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आखिर क्यों घटा भारत का जीडीपी ग्रोथ रेट

वित्त वर्ष 2017 के दौरान सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर 7.1 फीसदी रही. वहीं वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (जनवरी से मार्च) के दौरान जीडीपी विकास दर 6.1 फीसदी रही है. कृषि क्षेत्र के काफी अच्छे प्रदर्शन के बावजूद वृद्धि दर नीचे आई है.

सरकार ने 500 और 1,000 के बड़े मूल्य के पहले से चल रहे नोटों को आठ नवंबर को बंद करने की घोषणा की थी. इस नोट बदलने के काम में 87 फीसदी नकद नोट चलन से बाहर हो गए थे. नोटबंदी के तत्काल बाद की तिमाही जनवरी-मार्च में वृद्धि दर घटकर 6.1 फीसदी रही है.

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च को समाप्त वित्त वर्ष में सकल मूल्यवर्धन (जीवीए) घटकर 6.6 फीसदी पर आ गया, जो कि 2015-16 में 7.9 फीसदी रहा था. नोटबंदी से 2016-17 की तीसरी और चौथी तिमाही में जीवीए प्रभावित हुआ है. इन तिमाहियों के दौरान यह घटकर क्रमश: 6.7 फीसदी और 5.6 फीसदी पर आ गया. जो इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाहियों में 7.3 और 8.7 फीसदी रहा था.

नोटबंदी के बाद कृषि को छोड़ कर अन्य सभी क्षेत्रों में गिरावट आई. विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर चौथी तिमाही में घटकर 5.3 फीसदी रह गई. जो एक साल पहले समान तिमाही में 12.7 फीसदी रही थी. निर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर भी नकारात्मक रही. बेहतर मानसून की वजह से कृषि क्षेत्र को फायदा हुआ. 2016-17 में कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 4.9 फीसदी रही, जो इससे पिछले वित्त वर्ष में 0.7 फीसदी रही थी. चौथी तिमाही में कृषि क्षेत्र का जीवीए 5.2 फीसदी बढ़ा, जबकि 2015-16 की समान तिमाही में यह 1.5 फीसदी बढ़ा था.

कोयला, कच्चा तेल व सीमेंट उत्पादन में गिरावट के चलते नए वित्त वर्ष में भी आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर अप्रैल में घटकर 2.5 फीसदी रही. इन उद्योगों ने पिछले साल अप्रैल में 8.7 फीसदी वृद्धि दर्ज की थी. इनमें उद्योग कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार कोयला, कच्चा तेल व सीमेंट उत्पादन में क्रमश: 3.8 फीसदी, 0.6 फीसदी व 3.7 फीसदी की गिरावट आई.

प्रमुख क्षेत्रों में धीमी वृद्धि से औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आइआइपी) पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि कुल औद्योगिक उत्पादन में इन क्षेत्रों का योगदान करीब 38 फीसदी है. रिफाइनरी उत्पाद व बिजली उत्पादन की वृद्धि दर अप्रैल में कम होकर क्रमश: 0.2 फीसदी और 4.7 फीसदी रही, जो पिछले साल इसी माह में क्रमश: 19.1 फीसदी व 14.5 फीसदी थी. हालांकि प्राकृतिक गैस, उर्वरक और इस्पात क्षेत्र में क्रमश: 2 फीसदी, 6.2 फीसदी व 9.3 फीसदी की वृद्धि हुई.

अर्थशास्त्री इस गिरावट की बड़ी वजह कंस्ट्रक्शन और नॉन फूड क्रेडिट सेक्टर के कमजोर प्रदर्शन को मान रहे हैं. गौरतलब कि चौथी तिमाही में कंस्ट्रक्शन सेक्टर की ग्रोथ पिछली तिमाही के 6 फीसदी से घटकर -3.7 फीसदी रही है. वहीं सालाना आधार पर इस सेक्टर की ग्रोथ 5 फीसदी से घटकर 1.7 फीसदी रह गई है.

नॉन फूड फाइनेंस सेक्टर में मंदी

बैंकों इस तिमाही में कर्ज का वितरण कम कर सके. खासतौर पर नॉन फूड फाइनेंस सेक्टर में कर्ज का वितरण धीमा रहा. तिमाही आधार पर फाइनेंनशियल, इंश्योरेंस, रियल्टी और प्रोफेशनल सर्विसेज की ग्रोथ 9 फीसदी से घटकर 2.2 फीसदी रह गई. वहीं सालाना आधार पर वित्त वर्ष 2017 में इस सेक्टर की ग्रोथ 10.8 फीसदी से घटकर 5.7 फीसदी रही.

