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मशहूर चित्रकार की जिंदगी पर बायोपिक फिल्म बनाएंगे संजय छैल

बहुत कम लोगों को पता होगा कि मशहूर लेखक व निर्देशक सजय छैल बेहतरीन चित्रकार भी हैं. उनका यह नया रूप अब उस वक्त लोगों के सामने आया है, जब संजय छैल ने अपनी बनायी हुई पचास पेंटिंग्स की प्रदर्शनी मुंबई की जहांगीर आर्ट गैलरी में लगायी. पेंटिंग्स की यह प्रदर्शनी 29 मई से शुरू हुई है, जो कि 4 जून तक चलेगी.

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अपनी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी की शुरुआत के दिन संजय छैल ने घोषणा की कि वह एक मशहूर महिला चित्रकार की जिंदगी पर फिल्म बनाने वाले हैं. संजय छैल की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी के उद्घाटन के वक्त मशहूर गजल गायक पंकज उदास, उमेश शुक्ला, श्वेता खंडूरी, डी जे शेजवुड, बाबूभाई सोनी, धर्मेश मेहता, संतोष मजूमदार व प्रकाश कोठारी सहित कई हस्तियां मौजूद थी.

इस अवसर पर संजय छैल ने कहा- ‘‘मेरे पिता मशहूर कला निर्देशक थे. उनसे मुझे पेंटिंग्स बनाने की प्रेरणा मिली और मैं बचपन से ही पेंटिंग्स बनाता आ रहा हूं. मैंने अब तक सैकड़ों पेंटिंग्स बनायी है. पर पहली बार चुनिंदा पेटिंग्स की प्रदर्शनी लगायी है. मैं अपने बचपन के इस शौक पर फिल्म बनाने वाला हूं. इसके लिए मैंने हिंदुस्तान की मशहूर महिला चित्रकार से उनकी जिंदगी पर बायोपिक फिल्म बनाने के लिए अधिकार मांगे हैं, जैसे ही वह फिल्म बनाने के अधिकार मुझे देंगी, वैसे ही मैं फिल्म और इस महान चित्रकार के नाम की घोषणा करूंगा. यह बहुत बड़े स्तर की फिल्म होगी.’’

हम वर्ल्ड कप के प्रबल दावेदार नहीं : लियोनल मेसी

अर्जेटीना के स्टार फारवर्ड लियोनल मेसी भले ही फीपी वर्ल्डकप 2018 के सबसे पसंदीदा फुटबौलरों में से एक हों, लेकिन ऐसा लगता है कि वे अपनी टीम को जिता पाने के लिए आश्वस्त नहीं है. मेसी का मानना है कि उनकी रूस में 14 जून से शुरू होने वाले फीफा विश्व कप का खिताब जीने की प्रबल दावेदार नहीं है लेकिन उनके पास ऐसे खिलाड़ी हैं जो “किसी से भी लड़ सकते हैं.” मेसी ने मंगलवार रात हैट्रिक लगाते हुए एक दोस्ताना मैच में अर्जेटीना को हैती के खिलाफ 4-0 से जीत दिलाई.

टीवाईसी स्पोर्ट्स ने मेसी के हवाले से बताया, “मैं उन सभी प्रशंसकों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हमारा समर्थन किया. हम विश्व कप जीतने के प्रबल दोवेदार नहीं है लेकिन हमारी टीम अच्छी है और खिलाड़ी किसी का भी सामना करने के लिए तैयार हैं. खिलाड़ी लंबे समय समय से एकसाथ हैं और हम खिताब जीतना चाहते हैं.”

मेसी ने कहा, “हम पूरे उत्साह के साथ रूस जा रहे हैं. हम मैदान पर अपना 100 प्रतिशत देंगे. हम विश्व कप जीतने के सपने का पूरा करना चाहते हैं.” विश्व कप के लिए अर्जेटीना को ग्रुप डी में क्रोएशिया, आइसलैंड एवं नाइजीरिया के साथ रखा गया है.

मेसी इससे पहले कह चुके हैं कि उन्हें अपनी टीम पर भरोसा है और वह शांत तरीके स्वभाव से टूर्नामेंट में भाग लेगी. उन्होंने यह भी कहा कि वह खिताबी जीत की गारंटी नहीं ले सकते क्योंकि उनका मानना है कि केवल वे ही यहां सर्वश्रेष्ठ नहीं है बल्कि और भी टीमें टक्कर में हैं.

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मेसी ने एक टेलीविजन को दिए साक्षात्कार में कहा था, “हमें अपनी पूरी क्षमता और अनुभव के साथ खेलना होगा, लेकिन शांति के साथ. हम यह नहीं जता सकते कि हम सर्वश्रेष्ठ हैं और खिताब जीतेंगे क्योंकि वास्तव में ऐसा नहीं है.” कप्तान ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण यह है कि हम मैच दर मैच अपना ध्यान लगाएं और 16 जून को आइसलैंड के साथ होने वाले पहले मैच को जीतने पर ध्यान दें.

मेसी का कहना है, “विश्व कप में जीत के साथ आगाज करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि शांत रहने से आपको अन्य टीमों के साथ मुकाबला करने में आसानी होगी. यह ग्रुप आसान नहीं है.” उन्होंने कहा कि अर्जेटीना 21 जून को क्रोएशिया और 26 जून को नाइजीरिया के साथ होने वाले मैचों में भी शांत स्वभाव के साथ उतरेगा. कप्तान ने कहा, “इसे लेकर ईमानदार रहना है. यहां पर कई सारी टीमें हैं जो हमसे अच्छे हैं. इसे लेकर हमें वास्तविक रहना होगा.”

एक बयान से लगा कि वे स्पेन के लिए खेलना चाहते हैं

उल्लेखनीय है कि हाल ही में मेसी को कहना पड़ा था कि उन्होंने एक मिनट के लिए भी स्पेन की राष्ट्रीय फुटबाल टीम के लिए खेलने के बारे में नहीं सोचा. मेसी का कहना है कि अपने पड़ोसी देश की टीम के लिए खेलना एक अनूठा अनुभव होगा. एक रिपोर्ट के अनुसार, अर्जेटीना के चैनल ‘चैनल 13’ को दिए एक साक्षात्कार के दौरान मेसी ने कहा, “मैं अपने दोस्त से बात कर रहा था और उसने मुझसे कहा कि देखो अगर तुम स्पेन में रह रहे हो, तो तुम पहले से ही विश्व चैम्पियन हो.”

