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ऐंटरटेनमैंट : गैजेट्स बनाम परिवार

आज किशोर अपनों से ज्यादा गैजेट्स के इतने अधिक आदी हो गए हैं कि उन्हें उन के बगैर एक पल भी रहना गवारा नहीं, भले ही अपनों से दूर रहना पड़े या फिर उन की नाराजगी झेलनी पड़े. अब तो आलम यह है कि किशोर सुबह उठते ही भले ही मम्मीपापा, दादादादी, बहनभाई से गुडमौर्निंग न कहें पर स्मार्टफोन पर सभी दोस्तों को विशेज का मैसेज भेजे बिना चैन नहीं लेते.

यह व्याकुलता अगर अपनों के लिए हो तो अच्छी लगती है, लेकिन जब यह वर्चुअल दुनिया के प्रति होती है जो स्थायी नहीं तो ऐक्चुएलिटी में सही नहीं होती. इसलिए समय रहते गैजेट्स के सीमित इस्तेमाल को सीख लेना ही समझदारी होगी.

गैजेट्स परिवार की जगह नहीं ले सकते

स्मार्टफोन से नहीं अपनों से संतुष्टि

आज स्मार्टफोन किशोरों पर इतना अधिक हावी हो गया है कि भले ही वे घर से निकलते वक्त लंच रखना भूल जाएं, लेकिन स्मार्टफोन रखना नहीं भूलते, क्योंकि उन्हें उस पर घंटों चैट जो करनी होती है ताकि पलपल की न्यूज मिलती रहे और उन की खबर भी औरों तक पहुंचती रहे. इस के लिए ऐडवांस में ही नैट पैक डलवा लेते हैं ताकि एक घंटे का भी ब्रेक न लगे. भले ही किशोर गैजेट्स से हर समय जुड़े रहते हैं, लेकिन इन से उन्हें संतुष्टि नहीं मिल पाती जबकि अपनों संग अगर हम आराम से आधा घंटा भी बात कर लें, उन की सुनें अपने मन की कहें तो भले ही हम पूरा दिन भी उन से दूर रहें तब भी हम संतुष्ट रहते हैं, क्योंकि उन की कही प्यार भरी बातें हमारे मन में पूरे दिन गूंजती जो रहती हैं.

गैजेट्स भावनाहीन, अपनों से जुड़ीं भावनाएं

चाहे आज अपनों से जुड़ने के लिए ढेरों ऐप्स जैसे वाइबर, स्काइप, व्हाट्सऐप, फेसबुक मौजूद हैं जिन के माध्यम से जब हमारा मन करता है हम दूर बैठे अपने किसी फ्रैंड या रिश्तेदार से बात करते हैं. दुखी होते हैं तो अपना दर्द इमोटिकोन्स के माध्यम से दूसरों तक पहुंचाने की कोशिश करते हैं.

भले ही हम ने अपनी खुशी या दर्द इमोटिकोन्स से शेयर कर लिया, लेकिन इस से देखने वाले के मन में वे भाव पैदा नहीं होते जो हमारे अपने हमारी दर्द भरी आवाज को सुन कर या फिर हमारी आंखों की गहराई में झांक कर महसूस कर पाते हैं. उन्हें सामने देख कर हम में दोगुना उत्साह बढ़ जाता है, जो गैजेट्स से हरगिज संभव नहीं.

इंटरनैट अविश्वसनीय, अपने विश्वसनीय

भले ही हम ने इंटरनैट को गुरु मान लिया है, क्योंकि उस के माध्यम से हमें गूगल पर सारी जानकारी मिल जाती है लेकिन उस पर बिखरी जानकारी इतनी होती है कि उस में से सच और झूठ में फर्क करना मुश्किल हो जाता है, जबकि अपनों से मिली जानकारी भले ही थोड़ी देर से हासिल हो लेकिन विश्वसनीय होती है. इसलिए इंटरनैट के मायाजाल से खुद को दूर रख कर अपने बंद दिमाग के ताले खोलें और कुछ क्रिएटिव सोच कर नया करने की कोशिश करें.

गैजेट से नहीं अपनों से ऐंटरटेनमैंट

अगर आप के किसी अपने का बर्थडे है और आप उस के इस दिन को खास बनाने के लिए अपने फोन से उसे कार्ड, विशेज पहुंचा रहे हैं तो भले ही आप खुद ऐसा कर के संतुष्ट हो जाएं, लेकिन जिसे विशेज भेजी हैं वह इस से कतई संतुष्ट नहीं होगा, जबकि अगर यह बर्थडे वह अपने परिवार संग मनाएगा तो उसे भरपूर मजा आएगा, क्योंकि न सिर्फ गिफ्ट्स मिलेंगे बल्कि ऐंटरटेनमैंट भी होगा व स्पैशल अटैंशन भी मिलेगी.

गैजेट में वन वे जबकि परिवार में टू वे कम्युनिकेशन

जब भी हम फेसबुक या व्हाट्सऐप पर किसी को मैसेज भेजते हैं तो जरूरी नहीं कि उस वक्त रिप्लाई आए ही और अगर आया भी तो थंब सिंबल या स्माइली बना कर भेज दी जबकि आप उस मैसेज पर खुल कर बात करने के मूड में होते हैं. ऐसे में आप सामने वाले को जबरदस्ती बात करने के लिए मजबूर भी नहीं कर पाएंगे. परिवार में हम जब किसी टौपिक पर चर्चा करते हैं तो हमें उस पर गुड फीडबैक मिलती रहती है, जिस से हमें कम्युनिकेट करने में अच्छा लगता है और सामने होने के कारण फेस ऐक्सप्रैशंस से भी रूबरू हो जाते हैं.

