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अपने डेब्यू मैच में ही इस बल्लेबाज ने ठोक दिया था शतक

पिछले साल जिंबाब्वे के खिलाफ अपने पहले ही वनडे मैच में शतक लगाकर लोकेश राहुल ने एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया था. लोकेश राहुल अपने पहले ही वनडे मैच में शतक जमाने वाले एकलौते भारतीय बल्लेबाज बन गए थें. इससे पहले कोई भी भारतीय बल्लेबाज अपने वनडे पहले मैच में शतक नहीं लगा पाया था. कुछ बल्लेबाज ऐसे थे जो शतक के करीब पहुंचे लेकिन शतकीय पारी नहीं खेल पाएं. तो आइए अपने पहले वनडे मैच में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले भारतीय बल्लेबाजों के बारे में जानते हैं.

लोकेश राहुल (100*)

2016 के जिंबाब्वे दौरे पर गई भारतीय टीम की ओर से लोकेश राहुल ने अपने पहले ही मैच में शतक जमाने वाले पहले बल्लेबाज बनने का गौरव हासिल किया. लोकेश राहुल ने 115 गेंदों पर 7 चौकों और 1 छक्के की बदौलत 100* रनों की पारी खेली. लोकेश राहुल ने इस मैच में छक्का लगाकर ना सिर्फ अपना शतक पूरा किया बल्कि भारत को जीत भी दिलाई.

रॉबिन उथप्पा (86)

2006 में भारत दौरे पर आई इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला मैच खेलते हुए रॉबिन उथप्पा ने 86 रनों की पारी खेली थी. रॉबिन उथप्पा ने 12 चौके और 1 छक्के की मदद से 96 गेंदों में 86 रन बनाए थे. ये उस दौर में किसी भी भारतीय बल्लेबाज द्वारा पहले वनडे में बनाया गया सबसे बड़ा स्कोर था.

बृजेश पटेल (82)

1974 में बृजेश पटेल ने अपना पहला वनडे मैच खेला था. मैच में बृजेश पटेल ने बल्ले से शानदार प्रदर्शन करते हुए सुनील गावस्कर, गुंडप्पा विश्वनाथ जैसे बल्लेबाजों को पीछे छोड़ते हुए 82 रनों की आक्रामक पारी खेली. बृजेश पटेल ने मात्र 78 गेंदों 8 चौके और 2 छक्कों की मदद से 82 रन ठोंक दिये.

नवजोत सिंह सिद्धू (73)

अपनी बेबाक बोली और शायरी के लिए मशहूर भारत के पूर्व सलामी बल्लेबाज नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने पहले ही वनडे में शानदार अर्धशतक जमाते हुए 73 रनों की पारी खेली थी. 1987 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चेपक की पिच पर सिद्धु ने कंगारू गेंदबाजों की खबर लेते हुए 79 गेंदों पर 4 चौकों और 5 छक्कों की बदौलत 73 रनों की पारी खेली थी, हालांकि उनकी इस शानदार बल्लेबाजी के बावजूद भारत को 1 रन से हार का सामना करना पड़ा.

मनीष पांडे (71)

मौजूदा दौर में भारतीय टीम के सबसे टैलेंटेड युवा खिलाड़ियों में से एक मनीष पांडे नें 2015 में जिंबाब्वे दौरे पर अपने पहले मैच में शानदार 71 रनों की पारी खेली थी. मनीष पांडे ने अपनी इस पारी में 86 गेंदों का सामना करते हुए 4 चौके और 1 छक्के की मदद से 71 रनों की मैच जिताऊ पारी खेली थी. मनीष पांडे ने 2016 में ऑस्ट्रेलिया दौरे पर भी अपने टैलेंट का प्रदर्शन करते हुए अंतिम वनडे मैच में शानदार शतक जमाकर भारत को जीत दिलाई थी.

फीकी पड़ जाएगी धोनी के बल्ले की चमक!

क्रिकेट की दुनिया में गेंद और बल्ले का मुकाबला समान करने के लिए कुछ नियम बनाए गए हैं. इन नियमों में समय समय पर बदलाव किए जाते हैं. एक बार फिर इन नियमों में बदलाव किया जाना है. इन नियमों के लागू होने के बाद मौजूदा क्रिकेट जगत के कुछ बल्लेबाजों की चमक फीकी पड़ सकती है.

एक अक्टूबर के बाद डेविड वॉर्नर, क्रिस गेल, कायरन पोलार्ड और भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को गेंदबाजों पर हावी होने से पहले अपनी रणनीति पर कुछ विचार करना होगा. बल्लों की मोटाई, जो खासतौर पर बैट के निचले हिस्से में होती है, 40 मिमी से अधिक नहीं हो सकती. इस साल मार्च में मेर्लबॉन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) ने बल्ले की मोटाई के संदर्भ में फैसला किया था. इसका अर्थ यह है कि इन खिलाड़ियों को अब नए बैट से खेलना होगा.

