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तैयारी मिलन की रात की

जीवन के कुछ बेहद रंगीन पलों, जिन की कल्पना मात्र से धड़कनें तेज हो जाती हैं और माहौल में रोमानियत छा जाती है, में से एक है शादी की पहली रात यानी मिलन की वह रात जब दो धड़कते जवां दिल तनमन से मिलन को तैयार होते हैं.

चाहे किसी भी उम्र का कोई भी व्यक्ति क्यों न हो? वह अपनी पहली रात की यादों की खुशबू को हमेशा अपने जेहन में बसाए रखना चाहता है. मिलन की यह रात एक प्रेम, रोमांस और रोमांच तो पैदा करती ही है साथ ही अगर सावधानीपूर्वक इस के आगमन की तैयारी न की जाए तो यह पूरे जीवन के लिए टीस बन कर रह जाती है. जीवन की इस खास रात को यादगार बनाने के लिए अगर थोड़ा ध्यान दिया जाए तो बेशक यह रात हमेशाहमेशा के लिए खास बन जाएगी.

घूंघट में लिपटी, फूलों की सेज पर बैठी दुलहन के पारंपरिक कौंसैप्ट से अलग बदलाव आने लगे हैं. अब तो युवा शादी तय होते ही बाकायदा इसे सैलिब्रेट करने की योजना में विवाह से पहले ही जुट जाते हैं.

रोमानियत और रोमांच की इस रात को अगर थोड़ी तैयारी और सावधानी के साथ मनाया जाए तो जिंदगी फूलों की तरह महक उठती है वरना कागज के फूल सी बिना खुशबू हो जाती है. दो लफ्जों की यह कहानी ताउम्र प्यार की सुरीली धुन बन जाए इस के लिए कुछ बातों का जरूर खयाल रखें.

मुंह की दुर्गंध करें काबू : यह समस्या किसी को भी हो सकती है. मुंह से दुर्गंध आना एक आम समस्या है पर यही समस्या मिलन की रात आप के पार्टनर पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है. चूंकि नवविवाहितों को इस खास रात बेहद करीब आने का अवसर मिलता है. ऐसे में थोड़ी सी भी लापरवाही आप के पार्टनर के मन में आप के लिए खिन्नता व दूरी पैदा कर सकती है. इसलिए बेहतर है कि अगर आप के मुंह से दुर्गंध आती है तो पहले ही इस का बेहतर इलाज करा लें या फिर इसे दूर करने के लिए मैंथौल, पीपरमैंट या फिर सुगंधित पानसुपारी आदि लें. आप बेहतर क्वालिटी के माउथ फ्रैशनर का भी प्रयोग कर सकते हैं.

सैंट का प्रयोग करें : कहते हैं शरीर की सुगंध सामने वाले को सब से ज्यादा प्रभावित करती है. पसीने के रूप में शरीर से निकलने वाली दुर्गंध आप की छवि खराब कर सकती है. मिलन की रात ज्यादातर लोग इसे ले कर गंभीर नहीं होते जबकि यह सब से अहम है. आप के तन की खुशबू सीधे आप के पार्टनर के मन पर प्रभाव डालती है जिस से मिलन का मजा दोगुना हो जाता है. शारीरिक दुर्गंध कोई बड़ी समस्या नहीं है. आजकल बाजार में आप की पसंद और चौइस के अनुसार ढेरों फ्लेवर व विभिन्न ब्रैंड्स के डिओ उपलब्ध हैं.

‘आप चाहें तो अपने पार्टनर की पसंद पूछ कर उसी ब्रैंड का डिओ, सैंट, स्पे्र आदि इस्तेमाल कर सकते हैं. इस के दो फायदे हैं एक तो आप की सकारात्मक इमेज बनेगी दूसरे पसीने की दुर्गंध से बचेंगे, जिस से आप की पार्टनर आप से खुश भी हो जाएगी.

अनचाहे बालों से मुक्ति : कई बार अनाड़ीपन में पहली रात का मजा किरकिरा हो जाता है. लापरवाही और बेफिक्री आप को इम्बैरेंस फील करा सकती है. बोयोलौजिकली हमारे शरीर के हर हिस्से में बाल होते हैं जिन में गुप्तांगों के बाल भी शामिल हैं. मिलन की रात से पहले ही अपने शरीर के इन अंगों के बालों को अवश्य हटा लें. यह न केवल हाइजिनिक दृष्टि से जरूरी है बल्कि यह कम्फर्टेबिलिटी का पैमाना भी है. बाजार में कई तरह के हेयर रिमूवर व क्लीनर मिलते हैं, जिन से आसानी से इन बालों को रिमूव किया जा सकता है. अगर इम्बैरेंस होने से बचना है तो इस बात का खयाल अवश्य रखें.

मासिक धर्म न आए आड़े : कई बार ऐसा होता है कि मिलन की रात वाले दिन ही मासिक धर्म एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आ कर आप के हसीन सपनों पर पानी फेर देता है. इस रात मासिक धर्म आप के मिलन पर भारी न पड़े, इस के लिए जरूरी है कि अगर आप के मासिक धर्म की तिथि इस दौरान है तो पहले ही डाक्टर से मिल कर इस का समाधान कर लें. माहवारी ऐक्सटैंड या डिले करने वाली दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं. डाक्टर की सलाह से उन का उपयोग करें.

कुछ यों करें साथी को तैयार

–       कई बार मिलन की हड़बड़ी में पार्टनर की भावनाओं की परवा किए बगैर युवा गलती कर बैठते हैं. इसलिए जब तक साथी मिलन के लिए पूरी तरह तैयार न हो उस पर बिलकुल दबाव न डालें.

–       बेसब्र होने के बजाय धीरज से पार्टनर के पास जाएं. बातचीत करें. उस के शौक, चाहत, लक्ष्य आदि के बारे में बात करें.

–       अगर पार्टनर अपने अतीत के बारे में स्वयं कुछ बताना चाहे तो ठीक अन्यथा कुरेदकुरेद कर उस के अतीत को जानने का प्रयत्न न करें.

–       पार्टनर के हावभाव, तेवर व आंखों की भाषा पढ़ने की कोशिश करें, उसे जो पसंद हो, वही करें. अपनी चौइस उस पर न थोपें.

–       आप की पार्टनर अपने घर को अलविदा कह कर आप के घर में  सदा के लिए आ गई है, ऐसे में जल्दबाजी में संबंध बनाने के बजाय उस का विश्वास जीतने की कोशिश करें व सामीप्य बढ़ाएं.

– संभव हो तो अपने परिवार के सदस्यों के बारे में उस की पसंदनापसंद, स्वभाव, प्रवृत्ति तथा घर के तौरतरीकों के बारे में हलकीफुलकी बातें कर सकते हैं.

–       पार्टनर की कमियां निकालने के बजाय उस की खूबियों की चर्चा करें, फिर देखिए मिलन की रात कैसे सुपर रात बनती है.

इन बातों का भी रखें ध्यान

–  अपने बैडरूम का दरवाजाखिड़की अच्छी तरह बंद करें. उन्हें खुला बिलकुल न छोड़ें.

– ड्रिंक न करें, जरूरी हो तो ओवरडोज से बचें. नशा सारी खुमारी पर पानी फेर सकता है.

– कमरे में तेज रोशनी न करें. हलके गुलाबी या रैड लाइट वाले जीरो वाट के बल्ब का इस्तेमाल करें.

– पार्टनर के साथ जोरजबरदस्ती बिलकुल न करें. उसे प्यार से तैयार करें. पहले बातचीत से नजदीक आएं फिर मिलन के लिए आलिंगनबद्ध करें व बांहों के आगोश में समा जाएं.

– भारीभरकम वैडिंग गाउन, लहंगे, साड़ी पहनने से बचें. हलकेफुलके नाइट गाउन को तरजीह दें. सैक्सी अंत:वस्त्र ऐसे में माहौल को रोमानियत प्रदान करते हैं.

–  रूम फ्रैशनर का प्रयोग करें पर जरूरत से ज्यादा नहीं. हो सकता है आप के पार्टनर को इस से ऐलर्जी की समस्या हो.

–  बैड की पोजिशन जरूर चैक करें. ज्यादा आवाज करने वाले बैड आप को इम्बैरेंस कर सकते हैं.

मौत का खेल खेलने वाला मास्टर

4 मार्च, 2017 की रात लैंडलाइन फोन की घंटी बजी तो नाइट ड्यूटी पर तैनात एसआई सुरेश कसवां ने रिसीवर उठा कर कहा, ‘‘कहिए, हम आप की क्या सेवा कर सकते हैं?’’

‘‘साहब, मैं खेरूवाला से यूनुस खान बोल रहा हूं. मेरे दोस्त जसवंत मेघवाल पर अज्ञात लोगों ने जानलेवा हमला कर दिया है. साहब, कुछ करिए, उस के साथ महिलाएं और बच्चा भी है.’’ डरेसहमे स्वर में यूनुस खान ने कहा था.

‘‘ठीक है, अपने दोस्त की लोकेशन बताओ, पुलिस हरसंभव मदद करेगी.’’ सुरेश कसवां ने कहा.

