Download App

राष्ट्रपति के गांव में बनेगा स्मार्ट स्कूल

देश के 14वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पैत्रिक गांव परौंख के परिषदीय स्कूलों में अब स्मार्ट क्लास खुलेंगे. स्मार्ट क्लास में लगने वाले कंम्यूटर को चलाने के लिये सोलर पैनल लगाए जायेंगे. उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात में स्थित परौंख गांव में बचपन के दिनों में रामनाथ कोविंद ने पेड़ के नीचे अपनी पढाई शुरू की थी. देश के राष्ट्रपति बनते ही गांव के स्कूलों के कायाकल्प की योजना तैयार हो गई है.

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने बेसिक शिक्षाधिकारी को फोन कर इस दिशा में सर्वे कर योजना तैयार करने को कहा. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का पैत्रिक गांव परौंख अब चर्चा में है. ऐसे में उस गांव की दशा को सुधारने की पहल सरकार द्वारा शुरू की गई है. मानव संसाधन विकास मंत्रालय के मौखिक आदेश के बाद से ही जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी सक्रिय हो गये हैं. इसका एक प्रोजेक्ट तैयार कर लिया गया है.

गांव के परिषदीय स्कूल में 100 बच्चे और 2 प्राइमरी स्कूल में 225 बच्चों के नाम लिखे हैं. अभी तक यह बच्चे भले ही सामान्य सरकारी स्कूलों की तरह पढ रहे हों पर अब यह विशेष सुविधा वाले स्कूल हो जायेंगे. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का पैत्रिक गांव परौंख अब चर्चा में है. ऐसे में यहां स्कूलों में सुधार के जरीये गांव के बच्चों को सुविधायें मिल सकती है. इससे बेहतर कुछ हो नहीं सकता. जरूरत इस बात की है कि हर गांव के स्कूल को इस तरह बनाने का काम शुरू हो जिससे गांव के बच्चों को भी तरक्की करने का मौका मिले.

5 साल के बच्चे ने संभाली दिल्ली क्रिकेट टीम की कमान

क्रिकेट का खेल हमेशा से ही चमत्कारों का साक्षी बनता रहा है. इस खेल में कब क्या हो जाए कहना मुश्किल है. क्रिकेट में चमत्कारों के कई किस्से आपने सुने होंगे लेकिन आज जो हम आपको बताने और दिखाने जा रहे हैं उसे देख आपकी आंखें फटी की फटी रह जाएगी.  

क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले स्टार क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने 15 साल की उम्र में अपने क्रिकेट करियर की शुरुआत की थी. लेकिन क्या आप यकीन करेंगे की 5 साल की उम्र में एक बच्चा अंडर 14 की टीम में है और वह दिल्ली की ओर से खेल रहा है. जी हां, 5 साल का लड़का रुद्र प्रताप बड़े लड़कों के साथ क्रिकेट खेल रहा है और वह किसी चमत्कार से कम नहीं है.

साल 2016 में 5 साल के रुद्र अंडर-14 दिल्ली टीम की ओर से खेल रहे थें, जो अक्सर देखने को नहीं मिलता. जिस तरह का विश्वास रुद्र में देखने को मिल रहा है वह गजब है. वह डेथ ओवरों में बल्लेबाजी के लिए आए और उन्होंने अपने विश्वास और क्षमता से गेंदबाजों का सामना कर, उन खिलाड़ियों के सामने असीम प्रतिभा दिखाई जो उनकी उम्र से लगभग ढाई गुना हैं.

रुद्र बल्लेबाजी के लिए किसी मास्टर की तरह अपना गार्ड लेते हैं और वह अपने क्रिकेटिंग गियर से कई चुनौतियों का सामना सफलतापूर्वक करते हैं. जैसा कि उनके साइज का क्रिकेट सामान बाजार में उपलब्ध नहीं है तो क्रिकेटिंग मास्टर ने पहले तो टोपी पहनी फिर हैलमेट लगाया ताकि वह हैलमेट को अच्छी तरह से एडजस्ट कर सके. उनके साइज के थाई गार्ड शायद ही बाजार में उपलब्ध होंगे इसलिए उन्होंने कमाचलाऊ रूप में चेस्ट गार्ड का इस्तेमाल किया.

रुद्र इस मौके पर बहुत विश्वास में नजर आए और कुछ टेक्सटबुक स्ट्रोक खेले. उन्होंने इस दौरान कोई खराब सिंगल नहीं दौड़ा और अपने विकेट की कीमत समझी. वह भविष्य के हिसाब से बढ़िया नजर आते हैं और जाहिर तौर उनके पास वो है जिससे वह भविष्य में क्रिकेट के खेल में नाम कमा सकते हैं.

यदि इन सब बातों पर आपको यकीन नहीं आता तो देख लिजिए ये वीडियो.

तो इसलिए ऑनलाइन खरीदें इंश्‍योरेंस पॉलिसी

अगर आप ऑनलाइन इंश्‍योरेंस पॉलिसी खरीदते हैं तो आपको किसी एजेंट से पॉलिसी खरीदने की जरुरत नहीं होती है. जीवन बीमा कंपनियों की इंश्‍योरेंस पॉलिसी ऑनलाइन उपलब्‍ध रहते हैं इसलिए ऑनलाइन खरीददारी करना ज्‍यादा फायदेमंद रहता है. ऑनलाइन कस्‍टमर एक क्लिक में किसी भी समय दुनिया के किसी भी जगह से पॉलिसी खरीद सकता है. लेकिन खरीदने से पहले आपको प्रोडक्‍ट के बारे में अच्‍छे से समझ लेना चाहिए. साथ ही उसके बारे में पूरी रिसर्च भी कर लेनी चाहिए.

बचते हैं खर्चे

जब आप इंश्‍योरेंस पॉलिसी ऑनलाइन खरीदते हैं तो एजेंट को दिए जाने वाला कमीशन और डिस्‍ट्रीब्‍यूशन खर्च बचता है. इसी बचत का लाभ कंपनियां ऑनलाइन ग्राहकों को देती हैं. यह पूरी प्रोसेस वर्चुअल और पेपरलेस होती है जिस वजह से यह सस्‍ती हो जाती है. साथ ही ऑनलाइन पॉलिसी लेने से सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि ग्राहकों को किसी पर भी निर्भर रहने की जरुरत नहीं होती है.