हालांकि भारतीय कप्तान विराट कोहली इसके अपवाद रहेंगे. कोहली का बैट नए नियमों के अनुसार फिट बैठता है. साउथ अफ्रीका के एबी डि विलियर्स, ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ और इंग्लैंड के जो रूट भी 40 एमएम से कम मोटाई के बल्ले से खेलते हैं. यानी इस नए नियम से उन्हें अपना बैट नहीं बदलना पड़ेगा.

बात करें ऑस्ट्रेलिया के डेविड वॉर्नर की, वेस्टइंडीज के क्रिस गेल और पोलार्ड की, तो इन सबके बैट की मोटाई 50 एमएम से ज्यादा है. इससे उन्हें गेंदबाजों पह हमला बोलने का मौका मिलता है. खास तौर पर खेल के छोटे प्रारूप में वे ज्यादा खतरनाक हो जाते हैं.

भारत के चोटी के खिलाड़ियों की बात करें तो सिर्फ महेंद्र सिंह धोनी ही 45 एमएम की मोटाई वाले बैट से खेलते हैं. पोलार्ड ने हालांकि अपना बैट पहले ही बदल लिया है. आईपीएल के दौरान उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि अक्टूबर तक रुकने का 'कोई मतलब' नहीं है.

कोहली ही नहीं ज्यादातर भारतीय क्रिकेटर 40 एमएम या उससे कम मोटाई के बैट से खेलते हैं. केएल राहुल, शिखर धवन, चेतेश्वर पुजारा और नए बल्लेबाज ऋषभ पंत का बैट कोहली जैसा ही है.

नए नियमों के अनुसार बल्ले की चौड़ाई 108 एमएम और गहराई 67 एमएम हो सकती है. वहीं एज यानी किनारा 40 एमएम से ज्यादा नहीं हो सकता.

मैं 18 साल का हूं और मेरी गर्लफ्रैंड 16 साल की है. हमबिस्तरी करने की वजह से वह पेट से हो गई. मुझे उस का पेट गिरवाना पड़ा. मैं क्या करूं.

सवाल

मैं 18 साल का हूं और मेरी गर्लफ्रैंड 16 साल की है. लगातार हमबिस्तरी करने की वजह से वह पेट से हो गई थी. लिहाजा, मुझे उस का पेट गिरवाना पड़ा. तब से वह बहुत उदास रहती है. मैं क्या करूं?

जवाब

आप उसे बाहर घुमाफिरा कर और खिलापिला कर खुश करें, मगर हमबिस्तरी कतई न करें. पहले पढ़ाई पूरी करें, फिर नौकरी करें और शादी की उम्र हो जाने के बाद शादी करें.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

सोनम के साथ फिल्म करेंगे अनिल!

अनिल कपूर ने कभी अपने करियर को संवारने के लिए इतनी मशक्कत नहीं की होगी, जितनी वह अपने बेटे हर्षवर्धन कपूर और बेटी सोनम कपूर के करियर को बनाने के लिए कर रहे हैं. ‘नीरजा’ जैसी फिल्म में अभिनय करने के बावजूद सोनम कपूर का करियर आगे नहीं बढ़ रहा है. इस फिल्म के प्रदर्शन के बाद से सोनम कपूर की एक भी फिल्म शुरू नहीं हो पायी. पिछले डेढ़ वर्ष से ‘वीरे दी वेडिंग’ की शूटिंग शुरू नहीं हो पायी है. अब तो इस फिल्म की कोई चर्चा भी नहीं है.

बहरहाल, अब सूत्र दावा कर रहे हैं कि अपनी बेटी के करियर को गति दिलाने के लिए अब अनिल कपूर खुलकर सामने आ गए हैं. सूत्रों की मानें तो विधु विनोद चोपड़ा निर्मित और शैली चोपड़ा (विधु विनोद चोपड़ा की बहन) निर्देशित फिल्म में सोनम कपूर के साथ अनिल कपूर भी अभिनय करने वाले हैं. सूत्र बता रहे हैं कि शैली चोपड़ा व विधु विनोद चोपड़ा इस फिल्म की योजना पर लंबे समय से काम कर रहे थें. पर जब अनिल कपूर ने इससे जुड़ने के लिए हामी भरी, तभी इस फिल्म से सोनम कूपर को जोड़ने का निर्णय हुआ.

उधर अनिल कपूर भी बिना फिल्मों का नाम लिए दावा कर चुके हैं कि वह अपने बेटे हर्षवर्धन कपूर और अपनी बेटी सोनम कपूर के साथ बेहतरीन विषय वस्तु वाली फिल्में कर रहे हैं.

नवाजुद्दीन ने क्यों कहा कि मैं काला और देखने में भद्दा हूं?

