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पिस्ता मलाई ब्रोकली

सामग्री मैरिनेट

– 100 ग्राम हंग कर्ड

– 20 ग्राम काजू का पेस्ट

– 25 ग्राम ताजा क्रीम

– थोड़ा सा कालीमिर्च का पाउडर

– थोड़ा सा बूरा

– 25 एमएल सलाद औयल

– 25 ग्राम कद्दूकस किया प्रोसीड चीज

– थोड़ा सा इलायची पाउडर

– थोड़ा सा अदरक बारीक कटा

– 20 ग्राम हरी चटनी

विधि

ब्रोकली के मीडियम साइज के टुकड़े कर उन्हें उबाल कर थोड़ी देर के लिए ठंडे पानी में डाल छोड़ दें.

फिर सारी मैरिनेट सामग्री को अच्छी तरह मिक्स कर उसे ब्रोकली के टुकड़ों पर लगाएं.

अब टुकड़ों को सीख में लगा कर तंदूर में सुनहरा होने तक पका कर हरी चटनी के साथ सर्व करें.

आंगन से फूटी विषबेल : दोस्त की पत्नी के साथ मिल कर रची साजिश

17 सितंबर, 2018 की सुबह करीब साढ़े 6 बजे सिपाही सुजान सिंह अपनी पिकेट ड्यूटी पूरी करने के बाद अपने कमरे पर जा रहे थे. रास्ते में उन्होंने बहोरिकपुर गांव के पास काली नदी के किनारे सड़क पर एक सैंट्रो कार खड़ी देखी. वह लावारिस कार के नजदीक पहुंचे तो चौंक गए, क्योंकि कार के आगेपीछे लाशें पड़ी हुई थीं. दोनों लाशें पुरुषों की थीं.

मामला गंभीर था. सुजान सिंह ने घर न जा कर इस की सूचना तुरंत थाना जहानगंज को दी. सूचना पा कर थानाप्रभारी संजीव सिंह राठौर पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंच गए. काली नदी के किनारे सड़क पर खड़ी सैंट्रो कार के आगेपीछे पड़ी दोनों लाशें कुचली हुई थीं. कार का एक पहिया खुला हुआ था. जो पहिया खुला था, उसी तरफ जैक लगा हुआ था. ऐसा लग रहा था जैसे कार का पहिया बदलते वक्त कोई दूसरा वाहन उन दोनों को रौंदता हुआ निकल गया था.

इसी बीच एसपी संतोष कुमार मिश्रा, एएसपी त्रिभुवन सिंह फील्ड यूनिट और डौग स्क्वायड ले कर वहां पहुंच गए. लाशों का बारीकी से निरीक्षण किया गया तो दोनों मृतकों के शरीर पर कई जगह चोटों के निशान मिले. उन के हाथों पर बांधे जाने और किसी चीज से गला कसने के निशान भी मिले. कार की पिछली सीट खुली हुई थी. उस खाली जगह पर खून से सना करीब 3 मीटर काला कपड़ा पड़ा मिला, इस से जाहिर था दोनों की हत्या करने के बाद उन्हें वहां ला कर डाला गया था और इसे रोड ऐक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश की गई.

लाशों की हुई शिनाख्त

मृतकों की तलाशी ली तो उन की जेब से 2 मोबाइल फोन बरामद हुए. उन में मिले नंबरों पर बात कर के थानाप्रभारी को उन के घर वालों के फोन नंबर मिल गए तो उन्होंने मृतकों के घर वालों को घटना की सूचना दे दी. थोड़ी देर में दोनों के परिजन रोतेबिलखते वहां पहुंच गए. उन्होंने मृतकों को पहचान लिया.

जिस की लाश कार के अगले दाहिने पहिए के पास पड़ी थी, उस का नाम अनिल सिंह (36) था और दूसरी लाश सुरजीत सिंह उर्फ गोधन (20) की थी. दोनों पड़ोसी जिले कन्नौज के सौरिख थानाक्षेत्र के गांव टड़ारायपुर के रहने वाले थे. गोधन अनिल का सगा भतीजा था.

