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पत्ते खोलने से बच रहे राजा भैया

समाजवादी नेता शिवपाल यादव के बाद कुंडा प्रतापगढ़ से विधायक राजा रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया उत्तर प्रदेश की राजनीति में दूसरी बड़ी घोषणा करने वाले हैं. इस संबंध में राजा भैया के समर्थक सोशल मीडिया पर एक सर्वे भी कर चुके हैं. बताया जाता है कि 80 फीसदी लोगों की राय है कि राजा भैया को अपनी पार्टी बनाकर काम करना चाहिये. 20 अक्टूबर 2018 को राजा भैया ग्रुप के द्वारा लखनऊ के होटल कार्टन में एक प्रेस कांफ्रेंस बुलाई गई. मीडिया को उम्मीद थी कि राजा भैया आयेंगे और अपनी राजनीति दिशा और नीति पर अपने विचार रखेंगे, जिससे अटकलों का बाजार खत्म हो सकेगा.

प्रेस कांफ्रेस में राजा भैया नहीं आये. राजा भैया ग्रुप से जुडे विधायक विनोद कुमार सरोज के द्वारा यह बताया गया कि राजा भैया के राजनीतिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर एक रजत जंयती समारोह का आयोजन 30 नवंबर 2018 को किया जा रहा है. राजा भैया लगातार 5 बार निर्दलीय चुनाव जीतने वाले विधायक है.

विनोद कुमार सरोज के द्वारा यह बताया गया कि इस अवसर पर राजा भैया अपनी नई राजनीतिक दिशा की घोषणा करेंगे. जानकार सूत्रों का कहना है कि राजा भैया की पार्टी का प्रारूप तैयार हो गया है. इसके लिये सही समय की प्रत़ीक्षा की जा रही है.

असल में राजा भैया भाजपा और सपा दोनों की सरकार में मंत्री रहे. दोनों ही दलों में उनकी अच्छी घुसपैठ है. सपा से अब वह भाजपा के खेमे में लौट आये हैं. भाजपा के साथ राजा भैया का तालमेल बना हुआ है. दलित एक्ट के बाद जिस तरह से ठाकुर बिरादरी भाजपा से नाराज हुई उसके चलते राजा भैया भाजपा के साथ खड़े होने का साहस चुनाव पहले नहीं कर सकते. भाजपा से नाराज ठाकुर बिरादरी का अपनी ओर मोड़ने के लिये ही राजा भैया अपनी नई पार्टी बना सकते हैं.

सोशल मीडिया पर भले ही ठाकुर बिरादरी राजा भैया के पक्ष में हो. सही मायनों में राजा भैया का असर केवल उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में ही है. राजा भैया के नाम पर ठाकुर एकजुट होगा यह कहीं होता दिख नहीं रहा है. ऐसे में राजा भैया अपने पत्ते खोलने में डर रहे हैं. यही वजह है कि आज की प्रेस कांफ्रेंस में वह शामिल नहीं हुये. लोकसभा चुनाव की नजर से राजा भैया के पास अब नई पार्टी की घोषणा करने का समय नहीं रह गया है. वह जितना विलंब करेगे उनके लिये मुश्किलें उतनी ही बढ़ेंगी.

भूखे देश न होए विकासा : क्यों भुखमरी में तरक्की ढूढ़ रहे हैं हम?

हमारे यहां पुरानी कहावत रही है, भूखे भजन न होई गोपाला. यानी जब पेट में खाने का निवाला न हो और भूख से लोग दम तोड़ रहे हों, तो ऐसे में भक्तजन आज के सत्ताधारी गोपालों का भला भजन कैसे करें. देश की जीडीपी को हवाभरे गुबारे की तरह लहराने वाली सरकार की नजर में देश तरक्की कर रहा है, जिओ ने कई GB डाटा से सबका पेट भर दिया है. लेकिन उन चंद निवालों का इन्तेजाम नहीं करा पाई जिसे भूखा आदमी रोटी कहता है.

सबका साथ सबका विकास का दावा लोगों के खाली पेटों में तब लात मारता दिखता है जब ग्लोबल हंगर इंडेक्स की रिपोर्ट आती है.

