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सामंती सोच की शिकार वसुंधरा राजे सरकार

सामंती सोच की शिकार वसुंधरा राजे सरकार पानी नाक तक आने के बाद ही जागती है. हालात को समय रहते नहीं भांपने का खमियाजा आज राजस्थान के आमजन को भुगतना पड़ रहा है. थोड़ा सा पीछे चलते हैं. समूचे प्रदेश में तकरीबन 3 महीने चली डाक्टरों की हड़ताल आखिरकार खत्म हो गई. सरकार की ओर से सभी मांगें माने जाने के बाद वे काम पर लौट आए. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब सरकार को डाक्टरों की मांगें माननी ही थीं तो 3 महीने तक प्रदेश के मैडिकल इंतजाम को किस के भरोसे छोड़ा गया?

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब वसुंधरा सरकार की सुस्ती की वजह से बेवजह आंदोलन लंबा खिंचा हो. बीते एक साल का यह तीसरा बड़ा आंदोलन था, जिस ने सरकार की सुस्ती की वजह से तूल पकड़ा और आखिर में वह उस के लिए सिरदर्द बन गया. बेवजह की हठ राज्य के सरकारी अस्पतालों में काम कर रहे डाक्टरों का संगठन अपनी 33 मांगों को ले कर 3 महीने तक काम छोड़ कर बैठा था. इस बीच सरकार

ने 4 नवंबर, 2017 को संगठन के पदाधिकारियों को बातचीत के लिए बुलाया. इस बैठक में चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ और चिकित्सा सचिव की मौजूदगी में चिकित्सा महकमे के अतिरिक्त निदेशक के डाक्टरों के खिलाफ टिप्पणी करने से माहौल बिगड़ गया. संगठन के पदाधिकारी न सिर्फ बैठक बीच में ही छोड़ कर आ गए, बल्कि प्रदेश के सभी डाक्टरों ने अपने इस्तीफे भी सरकार को भेज दिए.

अगले दिन चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने डाक्टरों को बातचीत के लिए तो बुलाया लेकिन संगठन के पदाधिकारियों के बजाय अपने चहेते डाक्टरों को न्योता दिया. इस बैठक के बाद सराफ ने बयान दिया कि सरकार ने डाक्टरों की सभी मांगें मान ली हैं, लेकिन उन के संगठन के पदाधिकारी समझौते पर दस्तखत करने नहीं आ रहे.

दरअसल, डाक्टरों के संगठन के पदाधिकारियों को यह डर हो गया कि सरकार समझौता करने के बजाय ‘फूट डालो और राज करो’ की चाल पर काम कर रही है. इस में उलझने के बजाय वे 6 नवंबर, 2017 से हड़ताल पर चले गए. इस से समूचे प्रदेश की मैडिकल व्यवस्था चरमरा गई. इस दौरान सरकार पूरी तरह से भरम में नजर आई. कभी डाक्टरों को बातचीत के लिए बुलाया गया तो कभी उन्हें राजस्थान आवश्यक सेवा कानून यानी रेसमा का डर दिखाया गया.

इस बीच सरकार ने प्रदेश के लड़खड़ाते मैडिकल इंतजाम को सुधारने के लिए कोई दूसरे फौरी इंतजाम भी नहीं किए. सरकार ने हड़ताल कर रहे डाक्टरों के खिलाफ सख्ती अपनाई. दर्जनभर डाक्टरों को आवश्यक सेवा कानून के तहत गिरफ्तार किया. कुछ डाक्टरों पर दबाव बना कर उन्हें अस्पतालों में भी भेजा, लेकिन इस से हालात नहीं सुधरे. समय पर इलाज न मिलने से 125 लोगों की मौतें हो गईं और हजारों मरीज दरदर भटकते रहे.

सरकार पर इतना दबाव आ गया कि आखिरकार उसे झुकना पड़ा. चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने डाक्टरों के संगठन के पदाधिकारियों को बातचीत के लिए न सिर्फ बुलाया, बल्कि उन्हें रेसमा के तहत गिरफ्तार नहीं करने का आश्वासन भी दिया. तब समझौता हो गया.

इसी तरह सीकर में हुए किसान आंदोलन और गैंगस्टर आनंदपाल सिंह के ऐनकाउंटर की सीबीआई जांच की मांग को ले कर हुए आंदोलन से भी सरकार समय रहते नहीं निबट पाई. इन तीनों आंदोलनों की गंभीरता को न तो सरकार का खुफिया तंत्र भांप पाया और न ही इन को खत्म करने के लिए सरकार समय रहते कारगर नीति बना पाई. इस का अंजाम यह हुआ कि ये आंदोलन बड़े पैमाने पर फैल गए और इन से आम जनजीवन पर भी असर पड़ा. आखिरकार सरकार को आंदोलनकारियों की मांगों के सामने झुकते हुए समझौता करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

सितंबर, 2017 में सीकर में हुए किसान आंदोलन के समय भी सरकार का लचर रवैया सामने आया था. अखिल भारतीय किसान सभा के बैनर तले कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने सरीखी मांगों को ले कर शुरू हुआ यह आंदोलन 13 दिन तक चला, लेकिन इस की तैयारी 6 महीने से चल रही थी.