दोनों के परिवार वालों से पूछताछ की गई. अनिल की पत्नी आरती ने बताया कि अनिल 16 सितंबर की शाम को घर से निकले थे, कहां जा रहे थे, इस बाबत उन्होंने कुछ नहीं बताया था.

पूछताछ के बाद दोनों लाशों को पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया गया. मृतक गोधन के मामा चंद्रपाल सिंह ने थानाप्रभारी संजीव राठौर को बताया कि उन का भांजा गोधन और गोधन के चाचा अनिल कन्नौज के गांव टिउला निवासी गोविंद के साथ मिल कर अवैध शराब का धंधा करते थे.

घटना से 10-12 दिन पहले पैसों को ले कर दोनों का गोविंद से झगड़ा हो गया था. गोविंद ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी, आज दोनों की लाशें मिल गईं.

चंद्रपाल की तहरीर पर पुलिस ने गोविंद व अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया. केस की जांच के लिए एसपी संतोष मिश्रा द्वारा स्वाट टीम प्रभारी कुलदीप दीक्षित को संजीव राठौर की मदद के लिए लगा दिया. मृतक अनिल के मोबाइल पर आनेजाने वाले मोबाइल नंबरों को चैक किया गया. उन में एक नंबर ठाकुर के नाम से सेव था. उस नंबर की 2 मिस्ड काल आई हुई थीं. थानाप्रभारी ने वह नंबर मिलाया तो रिंग जाने पर भी दूसरी ओर से फोन नहीं उठाया गया.

पत्नी पर हुआ संदेह

पुलिस ने पूछताछ के लिए अनिल की पत्नी आरती को थाने बुला लिया. आरती से अलगअलग बिंदुओं पर पूछताछ की गई. पुलिस को उस पर शक हुआ तो उस के मोबाइल नंबर की काल डिटेल्स निकलवाई गई. उस से पता चला कि घटना वाले दिन की शाम को आरती ने एक मोबाइल नंबर पर काल की थी. फिर देर रात उसी नंबर से आरती को काल आई थी.

शक बढ़ने पर थानाप्रभारी संजीव राठौर ने महिला आरक्षी की उपस्थिति में उस से सख्ती से पूछताछ की तो उस ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उस ने घटना में शामिल सभी लोगों के नाम बता दिए. इस के बाद पुलिस ने ढाबा संचालक नीरज राजपूत को 21 सितंबर को दोपहर के समय उस के छाचा भोगांव स्थित ढाबे से गिरफ्तार कर लिया. आरती और नीरज ने पूछताछ में पूरी कहानी बयां कर दी.

उत्तर प्रदेश के जिला कन्नौज के सौरिख थाना क्षेत्र के गांव टड़ारायपुर में जाहर सिंह अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी शकुंतला देवी के अलावा 2 बेटे थे- सुनील उर्फ गंगू और अनिल.

सुनील मानसिक विक्षिप्त था. जबकि अनिल गलत संगत में पड़ कर आपराधिक प्रवृत्ति का बन गया था. मेहनत करने के बजाय उसे गैरकानूनी कामों में पैसा ज्यादा नजर आता था. वह ज्यादा पैसे कमाने लिए कुछ भी करने को तैयार रहता था. इसी सोच के चलते उस की दोस्ती ज्यादातर गैरकानूनी काम करने वालों से थी. उस के दोस्त अवैध शराब के धंधे में लिप्त थे. अनिल भी इस धंधे में घुसता चला गया. इस काम से उस के पास खूब पैसा आने लगा.

इसी बीच 10 साल पहले उस का विवाह आरती से हो गया. आरती काफी खूबसूरत थी, वह भी उस के साथ खुश था. कालांतर में आरती 2 बेटों की मां बन गई.