  • 119 देशों में से 103वें पर हम

हर बार उम्मीद की जाती है कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स यानी जीएचआई में भारत की स्थिति पिछले इंडेक्स से बेहतर होगी, लेकिन होता है बिलकुल उल्टा. अब इस पिछले साल भारत का इस लिस्ट में 100वां नंबर था पर साल 2018 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक़ भारत 119 देशों की सूची में 103वें स्थान पर है. यानी भुखमरी खत्म करने वाले देशों की सूची में भारत लगातार रुपये के एकीमत सरीखा लुढ़क रहा है. 2014 में भारत 99वें, 2015 में 80वें और 2016 में 97वें स्थान पर था. पर इस बार तो नतीजे और शर्मनाक हैं. बता दें कि ग्लोबल हंगर इंडेक्स वैश्विक, क्षेत्रीय, और राष्ट्रीय स्तर पर भुखमरी का आंकलन करता है. भूख से लड़ने में हुई प्रगति और समस्याओं को लेकर हर साल इसकी गणना की जाती है.

  • नेपाल और बांग्लादेश से भी गए गुजरे

शर्मिन्दगी यहीं ख़त्म नहीं होती. जब पता चलता है कि हंगर इंडेक्स में हमारी स्थिति नेपाल और बांग्लादेश जैसे  भी खराब है, सारे देश का विकास दम दबाकर भागता दीखता है. हमेशा के इतरह चीन भारत से काफीबेहतर हाल में है यानी 119 देशों में चीन 25वें नंबर पर है. वहीं बांग्लादेश 86वें, नेपाल 72वें, श्रीलंका 67वें और म्यामांर 68वें स्थान पर हैं. पाकिस्तान भारत से पीछे है. उसे 106वां स्थान मिला है. इस रिपोर्ट का कहना है, भारत में भूख की स्थिति बेहद गंभीर है.

  • ट्रंप की टर्र टर्र

इधर देश में खाने के लाले पड़े हैं और के मिस्टर प्रेसीडेंट संयुक्त राष्ट्र महासभा में लाग ही सुर आलाप रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप संयुक्त राष्ट्र महासभा के 73वें सत्र में फरमाते हैं कि भारत है, जहां का समाज मुक्त है और एक अरब से अधिक आबादी में लाखों लोगों को सफलतापूर्वक गरीबी से ऊपर उठाते हुए मध्यम वर्ग में पहुंचा दिया. अब इन्हें कौन समझाए कि देश में प्रतिदिन 20 करोड़ लोग भूखे पेट सो जाते हैं. प्रतिदिन पर्याप्त खाना न मिल पाने के कारण 821 बच्चे दम तोड़ देते हैं. ऐसे ही भारत के न जाने कितने राज्यों में कितने लोग खाना और पानी के अभाव में जान गंवा देते हैं. कुछ तो आधार कार्ड नाम की बला हाथ में न होने के चलते सामने रखा राशन छू भी नहीं पाते. लेकिन डोनाल्ड ट्रंप के लिए तो सावन के अंधे वाला मामला है.

  • खाना सड़ता है तो सड़ने दे..

देश में भुखमरी इसलिए नहीं है कि यहां अन्न की कमी है, बल्कि इसलिए है क्योंकि यहां असमानता का माहौल है. अमीर और गरीब के बीच की खाई इस कदर बढ़ चुकी है कि एक तरफ करोड़ों टन खाने का सामान पड़े पड़े सड़ जाता है और दूसरी तरफ एक रोटी के अभाव में कोई मर जाता है. इण्डियन इन्सटिट्यूट औफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, भारत में हर साल 23 करोड़ टन दाल, 12 करोड़ टन फल एवं 21 टन सब्जियां वितरण प्रणाली में खामियों के चलते खराब हो जाती है तथा उत्सव, समारोह, शादी-ब्याह आदि में बड़ी मात्रा में पका हुआ खाना ज्यादा बनाकर बर्बाद कर दिया जाता. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अनाज का सही तरीके से भंडारण और रख रखाव नहीं होता और संपन्न तबका खाने को बर्बाद करता है. भारत में अनाज की बर्बादी करने वाले टौप 10 राज्य की बात करें तो पश्चिम बंगाल- नंबर 1 पर है. यहां 1,54,810 क्विंटल, महाराष्ट्र में 1,12,640 क्विंटल, बिहार में 82,010 क्विंटल, उड़ीसा में 72,780 क्विंटल, जम्मू कश्मीर में 61,310 क्विंटल,  आंध्र प्रदेश में 49,680 क्विंटल, गुजरात में 46,290 क्विंटल, उत्तराखंड में 34,580 क्विंटल, पंजाब में 32,800 क्विंटल और उत्तर प्रदेश में 26,490 क्विंटल अनाज बर्बाद होता है. ये ज्यादातर राज्य वही हैं जहां गरीबी का प्रतिशत काफी ज्यादा है.

