मध्य प्रदेश अपनेआप में अजबगजब प्रदेश है. यहां एक तरफ इस की कुदरती खूबसूरती अपनी ओर खींचती है, तो वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में होने वाले निराले काम पूरे देश में किसी अजूबे से कम नहीं होते.

हाल ही में धार जिले में हुई आरक्षक भरती चर्चा का मुद्दा रही और उस के बाद एमपीबीएसई ने जब 10वीं और 12वीं जमात के इम्तिहानों के नतीजों का ऐलान किया, तो वे भी सुर्खियों में रहे.

इस के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बड़े से पंडाल में छात्रों और मीडिया के सामने नतीजों का ऐलान कर के वाहवाही लूटी.

यहां भी मध्य प्रदेश ने पूरे देश के राज्यों से अलग हट कर काम किया. उस ने बोर्ड परीक्षा का नतीजा ही सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग बना कर जारी कर दिया.

इस में प्रदेश सरकार की क्या मंशा है, यह तो वही बता सकती है, लेकिन जानकारों की मानें तो यह सोचीसमझी चाल के तहत किया गया काम है. इसी साल के आखिर में मध्य प्रदेश में विधानसभा के लिए चुनाव होने हैं, ऐसे में शिवराज सिंह चौहान चाहते हैं कि एक बार फिर उन्हीं के सिर प्रदेश के सरताज होने का ताज सजे.

एक तरफ सरकार बारबार यह जताने की कोशिश करती है कि यहां सभी को बराबर के मौके दिए जा रहे हैं, किसी के साथ नाइंसाफी नहीं की जाएगी, लेकिन जाति आधारित नतीजा जारी करने की क्या जरूरत आ पड़ी, इस बारे में कोई कुछ नहीं बोल रहा है.

इस फैसले पर फजीहत होते देख सरकार ने यह कहना शुरू कर दिया कि इस के पीछे मंशा साफसुथरी है. सरकार चाहती है कि प्रदेश के अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के छात्रों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव न हो और उन्हें कल्याणकारी योजनाओं का फायदा आसानी से मिल सके.

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