मेसी ने कहा कि जब वह 15 या 16 साल के थे, तब उन्हें स्पेन की अंडर-17 फुटबाल टीम ने टीम में जगह देना का प्रस्ताव दिया था.

एक किशोर खिलाड़ी के रूप में मेसी अपने गृहनगर रोसारियो से निकलकर बार्सिलोना क्लब में शामिल हुए. इस क्लब में उन्होंने कई जीत हासिल की. इस कारण से मेसी ने कहा कि वह आश्वस्त हैं कि अगर वह भविष्य में यूरोप में खेलना जारी रखेंगे, तो वह किसी अन्य टीम के साथ नहीं बल्कि उसी टीम के साथ रहेंगे, जिसके साथ उन्होंने अपना पूरा करियर बिताया है.

तो प्रियंका चोपड़ा कर रही हैं निक जोनास के संग डेटिंग

बौलीवुड में खबर गर्म है कि बौलीवुड अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा की जिंदगी में एक नया इंसान आ गया है. सूत्रों के अनुसार प्रियंका चोपड़ा और पच्चीस वर्षीय अंतरराष्ट्रीय पौप गायक व अभिनेता निक जोनास के बीच पिछले एक वर्ष से प्यार की खिचड़ी पक रही है. सूत्रों के अनुसार यह दोनों पहली बार उस वक्त सूर्खियों में आए थे, जब दोनों एक साथ हाथ में हाथ डाले एक समारोह में रेड कारपेट पर शिरकत करते हुए नजर आए थे. उसके बाद से कई बार यह दोनों एक साथ देखे जा चुके हैं.

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सूत्रों की माने तो प्रियंका चोपड़ा व निक जोनास हौलीवुड में ‘ब्यूटी एंड बीस्ट’ के लाइव कंर्सट में भी नजर आ चुके हैं. फिर 27 मई 2018 को डोजर्स बेसबाल गेम में एक साथ नजर आए. 28 मई को यह दोनों लौस एंजेल्स के एक रेस्टारेंट में कुछ अन्य दोस्तों के साथ डिनर करते हुए नजर आएं.

मजेदार बात यह है कि प्रियंका चोपड़ा व निक जोनास के एक साथ खुशी के मूड की तस्वीरें निक जानेास व प्रियंका चोपड़ा के अलावा उनके करीबी दोस्त भी लगातार इंस्टाग्राम सहित कई सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं. इससे बौलीवुड में चर्चा गर्म हुई है कि प्रियंका चोपड़ा व निक जोनास के बीच प्यार की खिचड़ी पक रही है. वैसे अभी तक इस मसले पर प्रियंका चोपड़ा या निक जोनास की तरफ से कुछ भी नहीं कहा गया है.

कहीं आपका पासवर्ड लीक तो नहीं हो गया, ऐसे लगाएं पता

हम सभी अपने फोन और लैपटौप के साथ इस्चेमाल की जाने वाली साइट्स व ईमेल आदि पर पासवर्ड डालकर रखते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि हम ये अच्छी तरह से जानते हैं कि हैकर्स से डेटा को सुरक्षित रखने के लिए एक मजबूत पासवर्ड रखना बेहद जरुरी है. हालांकि, आपको पता नहीं होगा कि जटिल लगने वाले पासवर्ड भी खतरनाक हो सकते हैं. किसी भी डेटा उल्लंघन में एक बार कब्जा कर लिया गया पासवर्ड साइबर क्राइम फोरम पर आनलाइन पोस्ट हो जाता है.

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इंटरनेट पर इस्तेमाल किए जा रहे पासवर्ड्स को हैकर्स एकत्रित करते रहते हैं और इनका उपयोग करके दूसरे आनलाइन अकाउंट्स को हैक करने की कोशिश करते हैं. इसलिए, भले ही आपका पासवर्ड लंबा और रेंडम हो, फिर भी इसका उपयोग न करें अगर इसे डेटा उल्लंघन में पकड़ा गया हो.

अगर आप यह सोच रहे हैं कि आपको कैसे पता चलेगा कि कौन सा पासवर्ड हैक किया गया है और कौन सा नहीं. तो चिंता न करें उस समस्या का समाधान भी है हमारे पास. Okta, एक लौगिन मैनेजमेंट कंपनी इस मुद्दे को हल करने के लिए एक ब्राउजर प्लग-इन लाई है. इसका नाम PassProtect है, प्लग-इन आपको सूचित करेगा कि आपके द्वारा उपयोग किए जाने वाले पासवर्ड को कितनी बार डेटा उल्लंघन के संपर्क में लाया गया है.

कंपनी का कहना है कि प्लग-इन “हैव आई बीन पनड” डेटाबेस से अपना डेटा लेता है, जो सभी हैक किए गए पासवर्ड को ट्रैक करता है. आप सीधे उस वेबसाइट पर जाकर भी अपने पासवर्ड को चेक कर सकते हैं. अभी, पासप्रोटेक्ट केवल क्रोम ब्राउजर पर काम करता है लेकिन कंपनी इसे फायरफौक्स में लाने पर भी काम कर रही है. इसके अलावा, प्लग-इन केवल पासवर्ड का विश्लेषण करता है, यूजर नेम का नहीं. भविष्य में कंपनी भी इस कार्यक्षमता को प्लग-इन में जोड़ना चाहती है.

आईटीआर फाइल करने के ये 5 फायदे नहीं जानते होंगे आप

चालू वित्त वर्ष में आयकर रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2018 है और इसमें देरी करने पर आपको जुर्माना भी देना पड़ सकता है. अगर आपकी सालाना आय 2 लाख 50,000 रुपये से ज्यादा तो आपको आयकर रिटर्न भरना चाहिए. आमतौर पर लोग रिटर्न दाखिल करने से बचते हैं, लेकिन जानकारी के लिए आपको बता दें कि आयकर रिटर्न दाखिल करने के पांच बड़े फायदे भी होते हैं. हम अपनी इस खबर में आपको इसी के बारे में जानकारी देने जा रहे हैं.

