया गया. पर छात्रों के हितों को तो आजकल के शिक्षा प्रबंधक ध्येय समझते ही नहीं हैं. उन्होंने छात्रों के फ्लैटों को खरीदारों के बराबर मान कर वादों को टरकाना शुरू कर दिया और नतीजा यह हुआ है कि अंसल विश्वविद्यालय के छात्र हड़ताल व धरने पर बैठे हैं. यह कई निजी विश्वविद्यालयों में हो रहा है, क्योंकि वहां प्रबंधक शिक्षा के माध्यम से अगली पीढ़ी को तैयार करने नहीं आ रहे, अपने लिए पैसा बनाने के लिए शिक्षा का इस्तेमाल कर रहे हैं.

शिक्षा आज देश का एक बड़ा काला धंधा बन गया है. आज के मातापिता जानते हैं कि शिक्षा ही बच्चों का भविष्य बना सकती है और इसलिए बच्चों की पढ़ाई पर पेट काट कर खर्च कर रहे हैं, पर शिक्षा देने वाले इसे मातापिता की मजबूरी मान कर उन्हें लूटने में लग गए हैं. सरकारी शिक्षा में कौपीइंग, एबसैंटिज्म और ट्यूशन की भरमार है तो निजी में फीस के नाम पर डोनेशन और चार्जेज का बोलबाला है. प्रबंधक चाहे सरकारी शिक्षा के हों या निजी शिक्षा के, नई पीढ़ी के प्रति अपने उत्तरदायित्व को भूल चुके हैं और उसे कमाई और सिर्फ कमाई का धंधा मान कर चलते हैं. अफसोस यह है कि मातापिता अपने को इतना लाचार व असहाय समझते हैं कि हर पग पर कंप्रोमाइज करने को तैयार हैं. वे किसी भी गलत काम पर हल्ला नहीं मचाते.

गनीमत है कि देश की आबादी इतनी ज्यादा है कि कामचलाऊ संख्या में प्रतिभाशाली छात्र निकल ही आ रहे हैं. तभी तो 95 और 98त्न वालों को भी दाखिला नहीं मिल रहा है, पर यह भी संभव है कि जो 95 व 98त्न वाले बेईमान शिक्षा के प्रौडक्ट हों और डिग्री की प्रतिष्ठा को भी नष्ट कर रहे हों, पर इतना जरूर है कि हमारे युवाओं ने इन विषम स्थितियों में भी कुछ लाभ तो कमा लिया कि अमेरिका की सिलीकौन वैली भारतीयों  से भरी पड़ी है और अमेरिका में डौनल्ड ट्रंप के निशाने पर मुसलिम आतंकवादी कम और भारतीय मेधावी छात्र ज्यादा हैं. अगर हमारे शिक्षा प्रबंधक जरा से देशभक्त हो जाएं तो वे अगली पीढ़ी ऐसी तैयार कर सकते हैं कि भारत ही भारत दिखे.

अवहेलना की शिकार युवतियां

‘यत्र नार्यस्तु पूज्यते…’ जैसे जुमले कह कर स्त्री को मानसम्मान का प्रतीक मानने वाले कट्टरपंथी देश में आज स्त्री की पूजा होती है रेप से, एकतरफा प्यार में कैंची द्वारा गोदगोद कर उस की हत्या से, निर्भया की तरह मौत के बाद भी इंसाफ न मिलने से या फिर गुरमेहर की तरह अभिव्यक्ति की आजादी का दमन कर गालियां व रेप की धमकी दे कर. इस के बाद खुद को जगत गुरु कहा जाता है.