यूनुस खान ने लोकेशन बताई तो 5 मिनट में ही सुरेश कसवां सिपाहियों के साथ हाथियांवाला खैरूवाला मार्ग स्थित घटनास्थल पर पहुंच गए. पुलिस की गाड़ी को देख कर सरसों के खेत में छिपा एक आदमी भागता हुआ सुरेश कसवां के सामने आ कर खड़ा हो गया. उस ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, ‘‘साहब, हमें बचा लीजिए. वे दोनों मेरे परिवार को खत्म कर देना चाहते हैं. उन्होंने हमारे ऊपर बरछीतलवारों से हमला कर दिया है. मैं तो उन्हें चकमा दे कर भाग आया, पर मेरी सास, पत्नी और बेटा उन के कब्जे में है.’’

इतना कह कर डरेसहमे उस आदमी ने अपने दोनों हाथ जोड़ कर एसआई सुरेश कसवां के सामने किए तो चांदनी रात में उस के हाथों से टपकता हुआ खून उन्हें साफ दिखाई दे गया.

मामला काफी गंभीर था. पुलिस फोर्स के सामने 2 महिलाओं और एक बच्चे की सकुशल बरामदगी चुनौती बन गई. एक पल गंवाए बिना सुरेश कसवां ने उसी मार्ग पर खड़ी कार ढूंढ निकाली, जिस में पीछे की सीट पर 28-29 साल की एक युवती गंभीर हालत में घायल पड़ी थी. अगली सीट पर दो-ढाई साल का एक बच्चा गुमसुम बैठा था. उस की भरी हुई आंखें बता रही थीं कि कुछ देर पहले तक वह जारजार रोया था.

सुरेश कसवां ने घायल युवती की नब्ज टटोली तो उन्हें लगा कि इस की सांसें चल रही हैं. घायल आदमी और युवती को ले कर पुलिस टीम तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंची, जहां डाक्टरों ने उस घायल युवती की जांच की तो पता चला कि वह मर चुकी है. घायल व्यक्ति को भरती कर के उस का इलाज शुरू कर दिया गया.

यह घटना राजस्थान के जिला श्रीगंगानगर की सादुल शहर तहसील में 4 मार्च, 2017 की आधी रात को घटी थी. घायल व्यक्ति का नाम जसवंत मेघवाल था और जो महिला मर गई थी, वह उस की पत्नी राजबाला थी. कार में मिला बच्चा उसी का बेटा रुद्र था.

इस के बाद थाना सादुल शहर के थानाप्रभारी भूपेंद्र सोनी के निर्देश पर जसवंत मेघवाल के बयान के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ अपराध संख्या 56/17 पर भादंवि की धाराओं 302, 307, 323, 342 हरिजन उत्पीड़न और धारा 34 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. जसवंत की सास परमेश्वरी का अभी तक कुछ अतापता नहीं था. सुबह उस की तलाश में पुलिस टीम घटनास्थल पर पुन: पहुंची तो सड़क पर खड़ी कार से लगभग 200 मीटर दूर परमेश्वरी का लहूलुहान शव पुलिस को मिल गया. इस के बाद अपनी काररवाई कर पुलिस ने परमेश्वरी और उस की बेटी राजबाला की लाश को पोस्टमार्टम करा कर दोनों शव घर वालों को सौंप दिए गए.

दोनों हत्याओं की जानकारी पा कर श्रीगंगानगर के एसपी राहुल कोटकी सादुल शहर पहुंच गए थे. चूंकि इस मामले में हरिजन एक्ट लगा था, इसलिए इस मामले की जांच डीएसपी दिनेश मीणा को सौंपी गई.

स्वास्थ्य केंद्र में उपचार करा रहे जसवंत मेघवाल ने अपने बयान में बताया था कि उस ने सालासर बालाजी धाम में बेटे रुद्र मेघवाल का मुंडन कराने की मन्नत मांगी थी. इसीलिए 2 मार्च की सुबह उस ने अपनी सास परमेश्वरी से फोन पर इस बारे में बात की तो उन्होंने चलने के लिए हामी भर दी. तब वह 3 मार्च की रात अपनी कार से सास परमेश्वरी, पत्नी राजबाला और बेटे रुद्र को ले कर निकल पड़ा.

लगभग 10 किलोमीटर चलने पर 2 लोगों ने हाथ का इशारा कर कार रोकने को कहा तो उस की सास ने उन लोगों को अपना परिचित बता कर कार रुकवा दी. उस की सास ने उन दोनों को भी पिछली सीट पर अपने पास बैठा लिया. वह कुछ दूर ही गया था कि उन अज्ञात लोगों ने खंजर निकाला और उस पर तथा उस की पत्नी राजबाला पर हमला कर दिया.

अचानक हुए हमले से वह घबरा गया और ड्राइविंग सीट से कूद कर नजदीक के खेत में जा छिपा. इस के बाद उस ने अपने मित्र यूनुस खान को मोबाइल से फोन कर के इस घटना के बारे में बता कर मदद मांगी.

उस ने रोते हुए कहा था, ‘‘साहब, कुछ दिनों पहले भी मेरी सास ने मुझ पर हमला करवाया था, तब मैं बच गया था. कल रात हुआ हमला भी मेरी सास द्वारा करवाया गया था. वह मेरी जायदाद हड़पने के लिए मुझे मरवाना चाहती थी.’’

जांच अधिकारी दिनेश मीणा ने जसवंत के बयान पर गौर किया तो उन्हें संदेह हुआ. जसवंत हमले को सास की साजिश बता रहा था, जबकि सास खुद मारी गई थी. इस से उन्हें जसवंत के आरोप बेबुनियाद लगे थे. उन की नजर में वही संदिग्ध हो गया. उस के दाहिने हाथ पर मामूली खरोंच थी, जबकि बाएं हाथ पर थोड़ा आड़ेतिरछे गहरे घाव थे.

दिनेश मीणा ने जसवंत के हाथों के जख्मों के बारे में डाक्टरों से राय ली तो उन का संदेह यकीन में बदलने लगा. डाक्टरों का कहना था कि खंजर के वार आड़ेतिरछे थे, जो मात्र बाएं हाथ पर थे. दाहिने हाथ पर मात्र खरोंच के निशान थे. अगर कोई वार करता तो गहरे घाव होते. घावों को देख कर यही लगता है कि खुद ही वार किए गए थे.

दिनेश मीणा ने हमले को जर, जोरू और जमीन के तराजू पर तौला तो उद्देश्य भी सामने आ गया. कत्ल के पीछे परमेश्वरी की बेशकीमती खेती की जमीन थी. राजबाला के कत्ल की वजह उस का अनपढ़, साधारण रंगरूप और फूहड़ होना था. पढ़ालिखा जसवंत राजबाला की मौत के बाद किसी सुंदर पढ़ीलिखी युवती से विवाह करना चाहता था.

दिनेश मीणा ने स्वास्थ्य केंद्र में उपचार करा रहे जसवंत के पास जा कर पूछा, ‘‘कहो जसवंत, कैसे हो? तुम्हारी तबीयत कैसी है?’’

‘‘साहब, हमलावरों ने अपनी समझ से तो मुझे मार ही डाला था, पर संयोग से मैं बच गया. हाथ में हुए घाव बहुत गहरे हैं. असहनीय पीड़ा हो रही है.’’ जसवंत ने कहा.

‘‘भई, तुम्हारी सास तो बड़ी शातिर निकली. अपने ही दामाद पर हमला करवा दिया. खैर, घबराने की कोई बात नहीं है, 2 दिनों में घाव ठीक हो जाएंगे. पूरा पुलिस विभाग तुम्हारी सुरक्षा में लगा है. मुझे आशंका है कि परमेश्वरी के गुंडे तुम पर यहां भी हमला कर सकते हैं, इसलिए मैं ने तुम्हारी सुरक्षा के लिए यहां गनमैन तैनात कर दिए हैं.’’

दिनेश मीणा ने घायल पड़े जसवंत के चेहरे पर गौर किया तो उन्हें जसवंत के चेहरे पर कुटिल मुसकान तैरती नजर आई. शायद वह सोच रहा था कि उस की समझ व सोच के अनुरूप ही पुलिस ने उस की कहानी पर विश्वास कर लिया है. उस की सुरक्षा की व्यवस्था भी कर दी है.

दूसरी तरफ दिनेश मीणा के होंठों पर भी मुसकराहट तैर रही थी कि पुलिस ने डबल मर्डर के आरोपी जसवंत की खुराफात बेपरदा कर उसे निगरानी में ले लिया है. अगले दिन जसवंत को स्वास्थ्य केंद्र से डिस्चार्ज करा कर थाने लाया गया. दिनेश मीणा ने उस से गंभीरता से पूछताछ की तो आखिर उस ने बिना हीलाहवाली के अपना अपराध स्वीकार कर लिया.

इस के बाद जसवंत को सादुल शहर के एसीजेएम की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे पूछताछ के लिए 8 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया गया. थाने में दर्ज मुकदमे में अज्ञात की जगह जसवंत मेघवाल का नाम दर्ज कर लिया गया था.

