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जियो से भी अच्छे प्लान्स दे रही है ये कम्पनी, 419 रुपये में 3 महीने के लिए रोजाना 2 जीबी डाटा और अनलिमिटेड कौलिंग

रिलायंस जियो के बेहतरीन प्लान पेश करने के बाद बाकी टेलीकाम कंपनिया भी अपने ग्राहकों को इससे मिलते जुलते आफर देने में जुट गए हैं. इस  प्रक्रिया में अब एक नया औफर एयरसेल ने पेश किया है. कंपनी 419 रुपये के रिचार्ज पर रोजाना 2GB डाटा के साथ ही अनलिमिटेड कौलिंग दे रही है.

दरअसल जियो ने अपने नए 399 रुपये के आफर में 84 तीन महीने के लिए रोजाना 1GB 4G डाटा के साथ अनलिमिटेड कौलिंग, एसएमएस, रोमिंग और जियो ऐप्स एक्सेस का फायदा यूजर्स को दिया है.
जियो की घोषणा के बाद एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया, रिलायंस, बीएसएनएल, जैसी कंपनियां भी इससे मिलते-जुलते प्लान पेश कर चुकी हैं. इन कंपनियों की देखा-देखी अपने ग्राहकों को रोके रखने और बेहतर सेवाएं देने के लिए अब एयरसेल ने प्लान पेश किया है.

इन खिलाड़ियों के नाम है लगातार सबसे ज्यादा मैन आफ द मैच अवार्ड जीतने का रिकार्ड

क्रिकेट के खेल में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी को मैन आफ द मैच का खिताब देकर सम्मानित किया जाता है. ये खिलाड़ी एक गेंदबाज, बल्लेबाज या फिर औलराउंडर भी हो सकता है. वनडे क्रिकेट में सबसे ज्यादा मैन आफ द मैच का खिताब जीतने वाले खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं लगातार सबसे ज्यादा मैन आफ द मैच का खिताब हासिल करने वाला खिलाड़ी कौन है.
सौरव गांगुली

प्रिंस आफ कोलकाता के नाम से मशहूर खिलाड़ी सौरव गांगुली 4 मैचों में मैन आफ द मैच खिताब के साथ टाप पर हैं. सौरव गांगुली ने 1997 में सहारा कप के दौरान लगातार 4 मैचों में मैन आफ द मैच खिताब पर कब्जा जमा कर ये रिकार्ड अपने नाम किया.

गैरी कर्सटन

साउथ अफ्रीका के सलामी बल्लेबाज़ और टीम इंडिया को विश्व कप जीताने वाले कोच गैरी कर्सटन के नाम भी लगातार 3 मैन आफ द मैच खिताब जीतने का रिकार्ड है. गैरी कर्स्टन ने 1996 में पाकिस्तान और आस्ट्रेलिया के खिलाफ लगातार 3 मैचों में मैच जिताऊ प्रदर्शन किया था.

मोहिंदर अमरनाथ

पूर्व भारतीय खिलाड़ी मोहिंदर अमरनाथ ने 1983 में अपने औलराउंड खेल की वजह से ही भारतीय टीम को विश्व विजेता बनाने में अहम भूमिका निभाई थी. मोहिंदर अमरनाथ ने 1983 विश्व कप के सेमीफाइनल और फाइनल में मैन आफ द मैच खिताब जीता था. इसके बाद इसी साल के सितंबर में पाकिस्तान के खिलाफ एक बार और मैन आफ द मैच खिताब जीतकर लगातार तीन मैन आफ द मैच खिताब पर कब्जा जमाया.

अरविंद डि सिल्वा

श्रीलंका के सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में एक अरविंद डि सिल्वा ने पहली बार 1996 में आस्ट्रेलिया और जिम्बाब्वे के खिलाफ लगातार 3 मैन आफ द मैच में खिताब जीता. 1997 में अरविंद डिसिल्वा ने एक बार फिर से सिंगर कप में करिश्माई प्रदर्शन करते हुए 3 मैच में मैन आफ द मैच खिताब जीता था.

ग्राहम गूच

इंग्लैंड के सबसे सफल बल्लेबाजों में से एक ग्राहम गूच ने लगातार 3 बार मैन आफ द मैच खिताब पर कब्जा जमाया था. गूच ने यह कारनामा 1987 विश्व कप में कर दिखाया था. गूच ने वेस्टइंडीज, श्रीलंका और भारत के खिलाफ ये मैन आफ द मैच खिताब जीते.

