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बेवफाई का सिला कुछ ऐसा मिला

26 जनवरी, 2017 को इलाहाबाद के यमुनानगर इलाके के थाना नैनी में गणतंत्र दिवस के ध्वजारोहण की तैयारी चल रही थी. इंसपेक्टर अवधेश प्रताप सिंह एवं अन्य पुलिसकर्मी सीओ अलका भटनागर के आने का इंतजार कर रहे थे. उसी समय एक दुबलापतला युवक आया और एक सिपाही के पास जा कर बोला, ‘‘स…स… साहब, बड़े साहब कहां हैं, मुझे उन से कुछ कहना है.’’

इंसपेक्टर अवधेश प्रताप सिंह वहीं मौजूद थे. उस युवक की आवाज उन के कानों तक पहुंची तो उन्होंने उसे अपने पास बुला कर पूछा, ‘‘कहो, क्या बात है?’’

‘‘साहब, मेरा नाम इंद्रकुमार साहू है. मैं चक गरीबदास मोहल्ले में मामाभांजा तालाब के पास रहता हूं. मैं ने अपनी पत्नी और उस के प्रेमी को मार डाला है.’’

इंद्रकुमार के मुंह से 2 हत्याओं की बात सुन कर अवधेश प्रताप सिंह दंग रह गए. उन्होंने उस के ऊपर एक नजर डाली, उस के उलझे बाल, लाललाल आंखों से वह पागल जैसा नजर आ रहा था. चेहरे के हावभाव देख लग रहा था कि वह रात भर नहीं सोया था.

वहां मौजूद सभी पुलिसकर्मी इंद्रकुमार को हैरानी से देख रहे थे. थाना पुलिस कुछ करने का सोच रही थी, तभी सीओ अलका भटनागर भी थाना आ पहुंचीं. इंद्रकुमार द्वारा दो हत्याएं करने की बात सुन वह भी दंग रह गईं. सीओ के इशारे पर अवधेश प्रताप सिंह ने उसे हिरासत में ले लिया.

ध्वजारोहण की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अवधेश प्रताप सिंह इंद्रकुमार को अपनी जीप में बैठा कर उस के घर ले गए. अलका भटनागर भी साथ गईं. इंद्रकुमार पुलिस को उस कमरे में ले गया, जहां पत्नी गीता साहू और उस के प्रेमी रीतेश सोनी की लाशें पड़ी थीं.

पुलिस के पहुंचने पर इस दोहरे हत्याकांड की खबर पासपड़ोस वालों को मिली तो सभी इकट्ठा हो गए. पुलिस दोनों लाशों का बारीकी से निरीक्षण करने लगी. पुलिस अधिकारी यह देख कर हतप्रभ थे कि दोनों लाशों पर नोचखसोट या चोट के कोई निशान नहीं थे. गीता के गले पर लाल धारियां जरूर पड़ी थीं. रीतेश के गले पर भी वैसे ही निशान देख कर लग रह था कि उन की हत्या गला घोंट कर की गई थी.

मोहल्ले वालों से खबर पा कर उस के घर वाले रोतेबिलखते घटनास्थल पर आ गए थे. मौके की जरूरी काररवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवा दिया. इस के बाद इंद्रकुमार को थाने ला कर उस से इस दोहरे हत्याकांड के बारे में पूछताछ की तो उस ने पत्नी की बेवफाई की जो कहानी बताई, वह इस प्रकार थी—

इंद्रकुमार साहू उत्तर प्रदेश के जिला इलाहाबाद के थाना नैनी के मोहल्ला गरीबदास में अपनी 32 साल की पत्नी गीता और 4 बच्चों के साथ रहता था. उस की बड़ी बेटी 15 साल की थी. इंद्रकुमार ने अपने मकान के आगे वाले हिस्से में किराना और चायनाश्ता की दुकान खोल रखी थी. उस का काम अच्छा चल रहा था. घर के काम से फारिग होने के बाद गीता भी दुकानदारी के काम में उस का हाथ बंटाती थी.

इंद्रकुमार के घर से कुछ दूरी पर बनारसीलाल सोनी रहता था. उस का बेटा रीतेश सोनी सिगरेट और गुटखा का शौकीन था. इसी वजह से उस का इंद्रकुमार की दुकान पर आनाजाना लगा रहता था. मोहल्ले के रिश्ते से गीता उस की भाभी लगती थी. इसी नाते वह अकसर उस से इंद्रकुमार के सामने ही हंसीमजाक कर लिया करता था.

अपने से 9 साल छोटे रीतेश की बातों का गीता भी हंस कर जवाब दे दिया करती थी. स्वभाव से सीधा और सरल इंद्रकुमार इस का कतई बुरा नहीं मानता था. इंद्रकुमार दुकान का सामान लेने अकसर इलाहाबाद शहर जाता रहता था. ऐसे में गीता ही दुकान संभालती थी.

इस बीच रीतेश गीता को रिझाने के लिए उस की तारीफ किया करता था. एक बार उस ने कहा, ‘‘भाभी, तुम्हें देख कर कोई नहीं कह सकता कि तुम 4 बच्चों की मां हो. तुम तो अभी भी जवान दिखती हो.’’

अपनी तारीफ सुन कर गीता गदगद हो गई थी. इस के बाद एक दिन उस ने कहा, ‘‘भाभी, तुम में गजब का आकर्षण है. कहां तुम और कहां इंदर भाई. दोनों की कदकाठी, रंगरूप और उम्र में जमीनआसमान का अंतर है. तुम्हारे सामने तो वह कुछ भी नहीं है.’’

अपनी तारीफ सुन कर गीता अंदर ही अंदर जहां एक ओर फूली नहीं समाई, वहीं दिखावे के लिए उस ने मंदमंद मुसकराते हुए रीतेश की ओर देखते हुए कहा, ‘‘झूठे कहीं के, तुम जरूरत से ज्यादा तारीफ कर रहे हो? मुझे तुम्हारी इस तारीफ में दाल में कुछ काला नजर आ रहा है, तुम्हारे भैया जो मरियल से दिखते हैं, आने दो बताती हूं उन से.’’

इतना कह कर वह जोरजोर से हंसने लगी. हकीकत यह थी कि गीता रीतेश को मन ही मन चाहती थी. उस ने केवल दिखावे के लिए यह बात कही थी. रीतेश हर हाल में उसे पाना चाहता था. गीता के हावभाव से वह समझ चुका था कि गीता भी उसे पसंद करती है. लेकिन वह इजहार नहीं कर पा रही है.