यूं तो फिल्मी दुनिया में आए दिन कुछ न कुछ होता रहता है जो खबरों में छाया रहता है. पर कल सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा हुआ, जिसने कुछ ही घण्टों में तूल पकड़ लिया. जी हां बॉलीवुड के एक बहुत ही होनहार अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी को ट्विटर पर एक शख्स ने शर्मिंदा करने की कोशिश की. लेकिन कियी भी बात से शर्मिंदा होने की जगह, नवाजुद्दीन ने कुछ ऐसा कह दिया कि उन्हें लोगों की जमकर तारीफें मिल रही हैं.

दरअसल @iankursingh नाम के ट्विटर हैंडल अकाउंट से एक तस्वीर ट्वीट की गई. इस तस्वीर में एक गोरी और सुंदर लड़की के साथ एक काला और बदसूरत सा लड़का नजर आ रहा था. इस तस्वीर को ट्वीट करते हुए उपयोगकर्ता ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी को टैग कर उन्हें चिढ़ाने की कोशिश की. पर ये क्या, इस ट्वीट को रिट्वीट कर नवाज ने भी यूजर को जोरदार जवाब दिया. नवाज ने जो जवाब दिया उस पर लोगों ने तारीफों के पुल बांधते हुए कमेंट किया कि नवाज आप इसीलिए ही खास हैं.

वहीं कुछ यूजर्स ने लिखा कि आप हमारे देश में मौजूद कुछ चुनिंदा उम्दा कलाकारों में से एक हो. @iankursingh के जवाब में नवाज का ये ट्वीट तेजी से वायरल भी हो रहा है. इस ट्वीट को अब तक 2 हजार से ज्यादा बार रिट्वीट किया जा चुका है.

@iankursingh ने जिस तस्वीर से नवाजुद्दीन को चिढ़ाने की कोशिश की उसे देख ये बॉलीवुड एक्टर बिल्कुल भी नहीं चिढ़ा. नवाजुद्दीन ने इस लड़के के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा – शुक्रिया कि आपने मुझे अहसास कराया कि मैं किसी सुंदर और गोरी लड़की के साथ अपनी जोड़ी नहीं बना सकता क्योंकि मैं काला हूं और देखने में भी भद्दा हूं. लेकिन मैंने कभी इन सब बातों पर ध्यान नहीं दिया.

नवाज के इस ट्वीट की लोगों ने जमकर तारीफे की हैं. यूजर्स लिख रहे हैं कि सर लुक्स से कुछ नहीं होता..आप कला के कोहीनूर हैं. वहीं कुछ लोग नवाज की तुलना अजय देवगन से करते हुए लिख रहे हैं कि सर अजय ने भी ऐश्वर्या राय के साथ काम किया था..आप तो फिर भी उनसे कहीं ज्यादा सुंदर हैं.

शेयर बाजार में निवेश से पहले जरा यहां ध्यान दें

इक्विटी मार्केट में जब चाहे निवेश किया या निकाला जा सकता है. पिछले 5 सालों में सेंसेक्स का औसत सालाना रिटर्न 17.4 से 20 फीसदी रहा है. लंबी अवधि में हमेशा इक्विटी मार्केट ने अच्छा रिटर्न दिया है. लिहाजा इक्विटी मार्केट में लंबी अवधि का नजरिया रखना जरूरी है. इसके अलावा…

1. शेयर खरीदने से पहले निवेशकों को पूरा रिसर्च करना चाहिए.  अगर खुद की रिसर्च नहीं है, तो निवेशकों को इंडेक्स फंड में ही लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहिए. लंबी अवधि में इंडेक्स फंड से अच्छा फायदा मिल सकता है.

2. एक्सपर्टस की माने तो शेयर बाजार में निवेश की रणनीति अपनाते समय निवेशक लालच और डर से बचें और बाजार में लंबे समय का नजरिया बनाएं रखें.

3. निवेशकों को शेयर खरीदने के साथ ही उसे बेचने का लक्ष्य तय करना चाहिए. शेयर टार्गेट प्राइस पर पहुंचने पर ही उसे बेचना चाहिए.

4. निवेशकों को टिप्स के आधार पर निवेश नहीं करना चाहिए क्योंकि उससे नुकसान होने की संभावना है. आईपीओ या सेकंडरी मार्केट में पैसा लगाते समय सावधानी बरतनी चाहिए.

5. कोई भी शेयर चुनने से पहले निवेशकों को कंपनी के बिजनेस के बारे में जानकारी लेनी चाहिए. कंपनी का परफॉर्मेंस देखना चाहिए. साथ ही शेयरों का वैल्युएशन भी देखना चाहिए. निवेशकों को अच्छे फंडामेंटल्स वाली कंपनियों में पैस लगाना चाहिए.