संशोधित हुई दरें

वित्त वर्ष 2015 की जीडीपी ग्रोथ 7.2 फीसदीी से संशोधित होकर 7.5 फीसदीी हो गई. वित्त वर्ष 2014 की जीडीपी ग्रोथ 6.5 फीसदीी से संशोधित होकर 6.4 फीसदीी हो गई. वित्त वर्ष 2013 की जीडीपी ग्रोथ बिना बदलाव के 5.5 फीसदीी पर बरकरार रही.

ये हैं चैंपियंस ट्रॉफी के सबसे युवा खिलाड़ी

1 जून से आइसीसी चैंपियंस ट्रॉफी 2017 का आगाज हो रहा है. टूर्नामेंट में वनडे क्रिकेट के 8 धुरंधर देश खिताब जीतने के इरादे से मैदान पर उतरेंगे. डिफेंडिंग चैंपियन टीम इंडिया अपना खिताब बचाना चाहेगी. सभी 8 टीमों में कुछ युवा खिलाड़ी होंगे और कुछ सीनियर खिलाड़ी. अनुभव और युवा जोश का ये मिश्रण हर टीम की ताकत होगी.

आइए आपको रूबरू करवाते हैं चैंपियंस ट्रॉफी के 5 सबसे युवा खिलाड़ी जो मैदान पर दिखायेंगे अपना जलवा.

शादाब खान (पाकिस्तान)

पाकिस्तान के स्पिनर शादाब खान की उम्र 18 वर्ष 240 दिन है और वो इस बार टूर्नामेंट में खेलने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी होंगे. पाकिस्तान अंडर-19 टीम में दम दिखाने के बाद उनको राष्ट्रीय टीम में जगह मिली है.

मेहदी हसन (बांग्लादेश)

बांग्लादेश के मेहदी हसन की उम्र 19 वर्ष 219 दिन है. वो इस टूर्नामेंट में उतरने वाले दूसरे सबसे कम उम्र के खिलाड़ी होंगे. इस युवा ऑलराउंडर को भी अंडर-19 क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने के बाद राष्ट्रीय टीम का बुलावा मिला.

मोसाडेक होसैन (बांग्लादेश)

तीसरे नंबर पर भी बांग्लादेश के ही खिलाड़ी का कब्जा है. मोसाडेक की उम्र 21 वर्ष 172 दिन है. वो एक बेहतरीन बल्लेबाज हैं और तमाम क्रिकेट लीग में भी अपना दम दिखा चुके हैं.

एंडाइल फेहलुकवायो (दक्षिण अफ्रीका)

एंडाइल दक्षिण अफ्रीका के पेसर-ऑलराउंडर हैं. उनकी उम्र इस समय 21 वर्ष 89 दिन है. वो अब तक अपने देश की तरफ से 16 वनडे मैच खेल चुके हैं.

कगीसो रबाडा (दक्षिण अफ्रीका)

चैंपियंस ट्रॉफी में खेलने वाले पांचवें सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाज कगीसो रबाडा. वो कुछ दिन पहले ही 22 साल के हुए हैं. साथ ही साथ चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले इस युवा गेंदबाज ने गेंदबाजों की आइसीसी वनडे रैंकिंग के शीर्ष स्थान पर भी कब्जा जमा लिया है.

सपनों से हासिल होती है मंजिल

हाल ही में एक कहानी पढ़ी थी. एक अनपढ़ लड़का था, भेड़-बकरियां चरा कर या लोगों के छोटे-मोटे काम करके अपना गुज़ारा करता था. पास में ही एक बौद्ध मठ था जो अपने ज्ञान के लिए विख्यात था. एक दिन उस लड़के ने सोचा कि मेरा जीवन यूं ही व्यर्थ बीत जाएगा, क्यों न मठ में जाकर लोगों की सेवा करूं. काम का काम हो जाएगा और दो अक्षर ज्ञान के कानों में पडेंगे तो जीवन संवर जाएगा. बस जा पहुंचा मुख्य लामा के पास और जाकर बोला कि “मैं बरतन साफ करने से लेकर साफ-सफाई तक हर काम करने को तैयार हूं, पर आप मुझे अपनी शरण में ले लें”. लामा उसे ऊपर से नीचे देखते हुए बोले कि “हर इंसान को अपनी उपयोगिता सिद्ध करनी होती है. तुमको भी करनी होगी. तुममें कोई हुनर है?”

“हुनर. हुनर तो कोई नहीं लेकिन हां मुझे शतरंज खेलनी आती है. बचपन में सीखी थी.”