आंदोलन की शुरुआत में किसानों ने सीकर में महापड़ाव डाला तो भी सरकार के कानों पर जूं नहीं रेंगी. सरकार ने इस आंदोलन को इस कदर नजरअंदाज किया कि कई दिनों तक आंदोलनकारियों से बातचीत करना भी जरूरी नहीं समझा. सरकार से किसानों का ही नहीं, सीकर के कारोबार व दूसरे संगठनों का गुस्सा बढ़ गया. इस का नतीजा यह हुआ कि आंदोलन पूरे जिले में फैल गया. सड़क, बाजार, मंडी… सब बंद हो गए. बाकी जिलों में भी यह आंदोलन पैर पसारने लगा. विपक्ष के नेता भी आंदोलन के समर्थन में उतर आए.

इतना सब होने के बाद सरकार को आंदोलनकारी किसानों से बातचीत की सूझी. आखिरकार समझौता हुआ और आंदोलन खत्म हुआ.

ऐनकाउंटर से बवाल आनंदपाल सिंह के ऐनकाउंटर की सीबीआई जांच के लिए हुए आंदोलन से निबटने में भी सरकार की लेटलतीफी सामने आई थी. इस कुख्यात गैंगस्टर का ऐनकाउंटर 24 जून, 2017 को हुआ था.

आनंदपाल के परिवार वालों और राजपूत समाज के नेताओं ने ऐनकाउंटर को फर्जी बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की. परिवार वालों ने सीबीआई जांच के आदेश नहीं होने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की जिद पकड़ ली. इस के बावजूद सरकार टस से मस नहीं हुई. गृह मंत्री गुलाब चंद कटारिया ने तो यहां तक कह दिया कि पुलिस ने बहादुरी से मुकाबला करते हुए अपराधी का ऐनकाउंटर किया है.

उन का कहना था, ‘‘अगर हम इस की सीबीआई जांच कराते हैं तो उन के मनोबल पर असर पड़ेगा और पुलिस काम नहीं करेगी. अगर लोग ऐनकाउंटर की सीबीआई जांच कराना चाहते हैं तो कोर्ट का दरवाजा खुला है. वे कोर्ट जाएं.’’ सरकार के इस रुख से राजपूतों का गुस्सा बढ़ता गया. 12 जुलाई, 2017 को आनंदपाल के गांव सांवराद में एक सभा हुई. सभा खत्म होने के बाद भीड़ हिंसक हो गई. इस में एक आदमी की मौत हुई और कई पुलिस वाले घायल हो गए. सरकार ने सख्ती दिखाते हुए इलाके में कर्फ्यू लगा दिया.

इस बीच मानवाधिकार आयोग ने अंतिम संस्कार के आदेश दे दिए. पुलिस ने अंतिम संस्कार भी करा दिया, लेकिन राजपूतों का गुस्सा शांत नहीं हुआ. बवाल थमता न देख कर सरकार ने 17 जुलाई, 2017 को सीबीआई जांच की मांग मान ली. अगर सरकार शुरू में ही इस मांग को मान लेती तो इतना बवाल नहीं होता. काले कानून से फजीहत

सरकारी मुलाजिमों को बचाने वाले बिल सीआरपीसी संशोधन विधेयक, 2017 को ले कर भी वसुंधरा राजे सरकार को मुंह की खानी पड़ी. विधानसभा के अंदर और बाहर भारी विरोध के बावजूद राजस्थान सरकार ने इस बिल को विधानसभा में पेश किया था. गौरतलब है कि राजस्थान सरकार के इस विवादित अध्यादेश को कांग्रेस ने काला कानून बताते हुए जोरदार विरोध किया था. इस बिल के खिलाफ कांग्रेस ने जहां सदन से वाकआउट किया, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट की अगुआई में विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया गया.

प्रशासन ने कांग्रेस के विरोध मार्च की इजाजत नहीं दी तो कांग्रेस ने गिरफ्तारियां दीं. सचिन पायलट ने इसे काला कानून बताते हुए कहा कि जब तक यह बिल वापस नहीं होगा तब तक हम चैन से नहीं बैठेंगे. इस बिल को राजस्थान हाईकोर्ट में चुनौती दी गई. एडवोकेट एके जैन ने याचिका दायर कर दंड विधि राजस्थान संशोधन अध्यादेश, 2017 में अनुच्छेद 14, 19 और 21 का उल्लंघन बताते हुए इस की वैधता को चुनौती दी.

नीति और नीयत में खोट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने राज्य की भाजपा सरकार पर चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि इस के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए. सरकार हर मोरचे पर नाकाम रही है.

प्रदेश में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था के चलते बलात्कार, हत्या, अपहरण और दलितों पर जोरजुल्म करने के मामले भी बढ़ रहे हैं. सचिन पायलट ने कहा कि दलितों के शोषण के मामले में देश में राजस्थान पहले नंबर पर आ गया है जबकि महिला शोषण और बलात्कार में तीसरे नंबर पर आ गया है. इसी तरह हत्या व अपहरण के मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है.

राज्य में कई कर्मचारी संगठन अपनी मांगों को ले कर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार को उन की समस्याओं के प्रति कोई दिलचस्पी नहीं है. यही वजह है कि सरकार संगठनों के साथ किसी तरह की बातचीत भी नहीं कर रही है.

