Download App

बैंक ग्राहकों के लिए आई है ये अच्छी खबर

बैंक ग्राहकों के लिए एक अच्छी खबर है. अगर आप बैंकिंग लेनदेन के दौरान अवैध रुप से धोखाधड़ी के शिकार हो गये हैं तो तीन दिनों के अंदर अपने बैंक को सूचित कर दीजिए आपको कोई नुकसान नहीं होगा. यहीं नहीं रिजर्व बैंक ने गुरुवार (6 जुलाई) को बताया कि जितनी रकम की हानि आपको हुई उस रकम को 10 से 12 दिनों के अंदर आपके खाते में क्रेडिट कर दिया जाएगा. ऐसी धोखाधड़ी जिसमें बैंक और ग्राहक के अलावा कोई तीसरा पक्ष शामिल है, अगर ऐसी लेन-देन की जानकारी ग्राहक बैंक को 4 से 7 कार्य दिवस के अंदर देता है तो उसे 25 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है. हालांकि वैसे मामलों में जहां हानि खाताधारी की लापरवाही की वजह से हुई हो, जैसे कि किसी तीसरे व्यक्ति को पिन, ओटीपी, जैसी गुप्त जानकारी बता देना, वहां सारे नुकसान की जिम्मेदारी खुद ग्राहक की होगी जबतक कि वो ऐसे मामले की जानकारी अपने बैंक को नहीं देता है.

बैंक को जानकारी देने के बाद होने वाले ऐसे अवैध लेनदेन से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी बैंक की होगी. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ये जानकारी ग्राहक सुरक्षा पर संशोधित निर्देशों को जारी करते हुए दी. रिजर्व बैंक का कहना है कि ग्राहकों की ओर से धोखाधड़ी की बढ़ती शिकायतों को देखते हुए ऐसे दिशानिर्देश जारी किये गये हैं. रिजर्व बैंक के मुताबिक अगर कोई तीसरी पार्टी की वजह से नुकसान होता है जहां गलती न तो बैंक की है और ना ही ग्राहक की ऐसी हालत में कस्टमर को जीरो नुकसान होगा.

रिजर्व बैंक ने कहा कि ऐसे मामलों में बैंक को ग्राहक के खाते में उसके नुकसान की राशि 10 दिनों में क्रेडिट कर देनी चाहिए. आरबीआई के मुताबिक ऐसा करने के लिए बीमा के दावे का भी इंतजार नहीं करना चाहिए. रिजर्व बैंक ने कहा कि बैंकों को अपने ग्राहकों को अनिवार्य रुप से एसएमएस अलर्ट के लिए रजिस्टर करवाने को कहना चाहिए, इसके साथ ही जहां संभव हो ईमेल अलर्ट के लिए कहा जाना चाहिए. रिजर्व बैंक के मुताबिक हर लेन-देन के ग्राहकों को अनिवार्य रुप से मैसेज भेजा जाएगा.

हैप्पी बर्थडे धोनी : इन 5 पारियों ने बनाया धोनी को बेस्ट फिनिशर

धोनी एक ऐसा नाम है जिसे सिर्फ भारत के क्रिकेट प्रेमी ही नहीं बल्कि लगभग हर देश के क्रिकेट प्रेमी प्यार करते हैं. आज, भारतीय टीम के इस पूर्व कप्तान और विकेटकीपर बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी का 36वां जन्मदिन है. धोनी का शांत स्वभाव ही उन्हें सबसे अलग बनाता है.

धोनी भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं. क्रिकेट के शीर्ष स्तर पर हर फॉर्मेट में भारत को चैंपियन बनाने वाले इस महान खिलाड़ी का क्रिकेट करियर ही नहीं बल्कि पूरी जिंदगी दिलचस्प और प्रेरणादायक रही है.

1997-98 में वीनू मांकड़ ट्रॉफी अंडर-16 चैंपियनशिप धोनी के क्रिकेट करियर का पहला बड़ा पल था. उस टूर्नामेंट में अच्छे प्रदर्शन ने उन्हें स्थानीय क्रिकेट में एक चर्चित नाम बना दिया था.

धोनी को क्रिकेट जगत का बेस्ट फीनिशर माना जाता है. वह धोनी ही थें जिन्होंने 2011 में छक्का मारकर टीम इंडिया को चैंपियन बनाया था. धोनी के नाम सबसे ज्यादा बार (9 बार) सिक्स मारकर मैच जिताने का रिकॉर्ड है.

धोनी के जन्मदिन पर आज हम बात करते हैं उनकी कुछ यादगार पारियों पर.

वर्ल्ड कप 2011 में 91 रनों की नाबाद पारी

वर्ल्ड कप 2011 का फाइनल मैच (भारत बनाम श्रीलंका) कौन भूल सकता है. इस मैच में धोनी बेहतरीन फिनिशर के रूप में उभरे थें. इस मैच में श्रीलंका ने भारत के सामने 275 रन का लक्ष्य रखा था. लक्ष्य का पीछा करने आई टीम इंडिया 114 रन पर 3 विकेट खो चुकी थी. लेकिन ओपनर गंभीर क्रीज पर डटे थें. धोनी ने गंभीर के साथ 109 रनों की साझेदारी करते हुए टीम को मजबूत स्थिति में ले आए और फिर 79 गेंदों में 91 रन ठोक डाले. वर्ल्ड कप में उनका विजयी छक्का आज भी क्रिकेट प्रेमियों के जहन में बसा है.