गैजेट्स से बेचैनी, अपनों से करीबी का एहसास

गैजेट्स से थोड़ा दूर रहना भी हमें गवारा नहीं होता, हम बेचैन होने लगते हैं और हमारा सारा ध्यान उसी पर ही केंद्रित रहता है तभी तो जैसे ही हमारे हाथ में स्मार्टफोन आता है तो हमारे चेहरे की मायूसी खुशी में बदल जाती है और हम ऐसे रिऐक्ट करते हैं जैसे हमारा अपना कोई हम से बिछुड़ गया हो.

यहां तक कि फोन की बैटरी खत्म होने पर या उस में कोई प्रौब्लम आने पर हम फोन ठीक करवाने का विकल्प होने के बावजूद अपने पेरैंट्स से जिद कर के नया फोन ले लेते हैं. इस से साफ जाहिर है कि हम गैजेट्स से एक पल भी दूर नहीं रहना चाहते, उन से दूरी हम में बेचैनी पैदा करती है.

हैल्थ रिस्क जबकि परिवार संग फिट ही फिट

हरदम गैजेट्स पर व्यस्त रहने से जहां आंखों पर असर पड़ता है वहीं कानों में लीड लगाने से हमारी सुनने की क्षमता प्रभावित होती है. यहां तक कि एक सर्वे से पता चला है कि अधिक समय तक स्मार्टफोन और लैपटौप पर बिजी रहने वाले किशोर तनावग्रस्त भी रहने लगते हैं. जबकि परिवार के साथ यदि हम समय बिताते हैं तो उस से स्ट्रैस फ्री रहने के साथसाथ हमें ज्ञानवर्धक जानकारियां भी मिलती रहती हैं, जो हमारे भविष्य निर्माण में सहायक सिद्ध होती हैं.

भारी खर्च जबकि परिवार संग मुफ्त टौक

आज यदि हमें गैजेट्स के जरिए अपना ऐंटरटेनमैंट करना है तो उस के लिए रिचार्ज करवाना पड़ेगा या फिर नैट पैक डलवाना पड़ेगा, जिस का भार हमारी जेब पर पड़ेगा. जबकि परिवार में बैठ कर अगर हम अंत्याक्षरी खेलें या फिर अपनी बातों से एकदूसरे को गुदगुदाएं तो उस के लिए पैसे नहीं बल्कि अपनों का साथ चाहिए, जिस से हम खुद को काफी रीफ्रैश भी महसूस करेंगे. इसलिए समय रहते पलभर की खुशी देने वाले गैजेट्स से दूरी बना लें वरना ये एडिक्शन आप को कहीं का नहीं छोड़ेगा साथ ही यह भी मान कर चलें कि जो मजा परिवार संग है वह गैजेट्स संग नहीं.

यह लीक MMS उड़ा देगा लाखों लड़कियों के होश, देखें वीडियो

अक्सर यह सुनने को मिलता है कि फलां शोरूम के चेंजिग रूम में कैमरा मिला. जहां लड़कियों का एमएमएस बनाया जाता था. लेकिन क्या आपको पता है कि ऐसे मामले सामने आने के बाद भी रोज कहीं न कहीं ऐसी घटनाएं हो रही हैं. आपको याद होगा कि करीब 2 साल पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने गोवा के एक शोरूम के चेंजिंग रूम में कैमरा पकड़ा था. क्योंकि बात मिनिस्टर की थी इसलिए इस मामले पर काफी बवाल मचा था और देश के लगभग सभी बड़े मॉल, वॉटर पार्कों और कपड़ों की दुकानों के चेजिंग रूम की तलाशी की गई थी.

चेंचिंग रूम में सावधान रहें लड़कियां

इस पूरे मामले के बाद सरकार ने सख्त निर्देश जारी किया था कि चेंजिंग रूम में कैमरा या अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग डिवाइस पकड़े जाने पर मॉल या कपड़ों की दुकानों के मालिकों पर दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत कार्रवाई की जाएगी. लेकिन फिर भी इसका कोई खास असर होता नहीं दिखता. आए दिन चेंजिंग रूम में गुप्त कैमरा मिलने की खबरें सुनने को मिलती हैं. लड़कियों को इसी विषय पर जागरूक करने के लिए यूट्यूब पर एक वीडियो अपलोड किया गया है, जिसे लोग काफी संख्या में पसंद और शेयर कर रहे हैं.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक लड़की शॉप से कपड़े लेकर जब चेंजिंग रूम में जाती है, तो कपड़े चेंज करते समय उसकी नजर वहां लगे गुप्त कैमरे पर पड़ती है. उसके बाद जो कुछ भी होता है वो आप इस वीडियो में देख सकते हैं.

चेंजिंग रूम में ऐसे जानें कहां लगा है गुप्त कैमरा

किसी भी शॉपिंग मॉल, वॉटर पार्क या कपड़े की दुकान के ट्रायलरूम या बाथरूम में जाने से पहले वहां लगे शीशे की जांच करें. गलत नियत से ऐसी जगहों पर लगाए जाने वाले गुप्त कैमरे को पकड़ने के लिए ट्रायलरूम या चेंजिंग रूम की सभी लाइटें बंद कर लें, उसके बाद अगर आपको कोई लाल या हरी लाइट दिखे तो वह गुप्त कैमरा हो सकता है. इसके अलावा, गुप्त कैमरे को हैंगर, बटन, कैप, चश्मे, पेन, हुक, जूते, बेल्ट तथा इलेक्ट्रिक प्लग आदि में भी छिपाया जा सकता है. इसलिए ट्रायलरूम में इनकी बारीकी से जांच करें.

