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अयोध्या को कर्मभूमि बनायेंगे योगी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से लोकसभा सदस्य हैं. अब उनको लोकसभा की सदस्यता से त्यागपत्र देकर विधानसभा का चुनाव लड़ना है. योगी आदित्यनाथ के लिये गोरखपुर से सुरक्षित कोई दूसरी जगह नहीं है. गोरखपुर के कुछ विधायक अपनी सीट से इस्तीफा देकर योगी के लिये विधानसभा उपचुनाव लड़ने के लिये सीट खाली करने का मन भी बना चुके हैं. इसके बाद भी योगी आदित्यनाथ की गोरखपुर के बजाये अयोध्या विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना दिख रही है. योगी के अयोध्या दौरे के बाद अयोध्या की विकास योजनाओं पर जिस तरह से सरकार अपना फोकस बढ़ा रही है, उससे यह साफ होने लगा है. भाजपा योगी को हिन्दुत्व और अयोध्या से जोड़कर देखना चाहती है, जिससे 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी को बढ़त हासिल हो सके.

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने गंगा की सफाई को लेकर धार्मिक मुद्दा चुनाव में उठाया था. 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा गाय और गौ वंश को लेकर धार्मिक वोटबंदी करने की योजना में है. दक्षिण भारत, गोवा और देश के कुछ पहाड़ी इलाकों में गाय और गौ वंश के मीट को लेकर नया विरोध और समर्थन शुरू हो गया है. भाजपा से जुडे साधूसंत भी इस मुद्दे को हवा देने में जुट गये हैं. गंगा सफाई के वादे को 3 साल बीत गये हैं. गंगा में पानी जस का तस ही है. ऐसे में अब भाजपा नये धार्मिक मुद्दे तलाशने में लग गई है.

अयोध्या और गाय दोनों ही ऐसे सबसे बडे मुद्दे हैं जिनपर देश वोटबंदी का शिकार हो सकता है. राममंदिर आंदोलन का असर उत्तर प्रदेश से अधिक देश के बाकी हिस्से पर हो रहा है. जिस तरह से अदालत ने अयोध्या विवाद में तेजी दिखाई है उससे साफ लगता है कि आने वाले कुछ साल तक देश की राजनीति अयोध्या मुद्दे के आसपास ही रहेगी. योगी आदित्यनाथ खुद को राजनीति के केन्द्र में रखने के लिये अयोध्या का सहारा ले सकते हैं.

योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री रहते उनकी हिन्दू युवा वाहिनी का संगठन भी गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश से निकल कर पूरे प्रदेश में विस्तार लेने लगा है. अब यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक विस्तार लेने लगा है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हर जिले, कस्बे में हिन्दू युवा वाहिनी के बैनर और पोस्टर दिखने लगे हैं. इसके साथ ही साथ हिन्दू महासभा जैसे पुराने संगठन भी फिर से आकार लेने लगे हैं. योगी आदित्यनाथ को अब खुद को उत्तर प्रदेश की राजनीति के केन्द्र में रखकर आने वाला चुनाव लड़ना है. ऐसे में योगी के लिये अयोध्या सबसे मुफीद है.

पोलो वर्ल्ड कप : भारतीय खिलाड़ी के नाम रिकॉर्ड दर्ज

ऑस्ट्रेलिया में होने वाले पोलो वर्ल्ड कप के लिए भारतीय टीम की घोषणा कर दी गई है. टीम में गुलाबी नगर यानि कि पिंक सिटी के 18 साल के पद्मनाभ सिंह का इस वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम में चयन किया गया है. पद्मनाभ के चयन के साथ ही उनके नाम एक रिकॉर्ड भी दर्ज हो गया है. मैदान में उतरने के साथ ही पद्मनाभ सिंह वर्ल्ड कप मैच में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले अब तक के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी होंगे.

