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मैं एक अध्यापिका हूं. एक विवाहित अध्यापक के साथ शारीरिक संबंध हैं. क्या शादी होने तक मैं इसे जारी रख सकती हूं.

सवाल
मैं 25 वर्षीय अविवाहित लड़की हूं. एक स्कूल में अध्यापिका हूं. स्कूल के ही एक विवाहित अध्यापक के साथ शारीरिक संबंध हैं. हर हफ्ते हम संबंध बनाते हैं. मैं जानना चाहती हूं कि क्या अपनी शादी होने तक मैं इस सिलसिले को जारी रख सकती हूं? इस से कोई परेशानी तो नहीं होगी?

जवाब
आप की उम्र विवाह योग्य है, इसलिए आप को उपयुक्त व्यक्ति से विवाह कर लेना चाहिए. किसी विवाहित पुरुष से अवैध संबंधों की बात ज्यादा दिनों तक छिपी नहीं रह सकती. कभी न कभी अवैध संबंधों की भनक उक्त अध्यापक के परिवार को लग जाएगी. इस से उस का दांपत्य तो प्रभावित होगा ही, आप की भी समाज में बदनामी होगी. तब हो सकता है आप को अपने लिए उपयुक्त वर न मिले.
इस के अलावा आप अध्यापिका हैं और अध्यापक अपने विद्यार्थियों के लिए रोल मौडल होता है. आप के अनैतिक आचरण का उन पर क्या प्रभाव पड़ेगा, आप सोच सकती हैं. अत: तुरंत इस सिलसिले को बंद कर दें.

अगर वाई-फाई ने अचानक काम करना कर दिया है बंद, तो अपनाएं ये तरीके

कभी-कभार ऐसा होता है जब आप कहीं बैठ कर अपने लैपटाप में कुछ जरूरी काम कर रहीं होती हैं और वाई-फाई कनेक्शन एक दम से चलना बंद हो जाता है या एक दम से उसकी स्पीड धीमी हो जाती है. ऐसे में क्या आप भी काफी परेशान होने लगती हैं. तो अब आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि आज हम आपको वो खास तरीके बताने जा रहा है जिसकी मदद से आप अपने वाई-वाई कनेक्शन का ठीक से इस्तेमाल कर सकेंगी.

डिफाल्ट सेटिंग को रीसेट करें

आप अपने राउटर के पीछे लगे रीसेट बटन को लौन्ग प्रेस कर राउटर की पूरी सेटिंग रीसेट कर सकते हैं. ध्यान रखें राउटर को फिर से कन्फिगर करें जिसमें नेटवर्क का नाम और पासवर्ड को दोबारा डाल कर रीसेट करें.

राउटर को रीबूट करें

कई बार कनेक्शन भी बार-बार चला जाता है. फिर नेटवर्क भी धीमा चलने लगता है और वेबसाइट लोड होने में फेल हो जाती है. ऐसे में आप अपने राउटर को एक बार रीबूट कर सकते हैं. इसके लिए आपको अपने राउटर को अनप्लग करें. कुछ सेकंड़ इंतजार करने के बाद आप फिर से उसका प्लग लगाएं. इसके बाद स्विच आन करें और यह रीबूट हो जाएगा.

राउटर को रिपौजिशन करें या वायरलेस चैनल को चेंज करें

अगर राउटर में वाई-फाई सिग्नल्स केच नहीं कर रहे हैं तो आपको राउटर को फिर से पौजिशन करना होगा. यानी आपको अपने राउटर की जगह बदलनी होगी. सुनिश्चित करें कि राउटर का एंटीना खड़ा हो.

कुछ अपार्टमेंट्स या सोसाइटी की बिल्डिंगे ऊची होने या फिर कनेक्शन की फेसिंग ठीक न होने से सिग्नल चला जाता है. अगर राउटर की लोकेशन भी कई बार बदल ली और इसके बाद भी कोई रिस्पांस नहीं मिल रहा तो आपको अपने वायरलेस राउटर को चेंज कर लेना चाहिए ताकि वह वायरेस चैनल पर काम कर सके जहां वह दिक्कत कर रहा है.

अपने पीसी को क्लीन करें

हो सकता है आपके पीसी में स्पाइवेयर, वायरस या मालवेयर आ गया हो. इंटरनेट सर्फिंग के दौरान यह आपके सिस्टम पर बिना किसी जानकारी के डाउनलोड और इंस्टाल हो जाता है. जिसके बाद नेट स्पीड में दिक्कत और पूरे सिस्टम का परफार्मेंस खराब हो जाती है. इसके लिए आपको पहले अपने कंप्यूटर को एंटीवायरस साफ्टवेयर से क्लीन करना होगा.

केबल को चेक करें

कई बार मौसम या किसी गलती की वजह से केबल के कनेक्शन में दिक्कत आ जाती है. जिसका आपको पता नहीं होता. ऐसे में आपको केबल कनेक्शन को चेक कर लेना चाहिए.