परमाणु द स्टोरी आफ पोखरण का फर्स्ट लुक लांच, जौन अब्राहम लीड रोल में

बौलीवुड एक्टर जौन अब्राहम की फिल्म ‘परमाणु- द स्टोरी आफ पोखरण’ रिलीज होने के लिए तैयार है. फिल्म का पहला लुक सामने आ चुका है और इसमें जौन एक अलग ही अंदाज में नजर आ रहे हैं. फिल्म के फर्स्ट लुक में जौन को दौड़ते हुए दिखाया गया है.

‘परमाणु : द स्टोरी आफ पोखरण’ एक मनोरंजक फिल्म है, जो सच्ची कहानी पर आधारित है. यह फिल्म 1998 में पोखरण में हुए परमाणु परीक्षण पर आधारित है, जब उस वक्त के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी थे.
हाल ही में जौन ने कहा था. “मुझे लगता है कि यह एक रोचक फिल्म है. अटल जी हमारे देश के प्रधानमंत्री रहे हैं. लेकिन यह फिल्म है और इसका मनोरंजक होना जरूरी है . न तो हम राजनीतिक हैं और न ही इस फिल्म में राजनीति से जुड़ी कोई भी चीज दिखाई जा रही है. हमने इसे मनोरंजक बनाने की कोशिश की है.”
आपको यह बता दें कि इस फिल्म में जौन अब्राहम के अलावा डायना पेंटी और बोमन ईरानी मुख्य किरदार में हैं. अभिषेक शर्मा द्वारा निर्देशित यह फिल्म 8 दिसंबर को सिनेमा घरों में रिलीज की जाएगी.

आखिर बाजार में क्यों लेट आई थी 500 रुपये की नई नोट

पिछले साल आठ नवंबर को की गई नोटबंदी के दो दिन बाद 2,000 रुपये के नए नोट बाजार में अच्छी खासी मात्रा में जारी किए गए थे. लेकिन 500 रुपये के नोट को आने में लंबा वक्त लग गया, जिसके कारण लाखों लोगों को कई दिनों तक परेशानी झेलनी पड़ी.

क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों हुआ. इस मुद्दे से जुड़े एक शीर्ष अधिकारी ने इसका खुलासा किया है. जानें आखिर क्यों लेट से आई थी 500 रुपये की नोट.

– जब नोटबंदी की घोषणा की गई थी, तब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास 2,000 रुपये के नए नोटों का 4.95 लाख करोड़ का स्टाक था, लेकिन उसके पास नए 500 रुपये का एक भी नोट नहीं था. इस नोट के बारे में बाद में सोचा गया.

– देश में नोट छापने के चार प्रिंटिंग प्रेस हैं. इनमें आरबीआई के दो प्रेस हैं, जो मैसूर (कर्नाटक) और सालबोनी (पश्चिम बंगाल) में हैं. इसके अलावा भारतीय प्रतिभूति मुद्रण तथा मुद्रा निर्माण निगम लिमिटेड (एसपीएमसीआईएल) के दो प्रिंटिंग प्रेस हैं, जो नासिक (महाराष्ट्र) और देवास (मध्य प्रदेश) में हैं.

एसपीएमसीआईएल सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है, जिसकी स्थापना साल 2006 में नोट छापने, सिक्कों की ढलाई करने तथा गैर-न्यायिक स्टैंप के मुद्रण के लिए की गई थी.

– एसपीएमसीआईएल हमेशा आरबीआई द्वारा दिए गए आर्डर के मुताबिक नोटों की छपाई करती है. लेकिन इस बार एसपीएमसीआईएल ने आरबीआई के आधिकारिक आर्डर के बिना ही नोटों की छपाई शुरू कर दी. 500 रुपये के नोट की डिजाइन नोटबंदी से पहले केवल आरबीआई के मैसूर प्रेस के पास था.

– एसपीएमसीआईएल के देवास प्रेस में आरबीआई के आधिकारिक आर्डर के बिना नवंबर के दूसरे हफ्ते में नाशिक प्रेस में नवंबर के चौथे हफ्ते में इसकी छपाई शुरू कर दी गई. हालांकि इसकी छपाई आरबीआई के प्रेस में पहले से की जा रही थी, लेकिन वह नोटबंदी के कारण बढ़ी मांग को पूरा नहीं कर पा रहा था.

– किसी नोट को छापने में सामान्यत: 40 दिन लगते हैं, जिसमें नई डिजाइन के हिसाब से कागज की खरीद में लगने वाला समय भी शामिल है. नोटबंदी के कारण इसमें तेजी लाने के लिए इस अवधि को घटाकर 22 दिन कर दिया गया. नोट की छपाई में लगने वाले कागज और स्याही की खरीद दूसरे देशों से की जाती है, जिसके आने में 30 दिन लगते हैं. लेकिन नोटबंदी के बाद हुई परेशानी को देखते हुए इसे विमान से दो दिन में लाया जा रहा था. आरबीआई से उसके दूरदराज के चेस्ट में नोट ले जाने में 10-11 दिन लगते हैं, जिसे हेलीकॉप्टर और जहाज से 1-1.5 दिन में पहुंचाया गया.

