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तो ‘‘कलंक’’ में इस किरदार में होंगी सोनाक्षी सिन्हा

करण जोहर की महत्वाकांक्षी एपिक पीरियड ड्रामा वाली फिल्म ‘‘कलंक’’ में छह नामचीन कलाकार अभिनय कर रहे हैं. इन्ही कलाकारों में एक हैं सोनाक्षी सिन्हा. सूत्रों की मानें तो सोनाक्षी सिन्हा तेरह जून, बुधवार से मुंबई में फिल्म ‘कलंक’ की शूटिंग शुरू करने वाली हैं.

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उन्होंने हाल ही में आनंद एल रौय निर्मित फिल्म ‘‘हैप्पी फिर भाग जाएगी’’ की शूटिंग पूरी की है. सूत्रों का दावा है कि फिल्म ‘‘कलंक’’ में सोनाक्षी सिन्हा एक बंजारन के किरदार में नजर आने वाली हैं. वैसे वह इस फिल्म में आदित्य रौय कपूर के किरदार की पत्नी के किरदार में होंगी.

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वैसे सोनाक्षी सिन्हा का दावा है कि वह ‘कलंक’ में जैसा किरदार निभा रही हैं, वैसा किरदार अब तक उन्होनें किसी भी फिल्म में नहीं निभाया है. फिल्म ‘‘कलंक’’ में सोनाक्षी सिन्हा व आदित्य रौय कपूर के अलावा माधुरी दीक्षित, संजय दत्त, आलिया भट्ट व वरूण धवन हैं.

अफगानिस्तान के खिलाफ पहले मैच में खेलना सम्मान की बात : अजिंक्य रहाणे

भारतीय टेस्ट टीम के कार्यवाहक कप्तान अजिंक्य रहाणे का कहना है कि अफगानिस्तान के पहले और ऐतिहासिक टेस्ट में उसके खिलाफ खेलना उनके लिए बेहद सम्मान की बात है. भारतीय टीम अफगानिस्तान के खिलाफ बेंगलुरू में 14 जून से होने वाले एकमात्र टेस्ट मैच में खेलेगी. आईसीसी द्वारा जारी विज्ञप्ति में अजिंक्य रहाणे ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान के पहले टेस्ट मैच में खेलना सम्मान की बात हैं. यह उनके लिए एक ऐतिहासिक क्षण है और इस अवसर का हिस्सा बनना हमारे लिए सम्मान की बात है.’’

रहाणे ने कहा, ‘‘अफगानिस्तान के पास एक अच्छी टीम और कुछ प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, जिन्होंने छोटे प्रारूपों में खुद को साबित किया है. मुझे यकीन है कि वे टेस्ट क्रिकेट में ऐसा करने की उम्मीद कर रहे हैं. भारतीय टीम की तरफ से, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं.’’

टेस्ट रैंकिंग में शीर्ष पर काबिज भारतीय टीम इस मैच में नियमित कप्तान विराट कोहली के बिना उतरेगी लेकिन आईसीसी टेस्ट रैंकिंग में चेतेश्वर पुजारा (छठे रैंकिंग), रहाणे (18 वीं रैंकिंग) और लोकेश राहुल (19 वीं रैंकिंग) जैसे बल्लेबाज अपनी स्थिति को मजबूत करना चाहेंगे. गेंदबाजी में पूर्व शीर्ष रैंकिंग वाले रविंद्र जडेजा (चौथे) और रविचंद्रन अश्विन (पांचवें) भी रैंकिंग में ऊपर चढ़ना चाहेंगे.

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अफगानिस्तान ने खुद को छोटे प्रारूप में साबित किया है और अब वह टेस्ट क्रिकेट में भी अपनी छाप छोड़ना चाहेंगे. आयरलैंड के बाद टेस्ट क्रिकेट खेलने वाला अफगानिस्तान 12 वां देश बनेगा. आयरलैंड ने पिछले महीने पाकिस्तान के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला था.

भारत के कार्यवाहक कप्तान अंजिक्य रहाणे ने पहले कहा था कि, ‘‘राशिद खान सचमुच बढ़िया प्रदर्शन कर रहे हैं. विशेषकर छोटे प्रारुप टी-20 में. उन्होंने सनराइजर्स हैदराबाद के लिए शानदार प्रदर्शन किया. वह बेहतरीन गेंदबाज है और हर किसी को इसे स्वीकार करना और इसका सम्मान करना चाहिए. अफगानिस्तान को हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि क्रिकेट में और आम तौर पर जिंदगी में आप किसी भी चीज को हल्के में नहीं ले सकते.’’