एक दिन दोपहर को गीता के बच्चे स्कूल गए थे. इंद्रकुमार बाजार गया हुआ था. गरमी के दिन थे. दुकान पर सन्नाटा था. रीतेश ऐसे ही मौके की तलाश में था. वह गीता की दुकान पर पहुंच गया. इधरउधर की बातों और हंसीमजाक के बीच रीतेश ने गीता का हाथ अपने हाथ में ले लिया.

गीता ने इस का विरोध नहीं किया. चेहरेमोहरे से गोरेचिट्टे गबरू जवान रीतेश के हाथों का स्पर्श कुछ अलग था. गीता का हाथ अपने हाथ में ले कर रीतेश सुधबुध खो कर एकटक उस के चेहरे पर निगाहें टिकाए रहा. अचानक रीतेश की तंद्रा भंग करते हुए गीता ने कहा, ‘‘अरे ओ देवरजी, किस दुनिया में सो गए. छोड़ो मेरा हाथ. अगर किसी ने देख लिया तो जानते हो कितनी बड़ी बेइज्जती होगी?’’

गीता की बात सुन कर रीतेश ने कहा, ‘‘यहां बाहर कोई देख लेगा तो अंदर कमरे में चलें?’’

‘‘नहीं…नहीं… आज नहीं, अभी उन के आने का समय हो गया है. वह किसी भी समय आ सकते हैं. फिर कभी अंदर चलेंगे.’’ गीता ने कहा तो रीतेश ने उस का हाथ छोड़ दिया.

लेकिन वह मन ही मन बहुत खुश था, क्योंकि उसे गीता की तरफ से हरी झंडी मिल गई थी. इस के बाद मौका मिलते ही दोनों ने मर्यादा की दीवार तोड़ डाली. इस के बाद इंद्रकुमार की आंखों में धूल झोंक कर गीता रीतेश के साथ मौजमस्ती करने लगी. अवैधसंबंधों का यह सिलसिला करीब 3 सालों तक चलता रहा.

अवैध संबंधों को कोई लाख छिपाने की कोशिश क्यों न करे, लेकिन वह छिप नहीं पाते. किसी तरह पड़ोसियों को गीता और रीतेश के अवैध संबंधों की भनक लग गई. इंद्रकुमार के दोस्तों ने कई बार उसे उस की पत्नी और रीतेश के संबंधों की बात बताई, लेकिन वह इतना सीधासादा था कि उस ने दोस्तों की बातों पर ध्यान नहीं दिया. क्योंकि उसे पत्नी पर पूरा विश्वास था. जबकि सच्चाई यह थी कि वह उस के साथ लगातार विश्वासघात कर रही थी. सही बात तो यह थी कि गीता पति को कुछ समझती ही नहीं थी. आखिर 6 महीने पहले एक दिन इंद्रकुमार ने अपनी पत्नी और रीतेश को अपने ही घर में आपत्तिजनक स्थिति में रंगेहाथों पकड़ लिया. रीतेश ने जब इंद्रकुमार को देखा तो वह फुरती से वहां से भाग गया. उस ने भी उस से कुछ नहीं कहा. पर उस ने गीता को खूब खरीखोटी सुनाई और दोबारा ऐसी हरकत न करने की हिदायत दे कर छोड़ दिया.

उस दिन के बाद से कुछ दिनों तक रीतेश का गीता के यहां आनाजाना लगभग बंद रहा. पर यह पाबंदी ज्यादा दिनों तक कायम न रह सकी. मौका मिलने पर दोनों फिर से इंद्रकुमार की आंखों में धूल झोंकने लगे. पर अब वे काफी सावधानी बरत रहे थे. गीता ने अपने दोनों बड़े बच्चों बेटी और बेटे को पूरी तरह से अपने पक्ष में कर लिया था.

रीतेश भी बच्चों को पैसे और खानेपीने की चीजें ला कर देता रहता था, जिस से बच्चे रीतेश के घर में आने की बात अपने पिता को नहीं बताते थे. इस के बावजूद इंद्रकुमार ने दोनों की चोरी दोबारा पकड़ ली. इस बार उस ने गीता की जम कर धुनाई की और बच्चों को भी डांटाफटकारा.

अब वह गीता पर और ज्यादा निगाह रखने लगा. मगर गीता पर इस का विपरीत असर हुआ. वैसे भी वह पहले ही पति की परवाह नहीं करती थी. अब उस का डर बिलकुल मन से निकल गया था. वह पूरी तरह बेशर्मी पर उतर आई. पति की मौजूदगी में ही वह प्रेमी रीतेश से खुलेआम मिलने लगी.

इंद्रकुमार दुकान पर बैठा रहता तो रीतेश उस के सामने ही घर के अंदर उस की पत्नी के पास चला जाता. वह जानता था कि रीतेश और गीता उस से ज्यादा ताकतवर हैं, इसलिए वह चाह कर भी कुछ नहीं कह पाता था. लाचार सा वह दुकान पर ही बैठा रहता था.

पत्नी पर अब उस का कोई वश नहीं रह गया था. वह 15 साल की बड़ी बेटी की दुहाई देते हुए पत्नी को समझाता, पर पत्नी पर उस के समझाने का कोई फर्क नहीं पड़ता था. बल्कि वह और भी ज्यादा मनमानी करने लगी थी.

अपनी आंखों के सामने अपनी इज्जत का जनाजा उठते देख उस का धैर्य जवाब देने लगा. अब उस से पत्नी की बेवफाई और बेहयाई बिलकुल बरदाश्त नहीं हो रही थी. इसी सब का नतीजा था कि उस ने मन ही मन एक खतरनाक मंसूबा पाल लिया. वह मंसूबा था रीतेश और बेवफा पत्नी की हत्या का.

घटना से 8-10 दिन पहले से ही वह अपने मंसूबे को अमलीजामा पहनाने में लग गया था. मसलन दोनों को मौत के आगोश में सुलाने की उस ने एक खतरनाक योजना बना ली थी. अपनी इस योजना के तहत वह खुद भी पत्नी के प्रेमी रीतेश से ऐसे बातें करने लगा, जैसे कि कुछ हुआ ही न हो.