6. निवेशक अपना पोर्टफोलियो बनाने से पहले कुछ बातों का जरूर ध्यान रखें. नए निवेशकों को छोटे निवेश से शुरुआत करना चाहिए और काफी ज्यादा कंपनियों के शेयर ना खरीदें.

7. एक ही सेक्टर की ज्यादा कंपनियों में भी पैसा नहीं लगाना चाहिए.

8. निवेशक एफएमसीजी, फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर के शेयर अपने पोर्टफोलियो में शामिल करके अपना पोर्टफोलियो मजबूत कर सकते हैं.

9. इक्विटी निवेश के लिए बैंक एकाउंट, डीमैट एकाउंट, ट्रेडिंग एकाउंट होना चाहिए. इक्विटी में आईपीओ, सेकेंडरी मार्केट या म्युचुअल फंड के जरिए निवेश किया जा सकता है.

10. आईपीओ या लिस्टेड शेयर में निवेश करने से पहले निवेशकों को रिसर्च करके खुद की समझ से कंपनी के परफॉर्मेंस, मैनेजमैंट को देखकर निवेश करना चाहिए.

अस्पतालों के ओपीडी में बैठेंगे ज्योतिषी

जागरुक जनता बड़ा खतरा होती है, वह सवाल करने लगती है, तर्क देने लगती है और शासक से हिसाब भी मांगने लगती है. मध्य प्रदेश में भी ऐसा होने लगा है तो अब तक राज चला रहे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने जनता को बरगलाए रखने धर्म और अंधविश्वासों की अफीम चटाने का मन बना लिया है, जिससे वह धर्म के नशे में झूमती राम राम भजती रहे और अपनी बदहाली के बारे में सवाल करने से पहले ही लखखड़ाकर लुढ़क पड़े और सरकार के बजाय किस्मत को कोसे.

राज्य में सरकार खुलेआम भजन पूजन-कीर्तन आरती करवाती रही है, अब इन ढकोसलों की भी पोल खुलने लगी तो नया शिगूफा ज्योतिष का अपनाया जा रहा है. सरकार ने फैसला लिया है कि अब अस्पतालों के ओपीडी में ज्योतिषी बैठेंगे, जो मरीजों को बताएंगे कि उनकी बीमारी की वजह कोई इन्फेक्शन, एलर्जी, वायरस या बेक्टीरिया नहीं, बल्कि पंचम का बुध और राहु की महादशा सहित उनके घर का ईशान कोण जैसी बाधाएं हैं, जो दवाइयों, सर्जरी या दूसरे एलोपेथिक इलाज से नहीं, बल्कि मूंगा या नीलम नाम का रत्न धारण करने से ठीक होंगी. घर का प्रवेश द्वार पूर्व में कर दिया जाये तो शर्तिया हार्निया में आराम मिलेगा और अगर जातक यानि रोगी हर सोमवार धतूरे का सेवन करे, तो उसका सालों पुराना बवासीर ठीक हो जाएगा. शुक्रवार का नियमित व्रत रखने से वह पलंग तोड़ने लगेगा.

इस विचित्र किन्तु सत्य जैसी मुहिम की शुरुआत हाल फिलहाल भोपाल स्थित महर्षि पतंजलि संस्थान से होगी, जिसके ओपीडी में डाक्टरों के बजाय ज्योतिषी अपने औजार भृगु संहिता, हस्त रेखाएं देखने बाला मोटा लेंस और हिमालय से लाई गई सिद्धियां लेकर विराजमान होंगे, वह भी नाम मात्र के शुल्क 5 रुपये में.

आइडिया चल निकला तो प्रदेश के अस्पताल देखते ही देखते ज्योतिष केन्द्रों में तब्दील हो जाएंगे और काबिल डाक्टर तीर्थ यात्रा पर निकल पड़ेंगे. नजारा बड़ा दिलचस्प होगा कि रोगी जब अस्पताल में दाखिल होगा, तब ज्योतिषी मुमकिन है ज्यादा मगजमारी न करते उसके मस्तिष्क की रेखाएं देख कर ही बता दे कि उसे जाड़ा मलेरिया या डेंगू नहीं बल्कि सूर्य के क्षीर्ण होने से लग रहा है. इससे ठीक होने उसे बजाय दवाई लेने के सूर्य देवता को दो लोटा जल सुबह शाम चढ़ाते सोमवार का उपवास रखना चाहिए और इससे भी आराम न लगे तो धतूरे की जड़ का सेवन करना चाहिए.