  • चौकीदार का भूखासन

जरा सोचिए, अगर यह अन्न न बर्बाद किया जाए तो प्रत्येक व्यक्ति को दो वक्त की रोटी आराम से नसीब हो सकती है. शायद इसीलिये जब इस ग्लोबल हंगर इंडेक्स लिस्ट को देखकर राहुल गांधी नरेन्द्र मोदी पर तंज कसते हुए कहते हैं कि, ‘चौकीदार ने भाषण खूब दिया, पेट का आसन भूल गए. योग-भोग सब खूब किया, जनता का राशन भूल गए’, तो वहां से कोई जवाब नहीं आता. शायद हम बतौर देश भुखमरी में ही तरक्की ढूढ़ रहे हैं. लेकिन क्या भूखे पेट देश का विकास संभव है  ?

लगातार गिरती  रैंकिंग

वर्ष            भारत की रैंकिंग

2014           – 55

2015           – 80

2016           – 97

2017          – 100

2018          – 103

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में बाकी देशों का हाल

  • चीन                25
  • श्रीलंका            67
  • म्यामांर            68
  • नेपाल              72
  • बांग्लादेश         86
  • मलेशिया          57
  • थाईलैंड           44
  • पाकिस्तान      106

 

लौन्च हुआ 10 लाख की कीमत वाला स्मार्टफोन, जानिए क्या है खास

वर्टू लग्जरी स्मार्टफोन ब्रांड ने अपने नए लेटेस्ट स्मार्टफोन एस्टर P को लौन्च कर दिया है. इसे चीन में पेश किया गया है. आपको बता दें, कंपनी ने 18 महीने पहले स्मार्टफोन न बनाने का ऐलान किया था. लेकिन फिर कंपनी एस्टर P के साथ वापसी कर रही है.

  • वर्टू एस्टर P के  स्पेसिफिकेशन

वर्टू ब्रांड का यह प्रीमियम स्मार्टफोन यूरोपियन स्टाइल बैक केस डिजाइन और टाइटेनियम अलॉय फ्रेम के साथ आता है. वर्टू एस्टर P के बारोक्यू  सीरीज को ब्लैक, जेंटलमैन ब्लू, ब्राउन और ट्विलाइट औरेंज में लौन्च किया गया है. डुअल-सिम (नैनो) वाला वर्टू एंड्रॉयड 8.1 ओरियो पर चलता है. 16:9 आस्पेक्ट रेशियो वाले इस हैंडसेट में 4.97 इंच का फुल एचडी (1080×1920 पिक्सल) डिस्प्ले है. फोटो, वीडियो और अन्य चीजों को सेव करने के लिए 128 जीबी इनबिल्ट स्टोरेज है. स्पीड और मल्टीटास्किंग के लिए क्वालकाम स्नैपड्रैगन 660 चिपसेट के साथ 6 जीबी रैम दी गई है.

अब बात  करते है कैमरे की, डुअल-एलईडी फ्लैश के साथ 12 मेगापिक्सल का रियर कैमरा है. सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 20 मेगापिक्सल का फ्रंट कैमरा दिया गया है. कनेक्टिविटी के लिए 4 जी एलटीई, वाईफाई के साथ हाटस्पाट, ब्लूटूथ, जीपीएस और यूएसबी टाइप-सी पोर्ट शामिल है.

इसकी बैट्री 3,200mah की होगी. इसके साथ क्वालकॉम क्विक चार्ज 3.0 टेक्नोलॉजी भी रहेगी. इस फोन की लंबाई-चौड़ाई 149.8x71x10.1 मिलीमीटर और वजन 220 ग्राम है. सर्विस 24×7 उपलब्ध रहेगी, डिनर के लिए टैबल रीजर्व, ट्रेवल प्लान करने और अन्य जरूरी चीजों के लिए सर्विस का इस्तेमाल किया जा सकेगा. वर्टू एक्सक्लूसिव बटलर सर्विस इस्तेमाल करने के लिए फोन के साइड में बटलर बटन दिया गया है.

  • फोन की कीमत

फोन की कीमत 5,000 डॉलर (करीब 3.79 लाख रुपये) से शुरू होती है. वहीं गोल्ड प्लेटेड मॉडल को 14,146 डॉलर (करीब 10 लाख रुपये) में बेचा जाएगा. स्मार्टफोन के सभी वेरिएंट को चीनी साइट JD.com पर लिस्ट कर दिया गया है. 30 अक्टूबर से उपभोक्ता इस फोन को खरीद सकते हैं.