रिमांड के दौरान जसवंत मेघवाल से की गई विस्तृत पूछताछ में उस का ऐसा वीभत्स कृत्य सामने आया कि जान कर हर कोई दंग रह गया. उस ने अपनी सास की जमीन हड़पने और अनपढ़ पत्नी से छुटकारा पाने के लिए अपनों के ही खून से हाथ रंग लिए थे. टीवी पर आने वाले आपराधिक धारावाहिकों को देख कर उस ने घटना का तानाबाना बुना था.

सादुल शहर तहसील के 2 गांव अलीपुरा और नूरपुरा आसपास बसे हैं. अलीपुरा में जसवंत रहता था तो नूरपुरा में परमेश्वरी. दोनों गांवों के बीच लगभग 5 किलोमीटर की दूरी है. जसवंत 20 बीघा सिंचित खेती की जमीन का एकलौता मालिक था तो वहीं परमेश्वरी भी 35 बीघा सिंचित खेती की जमीन की मालकिन थी.

दोनों ही परिवार भले ही हरिजन वर्ग से  आते थे, पर दोनों ही परिवारों की गिनती धनाढ्य और रसूखदार परिवारों में होती थी. परमेश्वरी की एकलौती संतान राजबाला थी. लाड़प्यार में पली राजबाला का प्राथमिक शिक्षा के बाद शिक्षा से मोह भंग हो गया था, वहीं जसवंत के दिल में शिक्षा के प्रति गहरा लगाव था. यही वजह थी कि उस ने एमए, बीएड तक की पढ़ाई की थी.

विधवा परमेश्वरी जवान हो चुकी बेटी राजबाला के लिए वर की तलाश में जुटी थी, पर उस की जातिबिरादरी में उस की हैसियत का घर व वर नहीं मिल रहा था. किसी रिश्तेदार ने अलीपुरा निवासी उच्चशिक्षित जसवंत का नाम सुझाया तो यह रिश्ता उसे जंच गया.

बात चली तो राजबाला के अनपढ़ होने की बात कह कर जसवंत नानुकुर करने लगा. पर बिचौलिए रिश्तेदारों ने कार सहित लाखों का दहेज मिलने का लालच दे कर जसवंत को शादी के लिए तैयार कर लिया.

इस के बाद मार्च, 2012 में राजबाला और जसवंत की शादी हो गई. राजबाला के आने के साथ ही जसवंत का घर दहेज में मिले सामान से भर गया था. घर के दालान में खड़ी नईनवेली कार ने तो जसवंत के रुतबे में चारचांद लगा दिया था.

शादी के बाद जसवंत पैरा टीचर के रूप में नियुक्त हो गया तो खेतों को बटाई पर उठा दिया. कार और ठीकठाक पैसा होने की वजह से जसवंत के दोस्तों का दायरा बढ़ गया. कभी दोस्तों को अपने घर पर तो कभी दोस्तों के यहां होने वाली पार्टियों में वह पत्नी के साथ शामिल होता. दोस्तों की बीवियों के सामने उसे अपनी अनपढ़ पत्नी राजबाला फूहड़ नजर आती.

सच्चाई यह थी कि उच्च और शिक्षित समाज की होने वाली पार्टियों में सामंजस्य बिठा पाना राजबाला के बूते में नहीं था. उस का अनपढ़ और फूहड़ होना जसवंत के दिमाग पर हावी होने लगा. अब वह उस से ऊब चुका था, जिस की वजह से घर में रोजरोज किचकिच होने लगी.

उसी बीच राजबाला ने पहली संतान के रूप में बेटे को जन्म दिया, जिस का नाम रुद्र रखा गया. इस के बाद जसवंत राजबाला की उपेक्षा करने लगा. पति के प्यार व अपनत्व से वंचित राजबाला विद्रोही बन गई. उस ने अपनी मां को फोन कर के जसवंत के खिलाफ भर दिया.

कहा जाता है कि राजबाला ने मां से कहा था कि जसवंत किसी बाजारू लड़की के चक्कर में फंस कर न केवल पैसे बरबाद कर रहा है बल्कि उस की गृहस्थी उजाड़ रहा है. यह जान कर परमेश्वरी आगबबूला हो उठी और जसवंत के घर आ धमकी. आते ही उस ने कहा, ‘‘जवाईंराजा, क्यों पराई औरतों के चक्कर में पड़ कर अपना घर उजाड़ रहे हो? तुम यह जो कर रहे हो, ठीक नहीं है.’’

‘‘नहीं मांजी, ऐसी कोई बात नहीं है. जिस ने भी यह कहा है, सरासर झूठ है.’’ सफाई में जसवंत ने कहा.

पति की इस सफाई पर नाराज राजबाला भी बीच में कूद पड़ी. इस के बाद पतिपत्नी में लड़ाई होने लगी. परमेश्वरी भी बेटी का पक्ष ले कर लड़ रही थी.

‘‘मांजी, राजबाला अनपढ़ है, इसलिए मेरी पढ़ाई और रहनसहन को ले कर जलती है. आप इसे समझाने के बजाए मुझ पर ही आरोप लगा रही हैं.’’ मामले को संभालने की कोशिश करते हुए जसवंत ने कहा, ‘‘इस से ब्याह कर के तो मेरा भाग्य ही फूट गया है.’’

‘‘बेटा, यह तो तुम्हें शादी से पहले सोचना चाहिए था. मैं ने तुम्हारे साथ कोई जबरदस्ती तो नहीं की थी.’’ परमेश्वरी ने कहा.

‘‘तुम लोगों ने मेरे साथ धोखा किया है. कार और दहेज का लालज दे कर मुझे फंसा दिया.’’ कह कर जसवंत घर से बाहर निकल गया.

इस झगड़े ने जसवंत का दिमाग खराब कर दिया. अब राजबाला के साथ उस की मां परमेश्वरी भी उस के दिमाग में खटकने लगी. फिर क्या था, खुराफाती और उग्र दिमाग के जसवंत ने मांबेटी का अस्तित्व ही मिटाने का खतरनाक निर्णय ले लिया. अपने इस निर्णय को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उस ने हर पहलू को नफेनुकसान के तराजू पर तौला. इस के बाद किसी पेशेवर बदमाश से दोनों को सुपारी दे कर मरवाने का विचार किया. जसवंत का सोचना था कि अगर वह दोनों को मरवा देता है तो न केवल सुंदर और शिक्षित लड़की से शादी कर सकेगा, बल्कि परमेश्वरी की 35 बीघा बेशकीमती जमीन भी उस के बेटे रुद्र को मिल जाएगी.

अगर वह पकड़ा भी गया तो हत्या के आरोप में होने वाली 18 साल की जेल काटने के बाद बाहर आने पर बाकी की जिंदगी बेशुमार दौलत के सहारे ऐशोआराम से काटेगा. तब तक बालिग होने वाला बेटा रुद्र सोनेचांदी में खेलेगा. जसवंत को लगा कि उस के दोनों हाथों में लड्डू हैं.

महत्त्वाकांक्षी और ऐशोआराम की जिंदगी जीने की चाहत रखने वाला जसवंत अपने इस निर्णय पर बहुत खुश हुआ. उस ने पेशेवर हत्यारे की तलाश शुरू कर दी. काफी दिनों बाद नूरपुर का रहने वाला जसवंत का खास मित्र तुफैल खां मिला तो उस ने कहा, ‘‘अरे जसवंत भैया, बड़े परेशान दिख रहे हो? आज फिर भाभी से झगड़ा हो गया है क्या?’’

‘‘भाई, आप से क्या छिपाना, मांबेटी ने मेरा जीना हराम कर दिया है. मन करता है, आत्महत्या कर लूं. पर बेटे के मोह के आगे बेबस हूं. लगता है, मांबेटी को ही मारना पड़ेगा.’’ जसवंत ने कहा, ‘‘तुफैल भाई, तुम कोई ऐसा आदमी ढूंढो, जो पैसे ले कर मेरा यह काम कर दे.’’

‘‘जसवंत भाई, बहुत ही गंभीर मामला है. फंस गए तो जिंदगी तबाह हो जाएगी. सारी जिंदगी जेल में पड़े रहेंगे.’’

‘‘इतना घबराते क्यों हो, मैं हूं न. फंस भी गए तो पैसा पानी की तरह बहा दूंगा.’’ जसवंत ने कहा.

तुफैल 2 दिनों बाद कीकरवाली निवासी हैदर अली को साथ ले कर जसवंत से मिला. तीनों के बीच पैसों को ले कर बात चली तो हैदर और तुफैल ने 3 लाख रुपए मांगे. जबकि जसवंत एक लाख रुपए देने को तैयार था. आखिर डेढ़ लाख में सौदा तय हो गया. लेकिन उस समय पैसे की व्यवस्था न होने से जसवंत ने डेढ़ लाख रुपए का चैक तुफैल और हैदर को दे दिया. काम होने के बाद जसवंत को नकद पैसे देने थे.