ऑस्ट्रेलिया में होगा पोलो वर्ल्ड कप : हम आपको बता देना चाहते हैं कि इस ग्यारहवें पोलो वर्ल्ड कप के जोनल प्ले ऑफ का आयोजन आगामी 29 जून से 7 जुलाई 2017 के बीच ईरान में होगा. वहीं वर्ल्ड कप का आयोजन इसी साल के अक्टूबर में ऑस्ट्रेलिया में किया जाएगा और बहुत जल्द भारतीय टीम कोचिंग प्रोग्राम के लिए विदेश रवाना होगी.

पोलो (Polo) : ये एक टीम खेल है जिसे घोड़ों पर बैठ कर या घुड़ सवारी करते हुए खेला जाता है. इसका उद्देश्य प्रतिद्वंदी टीम के विरुद्ध गोल करना होता है. भारत में पोलो खेल का प्रचलन तुर्को ने किया था, पर ब्रिटिश काल के दौरान इस खेल को काफी ख्याति मिली थी. आपको शायद पता हो कि इस खेल में, एक टीम का खिलाड़ी एक प्लास्टिक या लकड़ी की गेंद को बड़े हॉकी जैसे डंडों से मारकर दूसरी टीम के गोल में डालने की कोशिश करते हैं. परम्परागत तरीके से ये खेल बडी रफ्तार से और एक बड़े खुले मैदान में खेला जाता है. इस खेल में हर टीम में चार खिलाड़ी होते हैं. पोलो वर्तमान में ओलंपिक खेलों में शामिल नहीं है.

1957 में जीता था वर्ल्ड कप : जयपुर के पूर्व महाराजा सवाई मान सिंह द्वितीय की कप्तानी में भारत ने 1957 में फ्रांस में वर्ल्ड कप जीता था. उल्लेखनीय है कि वर्तमान वर्ल्ड कप को अब ’जयपुर वर्ल्ड कप’ के नाम से जाना जाता है. पूर्व महाराजा सवाई भवानी सिंह ने 1982 में ब्यूनस आयर्स में इस ट्रॉफी को प्रदान की थी.

खेल में लेफ्ट हैंड खिलाड़ियों के लिए कोई जगह नहीं : पोलो के खेल में लेफ्ट हैंड खिलाड़ियों के लिए कोई जगह नहीं है. साल 1930 तक पोलो में लेफ्ट हैंड खिलाड़ियों के खेलने पर पूरी तरह से प्रतिबंध था, पर दूसरे विश्व युद्द के बाद ये प्रतिबंध हटा लिया गया. इसके बाद यूएस पोलो एसोसिएशन जो कि विश्व में पोलो खेल से संबंधित नियम बनाने वाली संस्था है, ने साल 1974 में एक बार फिर लेफ्ट हैंड खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगा दिया. इसके पीछे तर्क दिया गया कि लेफ्ट व राइट हैंड के दो अलग-अलग खिलाड़ी जब आमने-सामने होते हैं तो इनके बीच टक्कर लगने की आशंका सबसे अधिक रहती है. खिलाड़ियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह प्रतिबंध लगाया गया है.

भारतीय टीम : पद्मनाभ के अलावा भारतीय पोलो टीम में चुने गए अन्य खिलाड़ियों में लेफ्टिनेंट कर्नल रवि राठौड़, अभिमन्यु पाठक,अंगद कलान,सिद्धांत शर्मा, और प्रणव कपूर शामिल हैं.

आपके घर में भी है वाई-फाई तो ध्यान दें…

रोजमर्रा की जिंदगी में हमें इंटरनेट की जरूरत वैसे ही पड़ती है जैसे बिजली और पानी की. इसलिए हम घर में भी वाई-फाई लगवा कर अच्छे से इंटरनेट का इस्तेमाल करना चाहते हैं. ज्यादातर इंटरनेट सर्विस प्रवाइडर्स बेसिक मॉडम राउटर देते हैं जिसके चलते घर के काफी कोने वाई-फाई की जद में नहीं आ पाते.