फर्मवेयर को अपडेट करें

आपको अपने फर्मवेयर को चेक और अपडेट कर लेना चाहिए. इसके लिए राउटर्स मैनेजमेंट कंसोल सिस्टम सेक्शन के अपडेट टूल में जाकर वहां मौजूद लेटेस्ट फर्मवेयर को इंस्टाल करें. हमेशा ध्यान रखे कि फर्मवेयर को कभी भी किसी थर्ड-पार्टी की साइट से इंस्टाल न करें. फर्मवेयर एक एम्बेडेड सौफ्टवेयर होता है, जो पहले से ही इंस्टाल होता है. यह मौडन हार्डवेयर को सिग्नल देने में मदद करता है. काफी लोग फर्मवेयर को इनकी आफिशियल वेबसाइट से डाउलोड करते हैं.

राउटर को अपग्रेड करें

कभी-कभार सब कुछ सही होने के बाद भी वाई-फाई कनेक्शन में दिक्कतें आती हैं. राउटर काफी समय से लगातार इस्तेमाल करने पर कमजोर हो जाता है और इसका असर सीधा वाई-फाई कनेक्शन पर पड़ता है जिसकी वजह से स्ट्रीमिंग और डाउनलोडिंग में दिक्कते आने लगती हैं. ऐसे में आपको और ज्यादा पावरफुल राउटर की जरूरत है. इसलिए आपको अपने राउटर को अपग्रेड करना होगा.

सरकारी सेवाओं के लिए डिजिटल भुगतान होगा अनिवार्य

कैशलेस इंडिया के तहत सरकार जल्द ही भीम (BHIM) और भारत क्यूआर कोड जैसी पेमेंट सर्विसेस के जरिए सरकारी सेवाओं के लिए डिजिटल पेमेंट को अनिवार्य कर सकती है. यही नहीं, इस अभियान के तहत सरकार डिजिटल पेमेंट करने वाले ग्राहकों को इंसेंटिव भी देगी. इसमें रेलवे और सरकारी परिवहन निगम की बसों समेत अन्य सेवा के लिए डिजिटल भुगतान किया जा सकेगा.

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने इस बात की जानकारी दी है कि डिजिटल भुगतान सेवा को अनिवार्य करने के लिए सरकार कई नए तरीकों पर विचार कर रही है, उन्होंने बताया कि BHIM और भारत क्यूआर कोड जैसी पेमेंट सर्विसेस के साथ आनलाइन पेमेंट गेटवे के लिए ज्यादा इंटीग्रेशन की योजना भी बनाई जा रही है. इस काम का पूरा जिम्मा इलेक्ट्रानिकी व आईटी मिनिस्ट्री को दिया गया है.

टिकट काउंटर्स पर डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था

रेल बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उन्होने अपने सभी टिकट और रिजर्वेशन काउंटर्स को डिजिटल पेमेंट को लेने लायक बनाने का निर्णय लिया है. हम अपने टिकट काउंटरों पर आधे ट्रांजैक्शन्स को डिजिटल मोड में लाने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं. नई गाइडलाइंस के तहत देश में सभी 14 लाख काउंटर्स पर भारत क्यूआर कोड दिखेगा.

आपको बता दें कि भारतीय रेलवे 52000 करोड़ रुपये के टिकट हर वर्ष बेचती है. इसमें आनलाइन बुकिंग पोर्टल की हिस्सेदारी 60 फीसद है.

बिजली और पानी के बिल्स पर क्यूआर कोड प्रिंट किया जाएगा

माना जा रहा है कि जल्द ही रेल, पासपोर्ट आफिस, बस और मेट्रो टिकट काउंटर्स को भारत क्यूआर कोड के जरिए डिजिटल भुगतान लेने के लिए कहा जाएगा. यही नहीं, बिजली और पानी जैसे यूटीलिटी के बिल्स पर भी क्यूआर कोड प्रिंट किया जाएगा जिससे भुगतान आसानी से किया जा सके.

गांधी जयंती के दिन हो सकती है इसकी घोषणा

अधिकारी ने बताया, “देश में कुल ट्रांजैक्शन्स का बहुत बड़ा हिस्सा सरकारी भुगतानों का होता है. अगर ये भुगतान डिजिटल तरीके से किए जाएं तो इलेक्ट्रानिक पेमेंट्स की संख्या में बड़ा उछाल आएगा.” खबरों के मुताबिक, इस अभियान की शुरुआत 2 अक्टूबर यानि गांधी जयंती के दिन हो सकती है.