अंधविश्वासों को बढ़ावा देते इस फैसले के पीछे वजहें साफ हैं कि सरकार अब लड़खड़ाने लगी है और पाखंडों व धर्म कर्म को सरकारी इमारतों का मनमाना  इस्तेमाल करते मूर्खतापूर्ण हरकतों पर उतारू हो आई है. वह प्रामाणिक विज्ञान को नकारते पोंगापंथ को प्रोत्साहित करने जैसा आत्मघाती कदम उठा रही है, जो जनता के लिए बेहद नुकसानदेह है. सरकार ने हालफिलहाल यह नहीं बताया है कि इन मूर्खताओं पर यकीन न करने वाले मरीजों को जबरन ज्योतिषी की सलाह पर अमल करने बाध्य किया जाएगा या उन्हें बख्श दिया जाएगा. हर मोर्चे पर असफल हो रही सरकार को यह अनूठा आइडिया तय है भाबी जी घर पर हैं नाम के टी वी सीरियल से मिला है जिसका डाक्टर एलोपेथी से नहीं बल्कि तंत्र मंत्र और झाड फूंक से इलाज करता है.

क्या किसी ने हैक किया है आपका अकाउंट?

क्या कभी आपका पर्सनल अकाउंट हैक हुआ है? क्या आप जानते हैं कि अकाउंट हैक होने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? अगर नहीं, तो आज हम आपको हैकिंग से जुड़ी हर बात बताने जा रहे हैं. अकाउंट कैसे हैक होता है, इससे कैसे बचा जाएं और हैक होने के बाद क्या करना है, ये सभी बातें हम आपको बताएंगे. आज हम आपको ट्विटर अकाउंट हैक होने से संबंधित जानकारी देने जा रहे हैं.

ऐसे पता चलता है हैक हो गया अकाउंट

1. यदि आपके ट्विटर, फेसबुक या इंस्टाग्राम अकाउंट पर एकाएक अपशब्द लिखे जाने लगें, असामान्य गतिविधियां नजर आएं तो समझिए कि आपका अकाउंट हैक हो चुका है.

2. ऐसी स्थिति में ऐसे संदेश या ट्वीट अपलोड होने लगते हैं, जो आपने भेजे ही नहीं. एक अन्य संकेत यह है कि यह अपने आप ही लोगों को फालो.अनफालो या ब्लॉक करने लगता है.

3. यदि आपको यह पता नहीं पड़ा है कि आपका अकाउंट हैक हो गया है और एकाएक लोगों की रिएक्शन बढ़ गई है तो अपने अकाउंट की हिस्ट्री जांचें.

4. यदि आप लॉगइन नहीं कर पा रहे हैं, पासवर्ड नहीं बदल पा रहे हैं, तो यह भी संकेत है कि आपका अकाउंट हैक हो गया है.

ऐसा हो तो क्या करें?

1. यदि हैकर आपके अकाउंट के पासवर्ड, यूजरनेम, कॉन्टेक्ट ई.मेल आदि बदल देता है, तो ट्विटर आपके मेल पर इससे संबंधित जानकारी भेजता है.

2. यह आपके पासवर्ड को रीसेट भी कर देता है और आपको नोटिफिकेशन भेजता है.

3. हैकर ने जो ट्वीट किए हैं, उन्हें डिलीट कर दें. सभी थर्ड पार्टी एप ब्लॉक कर दें.

4. यदि संभव हो तो तत्काल अपना ट्विटर अकाउंट पासवर्ड बदलें.

5. यदि आप पासवर्ड नहीं बदल पा रहे हैं, तो ट्विटर सपोर्ट पर जाएं और पासवर्ड रीसेट रिक्वेस्ट के लिए आग्रह करें. यह आपके ई.मेल पर भेजी जाएगी.

ऐसे बचें

1. स्ट्रांग पासवर्ड रखें. इसे किसी पर जाहिर न करें.

2. एक ही पासवर्ड का कई जगह इस्तेमाल न करें. यदि ऐसा है तो समझ लीजिए कि आप हैकर को न्यौता दे रहे हैं.

3. यदि आप किसी एप में ट्विटर अकाउंट का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो भी अकाउंट हैक हो सकता है. ऐसे में वे सभी पासवर्ड अलग.अलग रखें.

इनके अकाउंट हो चुके हैक : कई बड़े सेलिब्रिटिजी के अकाउंट्स को हैक किया गया है. इनमें अमिताभ बच्चन, रजनीकांत, रितिक रोशन, शाहिद कपूर, जस्टिन बीबर, कायली जेनर, ट्रेलर स्विफ्ट, मार्क जुकरबर्ग, लाना डेल रे, डोनाल्ड ट्रंप, ब्रिटनी स्पीयर्स, सेलेना गोम्स, चार्ली शीन, एक्स फैक्टर आदि शामिल हैं.

