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हिंदू हैं हम

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का मन लखनऊ में नहीं लगा, तो वे मध्य प्रदेश चले आए और बुंदेलखंड इलाके के मंदिरों में रामलला की शरण में जाने के अलावा अपनी बातों से यह जताने की भी कोशिश करते रहे कि वे हिंदू ही हैं. खामखां भाजपा उन्हें बदनाम करती रही है. भगवान की शरण में जाने से शांति और संतुष्टि मिलती है, यह अखिलेश को करारी हार के बाद समझ आ रहा है. यही बात वे वक्त रहते समझ लेते, तो शायद बात जरा कम बिगड़ती.

अब यह राम की जिम्मेदारी है कि वे अखिलेश की बिगड़ी संवारें जो मध्य प्रदेश में कांग्रेस के सहयोग से संभावनाएं 2018 के विधानसभा चुनाव के लिए ढूंढ़ रहे हैं. हालांकि कोई नहीं मानेगा कि उन्होंने कोई सबक उत्तर प्रदेश के नतीजों से सीखा है जहां कांग्रेस के सहयोग ने उन की लुटिया डुबो दी.

 

बजी बांसुरी

मशहूर बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया को जाने क्या सूझी कि उन्होंने इस बात पर हैरानी जता डाली कि खेल से जुडे़ एक बच्चे (सचिन तेंदुलकर) को भारतरत्न देने से उस की गरिमा कम हुई है. बात में दम है, इसलिए किसी ने पंडितजी के नाम से मशहूर चौरसियाजी की बात पर एतराज नहीं जताया, हालांकि, समर्थन भी किसी ने नहीं किया.

हरिप्रसाद खुद की दावेदारी भारतरत्न के लिए यों पेश करें, यह हर्ज की नहीं, बल्कि उन के अधिकार की बात है. उन की बांसुरी से निकली यह धुन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गई है जिन्हें इस नामांकन पर फैसला लेना है. देखें, वे इस बंसी वाले की सुनते हैं या नहीं. हालांकि आजकल बांसुरी कोई नहीं सुनता. उस की धुन पर न गाएं दौड़तीं और न ही गोपियां रास रचाती हैं. पर वक्तखाऊ और पैसागंवाऊ खेल क्रिकेट हर कोई देखता है.

खाद्य पदार्थों के साइड इफैक्ट्स

खाद्य एलर्जी के लक्षण बच्चों और शिशुओं में बड़ी आम बात है, लेकिन ये किसी भी उम्र में दिख सकते हैं. संभव है कि जिन खाद्य पदार्थों को आप वर्षों तक बिना किसी समस्या के खाते रहे हों, अचानक ही अब उन से आप को एलर्जी हो जाए.

आप के शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली आप के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले सभी संक्रमणों व अन्य खतरों से लड़ कर आप को स्वस्थ रखती है. जब आप की प्रतिरक्षा प्रणाली किसी खाद्य पदार्थ या उस में मौजूद किसी तत्त्व की पहचान किसी खतरे के रूप में कर उस के लिए सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया करती है तो खाद्य एलर्जी प्रतिक्रिया का मामला सामने आता है.

 खाद्य पदार्थों से एलर्जी

भारत में करीब 3 प्रतिशत वयस्क और 6-8 प्रतिशत बच्चे खाद्य पदार्थ यानी फूड एलर्जी के शिकार हैं. वैसे, किसी को किसी भी चीज से एलर्जी हो सकती है, लेकिन कुछ विशेष खाद्य पदार्थों जैसे गेंहू, राई, बाजरा, मछली, अंडे, मूंगफली, सोयाबीन दूध से बने उत्पाद, सूखे मेवे प्रमुख हैं. कई लोगों को बैगन, खीरा, भिंडी और पपीता से भी एलर्जी होती है.

लक्षण

–       उलटी व दस्त होना. भूख न लगना.

–       मुंह, गले, आंखों, त्वचा व शरीर के दूसरे हिस्सों में खुजली होना.

–       पेट में दर्द और मरोड़ होना.

–       रक्त का दबाव कम हो जाना.

–       श्वासमार्ग अवरुद्ध हो जाना.

–       दिल की धड़कनें तेज होना.