शतरंज मंगवाई गई और दोनों खेलने बैठ गए. “रुको, शतरंज का खेल शुरू करने से पहले एक शर्त रखते हैं कि जो जीतेगा वो हारनेवाले की नाक काटेगा. बोलो मंज़ूर है?”

लड़के ने हामी भर दी और खेल शुरू हुआ. लड़का लामा के सामने घबराया सा था सो हारने लगा. हारता गया, फिर उसकी नज़र तलवार पर पड़ी और शर्त याद आ गई. नाक कटने के डर से अब संभल कर खेलना शुरू हुआ और एक-एक करके बाजियां जीतने लगा. लामा के चेहरे पर चिंता के भाव आने लगे. आखिरी बाजी थी और जीत लड़के के पाले में थी. जैसे ही वो आखिरी बाजी चलने लगा. रुक गया. सोचने लगा कि अगर हारने पर मेरी नाक कट जाए तो किसी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा पर लामा की नाक कटी तो लोग इनका मजाक बनांएगे. हो सकता है शर्म के मारे लामा शिक्षा देना बंद कर दें. इससे कितने विद्यार्थियों का नुकसान होगा. और उसने अगली चाल गलत चल दी और हार गया. लामा मंद-मंद मुस्कराने लगे और बोले कि आज से तुम इस मठ में रह सकते हो. शिष्यों ने पूछा कि हारने पर नाक काटने की बजाए आप इसे निरक्षर को मठ में रख रहे हैं.

“मैं इसके हालातों को शांतिपूर्वक संभालने के हुनर और दूसरों के प्रति करूणामय रवैये के कारण इसे यहां रहने की अनुमति दे रहा हूं. ये चाहता तो मुझे आसानी से हरा सकता था पर इसने ऐसा नहीं किया. जो इंसान जीवन में अपनी गलतियों से सीखता है वे असफल होकर भी सफल हो जाता है.”

मैं सोचने लगी कि कितनी बड़ी फिलासफी है इस कहानी में. कई बार होता है कि हम सही रास्ते पर चल रहे होते हैं लेकिन शुरुआती नाकामियों से रास्ता बदल लेते हैं फिर जब कभी पीछे मुड़कर देखने का मौका मिलता है तो पता चलता है कि मंजिल कितने करीब थी. गलतियों से सीखने की बजाए दूसरों में. मौकों में कमियां निकालने लग जाते हैं. हो सकता है जितनी समझदारी से आज चीजों को समझ रहे हैं,अनुभव की कमी के कारण. मकसदहीनता के कारण तब न समझ पा रहे हों, चाहे कैरियर हो, शौक हों या रिश्ते हर चीज समय और निष्ठा मांगती है. लगन से आप बड़ी से बड़ी मुश्किलों को पार कर लेते हैं. स्टीव ने एप्पल का आविष्कार गैराज में किया था. एडीसन की लैब रेल का डिब्बा था. हालातों को मेहनत और धैर्य से बदला जा सकता है.

किसी ने सही कहा है कि अगर किसी बड़े काम को करना है तो रोज थोड़ा-थोड़ा करो. रोज़ थोड़ा-थोड़ा करने से एक दिन वो पूरा खत्म हो जाएगा. पर छोड़ देने से कभी नहीं. सपने देखने के साथ-साथ उन्हें पूरा करने का हौंसला भी रखना पड़ता है क्योंकि तरक्की का कोई शार्ट कट नहीं होता, बस वो कदम हैं जो चाहे छोटे हैं पर हैं आगे की ओर. और जो कदम चल रहे हैं वो हमें मंजिल तक जरूर पहुंचाते हैं. अब्राहम लिंकन ने कहा है कि मैं चाहे धीमे चलता हूं पर चलता आगे की और हूं. कभी नहीं भूलना चाहिए कि हर कामयाब संस्थान पहले विचार होती है, फिर कागज और फिर इमारत. हमारी इमारत भी हमारे हौंसलों की तामील है.

– विम्मी करण सूद

..तो ऑस्ट्रेलियाई टीम की जर्सी पहनकर घूमेंगे दादा

दुनिया की टॉप-8 क्रिकेट टीमें आज से शुरू हो रहे मिनी वर्ल्ड कप यानी चैंपियंस ट्रॉफी में खिताबी मुकाबले के लिए कमर कस चुकी है. एक जून से 18 जून तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में दो सेमीफाइनल और एक फाइनल सहित कुल 16 मैच खेले जाएंगे. 2013 में हुए पिछले सीजन में खिताब अपने नाम करने वाली भारतीय टीम खिताब बचाने के इरादे से मैदान पर उतरेगी.