– प्रिंटिंग प्रेस में नोट छापने के जो कागज डाले जाते हैं, वह उच्च संवेदी सिक्युरिटी थ्रेड से लैस होता है और 16 दिन बाद छप कर बाहर निकलता है.

– लेकिन पहली बार देश में बने हुए कागज का इस्तेमाल 500 रुपये के नोट छापने में किया गया. यह कागज होशंगाबाद और मैसूर के पेपर मिल में विकसित किया गया. लेकिन उनकी क्षमता 12,000 मीट्रिक टन सालाना है, जो पर्याप्त नहीं है और अभी भी इसके आयात की जरूरत पड़ती है.

– 500 रुपये के नोट छापने के लिए एसपीएमसीआईएल के नासिक और देवास प्रेस ने खुद का बनाई हुई स्याही का इस्तेमाल किया, जबकि आरबीआई अपने प्रेस में जो स्याही इस्तेमाल करता है, वह दूसरे देशों से आती है.

– नासिक और देवास प्रेस की नोट छापने की संयुक्त क्षमता 7.2 अरब नोट सालाना की है. जबकि आरबीआई के मैसूर और सालबोनी प्रेस की संयुक्त क्षमता 16 अरब नोट सालाना छापने की है.

– नोटबंदी के बाद इन प्रिंटिंग प्रेस में काम करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने 200 लोग भेजे थे तथा इन प्रेसों के हाल में सेवानिवृत्त हुए 100 कर्मियों की भी मदद ली गई.

– एमपीएमसीआईएल ने 30 दिसंबर तक 500 रुपये के 90 करोड़ नोट छापने का लक्ष्य रखा है. जनवरी से यह 30 करोड़ नोट हर महीने छाप रहा है.

– आरबीआई और एसपीएमसीआईएल में 500 रुपये का नोट 60 और 40 के अनुपात में छपता है, जबकि 2000 रुपये का नोट सिर्फ आरबीआई के प्रेसों में ही छापा जाता है.

– अब ऐसी खबरें आ रही हैं कि 2000 रुपये के नोट की छपाई कम कर दी गई है और सरकार ने उसकी जगह 500 रुपये के नोट छापने के आदेश दिए हैं.

– यही कारण है कि नोटबंदी के बाद दिसंबर के अंत तक ही बाजार में 500 रुपये के नोट आने के बाद लोगों को थोड़ी राहत मिली थी.

20 मेगा पिक्सल कैमरा के साथ कम बजट में आप ले सकते हैं ये स्मार्टफोन्स

अगर आपका बजट 20,000 रुपये तक का है . इस बजट में अगर आप 4GB रैम जैसे फीचर्स के साथ आने वाला स्मार्टफोन तलाश रहे हैं. तो आइये इसी बजट में हम आपको कुछ फोन्स के बारे में बताते हैं. जो आपकी जरूरतों के मुताबिक आपके बजट में फिट हो सकते है.

हुवाई हानर 8

हुवाई के हानर 8 में 5.2 इंच की फुल एचडी डिस्प्ले दी गई है . इसमें 4GB रैम के साथ 32GB की इंटरनल मेमोरी दी गई है . फोटोग्राफी के लिहाज से इसमें 8 मेगा पिक्सल का फ्रंट कैमरा और 12 मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया है . इसमें 3,000mAH की बैटरी दी गई है . बाजार में इसकी कुल कीमत 18,500 रुपये है .

शियोमी Mi Max 2

शियोमी के Mi Max 2 में 6.44 इंच की फुल एचडी डिस्प्ले के साथ इसमें 4GB की रैम के साथ 64GB की इंटरनल मैमोरी दी गई है . इसमें 5,300mAH की बैटरी है . फोटोग्राफी के हिसाब से इसमे 5 मेगापिक्सल की फ्रंट कैमरा और 12 मेगापिक्सल का रियर कैमरा दिया गया है . इसकी कुल कीमत 16,999 रुपये है .

गैलेक्सी आन मैक्स

गैलेक्सी आन मैक्स में 5.7 इंच की फुल एचडी डिस्प्ले के साथ इसमें 4GB की रैम के साथ 32GB की इंटरनल मैमोरी दी गई है . फोटोग्राफी को और अच्छा बनाने के लिए इसमें 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 13 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. इसमें 3,300mAH की बैटरी दी गई है . बाजार मे इसकी कुल कीमत 16,900 रुपये है.