ये तो चंद मामले हैं जो सर्वविदित हैं जबकि आएदिन सुर्खियों में ऐसे मामले आते हैं जिन का सीधा संबंध नारी से होता है लेकिन पुरुषवादी मानसिकता, कट्टरतावादी धर्म पर चलता समाज उस के छींटे भी नारी पर ही डालता है और कहा जाता है कि ये सब होने की वजह युवतियों का घर से निकलना, छोटे कपड़े पहनना, पुरुषों संग मेलजोल बढ़ाना है. अगर ये सब बातें ही इन जघन्य अपराधों का कारण हैं तो छोटीछोटी बच्चियों के साथ बलात्कार के इतने सारे मामले क्यों प्रकाश में आते हैं? गांवों में जहां लड़कियां न तो पढ़ रही हैं और न छोटे कपड़े पहन रही हैं, वे क्यों वहां मर्दों की शिकार बनती हैं?

समाज में निरंतर बढ़ते अपराध का कारण भी हमारे धर्म की जड़ों में है जहां जन्म से ही लड़के के जन्म पर खुशी और लड़की होने पर शोक मनाया जाता है. बड़े होने पर दहेज हत्याएं, समाज में दकियानूसी सोच का उन्हें शिकार होना पड़ता है. इन्हीं कारणों के चलते एक और अपराध जन्म लेता है भ्रूण हत्या का. अगर परीक्षण कर पता चला कि गर्भ में लड़की है तो उसे वहीं मार दिया जाता है. इतने साल बाद भी हम समाज की कुरीतियों को बदल नहीं पाए, दहेज प्रथा, बाल विवाह, लड़कियों को कम शिक्षा दिलाना आदि कुरीतियां आज भी समाज में व्याप्त हैं. नारी को सदा धर्म में भोग की वस्तु माना गया और उसे पुरुष से कमतर आंका गया है. स्त्री निंदा में भी कसर नहीं छोड़ी गई, लेकिन जब हम समाज में यह भेदभाव देखते हैं तो भी आवाज नहीं उठाते, कारण यह भी है कि आवाज कैसे दबाई जाए सब को पता है.

निर्भया कांड को ही ले लीजिए. इस कांड के बाद पूरे देश में धरनाप्रदर्शन, कैंडिल मार्च हुए, नई समितियां गठित की गईं, नए कानून बने, फास्ट ट्रैक अदालतों का निर्माण हुआ, लेकिन बलात्कारियों के पता होने व पकड़े जाने पर भी क्या हम निर्भया को न्याय दिला पाए? एक दूसरे मामले में कैंची से गोद कर एक सिरफिरा सरेराह युवती को मार देता है तो क्या हुआ? ताजा मामला गुरमेहर का है. आखिर उस का गुनाह क्या है? सिर्फ यही न कि उस ने अपने मन की बात कही? यही कि कट्टरपंथी एबीवीपी का विरोध किया? उस के खिलाफ उसे गालियां दी गईं और उसे अपमानित किया गया. रेप करवा देंगे जैसी धमकियां मिलीं, क्यों?

रेप, एसिड अटैक, दहेज हत्या जैसी बातों की शिकार युवतियां ही हो रही हैं. न्याय के इतने पैर पसारने, सिक्योरिटी की नई तकनीक, आत्मरक्षा के तरीकों और पुलिस की चौकस निगाह के बावजूद आज ये सब हो रहा है. हाल ही में एक और मामला प्रकाश में आया है जिस में दिल्ली से सटे ग्रेटरनोएडा के लौयड कालेज के निदेशक ने युवतियों के क्लास में 20 मिनट देर से पहुंचने पर उन्हें गालियां दीं. यहां तक कि जूता उठा कर मारने के लिए उन के पीछे भी दौड़े. भले ही उन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्यवाही की गई और अगले दिन उन का इस्तीफा ले कर तत्काल प्रभाव से उन्हें हटा दिया गया, लेकिन युवतियों का अपमान तो हुआ न.