योजना के अनुसार, 25 जनवरी, 2017 को वह एक मैडिकल स्टोर से नींद की 20 गोलियां खरीद लाया. दोनों बड़े बच्चों को वह उन की मौसी के घर छोड़ आया. जबकि छोटे दोनों बच्चे घर में ही थे.

रात 9 बजे के आसपास उस ने दुकान बंद की. घर के भीतर गया तो देखा गीता खाना बनाने की तैयारी कर रही थी. उस का प्रेमी रीतेश कमरे में बैठा टीवी देख रहा था. उसे देख कर अंदर ही अंदर उस का खून खौल रहा था. हत्या के इरादे से इंद्रकुमार ने खुद ही चाय बनाई और पत्नी तथा रीतेश की चाय में नींद की दवा मिला कर चाय उन्हें दे दी. एक कप में ले कर वह खुद भी चाय पीने लगा.

चाय पीने के बाद भी दोनों बेहोश नहीं हुए तो इंद्रकुमार अवाक रह गया. क्योंकि उस दिन उस ने दोनों को मौत के घाट उतारने की पूरी तैयारी कर ली थी. जब उन दोनों पर नींद की गोलियों का कोई असर नहीं हुआ तो उस ने रीतेश से कहा, ‘‘भाई रितेश कल 26 जनवरी है. कल शराब की सारी दुकानें बंद रहेंगी. आज मेरा मन शराब पीने का कर रहा है. क्यों न आज हम 3-3 पैग लगा लें.’’

इंद्रकुमार की बात पर रीतेश खुश हो गया. उस ने कहा, ‘‘हांहां, क्यों नहीं. जब तक गीता भाभी खाना बना रही हैं, तब तक हम दोनों अपना काम कर लेते हैं.’’ इस के बाद दोनों शराब की दुकान पर गए और वहां से एक बोतल खरीद कर लौट आए. उन के बीच शराब का दौर शुरू हुआ. अब तक गीता और रीतेश पर गोलियों का असर होने लगा था.

बातोंबातों में इंद्रकुमार ने रीतेश को ज्यादा शराब पिला दी. बिना खाएपिए दोनों आधी रात तक शराब पीते रहे. इस बीच गीता को नींद आने लगी. दोनों बच्चों के साथ गीता ने खाना खा लिया. उस ने रीतेश और पति को कई बार खाने को कहा. लेकिन जब उस ने देखा कि दोनों पीने में मस्त हैं तो वह बच्चों के साथ दूसरे कमरे में सोने चली गई. थोड़ी देर बाद नशा हावी होते ही रीतेश भी वहीं पसर गया.

इंद्रकुमार को इसी मौके का इंतजार था. वह रीतेश को खींच कर दुकान के पीछे वाले कमरे में ले गया और पूरी ताकत से उस का गला दबा दिया. थोड़ी देर में उस का शरीर हमेशाहमेशा के लिए शांत हो गया.

इस के बाद वह गीता को भी उसी कमरे में खींच लाया. लेकिन गीता पूरी तरह बेहोश नहीं थी. उस ने इंद्रकुमार से बचने की भरपूर कोशिश की, विरोध भी किया, लेकिन इंद्रकुमार ने दुपट्टे से उस का गला कस दिया. जिस के चलते उस के भी त्रियाचरित्र का अध्याय हमेशा के लिए समाप्त हो गया.

इंद्रकुमार साहू से विस्तार से पूछताछ कर के पुलिस ने भादंवि की धारा 302, 308 के तहत गिरफ्तार कर उसे न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जिला कारागार भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

ये बौलीवुड अभिनेत्री दे रही है अपने साथ सोने का मौका, देखें वीडियो

चकाचौंध भरी फिल्मी दुनिया जितनी ग्लैमर दिखती है उतनी है नहीं. फिल्मों में पर्दे के पीछे की सच्चाई कुछ और है जो कम लोगों को ही पता होती है. फिल्मो में कास्टिंग काउच तो आज आम बात हो गई है. बॉलीवुड में कई अभिनेत्रियां हैं जो कास्टिंग काउच का शिकार हुई है. कई अभिनेत्रियों ने पर्दे के पीछे की काली सच्चाई की खुलासा भी किया है. आज हम भी आपको एक ऐसा ही वीडियो दिखाने जा रहे हैं जिसमें एक अभिनेत्री लोगों को अपने साथ सोने का ऑफर दे रही है.

दरअसल हम आपको जो वीडियो दिखाने जा रहे हैं उसमें एक्ट्रेस के पास खड़े लोगों का रिएक्शन भी देखने लायक है इस वीडियो को भी सोशल मीडिया पर भी काफी देखा जा रहा है.

दरअसल यह वीडियो एंकर कम वीजे कम मॉडल शहनाज ट्रेजरीवाला का है. इस वीडयो में शहनाझ रिवीलिंग ड्रेस में नजर आ रही हैं. उन्हें इस वीडियो पर काफी निगेटिव कमेंट भी झेलने पड़े.

आप भी देखिए ये वीडियो…

ये हैं बॉलीवुड के स्टार बच्चों के विवादों की कहानियां

आदित्य पंचोली बॉलीवुड के उन एक्टर्स में से एक हैं. जिन्हें कॉन्ट्रोवर्सीज के लिए जाना जाता है. आदित्य बेटा सूरज और बेटी सना के पिता हैं. खास बात ये है कि आदित्य के दोनों बच्चे भी कॉन्ट्रोवर्सी में फंस चुके हैं. पहले बात करते हैं बेटी सना की, जिन्हें 2008 में एक रेव पार्टी में पकड़ा गया था. हालांकि लिस्ट में ये लोग अकेले नहीं हैं. ऐसी और भी हस्तियां हैं, जो इस कतार में शामिल हैं…

आदित्य पंचोली की बेटी सना : रेव पार्टी

रिपोर्ट के मुताबिक सना को मुबई  क्लब बॉम्बे 72 डिग्री ईस्ट में चल रही पार्टी में पकड़ा गया था. एंटी नारकोटिक्स टीम ने यहां रेड डाली थी और उन्होंने ही आदित्य पंचोली की बेटी की पहचान की थी. बता दें कि लॉस एंजिलिस से पढ़ाई कर लौटीं सना अब गोवा में एक इटेलियन रेस्त्रां चलाती हैं. सना का सिलेक्शन टीवी शो 'शाका लाका बूम बूम' के लिए हुआ था. वे शूटिंग के लिए साउथ अफ्रीका रवाना हो गई थीं. लेकिन किसी वजह से उन्हें वापस लौटना पड़ा था.