कहा जाता है कि सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है. सावधानी हटी, दुर्घटना घटी. इसलिए अगर आप चेंजिंग रूम में जा रहीं हैं तो सबसे पहले तो आप जहां भी गुप्त कैमरा होने का शक है उस जगह की जांच करें. वायरल हो रहे इस वीडियो को अभी तक 50 लाख से ज्यादा लोगों द्वारा देखा जा चुका है. इस वीडियो के माध्यम से महिलाओं और लड़कियों को जो संदेश देने का प्रयास किया गया है वह उनके लिए हमेशा उपयोगी साबित होगा.

इस बिहारी छोरे का दीवाना है पूरा बॉलीवुड

इस बिहारी छोरे का दीवाना है पूरा बॉलीवुड. इसके बिना सलमान, ऋतिक सभी अधूरे हैं. करीना, कटरीना और आलिया की डांसिंग के दीवाने तो लाखों हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि डांस करने में माहिर ये सभी सितारे किसके जूते पहनते हैं? बिहारवासियों को यह जानकर खुशी और हैरानी होगी कि ये सभी सितारे दरभंगा के जमील शाह द्वारा डिजाईन किये गए और बनाए गए जूते पहनते हैं.

जमील शाह का नाम आजकल किसी भी बॉलीवुड सितारे के लिए अनसुना नहीं है. जमील बॉलीवुड के सभी बड़े सितारों के लिए जूते डिजाईन करते हैं और बनाते हैं. आपको बता दें की जमील डांस को जेहन में रखकर जूते बनाते हैं. देखा जाए तो जमील बॉलीवुड के इकलौते शू डिज़ाइनर हैं जो डांस की बारीकियों को ध्यान में रखकर जूते बनाते और डिजाईन करते हैं.

जूता बनाने से पहले जमील बॉलीवुड स्टार से मिलकर उनसे डांस की पूरी जानकारी लेते हैं. जमील हर गाने और डांस के हिसाब से अलग अलग जूते डिजाईन करते हैं. वैसे तो डांसिंग शूज की दुनिया में आज जमील का बड़ा नाम है लेकिन एक समय ऐसा भी था जब जमील को कई कई दिनों तक भूखा रहना पड़ता था. जमील दरभंगा जिला के दोघरा गांव के रहने वाले हैं. जमील के पिता खेती करते हैं और ट्यूशन पढ़ाते हैं.

बचपन में घर में किसी बात को लेकर अनबन होने के बाद जमील दिल्ली आ गए और उसके बाद वहां से मुंबई चले गए. मुंबई में जूते बनाने के साथ-साथ जमील डांस भी सीखने लगे. एक बार संदीप से डांस सीखने के दौरान जमील को पता चला की इंडिया में डांसिंग शूज नहीं बनाया जाता है और बॉलीवुड के सभी सितारे विदेशों से डांसिंग शूज मंगाते हैं. जमील को डांसिंग शूज की दुनिया में खुद को साबित करने का अवसर दिखा. फिर क्या था संदीप के कहे अनुसार उसने जूते बनाए. लेकिन जूते संदीप को पसंद नहीं आये. 14वीं बार जब उन्होंने डांसिंग शूज बनाया तो संदीप को जूता पसंद आया.

जमील अब शाह शूज के नाम से जूते डिजाईन करते हैं. जमील का कहना है कि कनाडा के वैंकुवर में जो टोएफा अवार्ड समारोह हुआ था उसमे कटरीना और करीना ने इनके बनाए शूज ही पहने थे. 

फोटो ही नहीं ये काम भी कर सकता है कैमरा

कैमरा तस्वीरें लेने के लिए बना है और आप भी अपने स्मार्टफोन के कैमरे से यही काम करते होंगे. लेकिन कभी आपने सोचा है कि इससे और क्या काम किए जा सकते हैं? कुछ ट्रिक्स ऐसे भी हैं जिनकी मदद से आप अपने कैमरे को और भी उपयोगी बना सकते हैं.

1. अपनी भाषा में अनुवाद करें

कैमरे की मदद से आप अनुवाद भी कर सकते हैं. आप विदेशी भाषा के किसी साइन, मेन्यु या टेक्स्ट का अनुवाद अपनी भाषा में कर सकते हैं. यह काम गूगल ट्रांसलेटर की मदद से होगा. इसके लिए आपको अपने स्मार्टफोन पर गूगल ट्रांसलेटर ऐप डाउनलोड करना होगा. ऐप को खोलकर फ्रंटपेज पर बने कैमरा आइकॉन पर टैप करें. कैमरा खुलने पर उसे उस सिंबल, मेन्यु या टेक्स्ट वगैरह की तरफ करें, जिसे अनुवाद करना है. गूगल तुरंत यह काम कर देगा.

इसमें आप सभी भाषाओं का तो अनुवाद नहीं कर पाएंगे, मगर बहुत सी भाषाओं को यह ऐप सपॉर्ट करता है. आप पहले से ली हुई तस्वीरों में मौजूद टेक्स्ट को भी अनुवाद कर सकते हैं. इसी तरह के कुछ और ऐप हैं, जो गूगल ट्रांसलेटर जैसा ही काम करते हैं. ये हैं- TextGrabber + Translator (Android, iOS) और WayGo (Android, iOS).