व्यवस्था के लिए हैदर अली ने जसवंत से 20 हजार रुपए लिए. काम कब करना है, यह जसवंत को तय करना था. इस के बाद हनुमानगढ़ की एक दुकान से जसवंत ने 2 खंजर खरीद कर उन की धार तेज करवाई और हैदर अली को सौंप दिए.

इस के बाद जसवंत का ज्यादातर समय टीवी पर चलने वाले आपराधिक धारावाहिकों को देखने में बीतने लगा. जसवंत का सोचना था कि अपराधी अपनी गलती की वजह से पकड़े जाते हैं, पर वह इस तरह काम करेगा कि पुलिस उस तक पहुंच नहीं पाएगी.

आखिरकार जसवंत ने पत्नी और सास की हत्या की योजना बना डाली. इस के बाद उस पर खूब सोचाविचारा. उस की नजर में योजना फूलप्रूफ लगी. अपनी इसी योजना के अनुसार, 3 मार्च की सुबह चिकनीचुपड़ी बातें कर के उस ने अपनी सास को सालासर जाने के बहाने अपने घर बुला लिया.

जब सारी तैयारी हो गई तो जसवंत ने फोन कर के तुफैल को रात 10 बजे सालासर जाने की बात बता कर मुख्य सड़क पर काम निपटाने को कह दिया. तय समय पर जसवंत पत्नी राजबाला, सास परमेश्वरी और बेटे रुद्र को ले कर कार से चल पड़ा.

मुख्य सड़क पर मोटरसाइकिल से आए तुफैल और हैदर अली मिल गए. दोनों ने हाथ के इशारे से जसवंत की कार रुकवाई और कार में बैठ गए. कुछ दूर जाने के बाद हैदर और तुफैल ने खंजर निकाल कर परमेश्वरी पर वार किए तो जान बचाने के लिए वह दरवाजा खोल कर कूद पड़ी.

जसवंत ने भी कार रोक दी. तुफैल और हैदर अली ने नीचे उतर कर उस का काम तमाम कर दिया. इस के बाद राजबाला का भी काम तमाम कर दिया गया. दोनों को मार कर जसवंत ने अपने दोस्त युनुस को फोन कर के मनगढं़त कहानी सुना कर पुलिस से मदद की गुहार लगाई.

रिमांड अवधि के दौरान पुलिस ने जसवंत के दोनों साथियों तुफैल और हैदर अली को गिरफ्तार कर खंजर, कार और चैक बरामद कर लिया था. रिमांड अवधि समाप्त होने पर तीनों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भिजवा दिया गया.

ग्लैमर की चकाचौंध में फंसे जसवंत ने खुद ही अपनी गृहस्थी और जिंदगी बरबाद कर ली, साथ ही 2 भोलेभाले लोगों को भी हत्या जैसे अपराध में जेल भिजवा दिया. आखिर परमेश्वरी के मरने के बाद उस की सारी जायदाद उसे ही मिलनी थी. तीनों आरोपियों का भविष्य अब अदालत का निर्णय ही तय करेगा.?

– कथा पुलिस सूत्रों के आधार पर

आसाराम : अंधभक्ति का बाजार

राजस्थान के दूसरे सब से बड़े शहर जोधपुर की सेंट्रल जेल की बैरकों में सैकड़ों कैदी हैं. लेकिन सलाखों के पीछे अक्सर चहलकदमी करने वाले एक कैदी को दूसरे कैदी और जेल के कर्मचारी कुछ अलग ही निगाहों से देखते हैं. जेल मैन्युअल के हिसाब से यूं तो उस के पास भी जरूरत की चीजों के रूप में एक बाल्टी, मग्गा, थाली, कटोरी और गिलास है, लेकिन उस की दिनचर्या दूसरों से अलग है.

इस कैदी का नाम है आसाराम बापू. इस नौटंकीबाज कैदी के कारनामे जेल का हर कैदी जानता है, जेल प्रशासन भी. इस के बावजूद वह चाहता है कि जेल में भी उसे भगवान माना जाए. उसे पूजा जाए और हर कोई उस के इशारों पर नाचे.

ऐशोआराम की जिंदगी जीने वाले आसाराम बापू पर 3 साल पहले जब अपने  एक भक्त की मासूम बेटी की अस्मत रौंदने का आरोप लगा था तो भक्तों की ताकत और बेशुमार दौलत के गुरूर में यकीनन उस ने सोचा होगा कि वक्त के साथ गुबार ठंडा हो जाएगा. और अगर नहीं हुआ तो वह अपनी ताकत, रसूख और दौलत के बूते पर इसे दबा देगा. लेकिन बाजी पलट गई और यह स्वयंभू भगवान कानून के शिकंजे में फंस गया. ऐशपरस्त जिंदगी के आदी रहे, इस पाखंडी के चेहरे पर 3 साल सलाखों के पीछे रह कर अब बेबसी की झटपटाहट साफ झलकने लगी है. भविष्य को ले कर उस के चेहरे पर उदासी  का साया होता जरूर है, लेकिन भक्तों के रूप में अपने चेले चेलियों को देख कर उस की आंखें में चमक आ जाती है कि उस का वह बाजार अभी जिंदा है, जिस ने धर्म के चोले में उसे नायक बनाया.

भक्ति के नाम पर लोग अब भी कामधाम छोड़ कर उस वक्त सड़कों पर एकत्र हो जाते हैं, जब आसाराम को जेल से अदालत लाया ले जाया जाता है. आसाराम के लिए यही बड़ी खुशी की बात है कि उस का भक्ति बाजार आबाद है. दरअसल, धर्म के नाम पर अरबों का साम्राज्य खड़े करने वाले आसाराम की जब यौन शोषण की घिनौनी करतूत उजागर हुई थी तो वह पूरी बेशर्मी पर उतर आया था. उस ने अपनी सोच यह कह कर उजागर की कि ‘ताली एक हाथ से नहीं बजती’ ऐसी घटिया मानसिकता वाले बाबा ने न जाने कितनी तालियां बजाई होंगी.

जानकार बताते हैं कि आसाराम गजब के किरदार निभाना जानता है. बस अब उस की सब से बड़ी ख्वाहिश यही है कि किसी तरह जेल से बाहर आ जाए. यह बात अलग है कि तमाम जतन कर लेने के बाद भी अदालतें उसे जमानत नहीं दे रहीं.

अपनी बीमारी को ले कर वह कई बार नौटंकी कर चुका है. इतना ही नहीं उस ने जांच करने वाले चिकित्सकों को भी चकमा देने की कोशिश की. यकीनन वह सामदाम दंड भेद का इस्तेमाल कर के बौलीवुड गया होता तो उसे कादर खान सरीखा रोल जरूर मिल गया होता. उसे जेल से निकलने की जल्दी कुछ इस कदर है कि उस ने अदालत में जेल प्रशासन का झूठा पत्र तक पेश करवा दिया था. लेकिन जांच में पोल खुल गई और मुकदमा भी दर्ज हो गया. अंधभक्तों को आसाराम पर लगा आरोप भले ही झूठा लगे, लेकिन कानून की नजर में गंभीर अपराध है. इसलिए माननीय अदालत उस के अपराध के मद्देनजर अभी उसे जमानत देने के मूड में नहीं हैं.

गुजरे 3 सालों आसाराम जमानत पाने के लिए कई बार तिकड़म भिड़ा चुका है. कभी वह कहता है कि चक्कर आते हैं, कभी नींद न आने की बात कहता है तो कभी कोई बीमारी बताता है. अलगअलग विधाओं के आधा दर्जन से ज्यादा डाक्टर दिल्ली से ले कर जोधपुर तक उस के विभिन्न टैस्ट कर चुके हैं, लेकिन बीमारी किसी की पकड़ में नहीं आती. जाहिर है यह बहानेबाजियां अदालत को चकमा देने के लिए की जाती हैं. जेल प्रशासन को भी उस के इस तरह के ढोंग की आदत पड़ चुकी है. अदालत के आदेश पर आसाराम ने जेल में धार्मिक पुस्तकें और पूजा सामग्री जरूर हासिल कर ली है. वह आए दिन धार्मिक आडंबर दिखाने की कोशिश करता है. लेकिन उस की कोई युक्ति काम नहीं आ रही. कोई चमत्कार या तंत्रमंत्र होता तो वह सलाखों के पीछे ही क्यों जाता.

हालांकि बाबा के अंधभक्त उसे आज भी अपना भगवान ही मानते हैं. उसे पुलिस, जेल, कानून और मीडिया सब खलनायक नजर आते हैं. यह समझने में शायद उसे वक्त लग जाए कि यदि वह वास्तव में सही आचरण वाला कोई करामाती शख्स होता तो सलाखों के पीछे नहीं जाता.

आसाराम के भक्त जेल प्रशासन और स्थानीय पुलिस के लिए मुसीबत का सबब बने हुए हैं. दरअसल आसाराम को जब भी जेल से पेशी पर अदालत ले जाया जाता है, तो नजारा देखने वाला होता है. जेल और अदालत के बीच करीब ढाई किलोमीटर का फासला है. सड़कों के दोनों तरफ सुबह से ही आसाराम के भक्तों की भारी भीड़ जमा हो जाती है. इन में महिलाएं अधिक होती हैं.