आदित्य पंचोली के बेटे सूरज पंचोली : अपनी गर्लफ्रेंड के मर्डर का आरोप

2015 में फिल्म 'हीरो' से बॉलीवुड डेब्यू कर चुके सूरज पंचोली पर अपनी ही गर्लफ्रेंड जिया खान के मर्डर का आरोप लगाया जा चुका है. निशब्द' और 'गजनी' जैसी फिल्मों की एक्ट्रेस रहीं जिया खान का शव 2 जून 2013 को उनके घर से बरामद हुआ था. घटनाइब चार महीने बाद कुछ फोटोज के चलते उनके बॉयफ्रेंड सूरज पंचोली शक के घेरे में आ गए थे.  हालांकि, अभी भी यह साफ नहीं हो पाया कि यह एक मर्डर था या सुसाइड. मामला कोर्ट में है.

शक्ति कपूर के बेटे सिद्धांत कपूर : रेव पार्टी

'शूटआउट एट वडाला' और 'अग्ली' जैसी फिल्मों में नजर आ चुके सिद्धांत कपूर को साल 2008 में उसी रेव पार्टी से पकड़ा गया था, जिसमें आदित्य पंचोली की बेटी भी शामिल थी. बता दें कि सिद्धांत फिलहाल, अपकमिंग फिल्म 'हसीना पारकर' की रिलीज का इंतजार कर रहे हैं, जिसमें वे दाऊद इब्राहिम की भूमिका में नजर आएंगे. फिल्म में उनकी रियल बहन रील सिस्टर हसीना के रोल में हैं.

महेश भट्ट के बेटे राहुल भट्ट : आतंकी डेविड हेडली से दोस्ती

महेश भट्ट और किरण भट्ट के बेटे राहुल पर आतंकी डेविड हेडली से कनेक्शन का आरोप लगा था. जिसके कारण वे खास विवादों में रहे थे. 26 नवंबर 2008 से 29 नवंबर 2008 के बीच साउथ मुंबई में 8 आतंकी अटैक किए गए थे. इनमें छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ओबेरॉय ट्रिडेंट, ताज पैलेस एंड टावर, लियोपोल्ड कैफ़े, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर कॉलेज शामिल थे. हेडली ने 26/11 हमले से पहले ही राहुल को मेल कर साउथ मुंबई की ओर न जाने की सलाह दी थी. इसके बाद उनकी और हेडली की दोस्ती की बात सामने आई और पुलिस ने उन्हें कस्टडी में ले लिया था. हालांकि, बाद में राहुल को क्लीनचिट मिल गई.

विनोद खन्ना के बेटे साक्षी खन्ना : रेव पार्टी में पकड़े गए

कुछ सालों पहले विनोद खन्ना और उनकी दूसरी पत्नी कविता के बेटे साक्षी खन्ना को मुंबई के माउंट व्यू रिजॉर्ट में चल रही रेव पार्टी से गिरफ्तार किया गया था. इस पार्टी में साक्षी सहित करीब 300 युवाओं को एंटी नारकोटिक्स टीम ने पकड़ा था.

जानें वर्ल्ड कप के बाद किस महिला खिलाड़ी को मिला क्या इनाम

महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप में भले ही भारतीय टीम हार गई हो लेकिन खिलाड़ियों ने देश का दिल जीत लिया है. कल तक जहां लोगों को टीम के खिलाड़ियों का नाम तक पता नहीं होता था, आज वही लोग उन महिला खिलाड़ियों का गुणगान कर रहे हैं. जिस तरह अचानक से महिला क्रिकेट को लेकर देश में माहौल बदला है उसे देखकर कहा जा सकता है कि महिला क्रिकेट के अच्छे दिन अब आने वाले हैं.

वैसे खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने के लिए देशभर में उनके ऊपर इनामों की बारिश हो रही है. जानें किस खिलाड़ी को कितनी इनामी राशि मिली.

बीसीसीआई देगी 50 लाख

बीसीसीआई टीम के लिए भव्य सम्मान समारोह के आयोजन की तैयारी में है. सभी खिलाड़ियों को 50-50 लाख रुपये और सपोर्ट स्टाफ को 25-25 लाख रुपये के चेक दिए जाएंगे.

राज्य सरकारों ने भी किया इनाम का ऐलान

महिला क्रिकेटरों को सिर्फ बीसीसीआई ही नहीं बल्कि कई राज्य भी सम्मानित करने वाले हैं. लगभग हर राज्य अपने-अपने खिलाड़ियों को अलग से सम्मानित करने की योजना बना चुका है.

शिवराज सिंह देंगे 50 लाख का इनाम

वर्ल्ड कप में उम्दा प्रदर्शन करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से 50 लाख रुपए इनाम के तौर पर टीम को दिया जाएगा. शिवराज सरकार ने इसकी घोषणा कर दी है.

मिताली की मिलेगी बीएमडबल्यू

पूर्व जूनियर क्रिकेट सिलेक्शन कमिटी के चेयरमैन और तेलंगाना बैडमिंटन एसोसिएशन के उपाध्यक्ष चामुंडेश्वरनाथ ने मिताली राज को ब्रैंड न्यू बीएमडब्ल्यू कार गिफ्ट करने का ऐलान किया है. आपको बता दें कि चामुंडेश्वरनाथ जो कि खुद आंध्र प्रदेश की रणजी टीम के कप्तान रहे हैं पिछले कुछ सालों में कई मौके पर खिलाड़ियों को कार गिफ्ट करते रहे हैं.

हरमनप्रीत बनेंगी डीएसपी

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में नॉटआउट 171 रन की आतिशी पारी खेलने वाली हरमनप्रीत कौर को पंजाब पुलिस में डीएसपी पद का ऑफर दिया है.

सुषमा को मिला डीएसपी बनने का ऑफर

हरमनप्रीत की ही तरह अब हिमाचल प्रदेश की सरकार भारतीय महिला टीम की विकेटकीपर सुषमा वर्मा को डीएसपी पद का ऑफर दिया है.

रेलवे में मिला खिलाड़ियों को प्रमोशन

रेल मंत्री सुरेश प्रभु पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि टीम की उन खिलाड़ियों को समय से पहले प्रमोशन दिया जाएगा, जो रेलवे में काम करती हैं. भारत की 15 सदस्यीय टीम में से 10 रेलवे से जुड़ी हैं.