2. डॉक्युमेंट्स स्कैनिंग

आप अपने फोन को ऐसे स्कैनर के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे आप डॉक्युमेंट्स को स्कैन कर सकते हैं. यही नहीं, आप डॉक्युमेंट्स में मौजूद टेक्स्ट को एडिट किए जा सकने वाले टेक्स्ट में भी बदल सकते हैं.

गूगल ड्राइव के एंड्रॉयड ऐप में भी स्कैनिंग फंक्शनैलिटी है और आपको अलग से कोई ऐप डाउनलोड करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. iOS यूजर स्कैनिंग के लिए Evernote's Scannable को इस्तेमाल कर सकते हैं. इनके अलावा CamScanner (Android, iOS) और Scanbot (iOS) को भी ट्राई किया जा सकता है.

3. तारे देखना

आप अपने फोन को ऑगमेंटेड या मिक्स्ड रिऐलिटी ऐप्स के साथ और मजेदार बन सकते हैं. SkyView (Android, iOS) जैसा कोई ऐप इंस्टॉल कीजिए और अपने कैमरे को आसमान की तरफ कीजिए. इससे आप तारों को पहचान सकते हैं और टेलिस्कोप के बिना उन्हें देखने का आनंद उठा सकते हैं. आप इसी तरह के ऐप्स Wikitude (Android, iOS) और Blippar (Android, iOS) को भी ट्राई कर सकते हैं.

4. बारकोड स्कैनिंग

आप अपने स्मार्टफोन के कैमरे की मदद से बारकोड और QR कोड्स को स्कैन कर सकते हैं. किसी प्रॉडक्ट के बारे में जानकारी चाहिए तो उसके बारकोड को स्कैन किया जा सकता है. बहुत सारे ऐप्स मौजूद हैं, जो तुरंत बारकोड को स्कैन करके उनमें लिखी जानकारी को टेक्स्ट में बदल देते हैं. इसके लिए बारकोड स्कैनर और क्यूआर कोड स्कैनर जैसे ऐप्स इस्तेमाल किए जा सकते हैं.

5. सिक्यॉरिटी कैमरा

आप अपने पुराने स्मार्टफोन को सिक्यॉरिटी कैमरे में तब्दील कर सकते हैं. इसके लिए आपको कोई Security camera app डाउनलोड करना होगा. उसकी मदद से आप अपने पुराने फोन को वाई-फाई से जोड़कर उसे कहीं पर रख दें. दूसरे स्मार्टफोन या कंप्यूटर पर आप उस फोन के कैमरे से दिख रही लाइव फीड देख सकतें हैं या रिकॉर्ड कर पाएंगे.

6. ​विजुअल सर्च

गूगल गूगल्स (Google Goggles) जैसे कई सारे ऐप्स आपको तस्वीरों को ढूंढने में मदद करते हैं. अगर आपने किसी प्रॉडक्ट की तस्वीर ली हैं तो वह उसे सर्च करके बताएगा कि वह किस चीज की तस्वीर है. साथ ही उस तस्वीर में कोई टेक्स्ट होगा, उसे भी वह हाइलाइट कर देगा. आप पहले से खींची गईं या कहीं और से मिली तस्वीरों को भी सर्च कर सकते हैं.

7. जगहों को चिह्नित करें

बहुत सारे ऐप्स हैं, जिनसे आप अपने आस-पास की लोकेशंस को पिनपॉइंट कर सकते हैं. कैमरे में आपको जो जगहें दिख रही होंगी, उनके बारे में जानकारी मिल जाएगी. Yelp ऐप का Monocole फीचर इसी तरह का काम करता है.

म्युचुअल फंड में निवेश से पहले…

म्युचुअल फंड के निवेश से जुड़े कई तरह के मिथ होते हैं. अगर आप म्युचुअल फंड में निवेश करने जा रहे हैं तो आपका इन बातों को जानना जरूरी है…

म्युचुअल फंड में रिस्क है : म्युचुअल फंड निवेश का एक जरिया है. इनके जरिए इक्विटी, डेट कमोडिटी में निवेश किया जा सकता है. बड़े तौर पर म्युचुअल फंड आपकी एसेट की रिस्क घटाते हैं. 1 शेयर के बदले अलग अलग शेयरों का गुच्छा कम रिस्की है. भारत में 70 फीसदी पैसा /uex लगाया जाता है. इसमें इतना उतार-चढ़ाव नहीं है.

क्या सभी म्युचुअल फंड शेयर बाजार में निवेश करते हैं : नहीं. हम आपको बताना चाहते हैं कि ऐसा आवश्यक नहीं है. इनके जरिए इक्विटी, डेट कमोडिटी में निवेश किया जाता है. इक्विटी (निष्पक्ष) स्कीम में निवेश करने से टैक्स में फायदा मिलेगा : ये बातें आधी सही और आधी पूरी तरह गलत होती हैं. अगर आप सिर्फ इक्विटी लिंक्ड स्कीम यानि ‘इएलएसएस’ में निवेश करते हैं तो ही आपको टैक्स में छूट (सेक्शन 80 सी के तहत) मिलेगी.

म्युचुअल फंड में निवेश के लिए एकमुश्त या लम्पसम 1 लाख रुपए की जरूरत होती है : ये बात बिल्कुल गलत है. ऐसा नहीं है. आप अधिकतर म्युचुअल फंड कंपनियों में कम से कम 500 रुपए से निवेश की शुरूआत कर सकते हैं. आईसीआईसीआई पू्रडेंशियल और एचडीएफसी म्युचुअल आदि निजी फंड्स में कुछ ऐसी स्कीम्स हैं जिसमें निवेश की रकम अपने आप बढ़ जाती है. इसके जरिए आप मोटा पैसा इकठ्ठा कर सकते हैं.

