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धर्म की खातिर पगला गए लोग हैं इस हादसे के जिम्मेदार

अमृतसर में रावण के फूंके जाने को देखने वालों की भीड़ को रेल द्वारा रौंदे जाने के लिए अगर कोई जिम्मेदार है तो धर्म की खातिर पगला गए लोग हैं. ये लोग इस रेल की पटरी पर खड़े रावण को देख रहे थे जिस पर ट्रेनें आतीजाती रहती हैं. फूट रहे पटाखों की आवाज में वे तेज आ रही ट्रेन की सीटियां और आवाज सुन कर पटरी से हट नहीं पाए.

धर्म की खातिर जान देने वालों की इस देश में कमी नहीं है. कभी कुंभों या तीर्थ स्थलों पर भगदड़ में लोग मरते हैं, कभी बसों में तीर्थयात्रा करते तो कभी स्नान करते हुए नदियों में बह जाने पर. जब भी कोई एलान होता है कि धार्मिक तमाशा होने वाला होता है, धंधेबाज उस के मौखिक प्रचार में लग जाते हैं और जहां 50-100 लोगों की जगह होती है, हजार 2 हजार जमा हो जाते हैं.

पुण्य कमाने का जो लालच सतत प्रचार के सहारे लोगों के ठस दिमागों में ठूंसा जाता है, उस का असर यह है कि लोग आगापीछा छोड़ कर जेब खाली करने, घंटों लाइनों में खड़े होने और गर्मीसर्दी सहने को तैयार हो जाते हैं. देश भर में मंदिरों को ले कर भयंकर धंधेबाजी चल रही है और पुलिस व व्यवस्था उसी का गुलाम बन कर रह गई है.

अमृतसर की घटना में जिम्मेदार यह धार्मिक पागलपन है जो बढ़ रहा है और हर रोज अतिरिक्त कमाई करा रहा है. जगहजगह मंदिर, मसजिद, गुरुद्वारे उग रहे हैं और हरेक के चारों ओर दुकानों की भरमार हो रही है. हमारे धार्मिक स्थलों की एक निशानी अव्यवस्था है क्योंकि पुण्य कमाने के चक्कर में अनुशासन व व्यवहार के सारे नियम ताक पर रख दिए जाते हैं.

रावण को जलते देखने के लिए कंपाउंड में जगह न मिले तो पास की ऊंची रेल की पटरी पर चढ़ जाना किसी भी तरह की समझदारी नहीं है पर धार्मिक अंधभक्ति इस तरह की रही है कि बिना जाने जेब की चिंता किए लोग छोटेछोटे बच्चों को ले कर पटरी पर चढ़ गए. अच्छाई की बुराई पर विजय का नारा कितना खूनी हो सकता है, यह साफ है.

धर्म के नाम पर भीड़ को जमा करना और सार्वजनिक जगहों पर शोरशराबा व तमाशा करना बंद करना जरूरी है. जब तक यह न होगा, भीड़ जमा होगी क्योंकि भीड़ से ही पैसा मिलता है और इसी पर धर्म की विशाल इमारत खड़ी है.

गुवाहाटी वनडे : जबरदस्त जीत और शानदार रिकौर्ड

रविवार, 21 अक्तूबर 2018 को गुवाहाटी में खेले गए पहले वनडे मैच में भारत ने वैस्टइंडीज को 8 विकेट से हरा कर सीरीज का अच्छा आगाज किया. यह जीत जितनी आसान हुई उतनी थी नहीं क्योंकि पहले बल्लेबाजी करते हुए वैस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने बेहतरीन खेल दिखाया था.

उस की तरफ से शिमरॉन हेटमायर ने बढ़िया बल्लेबाजी करते हुए 106 रनों की पारी खेली थी जिस की बदौलत वैस्टइंडीज ने 8 विकेट पर 322 रनों का अंबार लगा दिया था. हेटमायर वही 21 साल के खिलाड़ी हैं जिन्होंने साल 2016 में बंगलादेश में क्रिकेट का अंडर 19 वर्ल्ड कप जीतने में अहम रोल अदा किया था.

इस से पहले वैस्टइंडीज ने जब हाल ही में टेस्ट सीरीज में भारत से मात खाई थी तब कहीं से ऐसा नहीं लग रहा था कि 50 ओवरों में उस के खिलाड़ी भारत के सामने इतनी बड़ी चुनौती पेश कर देंगे. और जब भारत ने बल्लेबाजी शुरू की तो शिखर धवन के रूप में उस ने अपना पहला विकेट 10 रन पर ही गंवा दिया था. ओवर था दूसरा.

उस के बाद तो जो हुआ वह इतिहास बन गया. ओपनर बल्लेबाज रोहित शर्मा और कप्तान विराट कोहली ने इतनी उम्दा बल्लेबाजी की कि वेस्टइंडीज के फील्डर भी दर्शक बन कर रहे गए. रोहित शर्मा ने नाबाद 152 रन ठोंक दिए. वनडे क्रिकेट में यह छठा मौका था जब रोहित शर्मा ने 150 से ज्यादा का स्कोर बनाया हो. वे अब वनडे मैचों में सब से ज्यादा बार 150 से ज्यादा का स्कोर बनाने वाले बल्लेबाज बन गए हैं.

भारत की तरफ से विराट कोहली और रोहित शर्मा ने दूसरे विकेट के लिए 246 रनों की पार्टनरशिप की. रनों का पीछा करते हुए यह भारत की सब से बड़ी साझेदारी है. इस से पहले साल 2009 में गौतम गंभीर और विराट कोहली ने तीसरे विकेट के लिए 224 रन जोड़े थे.

अगर रोहित शर्मा ने बड़ा शतक लगाया तो विराट कोहली भला कैसे पीछे रहते. उन्होंने महज 107 गेंदों पर ताबड़तोड़ 140 रन जड़े जिस में 21 चौके और 2 छक्के शामिल थे. जबकि रोहित की 152 रनों की आतिशी पारी में 15 चौके और 8 छक्के उन के बल्ले से निकले थे. छक्कों के मामले में रोहित भारतीय बल्लेबाज के रूप में तीसरे पायदान पर आ गए हैं. वे अब तक खेले गए अपने वनडे मैचों में कुल 194 छक्के लगा चुके हैं. उन से ऊपर सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धौनी हैं जिन्होंने क्रमशः 195 और 210 छक्के मारे हैं.