अफगानिस्तान के कप्तान असगर स्टानिकजई ने कहा, ‘‘हमारे लिए यह एक महान क्षण है क्योंकि हम अपनी टेस्ट यात्रा की शुरूआत कर रहे है. भारत के खिलाफ पहला टेस्ट खेलना सम्मान की बात है. हमें उम्मीद है कि उन्हें कड़ी चुनौती देंगे.’’

झुलसे पंखों की उड़ान

जिंदगी कब कौन सा मोड़ लेगी, कोई नहीं जानता. ऐसे तमाम लोग हैं, जो चलतेचलते कुछ इस तरह लड़खड़ा कर गिरते हैं या गिरा दिए जाते हैं कि उन्हें जीवनपथ पर सहज गति से चलने की राह सुझाई नहीं देती. ऐसे ही लोगों में हैं रूपा. जब वह 15 साल की थीं, तभी सौतेली मां ने सोते में उन के चेहरे पर तेजाब फेंक दिया था. रूपा ने पूरी रात तड़पते हुए बिताई. अगली सुबह रूपा के चाचा उन्हें अस्पताल ले गए. वह बच तो गई लेकिन चेहरा कुरूप हो गया.

एक बार तो रूपा को लगा कि जिंदगी खत्म हो गई, बिलकुल टूट गई थी वह. अगले 5 साल तक रूपा ने खुद को कमरे में बंद रखा. किसी से बात तक नहीं करती थी वह. अस्पताल जाना मजबूरी थी, सो मुंह ढंक कर अस्पताल जाती.

हादसे से पहले रूपा फैशन की दुनिया में जाना चाहती थी, लेकिन उस का हर सपना धरा रह गया. यह सच है कि वक्त बड़ेबड़े घाव भर देता है. रूपा के साथ भी यही हुआ. रूपा ने फेसबुक के जरिए एसिड सरवाइवर्स रितु और नीतू के साथ जुड़ कर कुछ करने की ठानी. इस के लिए उन्होंने एनजीओ ‘छांव फाउंडेशन’ से संपर्क किया. छांव फाउंडेशन की टीम ने एक मुहिम के तहत जब एसिड सरवाइवर्स की मदद के लिए एक दुकान खुलवाने की सोची तो उन के साथ 8 एसिड सरवाइवर्स और जुड़ गईं.

इस के बाद फाउंडेशन को अपनी सोच बदलनी पड़ी. काफी सोचविचार के बाद छांव फाउंडेशन ने एसिड सरवाइवर्स के लिए 10 दिसंबर, 2014 को आगरा में एक कैफे शुरू किया, जिस का नाम रखा गया ‘शीरोज हैंगआउट’. इस का मतलब है महिला हीरोज का अड्डा. आगरा के शीरोज हैंगआउट का असिस्टेंट मैनेजर बनाया गया रूपा को.

बाद में इस की शृंखला के रूप में लखनऊ और उदयपुर में भी शीरोज हैंगआउट के कैफे खोले गए, जिन में 15 एसिड फाइटर्स काम करती हैं. आगरा में शुरू हुए इस कैफे को अब दुनिया भर में पहचाना जाने लगा है. कितने लोग ऐसे हैं जो यहां काम करने वाली एसिड अटैक फाइटर्स से मिलने आते हैं. आगरा के शीरोज हैंगआउट में अब तक उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, हौलीवुड अभिनेता जैसन आइजैक्स आ चुके हैं. मुख्यमंत्री रहते अखिलेश यादव ने आगरा के शीरोज हैंगआउट को समझ कर संस्था की मदद की और लखनऊ में इस शृंखला का कैफे खुलवाया.

आगरा के शीरोज हैंगआउट में अब तक गायिका सोना महापात्रा, अभिनेत्री कल्कि कोचलिन, मिस यूनिवर्स ग्रेट ब्रिटेन जेमी ली फौकनर, फिल्म निर्देशक ओमंग कुमार, अभिनेता राजकुमार राव और डिंपल यादव जैसी शख्सियतें आ चुकी हैं. सिलिकौन वैली से फेसबुक की ग्लोबल टीम भी इस कैफे का दौरा कर चुकी है. सभी ने मुक्त कंठ से इस प्रयास की सराहना की है.

रूपा फैशन डिजाइनर बनना चाहती थीं. अब अपनी डिजाइन की गई पोशाक वह कैफे पर बेचती हैं, जिन्हें लोग काफी पसंद करते हैं. उन का फैशन डिजाइनर बनने का सपना अभी जिंदा है. दिसंबर 2014 में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सैकड़ों गणमान्य लोगों की उपस्थिति में आगरा के शीरोज हैंगआउट की असिस्टेंट मैनेजर रूपा को ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ दे कर सम्मानित किया जो अपने आप में एक बड़ी बात है.

