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वायरल सुंदरता

हर युग में इंसान में सुंदरता को ले कर एक इच्छा मौजूद रही है. वैसे यह सुंदरता किसी भी तरह की हो सकती है, जैसे प्रकृति की सुंदरता. किसी वैज्ञानिक के लिए उस की कोई खोज सुंदर हो सकती है पर सब से ज्यादा चर्चा उस सुंदरता की होती है जिस में किसी का चेहरा लोगों को आकर्षित करता है. इस सुंदरता का इतना ज्यादा महत्त्व है कि इस के बारे में प्राचीन दार्शनिक अरस्तू ने एक बार कहा था, ‘सुंदरता दिलों में धड़कन पैदा कर देती है, दिलोदिमाग पर छा जाती है और भावनाओं के जंगल में जैसे आग ही लगा देती है.’

इधर कुछ समय से कुछ चेहरों की सुंदरता के ज्यादा चर्चे इंटरनैट पर हो रहे हैं. थोड़ेथोड़े अंतराल पर दुनिया के किसी कोने से किसी सुंदर लड़की या लड़के की तसवीरें इंटरनैट पर वायरल हो जाती हैं. लोगों में उन्हें देखने की दीवानगी का आलम यह होता है कि वे इस के लिए कुछ भी कर गुजरते हैं. कभी इस के लिए मारपीट की नौबत आ जाती है, तो कभी उस सुंदर व्यक्ति की ओर से मिले आमंत्रण में शामिल होने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है. पिछले कुछ समय में मैक्सिको से ले कर नेपाल, चीन तक से ऐसे युवकयुवतियों के चेहरे इंटरनैट पर छाए रहे जिन्हें पहले तो कोई नहीं जानता था, लेकिन जब किसी ने उन की तसवीरें या वीडियो इंटरनैट पर डाले तो वे रातोंरात पूरी दुनिया में छा गए. ऐसा ही एक सनसनीखेज किस्सा मैक्सिको की 15 साल की किशोरी रूबी इबार्रा गार्सिया का है.

रूबी की बर्थडे पार्टी

दिसंबर, 2016 में उत्तरी मैक्सिको के सैन लुईस पोटोसी में रहने वाली रूबी के पिता ने रूबी का एक वीडियो बना कर फेसबुक पर अपलोड किया और उसे देखने वाले हर शख्स से उस की बर्थडे पार्टी में शामिल होने का आमंत्रण दे डाला. इस वीडियो के साथ दी गई सूचना में बताया गया कि रूबी की बर्थडे पार्टी पर खानापीना होगा, एक घुड़दौड़ प्रतियोगिता का आयोजन होगा और स्थानीय बैंड इस मौके पर अपना प्रदर्शन करेगा.

फेसबुक पर पोस्ट किया गया यह वीडियो यूट्यूब पर पहुंच गया और देखते ही देखते इस पर संगीत के कई सितारों ने टिप्पणी की, इस पर जोक बनाए गए और कई कंपनियों ने रूबी के बर्थडे से जुड़े आयोजनों की स्पौंसरशिप तक का प्रस्ताव कर डाला. घुड़दौड़ जीतने वाले को 500 डौलर इनाम देने की घोषणा भी की गई. सब से उल्लेखनीय मैक्सिकन एयरलाइंस इंटरजैट का प्रस्ताव रहा, जिस ने इस मौके पर सैन लुईस पोटोसी पहुंचने वालों को किराए में 30त्न छूट देने का ऐलान किया.

एक अनजान किशोरी रूबी की बर्थडे पार्टी का आमंत्रण इंटरनैट पर वायरल हो जाना और उस में लाखों लोगों की भीड़ जुटना आश्चर्यजनक तो है, लेकिन इस की एक वजह थी रूबी की सुंदरता. सुंदर चेहरेमुहरे वाली रूबी का फोटो और वीडियो जिस किसी ने देखा, वह उस की सुंदरता का कायल हो गया और उस की बर्थडे पार्टी में शामिल होने को उतावला हो उठा.

इंटरनैट पर सुंदर लोगों के फोटो के वायरल होने का यह अकेला किस्सा नहीं है. हाल में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं, जब बिलकुल अनजान लोग अपने चेहरे और देहयष्टि की वजह से दुनिया में अचानक चर्चा में आ गए.

पाकिस्तान का चाय वाला

एक चाय वाला जिस का नाम है अरशद खान, पिछले कुछ समय से हर किसी की जबान पर है. नीली आंखों वाले पाकिस्तान के चाय वाले अरशद खान की कुछ तसवीरें एक पत्रकार ने इंटरनैट पर क्या डालीं, वह रातोंरात मशहूर हो गया. इंटरनैट पर मिली शोहरत का नतीजा यह निकला कि अरशद को एक वैबसाइट रीटेल साइट फिटइन डौट पीके ने मौडलिंग के लिए अनुबंधित कर लिया. उसे टीवी शोज में भी बुलाया जाने लगा.

इंटरनैट पर अरशद का फोटो वायरल होने के बाद लड़कियां उसे सुपरमौडल बता रही थीं और फैशन एजेंसियों से उसे हायर करने की सलाह दे रही थीं.

सिक्योरिटी अफसर ली मिनवेइ

अरशद खान की तरह अपनी स्मार्टनैस की वजह से सिंगापुर एयरपोर्ट पर तैनात सिक्योरिटी अफसर ली मिनवेइ भी इंटरनैट का सितारा बना. लोग ली मिनवेइ की ड्यूटी का समय पूछने लगे ताकि उसे देखा जा सके. इस हौट और हैंडसम सिक्योरिटी अफसर का एक फोटो उस की कंपनी सर्टिस सिस्को ने अक्तूबर, 2016 को ट्विटर पर शेयर किया था. वैसे तो ली मिनवेइ सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट पर अपने गुड लुक्स की वजह से पहले से चर्चा में था, लेकिन सोशल मीडिया पर उस की तसवीर आने के बाद तो लोग उस के साथ फोटो खिंचवाने को बेताब दिखने लगे. इंटरनैट पर वायरल होने के बाद ली मिनवेइ ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा कि लोग मुझ से मिलने और मेरे साथ फोटो खिंचवाने के लिए एयरपोर्ट तक चले आते हैं. मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि इंटरनैट ऐसा कमाल कर सकता है.

नेपाल की तरकारी वाली

जैसी चर्चा पाकिस्तान के चाय  वाले की इंटरनैट पर हुई, कुछ वैसा ही नजारा नेपाल में सब्जी बेचने वाली एक लड़की को ले कर देखने को मिला. यह लड़की नेपाल के एक स्थानीय बाजार में जाने के लिए पुल से गुजर रही थी तो उस की कुछ तसवीरें ली गईं. इसी तरह बाजार में सब्जी का ठेला लगाए वह खड़ी दिखाई दी. उस की ये तसवीरें जब ट्विटर पर डाली गईं, तो लाइक करने वालों का तांता लग गया. नेपाल के गोरखा जिले के भूमली चौक में दिखी कुसुम श्रेष्ठा नामक यह लड़की वैसे तो चितवन जिले के रतननगर में मैनेजमैंट की स्टूडैंट है पर त्योहारी छुट्टियों में जब वह सब्जी विक्रेता अपने पिता के घर पहुंची, तो उस ने पिता के कामकाज में हाथ बंटाया. उसी दौरान एक फोटोग्राफर रूपचंद्र महाराज ने उस की ये तसवीरें खींची और उन्हें इंटरनैट पर पोस्ट कर दिया. इन तसवीरों में से एक में वह गोरखा और चितवन के बीच बने फिशलिंग सस्पैंशन ब्रिज पर नजर आ रही है जबकि दूसरी में वह स्थानीय सब्जी मंडी में मौजूद है.

इन तसवीरों के वायरल होने के बाद कुसुम को मौडलिंग के कई औफर मिले और उस ने कुछ हौट फोटोशूट भी कराए. ट्विटर पर हैशटैग प्तञ्जड्डह्म्द्मड्डह्म्द्ब2ड्ड-द्ब के साथ लोगों ने कुसुम के फोटो शेयर किए और उस की खूबसूरती की तारीफ की.

चीन की मिर्ची

बात जब चाय और सब्जी की चली है, तो यह बताना रोचक होगा कि नेपाल की तरकारी वाली की तरह चीन में मिर्च बेचने वाली एक लड़की की तसवीरें भी खूब वायरल हुईं. सोशल मीडिया पर उस के वायरल फोटो देख कर उस की खूबसूरती की तारीफ करते लोगों ने कमैंट किया कि गांव की यह छोरी कई मौडल्स को टक्कर दे सकती है. हालांकि यह नहीं पता चल सका कि यह लड़की चीन के किस गांव की थी. बेशक, इंटरनैट पर खूबसूरत लोगों की तसवीरों के वायरल होने का यह सिलसिला आगे भी चलता रहेगा, क्योंकि प्राकृतिक या स्वाभाविक रूप से सुंदर लोग जरूरी नहीं कि खास तबके से ही हों, साधारण काम करने वाले लेकिन हंसीखुशी जिंदगी गुजारने वाले लोग भी स्वभाव से ही नहीं, शारीरिक रूप से भी कई बार असाधारण सुंदर होते हैं. ऐसे लोगों पर जब किसी की नजर पड़ती है, तो लोग उन्हें देखते ही रह जाते हैं.

लकीर का फकीर न बनें

एक पुरानी कहावत है, ‘लकीर का फकीर बनना’ यानी कहेसुने को गांठ बांध लेना और आंख मूंद कर एक ही ढर्रे पर चलते जाना. यदि घर में धार्मिक मान्यताओं पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है तो घर के बच्चे भी इस में शामिल हो जाते हैं और आंखें मूंदे वही सब करते हैं, जो उन्हें कहा जाता है.

बात सिर्फ पूजाअर्चना या अंधभक्ति तक ही सीमित नहीं है, कई बार तो इन अंधविश्वासों के कारण किशोरों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ जाता है. इस बारे में चंदन कुमार एक वाकेआ सुनाते हैं, कि औल इंडिया मैडिकल प्रवेश परीक्षा के दौरान मेरी मां ने घर से निकलते वक्त मुझे सख्त हिदायत दी कि बगल वाले मंदिर के  पुजारी का आशीर्वाद लिए बगैर परीक्षा देने मत जाना और जो मन्नत का धागा है उसे जरूर अपनी कलाई पर बंधवा लेना, इसे भूलना मत.