2 नंबर की कमाई से बना अमीर

अनिल ने शराब के धंधे में काफी पैसा कमाया. उस पैसे को दूसरे कामों में लगा कर उस ने और भी ज्यादा कमाई करनी शुरू कर दी. उस ने एक ढाबा भी खोल लिया, जोकि काफी अच्छा चल रहा था. इसी की आड़ में उस का अवैध शराब का धंधा बेरोकटोक चलता रहा. कई बार वह पुलिस के हत्थे भी चढ़ा. उस के खिलाफ कन्नौज के सौरिख और छिबरामऊ थाने में लूट, वाहन चोरी और शराब के धंधे के 13 मुकदमे दर्ज थे.

अनिल के साथ कन्नौज के इंदरगढ़ थाने के टिउला गांव का रहने वाला गोविंद उर्फ सुमित भी काम करता था. 25 वर्षीय गोविंद अविवाहित था. 4 बहनों में वह इकलौता भाई था और दूसरे नंबर का था. गोविंद को शराब का धंधा सिखाने वाला अनिल ही था, इसलिए गोविंद अनिल को अपना गुरु मानता था.

धीरेधीरे गोविंद शराब के धंधे में इतना माहिर हो गया कि उस ने कन्नौज के तिर्वा कस्बे में अपनी खुद की अवैध शराब की फैक्ट्री लगा ली, जिसे वह अपने पिता कुंवर सिंह और दोस्त रमन यादव निवासी गांव कुंडेपुरवा की मदद से चला रहा था. वह अनिल के शराब के धंधे को खूब बढ़ा रहा था.

2 साल पहले अनिल को नकली शराब बेचने के जुर्म में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. जेल जाने से पहले अनिल गोविंद को अपने परिवार, होटल और शराब के धंधे को संभालने की जिम्मेदारी सौंप गया था.

अनिल की गैरमौजूदगी में गोविंद ने उस के होटल को तो संभाल ही लिया, साथ ही वह उस के परिवार की भी देखभाल कर रहा था. घर आनेजाने के दौरान अविवाहित गोविंद का आरती पर मन डोल गया. वह अपने मन की बात नजरों से ही आरती पर जाहिर कर चुका था. आरती भी उस से नजरें मिलने पर मुसकरा देती थी. गोविंद ने आरती की आंखों में प्यास देख ली थी. उधर आरती ने भी गोविंद की आंखों में कामना देख ली थी.

गोविंद ने भाभी पर डाले डोरे

गोविंद आरती को भाभी कहता था. आरती उस से महज एक साल बड़ी थी, जबकि अनिल आरती से 10 साल बड़ा था. उम्र के इस बड़े फासले ने आरती को गोविंद की तरफ बढ़ने के लिए मजबूर कर दिया. एक दिन जब गोविंद उस के घर पहुंचा तो आरती को देख कर उस से रहा नहीं गया. मौका देखते ही वह आरती से बोला, ‘‘एक बात कहूं भाभी?’’

‘‘कहो,’’ आरती ने मुसकराते हुए कहा.

‘‘आप हो बहुत अच्छी. जब से आप को देखा है, आप को बारबार देखने को मन मचलता है.’’

‘‘यह सब कहने की बातें हैं. पहले अनिल भी यही कहते थे. सब मर्द एक जैसे होते हैं. बाहर से कुछ, अंदर से कुछ.’’ आरती ने ताना मारा.

‘‘अनिल भाई तो तुम्हारी कद्र करना ही नहीं जानते,’’ गोविंद को जैसे मौका मिल गया, ‘‘उन को आप के सुख की परवाह है कहां?’’

‘‘तुम को कैसे पता?’’ आरती ने भौंहें सिकोड़ीं.

‘‘भाभी, इंसान की आंखें भी तो दिल का हाल बयां कर देती हैं. मैं ने तुम्हारी आंखों में तुम्हारे दिल का दर्द देखा है.’’

गोविंद की बातों में आरती को भी मजा आ रहा था. यही वजह थी कि वह चाय तक बनाना भूल गई. अचानक खयाल आया तो वह बोली, ‘‘मैं तो चाय बनाना ही भूल गई.’’