ऐसे खरीदें ऑनलाइन पॉलिसी

ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने के लिए निश्‍चत कंपनी की वेबसाइट पर जाएं. वहां पर जाकर सभी जरुरी जानकारी भरने के बाद डॉक्‍यूमेंट्स अपलोड कर दें. भुगतान करने के लिए नेट बैंकिंग का इस्‍तेमाल करते हुए डेबिट या क्रेडिट कार्ड का उपयोग करें.

ऑनलाइन भी कर सकते हैं तुलना

अगर आप पॉलिसी की प्रीवियस परफॉमेंस देखना चाहते हैं और दूसरी पॉलिसी के साथ तुलना करना चाहते हैं तो आप वो भी कर सकते हैं. ऑनलाइन आपको यह सुविधा प्रदान की जाती है. इस सुविधा का लाभ आपको जरुर उठाना चाहिए.

चेक करें क्‍लेम रेशियो

पॉलिसी की तुलना करने के बाद आपको जिन कंपनियों की पॉलिसी सस्‍ती लगें उनका क्‍लेम रशियो चेक करें. क्‍लेम रेशियो चेक करने का मतलब है कि कंपनी 100 क्‍लेम करने वालों में से कितने लोगों को बीमा के पैसों का भुगतान करती है. इसके बाद वेबसाइट के रिव्‍यूज और कमेंट्स सेक्‍शन पर जाकर ग्राहकों का रिव्‍यू पढ़ें. इससे आपको इंश्‍योरेंस कंपनी की सर्विसेज के बारे में भी पता चल जाएगा.

लाइव चैट का ले सकते हैं सहारा

ऑनलाइन पॉलिसी खरीदने का एक और फायदा यह है कि आप इंश्‍यारेंस कंपनी के उत्‍तरदायी कस्‍टमर केयर सर्विस से चैट के द्वारा तुरंत ही किसी भी प्रकार की जानकारी प्राप्‍त कर सकते हैं. साथ ही साइट पर दिए गए टोल फ्री नंबर की मदद से फोन पर बात भी कर सकते हैं.

जब श्रीलंका ने भारत के खिलाफ ठोक दिए 952 रन

भारतीय क्रिकेट टीम श्रीलंका दौरे पर है. दोनों देशों के बीच पहला टेस्ट मैच 26 जुलाई को खेला जाएगा. भारत ने 1985 से अब तक श्रीलंका में 21 टेस्ट मैच खेले हैं. इनमें से भारत को केवल छह टेस्ट मैचों में जीत हासिल हुई है. पिछले श्रीलंका दौरे पर भारत ने 2-1 से सीरीज जीती थी. यह भारत को 22 साल बाद मिली विजय थी.

मौजूदा वक्त में श्रीलंका की टीम भारतीय टीम के मुकाबले कुछ कमजोर नजर आ रही है लेकिन एक वक्त था जब श्रीलंकाई टीम भारत पर भारी पर गई थी.

1997 में भारत और श्रीलंका के बीच टेस्ट सीरीज आयोजित किया गया. इस सीरीज के पहले टेस्ट मैच को आज भी याद किया जाता है. यह मैच इसलिए यादगार है क्योंकि इस मैच में श्रीलंका ने क्रिकेट इतिहास का सर्वाधिक स्कोर 952 पर 6 विकेट बनाया था. सनथ जयसूर्या ने 340 और महानामा ने 225 रन बनाए. दोनों के बीच रिकॉर्ड 576 रन की साझेदारी हुई.

जवाब में नवजोत सिंह सिद्धू, सचिन तेंदुलकर और अजरुद्दीन ने शतक बनाया. परिणामस्वरुप ये मैच ड्रॉ रहा. इस टेस्ट मैच में पांच दिनों में 1489 रन बने और केवल 14 विकेट गिरीं.

आज भारतीय टीम में बल्लेबाजों की कोई कमी नहीं है. आइए जानते हैं भारत के मौजूदा टीम के बारे में. आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि मौजूदा भारतीय टेस्ट टीम की तरफ से श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट मैचों में जिस खिलाड़ी ने सबसे ज्यादा रन बनाए हैं उनका आंकड़ा 250 तक का भी नहीं है. 

मौजूदा टेस्ट टीम में विराट के नाम है सबसे ज्यादा रन

भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली इस वक्त ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट मैचों में सबसे ज्यादा रन बनाए हैं. मौजूदा भारतीय टीम में अन्य किसी भी खिलाड़ी ने विराट से ज्यादा रन श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में नहीं बनाए हैं. विराट ने श्रीलंका के खिलाफ अब तक कुल 3 टेस्ट मैचों में 38.83 की औसत के कुल 233 रन बनाए हैं. श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में विराट का सर्वाधिक स्कोर 103 रन रहा है. उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट में एक शतक और एक अर्दशतक लगाया है.

सचिन के नाम हैं सबसे ज्यादा रन का रिकॉर्ड

श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट मैचों में भारत की तरफ से सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर हैं. सचिन ने श्रीलंका के खिलाफ कुल 25 टेस्ट मैच खेले जिसमें उन्होंने 60.45 की औसत से कुल 1995 रन बनाए. उन्होंने श्रीलंका के खिलाफ 9 शतक और 6 अर्धशतक लगाए हैं. इस टीम के खिलाफ टेस्ट में उनका सर्वाधिक स्कोर 203 रहा है. इस मामले में राहुल द्रविड़ दूसरे नंबर पर हैं जिन्होंने 20 टेस्ट मैचों में 1508 रन बनाए हैं. तीसरे नंबर पर सहवाग है जिनके नाम 11 टेस्ट मैचों में 1239 रन हैं.

क्या है शौचालयों के पीछे फिल्मकारों की दीवानगी का राज?