इस चक्कर में मैं काफी देर तक मंदिर में पुजारी की प्रतीक्षा करता रहा. वे किसी कार्यवश बाहर गए थे. जब वे काफी देर तक नहीं आए तो आखिर मुझे वहां से निकलना पड़ा. न पुजारी आए औैर न मैं धागा अपनी कलाई पर बंधवा पाया. उलटे देर से पहुंचने पर ऐग्जाम में नो ऐंट्री होतेहोते बची.

मेरे जीवन का यह बहुत कड़वा अनुभव था. मैं ने उस दिन से हर बात को पत्थर की लकीर मानना छोड़ दिया. अब मैं सहीगलत का आकलन कर उस बात पर अमल करता हूं.

एक किशोर होने के नाते मैं अपने दोस्तों को भी यही सलाह दूंगा कि लकीर का फकीर न बनें बल्कि अपने विवेक का इस्तेमाल कर कदम बढ़ाएं.

कई बार हमें बोझिल परंपराओं को मानने के लिए मजबूर होना पड़ता है. हम इन्हें मानने से इनकार नहीं कर पाते. ये सब आज 21वीं सदी में हो रहा है, जब सुपर कंप्यूटर और उन्नत तकनीक के युग में इंसान चांद की यात्रा कर चुका है लेकिन हम आज भी वैचारिक रूप से उन्नत नहीं हुए हैं. अंधविश्वास, ढोंग, जादूटोना आज भी हमारा पीछा नहीं छोड़ रहे हैं और हम बरबस ही अपना अहित न होने की शंका में आंख मूंद कर इन्हें अपनी जिंदगी में उतार रहे हैं.

कुल मिला कर ‘लकीर का फकीर’ बनने की परंपरा को अपने घर से तोड़ने की शुरुआत करें. छोटीछोटी दकियानूसी मान्यताओं मसलन, बिल्ली के रास्ता काटने पर आगे न बढ़ना, हमेशा दही खा कर ही घर से निकलना, छींक आ जाए तो यात्रा रोक देना, जाते वक्त किसी के पीछे से टोकने पर खिन्न होना, शाम को घर में झाड़ू लगाना, टिटहरी की आवाज सुनते ही रामराम करने लगना, रात को पीपल या नीम के पेड़ के आसपास न जाना आदि से बचें.       

ऐसे बनाएं खुद को वैचारिक रूप से सशक्त

– सुनीसुनाई बातों पर यकीन न करें. तथ्य एकत्रित करें, फिर उस पर विश्वास करें.

– ऐक्सप्लोरर बनें. आप का ऐक्सप्लोरर नेचर दूसरों को उस बात को न मानने पर विवश कर सकता है.

– टैबू ब्रेकर बनें. इसी से आप दूसरों के लिए प्रेरक बन सकते हैं. यदि आप के लौजिक में दम होगा तो लोग जरूर आप को फौलो करेंगे.

– ‘रिस्क गेनर’ बनें. अंधविश्वासों और खोखली मान्यताओं के खिलाफ चलें. इस से दूसरों में विश्वास भी पैदा होगा और वे आप का अनुसरण भी करेंगे.                 

जीएसटी को लेकर आपके मन में भी है सवाल तो..

वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) को 1 जुलाई को लागू किया जाना तयशुदा है. हालांकि इसे लागू करने में जहां एक महीने के करीब ही वक्त बचा है, वहीं लोगों और कारोबारियों के मन में इसे लेकर अभी कई सवाल बाकी हैं और कई उधेड़बुन बनी हुई हैं.

इसी के चलते डिपार्टमेंट ऑफ रेवन्यू ने एक नया ट्विटर हैंडल शुरू किया है जिस पर इस नयी अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था से जुड़े उद्योग जगत के सवालों का जवाब दिया जाएगा. व्यापारी और उद्योग जगत ‘एटदरेट आस्कजीएसटी अंडरस्कोर जीओआई’ ट्विटर हैंडल पर सवाल पूछ सकते हैं. केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क के अधिकारी इन सवालों का जवाब देंगे.

@askgst_goi पर जाकर करदाता और व्यापारी-कारोबारी अपने सवालों के जवाब पूछ सकते हैं.  वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सभी करदाता और अन्य हितधारकों का उपरोक्त वर्णित ट्विटर हैंडल पर जीएसटी से जुड़े सवाल सीधे पूछने का स्वागत है ताकि उनका जल्द से जल्द समाधान और स्पष्टीकरण किया जा सके.

केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद ने इस महीने की शुरुआत में जीएसटी के तहत 1200 से ज्यादा वस्तुओं और 500 सेवाओं का टैक्स स्लैब निर्धारित करने का फैसला किया था. इन सभी वस्तुओं और सेवाओं को 5, 12, 18 और 28 प्रतिशत के चार स्तरीय स्लैब में वर्गीकृत किया गया था.

भूल गए हैं अपने फोन का पासवर्ड!

स्मार्टफोन में निजी जानकारी सेव होने के कारण लोग फोन में पासवर्ड या पैटर्न लॉक लगा लेते हैं. फोन में लॉक के अलावा यूजर्स एप लॉक भी लगाते हैं जिससे उनकी पसर्नल चैट, फोटोज या डॉक्यूमेंट्स कोई और न देख पाए.

यूजर्स फोन गैलरी, व्हाट्सएप, फेसबुक, मैसेज, कॉन्टेक्ट नंबर आदि को लॉक करते हैं. लेकिन जरा सोचिए, अगर कभी आप अपना एप लॉक भूल गए तो क्या होगा? ऐसे में हम आपको एक ऐसा तरीका बताने जा रहे हैं जिसके जरिए अगर आप लॉक कोड या पासवर्ड भूल भी गए हैं तो उसे आसानी से खोल पाएंगे.

पासवर्ड भूल जाने पर कैसे खोलें एप लॉक

आपको बता दें कि जो ट्रिक हम आपको बताने जा रहे हैं वो हर तरह के एप लॉक पर काम करती है. इसके लिए सबसे पहले फोन सेटिंग्स में जाएं और एप्स पर टैप करें.

इसके बाद आपके फोन की स्क्रीन पर एप की लिस्ट ओपन हो जाएगी. अब एप लॉक वाले एप पर टैप करें. आपके फोन में एप लॉक या CM Security जो भी एप हो उस पर क्लिक कर दें.

इसके बाद आपके सामने एक विंडो ओपन होगी जिसमें एप का वर्जन, अनइंस्टॉल समेत कई ऑप्शन दिए गए होंगे. इसमें FORCE STOP पर टैप करें.

अब आपके फोन स्क्रीन पर एक मैसेज आएगा, जिसे आपको OK करना है. जैसे ही यह एप बंद हो जाएगी आपके फोन में लगे एप लॉक भी बंद हो जाएंगे.

यह तरीका तब कारगर होगा जब आपके फोन में होम स्क्रीन और सेटिंग्स में लॉक न लगा हो. इस ट्रिक का इस्तेमाल एप लॉक का पैटर्न भूल जाने पर भी कर सकते हैं.

क्लास में भी ग्लव्स पहनकर जाते थें द्रविड़

चैंपियंस ट्रॉफी के लिए टीम इंडिया के साथ इंग्लैंड गए कोच अनिल कुंबले का कार्यकाल जल्द ही खत्म होने वाला है. भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने नए कोच के पद के लिए आवेदन लेना भी शुरू कर दिया है. अब कोच के पद की दौड़ में राहुल द्रविड़ भी शामिल हो गए हैं.

ऑस्ट्रेलिया के सबसे सफल कप्तान रिकी पॉन्टिंग का कहना है कि पूर्व भारतीय खिलाड़ी राहुल द्रविड़ टीम इंडिया के कोच बनने के लिए सबसे उपयुक्त खिलाड़ी हैं. द्रविड़ ने अंडर-19 और भारत ए टीम की कोचिंग करने के बाद आईपीएल में दिल्ली डेयरडेविल्स के कोच का पद भी संभाला था.

आईपीएल में मुंबई इंडियंस के मेंटॉर रह चुके पॉन्टिंग ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि बीसीसीआई द्रविड़ से बेहतर उम्मीदवार ढूंढ पाएगी. अगर वह इस पद पर काम करने में रुचि रखते हैं तो वह एक अच्छे कोच साबित होंगे. उनके पास काफी अनुभव और जानकारी है, साथ ही वह तीनों प्रारूपों को अच्छे से समझते हैं.”

चलिए आज हम आपको भारतीय क्रिकेट के ‘मिस्टर भरोसेमंद’, ‘दि वॉल’ आदि नामों से पहचाने जाने वाले राहुल द्रविड़ के करियर से अवगत कराते हैं. द्रविड़ भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में से एक हैं. उनकी गिनती ना सिर्फ भारत के बल्कि विश्व के महान बल्लेबाजों में की जाती है. वे सचिन तेंदुलकर के बाद एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं, जिन्होंने 10 हजार से ज्यादा रन बनाये हैं.

टेस्ट क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों में द्रविड़ को चौथा स्थान प्राप्त है, उनसे ऊपर भारत के सचिन तेंदुलकर, आस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग और दक्षिण अफ्रीका के जैक कैलिस के बाद उनका नाम है. राहुल बल्लेबाजी में अपनी तकनीक के कारण विश्वप्रसिद्ध हैं.

करियर रिकॉर्ड

प्रथम क्रम पर बल्‍लेबाजी करते हुए द्रविड़ ने टेस्‍ट और वनडे, दोनों में ऐसी पारियां खेलीं, जो उनके करियर के लिहाज से मील का पत्‍थर रहीं. द्रविड़ की डिफेंस इतनी मजबूत थी कि उनके विकेट को हासिल करना दुनिया के तमाम मशहूर गेंदबाजों की चाहत हुआ करती थी.

राहुल द्रविड़ ने 164 टेस्ट और 344 वनडे मैच खेले हैं. जिनमें टेस्ट में 13,288 और वनडे में 10,889 रन बनाये हैं. वर्ष 2011-12 में उन्होंने दोनों ही फॉरमेट में अपना अंतिम मैच खेला. वर्ष 2012 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्‍यास लेने के बाद भी द्रविड़ कोच के तौर पर क्रिकेट से जुड़े हुए हैं.