‘‘रहने दो भाभी, बस आप को देख लिया तो मन भर गया. अब मैं चलता हूं.’’ यह कह कर गोविंद चला तो गया लेकिन आरती की हसरतों को हवा दे गया.

कामनाओं के ठौर की तलाश में आरती गोविंद पर आ कर ठहर गई. अनिल से कभीकभार मिलने वाला सुख वह गोविंद की बांहों में पाने को आतुर हो गई.

अब दोनों के बीच होने वाला हंसीमजाक छेड़छाड़ तक पहुंच गया था. गोविंद जब भी घर आता तो बच्चों के लिए खानेपीने की चीजें ले आता था. एक दिन आरती ने उसे दबे स्वर में टोका, ‘‘तुम्हें बच्चों की खुशी का तो बहुत खयाल रहता है, लेकिन भाभी की खुशी का कोई खयाल नहीं.’’ कह कर वह मुसकराई.

गोविंद फौरन उस का इशारा समझ गया. बात यहां तक पहुंच गई कि गोविंद उचित मौके की तलाश में रहने लगा. एक दिन वह आरती के पास उस समय पहुंचा जब बच्चे स्कूल गए हुए थे. उस के अंदर आते ही आरती बोली, ‘‘मुझे मालूम है, तुम क्यों आए हो?’’

‘‘तुम ने ही तो बुलाया था.’’ गोविंद हंसा.

‘‘अरे मैं ने कब बुलाया तुम्हें?’’

गोविंद एक कदम आगे बढ़ा, ‘‘अच्छा भाभी सच बताना, जब भी मैं तुम से बात करता हूं, क्या तुम्हारी आंखों की चाहत मुझे नहीं बुलातीं?’’ कह कर उस ने आरती का हाथ पकड़ लिया, ‘‘उन्हीं के बुलाने पर आया हूं मैं.’’

‘‘बात कहने का अंदाज अच्छा है. हाथ छोड़ो तो चाय बना कर लाऊं.’’

‘‘इस तनहाई में मैं चाय पीने नहीं, आप की आंखों के जाम पीने आया हूं.’’ गोविंद आरती के नजदीक खिसक आया, ‘‘बोलो पिलाओगी?’’

‘‘मैं ने कब मना किया है,’’ आरती का भी धैर्य जवाब दे गया था. वह गोविंद के

सीने से लगते हुए बोली, ‘‘पर पहले ये जो दरवाजा खुला हुआ है, इसे तो बंद कर लो.’’

आरती का खुला आमंत्रण पा कर गोविंद की बांछें खिल गईं. वह फटाफट दरवाजा बंद कर आया. उस के बाद दोनों ने अपनी हसरतें पूरी कीं. फिर तो दोनों एकदूसरे के ऐसे दीवाने हुए कि हर रोज ही उन के बीच यह खेल खेला जाने लगा. गोविंद अब अनिल के होटल में रहने के बजाय उस के घर में रहने लगा. वह भी आरती के पति की तरह से.

अनिल एक बात भूल गया था कि गलत काम में साथ देने वाले से वफादारी की उम्मीद करना अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारने जैसा होता है. जिस इंसान को उस ने धंधा सिखाया, गुरु बन कर उसे धंधे के गुर सिखाए, वही आस्तीन का सांप बन कर उस की बसीबसाई गृहस्थी को निगल रहा था.

जमानत पर आने के बाद अनिल को पता चली हकीकत

मार्च, 2018 में अनिल जमानत पर जेल से छूट कर आया तो उसे अपनी पत्नी और गोविंद के रिश्ते के बारे में पता चल गया. इस के बाद उस ने आरती को खूब पीटा और गोविंद को अपने धंधे से निकाल कर उस से दूरी बना ली.