वाई-फाई से जुड़ी दिक्कतों को ऐसे करें दूर…

सही जगह पर रखें राउटर

वाई-फाई की कवरेज को सुधारने का यह सबसे महत्वपूर्ण तरीका है. ज्यादातर यूजर्स राउटर को अपने घरों के कॉर्नर या फिर किसी खिड़की के करीब रख देते हैं. इससे घर में तारों का जाल तो नहीं बनता लेकिन इससे आपके वाई-फाई की रेंज सीमित हो जाती है, क्योंकि वाई-फाई सिग्नल ओमनी डायरेक्शन में फैलते हैं. इसलिए राउटर को रखने का सबसे बढ़िया तरीका घर का सेंटर प्वाइंट है. इससे आपको अपने घर के हर कोने में वाई-पाई का सिग्नल मिलेंगे. साथ ही, आप वाई-फाई के राउटर को अपने आई लेवल या फिर इससे ऊपर के लेवल पर रखने की कोशिश करें, इससे आपके वाई-फाई सिग्नल बेहतर बना रहेगा. राउटर को दूसरी डिवाइस जैसे कॉर्डलेस फोन बेस स्टेशन, दूसरे राउटर्स, प्रिंटर्स और माइक्रोवेव अवन से दूर रखें.

रेंज बढ़ाने के लिए लगाएं रिपीटर्स

कई बार इंटरनेट सर्विस प्रोवाइड करने वाली कंपनी जो राउटर देती है वह अक्सर पूरे घर में वाई-फाई का नेटवर्क नहीं पहुंचा पाता. इसके लिए आप अपने मौजूदा राउटर को ज्यादा पावरफुल राउटर से बदल सकते हैं या फिर आप सबसे सस्ता उपाय- रिपीटर का इस्तेमाल कर सकते हैं. यह डिवाइस आपके राउटर से वाई-फाई सिग्नल लेकर उसके कवरेज एरिया को बढ़ा देगी. रिपीटर से कनेक्ट होने के लिए डब्लूपीएस सबसे आसान तरीका है. इसके लिए आपको अपने राउटर के डब्लूपीएस को इनेबल करने के साथ रिपीटर के डब्लूपीएस बटन को ऑन करना होगा.

गेस्ट नेटवर्क

जब आपके घर में दोस्त और अन्य लोग पार्टी के लिए आते हैं तो अमूमन आप उनसे अपने प्राइमरी वाई-फाई पासवर्ड को शेयर नहीं करना चाहते. इसके लिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप अपने राउटर पर गेस्ट नेटवर्क को इनेबल कर उसका सेपरेट पासवर्ड रख लें. इसके लिए आपको अपने राउटर के एडमिन सेटिंग पर जाना होगा. यहां पर आपको वायरलेस टैब पर गेस्ट नेटवर्क का ऑप्शन मिलेगा. यहां पर आप नेटवर्क का नाम चेंज करने के साथ पासवर्ड सेट कर सकते हैं. इसके अलावा आप यहां नेटवर्क पर कनेक्ट होने वाले यूजर्स की संख्या का चुनाव भी कर सकते हैं. कुछ राउटर्स में आपको यह ऑप्शन भी मिलता है कि अगर किसी खास डिवाइस पर इंटरनेट का ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है तो यह उस डिवाइस को ब्लॉक कर देता है. इसके बाद जब आपके दोस्त घर से चले जाएं तो आप गेस्ट नेटवर्क को बंद करके अपने होम वाई-फाई को फिर से शुरू कर सकते हैं.