छांव फाउंडेशन द्वारा किया गया यह प्रयास सराहनीय है. ऐसे कामों के लिए अन्य संगठनों को भी आगे आना चाहिए ताकि इस तरह की पीडि़त महिलाएं स्वयं को अकेला महसूस न करें. इस के साथ ही लोगों और संगठनों को ऐसी महिलाओं की कानूनी मदद भी करनी चाहिए ताकि ऐसा घिनौना काम करने वालों को सजा दिलाई जा सके.

नादानी में उजड़ गया परिवार : विस्फोटक बन गए अनैतिक संबंध

रेखा ने वीरेंद्र को प्यार से समझाते हुए कहा था, ‘‘देखो वीरेंद्र, बात को समझने की कोशिश करो. जो तुम कह रहे हो वह संभव नहीं है. मेरा अपना एक घरसंसार है, पति है, 2 बच्चे हैं, अच्छीखासी गृहस्थी है हमारी. और तुम कहते हो मैं सब कुछ छोड़छाड़ कर तुम्हारे साथ भाग चलूं. नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. हम दोनों अच्छे दोस्त हैं और हमेशा दोस्त ही रहेंगे. हमारे बीच जो रिश्ता है, जो संबंध है, वह हमेशा बना रहेगा. हां, एक बात का मैं वादा करती हूं कि जो रिश्ता हम दोनों के बीच है, उसे तोड़ने में मैं पहल नहीं करूंगी.’’

‘‘तुम मेरी बात समझने की कोशिश नहीं कर रही हो.’’ वीरेंद्र हताश सा बोला.

‘‘मैं सब समझ रही हूं वीरेंद्र, मैं कोई दूधपीती बच्ची नहीं हूं. तुम चाहते हो मैं अपने पति को, अपने बच्चों को हमेशा के लिए छोड़ कर तुम्हारे साथ चली आऊं. यह मुझे मंजूर नहीं है.’’

‘‘तुम मेरी बात सुनोगी भी या नहीं. तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुम्हें कितना प्यार करता हूं, तुम्हारे बिना एक पल रहने की कल्पना भी नहीं कर सकता. इसीलिए कह रहा हूं कि पति और बच्चों का मोह त्याग कर मेरे साथ चली चलो, हम अपनी एक नई दुनिया बसाएंगे, जहां सिर्फ मैं रहूंगा और तुम होगी. रहा सवाल बच्चों का तो हम दोनों के और बच्चे पैदा हो जाएंगे. तुम नहीं जानती, तुम मेरी कल्पना हो, तुम्हें पाना ही मेरा एकमात्र सपना है.’’

‘‘वाह वीरेंद्र बाबू, वाह.’’ रेखा ने वीरेंद्र का मजाक उड़ाते हुए कहा, ‘‘तुम्हारे सपने और कल्पनाओं को पूरा करने के लिए मैं अपने परिवार की बलि चढ़ा दूं? ऐसा हरगिज नहीं होगा.’’

‘‘अच्छी तरह सोच लो रेखा रानी. मैं तुम्हें बदनाम और बरबाद कर दूंगा.’’ अपनी बात मानते न देख वीरेंद्र ने रेखा को धमकी दी.

‘‘बदनाम करने की धमकी किसे दे रहे हो?’’ रेखा भी गुस्से में आ गई, ‘‘बरबाद तो मैं उसी दिन हो गई थी, जिस दिन मैं ने अपने सीधेसादे पति को धोखा दे कर तुम्हारे साथ संबंध बनाए थे. रहा बदनामी का सवाल तो तुम्हारे साथ संबंधों को ले कर पूरा मोहल्ला मुझ पर थूकता है, यहां तक कि मेरे पति को भी मेरे और तुम्हारे संबंधों के बारे में पता है.

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‘‘उन की जगह कोई और होता तो मुझे अपने घर से कब का निकाल कर बाहर कर दिया होता. यह उन की शराफत है कि उन्होंने कभी मुझे तुम्हारे नाम का ताना दे कर जलील तक नहीं किया. अरे ऐसे पति के तो पैर धो कर पीने चाहिए और तुम कहते हो कि मैं पति को छोड़ कर तुम्हारे साथ भाग जाऊं.’’

‘‘वाह क्या कहने, नौ सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को चली है. पतिव्रता और सती सावित्री होने का ढोंग कर के दिखा रही है मुझे. वह दिन भूल गई, जब अपने उसी पति की आंखों में धूल झोंक कर मुझ से मिलने आया करती थी.’’

‘‘अपनी जिंदगी की इस भयानक भूल को मैं कैसे भूल सकती हूं, जब तुम्हारे सपनों के झूठे मायाजाल में फंस कर मैं ने अपना सब कुछ तुम्हें सौंप दिया था. आज मैं अपनी उसी गलती की सजा भुगत रही हूं.’’ कहते हुए एकाएक रेखा क्रोध से भड़क उठी और उस ने गुस्से में वीरेंद्र से कहा, ‘‘जाओ, निकल जाओ मेरे घर से. अपनी मनहूस शक्ल दोबारा मत दिखाना. तुम्हें जो करना है कर लेना, अब दफा हो जाओ.’’

