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खिलाड़ियों का खिलाड़ी : भ्रष्टाचार के खेल की पूरी कहानी

इसी साल जनवरी की बात है. देश की नामी कंपनी एसपीएमएल इंफ्रा लिमिटेड (पुराना नाम सुभाष प्रोजैक्ट्स ऐंड मार्केटिंग लिमिटेड) के गुड़गांव के सैक्टर-32 स्थित औफिस के लैंडलाइन पर फोन आया तो औपरेटर ने फोन रिसीव करते हुए कहा, ‘‘गुड मौर्निंग एसपीएमएल.’’

दूसरी ओर से फोन करने वाले ने रौबीली आवाज में कहा, ‘‘मैं एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) जयपुर से एसपी शंकरदत्त शर्मा बोल रहा हूं.’’

‘‘यस सर, बताइए, हमारी कंपनी आप की क्या सेवा कर सकती है?’’

‘‘आप की कंपनी के डाइरेक्टर ऋषभ सेठी अभी फरार हैं, इसलिए किसी जिम्मेदार आदमी से मेरी बात कराइए.’’ दूसरी ओर से उसी तरह रौबीली आवाज में कहा गया.

‘‘सर, सेठी साहब तो नहीं हैं, लेकिन उन के रिश्तेदार औफिस में आए हुए हैं. आप कहें तो उन से बात करा दूं?’’ औपरेटर ने फोन करने वाले से नम्रता से पूछा.

‘‘सेठी के रिश्तेदार का नाम क्या है?’’ फोन करने वाले ने पूछा.

‘‘सर, उन का नाम सनी पांड्या है. आप कहें तो मैं आप की उन से बात करा दूं.’’ औपरेटर ने कहा.

‘‘ठीक है, आप मिस्टर सनी पांड्या से मेरी बात कराइए.’’ फोन करने वाले ने कहा.

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औपरेटर ने इंटरकौम द्वारा सनी पांड्या को बता कर लाइन दे दी कि जयपुर से एसीबी के एसपी शंकरदत्त शर्मा उन से बात करना चाहते हैं. लाइन कनेक्ट होते ही फोन करने वाले ने पुलिसिया अंदाज में कहा, ‘‘पांड्या साहब, आप ऋषभ सेठी के रिश्तेदार हैं, इसलिए आप को तो पूरे मामले का पता ही होगा?’’

‘‘साहब, मुझे ज्यादा तो पता नहीं है कि क्या मामला है. सिर्फ इतना पता है कि जयपुर एंटी करप्शन ब्यूरो कुछ जांच कर रही है.’’ सनी पांड्या ने कारोबारी अंदाज में कहा.

‘‘पांड्या साहब, ऐसा कैसे हो सकता है कि आप को मामले की जानकारी न हो. आप से कुछ बात करनी है. आप अपना मोबाइल नंबर बताइए.’’ दूसरी ओर से कहा गया.

‘‘साहब, मेरा मोबाइल नंबर आप नोट कर लीजिए,’’ पांड्या ने अपना मोबाइल नंबर बताते हुए कहा, ‘‘लेकिन मेरा इस मामले में किसी तरह का कोई लेनादेना नहीं है.’’

‘‘वह तो मुझे पता है कि आप का इस मामले में कोई लेनादेना नहीं है,’’ फोन करने वाले ने कहा, ‘‘मैं आप के रिश्तेदार के भले की बात करने वाला हूं. खैर, मैं आप को बाद में फोन करता हूं.’’

इतना कह कर फोन काट दिया गया. फोन कटने के बाद पांड्या साहब सोचने लगे कि एसीबी के एसपी साहब ने फोन क्यों किया? कुछ देर तक वह इसी विषय पर सोचते रहे. उन्हें पता था कि एसपीएमएल इंफ्रा कंपनी राजस्थान के जलदाय विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को रिश्वत दे कर काम कराने के आरोप में फंसी हुई है.

अभी पांड्या इसी मसले पर विचार कर रहे थे कि उन के मोबाइल पर फोन आया. उन्होंने फोन रिसीव किया तो फोन करने वाले ने कहा, ‘‘पांड्या साहब, मैं जयपुर से एसीबी का एसपी शंकरदत्त शर्मा बोल रहा हूं. उस समय एक जरूरी फोन आ गया था, इसलिए बात नहीं हो सकी थी.’’

‘‘जी बताइए, कैसे याद किया?’’ पांड्या ने पूछा.

‘‘एसपीएमएल कंपनी का जो मामला एसीबी में चल रहा है, उस की जांच मैं ही कर रहा हूं,’’ फोन करने वाले ने कहा, ‘‘मैं इस मामले को रफादफा कर सकता हूं. रिश्वत देने के प्रकरण से ऋषभ सेठी और कंपनी के अन्य डाइरेक्टरों के नाम भी इस मामले से निकाल दूंगा.’’

‘‘सर, इस के लिए हमें क्या करना होगा?’’ पांड्या ने पूछा.

‘‘इस के लिए आप को 10 करोड़ रुपए देने होंगे.’’ फोन करने वाले ने कहा.

‘‘सर, यह रकम तो बहुत ज्यादा है.’’ पांड्या ने कहा.

‘‘आप के रिश्तेदार सेठीजी करोड़ों रुपए के बिल पास कराने के लिए इंजीनियरों को लाखोंकरोड़ों रुपए की घूस दे देते हैं. फिर आप को 10 करोड़ रुपए ज्यादा कैसे लग रहे हैं?’’ फोन करने वाले ने कहा.

‘‘सर, ऐसी बात नहीं है,’’ पांड्या ने सफाई देते हुए कहा, ‘‘इतनी बड़ी रकम हम नहीं दे सकेंगे.’’

‘‘ठीक है, आप को एक दिन की मोहलत देता हूं. आप ऋषभ सेठी से बात कर लें,’’ फोन करने वाले ने कहा, ‘‘मैं आप को कल फिर फोन करूंगा. तब बता देना कि क्या विचार है.’’

इस के बाद फोन कट गया. पांड्या फिर सोच में डूब गए. उन्हें बड़ा अजीब लग रहा था कि एसपी स्तर का एक आईपीएस अधिकारी खुद फोन कर के उन से मामला रफादफा करने के लिए 10 करोड़ रुपए घूस मांग रहा था. जिस नंबर से पांड्या के मोबाइल पर फोन आया था, उस नंबर के बारे में उन्होंने पता कराया.

अरबों रुपए के टर्नओवर वाली एसपीएमएल कंपनी के अधिकारियों के लिए किसी फोन नंबर के बारे में पता कराना चुटकी बजाने जैसा काम था. कुछ ही देर में उन्हें पता चल गया कि एसीबी के एसपी शंकरदत्त शर्मा के मोबाइल नंबर से ही उन के मोबाइल पर फोन आया था.

अब शक करने जैसी कोई बात नहीं थी. उन्होंने कंपनी के अधिकारियों से बात की. उस के बाद तय किया गया कि अगर एसपी साहब मामला रफादफा करने की बात कह रहे हैं तो उन से बात आगे बढ़ाई जाए.

अगले दिन सनी पांड्या को एसपी साहब के फोन का इंतजार था. जैसे ही एसपी शंकरदत्त शर्मा का फोन आया, उन्होंने तुरंत फोन रिसीव कर लिया तो दूसरी ओर से कहा गया, ‘‘पांड्या साहब कैसे हैं? मैं एसपी शंकरदत्त शर्मा बोल रहा हूं.’’

‘‘मैं तो ठीक हूं साहब,’’ पांड्या ने कहा, ‘‘मैं ने कंपनी के अधिकारियों से बात की है. अगर आप मामला रफादफा करते हैं तो वे ज्यादा से ज्यादा 2 करोड़ रुपए दे सकते हैं.’’

‘‘पांड्या, शायद तुम्हारी कंपनी के अधिकारियों को पुलिस की ताकत का अहसास नहीं है. अभी तो कंपनी के 2 ही एजीएम गिरफ्तार हुए हैं. जल्दी ही ऋषभ सेठी और केशव गुप्ता भी गिरफ्तार कर लिए जाएंगे. उस के बाद तुम्हें पता चलेगा कि हम लोग क्या चीज हैं.’’ फोन करने वाले ने धमकाते हुए कहा.

‘‘साहब, बाद का किस ने देखा है. जो होना है, होता रहेगा. लेकिन फिलहाल हम 2 करोड़ रुपए से ज्यादा नहीं दे सकेंगे.’’ पांड्या ने कहा.

‘‘पांड्या, काम करने के तो मैं 10 करोड़ रुपए ही लूंगा, बाकी तुम्हारी मरजी है.’’ दूसरी ओर से फोन करने वाले ने दोटूक लहजे में कहा.

‘‘साहब, हमारी हैसियत इतनी ही है.’’ पांड्या ने विनती करते हुए कहा.

‘‘ठीक है, जैसी तुम्हारी इच्छा.’’ कह कर दूसरी ओर से फोन काट दिया गया.

इस बारे में क्या हुआ, यह जानने से पहले हम थोड़ा आगे की कहानी जान लें, जिस के लिए हमें करीब एक साल पीछे जाना होगा. आइए जानें कि शंकरदत्त शर्मा किस मामले की बात कर रहे थे.

एसीबी ने जयपुर में राजस्थान के जलदाय विभाग के चीफ इंजीनियर आर.के. मीणा को 10 लाख रुपए और एडिशनल चीफ इंजीनियर सुबोध जैन को 5 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में 19 जुलाई, 2016 को गिरफ्तार किया था. आरोप था कि यह रिश्वत एसपीएमएल कंपनी के अधिकारियों ने इन दोनों इंजीनियरों को दी थी.

एसीबी ने उसी दिन दोनों आरोपी इंजीनियरों के जयपुर स्थित आवासों की तलाशी ली तो चीफ इंजीनियर आर.के. मीणा के घर से एसीबी को 12.41 लाख रुपए नकद और प्रौपर्टी के कागजात मिले थे. एडिशनल चीफ इंजीनियर सुबोध जैन के आवास से 9 लाख रुपए नकद, प्रौपर्टी के दस्तावेज एवं ढाई लाख रुपए से ज्यादा की ज्वैलरी मिली थी. दोनों के एकएक बैंक लौकर भी मिले थे.

सुबोध जैन राजस्थान की पिछली कांग्रेस सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रमोद जैन भाया के ओएसडी (औफिसर औन स्पैशल ड्यूटी) भी रहे थे. वह सरकार की ओर से विभिन्न मामलों की स्टडी के लिए जापान सहित कई देशों की यात्रा कर चुके थे.

जलदाय विभाग की ओर से जैन को आईएएस कैडर देने का प्रस्ताव भेजा गया था. अगर वह गिरफ्तार न होते तो बेटे को वकालत की मास्टर डिग्री की पढ़ाई के लिए एडमिशन दिलाने 22 जुलाई, 2016 को सिंगापुर जाने वाले थे. रिश्वत की रकम वह सिरहाने रख कर सोते थे. एसीबी की काररवाई के दौरान वह बैड पर मुंह ढक कर पड़े थे.

दोनों इंजीनियरों के पकड़े जाने से एक दिन पहले चंबल नादौती वाटर सप्लाई योजना सवाई माधोपुर के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर उदयभानु माहेश्वरी ने इसी कंपनी के अधिकारियों से 15 लाख रुपए की रिश्वत ली थी. उस समय वह एसीबी की पकड़ में नहीं आए थे. हालांकि कुछ दिनों बाद उन्होंने एसीबी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था. एसीबी ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया था.

