मशहूर बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया को जाने क्या सूझी कि उन्होंने इस बात पर हैरानी जता डाली कि खेल से जुडे़ एक बच्चे (सचिन तेंदुलकर) को भारतरत्न देने से उस की गरिमा कम हुई है. बात में दम है, इसलिए किसी ने पंडितजी के नाम से मशहूर चौरसियाजी की बात पर एतराज नहीं जताया, हालांकि, समर्थन भी किसी ने नहीं किया.

हरिप्रसाद खुद की दावेदारी भारतरत्न के लिए यों पेश करें, यह हर्ज की नहीं, बल्कि उन के अधिकार की बात है. उन की बांसुरी से निकली यह धुन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंच गई है जिन्हें इस नामांकन पर फैसला लेना है. देखें, वे इस बंसी वाले की सुनते हैं या नहीं. हालांकि आजकल बांसुरी कोई नहीं सुनता. उस की धुन पर न गाएं दौड़तीं और न ही गोपियां रास रचाती हैं. पर वक्तखाऊ और पैसागंवाऊ खेल क्रिकेट हर कोई देखता है.

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