मोटो जी5 प्लस

मोटो जी5 प्लस में 5.2 इंच की फुल एचडी डिस्प्ले के साथ इसमें 4GB की रैम 32GB की इंटरनल मैमोरी दी गई है . फोटोग्राफी के लिए इसमें 12 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 5 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है . इसमें 3,000mAH की बैटरी दी गई है . इसकी कीमत 14,999 रुपये है .

वीवो V5S

वीवो V5S में 5.5 इंच की फुल एचडी डिस्प्ले के साथ इसमें 4GB की रैम 64GB की इंटरनल मैमोरी दी गई है . इसमें 3,000mAH की बैटरी दी गई है . फोटोग्राफी के लिए इसमें 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 20 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. बाजार में इसकी कुल कीमत 17,900 रुपये है.

एथलीट नहीं क्रिकेटर बनना चाहते थे दुनिया के सबसे तेज धावक उसेन बोल्ट

उसेन बोल्ट जब ट्रैक पर दौड़ते है तो ऐसा लगता है कोई इंसान नहीं बल्कि एक महामानव दौड़ रहा हो. ट्रैक पर चीते की रफ्तार से दौड़ते बोल्ट एक ऐसे इंसान हैं जिसकी रफ्तार का अंदाजा सिर्फ हाई डेफनिशन कैमरे पर ही लगाया जा सकता है.

रफ्तार की दुनिया के सबसे बड़े शोमैन जमैका के उसेन बोल्ट को करियर की अंतिम रेस में पोडियम भी नसीब नहीं हो सका. जो धावक ट्रैक पर बिजली की गति सा दौड़ता था उसे लंगड़ाते हुए ट्रैक को अलविदा कहना पड़ा. स्वर्णिम विदाई के जश्न की जगह लंदन के ओलंपिक स्टेडियम में एक महानायक की पीड़ा का दर्द झलक रहा था. दर्शक भावुक थे और बोल्ट अवाक.

बोल्ट अब अपने गोल्डन शूज टांग देंगे लेकिन ट्रैक की दुनिया को ऐसा दूसरा चैंपियन ढूंढने में शायद बरसों लग जाएं. एथलेटिक्स की दुनिया में एक दशक तक तहलका मचाने वाले जमैका के सुपरस्टार एथलीट उसेन बोल्ट का अपनी अंतिम रेस में स्वर्ण से विदाई की हसरत अधूरी रह गई.

चोट की वजह से वह 4 गुणा सौ मीटर रिले की अपनी अंतिम रेस को फिनिश भी नहीं कर सके. रिले रेस में जमैका की चौकड़ी के लिए चौथे चरण में दौड़ रहे रफ्तार के सौदागर बोल्ट ने योहान ब्लैक से बैटन पकड़ी और लंबे डग भरते हुए तेजी से फिनिश लाइन की ओर दौड़े लेकिन मांसपेशियों में खिंचाव के कारण लड़खड़ाने लगे और दर्द से कराहते हुए ट्रैक पर ही गिर गए. तमाम उम्र शिखर पर रहे बोल्ट का सफर अंतिम रेस में सिफर पर आकर थम गया.

आइये जानते हैं विश्व के सबसे तेज धावक उसेन बोल्ट के बारे में कुछ रोचक बातें.

स्कूल में भी सबसे तेज धावक थे बोल्ट

बोल्ट ने सबसे पहली बार अपनी तेज दौड़ने की क्षमता स्कूल में ही दिखाई थी. वेल्डनसिया प्राइमरी स्कूल के छात्र रहे बोल्ट बारह साल की उम्र में पूरे स्कूल में 100 मीटर रेस के सबसे तेज धावक थे. बोल्ट जब छोटे थे, तब अपना काफी समय भाई के साथ गली में क्रिकेट और फुटबाल खेलने में बिताते थे.

ट्रेनिंग से जी चुराते थे बोल्ट

पूर्व ओलंपिक स्प्रिंट एथलीट पाब्लो मैकनील बोल्ट के शुरुआती कोच रहे और दोनों के बीच काफी अच्छा और सकारात्मक तालमेल भी नजर आया. हालांकि बोल्ट शुरुआत में ट्रेनिंग को लेकर गंभीर नहीं रहते थे जिस वजह से मैकनील कई बार उनसे नाराज भी हो जाते थे. बोल्ट को अपने दोस्तों के साथ घूमना और वीडियो गेम खेलना काफी पसंद था. वह अकसर अपने दोस्तों के साथ घूमते और वीडियो गेम खेलते थे और इसी कारण ट्रेनिंग पर नहीं जाते थे. इसके अलावा बोल्ट के व्यावहारिक चुटकुले भी मैकनील को कभी कभी काफी गुस्सा दिलाते थे.

