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बस तुम्हारी हां की देर है : सुहागरात पर दिव्या के साथ क्या हुआ

अपनीशादी की बात सुन कर दिव्या फट पड़ी. कहने लगी, ‘‘क्या एक बार मेरी जिंदगी बरबाद कर के आप सब को तसल्ली नहीं हुई जो फिर से… अरे छोड़ दो न मुझे मेरे हाल पर. जाओ, निकलो मेरे कमरे से,’’ कह कर उस ने अपने पास पड़े कुशन को दीवार पर दे मारा.

नूतन आंखों में आंसू लिए कुछ न बोल कर कमरे से बाहर आ गई. आखिर उस की इस हालत की जिम्मेदार भी तो वे ही थे. बिना जांचतड़ताल किए सिर्फ लड़के वालों की हैसियत देख कर उन्होंने अपनी इकलौती बेटी को उस हैवान के संग बांध दिया. यह भी न सोचा कि आखिर क्यों इतने पैसे वाले लोग एक साधारण परिवार की लड़की से अपने बेटे की शादी करना चाहते हैं? जरा सोचते कि कहीं दिव्या के दिल में कोई और तो नहीं बसा है… वैसे दबे मुंह ही, पर कितनी बार दिव्या ने बताना चाहा कि वह अक्षत से प्यार करती है, लेकिन शायद उस के मातापिता यह बात जानना ही नहीं चाहते थे.

अक्षत और दिव्या एक ही कालेज में पढ़ते थे. दोनों अंतिम वर्ष के छात्र थे. जब कभी अक्षत दिव्या के संग दिख जाता, नूतन उसे ऐसे घूर कर देखती कि बेचारा सहम उठता. कभी उस की हिम्मत ही नहीं हुई यह बताने की कि वह दिव्या से प्यार करता है पर मन ही मन दिव्या की ही माला जपता रहता था और दिव्या भी उसी के सपने देखती रहती थी. ‘‘नीलेश अच्छा लड़का तो है ही, उस की हैसियत भी हम से ऊपर है. अरे, तुम्हें तो खुश होना चाहिए जो उन्होंने अपने बेटे के लिए तुम्हारा हाथ मांगा, वरना क्या उन के बेटे के लिए लड़कियों की कमी है इस दुनिया में?’’

दिव्या के पिता मनोहर ने उसे समझाते हुए कहा था, पर एक बार भी यह जानने की कोशिश नहीं की कि दिव्या मन से इस शादी के लिए तैयार है भी या नहीं. मांबाप की मरजी और समाज में उन की नाक ऊंची रहे, यह सोच कर भारी मन से ही सही पर दिव्या ने इस रिश्ते के लिए हामी भर दी. वह कभी नहीं चाहेगी कि उस के कारण उस के मातापिता दुखी हों. कहने को तो लड़के वाले बहुत पैसे वाले थे लेकिन फिर भी उन्होंने मुंहमांगा दहेज पाया.

‘अब हमारी एक ही तो बेटी है. हमारे बाद जो भी है सब उस का ही है. तो फिर क्या हरज है अभी दें या बाद में’ यह सोच कर मनोहर और नूतन उन की हर डिमांड पूरी करते रहे, पर उन में तो संतोष नाम की चीज ही नहीं थी. अपने नातेरिश्तेदार को वे यह कहते अघाते नहीं थे कि उन की बेटी इतने बड़े घर में ब्याह रही है. लोग भी सुन कर कहते कि भई मनोहर ने तो इतने बड़े घर में अपनी बेटी का ब्याह कर गंगा नहा ली. दिल पर पत्थर रख दिव्या भी अपने प्यार को भुला कर ससुराल चल पड़ी. विदाई के वक्त उस ने देखा एक कोने में खड़ा अक्षत अपने आंसू पोंछ रहा था. ससुराल पहुंचने पर नववधू का बहुत स्वागत हुआ. छुईमुई सी घूंघट काढ़े हर दुलहन की तरह वह भी अपने पति का इंतजार कर रही थी. वह आया तो दिव्या का दिल धड़का और फिर संभला भी़ लेकिन सोचिए जरा, क्या बीती होगी उस लड़की पर जिस की सुहागरात पर उस का पति यह बोले कि वह उस के साथ सबंध बनाने में सक्षम नहीं है और वह इस बात के लिए उसे माफ कर दे.

सुन कर धक्क रह गया दिव्या का कलेजा. आखिर क्या बीती होगी उस के दिल पर जब उसे यह पता चला कि उस का पति नामर्द है और धोखे में रख कर उस ने उसे ब्याह लिया? पर क्यों, क्यों जानबूझ कर उस के साथ ऐसा किया गया? क्यों उसे और उस के परिवार को धोखे में रखा गया? ये सवाल जब उस ने अपने पति से पूछे तो कोई जवाब न दे कर वह कमरे से बाहर चला गया. दिव्या की पूरी रात सिसकतेसिसकते ही बीती. उस की सुहागरात एक काली रात बन कर रह गई.

सुबह नहाधो कर उस ने अपने बड़ों को प्रमाण किया और जो भी बाकी बची रस्में थीं, उन्हें निभाया. उस ने सोचा कि रात वाली बात वह अपनी सास को बताए और पूछे कि क्यों उस के जीवन के साथ खिलवाड़ किया गया? लेकिन उस की जबान ही नहीं खुली यह कहने को. कुछ समझ नहीं आ रहा था उसे कि करे तो करे क्या, क्योंकि रिसैप्शन पर भी सब लोगों के सामने नीलेश उस के साथ ऐसे बिहेव कर रहा था जैसे उन की सुहागरात बहुत मजेदार रही. हंसहंस कर वह अपने दोस्तों को कुछ बता रहा था और वे चटकारे लेले कर सुन रहे थे. दिव्या समझ गई कि शायद उस के घर वालों को नीलेश के बारे में कुछ पता न हो. उन सब को भी उस ने धोखे में रखा हुआ होगा. पगफेर पर जब मनोहर उसे लिवाने आए और पूछने पर कि वह अपनी ससुराल में खुश है, दिव्या खून का घूंट पी कर रह गई. फिर उस ने वही जवाब दिया जिस से मनोहर और नूतन को तसल्ली हो.

एक अच्छे पति की तरह नीलेश उसे उस के मायके से लिवाने भी आ गया. पूरे सम्मान के साथ उस ने अपने साससुसर के पांव छूए और कहा कि वे दिव्या की बिलकुल चिंता न करें, क्योंकि अब वह उन की जिम्मेदारी है. धन्य हो गए थे मनोहर और नूतन संस्कारी दामाद पा कर. लेकिन उन्हें क्या पता कि सचाई क्या है? वह तो बस दिव्या ही जानती थी और अंदर ही अंदर जल रही थी. दिव्या को अपनी ससुराल आए हफ्ते से ऊपर का समय हो चुका था पर इतने दिनों में एक बार भी नीलेश न तो उस के करीब आया और न ही प्यार के दो बोल बोले, हैरान थी वह कि आखिर उस के साथ हो क्या रहा है और वह चुप क्यों है. बता क्यों नहीं देती सब को कि नीलेश ने उस के साथ धोखा किया है? लेकिन किस से कहे और क्या कहे, सोच कर वह चुप हो जाती.