एक्टिंग किसी अनुभव को महसूस करना है : मधु शाह

मणिरत्नम की फिल्म ‘रोजा’ से चर्चा में आने वाली अभिनेत्री मधु शाह ने तमिल, तेलगू, मलयालम, कन्नड़ा और हिंदी फिल्मों में काम किया है. उसकी हिंदी फिल्म ‘फूल और कांटे’ भी हिट रही, जिसमें उन्होंने अभिनेता अजय देवगन के साथ अभिनय किया था. जिसे दर्शकों ने काफी पसंद भी किया. फिल्मी माहौल में बड़ी हुई मधु तमिल परिवार की है. वे अभिनेत्री हेमामालिनी की भतीजी और जूही चावला की भाभी है. जब मधु कामयाबी की चोटी पर थीं, तो उन्होंने अपने प्रेमी आनंद शाह से शादी कर ली थी और दो बेटियां अमेया और केया की मां बनी.

उनका पारिवारिक जीवन सुखद होने के बावजूद, मधु का फिल्मों में काम करने की इच्छा बनी रही और उन्होंने दक्षिण की फिल्मों से काम की दुबारा शुरुआत की. अभी उन्हें स्टार प्लस के धारावाहिक ‘आरंभ’ में महारानी की भूमिका निभाने का मौका मिला है. वे बहुत खुश हैं, इस मौके पर उन्होंने हमसे अपने जीवन के कई पहलुओं पर बातचीत की. पेश है इस खास बातचीत के कुछ अंश.

प्र. टीवी की ओर आना कैसे हुआ? किस बात से आप प्रभावित हुई?

मुझे इसके निर्देशक गोल्डी बहल ने कहा कि वीकेंड शो है, इसके काम के लिए महीने में 7 दिन ही लगेंगे. इस शो की कहानी ने मुझे प्रेरित किया. इसमें मैं महारानी की भूमिका निभा रही हूं, जिसके कई शेड्स है. इसके अलावा ये समय मेरे लिए खास है, क्योंकि इससे पहले भी कई ऑफर आये, पर मैं महीने में 20 दिन काम नहीं कर सकती थी, क्योंकि मेरा परिवार है. इसलिए मुझे ये सही लगा. इस शो की शूटिंग फिल्म की तरह बड़े अंदाज में हो रही है, इसलिए ज्यादा सोचना नहीं पड़ा.

वैसे तो आज टीवी की ऑडियंस करोड़ों में है, इससे मैं हर घर में पहुंच सकती हूं. असल में मैंने काफी सालों से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को छोड़ा हुआ है और मैं दक्षिण में कार्यरत हूं. अब इसकी वजह ये नहीं कि मैं काम करना नहीं चाहती. मुझे वैसा काम नहीं मिला जिसकी मुझे चाहत है,कई अच्छे डिरेक्टर ने मुझे काम के लिए बुलाया, लेकिन वे मेरा ऑडिशन लेना चाहते हैं, जो मुझे पसंद नहीं. यहां मुझे कुछ ऐसा नहीं करना पड़ा. शायद उन्हें मुझपर विश्वास है कि मैं इस चरित्र को अच्छी तरह से कर सकती हूं. ऐसे में इस शो के द्वारा मेरी पहचान फिर से बनेगी. बस इसी बात से मैं उत्साहित हुई और इस शो से जुड़ गयी.

प्र. इस चरित्र में तैयार होने के लिए आपको कितना घंटा देना पड़ता है?

इस गेटअप के लिए मुझे दो घंटे देने पड़ते हैं. पूरी क्रिएटिव टीम के अनुसार तैयार होना पड़ता है. इसमें ‘स्किन टोन’ से लेकर सब कुछ कहानी के अनुसार करना पड़ता है. बॉडी पेंटिंग करनी पड़ती है. सबसे अधिक इसकी चुनौती यही है कि इसे पहनकर मुझे सेट पर 10 से 12 घंटे बैठना पड़ता है. थोड़ी देर बाद एक-एक चीज चुभने लग जाती है. इसके बाद अगर दर्शक मेरे काम को पसंद कर लेंगे, तो उससे बड़ी खुशी मेरे लिए कुछ भी नहीं है.

प्र. इतने सालों तक इंडस्ट्री से दूर रहकर आपने अपने प्रसिद्धी, पॉपुलैरिटी और स्टारडम को कितना ‘मिस’ किया है?

मुझे इस बात से खुशी है कि दर्शकों ने मुझे भुलाया नहीं है और मुझे आज भी वे देखना चाहते है. यही वजह है कि मुझे टीवी पर काम मिला, लेकिन यहां ये कहना जरुरी है कि जब मैंने काम छोड़ा और शादी की, तो शुरू-शुरू में ‘मिस’ नहीं किया, क्योंकि मैं 5 भाषाओं में काम करते-करते थक चुकी थी. इसके अलावा फिल्मों की क्रिएटिविटी से भी मैं असहज होने लगी थी. दक्षिण में कुछ अच्छी फिल्में थीं, लेकिन हिंदी में एक ही तरह की फिल्में बनने लगी थी.