टेस्ट

11 जनवरी 1973 को मध्‍यप्रदेश के इंदौर शहर में जन्‍मे राहुल शरद द्रविड़ ने जून 1996 में टेस्‍ट करियर का आगाज किया था. टेस्ट में द्रविड़ के नाम 36 शतक और 63 अर्द्धशतक हैं.

इसमें पाकिस्‍तान के खिलाफ रावलपिंडी में खेली गई 270 रन की पारी (वर्ष 2004)और ऑस्‍ट्रेलिया के खिलाफ एडीलेड में खेली गई 233 रन की बेहतरीन पारी (वर्ष 2003) शामिल रही. इन दोनों टेस्‍ट मैचों में टीम इंडिया को जीत दिलाने में द्रविड़ के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता. टेस्‍ट करियर में राहुल ने पांच दोहरे शतक जमाए और पाकिस्‍तान के खिलाफ 270 उनका टॉप स्‍कोर रहा.

वनडे

द्रविड़ ने 1996 में टेस्ट और एकदिवसीय मैच में डेब्यू किया था. हालांकि वनडे के लिहाज से द्रविड़ की बैटिंग को आदर्श नहीं माना जाता था क्‍योंकि वे हवा में शॉट बेहद कम मौकों पर खेलते थे. लेकिन कई मौकों पर वे बेहद तेज गति से बैटिंग करके अपने आलोचकों को हैरान भी करते रहे. वनडे में द्रविड़ के नाम 12 शतक और 83 अर्द्धशतक हैं.

जब स्कूल की क्लास में भी ग्लव्स पहनकर लिखते थे राहुल

राहुल द्रविड़ के बारे में एक रोचक कहानी है. कहा जाता है कि क्रिकेट के कारण राहुल हमेशा क्लास छोड़ देते थें. एक बार वे क्लास में ग्लव्स पहनकर नोट्‌स लिख रहे थे. यह देख उनके साथियों ने उनका यह कहकर मजाक उड़ाया था कि वो क्लास की सबसे सुंदर लड़की को इंप्रेस करने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो द्रविड़ ने कारण बताया कि वो लड़की तो इंप्रेस है ही दरअसल वे अपने नये ग्लव्स को अपनी हाथों में सेट करने के लिए ऐसा कर रहे हैं.

सबसे सेक्सी खिलाड़ी की उपाधि

वर्ष 2004 में राहुल द्रविड़ को एक मैगजीन द्वारा कराये गये सर्वे में सबसे सेक्सी खिलाड़ी के रूप में चुना गया था. उस सर्वे में द्रविड़ को सानिया मिर्जा और युवराज सिंह से ज्यादा वोट मिले थे. द्रविड़ हिंदी, अंग्रेजी, मराठी और कन्नड़ भाषा अच्छे से जानते हैं.

चैंपियंस ट्रॉफी 2017: इन 6 बल्लेबाजों पर होगी सबकी नजर

आईपीएल का दसवां सीजन खत्म होते ही अब सबकी नजर इंग्लैंड में 1 जून से होने वाली चैंपियंस ट्रॉफी पर है. ‘मिनी वर्ल्ड कप’, ‘वर्ल्ड कप से पहले वार्म अप टूर्नामेंट’, ‘सर्वश्रेष्ठ का टेस्ट’ जैसी पहचान रखने वाले इस टूर्नामेंट का अपना इतिहास रहा है. जैसे जैसे टूर्नामेंट करीब आ रहा है इसका रोमांच बढ़ता जा रहा है.

1 जून से 8 जून तक इंग्लैंड में होने वाले आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के लिए 8 देशों ने अपनी टीमों की घोषणा की है. इसमें पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड, साउथ अफ्रीका, श्रीलंका और बांग्लादेश की टीमें शामिल हैं.

टूर्नामेंट में खेल रही इन 8 टीमों में से कुछ चुनिंदा बल्लेबाज हैं, जो अपनी टीम के लिए पासा पलटने का माद्दा रखते हैं. जानिए किन धाकड़ बल्लेबाजों पर होंगी सभी की नजर.

विराट कोहली (भारत)

टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली पर इस बार 2 जिम्मेदारियां होंगी. पहली कि वो अपनी टीम के खिताब की सफलतापूर्वक रक्षा करें और दूसरी की इंग्लैंड में रनों के सूखे को खत्म करें. वनडे में 27 शतक जड़ने वाले कोहली को आईपीएल और ऑस्ट्रेलिया सीरीज को भुला कर वो कमाल करना होगा, जिसके लिए वो विख्यात हैं. कोहली खुद भी उम्मीद करेंगे कि टीम जर्सी के साथ उनका प्रदर्शन भी बदले.

डेविड वॉर्नर (ऑस्ट्रेलिया)

ऑस्ट्रेलिया के सलामी बल्लेबाजी ने आईपीएल में ऑरेंज कैप अपने नाम की. शुरुआती ओवरों में बल्ले से तबाही मचाने वाले वॉर्नर हमेशा ही पांचवे गीयर में खेलते हैं. पिछले 10 वनडे में वॉर्नर ने 5 शतक जमाए हैं, जिसमें से 3 दफा उन्होंने 150 का आंकड़ा पार किया है. आईसीसी रैंकिंग में नंबर 2 बल्लेबाज वॉर्नर चाहेंगे कि अपनी आईपीएल की फॉर्म को जारी रखें.

एबी डीविलियर्स (साउथ अफ्रीका)

216 वनडे के अनुभव में 100 से अधिक का स्ट्राइक रेट रखने वाले एबी कभी भी गीयर बदल कर जितने चाहें उतने रन बना सकते हैं. मगर आईपीएल-10 के 9 मैचों सिर्फ 1 फिफ्टी बनाने वाले एबी इस साल चैंपियंस ट्रॉफी में अपनी टीम के सेनानायक बनना चाहेंगे.

जो रूट (इंग्लैंड)

आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में अच्छा प्रदर्शन करने वाले जो रूट ने पिछले एक साल में वनडे में अच्छा खेल दिखाया है. दुनिया उन्हें इंग्लैंड क्रिकेट का भविष्य मानती है, जो संभवत: वो अपने प्रदर्शन से साबित भी करते हैं. रूट को घरेलू कंडिशंस का खासा फायदा मिलेगा. 2016-17 सीजन में रूट ने 81.75 की औसत से रन कूटे हैं. रूट ने 85 वनडे में 9 शतक जड़े हैं.

स्टीव स्मिथ (ऑस्ट्रेलिया)

बतौर लेग स्पिनर क्रिकेट में एंट्री कर विश्व के टॉप बल्लेबाज बनने वाले स्टीव स्मिथ ने आगे से कंगारू टीम का नेतृत्व किया है. पिछले सीजन में उन्होंने 14 मैचों में 55.58 की औसत से 667 रन बनाए हैं. 95 वनडे खेलने वाले स्मिथ 8 शतक और 16 अर्धशतक जड़े हैं. अपनी अलग ही शैली में बल्लेबाजी करने वाले स्मिथ का रूत्ब दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है.

केन विलियमसन (न्यूजीलैंड)

क्रिकेट में एक कहावत है, जिसका मतलब है कि फॉर्म आती-जाती रहती है, मगर क्लास बरकरार रहती है. किवी कप्तान केन विलियमसन उसी क्लास के बल्लेबाज हैं, जो उन्हें वर्ल्ड के टॉप प्लेयर्स में से एक बनाती हैं. विलियमसन की बल्लेबाजी का लुत्फ उठाने वालों की कोई कमी नहीं. धीरे-धीरे वार करने वाला यह बल्लेबाज जब अपने रंग में होता है, तो विपक्षियों के रंग ही उड़ा देता है.

आधुनिक कृषि यंत्र और उन पर अनुदान

इस मशीनीकरण के युग से खेती भी अछूती नहीं रही है, लेकिन मशीनों की ऊंची कीमतों की वजह से आम किसान उन्हें खरीद नहीं पाते है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं जैसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, सब मिशन आन आयल सीड एंड आयलपाम व सब मिशन आन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन के तहत किसानों को वित्तीय वर्ष 2016-17 में अनुदान दिए जाने की योजना है ताकि किसान मशीनों को खरीद कर खेती में उन का इस्तेमाल कर के ज्यादा आमदनी ले सकें.

मल्टी क्राप थ्रेसर

फसलों की गहाई में थ्रेसर का काफी योगदान है. गहाई मशीनों से समय पर गहाई कर के पैदावार के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सका है. मशीनों से गहाई का काम बहुत आसान हो गया है. महीनों तक चलने वाला गहाई का काम अब कुछ दिनों में ही पूरा हो जाता है. आजकल मल्टी क्राप हार्वेस्टिंग मशीन बाजार में आ चुकी है, जिस से विभिन्न फसलों जैसे सोयाबीन, मक्का, ज्वार, बाजरा, सरसों, अलसी, मूंग, चना व उड़द आदि की गहाई तेजी से की जा सकती है. आईएसआई प्रमाणित थ्रेसर पर ही अनुदान दिया जाता है.

देखभाल

* गहाई के बाद गहाई मशीन को खाली चलाएं जिस से मशीन के अंदर से अनाज के दाने, भूसा व डंठल आदि बाहर निकल जाएं.

* गहाई मशीन को शक्ति स्रोत से अलग कर लें और चलनियों से सारा भूसा, डंठल व अनाज आदि अलग कर लें.

* गहाई मशीन में जहां से हवा खींची या फेंकी जाती है, उसे साफ कर लें.

* रबर के सभी पार्ट्स जैसे पट्टे वगैरह निकाल कर सुरक्षित जगह पर रखें.

* मशीन को साफ व सूखी जगह पर रखें और धूल व जंग से बचाने के लिए कवर से ढकें.

सावधानियां

* थ्रेसर के इस्तेमाल के समय अपने कपड़ों का खयाल रखें. कई बार इन की वजह से दुर्घटना हो जाती है.

* फसल निकलते समय थ्रेसर के राउंड फसल के मुताबिक सेट करें.

* इस्तेमाल के समय थ्रेसर और टैक्टर के पीटीओ (जाइंट) से दूर रहें.