हलके में न लें

 खाद्य एलर्जी के लक्षण हलके से ले कर गंभीर तक हो सकते हैं. सिर्फ इसलिए यह मान लेना कि शुरुआत में छोटीमोटी समस्या हुई थी तो बाद में वही खाद्य एलर्जी बड़ी समस्या खड़ी नहीं करेगी, गलत है. हो सकता है कि जिस खाद्य पदार्थ की वजह से पहली बार हलके लक्षण ही दिखें, अगली बार उस के गंभीर दुष्प्रभाव भी देखने को मिल सकते हैं.

एनाफाइलैक्सिस सभी एलर्जी की प्रतिक्रियाओं में सब से गंभीर है. पूरे शरीर में होने वाली एलर्जी की प्रतिक्रिया जान को जोखिम में डालने वाली होती है. यह आप के श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है. इस में रक्तचाप में अचानक बहुत कमी आ सकती है

तथा यह आप की हृदय गति को भी प्रभावित कर सकती है. एलर्जी वाले खा- पदार्थों के सेवन के चंद मिनटों में ही एनाफाइलैक्सिस की स्थिति सामने आ सकती है. इस में मौके पर इपिनैफ्रिन (एंड्रेनालाइन) की सूई के जरिए तुरंत इलाज किया जाना चाहिए.

 कोई भी भोजन ऐसी प्रतिक्रिया का कारक सिद्घ हो सकता है. 90 प्रतिशत ऐसी प्रतिक्रियाओं के लिए मुख्यतया 8 प्रकार के भोज्य पदार्थ जिम्मेदार माने जाते हैं जिन में अंडा, दूध, मूंगफली, मेवे, मछली, शेलफिश या सीपियां, गेहूं, सोया आदि शामिल हैं.

एलर्जी की प्रतिक्रिया के परिणामस्वरूप त्वचा, गैस्ट्रोइंटस्टाइनल ट्रैक्ट (पेट की नलियां व आंत), हृदय प्रणाली व श्वसन तंत्र प्रभावित हो सकते हैं. इस का असर हलके से गंभीर तक हो सकता है.

 खाद्य पदार्थ पेट में पहुंचने के 2 घंटे के भीतर ज्यादातर खाद्य संबंधी लक्षण सामने आ जाते हैं, कई बार ये चंद मिनटों में दिखने लग जाते हैं. कुछ बहुत ही दुर्लभ मामलों में ऐसी प्रतिक्रियाएं 4 से 6 घंटों में होती हैं या उस से भी ज्यादा समय ले सकती हैं. देरी से होने वाली ऐसी प्रतिक्रियाएं ज्यादातर बच्चों में देखने को मिलती हैं, जिन में खाद्य एलर्जी के परिणामस्वरूप एक्जिमा जैसे लक्षण नजर आते हैं.

एक अन्य प्रकार की देरी से सामने आने वाली खाद्य एलर्जी फूड प्रोटीन-इंड्यूस्ड एंटेरोकोलाइटिस सिंड्रोम की वजह से होती है. यह पेट व आंत में होने वाली एक घातक प्रतिक्रिया है, जो सामान्यतया दूध, सोया, कुछ खास अनाज व अन्य ठोस खाद्य पदार्थों के सेवन के 2 से 6 घंटों के बाद सामने आती है. दूध छुड़ाने के क्रम में या पहली बार उपरोक्त खाद्य के संपर्क में आने के बाद अकसर छोटे शिशुओं में ऐसी एलर्जी देखने को मिलती है. इस एलर्जी की स्थिति में बारबार उलटी आती है. यह निर्जलीकरण यानी डीहाइड्रेशन का रूप ले सकती है.

एक ही समूह के विभिन्न पदार्थों के लिए एलर्जी की जांच नहीं होती. कई बार जांच के परिणाम पौजिटिव आते हैं, इन से सिर्फ इस बात का ही पता लग पाता है कि एक समूह के अलगअलग खाद्य पदार्थ किसी खास जांच के परिणाम को कैसे प्रभावित करते हैं. जांच का नैगेटिव परिणाम एजर्ली को नकारने के लिए काफी महत्त्वपूर्ण सिद्घ हो सकता है.