अगर आप हैं उबर ड्राइवर, तो जान लें आपके फायदे की ये बातें

अमेरिकी कैब कंपनी उबर अपने भारतीय ड्राइवर्स के लिए एक नई स्कीम लेकर आने की तैयारी में है. बता दें कि उबर ने भारत में 4.5 लाख से अधिक अपने चालकों को नि:शुल्क बीमा देने की घोषणा की है. जिसके लिए ICICI लोम्बार्ड के साथ साझेदारी भी कर ली है. बता दें कि कंपनी यह कार्यक्रम 1 सितंबर से शुरू करेगी, जिससे कंपनी के भारत में 18 साल से 65 वर्ष के ड्राइवर्स को फायदा होगा. उबर ने हाल ही में ऐसी ही योजना म्यांमार और इंडोनेशिया में भी शुरू की है.

उबर का दावा है कि भारत में इस साल जुलाई में सालाना आधार पर कंपनी की कैब के फेरों में 115 प्रतिशत की बढ़त देखी गई है. यह बीमा उबर ऐप के जरिए बुकिंग पर दुर्घटना के केस में एक्सीडेंटल डेथ और डिसएबलमेंट (अक्षमता), अस्पताल में भर्ती संबंधी और आउट पेशेंट मेडिकल ट्रीटमेंट को सुनिश्चित करेगा.

इस कवरेज में मृत्यु की स्थिति में 5 लाख रुपये, स्थायी अक्षमता  5 लाख रुपये तक और अस्पताल भर्ती मामले में 2 लाख रुपये तक जबकि आउट पेशेंट ट्रीटमेंट में 50,000 रुपये तक का प्रावधान है.

इंश्योरेंस के अलावा, उबर ने ड्राइवरों की भागीदारी और अनुभव बढ़ाने के लिए पौज रिकौर्ड्स और इन-ऐप चैट जैसी सुविधाएं भी शुरू की हैं. उबर इंडिया के हेड औफ सेंट्रल औपरेशन्स प्रदीप परमेश्वरन ने बताया, ‘यह इनोवेशन्स और पार्टनरशिप्स हमारे ड्राइव-पार्टनर्स के साथ हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, और दिखाता है, कि उबर सिर्फ सबसे ज़्यादा आकर्षक मौके ही नहीं बल्कि सबसे पहली पंसद है. उन्होंने कहा कि आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के साथ पार्टनरशिप के जरिए ड्राइवर-पार्टनर्स को सुरक्षा मिलेगी जो कि उबर की ग्रोथ के सफर के लिए बहुत जरुरी है.

एक दो नहीं 6 बच्चों को अक्षय ने दिया जन्म, देखें वीडियो

बौलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार ने एक दो नहीं बल्कि 6 बच्चों को जन्म दिया है. कमाल की बात यह भी है कि ये सारे स्वस्थ हैं और जन्म के बाद रोने की बजाए हंस रहे हैं. कुछ समझ नहीं आ रहा है ना. चलिए तो हम बताते हैं आपको पूरी कहानी.

दरअसल अक्षय कुमार के ट्विटर हैंडल से शेयर किया गया एक वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. इस वीडियो में अक्षय कुमार को प्रेग्नेंट दिखाया गया है और फिर जब उनकी डिलीवरी होती है तो वह एक दो नहीं बल्कि 6 बच्चों को जन्म देते हैं. वीडियो में दिखाया गया है कि अक्षय के ये बच्चे दुनिया में आने के बाद रो नहीं रहे बल्कि हंस रहे हैं. वीडियो के अंत में आपको पता चलता है कि यह असल में एक अपकमिंग टीवी शो का प्रोमो वीडियो है.

यह शो कोई और नहीं बल्कि एक वक्त खूब सुर्खियां बटोर चुका ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ है. उस वक्त शो में नवजोत सिंह सिद्धू और शेखर सुमन जज हुआ करते थे.

अक्की ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ का 5वां सीजन होस्ट करेंगे. यह शो पूरे 9 साल के बाद छोटे पर्दे पर वापसी कर रहा है. चौथा सीजन 2008 में प्रसारित किया गया था. जो लोग इस शो को नहीं पहचानते हैं उन्हें बता दें कि कपिल शर्मा, राजू श्रीवास्तव, सुनील पाल और भारती सिंह जैसे कामेडियन इसी शो की देन हैं.

शो की सबसे दिलचस्प बात जो कि आपको और ज्यादा एक्साइटेड कर सकती है वह यह है कि इस शो में अक्षय कुमार के अलावा मशहूर कामेडियन जाकिर खान भी बतौर जज नजर आएंगे. शो को स्टार प्लस टीवी चैनल पर प्रसारित किया जाएगा.