युवाओं का सपना घर हो अपना

दिल्ली के आसपास के कई बिल्डरों के, ग्राहकों का पैसा ले कर, बैठ जाने से युवाओं का अपने घर का सपना चकनाचूर हो गया है. जेपी, यूनीटैक आम्रपाली, सुपरटैक, वैब जैसी कई बिल्डर कंपनियों ने उन युवाओं को उकसाया जो 60-70 लाख रुपए लगा कर अपना मकान पाने को उत्सुक थे. युवाओं को लगा कि अपनी बचत, अच्छे वेतन व बैंक लोन के जरिए वे मकान खरीद सकेंगे और 3-4 साल में ऐसे फ्लैट के मालिक बन जाएंगे जहां पास में स्विमिंग पूल होगा, क्लब होगा, टैनिस कोर्ट होगा और थोड़ी दूरी पर ही मल्टीप्लैक्स वाला मौल होगा. नोएडा, गुड़गांव में खासतौर पर कितने ही प्रोजैक्ट खटाई में पड़े हुए हैं, क्योंकि एक तो सरकारों ने बिल्डरों को समय पर अनुमति नहीं दी, दूसरे, बिल्डरों ने न केवल कानून तोड़ कर ज्यादा पैसा बनाया बल्कि उन्होंने ग्राहकों से वसूला पैसा मकान बनाने की जगह दूसरे प्रोजैक्ट्स में लगा दिया. अकेले जेपी ग्रुप की वजह से 20 हजार खरीदार अपनी जमापूंजी खो चुके हैं.

मामला सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा हुआ है पर कोर्ट कछुए की चाल चल रही है जबकि कल के युवा अब प्रौढ़ होेने लगे हैं और उन का छोटा बैंकलोन, महाकर्ज बन गया है. बैंकों ने इन बिल्डरों को जो कर्ज दिया था वह अलग डूब रहा है और लगभग 30 हजार से 50 हजार करोड़ रुपए खंडहरों में बदल रहे हैं. यह है हमारे देश की हालत जहां गरीबों को तो छोडि़ए, थोड़े खातेपीतों को भी चूसने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाती. देश का हाल यह है कि आज कोई भी वर्ग संतुष्ट नहीं है. पिछले सालों में दिखाए गए अच्छे दिनों के सपने वैसे ही टूट रहे हैं जैसे इन हजारों युवाओं के अपने घरों के सपने टूट गए हैं.

कोई सिनेमा छोटा नहीं : पायल रोहतगी

हिंदी फिल्मों की जानीमानी हीरोइन और ‘बिग बौस’ व ‘नच बलिए’ में प्रतियोगी रह चुकी पायल रोहतगी की शोख व बोल्ड अदाएं अब पूरे 2 साल बाद रमेश नैयर की भोजपुरी फिल्म ‘हल्फा मचा के गईल’ में भी देखने को मिल रही हैं. पायल रोहतगी इस भोजपुरी फिल्म में एक स्पैशल डांस में नजर आएंगी. इस गाने की शूटिंग मुंबई से 50 किलोमीटर दूर नायगांव के आरडीएल स्टूडियो में लगाए गए भव्य सैट पर की गई जिस में पायल रोहतगी के साथ फिल्म के हीरो राघव नैयर ने भी हिस्सा लिया.

इस गाने में पायल रोहतगी का बिंदास रूप दिखेगा. उन्होंने कहा, ‘‘फिल्म के निर्माता रमेश नैयर ने जब मुझे इस फिल्म का औफर दिया तो मैं इनकार न कर सकी. ‘‘फिल्म ‘हल्फा मचा के गईल’ भोजपुरी जरूर है, मगर मेरे डांस नंबर के बोल हिंदी में हैं. गाने के बोल बहुत अच्छे हैं. मैं ने तो इसे पूरी तरह से हिंदी आइटम सौंग मान कर किया है. यह एक क्लब के अंदर हो रहा डांस है जहां फिल्म के हीरो राघव नैयर एंजौय करने के लिए आते हैं.

‘‘जब मैं किसी फिल्म से जुड़ती हूं तो इस बात पर ध्यान देती हूं कि वह फिल्म अच्छी है या नहीं, क्योंकि सिनेमा का अच्छा होना जरूरी है. मेरी नजर में कोई सिनेमा छोटा नहीं होता.’’

पायल रोहतगी पिछले 4 सालों से किसी फिल्म में काम करते हुए नजर नहीं आईं. इस की क्या वजह रही?

इस सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘मैं काफी काम कर रही हूं. अब हम ‘संग्राम सिंह फाउंडेशन’ के लिए भी काफी समय देते हैं.

‘‘इस के अलावा मैं फिल्म और टैलीविजन में ऐक्टिंग कर रही हूं. एक नारी प्रधान गुजराती फिल्म में मैं लीड किरदार निभा रही हूं. इस फिल्म में लोगों को पहली बार मेरी ऐक्टिंग में कई तरह के रंग देखने को मिलेंगे.’’

‘संग्राम सिंह फाउंडेशन’ के बारे में पायल रोहतगी ने कहा, ‘‘हमारे देश में क्रिकेट व हौकी के अलावा दूसरे खेलों से लोगों को ज्यादा पैसे नहीं मिल पाते हैं. बाकी खेलों से जुड़े खिलाड़ी मेहनत करते हैं, पर उन्हें मनचाहे पैसे नहीं मिल पाते हैं. नतीजतन, उन्हें कई तरह की पैसे संबंधी मुसीबतों से जूझना पड़ता है. ऐसे खिलाड़ी बड़ी मुश्किल से अपनी रोजीरोटी कमा पाते हैं. हम चाहते हैं कि कुश्ती भी क्रिकेट के आईपीएल की तरह एक मशहूर खेल बन जाए.

‘‘अब तो सलमान खान और आमिर खान जैसे बड़े कलाकारों ने कुश्ती जैसे खेल पर फिल्में भी कर ली हैं. इस से लोगों के बीच एक जागरूकता पैदा हुई है.