लोकेश की बैकग्राउंड

रेखा का पति लोकेश मूलत: जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश के गांव कंबोह माजरा का रहने वाला था. साल 2006 में उस की शादी देहरादून, उत्तराखंड के गांव दंदोली निवासी ठेपादास की मंझली बेटी रेखा के साथ हुई थी. लोकेश साधारण शक्लसूरत का सीधासादा युवक था, जबकि रेखा खूबसूरत थी.

रेखा जैसी खूबसूरत पत्नी पा कर लोकेश अपने आप को बड़ा भाग्यशाली समझता था. वह रेखा से बहुत प्यार करता था और रेखा भी उसे प्यार करने लगी थी. कुल मिला कर पतिपत्नी दोनों एकदूसरे से संतुष्ट थे. वक्त के साथ लोकेश और रेखा अब तक 2 बच्चों 10 वर्षीय कार्तिक और 7 वर्षीय कृष के मातापिता बन गए थे.

लोकेश के मातापिता के पास थोड़ी सी खेती थी, जिस से घर खर्च भी बड़ी मुश्किल से चल पाता था, इसलिए 7 साल पहले लोकेश काम की तलाश में लुधियाना चला आया था. अपने पैर जमाने के लिए शुरू में वह छोटीमोटी नौकरियां करता रहा. साथ ही किसी अच्छे काम की तलाश में भी जुटा रहा. आखिर उसे सन 2014 में भारत की प्रसिद्ध साइकिल कंपनी हीरो में नौकरी मिल गई थी. वेतन भी अच्छा था और अन्य सुखसुविधाएं भी थीं.

हीरो साइकिल में नौकरी लगने के बाद लोकेश ने रहने के लिए सुरजीतनगर, 33 फुटा रोड, गली नंबर-1 ग्यासपुरा स्थित एक वेहड़े में किराए पर कमरा ले लिया और गांव से अपनी पत्नी रेखा और बच्चों को भी लुधियाना ले आया.

लुधियाना आने के बाद लोकेश ने अपने दोनों बच्चों को सरकारी स्कूल में दाखिल करवा दिया था. पतिपत्नी दोनों मजे में रहने लगे थे कि अचानक एक दिन वीरेंद्र सिंह उर्फ चाचा की नजर रेखा पर पड़ी. वीरेंद्र भी उसी गली नंबर-1 में लोकेश के घर के सामने ही रहता था.

वीरेंद्र की कामयाब चाल

शातिर वीरेंद्र की नजर जब खूबसूरत रेखा पर पड़ी तो वह उसे पाने के लिए छटपटाने लगा. उस ने रेखा को भी देखा था और उस के पति लोकेश को भी. साधारण शक्लसूरत वाले लोकेश की इतनी खूबसूरत बीवी देख वीरेंद्र के कलेजे पर सांप लोटने लगा था. वह हर हाल में रेखा से संबंध बनाना चाहता था.

इस के लिए 2-4 बार उस ने रेखा को छेड़ने की कोशिश भी की थी, पर रेखा ने उसे घास नहीं डाली तो शातिर दिमाग वीरेंद्र ने रेखा के निकट आने का एक दूसरा रास्ता अपनाया. उस ने रेखा के पति लोकेश के साथ दोस्ती कर ली और दोस्ती की आड़ ले कर वह लोकेश के घर आनेजाने लगा.

जबकि दूसरी ओर वीरेंद्र के नापाक इरादों से अनजान भोलाभाला लोकेश उसे अपना हितैषी समझ रहा था. रेखा को अपने जाल में फंसाने के लिए उस ने लोकेश और उस के बीच ऐसी दरार पैदा की कि घर में अकसर झगड़ा रहने लगा.

लोकेश की अधिकांश नाइट ड्यूटी होती थी, जिस का वीरेंद्र ने जम कर फायदा उठाया. शातिर वीरेंद्र ने रेखा को अपने प्रेम जाल में फंसा कर उस के साथ अवैध संबंध बना लिए. दोनों के बीच बने अवैध संबंधों ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया, जब वीरेंद्र ने रेखा पर पति व बच्चों को छोड़ कर साथ भागने का दबाव बनाना शुरू किया.

उस की बात सुन कर रेखा को अपनी गलती का अहसास हुआ कि उस ने अपने पति और बच्चों को धोखा दे कर अच्छा नहीं किया. लेकिन अब क्या हो सकता था, अब तो वह शैतान के जाल में फंस चुकी थी.