..तो नीलाम हो जाएगा भारत का पहला ओलंपिक मेडल

भारत को ओलंपिक में पहला व्यक्तिगत मेडल दिलाने वाले पहलवान काशाबा दादासाहेब जाधव (केडी जाधव) के परिवार उनके इस ऐतिहासिक मेडल को बेचने की धमकी दी है. ये कदम उनके परिवार द्वारा एक रेसलिंग अकादमी खोलने के लिए आ रही पैसे की कमी की वजह से किया जा रहा है.

महाराष्ट्र सरकार ने जाधव के परिवार को इस अकादमी के लिए पैसे देने का वादा किया था लेकिन फिर भी अब तक उन्हें एक भी पैसा नहीं मिला है.

इस दिग्गज पहलवान के बेटे रंजीत जाधव ने बताया कि कांस्य पदक की नीलामी का फैसला पीड़ादायक था, क्योंकि अकादमी बनाने के वादे से राज्य सरकार के पीछे हटने पर हमारे पास अधिक विकल्प नहीं बचे थे.

रंजीत ने कहा कि 2009 में जलगांव में कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान राज्य के तत्कालीन खेल मंत्री दिलीप देशमुख ने घोषणा की थी कि सरकार मेरे दिवंगत पिता के नाम पर सतारा जिले में राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती अकादमी बनायेगी. उन्होंने कहा कि आठ साल बाद भी कुछ नहीं हुआ है. दिसंबर 2013 में परियोजना के लिए एक करोड़ 58 लाख रपये स्वीकृत किए गये थे, लेकिन यह परियोजना आकार नहीं ले पायी.

रंजीर ने कहा, ‘हमने राज्य सरकार को 14 अगस्त का अल्टीमेटम दिया है, जोकि मेरे पिता की 33 वीं बरसी है. इसी दिन 1984 में 58 साल की उम्र में केडी जाधव का निधन हुआ था. अगर वे अकादमी के लिए किए गए अपने वादे को निभाने में असफल रहते हैं तो 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के दिन से उनका परिवार और गांव वाले भूख हड़ताल करेंगे.’

रंजीत ने कहा कि मेरे पिता ने कभी अपनी उपलब्धियों का गुणगान नहीं किया. वह 1984 तक जीवित रहे लेकिन सरकार ने कभी उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया, जो उन्हें उनके निधन के 16 साल बाद मिला. प्रतिष्ठित लोगों को उस समय क्यों नहीं सम्मानित करते जब वे जीवित होते हैं.

आपको बता दें कि 1952 हेलसिंकी ओलंपिक में पहलवान जाधव ने 27 बरस की उम्र में इतिहास रचते हुए व्यक्तिगत खेल में ओलंपिक पदक (कांस्य) जीतने वाले पहले भारतीय बने थें.

तो ये है ममता कुलकर्णी के गुमनाम अंधेरों की कहानी

90 के दशक में अपनी बिंदास अदाओं और खूबसूरती के लिए चर्चित रहीं ममता कुलकर्णी अचानक फिल्मी दुनिया से गायब हो गई हैं. गुमनामी के अंधेरों में गायब ममता का जिक्र अब उनकी किसी फिल्म या गाना आने पर ही होता है.

साल 1972 में एक मराठी परिवार में पैदा हुईं ममता ने, बॉलीवुड में 1992 में 'तिरंगा' फिल्म से कदम रखा था. फिर इसके बाद वे फिल्म 'आशिक अवारा' में दिखाई दीं. फिर 'वक्त हमारा है', 'क्रांतिवीर', 'करण अर्जुन', 'सबसे बड़ा खिलाड़ी' और 'बाजी', 'घातक', 'चाइना गेट' जैसी फिल्मों में काम करके उन्होंने बहुत नाम कमाया.

ये बात तो शायद आप जानते ही होंगे कि साल 2002 में आई 'कभी तुम कभी हम' के बाद उन्होंने बॉलीवुड को अलविदा कह दिया.

हर दम विवादों में घिरी रहीं ममता

साल 1993 में स्टारडस्ट मैगजीन में टॉपलैस फोटोशूट कराकर वे काफी चर्चा में आ गई थीं. इसके लिए उन पर जुर्माना भी हुआ था. यही नहीं 'चाइना गेट' में काम करने को लेकर खबरें उड़ी थीं कि छोटा राजन के कहने पर ही उन्हें यह फिल्म मिली. हालांकि यह फिल्म फ्लॉप रही और इसका सुपरहिट गाना 'छम्मा-छम्मा' भी उर्मिला के खाते में चला गया. बता दें कि ममता की इस फिल्म के जरिये सीरियस इमेज दिखाने की कोशिश नाकाम रही.

ये डांस नंबर आज भी थिरकने को मजबूर करते हैं

ममता के कई गाने आज भी लोगों की जुबान पर हैं. जब भी ये गाने कहीं सुनने को मिलते हैं तो अचानक इस अभिनेत्री की याद ताजा हो जाती है.

– कोई जाए तो ले आए मेरी लाख दुआएं पाए, मै तो पिया की गली..

– मुझको राणा जी माफ करना गलती म्हारे से हो गई…

– भंगड़ा पा ले… आजा आजा…

– भोली-भाली लड़की…

ड्रग्स तस्करी करने वाले विजय गोस्वामी से जुड़ी

शुरुआत में ममता के अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन से संबंधों की खबरें थीं, लेकिन कुछ समय बाद ही उनका नाम ड्रग तस्करी करने वाले विजय गोस्वामी यानि कि विकी के साथ जुड़ गया. उनके साथ वे दुबई और केन्या में रह रही थीं.

उन्होंने एक चैनल पर कबूला था कि उन्होंने विकी से शादी नहीं की और वे विकी से जेल में मिलने गईं थीं. ममता ने इसी इंटरव्यू में बताया कि उन्होंने सोचा था कि वह कैसे भी उन्हें जेल से बाहर निकालकर रहेंगी. विकी जेल से बाहर भी आए, लेकिन ममता भारत नहीं लौट पाईं.

जिस दौरान विकी जेल में थे ममता ने अपने आपको ईश्वर भक्ति में डुबो लिया था. ममता ने अध्यात्म पर एक किताब भी लिखी है, जिसका नाम है – 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ एन योगिन’.