‘‘इस फाउंडेशन के तहत हम ने कुछ बच्चों को एडौप्ट भी किया है. संग्राम सिंह बच्चों से बहुत प्यार करते हैं. हम दोनों चाहते हैं कि उभरते हुए उन बच्चों के लिए कुछ किया जाए जो कुश्ती में दिलचस्पी रखते हैं. ‘‘इस फाउंडेशन ने सब से पहले केडी जाधव मैमोरियल टूर्नामैंट कराया था. यह पिछले साल की बात है, जहां हम ने उभरते हुए पहलवानों के मैच कराए थे. जो पैसा जमा हुआ था, वह उन में बांटा गया था.’’

क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों की बदहाली के लिए भारतीय सोच पर बात करते हुए पायल रोहतगी ने कहा, ‘‘यह हमारे देश की बदकिस्मती है वरना कुश्ती भारत देश का सब से पुराना खेल है.

‘‘अफसोस की बात है कि जब दूसरे देशों के खिलाडि़यों ने कुश्ती में नाम कमाया तब हम ने उस पर ध्यान दिया. ‘‘हमारे यहां सब से बड़ी समस्या यह है कि हम लोग सबकुछ बाहर से आयात करना चाहते हैं. हम अपने घर की चीजों की अनदेखी करते हैं. पर जब वह चीज विदेशों में मशहूर हो जाती है, तो हम उसे अपना लेते हैं. यह हमारी भारतीय सोच की कमी है.’’

कम समय में बनानी हो लजीज डिश, तो बहुत काम आएंगे ये किचन टूल्स

वर्किंग कल्चर होने के कारण आज महिलाओं का शैड्यूल इतना बिजी हो गया है कि वे खाना बनाने पर ज्यादा समय नहीं दे पाती हैं. मन होने के बावजूद सब्जियां वगैरा काटने के झंझट से बचने के लिए शौर्टकट तरीका ही अपनाना पसंद करती हैं. ऐसे में वे कम समय में ज्यादा चीजें और अपनी पसंद का खाना बना सकें इस के लिए पेश हैं स्मार्ट किचन टूल्स:

क्विक चौपिंग एेंड डाइसिंग

फूड चौपर: सब्जियों को मिनटों में काट कर आप के समय की बचत करते हैं फूड चौपर. यही नहीं सब्जियां भी एक ही साइज की कटती हैं. न किचन गंदी होने का झंझट, न ही हाथ कटने का डर और काम करने में भी काफी आसानी. तो हुआ न मैजिक फूड चौपर. कीमत भी पौकेट फ्रैंडली यानी यह आप को क्व300 से क्व500 में आसानी से मिल जाएगा.

चौपर स्लाइसर डाइसर: आप पार्टियों आदि में बहुत ही डैकोरेटिव वे में सलाद को सजा देख सोचती होंगी कि काश मैं भी घर पर ऐसा सलाद तैयार कर सकती. जी हां, आप भी घर पर ऐसा सलाद डिफरैंट शेप वाले डाइसर से तैयार कर सकती हैं.

फ्रैश जूस कुछ ही पलों में

इलैक्ट्रौनिक जूसर से जूस निकालने के झंझट से बचने के लिए अधिकांश लोग बाहर से ही जूस पीना पसंद करते हैं. लेकिन वे इस बात से अनजान रहते हैं कि इस से जूस का तापमान बढ़ जाता है जो सेहत के लिए सही नहीं होता. मैन्युअल जूसर से जूस निकालना काफी आसान ही नहीं होता, वरन वह टेस्टी व सेहतमंद भी होता है. फिर जूसर को धोने में भी ज्यादा मेहनत करनी पड़ती. बस मन किया और तैयार कर लिया जूस. आप को क्व150 से ले कर क्व400 तक अच्छा जूसर मिल जाएगा.

फटाफट करें लंच की तैयारी

पूरी मेकर: घर में ज्यादा मेहमान आ जाएं और आप यह सोचसोच कर परेशान हैं कि खाने में क्या बनाया जाए तो घबराएं नहीं. पूरी मेकर से मिनटों में तैयार करें ढेरों पूरियां और वह भी बिना किसी की मदद लिए. यकीन मानिए इस से बनी पूरियां मेहमानों को आप की तारीफ करने को मजबूर कर देंगी और फिर कीमत भी सिर्फ क्व300 से क्व500 के बीच.

रोटी मेकर दे रोटियों को परफैक्ट शेप: रोटियों को परफैक्ट शेप देना बड़ा मुश्किल काम होता है. ऐसे में आप ने लंच के लिए डिशेज तो एक से बढ़ कर एक तैयार कर लीं लेकिन रोटियां कहीं टेड़ीमेड़ी न बन जाएं यह सोच कर घबरा रही हैं तो शांत हो जाएं, क्योंकि रोटी मेकर है न, जो रोटियों को परफैक्ट शेप देने के साथसाथ आप का समय भी बचाएगा.

सेहत वाले शेक्स मिनटों में

हैंड ब्लैंडर: परिवार का कोई सदस्य कब क्या फरमाइश कर दे कुछ कहा नहीं जा सकता और फिर आप की भी कोशिश उन्हें हैल्दी चीजें परोसने की रहती है, तो फिर सोचना कैसा. उन्हें रोज हैंड ब्लैंडर से उन की पसंद के शेक्स सर्व कर उन्हें सेहतमंद बनाएं. बजट की चिंता भी नहीं क्योंकि यह आप को वाजिब कीमत में मिल जाएगा.

इस तरह के स्मार्ट किचन टूल्स अपना कर आप जो समय बचाएंगी वही आप का अपनों के साथ बिताया क्वालिटी टाइम बन जाएगा.

रणवीर व दीपिका की शादी इटली या स्विटजरलैंड में..?