पहले तो रेखा उसे टालती रही, परंतु जब वह उसे अधिक परेशान करने लगा तो रेखा ने पति व बच्चों को छोड़ कर उस के साथ भागने से साफ इनकार कर दिया था. रेखा के स्पष्ट इनकार करने से वीरेंद्र तड़प कर रह गया. हर तरह के हथकंडे अपनाने के बाद भी जब वह नाकाम रहा तो उस ने रेखा को सबक सिखाने की ठान ली.

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रेखा द्वारा किए इनकार से गुस्साया वीरेंद्र 2 अप्रैल की सुबह मौका पा कर तब रेखा के घर पहुंचा, जब वह घर में अकेली थी. उस का पति लोकेश ड्यूटी पर व बच्चे स्कूल गए हुए थे. वीरेंद्र ने रेखा से साफ शब्दों में पूछा कि वह उस के साथ भागेगी या नहीं? रेखा के इनकार करने पर वीरेंद्र भाग कर रसोई से चाकू उठा लाया और रेखा के पेट में वार कर दिया.

वीरेंद्र ने खुद भी कोशिश की मरने की

अचानक हुए वार से रेखा घबरा गई. उसे वीरेंद्र से ऐसी उम्मीद नहीं थी. उस ने वीरेंद्र के वार से बचने की कोशिश की, लेकिन बचाव करते समय रेखा की एक अंगुली कट गई. इस के बाद वीरेंद्र ने उसे धक्का दे कर बैड पर गिरा दिया और उस के गले में चुनरी डाल गला घोंट कर उस की हत्या कर दी. वारदात को अंजाम देने के बाद वह अपने घर चला गया. अपने घर पर रखी चूहे मारने की दवा निगल कर उस ने आत्महत्या करने की कोशिश की.

इसी दौरान संदेह होने पर मोहल्ले के लोगों ने तुरंत पुलिस को फोन किया. सूचना मिलते ही एसीपी अमन बराड़ व डाबा थाने के प्रभारी इंसपेक्टर गुरविंदर सिंह घटनास्थल पर पहुंच गए. उन्होंने वीरेंद्र को काबू कर के जब लोकेश के घर जा कर देखा तो बिस्तर पर रेखा का शव पड़ा हुआ था. पुलिस ने शव कब्जे में ले कर पोस्टमार्टम के लिए सिविल अस्पताल भेज दिया.

लोकेश की तहरीर पर इंसपेक्टर गुरविंदर सिंह ने रेखा की हत्या के अपराध में वीरेंद्र के खिलाफ भादंवि की धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे अदालत में पेश किया, जहां अदालत के आदेश पर उसे जिला जेल भेज दिया गया था.

रेखा ने जो किया, उस का नतीजा उसे भोगना पड़ा. अपने पति से बेवफाई की सजा रेखा को अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी, पर इस सारे प्रकरण में लोकेश और उस के बच्चों का क्या दोष था, जिस की सजा वे आजीवन भोगते रहेंगे.

यह सच है कि लोकेश के मुकाबले उस की पत्नी रेखा कहीं अधिक खूबसूरत थी. पतिपत्नी के मजबूत रिश्ते में दरार डालने के लिए शातिर वीरेंद्र ने इसी फर्क को मुख्य वजह बनाते हुए हंसतेखेलते परिवार में जहर घोल दिया.

– पुलिस सूत्रों पर आधारित

मुंबई से बेंगलुरु तक

गरमियां शुरू हो गई थीं. मैं उद्यान एक्सप्रेस के सेकेंड क्लास डिब्बे में गुलबर्गा स्टेशन से गाड़ी में सवार हुई. मैं ने देखा डिब्बे में बहुत ज्यादा यात्री भरे हुए थे. मैं बैठ गई और भीड़ की वजह से खिसकतेखिसकते बर्थ के कोने तक पहुंच गई. टिकट कलेक्टर आया और उस ने यात्रियों के टिकट चैक करने शुरू कर दिए. उस ने मेरी ओर देख कर पूछा, ‘‘आप का टिकट मैडम?’’

मैं ने जवाब दिया, ‘‘मैं तो अपना टिकट आप को दिखा चुकी हूं.’’

‘‘आप का टिकट नहीं मैडम, उस लड़की का जो आप की सीट के नीचे छिपी हुई है.’’ टिकट कलेक्टर उस पर चिल्लाया तो डरी हुई लड़की बाहर आई.

पतलीदुबली सी वह लड़की बहुत डरी हुई लग रही थी, मानों बहुत देर से रो रही हो. उस की उम्र लगभग 13-14 साल रही होगी.

टिकट कलेक्टर उसे पकड़ कर जबरदस्ती डिब्बे से बाहर निकालने लगा. तभी मुझे अपने अंदर एक अनोखा अहसास हुआ. मैं ने उस से कहा, ‘‘इस के टिकट के पैसे मैं दे दूंगी.’’