आखिर क्यों यह गोल्ड मेडलिस्ट करना चाहता है सरकारी नौकरी

देश के प्रतिष्ठित खेल सम्मान अर्जुन अवार्ड से सम्मानित पैराओलम्पिक खिलाडी और रियो चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल विजेता मरियप्पन थांगवेलु इन दिनों अपने परिवार को मदद करने के लिए किसी नौकरी की तलाश में हैं. मरियप्पन थांगवेलु देश के उन 17 खिलाडियों में शामिल हैं, जिन्हें खेल क्षेत्र में श्रेष्ठ अर्जुन अवार्ड से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों सम्मानित किया गया है. गोल्ड मेडल जितकर देश लौटने के बाद इस खिलाड़ी ने देशवासियों का दिल जीत लिया था. आज के समय में जितना जल्दी हो सके वो कोई सरकारी नौकरी कर परिवार की मदद करना चाहते हैं.

मां कुछ दिनों पहले तक बेचती थी सब्जी

अर्जुन अवार्ड विजेता मरियप्पन थांगवेलु तमिलनाडु के एक मिडिल क्लास परिवार से ताल्लुक रखते हैं. मरियप्पन थांगवेलु को यहां तक पहुंचने में उनकी मां का सराहनीय योगदान रहा है. मैडल जीतने से पहले तक इस खिलाड़ी की मां ने तमिलनाडु के एक स्थानीय बाजार में सब्जी बेचकर थांगवेलु को इस काबिल बना दिया कि आज देश की हर मां अपने बेटे को वहां देखना चाहती है जहां आज थांगवेलु पहुंच चुके हैं.

परिवार में दो जवान भाई के अलावा मां हैं

हालांकि इस पैराओलम्पिक खिलाड़ी का परिवार छोटा है. परिवार में दो जवान बेरोजगार भाई के अलावा मां है. मरियप्पन थांगवेलु कोई सरकारी नौकरी कर अपने परिवार की जिम्मेवारी अपने कंधे पर लेना चाहते हैं. उन्होंने बताया कि वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री समेत कई लोगों को इस मामले में पत्र लिख चुके हैं, लेकिन कोई संतुष्टि पूर्ण जबाब नहीं मिला है. अर्जुन अवार्ड विजेता खिलाडी ने कहा कि वो सरकारी नौकरी करना चाहते हैं ताकि अपने दो भाई और मां की देखभाल कर सके. उन्होंने बताया कि प्राईज के तौर पर मिले पैसे से अपनी मां के लिए जमीन का टुकड़ा खरीदा ताकि वो चावल और सब्जी ऊगा पाए, इसके अलावा कुछ पैसा फिक्स कर दिया. अर्जुन अवार्ड के साथ मिले 5 लाख रूपए के बजाय इस खिलाडी ने सरकारी नौकरी को ज्यादा प्राथमिकता दिया.

पैराओलम्पिक में मेडल जीत बनाया रिकौर्ड

टी-42 वर्ग की प्रतियोगिता में थंगावेलु ने 1.89 मीटर ऊंची छलांग लगाकर गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया और इसके साथ ही यह गोल्ड मेडल जीतने वाले पहले भारतीय खिलाडी बन गए. पैराओलंपिक में भारत को इससे पहले दो स्वर्ण पदक मिल चुके हैं. 1972 में हीडलबर्ग में आयोजित पैराओलंपिक में मुरलीकांत पेटकर ने तैराकी में और देवेंद्र झाझरिया ने 2004 के एथेंस पैराओलंपिक के दौरान भाला फेंक में गोल्ड मेडल जीते थे. पांच साल के थे जब एक सड़क हादसे में उनका पैर खराब हो गया था.

एटीएम से अगर निकले नकली नोट, तो जानिए क्या करें

क्‍या आप के साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप एटीएम गए हों आप ने कुछ रुपये निकाले हों पर जब आप किसी को वो रुपये दे रहें हो तो आप को पता चले कि वो नोट नकली है. एटीएम से नकली नोट निकलने की हर रोज पूरे देश से शिकायत आती रहती है. अक्‍सर बैंक, एटीएम से नकली नोट निकलने की बात स्वीकार नहीं करते हैं जिससे कस्टमर को नुकसान उठाना पड़ता है. इसके अलावा कई बार एटीएम से कटे-फटे, स्टेपल लगे नोट भी निकल आते हैं जिससे भी परेशानी होती है.

अगर आपको लगता है कि आपके पर्स में नकली नोट होने की कोई संभावना नहीं है तो आप अंधेरे में हैं. आरबीआई ने अपनी सालाना रिपोर्ट में बताया कि 7,62,072 नकली नोटों का पता लगाया गया जिसमें से 96 प्रतिशत कमर्शल बैंकों को मिले. जानिए, अगर आपका नोट बैंक नकली बता कर जब्त करे या एटीएम से नकली नोट निकले तो क्या करें.