यह संख्या कभी सैकड़ों तो कभी हजारों में होती है. भीड़ के मद्देनजर रास्ते का ट्रैफिक रोकना पड़ता है. अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात करना पड़ता है. इस का प्रभाव पूरे शहर पर पड़ता है और लोग जाम से जूझते हैं. आसाराम को एक वज्र वाहन से जेल से अदालत ले जाया जाता है. आगेपीछे पुलिस की गाडि़यां होती हैं.

भक्त घंटों इंतजार करते हैं. स्थिति तब हास्यास्पद होती है जब जाली के पीछे से देखते हुए आसाराम उन की तरफ आशीर्वाद की मुद्रा में हाथ हिलाता है. इतना ही नहीं महिलाएं ‘बापू…बापू…’ कहते हुए वाहन के पीछे दौड़ने लगती हैं. कोई रोती है तो कोई हाथ जोड़ती है. कोईकोई व्यक्ति तो सड़क पर ही दंडवत हो जाता है. आए दिन होने वाला यह अजीब तमाशा हर किसी को हैरान करता है.

जेल के गेट से ले कर अदालत तक ऐसा ही होता है. पुलिस अधिकारी कहते हैं कि कानून व्यवस्था बनाए रखना हमारी जिम्मेदारी है, इसलिए फोर्स लगानी पड़ती है. दूसरी तरफ जेल अधीक्षक विक्रम सिंह कहते हैं कि ‘आशाराम हमारे लिए आम कैदियों की तरह ही हैं, उसे कोई विशेष सुविधा नहीं दी जा रही.’

आसाराम के भक्त कब धरना प्रदर्शन करें और जाम लगा दें इस बात को कोई नहीं जानता, क्योंकि अक्सर वह ऐसा करते रहते हैं. वह हाथों में नारे लिखी तख्तियां और आसाराम की तस्वीरें लिए होते हैं. साथ ही ये लोग धर्म के साथ देशभक्ति का तड़का लगाने की भी कोशिश करते हैं. तख्तियों पर लिखा होता है, ‘साधु संतों का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान’, ‘हिंदू उदार हैं, लेकिन मूर्ख और कायर नहीं’, ‘संत का निदंक महाहत्यारा’, ‘संत की रक्षा देश की सुरक्षा’, ‘नहीं सहेंगे बापू का अपमान, दे देंगे हम अपनी जान’, ‘हिंदुस्तान पुकारता है बचाओ संतों की आनबानशान’, ‘सांच को आंच नहीं, झूठ के पैर नहीं होते’, ‘देशवासियों समय रहते जागो.’

ऐसा करने वाले महिला व पुरुषों के सिर पर लंबी टोपियां लगी होती हैं, जिन पर लिखा होता है ‘बापू जी निर्दोष हैं’, ‘सब का मालिक एक है.’ यह सब देख कर आसाराम की आंखों में जरूर चमक आ जाती है.

ऐसे भक्तों ने जेल की बाहरी दीवारों पर भी ऐसी तमाम बातें लिख डाली हैं. बाबा के अंधभक्तों की चाहत देखिए. वे चाहते हैं कि आसाराम को नाम ले कर न पुकारा जाए बल्कि आपसी वार्तालाप में भी उसे बापू कह कर संबोधित किया जाए. आसाराम और उस के बेटे का अंजाम क्या होगा. यह तो अभी कोई नहीं जानता, लेकिन इतना सब होने पर भी अंधभक्तों की भक्ति जरूर चौंकाने का काम करती है.

कलयुगी गुरु

फरवरी, 2017 के पहले सप्ताह में जयपुर के पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल से कुछ लोगों ने जो बताया, सुन कर वह दंग रह गए. उन से मिलने आए उन लोगों में से एक अधेड़ ने चिंतित स्वर में कहा था, ‘‘सर, रामगंज इलाके का एक टीचर काफी समय से उन बच्चों का यौनशोषण कर रहा है, जो उस के पास ट्यूशन पढ़ने आते थे. उस ने बच्चों की वीडियो क्लिपिंग भी बना रखी थी. वह बच्चों को धमकी देता था कि अगर उन्होंने किसी को यह बात बताई तो वह वीडियो सार्वजनिक कर देगा.’’

संजय अग्रवाल कुछ कहते, उस के पहले ही उस ने आगे कहा, ‘‘सर, उस टीचर ने वाट्सऐप के एक ग्रुप पर एक अश्लील वीडियो डाल दी है, जो वायरल हो रही है.’’

उस अधेड़ ने इतना कहा था कि उस के साथ आए एक अन्य आदमी ने कहा, ‘‘जिस बच्चे की वीडियो वायरल हो रही है, वह हमारे परिवार का है. उस वीडियो को देख कर बच्चे की मानसिक स्थिति काफी खराब हो गई है. बच्चा घर से बाहर नहीं निकल रहा है. साहब, हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रह गए हैं.’’

इस के बाद उस आदमी ने जेब से स्मार्ट फोन निकाल कर कमिश्नर साहब को वह अश्लील वीडियो दिखा दी. वीडियो देख कर संजय अग्रवाल ने पूछा, ‘‘वह टीचर इस तरह की गंदी हरकतें कब से कर रहा है?’’

‘‘सर, हमारे खयाल से यह गंदा खेल करीब 3 सालों से चल रहा है. इस की जानकारी हमें तब हुई, जब इस वीडियो के वायरल होने के बाद बच्चे से पूछा गया.’’ उसी आदमी ने कहा.

संजय अग्रवाल ने उन लोगों से टीचर का नामपता आदि पूछ कर डायरी में नोट करते हुए कहा, ‘‘यह बहुत ही गंभीर और संवेदनशील मामला है. अगर ऐसा हुआ है तो हम ऐसी हैवान मानसिकता वाले टीचर को कतई नहीं छोड़ेंगे. आप लोग थाना रामगंज जा कर रिपोर्ट दर्ज कराइए. मैं रामगंज थानाप्रभारी को आप की रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहे देता हूं.’’

इसी के साथ उन्होंने इंटरकौम पर पीए से कहा, ‘‘रामगंज एसएचओ से बात कराओ.’’

पीए ने पलभर बाद लाइन मिला कर कहा, ‘‘सर, रामगंज थानाप्रभारी लाइन पर हैं.’’

इस के बाद संजय अग्रवाल ने थाना रामगंज के थानाप्रभारी से कहा, ‘‘कुछ लोग आप के पास जा रहे हैं. इन की रिपोर्ट दर्ज कर के तुरंत काररवाई करें और मुझे रिपोर्ट करें.’’

संजय अग्रवाल ने उन लोगों को अपना मोबाइल नंबर दे कर थाना रामगंज भेज दिया और कहा कि अगर कोई परेशानी हो तो वे सीधे उन से बात कर लें. उस पीडि़त बच्चे के चाचा ने थाना रामगंज में बच्चों का यौनशोषण करने वाले टीचर रमीज के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. पुलिस ने यह मामला पोक्सो एक्ट के तहत दर्ज कर लिया. यह 7 फरवरी, 2017 की बात है.

रिपोर्ट दर्ज कर के थाना रामगंज के थानाप्रभारी अशोक चौहान ने इस बात की जानकारी पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल को दी तो मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त उत्तर (प्रथम) समीर कुमार दुबे, सहायक पुलिस आयुक्त रामगंज बाघ सिंह राठौड़ तथा थानाप्रभारी अशोक चौहान के नेतृत्व में 6 पुलिस टीमें बना कर आरोपी टीचर को गिरफ्तार करने का आदेश दिया.

पुलिस ने आरोपी टीचर रमीज के घर दबिश दी तो वही नहीं, उस का पूरा परिवार घर से फरार मिला. घर पर ताला लगा था. पड़ोसी भी रमीज तथा उस के घर वालों के बारे में कुछ नहीं बता सके. इस से पुलिस ने यही अनुमान लगाया कि वाट्सऐप पर वीडियो के वायरल होने के बाद रमीज और उस के घर वाले फरार हो गए हैं.

रमीज की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने उस के साथी टीचरों तथा अन्य लोगों से पूछताछ की. इस के अलावा पीडि़त बच्चे से भी मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की गई. शुरुआती जांच में पता चला कि टीचर रमीज ने कई अन्य बच्चों को भी उसी बच्चे की तरह शिकार बनाया था. उन बच्चों की भी रमीज ने वीडियो क्लिपिंग बना रखी थी. इसी के साथ यह भी पता चला कि उन्हीं वीडियो क्लिपिंग्स की बदौलत रमीज बच्चों से पैसे भी ऐंठता था.

मामला बेहद गंभीर था. इस तरह का शर्मनाक और हैवानियत भरा काम मानसिक रूप से विकृत आदमी ही कर सकता है. रमीज ने गुरु और शिष्य के रिश्ते को तारतार किया था, इसलिए पुलिस ऐसे टीचर को पकड़ने के लिए जीजान से जुट गई.

