18 साल की हिमा दास ने साल 2016 में एथलेटिक्स की शुरुआत की थी. आज उन की मेहनत रंग ला रही है. यही वजह है कि उन्हें ‘यूनिसेफ इंडिया’ का ‘यूथ एंबेसडर’ बनाया गया है. ‘यूनिसेफ इंडिया’ ने 14 नवंबर को ट्वीट कर यह जानकारी दी थी.

हमारे देश के खेल जगत में अब बहुत से अजूबे हो रहे हैं. यह वर्ष पहलवान बजरंग पूनिया के लिए शानदार रहा है. उन्होंने कुश्ती के हर बड़े इवेंट में मैडल जीते हैं. भाला फेंक के बाहुबली हैंडसम हंक नीरज चोपड़ा के तो कहने ही क्या. स्वीट स्माइल वाली मनु भाकर को कौन भूल सकता है. कम उम्र में ही इतनी सटीक निशानेबाज हैं वह.

लेकिन सब से ज्यादा हैरान किया हिमा दास ने. भारत की 18 साल की इस हैरतअंगेज एथलीट ने जुलाई, 2018 में फिनलैंड के टैम्पेयर शहर में हुई आईएएएफ अंडर-20 एथलेटिक्स चैंपियनशिप की 400 मीटर दौड़ में गोल्ड मेडल जीता था. वे वर्ल्ड लेवल पर ट्रैक इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनी थीं. इस से पहले भारत के किसी मह‍िला या पुरुष खिलाड़ी ने जूनियर या सीनियर किसी भी लेवल पर वर्ल्ड चैंपियनशिप में गोल्ड मैडल नहीं जीता था.

इस के बाद इसी साल जकार्ता, इंडोनेशिया में हुए एशियन गेम्स में भी हिमा दास ने उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन कर 400 मीटर दौड़ में सिल्वर मैडल पर कब्जा जमाया था. फाइनल रेस में उन्होंने 50.79 सेकेंड का समय ले कर शानदार दौड़ लगाई थी, पर वे गोल्ड मैडल जीतने से चूक गई थीं.

यूनिसेफ संस्था को पूरी दुनिया में बच्चों की पढ़ाईलिखाई, सेहत और सुरक्षा से जुड़े काम करने के लिए जाना जाता है. लिहाजा, यूथ एंबेसडर के तौर पर हिमा दास को भी बच्चों से जुड़े कामों पर ध्यान देना होगा और उन्हें जागरूक करना होगा.

इस सम्मान से खुश हिमा दास ने ट्वीट कर के लिखा था, ‘यूनिसेफ इंडिया की यूथ एंबेसडर बन कर मैं खुश और आभारी हूं. मैं ज्यादा से ज्यादा बच्चों को उन के सपने पूरा करने के लिए बढ़ावा देना चाहूंगी.’

जब किसी खिलाडी को इस तरह के किसी समाजसेवी काम से जोड़ा जाता है तो उस का खेल के साथसाथ निजी जिंदगी में भी आत्मविश्वास बढ़ता है और हिमा दास जैसी किसी जुझारू खिलाडी के लिए तो यह और ज्यादा गौरव की बात है जिन्होंने सिर्फ अपने खेल के जुनून और मेहनत के दम पर यह मुकाम पाया है, क्योंकि कभी मिल्खा सिंह और पीटी उषा के बाद तो हम लोगों में से किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि असम के एक छोटे से गांव की एक दुबलेपतले कद की लड़की अमेरिका और दूसरे विकसित देशों की एथलीटों को टक्कर देगी.

सामाजिक सरोकारों पर चिंतित होने वाली हिमा दास ने साल 2013 में असम में हो रही आपराधिक घटनाओं और दूसरी सामाजिक समस्याओं को ध्यान में रख कर एक एक्टिविस्ट ग्रुप ‘मोन जई’ बनाया था. जिस का हिंदी में मतलब है मेरी चाहत. उम्मीद है कि अब यूनिसेफ जैसी इंटरनेशनल संस्था के साथ जुड़ कर यह ‘फर्राटा क्वीन’ अपनी चाहत को पूरा कर पाएगी.

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