इस मामले में एसीबी ने जलदाय विभाग के 3 इंजीनियरों आर.के. मीणा, सुबोध जैन और उदयभानु माहेश्वरी के अलावा एसपीएमएल कंपनी के डाइरेक्टर ऋषभ सेठी और वाइस प्रेसीडेंट केशव गुप्ता सहित 4 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था. इन में केशव गुप्ता कंपनी का राजस्थान का काम संभालते थे.

सब से पहले 2 इंजीनियरों की गिरफ्तारी के तुरंत बाद पूछताछ में ऋषभ सेठी का नाम सामने आने पर उच्चाधिकारियों ने अलवर से एसीबी की टीम को ऋषभ सेठी को गिरफ्तार करने के लिए गुड़गांव भेज दिया था. अलवर की एसीबी टीम गुड़गांव के थाना सुशांतलोक पुलिस को साथ ले कर एसपीएमएल कंपनी के औफिस पहुंची, लेकिन तब तक सेठी फरार हो चुके थे.

एसीबी की जांच में सामने आया कि एसपीएमएल कंपनी के अधिकारियों ने जलदाय विभाग के अधिकारियों को अपने करोड़ों रुपए के बिल पास करवाने, वर्क और्डर जारी करवाने एवं कंपनी के प्रोजैक्ट्स में सहयोग करने के लिए रिश्वत दी थी. रिश्वत की यह राशि एसपीएमएल कंपनी के वाइस प्रेसीडेंट केशव गुप्ता के कहने पर कंपनी के सहायक महाप्रबंधक प्रफुल्ल मोरेश्वर ने जलदाय विभाग के अधिकारियों को दी थी.

यह बात भी सामने आई थी कि जलदाय विभाग के कुछ अधिकारी प्रोजैक्ट हासिल करने वाली कंपनियों एवं फर्मों से 15 फीसदी तक कमीशन के रूप में लेते थे. एसपीएमएल कंपनी को भरतपुर में पाइपलाइन बिछाने एवं मेंटीनेंस का 250 करोड़ रुपए का टेंडर मिलने वाला था. इस के अलावा राजस्थान के अन्य जिलों में एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के प्रोजैक्ट मिलने वाले थे.

इस हिसाब से रिश्वत की राशि करोड़ों रुपए में होती है. प्रोजैक्ट हासिल करने के लिए कंपनी के प्रतिनिधियों की जलदाय विभाग के कई अधिकारियों से बातचीत चल रही थी. कंपनी तथा जलदाय विभाग के अधिकारियों के फोन एसीबी ने सर्विलांस पर लगा रखे थे. इसी से रिश्वत के इस खेल का खुलासा हुआ था. एसीबी ने रिश्वत देने के आरोप में एसपीएमएल कंपनी के सहायक महाप्रबंधक प्रफुल्ल मोरेश्वर को 19 जुलाई, 2016 को गिरफ्तार कर लिया था.

एसपीएमएल कंपनी बौंबे स्टौक एक्सचेंज व एनएसई में सूचीबद्ध है. कंपनी ने दिल्ली सहित देश के विभिन्न राज्यों में जलदाय, सीवरेज सहित इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई बड़े प्रोजैक्ट हासिल कर रखे थे. राजस्थान में इस कंपनी के हजारों करोड़ रुपए के नएपुराने प्रोजैक्ट चल रहे थे. रिश्वत मामले में नाम आने से इस कंपनी के शेयर के भाव तुरंत गिर गए थे.

कंपनी ने मार्च, 2016 में समाप्त वित्त वर्ष में 1407 करोड़ रुपए की कुल संचालन आय अर्जित की थी. कंपनी ने सन 2016 में ही टाटा प्रोजैक्ट्स के साथ मिल कर राजस्थान अरबन ड्रिंकिंग वाटर, सीवरेज ऐंड इंफ्रास्ट्रक्चर कार्पोरेशन से प्रदेश के 11 शहरों में सीवरेज सिस्टम के निर्माण और ट्रीटेड वेस्ट वाटर से जुड़े 1275 करोड़ रुपए के प्रोजैक्ट हासिल किए थे.

बाद में एसीबी ने इस मामले में एसपीएमएल कंपनी के जयपुर औफिस में काम करने वाले सहायक महाप्रबंधक आकाशदीप तोतला को नवंबर, 2016 के पहले सप्ताह में गिरफ्तार कर लिया था. इस रिश्वत प्रकरण में नामजद किए गए मुख्य सूत्रधार एसपीएमएल कंपनी के डाइरेक्टर ऋषभ सेठी एवं वाइस प्रेसीडेंट केशव गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए एसीबी ने कई बार गुड़गांव सहित अन्य जगहों पर छापे मारे, लेकिन वे पकड़ में नहीं आए.

बाद में एसीबी ने अदालत से सेठी और गुप्ता की गिरफ्तारी के लिए वारंट हासिल कर लिए थे. कंपनी के ये दोनों अधिकारी फरार थे. यह उसी बीच की बात है, जब शंकरदत्त शर्मा के नाम से सनी पांड्या के पास फोन आया था. पांड्या ने एसपीएमएल कंपनी के अधिकारियों के जरिए पता कराया कि क्या एसीबी के एसपी शंकरदत्त शर्मा इस तरह फोन कर के 10 करोड़ रुपए मांग सकते हैं?

कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि एसपी शंकरदत्त शर्मा ईमानदार अधिकारी हैं. वह इस तरह की हरकत कतई नहीं कर सकते. अगर लेनदेन से काम बनता तो उन के 2 अफसरों को गिरफ्तार न किया जाता और न ही कंपनी के डाइरेक्टर और वाइस प्रेसीडेंट के खिलाफ एफआईआर दर्ज होती.

काफी सोचविचार कर एक दिन बाद सनी पांड्या ने सीबीआई में इस की शिकायत कर दी और वह रिकौर्डिंग भी सौंप दी, जो उन्होंने 10 करोड़ रुपए मांगने वाले से बात की थी. सीबीआई ने पांड्या की ओर से सौंपी गई रिकौर्डिंग को सुन कर जांच शुरू कर दी, क्योंकि उसे यह मामला संदिग्ध लग रहा था. शुरुआती जांच के बाद सीबीआई ने इस मामले की जानकारी राजस्थान के एंटी करप्शन ब्यूरो यानी एसीबी के पुलिस महानिदेशक को दे दी.

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पेचीदा एवं तकनीकी मामला होने की वजह से एसीबी के आईजी सचिन मित्तल ने इस मामले की जांच शुरू कर दी. एसपी शंकरदत्त शर्मा के मोबाइल नंबर एवं एसीबी मुख्यालय के लैंडलाइन नंबरों की काल डिटेल्स निकलवाई गई तो साफ हो गया कि एसपी शंकरदत्त शर्मा के नाम से किसी अन्य आदमी ने फरजी तरीके से फोन कर के 10 करोड़ रुपए मांगे थे.

सवाल यह था कि जब एसपी शंकरदत्त शर्मा ने ऋषभ सेठी के रिश्तेदार सनी पांड्या को फोन नहीं किया था तो उन के मोबाइल पर शंकरदत्त शर्मा का नंबर डिसप्ले कैसे हो रहा था?

इस मामले में एसीबी के अधिकारियों ने टेलीकौम के तकनीकी विशेषज्ञों से जानकारी मांगी तो पता चला कि आजकल विदेशी सौफ्टवेयर के जरिए स्पूफिंग काल किए जा सकते हैं. स्पूफिंग काल गेटवे के जरिए होती है. इसे वायस ओवर इंटरनेट प्रोटोकाल (वीओआईपी) काल भी कहते हैं.

दरअसल, कई विदेशी कंपनियां ऐसा सौफ्टवेयर तैयार कर के उन के सर्वर बेचती हैं, जिन के जरिए कोई भी अपने मोबाइल से फोन कर सकता है, लेकिन फोन रिसीव करने वाले के पास नंबर वह डिसप्ले होगा, जो इस सौफ्टवेयर का उपयोग करने वाला चाहेगा. अगर किसी का मोबाइल स्विच औफ है तो भी उस के नंबर से इस सौफ्टवेयर द्वारा फोन किया जा सकता है.

इस का टेलीकौम कंपनियों के पास कोई रिकौर्ड नहीं होता. केवल सौफ्टवेयर बनाने वाली कंपनियों के सहयोग से ही जिस नंबर व मोबाइल फोन से फोन किया गया था, उस का आईपी एड्रैस पता किया जा सकता है. सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी यह काम बहुत आसान नहीं है.

भारत में स्पूफिंग काल के कोई 2-4 मामले ही अब तक सामने आए हैं. राजस्थान में इस तरह का यह पहला मामला था. जांच में पता चला कि फोन हांगकांग की एक गेटवे सर्विस प्रोवाइडर कंपनी के जरिए किए गए थे. वे फोन दुनिया के 9 देशों के गेटवे सर्विस प्रोवाइडरों के जरिए रूट की गई थीं.

एसीबी के अधिकारियों ने अमेरिका, यूके, दक्षिणी अफ्रीका और चीन सहित 9 देशों की कंपनियों का सहयोग लिया. इस में कई महीने लग गए.

लंबी जांच के बाद एसीबी को उस मोबाइल नंबर का आईपी एड्रैस मिल गया. यह एयरटेल का सिम था, जो श्रीगंगानगर के साहिल राजपाल के नाम आवंटित था. इस के बाद एसीबी ने साहिल के मोबाइल नंबर को सर्विलांस पर लगा दिया.

इस बीच एसीबी को जलदाय विभाग सहित दूसरे विभागों के अधिकारियों से भी कई और शिकायतें मिलीं. इन शिकायतों में भी बताया गया था कि एसीबी के एसपी शंकरदत्त शर्मा या किसी अन्य अधिकारी के नाम से उन्हें फोन कर के उन से रिश्वत की मांग की जा रही है.

इन शिकायतों के साथ एसीबी को 5 मोबाइल काल रिकौर्डिंग भी मिली, जिन में फोन करने वाले ने रिश्वत मांगी थी. जलदाय विभाग के एक इंजीनियर सी.एल. जाटव से एसीबी के एसपी शंकरदत्तर शर्मा के नाम से फोन कर के डेढ़ लाख रुपए ले भी लिए गए थे.

उन्होंने एसीबी के अधिकारियों को बताया कि एसपी शंकरदत्त शर्मा के मोबाइल नंबर एवं एसीबी के लैंडलाइनों से किसी ने उन के मोबाइल पर फोन कर के खुद को एसपी शंकरदत्त शर्मा बता कर जलदाय विभाग के घूसकांड से नाम निकालने के लिए 10 लाख रुपए मांगे थे. जाटव ने डेढ़ लाख रुपए दे भी दिए थे. इस के बाद भी बारबार पैसों के लिए एसीबी के नंबरों से फोन आ रहे थे.