भेड़चाल के लिए मशहूर बौलीवुड में फिल्मकार नये-नये विषयों पर रोचक व मनोरंजक फिल्में बनाने की कोशिश करते रहते हैं. इसी बनिस्बत बॉलीवुड एक ही विषय पर फिल्में बनाने के लिए मानो हमेशा तत्पर रहता है. परिणामतः इन सभी की फिल्में मात खाती रहती हैं. इसके बावजूद बौलीवुड का कोई भी शख्स सबक लेने को तैयार नहीं है.

अतीत में एक ही समय में शहीद भगतसिंह पर एक साथ चार चार फिल्में बनी थीं, जिनमें दिग्गज कलाकारों ने अभिनय किया था और इन सभी फिल्मों को जबरदस्त नुकसान हुआ था. लेकिन सभी देख रहे हैं, ये सिलसिला आज तक थमा नहीं है. आज जबकि बौलीवुड को हौलीवुड से जोरदार टक्कर मिल रही है, तब भी बौलीवुड के सर्जक सुधरने को तैयार नहीं है. आज भी बौलीवुड के फिल्मकार भेड़चाल के शिकार नजर आते हैं.

यह कटु सत्य है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान और शौचालय बनाने के आव्हान को आधार बनाकर बौलीवुड में कई फिल्मों का निर्माण किया जा रहा है. फिलहाल ‘टॉयलेट’ यानि कि शौचालय को केंद्र में रखकर बनी एक गुजराती व तीन हिंदी भाषा की फिल्मों की जो जानकारी उपलब्ध है, उसके अनुसार ये चारों फिल्में प्रेम कहानी के साथ साथ व्यंगात्मक हास्य फिल्में हैं.

इन चार फिल्मों में से गुजराती भाषा की कृष्णदेव याज्ञनिक निर्देशित व निर्मित फिल्म ‘‘करसन दास पे एंड यूज’’ 19 मई 2017 को गुजरात में प्रदर्शित होकर जबरदस्त सफलता बटोर चुकी है, जबकि इसी विषय पर अगस्त माह में एक सप्ताह के अंतराल से और दो फिल्में प्रदर्शित होने जा रही हैं. इनमें से एक है ‘‘मि.कबाड़ी’’ और दूसरी है ‘टॉयलेट एक प्रेम कथा’.

4 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली और फिल्म स्व.ओम पुरी के अभिनय से सजी ये फिल्म, उनकी अंतिम फिल्म है. हम आपको बता दें कि व्यंगप्रधान हास्य फिल्म ‘‘मि. कबाड़ी’’ की लेखक व निर्देशक स्व. ओम पुरी की पहली पत्नी सीमा कपूर हैं. इसके अलावा अनूप जलोटा, राकेश गुप्ता, दिनेश गुप्ता व ओम छंगाणी फिल्म के निर्माता हैं.

यूं तो फिल्म ‘मि.कबाड़ी’ की कहानी का केंद्र, एक गरीब इंसान के अमीर बन जाने के बाद की त्रासदी की कथा पर आधारित है. पर सूत्रों पर यकीन किया जाए तो फिल्म की कहानी जैसे ही आगे बढ़ती है, वैसे ही ‘शौचालय’ केंद्र में आ जाता है. फिल्म के नायक की शादी बार-बार महज इसलिए ही टूटती है कि वो 150 शौचालय चलाता है. सूत्रों के अनुसार फिल्म में शौचालय की जरुरत व स्वच्छता के मुद्दे को व्यंग के साथ पेश किया गया है. इस फिल्म में ओम पुरी के अलावा अन्नू कपूर, सारिका, ब्रजेंद्र काला, विनय पाठक, मीनल कपूर, राजवी सिंह, कषिष वोरा, उल्का गुप्ता की अहम भूमिकाएं हैं.

तो वहीं 11 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली निर्देशक श्री नारायण सिंह की व्यंगात्मक हास्य व प्रेम कहानी युक्त फिल्म ‘टॉयलेट : एक प्रेम कथा’ में अक्षय कुमार, भूमि पेडणेकर, अनुपम खेर व सना खान की अहम भूमिकाएं हैं. इस फिल्म में भी देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान के अलावा शौचालय निर्माण की कहानी को पेश किया गया है.

इतना ही नहीं एक सामाजिक संस्था के साथ मिलकर करीबन हजार षौचालयों का निर्माण करवा चुके और खुद को ‘टॉयलेट मैन’ कहलवाने की इच्छा रखने वाले फिल्मकार राकेश ओमप्रकाश मेहरा भी इसी विषय पर एक फिल्म ‘‘मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर’’ का निर्माण कर रहे हैं.

फिलहाल फिल्म ‘मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर’ की शूटिंग जारी है. हां! ‘शौचालय’ को कहानी के केंद्र में रखकर बनी इन चारों फिल्मों में से राकेश ओमप्रकाश मेहरा की फिल्म में सबसे बड़ा फर्क यही है कि फिल्म ‘मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर’ का नायक एक गरीब बस्ती का बालक है.

वैसे तो अब तक का इतिहास गवाह है कि एक ही विषय पर एक साथ जब कई फिल्में आती हैं, तो किसी को भी सफलता नहीं मिलती है. पर अब देखना है कि ‘शौचालय’ के इर्द-गिर्द बुनी गयी कहानी वाली इन चार फिल्मों से किस फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर क्या हश्र होता है. वैसे गुजराती भाषा की फिल्म ‘‘करसनदास पे एंड यूज’’ तो पहले  ही सफलता के झंडे गाड़ चुकी है. अब हर किसी की निगाहें 4 अगस्त व 11 अगस्त को प्रदर्शित होने वाली फिल्मों ‘मि. कबाड़ी’ और ‘टॉयलेट : एक प्रेम कथा’ पर टिकी हुई हैं.