बौलीवुड के गलियारों में अभिनेता रणवीर सिंह और अभिनेत्री दीपिका पादुकोण की शादी 18-19 नवंबर को होने की खबरे गर्म हैं. हम भी यहां पर कुछ समय पहले इस बात को बता चुके हैं. मगर इन दोनों की शादी को लेकर हर दिन एक नया शगूफा खड़ा होता रहता है अथवा कोई न कोई नई खबर आती रहती है, जिससे रणवीर सिंह व दीपिका पादुकोण की शादी अपने आप में एक पहेली सी बनती जा रही है. अब इसे खुद रणवीर सिंह व दीपिका पादुकोण महज खुद को हर दिन चर्चा में रखने के लिए पहेली बना रहे हैं या यह किसी प्रचारतंत्र का हिस्सा है? इसका सही जवाब तो रणवीर सिंह व दीपिका पादुकोण ही दे सकते हैं..पर इन दोनों ने चुप्पी साधी हुई है.

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मजेदार बात यह है कि एक तरफ इनकी शादी की तैयारी की खबरें आती हैं, तो दूसरी तरफ शादी कहां होगी, इसको लेकर अटकलें लगायी जाती हैं. तो तीसरी तरफ बार बार यह खबर आती रहती है कि रणबीर कपूर की वजह से दीपिका पादुकोण अपनी शादी को लेकर किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंच पा रही हैं? पर सच किसे पता? जबकि हाल ही में दीपिका पादुकोण व उनकी मम्मी मुंबई के बांदरा इलाके में ज्वेलरी खरीदते हुए भी नजर आयीं.

बहरहाल, इन दिनों बौलीवुड में अटकलों का बाजार गर्म है कि रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण की शादी 18-19 नवंबर को मुंबई या बंगलोर की बजाय इटली में होगी. कुछ सूत्रों का दावा है कि रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण खुद भारत की बजाय विदेशी धरती पर एक्सौटिक लोकेशन पर अपनी शादी की रश्मों को अंजाम देना चाहते हैं. इस तरह वह अनुष्का शर्मा और विराट कोहली की तरह भारतीय मीडिया की चकाचैंध से दूर रहकर शादी के बंधन में बंध सकेंगे.

सूत्र दावा कर रहे हैं कि इटली सरकार ने तो इन दोनों के पास संदेश भी भिजवा दिया है कि वह अपने देश में इनकी शादी समारोह के लिए आयोजक बनने के लिए तैयार है.

तो वहीं चर्चाएं हैं कि स्विटजरलैंड सरकार भी इनकी शादी को अपने देश की तमाम सुंदर लोकेशनों में से किसी भी लोकेशन पर आयोजित करने के लिए तैयार है. ज्ञातब्य है कि रणवीर सिंह का स्विस सरकार के संग रिश्ता बना हुआ है. वह स्विस पर्यटन के ब्रांड अम्बेसेडर भी हैं.

तो दीपिका पादुकोण व रणवीर सिंह की शादी को लेकर अटकलों का बाजार काफी गर्म है. देखना ये है कि अगले कुछ माह में तस्वीर किस तरह से उभरकर सामने आती है.

मात्र 84 रुपये जमा करें, मिलेगी 24,000 रुपये की सालाना पेंशन

अटल पेंशन योजना केंद्र सरकार की एक अहम योजनाओं में से एक है जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साल 2015 में की गई थी. यह पेंशन योजना मुख्य रूप से असंगठित क्षेत्र के लोगों और ऐसे निवेशकों पर केंद्रित है जिनकी निवेश करने की क्षमता बेहद कम होती है. इस योजना का लाभ उन परिवारवालों को सबसे ज्यादा होगा जिनकी आर्थिक स्थिति सही नहीं हैं या वो वृद्ध आश्रम में रहे हैं.

कोई भी इस पेंशन प्लान की शुरुआत 18 वर्ष से लेकर 40 वर्ष के बीच कर सकता है. इस दौरान किए गए निवेश पर वो 60 वर्ष की उम्र में 1000 से 5000 तक की मासिक पेंशन सुनिश्चित करवा सकता है. हालांकि इस पर मिलने वाला रिटर्न योगदानकर्ता (सब्सक्राइबर) के योगदान और योगदानकर्ता की ओर से कब इस योजना की शुरूआत की गई है इस पर निर्भर करता है.

इस तरीके से करें 24,000 रुपये की सालाना पेंशन: अटल पेंशन योजना के अंतर्गत सब्सक्राइबर अपने योगदान के लिए मासिक, तिमाही या फिर छमाही आधार के विकल्प को चुन सकता है. ऐसे में अगर आप 84 रुपये का मासिक योगदान भी देते हैं तो 60 वर्ष की उम्र तक आप 2000 रुपये की प्रतिमाह पेंशन सुनिश्चित करवा सकते हैं. वहीं अगर आपका निवेश 42 सालों तक हुआ है, यानी आपने 18 वर्ष की उम्र से ही इस योजना को शुरू करवा दिया था तो आपको 60 वर्ष की उम्र के बाद 24,000 रुपये की सालाना पेंशन मिलने लग जाएगी. वहीं अगर आपने 18 साल की उम्र से 210 रुपये के मासिक योगदान से शुरुआत की है तो 42 वर्षों बाद आपको 5,000 रुपये की पेंशन मिलने लगेगी. यह जानकारी एनएसडीएल की वेबसाइट पर उपलब्ध है.

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अटल पेंशन योजना के लिए कैसे करें आवेदन?