अनुदान

* राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत मूल्य का 50 फीसदी या अधिकतम 40000 रुपए तक अनुदान देय है.

* सब मिशन आन आयल सीड एंड आयल पाम व सब मिशन आन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के तहत एससी, एसटी,  लघु, सीमांत व महिला किसानों के लिए मूल्य का 50 फीसदी या अधिकतम 63000 रुपए का अनुदन देय होगा. अन्य किसानों के लिए 40 फीसदी या अधिकतम 50000 रुपए अनुदान देय है.

बीज व उर्वरक ड्रिल

(ट्रैक्टर चालित)

यह एक बहुत ही कारगर मशीन है, जो किसानों के लिए खेती में मददगार साबित हो रही है. इस से विभिन्न फसलों के बीज व खाद को एकसाथ खेत में डाल कर बोआई कर सकते हैं.

इस मशीन में मुख्य रूप से बीज बाक्स, खाद बाक्स, बीज नियंत्रित प्रणाली, खाद नियंत्रित प्रणाली, बीज नली, खूंड ओपनर व ट्रांसपोर्ट व्हील वगैरह होते हैं. सीड ड्रिल में एक अक्ष होता है, जो फ्लूटेड रोलर को चलाता है और यह सीड बाक्स के नीचे होता है. फ्लूटेड रोलर बीजों को बाक्स से लेता है और बीजनली में डाल देता है. चूंकि बीजनली खूंड ओपनर से जुड़ी होती है, इसलिए बीज सीधे खूंड ओपनर से होते हुए खूंड में गिर जाते हैं. यह मशीन भारत के उत्तर भाग में बहुत प्रचलित है.

देखभाल

* बक्से में खाद व बीज भरते समय खाद कम  या ज्यादा करने वाली पत्ती के नीचे वाली पत्ती बंद होनी चाहिए और चलते समय केवल इस पत्ती को ही खोलना चाहिए.

* ज्यादा समय तक बक्से में खाद नहीं रखनी चाहिए और यह ध्यान रखना चाहिए कि उस में रखी हुई खाद में नमी न आए और खाद का छिड़काव ठीक

ढंग से हो सके.

* उर्वरक को बक्से में भरते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि खाद में ढेले न हों.

* चलाते समय खाद बाक्स का ढक्कन बंद ही रखना चाहिए और साधारण गति से ही चलाना चाहिए जो कि तकरीबन 3-5 किलोमीटर प्रति घंटा होती है.

* हैंडल को आम गति से ही घुमाना चाहिए (30-40 चक्कर प्रति मिनट), क्योंकि हैंडल के चक्र कम या ज्यादा होने से खाद के एकसार छिड़काव पर असर पड़ता है.

* खाद छिड़कने के बाद यंत्र को अच्छी तरह से साफ कर के रखना चाहिए और बक्से में खाद नहीं होनी चाहिए.

* खाद के बक्से में घूमने वाले पट पर आने वाले उर्वरक की दर का नियंत्रण फीड पट या पट्टी की सहायता से किया जाता है, इसलिए सही दर हासिल करने के लिए यह जरूरी है कि हर मशीन में इसे कम या ज्यादा करने का सिस्टम हो.

* ट्रैक्टर आगे चलने की गति व मशीन की आगे चलने की गति भी खाद छिड़काव की दर को प्रभावित करती है. अगर ट्रैक्टर की गति ज्यादा होगी, तो एक सेटिंग पर मशीन द्वारा प्रति हेक्टेयर कम खाद पड़ती है. इस के विपरीत यदि ट्रैक्टर की गति कम होगी, तो पट की पूर्व गति व बक्से से आने वाली खाद की दर वही रहने पर भी खेत में अधिक उर्वरक छिड़का जा सकता है.

सावधानियां

* बीज व खाद के बक्सों, खाद वाली शाफ्ट और खाद मापने वाली पत्ती को अच्छी तरह से साफ कर लेना चाहिए.

* बीज व खाद वाले शाफ्टों का फ्री घुमाव देख लेना चाहिए. सभी चलने वाले भागों में ग्रीस व तेल डाल देना चाहिए.

* प्लास्टिक की नालियां लगाते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि नाली में ज्यादा मोड़ न आने पाए वरना बीज व खाद रुक जाते हैं.

* मशीन के फाल, फसल के मुताबिक सही दूरी पर लगा देने चाहिए. इस के लिए फालों में लोहे के क्लैंप लगे होते हैं, जिन को खिसका कर फालों की दूरी को कम या ज्यादा किया जा सकता है.

* अच्छे अंकुरण के लिए बीज व

खाद को सही नमी में ठीक अंतर व गहराई पर डालना जरूरी है. फालों की गहराई फसल के मुताबिक कम या ज्यादा की जा सकती है.

* खाद व बीज की मात्रा कम या ज्यादा करने वाले लीवर को आसानी से चलना चाहिए. सही खाद व बीज की मात्रा पर सेट करने के बाद इस के नट कस लेने चाहिए ताकि बोआई के समय बीज व खाद सारे खेत में एक तरह से पड़ सकें.

अनुदान

* राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत मूल्य का 50 फीसदी या अधिकतम 15000 रुपए तक अनुदान देय है.

* सब मिशन आन आयल सीड एंड आयल पाम व सब मिशन आन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के तहत एससी, एसटी, लघु, सीमांत व महिला किसानों के लिए मूल्य का 50 फीसदी या अधिकतम 19000 रुपए का अनुदान देय होगा.

अन्य यानी साधारण वर्ग के किसानों के लिए 40 फीसदी या अधिकतम 15000 रुपए अनुदान देय है.

रीपर ट्रैक्टर चालित (35 हार्स पावर से ज्यादा)

यह मशीन अनाज वाली फसलों को काटने के काम आती है. यह जमीन से 5-8 सेंटीमीटर ऊपर तक की कटाई करती है. इस में मुख्य भाग फ्रेम, कटरबार, चाकू, व्हील, बियरिंग वगैरह होते हैं. कटरबार हाई कार्बन स्टील का बना होता है. इसे ट्रैक्टर के द्वारा चलाते हैं. आजकल आधुनिक रीपर बाजार में आ गए हैं, जिन से समय व मजदूरी की बचत होती है.

देखभाल

* यदि रीपर से कटाई एक जैसी न हो रही हो, तो यह देखना चाहिए कि लेजर प्लेट कहीं से टूटी तो नहीं है और यदि ऐसा हो तो उसे बदल देना चाहिए.

* यंत्र को चलाने समय सभी नटबोल्ट अच्छी तरह से कसे होने चाहिए और दोनों कनवेयर बेल्ट और स्टार व्हील आसानी के साथ बिना रुकावट के चलने चाहिए.

सावधानियां

* यंत्र के सभी घूमने वाले भागों में अच्छी प्रकार से ग्रीस या तेल डालते रहना चाहिए.

* छूरों की धार को समयसमय पर तेज करते रहना चाहिए.

* खेत में काम खत्म होने के बाद कटरबार की सफाई करना बेहद जरूरी है.

* रीपर का इस्तेमाल उन्हीं फसलों की कटाई के लिए किया जाता है, जिन के बीच में कोई दूसरी फसल न बोई गई हो.

* यंत्र के काम करते समय इस के पास किसी भी व्यक्ति को नहीं होना चाहिए, वरना उस के कपड़े मशीन में फंस सकते हैं और दुर्घटना हो सकती है.

अनुदान

* सब मिशन आन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के तहत एससी, एसटी, लघु, सीमांत व महिला किसानों के लिए मूल्य का 50 फीसदी या अधिकतम 30000 रुपए का अनुदान देय होगा. अन्य किसानों के लिए 40 फीसदी या अधिकतम 24000 रुपए अनुदान देय है.

स्प्रिंग टाइन कल्टीवेटर

ये देशी हल की तरह जमीन को कुरेदने वाले यंत्र होते हैं, मगर उतने ही वक्त में देशी हल के मुकाबले 3-4 गुना ज्यादा काम कर सकते हैं, क्योंकि इन में कई फाल होते हैं. इन फालों का आकार जरूरत के हिसाब से बदल दिया जाता है. इन का इस्तेमाल ज्यादातर हलों से जुताई के बाद मिट्टी को भुरभुरी करने, ढेलों को तोड़ने और ठूंठ आदि से मिट्टी, अलग करने के लिए किया जाता है. इस से बीज खेत में बिखेर कर मिट्टी में मिलाए जा सकते हैं. लाइनों में बोई गई फसलों में सही फासला होने पर इसे लाइनों के बीच में निराईगुड़ाई के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. इस की चौड़ाई को कम या ज्यादा कर के विभिन्न अंतर पर बोई गई फसलों में इस्तेमाल किया जा सकता है. 3-4 इंच गहरी जुताई की जा सकती है. इस में जुताई को ज्यादा या कम गहरा करने का इंतजाम होता है, जोकि ट्रैक्टर के द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है.

देखभाल

आमतौर पर सभी नटबोल्टों की जांच करते रहना चाहिए, ताकि वे हमेशा टाइट और फिट रहें. सब से बढि़या तरीका यह है कि रोजाना काम शुरू करने से पहले इन की जांच कर लें.

* फालों के घिस जाने पर उन्हें पलट देना चाहिए या फिर नए फाल लगाने चाहिए.

* रोजाना काम खत्म करने के बाद यंत्र के सही भंडारण के लिए उस की पालिश की गई सतहों पर ग्रीस लगाना चाहिए, जिस से कि यंत्र में जंग न लगने पाए.

* आपरेटर को मशीन के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए, ताकि वह टूटे या घिसे हुए भागों को काम शुरू करने से पहले ठीक कर लें.

सावधानियां

* बोआई करते समय फालों के बीच की दूरी तय होनी चाहिए और फालों की गहराई भी बराबर होनी चाहिए.

* खेत की तैयारी करते समय लाइनों के बीच की दूरी इतनी ज्यादा नहीं होनी चाहिए, जिस से खेत बिना जुता हुआ रहे.

* खाद (उर्वरक) डालते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि उर्वरक सूखा व भुरभुरा है या नहीं. यदि भुरभुरा न हो तो उसे सुखा देना चाहिए.

* उर्वरक डालने के लिए यंत्र में लगने वाले भाग में प्लास्टिक का इस्तेमाल करना चाहिए.