लोन मिलने में रहती है आसानी

अगर आप हर साल अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करते हैं तो आपको लोन लेने में आसानी हो सकती है. आईटीआर आपकी आमदनी का प्रूफ होता है और निजी क्षेत्र के अधिकांश बैंक इसे प्रूफ के तौर पर स्वीकार करते हैं. आमतौर पर बैंक लोन देने से पहले इसकी मांग करते हैं.

रिफंड पाने में होती है आसानी

अगर आप नौकरीपेशा हैं तो आपका नियोक्ता आपकी सैलरी से टीडीएस की कटौती करता है. हालांकि अगर आपने टैक्स बचाने के लिए कहीं निवेश कर रखा है तो यह आपकी टैक्सेबल इनकम को कम कर देता है. आपको इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के दौरान इसका उल्लेख करना होता है और आपकी सैलरी से काटी गई अतिरिक्त राशि आपको वापस (रिफंड) कर दी जाती है. यानी आईटीआर रिफंड पाने में भी सहूलियत प्रदान करता है.

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जुर्माने से बच जाते हैं आप

हालांकि टैक्स फाइल न करने की सूरत में आपको तत्काल नोटिस नहीं भेजा जाता है लेकिन अंतत: यह आपको भेजा ही जाता है. तय तारीख निकल जाने के बाद भी आप रिटर्न फाइल कर सकते हैं लेकिन तब आपको पेनल्टी देनी पड़ती है जो कि 5,000 से 10,000 के बीच हो सकती है. इसमें आपको आयकर की धारा 234A के अंतर्गत ब्याज भी देना पड़ सकता है.

वीजा के लिए भी होता है जरूरी

आईटीआर फाइलिंग सिर्फ बैंक लोन दिलाने में ही मददगार नहीं है बल्कि यह वीजा प्राप्त करने यानी उसकी प्रोसेसिंग के लिए भी अहम होता है. काफी सारे देशों की वीजा अथौरिटीज बीते 3 से 5 साल के आईटीआर की मांग करती हैं. आईटीआर के जरिए अथौरिटीज वीजा प्राप्त करने वाले के फाइनेंशियल स्टेटस को चेक करने की कोशिश करती हैं.

सरकार को प्रोडक्ट की बिक्री के लिए भी जरूरी

अगर आप कोई बड़े व्यापारी है और सरकारी महकमें में अपने प्रोडक्ट बेचना चाहते हैं तो भी आईटीआर आपके काम आ सकता है. आम तौर पर सरकारी विभाग उन्हीं कारोबारियों से प्रोडक्ट्स की खरीद करते हैं जिन्होंने कम से कम पिछले दो साल आईटीआर भरा होता है.

पांच स्मार्टफोन जो देते हैं जबरदस्त बैट्री बैकअप

किसी भी स्मार्टफोन का बैट्री बैक-अप एक ऐसा मुद्दा है, जो आज भी कंपनियों के लिए सिर दर्द बना हुआ है. स्मार्टफोन्स के बड़े ब्रांड लगातार फोन का बैट्री बैक-अप बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं, इसके लिए कंपनियां फोन्स के सौफ्टवेयर में बदलाव कर रही हैं. आमतौर पर एक बजट स्मार्टफोन का बैट्री बैक-अप 24-30 घंटे ही होता है और आपको हर दिन अपना फोन चार्ज करना होता है. यहां हम 15000 के बजट में मिलने वाले 5 ऐसे फोन्स के बारे में बता रहे हैं, जिनका बैट्री बैक-अप काफी अच्छा है.

Asus Zenfone 3S Max

यह फोन 10,999 रुपए में उपलब्ध है. 500mah की बैट्री वाले इस स्मार्टफोन में 34 दिन तक बैट्री स्टैंड बाइ का दावा किया जा रहा है. इस स्मार्टफोन में 5 बैट्री मोड्स भी दिए गए हैं ,जिनकी मदद से फोन की बैट्री को सही तरीके से इस्तेमाल करके उसकी लाइफ बढ़ायी जा सकती है.

Xiaomi Mi Max 2

जियोमी का यह मॉडल 12,999 रुपए का है. 5300mah बैट्री वाले इस फोन को लेकर कंपनी का दावा है कि यह फोन 1 घंटे में ही 68 प्रतिशत चार्ज हो सकता है. इस फोन का बैट्री बैक-अप 2 दिन का है. एंड्रायड 7.0 Nougat आपरेटिंग सिस्टम पर चलने वाले इस फोन में 6.44 इंच का एचडी डिस्पले लगा हुआ है.

Micromax Bharat 5 Plus

5.2 इंच डिस्पले वाले इस फोन की कीमत 7,999 रुपए है. 1.3GHz quad core MediaTek Processor का इस्तेमाल किया गया है. इस फोन की रैम 2 जीबी है और इंटरनल मेमोरी 16 जीबी है, जिसे 64 जीबी तक बढ़ाया जा सकता है. इस फोन में 5000mah बैट्री दी गई है. दावा है कि स्टैंड बाइ के दौरान यह फोन 21 दिन तक बैट्री बैक-अप दे सकता है. इस फोन के साथ 8 मेगापिक्सल रियर कैमरा और 5 मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा मिल रहा है.

Panasonic Eluga Ray 700

यह फोन 9,999 रुपए की शुरुआती कीमत में उपलब्ध है. 5.5 इंच डिस्पले के साथ यह फोन Nougat एंड्रायड आपरेटिंग सिस्टम, 1.3Ghz ओक्टा-कोर प्रोसेसर, 3 जीबी रैम और 32 जीबी स्टोरेज से लैस है. 5000mah की ब्रैट्री वाले इस स्मार्टफोन में 13 मेगापिक्सल रियर कैमरा और 13 मेगापिक्सल फ्रंट कैमरा उपलब्ध है.

Asus Zenofone Max Pro M1

इस फोन की कीमत 10,999 रुपए है. इस फोन में आपको 3 जीबी रैम और 4 जीबी रैम के वैरिएंट मिल रहे हैं. 3 जीबी रैम वाले फोन की कीमत 10,999 और 4 जीबी रैम वाले फोन की कीमत 12,999 रुपए रखी गई है. दोनों ही वैरिएंट 5000mah की बैट्री से लैस हैं. दावा किया जा रहा है कि यह फोन 4जी पर 34.1 घंटे और 1080 पिक्सल की वीडियो चलाने पर 25.3 घंटे का बैट्री बैक अप देता है.