इस महामुकाबले से पहले दुनिया भर के दिग्गजों ने अपने पसंदीदा टीमों का चयन कर लिया है. इन्हीं नामों में पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और दिग्गज लेग स्पिनर शेन वॉर्न भी शामिल हैं.

एक निजी चैनल के प्रोग्राम में पहुंचे दोनों पूर्व खिलाड़ियों ने खुल कर बताया कि कौन-कौन सी टीमें खिताब की प्रबल दावेदार हैं. साथ ही यह भी बताया कि इस प्रतियोगिता किन खिलाड़ियों को दबदबा रहेगा. साथ ही टीम इंडिया के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा की गई. इस मौके पर पूर्व वर्ल्ड कप चैंपियन कप्तान माइकल क्लार्क ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच फाइनल के भविष्यवाणी की.

मगर टीम इंडिया के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली इस बात से इत्तेफाक रखते नजर नहीं आए. दादा ने कहा कि इंग्लैंड अपने घर में काफी खतरनाक है और उसने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज जीती है. ऐसे में वो इस खिताब की प्रबल दावेदार है. इस पर दिग्गज स्पिनर शेन वॉर्न ने कहा कि भारत किसी भी कंडीशन में अच्छा खेल सकती है और इसी वजह से वो भी खिताब की बड़ी दावेदार है.

इस मौके पर वॉर्न ने चुटकी लेते हुए दादा से शर्त भी लगा ली. वॉर्न ने कहा कि यदि ऑस्ट्रेलिया चैंपियंस ट्रॉफी जीत जाता है तो सौरव को एक दिन के लिए ऑस्ट्रेलियाई जर्सी पहननी होगी और यदि इंग्लैंड जीता, तो वॉर्न खुद इंग्लैंड की जर्सी पहनेंगे. दोनों ने एक-दूसरे की चुनौती को स्वीकार किया.

हंसल मेहता के समर्थन में उतरे राजकुमार राव

हंसल मेहता निर्देशित फिल्म ‘‘सिमरन’’ का विवाद ठंडा होने का नाम नहीं ले रहा है. फिल्म के निर्देशक हंसल मेहता ने जब से कंगना रानौट को ‘एडीशनल स्क्रिप्ट एंड डायलाग राइटर’ की क्रेडिट दी है, तब से फिल्म ‘सिमरन’ के एडीटर व लेखक अपूर्वा असरानी लगातार हंसल मेहता पर आरोपों की बौछार लगाए हुए हैं. अपूर्वा असरानी ने हंसल मेहता को कायर व बिना रीढ़ वाला इंसान कह दिया है. मगर पूरी फिल्म इंडस्ट्री चुप है. जो लोग हंसल मेहता के संग काम कर चुके हैं, वह भी मूक दर्शक बने हुए हैं.

मगर हंसल मेहता की हर फिल्म में अभिनय करने वाले अभिनेता राज कुमार राव ने हंसल मेहता का पक्ष लेते हुए अपनी जुबान खोली है. राज कुमार राव ने कहा है,‘‘अपूर्वा का आहत होना ठीक है. मगर हंसल मेहता कायर या बिना रीढ़ की हड्डी वाले कमजोर इंसान नहीं है…..’’ वाह क्या बात है..बालीवुड में लोग राज कुमार राव की इस स्वामी भक्ति के कायल हो गए हैं..बालीवुड से जुड़े कुछ लोगों की राय में राज कुमार राव के लिए हंसल मेहता की तारीफ में बोलना मजबूरी है. उन्हे कुछ अच्छी फिल्में करने का अवसर हंसल मेहता ने ही दिया है.

मगर राज कुमार राव यह भूल जाते हैं कि बिना अच्छी पटकथा के कोई फिल्म अच्छी नहीं बन सकती. इसलिए लेखक को नजरंदाज नहीं किया जा सकता. इतना ही नहीं राज कुमार राव यह भी भूल गए कि जिन फिल्मों में राज कुमार राव ने कंगना रानौट के साथ काम किया, उन फिल्मों की सारी क्रेडिट कंगना रानौट ही खा गयी, उन्हे सफल फिल्म का श्रेय तक नहीं मिला.

बहरहाल, विद्या बालन ने कंगना रानौट की अतिमहत्वाकांक्षा पर अपरोक्ष रूप से तंज कसते हुए एक तस्वीर सोशल मीडिया पर डाली है.