अटल पेंशन योजना के सब्सक्राइबर फौर्म सभी बैंकों की वेबसाइट पर औनलाइन उपलब्ध हैं. आपको फौर्म डाउनलोड करना होगा और इसमें दिए गए सभी जरूरी कौलम को भरकर उसे बैंक को देना होगा. इसके साथ कुछ अन्य जरूरी दस्तावेज भी जमा कराने होते हैं. इतना करने के बाद आवेदक आसानी से अपना अटल पेंशन योजना का अकाउंट खोल सकता है.

देरी से निवेश पर जुर्माना: इस योजना में मासिक, तिमाही या फिर छमाही आधार पर निवेश या भुगतान करना होता है, लेकिन अगर आप इसमें देरी करते हैं तो आपको डिले पेमेंट के लिए अतिरिक्त अमाउंट (राशि) देना होता है. ये अमाउंट 1 रुपये से लेकर 10 रुपये प्रति माह तक हो सकता है.

अटल पेंशन योजना के बारे में जरूरी बातें

  • अटल पेंशन योजना और नेशनल पेंशन स्कीम में निवेश करने की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष है.
  • अटल पेंशन योजना में आपको तीन मोड में योगदान करना होता है, मासिक, तिमाही और अर्धवार्षिक आधार पर.
  • अटल पेंशन योजना के सब्सक्राइबर्स को 60 वर्ष की उम्र से पहले निकासी की अनुमति मिलती है.
  • अगर आपने अटल पेंशन योजना में निवेश कर रखा है तो आपको आयकर की धारा 80CCD (1B) के अंतर्गत 50,000 रुपये तक की कर छूट मिलती है.

सुजुकी ने लौन्च किया अपना नया स्कूटर, खूबियां हैं दमदार

टू-व्हीलर बनाने वाली कंपनी सुजुकी मोटरसाइकिल इंडिया (SMIPL) ने इंडियन मार्केट में नया स्कूटर लौन्च किया है. एक्सेस 125 (Access) नाम से लौन्च किए गए स्कूटर को कंपनी ने सीबीएस से लैस किया है, साथ ही इसमें कई कलर औप्शन भी दिए गए हैं. कंपनी ने एक्सेस 125 सीबीएस को 58,980 रुपये की शुरुआती कीमत में पेश किया है. दिल्ली में इसके स्पेशल एडिशन की एक्स शोरुम कीमत 60,580 रुपये है.

पावर और परफौर्मेस दोनों ही दमदार

कंपनी का दावा है कि एक्सेस 125 में एडवांस्ड एसईपी टेक्निक है, जो ईंधन की बचत करती है. ईंधन की बचत होने के साथ ही इसकी पावर और परफौर्मेस दोनों ही दमदार हैं. नए एक्सेस 125 का सीबीएस बाएं ब्रेक लीवर से दोनों ब्रेक्स को चलाता है, जिससे आगे और पीछे के ब्रेक्स के बीच अच्छा संतुलन बना रहता है. सुजुकी एक्सेस 125 सीबीएस में लंबी एवं आरामदेह सीट, अधिक अंडर सीट स्टोरेज, सुविधाजनक फ्रंट पौकेट, वैकल्पिक डीसी सौकेट और ड्यूअल यूटिलिटी हुक्स दिए गए हैं.

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एक्सेस 125 7,000 rpm पर 7 पीएस पावर और 10,500 rpm पर 10 न्यूटर मीटर टौर्क जेनरेट करता है. सेफ्टी के लिए इसमें स्टील फ्रंट फेंडर और लेग शील्ड हैं. एक्सेस 125 स्पेशल एडिशन मैटेलिक सोनिक सिल्वर के अलावा मौजूदा रंगों जैसे मैटेलिक मैट ब्लेक और पर्ल मिराज व्हाइट में भी आता है. एक्सेस 125 सीबीएस सभी मौजूदा 6 प्रीमियम रंगों – पर्ल सुजुकी डीप ब्लू, कैंडी सोनोमा रेड, ग्लास स्पार्कल ब्लैक, मैटेलिक फाइब्रोइन ग्रे, मैटेलिक सोनिक सिल्वर और पर्ल मिराज व्हाइट में उपलब्ध होगा.

कंपनी के कार्यकारी उपाध्यक्ष सजीव राजशेखरन ने बताया ‘एक्सेस 125 अपने सेग्मेंट में सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले स्कूटरों में से एक है. उन्होंने कहा कि यह स्कूटर पावर, इकोनौमी और प्रीमियम अपील का शानदार मिक्सअप है. उन्होंने उम्मीद जताई कि नए बदलावों के साथ, हम सुजुकी परिवार में अधिक से अधिक ग्राहकों को शामिल करने में कामयाब होंगे.’

वाईफाई राउटर खरीदते समय इन बातों का रखें खास ख्याल

आज के समय में हर कोई इंटरनेट का इस्तेमाल करता है, कुछ लोग ऐसे होते हैं जो इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय धीमे नेटवर्क से समझौता कर सकते हैं पर ज्यादातर लोग बेहतर की उम्मीद करते हैं. वे अपनी सुविधा के अनुसार कई सिस्टमों पर इंटरनेट इस्तेमाल करना चाहते हैं, साथ में इंटरनेट स्पीड भी तेज हो और घर के हर कमरे में नेटवर्क मिले, इसके लिए वो Wi-Fi राउटर खरीदते हैं पर सही जानकारी के अभाव में उन्हें उनके मन मुताबिक राउटर नहीं मिल पाता. ऐसे में राउटर खरीदने से पहले उसके बारे में कई चीजे ऐसी है जिसे जानना आपके लिए बेहद जरूरी है.