पथरी निकालने वाले बाबा की खुली कलई

हमारे देश में आस्था के नाम पर अंधविश्वास का खेल सदियों से चला आ रहा है. कहीं सयानेभोपो झाड़फूंक से लोगों का इलाज करते हैं. कहीं तांत्रिक अपने टोटकों से लोगों की समस्याएं दूर करने का दावा करते हैं, तो कहीं ढोंगी बाबा अपने चमत्कार दिखाते हैं. कहीं फकीर का चोला पहन कर लोगों का दुख दूर किया जाता है. कोई बाबा दरबार सजाता है तो कोई मंदिर की आड़ में इस तरह के काम करता है. कोई मजार पर बैठ कर झाड़ा लगाता है.

यह सिलसिला आज से नहीं बल्कि लंबे समय से चला आ रहा है. कोई तथाकथित भूत उतारने का दावा करता है तो कोई लड़का पैदा होने की दवा देता है. कोई कैंसर की बीमारी का इलाज करने की बात करता है तो कोई वशीकरण मंत्र के नाम पर मुकदमा जीतने और खोया प्यार दिलाने की गारंटी देता है.

कई जगह तो महिलाएं भी ऐसे कथित चमत्कार दिखाती हैं कि अंधविश्वास में डूबे लोग उन की जयजय कार करते हैं. कई जगह तो इलाज के नाम पर पीडि़त पर अत्याचार भी किए जाते हैं. पीडि़त को लोहे की जंजीरों से पीटा जाता है.

विज्ञान के इस युग में ये कथित बाबा और भोपाभोपी आमजन के विश्वास से खिलवाड़ कर रहे हैं. शिकायत होने पर पुलिस और संबंधित विभागों के अधिकारी कभीकभार इन के खिलाफ काररवाई करते हैं. लेकिन ये काररवाई इतनी हल्की होती है कि ढोंगी बाबाओं पर कोई असर नहीं पड़ता.

कुछ दिन के बाद ये लोग फिर अपनी दुकान जमा लेते हैं. अपने ही लोगों के माध्यम से ये भक्तों का ऐसा मायाजाल बुनते हैं कि दुखी, पीडि़त लोग इन की चौखट पर माथा टेकने पहुंच जाते हैं और फिर शुरू कर देते हैं आस्था के नाम पर लोगों को ठगना.

अंधविश्वास की इस कमाई से आजकल दूर देहात के गांव और पहाड़ों में रहने वाले ये कथित बाबा भी हाईटेक हो गए हैं. उन के पास नएनए मौडल के मोबाइल फोन और लैपटाप के अलावा अपने वाहन तक हैं. राजस्थान में ढोंगी बाबाओं की बाढ़ सी आ गई है.

कई तो चमत्कारिक तरीके से लोगों का इलाज करने का दावा करते हैं. यहां पर हम ऐसे ही एक कथित बाबा के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी कथित शक्ति के बल पर किसी भी तरह की पथरी चुटकी में निकालने का दावा करता है.

राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है विश्व प्रसिद्ध सरिस्का बाघ अभयारण्य. इसी अभयारण्य के मुख्यालय के पास भर्तृहरि का समाधि स्थल है. भर्तृहरि मध्य प्रदेश की रियासत उज्जैन के राजा थे. वह न्यायप्रिय और जनसेवक थे. बाद में वह भोगविलास में उलझ गए. जब उन्हें अपनी गलती का पश्चाताप हुआ तो वह राजपाट छोड़ कर जंगलों में चले गए. बाद में उन्होंने सरिस्का के रमणीक जंगलों में समाधि ले ली. फिर वहीं पर उन का विशाल मंदिर बन गया.

भर्तृहरि बाबा के समाधिस्थल के पास इंदौक गांव है. इस गांव में ढोलमजीरे की आवाज के साथ बंदर की तरह कूदने वाला एक बाबा कथित चमत्कार दिखाता है. नारायण मीणा नाम का यह बाबा किडनी और पित्त की थैली की पथरी मुंह से उगलने के नाम पर पिछले करीब 8 सालों से लोगों को बेवकूफ बना रहा है.

अलवर शहर से करीब 32 किलोमीटर दूर इस गांव के एक छोटे से मंदिर पर बाबा हर बुधवार और शनिवार को दरबार लगाता है. बाबा ने आस्था के नाम पर भक्तों का ऐसा मायाजाल बना रखा है कि उस के दरबार में राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों  से लोग आते हैं.

इस कथित बाबा के गोरखधंधे में 8-10 लोग शामिल हैं. ये लोग मरीज की किडनी या पित्त की थैली की पथरी निकालने से पहले बाकायदा अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट ऐसे देखते हैं जैसे वह कोई डाक्टर हों. इस के कुछ देर बाद ही बाबा अपने मुंह से पथरी के नाम से पत्थर उगल देता है.

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मजे की बात तो यह है कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में जितनी पथरी बताई जाती हैं, बाबा उतने ही आकार की और उतने ही पत्थर अपने मुंह से उगल देता है.

निर्धारित दिन मरीज जब बाबा के दरबार में पहुंचते हैं तो सब से पहले बाबा के दरबार में अगरबत्ती और प्रसाद चढ़ाने के नाम पर उन से 120 रुपए लिए जाते हैं. यह प्रसाद बाबा के परिवारजन ही मंदिर के बाहर बेचते हैं. इस के बाद बाबा का बेटा प्रत्येक मरीज से नाम पूछता है और उन से 300-300 रुपए लेता है.

फिर सभी मरीजों की कतार लगवा ली जाती है. इस के बाद मजीरे बजते हैं. इन्हीं ढोलमजीरों की तेज आवाज के बीच बंदर की तरह उछलताकूदता हुआ नारायण मीणा नाम का बाबा मंदिर पर पहुंचता है. बाबा मंदिर में कई बार ऐसा दिखावा करता है जैसे कि उस के शरीर में किसी देवता का प्रवेश हो गया है. इस के बाद बाबा मंदिर के चबूतरे पर चुपचाप बैठ जाता है.

बाबा के पास बैठा उस का परिजन मरीज की अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देख कर उस से पथरी की संख्या पूछता है. कोई मरीज अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट नहीं लाता तो उस से मुंहजबानी पूछा जाता है कि पथरी कहां और कितनी हैं. इस के बाद रिपोर्ट देखने वाला वह व्यक्ति बाबा को अंगुलियों से इशारा करता है.