एटीएम के गार्ड से करें शिकायत

अगर एटीएम से कैश निकालते वक्त आपको लगे कि नकली नोट आ गया है तो आप एटीएम में मौजूद गार्ड से इसके बारे में शिकायत कर सकते हैं. एटीएम में गार्ड के पास एक रजिस्टर होता है जिस पर आपको नोट का नंबर, ट्रांजैक्शन आईडी नंबर, तारीख और समय लिखकर के साइन करने होते हैं. आप उस रजिस्टर पर गार्ड के साइन भी लें. फिर अपनी शिकायत का एक फोटो मोबाइल से लें और जिस ब्रांच से वो एटीएम कनेक्टेड है वहां जाकर भी मैनेजर को अपनी बात कहें. नकली नोट की लिखित में शिकायत दर्ज करवाएं.

आप एटीएम के सीसीटीवी कैमरे में नकली नोट दिखाना ना भूलें.

बैंक जारी करेगा नया नोट

रिजर्व बैंक औफ इंडिया की गाइडलाइंस के मुताबिक हर बैंक में नकली नोट की जांच के लिए स्कैनर लगाना जरूरी है. आपकी शिकायत पर बैंक नोट की जांच कराएगा. अगर सही में नोट नकली पाएगा तो वो उसे आपसे ले लेगा और बदले में बैंक आपको अपनी तरफ से नया नोट जारी करेगा.

आरबीआई को करें मेल

कई बार बैंक आपकी इन मामलों में शिकायत दर्ज करने में आनाकानी करते हैं. ऐसे में आप आरबीआई के पास लिखित में अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके लिए आपको आरबीआई की तरफ से नियुक्त बैंकिंग लोकपाल में शिकायत भेजनी होगी. आरबीआई के सभी रीजनल आफिस में इसके लिए अलग से डिपार्टमेंट बना हुआ है. आप आरबीआई को ई-मेल भी भेज सकते हैं. ई-मेल एड्रेस आपको बैंक की ब्रांच में लिखा हुआ मिल जाएगा.

एफआईआर दर्ज करवा सकते हैं आप

नकली नोट मिलने के केस में आप पुलिस के पास जाकर भी एफआईआर दर्ज करा सकते हैं. एफआईआर दर्ज कराते वक्त पुलिस को सारे ठोस सबूत सौंपे.

क्या व्हाट्सऐप के ये 5 फीचर आपके लिए भी बन गए हैं मुसीबत

व्हाट्सऐप, मैसेजिंग का दूसरा नाम बन चुका है. व्हाट्सऐप की टक्कर में मौजूद हाईक, आईमैसेज, वाइबर इसकी लोकप्रियता के आस-पास भी नहीं पहुंच सके. लेकिन इसी पौपुलर मैसेजिंग ऐप की एक डार्क साइड भी है. जहां यूजर्स इसके एक पहलू से अवगत हैं, वहां ये भी जरूरी हो जाता है की उन्हें इसका दूसरा पहलू भी पता हो. आइए जानें इस बारे में.

रिप्लाई करना हो गया है अनिवार्य

हम में से कई यूजर्स कई बार व्हाट्सऐप पर आने वाले मैसेज का रिप्लाई देना नहीं चाहते हैं, लेकिन फिर भी देना पड़ता है. क्योंकि आप ये बहाना नहीं कर सकते कि मैंने मैसेज देखा ही नहीं. आपके इस बहाने की तैयारी व्हाट्सऐप ने पहले ही लास्ट सीन फीचर के जरिए कर ली थी. लास्ट सीन में आप कितने बजे तक व्हाट्सऐप पर औनलाइन थे, नजर आ जाता है. हालांकि इसको हाइड करने का औप्शन है, लेकिन फिर आप दूसरों का लास्ट सीन भी नहीं देख सकेंगे. अब या तो रिप्लाई करें या फिर लास्ट सीन हाइड करें, फैसला आपके हाथ में है.

ब्लू टिक मौन्स्टर

ब्लू टिक जैसे फीचर के आने के बाद लोगों में बातचीत से ज्यादा गलतफहमियां होने लगी हैं. इस फीचर से सेन्डर को पता चल जाता है की मैसेज पढ़ लिया गया है. समय से रिप्लाई ना आने पर लोगों में बिना बात के गलतफहमियां पैदा हो जाती हैं. इससे लोग अपना अच्छा समय व्यर्थ की बातों में खराब कर देते हैं.

ग्रुप मैसेजिंग

व्हाट्सऐप ग्रुप चैट फीचर को इस सोच के साथ पेश किया गया था की जब जरुरत हो तो लोगों को जोड़कर जरूरी मैसेज एक-साथ दे दिया जाए. लेकिन आज के समय में ग्रुप फीचर जोक्स फौरवर्ड करने से ज्यादा कुछ नहीं रह गया. इसका सही इस्तेमाल बहुत कम किया जा रहा है.