इंटरनेट के साथ भी और उसके बिना भी

Wi-Fi राउटर को मुख्यतः इंटरनेट कनेक्शन शेयर करने के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है, लेकिन यह इसकी एक मात्र खासियत नहीं है. अगर आपके पास एक्टिव इंटरनेट कनेक्शन नहीं है तो भी आप अपने स्मार्टफोन्स, टैबलेट्स, टीवी और कंम्प्यूटर को इसके जरिए कनेक्ट कर सकते हैं.

ज्यादातर यूजर्स को राउटर की जरूरत कई डिवाइसेज पर इंटरनेट इस्तेमाल करने के लिए होती है. आपका इंटरनेट कनेक्शन या तो केबल वाला होगा या फिर ADSL. केबल कनेक्शन होने की स्थिति में आपको अपने इंटरनेट प्रोवाइडर से पूछ लेना चाहिए कि आपका कनेक्शन कैसा है. सामान्य तौर पर आपको एक राउटर के अलावा किसी और डिवाइस की जरूरत नहीं होगी. हालांकि, अगर आपके पास DSL कनेक्शन है और BSNL, MTNL और एयरटेल जैसी कपंनी सर्विस प्रोवाइडर हैं तो आपको राउटर के साथ ADSL मौडेम की भी जरूरत पड़ेगी. ऐसी परिस्थिति में बिल्ट इन ADSL मौडेम वाला राउटर खरीदना ज्यादा बेहतर होगा. वैसे तो आपको मार्केट में कई किस्म के और अलग-अलग फीचर्स वाले राउटर उपलब्ध हैं, लेकिन इसे खरीदने से पहले इन बातों का रखें ध्यान.

राउटर का वाई-फाई स्टेंडर्ड (802.11 a/b/g/n/ac)

सबसे पहले आपको यह देखना होगा कि राउटर किस वाई-फाई स्टेंडर्ड को सपोर्ट करता है. पुराने मौडल पर 802.11 ‘b’ or ‘g’ का सपोर्ट मिलता है जबकि नए राउटर्स ‘n’ को भी सपोर्ट करते हैं. 802.11n स्टेंडर्ड पर आप 600Mbps (mega bits per second) के स्पीड से डाटा ट्रांसफर कर सकते हैं, हालांकि कुछ 802.11n राउटर्स की टौप स्पीड 300Mbps होती है (इसका मतलब डाउनलोड स्पीड 37.5MBps or mega bytes per second).

802.11ac लेटेस्ट स्टेंडर्ड है. इस पर आपको 1.3Gbps का ट्रांसफर स्पीड मिलती है. वैसे अभी बेहद ही कम मोबाइल फोन और लैपटौप 802.11ac को सपोर्ट करते हैं. इसके अलावा यह टेक्नोलौजी 802.11n की तुलना में काफी महंगी है. फिलहाल आप ‘n’ स्टेंडर्ड वाले राउटर पर भरोसा जता सकते हैं. भारत के इंटरनेट कनेक्शन के लिए यह काफी तेज है और साथ में सभी डिवाइसेज पर इसका सपोर्ट मिलता है. और साथ में पैसों की बचत भी.

राउटर की वायरलेस फ्रिक्वेंसी (2.4GHz या 5GHz)

राउटर की फ्रिक्वेंसी से यह निर्धारित होता है कि आपका नेटवर्क कितना पावरफुल है. राउटर के दो मुख्य स्टेंडर्ड हैं 2.4GHz और 5GHz. दोनों के बीच मुख्य अंतर रुकावट और रेंज का है. 2.5 GHz स्टेंडर्ड राउटर की तुलना में 5GHz स्टेंडर्ड राउटर में नेटवर्क तो बेहतर मिलता है, पर यह इसकी कीमत भी ज्यादा है. अगर नेटवर्क इंटरफेरेंस मुख्य मुद्दा नहीं है तो आप 2.5GHz वाला राउटर ही खरीदें.

राउटर की स्पीड

किसी भी राउटर की स्पीड उस मौडल में इस्तेमाल किए गए हार्डवेयर पर भी निर्भर करती है. वैसे हर डिवाइस में स्पीड का जिक्र “High Speed Upto” सेक्शन में किया रहता है. जो राउटर स्लो होंगे उनकी कीमत भी कम होगी. अगर जरूरत सिर्फ इंटरनेट से जुड़ने की है तो आप सस्ता राउटर खरीदें. अगर लेपटौप पर हाई डेफिनेशन वीडियो देखने या उसे अपने स्मार्ट टीवी पर स्ट्रीम करने का शौक है तो आपका 300 Mbps राउटर से काम चल जाएगा.

राउटर के एंटीना का रेंज

किसी Wi-Fi राउटर का रेंज जानने का कोई सीधा तरीका नहीं है क्योंकि यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है. हालांकि, राउटर के पीछे उसके एंटीने के dBi रेटिंग्स का जिक्र रहता है. अमेरिका के एक नेटवर्क कंसल्टेंट प्रणव राजपारा का कहना है कि किसी छोटे से मिडिल साइज अपार्टमेंट के लिए 2-4dBi रेंज वाला राउटर पर्याप्त है. हालांकि आपके घर में फ्रीज, माइक्रोवेव ओवन जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस हैं और तो आपको ऊंची रेंज वाला राउटर लेना होगा. वाई फाई सिग्नल रोकने में दीवारों का भी अहम रोल है. चाहे दीवार कंक्रीट की हो या फिर लकड़ी की, एक स्टडी के मुकाबिक 3 से 4 दीवारों के बाद सिग्नल का स्ट्रेंथ और कमजोर हो जाता है. इसलिए राउटर खरीदने से पहले उसकी dBi प्रापर्टी पर जरूर ध्यान दें.