एसीबी के अधिकारियों ने उन के फोन नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई तो उस में शंकरदत्त शर्मा और एसीबी औफिस के लैंडलाइन नंबर मिल गए, लेकिन शंकरदत्त शर्मा की काल डिटेल्स में सी.एल. जाटव के नंबर नहीं मिले. यह भी कड़वा सच था कि उन का नाम जलदाय घोटाले में था ही नहीं, लेकिन साहिल के एसीबी का एसपी बन कर कई बार धमकाने से वह डर गए थे और डेढ़ लाख रुपए एसपी साहब के नाम पर दे भी दिए थे.

व्यापक जांच के बाद श्रीगंगानगर के साहिल राजपाल का नाम सामने आया तो एसीबी ने उस के बारे में पता किया. पता चला कि वह राजस्थान के पूर्वमंत्री और आजकल भाजपा के वरिष्ठ नेता राधेश्याम गंगानगर का पोता है.

साहिल के राजनीतिक परिवार से जुड़ा होने की जानकारी एसीबी के अधिकारियों ने उच्चाधिकारियों को दे दी.

वहां से हरी झंडी मिलने के बाद एसीबी ने 9 अगस्त, 2017 को जयपुर के जालूपुरा स्थित एक विधायक के सरकारी आवास से साहिल राजपाल को गिरफ्तार कर लिया. साहिल पूर्वमंत्री राधेश्याम गंगानगर के दूसरे बेटे वीरेंद्र राजपाल का बेटा था. वह इंग्लिश औनर्स से ग्रैजुएट था. एसीबी ने साहिल के खिलाफ 25 पेज की एफआईआर दर्ज की थी. इस एफआईआर के साथ फरवरी, 2017 से अब तक जुटाए गए दस्तावेजों के करीब 200 पेज लग चुके हैं.

पूछताछ में साहिल ने एसीबी के अधिकारियों को बताया कि उस ने जनवरी, 2017 से जुलाई तक विभिन्न सरकारी विभाग के अफसरों को विदेशी सौफ्टवेयर के जरिए एसीबी के लैंडलाइन एवं एसीबी अफसरों के मोबाइल नंबरों से न जाने कितने फोन किए हैं. वह अपने या किसी दूसरे के मोबाइल फोन से अफसरों को फोन करता था, लेकिन रिसीव करने वाले के मोबाइल पर एसीबी के नंबर डिसप्ले होते थे.

5 दिनों के रिमांड के दौरान पूछताछ में साहिल ने एसीबी को बताया कि उस ने जलदाय विभाग के एडिशनल चीफ इंजीनियर, 2 सुपरिंटेंडेंट इंजीनियरों और करीब 10 अन्य इंजीनियरों तथा रसद विभाग के अधिकारियों से एसीबी के एसपी के नाम से करीब 20 करोड़ रुपए मांगे थे.

वह एसपी शंकरदत्त शर्मा बन कर अधिकारी से पैसे मांगता था और उन का ड्राइवर बन कर पैसे लेने जाता था. उस ने एसीबी के अधिकारियों और जलदाय विभाग के इंजीनियरों के फोन नंबर विभागीय वेबसाइट से हासिल किए थे. स्पूफिंग काल के लिए उस ने एसटीडी बूथ से आईएसडी काल भी किए थे. उस ने कई बार एसटीडी बूथों से चंडीगढ़, गुड़गांव और दिल्ली फोन कर के अधिकारियों के नंबर लिए थे. एसीबी ने इन बूथों की भी जांच की है. चेन्नै से भी स्पूफिंग काल करने का पता चला है.

साहिल किसी भी अधिकारी को स्पूफिंग काल करने से पहले डायरी में लिख कर उस का अभ्यास करता था, ताकि पुलिसिया लहजे से बातचीत करने में कोई गलती न हो. एसीबी को उस के आवास से ऐसी 2 डायरियां मिली हैं, जिन में एसीबी के एसपी शंकरदत्त शर्मा के नाम से शुरुआत कर के कई बातें लिखी गई हैं.

डायरियों में कई नाम मिले हैं, जिन से अंदाजा लगाया जा रहा है कि साहिल ने उन्हें स्पूफिंग काल कर के पैसों की मांग की होगी. पुलिस ऐसे पीडि़तों का पता लगाने का प्रयास कर रही है. हालांकि एसीबी के पास अभी कुछ ही शिकायतें आई हैं. ज्यादातर पीडि़त अभी सामने नहीं आए हैं.

एसीबी को जालूपुरा स्थित विधायक के आवास की तलाशी में शराब की 34 बोतलें मिली थीं, जिन में विदेशी शराब भी थी. एसीबी की सूचना पर थाना जालूपुरा पुलिस ने शराब की उन बोतलों को जब्त कर लिया था और साहिल के खिलाफ अवैध रूप से शराब रखने का मामला दर्ज किया था. यह सरकारी आवास विधायक मोहनलाल गुप्ता के नाम से आवंटित था. इस में विधायक गुप्ता नहीं रहते थे. वहां साहिल रुका हुआ था.

पूछताछ में पता चला है कि साहिल राजपाल का श्रीगंगानगर में प्रौपर्टी का कारोबार था. प्रौपर्टी में मंदी के कारण उसे लाखों रुपए का घाटा हो गया था. घाटा पूरा करने के लिए उस ने जयपुर जा कर दिमाग लगाना शुरू किया. उस बीच मीडिया में जलदाय विभाग की रिश्वतखोरी की खबरें सुर्खियों में थीं.

साहिल हौलीवुड फिल्में खूब देखता था. इन्हीं फिल्मों से उसे आइडिया आया कि उन लोगों को ब्लैकमेल किया जा सकता है, जो भ्रष्टाचार के मामले में फंसे हैं. ऐसे लोग जांच एजेंसियों के शिकंजे से निकलने के लिए मोटी रकम देने को जल्दी तैयार हो जाते हैं.

इस के लिए साहिल ने एसीबी के एसपी व अन्य अफसरों के नाम का उपयोग किया. राजनीतिक परिवार से जुड़ा होने की वजह से साहिल की श्रीगंगानगर में पुलिस अधिकारियों से भी अच्छी सांठगांठ थी. वह पैसे ले कर पुलिसकर्मियों व दूसरे विभागों के कर्मचारियों के तबादले कराता था. हालांकि लोग तबादलों के लिए राधेश्याम गंगानगर के पास आते थे.

राज्य में भाजपा की सरकार होने और भाजपा का वरिष्ठ नेता होने की वजह से लोग अधिकारियों पर उन का प्रभाव होने की बात मान कर तबादलों के लिए निवेदन करते थे.

वहीं साहिल के ताया रमेश राजपाल भाजपा के जिला उपाध्यक्ष हैं. इस कारण भी लोग मानते थे कि इस परिवार का अधिकारियों पर रुतबा है. तबादले के लिए दादा और ताया के पास आने वाले लोगों को मौका मिलने पर साहिल अपना शिकार बनाता था.

5 दिनों का रिमांड पूरा होने के बाद 14 अगस्त को एसीबी ने साहिल को अदालत में पेश कर 7 दिनों का रिमांड और लिया. एसीबी उस की एक साल की मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवा कर चैक कर रही है. इस के अलावा बैंक से उस के खातों की भी डिटेल मांगी गई है. एसीबी उस के साथियों के बारे में भी पता कर रही है.

विधि विज्ञान प्रयोगशाला से जांच कराने के लिए उस की आवाज के नमूने लिए गए हैं. एसीबी ने जलदाय विभाग के इंजीनियर सी.एल. जाटव और एसपीएमएल कंपनी के डाइरेक्टर ऋषभ सेठी के रिश्तेदार सनी पांड्या के बयान दर्ज किए हैं.

दोनों ने एसीबी को वह रिकौर्डिंग भी सौंप दी थी, जो उन्होंने फोन पर एसपी के नाम से रकम मांगने के दौरान बातचीत की तैयार की थी.

इन रिकौर्डिंग की आवाज से साहिल की आवाज का मिलान किया जाएगा. एसीबी ने इन रिकौर्डिंग की ट्रांस्क्रिप्ट तैयार की है. पूर्वमंत्री राधेश्याम गंगानगर का कहना है कि उन का पोता ऐसा नहीं कर सकता. उन के परिवार को न्याय मिलेगा. न्याय प्रणाली पर उन्हें पूरा भरोसा है.

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साहिल का कहना है कि इस मामले में उसे फंसाया गया है. सियासी गलियारों में कहा जा रहा है कि साहिल की गिरफ्तारी का असर राधेश्याम गंगानगर के राजनीतिक कैरियर पर भी पड़ सकता है.

साहिल के ताया रमेश राजपाल भाजपा जिला उपाध्यक्ष होने की वजह से अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे थे. साहिल के पिता वीरेंद्र राजपाल गंगानगर क्लब के अध्यक्ष रहे हैं.

भारतपाक विभाजन के समय पाकिस्तान से आ कर श्रीगंगानगर में बसे राधेश्याम यहां की राजनीति की धुरी रहे हैं. कांग्रेस से 3 बार विधायक और एक बार राज्यमंत्री रहे राधेश्याम ने सन 2008 में टिकट कटने के बाद भाजपा का दामन थाम लिया था. वह चाहे सत्ता में रहे हों या न रहे हों, उन के परिवार का विवादों से पुराना नाता रहा है.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए भाजपा से जवाब मांगा है. जयपुर की पूर्व महापौर और प्रदेश कांग्रेस महासचिव ज्योति खंडेलवाल ने जयपुर के किशनपोल के विधायक मोहनलाल गुप्ता की भूमिका को भी संदिग्ध बताते हुए मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है.

– कथा एसीबी सूत्रों एवं अन्य रिपोर्ट्स पर आधारित

100 करोड़ की फिरौती का फंडा आपको हैरान कर देगा

22 जुलाई, 2017 की शाम को फिरोजाबाद के राजातालाब आर्किड ग्रीन के रहने वाले संजीव गुप्ता की पत्नी सारिका गुप्ता 2-3 लोगों के साथ टुंडला कोतवाली पहुंची तो कोतवाली प्रभारी अरुण कुमार सिंह हैरान ही नहीं हुए, बल्कि उन्हें किसी अनहोनी की आशंका भी हुई. क्योंकि वह सारिका गुप्ता को अच्छी तरह जानतेपहचानते थे. उस के पति संजीव गुप्ता शहर के जानेमाने व्यवसायी थे.

सारिका गुप्ता सीधे अरुण कुमार सिंह के पास पहुंची थी. उन्होंने उसे सामने पड़ी कुरसी पर बैठने के लिए कह कर आने की वजह पूछी तो उस ने जो बताया, सुन कर वह दंग ही नहीं रह गए, बल्कि परेशान भी हो उठे. उस ने बताया था कि साढ़े 5 बजे के करीब उस के पति संजीव गुप्ता अपने होटल सागर रत्ना से अपनी मीटिंग खत्म कर के सीधे घर आने वाले थे.

लेकिन अब तक वह न घर पहुंचे हैं और न ही उन का फोन मिल रहा है. जब भी उन्हें फोन किया जाता है, फोन बंद बताता है. इतना सब बता कर उस ने आशंका भी व्यक्त की कि कहीं उन का अपहरण तो नहीं हो गया है.

बहरहाल, अरुण कुमार सिंह ने सारिका से तहरीर ले कर उसे आश्वासन दिया कि पुलिस जल्दी ही उस के पति को ढूंढ निकालेगी. जबकि वह जानते थे कि यह काम इतना आसान नहीं है.