आखिर 9 फरवरी की शाम पुलिस ने उसे जयपुर से ही दिल्ली बाइपास रोड से पकड़ लिया. रमीज को थाना रामगंज ला कर सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने स्कूली बच्चों के यौनशोषण का अपना अपराध स्वीकार कर लिया. इस पूछताछ में बच्चों के यौनशोषण की जो कहानी सामने आई, वह इस प्रकार थी—

26 साल के रमीज का पूरा नाम रमीज राजा था. एमए, बीएड रमीज सन 2011 में जयपुर के रामगंज के 12वीं कक्षा तक के एक नामचीन प्राइवेट स्कूल में टीचर के रूप में नियुक्त हुआ तो उसे जल्दी ही स्कूल का वाइस प्रिंसिपल बना दिया गया था. कोएजुकेशन वाले इस स्कूल में वह अंगरेजी पढ़ाता था.

स्कूल में पढ़ाते हुए रमीज बच्चों को फेल करने की धमकी दे कर ट्यूशन पढ़ने का दबाव डालता था. फेल होने के डर से बच्चे उस के घर ट्यूशन पढ़ने आते थे. रामगंज में रहने वाला रमीज बच्चों को अपने घर के एक कमरे में अंदर से दरवाजा बंद कर के ट्यूशन पढ़ाता था. कुछ देर पढ़ाने के बाद वह उन्हें अश्लील वीडियो दिखाता था. इस के बाद वह बच्चों से कुकर्म करता था. खासतौर से वह 5 से 15 साल तक के बच्चों को अपना शिकार बनाता था.

पिछले 4-5 सालों से रमीज यह घृणित काम कर रहा था. वह बच्चे का यौनशोषण करते हुए मोबाइल फोन से वीडियो बना लेता था. इस के बाद वह वीडियो दिखा कर उसे सार्वजनिक करने की धमकी दे कर बच्चों का यौनशोषण तो करता ही था, साथ ही पैसे भी मंगवाता था. यही नहीं, वह उस बच्चे से दूसरे बच्चे के साथ यौनशोषण की वीडियो भी बनवाता था. बदनामी के डर से कई बच्चों ने घर से पैसे चोरी कर के उसे दिए तो कुछ ने सामान बेच कर दिए.

जनवरी, 2017 में कुछ पीडि़त बच्चों ने रमीज के कंप्यूटर की वह हार्डडिस्क निकाल ली, जिस में उन के कारनामे कैद थे. उस हार्डडिस्क को बच्चों ने स्कूल प्रशासन को सौंप दिया. स्कूल प्रशासन ने हार्डडिस्क में कैद उस के कारनामे को देख कर उसे 23 जनवरी को स्कूल से निकाल दिया. उन्होंने इस मामले की पुलिस को सूचना देने के बजाए दबा दिया.

रमीज की हरकतों से परेशान छात्र कई दिनों तक स्कूल प्रशासन से उस की शिकायतें करते रहे, लेकिन स्कूल प्रशासन ने उस के खिलाफ कोई काररवाई नहीं की. तब कुछ बच्चे अपने घर वालों के साथ घोड़ा निकास रोड स्थित रमीज के घर पहुंचे, जहां इस बात को ले कर रमीज के घर वालों से उन लोगों का झगड़ा हो गया.

पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई तो थाना रामगंज पुलिस मौके पर पहुंची. इस बीच रमीज भाग गया. पुलिस मामला शांत करा कर सभी को थाने ले आई. बच्चों और उन के घर वालों ने मामला दर्ज कराना चाहा, पर पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया. जांच की बात कह कर सभी को घर भेज दिया गया. इस के बाद लोग पुलिस कमिश्नर संजय अग्रवाल से मिले थे.

जांच में पता चला है कि इस से पहले रमीज को 2 स्कूलों से निकाला जा चुका था. उस के पिता प्रौपर्टी डीलिंग और नगीनों का काम करते थे. रमीज की गिरफ्तारी के बाद कई बच्चों ने हिम्मत कर के अपने घर वालों से अपने साथ हुए कुकर्म के बारे में बताया तो वे पुलिस थाने पहुंचे और रमीज के कुकृत्य की शिकायत की. 10 फरवरी की रात उस के खिलाफ दूसरा मुकदमा दर्ज किया गया था.

पुलिस ने रमीज से एक मोबाइल फोन और 2 पैन ड्राइव बरामद किए. उस के मोबाइल फोन से 76 क्लिपिंग्स बरामद हुई थीं. इस से पता चला है कि उस ने 5 से 15 साल के करीब 25 बच्चों का यौनशोषण किया था. उन में से कई बच्चे अब वयस्क होने वाले हैं. वैसे उस ने 11 बच्चों के यौनशोषण की बात स्वीकार की थी.

रमीज के मोबाइल में मिली क्लिपिंग्स देखने से साफ लग रहा था कि वे किसी अन्य व्यक्ति की मदद से बनाई गई थीं. ऐसे में पुलिस को इस बात की भी आशंका है कि रमीज का संबंध किसी पोर्नसाइट से हो सकता है. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि वह अश्लील क्लिपिंग्स बेचता तो नहीं था.

इस मामले में पुलिस की ओर से कोताही बरतने और स्कूल प्रशासन की ओर से मामला दबाए जाने के विरोध में 11 फरवरी को स्कूली बच्चों के घर वालों ने अन्य लोगों के साथ मिल कर थाना रामगंज पर प्रदर्शन किया. इन लोगों का आरोप था कि बच्चों के यौनशोषण का खुलासा होने के बाद भी पुलिस ने समय पर काररवाई नहीं की थी, इसलिए आरोपी टीचर ने तमाम सबूत नष्ट कर दिए हैं.

प्रदर्शनकारी मांग कर रहे थे कि अब इस मामले की जांच एसओजी के आईजी दिनेश एम.एन. से कराई जाए. उन का कहना था कि बच्चों ने जनवरी में ही रमीज के कंप्यूटर से हार्डडिस्क निकाल कर स्कूल प्रशासन को सौंप दी थी, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने मामले की सूचना पुलिस या बच्चों के घर वालों को देने के बजाए मामले को दबा दिया था. स्कूल से निकाले जाने के बाद 20 दिनों में आरोपी रमीज ने सबूतों को नष्ट कर दिया.

लोगों के आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने बच्चों का यौनशोषण करने वाले टीचर रमीज की करतूतों को छिपाने के मामले में 11 फरवरी को स्कूल के डायरेक्टर सरवर आलम को गिरफ्तार कर लिया था. इसी के साथ रमीज के कंप्यूटर से बच्चों ने जो हार्डडिस्क निकाल कर स्कूल प्रशासन को सौंपी थी, उसे बरामद करने के साथ स्कूल से कंप्यूटर, सीपीयू और डीवीडी बरामद की गई थी.

पुलिस ने रमीज से बरामद मोबाइल, पैन ड्राइव तथा स्कूल से बरामद हार्डडिस्क और स्कूल से जब्त कंप्यूटर, सीपीयू और डीवीडी को जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिया. पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि रमीज की करतूतों की जानकारी उस के घर वालों को थी या नहीं? इस बारे में पीडि़त बच्चों का कहना था कि रमीज के घर वालों को उस की इस करतूत की जानकारी थी.

पुलिस ने रमीज को कई बार रिमांड पर ले कर पूछताछ की. अंत में 20 फरवरी, 2017 को अदालत ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया था. डायरेक्टर सरवर आलम को भी पुलिस ने 14 फरवरी तक रिमांड पर रखा था. फिर उसी दिन उसे जमानत मिल गई थी.

इस मामले में आरोपी रमीज और सरवर आलम को कानून क्या सजा देगा, यह तो समय बताएगा. लेकिन चिंता की बात यह है कि जिस टीचर पर भरोसा कर के लोग अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए उसे सौंप देते हैं, अगर वही इस तरह की हरकत करे तो लोग बच्चों को कहां ले जाएं.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

आखिर किसने लीक की अक्षय की ‘टॉयलेट..’

अक्षय कुमार की फिल्म ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’ कुछ दिन पहले ऑनलाइन लीक होते-होते बची. खिलाड़ी कुमार और भूमि पोडनेकर की ये मोस्ट अवेटेड फिल्म एक जिम ट्रेनर को एक पेन ड्राइव में मिली. लेकिन फिल्म लीक नहीं हो पाई.

इस खबर के बाद लोगों के मन में सवाल ये उठा कि आखिर ये हुआ कैसे? आखिर कौन है वो शख्स जिसने इतनी बड़ी गलती की. अगर आप सोच रहे हैं कि इसमें किसी बाहर वाले का हाथ है तो आप गलत हैं.

अक्षय कुमार की फिल्म के लीक होने की खबर से पूरी फिल्म इंडस्ट्री में खलबली मच गयी. दरअसल फिल्म के प्रोड्यूसर नीरज पांडे के बिजनेस पार्टनर की असिस्टेंट की गलती की वजह से ये सब हुआ.

दरअसल, असिस्टेंट के पास एक पेन ड्राइव थी जिसमें टॉयलेट एक प्रेम कथा की पूरी फिल्म थी. असिस्टेंट वो पेनड्राइव कहीं पर भूल गईं और बाद में वो पेनड्राइव एक जिम ट्रेनर के हाथ लग गई. बाद में उसी जिम ट्रेनर ने वो पेन ड्राइव कोरियोग्राफर रेमो डिसूजा को दे दी और उन्हें पूरी बात बताई.