* यंत्र से निराईगुड़ाई करते समय यह ध्यान रखना चाहिए कि लाइनों में बोए हुए पौधे नष्ट न हों.

अनुदान

* सब मिशन आन आयल सीड एंड आयल पाम योजना के तहत एससी, एसटी, लघु, सीमांत व महिला किसानों के लिए मूल्य का 50 फीसदी या अधिकतम 10000 रुपए का अनुदान देय होगा. अन्य किसानों के लिए 40 फीसदी या अधिकतम 8000 रुपए अनुदान देय है.

* सब मिशन आन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना के तहत एससी, एसटी, लघु, सीमांत व महिला किसानों के लिए मूल्य का 50 फीसदी या अधिकतम 15000 रुपए का अनुदान देय होगा. अन्य किसानों के लिए 40 फीसदी या अधिकतम 12000 रुपए अनुदान देय है.

रोटावेटर

(35 हार्स पावर तक)

रोटवेटर मशीन के इस्तेमाल से खेत की मिट्टी को अच्छी तरह तैयार किया जाता है. यह मशीन बोआई के लिए खेत की जमीन को कम समय में तैयार करती है. यह मशीन पिछली फसल कटने के बाद जो अवशेष खेत में रह जाते हैं, उन्हें जड़ से खोद कर अच्छी तरह से मिट्टी में मिला देती है.

देखभाल

* यदि रोटावेटर के ब्लेड घिस गए हों, तो उन्हें बदल देना चाहिए. रोटावेटर को हमेशा ट्रैक्टर की कम स्पीड पर चलाना चाहिए, ताकि मिट्टी ठीक से भुरभुरी हो जाए.

* रोटावेटर के बगल में लगे हुए गहराई नियंत्रक भाग को ठीक तरीके से सेट कर के ही इसे चलाना चाहिए.

* घिसे हुए रोटावेटर ब्लेड का हमेशा पूरा सेट बदलना चाहिए. ऐसा नहीं करने पर रोटावेटर ब्लेड पर लगने वाले विभिन्न बलों का संतुलन बिगड़ सकता है, जिस के कारण ट्रैक्टर को ज्यादा कूवत से काम करना पड़ता है, नतीजतन तेल की खपत बढ़ जाती है.

* गीयर बाक्स के तेल के स्तर की जांच समयसमय पर की जानी चाहिए.

* रोटावेटर को ट्रैक्टर के पीटीओ से जोड़ने वाली शाफ्ट में 1 सिअर बोल्ट लगा रहता है, जो ज्यादा लोड आने पर टूट जाता है. यह सिअर बोल्ट ट्रैक्टर की पीटीओ शाफ्ट की हिफाजत के लिए लगा रहता है.

* यदि यह सिअर बोल्ट ज्यादा लोड पर नहीं टूटता है, तो ट्रैक्टर के पीटीओ शाफ्ट के टूटने का खतरा रहता है. खेत में रोटावेटर ले जाते समय हमेशा 2-4 सिअर बोल्ट अलग से रखने चाहिए, ताकि उस के टूटने पर उसे आसानी से बदला जा सके.

सावधानियां

* खेत में रोटावेटर को चलाने से पहले उस के ब्लेडों को ठीक से कस लेना चाहिए.

* मिट्टी भुरभुरी बनाने के लिए खेत में बहुत ज्यादा नमी नहीं होनी चाहिए.

* रोटावेटर के गीयर बाक्स और साइड के पावर सिस्टम में निशान तक तेल भरा रहना चाहिए.

अनुदान

* राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन योजना के तहत मूल्य का 50 फीसदी या अधिकतम 35000 रुपए तक अनुदान देय है.

* सब मिशन आन आयल सीड एंड आयल पाम व सब मिशन आन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन योजना के तहत एससी, एसटी, लघु, सीमांत व महिला किसानों के लिए मूल्य का 50 फीसदी या अधिकतम 44000 रुपए का अनुदान देय होगा. अन्य किसानों के लिए 40 फीसदी या अधिकतम 35000 रुपए अनुदान देय है.

अनुदान के लिए जरूरी प्रक्रिया और कागजात

* अधिकृत/पंजीकृत क्रयविक्रय सहकारी समिति, ग्राम सेवा सहकारी समिति या राज्य के किसी भी जिले के पंजीकृत निर्माता या विक्रेता से ही कृषि यंत्र खरीदने पर अनुदान देय होगा.

* यदि किसान के द्वारा खरीदे गए यंत्र की खरीद किसी अन्य जिले के पंजीकृत स्रोत से की गई है, तो किसान के द्वारा उस जिले के पंजीकृत आपूर्ति स्रोत का प्रमाण अनुदान क्लेम के साथ पेश करना होगा.

* किसान को अनुदान पाने के लिए अपने नजदीकी ई मित्र कियोस्को पर निर्धारित शुल्क (यदि है) जमा करवा कर अपने निर्धारित दस्तावेजों की फोटो काफी के साथ आनलाइन आवेदन करना अनिवार्य होगा. अनुदान के लिए आवेदन की पावती कियोस्को द्वारा किसान को दी जाएगी.

* किसान की स्वप्रमाणित पासपार्ट साइज फोटो.

* ट्रैक्टर का पंजीयन प्रमाणपत्र.

* स्वहस्ताक्षरित कृषि यंत्र के बिल की प्रति.

* आधारकार्ड/भामाशाह कार्ड की प्रति.

* अनुदानित यंत्र की खास जगह पर बड़े व साफ अक्षरों में ‘कृषि विभाग द्वारा वर्ष 2016-17 में अनुदानित’ का अंकन पेंट द्वारा अनिवार्य रूप से किया जाना जरूरी है.

* अनुदान क्लेम विभाग के स्थानीय अधिकारियों के द्वारा प्रमाणित होना चाहिए.

* बचत खाते की पासबुक की स्वप्रमाणित फोटो काफी व अन्य जरूरी दस्तावेजों की काफी लगाना जरूरी है.

* उपनिदेशक कृषि (विस्तार) जिला परिषद कार्यालय द्वारा प्राप्त आवेदनों को रजिस्टर में दर्ज कर के भौतिक सत्यापन के बाद किसान को बजट की मौजूदगी के मुताबिक वरीयता क्रम से अनुदान दिया जाएगा.

* ज्यादा जानकारी के लिए किसान अपने नजदीकी कृषि विभाग के कार्यालय में संपर्क करें.

तलाक एक साथ कई जिंदगियां बर्बाद करता है : पूजा बत्रा

अमरीका सहित कई पश्चिमी देशों में तलाक की घटनाएं आम बात हैं. वहां के लोगों की जिंदगी में इस कदर सूनापन है कि पति से तलाक होने पर औरत को वहां कोई मदद या भावनात्मक सहयोग नहीं मिलता है. ऐसे में अपनी बिखरी जिंदगी को पुनः पटरी पर लाने व तलाक की वजह से पैदा हुए दुःख से उबरने के लिए मनोचिकित्सक की मदद लेकर उन्हे सायकोलाजिकल थेरेपी करनी पड़ती है. इसी तरह की थेरेपी अभिनेत्री पूजा बत्रा को भी लगभग पांच वर्ष तक लेनी पड़ी.

मूलतः फैजाबाद निवासी और पुणे के फर्गुसन कालेज से एमबीए की डिग्री हासिल करने के बाद 1993 में पूजा बत्रा ‘फेमिना मिस इंडिया इंटरनेशनल’ चुनी गयी. उसके बाद 1997 में प्रदर्शित फिल्म ‘विरासत’ से पूजा बत्रा ने अभिनय के क्षेत्र में करियर की शुरुआत की. इस फिल्म में उनके साथ अनिल कपूर और तब्बू भी थीं.उ सके बाद वह ‘हसीना मान जाएगी’, ‘भाई’, ‘चंद्रलेखा’, ‘कहीं पर न हो जाए’ जैसी कई सफलतम फिल्मों में नजर आयीं. वह ‘एबीसीडी2’ में भी थी. 2002 में डाक्टर सोनू एस अहलूवालिया के संग शादी कर अमरीकन पति के साथ अमरीका के लास एंजेल्स शहर में रहने चली गयी थीं.

परिणामतः उन्हे कई अच्छी बालीवुड फिल्मों से हाथ धोना पड़ा. पर  2011 में दोनों के बीच तलाक हो गया. उस वक्त वह अमरीका के लांस एंजेल्स शहर में रह रही थी. जिससे वह घोर निराशा में डूब गयी थी. उन्हे लग रहा था कि जिंदगी खत्म हो गयी. पर तभी उन्हे उनके एक अमरीकी दोस्त ने मनोचिकित्सक से मिलने की सलाह दी. उस मनोचिकित्सक से सप्ताह में तीन घंटे थेरेपी लेती रहीं. यह सिलसिला पांच साल तक चला. धीरे धीरे उनकी जिंदगी ने नई राह पकड़ी. अब एक तरफ वह एक सफल बिजनेस वूमन बन चुकी हैं, तो दूसरी तरफ वह पुनः अभिनय के क्षेत्र में भी व्यस्त हैं.

2015 में वह सफलतम बौलीवुड फिल्म ‘‘एबीसीडी 2’’ में नजर आयी थीं. तो वहीं फरवरी माह में अमरीका व दुबई में प्रदर्शित हौलीवुड फिल्म ‘‘वन अंडर द सन’’ में वह मेनलीड में नजर आयी. यह हौलीवुड बहुत जल्द भारत में भी प्रदर्शित होगी. फिलहाल वह शीघ्र प्रदर्शित होने वाली थी बौलीवुड फिल्म ‘‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’’ को लेकर उत्साहित हैं, जिसमें वह मनोचिकित्सक डाक्टर राय के किरदार में हैं.

अमरीका के लांस एजेंल्स शहर में रह रही पूजा बत्रा अपनी नई बौलीवुड फिल्म ‘‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’’ के प्रमोशन के सिलसिले में मुंबई में थी. उसी वक्त पूजा बत्रा ने अपनेपन के माहौल में  ‘‘सरिता’’ पत्रिका से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए तलाक, तलाक के बाद की स्थिति से उबरने के उपाय, मनोचिकित्सक की जरुरत, करियर आदि को लेकर लंबी बातचीत की.

