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लाल को लेकर लाल पीली होती कांग्रेस

मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन मंत्री लाल सिंह आर्य के खिलाफ भिंड जिले की एक अदालत ने हत्या के एक चर्चित मामले में अपराधी मानते उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया है, इसके बाद भी मुख्य मंत्री शिवराजसिंह चौहान उन्हे बर्खास्त नहीं कर रहे हैं. इसे लेकर प्रदेश कांग्रेस ने आक्रामक रुख अख़्तियार कर रखा है, लेकिन हाल फिलहाल उसकी आवाज नक्कारखाने में तूती जैसी साबित हो रही है. कांग्रेसी सीएम हाउस और राजभवन पर धरने प्रदर्शन कर चुके हैं और अब जनता के बीच जाने की तैयारी कर रहे हैं, क्योंकि मुद्दे में दम है.

विधान सभा में कांग्रेसी नेता अजय सिंह इस सुनहरे मौके को भुनाने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं. उनकी इन दलीलों में वजन तो है कि आर्य का मंत्री पद पर बने रहना असंवैधानिक है और भाजपा अब मनमानी पर उतारू हो आई है. राज्यपाल ओमप्रकाश कोहली के नाम दिये ज्ञापन में कांग्रेस ने साफ कहा है कि राज्य मंत्रिमंडल का ऐसा सदस्य जो हत्या का आरोपी हो पद पर कैसे रह सकता है. संवैधानिक प्रमुख होने के नाते राज्यपाल को यह अधिकार है कि वे लाल सिंह आर्य को मंत्रिमंडल से बरख्वास्त करें.

अपनी बात में दम लाने अजय सिंह ने ऐसे ही दो पुराने मामलों का हवाला देते कहा है कि उमा भारती के सीएम रहते कर्नाटक की हुबली द्वारा जारी एक समन जारी होने पर उन्होंने पद से त्यागपत्र दे दिया था और एक अन्य मंत्री अनूप मिश्रा से भाजपा ने इस्तीफा ले लिया था जबकि वे सीधे आरोपी नहीं थे.

यह है मामला

13 अप्रेल 2009 की रात लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेसी नेता माखनलाल जाटव की गोहद इलाके के छरेंटा गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जाटव के परिजनों ने लाल सिंह आर्य का नाम बतौर मुजरिम लिया था लेकिन पुलिस ने उन्हें अभियुक्त नहीं बनाया था. इसके बाद जांच में सीबीआई ने भी आर्य को क्लीन चिट दे दी थी. बाद में जाटव के परिजनों ने धारा 319 के तहत आवेदन लगाया था जिसकी सुनवाई के बाद अदालत ने धारा 302 के तहत आर्य को मुजरिम करार देते वारंट भी जारी कर दिया था.

हमलावर हुई कांग्रेस

इस पर वजूद की लड़ाई लड़ रही कांग्रेस ने एकजुट होकर लाल सिंह आर्य को बर्खास्त करने की मुहिम छेड़ दी है, पर सीएम हाउस पर प्रदर्शन करते वक्त उन्हें इंसाफ की जगह पुलिस की लाठियां मिलीं तो वे और उग्र हो उठे और राजभवन पहुंच गए, लेकिन वहां भी कोई सुनवाई नहीं हुई तो इसे जन आंदोलन बनाने की तैयारी उसने शुरू कर दी है.

दिक्कत में शिवराज

आखिर शिवराज सिंह चौहान क्यों लाल सिंह आर्य को नहीं हटा रहे, इस बात को लेकर अफवाहों और अटकलों का बाजार गरम है. आम राय यह बन रही है कि आर्य के पद पर बने रहने से भाजपा की इमेज खराब हो रही है. दागियों से परहेज करने का दम भरने वाली पार्टी क्यों दिलेरी नहीं दिखा पा रही, जबकि उसके पास अच्छा मौका था कि वह आर्य को मंत्री पद से हटकर एक मिसाल कायम कर सकती थी. इस बात का जवाब साफ है कि अब नैतिकता, अनैतिकता और अच्छे,  बुरे के माने अपनी मनमर्जी से तय कर भाजपा और शिवराज सिंह आम लोगों की भावनाओं को दरकिनार कर रहे हैं जो उन्हें आगे चलकर महंगा भी पड़ सकता है.

उधर समर्थन मिलते देख कांग्रेस जोश में है और सूबे भर में आंदोलन की तैयारियां कर रही है. शिवराज सिंह को लग रहा है कि अगर कांग्रेस के दबाब में आकर आर्य को बाहर का रास्ता दिखाया तो ज्यादा किरकिरी होगी. देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस इसे जन आंदोलन बना पाने में कामयाब हो पाती है या नहीं और ज्यादा बवंडर मचा तो शिवराज उससे निबटने कौन सा ऐसा रास्ता चुनते हैं जिससे सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे. अगर अदालत ने लाल सिंह आर्य की गिरफ्तारी को लेकर और कडा रुख दिखाया तो फिर जरूर भाजपा को वही करने मजबूर होना पड़ेगा जिससे आज वह बचने की कोशिश में लगी है. अगले साल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर कांग्रेस को खोई जमीन हासिल करने एक अच्छा मौका मिल गया है, जिससे वह सरकार को कटघरे में खड़ा कर पाई तो फायदे की फसल भी काटने का मौका उसे मिलेगा.       

जल संरक्षण से आई खुशहाली

खराब मौसमी हालात यानी शरीर झुलसा देने वाली गरमी, कम बारिश और रेतीली जमीन के बीच जीवन गुजारने वाले झुंझुनू जिले की चिड़ावा तहसील के लोग अब खुशहाली के रास्ते पर चलने लगे हैं, वरना कुछ अरसा पहले तक हालात काफी खराब थे. यहां का जमीनी पानी फ्लोराइड मिला होने की वजह से पीने लायक नहीं था. लोग इस के इस्तेमाल की वजह से वक्त से पहले ही बूढ़े नजर आते थे. जमीन से लगातार पानी निकालने की वजह से जल स्तर 45 फुट से घट कर 180 फुट पर पहुंच गया था. किसानों को सिंचाई के लिए जरूरत भर का पानी नहीं मिलने की वजह से कृषि उत्पादन लगातार कम होता जा रहा था.

चिड़ावा तहसील इलाके की इस समस्या के हल के लिए रामकृष्ण जयदयाल डालमियां सेवा संस्थान ने जन सहभागिता के आधार पर योजना तैयार की, जिस के तहत जल संरक्षण के लिए किए गए उपायों के बाद एक भी बूंद गांव का पानी बेकार में बह कर नहीं जाता. बारिश के पानी को घरों में बनाए गए पक्के टांकों (कुंडों) में भरा जाता है, जिसे गांव वाले पूरे साल पीने के लिए इस्तेमाल करते हैं. यह पानी मीठा होता है व फ्लोराइड मुक्त होने की वजह से इस के इस्तेमाल से लोगों को फ्लोरोसिस जैसी बीमारी नहीं होती.

योजना के तहत संस्थान ने बारिश के पानी को जमा करने के लिए सभी पक्के मकानों की छतों को प्लास्टिक के पाइपों से जोड़ा है और पाइपों को पक्के टांकों से जोड़ कर पुनर्भरण कूपों से जोड़ा है. इसी तरह जमीन पर बहने वाले बारिश के पानी को तालाबों तक लाया गया है, जिस से तालाब पानी से लबालब भर जाते हैं. तालाब के लबालब होने से यह पानी जमीन में पहुंच कर जलस्तर को बढ़ा देता है. जलस्तर बढ़ने की जांच के लिए संस्थान ने पीजो मीटर लगा रखा है. तालाब में भरे बारिश के पानी से आसपास की जमीन का जल स्तर

बढ़ जाता है, जिस से किसानों को उन के नलकूपों से सिंचाई के लिए ज्यादा पानी मिलता है. ज्यादा अरसे तक पानी मिलने की वजह से फसल उत्पादन में भी कई गुना इजाफा हुआ, जिस से गांव में खुशहाली दिखाई देने लगी है.

गोविंदपुरा की तरक्की की कहानी ज्यादा पुरानी नहीं है. करीब 7 साल पहले रामकृष्ण जयदयाल डालमियां संस्थान ने इस गांव की दिक्कतों को जान कर सभी गांव वालों के सहयोग के आधार पर योजना की शुरुआत की थी और गांव के सभी पक्के मकानों को प्लास्टिक के पाइपों से जोड़ कर बारिश का पानी जमा करने के लिए 20000 लीटर कूवत का पक्का कुंड बनवाया था. गांव में इस तरह जनसहभागिता के आधार पर 85 कुंडों को बनवाया गया. इन कुंडों से हर परिवार को साल भर भरपूर मात्रा में पीने का पानी मिल रहा है.

कुंडों के भरने के बाद बहने वाले पानी को पाइप लाइनों से जोड़ कर सूखे कुओं तक ले जाया गया है. इस के साथ ही गांव के रास्तों में बहने वाले बारिश के पानी को भी भूमिगत जल तक पहुंचाने के लिए गांवों में तालाब भी बनवाए गए हैं. इस के अलावा घरों के बाथरूम व रसोई से निकलने वाले गंदे पानी को जमा करने के लिए हर घर में कच्ची कुई बनवाई गई है, जिस में घर का गंदा पानी एक फिल्टरनुमा जाली से छन कर जाता है. इस कुई में जमा गंदा पानी भी भूमिगत जल में मिल कर उस में इजाफा करता है और गंदे पानी से गांवों के रास्तों व सड़कों पर गंदगी नहीं फैलती.

तालाब के किनारे लगाए गए पीजो मीटर से हर महीने के पहले दिन भूमिगत जल स्तर की जांच के आंकड़े संस्थान द्वारा लिए जाते हैं. आकड़ों से पता चलता है कि गोविंदपुरा गांव में पानी बचाने के उपाय शुरू करने के बाद जलस्तर में कोई गिरावट नहीं हुई है. डालमिया संस्थान द्वारा गोविंदपुरा गांव में बनाए गए पुनर्भरण कूपों के पास जलदाय विभाग द्वारा नलकूप लगाए गए हैं. अब नलकूपों से ज्यादा समय तक पानी हासिल किया जा रहा है. इन नलकूपों के पानी में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा होने की वजह से गांव के लोग इस पानी का इस्तेमाल केवल नहानेधोने जैसे कामों में ही करते हैं. पीने और खाना पकाने के लिए तो कुंडों का पानी ही इस्तेमाल किया जाता है.

संस्थान ने गोविंदपुरा गांव में शुरू किए गए पानी बचाने के सिस्टम के रखरखाव के लिए भी गांव के लोगों की ग्राम विकास समिति का गठन कर रखा है. इस के लिए संस्थान तकनीकी मार्गदर्शन देता है. गोविंदपुरा गांव की तरह डालमियां संस्थान ने चिड़ावा तहसील के गांवों में इसी तरह का पानी जमा करने का इंतजाम किया है. वहां भी गांवों में बारिश के पानी को जमा करने के लिए टांकों व कूपों को बनाया गया है.

इंटरनेट पर लीक हुआ इस बालीवुड एक्ट्रेस का ये वीडियो

मां बाप ने कहा, शूट करो मेरी बेटी का न्यूड सीन. जी हां इस बॉलीवुड की इस एक्ट्रेस के मां बाप ने ही उसको न्यूड सीन करने के लिए प्रेरित किया है. इन दिनों मराठी फिल्म एक्ट्रेस नेहा महाजन का एक न्यूड वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. इस वीडियो में नेहा ने अश्लीलता की सारी हदें पार कर दी हैं. इसमें नेहा बेड से बाथरूम में जाती दिख रही हैं, लेकिन इस दौरान उन्होंने एक कपड़ा भी नहीं पहन रखा है. नेहा ने यह न्यूड वीडियो एक मलयालम फिल्म ‘छायम पोस्सिया विदु’ के लिए शूट किया था. लेकिन इस आपत्तिजनक सीन के कारण फिल्म को सेंसर बोर्ड ने पास नहीं किया.