बदलते रहें अपना वाई-फाई पासवर्ड

क्या आपने कभी अपने वाई-फाई का पासवर्ड बदला है? ज्यादातर यूजर्स पहली बार वाई-फाई इंस्टॉल करने के बाद पासवर्ड नहीं बदलते हैं. आप कई बार जरूरत पड़ने पर अपने पासवर्ड को अपने दोस्तों और पड़ोसी से भी शेयर करते हैं. इसका मतलब है कि अगली बार आपका दोस्त या फिर पड़ोसी बिना किसी इजाजत के आपके वाई-फाई का इस्तेमाल कर सकता है. इसलिए इससे बचने का तरीका यह है कि आप हर छह महीने में पासवर्ड बदलते रहें.

करें रीबूट

वैसे तो राउटर्स हमेशा काम करते रहने के लिए बनाए गए हैं मगर कभी-कभार आप इन्हें रीबूट भी कर सकते हैं. ध्यान रहे ‘रीबूट करें, रीसेट नहीं’. इसका सबसे बेहतर तरीका ये होगा कि आप राउटर को ऑफ करके कुछ देर बात ऑन करें. कई बार कनेक्टिविटी में समस्या आने पर भी यह तरीका काम करता है. बंद करके ऑन करने पर इंटरनेट सही से चलने लगता है.

कैटरीना दिखाती रहीं, सलमान देखते रहे और वायरल हो गया वीडियो

सलमान खान और कैटरीना कैफ के करोड़ों प्रशंसक सहित बॉलीवुड के तमाम लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि कैटरीना-सलमान साथ हैं या नहीं. दोनों ने इस रहस्य पर परदा डाल रखा है और स्पष्ट नहीं कर रहे हैं कि हकीकत क्या है. ब्रेकअप की खबरें आती हैं तो दोनों साथ दिखने लग जाते हैं और जब साथ होने की बातें की जाती हैं तो दोनों में अलगाव देखने को मिलता है.

बॉलीवुड के कुछ लोगों का कहना है कि दोनों में ब्रेकअप हो चुका है, लेकिन इस बारे में वे कुछ नहीं बोलकर अपनी गरिमा को कायम रखना चाहते हैं. पिछले कुछ दिनों से कैटरीना और रणबीर की नजदीकियां लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं. दोनों को एक-दूसरे के घर में देखा जा रहा है और यहां तक भी कहा गया है कि कैटरीना के घर पर जब आयकर अधिकारियों ने छापा मारा तो उसके कुछ देर पहले ही रणबीर वहां से रवाना हुए थे.

रणबीर और कैटरीना की नजदीकियों का हवाला देते हुए यह माना जा रहा है कि सलमान और कैटरीना में ब्रेक अप हो चुका है. शायद वे अपने को एक मौका और देना चाहते हैं, इसीलिए मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं.

इस बीच सलमान और कैटरीना का एक वीडियो सोशल मीडिया में छाया हुआ है. एक बार फिर सलमान खान सुर्खियों में बने हुए हैं, लेकिन इस बार वे अपनी वजह से नहीं बल्कि अपनी एक्स गर्लफ्रेंड कैटरीना की वजह से सुर्खियों में है. आईफा 2017 का जश्न शुरू होने वाला है और यही वजह है कि गुरुवार रात आईफा की प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई थी. इस कांफ्रेस का एक वीडियो वायरल हो गया है, अब क्या है इस वीडियो में, उसके लिए तो आपको इसे देखना होगा.

केजरीवाल की बेचारगी

अरविंद केजरीवाल का लोकपाल सत्याग्रह और भ्रष्टाचार पर कांग्रेस सरकार के खिलाफ युद्ध अब केजरीवाल को खुद निगलने लगा है. 2014 के बाद बनी भारतीय जनता पार्टी की सरकार का शासन करने का तरीका कांग्रेसी सरकारों से अलग है. केजरीवाल या तो उसे समझ नहीं पाए या उन मोरचों को खोलने की हिम्मत नहीं है उन में. कांग्रेस की तरह भाजपा भी भयंकर रूप से सरकारी अधिकारों का दुरुपयोग कर रही है पर हिंदू धर्म के मोटे, मजबूत और धारदार परदे के पीछे से.