कभी नहीं लगा की अर्जुन एक्टर बनेगा : अनिल कपूर

बॉलीवुड और हॉलीवुड में नाम कमा चुके अभिनेता अनिल कपूर आज भी हंसमुख और फिट हैं. उनकी इस फिटनेस का राज उनकी संतुष्टि है, जो उन्हें फिल्मों और पारिवारिक जीवन में मिला. वे अपने पुराने दिनों को आज भी याद करते हैं, जब फिल्मों का दौर, काम करने की तकनीक, लोगों की सोच सब अलग थी. तब एक फिल्म के दौरान पूरी टीम एक परिवार होती थी. जहां खाना-पीना, मौज-मस्ती सब काम के साथ होता रहता था, लेकिन वे इस दौर को भी अच्छा मानते है जहां उन्हें आज के टैलेंटेड कलाकारों, निर्देशकों के साथ काम करने का मौका मिल रहा है. इन दिनों उनकी फिल्म ‘मुबारका’ रिलीज पर है, जो पारिवारिक फिल्म है. पेश है कुछ अंश.

आपकी फिटनेस का राज क्या है?

मैं सब खाता हूं, लेकिन अधिक पेट भरकर नहीं खाता. साथ में रेगुलर वर्कआउट करता हूं और 8 घंटे की नींद पूरी करता हूं. खुश रहता हूं, तनाव नहीं लेता. कभी भी कोई इंज्यूरी होने पर पूरा आराम करता हूं. इससे जल्दी ठीक हो जाता हूं.

ये फिल्म आपकी अब तक की फिल्मों से कितनी अलग है?

ये एक पारिवारिक मनोरंजक फिल्म है, जिसमें रोमांस, कॉमेडी, एक्शन सब है. यह एक सच्ची कहानी है जिसे मनोरंजक तरीके से पेश करने की कोशिश की गयी है. इसमें मैंने पहली बार रियल भतीजे अर्जुन कपूर के साथ काम किया है और पहली बार मैं सरदार की भूमिका में हूं. इसमें मेरे आसपास काम करने वाले लोग सारे नए हैं, इसलिए नया सा महसूस कर रहा हूं.

पहले और अब की फिल्मों में अंतर क्या पाते हैं? आपकी सोच कितनी बदली है? आप अब किस तरह की फिल्मों को चुनते हैं?

सोच हमेशा बदलती रहती है. जो सोच और पसंद 35 साल पहले थी, अब वह नहीं है. इसलिये मेरे सोच विचार को भी समय के साथ-साथ बदलना पड़ा है. कभी यह बदलाव सही होता है, कभी गलत. कितना भी अनुभव होने के बाद भी कई बार कुछ बातें गलत हो जाती है. ये ‘शो बिजनेस’ में होता रहता है. इसे स्वीकारना भी जरुरी होता है. बहुत सारी चीजें बदली है. पहले कभी सोचा नहीं था कि तकनीक इतनी आगे बढ़ेगी. फिल्मों में भी आजकल बहुत परिवर्तन आया है. तकनीक, स्टोरी टेलिंग, कल्चर, आदि सब बदल चुकी है.

आपने अर्जुन कपूर के साथ अभिनय किया है, क्या बचपन में लगा था कि अर्जुन कपूर अभिनय करेंगे?

मुझे तो कभी लगा ही नहीं था कि वह एक्टर बनेगा, क्योंकि करियर की शुरुआत में वह असिस्टेंट डायरेक्टर बना था और काम के प्रति बहुत ‘पैशनेट’ था. तब लगा कि कैमरे के पीछे जायेगा, लेकिन अचानक उसका फिल्मों में अभिनय करना चौकाने वाला था. उसके बाद तो कई फिल्में उसने कर डाली.

आपने इतनी लम्बी जर्नी फिल्मों में की है, क्या कभी पुराने दिनों को याद करते है?

अच्छे दिन याद आते हैं. जो समस्या तब आई मैंने तभी ‘सॉल्व’ किया. माता-पिता की मदद भी ली. मैं आगे आने वाले समय पर अधिक फोकस्ड रहता हूं. पीछे मुड़कर कम देखता हूं. बहुत सारी यादे हैं, शूटिंग करना, साथ में ट्रेवल करना, मौज-मस्ती करना सब यादगार है. इसके अलावा जब मैं पहली बार पिता बना, पहली बार गाड़ी खरीदी, पहली बार बड़ा घर बना, पहली बार जब विदेश गया आदि बहुत सी यादे हैं. जिसे मैं अभी भी याद करता हूं.

आपको कभी कंट्रोवर्सी का सामना नहीं करना पड़ा, आपने इसे कैसे बनाये रखा?

जब लोग मुझे आकर कहते हैं कि मेरी पीठ पीछे सब मेरी तारीफ करते हैं तो बहुत अच्छा लगता है. उसमें मेरी पत्नी और परिवार का काफी योगदान है. मुझे खुशी किसमें है ये मैंने शुरू से समझ लिया था, वैसा ही मेरा व्यवहार सबके साथ था और उसी हिसाब से काम कर रहा हूं. साधारण रहना, इसमें एक खूबी है. जब आप हर वक्त खुश रहते हैं और आपका आत्मविश्वास बढ़ता रहता है. इसमें परिवार, दोस्त, खाना-पीना, रहन-सहन सब आ जाता है. जिसके हिसाब से आप आगे बढ़ते जाते हैं.

किसी फिल्म के सफल होने में निर्देशक का कितना हाथ मानते हैं?

अच्छा निर्देशक एक साधारण कहानी को अच्छा बना सकता है जबकि एक खराब निर्देशक एक अच्छी स्क्रिप्ट को खराब बना सकता है. ये अंतर है.

बच्चों की सफलता को कैसे देखते हैं?

(हंसते हुए) अभी तो उन्होंने शुरुआत की है. आगे और अच्छा करने की जरुरत है. मेरे हिसाब से सफलता केवल हिट फिल्मों की सूची से नहीं गिनी जाती, बल्कि आप कैसे ह्यूमन बीइंग हैं, आपका स्वभाव कैसा है, आप अपने जीवन को कैसे आगे ले जा रहे हैं, आपकी सोच क्या है आदि सभी अगर सबको पसंद आये तभी आप सफल हैं, अन्यथा नहीं. मेरे साथ उनका अच्छा रिश्ता है और वे दोनों ही नॉर्मल बच्चे हैं. आगे बढ़ने के लिए मेहनत कर रहे है.