रोहन मेहरा ने कब व कहां बच्चों को दी संगीत की शिक्षा

गौरव के चावला निर्देशित 26 अक्टूबर को प्रदर्शित हो रही फिल्म ‘‘बाजार’’ में रिजवान सिद्दिकी का किरदार निभाने वाले अभिनेता रोहन मेहरा को लेखन, फोटोग्राफी व यात्राएं करने का शौक है. वह कुछ समय तक बच्चों को संगीत की शिक्षा भी दे चुके हैं.

हाल ही में जब रोहन मेहरा से हमारी मुलाकात हुई, तो उन्होंने अपने सभी शौक पर बात करते हुए कहा- ‘‘मुझे यात्राएं करने का शौक है. पर मैं अकेले ही यात्रा पर निकलता हूं. अपने साथ मैं दो चीजें लैंड फोटोग्राफी के शौक के चलते कैमरा और गिटार लेकर जाता हूं. 2013 में मुंबई रहना शुरू करने के साथ ही मैंने निर्णय लिया था कि मुझे भारत को अच्छी तरह से समझना है. तो मै छोटे छोटे शहर ,गांव जाता रहता हूं. मैं बिहार में बोध गया और पटना भी गया हूं. उत्तरप्रदेश के फिरोजाबाद में मैंने कुछ समय के लिए बच्चों को संगीत की शिक्षा भी दी. मैंने अपनी यात्रा के दौरान कई लोगों से बात की. कइयों से बात करके मैंने बहुत कुछ सीखा. मुझे एडवेंचर का शौक है.’’

लिखने के शौक की चर्चा करते हुए रोहन मेहरा कहते हैं- ‘‘ अपने हर दिन के भाव या विचार लिखा करता था. फिर धीरे धीरे कहानी लिखनी शुरू कर दी. उसके बाद मैंने लघु फिल्म ‘आफ्टरवर्ड’ की कहानी खुद ही लिखी.’’

भारतीयों को ले कर ICC ने किया शर्मनाक खुलासा

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने एक हालिया बयान में भारतीयों को ले कर बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है. एक शीर्ष अधिकारी ने एक जांच के आधार पर बताया कि दुनिया भर में क्रिकेट की भ्रष्ट गतिविधियों में शामिल ज्यादातर सट्टेबाज भारतीय हैं. आईसीसी की भ्रष्टाचार रोधी इकाई के महाप्रबंधक एलेक्स मार्शल ने श्रीलंका क्रिकेट में भ्रष्टाचार की जांच की बात करते हुए कहा कि इस मामले में स्थानीय और भारतीय सट्टेबाज शामिल हैं.

आगे जब मार्शल से पूछा गया कि क्या सारे सट्टेबाज स्थानीय हैं? तो उन्होंने कहा कि, ‘श्रीलंका में स्थानीय और भारतीय सट्टेबाज दोनों थे, लेकिन दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में सबसे ज्यादा सट्टेबाज भारतीय हैं.’

हाल में आईसीसी की एंटी करप्शन यूनिट ने इंग्लैंड और श्रीलंकाई क्रिकेटरों से खेल से जुड़े भ्रष्टाचार की सूचना साझा की थी. हालांकि ये खुलासा बहुत हैरानी वाला नहीं था, क्योंकि भारतीय सट्टेबाज 2000 मैच फिक्सिंग मामलों में मुख्य केंद्र रहे हैं.

मार्शल ने आगे कहा कि, ‘हमने इंग्लैंड और श्रीलंका के खिलाड़ियों को क्रिकेट में सक्रिय सट्टेबाजों के नाम और फोटो दिखाई थी जो श्रीलंका और दुनिया में अन्य टूर्नामेंट में खिलाड़ियों को शामिल करने की कोशिश कर रहे थे. यही कारण रहा कि हमने खुलकर भ्रष्ट व्यक्तियों की सूचना साझा की, हमने उनकी फोटो दिखाई, उनके नाम और उनकी जानकारी दी. हमें लगता है कि इस तरह से खिलाड़ियों को बेहतर सूचना मिलेगी.’

लगाना है फ्री वाई-फाई का पता? ये हैं तीन तरीके

वैसे तो अब हर किसी के फोन में इंटरनेट पैक होता है, लेकिन फ्री की चीजें किसी पसंद नहीं हैं. जब आपको फिल्म या कोई ऐप डाउनलोड करना हो या कोई जरूरी चीज औनलाइन देखना हो तब आप भी फ्री वाई-फाई की सोचते हैं. वैसे तो रेलवे स्टेशन जैसे सार्वजनिक स्थानों पर फ्री वाई-फाई की सेवा मिल रही है, लेकिन कई बार हम ऐसी जगहों पर नहीं होते हैं और हमें इंटरनेट की बहुत जरूरत पड़ जाती है. ऐसे में हम आज आपको फ्री वाई-फाई का पता लगाने के 3 तरीके बताने जा रहे हैं.