रेमो की मानें तो उन्हें जब जिम ट्रेनर ने पेन ड्राइव देकर ये बताया कि उसमें टॉयलेट एक प्रेम कथा का फर्स्ट हाफ है. लेकिन रेमो का कहना है कि पेन ड्राइव में पूरी ही फिल्म थी. रेमो का कहना है, एक डायरेक्टर के तौर पर मुझे पता था कि अगर फिल्म रिलीज होने से पहले लीक हो गई तो बहुत बड़ा बवाल मच जाएगा. मैंने अक्षय कुमार से लगातार कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाए. जिसके बाद मैंने फिर फिल्म की प्रोड्यूसर प्रेरणा अरोड़ा को सब बताया और उन्हें तुरंत डायरेक्टर श्री नारायण को मेरे ऑफस भेजा और मैंने उन्हें वो पेन ड्राइव दे दी.

टॉयलेट एक प्रेम कथा के बारे में बात करें तो फिल्म में अक्षय कुमार के साथ भूमि पेडनेकर, अनुपम खेर और दिव्येंदु शर्मा लीड रोल में हैं. ये फिल्म स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरित है.

बता दें, ‘टॉयलेट : एक प्रेम कथा’ कहानी है केशव और जया की जिसका किरदार निभाया है अक्षय कुमार और भूमि पोडनेकर ने. दोनों एक दूसरे से प्यार करते हैं और शादी कर लेते हैं लेकिन जब जया को पता चलता है कि केशव के घर में टॉयलेट नहीं है और सौच करने के लिए खुले में जाना पड़ता है तो वो बहुत नाराज़ हो जाती है और अपने मायके लौट जाती है. केशव अपनी पत्नी को वापस लाने के लिए घर में टॉयलेट बनाने की ठानता है जिसके लिए उसे खूब मशक्कत करनी पड़ती है. फिल्म 11 अगस्त को रिलीज होगी.

लोन लेना चाहते हैं तो यहां ध्यान दें

देश में छोटे और मध्यम आकार के उद्योगों की वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने अप्रैल साल 2015 में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत की गई थी.

अगर कोई व्यक्ति अपना बिजनेस शुरु करना चाहता हैं या फिर अपने वर्तमान बिजनेस को आगे बढ़ाना चाहता हैं, तो वो सामान्यत: बैंक से लोन के लिए आवेदन करता हैं, लेकिन बैंक से लोन लेने की प्रक्रिया बहुत जटिल होती है और इसके लिए गारंटी भी देनी पड़ती हैं जिसके कारण ज्यादातर व्यक्ति बैंक से लोन लेने कतराते हैं. इसी बात को ध्यान में रखकर भारत सरकार ने लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मुद्रा योजना को लांच किया.

तो जानिए हमारे साथ क्या हैं मुद्रा योजना के लाभ

– मुद्रा स्कीम के तहत सामान्यत: बिना गारंटी के लोन प्रदान किये जाते हैं

– मुद्रा योजना के तहत लोन प्रदान करने में किसी भी तरह की कोई फीस चार्ज नहीं की जाती हैं.

– मुद्रा लोन की पुनः भुगतान अवधि (Repayment Period) को 5 वर्ष तक बढाया जा सकता हैं.

– वर्किंग केपिटल लोन को मुद्रा कार्ड के द्वारा प्रदान किया जा सकेगा.

योग्यता

कोई भी भारतीय नागरिक या फर्म जो किसी भी क्षेत्र, खेती के आलावा में अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता हैं या फिर अपने वर्तमान व्यवसाय को आगे बढ़ाना चाहता हैं और उसकी वित्तीय आवश्यकता10 लाख रूपये  तक हैं वह प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत लोन के लिए आवेदन कर सकते हैं.

इसके प्रकार

मुद्रा योजना के तहत लोन को विभिन्न व्यवसायों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीन भागों में विभाजित किया है. मुद्रा योजना के तहत ऋण के तीन प्रकार हैं:

शिशु लोन : शिशु ऋण के तहत 50,000/ – रुपये तक के ऋण दिए जाते है. मुद्रा योजना के तहत  कम से कम 60% ऋण, शिशु ऋणों के रूप में दिया जाएगा.

किशोर लोन : किशोर ऋण के तहत 50,000 / – रुपये के ऊपर और 5 लाख रूपए तक के ऋण दिए जाते है.

तरुण लोन : तरुण ऋण के तहत 5 लाख रूपये से ऊपर और 10 लाख रुपये तक के ऋण दिए जाते है.

क्या होती है बैंक लोन ब्याज दर

मुद्रा लोन के तहत कोई निश्चित ब्याज दर नहीं हैं. ब्याज दर विभिन्न बैंकों में अलग-अलग हो सकती हैं तथा आवेदक के व्यवसाय की Risk के आधार पर भी बैंक दर भिन्न-भिन्न हो सकती हैं. सामान्यत: इस लोन की ब्याज दर 12% प्रति वर्ष के आस-पास होती हैं.

मुद्रा लोन स्कीम के तहत सरकार की तरफ से कोई भी सब्सिडी नहीं दी जाती.अगर आवेदक ने किसी अन्य योजना के तहत किसी सब्सिडी के लिए आवेदन किया हैं जिसमें सरकार कैपिटल सब्सिडी प्रदान करती हैं तो उस सब्सिडी को मुद्रा लोन से लिंक किया जा सकता हैं.

मुद्रा लोन प्राप्त करने की प्रक्रिया में रखें इन बातों का ध्यान

जानकारी जुटाना और सही  बैंक का चुनाव करना.

डाक्यूमेंट्स तैयार करना और एप्लीकेशन सबमिट करना

– अच्छे से आवेदन फॉर्म भरना और इसके साथ सभी जरुरी दस्तावेजों को सबमिट करना.

– लोन प्रोसेसिंग सुनिश्चित करना.

– मुद्रा लोन लेने वाले सभी आवेदकों को लोन प्रदान करते समय मुद्रा कार्ड जारी किये जाते हैं जो कि एक तरह से डेबिट कार्ड की तरह ही होते हैं. इसके तरह व्यवसायी अपने मुद्रा लोन की 10% तक राशी मुद्रा कार्ड से खर्च कर सकता है.

मैं अपनी चाची के साथ 2 सालों से हमबिस्तरी कर रहा हूं. मना करने पर सब को बताने को कहती है. मैं क्या करूं.

सवाल

मैं 20 साल का हूं. मैं अपनी चाची के साथ 2 सालों से हमबिस्तरी कर रहा हूं. वह 4 महीने से पेट से है, फिर भी मेरे साथ हमबिस्तरी करना चाहती है. मना करने पर सब को बताने को कहती है. मैं क्या करूं?

जवाब

चाची के साथ संबंध बना कर आप ने अच्छा नहीं किया. आप फौरन यह सिलसिला बंद कर दें. चाची की धमकी से न डरें, औरतें ऐसी बातें बता कर खुद मुसीबत में फंस जाती हैं.

 

अगर आप भी इस समस्या पर अपने सुझाव देना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में जाकर कमेंट करें और अपनी राय हमारे पाठकों तक पहुंचाएं.

सुष्मिता सेन से शादी करना चाहते थें वसीम अकरम!

भारत जैसे देश में लोग दो चीजों के दीवाने हैं, एक क्रिकेट और दूसरा बॉलीवुड. क्रिकेट और बॉलीवुड एक दूसरे बहुत ज्‍यादा अलग नहीं हैं. यहां कभी क्रिकेट के मैदान में फिल्‍मी सितारे अपने पसंदीदा खिलाड़ी या टीम को चीयर करते दिख जाते हैं तो कभी फिल्‍म के प्रोमोशन पर क्रिकेटर फिल्‍म के बारे में बताते नजर आ जाते हैं.

बॉलीवुड का रिश्‍ता क्रिकेट से काफी पुराना है. क्रिकेटर्स का ग्‍लैमर से कनेक्‍शन ऐसा है कि आए दिन उनके अफेयर के चर्चे खबरों में छाए रहते हैं. बॉलीवुड का कनेक्शन सिर्फ भारतीय खिलाड़ियों तक ही सिमित नहीं है. परोसी देश पाकिस्तान के खिलाड़ियों से भी हमारे बॉलीवुड कितारों का रिश्ता जुड़ा है. ऐसे ही एक किस्से ने खुब सुर्खियां बटोरी थी.

पाकिस्तानी क्रिकेट के जाने माने चेहरों में से एक वसीम अकरम का टीवी कमेंट्री और आईपीएल में केकेआर टीम से जुड़े रहने के कारण भारत आना हमेशा लगा रहा है. अकरम ने 1995 में हुमा से शादी की थी, लेकिन हुमा शादी के कुछ सालों बाद ही बेहद बीमार रहने लगीं.