बौलीवुड में जब आपका करियर चरम पर था, तभी आपने अमरीका जाने का निर्णय लिया था. उस वक्त आपकी सोच क्या थी?

– मैंने 2002 में डा. सोनू अहलूवालिया से विवाह किया था, जो कि अमरीका के लांस एंजेल्स शहर में रहते हैं. तो उनके साथ मुझे अमरीका जाना पड़ा. उस वक्त मैने सोचा था कि मैं लास एंजेल्स में रहते हुए भी बालीवुड फिल्में करती रह सकती हूं. लेकिन वैसा हो नहीं पाया. मुझे नए सिरे से अपने करियर की शुरुआत करनी पड़ी. हालीवुड में मुझे कोई जानता नहीं था. उस वक्त बालीवुड से वहां के लोग ज्यादा परिचित नहीं थे. मैं तो नई पीढ़ी के लिए राह बना रही थी. मगर मेरा वैवाहिक जीवन भी असफल रहा. फिर कई उतार चढ़ाव से जिंदगी गुजरी. अब पुनः मैं अभिनय में सक्रिय हो चुकी हूं.इन दिनों विजित शर्मा निर्देशित फिल्म ‘‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’’ को लेकर काफी उम्मीद हैं.

फिल्म ‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’ के किरदार पर विस्तार से रोशनी डालेंगी?

– यह डॉ राय का किरदार है, जो कि क्रिमिनल मनोचिकित्सक है. वह अपराधियों से बात कर उनके मनोविज्ञान को समझने का प्रयास करती है. यह एक रहस्य रोमांच प्रधान फिल्म है, इसलिए बहुत कम ही बता सकती हूं.

मनोचिकित्सक का किरदार निभाना आपके लिए किस तरह आसान हुआ?

– मैंने खुद मनोचिकित्सक के पास जाकर लंबे समय के लिए थैरेपी की भी है. मैंने काफी लंबे समय तक थैरेपी की है. हर सप्ताह कम से कम तीन घंटे सायकोलाजी की थैरेपी किया करती थी. क्योंकि मैं जीवन के एक ऐसे दौर से गुजर रही थी, जहां मुझे लगा कि बिना सायकोलाजिकल थैरेपी के मैं जिदंगी नही जीं पाउंगी. इस वजह से मुझे पता था कि एक थैरेपी देने वाला मनोचिकित्सक व लेने वाला दोनों किस तरह से काम करते हैं, जिसके चलते मेरे लिए डाक्टर राय का किरदार निभाना आसान रहा.

क्या आप ‘‘सरिता’’ के पाठकों से अपनी जिंदगी के उस दौर पर विस्तार से बात करना चाहेंगी?

– देखिए, जिंदगी कोई आसान नहीं होती है. इंसानी जिंदगी में तमाम मोड़ आते हैं, कई ऐसे हादसे होते हैं, जिनसे निपटने के लिए इंसान को मनोचिकित्सक के पास जाकर  थैरेपी की मदद लेनी पड़ती है अन्यथा इंसान डिप्रेशन में चला जाता है. जब मेरा अपने पति से तलाक हुआ, तो उस वक्त जो हालात बने, उनसे उबरने के लिए मुझे मनोचिकित्सक के पास जाकर थैरेपी लेनी पड़ी. लास एजिंल्स में जरूरत के मुताबिक मैंने लंबे समय के लिए थैरेपी की. अमरीका में तमाम डाक्टर्स, मरीजों को तनाव व डिप्रेशन से बचाने के लिए किस तरह की सायकोलाजिकल थैरेपी लेने की सलाह देते हैं, यह सर्वविदित है. इस तरह की थैरेपी लेने से इंसान को अपने आप उन हालातों से उभरने की ताकत मिलती है.

क्या आप बताना पसंद करेंगी कि तलाक होने पर एक औरत को किस तरह की दिमागी व सामाजिक समस्याओं से जूझना पड़ता है?

– हर औरत के तलाक की वजहें अलग होती हैं. जबकि तलाक हर औरत के लिए अभिशाप ही है. हर किसी का तलाक भी अलग अलग तरीके से होता है. कुछ लोग आपसी समझ के आधार पर एक दूसरे को तलाक दे देते हैं. कुछ औरतों को तलाक के बाद पूर्व पति से बड़ी धनराशि मिल जाती है. कुछ लंबे समय तक अदालत में तलाक का मुकदमा लड़ते रह जाते हैं. कुछ औरतों को मुआवजे की रकम पाने के लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है. इसके अलावा तलाक के ही सिलसिले में पति पत्नी के बीच हो रहे झगडे़ का असर उनके बच्चों पर पड़ता है. पर तलाक का यह मसला बहुत ही दर्दनाक और दुःखद है. मैं कभी अपने किसी दुश्मन को भी तलाक का श्राप नहीं दूंगी. तलाक हर इंसान को बहुत ज्यादा डिप्रेशन में ले जाने वाला होता है. तलाक सिर्फ दो इंसानों यानी कि पति व पत्नी के बीच होता है, मगर उससे तमाम लोग प्रभावित होते हैं. पति व पत्नी का पूरा परिवार, सभी रिश्तेदार, दोस्त व बच्चे तथा पति पत्नी के दूसरे रियतेदारों को भी दर्द के अहसास से गुजरना पड़ता है.

यानी तलाक किसी को नहीं लेना चाहिए?

– जहां तक संभव हो सके तलाक लेने से बचने का पूरा प्रयास किया जाना चाहिए. मगर हालात जब ऐसे बन जाएं कि तलाक के अलावा दूसरा कोई चारा ना हो, तो औरत को बहुत मजबूत बनना चाहिए. ऐसे वक्त में पारिवारिक सदस्यों से सपोर्ट  मिलता है, तो कभी उन्हें सायकोलाजिकल थैरेपी लेकर उस हादसे से उबरने की ताकत मिलती है. कभी दोस्तों के साथ समय बिताने पर भी राहत मिलती है. मेरी राय में तलाक के बाद सपोर्ट सिस्टम बहुत जरूरी होता है. पर जब आप अमरीका में रह रहे होते हैं, तो आपके पास सपोर्ट सिस्टम नहीं होता है. वहां आप पूरी तरह से अकेले होते हैं. अमरीका में आप जब चाहें, तब लोगों से बात भी नहीं कर सकते हैं. क्योंकि पता चला कि जिनसे आप बात करना चाहते हैं तो वह काम व्यस्त होते हैं. उनका अपना परिवार व बच्चे भी हैं. इसी के चलते अमरीका में सायकोलाजिकल थैरेपी लेने का प्रचलन बहुत ज्यादा है.

पर तमाम लोग यह कहते पाए जाते हैं कि यदि हम साथ साथ रहते हुए खुश नहीं हैं, तो अलग हो जाना ही बेहतर है. आप क्या सोचती हैं?

– यहां पर मैं यही कहना चाहूंगी कि हर इंसान और हर पति पत्नी के रिश्ते अलग होते हैं. हर किसी के हालात, सोच अलग होती है. इसलिए किसी के इस तरह के बयान पर मेरी प्रतिक्रिया देना उचित नहीं है. मुझे लगता है कि हर तलाक के पीछे अलग परिस्थितियां और अलग सोच होती है. हर किसी की जिंदगी की अपनी अलग कहानी होती है. पर तलाक लेते हुए पति पत्नी दोनों को समझ लेना चाहिए कि उनके दुखद परिणाम उन्हें झेलने पडे़ंगे. यदि उनके बच्चे हैं, तो उन पर भी इसका बुरा असर पडे़गा. ऐसे में वह इन सबके साथ कैसे सामंजस्य बैठाएंगे, यह वह पहले सोच लें. कई बार लोग अपने आपको बदलना नहीं चाहते. इसलिए वह एक रिश्ता खत्म कर दूसरे रिश्ते की तरफ भागते हैं. कुछ लोग अकेले रहना पसंद करते हैं. अब मान लीजिए आप तलाक नहीं लेते हैं, साथ में रहते हुए हर दिन कई कई घंटे झगड़ते रहते हैं, तो इसका पति पत्नी दोनों की मानसिक स्थिति व इनके स्वास्थ्य पर गलत असर पड़ता है. हर दिन के झगड़े का बच्चों पर भी गलत असर पड़ता है. ऐसे में भी तलाक लेकर अलग होना जाना श्रेष्ठ लगता है.

आपके बच्चे हैं या नहीं?

– नहीं हैं. मैं यहां स्पष्ट कर दूं कि तलाक के बाद मेरे पूर्व पति के साथ कोई कटुता वाले संबंध नहीं हैं. वह मेरे दोस्त हैं. पर यह मान लेना कि हमारा बच्चा नहीं है, इसलिए तलाक से समस्या नहीं होगी, गलत है.

आपके अनुसार कब किस हद तक एक औरत को तलाक तक नही पहुंचना चाहिए?

– सही मायनों में इसका जवाब देना मेरे लिए उचित नहीं है. क्योंकि यह मसला पूरी तरह से हर औरत का अपना निजी मसला है. किसी के भी निजी मसले में दखलंदाजी करना उचित नहीं होता. 

अब आपकी जिंदगी किस तरह से गुजर रही है?

– मनोचिकित्सक की मदद से मेरी जिंदगी से सारा गम व अवसाद खत्म हो चुका है. मैंने अपनी जिंदगी को नए सिरे जीना शुरू कर दिया है. एक तरफ मैंने अपनी कंपनी ‘‘ग्लोबल आई एन सी’’ खोलकर मनोरंजन जगत के क्षेत्र में ही काम करना शुरू किया है. तो दूसरी तरफ अभिनय में सक्रियता बढ़ा दी है. अब हौलीवुड और बौलीवुड दोनों जगह की फिल्मों में अभिनय कर रही हूं. इसके अलावा घर पर भी नए दोस्त ले आयी हूं.

अभिनय जगत में किस तरह की सक्रियता है?