एक रात नींद में ही दिव्या को लगा कि कोई उस के पीछे सोया है. शायद नीलेश है, उसे लगा लेकिन जिस तरह से वह इंसान उस के शरीर पर अपना हाथ फिरा रहा था उसे शंका हुई. जब उस ने लाइट जला कर देखा तो स्तब्ध रह गई, क्योंकि वहां नीलेश नहीं बल्कि उस का पिता था जो आधे कपड़ों में उस के बैड पर पड़ा उसे गंदी नजरों से घूर रहा था. ‘‘आ…आप, आप यहां मेरे कमरे में… क… क्या, क्या कर रहे हैं पिताजी?’’ कह कर वह अपने कपड़े ठीक करने लगी. लेकिन जरा उस का ढीठपन तो देखो, उस ने तो दिव्या को खींच कर अपनी बांहों में भर लिया और उस के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करने लगा. दिव्या को अपनी ही आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था कि उस का ससुर ही उस के साथ…

‘‘मैं, मैं आप की बहू हूं. फिर कैसे आप मेरे साथ…’’ वह डर के मारे हकलाते हुए बोली. ‘‘ बहू,’’ ठहाके मार कर हंसते हुए वह बोला, ‘‘क्या तुम्हें पता नहीं है कि तुम्हें मुझ से ही वारिस पैदा करना है और इसीलिए ही तो हम तुम्हें इस घर में बहू बना कर लाए हैं.’’

सुन कर दिव्या को लगा जैसे किसी ने उस के कानों में पिघला शीशा डाल दिया हो. वह कहने लगी, ‘‘यह कैसी पागलों सी बातें कर रहे हैं आप? क्या शर्मोहया बेच खाई है?’’ पर वह कहां कुछ सुननेसमझने वाला था. फिर उस ने दिव्या के ऊपर झपट्टा मारा. लेकिन उस ने अपनेआप को उस दरिंदे से बचाने के लिए जैसे ही दरवाजा खोला, सामने ही नीलेश और उस की मां खड़े मिले. घबरा कर वह अपनी सास से लिपट गई और रोते हुए कहने लगी कि कैसे उस के ससुर उस के साथ जबरदस्ती करना चाह रहे हैं… उसे बचा ले.

‘‘बहुत हो चुका यह चूहेबिल्ली का खेल… कान खोल कर सुन लो तुम कि ये सब जो हो रहा है न वह सब हमारी मरजी से ही हो रहा है और हम तुम्हें इसी वास्ते इस घर में बहू बना कर लाए हैं. ज्यादा फड़फड़ाओ मत और जो हो रहा है होने दो.’’

अपनी सास के मुंह से भी ऐसी बात सुन कर दिव्या का दिमाग घूम गया. उसे लगा वह बेहोश हो कर गिर पड़ेगी. फिर अपनेआप को संभालते हुए उस ने कहा, ‘‘तो क्या आप को भी पता है कि आप का बेटा…’’ ‘‘हां और इसीलिए तो तुम जैसी साधारण लड़की को हम ने इस घर में स्थान दिया वरना लड़कियों की कमी थी क्या हमारे बेटे के लिए.’’

‘‘पर मैं ही क्यों… यह बात हमें बताई क्यों नहीं गईं. ये सारी बातें शादी के पहले…

क्यों धोखे में रखा आप सब ने हमें? बताइए, बताइए न?’’ चीखते हुए दिव्या कहने लगी, ‘‘आप लोगों को क्या लगता है मैं यह सब चुपचाप सहती रहूंगी? नहीं, बताऊंगी सब को तुम सब की असलियत?’’ ‘‘क्या कहा, असलियत बताएगी? किसे? अपने बाप को, जो दिल का मरीज है…सोच अगर तेरे बाप को कुछ हो गया तो फिर तेरी मां का क्या होगा? कहां जाएगी वह तुझे ले कर? दुनिया को तो हम बताएंगे कि कैसे आते ही तुम ने घर के मर्दों पर डोरे डलने शुरू कर दिए और जब चोरी पकड़ी गई तो उलटे हम पर ही दोष मढ़ रही है,’’ दिव्या के बाल खींचते हुए नीलेश कहने लगा, ‘‘तुम ने क्या सोचा कि तू मुझे पसंद आ गई थी, इसलिए हम ने तुम्हारे घर रिश्ता भिजवाया था? देख, करना तो तुम्हें वही पड़ेगा जो हम चाहेंगे, वरना…’’ बात अधूरी छोड़ कर उस ने उसे उस के कमरे से बाहर निकाल दिया.

पूरी रात दिव्या ने बालकनी में रोते हुए बिताई. सुबह फिर उस की सास कहने लगी, ‘‘देखो बहू, जो हो रहा है होने दो… क्या फर्क पड़ता है कि तुम किस से रिश्ता बना रही हो और किस से नहीं. आखिर हम तो तुम्हें वारिस जनने के लिए इस घर में बहू बना कर लाए हैं न.’’ इस घर और घर के लोगों से घृणा होने लगी थी दिव्या को और अब एक ही सहारा था उस के पास. उस के ननद और ननदोई. अब वे ही थे जो उसे इस नर्क से आजाद करा सकते थे. लेकिन जब उन के मुंह से भी उस ने वही बातें सुनीं तो उस के होश उड़ गए. वह समझ गई कि उस की शादी एक साजिश के तहत हुई है.

3 महीने हो चुके थे उस की शादी को. इन 3 महीनों में एक दिन भी ऐसा नहीं गया जब दिव्या ने आंसू न बहाए हों. उस का ससुर जिस तरह से उसे गिद्ध दृष्टि से देखता था वह सिहर उठती थी. किसी तरह अब तक वह अपनेआप को उस दरिंदे से बचाए थी. इस बीच जब भी मनोहर अपनी बेटी को लिवाने आते तो वे लोग यह कह कर उसे जाने से रोक देते कि अब उस के बिना यह घर नहीं चल सकता. उन के कहने का मतलब था कि वे लोग दिव्या को बहुत प्यार करते हैं. इसीलिए उसे कहीं जाने नहीं देना चाहते हैं. मन ही मन खुशी से झूम उठते मनोहर यह सोच कर कि उन की बेटी का उस घर में कितना सम्मान हो रहा है. लेकिन असलियत से वे वाकिफ नहीं थे कि उन की बेटी के साथ इस घर में क्याक्या हो रहा है…दिव्या भी अपने पिता के स्वास्थ्य के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहती थी, इसलिए चुप थी. लेकिन उस रात तो हद हो गई जब उसे उस के ससुर के साथ एक कमरे में बंद कर दिया गया. वह चिल्लाती रही पर किसी ने दरवाजा नहीं खोला. क्या करती बेचारी? उठा कर फूलदान उस दरिंदे के सिर पर दे मारा और जब उस के चिल्लाने की आवाजों से वे सब कमरे में आए तो वह सब की नजरें बचा कर घर से भाग निकली.