भारतीय वैज्ञानिकों ने की आकाशगंगाओं की खोज

अंतरिक्ष विज्ञानियों की एक टीम ने सुपरक्लस्टर सरस्वती नाम से आकाशगंगाओं के एक समूह की खोज की है. यह नजदीकी यूनिवर्स में मौजूद सबसे बड़े स्ट्रक्चर में से एक है.

पुणे स्थित इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च और दो अन्य भारतीय यूनिवर्सिटी के सदस्यों ने विशालकाय आकाशगंगा के मौजूद होने की बात कही है. यह खोज अमरीकन एस्टोनॉमिकल सोसायटी के प्रीमियर रिसर्च जर्नल, 'द एस्ट्रोफिज़िकल जर्नल' के ताजा अंक में प्रकाशित की जाएगी.

यह आकाशगंगा धरती से 400 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर है और क़रीब 10 अरब वर्ष से ज़्यादा पुरानी है. एक सुपरक्लस्टर में 40 से 43 क्लस्टर शामिल होते हैं, जिसके एक क्लस्टर में लगभग 1000 से 10,000 गैलेक्सी होती हैं. इनका आकार अरबों सूर्यों के बराबर होता है.

छह अंतरिक्ष विज्ञानियों की टीम द्वारा, ये एक आकाशगंगाओं की एक बड़ी चेन की खोज है, जो नजर आने वाले यूनिवर्स में सबसे बड़े स्ट्रक्चर हो सकते हैं. ऐसे विशालकाय ढांचों की मौजूदगी का पता चलने से हमें यूनिवर्स के बारे में नई बातों को जानने की दिशा में काफी मदद मिलेगी. ये आकाशगंगाएं इसी यूनिवर्स में तारों के चारों तरफ मौजूद हैं.

इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स के जॉयदीप बागची रिसर्च पेपर के मुख्य लेखक हैं, उनके साथी इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च के स्कॉलर शिशिर संख्यायन हैं. इन वैज्ञानिकों के अनुसार विशालकाय दीवार जैसी आकाशगंगाओं को देखकर सब लोग हैरान रह गए थे. इसके पहले कुछ ही बड़े सुपरक्लस्टर्स को देखा गया था लेकिन सरस्वती का आकार काफी बड़ा है.

इस रिसर्च से यह जानने में आसानी होगी कि कैसे अरबों सालों में यूनिवर्स में ढांचों में बदलाव हुए हैं और कैसे रहस्यमय डार्क एनर्जी ने नए ढांचों के बनने में बाधा डालनी शुरू कर दी.

लड़कियों में मीनमेख न निकालें

सुश्रुत अपने परिवार के साथ दिल्ली के राजौरी गार्डन में लड़की देखने गया. वह बड़े जोश में था और दोस्तों को भी बता कर आया था कि लड़की देखने जा रहा हूं. लड़की वालों के घर जब उस का पूरा परिवार पहुंचा तो उन्होंने आवभगत में कोई कसर नहीं छोड़ी. अच्छा खाना खिलाया. सभी रिश्तेदारों ने उन का खुले दिल से स्वागत किया.

अब आई लड़की दिखाने की बारी. सौम्य सी लड़की वंदना जब सामने बैठी तो सुश्रुत समेत उस के घर वाले इस तरह से सवाल दागने लगे मानो वंदना उन की कंपनी में इंटरव्यू देने आई हो.

कितनी उम्र है? अब तक कितने लड़के देख चुके हैं तुम्हें? कहां जौब करती हो औफिस में किसी से अफेयर तो नहीं है? बौस पुरुष है या महिला? हाइट कितनी है तुम्हारी?़ सैलरी कितनी मिलती है? इन्हैंड कितनी है और पेपर में कितनी है? तुम्हारी हाईट बिना हाई हील्स के कितनी है? तुम्हारा कलर ही इतना फेयर है या मेकअप किया है? कपड़े कैसे पहनती हो? वैस्टर्न का भी शौक है? इतनी ज्यादा उम्र हो गई है, अभी तक कोई लड़का नहीं मिला या कोई कमी थी?

ऐसे ही सवालों की झड़ी लगा दी उन्होंने, जिस से वंदना घबरा गई और बिना कुछ कहे रोते हुए अंदर चली गई. इस पर भी सुश्रुत का परिवार नहीं माना. लड़की हकली है क्या? कुछ बीमारी तो नहीं है? कुछ बोल क्यों नहीं रही थी? कुछ छिपा रही थी क्या? जैसे सवाल दागते रहे. जाहिर है लड़की और उन के परिवार वालों को उन की इन हरकतों से बहुत शर्मिंदा होना पड़ा.

लड़की राशन का सामान नहीं

यह ऐसी अकेली घटना नहीं है. लगभग हर घर में लड़की देखने आए लोग ऐसा ही व्यवहार करते हैं. बड़े बुजुर्ग ऐसा व्यवहार करते हैं तो समझ में आता है, लेकिन जब आज के युवा लड़की देखते वक्त इतनी मीनमेख निकालते हैं, तो लगता है उन्हें लड़की नहीं कोई स्मार्ट फीचर वाला फोन चाहिए, जिस का एकएक स्पैसिफिकेशन चैक करना जरूरी हो. अरे भाई, लड़की है कोई खानेपीने का सामान नहीं, जो इतना मोलभाव किया जाए.

हर इंसान में कुछ कमियां और कुछ खूबियां होती हैं. ऐसे में सिर्फ युवती में ही कमी निकालना गलत है. आज युवाओं को सोचना चाहिए कि युवतियां आत्मनिर्भर हो कर अपना जीवन जीना चाहती हैं.

इसलिए वे आत्मसम्मान से समझौता नहीं करतीं ऐसे में क्या कोई युवा चाहेगा कि उस की होने वाली वाइफ के साथ इस तरह की मीनमेख निकाल कर शादी हो. होना तो यह चाहिए कि युवक अपनी होने वाली पत्नी के साथ अलग से बात कर के अपनी पसंदनापसंद, हौबीज, आइडियोलौजी और जीवन में वरीयता देने वाली बातों पर चर्चा करे और जब मन मिल जाएं तब शादी के लिए हां करे.