इस के कुछ समय बाद ही गोविंद की तिर्वा स्थित अवैध शराब फैक्ट्री पुलिस ने पकड़ ली, जिस में गोविंद के पिता कुंवर सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार कर के जेल भेज दिया. जबकि गोविंद और रमन मुकदमे में वांछित थे. गोविंद को शक था कि उस की फैक्ट्री अनिल ने पकड़वाई है. वह अनिल को इस का सबक सिखाना चाहता था. साथ ही वह इस साजिश में उस की पत्नी आरती को भी शामिल करना चाहता था.

गोविंद मानता था कि अनिल की वजह से उस का बहुत नुकसान हुआ है. इसलिए वह उस से बदला लेना चाहता था. इस के अलावा उस की नजर अनिल की करोड़ों की संपत्ति और उस की बीवी पर भी थी. इस बारे में उस ने आरती से बात की तो वह भी तैयार हो गई. सोचविचार कर गोविंद और आरती ने अनिल को मौत के घाट उतारने का फैसला कर लिया.

‘‘कैसे मारोगे? पकड़े नहीं जाओगे?’’ आरती ने उस से पूछा.

‘‘हम होशियारी से ऐसी चाल चलेंगे कि हमें कोई नहीं पकड़ पाएगा.’’ गोविंद बोला.

‘‘ऐसी क्या योजना है जरा हम भी तो जानें?’’ आरती ने उत्सुकता दिखाई.

‘‘यह काम मेरे दोस्त नीरज राजपूत, रमन और मेरा ममेरा भाई सोनू कर देंगे. लेकिन इन सब के लिए पैसे देने पड़ेंगे.’’

‘‘कितने?’’

‘‘यही कोई ढाई लाख रुपए.’’

‘‘ठीक है, मेरे एकाउंट में 5 लाख रुपए पड़े हैं. उन में से दे दूंगी.’’ आरती बोली.

आरती के तैयार होने के बाद गोविंद ने अनिल की हत्या की सुपारी एक लाख रुपए में अपने दोस्त नीरज राजपूत को दे दी. नीरज एटा के नयागांव थाना क्षेत्र के गुनामई गांव में रहता था. छाचा भोगांव में उस का एक होटल चल रहा था.

शराब कंपनियों द्वारा शराब में प्रयोग होने वाला कैमिकल टैंकरों में भर कर सप्लाई होता है. टैंकरों के ड्राइवरों से सांठगांठ कर के नीरज उन से कम पैसों में कैमिकल की 4-5 कैन भरवा लेता था. फिर वह कैमिकल शराब माफियाओं को सप्लाई करता था.

शराब के धंधे से जुड़ा हर माफिया उसे जानता था और कैमिकल के लिए उस के पास जाता था. अनिल और गोविंद भी उस के पास जाते थे.

गोविंद ने नीरज राजपूत से बातचीत कर के अनिल की हत्या की योजना बना ली और उसे एडवांस में 30 हजार रुपए भी दे दिए. इस के अलावा उस ने रमन और ममेरे भाई अवनीश उर्फ सोनू को भी इस साजिश में शामिल कर लिया. रमन तो उस के धंधे का साथी था. अवनीश कानपुर देहात के गमीरापुर गांव में रहता था. लेकिन इस समय कन्नौज के कस्बा थाना तिर्वा के कालका नगर में गोविंद के साथ रह रहा था.

अवनीश को अपने काम से घाटा हो गया था, जिस से वह कर्ज में डूब गया था. उसे तुरंत एक लाख रुपए की जरूरत थी. उस ने गोविंद से पैसे मांगे तो उस ने पैसे देने के बदले अनिल की हत्या में साथ देने को कहा. इस के लिए अवनीश तैयार हो गया. इस के बाद सभी ने मिल कर हत्या की योजना बनाई.

नीरज ने 15 सितंबर, 2018 को फोन कर के अनिल को कैमिकल ले जाने के लिए अपने होटल पर बुलाया, क्योंकि अनिल नकली शराब बनाने में कैमिकल प्रयोग करता था. गोविंद, रमन और सोनू पूरी रात नीरज के होटल पर रुके, लेकिन अनिल वहां नहीं आया तो 16 सितंबर की सुबह तीनों लौट गए.