संभव है कि आप ने कोई ऐसी चीज न खाई हो, जिस के प्रति आप की जांच के परिणाम पौजिटिव आए हैं, लेकिन ऐसे परिणाम की वजह उस से बनी हुई या संबंधित अन्य चीज हो सकती है, जिसे आप ने किसी न किसी रूप में लिया हो. कोई खाद्य पदार्थ आप के लिए खतरनाक है या नहीं, ओरल फूड चैलेंज इस का पता लगाने का सब से बेहतरीन तरीका है.

जांच जरूर करवाएं

जितनी बार एलर्जी के लिए जिम्मेदार संभावित खाद्य पदार्थ का सेवन किया जाता है, खाद्य एलर्जी को उत्प्रेरित करने वाली प्रतिक्रिया सामने आती है. इस के लक्षण अलगअलग व्यक्तियों में भिन्न हो सकते हैं. यह भी जरूरी नहीं है कि आप में भी हर बार एकजैसे लक्षण ही दिखें. खाद्य एलर्जी का असर आप की त्वचा, श्वसन तंत्र, जठरांत्र (पेट व आंत) संबंधी मार्ग व हृदय प्रणाली पर दिख सकता है.

हालांकि किसी भी उम्र में खाद्य एलर्जी की समस्या सामने आ सकती है, लेकिन अधिकतर मामलों में बचपन में ही इस के लक्षण नजर आ जाते हैं. अगर आप खाद्य एलर्जी को ले कर आशंकित हैं तो किसी एलर्जी विशेषज्ञ के पास जाएं, जो आप के परिवार के इतिहास से अवगत होने के बाद जरूरी जांच की सलाह देंगे और परिणाम के आधार पर खाद्य एलर्जी के बारे में फैसला लेंगे.

स्किन प्रिक टैस्ट के जरिए 20 मिनट में परिणाम का पता लगाया जा सकता है. थोड़ी मात्रा में खाद्य एलर्जी (फूड एलर्जन) युक्त तरल को आप के हाथ या पीठ की त्वचा पर रखा जाता है. अब आप की त्वचा में एक छोटी व जीवाणुरहित सूई चुभोई जाती है ताकि उस तरल का त्वचा में रिसाव हो सके. दर्दरहित यह जांच आप के लिए कुछ हद तक असहज हो सकती है.

संभावित एलर्जन वाले स्थान पर, जहां पर सूई चुभोई गई थी, मच्छर के काटने जैसी सूजन विकसित होने की स्थिति में यह माना जाता है कि जांच में एलर्जी के संकेत मिले हैं.

पुष्टि के लिए अब ऐसे तरल का इस्तेमाल करते हुए स्किन प्रिक जांच की जाती है, जिस में एलर्जन मौजूद न हो व इस स्थिति में उस स्थान पर कोई प्रतिक्रियात्मक असर नहीं दिखता है तथा दोनों स्थानों से प्राप्त परिणामों की तुलना संभव होती है.

एलर्जी विशेषज्ञ इन जांचों के परिणामों का इस्तेमाल निदान के क्रम में करते हैं. पौजिटिव परिणाम का आना निश्चित तौर पर यह संकेत नहीं देता है कि एलर्जी की समस्या है, जबकि नैगेटिव परिणाम एलर्जी नहीं होने की पुष्टि करता है.

एक गंभीर प्रतिक्रिया की संभावना बनी रहने की वजह से किसी अनुभवी एलर्जिस्ट द्वारा उन के क्लीनिक या उस स्थान पर ओरल फूड चैलेंज कराया जाना चाहिए, जहां आपात्कालीन सुविधाएं व चिकित्सकीय उपकरण उपलब्ध हों.

प्रबंधन व इलाज

खाद्य एलर्जी से निबटने का मुख्य तरीका उन खा- पदार्थों से परहेज है, जिन से समस्या होती है. खा- उत्पादों में मौजूद सामग्रियों की सूची को ध्यानपूर्वक पढ़ें और यह भी जानने की कोशिश करें कि आप को जिन से परहेज है, वे किसी और नाम से तो सूचीबद्घ नहीं हैं.

डब्बाबंद खाद्य पदार्थों के उत्पादकों को हमेशा ही एलर्जी के कारक (एलर्जन), इन 8 सब से आम चीजों-दूध, अंडा, गेहूं, सोया, मूंगफली, मेवे, मछली व जलीय शेलफिश (सीपियों) की पहचान कर अपने उत्पादों में उन की मौजूदगी के बारे में सरल व स्पष्ट भाषा में जानकारी देनी चाहिए. वैसी स्थिति में भी इन एलर्जन की मौजूदगी के बारे में जरूर बताया जाना चाहिए जब वे पदार्थ उत्पादों में एडिटिव (उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार या उन्हें परिरक्षित करने के लिए) या फ्लेवरिंग (स्वादिष्ठ या सुगंधित बनाने के लिए) के तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे हों.