श्रीलंका के खिलाफ 183 रनों की पारी

धोनी द्वारा 2005 में खेली गई 183 रनों की पारी उनके बेहतरीन पारियों में से एक है. इस मैच में धोनी ने आक्रामक खेल दिखाई और श्रीलंकाई गंदबेजों को पस्त कर दिया. 145 गेंदों में खेली गई 183 रनों की पारी की बदौलत टीम इंडिया ने इस मैच में विजय प्राप्त किया. धोनी ने इस मैच में 15 चौके और 10 छक्के लगाए थे.

विशाखापतनम में खेली गई 148 रनों की पारी

2005 में भारत पाकिस्तान के बीच 6 वनडे मैचों की सीरीज खेली गई थी. सीरीज के दूसरे ही मैच में धोनी ने अपना कमाल दिखाया. पहले बल्लेबाजी करने आई टीम इंडिया के शीर्ष दो बल्लेबाज- गांगुली और सहवाग पैवेलियन लौट चुके थें. शुरुआती झटके के बाद धोनी और द्रविड़ ने टीम की कमान संभाली. धोनी ने ताबड़तोड़ बल्लेबाजी करते हुए 123 गेंद में 148 रन बनाए. ओडिआई मैचों में यह धोनी की पहली सेंचुरी थी. टीम इंडिया के विशाल 356 रनों के लक्ष्य का पीछा करने आई पाकिस्तानी टीम 58 रनों से यह मैच हार गई.

शानदार 107 रनों की पारी

श्रीलंका के विरुद्ध 2009 में खेले गए इस वनडे मैच में भारत की शुरुआत अच्छी नहीं हुई थी. धोनी जब क्रीज पर आए तो टीम इंडिया 81 रन पर 3 विकेट खो चुकी थी. फिर टीम की कमान संभाली धोनी और सुरेश रैना नें. दोनों की पार्टनरशिप की बदौलत टीम इंडिया ने 50 ओवर में 301 रनों का स्कोर बनाया. 301 रन के स्कोर में 107 रन धोनी के बल्ले से आए. हालांकि तिलकरत्ने दिलशान की शतक के कारण टीम इंडिया यह मैच हार गई. लेकिन धोनी की 107 रनों (111 गेंद) की पारी आज भी याद की जाती है.

पाकिस्तान के विरुद्ध 113 रनों की पारी

2012 में चेन्नई में पाकिस्तान के खिलाफ खेले गए वनडे मैच में टीम इंडिया एक समय 29 रन पर 5 विकेट खो चुकी थी. ऐसे में धोनी पर सारी जिम्मेदारी थी. धोनी ने इस दवाब भरी स्थिति में भी 113 रनों की पारी खेली, जिसमें 7 चौके और 3 छक्के शामिल थे. हालांकि धोनी की ये आतिशबाजी पारी काम नहीं आई और पाकिस्तान ने आसानी से 227 रन के लक्ष्य का पीछा कर लिया.

विश्व का सर्वश्रेष्ठ फिनिशर, कैप्टन कूल और छक्के के साथ गेम खत्म करने वाला महारथी. इन पारियों के कारण ही ऐसे कई तमगे हैं जो फैन्स और विशेषज्ञों ने महेंद्र सिंह धोनी को दिए हैं.

ब्लॉक वेबसाइट को ऐसे कर सकते हैं अनब्लॉक

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि ऑफिस में सबसे ज्यादा इस्तेमाल की जाना वाली वेबसाइट को अगर एडमिन की तरफ से ब्लॉक कर दिया गया हो. अगर ऐसे में आपको काम करना होता है तो आप क्या करते हैं. इंटरनेट सर्फ करते समय कई बार ऐसे होता है कि कोई वेबसाइट ब्लॉक दिखाई देती है और आप उसे ऐक्सेस नहीं कर पाते हैं.

जब कभी ऐशा कुछ आपके साथ ऑफिस में होता है तो अगर एडमिनिस्ट्रिेशन को बताया जाता है तो वे लोग तो इसे अनब्लॉक नहीं करेंगे, और जाहिर है कि आप ऑफिस में कहीं और से इसे अनब्लॉक नहीं कर सकते हैं. इसी तरह ऑफिस के अलावा भी बाहर अगर कोई वेबसाइट नहीं चले तो, हम आपको 4 तरीके बताने जा रहे हैं, जिनके जरिए आप ब्लॉक वेबासइट को अनब्लॉक कर सकते हैं.

इंटरनेट ऑप्शन को बदलें

अगर आपको किसी भी वेबसाइट को अनब्लॉक करना है तो, सबसे पहले इंटरनेट ऑप्शन को बदलना होगा. अगर आपके पैनल पर "Due to Restrictions On This Account," मैसेज लिखकर नहीं आता है तो आप आसानी से वेबसाइट को अनब्लॉक कर सकते हैं, क्योंकि अगर ऐसा लिखकर आता है तो ये साइट्स कानूनी तौर पर किसी कारणवश बंद की जाती हैं. तो इसके लिए, सबसे पहले Control Panel में जाएं, फिर Security पर टैप करें. इसके बाद Restricted Sites पर जाएं और जिस साइट को एक्टिव करना चाहते हैं, उसे एक्टिव कर दें.