जोगन ममता

ममता तो बॉलीवुड से गायब ही थीं, लेकिन एक तस्वीर ने ममता कुलकर्णी को फिर से चर्चा में ला दिया. इसमें वह माथे पर तिलक लगाए दिख रही थीं. इसके बाद खबरें चलीं कि ममता अब जोगन बन गई हैं. उन्होंने एक चैनल से इंटरव्यू में कहा कि मैं बॉलीवुड को छोड़कर ध्यान में लग गई और मैंने ईश्वर में ध्यान लगा लिया. उसके बाद उनका मन ही नहीं किया कि ग्लैमर की दुनिया में लौटूं.

बॉलीवुड को अलविदा कहने का कारण

एक ऑनलाइन इंटरव्‍यू में बॉलीवुड को अलविदा कहने की वजह पर ममता ने आध्यात्म को बताया. बॉलीवुड में वापसी पर उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा था कि क्या घी को फिर से दूध बनाना मुमकिन है.

ममता कुलकर्णी भगोड़ा घोषित

ममता कुलकर्णी और उसके बॉयफ्रेंड विकी गोस्वामी को ठाणे की एक स्पेशल कोर्ट ने 2000 करोड़ रुपये ड्रग्स रैकेट केस में दोषी करार दिया है. पिछले महीने ही कोर्ट ने ममता को भगोड़ा घोषित करने के साथ ही उनकी संपत्तियों की कुर्की करने का आदेश दिया है.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘यह घोषित किया जाता है कि आरोपी ममता कुलकर्णी और विकी गोस्वामी दोषी हैं. दोनों आरोपियों की अचल संपत्ति को जब्त करने का आदेश दिया जाता है.’

एक पुलिस ऑफिसर के अनुसार, ‘एक साल हो चुका है और मुख्य आरोपी अभी तक फरार है. ममता अभी भी फरार चल रही हैं, जबकि उनके पार्टनर विकी गोस्वामी को केन्या में गिरफ्तार किया जा चुका है. बता दें कि ममता की लोकेशन को लोकेट करने की कोशिश कर रहे हैं.’

सुर्खियों में हैं ‘सीबीएफसी’ चेअरमैन पहलाज निहलानी

‘‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ के चेअरमैन पहलाज निहलानी लगातार विवादों में बने रहते हैं. वह कई फिल्मों में कई तरह के दृश्यों व संवादो पर आपत्ति जताकर विवाद पैदा कर चुके हैं. अब एक बार फिर पहलाज निहलानी विवादों से घिर गए हैं. इस बार विवाद की जड़ उनके द्वारा एक वेब पोर्टल को दिया गया इंटरव्यू है.

इस इंटरव्यू में पहलाज निहलानी ने कहा है कि, ‘फिल्मों में महज एक कोने में छोटे अक्षरों में शराब या सिगरेट पीना हानिकारक है, यह लिखकर सिनेमा के परदे पर कलाकार को सिगरेट या शराब पीते हुए नहीं दिखाया जा सकता.’’ यदि पहलाज निहलानी ऐसा करने में सफल हो जाते हैं, तो अब कोई भी फिल्मकार शरतचंद्र के उपन्यास ‘‘देवदास’’ पर फिल्म नही बना सकेगा. परिणामतः इस बयान के बाद बॉलीवुड में कई तरह की बातें की जा रही हैं.

तो दूसरी तरफ खबर गर्म है कि पहलाज निहलानी को पदमुक्त किए जाने की तैयारी हो रही है. सूत्रों के मुताबिक ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ के सदस्यों की एक बैठक 28 जुलाई को तिरुअनंतपुरम में बुलाई गयी है. जहां पर इस मुद्दे पर कोई निर्णय लिया जा सकता है. सूत्रों की मानें तो पहलाज निहलानी को पदमुक्त कर फिल्मकार प्रकाश झा या चंद्रप्रकाश द्विवेदी को इस पद पर बैठाया जा सकता है.

उधर इस तरह की खबरों की चर्चाएं शुरू होने के बाद एक समाचार एजेंसी से बात करते हुए पहलाज निहलानी ने दावा किया इस बात की उन्हें कोई जानकारी नहीं है. पहलाज निहलानी ने कहा है, ‘‘अब तक मैंने सरकार की तरफ से इस तरह की योजना के बारे में नहीं सुना है. मुझे यकीन है कि मेरे शुभचिंतक अपनी सांसों पर काबू करके बैठे हुए हैं. जहां तक ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ के चेअरमैन पर मेरे बने रहने का सवाल है, तो मैं यह निर्णय सरकार पर छोड़ता हूं, जिसने जनवरी 2015 में मुझे इस कुर्सी पर बैठने के लिए कहा था. जब यह निर्णय हुआ था, तो मुझे आश्चर्य हुआ था. लेकिन मैंने तुरंत इस पद को स्वीकार करते हुए अपनी क्षमता के अनुरूप बेहतर काम करना शुरू किया. अब यदि मुझसे पद छोड़ने के लिए कहा जाता है, तो मैं बड़ी आसानी से यह काम करते हुए अपने उत्तराधिकारी को शुभकामनाएं दूंगा.’’

विवादों पर पहलाज निहलानी ने कहा, ‘‘मैं सिर्फ अपना काम कर रहा हूं. मैं अपने सेंसर के नियम नहीं लाद रहा. जो सेंसर की गाइड लाइन्स हैं, उन्हीं का पालन कर रहा हूं. यदि गाइड लाइन्स बदली जाती हैं, तो उन्हें लागू करने में मुझे खुशी होगी. लेकिन तब तक मैं अपना काम करता रहूंगा. मैं तो यही कहूंगा कि मेरे काम करने के तरीके को स्वीकार करें या सरकार मुझसे छुटकारा पाने का इंतजार करें.’’

खैर, देखना यह है कि जुलाई माह जाते जाते ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ में क्या बदलाव करता है.

क्या है ये दिवालियापन कानून?

सरकार इंडिविजुअल्स को दिवालिया घोषित करने की ऐसी प्रक्रिया तैयार करने जा रही है जो आर्थिक संकट के दलदल में फंसने के बजाय उन्हें इससे निकलने में मदद करेगी. नए नियम के तहत वक्त पर कर्ज की रकम नहीं चुका पानेवालों को आसान मौके दिए जाएंगे और उन्हें बैंक को एकमुश्त पैसे देने को बाध्य नहीं किया जाएगा. इसके पीछे मकसद प्रक्रिया को ज्यादा मानवीय बनाना है क्योंकि नए नियमों का वास्ता किसानों और किराना दुकानदारों से लेकर मध्यवर्ग के वेतनभोगियों से होगा जो रोजगार छिनने जैसे उचित कारणों की वजह से वक्त पर पैसे जमा नहीं करा पाते हैं.