गुरमेहर कौर का मामला

गुरमेहर कौर दिल्ली यूनिवर्सिटी के लेडी श्रीराम कालेज की छात्रा है और बहुत बोल्ड भी. रामजस कालेज में इतिहास विभाग ने 2 दिन का ‘कल्चरर औफ प्रोटैस्ट’ सैमिनार आयोजित किया था, जिस में पिछले साल विवादों में आए जेएनयू के छात्र उमर खालिद और छात्रसंघ के पूर्व सदस्य को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन एबीवीपी के विरोध के चलते कार्यक्रम रद्द करना पड़ा. कार्यक्रम रद्द होते ही दोनों गुटों यानी एबीवीपी और आईसा में तनातनी हो गई, जिस में कईर् छात्र घायल हो गए. ये सब गुरमेहर से देखा नहीं गया और उस ने इस हिंसा के विरोध में एबीवीपी के खिलाफ सोशल मीडिया पर एक कैंपेन चलाया, जिसे छात्रों का खूब समर्थन मिला, जिस से एबीवीपी बौखला गई. उसे लगा कि लड़की होते हुए उस ने हमारे खिलाफ आवाज उठाने की जुर्रत की, जो उन के लिए खौफ पैदा करने वाली थी.

बदले में एबीवीपी ने साल भर पुराना मुद्दा उछाला और भारतपाकिस्तान शांति के प्रयास के लिए डाले गए गुरमेहर के एक वीडियो, जिस में गुरमेहर ने कहा था, ‘मेरे पिता को पाकिस्तान ने नहीं युद्ध ने मारा’ को उभारा गया और गुरमेहर को राष्ट्रविरोधी करार दिया गया. उसे न केवल रेप जैसी धमकी मिली बल्कि भद्दी गालियों का भी सामना करना पड़ा. गुरमेहर इस से डरी नहीं और उस ने कहा कि जो सच था मैं ने वही कहा, मैं एबीवीपी से नहीं डरती. भले ही मैं इस अभियान से अलग हो रही हूं लेकिन इस का मतलब यह नहीं कि मैं डर गई, बल्कि मैं किसी भी तरह की हिंसा नहीं चाहती.

विचारों की कैसी स्वतंत्रता

आज हर व्यक्ति को विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है, लेकिन यह कैसी स्वतंत्रता जहां अपनी बात रखने पर बवाल मच जाता है. यह सिर्फ महिलाओं के साथ है पुरुषों के साथ नहीं, क्योंकि जब समाज में पुरुष कुछ गलत कहें या करें तो उस मामले को दबा दिया जाता है, लेकिन अगर महिला कुछ कहे तो यह समाज को बरदाश्त नहीं होता बल्कि उसे शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताडि़त करने की धमकी दे कर चुप कराने की कोशिश की जाती है. किसी भी महिला के लिए यह धमकी काफी डरावनी होती है, क्योंकि एक बार अगर उस का रेप हो जाए तो समाज उसे हेयदृष्टि से देखता है और यहां तक कि पढ़ीलिखी होने के बाद भी कोई उस से शादी करना पसंद नहीं करता, भले ही उस की कोई गलती न हो. इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि महिलाओं को आज भी विचारों की स्वतंत्रता नहीं है और अगर कोई बोलने की जुर्रत करती भी है तो उसे भी गुरमेहर की तरह बिना किसी गलती के अपने घर वापस लौटना पड़ता है.

महिलाओं के हिस्से गालियां ही क्यों

बात चाहे बौयफ्रैंड की इच्छापूर्ति की हो या फिर घर में पति की बात मानने की, जहां भी महिला ने किसी बात को मनाने से इनकार किया तो उसे मांबहन की गालियां दे कर अपनी बात को मनवाने की कोशिश की जाती है और अगर फिर भी उस ने इनकार किया तो ब्लैकमेलिंग की धमकी दी जाती है आखिर ऐसा क्यों?

जब रिश्ता आपसी सहमति से बना हो तो उस में जबरदस्ती कैसी? क्या महिलाएं सिर्फ  भोग की वस्तु हैं जब चाहे उन्हें यूज करो और जब मन भर जाए तो निकाल कर फेंक दो? अपनी इस मानसिकता को जब तक पुरुष नहीं बदलेंगे तब तक समाज व देश का भला नहीं हो पाएगा और पलपल पर महिलाओं को अपमानित हो कर अपने पैदा होने पर ही पछताने पर मजबूर होना पड़ेगा.