अगर एक बार एसआईपी करें और एक महीने पैसे नहीं जमा करवा सकें : अगर किसी कारणवश आप एक माह पैसा नहीं जमा कर सके तो कुछ भी नहीं होगा. आप हर महीने फंड मैनेजर को पैसे दे रहे हैं और एक महीने नहीं दिए तो कुछ नहीं होगा. हम आपको बता देना चाहते हैं कि ये किसी ईएमआई चेक बाउंस होने जैसा नहीं है, अगर आपका एसआईपी का चेक बाउंस होता है तो आपको बैंक चार्ज देना होगा. इससे ज्यादा और कुछ नहीं.

म्युचुअल फंड में निवेश लंबे समय के लिए ही करना चाहिए : म्युचुअल फंड्स कई तरह के होते हैं. कुछ लिक्विड फंड भी इसमें आप ज्यादा रकम थोड़े समय के लिए निवेश कर सकते हैं. दूसरी तरफ इक्विटी फंड में लंबे समय तक थोड़ा थोड़ा निवेश कर सकते हैं. परन्तु यह आवश्यक नहीं है कि निवेश केवल लंबे समय के लिए ही करना चाहिए.

क्या आप ये बात जानते हैं कि म्युचुअल फंड सलाहकार को निवेश किए गए पैसे में कुछ प्रतिशत कमीशन मिलता है. कई बार, कई सलाहकारों को इससे मतलब नहीं होता कि आप कौन से फंड में निवेश कर रहे हैं. ये एक मिथ है कि कम एनएवी वाले प्रोडक्ट सस्ते होते हैं. लेकिन वो सस्ते नहीं होते और आपको एनएवी की चिंता नहीं करनी चाहिए.

बाबा साहब पर मेहरबान योगी सरकार

दलित महापुरुष बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर के जन्म दिन पर 14 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में सरकार अवकाश तो पहले रहता था. योगी सरकार ने इसमें नया बदलाव किया है. जिसमें कहा गया है कि 14 अप्रैल को पहले की तरह छुट्टी रहेगी पर 13 अप्रैल को प्रदेश में सभी स्कूलों में बाबा साहब के आचार, विचार और व्यक्तित्व को लेकर अलग अलग आयोजन होंगे. इसके जरीये अंबेडकर जंयती मनाने का काम किया जाये. अपर शिक्षा निदेशक नीना श्रीवास्तव के पत्र के द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि स्कूलों में प्रार्थना के बाद लंच से पहले 1 घंटे का कार्यक्रम किया जाये. इसमें बाबा साहब की मूर्ति या फोटो के समक्ष उनके जीवन के कार्यों, विचारधारा, प्रेरक प्रसंगों आदि पर चर्चा की जाये.

इस मौके पर केवल स्कूल के छात्र ही नहीं शिक्षक, ग्राम प्रधान, एमएमसी सदस्य, बच्चों के माता पिता को भी बुलाया जाये. इसमें हिस्सा लेने वालों की पूरी जानकारी नाम और नम्बर के सहित संकलित कर शिक्षा विभाग के छोटे बड़े अफसरों तक पहुचाई जाये. यही नहीं इस कार्यक्रम में जो छात्र या बाकी सदस्य 13 अप्रैल को शामिल नहीं हुये उनको 14 अप्रैल के अवकाश के बाद 15 अप्रैल को 45 मिनट के लिये एकत्र कर बाबा साहब की जानकारी दी जाये. इसका भी पूरा रिकार्ड पूरी तरह से तैयार करके विभाग को भेजा जाये.

असल में भाजपा को अंबेडकर और दलित विरोधी ऊंची जातियों की पार्टी माना जाता रहा है. ऐसे में सरकार अपनी इस छवि को साफ करना चाहती है. ऐसे में एक दिन की जगह पर लगातार 3 दिन तक वह अंबेडकर साहब की चर्चा करना चाहती है. बाबा साहब अंबेडकर के नाम पर दल एक वोट बैंक तैयार करने की फिराक में रहते हैं. बहुजन समाज पार्टी ने बाबा साहब के नाम पर मूर्ति और पार्क बनवाये. समाजवादी और कांग्रेसी सरकारें भी इस परिपाटी पर चलती रही हैं. अब भाजपा भी दलित वोट बैंक पर कब्जा मजबूत करने के लिये बाबा साहब का सहारा ले रही है.

2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को दलितों का समर्थन बडी संख्या में मिला. उसका कारण धार्मिक ध्रुवीकरण था. अब भाजपा इसको बनाये रखने के प्रयास में बाबा साहब को आगे करना चाहती है. भाजपा इस क्रम में बाबा साहब के उन विचारों को आगे चर्चा में बढ़ाना चाहती है जो उसके लिये सहयोगी हों. भाजपा बाबा साहब के उन विचारों को सामने नहीं लाना चाहती जो उन्होंने हिन्दू धर्म की आलोचना में कहे थे. असल में बाबा साहब ने हिन्दू धर्म की संकीर्णता के विरोध में ही बौद्व धर्म को अपनाया था.