अगर जनता की मेहनत के पैसे को लूटना भ्रष्टाचार है तो भाजपा की सरकार जनता का पैसा धार्मिक आडंबरों पर खर्च कर रही है. पर न कांग्रेस की, न अरविंद केजरीवाल की हिम्मत है कि उस की पोलपट्टी खोल सकें.

गंगा नमामि, नर्मदा फैस्टिवल, शिवाजी स्मारक, पटेल स्मारक, अमृतसर का सौंदर्यीकरण, सरकारी या जनता के पैसों पर गौरक्षकों की फौज खड़ी करना, सामाजिक कल्याण व संस्कृति संबंधित विभागों, मंत्रालयों में भगवाइयों को भरना एक तरह का भ्रष्टाचार ही है जो जनता को कोल स्कैम या कौमनवैल्थ स्कैम से ज्यादा महंगा पड़ रहा है.

पर अरविंद केजरीवाल या राहुल गांधी इस पर चुप रहने को विवश हैं क्योंकि वे धर्म की आलोचना करने का साहस नहीं रखते. अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने पंजाब में अच्छेखासे वोट हासिल किए और दिल्ली नगर निगम चुनावों में भी वोटों की गिनती में वे भारतीय जनता पार्टी से सिर्फ 11 प्रतिशत ही कम हैं पर वे आर्थिक भ्रष्टाचार की पोलपट्टी खोलतेखोलते इतनी संकरी गली में चलने के आदी हो चुके हैं कि पूरे मैदान का धार्मिक भ्रष्टाचार उन्हें दिख ही नहीं रहा.

जनता एक सरकार से सुरक्षा, सही कर कानून, सही न्याय, सही प्रबंध की उम्मीद करती है और ये न मिलने पर भी यदि वह एक ही पार्टी को वोट देती रहे तो वोटिंगमशीन का अत्याचार कहा जाएगा. देश की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं हो रही. मध्यवर्ग के युवाओं के पास न देश में नौकरियां हैं, न विदेश में.

ठीकठाक वर्षा के बावजूद किसानों की हालत में खास बदलाव नहीं आया है. बजाय जनता की मुश्किलों को ध्यान में रखने के, अरविंद केजरीवाल के साथी नेता ही उन का सारा समय आपसी विवादों में ले कर उन के जगाएदिखाए सपनों को भंग कर रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल आर्थिक भ्रष्टाचार के साथ यदि धार्मिक भ्रष्टाचार व बढ़ते शासकीय अत्याचार के खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे तो उन का सफाया होना स्वाभाविक है. अरविंद केजरीवाल आतिशबाजी जला कर पहाड़ को तोड़, सिर्फ चमकने वाली नहर बनाने का निरर्थक सपना देख रहे हैं. उन्हें लाइन से कुछ हट कर करना होगा.

 

बात ऐसे बनी

मेरे एडवोकेट अंकल को हर बात में गाली देने की आदत हो गई थी. आंटी को वे कमीनी हरामखोर वगैरह बोलते रहते थे. उन का एक 3 साल का बेटा भी एक दिन आंटी से कुछ मांग रहा था न मिलने पर उस ने आंटी को बोला, ‘‘तुम एक नंबर की कमीनी हो.’’ ये सुन आंटी ने उसे बहुत मारा. रात में जब अंकल आए तो बेटे ने रो कर कहा, ‘‘पापा आप मम्मी को हमेशा ऐसे ही बोलते हो, उन्होंने न तो आप को डांटा न मारा लेकिन मुझे आज बहुत मारा. मैं उन से अब कभी बात नहीं करूंगा.’’

अंकल को अपनी गलती का एहसास हुआ और फिर उन्होंने दोबारा गाली न देने का प्रण किया.         