अपनी बेटी को यों अचानक अकेले और बदहवास अवस्था में देख कर मनोहर और नूतन हैरान रह गए, फिर जब उन्हें पूरी बात का पता चली तो जैसे उन के पैरों तले की जमीन ही खिसक गई. आननफानन में वे अपनी बेटी की ससुराल पहुंच गए और जब उन्होंने उन से अपनी बेटी के जुल्मों का हिसाब मांगा और कहा कि क्यों उन्होंने उन्हें धोखे में रखा तो वे उलटे कहने लगे कि ऐसी कोई बात नहीं. उन्होंने ही अपनी पागल बेटी को उन के बेटे के पल्ले बांध दिया. धोखा तो उन के साथ हुआ है. ‘‘अच्छा तो फिर ठीक है, आप अपने बेटे की जांच करवाएं कि वह नपुंसक है या नहीं और मैं भी अपनी बेटी की दिमागी जांच करवाता हूं. फिर तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा न? तुम लोग क्या समझे कि हम चुप बैठ जाएंगे? नहीं, इस भ्रम में मत रहना. तुम सब ने अब तक मेरी शालीनता देखी है पर अब मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि मैं क्या कर सकता हूं. चाहे दुनिया की सब से बड़ी से बड़ी अदालत तक ही क्यों न जाना पड़े हमें, पर छोड़ूंगा नहीं…तुम सब को तो जेल होगी ही और तुम्हारा बाप, उसे तो फांसी न दिलवाई मैं ने तो मेरा भी नाम मनोहर नहीं,’’ बोलतेबोलते मनोहर का चेहरा क्रोध से लाल हो गया.

मनोहर की बातें सुन कर सब के होश उड़ गए, क्योंकि झूठे और गुनहगार तो वे लोग थे ही अत: दिन में ही तारे नजर आने लगे उन्हें. ‘‘क्या सोच रहे हो रोको उसे. अगर वह पुलिस में चला गया तो हम में से कोई नहीं बचेगा और मुझे फांसी पर नहीं झूलना.’’ अपना पसीना पोछते हुए नीलेश के पिता ने कहा.

उन लोगों को लगने लगा कि अगर यह बात पुलिस तक गई तो इज्जत तो जाएगी ही, उन का जीवन भी नहीं बचेगा. बहुत गिड़गिड़ाने पर कि वे जो चाहें उन से ले लें, जितने मरजी थप्पड़ मार लें, पर पुलिस में न जाएं. ‘कहीं पुलिसकानून के चक्कर में उन की बेटी का भविष्य और न बिगड़ जाए,’ यह सोच कर मनोहर को भी यही सही लगा, लेकिन उन्होंने उन के सामने यह शर्त रखी कि नीलेश दिव्या को जल्द से जल्द तलाक दे कर उसे आजाद कर दे.

मरता क्या न करता. बगैर किसी शर्त के नीलेश ने तलाक के पेपर साइन कर दिए, पहली सुनवाई में ही फैसला हो गया.

वहां से तो दिव्या आजाद हो गई, लेकिन एक अवसाद से घिर गई. जिंदगी पर से उस का विश्वास उठ गया. पूरा दिन बस अंधेरे कमरे में पड़ी रहती. न ठीक से कुछ खाती न पीती और न ही किसी से मिलतीजुलती. ‘कहीं बेटी को कुछ हो न जाए, कहीं वह कुछ कर न ले,’ यह सोचसोच कर मनोहर और नूतन की जान सूखती रहती. बेटी की इस हालत का दोषी वे खुद को ही मानने लगे थे. कुछ समझ नहीं आ रहा था उन्हें कि क्या करें जो फिर से दिव्या पहले की तरह हंसनेखिलखिलाने लगे. अपनी जिंदगी से उसे प्यार हो जाए.

‘‘दिव्या बेटा, देखो तो कौन आया है,’’ उस की मां ने लाइट औन करते हुए कहा तो उस ने नजरें उठा कर देखा पर उस की आंखें चौंधिया गईं. हमेशा अंधेरे में रहने और एकाएक लाइट आंखों पर पड़ने के कारण उसे सही से कुछ नहीं दिख रहा था, पर जब उस ने गौर से देखा तो देखती रह गई, ‘‘अक्षत,’’ हौले से उस के मुंह से निकला.

नूतन और मनोहर जानते थे कि कभी दिव्या और अक्षत एकदूसरे से प्यार करते थे पर कह नहीं पाए. शायद उन्हें बोलने का मौका ही नहीं दिया और खुद ही वे उस की जिंदगी का फैसला कर बैठे. ‘लेकिन अब अक्षत ही उन की बेटी के होंठों पर मुसकान बिखेर सकता था. वही है जो जिंदगी भर दिव्या का साथ निभा सकता है,’ यह सोच कर उन्होंने अक्षत को उस के सामने ला कर खड़ा कर दिया. बहुत सकुचाहट के बाद अक्षत ने पूछा, ‘‘कैसी हो दिव्या?’’ मगर उस ने कोई जवाब

नहीं दिया. ‘‘लगता है मुझे भूल गई? अरे मैं अक्षत हूं अक्षत…अब याद आया?’’ उस ने उसे हंसाने के इरादे से कहा पर फिर भी उस ने कोई जवाब नहीं दिया. धीरेधीरे अक्षत उसे पुरानी बातें, कालेज के दिनों की याद दिलाने लगा. कहने लगा कि कैसे वे दोनों सब की नजरें बचा कर रोज मिलते थे. कैसे कैंटीन में बैठ कर कौफी पीते थे. अक्षत उसे उस के दुख भरे अतीत से बाहर लाने की कोशिश कर रहा था, पर दिव्या थी कि बस शून्य में ही देखे जा रही थी.

दिव्या की ऐसी हालत देख कर अक्षत की आंखों में भी आंसू आ गए. कहने लगा, ‘‘आखिर तुम्हारी क्या गलती है दिव्या जो तुम ने अपनेआप को इस कालकोठरी में बंद कर रखा है? ऐसा कर के क्यों तुम खुद को सजा दे रही हो? क्या अंधेरे में बैठने से तुम्हारी समस्या हल हो जाएगी या जिस

ने तुम्हारे साथ गलत किया उसे सजा मिल जाएगी, बोलो?’’ ‘‘तो मैं क्या करूं अक्षत, क्या कंरू मैं? मैं ने तो वही किया न जो मेरे मम्मीपापा ने चाहा, फिर क्या मिला मुझे?’’ अपने आंसू पोंछते हुए दिव्या कहने लगी. उस की बातें सुन कर नूतन भी फफकफफक कर रोने लगीं.