HTTP से HTTPS

जो वेबसाइट ब्लॉक है, उसके url में जाकर, वहां HTTP की जगह HTTPS कर दें. ऐसा करने से वेबसाइट चलने लगेगी.

पोर्टेबल प्रॉक्सी सर्वर करें इस्तेमाल

किसी वेबसाइट को अनब्लॉक करने के लिए आप पोर्टेबल प्रॉक्सी सर्वर कर इस्तेमाल भी किया जा सकता है.

गूगल ट्रांसलेट

जिस यूआरएल को आप ओपन करना चाहते हैं उसे गूगल ट्रांसलेट पर डालें. इसके बाद जो भी आपके सामने लिंक आए, उसे एंटर कर ओपन करके देखें. आपको बता दें कि इस तरीके से वेबसाइट को अनब्लॉक नहीं किया जा सकता है लेकिन इसे यूज कर सकते हैं.

कभी जीने की इच्छा न रखने वाला आज बन गया कामयाब सिंगर

आज सूफी गायक कैलाश खेर का जन्मदिन है. उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में जन्में कैलाश के बारे में ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्होंने मात्र 13 साल की उम्र में अपना घर छोड़ दिया था. कैलाश की संगीत से लगन बचपन से ही रही है. इसलिए संघर्ष करते, बच्चों को संगीत की ट्यूशन देते और अपने आप को निखारते, बचाते एक दिन कैलाश खेर ने वो मुकाम पा ही लिया जो कभी उनका ख्वाब था.

उनके जीवन की ये एक महत्पूर्ण बात हे कि उन्होंने एक लंबा संघर्ष किया है. ये बात साल 1999 की है, जब वे हर तरफ से निराश होकर अपने एक दोस्त के साथ एक बिजनेस करने लगे. साल 1999 कैलाश के लिए सबसे कठिन वर्षों में से एक रहा. ये वो दौर था जब कैलाश का जीवन अंधेरे में डूब गया था और उम्मीद की कोई किरण नजर नहीं आ रही थी. कैलाश ने इस साल अपने दोस्त के साथ हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट बिजनेस शुरू किया. कैलाश और उनके दोस्त को इसमें भारी नुकसान हुआ. कैलाश ने इस गम में आत्महत्या करने की कोशिश भी की थी. डिप्रेशन के चलते उन्होंने ऋषिकेश का रुख किया था.

व्यापार में काफी घाटा हुआ और इसका असर ये हुआ कि कैलाश डिप्रेशन में चले गए. बात इस हद तक बढ़ गई थी कि उन्होंने सुसाइड करने तक सोच लिया था. साल 2001 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने के बाद कैलाश खेर मुंबई आ गए. खाली जेब और घिसी हुई चप्पल पहने संघर्ष कर रहे कैलाश में संगीत के लिए कमाल का जूनून था. यहीं एक दिन उनकी मुलाकात संगीतकार राम संपत से हुई. उन्होंने कैलाश को कुछ रेडियो जिंगल गाने का मौका दिया और फिर कहते हैं न कि प्रतिभा के अपने पैर होते हैं, वो अपना मंजिल तलाश ही लेती है.

आज कैलाश खेर किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. उन्होंने आगे बढ़ने के लिए बहुत मेहनत की. इस मेहनत का फल उन्हें 'अंदाज' फिल्म में मिला. इस फिल्म में कैलाश मे 'रब्बा इश्क न होवे' गाना गाया था. ये गाना आते ही लोगों की जुबान पर चढ़ गया. इसके बाद 'वैसा भी होता है' पार्ट 2 में कैलाश ने गाना 'अल्लाह के बंदे' गाया. इस गाने की लोकप्रियता ऐसी है कि कैलाश आज भी इसी गाने से जाने जाते हैं. इसके बाद कैलाश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. बॉलीवुड में उन्होंने 'रब्बा', 'ओ सिकंदर' और 'चांद सिफारिश' जैसे गाने गाए हैं. इनमें से दो गानों के लिए कैलाश को फिल्मफेयर का बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर का अवॉर्ड भी मिल चुका है.

अपनी गायकी के लिए 'पद्मश्री' सम्मान से सम्मानित कैलाश ने हिंदी में 500 से ज्यादा गाने गाए हैं. इसके अलावा उन्होंने तमाम क्षेत्रीय भाषाओं में भी गाने गाए हैं. 'तेरी दीवानी' कैलाश के लोकप्रिय गानों में से एक है. गौरतलब है कि कैलाश भगवान शिव के बड़े भक्त हैं और सावन का महीना भी आने वाला है इसलिए उन्होंने इस अवसर पर यह सांग लांच करने का मन बनाया.