एलर्जन से परहेज, कहना आसान लगता है परंतु बहुत मुश्किल काम है. हालांकि सामग्रियों की सूची से इस मामले में कुछ हद तक मदद मिली है, परंतु कुछ खाद्य पदार्थ इतने आम हैं कि उन से बच पाना चुनौतीपूर्ण कार्य है.

खाद्य एलर्जी से ग्रसित बहुत लोग सोचते हैं कि क्या उन की यह स्थिति हमेशा ही बनी रहेगी. इस का कोई निश्चित जवाब नहीं है. संभव है कि दूध, अंडे, गेहूं व सोया से होने वाली एलर्जी की समस्या समय के साथसाथ खत्म हो जाए, जबकि मूंगफली, मेवे, मछली व सीपियों से होने वाली एलर्जी की समस्या पूरी जिंदगी बनी रह सकती है.

बाहर खानापीना

बाहर रैस्टोरैंट आदि में खाते वक्त अतिरिक्त सावधानी बरतें. जरूरी नहीं है कि सूची में मौजूद हर पकवान में मौजूद सभी सामग्रियों की जानकारी वेटर को हो. हालांकि यह पूरी तरह आप की संवेदनशीलता पर निर्भर करता है. हो सकता है कि आप ने रसोई या रैस्टोरैंट में प्रवेश किया और आप एलर्जी के शिकार हो गए.

एनाफाइलैक्सिस

खाद्य एलर्जी की वजह से उभरने वाले लक्षण हलके से ले कर जान को जोखिम में डालने वाले तक हो सकते हैं, किसी भी ऐसी प्रतिक्रिया की भविष्यवाणी कर पाना संभव नहीं है. हो सकता है कि जिस खाद्य पदार्थ की वजह से किसी व्यक्ति में पहली बार हलके लक्षण ही दिखें, अगली बार उस के गंभीर दुष्प्र्रभाव, एनाफाइलैक्सिस भी देखने को मिल सकते हैं.

इस दौरान अन्य समस्याओं के साथ श्वास में परेशानी व रक्तचाप में औचक गिरावट देखने को मिल सकती है. एनाफाइलैक्सिस का सब से पहला इलाज इपिनैफ्रिन  (एड्रीनालीन) है. एलर्जन के संपर्क में आने के बाद एनाफाइलैक्सिस के लक्षण दिखने में सिर्फ चंद सैकंड या मिनट का समय लगता है, पलभर में स्थिति इस कदर बिगड़ सकती है कि यह आप के लिए घातक सिद्ध हो सकती है.

नैदानिक जांच में एक बार एलर्जी की पुष्टि होने के बाद, आप के एलर्जी विशेषज्ञ आप को इपिनैफ्रिन  औटो-इंजैक्टर की सलाह देते हैं तथा इसे इस्तेमाल करने का तरीका बताते हैं. अगर आप सांस में तकलीफ, बारबार खांसी, नब्ज की गति में बदलाव, गले में जकड़न, निगलने में समस्या जैसे गंभीर लक्षण या शरीर के भिन्नभिन्न हिस्सों में चकत्ते, त्वचा पर सूजन के साथसाथ उलटी, दस्त या पेटदर्द का अनुभव करते हैं तो शीघ्र ही इपिनैफ्रिन  का इस्तेमाल करें.                   

(लेखक प्राइमस सुपर स्पैशलिटी अस्पताल, नई दिल्ली में पीडियाट्रीशियन हैं)

 

सितारों की दरियादिली

अक्षय कुमार काफी समय से शहीद सैनिकों के परिवारों के लिए चैरिटी करते आए हैं. अक्षय के नक्शेकदम पर चलते हुए अब अभिनेता विवेक ओबराय भी दिल खोल कर चैरिटी कर रहे हैं. उन्होंने शहीदों के परिवार की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है.