वेफी (WeFi)

वेफी एक ऐप है जो आपको आपके आसपास मौजूद फ्री वाई-फाई का पता बताता है. इसकी सबसे खास बात यह है कि अगर यह ऐप आपके फोन में है तो आपका फोन खुद ही फ्री वाई-फाई से कनेक्ट हो जाएगा, इसके लिए आपको सर्च करने की जरूरत नहीं है. इसे आप प्ले-स्टोर से फ्री में डाउनलोड कर सकते हैं.

इंस्टाब्रिज (Instabridge)

इंस्टाब्रिज भी एक ऐप है जिसकी मदद से आप पब्लिक वाई-फाई से जुड़ सकते हैं. इस ऐप की खासियत है कि यह सबसे फास्ट नेटवर्क से कनेक्ट करता है. इसके अलावा अगर नेटवर्क नहीं मिलता है तो यह ऐप औटो मोबाइल नेटवर्क पर आ जाता है ताकि कनेक्टिविटी बनी रहे.

फेसबुक (facebook)

आप अपने फेसबुक ऐप से भी फ्री वाई का पता लगा सकते हैं. इसके लिए फेसबुक ऐप के राइट साइड में दिख रहे तीन डौट पर क्लिक करें. अब नीचे स्क्राल करने पर फाइंड Wi-Fi का विकल्प दिखेगा. उस पर क्लिक करने पर आपको फ्री वाई-फाई की पूरी लिस्ट दिख जाएगी.

करीना के साथ फिल्म नहीं करना चाहते सैफ ! यह है चौंकाने वाली वजह

जब सिल्वर स्क्रीन पर रियल लाइफ की जोड़ियां एक साथ नजर आती हैं तो फैंस उस फिल्म में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी लेते हैं. खासकर जब कपल सुपर स्टार्स हों तो कहना ही क्या… लेकिन शायद सैफ अली खान को करीना के साथ फिल्म करने में कोई दिलचस्पी नहीं है. तभी तो उन्होंने हाल ही में दिए अपने इंटरव्यू में साफ शब्दों में यह कह दिया कि वह अब पत्नी करीना के साथ कभी स्क्रीन शेयर नहीं करना चाहते. जाहिर सी बात है कि यह बात चौंकाने वाली है.

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जहां एक तरफ सैफ और करीना अपनी रियल लाइफ की तस्वीरों के कारण आए दिन सुर्खियों में रहते हैं, वहीं इस बात को समझना बेहद मुश्किल है कि आखिर ऐसा क्या हुआ जो सैफ ने इतना बड़ा निर्णय ले लिया. ऐसे में सैफ का यह फैसला दर्शकों का दिल तोड़ने वाला है.

एक इंटरव्यू के दौरान सैफ अली खान ने कहा, ‘मैं करीना कपूर खान के साथ कभी काम नहीं करना चाहता’. ऐसे में सैफ के बयान से लगता है जैसे दोनों के रिश्ते में कोई ददार आ गई है, लेकिन डरिए मत ऐसा कुछ नहीं हुआ है. दरअसल, एक न्यूज बेवसाइट को दिए एक इंटरव्यू में सैफ अली खान ने इसकी वजह भी मीडिया से खुलकर शेयर की है. उन्होंने बताया कि वह करीना के साथ काम नहीं करना चाहते हैं, क्योंकि वह और करीना एक दूसरे के साथ बहुत ही सहज महूसस करते हैं और यही सहजता अच्छे सिनेमा की दुश्मन बन जाती है, सैफ के अनुसार अजनबियों के साथ काम काफी दिलचस्प होता है. क्योंकि यह एक स्वार्थी प्रोफेशन है.

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बता दें कि इस जोड़े ने 5 फिल्मों ‘एलओसी’, ‘ओमकारा’, ‘कुर्बान’, ‘टशन’ और ‘एजेंट विनोद’ में एक साथ काम किया है. 2012 में आई फिल्म ‘एजेंट विनोद’ में सैफ और करीना के जोड़ी को सिल्वर स्क्रीन पर देखा गया था. इसके बाद से दोनों ने साथ में फिल्म नहीं की. फिल्म ‘टशन’ से इन दोनों का दिल एक दूसरे के लिए धड़कने लगे. अब सैफ अली खान जल्द ही फिल्म बाजार में नजर आने वाले हैं, इस फिल्म के चार गाने अब तक इंटरनेट पर धूम मचाने में सफल रहे हैं. इतना ही नहीं फिल्म का ट्रेलर भी दर्शकों को काफी पसंद आ रहा है.