– मैंने 2015 में प्रदर्शित बौलीवुड फिल्म ‘‘एबीसीडी 2’’ में अभिनय किया था. अभी बौलीवुड फिल्म ‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’ की है. इसके अलावा मैंने एक डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘‘सेव हर’’ की है. जिसमें मैंने अपनी आवाज दी है. यह हैदराबाद की एक लड़की को यौन शोषण से बचाने पर आधारित है, जिसे उसके परिवार के लोग ही वेश्यावृत्ति के लिए बेच देते हैं. जबकि कुछ समय पहले मेरी हौलीवुड की साइंस फिक्शन फिल्म ‘‘वन अंडर द सन’’ अमरीका व दुबई में प्रदर्शित हुई है. भारत में अभी तक इस फिल्म को प्रमोट नहीं किया गया. इसमें मैंने कल्पना चावला जैसी एक अंतरिक्ष यात्री कैथरीन का किरदार निभाया है, जो कि मंगल ग्रह पर जाती है. जब वह वापस आती है, तो उसे मंगल ग्रह भेजने वाली कपंनी ही उसकी दुश्मन बन जाती है और अब वह उसे मारना चाहती है. लेकिन मेरे किरदार में कुछ सुपर पावर आ गए हैं.

अपनी कंपनी “ग्लोबल आई एन सी’’ के माध्यम से किस तरह का काम कर रही हैं?

– मेरी यह एक छोटी सी कंपनी है, जिसकी मैं सीईओ हूं. जिसके चलते सारे निर्णय मुझे ही लेने होते हैं. इस कंपनी के तहत मैं कई तरह के इवेंट करती हूं. फिल्मों के लिए कलाकारों की कास्टिंग करती हूं. साजिद नाडियादवाला की फिल्म ‘कमबख्त इश्क’ के लिए मैंने सिल्वेस्टर स्टेलोन व दूसरे कलाकारों की कास्टिंग की थी. अभी मैंने लेस्बन की एक कंपनी के लिए निकोल किडमैन को ब्रांड अम्बेसेडर बनवाया है. फिल्म ‘जल’ की कैम्पेनिंग मेरी कंपनी ने की थी. मैंने अमरीका में रेडियो स्टेशन खोल रखा है. यानी कि हमारी कंपनी मनोरंजन जगत से जुड़े काम कर रही है. अब मैं ब्रांडिंग में जा रही हूं. मसलन, कोई कंपनी असफल हो चुकी है, तो हम उसे रीलांच करेंगे.

आप लक पर कितना यकीन करती हैं?

– बहुत ज्यादा. आप बहुत बेहतरीन कलाकार हो सकते हैं, पर आपका समय सही नही है, तो सब बेकार.

आपने अभी कहा कि आपके घर पर आपके कुछ नए दोस्त हैं. इनके बारे में बताएंगी?

– मेरे घर पर कुत्ता बिल्ली और एक ड्रैगन है. देखिए,जब मैं भारत में थी, उस वक्त मुझे छिपकली से बहुत डर लगता था. अब कम डरती हूं. पहले मेरी सोच थी कि छिपकली को जिंदा रहने का कोई हक नहीं है. लेकिन अमरीका में रहते हुए मेरी सोच बदल गयी. अमरीका में जानवरों, पक्षियों को बहुत ज्यादा महत्व दिया जाता है. वहां पर जानवर व पक्षी को पालने पर जोर दिया जाता है. इसलिए मैंने ड्रैगान को भी पालने का निर्णय लिया. इसका नाम है-रेड. यह आस्ट्रेलियन होते हैं और यह अपना तुंह फूला लेते हैं. दांत नहीं होते हैं. यह हमेशा शांत रहते हैं. बुद्धा की तरह. इन पर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता. इन्हे बाहर घुमाने के लिए ले जाने की जरुरत नहीं पड़ती.

वैज्ञानिक विधि द्वारा मिर्च की पौधशाला

हर दिन इस्तेमाल की जाने वाली मिर्च की खेती बरसात में जुलाई से अक्तूबर तक, सर्दी में सितंबर से जनवरी तक और जायद मौसम में फरवरी से जून तक की जाती है. मिर्च को सुखा कर बेचने के लिए सर्दी के मौसम की मिर्च का इस्तेमाल होता?है. मिर्च की खासीयत यह है कि यदि पौध अवस्था में ही इस की देखभाल ठीक से कर ली जाए तो अच्छा उत्पादन मिलने में कोई शंका नहीं होती है. भरपूर सिंचाई समयानुसार करने से ज्यादा फायदा लिया जा सकता है. टपक सिंचाई अपनाने से मिर्च की फसल से दोगुनी उपज हासिल की जा सकती है. टपक सिंचाई से 50-60 फीसदी जल की बचत होती है और खरपतवार से नजात मिल जाती है.

मिर्च की नर्सरी ऐसे लगाएं

पौधशाला, रोपणी या नर्सरी एक  ऐसी जगह?है, जहां पर बीज या पौधे के अन्य भागों से नए पौधों को तैयार करने के लिए सही इंतजाम किया जाता है. पौधशाला का क्षेत्र सीमित होने के कारण देखभाल करना आसान व सस्ता होता है.

पौधशाला के लिए जगह का चुनाव

* पौधशाला के पास बहुत बड़े पेड़ न हों.

* जमीन उपजाऊ, दोमट, खरपतवार रहित व अच्छे जल निकास वाली हो, अम्लीय क्षारीय जमीन का चयन न करें.

* पौधशाला में लंबे समय तक धूप रहती हो.

* पौधशाला के पास सिंचाई की सुविधा मौजूद हो.

* चुना हुआ क्षेत्र ऊंचा हो ताकि पानी न ठहरे.

* एक फसल के पौध लगाने के बाद दूसरी बार पौध उगाने की जगह बदल दें यानी फसलचक्र अपनाएं.

क्यारियों की तैयारी व उपचार

पौधशाला की मिट्टी की एक बार गहरी जुताई करें या फिर फावड़े की मदद से खुदाई करें. खुदाई करने के बाद ढेले फोड़ कर गुड़ाई कर के मिट्टी को?भुरभुरी बना लें और उगे हुए सभी खरपतवार निकाल दें. फिर सही आकार की क्यारियां बनाएं. इन क्यारियों में प्रति वर्गमीटर की दर से 2 किलोग्राम गोबर या कंपोस्ट की सड़ी खाद या फिर 500 ग्राम केंचुए की खाद मिट्टी में अच्छी तरह से मिलाएं. यदि मिट्टी कुछ भारी हो तो प्रति वर्गमीटर 2 से 5 किलोग्राम रेत मिलाएं.

मिट्टी का उपचार

जमीन में विभिन्न प्रकार के कीडे़ और रोगों के फफूंद जीवाणु वगैरह पहले से रहते?हैं, जो मुनासिब वातावरण पा कर क्रियाशील हो जाते?हैं व आगे चल कर फसल को विभिन्न अवस्थाओं में नुकसान पहुंचाते?हैं. लिहाजा नर्सरी की मिट्टी का उपचार करना जरूरी?है.

सूर्यताप से उपचार

इस विधि में पौधशाला में क्यारी बना कर उस की जुताईगुड़ाई कर के हलकी सिंचाई कर दी जाती है, जिस से मिट्टी गीली हो जाए. अब इस मिट्टी को पारदर्शी 200-300 गेज मोटाई की पौलीथीन की चादर से

ढक कर किनारों को मिट्टी या ईंट से दबा दें ताकि पौलीथीन के अंदर बाहरी हवा न पहुंचे और अंदर की हवा बाहर न निकल सके. ऐसा उपचार तकरीबन 4-5 हफ्ते तक करें. यह काम 15 अप्रैल से 15 जून तक किया जा सकता?है. उपचार के बाद पौलीथीन शीट हटा कर खेत तैयार कर के बीज बोएं. सूर्यताप उपचार से भूमि जनित रोग कारक जैसे फफूंदी, निमेटोड, कीट व खरपतवार वगैरह की संख्या में भारी कमी हो जाती है.

रसायनों द्वारा जमीन उपचार

बोआई के 4-5 दिनों पहले क्यारी को फोरेट 10 जी 1 ग्राम या क्लोरोपायरीफास 5 मिलीलीटर पानी के हिसाब से या कार्बोफ्यूरान 5 ग्राम प्रति वर्गमीटर के हिसाब से जमीन में मिला कर उपचार करते हैं. कभीकभी फफूंदीनाशक दवा कैप्टान 2 ग्राम प्रति वर्गमीटर के हिसाब से मिला कर भी जमीन को सही किया जा सकता?है.

जैविक विधि द्वारा उपचार

क्यारी की जमीन का जैविक विधि से उपचार करने के लिए ट्राइकोडर्मा विरडी की 8 से 10 ग्राम मात्रा को 10 किलोग्राम गोबर की खाद में मिला कर क्यारी में बिखेर देते?हैं. इस के बाद सिंचाई कर देते?हैं. जब खेत का जैविक विधि से उपचार करें, तब अन्य किसी रसायन का इस्तेमाल न करें.

बीज खरीदने में सावधानियां

* बीज अच्छी किस्म का शुद्ध व साफ हो, अंकुरण कूवत 80-85 फीसदी हो.

* बीज किसी प्रमाणित संस्था, शासकीय बीज विक्रय केंद्र, अनुसंधान केंद्र या विश्वसनीय विक्रेता से ही लेना चाहिए. बीज प्रमाणिकता का टैग लगा पैकेट खरीदें.

* बीज खरीदते समय पैकेट पर लिखी किस्म, उत्पादन वर्ष, अंकुरण फीसदी, बीज उपचार वगैरह जरूर देख लें ताकि पुराने बीजों से बचा जा सके. बीज बोते समय ही पैकेट खोलें.

बीज उपचार : बीज हमेशा उपचारित कर के ही बोने चाहिए ताकि बीज जनित फफूंद से फैलने वाले रोगों को काबू किया जा सके. बीज उपचार के लिए 1.5 ग्राम थाइरम, 1.5 ग्राम कार्बेंडाजिम या 2.5 ग्राम डाइथेन एम 45 या 4 ग्राम?ट्राइकोडर्मा विरडी का प्रति किलोग्राम बीज के हिसाब से इस्तेमाल करना चाहिए. यदि क्यारी की जमीन का उपचार जैविक विधि (ट्राइकोडर्मा) से किया गया है, तो बीजोपचार भी ट्राइकोडर्मा विरडी से करें.