विराट कोहली भी कम नहीं रहे. बतौर कप्तान उन्होंने वनडे मैचों में अपना 14वां शतक बनाया जबकि कुल 36 शतक उन के नाम हैं. वैसे, बतौर कप्तान ऑस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग 22 वनडे शतक लगा कर सब से ऊपर हैं. इतना ही नहीं, विराट कोहली ने वैस्टइंडीज के खिलाफ यह 5वां शतक लगाया था जो एक भारतीय रिकॉर्ड है.

सब से बड़ी बात तो यह है कि विराट कोहली ने लगातार तीसरे साल इंटरनेशनल क्रिकेट में 2000 रन बनाए. वैसे वे 5वीं बार साल में 2000 हजार से ज्यादा इंटरनेशनल रन बना चुके हैं. उन से ऊपर श्रीलंका के दिग्गज बल्लेबाज कुमार संगकारा हैं जिन्होंने 6 बार ऐसा कारनामा किया है.

एक ही मैच में इतने रिकॉर्ड बनना अपने आप में रिकॉर्ड लग रहा है जो आने वाले वनडे मैचों में भारतीय टीम का हौसला बढ़ाने में मददगार साबित होगा.

मेरे लिए सिनेमा महत्वाकांक्षा नहीं, एक पैशन है : चित्रांगदा सिंह

सुधीर मिश्रा निर्देशित फिल्म ‘‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’’ में अभिनय कर सेक्सी एक्ट्रेस के रूप में पहचान बनाने के बाद चित्रांगदा सिंह ‘‘यह साली जिंदगी’, ‘इंकार’, ‘साहेब बीबी और गैंगस्टर’ सहित कई फिल्मों में लीक से हटकर किरदार निभाती आयी हैं. चित्रांगदा सिंह महज एक एक्ट्रेस नहीं हैं, बल्कि वह फिल्म निर्माता होने के साथ साथ फिल्म की पटकथाएं भी लिख रही हैं. टीवी पर कुकरी शो कर रही हैं. इन दिनों जहां वह सैफ अली खान के साथ गौरव बजाज निर्देशित फिल्म ‘‘बाजार’’ को लेकर चर्चा में हैं. वहीं वह आर्मी की पृष्ठभूमि के अलावा एक अन्य स्पोर्ट्स बायोपिक फिल्म बनाने की भी सोच रही हैं.

आपने अपने 15 साल के करियर में बहुत कम फिल्में की. इसकी कोई खास वजह ?

पहली बात तो मेरे करियर को 15 वर्ष नहीं हुए. 2003 में मेरी पहली फिल्म ‘‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’’ आयी थी. पर 2004 में मैंने बौलीवुड को बाय बाय कर दिया था. पूरे छह साल तक मैंने कोई काम नहीं किया. 2010 से 2014 तक मैंने काम किया. फिर दो वर्ष मैंने काम नही किया. अब 2016 के बाद काम करना शुरू किया है. तो जब हम अपने करियर में इतना लंबा ब्रेक लेते हैं, तो फिल्मों की संख्या का कम होना भी लाजमी है. यहां इंडस्ट्री में अपने आपको निरंतर बनाए रखना बहुत जरूरी होता है. पर मैं अपने आपको खुशकिस्मत मानती हूं कि जब भी ब्रेक लेकर मैंने काम करना चाहा, तो इंडस्ट्री ने मुझे हाथों हाथ लिया. 2014 में मैंने अपने निजी जीवन व वैवाहिक जीवन की समस्या के चलते ब्रेक लिया. अपनी जिंदगी की कुछ वजहों से भी मैंने कम काम किया. वैसे भी सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री ही नहीं हर जगह जरूरी होता है कि जहां आप काम कर रहे हैं, वहां हमेशा मौजूद रहें. लोगों के जेहन में मौजूद न रहने से फर्क पड़ता है.

पारिवारिक या निजी जीवन की समस्याओं का करियर पर किस तरह से असर होता है?

बहुत फर्क पड़ता है. हम अपना काम करके जो शोहरत, जो प्रशंसा इकट्ठा करते हैं, लोगों का जो विश्वास जीतते हैं, वह सब पारिवारीक व निजी समस्या के चलते हम गंवा देते हैं. मुझे लेकर लोगों के मन में हमेशा सवाल बना रहता है कि मैं मुंबई में रहती हूं या दिल्ली में रहती हूं. कई बार फिल्मकार मुझसे सवाल करते हैं कि अच्छा मुंबई में भी आपका घर है? इस वजह से भी लोगों के मन में शंका होती है कि यह गंभीरता से काम करेगी या बीच में छोड़कर चली जाएगी. तो फिल्मकारों के मन से इस शंका को दूर करने में मुझे बहुत समय लगा. यह सब मेरे निजी जीवन और पारिवारिक समस्या के चलते ही हुआ. जब हम लोगों की नजरों के सामने होते हैं, तो उन्हें अपनी फिल्म की कास्टिंग के समय हम याद आ जाते हैं. पर नजरों से ओझल होते ही सब कुछ गड़बड़ हो जाता है. फिर यह प्रतिस्पर्धा का जमाना है. और प्रतिस्पर्धा के दौर में फायदा उसी का होता है, जो सामने नजर आता है.

2014 के बाद दो साल तक बौलीवुड से दूर रहने के बाद जब आपने वापसी की, तो आपने ‘‘सूरमा’’ जैसी फिल्म से निर्माता बनने की बात क्यों सोची? क्या उस वक्त अभिनेत्री के तौर पर फिल्म नही मिल रही थी?