स्पैमिंग

जहां एक तरफ व्हाट्सऐप को मौडर्न कम्यूनिकेशन टूल माना जाता है. वहीं, यही वह टूल है जिसमें सबसे ज्यादा स्पैम मैसेज आते हैं. ऐसे टेक्स्ट में आपको सौभाग्य के लिए मैसेज फौरवर्ड करने को कहा जाता है. इसी ऐप के जरिए सबसे ज्यादा झूठे मैसेज भी फैलते हैं.

वीडियो स्टेटस में क्या लगाऊं

आप जानते होंगे कि पहले व्हाट्सऐप में सिर्फ टेक्स्ट स्टेटस फीचर था, फिर इसे अपग्रेड कर वीडियो और फोटो स्टेटस कर दिया गया. जब यूजर्स ने इसका विरोध किया तो अब आपके पास टेक्स्ट और वीडियो दोनों औप्शन है. वीडियो स्टेटस में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन ये सिर्फ 24 घंटे के लिए ही शेड्यूल रहता है और इसके बाद अपने आप हट जाता है. ज्यादातर यूजर्स के पास इतना समय नहीं होता कि हर रोज इस स्टेटस को अपडेट कर सकें. कुल मिलाकर इस स्टेटस फीचर का यूज बहुत कम यूजर्स करते हैं.

ये व्हाट्सऐप के कुछ ऐसे पहलू हैं जिससे हम रोजाना दो-चार होते हैं. जिन्हें चाह कर भी हम इग्नोर नहीं कर सकते. तो जहां इस मैसेजिंग ऐप के कुछ फायदे हैं तो कुछ नुकसान भी हैं.

मोदी मंत्रिमंडल : तीन साल में तीसरा फेरबदल और फिर भी जारी है माथापच्ची

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंत्रिमंडल का तीन साल में तीसरी बार फेरबदल होने जा रहा है, लेकिन रक्षा मंत्रालय में यह चौथा बदलाव होगा. सरकार और भाजपा के शीर्ष स्तर पर सबसे ज्यादा माथापच्ची नए रक्षा मंत्री के नाम को लेकर हो रही है. इसके लिए कई दौर की बातचीत हो चुकी है पर किसी नाम को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका है. सुरेश प्रभु और पीयूष गोयल का नाम इसके लिए आगे चल रहा है.

रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार देख रहे वित्त मंत्री अरुण जेटली ने गुरुवार को ही साफ कर दिया था कि वह ज्यादा दिनों तक रक्षा मंत्री नहीं रहेंगे. सूत्रों का कहना है कि जेटली से रक्षा मंत्रालय का प्रभार लेकर पीयूष गोयल या सुरेश प्रभु को सौंपने की चर्चा हो रही है. गोयल के ऊर्जा मंत्री के तौर पर अच्छे कामकाज को देखते हुए उन्हें प्रोन्नत करने की बात काफी दिनों से चल रही है.

अहम रक्षा सौदों के चलते रक्षा मंत्री का पद बेहद संवेदनशील है. साथ ही पाकिस्तान के साथ सीमा पर तनाव और चीन के साथ बनते-बिगड़ते रिश्तों के बीच पूर्णकालिक रक्षा मंत्री की जरूरत महसूस की जा रही है. पिछले तीन साल के दौरान करीब एक साल रक्षा मंत्रालय का कार्यभार जेटली के पास अतिरिक्त प्रभार के रूप में रहा है.

दिन भर चला अटकलों का दौर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को अपनी कैबिनेट में फेरबदल करेंगे, लेकिन इससे पहले शुक्रवार को दिनभर कयासों और अटकलों का दौर चलता रहा. कैबिनेट से हटाने और शामिल करने के नए-नए पैमाने तय किए जाते रहे, जिसमें कैबिनेट के मंत्री और सरकार के आला अफसर भी शामिल रहे. कई मंत्रियों के इस्तीफे और त्यागपत्र देने की पेशकश की खबरों के बीच कुछ मंत्री वक्त से पहले ही दफ्तर पहुंच गए.

मंत्रालयों में चहल-पहल सामान्य रही, लेकिन अधिकतर मंत्री और अफसर एक-दूसरे से फेरबदल की जानकारी लेने में व्यस्त रहे. अब बदलाव का समय तय होने के बाद कई मंत्रियों का मंत्रालय के कामकाज में मन नहीं लगा. वह पूरे दिन दूसरे मंत्रियों और पार्टी नेताओं को फोन कर यह जानने में जुटे रहे कि इस फेरबदल की सूची में कहीं उनका नाम तो नहीं है. उनकी लाल बत्ती बरकरार है या नहीं. उनका मंत्रालय तो नहीं बदला गया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल में जब भी फेरबदल की बात होती है तो केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह की चर्चा शामिल होती है. इस बार भी उनका मंत्रालय बदले जाने की अटकलें हैं, लेकिन अभी वह बिहार के दौरे पर हैं.