साल 2015 में ‘द पेंटेड हॉउस’ नॉवेल पर बेस्ड ‘छायम पोस्सिया विदु’ नाम की एक मलयालम फिल्म बनी थी. फिल्म में कई न्यूड सीन होने की वजह से सेंसर बोर्ड ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी. सेंसर बोर्ड ने फिल्म को सर्टिफिकेट देने के लिए इन दृश्यों को हटाने की शर्त रखी, जिसे फिल्म के निर्माताओं ने खारिज कर दिया था. जिसके बाद सेंसर बोर्ड से फिल्म को इंडिया में बैन कर दिया था. लेकिन एक साल बाद फिल्म के ये एडल्ट सीन इंटरनेट पर लीक हो गए हैं. लीक हुए इस वीडियो में नेहा बिना कपड़ों के बाथरूम और बेड रूम में नजर आ रही हैं.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो फिल्म का कुछ हिस्सा अचानक इंटरनेट पर लीक हो गया है. कुछ सेकेंड्स का ये वीडियो बेहद अश्लील है. वीडियो वायरल होने के बाद से नेहा सुर्खियों में आ गई हैं. इस पूरे मामले पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा, “किरदार की जरुरत थी, इसलिए न्यूड सीन किया. लेकिन इस सीन के लिए मैंने अपने माता-पिता से पहले ही चर्चा की थी. इसमें कोई अश्लीलता नहीं है.”

फैशन फ्लोरल प्रिंट का

फ्लोरल प्रिंट सदाबहार फैशन है यानी इस का चलन कभी खत्म नहीं होता. समय के साथ इस फैशन की लोकप्रियता पहले से और अधिक बढ़ गई है. गरमी के मौसम में आप फ्लोरल प्रिंट वाले परिधानों के बगैर अपने वार्डरोब की कल्पना नहीं कर सकतीं. गरमी के मौसम में जब सब कुछ नीरस लगने लगता है तब आप के परिधानों पर खिलते फूल आप में नया जोश भर देते हैं और आप का मूड तरोताजा कर देते हैं.

मगर ज्यादातर महिलाओं को फ्लोरल प्रिंट के स्टाइल की थोड़ी गाइडैंस की जरूरत होती है. अकसर महिलाएं इस के साथ गलत मैचिंग वाले परिधान पहन कर इस आकर्षक पैटर्न के साथ अन्याय कर बैठती हैं, जिस से उन का लुक पूरी तरह बिगड़ जाता है. इसी संबंध में यहां कुछ टिप्स दिए जा रहे हैं:

लें बोल्ड ऐंड ब्यूटीफुल निर्णय

इतने वर्षों तक अपने वार्डरोब में मौजूद फ्लोरल डिजाइन से आप बोर हो गई हैं, तो अब वक्त आ गया है कि कुछ आकर्षक नए रंगों में कुछ नए पैटर्न शामिल कर लिए जाएं. फूलों के छोटेछोटे प्रिंटों वाले परिधानों को आकर्षक बड़े आकार वाले प्रिंटों और चटक रंगों में बदल लें, इस से आप के पुराने वार्डरोब में ताजगी लौट आएगी और आप का आकर्षक लुक सामने आएगा.

फ्लोरल शूज प्रयोग करें

जी हां, फ्लोरल शूज इन दिनों चलन में हैं और स्मार्ट महिलाओं के शू कैबिनेट में ये जरूर दिखेंगे. यदि आप ऐसे शूज प्रयोग करना पसंद करती हैं तो 3डी फ्लोरल पैटर्न भी चुन सकती हैं. फ्लोरल शूज के साथ ऐसे ही परिधान पहनें. ये अच्छे दिखेंगे. इन दिनों इस तरह के शूज मौल्स में आसानी से उपलब्ध है. इन्हें पहन कर निकलें और बोल्ड फैशन की शुरुआत करें.

फ्लोरल फौर्मल टीशर्ट

स्टाइलिश लुक के लिए फ्लोरल प्रिंटेड टीशर्ट भी एक अच्छा विकल्प है. फ्लोरल टीशर्ट के साथ सौलिड कलर का ट्राउजर पहनें या पसंदीदा डैनिम का चुनाव करें.

आमतौर पर हम फ्लोरल टीशर्ट को फौर्मल परिधान नहीं मानते, लेकिन यदि इसे सौलिड कलर्ड समर ब्लेजर, फौर्मल ट्राउजर और क्लोज्ड शूज के साथ पहना जाए तो आप को बहुत ही आकर्षक फौर्मल लुक मिल सकता है.

फ्लोरल मैक्सी ड्रैस पर भी करें गौर

फ्लोरल मैक्सी ड्रैस एक जबरदस्त स्टाइल स्टेटमैंट है. किसी भी कदकाठी की महिला इसे धारण कर सकती है. यह कैजुअल और सेमीफौर्मल अवसर दोनों के लिए अनुकूल है. रविवार की ब्रंच पार्टी या मूवी देखने के किसी कैजुअल दिन के लिए फ्लोरल मैक्सी ड्रैस पहनें. लोगों की निगाहें आप पर ही रहेंगी.

मिक्सिंग और मैच पर दें ध्यान

यदि आप फूलों के प्रिंट वाले फैशन को ले कर बहुत ज्यादा आश्वस्त नहीं हैं, तो फ्लोरल प्रिंट को एकदूसरे के साथ मिला कर प्रयोग करें. अतिरिक्त आकर्षण पाने के लिए चलन से बाहर हो चुके प्रिंट पर दूसरे प्रिंट का प्रयोग करें. आप की फ्लोरल पैंट और टौप से एक अलग लुक बनेगा और यह आप को सब से अलग आकर्षण देगा. छोटे और सूक्ष्म फ्लोरल प्रिंट के साथ उसी आकार के प्रिंट का मैच करें. बड़े तथा बोल्ड पैटर्न के साथ बड़े और बोल्ड प्रिंट को ही शामिल करें, ध्यान रहे कि प्रिंट का आकार भी उसी अनुरूप होना चाहिए.

फ्लोरल हैरम पैंट्स में दिखाएं खास अंदाज

फ्लोरल हैरम पैंट्स इन दिनों खूब चलन में है. गरमी के मौसम के लिए यह पैंट कूल और आरामदेह है. जब इस में फ्लोरल प्रिंट डाला जाता है तो इस का आकर्षण और बढ़ जाता है. यदि आप दुबलीपतली हैं, तो आप फ्लोरल पहन कर इतरा सकती हैं. प्रिंटेड हैरम के साथ कोई सौलिड कलर का टौप पहनें और पाएं अट्रैक्टिव लुक.

फ्लोरल पैंट के साथ बनें फैंसी

यदि आप ने कंप्लीट लुक के लिए सही रंग और पैटर्न का चयन किया है तो फ्लोरल पैंट बहुत आकर्षक लग सकती है. हलके सौम्य शेड वाली किसी फ्लोरल पैंट का चयन करें और इस के साथ लंबा टौप पहनें. इस के साथ पीप टो या सौफ्ट मेटैलिक कलर भी पहन सकती हैं. इस से पैंट की सुंदरता ही बढ़ेगी.

अपने फ्लोरल लुक को कंप्लीट करने के लिए ड्रैस से मैचिंग फूलों के प्रिंट वाले हेयर बैंड का प्रयोग कर सकती हैं. हेयर ऐक्सैसरीज का चलन लंबे समय तक बना रहता है. लड़कियां प्रिंटेड टर्बन नौट वाले हैडबैंड में कूल और आकर्षक लगती हैं.    

– मोनिका ओसवाल, ऐक्जीक्यूटिव डाइरैक्टर, मोंटे कार्लो फैशंस                                         

झूठी खबरें पाखंड का हिस्सा

आजकल दुनिया भर में खबरों पर एक घमासान सा शुरू हो गया है. महल्ले और पड़ोस की सी झूठी बातें अब गूगल, फेसबुक, व्हाट्सऐप, सोशल टैक्सटिंग के जरीए घंटे भर में पूरी दुनिया में फैल सकती हैं और महल्ले की अफवाह की तरह पता ही नहीं चलता कि भ्रामक या दहलाने वाले समाचार को सही माना या नहीं, क्योंकि यह कौन से पेड़ पर उगा पता ही नहीं होता.

सदियों से इस प्रकार का झूठ लोगों ने धर्मग्रंथों से गले से उतारा है और इस के सहारे अपनों को भी मारा और दूसरों को भी. बीच की सदियों में मुद्रित सुलभ सामग्री ने महल्ले की चटपटी बातों को फीका कर दिया था पर अब तो इन का अंधड़ आ गया है जो घंटे, 2 घंटे नहीं चलता, रातदिन चलता रहता है.

जिस तरह धर्मग्रंथों के झूठों ने लोगों की सदियों से जेबें ढीली कराई हैं उसी तरह आज झूठे समाचार, फेक न्यूज, से लोगों को बुरी तरह बरगलाया जा रहा है. चुनावों से पहले तो पार्टियां अब छद्म नामों से प्रचारकों की फौज को मैदान ए जंग में भेज देती हैं कि विरोधी के खिलाफ जी भर कर बोलो. चुन्नी चाची की ‘मैं ने तो सुना है भई तो कह दिया, क्या सच है क्या झूठ पता नहीं,’ की तर्ज पर अब कुछ भी कहीं भी कहा जा सकता है.

महिलाएं फेक न्यूज की ज्यादा शिकार हैं. हालांकि राजनीतिबाज ज्यादा रोते नजर आते हैं. महिलाओं को व्हाट्सऐप पर कोई फौर्मूला पढ़ने को दिया नहीं कि वे उसे अपनाने को दौड़ती हैं और दूसरों पर थोपने लगती हैं. खटाक से वह अपने सारे गु्रपों को फौरवर्ड कर दिया जाता है, अपनी मुहर के साथ मानो उन्होंने पुष्टि कर ली.

पढ़ीलिखी महिलाओं से भी इस तरह के फेक न्यूज पर बहस करो तो वे कन्नी काट जाती हैं कि उन्होंने तो बस फौरवर्ड किया था. इन दिनों भ्रामक जानकारी बुरी तरह फैलाई जा रही है. 100-200 मित्रों को ऊटपटांग संदेश भेजे जा रहे हैं, उपदेश दिए जा रहे हैं. धर्मांध इन में ज्यादा होते हैं. अत: कभी व्हाट्सऐप, फेसबुक पर शिवजी को प्रणाम किया जाता है, तो कभी साई बाबा के चमत्कार पर चरण छू लिए जाते हैं.

धर्म के पाखंड का हिस्सा बन गए व्हाट्सऐप और फेसबुक सब से ज्यादा अज्ञान और अतर्क के भंडार बन गए हैं. अमेरिका व यूरोप फेक न्यूज के पीछे पड़े हैं पर वहां भी उन्हें नेताओं की छवि के खराब होने की ज्यादा चिंता है, पीपिंग टौम्स को कंट्रोल करने की कम. व्हाट्सऐप और फेसबुक अब टैक्स्ट के साथ शौर्ट मूवीज भी दिखाने लगे हैं और भ्रामक घटनाओं को काटछांट कर परोसा जा रहा है और भुक्खड़ पंडों की तरह सत्य की लाश पर मृत्यु भोजों में उन्हें खूब खाया जा रहा है.

यह गलत प्रचार का ही नतीजा है कि दुनिया के कितने ही देशों में कट्टरपंथियों की सरकारें बन गई हैं और 100 साल के लोकतंत्र के बाद तानाशाहीतंत्र लौटने लगा है.