ईमानदारी की बात यह है कि मेरे पास बीच में समय बहुत था. क्योंकि मैं किसी फिल्म में अभिनय नहीं कर रही थी. खाली वक्त में मैंने लिखना भी शुरू किया था. उस वक्त मैं दो अलग अलग विषयों पर फिल्म की स्क्रिप्ट लिख रही थी. क्योंकि मुझे लिखने में मजा आ रहा था. उसी दौरान एक दोस्त के मार्फत मेरी मुलाकात हौकी खिलाड़ी संदीप से हुई. जब मैंने संदीप सिंह के जीवन की कहानी सुनी, तो मुझे अविश्वसनीय लगी.

पर आप भी जानते हैं कि मैं शुरू से स्पोर्ट्स से जुड़ी रही हूं. तो मुझे पता है कि खेल जगत में एक बार चोटिल होने के बाद दुबारा वापसी करना मुश्किल होता है और वह भी हौकी जैसे खेल में, जहां शारीरिक रूप से स्वस्थ होना पहली जरूरत होती है. तो मैंने संदीप सिंह की कहानी को लिखना शुरू किया. लिखते लिखते मैंने उनके व खेल के बारे में बहुत कुछ महसूस किया. मैंने महसूस किया कि किसी भी खेल को खेलने में कितनी तकलीफें आती हैं. मैंने बहुत करीब से देखा हैं कि एक खिलाड़ी‘इंडियन जर्सी’पहनने के लिए कितनी मेहनत करता है. मुझे पता है कि क्रिकेट के खेल में बहुत पैसा है. मगर बाकी खेलों में पैसा नहीं है. क्रिकेट से इतर खेलों में खिलाड़ी महज ‘इंडियन जर्सी’पहनने के लिए जी जान लगा देता हैं. मुझे पता है कि क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों में लोग भारत देश के लिए खेलते हैं. तो उनके अंदर खेल के साथ साथ अपने देश भारत के लिए जो जज्बा, जो जुनून होता है, वही सब कुछ मुझे संदीप सिंह की कहानी में नजर आया. जिसकी वजह से मेरे दिल ने आवाज दी की यह कहानी पूरे देश को सुनायी जानी चाहिए. और वह भी इसलिए क्योंकि यह क्रिकेट का खेल नहीं है. मैंने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि सदीप सिंह की कहानी को व्यवसाय के रंग में न रंगते हुए यथार्थ के धरातल पर सही ढंग से परदे पर पेश कर लोगों तक पहुंचाउं. मुझे लगता है कि मैंने अपनी तरफ से ईमानदारी से काम किया.

पर क्या आपने सोचा कि क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों से खिलाड़ी को पैसा क्यों नहीं मिलता है? उनके सामने समस्या क्यों आती हैं?

मैं हमेशा से सोचती रही हूं. मेरा भाई भी गोल्फ खेलता है. उसने अमैच्योर गोल्फ खेला है. एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया है. तो मुझे सारी तकलीफें पता है. जब मेरा भाई एशियन गेम्स में गोल्फ खेलने गया था, तो हमारे लिए बहुत बड़े गर्व की बात थी. वह भारतीय टीम का हिस्सा था. मेरे पिता खुद आर्मी में रहे हैं. तो हमारे लिए गौरव का वक्त था. लेकिन जब वह अपने ब्लेजर की फिटिंग के लिए गया था, तो बहुत तकलीफ हुई थी. क्योंकि ब्लेजर की गुणवत्ता बहुत घटिया थी. हर तरफ से बहुत टाइट/कसी हुई थी. वह पहन नहीं पा रहा था. रातों रात उसने उसे दूसरे दर्जी से ठीक करवाया. तो जो दर्जी खिलाड़ियों की ब्लेजर व पैंट सिलते हैं, उनके मन में भी इन खिलाड़ियों के प्रति कोई सम्मान नहीं होता कि कम से कम उनकी ब्लेजर और पैंट तो सही नाप से सिलें. जबकि मेरा भाई बीस दिन पहले नाप दे चुका था. यह बात एक खिलाड़ी के लिए बहुत मायने रखती है. खिलाडी ब्लेजर को अपने गौरव के लिए पहनता है. पर यदि दर्जी के रूप में उसने उसे सम्मान नही दिया, तो कितनी तकलीफ होती है. यह एक छोटा सा उदाहरण है. मैंने इसी तरह से खिलाड़ियों के साथ बहुत सी चीजों पर शुरू से सोचती रही हूं. मैं स्पष्ट कर दूं कि मुझे क्रिकेट बहुत पसंद है. पर खेल जगत में यदि आप क्रिकेटर नहीं हैं, तो आपके साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है. मेरे कई राष्ट्रीय स्तर के शूटर खिलाड़ी जोरावर सिंह संधू, जुही आदि मित्र हैं. जिनसे मेरी बात होती रहती है. इन सभी को भी बहुत मुसीबतों का सामना करना पडता है. इन्हें शूटर के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए कारतूस तक नहीं मिलते. तो यह बेचारे कहां से प्रैक्टिस करेंगें? कैसे अच्छे खिलाड़ी बनेंगें? क्रिकेट और दूसरे खेल के खिलाड़ी के बीच बहुत अंतर है. क्रिकेट के अलावा दूसरे खिलाड़ियों के साथ जो समस्या है, उसकी सबसे बड़ी समस्या प्रायवेट स्पांसरो का ना होना है. सरकार की तरफ से तो कमी बनी ही रहती है. क्रिकेट के साथ प्रायवेट स्पांसर बहुत होते हैं. सच कहूं तो मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि मैं किसे दोष दूं. किस पर आरोप लगाउं? पर मैं देश के हर नागरिक से यह कहना चाहूंगी कि संदीप सिंह जैसे बहुत से खिलाड़ी ऐसे हैं, जो पैसे के लिए नहीं देश के लिए खेलते हैं. तो हम सबको दर्शक की हैसियत से सामने आकर ऐसे खिलाड़ियों की मदद करके उनका हौसला बढ़ाना चाहिए. छेत्री ने तो खुद लोगों से अपील की थी कि कम से कम आप खिलाड़ियों को सम्मान दें, उन्हें पहचान तो दें, भले पैसा ना दें.