वैसे इंटरनेट प्रोवाइडर आपको मुफ्त में राउटर उपलब्ध करा रहा है तो इससे बेहतर और कुछ नहीं,  लेकिन आप बार-बार नेटवर्क और रेंज की समस्या से जूझ रहे हैं तो आपको खुद ही राउटर खरीदने के बारे में सोचना चाहिए. साधारण इंटरनेट कनेक्शन के लिए 150Mbps या 300Mbps वाला राउटर फिट है. इसके लिए आपको 800 रुपये से ऊपर के रेंज में खर्चना होगा. वैसे Netgear, Asus, D-Link और Cisco Linksys पर ही भरोसा दिखाएं.

पौप अप कैमरे के साथ Vivo का नया स्मार्टफोन हुआ लौन्च

वीवो ने आखिरकार अपने पौप अप कैमरे के साथ वीवो नेक्स एस (Vivo Nex S) और वीवो नेक्स ए (Vivo Nex A) नाम से दो अनोखे स्मार्टफोन को लौन्च कर दिया है. इसमें दिया गया पौप अप कैमरा यानि सेल्फी कैमरा, फोटो क्लिक करते समय कैमरा फोन के सबसे ऊपरी हिस्से से निकलकर बाहर आएगा और फिर अंदर चला जाएगा. इनमें से वीवो नेक्स एस प्रीमियम मौडल है.

वीवो नेक्स एस (Vivo NEX S) की कीमत और स्पेसिफिकेशन

Vivo Nex S में डुअल सिम सपोर्ट, एंड्रायड ओरियो 8.1, 6.59 इंच की फुल एचडी प्लस सुपर एमोलेड डिस्प्ले है जिसका आस्पेक्ट रेशियो 19.3:9 है. फोन में क्वलकाम का स्नैपड्रगैन 845 प्रोसेसर, 8 जीबी रैम और 256GB व 128GB की स्टोरेज मिलेगी. फोन में इन डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिलेगा. फोन में डुअल रियर कैमरा सेटअप होगा जिसमें एक कैमरा 12 मेगापिक्सल का सोनी IMX363 और दूसरा 5 मेगापिक्सल का होगा, वहीं फ्रंट कैमरा 8 मेगापिक्सल का होगा. फोन में 4000mAh की बैटरी और कनेक्टिविटी के लिए 4जी एलटीई, वाई-फाई, ब्लूटूथ 5.0, यूएसबी 2.0 और ओटीजी का सपोर्ट मिलेगा. फोन के 8GB रैम+128GB मौडल की कीमत 4,498 चीनी युआन यानि करीब 47,400 रुपये और 8GB रैम +256GB मौडल की कीमत 4,998 चीनी युआन यानि करीब 52,600 रुपये है.

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वीवो नेक्स ए (Vivo NEX A) की कीमत और स्पेसिफिकेशन

फोन में डुअल सिम सपोर्ट, एंड्रायड ओरियो 8.1, 6.59 इंच की फुल एचडी प्लस सुपर एमोलेड डिस्प्ले है जिसका आस्पेक्ट रेशियो 19.3:9 है. फोन में क्वालकाम का स्नैपड्रगैन 710 प्रोसेसर, 6 जीबी रैम और 128GB की स्टोरेज मिलेगी. फोन में इन डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिलेगा. फोन में डुअल रियर कैमरा सेटअप होगा जिसमें एक कैमरा 12 मेगापिक्सल का सोनी IMX363 और दूसरा 5 मेगापिक्सल का होगा, वहीं फ्रंट कैमरा 8 मेगापिक्सल का होगा. फोन में 4000mAh की बैटरी और कनेक्टिविटी के लिए 4जी एलटीई, वाई-फाई, ब्लूटूथ 5.0, यूएसबी 2.0 और ओटीजी का सपोर्ट मिलेगा. इस फोन की कीमत 3,898 चीनी युआन यानि करीब 41,000 रुपये होगी.

टीवी के दो कलाकारों रिया दीपसी व अभय रायचंद की पहली फिल्म ‘‘भागते रहो’’

छोटे परदे के दो कलाकारों रिया दीपसी और अभय रायचंद ने अंततः बौलीवुड में कदम रख दिया है. इन दोनों की पहली एक्शनरोमांटिक हास्य फिल्म ‘‘भागते रहो’’ प्रदर्शन के लिए तैयार है.

‘‘साक्षी’’ क्रिएशंस के बैनर तले निर्माता सुनील तिवारी व सह निर्माता रिखब जैन तथा निर्देशक प्रफुल तिवारी की फिल्म ‘‘भागते रहो’’एक हास्य फिल्म है, जिसका मोशन पोस्टर और ट्रेलर मशहूर कलाकार मुकेश खन्ना के हाथों लोकार्पित किया गया.

इस फिल्म में रिया दीपसी व अभय रायचंद के साथ ही राजपाल यादव, सुनील पाल, गोपी भल्ला, दिनेश हिंगू, शेखर शुक्ला, नितीश चौबे, संजीव सोनी, अली, भूपेंद्र व अन्य.

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फिल्म‘‘भागते रहो’’की कहानी फिल्म के नायक फतेह सिंह यानी कि अभय रायचंद के इर्द गिर्द घूमती है, जो कि भोलेपन व मूर्खता की वजह से अपनी नौकरी से हाथ धो बैठता है. तब वह अपने पैतृक शहर आ जाता है, जहां वह नौ अलग अलग किरदारों से मिलता है और फिर उसकी जिंदगी में जो कुछ होता है, वह लोगों को हंसाने के लिए काफी है.

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