महिलाओं को तानाशाही में ज्यादा जुल्म सहने पड़ते हैं और इस की तसवीरें सीरिया, लीबिया, इराक के भागे रिफ्यूजी कैंपों में दिख जाएंगी. यह आप के पड़ोस में नहीं होगा इस की गारंटी नहीं है.

सनक बदला लेने की

20 दिसंबर, 2016 को पूरे 3 साल बाद हरप्रीत कौर तेजाब कांड के नाम से मशहूर मामले का फैसला सुनाया जाना था, इसलिए लुधियाना के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री संदीप कुमार सिंगला की अदालत में अन्य दिनों की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही चहलपहल थी. इस की वजह यह थी कि अपने समय का यह काफी चर्चित मामला था. इस की वजह यह थी कि यह तेजाब कांड उस समय घटित हुआ था, जिस दिन हरप्रीत कौर की शादी होने वाली थी.

दुख की बात यह थी कि इस मामले में दोष किसी और का था, दुश्मनी किसी और से थी और सजा भुगतनी पड़ी थी निर्दोष हरप्रीत कौर को. तमाम पीड़ा सहने के बाद उस की असमय मौत भी हो गई थी. इस मामले में क्या सजा सुनाई गई, उस से पहले आइए इस पूरे मामले के बारे में जान लें.

पंजाब के जिला बरनाला के ढनोला रोड पर स्थित है बस्ती फत्तहनगर. जसवंत सिंह यहीं के रहने वाले थे. उन्होंने अपने घर के एक हिस्से में सैलून खोल रखा था. उसी की कमाई से परिवार का गुजरबसर हो रहा था. उन के परिवार में पत्नी दविंदर कौर के अलावा 2 बेटे और एक बेटी हरप्रीत कौर थी.

बेटी पढ़लिख कर शादी लायक हुई तो जसवंत सिंह ने उस के लिए वर की तलाश शुरू कर दी. लुधियाना में उन की बहन रहती थी भोली. उसी के माध्यम से हरप्रीत कौर की शादी की बात कोलकाता के रहने वाले रंजीत  सिंह के बेटे हरप्रीत सिंह उर्फ हनी से चली.

रंजीत सिंह मूलरूप से दोराहा लुधियाना के रहने वाले थे. लेकिन अपनी जवानी में वह कोलकाता जा कर बस गए थे. वहां उन का होटल एंड रेस्टोरैंट का बहुत बड़ा कारोबार था. उन के पास किसी चीज की कमी नहीं थी.

वह बहू के रूप में गरीब और शरीफ परिवार की प्रतिभाशाली लड़की चाहते थे. इसीलिए उन्होंने ही नहीं, उन के बेटे हरप्रीत सिंह ने भी हरप्रीत कौर को देख कर पसंद कर लिया था. यह मार्च, 2013 की बात थी. बातचीत के बाद शादी की तारीख 7 दिसंबर, 2013 रख दी गई थी.

जसवंत सिंह और रंजीत सिंह की आर्थिक स्थिति में जमीन आसमान का अंतर था. शादी तय होने के कुछ दिनों बाद ही जसवंत सिंह को फोन कर के धमकी दी जाने लगी कि वह यह रिश्ता तोड़ दें अन्यथा परिणाम भुगतने को तैयार रहें. जसवंत सिंह ने यह बात रंजीत सिंह को बताई तो उन्होंने कहा, ‘‘कुछ लोगों से हमारी रंजिश हैं, शायद वही फोन कर के आप को धमका रहे हैं. लेकिन आप को चिंता करने की जरूरत नहीं है. हमारी तरफ से कोई बात नहीं है. आप शादी की तैयारी करें.’’

इस के बाद भी जसवंत सिंह के पास धमकी भरे फोन आते रहे. कुछ अंजान युवकों ने बरनाला स्थित उन के घर आ कर भी शादी तोड़ने को कहा, लेकिन जसवंत सिंह परवाह किए बिना बेटी की शादी की तैयारी करते रहे.

शादी की तारीख नजदीक आ गई तो जसवंत सिंह परिवार सहित लुधियाना के जनता  नगर की गली नंबर 16 में रहने वाले अपने रिश्तेदार रजिंदर सिंह बगा के घर आ गए. दूसरी ओर रंजीत सिंह का परिवार भी बेटे की शादी के लिए कोलकाता से लुधियाना आ गया था. विवाह के लिए उन्होंने परवोवाल रोड स्थित शहर का सब से महंगा स्टर्लिंग रिजौर्ट बुक करा रखा था.

7 दिसंबर, 2013 को शादी वाले दिन हरप्रीत कौर अपनी मां, पिता और 2 सहेलियों के साथ सजने के लिए सुबह 7 बजे कार से सराभानगर स्थित लैक्मे ब्यूटी सैलून॒पहुंची. मातापिता बाहर कार में ही बैठे रहे, जबकि हरप्रीत कौर सहेलियों के साथ सैलून में चली गई. चूंकि सैलून पहले से ही बुक कराया गया था, इसलिए उस के पहुंचते ही उस का मेकअप करना शुरू कर दिया गया.

ठीक साढ़े 7 बजे एक युवक हाथ में प्लास्टिक का डिब्बा लिए सैलून में दाखिल हुआ. उस ने अपना चेहरा ढक रखा था. सैलून में दाखिल होते ही उस ने हरप्रीत कौर को इस तरह पुकारा, जैसे वह उस का परिचित हो. हरप्रीत कौर के बोलते ही वह वहां गया, जहां हरप्रीत कौर का मेकअप हो रहा था. सैलून में काम करने वाले कर्मचारियों ने उसे अंदर आते देखा जरूर था, पर किसी ने उसे रोका नहीं. क्योंकि युवक जिस आत्मविश्वास के साथ अंदर आया था, सब ने यही समझा कि वह दुलहन का मेकअप करा रही हरप्रीत कौर का कोई रिश्तेदार है.

हरप्रीत कौर के पास पहुंच कर युवक ने थोड़ा ऊंचे स्वर में कहा, ‘‘मैं ने तुझ से ही नहीं, तेरे घर वालों से भी कितनी बार कहा था न कि मैं यह शादी नहीं होने दूंगा.’’

इस के बाद उस ने प्लास्टिक का डिब्बा खोला, जिस में वह तेजाब ले कर आया था. उस ने डिब्बे का सारा तेजाब हरप्रीत कौर के ऊपर उडे़ल दिया. इसी के साथ वह एक कागज फेंक कर जिस तरह तेजी से आया था उस से भी ज्यादा तेजी से बाहर निकल गया. तेजाब ऊपर पड़ते ही हरप्रीत चीखनेचिल्लाने लगी. उस के चीखनेचिल्लाने से वहां काम करने वाले कर्मचारियों को जब घटना का भान हुआ तो सभी डर के मारे चीखनेचिल्लाने लगे. शोरशराबा सुन कर सैलून के मैनेजर संजीव गोयल तुरंत आ गए. वह उस युवक के पीछे दौड़े भी, पर उन के बाहर आने तक वह बाहर खड़ी कार में सवार हो भाग गया था.

कार में शायद कुछ और लोग भी बैठे थे. हरप्रीत कौर के अलावा उस के बगल वाली सीट पर मेकअप करवा रही अमृतपाल कौर तथा 2 ब्यूटीशियनों पर भी तेजाब पड़ गया था. हरप्रीत कौर की हालत सब से ज्यादा खराब थी. मैनेजर संजीव गोयल ने थाना सराभानगर पुलिस को घटना की सूचना देने के साथ हरप्रीत कौर सहित सभी घायलों को डीएमसी अस्पताल पहुंचाया.

प्राथमिक उपचार के बाद अन्य सभी घायलों को तो छुट्टी दे दी गई थी, लेकिन हरप्रीत कौर का पूरा चेहरा एवं छाती बुरी तरह जल गई थी, इसलिए उसे अस्पताल में भरती करा दिया गया था.

मैनेजर संजीव गोयल, मेकअप करवाने वाली अमृतपाल कौर, 2 ब्यूटीशियनों के अलावा हरप्रीत कौर के मातापिता इस घटना के चश्मदीद थे. हरप्रीत कौर के पिता जसवंत सिंह की ओर से थाना सराभानगर में इस तेजाब कांड का मुकदमा दर्ज हुआ. घटनास्थल के निरीक्षण में इंसपेक्टर हरपाल सिंह ग्रेवाल को सैलून से युवक द्वारा फेंका गया कागज मिला तो पता चला कि वह प्रेमपत्र था.

उन्होंने सैलून के अंदर और बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज कब्जे में ले ली थी. बाद में जांच में पता चला कि युवक ने सैलून में जो प्रेमपत्र फेंका था, वह पुलिस की जांच को गुमराह करने के लिए फेंका था. हरप्रीत कौर का किसी से कोई प्रेमसंबंध नहीं था.

जब स्पष्ट हो गया कि मामला प्रेमसंबंधों का या एकतरफा प्रेम का नहीं था तो पुलिस सोच में पड़ गई कि आखिर दुलहन पर तेजाब क्यों फेंका गया, वह भी फेरों से मात्र एक घंटे पहले? यह बात मामले की जांच कर रहे हरपाल सिंह ग्रेवाल की समझ में नहीं आ रही थी. हरप्रीत कौर बयान देने की स्थिति में नहीं थी. तेजाब पड़ने के बाद वह बेहोश हुई तो फिर होश में नहीं आई. उस की हालत दिनोंदिन नाजुक ही होती जा रही थी.

जब डीएमसी अस्पताल के डाक्टरों ने हरप्रीत कौर के इलाज से हाथ खड़े कर दिए तो लुधियाना के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर निर्मल सिंह ढिल्लो और इंसपेक्टर हरपाल सिंह ने खुद और कुछ पुलिस फंड से मदद कर के इलाज के लिए दिसंबर, 2013 को विशेष विमान द्वारा उसे मुंबई भिजवाया.

इंसपेक्टर हरपाल सिंह ने रंजीत सिंह और उन के बेटे हरप्रीत सिंह, जिस से हरप्रीत कौर की शादी हो रही थी, दोनों लोगों से विस्तार से पूछताछ करते हुए उन की पारिवारिक पृष्ठभूमि के बारे में गहराई से छानबीन की तो आखिर पूरा मामला उन की समझ में आ गया.

इस के बाद अपने अधिकारियों से रायमशविरा कर के उन्होंने सबइंसपेक्टर मनजीत सिंह को साथ ले कर एक पुलिस टीम बनाई और पटियाला के रंजीतनगर स्थित एक कोठी पर छापा मारा. उन के छापा मारने पर भागने के लिए एक युवक कोठी की छत से कूदा, जिस से उस की एक टांग टूट गई और वह पकड़ा गया. उस का नाम पलविंदर सिंह उर्फ पवन था. पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया. उस के अलावा 30-32 साल की एक महिला को गिरफ्तार किया गया, जिस का नाम अमृतपाल कौर था.

दोनों को क्राइम ब्रांच औफिस ला कर पूछताछ की गई तो पता चला कि इस तेजाब कांड की मुख्य अभियुक्ता अमृतपाल कौर थी, जो हरप्रीत सिंह की भाभी थी.

उस का हरप्रीत सिंह के भाई से तलाक हो चुका था. उसी ने अपने ससुर रंजीत सिंह और उन के घर वालों से बदला लेने के लिए हरप्रीत कौर पर तेजाब डलवाया  था. अमृतपाल कौर से पूछताछ में इस तेजाब कांड की जो कहानी प्रकाश में आई, वह बेहद चौंकाने वाली थी.