दीपिका श्री

*

मेरे पति जब भी मेरे बाबूजी की बात करते, ‘तुम्हारे बाबूजी’ कहा करते. यह सुन कर मुझे अच्छा नहीं लगता था. एक दिन मैं ने अपनी सासूमां के लिए पति से ‘आप की मां’ कहा तो वे लगभग चिढ़ से गए. उन्होंने कहा, ‘‘यों तो तुम ‘मां’ बोलती हो, फिर आज क्या हो गया जो इस तरह का संबोधन प्रयोग किया.’’ मैं ने कहा, ‘‘आप की ही शिक्षा है. अब आप कुछ गलत तो करेंगे नहीं, सो मैं ने भी सही तरीका अपनाने की सोची.’’ यह सुन कर पति न सिर्फ झेंप गए बल्कि उस के बाद से ही ‘तुम्हारे बाबूजी’ की जगह सिर्फ ‘बाबूजी’ कहना शुरू कर दिया.       

सीमा ओझा

*

आज के समय में आप और मैं कोई भी तो इस सोशलनैटवर्किंग से अछूता नहीं. कितने ही व्यस्त क्यों न हों पर आए हुए मैसेज को इधर से उधर भेजने में मिनट नहीं लगाते. एक बार एक मैसेज आया. उस में एक महिला का चित्र था. साथ में लिखा था, ‘अब ट्रेन ऐसे रुकेगी.’ मुझे भी अच्छा लगा और फेसबुक पर अपने ग्रुप पर शेयर कर के खूब खुश हुई व अपने काम में लग गई. थोड़ी देर में कुछ मैसेज आए. पढ़ते ही बहुत दुखी हो गई. उस में एक महिला ने क्रोधित हो कर लिखा, ‘आप को ऐसे मैसेज शोभा नहीं देते. दूसरे की भावना की कद्र करनी चाहिए. यह स्त्री मेरी सासू मां है.’ मैं ने तो कभी सोचा भी न था कि इतनी बड़ी दुनिया में हम भी टकरा सकते हैं. मुझे बहुत ग्लानि हुई और फौरन वह मैसेज डिलीट किया. फिर उन महिला से अलग से क्षमा मांगी.   

मोनिका अग्रवाल

दिन दहाड़े

मैं और मेरे पति लुधियाना गए. हम ने बसस्टैंड से आटोरिकशा किया. रास्ते में एक जगह से आटो वाले ने एक महिला सवारी को लिया जिस की गोद में एक दुधमुंहा बच्चा था. उस औरत ने शौल ओढ़ रखी थी. फरवरी का महीना था, ठंड कड़ाके की थी. हम जब अपने गंतव्य पर पहुंचे, आटो वाला भाड़ा ले कर आगे बढ़ गया.

हमें कुछ सामान खरीदना था. मेरे पति ने कमीज की जेब में हाथ डाला तो अचंभित रह गए. कागजों की पर्र्तों में लिपटे 2 हजार रुपए के तीनों नोट गायब, जबकि कागज सहीसलामत थे. वह शातिर औरत न जाने कब जेब पर हाथ साफ कर गई.

यकीन ही नहीं होता कि कोई ऐसे भी आंखों में धूल झोंक सकता है. पुलिस में रिपोर्ट लिखाते भी तो किस की? न आटो का पता न उस औरत का. बाद में पता चला कि ऐसी औरतों के संग कुछ आटो वालों ने गैंग बनाए हुए हैं.

कुलविंदर कौर वालिया

*

मेरे भैया की मेन मार्केट में गिफ्ट की दुकान है. जिसे भैया और भाभी दोनों संभालते हैं. एक दिन भैया दुकान पर नहीं थे. भाभी दुकान पर आईं और अपना पर्स काउंटर के पास रखे छोटे स्टूल पर रख दिया. तभी शौल पहने हुए 3 औरतें आईं. उन में से एक औरत भाभी को नमस्ते कह कर कहने लगी, ‘‘हम लोग गांव के हैं. मेरी बेटी का रिश्ता शहर में हुआ है. आज मेरे दामाद का जन्मदिन है. आप कुछ अच्छा और सस्ता उपहार दिखा दें.’’