विवेक ने सीआरपीएफ के 25 शहीद जवानों के परिवारों को महाराष्ट्र के ठाणे में एकएक फ्लैट दिया है. विवेक की कंपनी कर्म इन्फ्रास्ट्रकचर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से इन सीआरपीएफ शहीदों के परिवारों को 25 फ्लैट दिए गए हैं. बता दें कि इस से पहले अक्षय कुमार सीआरपीएफ के 12 शहीद जवानों के परिवारों को 1.08 करोड़ रुपए का योगदान कर चुके हैं. आशा है कि अक्षय और विवेक की तर्ज पर और भी कलाकार सामाजिक सरोकार से जुड़े कामों में रुचि दिखाएंगे.     

चौंका रहे हैं नवाज

नवाजुद्दीन सिद्दीकी जल्द ही श्रीदेवी की फिल्म ‘मौम’ में नजर आने वाले हैं. इस फिल्म में उन के किरदार की काफी चर्चा थी और लुक देख कर लग रहा है कि वह जायज भी थी. नवाज अपने हर किरदार में ढल जाने के लिए जाने जाते हैं. उन्हें इस लुक में पहचान पाना काफी मुश्किल है. तसवीर में वे आधे गंजे और चश्मा लगाए नजर आ रहे हैं.

फिल्म के बारे में नवाज ने कहा था कि इस लुक को फाइनल करने में फिल्म के डायरैक्टर रवि उदयवर को 15 दिन लगे थे. पहले फिल्म का किरदार सोचा जाता है लेकिन ‘मौम’ के लिए पहले लुक पर चर्चा हुई थी. इस लुक में नकली बौडी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया था जिन्हें लगाने और हटाने में तकरीबन 3 घंटे का समय लगता था. श्रीदेवी और नवाजुद्दीन सिद्दकी की यह फिल्म जल्द रिलीज होगी.

बौलीवुड में तलाक

काफी समय से अभिनेत्री मलाइका अरोड़ा और अरबाज खान के बीच संबंधों की कड़वाहट भरी खबरें आ रही थीं. दोनों ने तलाक के लिए अर्जी भी दी थी लेकिन कहनेसुनने में यही आ रहा था कि दोनों के बीच सबकुछ ठीक हो जाएगा क्योंकि सलमान खान इस मामले में मध्यस्थता कर रहे हैं और अपने भाई का घर नहीं टूटने देंगे. फिलहाल, सब की कोशिशें बेकार हो गईं और दोनों को कानूनी रूप से तलाक मिल गया है. बेटे अरहान की कस्टडी मलाइका अरोड़ा खान को मिली है जबकि अरबाज खान जब चाहें अपने बेटे से मिल सकते हैं.

कुछ साल पहले ही सुपरस्टार रितिक रोशन और सुजेन खान ने तलाक लेने का फैसला लिया था. फरहान अख्तर भी इसी राह पर हैं. जिस तरह से बौलीवुड में संबंधविच्छेद की खबरें आती हैं, उस से यह तो साफ हो जाता है कि परदे पर रोमांस की बड़ीबड़ी बातें करने वाले ये सितारे असल जिंदगी में परिवार और संबंधों को संजो कर रखने में काफी कमजोर हैं. 

कैट की तिकड़मबाजी

कैटरीना कैफ बड़ी सितारा थीं. अक्षय कुमार और सलमान के साथ उन की फिल्में हिट होती थीं. समय बदला और उन्होंने अपने स्टार पावर को मापने के लिए नए अभिनेताओं के साथ काम करना शुरू किया. लेकिन उन का यह दांव बिलकुल ही उलटा हो गया. जहां आदित्य राय कपूर के साथ उन की फिल्म ‘फितूर’ बुरी तरह से पिट गई वहीं सिद्धार्थ मल्होत्रा के साथ आई फिल्म ‘बारबार देखो’ को किसी ने एक बार भी नहीं देखा.

हैरानपरेशान कैट को अब किसी ने समझा दिया कि दोबारा बड़े सितारों के साथ काम करो, तभी उन का कैरियर स्पीड पकड़ पाएगा. उन्हें यह टोटका काम का लगा और अब वे आमिर खान के साथ फिल्म ‘ठग्स औफ हिंदुस्तान’ में नजर आएंगी. इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और ‘दंगल’ फेम ऐक्ट्रैस फातिमा सना शेख भी हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने अपने सब से पसंदीदा जोड़ीदार अक्षय कुमार के साथ भी एक फिल्म करने की डील पर पूरा जोर लगा रखा है. सलमान खान और करण जौहर अक्षय कुमार के साथ एक फिल्म का निर्माण करने जा रहे हैं और कैट उस में लीड रोल पाने के लिए अपनी सारी तिकड़में भिड़ा रही हैं.