देश में खुला पहला बिटकौइन एटीएम, इस खबर में मिलेगी आप को पूरी जानकारी

देश में पहला क्रिप्टोकरेंसी एटीएम क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज यूनोकौइन ने बैंगलूरू में शुरू किया है. इसके बाद यूजर्स के लिए बिटकौइन की खरीद बिक्री आसान हो जाएगी. आपको बता दें कि यूनोकौइन और इसकी यूनिट यूनोडेक्स के ग्राहक हर रोज एटीएम से 1,000 से 10,000 रुपए तक कैश जमा और निकासी कर सकते हैं. क्रिप्टोकरेंसी खरीदने के लिए यूजर को अपने खाते में पैसा रखना होगा. जरूरी बात ये है कि क्रिप्टोकरेंसी के एटीएम पर लोग डेबिट या क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे.

भारत में बिटकौइन के लेनदेन पर सरकार ने फरवरी में रोक लगा दी थी, सरकार ने ये स्पष्ट किया था कि किसी भी सरकारी वित्तीय संस्था या किसी बैंक से क्रिप्टोकरेंसी की लेनदेन नहीं होगी. इसके बाद भारत के क्रिप्टोकरेंसी यूजर्स के लिए काफी परेशानी बढ़ गई थी. लेनदेन पर रोक के बाद वही लोग इसकी खरीदारी कर सकते थे जिनका खाता विदेशों में है. ऐसे में देश के तमाम यूजर्स की सहूलियत के लिए यूनोकौइन ने बिटकौइन एटीएम का रास्ता निकाला. आपको बता दे कि भारत में यूनोकौइन के 30 लाख यूजर्स हैं.

कैसे निकालें कैश

बिटकौइन एटीएम से पैसे निकालने के लिए ग्राहकों को यूनोकौइन की वेबसाइट या मोबाइल ऐप पर रिक्वेस्ट देनी पड़ेगी. यूजर को 12 डिजिट का रेफरेंस नंबर भेजा जाएगा. रेफरेंस नंबर और ओटीपी के जरिए ग्राहक बिटकौइन एटीएम से पैसे निकाल पाएंगे.

यूनोकौइन के सीईओ और फाउंडर सात्विक विश्वनाथ ने बताया कि सरकार के बैन लगाने से पहले गिफ्ट कार्ड, बुक, सीडी गेम्स और बुकिंग्स के लिए बिटकौइन का इस्तेमाल हो रहा था. पर बैन के बाद इसके ग्राहकों को खासा परेशानी का सामना करना पड़ा. पर एटीएम के बाद अब भारतीयों के लिए भी इसका इस्तेमाल संभव और आसान हो सकेगा.

विश्वनाथ ने आगे बताया कि ग्राहकों के लिए क्रिप्टोकरेंसी किसी निवेश के समान था. इससे लोग इसे खरीदते थे और मूल्य बढ़ने पर उसे बेच देते हैं. सरकार के बैन लगाने के बाद यूनोकौइन के यूजर की संख्या में 18% इजाफा हुआ है.

वैधता पर सवाल बरकरार

यूनोकौइन के कस्टमर रिप्रेंजटेटिव ने एक निजी संस्था से बातचीच में बताया कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि बिटकौइन यूजर्स अपने रिस्क पर क्रिप्टोकरेंसी में पैसा लगाएं. उन्होंने कहा कि क्रिप्टोकरेंसी न तो कानूनी तौर से वैध है और न ही गैरकानूनी है.

क्या है क्रिप्टोकरेंसी

सभी देशों की अपनी करेंसी होती है. जिसे वहां का केंद्रीय बैंक रेगुलेट करता है. बिटकौइन किसी देश की करेंसी नहीं है. ये एक डिजिटल करेंसी है ये किसी बैंक में नहीं रहती है. ये क्रिप्टोकरेंसी है जो क्रिप्टोग्राफी का उपयोग करती है. इसे डिजिटल तरीके से बनाया गया है. इसके जरिए सामान खरीदा जा सकता है. ये ट्रेड होती है इसलिए इसको बेचकर भी पैसा कमाया जा सकता है. एक वक्त पर 1 बिटकौइन ने 11 हजार डौलर का स्तर तोड़ दिया था.