दिव्या का हाथ अपनी दोनों हथेलियों में दबा कर अक्षत कहने लगा, ‘‘ठीक है, कभीकभी हम से गलतियां हो जाती हैं. लेकिन इस का यह मतलब तो नहीं है कि हम उन्हीं गलतियों

को ले कर अपने जीवन को नर्क बनाते रहें… जिंदगी हम से यही चाहती है कि हम अपने उजाले खुद तय करें और उन पर यकीन रखें. जस्ट बिलीव ऐंड विन. अवसाद और तनाव के अंधेरे को हटा कर जीवन को खुशियों के उजास से भरना कोई कठिन काम नहीं है, बशर्ते हम में बीती बातों को भूलने की क्षमता हो. ‘‘दिव्या, एक डर आ गया है तुम्हारे

अंदर… उस डर को तुम्हें बाहर निकालना होगा. क्या तुम्हें अपने मातापिता की फिक्र नहीं है कि उन पर क्या बीतती होगी, तुम्हारी ऐसी हालत देख कर. अरे, उन्होंने तो तुम्हारा भला ही चाहा था न… अपने लिए, अपने मातापिता के लिए,

तुम्हें इस गंधाते अंधेरे से निकलना ही होगा दिव्या…’’ अक्षत की बातों का कुछकुछ असर होने लगा था दिव्या पर. कहने लगी, ‘‘हम अपनी खुशियां, अपनी पहचान, अपना सम्मान दूसरों से मांगने लगते हैं. ऐसा क्यों होता है अक्षत?’’

‘‘क्योंकि हमें अपनी शक्ति का एहसास नहीं होता. अपनी आंखें खोल कर देखो गौर से…तुम्हारे सामने तुम्हारी मंजिल है,’’ अक्षत की बातों ने उसे नजर उठा कर देखने पर मजबूर कर दिया. जैसे वह कह रहा हो कि दिव्या, आज भी मैं उसी राह पर खड़ा तुम्हारा इंतजार कर रहा हूं, जहां तुम मुझे छोड़ कर चली गई थी. बस तुम्हारी हां की देर है दिव्या. फिर देखो कैसे मैं तुम्हारी जिंदगी खुशियों से भर दूंगा. अक्षत के सीने से लग दिव्या बिलखबिलख कर रो पड़ी जैसे सालों का गुबार निकल रहा हो उस की आंखों से बह कर. अक्षत ने भी उसे रोने दिया ताकि उस के सारे दुखदर्द उन आंसुओं के सहारे बाहर निकल जाएं और वह अपने डरावने अतीत से बाहर निकल सके.

बाहर खड़े मनोहर और नूतन की आंखों से भी अविरल आंसू बहे जा रहे थे पर आज ये खुशी के आंसू थे.

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भोजपुरी अदाकारा आलीशा रावत बनीं फिल्म निर्माता

जब प्रियंका चोपड़ा, अनुष्का शर्मा सहित कई बौलीवुड अभिनेत्रियां फिल्म निर्माण के क्षेत्र में कदम रखकर सफलता दर्ज करा रही हैं, तो भला भोजपुरी फिल्मों की अभिनेत्री आलीशा रावत कैसे पीछे रह जातीं. वह भी अब फिल्म निर्माता बन गयी हैं.

अभिनेत्री आलीशा रावत अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘‘गोंडा फिल्म विलेज प्रोडक्शन हाउस’’के तहत   भोजपुरी फिल्म ‘‘बस गइलू तू दिलो जान में’’का निर्माण कर रही हैं, जिसमें वह स्वयं नवोदित अभिनेता करण वर्मा के साथ अभिनय भी करेंगी. सुनील मांझी के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्म की शूटिंग शीघ्र ही महाराजगंज, लखनऊ, गोंडा, बिहार एवं नेपाल की खूबसूरत लोकेशनों पर शुरु होगी.

एक्शन व रोमांस से भरपूर पारिवारिक फिल्म‘‘बस गइलू तू दिलो जान में’’में नवोदित करण वर्मा, अलीशा रावत, कृष्णा कुमार, अर्चना सिंह, मनोज टाईगर, बालेश्वर सिंह, जगदीश यादव, रेखा वर्मा, रंजीत प्रजापति, कमरुद्दीन खान, कासिम खान, प्रमोद, कुलदीप भारती, नागेन्द्र राव, बिमल पांडेय, आदित्य राज, विपिन शर्मा, गुड्डू सिंह, संजीत कुमार, प्रयाग राज, राजेन्द्र रंगबाज आदि की मुख्य भूमिकाएं होंगी..

नवोदित अभिनेता करण वर्मा पूर्व में कई भोजपुरी म्यूजिक वीडियो अलबमों में काम कर चुके हैं. इस फिल्म में कुल 7 कर्णप्रिय गीत हैं. जिनके पार्श्व गायक हैं आलोक कुमार, इंदू सोनाली, पामेला जैन, राजेश सिंह राहत हैं व संगीतकार दामोदार राज हैं.

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केजरीवाल-बैजल-मोदी

दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुरी तरह खार खाए हुए हैं. मई 2014 में हुए आम चुनावों में शानदार जीत हासिल करने के बाद कुछ महीनों में हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों में अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें जीतने वाली पार्टी को 67 के मुकाबले 3 पर खड़ा कर दिया तो भाजपा की नाक शूर्पणखा की तरह कट गई. संविधान के लिखित प्रावधानों की आड़ में अब अरविंद केजरीवाल की सीता (सरकार) को हरने का प्रयास किया जा रहा है. अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में कोई चमत्कार नहीं किया लेकिन संविधान ने भी वास्तव में दिल्ली सरकार को बहुत कम अनियंत्रित अधिकार दिए हैं. वहीं जिन अधिकारों को प्रधानमंत्री के निर्देश पर उपराज्यपाल को कभीकभार इस्तेमाल करना चाहिए था, उन्हें रोज हर काम में किया जा रहा है. हर फाइल पर उपराज्यपाल महीनों बैठे रहते हैं और फैसले पर नुक्ताचीनी करते हैं.

नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार दिल्ली सरकार के साथ उस महापंडित की तरह व्यवहार कर रही है जो हर स्मृति, हर कुंडली, हर रिवाज को खोले बैठा है. मोदी की सरकार केजरीवाल की सरकार के हर फैसले को गलत ठहराने में लगी है, क्योंकि उस का उद्देश्य तो अरविंद केजरीवाल व उन की सरकार को हर जगह अपमानित करने का है. नरेंद्र मोदी सरकार ऐसा हर उस राज्य सरकार के साथ कर रही है जो अपने विज्ञापनों में भगवा रंग का इस्तेमाल नहीं करती और नरेंद्र मोदी का फोटो नहीं लगाती है. दिल्ली के मुख्यमंत्री उपराज्यपाल के निवास पर धरने पर बैठें, यह राजकाज की पराकाष्ठा है और खासतौर पर तब जब उन के साथ लगभग कैदियों सा व्यवहार हो रहा हो. कानूनीतौर पर राजभवन का खर्च अरविंद केजरीवाल की सरकार देती है पर उपराज्यपाल अपने संवैधानिक मालिक नरेंद्र मोदी के इशारों पर इस सरकार को परेशान करने का काम कर रहे हैं.