शक्लसूरत और धनसंपदा न होने के कारण लड़की में कमी निकालना मूर्खता है. शरीर और पैसा तो बदलता रहता है, लेकिन इंसान के विचार नहीं बदलते. जरा सोचिए जो युवक शादी से पहले युवतियों में इतनी मीनमेख निकाल कर उन्हें शर्मिंदा करते हैं, अगर उन की बहन को देखने आए लड़के वाले भी ऐसी ही हरकत करें तो उन्हें कितना बुरा लगेगा? जाहिर है सब की भावना और आत्मसमान का आदर करना चाहिए.

अपने गिरेबान में भी झांकें

हमारी संस्कृति और रीतिरिवाज ऐसे हैं जहां लड़की को लड़के वालों के सामने झुकना पड़ता है. लड़का लड़की को ब्याह कर यह समझता है कि वह उस पर एहसान कर रहा है जबकि दुनिया में दो लड़कालड़की शादी करते वक्त एकदूसरे का बराबरी से सामना करते हैं और कोई बिना किसी के सामने झुके व आपस में बात कर शादी तय करते हैं, लेकिन हमारे यहां युवक समझते हैं कि अगर वे शादी करने जा रहे हैं तो लड़की की क्लास ले कर आएंगे. उस का अगलापिछला सब चैक कर फिर उसे पास करेंगे.

दरअसल, वे अपने गिरेबान में झांकना भूल जाते हैं. जरा सोचिए, युवती यदि आप के शरीर, लंबाई और हैसियत का मजाक बना कर शादी के दौरान आप को कमतर आंके तो कैसा लगेगा?

युवा प्रश्न करने से पहले यह भूल जाते हैं कि पहले वे अपनी खूबियां भी तो बताएं. जब उन से सिर्फ लड़के के बारे में पूछा जाता है तो कहते हैं कि लड़का ज्यादा पढ़ा तो नहीं है, लेकिन बाप का बिजनैस देखेगा.

अगर लड़का लड़की देखने जा रहा है तो बिना लड़की देखे कोई राय न बनाएं. अकसर लोग पहले से ही नकारात्मक विचार मन में बना लेते हैं. जिस वजह से उन्हें हर चीज में यही भाव दिखाई देता है. लड़की वालों को ऐसा महसूस न कराएं कि आप को लड़की नापसंद है. सिर्फ लड़की की कमियां न गिनवाएं. इतना ही नहीं यदि लड़की या लड़के में कोई कमी या विकार है तो उसे उजागर करें.

लड़की वालों के यहां रिश्तेदारों की पूरी फौज ले कर न जाएं. अगर युवक ज्यादा कमाता है या परिवार आर्थिक रूप से लड़की वालों से मजबूत भी हो, तो भी लड़की वालों पर अपने पैसे का रोब दिखा कर उन्हें छोटा होने का एहसास न होने दें.

अंधविश्वासी न बनें

शादी के समय पंडेपुरोहित लड़के के घर वालों को अंधविश्वास में फंसा कर अपनी जेब भर लेते हैं. युवक को भी लड़की की खूबसूरती से जुड़े टोटके बता कर भटकाने का काम करते हैं.

वे भाग्य को चमकाने वाले चिह्न बता कर युवक के मन में शारीरिक और नस्लीय भेदभाव का बीज रोप देते हैं. कभी भी अंधविश्वास के चक्कर में पड़ कर शादी के दौरान लड़की देखते हुए ऐसे रिवाजों में न पड़ें. तन की नहीं मन की सुंदरता भी देखें.

लड़की को करें सहज

जब कोई युवा किसी लड़की को देखने जाता है तो उसे यह बात समझनी चाहिए कि यह समय लड़की के लिए बड़ा नर्वस होने वाला होता है. उस पर कई तरह के दबाव रहते हैं. मातापिता का दबाव होता है कि ठीक ढंग से तैयार हो कर लड़के के सामने जाना. किसी भी तरह की कोई चूक नहीं होनी चाहिए, जबकि लड़के के सामने किसी तरह का कोई दबाव नहीं होता. उलटे वह सीना चौड़ा कर यह सोच कर जाता है कि उसे तो लड़की सिलैक्ट या रिजैक्ट करनी है.

यह मानसिकता गलत है. युवक को चाहिए कि लड़की से बात कर उसे सहज करे. जाहिर सी बात है इस दिन आप दोनों अच्छे कपड़े पहन कर गए होंगे, लेकिन बात की शुरुआत के लिए कपड़ों की तारीफ करना अच्छा रहेगा. इस से उस लड़की को लगेगा कि आप ने उसे नोटिस किया.

लड़की को अच्छा लगेगा अगर आप अपनी संभावित पत्नी से उन के घरपरिवार के बारे में पूछें. कैरियर के बारे में उस से बातें करना भी एक अच्छा विकल्प है. कुछ न समझ आए तो चुपचाप उस की पसंद के बारे में पूछ लें. ऐसा करने से लड़की काफी सहज हो जाएगी और आप की बातों का उचित और तार्किक जवाब दे पाएगी. 

जरा सोचिए, आप एक परिवार के साथ जीवनभर का रिश्ता जोड़ने के इरादे से जाते हैं ऐसे में अगर वे भी आप के परिवार व आप को ले कर मीनमेख निकालें तो जाहिर है बुरा लगेगा. जो व्यवहार आप को बुरा लग सकता है उसे दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए. रीतिरिवाज या रिश्तेदारों के दबाव में आ कर लकड़ी की या उस के परिवार वालों की मीनमेख निकालने के चक्कर में हो सकता है आप के हाथ से एक अच्छा रिश्ता निकल जाए. शादी को सौदेबाजी का खेल बनाना निहायत ही गलत है.   