भाजपा की विचारधारा के समर्थक कभी भी बाबा साहब के विचारों के समर्थक नहीं रहे. यह जरूर रहा कि बाबा साहब के विचारों को अपने हिसाब से लेकर उसको अपने पक्ष में करने का काम किया गया. अब योगी सरकार बाबा साहब के जन्म दिन को 3 दिन तक मनाकर नई शुरुआत करने जा रही है. भाजपा के प्रबल समर्थक किस तरह से इस बदलाव को स्वीकार करेंगे और बाबा साहब के समर्थकों के साथ कैसे सामंजस्य बैठा पायेंगे, यह देखने वाली बात होगी.         

‘कारपोरेट रंग’ में योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश के भगवाधारी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पहनावे, रहनसहन और विचारों से भले ही आधुनिक संस्कृति का विरोध करते नजर आते हों, पर सरकार की कार्यशैली को वह ‘कारपोरेट रंग’ में रंग देना चाहते हैं. मुख्यमंत्री खुद भले ही भगवाधारी हों, पर अपने कर्मचारियों को वह ड्रेस कोड में देखना चाहते हैं. जींस और टीशर्ट के साथ सैंडल पहनने से मनाही कर दी गई है. धूम्रपान मना है. समय से आफिस आना जाना है. सरकार इस प्रयास में है कि कर्मचारियों की उपस्थित को बायोमैट्रिक किया जाये. देखने में यह बदलाव जितना सुखद है हकीकत में यह बदलाव इतना सरल नहीं है.

मंत्रियों, विधायकों, छोटे बड़े अफसरों की पूरी जानकारी योगी साफ्टवेयर पर रखना चाहते हैं, जिससे एक क्लिक से वह किसी के बारे में भी पूरी जानकारी हासिल कर सकें. सरकारी विभागों को यह कह दिया गया है कि वह अपने कामकाज और आने वाली योजनाओं को पावर प्वांइट में बनाकर मीटिंग में पेश करे. इसकी एक कापी मुख्यमंत्री कार्यालय के पास होगी. विभागों की समीक्षा भी पावर प्वाइंट प्रजेंटेंशन के जरीये होगी. सभी फाइलों को डिजीटल फार्म में रखने का काम शुरू करके सरकारी आफिस को फाइल मुक्त करने की पूरी तैयारी है.

कामचोरी, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी में लिप्त सरकारी नौकरशाही और नेता कैसे सुधरेंगे, यह देखने वाली बात है. योगी सरकार उत्तर प्रदेश में कारपोरेट कार्यशैली लाना चाहती है पर उसके पास कोई ठोस सांचा नहीं बन पा रहा है. सुबह मीटिंग और देर रात तक प्रेजेंटेशन चलने के मैराथन प्रसास के बाद भी 20 दिनों में सरकार के कामकाज कोई ठोस शक्ल उभर कर नहीं आ पाई है. सरकार अपने प्रयासों से उपरी चमकदमक तो दिखाने में सफल हो रही है पर सही मायनों में कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है.

योगी की सबसे बड़ी चुनौती अब उनके पुरातनवादी विचार हैं जिसको वह अब तक ढोते रहे हैं. अपने भाषणों में वह एक मुख्यमंत्री से ज्यादा धार्मिक गुरू सा प्रवचन देते नजर आ रहे हैं. जिसमें यह बारबार वह ईश्वर की महिमा के जरीये समस्याओं के समाधान की बात करते दिखते हैं. असल में अगर सबकुछ भगवान के भरोसे ही होना है तो इस पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन का क्या अर्थ रह जाता है. पहले के प्रधानमंत्री राजीव गांधी जब कम्प्यूटर को भारत में लाये तो भाजपा और उसके जैसे पुरातनवादी विचारधारा के लोग इसके प्रबल विरोधी थे. कम्प्यूटर को बेरोजगारी का सबसे बडा माध्यम बताया गया था.

आज पुरातनवादी विचारधारा के समर्थन करने वाले ही नहीं तमाम साधू, संत, बाबा तक कंम्यूटर के दीवाने हो गये. योगी आदित्यनाथ जब मुख्यमंत्री बने तो उनके विषय में यह जानकारियां आने लगी कि वह कम्प्यूटर ही नहीं सोशल मीडिया के सबसे बडे समर्थक हैं. अपने ईमेल के जवाब खुद देते हैं. गोरखपुर के मंदिर में अपने निवास में योगी आदित्यनाथ खुद का बड़ा मीडिया सेंटर मैनेज करते हैं. जिसके जरीये वह अपने लेख, संदेश लोगों तक पहुंचाते हैं.

एक तरफ मुख्यमंत्री आधुनिक संचार शैली के दीवाने हैं, दूसरी तरफ वह मुख्यमंत्री आवास में तब तक रहने नहीं गये जब तक उसका शुद्वीकरण नहीं हो गया. तमाम आफिसों में पूजापाठ कराया गया. यह सब कराने का कारण यह था कि सरकार के आचार और विचार बदल जायें. अगर इस तरह से ही सरकार के आचार और विचार बदलने हैं तो आधुनिक कंप्यूटर प्रणाली, पावर प्रजेंटेंशन की क्या जरूरत है? असल में योगी सरकार ने प्रदेश में जिन अपेक्षाओं को जगा दिया है उनको पूरा करना उसके बस से बाहर है. ऐसे में योगी सरकार हर दिशा में हाथ पांव मार रही है. जिससे जनता में इस उम्मीद को कायम रखा जा सके कि सरकार उसके लिये काम कर रही है. इसका जमीन पर कोई प्रभाव दिखेगा यह मुश्किल दिख रहा है.    