बैंक औफ बड़ौदा, विजया और देना बैंक का विलय, खाताधारकों पर होगा ये असर

बैंक औफ बड़ौदा, विजया बैंक और देना बैंक का विलय प्रस्तावित है. इस विलय के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक अस्तित्व में आ जाएगा. सरकार ने इन बैंकों के विलय का निर्णय बैंकों की कर्ज देने की ताकत उबारने और आर्थिक वृद्धियों को गति देने के प्रयासों के तहत किया है. विलय होने के बाद इन बैंकों के सिस्टम में तो बदलाव आएगा, साथ ही ग्राहकों पर भी इसका असर पड़ेगा.

अगर आपका अकाउंट इन बैंकों में से किसी बैंक में है तो आपको किन बदलावों का सामना करना पड़ सकता है इसके बारे में हम यहां आपको जानकारी दे रहे हैं.

अकाउंट नंबर, कस्टमर आईडी में हो सकता है बदलाव

आपको एक नया अकाउंट नंबर और कस्टमर आईडी मिल सकता है. यह पक्का करें कि आपका ईमेल एड्रेस और मोबाइल नंबर बैंक के पास अपडेटेड हो, जिससे किसी बदलाव के बारे में आपको तुरंत जानकारी मिल सके. आपके सभी अकाउंट एक आईडी के साथ टैग होंगे. उदाहरण के लिए, अगर आपका एक अकाउंट विजया बैंक और एक अन्य देना बैंक के साथ है, तो दोनों अकाउंट के लिए एक कस्टमर आईडी अलौट की जाएगी.

यह भी संभव है कि नई एंटिटी सिक्योरिटी की एक और परत जोड़ दे. सूत्रों के अनुसार समान बैंक के साथ एक से अधिक अकाउंट के लिए कस्टमर आईडी एक ही होगी. हालांकि, ज्वाइंट होल्डर के लिए एक अलग यूजर आईडी जेनरेट की जा सकती है जिससे वह केवल संबंधित अकाउंट तक ही पहुंच सके.’

थर्ड पार्टीज के साथ डिटेल्स अपडेट करनी होगी

जिन ग्राहकों को नए अकाउंट नंबर या IFSC कोड अलौट किए गए हैं, उन्हें इन डिटेल्स को विभिन्न थर्ड पार्टी एंटिटीज के साथ अपडेट करना होगा. इनमें इनकम टैक्स डिपार्टमेंट, इंश्योरेंस कंपनियां, म्यूचुअल फंड और नैशनल पेंशन सिस्टम (NPS) शामिल हैं. ग्राहक चाहे तो अपने पौलिसी अकाउंट के जरिए औनलाइन या ब्रांच जाकर नए अकाउंट की डिटेल्स अपडेट कर सकते हैं.

बंद हो सकती है लोकल ब्रांच

बैंक की कई ब्रांच बंद हो सकती हैं और ग्राहकों को नई ब्रांच में जाना पड़ सकता है. उदाहरण के लिए, आपकी मौजूदा होम ब्रांच ऐसी स्थिति में बंद हो सकती है जब एक्वायर करने वाले बैंक की अपनी ब्रांच पास में हो. अपनी ब्रांच के लिए लागू नए IFSC और MICR कोड का ध्यान रखें क्योंकि आपको फंड ट्रांसफर और अन्य फाइनैंशल ट्रांजैक्शंस के लिए इनकी जरूरत होगी.

नए ECS, SIP निर्देश

मर्जर के बाद एंटिटी को सभी इलेक्ट्रानिक क्लीयरिंग सर्विस (ECS) निर्देशों और पोस्ट डेटेड चेक को क्लीयर करना होगा. अपने बैंक, फंड हाउस और इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क कर नए ECS निर्देश जारी करें. जरूरत होने पर आपको ECS से जुड़ा फौर्म औनलाइन या अपनी ब्रांच के जरिए भरना होगा. औटो डेबिट या सिस्टेमैटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के लिए आपको नया SIP रजिस्ट्रेशन और इंस्ट्रक्शन फौर्म भरना पड़ सकता है. ऐसा ही लोन की ईएमआई के लिए भी करना होगा. ग्राहकों को आमतौर पर 6-12 महीनों के लिए बाकी के चेक और मौजूदा चेक बुक का इस्तेमाल करने की अनुमति होती है.