दो विभाग संभालने में मुश्किल

एनडीए सरकार के बनने के वक्त अरुण जेटली को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी, लेकिन उनके लिए वित्त और रक्षा दोनों विभागों को संभालना मुश्किल हो रहा था. इसलिए गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को दिल्ली लाकर रक्षा मंत्री बनाया गया था. ईमानदार छवि वाले पर्रिकर को रक्षा मंत्री बनाए जाने के फैसले की काफी सराहना हुई थी.

रेल मंत्रालय से विदाई तय

सुरेश प्रभु की रेल मंत्रालय से विदाई लगभग तय मानी जा रही है. हाल में दो रेल हादसों के बाद प्रभु ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर इस्तीफे की पेशकश की थी. उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन हादसे के बाद प्रभु ने मंत्रालय का कोई कामकाज नहीं किया है. यहां तक कई महाप्रबंधकों व रेलवे बोर्ड सदस्य की नियुक्ति संबंधी फाइल को भी आगे नहीं बढ़ाया है. प्रभु के सेल स्टाफ ने अहम फाइलें निपटा दी हैं.

गडकरी की चर्चा

रेलवे बोर्ड के सदस्यों से लेकर दूसरे अधिकारी नया रेल मंत्री कौन बनेगा, यह जानने के लिए बेहद उत्सुक हैं. रेल भवन में चर्चा है कि सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को रेल मंत्री बनाने की अटकलें अधिक हैं.

आखिरी विस्तार होगा

अगले लोकसभा चुनाव से पहले यह आखिरी विस्तार हो सकता है, इसलिए इसमें बड़ी संख्या में मंत्री शामिल किए जा सकते हैं. केंद्रीय मंत्रियों की संख्या लगभग 30 व राज्यमंत्रियों की संख्या लगभग 50 तक पहुंच सकती है.

मिशन 2019 को ध्यान में रखकर फेरबदल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कसौटी पर खरा न उतरने और अपने मंत्रालयों में बेहतर प्रदर्शन न कर पाने की वजह से आधा दर्जन मंत्रियों को हटाया जाना लगभग तय है. कुछ मंत्रियों को संगठन की जरूरतों के हिसाब से हटाया जा रहा है. मंत्रिमंडल में फेरबदल मिशन 2019 की तैयारियों से जुड़ा है, जिसमें सरकार व संगठन को उसके अनुरूप बनाना है.

सूत्रों के अनुसार, कौशल विकास मंत्रालय का गठन प्रधानमंत्री मोदी के नए भारत के निर्माण की संकल्पना से किया गया था लेकिन इस विभाग के मंत्री राजीव प्रताप रूड़ी अभी तक अपेक्षा के अनुरूप काम नहीं कर सके. साथ ही बिहार में जदयू के साथ आने और उसे सरकार में हिस्सेदारी देने के लिए भी बिहार से मंत्री कम करने थे. ऐसे में रूड़ी को इस्तीफा देने को कहा गया. स्वास्थ्य राज्यमंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते मंत्रालय व पार्टी दोनों स्तरों पर प्रदर्शन नहीं कर पा रहे थे.

रूडी-कुलस्ते को संगठन में मिलेगी अहम जिम्मेदारी

सूत्रों के अनुसार राजीव प्रताप रूड़ी व फग्गन सिंह कुलस्ते को संगठन में अहम काम दिया जाएगा. रूड़ी को राष्ट्रीय महासचिव व प्रवक्ता बनाए जाने की चर्चा है. कुलस्ते को भी प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिल सकती है. संजीव बालियान को भी संगठन के काम में लगाया जाएगा.

कलराज पर भारी पड़ी उम्र, बंडारू नहीं कर पाए काम

कलराज मिश्र का मंत्रालय भी ज्यादा प्रभावी काम नहीं कर पा रहा था और वे 75 साल की आयु को भी पार कर गए थे. उत्तर प्रदेश के चुनाव में जातीय समीकरणों को देखते हुए उनको मंत्री बनाए रखा गया था. बंडारू दत्तात्रेय भी मंत्रालय में ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे. महेंद्र नाथ पांडे को संगठन के कारण इस्तीफा देना पड़ा है.

‘परफॉर्मेंस’ बेहतर बनाने पर जोर

केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित फेरबदल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने मंत्रियों के साथ मंत्रालयों के ‘परफॉर्मेंस’ को भी बेहतर बनाने की कोशिश कर सकते हैं. ताकि, मंत्रालयों में आपसी समन्वय बढ़े और विकास की गति तेज हो. मोदी कई बार प्रभावशाली सरकार की वकालत कर चुके हैं. मंत्रिमंडल में रविवार को होने वाले बदलावों में मंत्रालयों के बीच बेहतर समन्वय का ध्यान रखा जाएगा. माना जा रहा है कि फेरबदल में आपस में जुड़े मंत्रलयों की जिम्मेदारी एक मंत्री को सौंपी जा सकती है, जिससे कामकाज में तेजी आए. प्रधानमंत्री का यह प्रयोग ऊर्जा के मामले में सफल रहा है. ऊर्जा से संबंधित सभी मंत्रालयों की जिम्मेदारी केंद्रीय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल के पास है. संबंधित मंत्रलयों के साथ होने से ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से काम हुआ है. ऐसे में मोदी मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान कुछ और मंत्रलयों में आपसी तालमेल बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं. इससे कार्यक्रमों के क्रियान्वयन और काम में तेजी आएगी.