कैलाश का 'कैलाशा' नाम से अपना बैंड भी है जो नेशनल और इंटरनेशनल शोज करता है. एल्बम – 'वैसा भी होता है' का 'अल्लाह के बन्दे' ऐसे गीत हैं जो, कैलाश को चाहने वाले हमेशा गुनगुनाते रहते हैं. दो बार फिल्मफेयर से बेस्ट सिंगर का अवार्ड जीत चुके कैलाश खेर के लिए 'सैयां' एल्बम का टाइटल सांग तो जैसे उनकी पहचान है.

हाल में 'बाहुबली 2' में भी कैलाश खेर को आप सबने सुना होगा. बहरहाल, 'बम लहिरी' भी उनके लोकप्रिय गीतों में शामिल है. फिल्म 'दिल्ली 6' का गीत 'अर्जियां सारी' को कैलाश खेर ने जावेद अली के साथ मिलकर गाया है. यह गीत भी काफी पॉपुलर है.

अपने 44 वें जन्मदिन पर कैलाश खेर आप सबके लिए एक नया गीत- 'भोले चले' लांच कर रहे हैं. गौरतलब है कि कैलाश भगवान शिव के बड़े भक्त हैं और सावन का महीना भी शुरू होने आने वाला है इसलिए उन्होंने इस अवसर पर यह सांग लांच करने का मन बनाया. बहरहाल, संगीत के इस जादूगर को हमारी ओर से जन्मदिन पर बहुत सारी शुभकामनाएं!

अब Skype पर वीडियो कौलिंग के लिए आधार नंबर

माईक्रोसॉफ्ट ने 12 डिजिट यूनीक ID को स्काईप लाइट से लिंक करने की शुरुआत की है. धोखाधड़ी से बचाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट ने अपने 'मेड फॉर इंडिया' Skype lite ऐप के साथ आधार नंबर को जोड़ने की सुविधा दी है, ताकि यूजर्स कॉल करनेवाले की पहचान का ऑनलाइन वेरीफिकेशन कर सकें, जिससे लोगों को ज्यादा सिक्योर तरीके से चैट करने में मदद मिलेगी.

कैसे आधार-स्काईप लिंक काम करेगा?

आधार के ज़रिए स्काइप पर किसी से वीडियो कॉल शुरू करने से पहले एक दूसरे की पहचान को वेरिफाई कर सकते हैं. इसके लिए यूज़र को ‘verify Aadhar Identity’ पर क्लिक करना होगा. फिर यूज़र को आधार नंबर डालना पड़ेगा, जिसके बाद OTP के ज़रिए आपकी वेरीफिकेशन होगी.

आधार को दुनिया का सबसे बड़ा राष्ट्रीय पहचान नंबर परियोजना माना जाता है. इसके ज़रिए भारत के लोग सरकार, व्यापार और बाकी की धोखाधड़ी की कम जोखिम और ज़्यादा सुरक्षा के साथ जुड़ सकते हैं.

बयान में कहा गया कि स्काइप आधार से संबंधित किसी भी जानकारी को स्टोर नहीं करेगा. साथ ही हमेशा की तरह यूजर की निजी जानकारी, उसका वीडियो और ऑडियो चैट, उसका चैट रिकार्ड सुरक्षित रूप से एनक्रिप्टेड रहेगा. यह काम सिर्फ धोखाधड़ी रोकने के लिए किया जा रहा है.

तारक मेहता फेम गोगी का फर्श से अर्श तक का सफर

'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' फेम गोगी यानी चाइल्ड आर्टिस्ट समय शाह ने मुंबई में अपना घर खरीद लिया है. 16 साल के समय ने हाल ही में फैमिली मेंबर्स के साथ गृह प्रवेश की पूजा करवाई. बता दें कि समय का यह 3 BHK  हाउस मुंबई के पॉश इलाके बोरीवली में स्थित है. जल्दी ही वे पेरेंट्स के साथ यहां शिफ्ट हो जाएंगे. घर की कीमत करीब 1.48 करोड़ रुपए बताई जा रही है. पिछले साल बुक किया था घर. नीडिया से बातचीत में समय शाह ने बताया, "हमने यह घर पिछले साल बुक किया था और इस साल मार्च में इसका पजेशन मिला. मैं अपने न्यू अपार्टमेंट को लेकर बहुत एक्साइटेड हूं. क्योंकि मुझे यहां कुछ प्राइवेसी मिल जाएगी."

"अब तक मैं जमीन पर सोता था, जिसकी वजह से मुझे और फेमिली वालों को बहुत दिक्कत होती थी. हमेशा से यही ख्वाब था कि मेरा खुद का बेडरूम और वार्डरोब हो. फाइनली, मेरा सपना पूरा हो गया."

करीब 1000 वर्गफीट में फैला है समय का नया घर

बकौल समय, "अभी तक यह 2BHK अपार्टमेंट है, जिसमें दो बड़ी बालकनी हैं. मेरे पेरेंट्स की प्लानिंग है कि एक बालकनी को बेडरूम में कन्वर्ट किया जाए. इसलिए यह 3BHK अपार्टमेंट होगा, जो 1000 वर्गफीट में फैला हुआ है."