बीज बोने की विधि : क्यारियों में उस की चौड़ाई के समानांतर 7-10 सेंटीमीटर की दूरी पर 1 सेंटीमीटर गहरी लाइनें बना लें और उन्हीं लाइनों पर करीब 1 सेंटीमीटर के अंतर से बीज बोएं. बीज बोने के बाद उसे कंपोस्ट, मिट्टी व रेत के 1:1:1 के 56 ग्राम थाइरम या केपटान से उपचारित मिश्रण से 0.5 सेंटीमीटर की ऊंचाई तक ढक देते?हैं. क्यारियों को पलवार से ढकना : बीज बोने के बाद क्यारी को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पुआल, सरकंडों, गन्ने के सूखे पत्तों या ज्वारमक्का के बने टटीयों से ढक देते हैं ताकि मिट्टी में नमी बनी रहे और सिंचाई करने पर पानी सीधे ढके हुए बीजों पर न पड़े, वरना मिश्रण बीज से हट जाएगा और बीज का अंकुरण प्रभावित होगा.

सिंचाई : क्यारियों में बीज बोने के बाद 5-6 दिनों तक हलकी सिंचाई करें ताकि बीज ज्यादा पानी से बैठ न जाएं. बरसात में क्यारी की नालियों में मौजूद ज्यादा पानी को पौधशाला से बाहर निकालना चाहिए. क्यारियों से पलवार घासफूल तब हटाएं जब तकरीबन 50 फीसदी बीजों का अंकुरण हो चुका हो. बोआई के बाद यह अवस्था मिर्च में 7-8 दिनों बाद, टमाटर में 6-7 दिनों बाद व बैगन में 5-6 दिनों बाद आती है.

खरपतवार नियंत्रण : क्यारियों में उपचार के बाद भी यदि खरपतवार उगते?हैं, तो समयसमय पर उन्हें हाथ से निकालते रहना चाहिए. इस के लिए पतलीलंबी डंडियों की भी मदद ली जा सकती है. बेहतर रहेगा अगर यदि पेंडीमिथालिन की 3 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में घोल कर बोआई के 48 घंटे के भीतर क्यारियों में छिड़क दें.

पौध विरलन : यदि क्यारियों में पौधे अधिक घने उग आएं तो उन को 1-2 सेंटीमीटर की दूरी पर छोड़ते हुए अन्य पौधों को छोटी उम्र में ही उखाड़ देना चाहिए, वरना पौधों के तने पतले व कमजोर बने रहते?हैं. घने पौधे पदगलन रोग लगने की संभावना बढ़ाते हैं. उखाड़े गए पौधे खाली जगह पर रोपे जा सकते?हैं.

पौध सुरक्षा?: पौधशाला में रस चूसने वाले कीट जैसे माहू, जैसिड, सफेद मक्खी व थ्रिप्स से काफी नुकसान पहुंचता है. विषाणु अन्य बीमारियों को फैलाते?हैं, लिहाजा इन के नियंत्रण के लिए नीम का तेल 5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में या डायमिथियेट (रोगोर) 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल कर बोआई के 8-10 दिनों और 25-27 दिनों बाद छिड़कना चाहिए. क्यारी और बीज उपचार करने के बाद भी यदि पदगलन बीमारी लगती है (जिस में पौधे जमीन की सतह से गल कर जमीन पर गिरने लगते हैं और सूख जाते?हैं), तो फसल पर मैंकोजेब या कैप्टान 2.5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें.

पौधे उखाड़ना : क्यारी में तैयार पौधे जब 25-30 दिनों के हो जाएं और उन की ऊंचाई 10-12 सेंटीमीटर की हो जाए और उन में 5-6 पत्तियां आ जाएं, तब उन्हें पौधशाला से खेत में रोपने के लिए निकालना चाहिए. पौध निकालने से पहले उन की हलकी सिंचाई कर देनी चाहिए. सावधानी से पौधे निकालने के बाद 50 या 100 पौधों के बंडल बना लें.

पौधों का रोपाई से पहले उपचार : पौधशाला से निकाले गए पौध समूह या रोपा की जड़ों को कार्बेंडाजिम बाविस्टीन 10 ग्राम प्रति लीटर पानी में बने घोल में 10 मिनट तक डुबोना चाहिए, रोपाई के बाद सिंचाई जरूर करें. गरमी के मौसम में कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर व पौधे से पौधे की दूरी 30 सेंटीमीटर और बरसात में कतार से कतार की दूरी 60 सेंटीमीटर व पौधे से पौधे की दूरी 45 सेंटीमीटर रखें. मिर्च से अधिकतम उत्पादन हासिल करने के लिए उस की नर्सरी लगा कर पौधशाला में स्वस्थ पौधे तैयार करने का अपना अलग महत्त्व है. जितनी स्वस्थ नर्सरी रहेगी, उतनी ही अच्छी रोप मिलेगी.

मुकेश तोपवाल व अभिषेक बहुगुणा

इसलिए पिट रही सचिन की बायोपिक

क्रिकेट के भगवान के खिताब से नवाज दिये गए सचिन तेंदुलकर की बायोपिक ए बिलियन ड्रीम्स उम्मीद के मुताबिक न तो पसंद की गई और न ही सचिन के नाम के हिसाब से बॉक्स ऑफिस पर पैसा इकट्ठा कर पाई, तो इसकी एक बड़ी वजह फिल्म का डाक्यूमेंटरी होना है जिसमें रोमांस नाम का वह तत्व नहीं है जिसके लिए दर्शक थियेटर तक जाता है.

फिल्म इंडस्ट्री में फर्स्ट डे कलेक्शन की अपनी अलग अहमियत होती है जिसे देख फिल्मी दुनिया के अर्थ पंडित भविष्यवाणी करते हैं कि फिल्म कितना कारोबार करेगी. फ़र्स्ट डे कलेक्शन के पैमाने पर देखें तो महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक धोनी – द अनटोल्ड स्टोरी ने रिकार्ड 21.30 करोड़ रुपयों की कमाई की थी, जबकि मशहूर धावक मिल्खा सिंह की ज़िंदगी पर बनी फिल्म भाग मिल्खा भाग ने 8.65 करोड़ रुपये की ओपनिंग दी थी, इस लिहाज से सचिन के सपने बिखरे ही कहे जाएंगे, बावजूद इस सच के कि महज 30 करोड़ की लागत से बनी ए बिलियन ड्रीम्स,  निर्माता रवि भगचदका को मालामाल तो कर जाएगी, क्योंकि यह सचिन की बायोपिक है जिसे देखने ही टिकट रख दिया जाये तो लोग पैसा देंगे.

यही वो फर्क है जो बताता है कि फिल्म और सेलिब्रिटी में क्या फर्क होता है और दर्शक फिल्म में क्या चाहता है. सचिन की जिंदगी यानि कहानी में बहुत ज्यादा पेंचों खम नहीं हैं, हर कोई जानता है कि वह गली में क्रिकेट खेलने वाला मध्यमवर्गीय लड़का था, जो चमत्कारिक ढंग से क्रिकेट का भगवान बन गया.  निसंदेह उसमें प्रतिभा थी, पर तकनीक के मामले में वह अपने साथी विनोद कांबली के सामने ही कहीं नहीं ठहरता था, फिर भी वह चल निकला तो इसमें प्रतिभा से ज्यादा किस्मत और रिकार्डों के लिए खेलने की चालाकी थी. क्रिकेट के कारोबारी  दांव पेंचों से परे देखें तो धोनी ए अनटोल्ड स्टोरी के चलने की एक अहम वजह उसमें दो नायिकाओं का होना भी थी जिसमें एक की असमय मौत हो जाती है.  यह मौत  नायक को जिंदगी भर सालती भी रहती है. पुराने जमाने के इस विरह जिसे आजकल तड़प कहा जाता है को अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने पर्दे पर बेहद सहज तरीके से जिया था. दर्शक चाहता है कि उसके आदर्श नायक की ज़िंदगी में ऐसा कुछ भी हो जो उसकी या उसके आसपास किसी की जिंदगी से मेल खाता हुआ हो और अगर वह सफल या असफल रोमांस हो तो बायोपिक में जान आ जाती है.

भाग मिल्खा भाग में सिर्फ दौड़ नहीं थी, बल्कि खेलों की दुनिया का एक कड़वा सच भी था कि कैसे खेल अधिकारी व संगठन मनमानी करते हैं और खेल के अलावा प्यार में भी असफल एक युवा धावक की मानसिकता क्या होती है. मिल्खा सिंह आज भी मानते हैं कि पहला प्यार तो पहला प्यार होता है कोई उसे भूल नहीं सकता. अभिनेता फरहान खान ने एक धावक के कम बल्कि एक मायूस प्रेमी के किरदार को ज्यादा जिया था जिसके लिए वे खासे सराहे भी गए थे.

सचिन ए बिलियन ड्रीम्स में यह सब (जिसे मसाला कहने में कोई झिझक नहीं होना चाहिए)  नहीं है, इसलिए दर्शक और समीक्षक उसे बोर भी करार दे रहे हैं. कहने का मतलब यह नहीं कि सचिन को रोमांस करते दिखाया जाना चाहिए था, बल्कि यह है कि बिना रोमांस बाली बायोपिक अगर  बनाई जाएगी तो वह ज्यादा चलेगी नहीं, क्योंकि उसमे दर्शक खुद को कहीं फिट नहीं (कर) पाता. आज अगर विराट कोहली की बायोपिक बनाई जाये, तो वह तय है सचिन तो दूर धोनी और मिल्खा को भी पछाड़ देगी, क्योंकि उसमें एक अलग किस्म का रोमांस होगा.

क्रिकेट कैसे खेलें जैसी किसी किताब का चित्रण करना जोखिम भरा काम है, जो सचिन ने अपनी लोकप्रियता को देखते उठा लिया तो कोई गुनाह नहीं कर डाला पर अभी तक का अनुभव यह भी बताता है कि बायोपिक की लोकप्रियता की एक मांग यह भी होती है कि मुख्य किरदार कोई और निभाए जिससे देखने वालों को लगे कि वे जीवनी नहीं बल्कि फिल्म देख रहे हैं, जो मनोरंजन की उनकी भूख शांत कर रही है और इस फिल्म के निर्देशक व लेखक जेम्स अर्सकिन भारतीय दर्शक की इस परम्परागत नब्ज को टटोलने में मात तो खा गए हैं. अब यह भी किस्मत की बात है कि फिल्म सिर्फ सचिन तेंदुलकर को देखने देखी जा रही है.         

 

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