अमृतपाल कौर उर्फ डिंपी उर्फ हनी उर्फ परी, लुधियाना के दुगड़ी के रहने वाले सोहन सिंह की बेटी थी. आधुनिक विचारों वाली अमृतपाल कौर अपनी मरजी से जिंदगी जीने में विश्वास करती थी, जिस से उस की तमाम लड़कों से दोस्ती हो गई थी. जिद्दी और झगड़ालू स्वभाव की होने की वजह से मांबाप भी उसे नहीं रोक पाए.

सन 2003 में रंजीत सिंह के बड़े बेटे तरनजीत सिंह से अमृतपाल कौर का विवाह हो गया तो वह कोलकाता आ गई थी. ससुराल आ कर जब उसे पता चला कि तरनजीत सिंह नपुंसक है तो वह सन्न रह गई. पति का साथ न मिलने की वजह से वह चिड़चिड़ी हो गई.

इस के बाद घर में क्लेश शुरू हो गया. बातबात पर अमृतपाल कौर ससुर और पति को ताने देने लगी. धीरेधीरे वह परिवार पर हावी होती गई. शारीरिक कमजोरी और समाज में बदनामी के डर से तरनजीत सिंह ही नहीं, घर का कोई भी सदस्य उस के सामने कुछ नहीं कह पाता था.

इस क्लेश से बचने के लिए तरनजीत सिंह अमृतपाल कौर को ले कर विदेश चला गया, जहां उस ने जुड़वा बेटों अनंत और मिरर को जन्म दिया. बच्चों के जन्म के बाद दोनों कोलकाता आ गए. विदेश से लौटने के बाद घर में क्लेश कम होने के बजाए इतना बढ़ गया कि अमृतपाल कौर ने दोनों बेटों को पति को सौंप कर उस से तलाक ले लिया. इस तलाक में अमृतपाल कौर ने 70 लाख रुपए नकद और लुधियाना के दोहरा में एक प्लौट लिया था.

तलाक के बाद अमृतपाल कौर  पूरी तरह से आजाद हो गई. पैसों की उस के पास कमी नहीं थी. वह अपनी मरजी की मालिक थी. सन 2013 में उस ने एक एनआरआई अमेंदर सिंह के शादी कर ली. वह वेस्ट लंदन में रहता था. शादी के कुछ दिनों बाद वह लंदन चला गया तो अमृतपाल कौर मायके में रहने लगी. पति के विदेश जाने के बाद उस की मुलाकात पलविंदर सिंह उर्फ पवन से हुई. वह आपराधिक प्रवृति का था, जिस की वजह से उस के पिता अजीत सिंह ने उसे घर से बेदखल कर दिया था.

अमृतपाल कौर को सहारे की जरूरत थी, इसलिए उस ने उस से नजदीकियां बढ़ाईं. पलविंदर से उस के संबंध बन गए तो वह उस के इशारे पर नाचने लगा. अमृतपाल कौर अपनी जिंदगी अपने तरीके से जी रही थी. लेकिन तलाक के बाद उस की ससुराल वालों ने चैन की सांस ली थी.

अमृतपाल कौर को पता चला कि उस के पति तरनजीत सिंह के छोटे भाई हरप्रीत सिंह की शादी बरनाला की एक खूबसूरत लड़की हरप्रीत कौर से हो रही है तो उसे जैसे सनक सी चढ़ गई कि कुछ भी हो, वह उस परिवार के किसी भी लड़के की शादी नहीं होने देगी. उस ने तुरंत अपने ससुर रंजीत सिंह को फोन कर के कहा, ‘‘रंजीत सिंह, तुम कान खोल कर सुन लो, मैं तुम्हारे घर में अब कभी शहनाई नहीं बजने दूंगी.’’

रंजीत सिंह ने उस की इस धमकी को गंभीरता से नहीं लिया और वह बेटे की शादी की तैयारी करते रहे. अमृतपाल कौर के पास ना तो शैतानी दिमाग की कभी थी और ना ही दौलत की. उस ने अपने मन की बात पलविंदर को बता कर उस के साथ योजना बनाई गई कि कोलकाता जा कर रंजीत सिंह के परिवार का कुछ ऐसा अनिष्ट किया जाए कि शादी करने की हिम्मत न कर सके.

पर उन के लिए यह काम इतना आसान नहीं था. इसलिए अमृतपाल कौर ने विचार किया कि जिस लड़की के साथ हरप्रीत सिंह की शादी होने वाली है, अगर उस लड़की की सुंदरता खराब कर दी जाए तो शादी अपने आप रुक जाएगी. पलविंदर को भी उस का यह विचार उचित लगा. उस ने कहा कि अगर हरप्रीत कौर के चेहरे पर तेजाब डाल दिया जाए तो शादी अपने आप रुक जाएगी.

इस योजना पर सहमति बन गई तो अमृतपाल कौर ने यह काम करने के लिए पलविंदर को 10 लाख रुपए दिए. पलविंदर ने अपनी इस योजना में अपने चचेरे भाई सनप्रीत सिंह उर्फ सन्नी को भी शामिल कर लिया. यह काम सिर्फ 2 लोगों से नहीं हो सकता था, इसलिए सन्नी ने अपने दोस्तों, राकेश कुमार प्रेमी, जसप्रीत सिंह और गुरसेवक को शामिल कर लिया. पलविंदर और सन्नी हरप्रीत कौर पर तेजाब डालने के लिए 3 बार बरनाला स्थित उस के घर गए, पर वहां मौका नहीं मिला.

इस के बाद अमृतपाल कौर ने पलविंदर को लुधियाना बुला लिया. क्योंकि उसे पता चल गया था कि 5 दिसंबर को हरप्रीत कौर का परिवार लुधियाना आ गया है. 6 दिसंबर, 2013 को पलविंदर भी अपने साथियों के साथ लुधियाना आ गया था. उस ने अपने फूफा की मारुति जेन कार यह कह कर मांग ली थी कि उसे अपने दोस्त की शादी में जाना है. इसी कार में पलविंदर ने फरजी नंबर पीबी11जेड-9090 की प्लेट लगा कर घटना को अंजाम दिया था.

पलविंदर सिंह ने तेजाब पटियाला के एक मोटर मैकेनिक अश्विनी कुमार से लिया था. अमृतपाल कौर ने अपने सूत्रों से पता कर लिया था कि हरप्रीत कौर सजने के लिए लैक्मे ब्यूटी सैलून जाएगी. इसलिए पलविंदर ने एक दिन पहले रेकी कर के हरप्रीत कौर पर तेजाब फेंक कर भागने का रास्ता देख लिया था.

अमृतपाल कौर से पूछताछ के बाद इंसपेक्टर हरपाल सिंह ने तेजाब कांड से जुड़े अन्य अभियुक्तों को गिरफ्तार कर के 9 दिसंबर, 2013 को ड्यूटी मजिस्ट्रैट की अदालत में पेश कर के सबूत जुटाने के लिए 3 दिनों की पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड अवधि में सारे सबूत जुटा कर सभी अभियुक्तों को पुन: अदालत में पेश कर के जेल भेज दिया गया.

मुंबई के नैशनल बर्न अस्पताल में भरती हरप्रीत कौर ने 27 दिसंबर की सुबह 5 बजे दम तोड़ दिया था. तमाम पुलिस काररवाई पूरी कर के हरपाल सिंह उस की लाश विमान द्वारा मुंबई से दिल्ली और वहां से सड़क मार्ग से बरनाला ले आए थे.

पुलिस ने इस मामले में अमृतपाल कौर उर्फ परी, परविंदर सिंह उर्फ पवन, सनप्रीत सिंह उर्फ सन्नी, राकेश कुमार प्रेमी, गुरुसेवक सिंह, अश्विनी कुमार और जसप्रीत सिंह को अभियुक्त बनाया था. इस मामले में लैक्मे ब्यूटी सैलून की ब्यूटीशियनों एवं मैनेजर संजीव गोयल सहित 38 गवाह थे. घटनास्थल से बरामद सीसीटीवी फुटेज भी अदालत में पेश की गई थी.

अभियोजन पक्ष की ओर से सीनियर पब्लिक प्रौसीक्यूटर एस.एम. हैदर ने जबरदस्त तरीके से दलीलें देते हुए माननीय जज से सभी दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने की गुजारिश की थी. जबकि बचाव पक्ष के वकील ने सजा में नरमी बरतने का आग्रह किया था. लंबी सुनवाई और बहस के बाद अदालत ने 6 अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए 20 दिसंबर, 2016 को सजा की तारीख तय कर दी थी.

तय तारीख पर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश संदीप कुमार सिंगला ने अपना फैसला सुनाया. माननीय न्यायाधीश ने अमृतपाल कौर और पलविंदर सिंह उर्फ पवन के इस कृत्य को अमानवीय मानते हुए दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

लेकिन उन्होंने इस सजा में एक शर्त यह रख दी थी कि दोनों दोषी पूरे 25 साल तक जेल में रहेंगे. इस के अलावा उन पर 9 लाख 60 हजार रुपए का जुरमाना भी लगाया था.

जुरमाने की इस राशि से 6 लाख रुपए मृतका हरप्रीत कौर के घर वालों को दिए जाएंगे. 1 लाख रुपया ब्यूटीपार्लर में घायल अमृतपाल कौर को तथा 50-50 हजार रुपए ब्यूटीपार्लर की घायल दोनों ब्यूटीशियनों को दिए जाएंगे.

इस तेजाब कांड में शामिल अन्य अभियुक्तों सनप्रीत सिंह उर्फ सन्नी, राकेश कुमार, गुरुसेवक सिंह और जसप्रीत सिंह को भी दोषी करार देते हुए अदालत ने इन्हें उम्रकैद की सजा के साथ सवासवा लाख रुपए जुरमाने की सजा सुनाई थी. अभियुक्त अश्विनी कुमार को सबूतों के अभाव में दोष मुक्त कर दिया गया था.

इन अभियुक्तों की वजह से एक बेकसूर को उस समय मौत के मुंह में जाना पड़ा, जब वह अपने जीवन के हसीन पल जीने जा रही थी. इसलिए इन्हें जो सजा मिली, शायद वह कम ही कही जाएगी.      

नन्हा हत्यारा

संगीता 16 जनवरी, 2017 की शाम को नौकरी से घर पहुंची तो उस के दोनों बच्चे चारपाई पर बैठे रो रहे थे. डेढ़ साल की बेटी काजल जोरजोर से रो रही थी, जबकि 4 साल का राहुल सिसकते हुए उसे चुप कराने की कोशिश कर रहा था. संगीता ने काजल को उठा कर सीने से लगाया और दूसरे हाथ से राहुल की आंखें पोंछते हुए 8 साल के बेटे दीपू को आवाज दी. दीपू नहीं बोला तो संगीता काजल को गोद में लिए बड़बड़ाते हुए घर के बाहर आ गई. उस ने गली में खेल रहे बच्चों से दीपू के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि आज वह उन्हें दिखाई नहीं दिया. खीझ कर वह लौट आई और बड़बड़ाते हुए घर के कामों में लग गई. साढ़े 7 बजे तक घर के काम निपटा कर संगीता खाली हुई तो एक बार फिर दीपू की तलाश में निकल पड़ी.

काफी तलाश के बाद भी जब उस का कुछ पता नहीं चला तो उसे चिंता हुई. अब तक अंधेरा भी घिर आया था. ऐसे में दीपू का न मिलना उसे बेचैन करने लगा था. संगीता घर के बाहर खड़ी सोच रही थी कि अब वह दीपू को कहां ढूंढे, तभी सामने से पति दिलीप कुमार को आते देख कर उसे थोड़ी राहत महसूस हुई. पत्नी के चेहरे पर परेशानी के बादल मंडराते देख दिलीप ने पूछा, ‘‘क्या हुआ, यहां क्यों खड़ी हो?’’