उस ने मेरी ओर देख कर कहा, ‘‘मैडम, अगर आप इस का टिकट खरीदने की बजाय इसे 10 रुपए दे देंगी तो यह खुश हो जाएगी.’’

मैं ने उस की बात अनसुनी कर के उस का टिकट आखिरी स्टेशन बेंगलुरु तक का ले लिया ताकि वह जहां चाहे, चली जाए.

कुछ देर बाद उस ने धीरे से बोलना शुरू किया. उस का नाम चित्रा था. वह बीदर के एक गांव में रहती थी. उस का बाप एक कुली था और उस की मां उस के जन्म के समय ही मर गई थी. उस के पिता ने दूसरी शादी कर ली थी, लेकिन कुछ महीने पहले उस की भी मौत हो गई थी. उस की सौतेली मां ने उस के साथ बुरा व्यवहार करना शुरू कर दिया तो अच्छे भविष्य के लिए उस ने घर छोड़ दिया.

बात करतेकरते ट्रेन बेंगलुरु पहुंच गई थी. मैं ट्रेन से उतरी तो मैं ने चित्रा की ओर देखा, जो मुझे उदास आंखों से देख रही थी. मैं इंसानियत के नाते उसे अपने एक मित्र राम के घर ले गई. राम ने बेसहारा लड़कों और लड़कियों के लिए एक आश्रम खोल रखा था और उस का प्रबंध वह खुद संभालता था. यह आश्रम इंफोसिस की मदद से चलता था.

चित्रा को एक घर मिल गया और उस के जीवन को एक नई दिशा भी. मैं समयसमय पर फोन से उस के बारे में पूछ लिया करती थी. वह बहुत परिश्रमी थी. मैं उस की शिक्षा के लिए उस की मदद करना चाहती थी. लेकिन उस ने कहा, ‘‘नहीं अक्का, मैं कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा करना चाहती हूं, जिस से मुझे जल्दी नौकरी मिल जाए.’’

उस ने कंप्यूटर साइंस में डिप्लोमा बहुत अच्छे नंबरों से हासिल किया और उसे एक सौफ्टवेयर कंपनी में नौकरी मिल गई. अपने पहले वेतन से उस ने मेरे लिए एक साड़ी और मिठाई का डिब्बा खरीद कर भेजा. एक दिन जब मैं दिल्ली में थी तो उस ने मुझे फोन कर के बताया कि उस की कंपनी उसे अमेरिका भेज रही है. वह मेरा आशीर्वाद लेना चाहती थी, लेकिन उस समय मैं दिल्ली में थी.

सालों बीत गए, चित्रा बहुत मेहनत से काम कर रही थी. साथ ही निरंतर ईमेल से मेरे संपर्क में भी थी. कई साल बाद कन्नड़ बोलने वाला एक परिवार जो कैलिफोर्निया में बसा था, ने सैन फ्रांसिस्को में कन्नड़ कोटा मीटिंग की और उस में मुझे भी आमंत्रित किया. मैं उसी होटल में ठहरी थी, जहां कन्नड़ बोलने वालों की मीटिंग होनी थी.

जब मैं होटल के कमरे से चैकआउट करने के लिए रिसैप्शन पर पहुंची तो रिसैप्शनिस्ट ने कहा, ‘‘आप के सभी बिलों का भुगतान पहले ही किया जा चुका है. अब आप को कुछ नहीं देना है. वह महिला जो सामने खड़ी हैं, उन्होंने आप के सब बिलों का भुगतान कर दिया है.’’

मैं ने मुड़ कर देखा तो चित्रा को एक युवक के साथ खड़े पाया. वह छोटे कटे हुए बालों में बहुत सुंदर लग रही थी. खुशी से उस की आंखें चमक रही थीं. मैं दौड़ कर उस के पास गई. उस ने खुशी से मुझे चिपटा लिया और मेरे पैर छुए. मैं भी बहुत खुश थी. मुझे यह देख कर और भी खुशी हुई कि उस ने अपने भविष्य के लिए अपने जीवन का कितना बेहतरीन चुनाव किया है. लेकिन मैं अपने सवाल पर लौट आई, ‘‘चित्रा, तुम ने मेरे बिलों का भुगतान क्यों किया?’’

उस ने रोते और सिसकियां भरते हुए मुझे लिपटा लिया और कहा, ‘‘क्योंकि आप ने मुंबई से बेंगलुरु तक के मेरे टिकट के पैसे अदा किए थे. अगर आप मेरी मदद न करतीं तो आज मैं यहां तक नहीं पहुंची होती.’’