हुमा को अकरम इलाज के लिए भारत ले आए और उनका चेन्नई के अपोलो अस्पताल में काफी दिनों तक इलाज चला. इसी बीच 2009 में उनकी तबियत कुछ ज्यादा ही खराब हो गई और जिस एयर एंबुलेंस में उन्हें सिंगापुर ले जाया जा रहा था उसमें उनकी हृदय गति रुक जाने की वजह से मौत हो गई.

इसी बीच 2008 में एक रियल्टी शो 'एक खिलाड़ी एक हसीना' के सेट पर अकरम की मुलाकात पूर्व मिस यूनिवर्स सुष्मिता सेन से हुई. इसके बाद से इन दोनों के अफेयर की खबरें मीडिया में उड़ने लगीं.

मीडिया में सबसे पहले चौंकाने वाली ये खबर आई कि वसीम अकरम और सुष्मिता सेन शादी करके दुबई में सेटल होने जा रहे हैं. इस खबर की उम्र 24 घंटे रही और अगले ही दिन सुष्मिता की तरफ से खंडन आ गया कि शादी की खबर में कोई सच्चाई नहीं है. और बात बनाते हुए उन्होंने कहा कि वह और अकरम एक अच्छे दोस्त हैं और 6 साल से चली आ रही इस दोस्ती के रिश्ते को शादी की शक्ल नहीं दे रहे हैं.

सुष्मिता ने फिर से मीडिया में यह कहकर जगह बनानी चाही है कि अकरम की जिंदगी में पहले से एक खूबसूरत महिला है, इसलिए हम दोनों का शादी करने का सवाल ही पैदा नहीं होता. दूसरी ओर अकरम ने भी इन खबरों पर निराशा जताई है. उन्होंने कहा, मैं ऐसी अफवाहों से परेशान हो चुका हूं. मैंने आईपीएल से इसलिए खुद को अलग किया क्योंकि मैं कम से कम एक वर्ष तक अवकाश लेना चाहता था ताकि अपने दोनों बेटों के साथ समय बिता सकूं.

करियर की नई पारी खेल रहे हैं टीवी पर डेब्यू कर चुके ये खिलाड़ी

टेलीविजन हर रोज कई फिल्मी सितारों के लिए नयी नयी राहें खोलता है. फिल्मी सितारे ही क्यों, आज कल तो खेल जगत के भी कई सितारों के लिए टेलीविजन ढेरों संभावनाओं से भर गया है.

हम आए दिन कई सारे खिलाड़ियों को टीवी पर होस्ट बनते देखते रहते हैं. अब लगता है कि भारत के होनहार क्रिकेटर और बल्लेबाज वीरेन्द्र सहवाग की बारी है. जी हां, खेल जगत का ये जाना पहचाना चेहरा अब टीवी पर एक होस्ट भी बन चुका है. वे टेलीविजन पर एपिक चैनल के शो उम्मीद इंडिया को होस्ट कर रहे हैं.

कुछ समय पहले ही भारतीय क्रिकेट टीम के कोच के चुनावों को लेकर चर्चा में रहे सहवाग ने अपने करियर का एक नया अध्याय लिखना शुरु कर दिया है.

यह एक रियेलिटी शो है, जिसमें भारत में खिलाड़ियों के संघर्ष और उनकी समस्याओं को दिखाया गया है. इस शो का पहला एपीसोड 20 जुलाई को प्रसारित किया गया है. ये शो ‘उम्मीद इंडिया’ भारतीय खिलाड़ियों के जीवन की इमोशनल और प्रेरणादायी कहानी को आप सभी के सामने लेकर आ रहा है औऱ इस लिस्ट में भारत के कई बड़े खिलाड़ियों के नाम शामिल हैं. इस शो को ‘कौन बनेगा करोड़पति’ लिखने वाले आर. डी. तेलंग ने लिखा है.

इन 5 गलतियों के कारण वर्ल्ड चैंपियन नहीं बन पाई टीम इंडिया

आईसीसी महिला विश्व कप का फाइनल मैच लॉर्ड्स के मैदान पर खेला गया. खिताबी मुकाबले में मिताली राज की कप्तानी वाली भारतीय टीम को मेजबान इंग्लैंड के खिलाफ 9 रनों से हार का सामना करना पड़ा.

इंग्लैंड की अनुभवी विकेटकीपर बल्लेबाज सारा टेलर ने 62 गेंदों पर 45 रनों की पारी खेली, इस दौरान उनके बल्ले से एक भी बाउंड्री नहीं निकली. इंग्लैंड की पारी की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन 63 रनों तक तीन विकेट झटक कर टीम इंडिया ने मैच में वापसी की थी.

इंग्लैंड ने भारत के सामने जीत के लिए 229 रनों का लक्ष्य रखा और जवाब में भारतीय टीम 48.4 ओवर में 219 रनों पर ऑलआउट हो गई. एक समय 191 रन के स्कोर पर तीन विकेट था, लेकिन इसके बाद पूरी पारी 219 रनों पर सिमट गई.

मध्यक्रम का खराब प्रदर्शन (28 रन में गंवाए 7 विकेट)

टीम इंडिया की हार की सबसे बड़ी वजह मिडिल ऑर्डर बल्लेबाजों को पूरी तरह फ्लॉप रहना रहा. एक वक्त पर भारत का स्कोर 42.4 ओवर में 3 विकेट पर 191 रन था और टीम काफी मजबूत स्थिति में दिख रही थी. लेकिन 28 रन के अंदर बाकी की सातों प्लेयर पवेलियन लौट गईं. इन सात में से तीन बल्लेबाज तो खाता भी नहीं खोल सकीं.

मांधाना का डक आउट होना

इंग्लैंड के खिलाफ ओपनिंग मैच में स्मृति मंधाना ने 90 रनों की शानदार पारी खेली थी, लेकिन इस मैच में वो खाता भी नहीं खोल सकीं. अन्या श्रूबसोल का पहला शिकार मंधाना ही थीं. मंधाना 4 गेंद पर बिना खाता खोले क्लीन बोल्ड हो गईं. भारत का स्कोर उस समय 5 रन था.

मिताली का दुर्भाग्यपूर्ण रनआउट

भारतीय पारी पहले विकेट के झटके से उबरती हुई नजर आ रही थी. स्कोर 40 रनों के पार पहुंच चुका था. पूनम राउत के साथ मिलकर मिताली अच्छी लय में भी नजर आ रही थीं. लेकिन तभी 13वें ओवर की पहली ही गेंद पर मिताली ने रन की कॉल दी और खुद क्रीच तक नहीं पहुंच सकीं.

पुच्छल्ले बल्लेबाजों के हाथ से निकली जीत

भारत को आखिरी 18 बॉल पर भारत को जीत के लिए 14 रन बनाने थे और 3 विकेट हाथ में थे. इस वक्त बल्लेबाजों को सिंगल्स लेते स्ट्राइक रोटेट करने की जरूरत थी. आखिरी ओवरों में सिंगल्स लेकर भी मैच आराम से जीता जा सकता था. लेकिन जीत के बेहद नजदीक पहुंचकर उन्होंने हड़बड़ी में अपने विकेट गंवा दिए.

सारा टेलर और स्काइवर की जोड़ी

लॉरेन विनफील्ड, टैमी बीमाउंट और कप्तान हीथर नाइट जैसी बल्लेबाज पवेलियन लौट चुकी थीं. 16.1 ओवर तक इंग्लैंड की टीम ने तीन विकेट के नुकसान पर 63 जोड़े थे. लेकिन इसके बाद सारा टेलर और नैटली स्काइवर ने मिलकर पारी को आगे बढ़ाया. सारा ने 45 रनों की पारी खेली और स्कोर को 146 रनों तक ले गईं. स्काइवर 51 रन बनाकर आउट हुईं. भारतीय टीम की हार का सबसे बड़ा कारण ये जोड़ी रही. इन दोनों ने ही इंग्लैंड की जीत की नींव रखी.

वर्ल्ड कप 2017 में टीम इंडिया ने 6 मैच जीते और 3 हारे.

कुछ ऐसा था टीम इंडिया का सफर.

– अपने पहवे ही मैच में टीम इंडिया ने इंग्लैंड को 35 रनों से हराया

– वेस्टइंडीज पर 7 विकेट से जीत मिली

– पाकिस्तान को 95 रनों से मात दी

– श्रीलंका को 16 रनों से शिकस्त दी

– द. अफ्रीका से 115 रनों से हार गए

– ऑस्ट्रेलिया ने 8 विकेट से हराया

-न्यूजीलैंड को 186 रनों से मात दी

– सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया को 36 रनों से शिकस्त दी

– फाइनल में इंग्लैंड ने 9 रन से हराया

जानें कप कौन सी टीम बनीं महिला वर्ल्ड कप की चैंपियन.

1973 इंग्लैंड

1978 ऑस्ट्रेलिया

1982 ऑस्ट्रेलिया

1988 ऑस्ट्रेलिया

1993 इंग्लैंड

1997 ऑस्ट्रेलिया विजेता

2000 न्यूजीलैंड विजेता

2005 ऑस्ट्रेलिया विजेता

2009 इंग्लैंड विजेता

2013 ऑस्ट्रेलिया विजेता

2017 इंग्लैंड विजेता

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