पिछली बार जब आपसे मुलाकात हुई थी, तो आपने बताया था कि आप शूटर की ट्रेनिंग ले रही हैं. उस वक्त आप एशियन गेम्स में जाना चाहती थीं. उसका क्या हुआ?

हंसते हुए..कुछ नहीं हुआ. जैसा कि मैंने अभी थोड़ी देर पहले बताया कि हमें भी बहुत समस्याओं का सामना करना पड़ा. मैं ट्रैक शूटिंग कर रही थी. बहुत प्रैक्टिस कर रही थी. मैंने अपने लिए भाई से कह कर एक गन भी सेट करवायी. उसे मैंने अपनी साइज का बनवाया था, जिसमें 26 इंच का बैरेल था. लेकिन वही कारतूस का सबसे बड़ा मुद्दा था. क्योंकि उस वक्त भी और आज भी मैं रिनाउंड यानी कि लोकप्रिय शूटर नहीं हूं. इसलिए हमें शूटर के रूप में प्रैक्टिस के लिए कारतूस का उतना कोटा नहीं मिलता, जितनी जरूरत थी. जिसकी वजह से मैं आगे नहीं बढ़ पायी. मेरी ही तरह कई खिलाड़ियो के साथ ऐसा होता है. तो लोगों में प्रतिभा होने के बावजूद सुविधा के अभाव के चलते वह आगे नहीं बढ़ पाते हैं. मेरे साथ भी यही हुआ. इसलिए फिर से अभिनय में ध्यान देना शुरू कर दिया.

चर्चा है कि आप किसी मशहूर तैराक पर बायोपिक फिल्म बनाना चाहती हैं?

जी हां! यह एक अपाहिज तैराक की कहानी है.

आपके पिता आर्मी में रहे हैं. आपको नही लगता कि आर्मी को लेकर आप फिल्म बनाएं?

आपने मेरे मन की बातें पढ़ रखी हैं. क्योंकि यह विचार मेरे मन में काफी दिनों से चल रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि हाल ही में भारत में कुछ फिल्में बनी हैं, जिनमें आर्मी को गलत ढंग से पेश किया गया है. इन फिल्मों को बनाते समय इस बात पर ध्यान ही नही दिया गया कि बैच कैसे लगने चाहिए? कितनी सीटियां होनी चाहिए? कैसी बेल्ट होनी चाहिए? यह सब मुझे पता है. तो इन फिल्मों को देखकर एक सैनिक की बेटी होने के कारण बहुत तकलीफ हुई. इन फिल्मों में निर्देशन और कला निर्देशन बहुत गलत होता है. इन फिल्मों में आर्मी को बहुत अलग ढंग से दिखाया गया, जिसे देखकर मुझे तकलीफ होती है. फिल्म देखकर लगता है कि आर्मी का क्या मजाक बना रहे हैं? सिर्फ मैं ही क्यों जो भी इंसान आर्मी में हैं, उन सभी को तकलीफ होती है. आर्मी से जुड़े लोग उस ढंग से संवाद करते ही नहीं, जिस ढंग से फिल्मों में दिखाया जाता है. तो कुछ कहानियों पर हम काम कर रहे हैं, पर सही वक्त आने पर मैं उसे उजागर करना चाहती हूं.

आपने बताया कि आप बीच में कुछ लिख रही थीं. तो क्या लिख रही थीं?

देखिए, मैं कविता या कहानी नहीं लिख रही थी. बल्कि मैं तीन फिल्मों की पटकथा लिख रही थी. इसमें से एक बच्चों की फिल्म है, जो कि मेरे दिल के काफी करीब है. मेरी तमन्ना है कि मैं सबसे पहले इस फिल्म पर काम करूं. दूसरी फिल्म प्रेम कहानी और तीसरी एक रोमांचक फिल्म है.

आप निर्माण, लेखन, अभिनय सहित कई जगह हाथ पैर मार रही हैं. बीच में आप टीवी शो से भी जज के रूप में जुड़ी थीं. अब आप टीवी पर कुकरी शो कर रही हैं?

आपने बिलकुल सही कहा. मैं इन दिनों कई तरह के काम कर रही हूं. पर इसके पीछे कोई खास वजह नहीं है. देखिए, मुझे सिनेमा से प्यार है. सिनेमा मुझे बहुत उत्साहित करता है. मेरे लिए सिनेमा महत्वाकांक्षा नही, बल्कि एक पैशन है. पैशन में आप अंधे होकर दौड़ते हैं. जबकि महत्वाकांक्षा के लिए लौजिक जरूरी है. इसलिए मैंने लिखना शुरू किया. इसी पैशन की वजह से निर्माता भी बनी. क्योंकि में चाहती थी कि संदीप सिंह की कहानी बिना कोई मसाला डाले लोगों तक पहुंचे. फिल्म ‘सूरमा’ से मुझे इतना उत्साह मिला है कि जिन लोगों ने मुझ पर विश्वास बनाया है, उसके कारण मैं कुछ और फिल्मों का निर्माण करना चाहूंगी.

लेकिन टीवी पर डांस इंडिया डांस या कुकरी शो मजे के लिए कर रही हूं. मैं इन कायक्रमों को करते हुए इंज्वाय कर रही हूं. मैंने बहुत यात्राएं की हैं. मैंने बहुत अलग अलग तरह के व्यंजन चखे व बनाना भी सीखा है. ताईवान से लेकर कोरिया, जापान, दक्षिण अमरीका सहित बहुत से देशों की कूकिंग को लेकर जानकारी रखती हूं. तो मुझे लगा कि कूकिंग शो से जुड़ना चाहिए. एक औरत और कुक होने के नाते अपने अनुभव इस शो में बांट रही हूं.

सिर्फ अपने अभिनय करियर से आप कितना संतुष्ट हैं?