आवाज को दबाने वाले दबंग

लाठीपत्थर बरसाने वाले, होहल्ला मचाने वाले ज्यादा दबंग हैं. उन में से ज्यादातर किसी धर्म के मानने वाले ही नहीं परम भक्त और उन के सेवक, दुकानदार हैं. वे धर्म के नाम पर रोब झाड़ते हैं और जबरन चंदा वसूली करते हैं. इन के सामने पुलिस भी नतमस्तक हो जाती है. इन दबंगों को प्रशासन या सरकार का खुला संरक्षण प्राप्त होता है. ये साफ कह देते हैं कि अगर बात बिगड़ती दिखी तो हम पैसों और पावर के दम पर सब संभाल लेंगे, तुम्हें डरने की जरूरत नहीं. ऐसे में इन के हौसले तो और बुलंद होंगे ही.

पुरुष हमेशा प्रत्यक्षदर्शी ही क्यों

जब पुरुष समाज में खुद का अहम रोल मानते हैं और समझते हैं कि उन के बिना महिला का कोई वजूद नहीं तो अकसर ऐसा देखने में आता है कि जब भी कोई बदतमीजी या फिर रेप वगैरा की घटना होती है या फिर मुसीबत में होेने पर महिला हैल्प मांगती है तो पुरुष क्यों चुप्पी साध लेते हैं. तब क्यों नहीं मर्दानगी दिखाते?

दोषी घूमते हैं आजाद

आज माहौल ऐसा बन गया है कि जो निर्दोष है वह सजा भुगतता है, लोगों के घटिया कमैंट का शिकार होता है और जो वास्तव में दोषी है वह खुलेआम आजाद घूम कर और खौफ पैदा करता है.असल में इस का दोष हमारी कानूनव्यवस्था में है, क्योंकि कभी रेप के आरोपी को नाबालिग के नाम पर छोटीमोटी सजा दे कर छोड़ दिया जाता है तो कभी दोषी मोटी रकम चढ़ा कर अफसरों का मुंह बंद करवा कर आजाद घूमता है. फ्रीडम औफ स्पीच का समर्थन जरूरी डीयू में जहां देशविदेश से छात्र पढ़ कर अपना कैरियर संवारते हैं, जहां न पढ़ाई में और न ही किसी और चीज में भेदभाव होता है तो फिर वहां जब महिलाएं सच के खिलाफ आवाज उठाती हैं तो उन का हमेशा विरोध क्यों होता है.

विचारों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ ही है कुछ अप्रिय कहने की स्वतंत्रता, तारीफ करनी हो तो किसी स्वतंत्रता की जरूरत ही नहीं. यह तो सऊदी अरब में भी कर सकते हैं और उत्तर कोरिया में भी, भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ है अप्रिय सच बोलना, तथ्यों पर सही बेबाक समीक्षा करना. देशभक्ति के नाम पर धर्मभक्ति को थोपने की कोशिश की जा रही है और हिंदू या इसलामी झंडे की जगह तिरंगा लहरा कर धर्मभक्ति को राष्ट्रभक्ति कहने की कोशिश भारत, इसलामी देशों और कम्युनिस्ट देशों में जम कर हो रही है. महिलाओं को तो फ्रीडम औफ स्पीच का अधिकार है ही नहीं. आज भले ही गुरमेहर अभियान से पीछे हट गई है, लेकिन फिर भी उस ने अपनी आवाज बुलंद कर दुनिया को बहुत पावरफुल मैसेज दिया है कि अगर आप सही हैं तो डरें नहीं. अगर इस तरह हर किशोरी, युवती, महिला सोचेगी तो कोई भी नारीशक्ति को कमजोर नहीं कर पाएगा और न ही रेप, मारने जैसी धमकियां दे कर डरा पाएगा.