‘‘दीपू पता नहीं कहां चला गया है. मैं ने उसे सब जगह तलाश लिया है, उस का कुछ पता नहीं चल रहा है.’’

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है,’’ दिलीप ने पत्नी को सांत्वना दी, ‘‘तुम चिंता मत करो, मैं देखता हूं वह कहां है.’’

कह कर दिलीप ने दीपू की तलाश शुरू कर दी. दीपू के गायब होने की जानकारी पड़ोसियों को हुई तो वे भी उस के साथ दीपू की तलाश में जुट गए. आधी रात तक तलाश करने पर भी जब दीपू का कुछ पता जब नहीं चला तो थकहार कर सभी अपनेअपने घर चले गए. दिलीप और संगीता ने वह रात आंखों में काटी.

अगले दिन सवेरा होते ही दिलीप और संगीता नौकरी पर जाने के बजाए दीपू की तलाश में जुट गए. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर दीपू कहां चला गया? दीपू एक समझदार बच्चा था. भले ही परिस्थितियों ने उसे स्कूल का मुंह नहीं देखने दिया था, पर वह अपनी जिम्मेदारियां भलीभांति निभा रहा था.

मातापिता और 15 साल के बड़े भाई दीपक कुमार के नौकरी पर चले जाने के बाद अपने 4 साल के छोटे भाई राहुल और डेढ़ साल की बहन काजल की देखभाल वही करता था. आज तक उस ने शिकायत का कोई मौका नहीं दिया था. लेकिन उस दिन वह पता नहीं कहां चला गया था. जब दीपू का कुछ पता नहीं चला तो दिलीप और संगीता ने उस के लापता होने की सूचना थाना पुलिस को दे दी थी.

इस तरह के मामलों में जैसा होता है, उसी तरह पुलिस ने उन्हें 24 घंटे बाद आने को कहा था. उसी दिन 4 बजे शाम को एक मजदूर ने एक खाली प्लौट में कुछ कुत्तों को आपस में लड़ते देखा. कुत्ते किसी चीज को ले कर छीनाझपटी कर रहे थे. मजदूर ने नजदीक जा कर देखा तो कुत्ते प्लास्टिक के कट्टे को ले कर छीनाझपटी कर रहे थे. वहां 2 कट्टे पड़े थे. कुत्तों को भगा कर उस ने जिज्ञासावश एक कट्टे का मुंह खोला तो उस में जो देखा, डर के मारे पीछे हट गया. कट्टे में मानव अंग थे.

उस ने यह बात मोहल्ले वालों को बताई तो किसी ने इस की सूचना स्थानीय थाना दुगड़ी पुलिस को दे दी. सूचना मिलते ही ड्यूटी अफसर जतिंदर सिंह, हैडकांस्टेबल प्रीतपाल सिंह और कांस्टेबल प्रभजोत सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस वालों ने प्लास्टिक के कट्टों को खोल कर देखा तो उन में किसी बच्चे की लाश के टुकड़े भरे थे. किसी ने बेरहमी से बच्चे के शरीर के टुकड़ेटुकड़े कर के दोनों कट्टों में भर कर वहां फेंक दिए थे.

बच्चे की लाश मिलने की खबर मोहल्ले में फैली तो लाश देखने दिलीप और संगीता भी वहां पहुंच गए. लाश देखते ही संगीता और दिलीप दहाड़े मार कर रोने लगे. क्योंकि लाश उन के बेटे दीपू की थी. पतिपत्नी दीपू की लाश के टुकड़ों से लिपट कर रो रहे थे. एसआई जतिंदर सिंह ने समझाबुझा कर दोनों को वहां से अलग किया और घटना की सूचना अधिकारियों तथा क्राइम टीम को दे दी.

सूचना मिलते ही थाना दुगड़ी के थानाप्रभारी इंसपेक्टर प्रेम सिंह, सीआईए इंचार्ज इंसपेक्टर हरपाल सिंह ग्रेवाल घटनास्थल पर आ गए थे. दीपू की लाश के टुकड़े मिलने से मोहल्ले वालों में बड़ा रोष था. लोगों की नाराजगी को देखते हुए प्रेम सिंह ने सारी काररवाई पूरी कर के पोस्टमार्टम के लिए लाश के टुकड़ों को सिविल अस्पताल भिजवा दिया था.

इस के बाद मृतक के पिता दिलीप की ओर से थाना दुगड़ी में दीपू की हत्या का मुकदमा अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज कर लिया गया था.

लुधियाना के सिविल अस्पताल में 17 जनवरी को दीपू की लाश के टुकड़ों का पोस्टमार्टम किया गया. पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों ने पुलिस को बताया कि बच्चे का दिल गायब है. इस खबर से लोग तरहतरह की अटकलें लगाने लगे. लेकिन पुलिस लोगों की बातों पर ध्यान न दे कर अपने हिसाब से काम में जुटी रही.

पूछताछ में दिलीप ने बताया था कि वह उत्तर प्रदेश के जिला उन्नाव के थाना बिहार के गांव छेदा का रहने वाला था. रोजीरोजगार की तलाश में वह कई सालों पहले लुधियाना  आ गया था. लुधियाना में वह थाना दुगड़ी की शेख कालोनी के सूआ रोड पर किराए के मकान में परिवार के साथ रहता था.

उस ने 5 साल पहले संगीता से विवाह किया था. संगीता तलाकशुदा थी. पहले पति ननकूराम से उसे 2 बेटे थे, जो दिलीप से शादी के समय 9 साल और 3 साल के थे. दिलीप से भी उसे 2 बच्चे राहुल और बेटी काजल हुई थी. पतिपत्नी दोनों नौकरी करते थे. संगीता का बड़ा बेटा दीपक, जो अब 15 साल का था, वह भी नौकरी करता था. सब के नौकरी पर चले जाने के बाद 8 साल का दीपू अपने छोटे भाई और बहन की देखभाल करता था.

दिलीप के बयान के आधार पर प्रेम सिंह ने एएसआई राम सिंह और एसआई रामपाल के नेतृत्व में एक टीम उत्तर प्रदेश के उन्नाव संगीता के पूर्वपति ननकूराम से पूछताछ के लिए भेजी. लेकिन पूछताछ में ननकूराम निर्दोष पाया गया. इस के बाद पुलिस ने अपना ध्यान इलाके में ही लगा दिया.

पुलिस हत्यारे के बारे में सोच रही थी कि मातानगर के होली सीनियर सैकेंडरी स्कूल के प्रिंसिपल ने फोन द्वारा इंसपेक्टर प्रेम सिंह को सूचना दी कि उन के स्कूल के ग्राउंड में एक जगह मानव दिल पड़ा है. सूचना मिलते ही प्रेम सिंह और हरपाल सिंह होली सीनियर सैकेंडरी स्कूल पहुंच गए और दिल बरामद कर उसे सिविल अस्पताल भिजवा दिया.

सिविल अस्पताल के सीनियर डाक्टरों ने दिल की जांच कर बताया कि बरामद दिल मृतक बच्चे दीपू का था. इस तरह दीपू के सभी अंग पूरे हो गए थे. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार दीपू की गला दबा कर हत्या की गई थी. उस के बाद किसी ऐसे हथियार से उस के शरीर के टुकड़े किए गए थे, जिस की धार बहुत तेज नहीं थी.

पुलिस को हत्यारे तक पहुंचने का कोई सूत्र नहीं मिला तो उस ने अपने मुखबिरों को सक्रिय कर दिया. इंसपेक्टर हरपाल सिंह ने इलाके के सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी थी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ था. तभी किसी मुखबिर ने प्रेम सिंह को बताया कि 16 जनवरी की दोपहर करीब डेढ़ बजे दीपू मोहल्ले के ही रमेश (बदला हुआ नाम) के साथ दिखाई दिया था.

शक के आधार पर प्रेम सिंह रमेश को थाने ले आए. उस से पूछताछ की जाने लगी तो वह पुलिस को बहकाने लगा. लेकिन उस की बातों से पुलिस को यकीन हो गया कि भले ही यह बच्चा है, लेकिन है यह घुटा हुआ. मजबूर हो कर प्रेम सिंह और हरपाल सिंह ने जब थोड़ी सख्ती की तो रमेश ने अपना अपराध स्वीकार कर के सच्चाई उगल दी कि उसी ने दीपू की हत्या कर उस की लाश के टुकड़े कर खाली प्लौट में फेंक आया था.

रमेश द्वारा अपराध स्वीकार करने पर वहां मौजूद लोग हैरान रह गए. खतरनाक से खतरनाक हादसे और वारदातें देखने वाले पुलिस अफसर भी सिहर उठे. क्योंकि हत्यारा मात्र 13 साल का था. एडीसीपी क्राइम बलकार सिंह और एसीपी योगीराज के सामने प्रेम सिंह ने जब रमेश से विस्तारपूर्वक पूछताछ की तो किसी हौरर फिल्म की कहानी की तरह रमेश ने जो कहानी सुनाई, वह इस तरह थी—

रमेश मृतक दीपू के घर से 3 घर छोड़ कर अपने मांबाप के साथ किराए के मकान में रहता था. वह मातानगर के होली सीनियर सैकेंडरी स्कूल में 8वीं में पढ़ता था. लेकिन कुछ दिनों पहले उसे स्कूल से निकाल दिया गया था. दरअसल रमेश बचपन से ही अपराधी प्रवृत्ति का जिद्दी लड़का था.

गरीब मातापिता गुजरबसर के लिए सुबह ही काम पर चले जाते थे. उस के बाद रमेश घर में अकेला ही रह जाता था. मांबाप मुश्किल से गुजरबसर कर रहे थे, इस के बावजूद बेटे का भविष्य संवारने के लिए उसे अच्छे स्कूल में पढ़ा रहे थे लेकिन रमेश स्कूल न जा कर इधरउधर आवारागर्दी किया करता था.

कमजोर और छोटे बच्चों पर धौंस जमाना, दादागिरी करना और उन से पैसे तथा खानेपीने की चीजें छीनना उस की आदत बन गई थी. यही नहीं, वह पढ़ने वाले बच्चों से मारपीट करता था और उन की किताबें चोरी कर के कबाड़ी को बेच कर मौज करता था. इसी वजह से क्लास टीचर ने सब के सामने पिटाई कर के उसे स्कूल से निकाल दिया था. स्कूल और क्लास टीचर से बदला लेने के लिए ही उस ने दिल  दहला देने वाला यह कांड कर डाला था.

दरअसल, स्कूल से निकाले जाने के बाद वह क्लास टीचर को सबक सिखाना चाहता था. रमेश टीवी पर आने वाले आपराधिक सीरियल खूब देखता था. इन्हीं धारावाहिकों से आइडिया ले कर वह कम उम्र के बच्चे की तलाश में जुट गया. किसी दिन उस की नजर गली में खेल रहे दीपू पर पड़ी तो उसे लगा कि इस बच्चे से उस के 2 काम हो सकते हैं.

योजना बना कर रमेश बाजार से पतंग ले आया और मोहल्ले वालों की नजर बचा कर दीपू के घर पहुंच गया. उसे पता ही था कि दीपू का भाई और मांबाप काम पर चले जाते हैं, उस के बाद वह घर पर अकेला ही रहता है. दीपू के घर जा कर उसे पतंग दिखाते हुए उस ने कहा, ‘‘देख मेरे पास ढेर सारी पतंगें हैं. चल मेरे घर की छत पर चल कर पतंग उड़ाते हैं.’’

दीपू छोटे भाई और बहन को छोड़ कर जाना तो नहीं चाहता था, पर पतंग उड़ाने के लालच में वह रमेश के साथ चला गया. अपने घर आ कर रमेश ने कहा, ‘‘चल, पहले कुछ खा लेते हैं, उस के बाद छत पर चल कर पतंग उड़ाएंगे.’’