"इसका इंटीरियर वर्क अभी शुरू नहीं हुआ है. इसमें अभी कम से कम 5-6 महीने का वक्त और लगेगा. इसलिए तब तक हम अपने पुराने घर में ही रहेंगे. हम वास्तु में यकीन भी रखते हैं, इसलिए कॉर्नर्स को उसी हिसाब से तैयार किया गया है. यह मेरे लिए ड्रीम हाउस की तरह है."

भव्य गांधी के कजिन हैं समय

समय 'तारक मेहता का उल्टा चश्मा' में टप्पू का रोल कर चुके भव्य गांधी की मौसी के बेटे हैं. समय के फैमिली मेंबर्स की बात करें तो पापा राजेश सोनमल शाह, मां नीमा शाह के अलावा दो बहनें दीनल शाह और प्रियंका शाह हैं.

पढ़ने में भी हैं अव्वल

हाल ही में वे तब चर्चा में थे, जब उन्होंने एसएससी बोर्ड में 82% मार्क्स हासिल किए थे. तब उन्होंने कहा था कि एग्जाम के दौरान भी उन्हें शूट करना पड़ता था. इसके लिए समय शाह ने शूटिंग शेड्यूल में कुछ चेंज्स भी करवएं थे. शूटिंग पूरी होते ही वो अपने एग्जाम की तैयारी में लग जाते थे.

टीवी पर बच्चों के रियालिटी शो बंद करने की उठी मांग

4 जुलाई को ‘सरिता’ पत्रिका में हमने प्रकाशित किया था कि ‘हीरोपंती’ और ‘बागी’ जैसी सफल फिल्मों के निर्देशक सब्बीर खान किस तरह से टीवी पर प्रसारित हो रहे बच्चों के रियालिटी शो के पक्षधर हैं. वास्तव में फिल्मसर्जक सब्बीर खान ने अपनी नई फिल्म ‘‘मुन्ना माइकल’’ में टीवी के डांस रियालिटी शो को रखा है और कुछ दिन पहले ‘‘सरिता’’ पत्रिका से बात करते हुए सब्बीर खान ने टीवी पर प्रसारित हो रहे बच्चों के रियालिटी शो का पक्ष लेते हुए जबरदस्त वकालत की थी. उन्होंने टीवी के रियालिटी शो की तुलना बच्चों द्वारा गली गली में खेले जा रहे क्रिकेट से भी की थी.

‘‘सरिता’’ पत्रिका में इस खबर के छपने के बाद मशहूर फिल्मकार सुजीत सरकार ने ट्वीटर पर बच्चों के रियालिटी शो को बंद किए जाने की मांग कर डाली. सुजीत सरकार ने ट्वीटर पर लिखा – ‘‘संबंधित अधिकारियों से विनम्र निवेदन है कि वे तुरंत सभी टीवी के रियालिटी शो पर बैन लगाएं. यह शो बच्चों को भावनात्मक स्तर के साथ साथ पवित्रता के स्तर पर भी बर्बाद कर रहे हैं.’’

सुजीत सरकार की मांग काफी जायज नजर आती है. वास्तव में टीवी के रियालिटी शो में विजेता बनने के लिए हर बच्चे के उपर कई तरह के दबाव होते हैं. उन्हें जनता से वोट की दरकार होती है. इसी के साथ जब तक वे इस तरह के शो का हिस्सा होते हैं, तब तक वे एक स्टारडम वाली जिंदगी जीते हैं. शो के खत्म होते ही वे धड़ाम से जमीन पर आ जाते हैं. इनमें से एक ही विजेता बनता है, पर विजेता बनने के बावजूद उसे फिल्म इंडस्ट्री में काम मिलने की कोई गारंटी नहीं होती. इससे उनके करियर, उनकी सेहत पर जबरदस्त असर होता है. उनकी भावनाएं आहत होती हैं. उनके सारे सपने एक ही मिनट में धराशायी हो जाते हैं, पर रियालिटी शो के खत्म होते ही इन बच्चों का हाल जानने वाला कोई नहीं होता. इतना ही नहीं तमाम लोगों की राय में जिस वक्त बच्चो को पढ़ाई पर ध्यान देकर डाक्टर, इंजीनियर,सीए या अन्य क्षेत्र में जाने के बारे में सोचना चाहिए, उस वक्त वे रियालिटी शो का हिस्सा बन स्टारडम की हवा में बह रहे होते हैं, जिससे उनके अंदर भटकाव भी आता है.

मगर सुजीत सरकार द्वारा रियालिटी शो पर बैन की मांग उठाए जाने के बाद से ही यह मसला काफी गर्मा गया है. रियालिटी शो को पक्ष में फिल्म ‘‘मुन्ना माइकल’’ के हीरो टाइगर श्राफ भी खुलकर सामने आ गए. टाइगर श्राफ ने कहा है – ‘‘मैं तो पूरी तरह से टीवी के रियालिटी शो के पक्ष में हूं, यह रियालिटी शो बच्चों को सही दिशा देते हैं, उनके अंदर की सकारात्मक उर्जा को सही ढंग से संचालित करते हैं. ये शो बच्चों को कम उम्र मे ही आगे बढ़़ने की सही दिशा दिखाते हैं, जो कि बहुत अच्छी बात है.’’