खूबसूरती के रंग, सितारों के संग

त्वचा की खूबसूरती अंदर से आती है और इस के लिए चाहिए सही खानपान और नियमित वर्कआउट. आज की महिलाएं इस पर खास ध्यान देने लगी है, क्योंकि उन्हें पता है कि हर उम्र में स्किन की सही देखभाल जरूरी है. जिस से आप के चेहरे पर किसी प्रकार के दाग, झाइयां और झुर्रियां न आएं. ग्लैमर वर्ल्ड में सुंदर चेहरे की तो और अधिक जरुरत होती है, क्योंकि हर दिन धूप में शूटिंग, मेकअप का प्रयोग और अनियमित खानपान से त्वचा बेजान होने लगती है. ऐसे में क्या करती है ये सिने तारिकाएं आइए जानते हैं:

आलिया भट्ट

गर्मी के मौसम में त्वचा में नमी की कमी हो जाती है. ऐसे में पर्याप्त पानी पीना जरूरी होता है. आलिया गर्मी में डिटौक्स वाटर का अधिक प्रयोग करती हैं. जो खासकर नीबू पानी होता है. वे कहती हैं कि इस से शरीर का वजन कंट्रोल में रहता है. डिटौक्स वाटर से पाचन शक्ति बढ़ती है और शरीर में ऊर्जा बनी रहती है. इस के अलावा मैं कभी डाइट फौलो नहीं करती. 2 घंटे के अंतराल पर खाना खाती हूं. शुगर, फैट और कार्बोहाइड्रेट कम लेती हूं. गर्मियों में पाए जाने वाले फ्रैश फ्रूट्स और सब्जियां अधिक खाती हूं. दिन में 8 से 10 गिलास पानी पीती हूं. वर्क आउट मैं सप्ताह में 4 से 5 दिन करती हूं, जिस में मैडिटेशन खास होता है ताकि लंबी शूटिंग के बाद दिमाग शांत रहे.

आलिया अपनी त्वचा के लिए हमेशा अच्छे ब्रांड के उत्पाद का प्रयोग करती है. गर्मियों में त्वचा नमी युक्त रखने के लिए मौइश्चराजर का प्रयोग दिन में 2 बार करती हैं. अधिक मेकअप वह पसंद नहीं करतीं. काजल, लिप बाम और परफ्यूम वे अपने पर्स में हमेशा रखती हैं. इस के अलावा गर्मियों में त्वचा को नियमित स्क्रब करना नहीं भूलतीं. रैगुलर स्क्रब और स्पा से अपने तनाव को कम करती हैं.

दीपिका पादुकोण

अभिनेत्री दीपिका की स्किन जन्म से ही काफी अच्छी है, लेकिन पूरा दिन मेकअप लगाने से पहले वे चेहरे पर सनस्क्रीन लगाना नहीं भूलतीं. वे अधिकतर मौइश्चराइजर एसपीएफ वाले प्रयोग करती हैं ताकि त्वचा में नमी की कमी न हो. इस के अलावा वे सन ग्लासेज हमेशा पहनती हैं, जिस से सूर्य की किरणें उन की आंखों के आसपास के टिश्यू को क्षति न पहुंचाएं. रात को सोने से पहले वे अपने मेकअप को फेसवाश से निकाल कर क्रीम या मौइश्चराइजर लगाती हैं. जिस से सुबह उठकर ताजगी महसूस हो. वे कहती हैं कि कई बार घंटो धूप में शूटिंग करनी पड़ती है, जिस के लिए मुझे पहले से ही तैयारी करनी पड़ती है. गर्मी में पानी और लिक्विड डाइट अधिक लेती हूं. यह जरूरी नहीं कि आप कितना खाते हैं, गर्मी में जरूरी है कि आप खाते क्या हैं? हैल्दी और बैलेंस डाइट हमेशा आप की त्वचा को हैल्दी रखती है. बाडी वाश के लिए वे लिक्विड साबुन का प्रयोग करती हैं.