यह कयास भी हैं कि सड़क एवं परिवहन मंत्रलय और रेल मंत्रलय का प्रभार एक ही मंत्री को सौंपा जा सकता है, क्योंकि रेल भी परिवहन से जुड़ा है. साथ ही राजमार्गों के निर्माण में रेलवे लाइन पर पुल और अंडरपास बनाने की इजाजत मिलने में दो मंत्रालयों के सामंजस्य की वहज से देर लगती है.

सहयोगी दलों से दो मंत्रियों को जगह

विस्तार में जदयू से दो मंत्रियों को शामिल किए जाने की उम्मीद है. सूत्रों के अनुसार जदयू से आरसीपी सिंह व संतोष कुमार को मंत्री बनाया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना से आनंद राव अडसूल या अनिल देसाई को मंत्री बनाया जा सकता है. तेलुगुदेशम अपने हिस्से में एक और मंत्री चाहती है. अन्नाद्रमुक के बारे में अभी फैसला होना बाकी है. अन्नाद्रमुक से एम थंबीदुरई, वी मैत्रेयन व पी वेणुगोपाल के नामों की चर्चा है.

नाकामी को छुपाने के लिए मंत्रिमंडल में बदलाव : शर्मा

केंद्रीय मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल को कांग्रेस ने विफलता छुपाने की कोशिश करार दिया. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियों ने अर्थव्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया है. मंत्रिमंडल में फेरबदल से जीडीपी के आंकड़े नहीं बदल जाएंगे. यह नाकामी छुपाने की कोशिश है. शर्मा ने कहा कि भाजपा के पास योग्य व्यक्तियों की कमी है. ऐसे में इस बदलाव से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. मंत्रिमंडल फेरबदल के बारे में सवाल किए जाने पर उन्होंने कहा कि यह प्रधानमंत्री का विशेषाधिकार होता है, वह जिसे चाहे मंत्री बना या हटा सकते हैं. सरकार को हर मोर्चे पर विफल रहने का आरोप लगाते हुए आनंद शर्मा ने कहा कि मंत्रिमंडल में बदलाव से सरकार पर लगा नाकामी का ठप्पा नहीं हटेगा.

वीडियो : तो इस वजह से टीम इंडिया जीत रही है सारे मैच

भारतीय टीम ने श्रीलंका के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों की सीरीज का चौथा मैच 168 रनों से जीत लिया. भारत ने सीरीज में 4-0 से बढ़त बना ली है. पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 375 रनों का पहाड़ जैसा स्कोर बनाया. भारत की तरफ से रोहित शर्मा और कप्तान विराट कोहली ने शानदार शतकीय पारी खेली और दूसरे विकेट के लिए 219 रनों की साझेदारी निभाई.

मैच के बाद उप कप्तान रोहित शर्मा ने बीसीसीआई टीवी के लिए कप्तान कोहली का इंटरव्यू लिया. रोहित शर्मा ने कोहली से पूछा कि आपकी कप्तानी में टीम लगातार जीत रही है इसके पीछे क्या कारण है तो कोहली ने कहा, “खिलाड़ियों के अंदर अच्छा प्रदर्शन करने की जो भूख है, उसी की वजह से हम जीत हासिल कर रहे हैं. एक-दो मैच में अच्छा खेलने के बाद भी वह रुकते नहीं हैं और आगे के मैचों में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करते हैं. इससे मेरा काम काफी आसान हो जाता है. मैं केवल फील्ड लगाता हूं, बाकी सब खिलाड़ी ही करते हैं.”

रोहित ने फिर कोहली से पूछा कि आपको मेरे साथ खेलकर कैसा लगा तो कोहली कहते हैं कि रोहित के साथ खेलते समय बहुत ही मजा आता है. हम बल्लेबाजी का मजा ले रहे थे और स्कोरबोर्ड पर ध्यान नहीं दे रहे थे. हमने साथ में कई बड़ी साझेदारियां बनाई हैं और ये भी उनमें से एक थी.

कोहली का कहना है कि आज टीम जिस भी मुकाम पर है उसमें खिलाड़ियों के साथ साथ सपोर्ट स्टाफ का भी बड़ा योगदान है. करीब साढ़े तीन मिनट के इस इंटरव्यू में रोहित शर्मा कोहली से खूब सवाल जवाब करते हैं. आप भी देखें ये वीडियो.

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