संतुष्ट हूं ऐसा तो नहीं कह सकती. क्योंकि अभी तक मैंने बहुत ज्यादा काम नही किया है और ना ही बहुत अलग तरह के किरदार किए हैं. जहां तक अभिनय का सवाल है, तो मुझे लगता है कि अभी बहुत कुछ करना है. मैं चाहती हूं कि लोग कहें कि यह किरदार आपके लिए लिखा गया है. मुझे लगता है कि मेरे अंदर जो आग है, उसके चलते कुछ किरदार अपने आप मेरे पास आ जाएंगे. मैं इस उम्मीद से काम कर रही हूं कि मुझे भी कुछ बेहतर करने का मौका मिलेगा. मेरी इच्छा कुछ अलग तरह के किरदार निभाने की है. मसलन 26 अक्टूबर को प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘‘बाजार’’ में काफी अगल तरह का किरदार निभाया है. इस तरह का किरदार इससे पहले नहीं निभाया था.

फिल्म ‘‘बाजार’’ के किरदार को लेकर क्या कहेंगी?

इस फिल्म में मंदिरा का किरदार निभाया है, जो कि एक उद्योगपति की बेटी है. मंदिरा के पिता की कंपनी में शकुन कोठारी (सैफ अली खान) नौकरी करते हैं. वह इस कंपनी को पांच करोड़ से पचास करोड़ की बनाने में योगदान देते हैं. उसके बाद मंदिरा व शकुन कोठारी की शादी हो जाती है. अति महत्वाकांक्षी शकुन अपनी मेहनत के बल पर एक दिन डायमंड मार्केट के अलावा शेअर बाजार में बहुत बड़ी हस्ती बन जाते हैं. मंदिरा अपने पति के साथ चट्टान की तरह खड़ी रहती है. मगर दौलत व महत्वाकांक्षा को लेकर मंदिरा व शकुन दोनों की सोच में अंतर है. मंदिरा एक अमीर परिवार से आयी है. इसलिए उसके लिए दौलत बहुत बड़ा मुद्दा कभी नहीं होता. उसके जीवन मूल्य व आदर्श अलग है. जबकि नए नए अमीर बने शकुन के लिए दौलत बड़ा मुद्दा है. मंदिरा जहां आवश्यक हो, वहीं बोलती है अन्यथा चुप रहना पसंद करती है. अब वह दो बेटियों की मां भी बन चुकी है. मगर महत्वाकांक्षाओं के टकराव के चलते मंदिरा का वैवाहिक जीवन गड़बड़ होता है.

सैफ अली खान के साथ फिल्म ‘‘बाजार’’ आपकी पहली फिल्म होगी?

जी हां! सैफ के साथ यह मेरी पहली फीचर फिल्म है. पर कई वर्ष पहले मैंने उनके साथ एक विज्ञापन फिल्म ‘‘ताज चाय’’ की थी. जब हम दोनों इस फिल्म के सेट पर मिले, तो इस विज्ञापन फिल्म को याद कर रहे थे. इस विज्ञापन फिल्म की शूटिंग के कुछ फोटोग्राफ सैफ के पास थे, जो एक दिन वह सेट पर लेकर आए थे. उस फोटो में वह और मैं दोनों अलग नजर आ रहे थे. उनके साथ काम करने का अपना अलग आनंद रहा

सनराइजर्स हैदराबाद को छोड़ इस टीम में शामिल हो सकते हैं धवन

भारतीय क्रिकेट टीम के ओपनर बल्लेबाज शिखर धवन अपनी आईपीएल टीम से नाखुश चल रहे हैं. खबरों की माने तो धवन अपनी कम फी के कारण सनराईजर्स हैदराबाद से खुश नहीं हैं और हो सकता है कि अगले साल होने वाले आईपीएल में मुंबई इंडियन्स के लिए खेलें. अगर सब कुछ ठीक रहा तो धवन जल्दी ही रोहित शर्मा के साथ आईपीएल में खेलते नजर आएंगे. इससे मुंबई को काफी फायदा होगा, आपको बता दे कि इसके पहले धवन 2009, 2010 में मुंबई के लिए खेल चुके हैं.

एक अखबार में छपी खबर की माने तो धवन अपनी टीम से खुश नहीं हैं. और उन्होंने टीम छोड़ने की इच्छा जाहिर की है. आपको बता दें कि धवन की हैदराबाद के कोच टौम मूडी से बहस हो गई थी. धवन का कहना था कि उन्हें टीम में नंबर-1 या नंबर-2 खिलाड़ी के तौर पर रिटेन किया जाए. क्योंकि वह टीम इंडिया में टौप 4 खिलाड़ियों में से हैं.

धवन को हैदराबाद टीम ने RTM के तहत 5.2 करोड़ रुपये में खरीदा था. हालांकि, वह हैदराबाद की ओर से सबसे महंगे खरीदे गए खिलाड़ी नहीं थे. डेविड वौर्नर को हैदराबाद ने 12 करोड़ में और भुवनेश्वर कुमार को 8.5 करोड़ रुपये में रिटेन किया था.

मुंबई इंडियन्स के एक अधिकारी ने कहा कि हां वो अच्छे खिलाड़ीयों को जरूर खरीदेगें. आपको बता दें कि फ्रेंचाइजी किंग्स इलेवन पंजाब और दिल्ली डेयरडेविल्स के साथ भी खरीद फरोख्त में लगी है. आईपीएल ट्रेडिंग विंडो अभी एक हफ्ते के लिए खुली है. वहीं द. अफ्रीकी खिलाड़ी क्विंटन डि कौक को भी मुंबई इंडियंस ने खरीद लिया है.

5G : 10 गुना ज्यादा होने वाली है आपकी इंटरनेट स्पीड

5वां जेनरेशन मोबाइल नेटवर्क या 5G जो टेक्नौलजी को  पूरी तरह से बदल देगा  बल्कि आपके नेट स्पीड में भी बदलाव लाएगा. जी हां सही सुना आपने, 5G नेटवर्क पर कई सारे डिवाइस एक साथ कई लाखों डेटा को अपने पास कलेक्ट करेंगे जिससे एक दूसरे से संपर्क किया जा सकेगा.