दीपिका बैडमिंटन प्लेयर भी रही हैं, इसलिए डेली एक्सरसाइज का महत्त्व जानती है. उन का कहना है कि सही व्यायाम से ब्लड सर्कुलेशन बढ़ता है और त्वचा में चमक बनी रहती है. मैं रेगुलर जिम न भी जा पाऊं तो साइक्लिंग या वाक कर लेती हूं.

अदा शर्मा

फिल्म ‘कमांडो 2’ में अभिनय करने वाली अभिनेत्री अदा शर्मा गर्मियों में अपनी त्वचा की खूब देखभाल करती हैं. वे कहती हैं कि मुझे गर्मियों में पसीना बहुत आता है इसलिए मैं पानी अधिक पीती हूं. इस मौसम में त्वचा

और बालों की भी देखभाल मुझे अधिक करनी पड़ती है. अपनी स्कैल्प और चेहरा हमेशा साफ रखती हूं. इस के लिए मैं पपीता और आमंड के नैचुरल फेस पैक का अधिक प्रयोग करती हूं. व्हिट ग्रास जूस मैं त्वचा को टैन होने से बचाने के लिए लगाती हूं और स्किन के अधिक टैन होने पर उसे हटाने के लिए एलो वेरा जैल लगा लेती हूं.

मैं पूरे साल ऐंटीबायोटिक साबुन अपनी त्वचा के लिए प्रयोग करती हूं ताकि किसी प्रकार के रैसेज न हों. अधिकतर मैं गर्मी के मौसम में त्वचा को नमी प्रदान करने के लिए लाइट मौइश्चराइजर का प्रयोग करती हूं, लेकिन अगर अधिक गर्मी हो, तो मैं एलो वेरा जैल लगाती हूं. इस मौसम में अधिक मौइश्चराइजर लगाने से त्वचा चिपचिपी हो जाती है, जिस से मुहांसे का डर रहता है. मैं प्योर वैजीटेरियन हूं और मौसमी फल और सब्जियां खाती हूं. गर्मी में अधिकतर तरल पदार्थ सेवन करती हूं. इस में मैं गाजर का जूस अधिक पसंद करती हूं.

कैटरीना कैफ

हालांकि कैटरीना कैफ की स्किन बहुत सौफ्ट है और हार्श गर्मी का मौसम उन्हें परेशान करता है, पर वे गर्मी के मौसम को बहुत ऐंजौय करती हैं. अगर शूटिंग न हो तो इस मौसम में वह सूती कपड़े पहनना पसंद करती है, ताकि त्वचा को आराम मिले. इस मौसम में वे अधिक मेकअप नहीं लगातीं. वे कहती हैं कि लाइट मौइश्चराइजर मैं इस मौसम में अधिक लगाती हूं. सनस्क्रीन लगा कर ही बाहर निकलती हूं. खाना मैं बहुत साधारण लेती हूं. जिस में औयल और मिर्च की मात्रा कम हो, जो अधिकतर उबली हुई सब्जियां ही होती हैं. लेकिन मौसमी फलों के जूस और फ्रैश फल लेती हूं. मुझे आम बहुत पसंद है.

कैटरीना गर्मी में त्वचा को साफ रखना बहुत जरूरी समझती हैं, इसलिए दिन में 2 बार फेस वाश से चेहरा धो कर लाइट मौइश्चराइजर लगाती हैं. रात में शूटिंग से आ कर क्लींजिंग, टोनिंग और मौइश्चराइजिंग अवश्य करती हैं. खूबसूरती को हमेशा कायम रखने के लिए वे मिनरल मड मास्क को अधिक उपयोगी समझती है, क्योंकि इस से त्वचा की गंदगी जल्दी निकल आती है. कैटरीना एक ऐसी ऐक्ट्रैस हैं जो बिना मेकअप के भी सुंदर दिखती हैं. वे गर्मियों में अपने पर्स में हमेशा लिप बाम और मौइश्चराइजिंग सनब्लाक रखती हैं. उन का कहना है कि खूबसूरती अंदर से आती है, जिस में खुश रहना बहुत जरुरी है. नियमित वर्कआउट करने में मुश्किल आने पर मैं मैडिटेशन करती हूं, लेकिन अगर समय मिले तो स्विमिंग, वेट ट्रेनिंग और डांस करती हूं. मेरे हिसाब से सोने से पहले शरीर को हल्का महसूस करना चाहिए, इसलिए खाना मैं सोने से 2 घंटा पहले खाती हूं. साबुन मैं अधिकतर मैडिकेटेड ही प्रयोग करती हूं.