बड़े स्टार के साथ केवल रोमांटिक दृश्य करने का ही मौका मिल रहा था. मैं दक्षिण से लेकर उत्तर तक काम कर परेशान हो चुकी थी. ऐसे में मुझे आनंद मिला, प्यार हुआ और शादी की. बच्चे हुए और करीब 5 साल बाद ही मैं इंडस्ट्री को ‘मिस’ करने लगी. बच्चे उस समय छोटे थे ,मैं उन्हें छोड़ नहीं पाई, लेकिन अब पिछले 4 सालों से दक्षिण में, मैं काम कर रही हूं. ये सही है कि प्रसिद्धी, पॉपुलैरिटी, स्टारडम एक ऐसी चीज है, जो एक बार मिल जाने पर, फिर उसे भुलाना आसान नहीं होता है. इसलिए कई बार इसे न पाने पर कलाकार मानसिक रूप से बीमार हो जाते है. मैं अपने पारिवारिक जीवन और फ्रेंड्स से बहुत खुश हूं, लेकिन स्टारडम फिर से अगर मिल जाए तो और भी अच्छा लगेगा.

प्र. क्या आपके बच्चों ने आपकी फिल्मों को देखा है?

नहीं, वे मेरी फिल्में देखना पसंद नहीं करते. अभिनेता मिठुन चक्रवर्ती के साथ एक फिल्म में मुझे मार दिया जाता है, जिसे देखकर मेरी छोटी बेटी दुखी हो गयी. बड़ी बेटी को भी मेरी रोमांटिक दृश्य कभी पसंद नहीं आते. उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं कि मैं किसी हीरो के साथ रोमांस करूं. एक ‘रेप सीन’ और ‘मर्डर’ को देखकर वे दोनों परेशान हो गए थे . इसलिए मैं उन्हें इन सबसे दूर रखती हूं, लेकिन अब उन्हें मेरा काम पसंद है. वे इस धारावाहिक में मुझे नये सिरे से काम करते हुए देखेंगे.

प्र. टीवी और फिल्मों में क्या अंतर पाती है?

मुझे काफी लोगों ने टीवी पर काम न करने की चेतावनी दी थी, क्योंकि टीवी पर दुगुनी रफ्तार से जल्दी-जल्दी काम होता है. इसलिए भी मैंने टीवी से अपने आपको दूर रखा, लेकिन निर्माता गोल्डी बहल के सेट पर फिल्मों के जैसे माहौल का एहसास हो रहा है. मैं अपने हिसाब से ही काम कर रही हूं. आज के टीवी कलाकार अभिनय के हिसाब से अच्छा काम करते हैं. अब सारी बातें इंडस्ट्री में बदल गयी है. असल में एक्टिंग एक अनुभव को महसूस करने जैसा है. अब मैं टीवी भी देखती हूं.

प्र. आज मीडिया हर छोटी-बड़ी चीज को दिखाती है,जिसे लेकर कुछ लोगों को नाराजगी भी रहती है, क्या पहले या आज आपको ऐसा कभी अनुभव हुआ है?

मीडिया हर किसी को प्रसिद्ध बनाकर रखता है. आज कुछ न करते हुए भी लोग मुझे जानते है, क्योंकि फोटो छपते रहते हैं. मैं इन सभी के प्रति आभार व्यक्त करती हूं. नकारात्मक बात ये है कि वे आलोचना भी करते हैं. इसका कुछ नहीं किया जा सकता. 90 के दशक में मेरी फिल्म ‘फूल और कांटे’ जितनी चर्चा में आई थी, अगर आज की मीडिया होती तो मुझे 10 गुना अधिक पॉपुलैरिटी मिलती. उस समय लोग आपको केवल परफोर्मेंस के आधार पर जानते थे. मैं भी उसे ही अधिक मानती थी, लेकिन आज मीडिया का किसी को भी आगे करने में बहुत बड़ी हाथ होता है.

प्र. क्या आपको जीवन में किसी प्रकार का मलाल रह गया है?

अच्छी फिल्में करने की इच्छा है. आज हर कलाकार को अभिनय करने का मौका है. टीवी, वेब सीरीज, शोर्ट फिल्म्स आदि कई आप्शन हैं, जहां वे अपने मन मुताबिक काम कर सकती हैं. मुझे खुशी है कि मैं इस समय फिर से काम कर रही हूं.

प्र. इंडस्ट्री में दोस्ती बड़ी क्षणिक होती है, क्या आप इस बात को मानती हैं? आप की दोस्ती शुरू से लेकर अब तक किसी से रही है?

ये सही है, क्योंकि यहां सब मतलब के लिए दोस्त बनते हैं. इसमें मैं अपने आप को भी शामिल करती हूं, लेकिन दक्षिण में मेरे कई अच्छे दोस्त है. रमैया कृष्णन, खुशबू, डांस मास्टर वृंदा आदि मेरे बहुत पक्के दोस्त हैं.

प्र. आपकी सफलता में किसका हाथ मानती हैं?