16 सितंबर की शाम को अनिल ने नीरज को फोन किया और बताया कि वह किसी वजह से कल नहीं आ सका था. अभी कुछ देर में होटल पहुंच जाएगा. इस के बाद आरती ने भी गोविंद को अनिल के घर से निकलने की बात बता दी.

अनिल अपनी सैंट्रो कार से अपने भतीजे सुरजीत उर्फ गोधन को ले कर नीरज के होटल के लिए निकला. उन के पीछेपीछे गोविंद भी रमन और सोनू के साथ अपनी कार से चल दिया. होटल से कुछ पहले ही गोविंद ने अपनी कार रोक दी. फिर तीनों होटल में पीछे के गेट से दाखिल हो गए और ऊपरी मंजिल पर बने कमरे में पहुंच गए.

उन्होंने नीरज से कहा कि वह अनिल को ऊपर के कमरे में ही ले कर आ जाए. नीरज अनिल को ले कर जैसे ही ऊपर के कमरे में पहुंचा, गोविंद और सोनू ने अनिल के सिर पर लोहे की रौड से प्रहार किए, जिस से अनिल गिर पड़ा. गोविंद ने दोनों साथियों की मदद से अनिल के गले में अंगौछा डाल कर कस दिया, जिस से उस की मृत्यु हो गई. इस के बाद नीरज ने अनिल की जेब में रखे एक लाख रुपए निकाल लिए. इसी बीच नीरज के मोबाइल पर किसी का फोन आ गया तो वह वहां से चला गया.

बिना वजह मारा गया सुरजीत

इस के बाद गोधन को ऊपर दूसरे कमरे में बुलाया गया. गोधन ऊपर आया तो उन लोगों को सामने देख कर चिल्लाने लगा. गोविंद ने उस का मुंह दबा कर कमरे के अंदर कर लिया. सोनू ने उस के पैर पकड़े और रमन ने हाथ. इस के बाद गोविंद ने उस के गले में अंगौछा डाल कर कस दिया, जिस से दम घुटने से उस की भी मृत्यु हो गई. दोनों की हत्या करने के बाद सभी लोग पूरी रात होटल में ही रहे.

सुबह 4 बजे के करीब एक लाश को अनिल की कार में दूसरी लाश को गोविंद की कार में रख कर ये लोग छिबरामऊ फतेहगढ़ मार्ग पर काली नदी के कनारे ले गए. फिर सड़क किनारे अनिल की कार खड़ी कर के उस की लाश को कार के आगे और गोधन की लाश कार के पीछे डाल दी.

कार के पिछले पहिए को सूजा मार कर पंक्चर कर दिया. इस के बाद गोविंद ने अपनी कार से जैक निकाल कर अनिल की कार में लगाया और एक पहिया खोल दिया. फिर अपनी कार दोनों की लाशों पर 2 बार चढ़ाई ताकि मामला एक्सीडेंट का लगे. तब तक लोगों का आनाजाना शुरू हो गया था.

दोनों लाशों को ऐसे ही छोड़ कर ये लोग होटल गए. कार को और कमरे को अच्छी तरह साफ कर के सब अपनेअपने घर को लौट गए. गोविंद ने आरती को फोन कर के कह दिया, ‘‘भाईसाहब को जहां पहुंचना था, पहुंच गए.’’

लेकिन उन की होशियारी उन के काम नहीं आई और पकडे़ गए. 24 सितंबर, 2018 को ये लोग थानाप्रभारी संजीव राठौर और स्वाट प्रभारी कुलदीप दीक्षित के हत्थे चढ़ गए. दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने आलाकत्ल लोहे की 2 रौड, एक अंगौछा और हत्या की सुपारी की रकम में से बचे 15 हजार रुपए भी बरामद कर लिए.

इस से पहले गिरफ्तार नीरज की निशानदेही पर अनिल की जेब से निकाले गए एक लाख रुपए, एक सूजा और 4 मोबाइल फोन पुलिस ने बरामद कर लिए थे. हत्याभियुक्त रमन एक दूसरे मुकदमे में कोर्ट में हाजिर हो कर जेल चला गया था.