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संजीव गुप्ता शहर का जानामाना नाम था. फिरोजाबाद शहर के राजातालाब इलाके की आर्किड ग्रीन में उस की शानदार कोठी थी, जहां कई महंगी कारें खड़ी रहती थीं. शहर के होटल सागर रत्ना में ही नहीं, कई स्कूलों में भी उस की हिस्सेदारी थी. इस के अलावा वह ब्याज पर पैसा उठाने के साथसाथ करोड़ों की कमेटी और सोसायटी चलाता था, जिस में शहर के ही नहीं, आसपास के शहरों के भी बड़ेबड़े लोग शेयर डालते थे.

ऐसे आदमी का गायब होना पुलिस के लिए परेशानी ही थी. पैसे वाला आदमी था, उस का अपहरण भी हो सकता था, इसलिए अरुण कुमार सिंह ने तुरंत इस बात की सूचना पुलिस अधिकारियों को दे दी. अपहरण की आशंका को ध्यान में रख कर तुरंत शहर की नाकाबंदी कराते हुए शहर भर की पुलिस को सतर्क कर दिया गया.

रात भर पुलिस अपने हिसाब से संजीव गुप्ता की तलाश करती रही, लेकिन कुछ पता नहीं कर पाई. अगले दिन यानी 23 जुलाई को सारिका गुप्ता एक बार फिर कोतवाली पहुंची और शक के आधार पर नीता पांडेय, उस के पति प्रदीप पांडेय और अमित गुप्ता तथा कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ अपराध क्रमांक 641/2017 पर भादंवि की धारा 364ए, 506, 120बी के तहत नामजद मुकदमा दर्ज करा दिया.

उन्होंने पुलिस को अपने मोबाइल में 2 मैसेज भी दिखाए, जो उन के पति के ही फोन से आए थे. उन संदेशों में उन से संजीव गुप्ता की रिहाई के लिए सौ करोड़ की फिरौती मांगी गई थी. फिरौती न देने पर संजीव गुप्ता को मौत के घाट उतारने की धमकी दी गई थी.

यह मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने संजीव गुप्ता के दोनों मोबाइल नंबरों को सर्विलांस पर लगवा दिए, साथ ही सुरक्षा की गरज से संजीव की कोठी पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया. एसएसपी अजय कुमार पांडेय ने पुलिस की कई टीमें बना कर संजीव की तलाश में लगा दिया. इस के साथ एसटीएफ की भी एक टीम बना कर इस मामले में लगा दी गई थी.

पुलिस ने संजीव के मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर अलीगढ़, दिल्ली, नोएडा, चंडीगढ़, जम्मूकश्मीर तक उस की खोज की, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली. उस के मोबाइल का स्विच औफ रहता था, बस थोड़ी देर के लिए औन होता था. उसी के हिसाब से जो लोकेशन मिलती थी, पुलिस वहां पहुंच जाती थी.

24 जुलाई को सारिका के मोबाइल पर एक बार फिर संदेश आया कि कोठी पर पुलिस क्यों तैनात है, पुलिस को वहां से हटवाओ. सारिका ने यह संदेश पुलिस अधिकारियों को दिखाया तो कुछ पुलिस वालों को वहां से हटा दिया गया, लेकिन पूरी तरह से पुलिस नहीं हटाई गई.

संजीव गुप्ता को गायब हुए 3 दिन हो चुके थे. यह घटना शहर में चर्चा का विषय बनी हुई थी. ज्यादातर लोगों का कहना था कि संजीव का अपहरण नहीं हुआ, बल्कि वह खुद ही कहीं छिपा बैठा है. दूसरी ओर संजीव की पत्नी और भांजे विप्लव गुप्ता ने संजीव के अपहरण का आरोप नीता पांडेय पर लगाया ही नहीं था, बल्कि शक के आधार पर मुकदमा भी दर्ज करा दिया था.

नीता का पति प्रदीप पांडेय समाज कल्याण विभाग में वरिष्ठ लिपिक था. भाजपा का जिला संगठन ब्राह्मण समाज ही नहीं, सरकारी कर्मचारी भी प्रदीप पांडेय और नीता पांडेय के साथ थे. इसलिए पुलिस नीता पांडेय, उस के पति प्रदीप पांडेय और अनिल गुप्ता के खिलाफ कोई काररवाई नहीं कर पा रही थी.

पुलिस द्वारा की गई जांच के अनुसार, नीता पांडेय का आरओ और बोतलबंद पानी का व्यवसाय था. उन्होंने सन 2015 में संजीव गुप्ता से 15 लाख रुपए ब्याज पर लिए थे, जिस का ब्याज पहले ही काट कर संजीव ने उसे 10 लाख 80 हजार रुपए दिए थे. इस के बाद जबरदस्ती उस से 25 लाख रुपए की कमेटी डलवाई थी. बाद में ब्याज जोड़ कर वह उस से 60 लाख रुपए मांगने लगा था.

नीता ने इतना रुपया देने से मना किया तो संजीव जबरदस्ती वसूल करने की कोशिश करने लगा. मजबूर हो कर नीता ने 1 जुलाई, 2017 को भादंवि की धारा 406, 452, 504, 506 एवं 6 के तहत संजीव, दीपक और विप्लव गुप्ता के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया था. जबकि दोनों के बीच झगड़ा अप्रैल से ही चल रहा था.

यह मामला सुर्खियों में तब आया, जब नीता पांडेय ने जिलाधिकारी से संजीव गुप्ता द्वारा धमकी देने की शिकायत के साथ ब्याज पर पैसे उठाने की शिकायत कर दी थी. जिलाधिकारी ने एसपी (सिटी) और एसडीएम को इस मामले को सुलझाने का आदेश दिया था. लेकिन बुलाने पर भी संजीव समझौते के लिए नहीं आया.

धीरेधीरे नीता पांडेय और संजीव गुप्ता का विवाद इतना बढ़ गया कि यह प्रदेश के डीजीपी और मुख्यमंत्री तक पहुंच गया. ऐसे में कुछ और लोग नीता के साथ आ गए थे, जिन्हें कमेटी का अपना पैसा डूबता नजर आ रहा था. संजीव गुप्ता शहर का बड़ा आदमी ही नहीं, रसूख वाला भी था. उस के सामने हर किसी के आने की हिम्मत नहीं थी.

सपा सरकार के समय उस का अलग ही रुतबा था. लेकिन सत्ता बदलते ही उस का रुतबा जाता रहा. उस की कमेटी और सोसायटी का व्यवसाय शहर ही नहीं, अन्य शहरों तक फैला था, जिस की वजह से लगभग रोज ही होटल में पार्टियां होती रहती थीं, जिस में बड़ेबड़े लोग शामिल होते थे.

इसी संजीव गुप्ता की वापसी के लिए 100 करोड़ की फिरौती मांगी जा रही थी. यह हैरान करने वाली बात थी. पुलिस को भी इस बात पर विश्वास नहीं हो रहा था. 22 जुलाई की शाम को संजीव गायब हुआ था और 23 जुलाई की रात एक बज कर 40 मिनट पर 100 करोड़ की फिरौती का संदेश उस की पत्नी के फोन पर वाट्सऐप द्वारा आ गया था. यह भी संदेह पैदा करने वाली बात थी.

100 करोड़ की फिरौती की वजह से ही यह मामला राजधानी लखनऊ तक पहुंच गया था. विधान परिषद में भी मामला उठाया गया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सख्त आदेश था कि इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाया जाए, इसीलिए इस मामले को सुलझाने में पुलिस जीजान से जुटी थी.

इसी का नतीजा था कि पुलिस को अपने सूत्रों से पता चला कि संजीव गुप्ता की कार अलीगढ़ के गभाना में खड़ी है. उस का मोबाइल फोन औन तो होता था, पर बहुत थोड़ी देर के लिए. फिर भी उस की जो लोकेशन मिलती थी, पुलिस उसी ओर भागती थी. अब तक की भागदौड़ से पुलिस को लगने लगा था कि यह अपहरण का मामला नहीं है. यह योजना बना कर किया गया अपहरण का नाटक है.

पुलिस ने नीता पांडेय से पूछताछ की तो उस ने कहा कि अगर सारिका गुप्ता को हिरासत में ले कर सख्ती से पूछताछ की जाए तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी. लेकिन पुलिस ऐसा करने से कतरा रही थी, क्योंकि ऐसा करने पर उस पर अंगुली उठ सकती थी. जबकि पुलिस पर इस मामले को सुलझाने का काफी दबाव था. अधिकारी भी मामले को सुलझाने में लगी टीमों पर दबाव बनाए हुए थे.

पुलिस ने संजीव के बारे में पता किया तो जानकारी मिली कि उस पर कमेटी और सोसायटी मैंबरों का करोड़ों का कर्ज था. पैसे वाले लोगों ने अपना चोरी का पैसा उस की कमेटी में लगा रखा था. उन्हें जब लगा कि उन का पैसा डूबने वाला है तो परेशान हो कर वे अपना पैसा उस से वापस मांगने लगे थे, जबकि उस के पास लौटाने के लिए पैसा नहीं था. उस ने कमेटी और सोसायटी का पैसा अपनी अय्याशी और शानोशौकत में उड़ा दिया था.

पुलिस जांच में एक आदमी ने बताया कि उस ने संजीव को 23 जुलाई को फिरोजाबाद में देखा था. इस से पुलिस को लगा कि संजीव का अपहरण नहीं हुआ है. वह अपहरण का नाटक कर रहा है. वह देश छोड़ कर भाग न जाए, पुलिस ने उस का पासपोर्ट जब्त कर लिया था.

पुलिस ने शहर के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली तो सारी पोल खुल गई. संजीव अपनी कार में अकेला ही नजर आ रहा था. गभाना में जहां उस की कार मिली थी, वहां एक पंक्चर बनाने वाले ने भी बताया था कि इस कार से एक ही आदमी उतरा था और कार लौक कर के वह चला गया था.

आखिर 28 जुलाई को एसटीएफ की टीम ने नाटकीय ढंग से संजीव गुप्ता को पानीपत के होटल स्वर्ण महल से बरामद कर लिया और फिरोजाबाद ला कर 29 जुलाई की सुबह एसएसपी अजय कुमार पांडेय के सामने पेश कर दिया. इस तरह संजीव गुप्ता की सकुशल बरामदगी से पुलिस ने राहत की सांस ली.

पुलिस की मेहनत तो सफल हो गई थी, पर उस की अपहरण की कहानी पर किसी को विश्वास नहीं था. संजीव गुप्ता ने कहा कि एसटीएफ और एसएसपी साहब ने उसे बचा लिया. अपनी बात कहते हुए वह कभी रोने लगता था तो कभी हंसने लगता था. उस के बताए अनुसार, जब वह मीटिंग खत्म कर के होटल सागर रत्ना से निकला और बाहर खड़ी कार में बैठा तो पीछे छिप कर बैठे एक युवक ने उस की पीठ पर पिस्टल सटा कर चुपचाप गाड़ी चलाते रहने को कहा.