दुकान पर थोड़ी भीड़ होने के कारण भाभी ने कहा, ‘‘5 मिनट रुको, यह लड़का तुम्हें दिखा देगा.’’

इस पर वह औरत कहने लगी, ‘‘दीदी, बुरा मत मानना, हमें लड़कों पर विश्वास नहीं है. आप पढ़ीलिखी, समझदार लगती हो. लेनदेन की आप को समझ है. आप अपनी पसंद से कुछ अच्छा दिखा दो.’’

मेरी भाभी ने कुरसी से उठ कर थोड़ा आगे जा कर एक फोटोफ्रेम दिखाया. उस औरत को गरीब जान कर उस से 300 रुपए देने को कहा.

उस औरत ने जल्दी से रुपए काउंटर पर रखे और फोटोफ्रेम का डब्बा ले कर तीनों औरतें जाने लगीं.

‘‘अरे, इसे पैक तो करवा लो,’’ भाभी ने उन्हें जाते हुए देख कर कहा.

‘‘नहींनहीं, हमें जल्दी है,’’ यह कहते हुए वे औरतें दुकान के पास खड़े आटोरिकशा में बैठ कर चली गईं.

थोड़ी देर में मेरी भाभी कुछ समान निकालने के लिए पर्स ढूंढ़ने लगी तो वह नहीं मिला. पर्स चोरी हो गया था. उस पर्स में 5 हजार रुपए, मोबाइल, घर की चाबी के अलावा अलमारी की चाबियां और कुछ जरूरी कागजात थे.    

दीपा गुलाटी

 

सफर अनजाना

पुरानी डायरी में एक नाम वीरेंद्र सिंह देख कर ढाई साल पहले की एक ठंडी रात याद आ गई. बात दिसंबर 2014 की है. मैं एक कार्यक्रम में शामिल होने करनाल (हरियाणा) गई थी. बीकानेर से जींद तक अवधअसम ट्रेन से मेरा आरक्षण था. जाते समय मेरा भाई मेरे साथ था, इसलिए मैं सफर में निश्ंिचत थी. मगर वापसी मुझे अकेले ही करनी थी.

मुझे वापसी में यही ट्रेन जींद से पकड़नी थी. ट्रेन का समय था शाम लगभग पौने 7 बजे. मैं सही समय पर स्टेशन पहुंच गई. वहां पता चला कि कोहरे के कारण ट्रेन 3 घंटे लेट है. मेरे पास वेटिंगरूम में इंतजार करने के अलावा चारा नहीं था.

वहां मेरे अलावा और कोई नहीं था. अनजान जगह होने के कारण मैं डर रही थी. उधर बीकानेर में बैठे मेरे घर वाले मेरे लिए परेशान हो रहे थे. वे बारबार ट्रेन की लोकेशन पता कर के मुझे बता रहे थे. इस बातचीत में मेरे फोन की बैटरी कम होती जा रही थी.

मैं ने वेटिंगरूम में देखा तो कोई भी चार्जिंग पौइंट काम नहीं कर रहा था. मैं ने आखिरी बार घर पर बात कर के बताया कि अब मेरा फोन स्विचऔफ हो रहा है, ट्रेन में चार्ज कर के बात करूंगी और इसी समय मेरा सब से संपर्क टूट गया.

मुझे भूख भी लग रही थी और ठंड भी. मैं हिम्मत कर के प्लेटफौर्म पर आई. सबकुछ सुनसान था. मैं ने पूछताछ खिड़की पर पता किया तो मालूम हुआ कि अब ट्रेन 7 घंटे देरी से चल रही है.