सुजीत सरकार की मांग पर टाइगर श्राफ ने कहा – ‘‘मैं उनसे पंगा नही लेना चाहता. उनके विचार अलग है. मैं मानता हूं कि बच्चों के लिए शिक्षा महत्वपूर्ण है, मगर अन्य गतिविधियां भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं. पढ़ाई ही सब कुछ नही है.’’

अभिनेत्री और रियालिटी शो ‘छोटा मियां धाकड़’’ की जज रही नेहा धूपिया भी सुजीत सरकार के खिलाफ खड़ी नजर आ रही हैं. नेहा धूपिया का दावा है कि टीवी के रियालिटी शो बच्चों को आत्मविश्वास और मार्गदर्शन देते हैं. नेहा धूपिया कहती हैं – ‘‘टीवी के रियालिटी शो जैसे मंच, बच्चो को अपने शुरूआती जीवन में ही आत्म विश्वास व दिशा देते हैं, लेकिन मेरा मानना है कि बच्चों को किसी भी चीज के लिए अपनी शिक्षा के साथ समझौता नहीं करना चाहिए. सुजीत सकार से मेरी राय अलग है. मैं उनकी राय का सम्मान भी करती हूं. मगर इस प्रतिस्पर्धात्मक युग में ऐसे शो चाहिए. दूसरी बात मैं इस तरह के शो का हिस्सा रही हूं, तो मुझे पता है कि रियालिटी शो के दौरान बच्चों की देखभाल की जाती है. मैं यह मानती हूं कि बच्चों का सपना चाहे जो हो, मगर बच्चों को अपनी शिक्षा पहले पूरी करनी चाहिए.’’

बहरहाल, अब टीवी पर रियालिटी शो को लेकर नई बहस पैदा हुई है. अब देखना ये है कि यह बहस आगे क्या रूप लेती है और इसके परिणाम क्या सामने आते हैं. वैसे जब अमोल गुप्ते ‘‘चिल्ड्रेन फिल्म सोसायटी’’ के चेअरमैन थे, तब उन्होंने भी टीवी व फिल्मों में बच्चो से काम कराए जाने पर कई तरह के सवाल उठाते हुए केंद्रीय बाल मंत्रालय से कुछ कदम उठाने की गुहार लगायी थी, पर मंत्रालय अब तक खामोश है.

मॉम : क्या श्रीदेवी और नवाजुद्दीन फिल्म को बचा पाएंगे

बलात्कार के मुद्दे पर कई फिल्में लगातार बन रही हैं. कुछ माह पहले बलात्कार के मुद्दे पर ही प्रदर्शित फिल्म ‘‘मातृ’’ और श्रीदेवी के अभिनय से सजी फिल्म ‘‘मॉम’’की कहानी में अंतर नही है. गैंगरेप और फिर बदला लेने की दास्तान है. ‘मॉम’ में मां के किरदार को बहुत ही सशक्त रूप में पेश किया गया है. मगर फिल्म ‘मॉम’का प्रस्तुतिकरण काफी बेहतर है.

इस रोमांचक कहानी के केंद्र में दिल्ली विश्वविद्यालय में बायोलॉजी (जीवविज्ञान) की प्रोफेसर देवकी (श्रीदेवी) और उनकी सौतेली बेटी आर्या (सजल अली) और अपनी बेटी प्रिया है. देवकी अपनी दोनों बेटियों व पति आनंद (अदनान सिद्दिकी) के साथ, खुशहाल जिंदगी जी रही है. देवकी जिस स्कूल में शिक्षक है, उसी स्कूल में प्रिया व आर्या दोनों पढ़ते हैं. मोहित एक लड़की को अश्लील संदेश भेजता है, जिसकी वजह से देवकी, मोहित को सजा देती है. आर्या अपनी सौतेली मां देवकी से प्यार नहीं करती, बल्कि ‘मैडम’ कह कर बुलाती है. जबकि देवकी उसे बहुत प्यार करती है.

देवकी व आनंद की मर्जी के विपरीत आर्या उन्हें मजबूर करती है कि वह उन्हें वेलेनटाइन डे की पार्टी में जाने की इजाजत दे. वेलेनटाइन डे की पार्टी में मोहित, उसका चचेरा भाई, जगन (अभिमन्यू सिंह) व एक अन्य दोस्त मिलकर गाड़ी के अंदर आर्या के साथ बलात्कार कर उसे सड़क किनारे एक गटर में फेंक देते हैं. बहुत बुरी हालत में आर्या अस्पताल पहुंचायी जाती है. एक कड़क मिजाज पुलिस ऑफिसर फ्रांसिस (अक्षय खन्ना) अपने काम को ईमानदारी के साथ अंजाम देने में जुटा हुआ है. मामला अदालत में पहुंचता है, मगर सभी आरोपी बरी हो जाते हैं.