सबके सामने कैटरीना ने की सलमान के साथ जबरदस्ती, वीडियो हुआ वायरल, आप भी देखें

हाल ही में दबंग खान एक प्रेस कांफ्रेंस में अपनी ही जींस चबाते हुए नजर आए थे, जिसके वीडियो ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया था. एक बार फिर सलमान खान सुर्खियों में बने हुए हैं, लेकिन इस बार वे अपनी वजह से नहीं बल्कि अपनी एक्स गर्लफ्रेंड कैटरीना की वजह से सुर्खियों में है. आईफा 2017 का जश्न शुरू होने वाला है और यही वजह है कि गुरुवार रात आईफा की प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई थी.

इस प्रेस कांफ्रेंस में सलमान खान, कैटरीना कैफ, आलिया भट्ट शामिल हुए, जिन्होंने साथ मिलकर लोगों के लिए समां बांध दिया. जहां सलमान को मीडिया के बीच बिंदास होते हुए देखा जाता है, वहीं कैटरीना अपने रिजर्व नेचर के लिए फेमस हैं. लेकिन इस इवेंट में बिल्कुल उल्टा हुआ. सलमान इवेंट में चुप्पी साधे हुए बैठे थे, जबकि कैटरीना ने जमकर सुर्खियां बटोरीं.

इस इवेंट के दौरान कैटरीना ने सलमान को लेकर कुछ ऐसा कहा, जिसे सुनकर सलमान भरी महफिल में शरमा गए. असल में सलमान से पूछा गया कि वे आलिया भट्ट के साथ काम कब करेंगे? सलमान इसका जवाब देते, इससे पहले कैटरीना ने ही जवाब दे दिया. कैटरीना ने बीच में बोलते हुए कहा कि ‘सलमान को मेरे लिए छोड़ दीजिये.’ जी हां ये किसी और ने नहीं, बल्कि सलमान की एक्स गर्लफ्रेंड ने कैमरा के सामने कहा. यहां तक कि कैट ने आलिया को भी नहीं छोड़ा और उनके लिए कह दिया ‘आलिया को वरुण के साथ रहने दीजिए.’

अब बताइए, भरी महफिल में आपकी एक्स गर्लफ्रेंड आपके लिए ऐसा कह दे, तो आप शर्म से पानी-पानी तो हो ही जाएंगे. कुछ ऐसा ही हाल सलमान का भी था.

सलमान खान और कैटरीना कैफ कभी एक दूसरे के काफी करीब थे. फिर, दोनों ने अपनी राहें बदल लीं. लेकिन, एक बार फिर जब यह जोड़ी 'टाइगर ज़िंदा है' में एक साथ काम करती नजर आयी तो दोनों में एक नई बॉन्डिंग देखने को मिली और यहीं से कयास लगाए जाने लगे कि सलमान-कैटरीना फिर से रिलेशनशिप में हैं.

आपको बता दें कि पिछले महीने ही सलमान खान और कैटरीना कैफ दोनों ऑस्ट्रिया में टाइगर जिंदा है की शूटिंग से लौटे हैं. गौरतलब है कि शूटिंग के दौरान कैटरीना बुरी तरह से घायल हो गई थीं, जिससे उनकी पीठ पर काफी चोटें आई. डॉक्टर ने उन्हें आराम करने की सलाह भी दी है. खबर यह भी आई थी कि उस दौरान सलमान की यही कोशिश रही कि कैटरीना को शूटिंग करने में ज्यादा दिक्कतों का सामना ना करना पड़े और वो केवल आसान दृश्यों की शूटिंग ही करें.

डेथ इन ए गंज : कलाकारों के बेहतरीन अभिनय से सजी फिल्म

कहानीकार मुकुल शर्मा ने सत्तर के दशक में एक लघु कहानी लिखी थी, जिस पर उनकी बेटी व अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा बतौर निर्देशक फिल्म ‘‘डेथ इन ए गंज’’ लेकर आयी हैं,जो कि बंगला फिल्मों की परिपाटी वाली फिल्म कही जा सकती है.