मिरर गेम:अब खेल शुरू – मनोविज्ञान पर स्तरहीन फिल्म

मूलतः आईटी प्रोफेशनल विजित शर्मा पहली बार बतौर लेखक व निर्देशक रहस्य व रोमांच प्रधान मनोवैज्ञानिक फिल्म ‘‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’’ लेकर आए हैं. मनोचिकित्सक प्रोफेसर के इर्द गिर्द घूमने वाली यह फिल्म प्रभावित नहीं करती. दर्शकों को दुविधा में डालने के प्रयास में रहस्यमय परिस्थितियों को पैदा करते हुए लेखक निर्देशक स्वयं कन्फ्यूज हो गए हैं.

फिल्म की कहानी के केंद्र में मनोचिकित्सक प्रोफेसर जय वर्मा (परवीन डबास) हैं. प्रोफेसर वर्मा के एक विद्यार्थी रणवीर भार्गव ने दो वर्ष पहले आत्महत्या कर ली थी, जिसके लिए प्रोफेसर जय वर्मा खुद को दोषी मानते हैं, इसलिए वह अपना ईलाज डा.सोनल से करवा रहे हैं. वह अपने प्रोफेसर के काम को भी सही ढंग से अंजाम नहीं दे पा रहे हैं. विश्वविद्यालय में उनकी पत्नी तान्या वर्मा (शान्ति अकिनेनी) का रोनी (ध्रुव बाली) के साथ रोमांस की चर्चाएं हैं. पर जय वर्मा को तान्या के प्रेमी का नाम नहीं पता. घर के अंदर पति पत्नी के बीच मधुर संबंध नहीं हैं. तान्या चाहती है कि जय वर्मा उसे तलाक दे दे, मगर जय वर्मा ऐसा नहीं करना चाहते. जय की सोच है कि जो उनकी नहीं हो सकती, वह दूसरे की कैसे हो जाए. इसलिए वह तान्या की हत्या करना चाहते हैं.

इस बीच रोनी उनके पास विद्यार्थी बनकर आता है और उनसे अपने शोधकार्य में मदद चाहता है. जय वर्मा को लगता है कि इसके माध्यम से वह अपना काम कर सकते हैं. जय वर्मा, रोनी की मदद इस शर्त पर करने के लिए तैयार होते हैं कि वह उनकी पत्नी की हत्या उनकी योजना के अनुसार कर दे. जय वर्मा की योजना है कि वह रोनी व तान्या दोनों को खत्म कर देंगे. उसके बाद शुरू होता है रहस्य का खेल.

तान्या के गायब हो जाने के बाद पुलिस की जांच शुरू होती है. पुलिस जांच अधिकारी शेणाय (स्नेहा रामचंद्रन) पुलिस मनोचिकित्सक डा. राय (पूजा बत्रा) भी इस जांच का हिस्सा बन जाती हैं. पुलिस को लगता है कि जय वर्मा सीजोफ्रेनिया का शिकार है. उसके दो रूप हैं और उसी ने अपनी पत्नी तान्या को गायब किया है. पता चलता है कि यह रोनी ही तान्या का प्रेमी है जो कि प्रोफेसर जय वर्मा से अपने भाई रणवीर भार्गव की मौत का बदला लेने के लिए तान्या से झूठा प्यार का नाटक कर रहा है. जय वर्मा के फंस जाने पर  रोनी खुद ही तान्या को सच बताकर उसकी हत्या कर देता है. उधर जय वर्मा की शतरंजी चाल में फंस कर रोनी मारा जाता है. बाद में जय वर्मा भी सारे आरोपों से बरी हो जाते हैं. और डा. सोनल के साथ नई जिंदगी शुरू करते हैं.

लेखक निर्देशक विजित शर्मा यदि अपनी फिल्म को इंसानी मनोविज्ञान तक ही सीमित रखते तो शायद फिल्म बेहतर बन जाती. मगर बदले की भावना की कहानी के साथ दर्शकों के मन में शक की सुई इधर उधर घुमाने के चक्कर में जिस तरह के घटनाक्रम गढ़े गए हैं, उससे फिल्म स्तरहीन हो जाती है. फिल्म सीजोफ्रेनिया और मल्टीपल पर्सनालिटी डिसआर्डर की बात करती है, मगर लेखक व निर्देशक की अपनी कमजोरियों के चलते यह बात ठीक से उभर नहीं पाती कि इस तरह की बीमारी से ग्रसित इंसान के दिमाग में उस वक्त क्या चल रहा होता है.

इस विषय पर अति रोचक व अति संजीदा फिल्म बन सकती थी, लेकिन विजित शर्मा पूरी तरह से असफल रहे. पूरी फिल्म में एक भी दृश्य में जय वर्मा अपनी दिमागी बीमारी से जूझते नजर नहीं आते. दवा का सेवन बंद करने के बावजूद वह एक उच्च स्तर के प्रोफेसर की तरह कई तरह की बुद्धिमत्तापूर्ण योजनाएं बनाते रहते हैं. दूसरी बात फिल्म में तकनीकी शब्द उपयोग किए गए हैं और उनका अर्थ भी नहीं स्पष्ट किया गया, जिससे आम दर्शक बोर हो जाता है. किसी भी किरदार को पूरी गहराई के साथ पेश नहीं किया गया. फिल्म का अंत क्या होगा, यह इंटरवल से पहले ही समझ में आ जाता है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो परवीन डबास और शांति अकिनेनी ने ठीक ठाक अभिनय किया है. मगर सीजोफ्रेनिया ग्रसित इंसान की दिमागी हालत को परवीन डबास ठीक से परदे पर नहीं ला सके, अब इसमें पटकथा लेखक व निर्देशक की भी कमजोरी रही है. पर फिल्म में पूजा बत्रा को छोटे से किरदार में जाया किया गया है. स्नेहा रामचंद्रन का किरदार भी उभर नही पाता. ध्रुव  बाली कुछ दृश्यों में ही जम पाए हैं.

एक घंटे 47 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘मिरर गेमःअब खेल शुरू’’ का निर्माण राहुल कोचर, सह निर्माण, लेखन व निर्देशन विजित शर्मा ने किया है. कैमरामैन जोश इथेवारिया, गीतकार सिद्धांत कौशल तथा कलाकार हैं-परवीन डबास, पूजा बत्रा, ध्रुव बाली,  स्नेहा रामचंद्रन, शांति अकिनेनी व अन्य.

संजय दत्त की दीवानी थीं रवीना टंडन

बॉलीवुड एक्ट्रेस रवीना टंडन जल्द ही फिल्म 'शब' में नजर आएंगी. हाल ही में एक प्रमोशनल इवेंट में एक दौरान रवीना ने कहा कि वह एक समय में संजय दत्त के प्रति बहुत ज्यादा आकर्षित थीं और उनकी दीवानी थीं.

फिल्म 'शब' के प्रचार में इंटरव्यू के दौरान रवीना से उनके पंसदीदा कलाकारों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि समय-समय पर उनकी पसंद बदलती रही है.

उन्होंने कहा कि बचपन में मैं ऋषि कपूर की प्रशंसक थीं और जब बड़ी हुई तो संजय दत्त की तरफ आकर्षित थी. मैंने उनके साथ सात फिल्मों में काम किया है. मैं उनके साथ काम करने के दौरान काफी डरी रहती थी क्योंकि मैं यकीन ही नहीं कर पाती थी कि मैं वास्तव में उस शख्स के साथ फिल्म में काम कर रही हूं, जिसका पोस्टर चारों तरफ मेरे कमरे की दीवारों पर लगा हुआ है.

रवीना फिलहाल रिएलिटी शो सबसे बड़ा कलाकार को जज कर रही हैं. अभी कुछ समय पहले रवीना की फिल्म ‘मातृ’ भी रिलीज हुई है.

बता दें कि 90 के दशक में अक्षय और रवीना में अफेयर था और दोनों ने सगाई भी कर ली थी. लेकिन यह रिश्ता ज्यादा दिन तक नहीं चल पाया था. उसके बाद अक्षय ने शिल्पा शेट्टी को डेट किया लेकिन उनका रिश्ता भी आगे नहीं बढ़ पाया और उन्होंने ट्विंकल खन्ना से शादी कर ली. रवीना भी अनिल थडानी से शादी कर अपनी जिंदगी बिता रही हैं.

अब अपना बैंक अकाउंट भी करवाएं पोर्ट

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंक खातों को लेकर नया प्रस्ताव पेश किया है. आरबीआई के इस नए प्रस्ताव के मुताबिक अब बिना खाता नंबर बदले अब लोग अपना बैंक बदल सकेंगे. अगर यह प्रस्ताव पास होता है तो मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी के बाद बैंक अकाउंट पोर्टेबिलिटी भी संभव हो सकेगी.

जिस प्रकार आप मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी का लाभ ले पाते हैं, काफी हद तक वैसे ही बैंक अकाउंट नंबर पोर्टेबिलिटी का लाभ भी ले पाएंगे. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर एसएस मूंदड़ा ने खाता संख्या पोर्टेबिलिटी की जरूरत पर जोर दिया है और यह जल्द ही ग्राहक को मुहैया करवा दी जाएगी.