देवकी के पति आनंद उदार स्वभाव के इंसान हैं. वह दूसरे वकील के माध्यम से हाई कोर्ट जाने की बात सोचता है. मगर देवकी चुप बैठने वाली मां नहीं है. वह उनमें से नहीं है, जो कि कानून के सहारे हाथ पर हाथ बांध कर बैठी रहे. अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए वह किसी भी हद तक जा सकती है. देवकी बदला लेने के अपने मिशन पर निकल पड़ती है. वह दिल्ली के एक प्राइवेट डिटेक्टिव डी के (नवाजुद्दीन सिद्दिकी) की सेवाएं लेती है. फिर कहानी में कई मोड़ आते हैं. अंततः देवकी अपनी बेटी आर्या के अपराधियों को सजा देने में सफल हो जाती है और आर्या उन्हें ‘मॉम’ कहकर पुकारती है.

जहां तक अभिनय का सवाल है, तो श्रीदेवी ने जबरदस्त अभिनय क्षमता का परिचय दिया है. खुशी, गम, बेबसी, प्रतिशोध व जीत के भाव बड़ी आसानी से उनके चेहरे पर पढ़े जा सकते हैं. श्रीदेवी अनुकरणीय कलाकार के रूप में उभरती हैं. सौतेली बेटी द्वारा स्वीकार न किए जाने का दर्द भी उनके चेहरे पर बड़ी साफगोई के साथ उभरता है. काश एक बेहतरीन कहानी व पटकथा उन्हें मिली होती. बलात्कार पीड़िता के दर्द को बयां करने में सजल अली ने कोई कसर नहीं छोड़ी. सजल अली व श्रीदेवी के बीच के कई दृश्य दर्शकों को भावुक करते हैं. सजल अली का संजीदा अभिनय तारीफ के काबिल है. नवाजुद्दीन सिद्दिकी और अक्षय खन्ना ने भी जबरदस्त परफॉर्मेंस दी है. नवाजुद्दीन सिद्दिकी लगातार साबित करते जा रहे हैं कि अभिनय में उनका कोई सानी नहीं है. नवाजुद्दीन सिद्दिकी की खामोशी और एक वाक्य के संवाद भी बहुत कुछ कह जाते हैं. अभिमन्यू सिंह के हिस्से करने को है ही नहीं. परफॉर्मेंस के लिए अदनान सिद्दिकी के हिस्से भी खास दृश्य नहीं रहे.

कहानी व पटकथा के स्तर पर फिल्म काफी कमजोर है. कहानी के अलावा रात, बलात्कार, पुलिस कार्यवाही, मां द्वारा बदला लेना, वगैरह सब कुछ हम अब तक कई फिल्मों में इसी तरह से देखते आए हैं. इसमें कुछ भी नयापन नहीं है. मगर प्रस्तुतिकरण व कलाकारों की अति उत्कृष्ट परफॉर्मेंस के चलते फिल्म एक अलग मुकाम पर पहुंचती है. इंटरवल के बाद पटकथा में कसावट की बहुत जरुरत है. यदि कहानी व पटकथा पर और काम किया जाता तो फिल्म ज्यादा बेहतर बन सकती थी. संवाद प्रभावी नहीं है. क्लायमेक्स तक पहुंचते पहुंचते निर्देशक के हाथ से फिल्म फिसल जाती है. जॉर्जिया में देवकी, जगन व पुलिस अफसर फ्रांसिस के बीच का दृश्य जरुरत से ज्यादा मेलोड्रामैटिक हो गया है.

संगीतकार ए आर रहमान का पार्श्व संगीत साधारण है. फिल्म का एक भी गाना जमता नहीं है. इंटरवल के बाद का गाना तो कहानी को बहुत ही ज्यादा शिथिल करता है. कैमरामैन ऐना गोस्वामी ने कुछ अच्छे दृश्य फिल्माए हैं. जॉर्जिया की खूबसूरती अच्छे ढंग से कैद हुई है.

दो घंटे 27 मिनट की अवधि वाली फिल्म ‘‘मॉम’’ का निर्माण बोनी कपूर, सुनील मनचंदा, नेरश अग्रवाल, मुकेश तलरेजा, गोतम जैन, निर्देशक रवि उद्यावर, कहानी लेखक रवि उद्यावर, गिरीश कोहली व कोना वेंकट, संगीतकार ए आर रहमान, कैमरामैन ऐना गोस्वामी, पटकथा लेखक गिरीश कोहली तथा कलाकार हैं- श्रीदेवी, अदनान सिद्दिकी, साजल अली, नवाजुद्दीन सिद्दिकी, अक्षय खन्ना, अभिमन्यू सिंह व अन्य.

जब सना खान हुईं ऊप्स मोमेंट का शिकार, अकेले में देखें ये वीडियो

बॉलीवुड के स्टार्स पर मीडिया की पैनी नज़र होती है. लोग अपने पसंदीदा अभिनेता-अभिनेत्रियों के बारे में सब कुछ जानना चाहते हैं. इसका फायदा बॉलीवुड सेलेब्रिटीज को ये मिलता है, कि वह लगातार लोगों के बीच चर्चा का विषय बने रहते हैं, लेकिन इसके कुछ नुकसान भी हैं, कि उनकी छोटी से छोटी गलती मीडिया की खबर बन जाती है. अक्सर मीडिया में अभिनेत्रियों के वार्डरोब मालफंक्सन के शिकार होने की खबरें सामने आती रहती हैं.