अब तक नहीं टूटा है आईपीएल का ये रिकॉर्ड

आईपीएल के अब तक हुए 9 सीजन हो चुके हैं. दसवां सीजन चल रहा है. इन 9 सीजन में कई रिकॉर्ड्स बने और टूटे हैं लेकिन वहीं कुछ ऐसे भी रिकॉर्ड हैं जो आईपीएल की शुरूआत से अब तक कायम हैं और कोई भी उन्हें तोड़ नहीं पाया है. आइए नजर डालते है ऐसे ही कुछ खास रिकॉर्ड्स पर..

एक आईपीएल मैच में सबसे कम रन

आईपीएल 2008 में एक मैच में सबसे कम रन बनाने का रिकॉर्ड बना था. मुंबई इंडियंस और कोलकाता नाइट राइडर्स के बीच हुए इस मुकाबले में दोनों पारियों को मिलाकर कुल 135 रन बने थे जो कि आईपीएल इतिहास का एक रिकॉर्ड है.

16 मई 2008 को हुए इस मैच में मुंबई ने टॉस जीतकर केकेआर को बल्लेबाजी का न्यौता दिया था. जिसके बाद कोलकाता की टीम केवल 67 रन पर ही ऑल आउट हो गई थी. मुंबई इंडियंस ने केवल 33 गेंदों नें 2 विकेट देकर जीत का लक्ष्य हासिल कर लिया था.

एक पारी में सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन

पाकिस्तान के बाएं हाथ के तेज गेंदबाज सोहेल तनवीर ने साल 2008 में राजस्थान रॉयल्स को आईपीएल चैंपियन बनाने में अहम किरदार निभाया था. तनवीर आईपीएल के पहले सीजन के पर्पल कैप भी जीते थे.

आईपीएल के ओपनिंग सीजन में चेन्नई सुपरकिंग्स के खिलाफ हुए एक मुकाबले में तनवीर ने बेहतरीन गेंदबाजी करते हुए 14 रन देकर 6 विकेट लिए थे. जो कि आईपीएल का सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन है.

आईपीएल 2016 में ऑस्ट्रेलिया के युवा गेंदबाज एडम जम्पा ने इस रिकॉर्ड की बराबरी करने के करीब आए लेकिन वह ये रिकॉर्ड तोड़ नहीं पाए. उन्होंने 6 विकेटों के लिए 19 रन दे दिए.

भारतीय टीम के दिग्गज स्पिनर अनिल कुंबले आरसीबी की तरफ से राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 2009 आईपीएल में इस रिकॉर्ड काफी करीब आये थे जब उन्होंने 5 रन देकर 5 विकेट लिए थे.

एक पारी में सबसे ज्यादा एक्स्ट्रा रन

आईपीएल 2008 में डेक्कन चार्जर्स ने एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया था जिसे कोई भी टीम नहीं तोड़ना चाहेगी. कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ हुए इस मुकाबले में डेक्कन के गेंदबाजों ने 28 एक्स्ट्रा रन दिए थे जो कि एक रिकॉर्ड है.

एडम गिलक्रिस्ट की कप्तानी वाली डेक्कन की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 110 रन बनाए थे. आसान लक्ष्य के जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी कोलकाता की टीम का सारा काम डेक्कन के गेंदबाजों ने आसान कर दिया. डेक्कन के गेंदबाजों ने 28 एक्स्ट्रा रन दिए थे जिसमें 15 वाइड गेंद शामिल थी.

सबसे ज्यादा कैच लेने का रिकॉर्ड

कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ हुए मैच में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने एक पारी में किसी फिल्डर द्वारा सबसे ज्यादा कैच पकड़ने का रिकॉर्ड बनाया था. सचिन ने इस मुकाबले में रिद्धिमान साहा, अजित अगरकर, सलमान बट और शोए्ब अख्तर का कैच लपका था.

सचिन के अलावा साउथ अफ्रीका के पूर्व हरफनमौला खिलाड़ी जैक कैलिस और डेविड वॉर्नर भी यह कमाल कर चुके हैं लेकिन कोई भी यह रिकॉर्ड तोड़ नही पाया है.

अब देखना यह होगा की आईपीएल के इस सीजन में ये रिकॉर्ड्स टूट पाते हैं या नहीं.

गलती से डिलीट हुए कॉन्टैक्ट्स करें रिकवर

सभी के साथ एक न एक बार ऐसा होता है कि फोन से सारे कॉन्टेक्ट्स गलती से या अपने आप किसी भूलवश डिलीट हो जाते हैं. क्या आपके स्मार्टफोन से भी से कभी सारे कॉन्टैक्ट्स गायब हुए हैं या गलती से डिलीट.

ये बात तो आपको बताने वाली नहीं है कि आज के समय में आपके फोन में सबसे ज्यादा अहम आपके कॉन्टैक्ट्स ही हैं. आज की जीवनशैली पर गौर करें तो, बिना कॉन्टैक्ट के तो आप शायद आपके पूरे दिन के कई कामों को अंजाम ही नहीं दे पाएंगे.

ऐसे में हम आपके लिए लाए हैं, कुछ ऐसे 5 आसान से तरीके जिनकी मदद से आप, अपने फोन के डिलीटेड कॉन्टैक्ट्स को आसानी से रिकवर कर पाएंगे. आइए हम आपको इन स्टेप्स के बारे में बताते हैं..

1. सबसे पहले तो आपको अपने कम्प्यूटर या लैपटॉप में एंड्रॉयड डेटा रिकवरी सॉफ्टवेयर डाउनलोड और इंस्टॉल करना होगा.