रास्ते में 2-3 लोग और बैठ गए. उन्होंने उस का फोन ले कर उस की पत्नी को 100 करोड़ की फिरौती का संदेश भेजा. लेकिन वह अपनी इस बात पर टिका नहीं रह सका. बारबार बयान बदलता रहा. पुलिस को पहले से ही उस पर शक था, बयान बदलने से शक और बढ़ गया. इस के बावजूद पुलिस तय नहीं कर पा रही थी कि उस के साथ क्या किया जाए? अब तक उस की मदद के लिए तमाम लोग आ गए थे.

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पुलिस के पास अभी संजीव के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं थे, इसलिए सबूतों के अभाव में पुलिस ने उस के खिलाफ कोई काररवाई न करते हुए उसे उस के घर वालों के हवाले कर दिया. पुलिस की यह हरकत लोगों को नागवार गुजरी, क्योंकि सभी जानते थे कि संजीव का अपहरण नहीं हुआ था. उस ने खुद ही अपने अपहरण का नाटक किया था.

सब से ज्यादा विरोध तो नीता पांडेय ने किया. उस ने संजीव से जान का खतरा बताते हुए उसे जेल भेजने की गुहार लगाई. संजीव को पुलिस ने घर भेज दिया तो वही नहीं, उस के घर वाले भी खुश थे कि उन का कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाया. लेकिन पुलिस की स्थिति संदिग्ध होने लगी थी, इसलिए पुलिस अभी चुप नहीं बैठी थी.

अगले दिन आईजी मथुरा अशोक जैन फिरोजाबाद आए तो स्थिति बदलने लगी. पुलिस को होटल सागर रत्ना के गार्ड ने बताया था कि उस दिन संजीव गुप्ता ने उस होटल में कोई मीटिंग नहीं की थी. एक आदमी ने बताया था कि संजीव उस दिन अकेला ही कार में था. होटल के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में भी संजीव अकेला ही कार में दिखाई दिया था.

एसटीएफ टीम ने उस कार को भी ढूंढ निकाला, जिस में संजीव जम्मू में अकेला घूमता रहा था. 22 जुलाई यानी संजीव के लापता होने वाले दिन उस की लोकेशन एटा, अलीगढ़ की मिली थी. 24 जुलाई को वह जम्मू में था. एसटीएफ टीम जब वहां होटल में पहुंची तो वह वहां से निकल चुका था. इस तरह के सारे सबूत जुटा कर पुलिस ने उस के खिलाफ काररवाई करने का मन बना लिया.

अब तक संजीव गुप्ता और सारिका गुप्ता की स्थिति काफी बदल चुकी थी. जो लोग उन की मदद के लिए खड़े रहते थे, अब उन्होंने दूरियां बना ली थीं. लोगों ने उन के नंबर ब्लौक कर दिए थे. लोग इस अपहरण के ड्रामे से हैरान थे, इसलिए लोग अब किसी तरह के पचड़े में नहीं पड़ना चाहते थे.

31 जुलाई की शाम को इंसपेक्टर अरुण कुमार सिंह संजीव गुप्ता की कोठी पर पहुंचे और संजीव गुप्ता तथा सारिका गुप्ता से अलगअलग पूछताछ की. संजीव और उस के घर वालों ने तो समझा था कि सब ठीक हो गया है, पुलिस को उन्होंने गुमराह कर दिया है, पर ऐसा नहीं था.

1 अगस्त, 2017 को पुलिस ने संजीव गुप्ता, सारिका गुप्ता, उस के भांजे विप्लव गुप्ता तथा सारिका के भाई सागर गुप्ता को हिरासत में ले कर थाने ले आई. अधिकारियों के सामने जब इन से अलगअलग पूछताछ शुरू हुई तो पुलिस की सख्ती के आगे सभी टूट गए और उन की जुबान खुल गई. संजीव को जब सीसीटीवी कैमरों की फुटेज दिखाई गई तो वह फूटफूट कर रोने लगा.

संजीव ने पुलिस को सारी कहानी सचसच बता दी. उस ने बताया कि लेनदारों तथा नीता पांडेय से छुटकारा पाने के लिए उस ने अपनी पत्नी सारिका, भांजे विप्लव और साले सागर के साथ मिल कर अपने अपहरण की योजना बनाई थी. नीता पांडेय और उस के पति को फंसा कर वह विदेश भाग जाना चाहता था.

पूछताछ के बाद पुलिस ने संजीव के बयानों के आधार पर सारिका, विप्लव और सागर के खिलाफ भादंवि की धारा 419, 420, 467, 468, 469, 471, 500, 507, 120बी, 34, 182, 186 और 187 के तहत मुकदमा दर्ज कर चारों को जेल भेज दिया. इस पूछताछ में संजीव गुप्ता ने जो बताया, उस के अनुसार, कहानी कुछ इस प्रकार थी.

संजीव गुप्ता बड़ेबड़े सपने देखने वाला नौजवान था. फर्श पर रह कर वह अर्श छूना चाहता था. कभी शहर की एक तंग गली में उस का चूडि़यों का छोटा सा गोदाम था. लेकिन वह रंगबिरंगी चूडि़यों के बीच जिंदगी के गोलगोल रंगीन सपने बुन रहा था. वह सपने ही नहीं देख रहा था, बल्कि धीरेधीरे उन सपनों को हकीकत का जामा भी पहनाने लगा था. पर इस के लिए उसे पैसों की जरूरत थी.

उस ने फिरोजाबाद ही नहीं, आगरा, मथुरा के बड़ेबड़े व्यापारियों से संपर्क बनाए और कमेटी और किटी का काम शुरू किया. लोग उस की कमेटी और किटी में बड़ीबड़ी रकम लगाने लगे. इसी पैसे को वह ब्याज पर उठाने लगा. बाजार में उस का लाखों रुपए ब्याज पर उठ गया. मजे की बात यह थी कि वह ब्याज के रुपए काट कर लोगों को रुपए उधार देता था.

समय पर किस्त न आने से संजीव अलग से ब्याज लेता था. धीरेधीरे वह बड़ा आदमी बनने लगा. पैसा आया तो वह अन्य धंधों में पैसे लगाने लगा. कमेटी में जो लोग पैसा डालते थे, वह दो नंबर का था. संजीव का सारा काम भी 2 नंबर का होता था, इसलिए हर कोई एकदूसरे की चोरी छिपाए रहा. पैसा आया तो संजीव गुप्ता के खर्चे बढ़ने लगे.

लोगों के पैसों से संजीव ने प्रौपर्टी तो बनाई ही, बड़ीबड़ी कारें भी खरीदीं. लेकिन बाद में लोग अपने पैसे मांगने लगे. अब उसे घाटा भी होने लगा था, जिस से लोगों को अपना पैसा डूबता नजर आया. फिर तो वह उस पर पैसा लौटाने के लिए दबाव डालने लगे. लोगों के दबाव से परेशान संजीव गुप्ता नीता पांडेय से 60 लाख रुपए मांगने लगा तो परेशान हो कर नीता ने उस पर मुकदमा कर दिया.

संजीव अब परेशान रहने लगा था. इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए उस ने एक योजना बनाई, जिस में उस ने पत्नी सारिका, भांजे विप्लव और साले सागर गुप्ता को शामिल किया. अगर संजीव की योजना सफल हो गई होती तो नीता पांडेय और उस के पति प्रदीप पांडेय जेल में होते और वह विदेश में मौज कर रहा होता.

योजना के अनुसार, संजीव ने सारिका की बहन के बेटे विप्लव गुप्ता तथा साले सागर को फिरोजाबाद बुला लिया. सागर सीए भी था और वकील भी. संजीव ने सागर को अपने ऊपर सूदखोरी के चल रहे मुकदमे की पैरवी के लिए बुलाया था, लेकिन आने पर अपने अपहरण की पटकथा लिखवा डाली.

सारिका किटी पार्टियों की शान मानी जाती थी. कमेटी और किटी में रुपए डालने के लिए सदस्यों को पटाने का काम वही करती थी. कमेटी चलाने की जिम्मेदारी भी उसी की थी. पति के अपहरण के इस ड्रामे में मुख्य भूमिका उसी की थी.

संजीव ने अपने अपहरण का तानाबाना काफी मजबूती से बुना था, पर पुलिस की मुस्तैदी और दूरदर्शिता के कारण उस का ड्रामा सफल नहीं हुआ. पत्रकारों के सामने संजीव, सारिका, विप्लव और सागर को पेश कर के एसएसपी अजय कुमार पांडेय ने बताया कि संजीव अपनी कार को ऐसे रास्तों से अलीगढ़ गया, जिन पर कोई टोलनाका नहीं था.

इसी वजह से वह सीसीटीवी कैमरों की नजर में नहीं आ सका. अलीगढ़ के गभाना टोल प्लाजा के पहले ही उस ने अपनी कार हाईवे के किनारे खड़ी कर के लौक कर दी और बस से दिल्ली के आईएसबीटी बसअड्डे पहुंचा. वहां से चंडीगढ़, मोहाली होते हुए 24 जुलाई को वह जम्मू पहुंच गया.

वहां से वह मनाली गया और 25 से 27 जुलाई तक वहीं रहा. वह रोहतांग भी गया, जहां से मनाली आ गया. मनाली से देहरादून होते हुए 28 जुलाई को वह पानीपत आया, जहां स्वर्ण होटल पहुंचा और योजना के अनुसार अपने अपहरण की कहानी होटल के कर्मचारियों को सुनाई.

दूसरी ओर सारिका ने कई बार सूटकेस ले कर कोठी से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के पहरे की वजह से वह जा नहीं सकी. यह भी उस का एक ड्रामा था. अगर वह निकल जाती तो लोगों से कहा जाता कि सौ करोड़ की फिरौती दे कर वह पति को छुड़ा कर लाई है.

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संजीव एक तीर से कई निशाने साधना चाहता था. अपहरण की आड़ में नीता पांडेय और उस के पति को जेल भिजवा कर उन से छुटकारा पाना चाहता था. सौ करोड़ की फिरौती दे कर आने के नाम पर वह कमेटी के कर्ज से छुटकारा पाना चाहता था. क्योंकि लोगों को उस से सहानुभूति हो जाती.

पर सच्चाई सामने आ जाने से संजीव की योजना पर पानी फिर गया. इस की वजह थी ज्यादा लालच. उस ने सौ करोड़ की जो फिरौती की बात की थी, उस पर किसी ने विश्वास नहीं किया.  जिन धाराओं में संजीव और सारिका को जेल भेजा गया है, उन का जेल से बाहर आना मुश्किल है. शानदार कोठी में रहने वाले पता नहीं कब तक जेल की कोठरी में रहेंगे.

संजीव के वकील ने उन की जमानत के लिए अदालत में अरजी लगा कर जमानत की काफी कोशिश की, लेकिन सरकारी वकील की दलीलें सुन कर न्यायाधीश श्री पी.के. सिंह ने जमानत की अरजी खारिज कर दी. एसटीएफ ने जिस तरह इस मामले का खुलासा किया, किसी को उम्मीद नहीं थी. उन की इस काररवाई से खुश हो कर एसएसपी अजय कुमार पांडेय ने उन्हें प्रशस्तिपत्र के साथ 15 हजार रुपए का नकद इनाम दिया है.

इंसपेक्टर अरुण कुमार सिंह का तबादला हो गया है. उन की जगह पर नए कोतवाली प्रभारी भानुप्रताप सिंह आए हैं. वह संजीव गुप्ता और उस के साथियों को रिमांड पर ले कर एक बार फिर पूछताछ करना चाहते हैं.