डिपौजिट, लेंडिंग रेट में जल्द बदलाव नहीं

कोटक महिंद्रा बैंक के प्रेसिडेंट (रिटेल लायबिलिटीज एंड ब्रांच बैंकिंग), विराट दीवानजी ने बताया, ‘औफिशल मर्जर की तिथि पर एक्वायर करने वाले बैंक की ओर से औफर किया जाने वाला फिक्स्ड डिपौजिट रेट लागू होगा.’ हालांकि, मौजूदा फिक्स्ड डिपौजिट पर मैच्योरिटी तक पहले से तय इंटरेस्ट मिलेगा. इसी तरह लोन पर इंटरेस्ट रेट भी वास्तविक एग्रीमेंट के अनुसार जारी रहेगा. होम लोन के लिए मौजूदा इंटरेस्ट रेट तब तक बरकरार रहेगा जब तक नई एंटिटी इंटरेस्ट रेट में बदलाव नहीं करती.

25 फीसदी सीटों की मांग से टूटा मायावती-कांग्रेस गठबंधन

मायावती की सोच में राजनीतिक लचीलापन नहीं है. वह बहुजन समाज पार्टी को अपनी निजी जायदाद समझ कर काम कर रही हैं. यही वजह है कि 4 बार उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की मुख्यमंत्री रहने के बाद भी उनको राष्ट्रीय स्तर का नेता नहीं माना जाता. राष्ट्रीय राजनीति में उनकी तुलना पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से कमतर की जाती है. दलित वर्ग जैसे बड़े वर्ग की नेता होने के बाद भी करीब 30 साल की राजनीति में वह उत्तर प्रदेश से बाहर अपना प्रभाव नहीं बना पाई.

उत्तर प्रदेश में 2007 के बाद से उनका जनाधार कमजोर होता जा रहा है. मध्य प्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में मायावती से जिस समझदारी भरी राजनीति की उम्मीद की जा रही थी वह खत्म हो रही है.

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में गठबंधन न होने के पीछे मायावती का अक्खड़पन था. वह उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे में कांग्रेस को सबसे कम सीटें देना चाहती थी जबकि कांग्रेस से मध्य प्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ मांग रही थी.

उत्तर प्रदेश में पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को बसपा से अधिक सीटे मिली थी. बसपा को उस समय 5 और कांग्रेस को 2 सीटें मिली थी. बसपा को एक भी सीट नहीं मिल सकी थी. लोकसभा में बसपा का कोई सदस्य नहीं है. इसके बाद भी वह उत्तर प्रदेश में सपा और कांग्रेस से ज्यादा सीटें मांग रही थी.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस को सबसे कम सीटें देने की बात कहने वाली मायावती मध्य प्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ दलित आबादी को आधार मानकर 25 प्रतिशत सीटें मांग रही थी. मायावती तालमेल का जो फार्मूला उत्तर प्रदेश में लागू कर रही थी वह उसे मध्य प्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ में लागू नहीं करना चाहती थी. इस वजह से कांग्रेस के साथ उनका तालमेल नहीं हो सका.

राष्ट्रीय राजनीति में मायावती खुद को तीसरे मोर्चे का नेता मानकर चल रही हैं. उन्हे लगता है कि अजित जोगी जैसे नेताओं के साथ मिलकर वह अपना जनाधार साबित कर लेंगी. मायावती की मजबूरी दलित वोटर का बिखर जाना है. उत्तर प्रदेश में इस बिखराव को रोकने की जिम्मेदारी मायावती की थी. तालमेल तोड़ कर मायावती ने बड़ी चूक की है.

अखिलेश यादव और राहुल गांधी के पास अभी समय है. मायावती इस बार चूकी तो जो जनाधार उनके पास बचा है वह भी खत्म हो जायेगा. ऐसे में वापस बसपा का उभर कर आना नामुमकिन हो जायेगा. जिस तरह से बसपा-कांग्रेस का तालमेल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छतीसगढ़ के चुनाव में टूटा है उसी तरह उत्तर प्रदेश में भी टूटेगा.

मायावती को अगर तीन राज्यों के विधानसभा चुनाव में सफलता मिली तो वह बढ़ी हुई कीमत वसूल कर तालमेल करेंगी. हमेश खुद को अपर हैंड रखने की चाहत मायावती, बसपा और दलित वर्ग के लिये किसी अभिशाप से कम नहीं है. बसपा इससे बाहर आकर कोई फैसला करने की हालत में नहीं है. ऐसे में दलित  वोटर बिखर रहा और मायावती का वजन घटता जा रहा है.

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