2. ये सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करने के बाद, आप यूएसबी केबल के माध्यम से अपने स्मार्टफोन को पीसी से कनेक्ट करें. यहां ध्यान रखिए कि इस दौरान आपका फोन कम से कम 50 फीसदी तक चार्ज हो.

3. अब आपको अपने फोन में यूएसबी डिवगिंग (USB Debugging) ऑप्शन को ऑन करना होगा. इसके लिए सेटिंग्स में जाएं, फिर फोन के डेवलपर ऑप्शन्स पर क्लिक करें उसके बाद यूएसबी डिवगिंग पर टैप करें.

Settings > Developer Options > USB Debugging

नोट : ध्यान रखें कि सभी के फोन की सेटिंग्स अलग-अलग होती हैं तो यूएसबी डिवगिंग ऑन करने के तरीके भी अलग-अलग हो सकते हैं.

4. इसके बाद आपको पीसी में डिलीट हुई फाइल्स दिखाई देंगी जिसमें कॉन्टैक्ट, फोटोज, वीडियोज शामिल हो सकते हैं. इसके बाद आपको स्केन डिलीटेड फाइल्स या ऑल फाइल्स (Scan Deleted files or all files)  जैसे दो ऑप्शन्स दिखाई देंगे. इनमें से आपको स्केन डिलीटेड फाइल्स पर क्लिक करना होगा.

5. यहां स्कैनिंग पूरी होने के बाद आप देख पाएंगे की आपके सभी डिलीटेड कॉन्टैक्ट्स पीसी के स्क्रीन पर हैं. अब आप जिस फाइल को भी सेव करना चाहते हैं, उन्हें वापस सेलेक्ट कर सकते हैं.

अंगूरी भाबी “शुभांगी अत्रे” के जन्मदिन पर खास

शुभांगी आत्रे पूरे, आजकल सीरियल ‘भाबी जी घर पर हैं’ में अंगूरी भाभी का किरदार निभाने से काफी चर्चा में रहती हैं. आज अंगूरी भाभी का जन्मदिन है, तो आज आइए आपको बताते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें…

शुभांगी आत्रे ने टीवी पर अपना करियर 2006 में चर्चित सीरियल कसौटी जिंदगी में प्रेम बजाज यानी रोनित रॉय की बेटी पलछिन प्रेम बजाज के रोल से शुरू किया था.

इसके बाद शुभांगी को धारावाहिक “कस्तूरी” में लीड रोल मिला और खूब लोकप्रियता भी. बल्कि यही उनका आजतक का सबसे चर्चित किरदार रहा है.

‘कस्तूरी’ में शुभांगी की जोड़ी अपने को-ऐक्टर करण पटेल, जो आजकल “ये हैं मोहब्ब्तें” में रमन का रोल कर रहे हैं, से पर्दे पर तो बहुत हिट हुई लेकिन पर्दे के पीछे दोनों के बीच बहुत झगड़े हुए हैं. दोनों ही असल जिंदगी में एक दूसरे से नफरत करते थे. शुभांगी ने एक इंटरव्यू में ये भी कहा था ''मैं करण को अपने सामने बर्दाश्त भी नहीं कर पाती हूं पर क्या करूं मजबूर हूं. मैंने खुद को इसके लिए इंडस्ट्री में आने से पहले ही तैयार कर लिया था. मुझे पता था मुझे ऐसे कुछ लोगों से मिलना पड़ेगा जो मुझे पसंद नहीं होंगे और फिर भी प्रोफेशनल रवैया अपनाना पड़ेगा.''

धारावाहिक ‘कस्तूरी’ के बाद शुभांगी को सीरियल “दो हंसों का जोड़ा” में मुख्य भूमिका मिली. इसमें उनके हीरो शालीन भनोट थे.

शुभांगी ने सीरियल “हवन” में तृष्णा का नकारात्मक किरादर भी निभाया है. वे काफी अलग और अपनी उम्र से बड़ी भी लग रही थीं.

एक साल के अंतराल के बाद वे सीरियल “चिड़ियाघर” में कोयल के किरदार में लौंटीं. ऐसा पहली बार नहीं है कि शुभांगी ने शिल्पा शिंदे की जगह ली हो. चिड़ियाघर में भी कोयल का किरदार पहले शिल्पा निभाती थीं, फिर शुभांगी और अब अंगूरी भाभी के किरदार के साथ भी ऐसा ही हो रहा है.

अंगूरी भाभी के रोल के लिए एक महीने तक 80 लड़कियों का ऑडीशन हुआ. इसमें शीतल मंडल का भी नाम आ रहा था लेकिन आखिरकार ये बाजी शुभांगी ने जीती.

चिड़ियाघर भी छोड़ने के बाद शुभांगी ने सीरियल “गुलमोहर ग्रैंड” में मिसेज कार्तिक का छोटा सा रोल किया.

हाल ही में वे सीरियल “अधूरी कहानी हमारी” में देवसेना के किरदार में दिखी थीं.

35 साल की शुभांगी इंदौर, मध्य प्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने एमबीए की पढ़ाई भी वहीं से की है. उनकी शादी पीयूष पूरे से हुई है. शुभांगी की एक आशी नाम की बेटी भी है. अब कुछ ही दिनों में शुभांगी नई अंगूरी भाबी बन कर आने वाली हैं.

शुभांगी को 2016 में इंडियन टेलीविजन एकेडमी की तरफ से धारावाहिक “भाबी जी घर पर हैं” के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला अभिनेत्री का खिताब भी मिला है.

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