वीडियो : जब रोहित शर्मा ने बनाया चहल का मजाक

टीम इंडिया साउथ अफ्रीका दौरे पर है. पहला टेस्ट हारने के बाद टीम इंडिया शानदार वापसी करने के लिए जी तोड़ मेहनत कर रही है. टीम इंडिया एक तरफ प्रैक्टिस में पसीना बहा रही है तो वहीं टीम इंडिया के युवा लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल अपना क्वालिटी टाइम स्पेंड कर रहे हैं.

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बता दें कि टीम इंडिया के स्टार स्पिनर युजवेंद्र चहल फिलहाल टीम के साथ नहीं है, लेकिन जल्द ही वे साउथ अफ्रीका के खिलाफ होने वाली वनडे सीरीज में खेलते नजर आएंगे. 1 फरवरी से साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज है. जिसके लिए चहल साउथ अफ्रीका रवाना होंगे.

चहल ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है. जिसमें वह गोल्फ में हाथ आजमाते नजर आ रहे हैं. वो वहां महेंद्र सिंह धोनी का हेलिकोप्टर शौट खेलने की कोशिश कर रहे हैं. जहां इस वीडियो को फैंस ने पसंद किया तो वहीं टीम इंडिया के स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा ने मजाकिए अंदाज में ऐसा कमेंट किया, जिसे पढ़कर आप लोटपोट हो जाएंगे.

चहल ने गोल्फ स्टिक के साथ एक फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की तो रोहित शर्मा ने उनके फोटो पर कमेंट किया कि ”खुद मत उड़ जाना गोल्फ स्टिक के साथ.” रोहित का कमेंट पढ़ने के बाद चहल भी चुप नहीं रहे और उन्होंने भी रोहित को जोरदार जवाब दिया. चहल ने लिखा- ”हाहा… स्टिक होती तो शायद उड़ जाता पर ये गोल्फ क्लब है भईय्या..”

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वैसे चहल ने भले ही रोहित को चुप करा दिया हो, लेकिन कई अन्य फैन्स ने भी हेल्थ को लेकर उनकी जमकर खिंचाई की. हालांकि कुछ फैन्स ने रोहित के भी मजे लिए और उनसे बैटिंग पर ध्यान देने के लिए कहा.

बता दें कि रोहित और युजवेंद्र भले ही टीम में सीनियर-जूनियर हों, लेकिन दोनों के बीच काफी अच्छी बौन्डिंग हैं. वे अक्सर हंसी-मजाक करते नजर आते हैं.

ग्रुप एडमिन को और भी ज्यादा पावरफुल बनाएगा व्हाट्सऐप

व्हाट्सऐप मैसेंजिंग ऐप यूजर्स की सुविधा को देखते हुए लगातर नए फीचर्स लेकर आ रहा है. हाल ही में खबर आई थी कि व्हाट्सऐप औडियो कौल से वीडियो कौल पर स्विच करने का नया बटन देगा. इससे आपको औडियो से वीडेयो कौल पर जाने के लिए कौल काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इस फिचर के बाद अब व्हाट्सऐप अपना एक और नया फीचर लाने की तैयारी कर रहा है. यह फीचर है व्हाट्सऐप ग्रुप के एडमिन को और पावरफुल बनाने का.

आपको बता दें कि व्हाट्सऐप अब ग्रुप चैट में एक नए बटन की टेस्टिंग कर रहा है जिसके जरिए एक एडमिन किसी दूसरे एडमिन को ‘डीमोट’ या ‘डिस्मिस’ कर सकेगा. यानी व्हाट्सऐप ग्रुप एडमिन के पास दूसरे एडमिन को बिना ग्रुप से हटाए, एडमिन के पद से हटाने की सुविधा दा जाएगी. जबकि वर्तमान में अगर कोई एडमिन ग्रुप के किसी व्यक्ति को एडमिन बनाता है और उसे कुछ वक्त बाद एडमिन के पद से हटाता है तो वह व्यक्ति ग्रुप से ही बाहर हो जाता है, लेकिन नए फिचर में ऐसा नहीं होगा.

इस नए फीचर के तहत व्हाट्सऐप में ‘डिसमिस एज एडमिन’ (Dismiss as Admin) का विकल्प दिया जाएगा. यह विकल्प ग्रुप इन्फो सेक्शन में होगा. गूगल प्ले स्टोर से व्हाट्सऐप का बीटा वर्जन डाउनलोड करने वाले यूजर्स फिलहाल इस विकल्प को देख सकते हैं.

तीन डौट पर क्लिक कर आप Group Info सेक्शन एक्सेस कर सकते हैं. ग्रुप इन्फो में आपको किसी एडमिन को बिना ग्रुप से निकाले एक एडमिन के तौर पर डिस्मिस करने का विकल्प दिख जाएगा, लेकिन इसके लिए आपको किसी ग्रुप का एडमिन होना जरूरी है.

नीरस हो रहे रिश्ते में रोमांस जगाने के ये टिप्स आजमा कर तो देखें

जब लंबे समय तक साथ रह कर ऐसा अनुभव होने लगे कि आप सोलमेट के साथ नहीं, फ्लैटमेट के साथ रह रहे हैं, तो समझ लीजिए आप को कुछ तरीके अब सोचने ही पड़ेंगे कि कैसे रोमांस फिर से लाया जाए. कुछ बोरियत को उम्र का बढ़ना मान लेते हैं और फिर इस बोरियत से बचने के लिए कहीं और आकर्षित होने लगते हैं. मगर ऐसी नौबत आने ही न दें.

रिलेशनशिप थेरैपिस्ट रीता कोठारी का कहना है, ‘‘परफैक्ट रिलेशनशिप का आइडिया ही एक भ्रम है. सब में अच्छीबुरी आदतें होती हैं. बस प्यार ही वह भावना है, जो इस रिश्ते को सहेज कर रख सकती है और एकदूसरे की बुरी आदतों की उपेक्षा कर सकती है.’’

आइए, जानें कि विशेषज्ञ आप के रिश्तों को सुधारने के लिए क्या होमवर्क करने के लिए कहते हैं:

आलिंगन से बढ़ता है विश्वास

रिलेशनशिप कोच आदिति का कहना है, ‘‘आलिंगन से विश्वास बढ़ता है और हैप्पीनैस हारमोंस औक्सीटोसिन और सैरोटोनिन बढ़ते हैं. इस से निराशा कम होती है और अंडरस्टैंडिंग बढ़ती है. जानें कि आप के पार्टनर को क्या अच्छा लगता है. कुछ पल बांहों में रहना या कम देर रहना. रिसर्च कहती है कि बहिर्मुखी लोगों को दिन में 8 बार हग करना अच्छा लगता है.’’

मनोवैज्ञानिक डा. अंजलि कहती हैं, ‘‘रिसर्च के अनुसार प्रिय की मौजूदगी से किसी भी कार्य को करने की सामर्थ्य बढ़ती है. जो कपल्स साथ ऐक्सरसाइज करते हैं उन की बौंडिंग ज्यादा अच्छी होती है. एक दंपती ने अपना अनुभव बताया कि दोनों ने एक डांस क्लास साथ जौइन की तो दोनों के रिश्ते में बहुत सकारात्मक परिवर्तन हुआ. अत: कोई भी ऐक्टिविटी साथ जरूर करें.’’

कैसे बढ़ाएं अंतरंगता

अंजलि आगे कहती हैं, ‘‘बैड पर एक ही समय जाएं. इस से दोनों को कुछ समय साथ रहने को मिलेगा जिस से अंतरंगता बढ़ेगी. हां, यह प्रतिदिन तो संभव नहीं हो

सकता, क्योंकि कोई पार्टनर देर तक काम कर रहा हो सकता है या बाहर हो सकता है पर कोशिश करें कि ऐसा महीने में 7 दिन तो हो.

1991 में जेफरी लार्सन की रिसर्च के अनुसार जिन पतिपत्नी का स्लीपिंग पैटर्न मैच नहीं करता उन्हें ऐडजस्टमैंट में मुश्किलें आती हैं.

छोटेछोटे संकेत से बढ़ाएं प्यार

एकदूसरे का हाथ पकड़ कर दिन की शुरुआत करें या मौर्निंग वाक के समय या चाय पीते हुए. इस से प्यार में ऊष्मा बढ़ती है या बाहर जाने पर टेबल तक ही हाथ पकड़ लें. हाथ और उंगलियों में सब से ज्यादा स्पर्श की अनुभूति होगी. इस टच से स्ट्रैस हारमोंस कम होते हैं और दोनों रिलैक्स्ड होते हैं. इसलिए एकदूसरे के हाथ में अपना हाथ देने में देर न करें. इस स्पर्श का आनंद उठाएं.

वैवाहिक जीवन की सफलता और इसे आनंददायक बनाने के लिए पार्टनर को थैंक्स बोलते रहना बहुत जरूरी है. धीरेधीरे दोनों एकदूसरे को टेकेन फौर ग्रांटेड लेने लगते हैं पर रोज किसी न किसी बात पर एकदूसरे को प्यार से थैंक्स कहने से यही लगेगा कि दोनों की हर बात पर एकदूसरे का ध्यान है. ये छोटेछोटे संकेत प्यार बढ़ाते हैं.

मोबाइल से दूर रहें

अमेरिकन साइकोलौजिकल ऐसोसिएशन के अध्ययन के अनुसार स्मार्टफोन के ज्यादा प्रयोग से रिश्तों में अनिश्चितता आती है, गैजेट्स ने पतिपत्नी के समय और स्पेस पर असर डाला है. दोनों भले ही साथ खाना खा रहे हों पर ध्यान फोन पर होता है. साथ होने पर आधा घंटा फोन से दूर रहने की आदत डालना इतना मुश्किल भी नहीं है. हो सके तो डाइनिंग टेबल को नो फोन जोन बना दें. आधा घंटा भी बात कर के दोनों एकदूसरे के साथ और जुड़ सकते हैं.

हंसने से फील गुड हारमोन इंडोर्फिंस बढ़ता है जो इम्यून सिस्टम को अच्छा रखता है. महिलाएं पुरुषों में सैंस औफ ह्यूमर होना पसंद करती हैं पर इस के लिए स्टैंडअप कौमेडियन होना जरूरी नहीं है. कोई फनी मूवी साथ देखें या कोई फनी चीज किसी बुक से सुनाएं, साथ हंसें और हंसाएं.

बिताएं खुशनुमा पल

धीरेधीरे समय के साथ काम और परिवार की जिम्मेदारी में सैक्स पीछे छूटता चला जाता है. सब से ध्यान हटा कर हफ्ते में कम से कम 1 बार ही सही सैक्स का आनंद अवश्य लें.

कभीकभी अकेले कहीं समय बिताने जाएं, यह जरूरी है. चाहे आप को हर काम अपने पार्टनर के साथ करने की आदत हो पर कभीकभी सिर्फ अपनी कंपनी ऐंजौय करें.