सफल होने के लिए मेहनत तो है ही, पर मैं ‘लक’ को नहीं मानती. सबसे अधिक महत्वपूर्ण मैं शालीनता को समझती हूं. कई बार खराब मेकअप भी अच्छा लगने लगता है. मेरा परिवार मेरे रास्ते में कभी भी नहीं आया. मैंने जो चाहा, हमेशा मुझे करने दिया. शादी के बाद भी मेरी सास और मेरे पति का हमेशा मुझे सहयोग रहा है. वे भी चाहते हैं कि मैं अपने पसंद का काम करूं.

धर्म के नाम पर पागलपन

हिंदू-मुसलिम विवादों को आज लगातार हिंसक बनाया जा रहा है. हिंदुत्व के नाम पर कहीं भी, बिना किसी पूर्वयोजना के किसी मुसलिम की हत्या की जा सकती है. कट्टर हिंदू दलों ने सोशल मीडिया के माध्यम से हिंदुओं को घरघर संदेश पहुंचा दिया है कि हिंदू धर्म के नाम पर जो चाहे कर लो, कोई कुछ नहीं कहेगा.

भारत के मुसलिम चाहे किसी विदेशी धर्म के अनुयायी हों, वे हैं भारतीय और बहुमत की आस्था से चाहे उन का मतभेद हो, उन्हें इस देश में रहने का पूरा और बराबर का अधिकार वैसा ही है जैसे 3 करोड़ भारतीय मूल के लोगों के दूसरे देशों में रहने का है. धर्म, रंग, जाति, भाषा के नाम पर एक पूरे समुदाय को कठघरे में खड़ा करने का जो प्रयास किया जा रहा है वह कट्टर हिंदुओं को चाहे सुकून दे पर यह उन के खुद के लिए भी खतरनाक है.

हरियाणा के बल्लभगढ़ में 23 जून को ट्रेन के भीतर सीट को ले कर हुए झगड़े को गोमांस ले जाने के आरोप में बदल कर भीड़ द्वारा 19 वर्षीय युवक की हत्या करना बताता है कि हिंदू कट्टरवादी लीडरों का अब अपने समर्थकों पर नियंत्रण नहीं रह गया है. वे धर्म के नाम पर कहीं भी उत्पात मचा सकते हैं.

धर्मभीरुओं की भीड़ मुसलिमों के अल्पमत में होने के कारण उन्हें कभी भी मार सकती है. लेकिन, कट्टरों की यह आदत बाद में अपनों को भी सीधा करने में शुरू हो सकती है. 1960 व 1970 के दशकों में कम्युनिस्टों ने श्रमिक संगठन बना कर मजदूरों को अधिकारों के नाम पर दंगा करने का अवसर दे दिया और नतीजा यह हुआ कि देश के अधिकांश बड़े उद्योग बेमौत मारे गए. आज देश की बदहाली (वित्त मंत्री द्वारा छाती ठोकने के बावजूद) उन जैसे दिनों की तरह है जब लाल सलाम के नाम पर किसी भी उद्योगपति, व्यापारी को परेशान किया जा सकता था.

नतीजा क्या है, औद्योगिक क्षेत्र आज कब्रिस्तान लग रहे हैं और कारखानों की जगह अब मकान बनाने पड़ रहे हैं. कारखाने चीनी ले गए. यही, हिंदू कट्टरवादी कर रहे हैं. आज वे मुसलमानों के खिलाफ भीड़ का इस्तेमाल कर रहे हैं, कल वे अपनों के खिलाफ करेंगे. दलितों के खिलाफ तो वे शुरू हो ही गए हैं. फिर, किसान लपेटे में आएंगे क्योंकि वे महामहंतों को चुनौती दे रहे हैं. और फिर महामहंत खुद निशाना बनेंगे.

हर देश में ऐसा हो चुका है. हमारा इतिहास तो इन घटनाओं से भरा पड़ा है. रामायण और महाभारत के वे आदर्श पात्रों जिन के नाम पर खूब हल्ला मचाया जाता है, के जीवन के अंत दुखद ही थे. उन के वंश ही समाप्त हो गए. ये आदर्श एक पीढ़ी में ही चमके थे. उन की कहानियां बचीं, उन के आने वालों की नहीं.

जो बीज आज बोए जा रहे हैं, वे विषैले प्रदूषण के जनक हैं और जल्द ही देश को इन का खमियाजा भुगतना पड़ सकता है. आज सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, राजस्थान, हरियाणा पर जो खीखी कर रहे हैं वे कल के भयंकर तूफान को आमंत्रित कर रहे हैं. नोटबंदी और जीएसटी का प्रहार सहने वाली जनता की क्षमता इस अत्याचार को भी उठाने की नहीं है. दार्जिलिंग व कश्मीर के मामलों को हलके में न लें, ये बडे़ तूफानों के आसार हैं.       

   

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