इस बीच वही व्यक्ति बालों की बनी रस्सी मरीज के शरीर पर उस जगह घुमाताफिराता है. जहां पथरी बताई गई है. फिर बाबा को एक आदमी पानी पिलाता है. इस के बाद बाबा वहां बैठे अपने परिजन के हाथ में थमी हुई थाली में अपने मुंह से छोटेछोटे पत्थर उगल देता है. इन पत्थरों की संख्या उतनी ही होती है, जितनी मरीज ने अपने शरीर में पथरी बताई थीं.

आमतौर पर इन पत्थरों की संख्या एक या 2 होती है. इन पत्थरों को बाबा का परिजन कागज की एक पुडि़या में बांध कर मरीज को दे देता है और कहता है कि ये लो पथरी निकल गई है.

पर हाल ही में एक स्टिंग औपरेशन में इस बाबा की करतूत सामने आ गई है. इस स्टिंग औपरेशन में अलवर जिले के राजगढ़ के थाना राजाजी निवासी बबली सैनी का जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया गया.

अल्ट्रासाउंड में बबली सैनी की दाईं किडनी में 3 और बाईं किडनी में एक पथरी बताई गई. बबली की यह अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देख कर मंदिर में कथित बाबा ने अपने मुंह से पत्थर के 3 टुकड़े उगल कर उसे थमा दिए. इस के बाद बबली सैनी का दोबारा अलवर के जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया तो उस की दोनों किडनियों में चारों पथरियां मौजूद मिलीं.

स्टिंग औपरेशन में इस कथित बाबा ने एक मीडियाकर्मी को भी अपने मुंह से एक पत्थर का टुकड़ा उगल कर दे दिया जबकि उस मीडियाकर्मी के कोई पथरी नहीं थी. बाबा की करतूत उजागर करने के लिए दरबार में पहुंचे मीडियाकर्मी से जब बाबा के परिजन ने अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट मांगी तो उस ने कहा कि रिपोर्ट घर पर रह गई है. लेकिन पेट में साढ़े 6 एमएम की पथरी है.

इस पर बाबा ने अपने मुंह से पथरी के नाम पर पत्थर का एक टुकड़ा उगल दिया. इन पत्थरों की जांच कराई गई तो ये नदियों में बजरी के साथ निकलने वाले कंकड़ पत्थर निकले. बाबा के इस कथित चमत्कार के पीछे का सच यह है कि उसी के परिवार के 8-10 लोग इस पूरे ढोंग को अंजाम देते हैं.

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखने के बाद मरीज से पथरी की संख्या पूछ कर बाबा का परिजन इशारे से बाबा को पथरी की संख्या बताता है इसी के साथ दूसरा आदमी उस मरीज के शरीर पर पथरी वाली जगह पर बालों को बनी एक रस्सी घुमाताफिराता है. इसी दौरान बाबा कथित चमत्कार दिखाते हुए अपने मुंह से पथरी के नाम पर उतने ही कंकड़पत्थर उगल देता है.

बाबा दरबार में पहुंचने से पहले अपने मुंह में छोटेछोटे कंकड़पत्थर दबा कर लाता है. इसीलिए पथरी निकालने के ढोंग के दौरान वह किसी से बात तक नहीं करता. जब उस के मुंह में पत्थर खत्म हो जाते हैं. तब वह चादर ओढ़ कर एक तरफ बैठ जाता है. उस चादर की आड में वह फिर से अपने मुंह में पत्थर भर लेता है.

पथरी निकालने का दावा करने के बाद बाबा के परिजन उस मरीज को भभूत की एक पुडि़या देते हैं. साथ ही यह भी कह देते हैं कि भर्तृहरि धाम जा कर वहां से एक और भभूत की पुडि़या ले कर पानी में मिला कर पीनी है. इस के बाद भगवान शंकर का जल और दूध से अभिषेक कर के और बंदरों को चने खिलाने हैं.

मछली को गुंथा हुआ आटा और गाय को ढाई किलो दलिया खिलाना है. कन्या को भोजन करा कर दक्षिणा देनी है. फिर चीटिंयों को मीठा आटा डालना है.

बाबा का यह कथित चमत्कार सप्ताह में 2 दिन और महीने में 8 दिन चलता है. हर बार मोटे तौर पर 250 से 300 मरीज वहां पहुंचते हैं. इस तरह बाबा का परिवार लोगों को बेवकूफ बनाकर हर महीने करीब 4 लाख रुपए तक ठग रहा है.

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि मानव शरीर में सामान्य तौर पर पथरी पित्त की थैली यानी गाल ब्लेडर और किडनी में बनती है. मैडिकल साइंस में पित्त की थैली की पथरी को आमतौर पर औपरेशन से निकाला जाता है. किडनी की पथरी एवं यूरिनरी सिस्टम, यूरेटर और ब्लेडर की पथरियों का इलाज उन के आकार और स्थान पर निर्भर करता है.

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कानूनी रूप से औषधि और जादुई उपचार अधिनियम 1954 आपित्तजनक विज्ञापन तथा औषधि प्रसाधन अधिनियम 1940 के अंतर्गत जादूटोना, चमत्कार आदि से इलाज करना प्रतिबंधित है. ऐसे मामलों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग सीधे तौर पर काररवाई कर सकता है.

पहली बार पकड़े जाने पर 6 महीने तक और दूसरी बार पकडे़ जाने पर एक साल तक की सजा का प्रावधान है. इस अधिनियम में पथरी, अंधता, कैंसर, मिर्गी, डायबिटीज, बहरापन, मोतियाबिंद सहित 54 बीमारियों को शामिल किया गया है. इतना सब कुछ होने के बावजूद कथित चमत्कारी बाबा आस्था के नाम पर लोगों को ठग कर खूब फलफूल रहा है.

दुश्मन से भी बुरे दोस्त : आस्तीन के सांप बन गए दोस्त

अमृतसर के जीटी रोड से सटे व्यस्तम इलाके दशमेश एवेन्यू की कोठी नंबर 157 से 4-5  फरवरी की आधी रात के बाद अचानक धुआं उठने लगा. वह कोठी गगनदीप वर्मा की थी. फरवरी का महीना होने के कारण अधिक ठंड भी नहीं थी फिर भी लोग अपनेअपने घरों में घुसे हुए थे.