40 + में भी दिखना चाहती हैं हसीन, तो आजमाइये ये आसान से टिप्स

बात चाहे 20 प्लस की हो या 50 प्लस की, हर उम्र में महिलाएं अपनी खूबसूरती को निखारने के लिए कई जतन करती रहती हैं. मेरी पड़ोसिन 50 प्लस की हैं, लेकिन उम्र के इस दौर में भी अपने मेकअप और लुक को ले कर बहुत ही ऐक्टिव हैं. हो भी क्यों न? उम्र के इस पड़ाव में अपने लुक को निखारने की जरूरत 20 प्लस की लड़कियों से ज्यादा होती है, क्योंकि ढलती उम्र में ढीली त्वचा, रिंकल्स और फाइन लाइंस चेहरे की रंगत चुरा लेती हैं. अत: चेहरे की रौनक को पाने के लिए अपनाएं इन मेकअप ट्रिक्स को, जिन्हें बता रही हैं मेकअप आर्टिस्ट और सैलिब्रिटी हेयर डिजाइनर सिमरन और परमजीत सोई:

फेस मेकअप ट्रिक्स : चेहरे को अच्छी तरह साफ कर के दागधब्बों पर कंसीलर लगाएं ताकि वे आसानी से छिप सकें. फिर उस पर हलके हाथों या ब्रश से कौंपैक्ट पाउडर लगाएं. अब इस पर स्किन मैचिंग फाउंडेशन बेस का इस्तेमाल करें.

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इसे पूरे चेहरे पर लगाते हुए अच्छी तरह से मर्ज करें. कभी भी ज्यादा बेस का इस्तेमाल न करें वरना यह स्किन को और भी खराब दिखाएगा. बेस लगाने के बाद हलके ब्रश से मैचिंग लूज पाउडर लगाएं ताकि बेस सैट हो जाए.

आईज मेकअप : बेस लगाने के बाद आई मेकअप की शुरुआत करें. आंखों पर क्रीम बेस शैडो न लगा कर पाउडर बेस शैडो ही लगा कर अच्छी तरह ब्रश से मर्ज करें. फिर लाइट ब्राउन या पीच कलर का शैडो लगाएं. इसे हलके हाथों से आंखों के बाहरी किनारों से ले कर अंदर की तरफ लाते हुए लगाएं. बाहर की तरफ अंदर से हलका डार्क ही रखें. अब ब्राउन व ब्लैक कलर मिक्स कर के ब्रश से लाइनर लगाएं. अंदर से लगाते हुए बाहर की तरह हलका सा ऊपर उठाते हुए लगाएं.

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अगर वाटर लाइन एरिया में काजल की जरूरत लगे तभी लगाएं नहीं तो बाहर की तरफ हलका लाइनर लगा कर ब्रश से मर्ज कर दें. आईब्रोज को शार्प दिखाने के लिए बालों के कलर की आईब्रो पैंसिल का प्रयोग करें. लेकिन उसे ज्यादा परमानैंट न करें. हलकी पैंसिल चला कर कौटन से पोंछ दें ताकि वह आर्टिफिशियल न लगे.

लिप मेकअप : होंठों के आकार के अनुसार उन की आउट लाइन बनाएं. यदि होंठ पतले हैं तो बाहर की तरफ निकालते हुए आउट लाइन बनाएं और मोटे हैं तो अंदर की तरफ दबाते हुए आउट लाइन बनाएं. आउट लाइन भी डार्क कलर की न करें.

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जो कलर आप की लिपस्टिक का है उसी कलर से करें. लिपस्टिक का कलर भी उम्र के अनुसार लाइट पिंक, पीच व लाइट ब्राउन ही रखें. फिर आउट लाइन के बाद होंठों पर लिपस्टिक फिल करें.

चीक्स मेकअप : आखिर में चीक्स को उभारने के लिए चीक्सबोन पर ब्रश की सहायता से नीचे से ऊपर की ओर एक स्ट्रोक में पीच कलर का ब्लशर लगाएं. ऐसे ही दूसरी साइड के गाल पर लगाएं.

रौयल हेयरस्टाइल : बालों पर हलकी बैककौंबिंग कर एक साइड के बालों को अच्छी तरह से नीड कर के पिन लगाएं. ऐसा ही दूसरी तरफ के बालों को कर के फ्रैंच रोल बना कर पिन लगाएं.

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अब आगे के बालों का 1-1 सैक्शन ले कर बैककौंबिंग करें. वन साइड बालों को हलका नीड कर के पिन लगाएं. हेयरस्टाइल बन जाने के बाद पूरे बालों पर हेयर स्प्रे लगाएं. फिर उसे आर्टिफिशियल फ्लौवर से पीछे की तरफ सजाएं. अब साड़ी से मैचिंग लाइट ज्वैलरी पहनें. रौयल लुक तैयार है.

राजनीति हो या गृहस्थी, बात मेहनत से ही बनती है

गुजरात के चुनावों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी का संघर्ष एक बात साफ करता है कि जीवन संघर्ष का नाम है और कुछ पाने के लिए बहुत कुछ करना पड़ता है. नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी दोनों ने दिखावे के लिए मंदिरों में खूब मत्थे टेके पर असल में उन्हें जितनी भी सीटें मिलीं, अपनी कर्मठता के कारण. अगर नरेंद्र मोदी चुप बैठ जाते और रातदिन भाषणों की झड़ी न लगाते तो राहुल गांधी गुजराती पेड़ा गटक जाते. अगर राहुल गांधी यह सोच कर 10 जनपथ में दुबक जाते कि 1947 से उन का परिवार सत्ता के शिखर पर ही है तो आज वे कहीं के न होते.

यह राजनीतिक पाठ हर घर को पढ़ना चाहिए. सफल गृहस्थी का राज भी यही है कि हर समय सतर्क रहो, कर्मठ रहो और घर के हर सदस्य को काम में लगाए रखो. बहुत से परिवार विनाश केवल इसलिए देखते हैं, क्योंकि उन की औरतें अपनी मूल जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लेती हैं और घर को ठीक करने की जगह अपने साजशृंगार या किट्टी पार्टियों में तंबोला खेलने में दक्ष होने को सफलता मान लेती हैं.

घर में पैसा हो तो भी उसे बचाए रखने में उतनी ही मेहनत करना जरूरी है जितनी नरेंद्र मोदी ने लोक सभा में 2 तिहाई सीटों और 29 में से 19 राज्यों की विधान सभाओं के कब्जे के बाद की. हां, उन की कमी इस बात की रही कि उन्होंने सारा बोझ अपने कंधों पर डाल लिया. यह भी हर हाउसवाइफ या वर्किंगवाइफ को एक सबक है कि ज्यादा काम करना थकाता नहीं वरन मजबूती ही देता है. ऐफिशिएंट और इंटैलीजैंट औरत ही घर व बाहर को ढंग से देख सकती है.

नरेंद्र मोदी ने जिस तरह गुजरात का जिम्मा वहां के अनजाने से मुख्यमंत्री विजय रूपानी पर ही नहीं छोड़ दिया, उसी तरह घर में रसोई या साफसफाई दूसरों पर न छोड़ें भले ही वे कितने ही दक्ष या विश्वसनीय ही क्यों न हों. यह न भूलें कि हर समय आप के घर पर भी दूसरों की नजर है जैसे राहुल गांधी की गुजरात पर थी. पति की खुद की और बच्चों की मनमानी व उन की सुरक्षा पर सतर्क रहना चाहिए.

राजनीति से सबक सीखें कि घर में भी केवल रोब से ही नहीं लेनदेन का भी योगदान होता है. जिस तरह राहुल गांधी ने कांग्रेस को बचाए रखने के लिए हार्दिक पटेल, जिग्नेश मवानी, अल्पेश ठाकुर की सहायता ली, वैसे ही सास, ननद, जेठानी, पड़ोसिन की सहायता लेना गलत नहीं है. यह सहायता बोझ नहीं होती, बल देती है.

इन चुनावों में दोनों पार्टियों ने बेहद पैसा खर्चा. हर सभा करने पर लाखों रुपए खर्च होते हैं. खुद के वजूद को बचाने के लिए यह पैसा होना जरूरी है. फक्कड़ हो कर राजनीति नहीं की जाती. कांग्रेस अमीर भाजपा से कहीं कम नहीं दिखी. इसी तरह हर घरवाली को शादी, उत्सव, बीमारी, मुकदमे के लिए पैसा बचा कर रखना चाहिए. छोटे खर्चों की लगभग कटौती से ही बड़ी लड़ाई को लड़ने का बल मिलता है. आजकल छोटे से रोग पर भी हजारों खर्च हो जाते हैं. पढ़ाई पर लाखों लग जाते हैं.

राजनीति का एक पाठ यह भी है कि ऊंचनीच चलती रहती है. बहन या जेठानी के पास ज्यादा है तो ईर्ष्या से काम नहीं चलता, मेहनत से बात बनती है. रातदिन लगे रहना जरूरी है. पति की भी हिम्मत बढ़ाएं. उन्हें ही कमाना है तो पत्नी को संभालना है. दोनों कमाते हैं तो भी संभालने की जिम्मेदारी घरवाली की है. विरासत में मिले पैसे व रोब को भी संभालना आसान नहीं. एक बार की फतह हरदम नहीं चलती. जिंदगी लगातार चलने वाली रेस है.

साडि़यों और अन्य ड्रैसों से भी आगे दुनिया है, दुनिया की चुनौतियां हैं. हर घर पर नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी छाप रहनी चाहिए तभी सफलता मिलेगी.

फेसबुक करने जा रहा है बड़ा बदलाव, मिलेगी सिर्फ काम की जानकारी

साल 2018 में बहुत कुछ बदल रहा है. इसमें से एक सबसे चर्चित सोशल मीडिया प्लेटफौर्म फेसबुक भी इस साल कुछ बदलाव करने की योजना बना रहा है. चर्चा है कि फेसबुक जल्द ही नए फीचर शुरू करने वाला है. इन फीचर्स के आने के बाद यूजर्स को सिर्फ काम की चीजें मिलेंगी. फेसबुक अपने उपभोक्ताओं को यूजर्स फ्रेंडली अनुभव देने के लिए जल्द ही बड़े बदलाव करने वाला है. जिसके बाद यूजर्स को फेसबुक बिल्कुल नए और बेहतर ढंग से देखने को मिलेगा.

क्या होगा बदलाव

इस बदलाव के अंतर्गत फेसबुक की न्यूजफीड में ‘रिलिवेंट कंटेंट’ की तुलना में ज्यादा ‘मीनिंगफुल’ कंटेंट नजर आएगा. इस बदलाव के अंतर्गत फेसबुक की न्यूजफीड में उनके काम का ज्यादा कंटेंट ज्यादा नजर आएगा. फेसबुक के इस नए प्लान के बाद यूज़र्स को फेसबुक पर कम समय खर्च कर, ज्यादा मीनिंगफुल और रिलेवेंट कंटेंट मिल सकेगा.

फेक न्यूज पर लगाम की तैयारी

फेसबुक पर लम्बे समय से फेक न्यूज और गलत जानकारी फैलाने के आरोप लगते आए, जिसकी वजह से यूज़र्स पर नकरात्मक प्रभाव पड़ता है. इस कदम के जरिए फेसबुक का प्रयास है, वह यूजर्स तक सटीक और बेहतर कंटेंट पहुंचा सके.