अरविंद केजरीवाल अद्भुत किस्म के नेता हैं क्योंकि वे कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी की परंपराओं की जंजीरों में नहीं बंधे. 4 साल तक सरकार चलाने के बावजूद उपचुनाव में भी जीत दर्ज करा रहे हैं. यह भाजपा के लिए घोर चिंता का विषय है और वह नहीं चाहती कि यह नौसिखिया नेता दिल्लीवासियों के लिए अनूठे काम कर पाए. आम आदमी पार्टी का कोई भी फैसला ऐसा नहीं है जो केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जाता हो या दिल्ली की जनता के लिए हानिकारक हो. किसी भी फाइल में ऐसी कोई सिफारिश नहीं है जिस में अरविंद केजरीवाल किसी विशेष को लाभ पहुंचाना चाहते हों. अरविंद केजरीवाल केवल अपने (भारी) बहुमत के अधिकार का उपयोग कर रहे हैं पर चूंकि वे भाजपाश्रेष्ठ नहीं हैं, इसलिए उपराज्यपाल अनिल बैजल प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के इशारे पर उन्हें दबा कर रखते हैं.

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हैल्थी सैक्स स्पैशल : उम्र को मात देते 50 + सितारे

खान तिकड़ी अब 50 प्लस हो चुकी है और आज अपने से आधी उम्र की हीरोइनों के साथ फिल्मों में रोमांस फरमा रही है. देखा जाए तो फिल्म अभिनेताओं ने आम लोगों को यह प्रेरणा दी है कि बढ़ती उम्र में भी अपनी बौडी को कैसे फिट रखा जा सकता है. सलमान ने जिस बौडी दिखाऊ परंपरा की शुरुआत की थी उसे 53 पार कर चुके आमिर, 50 के हो चुके अक्षय और 52 के शाहरुख आज तक अच्छे से निभा रहे हैं.

इंडस्ट्री में आज एक भी कलाकार नहीं है जो 20 प्लस हो कर सितारा की श्रेणी में आता हो. शीर्ष सितारा की कुरसी पर 50 प्लस कलाकारों का कब्जा बरकरार है. इन्होंने लोगों को दिखा दिया है कि उम्र चाहे कुछ भी हो, फिट रहने के लिए जज्बा होना चाहिए.

मिस्टर परफैक्ट

आमिर खान बौलीवुड में इकलौते ऐसे अभिनेता हैं जो किरदार के अनुसार खुद को पूरी तरह ढाल लेते हैं. जब पहली बार ‘गजनी’ में आमिर ने सिक्स पैक एब्स दिखाए तो लोगों को यकीन करना मुश्किल हो गया कि यह वही चौकलेटी बौय है जो कुछ सालों पहले सिर्फ रोमांटिक फिल्में करता था. फिल्म ‘दंगल’ में अपना वजन 70 से 98 किलो करने के लिए वे अमेरिका चले गए थे और वहां न्यूट्रीशनिस्ट व जिम ट्रेनर की देखरेख में उन्होंने अपना वजन बढ़ाया और फिल्म पूरी होने के बाद फिर कम किया.

आमिर के डेली रूटीन में ट्रैकिंग, साइक्लिंग, स्विमिंग और टैनिस खेलना शामिल है. वे अपने कैरेक्टर के अनुसार वजन घटाने के लिए रोज अपना शैड्यूल तैयार करते हैं.

खिलाड़ी कुमार की बौक्सिंग

बौलीवुड के खिलाड़ी अक्षय कुमार की फिल्मों में ऐंट्री ही उन के स्टंट और दमदार फिजिक से हुई थी. अक्षय कुमार आज 50 वर्ष के हो गए हैं, फिर भी अपनी दिनचर्या में स्पोर्ट्स को पहले नंबर पर रखते हैं. वे आज भी हफ्ते में 3 दिन बास्केटबौल खेलते हैं और एक बार में 10 मील दौड़ते हैं.

अक्षय कराटे में ब्लैक बैल्ट होल्डर भी हैं, इसलिए किक, बौक्सिंग और कराटे की प्रैक्टिस भी उन की दिनचर्या में शामिल है. बौडी को फिट और स्टेमिना को बनाए रखने के लिए वे वाक और ट्रैक का सहारा लेते हैं. खाने के मामले में भी अक्षय बड़े पक्के हैं. वे घर पर बना हुआ खाना और फल व सब्जियां खाना पसंद करते हैं.

बादशाह खान की बादशाहत

फिल्म ‘ओम शांति ओम’ में शाहरुख के सिक्स पैक एब्स को कौन भूल सकता है. खुद को फिट रखने के लिए वे कड़ी ट्रेनिंग, वेट लिफ्टिंग और कार्डियोवैस्कुलर ऐक्सरसाइज करते हैं. आज भी वे रोजाना 10 गिलास पानी पीते हैं और 30 मिनट की कार्डियोवैस्कुलर ऐक्सरसाइज फैट बर्न करने के लिए करते हैं.

52 साल की उम्र में भी वे 100 पुश अप्स और 60 पुल अप्स करना कभी नहीं भूलते. अगर समय मिला तो मौर्निंग वाक और साइक्लिंग के साथ वे बेली डांस भी करते हैं.

सलमान के बाईसैप्स

अगर बौलीवुड में बौडी दिखाने का श्रेय किसी को जाता है तो वे सलमान खान हैं जिन्होंने अपनी पहली फिल्म ‘मैं ने प्यार किया’ में पहली बार अपनी शर्ट उतार कर बौडी दिखाई थी. उन के पास बेहतरीन बाइसैप्स, ट्राइसैप्स और शानदार एब्स हैं. सलमान अपने एब्स को शेप में रखने के लिए कार्डियोवैस्कुलर ऐक्सरसाइज और वर्कआउट करते हैं. इस के अलावा 10 किलोमीटर तक साइकिल भी चलाते हैं.

आज भी नईनई हीरोइनों के साथ फिल्म बनाने वाले ये अधेड़ हीरो अपनी फिटनैस और स्टारडम से कहीं से भी नहीं लगते कि वे किसी भी मामले में आज के हीरो वरुण धवन और टाइगर श्रौफ से पीछे हैं. सोशल मीडिया पर इन की फैन फौलोइंग और फिल्मों का हिट होना इस बात का प्रमाण है कि अभी भी बौलीवुड की सितारा कुरसी पर इन्हीं 50 प्लस सितारों का कब्जा बरकरार रहेगा.

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हैल्थी सैक्स स्पैशल : सैक्स लाइफ में तड़का लगाते इनरवियर्स

रीता की लाइफ से सैक्स धीरेधीरे गायब होता जा रहा था. वह इस का कारण नहीं जान पा रही थी. एक दिन अनजाने में उस ने सैक्सी लौंजरी पहनी जिसे देख उस का पति रोहित उस की ओर तुरंत अट्रैक्ट हो गया और उसे इसी तरह की लौंजरी पहनने की सलाह दी. इस सलाह पर अमल करने के बाद उन पतिपत्नी की सैक्स लाइफ फिर से खुशियों से भर गई. यह सिर्फ एक उदाहरण ही नहीं है बल्कि अगर हम बात करें मौडल्स की, तो वे बिकिनी वगैरह के कारण ही चर्चा में रहती हैं. उन की इसी झलक को पाने के लिए लोग दीवाने रहते हैं. दरअसल, सैक्सी दिखना व देखना सभी को अच्छा लगता है. सो, आप भी लेटैस्ट व सैक्सी गारमैंट्स पहन कर खुद को बनाएं ज्यादा सैक्सी.