————

सोच बदलो देश बदलेगा

यूरोप के कई देशों की तरह आस्ट्रिया ने भी पूरा चेहरा ढकने वाले बुरके पर पाबंदी लगा दी है. इस से मुसलिम औरतों को चलतेफिरते कैदखाने में रहने की मजबूरी से कुछ तो नजात मिलेगी. बुरका किसी भी तरह से चरित्र रक्षा का कवच है, यह गलत है. असल में तो यह मर्दों की पोल खोलता है कि वे इतने कामुक हैं कि औरत का चेहरा देखते ही बौरा सकते हैं. ऐसा समाज किस काम का जो अपने लोगों को औरतों की इज्जत करना तक न सिखा सके?

ऐसा नहीं कि यह किसी धर्म विशेष की ही खासीयत है. सभी धर्मों ने औरतों के पहरावे पर समयसमय पर पाबंदियां लगाई हैं. भारत में आज भी हिंदू औरतों को कितने ही अवसरों पर परदा करने को मजबूर करा जाता है. ईसाई समाज ने भी इसी तरह कपड़ों पर सदियों तक पाबंदियां लगा रखी थीं. यह तो 19वीं सदी के बाद हुआ है कि औरतों को मनचाहा करने की छूट मिली है.

औरतों पर पाबंदियां असल में समाज के लिए बेहद हानिकारक  होती हैं. समाज उत्पादक औरतों को बेकार में खो देता है और वे बच्चे पालने और चूल्हाचौका संभालने के काम में लगी रहती हैं.

जिस समाज ने औरतों को बराबरी का स्थान दिया है, वह आगे बढ़ा है. जब भी औरतों को अपने पिता के घर या ससुराल से अलग हो कर कहीं अकेले रहना पड़ता है वे आमतौर पर सैकड़ों काम कर लेती हैं और तभी खाली हाथ आए शरणार्थी 10-15 सालों में पैसे वाले बन जाते हैं, क्योंकि उस समय आदमीऔरत बराबरी के स्तर पर कंधे से कंधा मिला कर काम करते हैं.

पश्चिमी देशों में पहुंचने वाले शरणार्थियों को तो खास खयाल रखना पड़ेगा कि वे वहां के समाज में ऐसे घुलमिल जाएं कि सिवा त्वचा के रंग के उन में कोई भेद न दिखे.

अगर मुसलिम देशों को भयंकर आतंकवाद, गृहयुद्धों और अराजकता से निकलना है तो वहां औरतों को बराबरी के हक के लिए आगे आना होगा. यह बराबरी उन्हें उपहार में नहीं मिलेगी, इस के लिए उन्हें खुद लड़ना होगा.            

वुडबी के साथ डेटिंग

अमूमन शादीब्याह तय करने से पहले युवकयुवती को अकेले में बातचीत करने, एकदूसरे के बारे में जाननेसमझने और राय देने के लिए कहा जाता है, लेकिन एकदूसरे के घर में होती ऐसी मुलाकात जिस में एक तो पहली बार एकदूसरे से मिल रहे होते हैं, दूसरा पता होता है कि बाहर फैमिली वाले राय जानने को तैयार बैठे हैं. ऐसे में न तो थोड़े समय में एकदूसरे के बारे में जाना जा सकता है और न ही राय देना संभव हो पाता है.

अकसर पेरैंट्स के दबाव में दी गई राय सटीक नहीं होती और बाद में किसी कमी का जिक्र आने पर पेरैंट्स यह कह कर पल्ला झाड़ लेते हैं कि हम ने तो आप को मौका दिया था एकदूसरे को जानने का. इस संदर्भ में जरूरी है कि जिस शख्स के साथ आप ने ताउम्र रहना है, सुखदुख निभाने हैं उसे अच्छी तरह जानपरख लिया जाए. उस का स्वभाव, पहनावा, सोसायटी आदि के बारे में उस के विचार, पसंदनापसंद जो एक छोटी मुलाकात में समझना मुश्किल है. इसलिए जरूरी है विवाह से पहले खासकर ‘हां’ हो जाने के बाद से ही युवकयुवती कम से कम 3-4 बार डेटिंग करें और एकदूसरे के बारे में जानें ताकि बाद में किसी तरह की शिकायत न रहे.

घर परिवार के बारे में जानें

अमूमन युवतियां वुडबी से डेटिंग कर उस के व उस के स्वभाव के बारे में ही पूछती हैं जबकि आप को विवाह के बाद परिवार में भी रहना है इसलिए वुडबी से उस के परिवार के बारे में जानें. मातापिता का स्वभाव, खानपान, आदतें, पसंदनापसंद आप को पता होनी चाहिए. यह भी देखें कि परिवार धार्मिक कर्मकांडों को मानने वाला व दकियानूस तो नहीं है. कहीं आप शादी के बाद व्रतत्योहार ही निबटाती रह जाएं. संयुक्त परिवार तो नहीं है अगर है तो कितना बड़ा है, खाना बनाने का स्टेटस काम का बंटवारा या सभी अपनाअपना काम करते हैं आदि के बारे में जानें.

वुडबी के शौक व आदतें जानें

आप ने जिस के साथ ताउम्र रहना है उस के बारे में सब पता होना चाहिए. उस के शौक क्या हैं? उस की आदतें कैसी हैं? बातोंबातों में जान लें कि वह ड्रिंक तो नहीं करता, उसे सिगरेट आदि की लत तो नहीं. उस का खानपान कैसा है, शौक क्या हैं, घूमना, फिल्म देखना, यारीदोस्ती को कितना समय देता है आदि.

आर्थिक स्थिति का पता लगाएं

अमूमन शादी के समय युवक की सैलरी, इनकम आदि के बारे में बढ़चढ़ कर बताया जाता है. आप इस की हकीकत का पता डेटिंग के दौरान लगा सकती हैं. ध्यान रहे, सीधेसीधे वेतन के बारे में न पूछें. बस, घुमाफिरा कर जानने की कोशिश करें कि जो बताया गया है क्या वह सही है? परिवार के अन्य आय के स्रोत क्या हैं और खर्च कैसे किया जाता है.

आप का वुडबी अपनी कमाई किसे देता है, घर पर निर्भर तो नहीं रहता आदि बातें जानें. यह भी जानें कि आप की कमाई पर नजर रख कर तो शादी नहीं हो रही.