इस तरह रमेश दीपू को अपने कमरे में ले जा कर अंदर से कुंडी बंद कर ली. इस के बाद उसे उठा कर पलंग पर पटक दिया. अचानक हुए इस हमले से दीपू घबरा गया और खुद को रमेश के चंगुल से छुड़ाने के लिए हाथपैर चलाने लगा. दीपू छोटा और उस से कमजोर था, इसलिए उस का मुकाबला नहीं कर सका. उस ने रमेश को 2-3 जगह दांतों से काटा भी. लेकिन रमेश उस की छाती पर सवार हो गया और उस का गला दबा कर उसे मार डाला.

दीपू की हत्या करने के बाद रमेश ने लाश को पलंग से नीचे उतारा और घसीट कर बाथरूम में ले गया. इस के बाद घर में रखी खुरपी से उस के शरीर के टुकड़े कर प्लास्टिक के कट्टे में भर दिए. दिल निकाल कर उस ने अलग पौलीथिन में रख लिया. जब गली में कोई नहीं दिखाई दिया तो लाश के टुकड़ों वाले कट्टे ले जा कर खाली प्लौट में फेंक आया.

इस के बाद बाथरूम को साफ कर दिया. अब बची दिल वाली पौलीथिन, जिसे ले कर जा कर वह स्कूल के ग्राउंड में फेंक आया. जिस समय रमेश अपने घर पहुंचा, सभी दीपू की तलाश कर रहे थे. वह भी सब के साथ दीपू की तलाश करने लगा.

20 जनवरी, 2017 को प्रेम सिंह ने रमेश को हत्या के अपराध में बच्चों की अदालत में पेश कर के 2 दिनों के पुलिस रिमांड पर लिया. रिमांड के दौरान पूछताछ में बताया कि उस ने दिल स्कूल में इसलिए फेंका था कि अगर वहां दिल मिलेगा तो लोगों को लगेगा कि स्कूल में बच्चों के अंग निकाल कर बेचा जाता है. बाद में वह क्लासटीचर के बारे में अफवाह फैला देता कि वह इस तरह के काम करता है. इस तरह स्कूल भी बदनाम हो जाता और क्लासटीचर भी.

इस के अलावा रमेश दीपू के अपहरण की बात कह कर दिलीप से फिरौती वसूलना चाहता था. लेकिन पुलिस का दबाव बढ़ने की वजह से वह फिरौती के लिए दिलीप को फोन नहीं कर सका था. पुलिस ने रमेश की निशानदेही पर घर से खुरपी बरामद कर ली थी. रिमांड खत्म होने पर पुलिस ने उसे फिर से बच्चों की अदालत में पेश किया था, जहां से उसे बालसुधार गृह भेज दिया गया था.

रंग बदलता देह व्यापार

सारी जानकारियां भोपाल के थाना निशातपुरा के टीआई मनीष मिश्रा की मेज पर थीं, जो उन्हें मुखबिरों से मिली थीं. इस के लिए उन्होंने अपने मुखबिरों का जाल काफी पहले से फैला रखा था. शहर का किनारा होने की वजह से थाना निशातपुरा में आए दिन हर तरह के अपराध हुआ करते थे, जिस की वजह से यहां के पुलिसकर्मियों की किस्मत में सुकून नाम की चीज नहीं थी.

मनीष मिश्रा को जानकारी यह मिली थी कि इलाके की हाउसिंग बोर्ड कालोनी के डुप्लेक्स नंबर 55, जो त्रिवेदी हाइट्स के पीछे था, में धड़ल्ले से देहव्यापार हो रहा है. सूचना चूंकि भरोसेमंद मुखबिर ने दी थी, इसलिए किसी तरह का शक करने की कोई वजह नहीं थी. लेकिन जरूरी यह था कि कालगर्ल्स और ग्राहकों को रंगेहाथों पकड़ा जाए, क्योंकि छापों में पकड़ी गई कालगर्ल्स और ग्राहक अकसर सबूतों के अभाव में छूट जाते हैं, जिस से छिछालेदर पुलिस वालों की होती है.

मनीष मिश्रा ने मुखबिरों से मिली जानकारी सीएसपी लोकेश सिन्हा को दी तो उन्होंने आरोपियों को रंगेहाथों पकड़ने के लिए एक टीम गठित कर दी, जिस में महिला थाने की थानाप्रभारी शिखा बैस को भी शामिल किया. टीम ने छापे की पूरी तैयारी कर के देहव्यापार के धंधे के उस अड्डे पर 10 फरवरी को छापा मारने का निर्णय लिया.

छापा मारने से पहले एक युवा हवलदार रमाकांत (बदला हुआ नाम) को ग्राहक बना कर हाउसिंग बोर्ड कालोनी के डुप्लेक्स नंबर 55 पर भेजा गया. रमाकांत इस बात से काफी रोमांचित और उत्साहित था कि उसे यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी. जबकि सहकर्मी मजाक में कह रहे थे, ‘देख भाई, संभल कर रहना और याद रखना तू फरजी ग्राहक बन कर जा रहा है. सुंदर लड़की देख कर कहीं सचमुच का ग्राहक मत बन जाना.’

बात हंसीमजाक की थी, इसलिए रमाकांत भी मुसकरा दिया था, पर वह मन ही मन रिहर्सल कर रहा था कि ग्राहक कैसे कालगर्ल्स के पास जाते हैं, कैसे सौदेबाजी करते हैं और कैसे माल यानी लड़कियां छांटते हैं.

10 फरवरी की रात जब वह बताए गए अड्डे पर पहुंचा तो नीचे के कमरे में उस की मुलाकात एक उम्रदराज महिला कामिनी (बदला हुआ नाम) और उस के पति सोनू से हुई. नीचे की मंजिल के उस हालनुमा कमरे में पहले से ही कोई 8 युवक लाइन लगाए बैठे थे. ऐसा लग रहा था, जैसे यह आधुनिक कोठा नहीं, बल्कि कोई सैलून है, जहां लोग हजामत बनवाने आए हैं और अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं.

कामिनी और सोनू ने रमाकांत से कुछ सवाल पूछे, जिन के जवाब वह पहले से ही रट कर आया था. दोनों को जब विश्वास हो गया कि ग्राहक गड़बड़ नहीं है तो उन्होंने उसे लाइन में बैठने के लिए कह दिया. रमाकांत को असमंजस में देख कर सोनू ने मुसकराते हुए कहा, ‘‘चिंता की कोई बात नहीं है. तुम्हारा नंबर आधे घंटे में आ जाएगा. अंदर 4 लड़कियां सर्विस दे रही हैं.’’

इतना कह कर सोनू ने पैसे के लिए इशारा किया तो रमाकांत ने पूछा, ‘‘कितने देने होंगे?’’

जवाब में सोनू ने बड़ी बेशरमी से कहा, ‘‘पंजाब से 4 आइटम आए हैं, जो एकदम कड़क और दमदार हैं. नेचुरली करोगे तो 15 सौ रुपए लगेंगे और अननेचुरली करोगे तो ढाई हजार रुपए देने होंगे.’’

‘‘हजार रुपए में बात बनती हो तो बोलो.’’ रमाकांत ने अपनी भूमिका में जान डालते हुए कहा, ‘‘मैं तो नेचुरल करूंगा.’’

‘‘पठानकोट की सवारी 1500 रुपए से एक पैसे कम में नहीं होगी,’’ सोनू ने कहा, ‘‘तुम एक काम करो, उज्जैन की मेहंदी ले लो, हजार रुपए में काम बन जाएगा.’’

इतना कह कर सोनू ने एक लड़की की फोटो रमाकांत को दिखाई. रमाकांत ने सरसरी तौर पर फोटो देख कर कहा, ‘‘मैं तो पठानकोट की ही सवारी करूंगा. ये लो रुपए.’’

कह कर रमाकांत ने जेब से 1500 रुपए निकाल कर सोनू को थमा दिए. इस तरह उस की बुकिंग कनफर्म हो गई. कुरसी पर बैठ कर रमाकांत मौके का जायजा ले रहा था. इंतजार कर रहे लोग कुरसियों और सोफे पर चुपचाप बैठे थे. जाहिर है, वे अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे. एकदूसरे से खुद को बचाए रखने के लिए वे एकदूसरे की तरफ नजर उठा कर नहीं देख रहे थे.

थोड़ी देर बाद एक युवक कमरे से निकला और सिर झुकाए चुपचाप इस तरह बाहर चला गया, मानो बाहर सब कुछ नश्वर और मिथ्या हो. अंदर से वह सच का साक्षात्कार कर के आ रहा हो. उसे गए 5 मिनट बीते होंगे कि सोनू ने वेटिंग लिस्ट के हिसाब से लाइन में बैठे एक युवक को अंदर जाने का इशारा किया तो वह रौकेट की भांति कमरे की ओर भागा. ऊपर की मंजिल पर भी लड़कियां और ग्राहक हैं, अब तक रमाकांत को इस का अंदाजा हो गया था.

उस माहौल में रमाकांत खुद को सहज महसूस करने लगा तो तयशुदा प्लान के मुताबिक उस ने पुलिस टीम को छापा मारने का इशारा कर दिया. जल्दी ही मनीष मिश्रा और शिखा बैस सहित पूरी टीम मकान में दाखिल हुई तो सोनू, कामिनी और उन का एक साथी एकदम से घबरा गए कि यह क्या हो गया.

अंदर आते ही पुलिस ने कमरे में घुस कर कालगर्ल्स और उन के ग्राहकों को आपत्तिजनक स्थिति में दबोच लिया. उन के पास से शराब की बोतलों के अलावा इस्तेमाल और बिना इस्तेमाल हुए कुछ कंडोम भी जब्त किए गए. इस के बाद सभी को थाने ला कर पूछताछ शुरू कर दी गई.

 

पूछताछ में पता चला कि 4 में से 3 लड़कियां पंजाब की थीं और एक उज्जैन की, जिस का जिक्र सोनू ने रमाकांत से उज्जैन की मेहंदी कह कर किया था. सभी को कपड़े पहनने का मौका दिया गया. इस बीच तलाशी में पुलिस को 22 हजार रुपए नकद और करीब 2 दर्जन मोबाइल फोन मिले.

पुलिस के लिए कामिनी का चेहरा, नाम और कारनामा नया नहीं था. पहले भी वह कई बार सैक्स रैकेट चलाने के आरोप में पकड़ी जा चुकी थी. कुछ दिनों पहले ही वह जेल से छूटी थी. इस के पहले वह भोपाल के ही कोलार इलाके में देहव्यापार का अड्डा चलाने के आरोप में पकड़ी गई थी. पता चला कि वह मुंबई में भी एक बार पकड़ी गई थी.

सोनू उर्फ विजय प्रताप सिंह उस का पति था. वह भी इस धंधे में शामिल था. छापे में पकड़ा गया इन का साथी शुभम दुबे मिसरोद के शुभालय परिसर का रहने वाला था.

छापे में पकड़े गए 8 ग्राहकों की हालत देखने लायक थी, उन के चेहरों पर हवाइयां उड़ रही थीं. थोड़ी देर पहले जो कमरों में बंद हो कर जन्नत की सैर कर रहे थे, अब उन्हें जेल का दरवाजा नजर आ रहा था. पुलिस टीम उन के नामपते दर्ज कर के थाने ले आई.

अलबत्ता पकड़ी गई लड़कियों के चेहरों पर जरा भी शिकन नहीं थी. जाहिर है, इस स्थिति का अच्छाखासा तजुर्बा था. उन्हें पूरा भरोसा था कि पुलिस या उस के इस छापे से उन का कुछ भी बिगड़ने वाला नहीं था. इस धंधे में तो इस तरह होता रहता है. कामिनी मैडम को इस स्थिति से निकलने का अच्छाखासा अनुभव था.