ब्रा हो स्टाइलिश

भले ही आप 35 वर्ष की उम्र क्रौस कर गई हों लेकिन मन में यह सोच न पालें कि अब क्या जरूरत है इतनी स्टाइलिश ब्रा पहनने की. इस उम्र में भी आप की सैक्सी लौंजरी आप के पार्टनर को आप की ओर खींचेगी.

आप ही सोचिए, अगर आप अपने पार्टनर के पास बैठी हैं और आप की नैट वाली स्ट्रिप दिखाई दे तो क्या पार्टनर आप को अपनी बांहों में लेने को मजबूर नहीं हो जाएगा. सो, ट्राई करें नैट वाली, विदआउट स्ट्रिप, पैडिड, कलरफुल, कंफर्टेबल, केज व लौंगलाइन ब्रा पहनने की, क्योंकि जहां फिटिंग के मामले में इन का कोई जवाब नहीं वहीं स्टाइल भी इन का जबरदस्त होता है.

पैंटीज हो मस्तमस्त

सैक्स यानी समर्पण. तो फिर हिचक कैसी. जब आप और आप का पार्टनर रूम में हैं तो ब्रा के साथ पैंटी भी हौट हो. और हो सके तो दोनों मैचिंग की हों, तो मजा दोगुना हो जाएगा.

रात में आप डोरी वाली, हाफ या फुल नैट स्टाइल ब्रा के साथ मैचिंग कलर पैंटी पहनना न भूलें. यह पार्टनर में सैक्स की इच्छा को कई गुना बढ़ा देती है.

चेहरे से दिखे आप की इच्छा

यह नहीं कि आप, बस, पार्टनर के कहनेभर से उस के समीप जा कर लेट जाएं बल्कि आप का चेहरा इतना खिलाखिला व फ्रैश दिखना चाहिए कि पार्टनर को लगे कि आप की भी सैक्स करने की इच्छा है, तभी सैक्स का ज्यादा मजा आ पाएगा.

पुरुष भी दिखें सैक्सी

अकसर पुरुषों की यही सोच रहती है कि पार्टनर का ही सैक्सी दिखना जरूरी होता है. लेकिन जितना आप उन्हें खूबसूरत देखना चाहते हैं उतना ही वे भी आप को देखना चाहती हैं. इसलिए आप भी खुद को संवारने पर ध्यान दें. युवतियों के मुकाबले आप के भी अंडरगारमैंट्स स्टाइलिश हों और फिटिंग का भी खास ध्यान रखें. वह आप के पार्टनर को हौट फील कराने के लिए काफी है.

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हैल्थी सैक्स स्पैशल : फिर अकेले हैं कहीं…

शादी के बाद पतिपत्नी के जीवन में एक अलग सी चाहत होती है. एकदूसरे के साथ अधिक से अधिक समय तक करीब रहना, एकदूसरे को छूना, उत्तेजित हो जाना, सैक्स के लिए पोर्न फिल्में देखना, उसी तरह की चाहत रखना सामान्य बातें होती हैं. यही वजह है कि शादी के निजी पलों को खुल कर जीने के लिए लोग हनीमून के लिए जाते हैं.

शादी के बाद का सा आनंद जीवन में दोबारा तब आता है जब बच्चे होस्टल चले जाते हैं. पतिपत्नी के जीवन में आने वाला यह एकांत उन को बहका देता है. कई कपल्स तो ऐसे मौके का लाभ उठा कर सैकंड हनीमून तक प्लान कर लेते हैं. ऐसे में कई बार वैसी ही गड़बडि़यां हो जाती हैं जैसी शादी के बाद होती हैं. शादी के बाद अबौर्शन संभव हो जाता था पर सैकंड हनीमून के बाद ऐसी गड़बड़ी भारी पड़ सकती है. इसलिए जरूरी है कि गर्भधारण से बचने वाले उपाय व साधनों का प्रयोग करें.

महिला रोग विशेषज्ञ डाक्टर नमिता चंद्रा कहती हैं, ‘‘कंडोम और पिल्स सब से अहम उपाय हैं. महिलाएं गर्भ रोकने के लिए पिल्स का प्रयोग डाक्टर की राय से करें. गर्भनिरोधक गोलियां कई बार बौडी के हार्मोंस को प्रभावित करती हैं. इन के लगातार प्रयोग से जिस्म में कैल्शियम भी प्रभावित होता है. कुछ औरतों में जल्दी मेनोपौज की शुरुआत हो जाती है. जिस से कई बार मासिकधर्म अनियमित हो जाता है. ऐसे में यह भ्रम हो जाता है कि माहवारी बंद है तो गर्भधारण कैसे हो सकता है?

‘‘कई मामलों में देखा गया कि माहवारी बंद होने के बाद भी गर्भधारण हो गया. कई बार माहवारी न होने का कारण मेनोपौज को समझ लिया जाता है, जबकि माहवारी न होने का कारण गर्भधारण होता है. इस का पता तब चलता है जब पेट में दर्द या दूसरे कारण दिखाई देते हैं. देर से पता चलने के कारण गर्भपात कराना संभव नहीं रह जाता और बच्चा पैदा करने के बाद तमाम तरह की सामाजिक व शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है.’’

भ्रांतियों का शिकार न हों

आज के दौर में 40 से 50 वर्ष की उम्र वाली महिलाओं का मुकाबला 20 से 30 वर्ष की महिलाओं के साथ किया जा सकता है. दोनों ही उम्र में सैक्स को ले कर कुछ भ्रांतियां होती हैं. आमतौर पर पुरुष इस उम्र में कंडोम का इस्तेमाल पसंद नहीं करते. इस का कारण यह होता है कि कई बार उन में इरैक्शन को ले कर परेशानियां होती हैं. ऐसे में महिला को पिल्स का सेवन करना चाहिए. वैसे गर्भनिरोधक पिल्स के साथ ही साथ इमरजैंसी पिल्स का भी प्रयोग कर सकती हैं. इमरजैंसी पिल्स का प्रयोग सैक्स संबंध बनने के बाद जितनी जल्दी हो सके कर लें.

कई बार इरैक्शन के शिकार व्यक्ति का डिस्चार्ज योनि के बाहर ही हो जाता है. वह सोचता है कि डिस्चार्ज योनि के बाहर होने से गर्भधारण का खतरा नहीं रहता. यह भी एक तरह की भ्रांति है. पुरुष का वीर्य अगर किसी भी तरह से योनि के अंदर पहुंच गया तो गर्भधारण हो सकता है. ऐसे में किसी भी तरह से वीर्यस्खलन होने पर सावधान रहें. अगर ऐसा हो जाता है तो सावधानी बरतें. गर्भधारण से बचने के लिए उचित डाक्टरी सलाह व प्रैग्नैंसी टैस्ट किट की मदद लें.