2004 में बने पेशेवर धावक

बोल्ट ने 2004 में पेशेवर धावक बनने का फैसला किया. अपने नए कोच फित्ज कोलमैन के मार्गदर्शन में बरमुडा में आयोजित हुए कारिफ्ता गेम्स में पेशेवर धावक के तौर पर हिस्सा लिया. वह 200 मीटर की दौड़ को 20 सेकंड से कम में पूरा करने वाले पहले जूनियर स्प्रिंटर थे. उन्हें 2004 कारिफ्ता गेम्स में आस्टिन सीले ट्राफी से नवाजा गया था. हैम्स्ट्रिंग की चोट के कारण वह 2004 वर्ल्ड जूनियर चैंपियनश्र्प में हिस्सा नहीं ले सके थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें जमैका की ओलंपिक टीम में शामिल किया गया. बोल्ट ने 2004 एथेंस ओलंपिक में हिस्सा लिया और चोट के कारण 200 मीटर रेस के पहले ही राउंड मे बाहर हो गए.

क्रिकेट कोच ने किया था गति को नोटिस

विलियम निब्ब मेमोरियल हाई स्कूल में बोल्ट के क्रिकेट कोच ने पिच पर उनकी गति को नोटिस किया और उनसे ट्रैक एंड फील्ड इवेंट में अपना करियर बनाने की सलाह दी. पूर्व ओलंपिक स्प्रिंट एथलीट पाब्लो मैकनील और ड्वेन जारेट ने बोल्ट को शुरुआती कोचिंग दी और एथलेटिक्स में अपनी ऊर्जा को सुधारने पर फोकस करने के लिए प्रेरित किया. बोल्ट ने 2001 में वार्षिक हाई स्कूल चैंपियनशिप में पदक जीता. उन्होंने 200 मीटर रेस 22.04 सेकंड में पूरी कर सभी को हैरान कर दिया.

गेंदबाज बनना चाहते थें बोल्ट

एथलीट बनने से पहले बोल्ट क्रिकेट में गेंदबाज बनना चाहते थें और वकार युनूस उनके पसंदीदा थे लेकिन उन्होंने जो किया पूरी शिद्दत से किया.

बोल्ट के विश्व रिकार्ड

बोल्ट के नाम 100 मीटर और 200 मीटर के विश्व रिकार्ड दर्ज हैं. उन्होंने बर्लिन में 2009 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में फर्राटा रेस 9.58 सेकंड में पूरी की थी और विश्व रिकार्ड बनाया था. बर्लिन में ही उन्होंने 200 मीटर रेस 19.19 सेकंड में पूरी कर विश्व रिकार्ड बनाया जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ सका है.

बोल्ट के नाम ओलंपिक और विश्व चैंपियनशिप में कुल 22 पदक हैं जिसमें से 19 स्वर्ण हैं. उन्होंने दो रजत पदक 2007 ओसाका विश्व चैंपियनशिप में जीते जो 200 मीटर और चार गुणा 100 मीटर स्पर्धा में अपने नाम किया था. उनका एकमात्र कांस्य पदक भी विश्व चैंपियनशिप में जीता है जो इस साल लंदन में फर्राटा रेस में अपने नाम किया था. बोल्ट के नाम आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक हैं. इसके अलावा उन्होंने वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप में एक स्वर्ण और दो रजत पदक भी जीते हैं.

आज तक नहीं टूटा उसेन का रिकार्ड

उसेन बोल्ट ने 2009 की बर्लिन विश्व चैंपियशिप में 100 मीटर की दूरी 9.58 सेकेंड में पूरा करने का रिकार्ड बनाया था. जिसे आज तक कोई धावक नहीं तोड़ पाया.

इसके अनुसार बोल्ट ने 9.58 सेकेंड में 100 मीटर का लक्ष्य अपनी रफ्तार को 12.2 मीटर प्रति सेकेंड तक पहुंचाकर हासिल किया. यानी बोल्ट 27 मील प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ रहे थें

पिता की है किराने की दुकान

उसेन बोल्ट एक बेहद साधारण परिवार से हैं. उनके पिता वेलेस्ले बोल्ट की अपने इलाके में छोटी सी किराने की दुकान है. बोल्ट का जन्म जमैका के एक छोटे से कस्बे शेरवुड कंटेंट में हुआ था. बोल्ट को अपने शुरुआती जीवन में काफी समस्याओं से जूझना पड़ा था लेकिन आज दुनिया में कितने ही लोग उनकी तरह नाम कमाना चाहते हैं. बोल्ट के एक भाई सादिकी और बहन शेरिन हैं.