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Facebook पर भूलकर भी पोस्‍ट न करें ये चीजें

पूरी बर्थडेट कभी न डालें

बर्थडे के दिन अपनी फेसबुक वौल पर “हैप्‍पी बर्थडे” मैसेज पढ़कर यूजर्स सबको बेहद खुशी होती है. यही वजह है कि हम में से ज्‍यादातर लोग अपने जन्‍मदिन की तारीख फेसबुक पर जरूर मेंशन करते हैं, लेकिन ऐसा करते वक्‍त हम ये भूल जाते हैं कि हम चोरों को अपने बारे में बेहद निजी जानकरी दे रहे हैं. वैसे यूजर्स को बर्थ डेट मेंशन करने से बचना चाहिए, लेकिन फिर भी अगर आप ऐसा करना ही चाहते हैं तो कम से कम से बर्थ ईयर के बारे में कोई जानकारी न दें. वैसे भी जो आपके सच्‍चे और पक्‍के दोस्‍त होंगे उन्‍हें आपके बर्थडे के बारे में मालूम ही होगा.

रिलेशनशिप स्‍टेटस

चाहे आप रिलेशन में हों या न हों, उसे सार्वजनिक रूप से जाहिर न करने में ही अक्‍लमंदी है. अगर आप अपना स्‍टेटस कमिटेड से सिंगल करते हैं तो उन लोगों को मौका मिल जाता है जो काफी समय से आपके पीछे पड़े हुए थे. इससे उन्‍हें यह भी पता चल जाता है कि अब आप ज्‍यादातर समय अकेले रहते हैं. ऐसे में बेहतर यही रहेगा कि अपने प्रोफाइल में रिलेशनशिप स्‍टेटस को ब्‍लैंक ही छोड़ दिया जाए.

करंट लोकेशन

ऐसे कई लोग हैं जिन्‍हें फेसबुक पर लोकेशन टैग करना बहुत अच्‍छा लगता है ताकि वे बता सकें कि 24 घंटे सातों दिन वे कहां रहते हैं. यानी कि आप खुलेआम इस बात का ऐलान करते फिर रहे हैं कि आप छुट्टियों पर हैं (और आपके घर में कोई नहीं है). इस पर अगर आप ये भी बता दें कि आप कितने दिनों के लिए बाहर गए हैं तो चोरों का काम आसान हो जाता है और वे आसानी से आपके घर पर हाथ साफ करने की साजिश रच लेते हैं. अच्‍छा यह रहेगा कि छुट्टियों से वापिस आने पर आप फोटो अपलोड कर अपने दोस्‍तों को जताएं कि जब वो काम कर रहे थे तब आप घूमने, खाने-पीने और शौपिंग में बिजी थे.

घर पर अकेले हैं तो रखें खास एहतियात

पेरेंट्स को इस बात का खास ध्‍यान रखना चाहिए कि जब उनके बच्‍चे घर पर अकेले हों तब न तो खुद और न ही बच्‍चे इस बारे में अपने-अपने फेसबुक एकाउंट पर कुछ लिखें. वैसे भी जब आप घर पर अकेले होते हैं तब खुद किसी अजनबी के घर जाकर उसे इस बारे में जानकारी नहीं देते हैं तो फेसबुक पर भी ऐसा न करें. हमें लगता है कि सिर्फ हमारे दोस्‍त ही हमारा स्‍टेटस पढ रहे हैं, लेकिन असल में हमें पता ही नहीं होता है कि कौन-कौन उसे पढ़ रहा है. हो सकता है कि आपके दोस्‍त का एकाउंट हैक हो गया हो या दफ्तर में उसके पीछे खड़े होकर कोई चुपके से आपके स्‍टेटस को पढ़ रहा हो. सबसे अच्‍छा तरीका यही है कि आप फेसबुक पर ऐसा कोई स्‍टेटस अपलोड न करें जिसे आप किसी अजनबी से कभी शेयर नहीं करेंगे.

बच्‍चों की तस्‍वीरें उनके नाम से टैग न करें

कई बार तो हम बच्चों की फोटो को ही अपनी प्रोफाइल पिक्‍चर बना लेते हैं. 10 में से नौ पेरेंट्स ऐसे हैं जो डिलीवरी के बाद अस्‍पताल में रहते हुए ही अपने बच्‍चों का पूरा नाम और डेट तथा टाइम फेसबुक पर पोस्‍ट कर देते हैं. बच्‍चों की फोटो पोस्‍ट करने के साथ ही उन्‍हें और उनके दोस्‍तों को अपने भाई-बहनों, कजिन्‍स और दूसरे रिश्‍तेदारों के साथ टैग कर देते हैं. इस जानकारी का इस्‍तेमाल बदमाश आपके बच्‍चे को बहलाने के लिए कर सकते हैं. आपके बच्‍चों का विश्‍वास जीतने के लिए वे उन्‍हें नाम से बुलाने के साथ ही उनके दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों का नाम भी ले सकते हैं ताकि उन्‍हें यकीन हो जाए कि वो अजनबी नहीं हैं.

शानदार फौर्म में होने के बाद भी नहीं हुआ रहाणे का चयन

भारतीय कप्तान विराट कोहली ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले टेस्ट मैच से अजिंक्य रहाणे को बाहर रखने के फैसले पर सवाल उठाने वाले आलोचकों पर ताना कसते हुए कहा कि जो उनके उप कप्तान को टीम से बाहर चाहते थे अब वे ही उनकी वापसी के लिये होहल्ला मचा रहे हैं.

कोहली ने दूसरे टेस्ट मैच की पूर्व संध्या पर कहा, ‘‘यह दिलचस्प है कि सप्ताह भर में या पांच दिन में चीजें कैसे बदल जाती हैं. पहले टेस्ट मैच से पहले कोई नहीं सोच रहा था कि उसे अंतिम एकादश में होना चाहिए और अचानक लोग अन्य विकल्प को देखने लगे. ’’

कप्तान की टिप्पणी दिलचस्प हैं क्योंकि रहाणे के अंतिम एकादश में चयन को लेकर कभी सवाल नहीं उठा. असल में विदेशों में उनके शानदार रिकौर्ड को देखते हुए उन्हें टीम में नहीं चुना जाना हैरानी भरा था. भारत ने यह मैच 72 रन से गंवाया. कोहली ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, ‘‘हमारे लिए एक टीम के तौर पर सही संतुलन खोजना है. अगर खिलाड़ी इस तरह के संतुलन में फिट बैठता है तो उसे टीम में रखते हैं. बाहर से लोग क्या बोल रहे हैं, क्या चर्चाएं हैं हम निश्चित तौर पर उस पर गौर नहीं करते.’’

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उन्होंने कहा, ‘‘वह (रहाणे) बेहतरीन खिलाड़ी है. उसने दक्षिण अफ्रीका विशेषकर विदेशों में अच्छा प्रदर्शन किया है. वह संभवत: विदेशों में हमारा लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाला खिलाड़ी रहा है.’’ कोहली ने फिर से दोहराया की रोहित शर्मा को उनकी वर्तमान फार्म के कारण टीम में लिया गया.

उन्होंने कहा, ‘‘मैं रोहित शर्मा को उन पर तरजीह देने के कारणों के बारे में पहले ही कह चुका हूं. मैं यह नहीं कह रहा हूं कि अंजिक्य इस मैच में नहीं खेलेगा. अभी सभी विकल्प खुले हैं और हम अभ्यास के बाद फैसला करेंगे.’’

कप्तान ने संकेत दिये कि अंतिम एकादश में बदलाव किये जा सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘जहां तक सलामी जोड़ी की बात है तो हम अभ्यास सत्र के बाद इस पर फैसला करेंगे. हम कुछ अलग कर सकते हैं लेकिन अभी वास्तव में घबराने की जरूरत नहीं है.’’ कोहली ने कहा कि पिच में पर्याप्त तेजी और उछाल हो सकती है लेकिन यह न्यूलैंड्स के विकेट की तरह ज्यादा हरा नहीं है.

उन्होंने कहा, ‘‘यह जीवंत विकेट लग रहा है. हमें ऐसी ही उम्मीद थी. यह पिच फिर से अपनी सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेलने के लिये चुनौती देगी और हम इसके लिये तैयार हैं.’’ कोहली ने बल्लेबाजों से कहा कि वह उछाल से हैरान न हों. कप्तान ने कहा, ‘‘हमें यहां की उछाल से हैरान नहीं होना चाहिए. हमें उछाल में अचानक बदलाव पर अपना धैर्य बनाये रखना होगा.’’

तो ‘पद्मावत’ 25 जनवरी को भी नहीं होगी रिलीज?

केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘‘पद्मावत’’ को सिनेमाघरों में प्रदर्शन की इजाजत दे दी है. सूत्र दावा कर रहे हैं कि अब ‘वायकाम 18’ इस फिल्म को 25 जनवरी को अक्षय कुमार की फिल्म ‘‘पैडमैन’’ के साथ प्रदर्शित करेगी. इसके बाद ही 25 जनवरी को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘‘अय्यारी’’ के निर्माता निर्देशक नीरज पांडे ने अपनी फिल्म को नौ फरवरी को प्रदर्शित करने का ऐलान किया. मगर फिल्म की निर्माण से जुड़ी कंपनी ‘वायकाम 18’ और संजय लीला भंसाली की तरफ से अभी तक फिल्म ‘‘पद्मावत’’ के प्रदर्शन की आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की गयी है.

उधर फिल्म‘‘पद्मावत’’का ‘करणी सेना’की तरफ से लगातार विरोध जारी है. इसी विरोध के बीच राजस्थान सरकार ने ऐलान कर दिया है कि वह फिल्म‘‘पद्मावत’’को राजस्थान में प्रदर्शित नहीं होने देगी. मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र के सिंगल थिएटर और मल्टीप्लैक्स मालिकों ने कहा है कि वह ‘पद्मावत’ को तभी दिखाएंगे, जब पुलिस उनकी सुरक्षा का लिखित आश्वासन दे. पर ऐसा नहीं होने जा रहा है.

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मुबई पुलिस ने तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को खत लिखकर दे दिया है कि 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की तैयारी के चलते वह फिल्म ‘पद्मावत’ के लिए सिनेमाघरों की सुरक्षा की जिम्मेदारी नहीं ले सकती,  इसलिए ‘पद्मावत’ को 25 जनवरी को प्रदर्शित करने की इजाजत न दी जाए. गोवा राज्य की पुलिस ने भी गणतंत्र दिवस के साथ ही विदेशी सैलानियों का मौसम व उनकी सुरक्षा का हवाला देते हुए गोवा के मुख्यमंत्री से फिल्म ‘पद्मावत’ के प्रदर्शन पर बैन लगाने की मांग की है.

उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, गुजरात, हरियाणा व हिमाचल प्रदेश की सरकारें भी ‘पद्मावत’ के प्रदर्शन को लेकर उत्सुक नजर नही आ रही है. जिन राज्यों ने नवंबर माह में इस फिल्म पर बैन लगाने का ऐलान किया था, उन राज्य सरकारों ने अभी तक फिल्म पर से बैन हटाए जाने की कोई घोषणा नहीं की है.

यानी कि हालात ऐसे हैं कि 25 जनवरी को फिल्म‘‘पद्मावत’’के प्रदर्शित होने के आसार नजर नहीं आ रहे है.शायद यही वजह है कि ‘वायकाम 18’ और संजय लीला भंसाली ने अभी तक फिल्म के प्रदर्शन की तारीख को लेकर खुद कुछ नहीं कहा है.

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