लिखापढ़ी के दौरान ग्राहकों के चेहरों पर उस सर्दी में भी पसीना छलक रहा था. वे पुलिस वालों के सामने छोड़ देने के लिए गिड़गिड़ा रहे थे. लेकिन अब राहत की कोई गुंजाइश नहीं थी. क्योंकि एक बड़ी प्लानिंग के तहत काफी मेहनत के बाद पुलिस ने इस सैक्स रैकेट का परदाफाश किया था. इस में दिलचस्प बात कालगर्ल्स का पंजाब का होना था.

पूछताछ में जो कहानी सामने आई थी, उस के अनुसार सोनू और शुभम ग्राहकों को मैनेज करने के साथ सौदा तय करते थे. जबकि कामिनी लड़कियों को ग्राहकों के सामने पेश करने के साथ उन का ध्यान रखती थी. लड़कियों को रोजाना 5 हजार रुपए दिए जाते थे. इस मेहनताने के एवज में उन्हें एक दिन में 25 से 30 ग्राहकों को सर्विस देनी पड़ती थी. देखा जाए तो तीनों एक लड़की से रोजाना कमा तो 40-50 हजार रुपए थे, पर उस का बहुत छोटा हिस्सा उन्हें दे रहे थे.

ग्राहकों को लुभाने के लिए कामिनी और सोनू ने वाट्सऐप ग्रुप भी बना रखे थे, जिन पर लड़कियों की फोटो दिखाई जाती थी. ज्यादा पैसे झटकने की गरज से ग्राहकों को लालच दिया जाता था कि ये लड़कियां अननेचुरल सैक्स भी करवाती हैं, पर इस की फीस ज्यादा होती है.

इस छापे की कहानी तो खत्म हो गई, पर छापे में पकड़ी गई 22 साल की सिमरन (बदला हुआ नाम) ने जो बताया, वह छापे से भी ज्यादा दिलचस्प है और देहव्यापार के नए तौरतरीकों को उजागर करता है.

 

सिमरन पंजाब के जिला जालंधर की कालेज गर्ल थी और वह पैसों के लिए इस धंधे में आई थी. इस के लिए उसे न कोई शरम थी और न पछतावा. उस का अंगअंग सांचे में ढला था. उस का गदराया जिस्म किसी का भी ईमान बिगाड़ने की कूव्वत रखता था.

बहुत कम उम्र में सिमरन सैक्स की खिलाड़ी बन गई थी, जो पुरुषों की कमजोरी पकड़ कर रखती थी. ठीकठाक संख्या तो उसे याद नहीं, पर उस ने पूरे आत्मविश्वास से इतना जरूर बताया कि अब तक वह 5 हजार से भी ज्यादा मर्दों को सर्विस दे चुकी थी.

सिमरन और उस की जैसी लड़कियों की बातों पर गौर करें तो यह जान कर हैरानी होती है कि आजकल कालगर्ल्स दूसरे शहरों और राज्यों में जा कर धंधा करना ज्यादा पसंद करती हैं. इस की वजह यह है कि उन के पहचाने जाने का खतरा और पकड़े जाने का जोखिम कम रहता है. देहव्यापार के धंधे से जुड़े गिरोह एकदूसरे के संपर्क में रहते हैं और जरूरत पड़ने पर लड़कियों की अदलाबदली तक कर लेते हैं.

भोपाल के शौकीन ग्राहक पंजाब या केरल नहीं जा सकते. हां, अगर वे वहां की लड़कियां चाहते हैं तो उन की यह इच्छा पूरी करने के लिए लड़कियां भोपाल ही बुलवा ली जाती हैं. आमतौर पर डेढ़, 2 हजार रुपए दे सकने वाले ग्राहकों को अड्डे पर बुला लिया जाता है.

अगर कोई ग्राहक 15-20 हजार रुपए दे सकता है और विश्वसनीय होता है तो लड़की उस की बताई जगह, जो अकसर कोई महंगा होटल, फार्महाउस या फ्लैट होता है, वहां भेज दी जाती है.

ग्राहक हर तरह के हैं व्यापारी, अफसर, छात्र और नेता भी. इसी तरह कालगर्ल्स बनी लड़कियां भी हर तरह की हैं छात्राएं, बेरोजगार, परित्यक्ता और विधवाएं. कुछ शादीशुदा युवतियां भी देह बेच कर घरगृहस्थी चला रही हैं. सब की अपनी अलगअलग कहानी है.

इन दुलहनों की जिंदगी से एक रात या कुछ घंटे का ताल्लुक रखने वाला एक सच यह भी है कि इन्हें अपने पेशे पर किसी तरह का मलाल, पछतावा या ग्लानि नहीं है. ये पूरी तरह लग्जरी लाइफ जीती हैं. अगर पंजाब से दिल्ली जा कर सर्विस देना है तो ये हवाईजहाज से आतीजाती हैं. वहां के सारे इंतजाम मसलन ठहरने, खानेपीने और ग्राहक ढूंढने की जिम्मेदारी कामिनी और सोनू जैसे गार्जियन की होती है.

धंधा कराने वाले ग्राहक से चाहे जितना पैसा वसूलें, इस पर लड़कियों को कोई ऐतराज नहीं होता, क्योंकि वे अपनी फीस 5 हजार रुपए प्रतिदिन या फिर लाख, डेढ़ लाख रुपए महीना वेतन की तरह लेती हैं. इस अनुबंध के तहत दोनों एकदूसरे के काम में दखल नहीं देते. अगर सौदा यह हुआ है कि सर्विसगर्ल एक दिन में 20 ग्राहक निपटाएगी तो वह ईमानदारी से इस का पालन करती है.

इस से कम ग्राहक आएं तो उसे मिलने वाली फीस में लोकल गार्जियन कोई कटौती नहीं कर सकता और न ही दूसरे दिन 20 से ज्यादा ग्राहकों को सर्विस देने को मजबूर कर सकता है. रहने और खानेपीने का खर्च लोकल गार्जियन ही उठाते हैं. शौपिंग वगैरह के शौक ये लड़कियां, जो आजकल खुद को सर्विस गर्ल्स कहने लगी हैं, खुद उठाती हैं. जबकि शराब और सिगरेट का खर्च ग्राहक उठाता है.

इन सर्विस गर्ल्स की मानें तो ग्राहक सिर्फ 2 तरह के होते हैं. पहले वे, जो आ कर भूखे भेडि़ए की तरह एकदम झपट्टा सा मारते हैं और बगैर कुछ कहेसुने जिस्म को टटोलने लगते हैं. इस तरह के अधिकांश ग्राहक नौसिखिए और मुद्दत से औरत के सुख से वंचित होते हैं. दूसरे तरह के ग्राहकों को जल्दी नहीं होती. वे इत्मीनान से अपनी प्यास पहले शराब से बुझाना पसंद करते हैं, उस के बाद सधे हुए खिलाडि़यों की तरह कुदरती खेल खेलते हैं.

सिमरन जैसी सर्विस गर्ल्स की एक बड़ी दिक्कत नौजवान कस्टमर होते हैं, जो उन के पास शक्तिवर्धक दवाएं खा कर आते हैं. जाहिर है, उन में आत्मविश्वास की कमी होती है और वे लंबा वक्त फारिग होने में लेते हैं. कई नौजवान फिल्मी स्टाइल में टूटा दिल ले कर आते हैं. इस तरह के देवदासों से निपटना सिमरन जैसी लड़कियों के लिए दिक्कत वाला काम होता है, क्योंकि वे चाहते हैं कि सर्विस गर्ल्स इन की कहानी भी सुने.

आजकल अधेड़ ग्राहकों की संख्या भी बढ़ रही है. वे अपनी पत्नी से संतुष्ट नहीं होते और काफी घबराए हुए होते हैं, क्योंकि वे घरगृहस्थी वाले होते हैं. ऐसे लोगों की समाज में इज्जत भी होती है. अकसर ऐसे लोग अपनी सुरक्षा के लिए 3-4 लोगों के साथ अड्डे पर आते हैं या फिर खुद की चुनी जगह पर सर्विस गर्ल्स को मुंहमांगा पैसा दे कर बुलाते हैं.

छापे में पकड़ी गई हर एक सर्विस गर्ल की अपनी एक अलग कहानी होती है, जिसे ये आमतौर पर जल्दी साझा नहीं करतीं. हां, जोर देने पर कुछ हिस्सा कांटछांट कर जरूर बता देती हैं.

एक दिन यानी 7-8 घंटे में 20-25 पुरुषों को सर्विस देना उन के लिए उतना तकलीफदेह नहीं होता, जितना अप्राकृतिक सैक्स की मांग पूरी करने पर होता है. इस आदिम कारोबार में यौन बीमारियों से बचने के लिए कुछ ग्राहक अननेचुरल सैक्स ही चाहते हैं, जो तय है कि उन्हें अपनी पत्नी या प्रेमिका से नहीं मिलता. यह चलन वीडियो फिल्मों से बढ़ा है, जो अब स्मार्टफोन में मौजूद है.

सिमरन देश के लगभग सभी बड़े शहरों में सर्विस दे चुकी है और हर तरह के ग्राहकों और माहौल से उस का पाला पड़ चुका है. मुंबई को अभी भी वह देहव्यापार का सब से बड़ा केंद्र मानती है, जहां यह धंधा झुग्गीझोपडि़यों से ले कर पांचसितारा होटलों तक में चलता है. वहां हर राज्य और क्षेत्र की लड़कियों की मांग और उपलब्धता रहती है.

अकसर यह व्यापार पुलिस की छत्रछाया में चलता है. इस के लिए दलाल या लोकल गार्जियन नजराना भी खूब देते हैं. इस के बाद भी अगर छापा पड़ता है तो इसे उन की बदकिस्मती या फिर ऊपरी दबाव माना जा सकता है. कई बार इस में राजनेता भी शामिल पाए गए हैं.

ज्यादा पैसे उन सर्विस गर्ल्स को मिलते हैं, जो थर्ड ग्रेड की फिल्मों की हीरोइन या टीवी कलाकार होती हैं अथवा जिन्होंने किसी सौंदर्य प्रतियोगिता में कोई छोटामोटा खिताब जीता होता है. उन्हें ग्राहक के सामने न केवल अलग तरह से पेश किया जाता है, बल्कि फीस के अलावा अन्य खर्चे भी ग्राहक को उठाने पड़ते हैं. इन के ग्राहक भी हाईप्रोफाइल होते हैं. अगर एक बार भरोसा जम जाए तो कस्टमर इन से सीधे संपर्क कर के इन्हें दूसरे शहर भी ले जा सकता है.

कोई भी सर्विस गर्ल अगर सीधे कस्टमर से डील करने लगती है तो इस से नुकसान लोकल गार्जियन यानी दलालों का होता है. इसलिए वे आजकल वेतन भी देने लगे हैं और ज्यादा से ज्यादा पैसा वसूलने के लिए इन्हें किसी भी दिन खाली नहीं छोड़ते. ग्राहक आजकल सोशल मीडिया के जरिए ज्यादा ढूंढे जाते हैं. फेसबुक और वाट्सऐप इस का बड़ा माध्यम है, जिन पर आमतौर पर सर्विस गर्ल्स की फोटो भी होती है और उन का रेट भी लिखा होता है.

कुछ सैक्सी और सुंदर सर्विस गर्ल्स केवल विदेशी ग्राहकों को ही सर्विस देती हैं, पर ऐसा अधिकतर पर्यटनस्थलों पर ही होता है. आगरा, जयपुर, बनारस और खजुराहो में विदेशी पर्यटक ज्यादा आते हैं, जो मुंहमांगे पैसे देते हैं और सुरक्षा कारणों मसलन पुलिस के छापों से बचने के लिए दिन में ही सर्विस लेना पसंद करते हैं.