साफ है कि सभी बैंक खातों के आधार कार्ड से लिंक होने के बाद अब यह संभव है कि खातों को एक बैंक से दूसरे बैंक में स्विच किया जा सके. जो कि बैंक खाता धारकों के लिए काफी राहत भरा फैसला हो सकता है.

आरबीआई का कहना है कि हाल ही के दौर में बैंकिंग सिस्टम में लगातार टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ा है, जिससे इन चीजों में काफी आसानी आई है. यही कारण है कि अब मोबाइल नंबर पोर्टेबिलिटी की तरह ही बैंक खाता भी पोर्टेबल किया जा सकता है.

एसएस मूंदड़ा ने कहा कि एक बार अकाउंट नंबर पोर्टेबिलिटी शुरू हो जाएगी उसके बाद कुछ नहीं बोलने वाला ग्राहक बैंक से बात किए बिना ही दूसरे बैंक के पास चला जाएगा. मूंदड़ा ने कहा कि बड़ी संख्या में बैंक बीसीएसबीआई द्वारा डिजाइन आचार संहिता का पालन नहीं कर रहे हैं. बीसीएसबीआई एक स्वतंत्र निकाय है जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक्स असोसिएशन (IBA) और अनुसूचित कमर्शल बैंकों द्वारा स्थापित किया गया है.

उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग से जुड़े खतरों के बाबत भी बात की. बैंकिंग कोड्स और स्टैंडर्ड्स बोर्ड ऑफ इंडिया (BCSBI) ने मुंबई में एक कार्यक्रम में कहा, मैंने कुछ साल पहले अकाउंट नंबर पोर्टेबिलिटी की वकालत की थी. तब यह भले ही एबस्ट्रेक्ट लगा हो लेकिन यूपीआई आदि नई तरह के तकनीकी पेमेंट सिस्टम आ जाने के बाद और आधार नंबर के खातों से जुड़ने के बाद इसे लागू किए जाने की संभावना तेजी से बलवती हुई है.

मूंदड़ा ने कहा कि रिजर्व बैंक की चिंता सभी लोगों को बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित है. केंद्रीय बैंक यह नहीं देख रहा कि ग्राहकों को ये सुविधाएं देने के लिए बैंक कितना शुल्क लगा रहे हैं.

उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में आधार नामांकन हुआ है, एनपीसीआई ने प्लेटफॉर्म बनाया है. आईएमपीएस जैसे बैंकिंग लेनदेन के लिए कई ऐप शुरू किए गए हैं. ऐसे में खाता संख्या पोर्टेबिलिटी की भी संभावना बनती है.

मूंदड़ा ने यह भी कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक धोखाधड़ी के जरिये अवैध रूप से होने वाले इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए जल्द ही अंतिम दिशा निर्देश जारी करेगा. इन नियमों में अनाधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन के मामले में ग्राहकों की देनदारी को सीमित रखने का प्रावधान किया जा सकता है.

सचिन ने पहली बार की विकेटकीपिंग और फिर..

भारत में क्रिकेट सचिन चेंदुलकर के नाम से जाना जाता है. सचिन सिर्फ भारत ही नहीं विश्व के महान खिलाड़ियों में से एक हैं. खुद को महान बनाने और इस मुकाम तक पहुंचने के लिए उन्होंने काफी संघर्ष किया है.

रोचक बात यह है कि आपने सचिन को कभी विकेटकीपिंग करते नहीं देखा होगा मगर तेंदुलकर ये भी कर चुके हैं और साथ ही इस वजह से एक भयानक हादसे का शिकार होते बाल-बाल बचे.

सचिन अपनी आत्मकथा ‘प्लेइंग इट माई वे’ में बताते हैं कि वह मुंबई स्थित शिवाजी पार्क में अपनी टीम की कप्तानी कर रहे थे. उनकी टीम का विकेटकीपर चोटिल हो चुका था. 12 साल के सचिन ने साथी खिलाड़ियों से पूछा कि क्या वो विकेटकीपिंग करना चाहते हैं, तो किसी ने भी हां नहीं कहा. मैंने ये चैलेंज लिया. हालांकि इससे पहले मैंने कभी विकेटकीपिंग में हाथ नहीं आजमाए थे. मैं विकेट के पीछे खुद को काफी असहज महसूस कर रहा था.