नहीं फला राहुल गांधी का पूजापाठ

गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस कम दुर्गति का शिकार हुई थी पर कर्नाटक में उम्मीद से ज्यादा हुई तो इस की एक अहम वजह राहुल गांधी की मंदिर जाने की बीमारी ही है. मतदाता को धर्म और जाति के नाम पर रिझाने का खानदानी नुस्खा भाजपा के पास ही है, इसीलिए सोशल मीडिया पर अमित शाह के बारे में मजाक में नहीं, बल्कि पूरी गंभीरता से यह कहा जाता है कि सरकार बनाने के लिए वैद्य अमित शाह से संपर्क करें.

कर्नाटक में कांग्रेस की यह कमजोरी तो लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने के साथ ही उजागर हो गई थी, रहीसही कसर वहां के मठाधीशों ने कांग्रेस के पक्ष में फतवे जारी कर पूरी कर दी. मठ हर कोई जानता है दलितों के नहीं होते, इसलिए दलितों में कांग्रेस को ले कर भी असमंजस रहा जिस का फायदा भाजपा को मिला.

राहुल गांधी के पास अब मुकम्मल वक्त यह तय करने के लिए है कि वे आगे भी वैसी ही राजनीति करेंगे जैसी भाजपा चाहती है या फिर वैसी जैसी जनता चाहती है.

वालमार्ट की फ्लिपकार्ट

पहले लोग कंपनी सामान बनाने या सेवा बेचने के लिए बनाते थे पर अब सामान बनाने और सेवा देने के अलावा कंपनी को बेचने के लिए भी बनाते हैं. सचिन बंसल और बिन्नी बंसल ने 11 वर्षों पहले बनाई फ्लिपकार्ट कंपनी को वालमार्ट कंपनी, जो अमेरिका में बड़ेबड़े स्टोर चलाती है, को 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा में बेच डाला है. मुनाफा कंपनी ने अर्जित किया, बंसल बंधुओं ने फायदा उठाया. जब तक फ्लिपकार्ट बिन्नी व सचिन बंसलके हाथों में थी, लगातार नुकसान हुआ पर इन्वैस्टरों के सहयोग से व्यवसाय खूब फैला. फ्लिपकार्ट ने 17 करोड़ ग्राहकों को सामान बेचा था और यही कंपनी का असली उत्पादन है. इन 17 करोड़ ग्राहकों के नाम, पते, बैंक अकाउंट, खरीद की पसंद आज बहुत कीमती हो गए हैं. अगर यह डेटा भारतीय जनता पार्टी को इस्तेमाल करने को मिल जाए (क्या पता वह कर भी रही हो) तो नरेंद्र मोदी को भी जैकेटों, मोबाइलों के साथ बेचा जा सकता है.

ई कौमर्स आज के युग का नया बाजार बन गया है जिस में आप को घर बैठे चीजें या सेवाएं मिल सकती हैं. पर इस ई कौमर्स के कारण देश के छोटे व्यापारी कितना नुकसान सह रहे होंगे, इस का अंदाजा नहीं. आज युवाओं को इस तरह की कंपनियों के सामान को पीठ पर ढोने का काम तो मिल गया है पर वे अपनी छोटी दुकान नहीं चला सकते. सचिन व बिन्नी बंसल ने कमाल किया है पर अपने लिए कंपनी नहीं रखी, सिर्फ बैंक बैलेंस जमा किया है.

फ्रूटी एंड टेस्टी बाइट्स : आमूर जैलपीनो का तंदूरी झींगा

आमूर जैलपीनो का तंदूरी झींगा

सामग्री

– 4 प्रौंस

– 40 ग्राम हंग कर्ड

– 50 ग्राम फ्रैश मैंगो प्यूरी

– 20 ग्राम ताजा क्रीम

– 10 ग्राम अदरक का पेस्ट

– 10 ग्राम कालीमिर्च कुटी हुई

– 10 ग्राम यलो चिली पाउडर

– 10 ग्राम जैलपीनो – गार्निशिंग के लिए चिली औयल

– थोड़ी सी धनियापत्ती कटी

– नमक स्वादानुसार

विधि

प्रौंस की ऊपरी परत उतार कर उन्हें दही, अदरक के पेस्ट, क्रीम, मैंगो प्यूरी, कालीमिर्च, व चिली पाउडर के पेस्ट में 1/2 घंटा मैरीनेट करें. फिर इन्हें सीख में सैट कर के तंदूर में पकाएं. पकने के बाद चिली औयल और धनियापत्ती से सजा कर गरमगरम सर्व करें.