सिगरेट बेचने का किया काम

बोल्ट एक साधारण परिवार से आते हैं. अपनी बहन, भाई और परिवार की मदद के लिए उन्होंने किराना दुकान पर रम और सिगरेट बेचने का काम किया था.

योगी आदित्यनाथ के काम नहीं आ रहा पूजापाठ

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने पर योगी आदित्यनाथ ने मुख्यमंत्री के सरकारी आवास में गृहप्रवेश करने से लेकर मुख्यमंत्री के कार्यालय एनेक्सी में कामकाज शुरू करने तक हर काम की शुरूआत विधिवत पूजा पाठ से की. विशेष तरह की पूजा खुद योगी के गोरखपुर मंदिर से आये पुजारियों ने की. 4 माह में एक के बाद एक ऐसी घटनाये घटी जो प्रदेश में पहली बार घटी थी. बड़ीबड़ी घटनाओं का केन्द्र बिन्दू कभी राजधानी लखनऊ रही, जो योगी आदित्यनाथ का कर्म स्थल है या गोरखपुर जहां योगी आदित्यनाथ की तपोभूमि रही है. ऐसे में साफ दिख रहा है कि काम करने से पहले पूजापाठ और शुद्वीकरण जैसे उपाय योगी के किसी काम नहीं आ रहे हैं. सबसे खास बात यह कि इस तरह की घटनाओं में योगी सरकार उपहास का पात्र बनती जा रही हैं.

उत्तर प्रदेश की विधानसभा में विस्फोटक मिला. जोरशोर से विधानसभा में सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर लोगों का प्रवेश बंद कर दिया गया. सुरक्षा व्यवस्था बढा दी गई. सरकार आज तक यह साबित नहीं कर पाई कि विस्फोटक का सच क्या है? विधानसभा मुख्यमंत्री से सीधे तौर पर जुड़ी होती है. एक तरह से कहें तो यह मुख्यमंत्री का दरबार होता है. राजधानी लखनऊ के मेडिकल कालेज में आग लगी. कई मरीज मौत का शिकार हुये, आग के कारणों का आज तक पता नहीं चल सका. लखनऊ केवल राजधानी भर नहीं है. यहां देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री डाक्टर दिनेश शर्मा का कार्यक्षेत्र भी है.

उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ के बाद गोरखपुर सबसे महत्वपूर्ण है. क्योंकि गोरखपुर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सांसद हैं और यही उनका गोरक्षा पीठ का मंदिर भी है. मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ गोरखपुर जाते रहते हैं. गोरखपुर में सब कुछ ठीक रहे यह करने का प्रयास सरकारी मशीनरी के द्वारा बराबर होता है. इसके बाद भी गोरखपुर किसी न किसी वजह से चर्चा में बना रहा है. गोरखपुर के सबसे बड़े अस्पताल में औक्सीजन की कमी से होने वाली 30 से अधिक बच्चों की मौतों ने सरकार के मुंह पर कालिख पोत दी है. बच्चों के साथ दूसरों की मौतों को देखें तो यह संख्या 50 के करीब पहुंच चुकी है.

सरकार की गंभीरता का आलम यह है कि वह यह बात साबित करने में जुटी है कि मौत की वजह औक्सीजन की कमी नहीं रही है. अस्पताल और प्रशासन लखनऊ मेडिकल कालेज में घटी घटना के बाद भी मौत के आंकडे छिपाने पर लगा था. यही काम गोरखपुर में हो रहा है. मरने वालों के भर्ती कार्ड गायब करने से लेकर उनको फर्जी तरह से डिस्चार्ज तक दिखाया जा रहा है. मुख्यमंत्री हर घटना पर कड़ी कारवाई की बात करते हैं. इसके बाद भी किसी के कान पर जूं नही रेंग रही. ऐसे में साफ है कि सरकारी मशीनरी ही नहीं भगवान भी मुख्यमंत्री की पूजापाठ से खुश नहीं हैं. यही वजह है कि एक के बाद एक बड़ी बड़ी घटनाओं में सरकार का सर शर्मसार हो रहा है.

6 गेंद में 6 विकेट ले इस गेंदबाज ने रचा इतिहास

क्रिकेट का दूसरा नाम ही करिश्मा है. इस खेल में कब क्या हो जाए कोई नहीं जानता. क्रिकेट में हर दिन रिकार्ड बनते और टूटते हैं. हर दिन गेंदबाजी से लेकर बल्लेबाजी में कुछ न कुछ नया होता है.