कोई राहगीर सड़क से गुजरा भी तो उस ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया. कुछ ही देर में कोठी से आग की ऊंची लपटें उठने लगीं, जिन्होंने कोठी को चारों तरफ से घेर लिया था.

आग बढ़ने पर मोहल्ले के तमाम लोग अपने घरों से निकल कर गगनदीप वर्मा की कोठी की तरफ दौड़ पड़े. सभी अपनेअपने तरीके से कोठी में लगी आग को बुझाने की कोशिश करने लगे. इस बीच किसी ने फायर ब्रिग्रेड और थाना सुलतानविंड पुलिस को सूचना दे दी थी.

घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगे्रड के साथ थाना सुलतानविंड के थानाप्रभारी नीरज कुमार, एसआई राजवंत कौर, एएसआई अर्जुन सिंह, दर्शन कुमार, हवलदार लखविंदर कुमार, गुरनाम सिंह, बलविंदर सिंह, गुरमेज सिंह, हरजिंदर सिंह, कांस्टेबल सुनीता के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए.

आग की लपटें लगातार बढ़ती जा रही थीं. सुरक्षा के लिहाज से थानाप्रभारी ने आसपास के घरों को भी खाली करवा लिया था. फायर ब्रिग्रेड के कर्मचारी लगातार आग बुझाने की कोशिश में लगे रहे, तब कहीं सुबह साढ़े 6 बजे तक आग पर काबू पाया गया.

आग बुझने के बाद पड़ोसी पुलिस के साथ जब कोठी के भीतर गए तो सब के पैरों तले से जमीन खिसक गई. भीतर का नजारा डरावना और दिल दहला देने वाला था. कोठी में मालकिन गगनदीप वर्मा और उन की बेटी शिवनैनी की झुलसी हुई लाशें पड़ी थीं.

थानाप्रभारी ने यह जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी. जिस के बाद अमृतसर के सीपी एस.एस. श्रीवास्तव, एडीसीपी जे.एस. वालिया, एडीसीपी हरजीत सिंह धारीवाल और एसीपी मंजीत सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए. थानाप्रभारी ने क्राइम इन्वैस्टीगेशन टीम को भी मौके पर बुलवा लिया.

पुलिस जांच कर रही थी तभी वहां एक 48 वर्षीय संजीव वर्मा नाम का शख्स आया. वह खुद को गगनदीप वर्मा का भाई बता रहा था. उस ने बताया कि वह 2 भाईबहन थे. उस के पिता रामदेव और मां जीवन रानी की मृत्यु हो चुकी है. वह अपनी पत्नी गीता और बेटे चंदन के साथ जंडियाला गुरु स्थित मकान नंबर 1334 में रहता है. पेशे से वह डाक्टर है और घर के पास ही उस का क्लीनिक है.

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पड़ोसियों से पूछताछ करने पर पता चला कि दोनों मांबेटी किसी से कोई संबंध नहीं रखती थीं. यहां तक कि पड़ोसियों के घर भी उन का कम आनाजाना था. शिवनैनी का शव जिस आपत्तिजनक हालत में मिला उस से रेप की  आशंका जताई जा रही थी.

वरिष्ठ पुलिस अधिकारी थानाप्रभारी को दिशा निर्देश दे कर चले गए. इसके बाद थानाप्रभारी नीरज कुमार ने जरूरी काररवाई कर के दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए सरकारी अस्पताल भेज दिया.

पुलिस कमिश्नर ने थानाप्रभारी नीरज कुमार के साथ क्राइम ब्रांच के जिला इंचार्ज इंसपेक्टर वविंदर महाराज को भी लगा दिया था. वे सब पुलिस अधिकारी इस दोहरे हत्याकांड की जड़ें खोदने में जुट गए.

हत्या की वजह अभी तक सामने नहीं आई थी. लेकिन यह अनुमान लगाया गया कि हत्या में किसी करीबी का हाथ रहा होगा. गगनदीप वर्मा का बेटा रिधम कनाडा में रह रहा था. उसे भी मां और बहन की हत्या की सूचना दे दी गई. ताकि वह जल्द से जल्द इंडिया आ कर अपनी मां बहन की लाशें देख सके. थानाप्रभारी को इस बात की भी उम्मीद थी कि रिधम के आने के बाद शायद कोई ऐसी बात पता चल सके जिस से हत्यारों तक पहुंचने में मदद मिले.

बहरहाल पुलिस को इसी बात की आशंका थी कि वारदात में ऐसे शख्स का हाथ रहा होगा जिस का उस कोठी में आनाजाना रहा हो. यानी कोई नजदीकी व्यक्ति ही वारदात में शामिल रहा होगा.

पुलिस ने मृतका गगनदीप के भाई डा. संजीव वर्मा से एक बार फिर पूछताछ की. उस ने बताया कि 25 साल पहले उस के मांबाप ने अपने जीतेजी गगनदीप वर्मा की शादी नवजोत सिंह के साथ कर दी थी. शादी के बाद एक बेटा रिधम और बेटी शिवनैनी पैदा हुई. दोनों बच्चों की अच्छी परवरिश होने लगी.

इस के बाद नवजोत सिंह स्टडी करने कनाडा चला गया. इस के बाद वह वापस नहीं लौटा. मजबूरी में गगनदीप ने जंडियाला के सरकारी सीनियर सैकेंडरी स्कूल में क्लर्क की नौकरी कर ली. इसी से उन्होंने दोनों बच्चों को पढ़ाया लिखाया. गगनदीप ने बेटे रिधम को भी अपने एक रिश्तेदार के माध्यम से कनाडा भेज दिया.

घर पर केवल मांबेटी ही रह गए थे. ग्रैजुएशन के बाद शिवनैनी इन दिनों बीएड की तैयारी कर रही थी. जिस कोठी में यह दोनों रह रही थीं, वह उन्होंने 4 साल पहले ही बनवाई थी. कोठी क्या यह एक प्रकार का किला था. चारों तरफ से बंद, जहां उन की मरजी के बिना कोई परिंदा भी पर न मार सके. जब उन की कोठी इतनी सुरक्षित थी तो ऐसा कौन आ गया, जिस ने दोनों की हत्या कर दी, पुलिस यह बात नहीं समझ पा रही थी.