5G आने के बाद आप अपने फोन को घर में मौजूद हर डिवाइस से कनेक्ट कर सकेंगे, चाहे वो सिक्योरिटी सिस्टम, फ्रिज, स्मार्ट सिटी या फिर आपकी कार हो. सबकुछ आपके एक इशारे पर काम करेंगे. 5G की शुरूआत साल 2022 में होगी. तो चलिए आपको बताते हैं कि इस नेटवर्क के आने से आपके आम जिंदगी में किस का तरह बदलाव होगा-

–  नेटवर्क काफी तेज हो जाएगा जिसकी मदद से आपको नेटवर्क के कारण कोई भी दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा.

– 4G के मुकाबले इंटरनेट की स्पीड 10 गुना ज्यादा होगी.

–  पॉवर और बैटरी का इस्तेमाल कम हो जाएगा.

– डेटा को ट्रांस्फर करने और नेटवर्क की स्पीड में बढ़ोतरी होगी.

आपको बता दें, 10 साल पहले जिस तरह से 4जी ने हमारी जिंदगी को पूरी तरह से बदल कर रख दिया था वैसे ही साल 2022 में भी कुछ ऐसा ही होगा. 4 जी से पहले हम ऑनलाइन गानें, एप्स और डिजिटल ट्रान्जैक्शन नहीं कर पाते थे लेकिन जैसे ही ये नेटवर्क आया हमारे जीवन में सबकुछ बदल गया. तो चलिए जानते हैं कि 5G आने के बाद क्या-क्या बदलेगा.

स्मार्ट घर- नेटवर्क की मदद से सिक्योरिटी सिस्टम, पावर सप्लाई, पानी मैनेजमेंट जैसी चीजों को कंट्रोल किया जा सकेगा. 5G की मदद से आप सिर्फ दूध ही आर्डर नहीं कर पाएंगे बल्कि एक ईशारे पर पानी और बिजली को भी बंद कर पाएंगे तो वहीं सेहत में गड़बड़ी होने पर इमरजेंसी का भी सहारा लिया जा सकेगा.

स्मार्ट शहर– 5G की मदद से एक शहर दूसरे शहर से कनेक्टेड रहेंगे जिसमें ट्रैफिक, कूड़ा मैनेजमेंट, पावर सप्लाई और गाड़ियों का आना जाना शामिल होगा, ये सबुकछ आटोमैटिक होगा जिससे ट्रैफिक में भी काफी मदद मिलेगी.

खुद से चलने वाली गाड़ियां– सेल्फ ड्राइविंग गाड़ियों में एआई कंपोनेंट का इस्तेमाल किया जाएगा. इसकी मदद से कई लाखों डेटा का इस्तेमाल कर इस बात पर ध्यान दिया जाएगा कि आपकी गाड़ी सही से चले तो वहीं आपके आसपास चलनी वाली गाड़ियों पर भी ध्यान हो जिससे एक्सिडेंट के खतरे कम हो.

भ्रष्टाचार का सनसनीखेज खुलासा : 15 मैचों में की गई थी स्पाट फिक्सिंग

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भ्रष्टाचार का सनसनीखेज खुलासा हुआ है. एक समाचार चैनल ने अपनी एक इनवेस्टिगेटिव डौक्यूमेंट्री रविवार को प्रसारित की, जिसमें खुलासा हुआ कि साल 2011-12 में कुल 15 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 26 बार स्पाट फिक्सिंग हुई. डौक्यूमेंट्री में दावा किया जा रहा है कि अनील मुनव्वर नाम के एक आरोपी ने 6 टेस्ट, 6 वनडे इंटरनैशनल और 3 वर्ल्ड टी20 मैचों में फिक्सिंग की जिसमें 2011 में लार्ड्स में खेला गया भारत-इंग्लैंड टेस्ट मैच भी शामिल है.

बता दें कि अल जजीरा पर जो डौक्यूमेंट्री प्रसारित हुई, उसका नाम ‘क्रिकेट के मैच फिक्सर्स: द मुनवर फाइल्स’ है. इस डौक्यूमेंट्री में दावा किया गया है कि इंग्लैंड के खिलाड़ियों ने 7 मैचों में, औस्ट्रेलिया के खिलाड़ियों ने 5 मैचों में, पाकिस्तान के क्रिकेटरों ने 3 मैचों में और 1 अन्य देश के क्रिकेटर ने फिक्सिंग की. इनमें भारत-इंग्लैंड के बीच लार्ड्स में खेला गया टेस्ट मैच, साउथ अफ्रीका और औस्ट्रेलिया के बीच 2011 में ही केप टाउन मं खेला टेस्ट मैच शामिल है.

इसके अलावा 2011 वर्ल्ड कप के 5 मैचों में और 2012 वर्ल्ड टी20 के 3 मैचों में भी फिक्सिंग का दावा किया गया है. साथ ही यह भी दावा है कि इंग्लैंड और पाकिस्तान के बीच 2012 में खेले गए तीनों टेस्ट मैचों में फिक्सिंग की गई. अल जजीरा को कई ऐसी फाइल मिली हैं जिसमें मुनव्वर की कौल रिकौर्डिंग शामिल है जिसमें उसने दिनेश खंबत को फोन किया. खंबत दिनेश कलगी का साथी रहा जिसकी साल 2014 में मौत हो गई थी.

कौल रिकौर्डिंग में पैसे भेजने की बात

डौक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि मुनव्वर में इंग्लैंड के एक प्लेयर को 2011 में कौल किया और कहा- एशेज के लिए मुबारक हो. आपके अकाउंट में बकाया रकम एक सप्ताह में पहुंच जाएगी. इसके जवाब में प्लेयर कहता है- शानदार. हालांकि जब इस क्रिकेटर (जिसका नाम नहीं बताया गया) से पूछा गया तो उन्होंने साफ तौर पर इनकार किया और इस ऑडियो को ‘झूठा’ करार दिया.