विवाहपूर्व संबंधों के बारे में जानें

अमूमन आज के दौर में युवकयुवतियों के विवाहपूर्व संबंध बनने लगे हैं. आप अपने वुडबी के पूर्व संबंधों के बारे में डेटिंग के दौरान जानने की कोशिश करें. सिर्फ दोस्ती थी या संबंध प्रेम तक पहुंचे. ध्यान रहे कि उस की भावनाएं आहत न हों. अगर कोई ब्रेकअप हुआ और वह संभल गया, तो उसे मुद्दा न बनाएं.

भविष्य के बारे में जानें

आप का वुडबी भविष्य के बारे में कितना सजग है, इस बारे में चर्चा अवश्य करें. उस ने भविष्य की क्या योजनाएं बना रखी हैं, आगे सिर्फ जौब तक ही सीमित रहना चाहता है या कुछ समय बाद अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता है. बचत को ले कर क्या सोचता है? भविष्य में अगर घर नहीं है तो खरीदना चाहेगा या मम्मीपापा के घर में ही रहेगा. कहीं शेयरबाजार, सट्टा, कमेटी आदि के चक्कर में तो नहीं रहता. इस बारे में जानें.

पूर्व सैक्स संबंधों की चर्चा न करें

आप ने अपने बारे में भले उसे सबकुछ बता दिया हो, लेकिन भूल कर भी डेटिंग के दौरान अपने पूर्व सैक्स संबंधों के बारे में न बताएं. इस के बाद भले उसे आप में लाखों अच्छाइयां दिखें पर उसे आप की सभी अच्छाइयों के बावजूद आप को अपनाने में हिचक होगी. अगर अपना भी लिया तो ताउम्र यह बात उलाहने का कारण बन सकती है.

ममाज बौय न हो

बातोंबातों में डेटिंग के दौरान जान लें कि कहीं वह ममाज बौय तो नहीं है. उस की घर में क्या स्थिति है? कितनी चलती है, निर्णय लेने में सक्षम है कि नहीं? कहीं ऐसा तो नहीं कि छोटीछोटी बातों पर उसे पेरैंट्स की इजाजत लेनी पड़ती हो. उस की बोल्डनैस आदि के बारे में भी जानने की कोशिश करें.

अंधविश्वासी तो नहीं

वुडबी अंधविश्वासी और टोनेटोटकों में भरोसा करने वाला तो नहीं, चैक करें. ऐसे लोग अगर अपनी दूसरी खूबियों के कारण सफल हों तो भी हरदम उन पर खौफ छाया रहता है और वे हर तरह के भगवान की सेवा करने में लगे रहते हैं. खुद भी अंधविश्वासी न बनें और वुडबी की अंधविश्वासी तो नहीं, यह भी जांच लें.

उपरोक्त बातों को ध्यान में रख कर 3 से 4 बार डेटिंग अवश्य करें. फिर सभी बातों का निचोड़ निकाल गंभीरता से विचार कर मन बनाएं कि वह आप का वुडबी है या उसे इग्नोर करना ही ठीक है. इस के लिए किसी के दबाव में न आएं. न डेटिंग की बातें किसी से शेयर करें खासकर अंतरंग बातें तो बिलकुल न बताएं. गंभीरता से विचार कर अपना फैसला पेरैंट्स को सुनाएं. 

इन बातों का रखें खास खयाल :

–       डेटिंग के दौरान खुद कम बोलें और वुडबी की अधिक सुनें. ज्यादा व बढ़चढ़ कर बोलने, हर बात में हांहां करने से आप बातों में फंस सकती हैं. कोई बात छिपाना भी चाहें तो निकल सकती हैं. अत: कम बोलें व जरूरत के अनुसार विश्लेषण करें.

–       ड्रैस का ध्यान रखें. जहां युवकों को डेटिंग के लिए सिंपल बन कर जाने की सलाह दी जाती है वहीं युवतियां भी यदि सिंपल ड्रैस पहनें तो अच्छा रहेगा. वल्गर कपड़े न पहनें. न ही ज्यादा फैशनेबल, सैक्सी या शरीर दिखने वाले कपड़े पहनें. सिंपलसोबर कपड़े इस अवसर पर ठीक रहेंगे.

–       आप भी यंग हैं वह भी और विपरीत लिंग का आकर्षण भी. तिस पर आप की शादी भी होने वाली है यह सोच कर बहक न जाएं. हाथों में हाथ डालना, पास आना आदि से डेट को सैक्सुअल न बनाएं और सैक्स हेतु उतावले न हों. इसे शादी के बाद के लिए ही रखें व दूरी बनाए रखें.

–       डेट के दौरान कभी भी गिफ्ट के चक्कर में न पड़ें. न गिफ्ट दें न लेने की उत्सुकता दिखाएं. बर्थडे विश या अन्य तरह के कार्ड देनालेना भी वर्जित रखें, क्योंकि अगर शादी नहीं होती तो ये चीजें झगड़े का मुद्दा बनती हैं.

–       फेसबुक फ्रैंडशिप व औनलाइन चैटिंग से बचें, क्योंकि इस से आप के सभी फ्रैंड्स भी आप के वुडबी को जान जाएंगे जब तक रिश्ता नहीं हो जाता इसे अवौइड करें.

–       फोन पर डेट फिक्स कर सकती हैं, लेकिन व्हाट्सऐप पर चैटिंग न करें. कभीकभी यह बातचीत रिश्ता न होने पर सुबूत के तौर पर दिखाई जाती है, स्मार्टफोन से फोटो व सैल्फी लेने की भूल भी न करें. ध्यान रहे अभी आप सिर्फ परख रहे हैं रिश्ते हेतु हां नहीं हुई.

–       डेट पर जाएं तो खानेपीने का खर्च आधाआधा रखें. उस के न कहने पर भी खर्च करें ताकि एक पर बोझ न पड़े और अगला यह भी न समझे कि यह तो खानेपीने में ही रहती है, खर्च में नहीं.

अनलिमिटेड कहानियां-आर्टिकल पढ़ने के लिएसब्सक्राइब करें