श्रद्धा कपूर

श्रद्धा कपूर इन दिनों शूटिंग को ले कर बहुत व्यस्त हैं, ऐसे में उन्हें अपनी त्वचा का खास ध्यान रखना पड़ता है. वे हंसती हुई कहती हैं कि वैसे तो मेरी चमकती त्वचा का राज मेरे मातापिता हैं, जिन से मुझे ये वरदान में मिली है, लेकिन इस की देखभाल मेरे लिए वाकई चुनौती है. मुझे खोई हुई ग्लो को लाने के लिए स्ट्राबेरी और पीच का सेवन नियमित करना पड़ता है. अधिक समय तक हार्श मौसम में शूटिंग करने से मैं ने पाया कि मेरी त्वचा रूखी और बेजान हो जाती है. इसलिए सही खानपान इस मौसम में जरूरी है, जिस में अधिक तरल पदार्थ, फ्रूट्स और पानी पीती हूं. मैं कुछ लगाने से अधिक अपनी डाइट पर ध्यान देती हूं. मुंबई में गर्मी अधिकतर चिपचिपी होती है, ऐसे में नियमित क्लींजर से चेहरे को साफ रखती हूं और लाइट मौइश्चराइजर से खोई हुई नमी को वापस लाती हूं. गर्मियों में मैं अपने स्कैल्प को नारियल तेल से मसाज करवा कर शैम्पू करती हूं. इस के अलावा सनस्क्रीन लगाना नहीं भूलती.

गर्मियों में श्रद्धा अपनी ब्यूटी किट में लिपबाम, हीट प्रोटैक्शन स्प्रे, मेकअप रिमूवर और काटन स्वाइप्स रखती हैं. मेकअप वे अधिक नहीं पसंद करतीं. इसलिए सिंपल रहती हैं. नहाने के लिए वे शावर जेल का प्रयोग करती हैं. वर्कआउट का समय मिले तो जौगिंग करने और जिम में जाती है.

करीना कपूर

गौर्जियस करीना कपूर की त्वचा रुखी होने की वजह से वे गर्मी में हमेशा अच्छे ब्रांड के मौइश्चराइजर का प्रयोग करती हैं. वे प्राकृतिक ब्यूटी प्रोडक्ट का अधिक इस्तेमाल करती हैं. घरेलू नुस्खे उन्हें अपनाना अधिक पसंद है, जिस में खास कर शहद से त्वचा की मालिश कर थोड़ी देर बाद धो देती हैं. इस से त्वचा काफी मुलायम हो जाती है. होम मेड फेस मास्क लगाती हैं. वे गर्मियों में फेसवाश कर हलके गरम पानी से चेहरे को धोती हैं. वे कहती हैं खूबसूरती अंदर से आती है, जिस के लिए मुझे खुश रहना जरुरी है. मैं कोई तनाव नहीं लेती. शूटिंग खत्म होने के बाद रात को मैं अपना मेकअप उतार कर मौइश्चराइजर लगा लेती हूं.

त्वचा की देखभाल के लिए करीना गर्मियों में सही डाइट लेती हैं. वर्कआउट नियमित करती हैं, जिस में जौगिंग, स्विमिंग और जिम शामिल होता है. बौडी क्लीनिंग के लिए शावर जैल का प्रयोग करती है.                

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