इस बार इस खेल में कारनामा इंग्लैंड के 13 साल के एक स्कूली बच्चे के नाम दर्ज हुआ है. इंग्लैंड के ल्यूक रोबिनसन ने इस हफ्ते फिलाडेलफिया क्रिकेट क्लब के अंडर-13 वर्ग में एक ओवर में 6 विकेट लेने का कारनामा किया.

ल्यूक रोबिनसन ने अपने ओवर के 6 गेंद में 6 विकेट चटकाए. इसमें खास बात यह रही कि उन्होंने सभी बल्लेबाजों को बोल्ड किया. ल्यूक का यह क्लब उत्तर पूर्वी इंग्लैंड के टाइन एवं वियर में हाटन लि स्प्रिंग के समीप है. ल्यूक के इस मैच जिताऊ प्रदर्शन के गवाह उनके माता-पिता भी बने. क्योंकि कहीं न कहीं मैच का हिस्सा वह भी थे.

ल्यूक के पिता स्टीफन गेंदबाज के छोर पर अंपायरिंग कर रहे थे, जबकि उनकी मां हेलेन मैच की स्कोरर थीं. ल्यूक का छोटा भाई मैथ्यू फील्डिंग कर रहा था. वहीं उनके दादा ग्लेन बाउंड्री के समीप से मैच देख रहे थे.

ल्यूक के इस अविश्वसनीय प्रदर्शन के बाद उनके पिता ने कहा कि यह कोई सपना सच होने जैसा प्रदर्शन था. रौबिनसन ने बताया कि वह भी पिछले 30 साल से क्रिकेट खेल रहे हैं और उन्होंने भी हैटट्रिक ली है, लेकिन इससे पहले वह कभी भी ऐसे किसी प्रदर्शन के गवाह नहीं बने और न ही उन्होंने आज तक ऐसे रिकार्ड के बारे में सुना है. सीनियर टीम के लिए खेलने वाले रौबिन्सन ने बताया कि आज लग रहा है कि क्रिकेट में ऐसा भी हो सकता है.

तो कीर्ति कुल्हारी ‘स्विच आन, स्विच आफ’ कलाकार हैं..!

स्वांतः सुखाय कविताएं लिखने वाली अदाकारा कीर्ति कुल्हारी ने अभिनय जगत में काफी लंबी यात्रा तय की है. थिएटर व टीवी से होते हुए वह फिल्मों में अपनी पकड़ बना चुकी हैं. हालिया प्रदर्शित फिल्म ‘‘इंदू सरकार’’ में वह शीर्ष भूमिका निभा चुकी हैं. कीर्ति कुल्हारी पर कोई भी किरदार ज्यादा समय तक थोपा नही रहता. क्योंकि वह खुद को ‘स्विच आन और स्विच आफ’ कलाकार मानती हैं.

खुद कीर्ति कुल्हारी कहती हैं-‘‘मैं किरदार में घुसने और उससे अलग होने को अंतर को समझ चुकी हूं. कब कीर्ति किरदार बन जाती है और कब किरदार से कीर्ति बन जाती है, यह चरित्र चित्रण का एक खूबसूरत प्रोसेस है. ऐसा हमेशा होता है कि हम कुछ चीजें किरदार से रिलेट कर पाते हैं और कुछ चीजें नहीं कर पाते हैं. पर हमारे अंदर हर किरदार की संभावनाएं होती हैं. उन संभावनाओं को तलाशना ही मेरा काम है. शूटिंग के दौरान मेरे अंदर एक अलग एनर्जी होती है. मेरी खुशकिस्मती यह रही है कि मेरी हर फिल्म एक ही शिड्यूल में खत्म होती हैं. वैसे भी मैं स्विच आन और स्विच आफ वाली कलाकार हूं. हर दिन पैकअप के बाद मैं कीर्ति बन जाती हूं.’’

 इसी तरह फिल्मों की सफलता या असफलता से भी खुद को अलग कर आगे बढ़ना उन्हे आता है. वह बताती हैं-‘‘ईमानदारी से कहूं तो मैंने अपनी जिंदगी में बहुत जल्दी यह सीख लिया है कि चीजों से खुद को कैसे अलग किया जाए. अब मैं ‘कर्म करो, फल की इच्छा मत करो’ के सिद्धांत पर चलने लगी हूं. जब मैं काम करती हूं, तो पूरी तरह से उससे जुड़ी होती हूं. पर जब रिजल्ट का समय आता है, तो हमें उसका अहसास होने लगता है. एक कलाकार के तौर पर फिल्म निर्माण के दौरान हमें अहसास होने लगता है कि चीज किस तरह की बन रही है. उसके बाद जब हम पहली बार फिल्म देखते हैं, तो उसको लेकर हमारे मन में बहुत कुछ साफ हो जाता है. फिल्म पूरी होने के बाद जब हम फिल्म का प्रमोशन करना शुरू करते है. तो धीरे धीरे हमें फिल्म के भविष्य का अहसास भी होने लगता है. हमें अंदाजा हो जाता है कि प्रोडक्ट में दम है या नहीं. फिल्म के असफल होने पर तकलीफ तो होती है, पर उसके बाद हमें आगे बढ़ना ही होता है.