– व्यंजन सहयोग : सेलिब्रिटी शैफ अजय चोपड़ा

फ्रूटी एंड टेस्टी बाइट्स : टैको कुल्फी

टैको कुल्फी

सामग्री

– 120 ग्राम पिघला मक्खन

– 45 ग्राम अंडे का सफेद भाग

– 160 ग्राम आइसिंग शुगर

– 100 ग्राम आटा

– 50 ग्राम दूध

– कुल्फी (केसर)

विधि

मक्खन, चीनी और अंडे के सफेद भाग को मिला कर इस में आटा डालें व अच्छी तरह मिक्स करें. अब इस में दूध डाल कर घोल तैयार करें. उसे मोल्ड में डाल कर 180 डिग्री सेंटीग्रेड पर बेक करें. ठंडा कर टुकड़ों में काट लें और टैको शैल में सजा कर सर्व करें.

– व्यंजन सहयोग : सेलिब्रिटी शैफ अजय चोपड़ा                     

अपनी पत्नी के सामने अवौर्ड लेते हुए भावुक हुए विराट कोहली

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने दो सीजन (2016-17 और 2017-18 ) के लिए खिलाड़ियों को सम्मा के रूप में मिलने वाले अवौर्ड्स दिये हैं. इसमें भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली को दोनों साल का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर चुना गया. विराट कोहली बेंगलुरु में हुए इस अवौर्ड शो में अपनी पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ आए थें. अफगानिस्तान के खिलाफ हो रहे ऐतिहासिक टेस्ट मैच में भले ही वह नहीं खेल रहे हों, लेकिन विराट कोहली और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा बीसीसीआई के सालाना पुरस्कार समारोह में सबसे ज्यादा लाइमलाइट में रहे. इस अवौर्ड शो में विराट कोहली को लगातार दो सत्र के लिए पौली उमरीगर ट्रौफी (वर्ष के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर) प्रदान की गई.

शानदार फौर्म में चल रहे टीम इंडिया के कप्तान विराट कोहली ने 2016-17 और 2017-18 में जबर्दस्त प्रदर्शन किया. बीसीसीआई का सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर विश्व कप सितारे हरमनप्रीत कौर और स्मृति मंधाना को महिला वर्ग में यह पुरस्कार दिया गया. वह फिलहाल आईपीएल 2018 के दौरान गर्दन में लगी चोट का उपचार करा रहे हैं जिसकी वजह से वह सर्रे के लिए काउंटी क्रिकेट भी नहीं खेल सके. विराट कोहली 15 जून को एनसीए में फिटनेस टेस्ट देंगे.

विराट कोहली इस अवौर्ड फंक्शन में पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ आए थे. विराट कोहली को टीम इंडिया के कोच रवि शास्त्री ने अवौर्ड दिया. अवौर्ड लेने के बाद विराट कोहली इमोशनल हो गए जिसके बाद आगे उन्होंने कहा की आज मेरी पत्नी यहां मौजूद है. इसलिये इस अवौर्ड के रूप में मिल रहे सम्मान की अहमियत ज्यादा बढ़ जाती है. वो काफी स्पेशल हैं. मैं खुश हूं कि पिछले साल यह अवौर्ड नहीं दिया गया था. अनुष्का के सामने यह अवौर्ड लेना और भी स्पेशल हैं.” 9 सेकेंड का विराट कोहली का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

बता दें कि अनुष्का शर्मा भी वहां विराट कोहली को सपोर्ट करती दिखीं. विराट को जब अवौर्ड दिया गया तब अनुष्का ने खूब तालियां बजाईं और जब विराट ने उनका जिक्र किया तो अनुष्का के चेहरे पर मुस्कान आ गई.

विराट कोहली ने 2016-17 सत्र में 13 टेस्ट में 1332 रन बनाए, जबकि 27 वनडे में 1516 रन बनाए. वहीं 2017-18 में खेले गए छह टेस्ट में कोहली ने 89.6 की औसत से 896 रन बनाए और वनडे में उनका औसत 75.50 रहा. कोहली को हर सत्र के लिए पुरस्कार के तौर पर 15 लाख रुपए दिए गए.

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अवौर्ड लेने के बाद विराट और अनुष्का मुंबई वापस लौट आए हैं. विराट और अनुष्का को मुंबई एयरपोर्ट पर हाथों में हाथ डाले स्पौट किया गया.

इस मौके पर पिछले जमाने के और मौजूदा पीढी के भारतीय क्रिकेटर एक ही छत के नीचे मौजूद थे. अंशुमान गायकवाड़ और सुधा शाह को सी के नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट सम्मान दिया गया. जलज सक्सेना, परवेज रसूल और क्रुणाल पांड्या को घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन का पुरस्कार मिला. जलज और रसूल को रणजी ट्राफी में सर्वश्रेष्ठ हरफनमौला और कृणाल को विजय हजारे वनडे चैम्पियनशिप में उनके प्रदर्शन के लिए पुरस्कार मिले.

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