रात के 10 बज रहे थे. मैं घूमते हुए नाइट ड्यूटी पर बैठे सैक्शन इंजीनियर वीरेंद्रजी के रूम की तरफ निकल आई. वहां जा कर मैं ने अपना परिचय दिया और मदद मांगी. उन्होंने न केवल मेरा मोबाइल चार्ज करवाया बल्कि रूम का हीटर भी मेरी तरफ घुमा दिया. पहले मुझे चाय पिलाई और फिर मेरे लिए कैंटीन से खाना मंगवाया. फोन चार्ज होते ही मैं ने बीकानेर में अपने घर वालों से बात कर के सारी जानकारी दी तो उन की जान में जान आई.

वीरेंद्रजी से बातें करते हुए पता ही नहीं चला कि कब रात के 12 बज गए. उन का ड्यूटी टाइम खत्म होने को था, मगर मुझे चिंतित देख कर वे मेरी ट्रेन आने तक रुके रहे. रात लगभग डेढ़ बजे ट्रेन आई तो उन्होंने मुझे ट्रेन में सुरक्षित बैठाया और ट्रेन रवाना होने पर ही वे अपने घर गए.

बीकानेर पहुंचते ही मेरे पति ने सब से पहले उन्हें फोन कर के मेरी मदद करने के लिए धन्यवाद दिया. उन की सहृदयता आज भी मेरे मनमस्तिष्क में ताजा है.   

आशा शर्मा

किस का चारा हरा

सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले मामले में झारखंड हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव पर चारा घोटाले से जुड़े सभी मामलों में आपराधिक साजिश का मुकदमा चलाने का फैसला क्या दिया, बिहार की राजनीति फिर गरमा उठी. लालू पर साढ़े साती की यह तीसरी अढ़ैया है. बीते ढाई सालों का अरसा ही वे सुकून से गुजार पाए हैं.

लालू की असल दिक्कत है भाजपा द्वारा बिहार के मुख्यमंत्री और उन के सहयोगी नीतीश कुमार को दिया यह औफर कि लालू का साथ छोड़ो तो हम समर्थन देने को तैयार हैं. आजकल की राजनीति में ‘कभी भी, कुछ भी हो सकता है’ की थ्योरी के तहत अगर नीतीश कुमार ने वाकई इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर डाला तो लालू परिवार पर संकट के जो बादल मंडाराएंगे वे फिर शायद ही कभी छंट पाएं. ऐसे में लालू के लिए बेहतर है कि वे यों ही सिर झुकाए नीतीश की हां में हां मिलाते शनि आराधना करते रहें.

तमिलनाडु का बरगद

डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि ने अपनी जिंदगी में 6 मुख्यमंत्रियों को श्रद्धांजलि दी है. उन के जमाने के तो बरगद के पेड़ तक सूख गए हैं…पता चला है कि उन की और एमडीएच मसाले वाले महाशियांजी की उम्र भगवान से 2-3 साल ही कम हैं… जैसी बातों के जरिए सोशल मीडिया पर करुणानिधि का मजाक बनाने वालों को अच्छा मौका है कि वे 94 वर्षीय इस दिग्गज बुजुर्ग से सीखें कि सक्रियता ही जीवन है.

3 जून को अगर सबकुछ ठीकठाक रहा तो करुणानिधि के जन्मदिन समारोह में चेन्नई में बिखरा विपक्ष इस बात पर एकजुट होने की एक कोशिश भी कर सकता है कि राष्ट्रपति पद के चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार के मुकाबले किसे उतारा जाए. इस बाबत करुणानिधि की बेटी कनिमोझी दिल्ली और उत्तर भारत से विपक्ष को न्योता देती घूम रही हैं. नीतीश कुमार और लालू यादव ने तो अपनी रजामंदी दे भी दी है. धीरगंभीर करुणानिधि खुद राष्ट्रपति बन जाने की गोटियां बिठा रहे हों तो बात कतई हैरत की नहीं.

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