इससे बड़ा सामाजिक कलंक जुड़ा है. इसलिए आप दंड देने को ही आतुर नहीं हो सकते. लोगों को अपना जीवन फिर से पटरी पर लाने का मौका दिया ही जाना चाहिए.'

व्यक्तिगत दिवालियापन यानी इंडिविजुअल इन्सॉल्वंसी को लेकर नियम तो 100 साल पहले बने हैं, लेकिन उनका संयमपूर्वक इस्तेमाल पिछले कुछ दशकों से ही हो रहा है. ज्यादातर मामले जिला जजों के तहत आते हैं. हालांकि, बैंक अभी बकाया वसूलने के मकसद से बने सिक्यॉरिटाइजेशन ऐंड रीकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनैंशल ऐसेट्स ऐंड एनफोर्समेंट ऑफ सिक्यॉरिटी इंट्रेस्ट ऐक्ट (सरफेसी) के तहत डेट रिकवरी ट्राइब्युनल्स का रुख करते हैं.

पिछले साल संसद में पारित इन्सॉल्वंसी ऐंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) में लोगों को दिवालिया घोषित किए जाने का प्रावधान किया गया है जबकि कार्रवाई को अब भी कॉर्पोरेट सेक्टर और स्टार्ट-अप्स तक ही सीमित रखा गया है. कंपनी मामलों के मंत्रालय और इन्सॉल्वंसी ऐंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया ने इंडिविजुअल्स और पार्टनरशिप फर्मों की मदद के लिए नियम बनाने पर विचार-विमर्श शुरू कर दिया है.

हम आपको बता देना चाहते हैं कि वर्किंग ग्रुप कई पहलुओं पर विचार कर रहा है जिनमें काउंसलिंग को अनिवार्य बनाया जाना शामिल है, जैसा कि सिंगापुर में होता है. इसी तरह, कानूनी तंत्र तक पहुंच और आसान बनाने की जरूरत है. एक सूत्र ने बताया, 'हमें एक उपयुक्त ढांचे की जरूरत है जो वैसे लोगों को मदद मुहैया कराए जो पहले से ही संकट में हैं. साथ ही, राज्य संबंधी कानूनों पर भी काम करना होगा.'

मंत्र शक्ति से चीन को नष्ट करेगा आरएसएस

अब किसी को घबराने या चीन से डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि आरएसएस के एक वरिष्ठ पदाधिकारी इंद्रेश कुमार ने एक पौराणिक आइडिया, एक खास मंत्र का जाप दिया है जिसे अगर सभी देश वासी नियमित पढ़ें तो चीन नाम की आसुरी शक्ति से निबटा जा सकता है. इंद्रेश कुमार की मानें तो यह मंत्र सभी को घरों मे पूजा अर्चना करते वक्त जपना है. मुसलमान इस मंत्र को नमाज के पहले या साथ पढ़ सकते हैं.

जाहिर है इससे शंकर और अल्लाह दोनों की ताकत इकट्ठा होकर नास्तिक चीन को सबक सिखा देगी कि विज्ञान–फिज्ञान, अस्त्र-शस्त्र और सैन्य शक्ति सब मिथ्या है, कारगर है तो वह दैवीय चमत्कारिक शक्ति जो हिमालय तरफ कहीं है तो, पर बढ़ रहे पापों के चलते प्रकट होने में हिचकती है. अगर वह सामने आ गई तो उसके प्रति भक्तों की जिज्ञासा और आस्था खत्म हो जाएंगे और पंडों की दुकानदारी खत्म हो जाएगी चूंकि वह न होकर भी बनाए रखी जानी है इसलिए यह नया मूर्खतापूर्ण अंधविश्वास परोस दिया गया है जिससे धर्म और चमत्कारों की डूबती दुकानों को मंदी से उबरने में सहूलियत रहे.

भारत तंत्रिकों मांत्रिकों का देश है जहां सांप के काटे जाने पर लोग अस्पताल नहीं बल्कि झाड़ फूंक कराने गुनिया या ओझा के पास जाते हैं और जब पीड़ित मर जाता है तो अस्पताल जाकर हल्ला मचाने लगते हैं कि डॉक्टरों की लापरवाही से हमारे सगे बाले की मौत हो गई. हमारे महान देश में टेंडर हासिल करने ठेकेदार तांत्रिक को चढ़ावा चढ़ाते हैं, हमारे नेता चुनाव जीतने वोट मांगने जाने से पहले किसी प्रसिद्ध मंदिर मे जाकर तांत्रिक अनुष्ठान कराते हैं, तंत्र मंत्र की महिमा धर्म की तरह अपरमपार है.

हालत तो इतनी दयनीय है कि तंत्रिकों के इश्तिहार चैनल्स और अखबारों की कमाई का बड़ा जरिया हो गए हैं इन विज्ञापनो में ग्यारंटी से कहा जाता है कि तंत्र मंत्र से मनचाहा प्यार मिलता है, रूठा और नाराज जीवन साथी मान जाता है, छात्र बिना पढ़े इम्तिहान पास कर सकते हैं, आप चाहें तो किसी को भी वश में कर सकते हैं और तो और दुश्मन भी आपके पावों में लोट लगाने लगता है. छोटे मोटे मंत्र से अगर वह न माने तो इन सिद्ध पुरुषों के पास एक अदभुद सिद्धि या विद्या उन्हें जान से मारने की भी होती है जिसकी फीस भी तगड़ी होती है इसे मूठ मारनी विद्या कहा जाता है.

यकीन से परे इन ठगों का बाजार और पहुंच दोनों चाइनीज उत्पादों से बहुत ज्यादा हैं जिनके बहिष्कार की बात कानून होते हुए भी करना एक संगीन गुनाह है. इंद्रेश कुमार बेहतर होता बजाय देशवासियों का आव्हान करने के इन सिद्ध पुरुषों का सहारा लेते जो छोटी से छोटी लाज से लेकर अपनी हैसियत के मुताबिक पांच सितारा होटलों तक में पाये जाते हैं. जब इन्हें लाख दो लाख की दक्षिणा देकर चीन को भस्म किया जा सकता है तो सरकार बेवजह अरबों रुपए सीमा सुरक्षा पर खर्च करने की बेवकूफी कर रही है और देश वासी दहशत में हैं सो अलग. लेकिन आरएसएस का मकसद अब चीन के बहाने लोगों में अंधविश्वास फैलाने का है जिससे लोग घरों में पूजा पाठ तो करें ही साथ ही लुप्त हो रही मंत्र शक्ति के नाम पर भी लुटने तैयार हो जाएं.