सचिन बताते हैं कि, मैं विकेटकीपिंग करने में परफेक्ट नहीं था और तभी एक बॉल मिस हुई और तेजी से मेरी तरफ आई. मैं इससे पहले कुछ करता, बॉल सीधे मेरे चेहरे पर लगी. मुझे काफी गहरी चोट लग गई थी और खून भी काफी बहने लग गया था. मेरी आंख बाल-बाल बची थी.

उस समय मेरे पास इतने रुपए नहीं थे कि टैक्सी लेकर घर चला जाता और बस में बैठकर जाने से भी शर्म आ रही थी. मैंने अपने एक दोस्त से साइकिल पर लिफ्ट मांगी.

भारत की ओर से 463 वनडे खेलने वाले तेंदुलकर ने वनडे में 86.23 की स्ट्राइक के साथ 18,426 रन बनाए हैं. इस दौरान उन्होंने 49 शतक समेत 96 अर्धशतक भी जमाए. वहीं बात अगर टेस्ट की करें तो 200 मैचों में इस खिलाड़ी ने 51 शतक और 68 अर्धशतक की मदद से 15,921 रन बनाए. टेस्ट क्रिकेट में सचिन 2 हजार से ज्यादा चौके लगाने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं. उन्होंने टेस्ट मैचों में 2058 चौके जड़े हैं.

चंपियंस ट्रॉफी में इन 5 भारतीय खिलाड़ियों पर होगी सबकी नजर

पहली जून से शुरू हो रही चैंपियंस ट्रॉफी के लिए वार्मअप मैच का दौर शुरू हो चुका है. भारत ने न्यूजीलैंड और बांग्लादेश दोनों को वार्मअप मैच में पराजित किया. क्रिकेट प्रेमियों की नजर यूं तो हर खिलाड़ी पर होगी लेकिन भारत की टीम के इन खिलाड़ियों से चैंपियंस ट्रॉफी में खास कमाल की उम्मीद है.

विराट कोहली

विराट कोहली पहली बार किसी आईसीसी इवेंट में भारत की अगुवाई कर रहे हैं. ऐसे में चैंपियंस ट्रॉफी में उनपर सबकी नजर होगी. आईपीएल में भले ही उनकी टीम रॉयल चैलेंजर्स का प्रदर्शन अच्छा न रहा हो, लेकिन व्यक्तिगत तौर पर विराट ने निराश नहीं किया. पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी का साथ होना भी विराट के लिए मददगार होगा.

एम एस धोनी

धोनी की कप्तानी में चार साल पहले भारत ने चैम्पियंस ट्रॉफी जीती थी. 2016 में, उन्होंने 2019 विश्वकप तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने का मन बनाया है और शायद यह इस बार भी टीम के लिए बेहतर साबित हो. कप्तान विराट कोहली के साथ धोनी की जोड़ी कमाल कर सकती है. फिलहाल इस वक्त तेज विकेटकीपर और मध्य क्रम के खतरनाक बल्लेबाज के तौर पर धोनी की जगह कोई नहीं ले सकता.

रवींद्र जाडेजा

चैंपियंस ट्रॉफी 2013 फाइनल के मैन ऑफ द मैच रहे रवींद्र जाडेजा पर भी नजर होगी. इंगलैंड में खेले अपने 12 वनडे मैचों में जाडेजा ने 23 विकेट लिए और 114.65 के स्ट्राइक रेट के साथ 266 रन बनाए हैं. इंग्लैंड के खिलाफ अपने दमदार प्रदर्शन कर खुद को साबित करने वाले जाडेजा पर चैम्पियंस ट्रॉफी में बड़ा दारोमदार होगा.

हार्दिक पांड्या

आईपीएल 2017 की विजेता टीम मुंबई इंडियंस का हिस्सा रहे हार्दिक पांड्या के पास ज्यादा अनुभव नहीं है. एक ऑल राउंडर के तौर पर अपने सात एकदिवसीय मैचों में पांड्या ने नौ विकेट लिए हैं और एक अर्द्धशतक लगाया है. 23 साल के इस खिलाड़ी के लिए चैंपियंस ट्रॉफी एक बड़ा मौका है और उन पर सबकी नजरें होगी.

भुवनेश्वर कुमार

26 विकेट लेकर आईपीएल 2017 के सबसे सफल गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार इस वक्त बेहतरीन फॉर्म में हैं. इंग्लैंड में खेले अपने नौ वनडे मैचों में भुवनेश्वर ने औसत 4.10 रन प्रति ओवर देकर 24.63 की औसत से 11 विकेट लिए हैं. इंग्लैंड की पिच पर अनुभव और बेहतरीन फॉर्म के बदले भारत को दांये हाथ के इस गेंदबाज से ट्रॉफी की उम्मीद है.

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