जब इंसान को बार बार अपमानित किया जाए या कुचला जाए, तो यह सब किसी भी इंसान के लिए भुलाना मुश्किल होता है. ऐसे में इंसान डिप्रेशन का शिकार हो खुद को ही खत्म कर लेता है. इस बात को यह फिल्म बेहतरीन ढंग से चित्रित करती है.

कहानी 1979 की रांची के पास मैक्लुस्की गंज में रहने वाले ओ पी बख्शी (ओमपुरी) और मिसेस अनुपमा बख्शी (तनूजा) के घर पर छुट्टी बिताने आने वाले रिश्तेदारों में से एक नंदू (गुलशन देवैया) के भाई शुतु (विक्रांत मैसे) के इर्द गिर्द घूमती है. इस घर में नंदू (गुलशन देवैया), बोनी (तिलोत्मा शोम), मिमी (कलकी कोचलीन), ब्रायन (जिम सर्भ), तानी (आर्या शर्मा) व शुतु (विक्रांत मैसे) जमा हुए हैं.

इस परिवार में रहने आने वाले यह सभी एक बड़े परिवार का हिस्सा हैं. मगर इनके बीच जो संबंध हैं, उससे एहसास होता है कि इनमें आपस में आत्मीयता का अभाव है. इन सभी की अपनी समस्याएं और परेशानियां हैं, जिन्हें कोई दूसरा समझ नहीं पाता. यह सभी पिकनिक मनाने आए हैं, मगर सभी तन्हा व परेशान हैं.

शुतु अपनी समस्याओं से जूझ रहा है. वह पढ़ाई में असफल हो चुका है, तो कहीं न कहीं डिप्रेशन का शिकार है. उसकी मां भी उसके बर्ताव से परेशान है और अपनी बहन अनुपमा बख्शी को पत्र लिखकर मदद मांगती है. शुतु को सभी अपमानित व कुचलने का ही प्रयास करते हैं. सभी उस पर अपनी धौंस जमाते हैं. कहानी आगे बढ़ती है, तो पता चलता है कि गर्म दिमाग के विक्रम की शादी हो गयी है और विक्रम ने अपनी पत्नी को सोने की पायल पहनने के लिए दी है. इसके बावजूद विक्रम व मिमी के बीच अवैध संबंध हैं.

एक दिन जब व्रिकम अपनी पत्नी के सामने मिमी की अनदेखी करता है, तो मिमी बहाने से शुतु का अपने कमरे में ले जाती है और उसके यौन क्रीड़ा कर अपनी प्यास बुझाती है. शुतु को लगता है कि मिमी उससे प्यार करने लगी है. दोनों दूसरे दिन घने बाग में जाकर प्यार करने के साथ साथ शारीरिक भूख मिटाते हैं. उसके दूसरे दिन विक्रम का साथ पाते ही मिमी भी शुतु को अपमानित कर विक्रम के संग चल देती है. इससे शुतु व्यधित होता है और ओ पी बख्शी से बंदूक छीनकर खुद को सभी के सामने गोली मार लेता है. उसकी मौत हो जाती है.

फिल्म की गति धीमी है, मगर सशक्त कहानी व पटकथा के साथ ही उत्कृष्ट निर्देशन के चलते फिल्म अपना प्रभाव छोड़ने में कामयाब रहती है. बंगला पृष्ठभूमि के सभी किरदार

अंग्रेजी,बंगला व हिंदी बोलते हुए नजर आते हैं. इंसानी रिश्तों, उनके अंदर की कसक आदि का बेहतरीन चित्रण है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो बार बार कुचले जा रहे व अपमानित हो रहे शुतु के किरदार में विक्रांत मैसे ने जान डाल दी है. रणवीर शोरी, कल्की कोचलीन व बाल कलाकार आर्या शर्मा ने भी उल्लेखनीय अभिनय किया है. स्व. ओम पुरी व तनूजा के अभिनय की तो हर कोई हमेशा तारीफ करता है. इसमें भी इन दोनों ने बेहतरीन परफॉर्मेंस दी है.