उमर अकमल की तस्वीरें

इसमें उमर अकमल को ‘डी कंपनी’ के एक सदस्य से होटेल लौबी में मुलाकात करते तस्वीरें दिखाई गई हैं जो दुबई में पाकिस्तान-इंग्लैंड टेस्ट से पहले की बात है. बता दें कि इस साल जून में अकमल को पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की ऐंटी करप्शन यूनिट ने समन भेजा था जब उन्होंने कहा कि 2015 वर्ल्ड कप और हौन्ग कौन्ग सुपर सीरीज के दौरान मैच फिक्सरों ने उन्हें जाल में फंसाने का प्रयास किया था.

जांच कराएगा आईसीसी

आईसीसी की ऐंटी करप्शन यूनिट के जनरल मैनेजर एलेक्स मार्शल ने कहा कि क्रिकेट की यह वैश्विक संस्था मामले की पूरी जांच करेगी. उन्होंने कहा, ‘हम इस डौक्यूमेंट्री के कौन्टेंट को फिर से देखेंगे और हर तरह के आरोपों की जांच की जाएगी. हमारे पास खेल से भ्रष्टाचार को दूर करने के लिए पहले से काफी ज्यादा संसाधन हैं.’

टेक्नोलौजी की दुनिया में क्रांति लेकर आएगा 5G

भारत में 2022 तक 5G नेटवर्क के आने की उम्मीद है. 5G न सिर्फ इंटरनेट की स्पीड को कई गुना बढ़ा देगा बल्कि टेक्नोलौजी की दुनिया में भी एक क्रांति ले आएगा. 5G के दौर में लाखों डिवाइसेस एक-दूसरे के संपर्क में रहेगें. आपका डिवाइस घर पर मौजूद हर डिवाइस यानी फ्रिज से लेकर आपके सिक्योरिटी सिस्टम तक कनेक्टेड रहेगा. आखिर 5G नेटवर्क के आने के बाद हमारी जिंदगी कैसी होगी? आइए जानते हैं:

5G क्या है?

सबसे पहले तो यह जानना जरूरी है कि 5G क्या है. 5G को मोबाइल इंटरनेट की पांचवी पीढ़ी कहा जा सकता है. कुछ सालों के अंतराल पर हर बार मोबाइल इंडस्ट्री बेहतरीन इंटरनेट स्पीड के लिए खुद को अपग्रेड करती है. 5G यानी हाई स्पीड इंटरनेट. 5G नेटवर्क 1 सेकंड में 20 गीगाबाइट्स तक की स्पीड पकड़ सकेगा. 3जी और 4जी के मुकाबले, इसके जरिए 20 गुना तेजी से डेटा डाउनलोड और ट्रांसफर किया जा सकेगा. इसमें एक साथ कई डिवाइसेस को इंटरनेट से जोड़ा जा सकेगा.

स्मार्ट सिटीज

5G के जरिए स्वचालित कारें भी एक दूसरे से बेहतर संवाद कर पाएंगी और ट्रैफिक व मैप्स से जुड़ा डेटा लाइव साझा कर पाएंगी. मान लीजिए कि शहरों में अगर सेंसर लगे हैं तो फिर वे पैदल चलने वालों और वाहनों के मूवमेंट पर नजर रख सकते हैं और औटोमैटिकली ट्रैफिक लाइट्स का संचालन कर जाम लगने की स्थिति से बचा सकते हैं.

स्मार्ट होम्स

5G सर्विस से लैस स्मार्ट होम्स सिक्योरिटी सिस्टम, बिजली और पानी की खपत को मैनेज कर पाएंगे. एक स्मार्ट होम घर के हर काम कर पाएगा और बिजली की फिजूलखर्ची भी रोकेगा. और तो और यह आपकी हेल्थ का भी ख्याल रखेगा. इमर्जेंसी होने पर इसके जरिए डॉक्टर को भी बुलाया जा सकेगा.

स्वचालित कारें

5G की मदद से स्वचालित कारों के AI कम्पोनन्ट में सुधार किया जा सकेगा. स्वचालित कारों में जल्दबाजी के चक्कर में उनका मार्गदर्शन नहीं हो पाता, जिसकी वजह से उन्हें चलाने के लिए मानवीय हस्तक्षेप की जरूरत पड़ जाती है, लेकिन 5G के आने के बाद स्वचालित कारों का स्वरूप और दिशा ही बदल जाएगी.

हेल्थ मानिटरिंग

5G के आने के बाद स्वास्थ्य संबंधी उपकरणों से सेंसर लगातार जुड़े रहेंगे जो आपके स्वास्थ्य के बारे में पल-पल की जानकारी देते रहेंगे. कुल मिलाकर स्वास्थ्य संबंधी सेवाएं और भी बेहतर हो जाएंगी. उदाहरण के लिए, अगर आप एक डॉक्टर हैं तो दूर बैठे ही मरीज की जांच कर सकते हैं. बाहर किसी देश से आप भारत के किसी अस्पताल में पड़े मरीज का इलाज या औपरेशन भी कर पाएंगे. एक तरह से 5G टेक्नोलौजी के लिए आपके दरवाजे खोल देगा, जिसके बाद आपकी लाइफ में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे.

नो कौस्ट ईएमआई मतलब घाटे का सौदा !

इस समय त्यौहारों का मौसम चल रहा है. ऐसे में ज्यादातर बड़े स्टोर और ई-कौमर्स कंपनियां अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए नो कौस्ट ईएमआई का लुभावना औफर दे रही हैं. यह औफर मोबाइल फोन, टीवी, फ्रिज, वाशिंग मशीन और एसी जैसे सामान खरीदने पर दिया जा रहा है.

हालांकि लोगों को इस तरह के औफर से एक ही फायदा होता है, वो यह कि लोगों को सामान खरीदने पर एकमुश्त पैसा नहीं देना पड़ता. लेकिन इसका केवल एक यह फायदा बाकी सभी तरह के होने वाले नुकसान को छिपा देता है और लोगों को पता भी नहीं चलता कि वह सामान की वास्तविक कीमत से ज्यादा पैसा चुकाते हैं.