पुलिस की जांच की सुई गगनदीप के रिश्तेदारों और पहचान वालों पर आ कर अटक गई. पुलिस ने मृतका गगनदीप और उन की बेटी के मोबाइल नंबरों की काल डिटेल्स खंगालनी शुरू कीं. साथ ही यह भी जांच की कि घटना वाली रात को दशमेश एवेन्यू एरिया में स्थित फोन टावर के संपर्क में कितने फोन नंबर आए थे.

उन फोन नंबरों की भी पुलिस ने जांच शुरू कर दी. अगले दिन दोनों लाशों का पोस्टमार्टम कराया गया. पोस्टमार्टम के समय पुलिस ने वीडियोग्राफी भी करवाई. कनाडा से मृतका का बेटा भी पंजाब नहीं लौट सका. उस की गैरमौजूदगी में दोनों लाशों का अंतिम संस्कार किया गया.

साइबर क्राइम सेल फोन नंबरों की जांच में जुटी हुई थी. साइबर सैल ने शिवनैनी की फेसबुक आईडी को भी अच्छी तरह खंगालना शुरू किया. पुलिस ने शक के आधार पर एक दरजन से ज्यादा हिस्ट्रीशीटरों व अन्य लोगों को भी पूछताछ के लिए उठाया. लेकिन उन से कोई सफलता नहीं मिली.

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पुलिस टीम हत्या के इस मामले को कहीं नहीं न कहीं अवैध सबंधों से जोड़ कर भी देख रही थी. रिधम ने फोन पर हुई बात में इस हत्याकांड के पीछे अपने किसी रिश्तेदार का हाथ होने की शंका जताई.

पुलिस ने जब तफ्तीश की तो इस मामले में शहर के 2 बडे़ नेताओं के नाम सामने आए. यह नाम मांबेटी के फोन नंबरों की काल डिटेल्स खंगालने के बाद सामने आए थे.

इस दोहरे हत्याकांड के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली रहे. उधर रिधम भी कनाडा से नहीं लौट पाया था. गगनदीप और एक पार्षद के बीच फोन पर जो बातचीत होने के सबूत मिले थे, उस ने उन दोनों के संबंधों को भी शक के दायरे में ला कर खड़ा कर दिया था.

थानाप्रभारी नीरज और इंसपेक्टर वविंदर महाराज पूरे मामले की कड़ी से कड़ी जोड़ कर विचारविमर्श कर रहे थे कि अचानक थानाप्रभारी का ध्यान रिधम के खास दोस्तों 21 वर्षीय पंकज शर्मा और 18 वर्षीय नीरज निवासी गुरु गोविंदसिंह नगर की ओर गया.

हालांकि यह एक संभावना थी. इस का कोई ठोस सबूत या वजह नहीं थी, फिर भी वह पंकज शर्मा और नीरज से पूछताछ के लिए उन के घर पहुंच गए. वहां पता चला कि पंकज और नीरज दोनों ही गरीब परिवारों से हैं. पंकज के पिता सोफा मरम्मत का काम करते हैं जबकि नीरज ओपन स्कूल से पढ़ाई करता है. दोनों ही दोस्त आवारा किस्म के थे. मौजमस्ती और अपने खर्चे के लिए वह छोटीमोटी चोरी और ठगी भी करते थे.

पुलिस टीम जब पंकज के घर पहुंची तो पंकज के पिता ने बताया कि पंकज और नीरज 5 फरवरी की रात से गायब हैं. इस के बाद उन दोनों पर पुलिस का शक बढ़ गया. पुलिस उन की तलाश में जुट गई.

एक मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया. थाने ला कर जब उन से गगनदीप और उन की बेटी की हत्या के संबंध में पूछताछ की गई तो उन्होंने आसानी से स्वीकार कर लिया कि उन्होंने ही गगनदीप और उन की बेटी की हत्या कर के कोठी में आग लगाई थी. उन्होंने उन की हत्या की जो कहानी बताई वह आस्तीन का सांप बन कर डंसने वाली निकली.

दरअसल पंकज और नीरज की गगनदीप के बेटे रिधम से अच्छी दोस्ती थी. दोस्ती के नाते उन का गगनदीप के यहां आनाजाना था. कुछ दिनों पहले रिधम कनाडा चला गया तो पंकज और नीरज का उन के यहां आनाजाना  बंद हो गया. ये दोनों दोस्त कोई कामधंधा करने के बजाए दिन भर नशा कर के खाली घूमते थे. साथ ही उन्हें अय्याशी का भी शौक लग गया था.

अपने शौक पूरे करने के लिए उन्हें पैसों की जरूरत पड़ती थी, लिहाजा उन्होंने छोटीमोटी चोरियां करनी शुरू कर दीं. साथ ही कोई लालच दे कर लोगों को ठग लेते. लेकिन अभी तक दोनों कभी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़़े थे.

दोनों कोई ऐसा काम करने की सोच रहे थे जिस से उन के हाथ मोटा पैसा लग सके और रोजरोज की छोटीमोटी चोरी न करनी पड़े. 4 फरवरी, 2018 को दोनों इसी विषय पर चर्चा कर रहे थे, तभी पंकज बोला, ‘‘यार मेरे पास एक बिना रिस्क का आसान तरीका है. इस में इतना पैसा मिलेगा कि हम रात दिन ऐश कर सकते हैं और मजे की बात यह है कि हम पर किसी को रत्ती भर भी शक भी नहीं होगा.’’ पंकज ने बताया.

नीरज ने खुश होते हुए कहा, ‘‘जल्दी भौंक, देर क्यों कर रहा है. और यह भी कि करना क्या है?’’

‘‘रिधम के घर डकैती.’’ पंकज बोला.

‘‘अबे तेरा दिमाग तो खराब नहीं है.  जानता नहीं वह हमारा बचपन का दोस्त है. हम साथ खेले और साथ खातेपीते रहे हैं. नहीं, यह गलत काम है.’’ नीरज ने साफ मना कर दिया.

‘‘अबे गधे उन के पास करोड़ों रुपया है और फिर रिधम भी आजकल कनाडा में है. हम पर कौन शक करेगा?’’ पंकज ने समझाया.