ये लोग महंगे होटलों में ठहरते हैं, जहां कोई ज्यादा पूछताछ नहीं करता. कुछ ऐसे भी विदेशी पर्यटक होते हैं, जो सर्विस गर्ल्स को हफ्ते भर या इस से भी ज्यादा दिनों के लिए हायर करते हैं.

खूबसूरत सर्विस गर्ल्स केलिए यह पार्टटाइम काम होता है, क्योंकि उन की तगड़ी कमाई होती है. हालांकि कमाई सिमरन जैसी सर्विस गर्ल्स की भी अच्छी होती है लेकिन ये ज्यादा से ज्यादा पैसा कमा कर रख लेना चाहती हैं, क्योंकि ये जानती हैं कि जैसेजैसे उम्र ढलती जाएगी, वैसेवैसे उन की कीमत भी घटती जाएगी.

घरगृहस्थी बसाना इन सर्विस गर्ल्स का सपना कम ही होता है. हालांकि कई बार भावुक और अकेले रहने वाले ग्राहक शादी की पेशकश भी कर देते हैं, लेकिन बंधन इन सर्विस गर्ल्स को रास नहीं आता. इन का मकसद सिर्फ पैसा कमाना होता है.

भोपाल में पकड़ी गई सिमरन छूटने के बाद पहले वापस अपने घर जालंधर जाएगी. कुछ दिन आराम करने के बाद पंजाब के आसपास ही सर्विस देगी. वह जानती है कि एकाध बार पेशी पर उसे भोपाल भी आना पड़ेगा, क्योंकि आजकल पहचान छिपाना मुश्किल होगया है और कभी भी वारंट तामील हो सकते हैं.

बाकी पेशियां कामिनी और सोनू संभाल लेंगे, जो हवालात में खुद को बेगुनाह बताते हुए अदालत में अपने बचाव की रिहर्सल कर रहे थे. ये लोग पांचवीं बार पकड़े गए हैं, लेकिन बेफिक्र हैं. जाहिर है, इन्हें पता है कि देहव्यापार के आरोप अदालत में साबित कर पाना मुश्किल काम होता है और आरोप साबित हो भी जाएं तो मामूली सजा और जुरमाने के बाद वे छूट कर फिर से इसी धंधे में लग जाएंगे.       

 

रील से ज्यादा रियल लाइफ में बिकिनी पहनना पसंद : कैटरीना

साल 2003 में फिल्म 'बूम' से बॉलीवुड में कदम रखने वाली कैटरीना आज बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्रियों में शुमार हैं. उनकी पहली फिल्म बूम बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप रही थी. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और गुलशन ग्रोवर भी थे. कैटरीना ने इस फिल्म में बेहद कामुक और उत्तेजक सींस देकर बॉलीवुड में खलबली मचा दी थी लेकिन फिल्म को उसका कोई लाभ नहीं मिल पाया था.

फिल्म बूम में बोल्ड और बिकिनी सीन से सुर्खियां बटोरने वाली कैटरीना कैफ रील से ज्यादा रियल लाइफ में बिकिनी पहनना ज्यादा पसंद करती हैं. रणबीर के साथ वेकेशन वाली उनकी बिकिनी की पिक्चर देखकर उनके फैन्स को तो यही लगा था. हालांकि कैटरीना मॉडलिंग के दिनों में भी कई बिकिनी के शूट करा चुकी हैं, लेकिन बूम के बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में बोल्ड सीन और बिकिनी पहनने से परहेज ही किया है.

हालांकि मिस्टर परफेक्शनिस्ट के साथ धूम में काम करते हुए उन्होंने कई बोल्ड सीन दिए और फैन्स ने उनके बिकिनी लुक को भी काफी पसंद किया. खबरें आ रही हैं कि कैटरीना जग्गा जासूस में भी बिकिनी में नजर आएंगी. बता दें कि कैटरीना बॉलीवुड में उनकी डेब्यू फिल्म सलमान खान के साथ मैंने प्यार क्यूं किया को मानती हैं, लेकिन उन्होंने बूम से बॉलीवुड में डेब्यू किया था.

कैटरीना ने मॉडलिंग के दिनों में कई छोटे-बड़े प्रोजेक्ट किए हैं. इस दौरान उन्होंने बिकिनी शूट भी किया है. कहा जाता है कि इंडस्ट्री में कोई गॉडफादर नहीं होने की वजह से कैटरीना ने बूम जिसे सॉफ्ट पोर्न भी कहा गया था, में भी काम किया.

बूम के बाद कैटरीना की मुलाकात सलमान खान से हुई और उन्होंने कैटरीना को मैंने प्यार क्यूं किया के लिए अप्रोच किया. कई इंटरव्यू में कैटरीना कह चुकी हैं कि उनके फिल्मी कैरियर में वो बूम को नहीं गिनती हैं. बूम में उनके और गुलशल ग्रोवर के हॉट सीन ने काफी कॉन्ट्रोवर्सी क्रिएट की थी. एक इंटरव्यू में गुलशन ग्रोवर ने कहा था कि उन्होंने कैटरीना के साथ किस सीन के लिए दो घंटे रिहर्सल की थी. कैटरीना सलमान को आज भी अपना मैंटर मानती हैं औऱ इंडस्ट्री में आने का क्रेडिट उनको देती हैं.

सलमान के साथ काम करने के दौरान कैटरीना और सलमान के अफेयर की खबरें आई थीं, लेकिन दोनों ने कभी इसे खुलकर स्वीकार नहीं किया. सलमान की शादी के सवाल पर एक बार उनके पिता सलीम खान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि एक्ट्रेस सलमान को काम मिलने के लिए यूज करती हैं.

कैटरीना कहती हैं कि बॉलीवुड में डेब्यू करते टाइम उन्हें हिंदी सिनेमा के बारे में कुछ भी नहीं पता था, इसीलिए उन्होंने बूम जैसी फिल्म साइन कर ली थी. कैटरीना को अब बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेस में काउंट किया जाता है. उनके और रणबीर के अफेयर की खबरें उस वक्त पक्की हो गई थीं, जब उनकी रणबीर के साथ सीक्रेट वेकेशन की पिक्चर लीक हो गई थी.

खैर ये सब छोड़िए और अब आइये मुद्दे की बात पर. आज हमको जो वीडियो दिखाने जा रहे हैं, उसे देखकर आप यकीन मानेंगे की कैटरीना अपनी पहली फिल्म से ही बेहद हॉट थी.

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क्या आपके घर का वाई-फाई भी है स्लो!

रोजमर्रा की जिंदगी में हमें वाई-फाई की जरूरत वैसे ही पड़ती है जैसे बिजली और पानी की. ज्यादातर इंटरनेट सर्विस प्रवाइडर्स बेसिक मॉडम राउटर देते हैं जिसके चलते घर के काफी कोने वाई-फाई की जद में नहीं आ पाते.

आज हम आपको वाई-फाई से जुड़ी कुछ आम दिक्कतों को सुलझाने के तरीके बता रहे हैं.

राउटर को सही जगह पर रखें

वाई-फाई की कवरेज को सुधारने का यह सबसे महत्वपूर्ण तरीका है. ज्यादातर यूजर्स राउटर को अपने घरों के कॉर्नर या फिर किसी खिड़की के करीब रख देते हैं. इससे घर में तारों का जाल तो नहीं बनता लेकिन इससे आपके वाई-फाई की रेंज सीमित हो जाती है, क्योंकि वाई-फाई सिग्नल ओमनी डायरेक्शन में फैलते हैं. इसलिए राउटर को रखने का सबसे बढ़िया तरीका घर का सेंटर प्वाइंट है.

इससे आपको अपने घर के हर कोने में वाई-पाई का सिग्नल मिलेंगे. साथ ही, आप वाई-फाई के राउटर को अपने आई लेवल या फिर इससे ऊपर के लेवल पर रखने की कोशिश करें, इससे आपके वाई-फाई सिग्नल बेहतर बना रहेगा. राउटर को दूसरी डिवाइस जैसे कॉर्डलेस फोन बेस स्टेशन, दूसरे राउटर्स, प्रिंटर्स और माइक्रोवेव अवन से दूर रखें.

अच्छी रेंज के लिए रिपीटर्स लगाएं

कई बार इंटरनेट सर्विस प्रोवाइड करने वाली कंपनी जो राउटर देती है वह अक्सर पूरे घर में वाई-फाई का नेटवर्क नहीं पहुंचा पाता. इसके लिए आप अपने मौजूदा राउटर को ज्यादा पावरफुल राउटर से बदल सकते हैं या फिर आप सबसे सस्ता उपाय- रिपीटर का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह डिवाइस आपके राउटर से वाई-फाई सिग्नल लेकर उसके कवरेज एरिया को बढ़ा देगी. रिपीटर से कनेक्ट होने के लिए डब्लूपीएस सबसे आसान तरीका है. इसके लिए आपको अपने राउटर के डब्लूपीएस को इनेबल करने के साथ रिपीटर के डब्लूपीएस बटन को ऑन करना होगा.

गेस्ट नेटवर्क

जब आपके घर में दोस्त और अन्य लोग पार्टी के लिए आते हैं तो अमूमन आप उनसे अपने प्राइमरी वाई-फाई पासवर्ड को शेयर नहीं करना चाहते. इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने राउटर पर गेस्ट नेटवर्क को इनेबल कर उसका सेपरेट पासवर्ड रख लें. इसके लिए आपको अपने राउटर के एडमिन सेटिंग पर जाना होगा. यहां पर आपको वायरलेस टैब पर गेस्ट नेटवर्क का ऑप्शन मिलेगा. यहां पर आप नेटवर्क का नाम चेंज करने के साथ पासवर्ड सेट कर सकते हैं.

इसके अलावा आप यहां नेटवर्क पर कनेक्ट होने वाले यूजर्स की संख्या का चुनाव भी कर सकते हैं. कुछ राउटर्स में आपको यह ऑप्शन भी मिलता है कि अगर किसी खास डिवाइस पर इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है तो यह उस डिवाइस को ब्लॉक कर देता है. इसके बाद जब आपके दोस्त घर से चले जाएं तो आप गेस्ट नेटवर्क को बंद करके अपने होम वाई-फाई को फिर से शुरू कर सकते हैं.

रीबूट करते रहें

वैसे तो राउटर्स हमेशा काम करते रहने के लिए बनाए गए हैं मगर कभी-कभार आप इन्हें रीबूट भी कर सकते हैं. ध्यान रहे रीबूट करें, रीसेट नहीं. सबसे बेहतर तरीका यह होगा कि आप राउटर को ऑफ करके कुछ देर बात ऑन करें. कई बार कनेक्टिविटी में समस्या आने पर भी यह तरीका काम करता है. बंद करके ऑन करने पर इंटरनेट सही से चलने लगता है.

वाई-फाई का पासवर्ड बदलते रहें

क्या आपने कभी अपने वाई-फाई का पासवर्ड बदला है? ज्यादातर यूजर्स पहली बार वाई-फाई इंस्टॉल करने के बाद पासवर्ड नहीं बदलते हैं. आप कई बार जरूरत पड़ने पर अपने पासवर्ड को अपने दोस्तों और पड़ोसी से भी शेयर करते हैं. इसका मतलब है कि अगली बार आपका दोस्त या फिर पड़ोसी बिना किसी इजाजत के आपके वाई-फाई का इस्तेमाल कर सकता है. इसलिए इससे बचने का तरीका यह है कि आप हर छह महीने में पासवर्ड बदलते रहें.

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