अगर आपको लगता है कि नो कौस्ट ईएमआई पर सामान खरीदना महंगा नहीं है, तो फिर आप गलत सोच रहे हैं. नार्मल ईएमआई हो या फिर नो कौस्ट ईएमआई आप हमेशा एमआरपी से ज्यादा पैसा चुकाते हैं.

बिना क्रेडिट कार्ड खरीद सकते हैं सामान

अगर आपके पास क्रेडिट कार्ड नहीं है तो भी बैंक डेबिट कार्ड के जरिए नो कौस्ट ईएमआई पर सामान खरीदने की सुविधा दे देते हैं. इस ईएमआई को आप 3 महीने से लेकर के 12 महीने के बीच चुका सकते हैं.

16 से 24 फीसदी ब्याज

इस तरह की स्कीम पर आपको 16 से 24 फीसदी ब्याज देना होता है. बैंक आपसे पर्सनल लोन पर लगने वाले ब्याज दर को ही नो कौस्ट ईएमआई में लिया जाता है. भारतीय रिजर्व बैंक के सर्कुलर के अनुसार जीरो या फिर नो कौस्ट ईएमआई का सिद्धांत ही नहीं है. बैंक व अन्य वित्तीय कंपनियां इसको केवल मार्केटिंग छलावा है, क्योंकि किसी को भी कुछ सस्ता नहीं मिलता है.

ईएमआई में जुड़ी होती है ब्याज दर

प्रत्येक ईएमआई में बैंक ब्याज भी जोड़कर चलते हैं. इसी आधार पर किश्त बनती है. मान लिजिए आपने 20 हजार का फोन लिया और उस पर कंपनी ने पांच हजार की छूट दे दी. अब आपने उसको एक साल के समयवधि के लिए ईएमआई पर लिया है.

अगर ब्याज न लिया जाए तो फिर हजार रुपये प्रति महीने की किश्त बनेगी. लेकिन ऐसा नहीं है. आपको यह फोन ब्याज मिलाकर 20 हजार रुपये से ज्यादा का ही पड़ेगा. इसलिए ऐसे छलावे में आने से पहले पूरी तरह से नो कौस्ट ईएमआई की नियम व शर्ते पढ़ लें.

अक्टूबर में भारतीय बाजार से निकले 32000 करोड़, जानिए वजह

सरकार चाहे कितना ही निवेश और देश की आर्थिक स्थिति में सुधार की बात करती हो पर अक्टूबर महिने में शेयर बाजार से आने वाली ये खबर उसकी उदासीन और ध्वस्त आर्थिक नीति की ओर इशारा कर रहे हैं. अक्टूबर के पहले तीन हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से 32,000 करोड़ रुपए की रकम निकाल ली है. जबकि, पूरे सितंबर महीने में सिर्फ 21,000 करोड़ रुपए की निकासी की थी. हालांकि इसके लिए ग्लोबल ट्रेड वार, क्रूड की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़ने जैसी वैश्विक घटनाओं को मुख्य घटक माना जा रहा है. जानकारों का मानना है कि इसका प्रमुख कारण निवेशकों इक्विटी और डेट मार्केट में घटा भरोसा है, जिसकी वजह से ज्यादा बिकवाली की गई है.

आपको बता दें कि निवेशकों ने 1 से 19 अक्टूबर तक इक्विटी मार्केट में 19,810 की बिकवाली की. इस दौरान 12,167 करोड़ रुपए के बौन्ड बेचे गए. इस साल विदेशी निवेशकों ने ज्यादातर महीनों में खरीदारी कम और बिकवाली ज्यादा की.

एक फाइनेंशियल सर्विसेज के आर्थिक मामलों के जानकार ने दुनिया भर में आई इस आर्थिक सुस्ती के लिए के लिए अमेरिका चीन के ट्रेड वार को मुख्य वजह बताया है. इसके चलते विदेशी निवेशकों ने रकम निकाली. इसके अलावा इसका कारण आईएमएफ के वैश्विक अर्थव्यवस्था की ग्रोथ का अनुमान कम करना भी है. जिसके कारण निवेशकों का सेंटीमेंट बिगड़ा है.

जानकारों की माने तो अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ने और डौलर में मजबूती जैसी वजहों के चलते निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर दूसरे बाजारों में निवेश बढ़ा रहे हैं. वहीं आईएल एंड एफएस का संकट भी इस निकासी का प्रमुख कारण है. इस साल विदेशी निवेशक इक्विटी बाजार से 33,000 करोड़ और डेट मार्केट से 60,000 करोड़ रुपए की निकासी कर चुके हैं.

तो 14 और 15 नवंबर को शादी के बंधन में बंधेंगे दीपिका-रणवीर

पिछले दो सालों से दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की शादी के तारीख को लेकर चल रही अटकलों के बाजार पर अब विराम लग गया है. दीपिका ने 21 अक्टूबर को 3 बजकर 59 मिनट पर अपनी शादी का कार्ड सोशल मीडिया पर पोस्ट किया और वहीं रणवीर सिंह ने भी 4 बजकर 03 मिनट पर ट्विट किया. उन्होंने अपनी शादी का कार्ड पोस्ट करते हुए घोषणा की है कि उनकी शादी 14 और 15 नवंबर को होगी. आपको बता दें, पहले रणवीर सिंह ने इस कार्ड को अंग्रेजी में लिखा हुआ पोस्ट किया था फिर दोनों यानी दीपिका और रणवीर ने हिन्दी में लिखा हुआ कार्ड पोस्ट किया.

 

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सूत्रों के अनुसार रणवीर सिंह और दीपिका पादुकोण इटली के लेक कोमो में शादी करेंगे. जबकि शादी से पहले जो नंदी पूजा होती है, वो बंगलौर में दीपिका के घर होगी. इस पूजा के लिए रणवीर और दीपिका के परिवार नवंबर के पहले सप्ताह में बंगलौर जाएंगें. दीपिका की मां उज्जवला पादुकोण ने इस पूजा के लिए बंगलौर के मशहूर नंदी मंदिर के पुजारियों से बात कर ली है. इस ‘‘नंदी पूजा’’ में वर व वधू दोनों की मौजूदगी अनिवार्य होती है.

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