बाद में पंकज की बात उस की समझ में आ गई. पंकज व नीरज को पता था कि इस समय दोनों मांबेटी घर में अकेली रहती हैं. इसलिए वहां काम को अंजाम देना आसान हो जाएगा.

योजना के अनुसार पंकज शर्मा व नीरज कुमार ने बाजार से क्लोरोफार्म की शीशी खरीद ली और 4-5 फरवरी की रात सवा 8 बजे गगनदीप वर्मा के घर चले गए. गगनदीप दोनों को अच्छी तरह जानती ही थीं. इसलिए उन्होंने दरवाजा खोल दिया. दोनों हत्यारोपी अंदर जा कर बैठ गए.

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चाय पीने के बाद पंकज शर्मा ने गगनदीप को क्लोरोफार्म सुंघाई, जिस से वह बेहोश हो कर बिस्तर पर गिर गईं. इस के बाद दोनों ऊपर की मंजिल पर बैठी शिवनैनी के कमरे में दाखिल हुए और उसे भी क्लोरोफार्म सुंघा कर बेहोश कर दिया. दोनों आरोपियों ने घर की तलाशी ली और कुछ ज्वैलरी के साथसाथ नकदी भी चुरा ली. नीयत खराब होने पर दोनों ने बेहोशी की हालत में पड़ी शिवनैनी से अश्लील हरकतें भी कीं.

गगनदीप और उन की बेटी के होश में आने पर उन का भेद खुलना लाजिमी था. इसलिए उन्होंने सुबूत मिटाने के लिए गगनदीप व उन की बेटी शिवनैनी की हत्या करने की योजना बनाई. उन्होंने कोठी में आग लगा दी और मौके से फरार हो गए.

पुलिस ने पंकज और नीरज से विस्तार से पूछताछ के बाद उन्हें अदालत पर पेश कर के 5 दिनों के पुलिस रिमांड पर ले लिया. रिमांड के दौरान दोनों अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने 85 ग्राम सोने, चांदी की ज्वैलरी, एक टेबलेट, कैमरा, लैपटौप व अन्य कीमती सामान बरामद कर लिया.

पुलिस ने रिमांड अवधि समाप्त होने पर अभियुक्त पंकज और नीरज को पुन: अदालत में पेश किया गया, जहां से दोनों को जिला जेल भेज दिया गया.

– कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

तड़का दाल हांडी

 

सामग्री

– 1/4 कप टाटा सम्पन्न अरहर दाल – 1/2 छोटा चम्मच टाटा सम्पन्न हलदी पाउडर – 1 टमाटर कटा हुआ – नमक स्वादानुसार.

सामग्री तड़के के लिए

– 2-3 बड़े चम्मच घी

– 1 छोटा चम्मच टाटा सम्पन्न दाल तड़का मसाला

– 2-3 सूखी लालमिर्चें

– 1 छोटा चम्मच लहसुन पेस्ट

– 1 हरीमिर्च कटी

– 1 छोटा चम्मच अदरक लंबे पतले टुकड़ों में कटा

– 2 बड़े चम्मच धनियापत्ती कटी.

विधि

दाल को अच्छी तरह धो कर मोटी पेंदी वाले गहरे बरतन में डालें. फिर उस में 5 कप पानी, हलदी और नमक डालें. ढक कर मध्यम आंच पर पकाएं. फिर दाल को चम्मच से मैश कर इस में टमाटर डाल कर 1-2 मिनट और उबालें.

विधि तड़के के लिए

घी को गरम कर उस में लहसुन पेस्ट और सूखी लालमिर्च मिला कर तब तक पकाएं जब तक लहसुन का रंग न बदल जाए. फिर आंच को धीमा कर दें. फिर टाटा सम्पन्न दाल तड़का मसाला, हरीमिर्च, अदरक और धनियापत्ती मिलाएं. फिर इस मिश्रण को आंच से उतार कर यह तड़का गरम दाल में डालें और तुरंत ढक्कन से बंद कर दें ताकि दाल में महक समा जाए. फिर गरमगरम परोसें.

स्वाद मसालेदार : मसाला सोया हांड़ी

मसाला सोया हांड़ी

सामग्री

– 2 कप सोया चंक्स भिगोया

– 1 कप ब्रैडक्रंब्स

– 1/2 इंच टुकड़ा अदरक कटा

– 1 छोटा चम्मच लहसुन कटा

– 1 छोटा चम्मच टाटा सम्पन्न लालमिर्च पाउडर

– 1 चुटकी चाटमसाला

– 1 छोटा चम्मच हरीमिर्च पेस्ट

– 1 बड़ा चम्मच कौर्नफ्लोर

– पर्याप्त तेल – 2 छोटे चम्मच टाटा सम्पन्न गरम मसाला

– 1 छोटा चम्मच टाटा सम्पन्न धनिया पाउडर

– 1 छोटा चम्मच जीरा पाउडर

– 11/2 बड़े चम्मच ब्राउन शुगर

– 2 बड़े चम्मच इमली का पेस्ट

– नमक स्वादानुसार

विधि

सोया चंक्स को छोटे टुकड़ों में काट लें. फिर इन में ब्रैडक्रंब्स, अदरक, लहसुन, आधा लालमिर्च पाउडर, चाटमसाला, हरीमिर्च पेस्ट, नमक और 2 बड़े चम्मच पानी मिला कर मिक्सर में पेस्ट बनाएं. इसे एक बरतन में डाल कर कौर्नफ्लोर मिलाएं. फिर इस मिश्रण को बराबर भागों में बांट कर ओवल शेप दें और एक आइसक्रीम स्टिक से बांध दें. फिर पैन में तेल गरम कर चारों तरफ से सुनहरा होने तक पकाएं. फिर पेपर पर सुखाएं. फिर उसी पैन में टाटा सम्पन्न गरम मसाला मिलाएं. बचा लालमिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, जीरा पाउडर, ब्राउन शुगर व इमली का पेस्ट मिला कर 2-3 मिनट पकाएं. फिर 1 कप पानी व नमक मिलाएं और मसाला गाढ़ा होने तक पकाएं. सोयाचाप को आइसक्रीम स्टिक से निकाल कर टुकड़ों में काट कर ग्रेवी में डाल कर थोड़ी देर पकाएं. सर्विंग प्लेट में डाल कर गरमगरम सर्व करें.

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