एक घंटे 44 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘ए डेथ इन ए गंज’’ का निर्माण अषीश भटनागर विजय कुमार स्वामी, हनी त्रेहान, अभिषेक चौबे तथा पटकथा लेखन व निर्देशन कोंकणा सेन शर्मा ने किया है. संगीतकार सागर देसाई, कैमरामैन सिरसा रे तथा कलाकार हैं, ओम पुरी, तनूजा, विक्रांत मैसे, रणवीर शोरी, तिलोत्मा शोम, गुलशन देवैया, जिम सर्भ, आर्या शर्मा व अन्य.

कुछ ऐसे खाली करें अपने फोन की इंटरनल स्टोरेज

ऐंड्रॉयड स्मार्टफोन्स हमारे लिए खासा मददगार साबित होते हैं. लेकिन परेशानी तब होती है जब धीरे-धीरे इनका इंटरनल मेमरी भरती चली जाती है. आप कुछ आसान से तरीकों से इंटरनल स्टोरेज खाली कर अपने फोन की परफॉर्मेंस सुधार सकते हैं. जानें कैसे.

फालतू ऐप्स को करें अनइंस्टॉल

ऐंड्रॉयड प्लेस्टोर से आप कई सारे ऐप्स डाउनलोड कर सकते हैं. मगर बहुत से ऐप्स ऐसे होते हैं, जिन्हें हम इंस्टॉल तो कर लेते हैं मगर बाद में इस्तेमाल नहीं कर पाते. ऐसे ही काम न आने वाले ऐप्स को अनइंस्टॉल कर दें. इसके लिए सेटिंग्स मे ऐप्स के अंदर जाकर उसे हटाएं.

तस्वीरों का साइज कम करें

जरूरी नहीं कि तस्वीरों वगैरह को आप फोन में ही रखें. उन्हें गूगल फोटोज या अन्य क्लाउड स्टोरेज ऐप्स के जरिए ऑनलाइन बैकअप कर लें. इसके बाद उन्हें फोन से डिलीट कर दें. इससे आप बहुत ज्यादा स्पेस फ्री कर पाएंगे.

इसके अलावा आप फोटो एण्ड पिक्चर रिसाइजर (Photo and picture resizer) ऐप डाउनलोड करके तस्वीरों को रीसाइज कर सकते हैं. इससे ये आपकी स्टोरेज में कम जगह घेरेंगी. फुल रेजॉलूशन वाली तस्वीरों का बैकअप लेना न भूलें.

कैशे क्लियर करें

कैशे में बहुत सारी चीजें सेव होते रहने की वजह से कुछ ही दिनों में स्टोरेज भर जाती है. ऐप्स और वेबसाइट लोडिंग टाइम कम करने के लिए बहुत सा डेटा कैशे कर लेती हैं. अगर आपके पास इंटरनेट कनेक्शन है तो यह डेटा आपके लिए किसी काम का नहीं होता. इसलिए कैशे मेमरी को डिलीट करें और स्पेस फ्री कर लें. ऐसा करने के लिए नीचे दिए स्टेप फॉलो करें- Settings –> Storage & USB–> Internal Storage–>Cached Data

डाउनलोड्स को डिलीट करें

सेटिंग्स के अंदर डाउनलोड्स में जाएं. अगर आपने कोई बड़ी फाइल डाउनलोड की है तो उसे डिलीट कर दें. वक्त-वक्त पर डाउनलोड्स को क्लियर करते रहें, क्योंकि कई बार इनमें ऐसी फाइल्स पड़ी रहती हैं, जो काम की नहीं होतीं.

विडियो हटा दें

विडियो भी बहुत ज्यादा जगह घेरते हैं. आप इन्हें भी क्लाउड पर बैकअप कर लें या फिर प्राइवेटली यूट्यूब पर अपलोड कर दें. इसके बाद इन्हें फोन से डिलीट कर दें.

ब्लोटवेयर हटाएं

कई बार स्मार्टफोन्स के साथ प्रीलोडेड ऐप्स आते हैं. इनमें से कुछ काम के नहीं होते और वे बेवजह जगह घेरते हैं. इन ऐप्स को सामान्य तरीके से डिलीट नहीं किया जा सकता, मगर फोन को रूट करने के बाद यह काम किया जा सकता है. आप रूट करने के बाद Root Unistaller ऐप से इन्हें हटा सकते हैं.अगर फोन रूट नहीं किया है तो सेटिंग्स में ऐप्स के अंदर जाकर इन्हें हटाने की कोशिश करें.

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