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डीडीसीए चुनाव हो सकते हैं रद्द : विनोद राय

सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित की गई प्रशासकों की समिति के प्रमुख विनोद राय ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ के एक दिन पूर्व ही घोषित हुए चुनाव परिणामों को लेकर बड़ा बयान दिया. राय ने मंगलवार को ही चेताया कि डीडीसीए के चुनाव परिणामों को ‘नैतिक और संवैधानिक कमियों के चलते’ रद्द किया जा सकता है. सोमवार को ही रजत शर्मा ने डीडीसीए चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंदी पूर्व क्रिकेटर मदनलाल को हराया. शर्मा ने पिछले बुधवार को हुए मतदान में 54.40 प्रतिशत वोट हासिल करते हुए जीत हासिल की थी.

एक खबर के मुताबिक विनोद राय ने कहा कि चूंकि यह चुनाव सुप्रीम कोर्ट से अनुमोदित संविधान के अनुसार नहीं कराए गए हैं, इन्हें बाद में रद्द किया जा सकता है. विनोद राय को सुप्रीम कोर्ट ने लोढ़ा समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए, पूर्व क्रिकेटर दियाना एदुल्जी के साथ, नियुक्त किया था. राय ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जो हितों के टकराव की स्थितियों से बचने के लिए जो नियंत्रण और संतुलन के लिए व्यवस्थाएं दी हैं उन्हें लागू करने में डीडीसीए नाकाम रही है.

लोढ़ा समिति ने जो हितों के टकराव से बचने के लिए मानदंड तय किए थे, वे काफी सख्त हैं. ओम्बड्समैन और इथिक्स अफसर सुनिश्चित करता है कि  हितों के टकराव के मानदंड कोई प्रतिकूलता नहीं आने दें. मौजूदा चुनाव ओम्बड्समैन और इथिक्स अफसर किसी छानबीन के बिना ही करा लिए गए और उम्मीदवारी की योग्यता पर अभी भी बड़ा सविलिया निशान बना हुआ है.

अभी तक डीडीसीए हाईकोर्ट के द्वारा नियुक्त किए प्रशासक जस्टिस विक्रमजीत सेन के मातहत था जिन्होंने, दिल्ली में अधिकारियों की ओर से गैरकानूनी नकदी हस्तांतरण के अनेक मामलों के सामने आने के बाद, पद संभाला था. जहां चुनाव में दागी अधिकारियों के रिश्तेदार भी उम्मीदवार थे, ओम्बड्समैन की नियुक्ति चुनाव के आखिरी दिन ही हुई थी.

राय ने कहा कि  सुप्रीम कोर्ट का आदेश पदाधिकारियों के भाई, पत्नी, बच्चों और रिश्तेदारों को चुनाव लड़ने से नहीं रोकता. लेकिन एक नैतिक अपर्याप्तता का पहलू भी होता है. कानून की भावना से भी लोगों को चलना चाहिए न कि केवल कानून से.

उल्लेखनीय है कि डीडीसीए की तरह ही बीसीसीआई की बाकि ईकाइयों में भी जस्टिस लोढ़ा समितियों की सिफारिशों को उनके संविधान में लागू नहीं किया गया है. बीसीसीआई इसके कई प्रावधानों के खिलाफ भी बताया जा रहा था. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान बीसीसीआई से संविधान बनाने के सुझाव भी मांगे थे. कोर्ट की आगामी 5 जुलाई को होने वाली सुनवाई में भी डीडीसीए चुनावों का मामला उठ सकता है.

रजत शर्मा के गुट ने जीता था चुनाव

हाल ही में डीडीसीए के अध्यक्ष पद का चुनाव में रजत शर्मा ने पूर्व क्रिकेटर मदन लाल को 517 वोट से हराया था. सोमवार को डीडीसीए चुनाव के नतीजे घोषित कर दिए गए थे और रजत शर्मा के समूह ने सभी 12 सीटें जीती थीं. शर्मा को 1,531 वोट मिले जबकि मदन लाल को 1,004 वोट से संतोष करना पड़ा. मुकाबले में खड़े तीसरे उम्मीदवार वकील विकास सिंह को महज 232 वोट मिले.

इसके अलाव बीसीसीआई के कार्यवाहक अध्यक्ष सी के खन्ना की पत्नी शशि उपाध्यक्ष पद के चुनाव में राकेश बंसल से हार गईं थीं. राकेश डीडीसीए के पूर्व अध्यक्ष स्नेह बंसल के छोटे भाई हैं. राकेश ने शशि को 278 वोट से हराया. उन्हें 1,364 जबकि शशि को 1,086 वोट मिले.

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इन 4 तरीकों से 40 प्रतिशत तक बचेगी स्मार्टफोन की बैटरी

आप चाहे कितने भी एमएएच की बैटरी वाले फोन क्यों ना ले लें, लेकिन आपने अक्सर ही देखा होगा कि फोन के जरा सा पुराना होते ही स्मार्टफोन में बैटरी की समस्या आने लगती है. कई लोगों की तो हालत ऐसी हो गई है कि वे दिनभर पावर बैंक लेकर घूमते रहते हैं. खैर, छोड़िए इस बात को, क्योंकि आप कुछ तरीकों को अपनाकर अपने स्मार्टफोन की बैटरी को 40 प्रतिशत तक बचा सकते हैं. आइए जानते हैं.

एरोप्लेन मोड से फोन की बैटरी की होगी बचत

क्या आप यह जानते हैं कि एरोप्लेन मोड में आपके फोन की बैटरी बचती है हालांकि इस दौरान आप ना फोन कर पाएंगे और ना ही रिसीव कर पाएंगे. ‘विमान में यात्रा करते समय आप इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. बता दें कि एरोप्लेन मोड में सिर्फ 5 फीसदी बैटरी खपत होती है.

अगर आपके पास वाई-फाई का विकल्प है तो मोबाइल के इंटरनेट का इस्तेमाल ना करें, क्योंकि मोबाइल नेटवर्क पर वाई-फाई के मुकाबले ज्यादा बैटरी खपत होती है. एक रिपोर्ट की मानें तो 4जी की तुलना में वाई-फाई के इस्तेमाल पर 40 फीसदी बैटरी कम खर्च होती है.

बैटरी को 100 फीसदी चार्ज ना करें

कोशिश करें कि 80% पूरा होते ही फोन को चार्जिंग से निकाल दें और इस बात का भी ख्याल रखें कि फोन की बैटरी 0% भी ना हो जाए. अगर फोन इस्तेमाल नहीं भी करना है तो चार्ज करके ही रखें.

सोशल मीडिया पर औटो प्ले वीडियो बंद रखें

आमतौर पर फेसबुक, ट्विटर और गूगल क्रोम में औटो प्ले वीडियो का औप्शन आता है, उसे हमेशा बंद रखें, क्योंकि इनके कारण बैटरी बहुत ज्यादा खपत होती है. इसके अलावा फोन को बार-बार चार्ज में ना लगाएं और चार्जिंग के दौरान फोन पर बात ना करें.