त्रेता में राम और द्वापर में अर्जुन जब वाण चलाते थें तो मंत्र जरूर पढ़ते थें रामायण और महाभारत में बड़े विस्तार से बताया गया है कि कैसे अभिमंत्रित अस्त्र शस्त्र सीधे दुश्मन के सीने में जाकर लगते थे और वह यमलोक पहुंच जाता था. ये मंत्र मिसाइल दागने वाले हमारे सैनिकों को भी सिखाये जाने चाहिए जिससे चीन को एहसास हो कि भारत किस दम पर विश्व गुरु बनने की बात कर रहा है. एक निहायत ही मूर्खतापूर्ण, अवैज्ञानिक और अव्यवहारिक बात आरएसएस की तरफ से की जाना दर्शाता है कि देश को खतरा चीन या पाकिस्तान से कम इन ढकोसलों से ज्यादा है जो लोगों को दिमागी तौर पर गुलाम आर अपाहिज बनाए रखने का सनातनी टोटका है.

अगर मंत्र शक्ति कहीं है तो उसका इस्तेमाल उपज बढ़ाने और बेरोजगारी दूर करने में क्यों नहीं किया जाता ऐसी और भी कई समस्याएं और जरूरतें हैं जिन्हें तुरंत इस शक्ति की जरूरत है. अफसोस तो इस बात का है कि अगर ऐसा कुछ होता तो हर हर महादेव का और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते सैकड़ों अमरनाथ यात्री बस हादसों और आतंकियों की गोलियों का शिकार होकर मरते नहीं. फिर भी इंद्रेश कुमार निर्देश दे रहे हैं तो उनका दिया यह मंत्र सभी जरूर पढ़ें जिससे चीन को समझ आए कि भारत क्यों उससे पिछड़ा है.

यह नव निर्मित मंत्र बहुत आसान है– हे ऊपर वाले (अपने धर्म और इष्ट के अनुसार स्मरण करें यानि बुदबुदाएं) कैलाश, हिमालय और तिब्बत चीन की आसुरी शक्ति से मुक्त हों. अब अगर आप देश की रक्षा के लिए ये 13 अक्षर भी नहीं पढ़ सकते तो देश द्रोही नहीं तो क्या हैं यह आप खुद तय कर लें.

क्या आप भी करते रहते हैं डेस्कटॉप रिफ्रेश?

लोगों की आदतों में यह शुमार है कि वे माउस को राइट क्लिक कर रिफ्रेश करने लगे हैं. ऐसा मानना है कि 10 में से 9 विंडो यूजर्स जमकर रिफ्रेश करते हैं. कहा जाता है कि सभी विंडो यूजर्स के बीच रिफ्रेश कंप्यूटर की शायद सबसे बड़ी पहेली है.

कई बार शायद रिफ्रेश करने की जरूरत पड़ती होगी लेकिन ज़्यादातर ऐसे लोग हैं जो जानते भी नहीं कि रिफ्रेश करने से क्या होता है. कुछ लोग तो इसलिए करते हैं कि पास में बैठे और लोग भी कर रहे होते हैं. कुछ लोगों को लगता है कि इससे रैम रिफ्रेश हो रहा है तो कई लोगों को लगता है कि इससे कंप्यूटर स्मूद और फास्ट चलेगा.

कई लोग तो कम से कम 30 सेकंड तक रिफ्रेश करते रहते हैं. ज्यादातर लोगों ने F5 बटन का रिफ्रेश का शॉटकर्ट अपना लिया है. कई लोग इस बटन देर तक दबाए रहते हैं.

आखिर रिफ्रेश करने से कंप्यूटर पर क्या असर होता है?

रिफ्रेश करने से डेस्कटॉप पर जो आइकन होते हैं उनमें हरकत होती है. इसके अलावा कुछ और नहीं होता है. इससे रैम रिफ्रेश नहीं होता है. रिफ्रेश करने से आपका पीसी भी सरपट नहीं भागता है. डेस्कटॉप रिफ्रेश करने से कंप्यूटर के परफॉर्मेंस पर कोई असर नहीं पड़ता है.

क्यों हैं ऐसे रिफ्रेश टूल

रिफ्रेश टूल डेस्कटॉप के आइकन को री-डिस्प्ले करने के लिए होता है. कई बार आप डेस्कटॉप के आइकन में बदलाव करते हैं तो वे तत्काल दिखते नहीं हैं. ऐसे में जब रिफ्रेश करते हैं तो सारे आइकन डेस्कटॉप पर दिखने लगते हैं.

अगर आपके डेस्कटॉप पर आइकन हैं तो इसे एल्फाबेटिकली सेट कर सकते हैं. सेट करने के बाद अगर कोई नया आइकन जोड़ते हैं तो वह सबसे नीचे आ जाता है. ऐसे में जब आप रिफ्रेश करते हैं तो नया आइकन भी उस क्रम में सेट हो जाता है. इसके अलावा रिफ्रेश का कोई काम नहीं होता है.

लगातार रिफ्रेश क्यों?

विंडो क्लब का कहना है कि रिफ्रेश करने वाले लोग कंपल्सिव डिसॉर्डर से पीड़ित होते हैं. ऐसे लोग बेवजह चीज़ो की जांच करते रहते हैं. यह आदत केवल आम लोगों में ही नहीं बल्कि कंप्यूटर इंजीनियरो में भी होती है. कई इंजीनियर भी F5 बटन को लेकर मोहग्रस्त होते हैं. विंडो क्लब का कहना है कि यह नासमझी के सिवा कुछ भी नहीं है और इसे आदत को ख़त्म करने की जरुरत है.

ऐसे में अगर आप भी रिफ्रेश करने की आदत और मिथ से पीड़ित हैं तो इसे बेफिक्र होकर बंद कर दीजिए. इससे आप अपना केवल टाइम ही बर्बाद करते हैं. आप अगर किसी को लगातार रिफ्रेश करते देखें तो उसे बता सकते हैं कि इसका मतलब क्या होता है.

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