पांच माह पहले ही हो गई पहलाज निहलानी की विदाई

‘‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ के चेअरमैन पहलाज निहलानी का कार्यकाल 18 जनवरी 2018 को खत्म होने वाला था, लेकिन उन्हे साढ़े पांच महीने पहले ही पदमुक्त कर दिया गया और अब ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ के चेअरमैन मशहूर गीतकार प्रसून जोशी होंगे.

केंद्र में नई सरकार आसीन होने के बाद उस वक्त की ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ की चेअरमैन लीला सैमसन ने स्वेच्छा से त्यागपत्र दे दिया था. तब ‘सूचना प्रसारण मंत्रालय’ ने 19 जनवरी 2015 को पहलाज निहलानी को चेअरमैन नियुक्त किया था और उनका कार्यकाल 18 जनवरी 2018 तक था. भारतीय जनता पार्टी के भक्त और 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त मोदी की प्रशंसा में लगे रहे पहलाज निहलानी को उम्मीद थी कि उनका कार्यकाल दुबारा बढ़ा दिया जाएगा. मगर सरकार ने उनका कार्यकाल खत्म होने से लगभग साढ़े पांच माह महीने पहले ही पदमुक्त कर दिया. सूत्रों का दावा है कि पहलाज निहलानी ने ‘केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’ के चेअरमैन की हैसियत से जो विवादास्पद निर्णय लिए उसके चलते केंद्रीय सूचना प्रसारण मंत्री को यह निर्णय लेना पड़ा.

पहलाज निहलानी और विवाद ही विवाद

सेंसर बोर्ड के चेअरमैन पद पर आसीन होते ही पहलाज निहलानी ने अपने वक्तव्यों और अपने निर्णयों से कई तरह के विवाद पैदा कर दिए. हमें यहां यह याद रखना होगा कि फिल्म को प्रमाण पत्र देने के लिए सेंसर बोर्ड की अपनी गाइड लाइन्स हैं. इसके बावजूद पहलाज निहलानी ने आनन फानन में कुछ गालियों की सूची जाहिर कर दी कि यदि किसी फिल्म में ऐसी गालियां होंगी, तो वह फिल्म पारित नहीं की जाएगी. इस पर काफी विवाद हुआ और अंततः केद्रीय सूचना प्रसारण राज्यमंत्री ने यह कर इस विवाद को शांत किया कि ऐसा कुछ नहीं होगा.

उसके बाद भी पहलाज निहलानी लगातार विवादों से घिरे रहे. कई फिल्मों में बोल्ड दश्यों व गालियों पर कैंची चलाने को लेकर उनकी काफी आलोचना हुई. फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर जमकर बवाल हुआ था. उस वक्त फिल्म निर्माता ने मुंबई उच्च न्यायालय से अपनी फिल्म को पारित करवाया था, तब निर्माता को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की तरफ से जो प्रमाण पत्र दिया गया था, उसमें लिखा था कि मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश पर प्रमाणपत्र जारी हुआ. उसके बाद भी कई फिल्मों पर उनके निर्णय विवाद के केंद्र बने. जिसमें से प्रकाश झा निर्मित और अलंकृता श्रीवास्तव निर्देशित फिल्म ‘लिपस्टिक अंडर माई बुरका’ और ‘इंदू सरकार’ का भी समावेश है. इन दिनों कुशान नंदी निर्देशित फिल्म ‘‘बाबूमोशाय  बंदूकबाज’’ को 48 कट्स लगाने की बात कहकर विवाद को नई हवा दे दी.

यूं तो जब 28 जुलाई को तिरूअनंतपुरम में ‘‘केद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड’’ के सभी बोर्ड सदस्यों की बैठक बुलायी गयी थी, तभी यह संकेत आ गया था कि इस बैठक में पहलाज निहलानी को बाहर किए जाने पर मुहर लगेगी, इस बैठक में क्या हुआ था, उसकी खबर नहीं मिली थी. पर अब शुक्रवार, ग्यारह अगस्त की  की देर शाम पहलाज निहलानी की विदाई और प्रसून जोशी की नियुक्ति की खबर आ गयी.

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