फोन को गर्म ना होने दें

फोन को हमेशा धूप से बचा कर रखें, क्योंकि फोन जितना गर्म होगा बैटरी उतनी ही तेजी से खत्म होगी.

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आरबीआई ने एटीएम अपग्रेड करने का दिया निर्देश, ग्राहकों से वसूला जाएगा चार्ज

एटीएम का इस्तेमाल करना जल्द ही महंगा हो सकता है. बैंकों ने आरबीआई से एटीएम ट्रांजैक्शन चार्ज बढ़ाने की इजाजत मांगी है. एटीएम अपग्रेडेशन से बढ़ने वाले वित्तीय बोझ को देखते हुए बैंकों ने यह कदम उठाया है. आपको बता दें, आरबीआई ने सभी बैंकों को एटीएम अपग्रेडेशन का निर्देश दिया है. अपग्रेडेशन से बैंकों का वित्तीय बोझ बढ़ेगा. यही वजह है कि वो अपना वित्तीय बोझ ग्राहकों पर डालना चाहते हैं. हालांकि, अभी आरबीआई ने इसकी मंजूरी नहीं दी है. लेकिन, कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में एटीएम चार्ज बढ़ाया जा सकता है.

दो तरह से बढ़ा सकते हैं चार्ज

सूत्रों के मुताबिक, एटीएम अपग्रेडेशन की लागत वसूलने के लिए बैंक एटीएम ट्रांजैक्शन चार्ज में दो तरह से बढ़ोतरी कर सकते हैं. पहला फ्री ट्रांजैक्शन खत्म होने के बाद वसूले जाने वाले 18 रुपए के चार्ज को बढ़ाकर 23 रुपए तक किया जा सकता है. इसके अलावा एटीएम से फ्री ट्रांजैक्शंस की संख्या को भी घटाया जा सकता है. आपको बता दें, प्राइवेट बैंकों ने अभी एटीएम की 3 ट्रांजैक्शन फ्री रखी हैं. वहीं, कुछ बैंकों ने 5 एटीएम ट्रांजैक्शन तक कोई चार्ज नहीं लेने की सुविधा दी है.

कितना बढ़ सकता है चार्ज

एटीएम से ट्रांजैक्शन करने पर चार्ज कम से कम 3 रुपए से 5 रुपए बढ़ सकता है. इससे एटीएम औपरेटर्स यानी बैंक अपग्रेडेशन से पड़ने वाले बोझ की लागत निकाल सकें. सूत्रों के मुताबिक, आरबीआई ने काफी सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं. ऐसे में अगर ग्राहकों से फीस नहीं वसूली गई तो बैंकों को बड़ा घाटा हो सकता है.

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6 चरणों में होगा अपग्रेडेशन

एक खबर के मुताबिक, एटीएम से होने वाली धोखाधड़ी और बढ़ती हैकिंग को रोकने के लिए आरबीआई ने एटीएम को अपग्रेड करने के निर्देश दिए थे. बैंक एटीएम के अपग्रेडेशन को 6 चरणों में पूरा करना है. इसकी डेडलाइन भी तय कर रही है. पहला चरण अगस्त 2018 में खत्म होना है. यही वजह है कि बैंक जुलाई अंत तक एटीएम चार्ज में बढ़ोतरी कर सकते हैं. एटीएम अपग्रेडेशन का आखिरी चरण जून 2019 में खत्म होगा.

क्या होना है अपग्रेडेशन?

ATM अपग्रेडेशन में सबसे पहले बैंकों को बेसिक इनपुट-आउटपुट सिस्टम (BIOS) को अपग्रेड करना है. BIOS वह सिस्टम है, जो कम्प्यूटर को बूट करते वक्त इस्तेमाल किया जाता है. बैंकिंग प्रणाली में यह पहला सौफ्टेवयर होता है, जिससे रैम, प्रोसेसर, कीबोर्ड, माउस, हार्डड्राइव की पहचान की जाती है. इससे हैकिंग से बचने में मदद मिलती है. औपरेटिंग सिस्टम को लोड करते वकत यह पूरे प्रोसेस को कॉन्फिगर करता है. बाद में कम्प्यूटर की मेमोरी में औपरेटिंग सिस्टम को लोड किया जाता है.

एटीएम कैसेट्स भी होंगी री-कौन्फिगर

BIOS सिस्टम को अपग्रेड करने के अलावा एटीएम में लगी कैसेट्स को भी री-कौन्फिगर किया जाएगा. इसमें लेटेस्ट वर्जन इस्तेमाल किया जाएगा. इस मदद से नए नोटों को कैसेट्स में फिट किया जाएगा. इसके अलावा यूएसबी पोर्ट को भी डिसेबल करने के निर्देश हैं.

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फेसबुक में आया बग, 8 लाख से ज्यादा अकाउंट हुए प्रभावित

फेसबुक पर आए एक बग के कारण कई यूजर्स के अकाउंट प्रभावित हुए हैं. अगर आपने किसी को फेसबुक पर ब्लौक किया है तो यह खबर आप ही के लिए है, क्योंकि हो सकता है कि जिन लोगों को आपने ब्लौक किया है वे अब अनब्लौक हो गए हों. जीं हां, यह खबर बिल्कुल पक्की है.

हम आपकी जानकारी के लिए यह भी बता दें कि कुछ दिन पहले यही बग दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप में भी आया था. जिसके बाद ब्लौक किए गए लोग भी मैसेज कर रहे थे और स्टेटस पढ़ रहे थे. इसके अलावा ब्लौक किए गए यूजर्स मैसेज भी भेजने लगे थे.

इस बग की वजह से 8 लाख से ज्यादा यूजर्स के अकाउंट प्रभावित हुए हैं. इसकी जानकारी खुद कंपनी ने दी है. इस बग के कारण जिन लोगों ने फेसबुक पर अपने किसी दोस्त को ब्लौक किया था वे अब अनब्लौक हो चुके हैं. इस बग के कारण ब्लौक किए लोग भी अपने दोस्तों को फेसबुक पर संपर्क करने लगे थे और फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने लगे थे. वहीं इस बग से प्रभावित लोगों को फेसबुक नोटिफिकेशन भेजकर जानकारी भी दे रहा है. हालांकि कंपनी ने कहा है कि अब इस बग को फिक्स कर दिया गया है. यह बग 29 मई से 5 जून तक फेसबुक पर रहा. फेसबुक ने इस बग के बारे में विस्तार से जानकारी भी दी है.

अगर आपने भी किसी को ब्लौक किया है तो फेसबुक ओपन करें और फिर सेटिंग्स में जाकर दाईं ओर दिख रहे ब्लौक लिस्ट पर क्लिक करके चेक कर लें कि आपने जिसे ब्लौक किया था वे ब्लौक ही हैं या अनब्लौक हो चुके हैं.

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