इसका शिकार एक्ट्रेस नहीं होती बल्कि इंडस्ट्री से जुड़ी अन्य महिलाओं पर भी मीडिया के कैमरों की पैनी नजर रहती है. हाल ही में एकता कपूर के उप्स मूवमेंट का शिकार होने की खबरें सामने आयी थीं.

बॉलीवुड की अभिनेत्री सना खान भी उप्स मूवमेंट का शिकार हो चुकी हैं. सना खान बॉलीवुड और साउथ फिल्मों में नज़र आ चुकी हैं. इसके अलावा उन्होंने कई विज्ञापनों में भी काम किया है. वह एक एक्ट्रेस, मॉडल और डांसर हैं. सना खान सलमान खान की फिल्म ‘जय हो’ में भी नजर आयीं थीं. पिछले साल दिसंबर में आयी फिल्म ‘वजह तुम हो’ में सना खान ने गुरमीत चौधरी के साथ कई बोल्ड सीन दिए थे.

जब सना खान उप्स मूवमेंट का शिकार हुईं तब उन्होंने गुलाबी रंग की एक साड़ी पहन रखी थी जिसमें वह काफी खूबसूरत नज़र आ रही थीं. उन्होंने इस मौके पर पोज देते हुए कई फोटोज भी खिचवायीं.

इस दौरान सना के साथ कुछ ऐसा हो गया जो शायद नहीं होना चाहिए था. इस वीडियो को देखकर आप खुद ही समझ जायेंगे कि हम किस बारे में बात कर रहे हैं.

ये पहली बार नहीं है जब सना खान उप्स मूवमेंट का शिकार हुईं हैं. उनके साथ पहले भी ऐसा हो चुका है. सिर्फ ऑफ स्क्रीन ही नहीं बल्कि ऑन स्क्रीन भी सना ऐसी घटनाओं का शिकार हो चुकी हैं. इस पर कई लोग यह भी कहते हैं कि मीडिया अभिनत्रियों के पहनावे में हुई गलतियों को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करता है. 

देखें वीडियो

योगी सरकार की नजर में ‘गूलर’ धार्मिक नहीं

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जो धार्मिक नहीं वो स्वीकार नहीं की तर्ज पर चल रही है. यही वजह लगती है कि प्रदेश की सरकार पर्यटन से विकास तक में धर्म से जुडे शहरों को प्राथमिकता दे रही है. हद तो तब हो गई जब प्रदेश सरकार ने कहा कि कांवरियों के बीच अपवित्र माने जाने वाले गूलर के पेड की भी कटाई छंटाई कर दी जायेगी. वैसे तो गूलर का पेड अपवित्र क्यों है इस बात का जबाव प्रदेश सरकार के पास नहीं है. गूलर के पेड़ की कटाई छंटाई के बयान को लेकर शुरू हुई आलोचना के बाद प्रदेश सरकार ने कोई सफाई नहीं दी है. गूलर के पेड़ को अधार्मिक बताकर उसकी कटाई छंटाई के आदेश का विरोध पर्यावरण के समर्थक भी कर रहे हैं. धार्मिक प्रवृत्ति के लोग भी इसका कोई तर्क नहीं तलाश पा रहे हैं.

आयुर्वेद का समर्थन करने वाले गूलर के गुणों का महत्व बताते हैं. गूलर के फल का महत्व आम जनता के बीच ऐसा है कि इसके कच्चे फल से सब्जी और अचार बनता है तो पके हुये फल को खाया भी जाता है. केवल इंसान की नहीं चिडियां भी गूलर के फल से अपना भोजन तलाशते हैं. गांव में बड़ी संख्या में गूलर के पेड पाये जाते हैं. उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने आदेश दिया है कि कांवरियों के मार्ग में पड़ने वाले गूलर के पेड को काट कर छोटा किया जायेगा क्योकि कांवर ले जाने वाले लोग गूलर को पवित्र नहीं मानते हैं. प्रदेश सरकार ने कांवर यात्रा को महत्व देते हुये लंबे चौडे आदेश जारी किये हैं जिससे कांवर यात्रा करने वालों को रास्ते में कहीं कोई परेशानी न हो.

प्रदेश सरकार ने जिस तरह से कांवर यात्रा को महत्व दिया है उससे लगता है कि कांवर यात्रा के समय केवल सरकार ही नहीं भाजपा का संगठन भी जगह जगह कांवर यात्रा के प्रचार प्रसार में लग जायेगा. उत्तर प्रदेश की सरकार ने अपने हर काम को धार्मिक महत्व से जोड़ना शुरू कर दिया है. पर्यटन विकास के लिये जो नीतियां बन रही हैं उसमें धार्मिक महत्व वाले शहरों का ही ध्यान रखा जा रहा है. अभी सरकार प्रदेश में शहरों के बीच हेलीकौप्टर से हवाई सेवा शुरू करने जा रही है. उसमें भी सबसे पहले 15 धार्मिक महत्व के शहरों का नाम लिया जा रहा है. असल में भाजपा ने धर्म को ही आगे रखकर उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली है, जिससे अब उसके हर काम में धर्म के महत्व को अंडरलाइन करके दिखाया जा रहा है. 

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें