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शारीरिक शोषण के खिलाफ चुप रहें या आवाज उठाएं

आजकल अकसर महिलाओं को सलाह दी जाती है कि वे घर, औफिस या पब्लिक प्लेस में हुए शारीरिक शोषण के खिलाफ अवाज उठाएं. उन से कहा जाता है कि जब तक वे अपना विरोध प्रकट नहीं करेंगी, स्थिति को बदलना नामुमकिन है पर जैसे ही कोई महिला ऐसी घटना के खिलाफ अपनी आवाज उठाती है, उसे ट्रोल किया जाता है. सोशल मीडिया पर उस के खिलाफ जहर उगलना शुरू हो जाता है, उस पर फिर यह इलजाम लगाया जाता है कि वह पब्लिसिटी पाने के लिए यह सब कर रही है.

चाहे बौस द्वारा शारीरिक शोषण की शिकायत हो या किसी पार्टी की तसवीरें पोस्ट करने पर किसी छात्रा को रेप की धमकी मिलने की, ऐसे उदाहरण समाज की महिलाओं के प्रति असहिष्णुता स्पष्ट कर देते हैं. जो महिला प्रतिकूल परिस्थितियों के खिलाफ आवाज उठाती है, उसे यही सुनने को मिलता है, ‘यह सब तो होता रहता है’, ‘अच्छे घर की लड़कियां ऐसे काम नहीं करतीं’ या ‘जरूर तुम ने ही कुछ किया होगा वरना वह लड़का ऐसा कुछ कर ही नहीं सकता.’

आइए, ऐसी ही कुछ महिलाओं के उदाहरण देखते हैं, जिन्होंने अपनी आवाज उठाने का साहस किया पर उन्हें ही टार्गेट किया गया-

पहली

2017 का पहला दिन ही शर्मनाक रहा, जब बैंगलुरु में लड़कियों का मास मोलेस्टेशन हुआ. पुलिस कोई ऐक्शन ले ही नहीं सकी, क्योंकि अभी तक कोई रिपोर्ट फाइल नहीं की गई. इस शर्मनाक प्रकरण में कोई ऐक्शन लेने के बजाय नेताओं और आम पब्लिक ने लड़कियों पर ही दोषारोपण किया. तर्क दिया गया कि लड़कियां नशे में थीं और उन्होंने छोटी ड्रैसें पहनी हुई थी.

दूसरी

कुछ ही दिन पहले मुंबई की 2 बहनें घर जा रही थीं. बड़ी बहन ने नोटिस किया कि एक आदमी छोटी बहन के वक्षस्थल को घूर रहा है. उस ने आदमी को टोका और उस के प्राइवेट पार्ट को घूरना शुरू कर दिया, उस ने यह घटना सोशल मीडिया पर शेयर की तो संस्कारी कमैंट्स की बाढ़ आ गई. तर्क दिया गया कि किसी लड़की को पब्लिक में इस तरह की हरकत नहीं करनी चाहिए.

तीसरी

जब एक छात्रा गुरमेहर कौर ने, जिस ने अपने पिता को जंग में खो दिया था, अपनी बात सोशल मीडिया के सामने रखी, तो उसे रेप की धमकियां मिलने लगीं. उसे ट्रोलर्स ने इतना निशाना बनाया कि उसे पीछे हटना पड़ा, क्योंकि अपने मन की बात, अपने विचार सामने रखना ‘ऐंटीनैशनल’ हो गया है.

चौथी

एक लड़की, जो वैब ऐंटरटेनमैंट पोर्टल के लिए काम करती थी, उस ने लिखा कि कैसे 2 साल तक पोर्टल के फाउंडर अरुणाभ कुमार ने उस का शोषण किया. ऐसे ही आरोप कुछ और परिचितों और महिलाओं ने भी अरुणाभ पर लगाए थे.

जहां मूवी ‘अलीगढ़’ के लेखक अपूर्व असरानी और कौमेडियन अदिति मित्तल ने इस अज्ञात पोस्ट का समर्थन किया, वहीं अधिकांश लोगों ने इसे लड़की का पब्लिसिटी स्टंट बताया.

एक अज्ञात लड़की की यह पोस्ट पब्लिसिटी स्टंट कैसे हो सकती है. जब लड़की अपना नाम भी नहीं लिख रही है तब यह कैसे कहा जा सकता है?

5वीं

दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा मेघना सिंह हाल ही में एक कालेज फैस्ट से घर लौटी तो उस ने अपनी जींस पर पुरुषवीर्य के धब्बे देखे. उस ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘‘कंसर्ट्स लोगों का स्टेज पर परफौर्म करते हुए व्यक्ति के लिए अपना प्यार दिखाने के लिए होते हैं. उन का सपना सच होने जैसा होता है. मैं केके के प्यारे गीत सुन कर इतना खुश हो कर घर आई थी, पर मर्द हो गया आज तो यह बंदा, एकदम मर्द. थैंक्स, मर्दों, भीड़ के बीच यह सब…’’

मेघना ने जींस का फोटो भी पोस्ट किया था. कुछ लोगों ने उस का समर्थन किया, तो कुछ को यह शर्मनाक अनुभव मजेदार लगा. ऐसे कमैंट्स भी किए गए जिन में उन धब्बों का कैमिकल ऐनालिसिस करवाने के लिए कहा गया था कि कहीं वे धब्बे ‘श्रीखंड’ या ‘चूना’ के न हों. कहा गया कि लड़की झूठ बोल रही है. पब्लिसिटी के लिए यह कर रही है.

26 वर्षीया आईटी प्रोफैशनल जो अपनी बहन को घूरने वाले के खिलाफ डट कर सामने आ गई थी, बताती है, ‘‘मेरे आसपास के लोगों के अनुसार पब्लिक में अपनी आवाज उठाना एक महिला के लिए ठीक नहीं है. लोग मुझे नीच, नैगेटिव, ऐंटीमैन और पता नहीं क्याक्या कह रहे थे. कुछ लोगों ने तो मुझे लेस्बियन भी कह दिया. मेरे तथाकथित दोस्तों ने भी मुझे ही गलत ठहराया.’’

विशाखा गाइडलाइंस के अनुसार हर कंपनी में महिलाओं की सुरक्षा पर ध्यान देने के लिए एक उचित सैक्सुअल हैरेसमैंट सैल होना चाहिए.

महिलाओं के लिए सुरक्षित सार्वजनिक जगहों के लिए काम करने वाली समाजसेविका रुचिता जैन कहती हैं, ‘‘एक आरोपी अपने सामाजिक, आर्थिक स्टेटस से परखा जाता है जैसे किसी बड़ी कंपनी का अधिकारी लोगों की नजरों में गलत नहीं हो सकता. हम यह कौन सा उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं? पीडि़ता को ही क्यों दोष देने लगते हैं हम? आज ऐसे लोगों की जरूरत है जो पीडि़ता की स्थिति को समझें और उस से पूछें कि वे उस के लिए क्या कर सकते हैं?’’

आधुनिक समाज जहां महिला सशक्तीकरण की बड़ीबड़ी बातें करता है, वहीं अपने साथ हुए शोषण के खिलाफ आवाज उठाते ही महिला का अपमान शुरू हो जाता है.

महिलाओं के साथ रेप, अपराध की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. जिस समाज में एक महिला का स्थान सुरक्षित न हो, जहां अंधविश्वास, भ्रष्टाचार, अशिक्षा का बोलबाला हो, उस समाज का भविष्य पूर्णरूपेण अनिश्चित है.

जुझारूपन से मिलती ममता बनर्जी को सफलता

भारतीय जनता पार्टी पूरे देश में धर्म का झुनझुना बजा कर फैल गई है पर पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी उसे घुसने नहीं दे रही हैं. कुछ नगर निकायों के चुनावों में ममता को मिलीं 140 सीटों के मुकाबले में भाजपा को मात्र 6 सीटें मिलीं. यह और कुछ नहीं, बस, यह बताता है कि अगर लगन हो तो भूकंपों, आंधियों और आग से भी मुकाबला किया जा सकता है.

ममता बनर्जी के पास कोई धर्म नहीं, दिमाग को सुन्न करने वाला कोई कैडर नहीं. उन के जुझारूपन, उन के त्याग, उन की मेहनत और उन की सादगी का नतीजा है कि वे पश्चिम बंगाल की आंखों का तारा बनी हुई हैं.

यह जीवन के हर क्षेत्र में लागू होता है. सफल वही होते हैं जो लग कर काम करते हैं, चाहे क्षेत्र पढ़ाई का हो, क्रिकेट का हो, डांस का हो या लेखन का. जम कर काम करना और अपना ध्येय व लक्ष्य सामने रखना जरूरी होता है. आप जो कर रहे हैं और कह रहे हैं उस में स्वार्थ ही न हो, दूसरों का खयाल भी हो.

ममता इस का जीताजागता उदाहरण हैं कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह की लगातार कोशिशों के बावजूद पूरे बंगाल की जनता टस से मस नहीं हो रही. त्रिपुरा में भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के कुछ विधायक तोड़े भी, लेकिन फिर भी पश्चिम बंगाल में वह कुछ न कर पाई. हर युवा को अपने काम पर विरोधी को सेंध मारने से रोकने के लिए अपना किला मजबूत करना सीखना होगा. यह मुश्किल नहीं है.

हर युवा को कन्हैया कुमार की तरह जुझारू होना होगा. वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के एक कार्यक्रम के दौरान नकली नारों के नाम पर पकड़ा गया, जेल में रहा पर उस ने हिम्मत नहीं हारी. वह आज करोड़ों का नहीं, तो हजारों की आंखों का तारा तो है. वह जब बोलता है तो लोगों की सांसें रुक जाती हैं. न अमीर घर का रहनसहन, न अंगरेजी स्कूल की पढ़ाई. पर उसे हर बात का ज्ञान है, हर बात की समझ है.

गुजरात में हार्दिक पटेल भारतीय जनता पार्टी की किरकिरी बना हुआ है, वह लगातार संघर्ष में जो लगा है. जो युवा अपने सुखों को अपने लक्ष्यों के लिए कुरबान करने को तैयार हैं, वे सफल होते हैं. जनून की जरूरत है. हेरफेर से कुछ सफल होते हैं, हर कोई नहीं. मेहनत व जमीर दोनों का पैसा व शोहरत पाने के लिए इस्तेमाल करें लेकिन उन्हें नीलाम न कर दें. रातदिन लगन ही सफलता की जरूरत है. सोने की तश्तरी में कुछ नहीं मिलता. तानाशाहों को भी कभी नहीं मिला.

आईफोन 8 और गैलेक्सी नोट 8 के बीच बड़ी टक्कर

12 सितंबर को सैमसंग और ऐपल अपने-अपने स्मार्टफोन लांच करने जा रहे हैं. सैमसंग जहां गैलेक्सी नोट 8 लेकर आ रहा है, तो वंही ऐपल आईफोन 8 लांच करने की तैयारी में है. ऐसे में दोनों के बीच बड़ी टक्कर देखने को मिल सकती है. भारत में इन दोनों हैंडसेट्स की कीमत क्या होगी, इसका खुलासा फिलहाल नहीं हुआ है. अपनी-अपनी लांचिंग को लेकर सैमसंग और ऐपल ने मीडिया इनवाइट्स भेजना शुरू कर दिया है. सैमसंग अपनी आफिशियल वेबसाइट पर प्री-बुकिंग शुरू कर चुका है, जबकि ऐपल इसकी तैयारी कर रहा है.

ऐपल आईफोन के फीचर्स को तो फिलहाल आफिशियली सबके सामने नहीं लाया गया है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईफोन 8 में फेशियल रिकग्निशन और वायरलेस चार्जिंग हो सकेगा, आईफोन 8 फ्लैट डिस्प्ले वाला होगा. इसमें नये टच सेंसर, आगमेंटेड रियलिटी एप्लिकेशन जैसे नये फीचर्स भी रहेंगे.

नये आईफोन में कोई टच आईडी नहीं होगी, इसकी जगह जो नये सेंसर इस्तेमाल किये जा रहे हैं उनकी मदद से ही बायोमेट्रिक औथेंटिकेशन होगा. इसके साथ ही नये आईफोन में A11 का पावरफुल प्रोसेसर दिये जाने की भी चर्चा जोरों पर है, जो अभी इस्तेमाल हो रहे प्रोसेसर से 10 गुना बेहतर होगा.

सैमसंग गैलेक्सी नोट 8 के फीचर्स के बारे में बात करें, तो इस स्मार्टफोन में खास बात यह है कि इसमें दिया गया आइरिस सेंसर होगा. 2960 x 1440 रेजौल्यूशन वाला 6.2 इंच का इनफिनिटी डिस्प्ले, मीडिया टेक एमटी प्रोसेसर के साथ 6 GB रैम, ड्यूल कैमरा सेटअप के साथ 13 मेगापिक्सल का रियर कैमरा और 8 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है.

इस स्मार्टफोन के स्टोरेज की अगर बात करें तो इसमें 64GB/128GB/256GB की इंटरनल मेमोरी दी गयी है. पावर के लिए इसमें 3300 mAh की बैटरी दी गयी है.

साधु तो सभी एक से होते हैं, पर नक्कालों से सावधान

जिस भगवान की मर्जी के बगैर बच्चा पैदा होना तो दूर की बात है पत्ता भी न हिलता हो उसकी मर्जी के बिना फर्जी साधु कैसे पैदा हो सकते हैं यह बात अब हैरानी, दिलचस्पी या चिंता की नहीं बल्कि शोध का विषय हो चली है. खुद को असली साबित करने के लिए कुछ कथित साधु संतों के एक संगठन को फर्जी बाबाओं की लिस्ट कुछ और नहीं बल्कि धर्म के अपने शाश्वत धंधे को चमकाए रखने का टोटका भर है. यह टोटका अब से कुछ साल पहले तक अखबारों में अक्सर छपने वाले एक इश्तिहार की याद दिलाता है.

कुछ बीड़ी निर्माता मोटे मोटे अक्षरों के जरिये खबर देते थे कि नक्कालों से सावधान, कुछ विक्रेता हमारे ब्रांड की बीड़ी के नाम से मिलती जुलती बीड़ी बेच रहे हैं पकड़ाये जाने पर ऐसे नक्कालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस इश्तिहार से कई फायदे एक साथ होते थे पहला यह मशवरा कि सेहत के लिए नुकसानदेह होते हुये भी बीड़ी पीयी जा सकती है और हमारे ब्रांड की बीड़ी इतनी बिकती है कि लोग उसकी नकल करते हैं पर तीसरा बड़ा फायदा यह संदेश लाना होता था कि बीड़ी असली हो या नकली नशा भरपूर देती है. फिर असली नकली की पहचान और ट्रेड मार्क की जांच करने की जहमत बीड़ी का धुआं उड़ाने वाले नहीं उठाते थे.  उन्हें नशे से मतलब होता था फिर चाहे वह असली से मिले या नकली बीड़ी से. भारतीय उपभोक्ता भोला नहीं है वह इस संभावना से भी इंकार नहीं करता था कि मुमकिन है यह नकली बीड़ी भी असली निर्माता ही बनाता हो जिससे उसकी असली नकली दोनों बीड़ी बिकती रहें और वह इस तरह नशे के प्रसार के कानूनी आरोप से भी बच जाता है.

फर्जी बाबाओं की सूची बीड़ी के इस कारोबार से जुदा नहीं है बकौल कार्ल मार्क्स धर्म तो अफीम का नशा है सो लोगों ने इस सूचना को भी बीड़ी उपभोक्ताओं की तरह फेफड़ों तक हजम कर लिया कि कोई फर्क नहीं पड़ता बाबा ब्रह्मचारी हो या व्यभिचारी हमें तो उसके प्रवचनों से सुन्न होकर आनंद आना चाहिए. बाबा लोग भले ही धर्म और जात पात के अलावा (कु)कर्मों की बिना पर असली नकली साधु में फर्क करते रहें लेकिन भक्तों के पास सचमुच की सम्यक दृष्टि बिना किसी त्याग तपस्या या सिद्धि के है कि सभी बाबा आलीशान महलों में रहते हैं, हवाई जहाजों में सफर करते हैं, चमत्कारी आयुर्वेदिक दवाएं बेचते हैं, ज्यादा दक्षिणा दो तो काउंटर के नीचे से (ओटीसी) पुत्र जीवक नुस्खा या जड़ी भी थमा देते हैं. मनचाही औरत भी वे वश में करा देते हैं. फर्क इतना है कि कुछ बाबा लोग ऐसे दो नंबर के काम महंगे में चोरी छुपे सम्पन्न कराते हैं तो कुछ सभी पर सस्ते में कृपा बरसा देते हैं. ये भी नेताओं के लंगोटिया होते हैं और वे भी तो दोनों में फर्क क्या.

ये दूसरी तरह के बाबा आमतौर पर जाति के ब्राह्मण नहीं होते पर प्रवचन उनसे कहीं लुभावने करते हैं. वे मोक्ष मुक्ति वगैरह बड़े सस्ते में बेचते हैं क्योंकि उन्हें विरासत में जमा जमाया कारोबार नहीं मिलता इसलिए जल्दी और ज्यादा पैसा कमाने वे धार्मिक क्रिया कलापों और उत्पादों पर भारी डिस्काउंट देने लगते हैं. ये बाबा जन्मना ब्राह्मण हैं या कर्मणा इससे चमत्कार खरीदने निकले भक्तों को कोई खास सरोकार नहीं रहता उल्टे वे ऐसे बाबाओं के ज्यादा मुरीद हो जाते हैं जो रातों रात अपनी दम पर अपना मठ और बादशाहत खड़ी कर लेते हैं.

इन सूचीबद्ध बाबाओं के अधिकांश भक्त भी उन्हीं की तरह छोटी जाति के होते हैं जिन्हें वेदों, पुराणों, उपनिषदों, संहिताओं और स्मृतियों से भी मतलब नहीं रहता. कुछ जागरुक दलित विद्वानों की मेहरबानी से उन्हें यह ज्ञान सहज प्राप्त हो गया है कि इन्हीं धर्म ग्रन्थों में उन्हें नीच, शूद्र, गंवार और पशु वगैरह वगैरह कह कर प्रताड़ित करने की बातें कही गईं हैं ऐसे में ऊंची जाति वाला बाबा क्यों उनका उद्धार करेगा इसलिए छोटी जाति वाला बाबा उन्हें मुफीद लगता है. इधर असली बाबाओं को नकली बाबाओं के उजागर होते कारनामों से अपनी ग्राहकी घटती लगी तो आनन फानन में उन्होंने मुजरे और शास्त्रीय नृत्यों में फर्क गिनाने जैसा काम करना मुनासिब समझा.

बात कतई नई या हैरानी वाली इस लिहाज से भी नहीं है कि एक शंकराचार्य जी तो शिर्डी वाले साईं बाबा को मुसलमान और वेश्या की संतान कहते उन्हें प्रेत और जिन्न तक बताते कहते रहते हैं कि जो इस साईं बाबा का पूजा पाठ करेगा वो दिक्कत में पड़ जाएगा. इन शंकराचार्य की परेशानी यह है कि पथ और धर्म भ्रष्ट हो चुके हिंदुओं पर उनकी सलाह या धमकियों का कोई असर नहीं पड़ रहा शिर्डी में भी तिरुपति और वैष्णोदेवी के मंदिरों के बराबर ही पैसा बरस रहा है.

फर्जी बाबाओं का जो धार्मिक वारंट या समन निकला वह अपने सफेद दामन का इश्तिहार भर है इस पर भी कोई आश्वस्त नहीं कि ये, वैसे नहीं होंगे और वे, वैसे थे तो कौन सा पहाड़ टूटा पड़ रहा था. धर्म के बाजार में पैसा तो सभी बना रहे हैं फिर कुछ मानवीय गलतियों और कमजोरियों पर धर्म अधर्म का हल्ला क्यों जबकि तमाम धर्म ग्रंथ और उनमें भी खासतौर से गीता में भगवान कहते हैं कि मैं ही सब कुछ करता और करवाता हूं. चिंता दरअसल में भगवान या धर्म की नहीं बल्कि चढ़ावे की है कि कहीं ऐसा न हो कि इन कथित फर्जी बाबाओं की वजह से कल को तमाम सुख और एश्वर्य छिन और छूट जाएं इसलिए वक्त रहते ग्राहकों को बता दो कि नक्कालों से सावधान. अच्छा तो यह होता कि बजाय फर्जी बाबाओं के एक लिस्ट असली बाबाओं की जारी कर दी जाती और उसे संसद से पारित कराया जाए जिससे यह झंझट ही खत्म हो. जब नोट बंदी हो सकती है तो बाबा बंदी भी मान्य होना चाहिए.

अब यह तो लोगों के समझने की बात है कि ढोंग पाखंड चमत्कार सब बकवास बाते हैं जो ठगी के बहुत पुराने तौर तरीके हैं. यह बात कतई अहम नहीं कि इन्हें कौन करता है और कौन नहीं. कोई भी करे उसके झांसे मे आकर अपनी मेहनत की कमाई लुटाना बेवकूफी है जो लोग अपने सुखों के लिए लोगों के दुख के मोहताज हैं उनकी फितरत और मंशा क्या होगी यह बात एक दफा समझ आ जाये तो आधे से ज्यादा दुख और परेशानियां तो बगैर किसी जतन के कम हो जाएंगे. असली नकली की बहस और उदाहरणों से परे संकल्प बीड़ी न पीने का लिया जाये तो जरूर बात समझ की होगी.

पुराने फोन को अच्छे दाम में बेच कर खरीदें नया फोन, जानिये कैसे

एप्पल 12 सितंबर को अपना नया फ्लैगशिप आईफोन 8 लौन्च करने की तैयारी में है. सूत्रों की माने तो इस फोन को 1000 डौलर यानि करीब 63,000 रुपये में लौन्च किया जाएगा. ऐसे में अगर यह फोन आप खरीदना चाहते हैं तो आपको ढेर सारे पैसे की जरुरत होगी क्योंकि भारत में यह और भी ज्यादा कीमत में पेश किए जाने की उम्मीद है.

अगर आप इसे खरीदना चाहते हैं और अभी तक आपने पैसे बचाने शुरू नहीं किए हैं, तो अब भी आपके पास कुछ समय है. इसका एक तरीका यह भी है कि आप अपने मौजूदा आईफोन या एंड्रौयड डिवाइस को बेच दें. वैसे तो फोन को बेचने के कई तरीके हैं लेकिन हम आपको 5 बेहतरीन तरीके बताने जा रहे हैं.

Gazelle

यहां आपको यह बताना होगा कि आप कौन सा फोन इस्तेमाल कर रहे हैं. साथ ही यह भी बताना होगा कि उसकी मौजूदा हालत क्या है. इसी आधार पर आपको फोन के पैसे दिए जाएंगे. अगर आप औफर को स्वीकार करते हैं तो आपको अपना आईफोन शिप करना होगा. जैसी ही फोन गजेल को रिसीव होगा वो आपको पेपल या अमेजन गिफ्ट कार्ड के जरिए पेमेंट कर देंगे. आपको बता दें कि अभी गजेल अनलौक्ड आईफोन 7 (256 जीबी) के 375 डौलर यानि करीब 23,000 रुपये दे रहा है.

Mazuma

अगर आप यूके में रहते हैं तो Mazuma आपको आपके फोन की अच्छी कीमत दे सकता है. यहां अभी अनलौक्ड आईफोन 7 (256 जीबी) के 380 डौलर यानि करीब 29,000 रुपये दिए जा रहे हैं. अगर आपका फोन चालू हालत में है तो आपको चेक या औनलाइन ट्रांसफर के जरिए पैसा मिल जाएगा.

Amazon

अमेजन सेलर सेंट्रल के जरिए आप अपनी डिवाइस को बेच सकते हैं. इसके लिए आपको फ्री सेलर अकाउंट बनाना होगा. इसके बाद आपको अपना आईफोन लिस्ट करना होगा और उसकी मौजूदा स्थिति को कंफर्म करना होगा. यहां आपको फोन की कीमत बता दी जाएगी. आप यहां पर अपने मुताबिक भी कीमत बता सकते हैं. अगर कोई अमेजन से फोन को खरीदता है तो आपके पास एक मेल आ जाएगा. इसके बाद आपको फोन को पैक कर पोस्ट औफिस के जरिए पोस्ट करना होगा.

Ebay

यहां लोग आपके फोन की बोली लगाएंगे और आप अपने मुताबिक कीमत को सेट कर सकते हैं. आपको अपने फोन की फोटो लेकर उसे अपलोड करनी होगी. यहां आपके अलावा भी कई स्मार्टफोन्स मौजूद होंगे जिनपर बोली लगाई जा सकेगी.

Gumtree

यहां आप एक क्लासिफाइड ऐड डाल सकते हैं. अगर आपका ऐड देखकर कोई कौन्टैक्ट करता है तो आप उससे मीटिंग फिक्स कर सकते हैं. इसके बाद उससे बातचीत कर आप कीमत तय कर सकते हैं.

इन्फोसिस में नौकरियों की भरमार, जानिए क्या आप हैं इसके योग्य

इन्फोसिस कम्पनी अगले एक दो साल सालाना करीब 6,000 कर्मचारियों की नियुक्ति करेगी. पिछले वित्त वर्ष में भी कंपनी ने इतनी ही नियुक्तियां की थी. यह जानकारी कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने दी. देश की दूसरी सबसे बड़ी साफ्टवेयर सेवा कंपनी ने अमेरिका और यूरोपीय बाजारों में नियुक्ति प्रक्रियाओं को बढ़ाया है. कंपनी ने अवसरों को भुनाने और वीजी संबंधी मुद्दों के कारण ये नियुक्तियां बढ़ायी हैं.

इन्फोसिस के अंतरिम सीईओ और प्रबंध निदेशक यूबी प्रवीण राव ने पिछले सप्ताह निवेशकों के साथ बैठक में कहा कि हम नियुक्ति जारी रखेंगे. अभी जो साल खत्म हुआ है  हमने शुद्ध रूप से 6,000 नियुक्तियां की हैं और अगले एक दो साल में इतनी ही लोगों को और नियुक्त करने की उम्मीद है जो बाजार में वृद्धि की स्थिति पर निर्भर करेगा.

बेंगलुरु की कंपनी पिछले कुछ महीनों से सुर्खियो में है. संस्थापक और पूर्व निदेशक मंडल सदस्यों के बीच कथित कंपनी संचालन में गड़बड़ी और अनियिमितता को लेकर मतभेद थे. इस विवाद के कारण कंपनी के तत्कालीन मुख्य कार्यपालक अधिकारी विशाल सिक्का को इस्तीफा देना पड़ा. साथ ही पूर्व चेयरमैन शेषसायी और निदेशक मंडल के तीन अन्य सदस्यों ने कंपनी छोड़ दी.

कंपनी के सह संस्थापक नंदन निलेकणि को गैर कार्यकारी चेयरमैन बनाया गया. सिक्का के जाने के बाद राव ने अंतरिम सीईओ और प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार संभाला.

साउथ के सुपरस्टार्स से कम नहीं हैं उनके बेटे

आज कल साउथ की एक्शन फिल्में काफी लोकप्रिय बनती जा रही हैं. ऐसे कई फैन्स हैं जो साउथ के स्टार्स को भगवान की तरह पूजते हैं. इतना ही नहीं वह सुपरस्टार के बेटों को भी उतना ही प्यार देते हैं. आज हम इस लेख में ऐसे ही कुछ साउथ के सुपरस्टार के संतानों के बारे में बात करेंगे.

नागार्जुन और नागा चैतन्य

नागार्जुन साउथ की फिल्मों के बड़े सुपरस्टार में से एक हैं. उनका बेटा चैतन्य भी साउथ फिल्म इंडस्ट्रीज के लोकप्रिय अभिनेता हैं. चैतन्य ने 2009 में आई फिल्म ‘जोश’ से साउथ फिल्म इंडस्ट्रीज में कदम रखा था. उसके बाद उन्होंने प्रेमम, सहासम, तडाखा, मनन, धाड़ा, ओका लैला कसम, और ‘बेजावडा’ जैसी फिल्मों में काम किया था और आज साउथ फिल्म इंडस्ट्री में उनका काफी नाम है.

चंद्रशेखर और विजय

‘वेतील’ और ‘मुथम’ जैसी फिल्में बनाने के बाद चंद्रशेखर काफी मशहूर हुए थे. वह एक सुपरस्टार से कम नहीं हैं. उनका बेटा विजय भी साउथ की फिल्मों में काफी लोकप्रिय है. विजय को उनके चाहने वाले उनके एक्शन की वजह से जानते हैं. विजय की फिल्में सबसे ज्यादा एक्शन कैटेगरी में होती हैं. विजय ने अब तक ‘थेरी’, ‘पुलि’, ‘सूरा’, ‘विल्लू’, ‘कुरुवी’, ‘शिवाकाशी’, जैसी कई हिट फिल्मों में काम किया है.

चिरंजीवी और राम चरण तेजा

साउथ फिल्मों के इस स्टार को आज कौन नहीं जानता. चिरंजीवी ने साउथ की फिल्मों के साथ साथ बौलीवुड की फिल्मों में भी कई बार काम किया है. उन्होंने अब तक हिंदी और साउथ की 150 से अधिक फिल्मों में काम किया है. उनका बेटा राम चरण तेजा भी आज कल युवाओं में काफी लोकप्रिय बना हुआ है. राम चरण तेजा को साउथ फिल्म इंडस्ट्रीज में सबसे महंगे स्टार के तौर पर जाना जाता है. राम चरण तेजा फिल्म ‘मगधीरा’ के बाद काफी मशहूर हुए थे.

कंगना रनौत की बहन ने केआरके को ट्वीट कर सुनाई खरी-खोटी

कंगना रनौत इन दिनों मीडिया में छाई हुई हैं. एक ओर उनकी फिल्म ‘सिमरन’ जल्द बड़े पर्दे पर रिलीज को तैयार है तो दूसरी तरफ कंगना ने कई टीवी इंटरव्यू में ऋतिक रोशन और आदित्य पंचोली पर संगीन आरोप लगाए, जिसके चलते वे लाइमलाइट में बनी हुई हैं. इस मामले में कुछ बौलीवुड स्टार्स ने चुप्पी साध रखी है, तो कुछ कंगना के बड़बोलेपन पर सवाल उठा रहे हैं. अब इस विवाद में कमाल आर खान भी कूद पड़े हैं.

कुछ समय पहले रंगोली ने जरीना को जवाब देने के लिए एक के बाद एक कई ट्वीट कर दावा किया था कि उनकी बहन 2005 में आदित्य से मिली, तो उनका रिश्ता जरीना के पति से साढ़े चार साल कैसे चला. इसपर केआरके ने रंगोली को ट्विटर पर टैग करते हुए लिखा कि आदित्य और कंगना की पहली मुलाकात 2003 में हुई थी और उसके पास इसके सबूत भी हैं. इसपर गुस्साई रंगोली ने एक के बाद एक कई ट्वीट कर केआरके को मुंह तोड़ जवाब दिया. उन्होंने केआरके को झूठा बताते हुए उनकी शक्ल पर ताने मारे, उनके विग का मजाक उड़ाया साथ ही उन्हें बिकाऊ भी कह दिया.

इसके बाद केआरके ने रंगोली पर आरोप लगाए. उन्होंने यह तक कह दिया कि यदि कोई तुम्हारे सामने सच बोलता है तो तुम उसे गाली बकने लगती हो. हिमाचल की रहने वाली रंगोली एसिड अटैक का शिकार हो चुकी हैं. इसी का आधार बनाते हुए केआरके ने लिखा, जिसने आपके चेहरे पर एसिड फेंका उसे भी कुछ कहती. केआरके की यह बात सुन रंगोली ने उन्हें जमकर खरी-खोटी सुनाई और काफी लंबे समय तक दोनों का झगड़ा ट्विटर पर चलता रहा.

आपको बता दें कि हाल ही में कंगना ने एक इंटरव्यू में कहा कि आदित्य ने उनके लिए घर खरीदा था, लेकिन वहां उनके दोस्तों को आने की अनुमति नहीं थी आदित्य ने उनको नजरबंद कर रखा था, तब वे उनकी पत्नी जरीना वहाब से मदद मांगने गई थीं पर जरीना ने मदद से इनकार कर दिया था.

पीएनबी में है खाता तो आपके लिए है बुरी खबर

अगर आप पंजाब नेशनल बैंक के ग्राहक हैं तो आपके लिए बुरी खबर है. अब आपको एटीएम से महीने में पांच से अधिक बार पैसे निकालने या किसी अन्य उद्देश्य से इस्तेमाल करने पर पैसे देने होंगे. यह नियम अक्टूबर महीने से लागू होगा.

वर्तमान में ग्राहकों को पीएनबी के एटीएम से महीने में कितने भी वित्तीय और गैर-वित्तीय लेनेदेन करने पर कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है. हालांकि नया नियम लागू होने के बाद से यह सुविधा समाप्त हो जाएगी.

पंजाब नेशनल बैंक ने ग्राहकों को जारी नोटिस में कहा, “पीएनबी एटीएम से पीएनबी ग्राहकों के लिए मुफ्त लेन देन की संख्या और मुफ्त लेनदेन से अधिक लेनदेन पर शुल्क संशोधित किए गए हैं.1 अक्टूबर 2017 से संशोधित शुल्क लागू होंगे.”

बैंक ने कहा कि बचत, चालू या ओवरड्राफ्ट खाता धारकों पर महीने में पांच बार से अधिक लेन देन करने पर 10 रुपये प्रति लेनदेन के हिसाब से शुल्क लगेगा. भले ही पीएनबी कार्ड धारक केवल पीएनबी एटीएम पर ही लेन देन करे.

इस प्रकार, ग्राहकों को मुफ्त सीमा से अधिक वित्तीय लेन देन (एटीएम से पैसे निकालने) और गैर वित्तीय लेन देन (मिनी स्टेटमेंट निकालने) करने पर शुल्क देना होगा. हालांकि बैंक ने कहा कि शेष राशि पूछताछ, निधि स्थानांतरण या ग्रीन पिन आवेदन जैसे गैर वित्तीय लेन देन के लिए कोई चार्ज नहीं देना होगा.

गौरतलब है कि पिछले माह पीएनबी के ग्राहकों को बैंक की दूसरी शाखा में 5,000 रुपये से अधिक नकद जमा करने पर शुल्क का भुगतान करने का नियम बदलकर झटका दिया था. यह नियम सितंबर से लागू हो गया है. अगर ब्रांच उसी शहर में स्थित में है तो भी उन्हें शुल्क देना होगा. इससे पहले पीएनबी ग्राहकों को शहर के अंदर दूसरी शाखा में 25,000 रुपये से अधिक जमा करने पर ही शुल्क देना होता है.

आपको बता दें कि अगस्त 2014 में आरबीआई ने बैंक ग्राहकों के लिए एटीएम ट्रांजेक्शन पर कुछ नियम बदले थे. अपने बैंक के एटीएम से ट्रांजेक्शन के संदर्भ में आरबीआई ने बैंकों को सलाह दी थी कि बचत खाताधारकों को हर माह कम से कम पांच मुफ्त ट्रांजेक्शन की सुविधा दी जाए. इसके ऊपर बैंक ग्राहकों पर अपने बैंक एटीएम के उपयोग लिए शुल्क लगा सकते हैं.

अन्य बैंक एटीएम से ट्रांजेक्शनों के लिए छह महानगरों में बैंकों को मुफ्त ट्रांजेक्शन की संख्या पांच से घटाकर तीन करने की अनुमति मिली थी. अन्य स्थानों पर दूसरे बैंकों के एटीएम से मुफ्त ट्रांजेक्शन की अधिकतम संख्या में बदलाव नहीं किया गया था.

आधार कार्ड से मोबाइल नंबर लिंक करने का ये आसान तरीका जानते हैं आप!

सरकार ने अब मोबाइल नंबर को आधार से लिंक करना जरूरी कर दिया है. अगर दोनों को लिंक नहीं करेंगे तो एक निश्चित तारीख के बाद नंबर बंद कर दिया जाएगा. अगर आपने अभी तक लिंक नहीं किया तो कर लीजिए, नहीं तो 28 फरवरी 2018 के बाद आपका नंबर बंद कर दिया जाएगा. मोबाइल नंबर में होने वाले फर्जीवाड़े को रोकने के लिए आधार कार्ड को मोबाइल नंबर से जोड़ना जरूरी किया जा रहा है.

इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया था कि वह एक साल के अंदर सौ करोड़ से ज्यादा वर्तमान और आगामी मोबाइल टेलिफोन उपभोक्ताओं की पहचान स्थापित करने की व्यवस्था करे. कोर्ट ने आदेश दिया था कि सत्यापन के लिए यूजर्स के सिम कार्ड को उनके आधार से लिंक कर दिया जाए.

सुप्रीम कोर्ट एनजीओ लोकनीति की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार और ट्राई को ये निर्देश दिए जाएं कि मोबाइल सिम धारकों की पहचान, पता और सभी डिटेल उपलब्ध हों. कोई भी मोबाइल सिम बिना वेरिफिकेशन के न दी जाए. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा था.

अटार्नी जनरल ने कहा था कि वह इसके लिए सहमत हैं, लेकिन मोबाइल फोन यूजर्स की संख्या लगभग 105 करोड़ है, इस प्रक्रिया में समय लगता है. इसके अलावा, 90% से ज्यादा यूजर्स प्री-पेड कनेक्शन का इस्तेमाल कर रहे हैं, लेकिन अब ऐसा मेकैनिज्म लाया जा रहा है जिससे इन मोबाइल सिम को भी आधार से जोड़ा जा सके.

फिलहाल टेलीकाम कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने ग्राहकों को इसके लिए सूचित करें और e-KYC प्रोसेस को शुरू करें, लेकिन यह काम आप खुद भी कर सकते हैं. इसके लिए आप अपने आधार कार्ड को लेकर अपने मोबाइल नंबर प्रोवाइडर कंपनी के नजदीकी स्टोर पर जाएं और आधार को मोबाइल नंबर से लिंक करा लें.

ऐसे लिंक करें आधार कार्ड से अपना फोन नंबर

इसके लिए आपको अपने मोबाइल और आधार कार्ड के साथ नजदीकी अपने मोबाइल नेटवर्क सर्विस प्रोवाइडर के आफिस जाना होगा. अगर आपके नाम पर सिम कार्ड नहीं है, यानि घर के किसी मेंबर के नाम पर है तो उन्हें साथ लेकर जाएं क्योंकि उन्ही के आधार कार्ड नंबर और फिंगरप्रिंट से मोबाइल नंबर वेरीफाई किया जाएगा.

कंपनी के आफिस में आपनी री-वेरिफिकेशन डिटेल भरें. प्रोसेस पूरी होने पर आपके मोबाइल नंबर पर (जिसे वेरीफाई कर रहे हैं) एक ओटीपी आएगा, जिसे नेटवर्क कंपनी के आफिस में उसी समय देना है.

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