कानूनी लिखापढ़ी के बाद सभी अभियुक्तों को न्यायालय में पेश कर के न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया.

-कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

अमेरिकी कंपनी भारत में अपने नकली सामान से हैरान

शौपिंग के नाम पर धोखाधड़ी. औनलाइन शौपिंग में ही नहीं, छोटी दुकानों से खरीदारी में भी. ज़रुरत है आप को होशियार रहने की. वर्ना डुप्लीकेट मैन्युफैक्चरर और सेलर्स किसी को भी नहीं छोड़ेंगे. ‘पैसा उगाहो कैसे भी’ इस को मन्त्र मानते हुए धोखेबाजों का धोखाधड़ी का धंधा शबाब पर है.

नकली निर्माता और नकली विक्रेता ग्राहकों को बेवकूफ़ बना रहे हैं. वे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम में कमी होने का नाजायज फायदा उठा रहे हैं. सूचीबद्ध उत्पादों का कम से कम 40 प्रतिशत डुप्लीकेट निर्माताओं द्वारा किया जाता है. ऐसे में अगर आप औनलाइन शौपिंग करते हैं तो सतर्क हो जाइए. इस की वजह ई-कौमर्स साइट्स पर धड़ल्ले से बिकने वाले नकली प्रोडक्ट्स हैं. यानी, आप ने औनलाइन शौपिंग साइट्स पर जो सामान ब्रांडेड समझ कर खरीदा है, हो सकता है कि वह नकली हो.

अमेरिका की मशहूर कौफ़ी हाउस चेन स्टारबक्स कारपोरेशन के कई प्रोडक्ट्स के डुप्लीकेट प्रोडक्ट्स भारत में बेचे जा रहे हैं. बता दें कि स्टारबक्स भारत में अपने किसी भी प्रोडक्ट को थर्ड पार्टी सेलर्स के ज़रिए नहीं बेचती.  इस के बावजूद फ्लिपकार्ट और अमेज़न समेत कई ई-कौमर्स प्लेटफार्म पर उस के लोगो वाले कौफ़ी मग और टम्बलर समेत कई सामान सर्च में टाप पर दिखते हैं.

मालूम हो कि टाटा और स्टारबक्स कंपनियों का जौइंट वेंचर यानी संयुक्त उपक्रम है टाटा स्टारबक्स, जो भारत में स्टारबक्स आउटलेट्स को संचालित करता है.  टाटा स्टारबक्स के प्रवक्ता का कहना है, “कंपनी अपने ब्रांड्स से जुड़ी जालसाजी को गंभीरता से लेती है.  हमें जालसाजी की जानकारी मिली है.  हम ने इस मामले को सक्षम अधिकारियों का सामने उठाया है.”

प्रिय ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि अगर वे ई-कौमर्स या देश में मौजूद छोटी दुकानों से स्टारबक्स के कौफी मग, टम्बलर या दूसरे प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं, तो होशियार हो जाएं क्योंकि इन में से ज़्यादातर नकली हैं.  हालांकि, स्टारबक्स कारपोरेशन ने कई फर्म्स और व्यक्तिगत लोगों के खिलाफ देश के कई शहरों में रिटेलर्स को कंपनी के नकली प्रोडक्ट्स सप्लाई करने के लिए मामला दर्ज कराया है.

मामला दर्ज होने के बाद छानबीन शुरू की जा चुकी है. स्टारबक्स के वकीलों ने हाल ही में कोर्ट द्वारा नियुक्त लोकल कमिश्नर्स के साथ दिल्ली के सदर बाज़ार इलाके में छापेमारी की थी. इस दौरान स्टारबक्स के लोगो और ट्रेडमार्क लगे कई डुप्लीकेट सामान जब्त भी किए गए थे.

गौरतलब है कि स्टारबक्स ने साल की शुरुआत में ही कस्टम विभाग के अधिकारियों को एक बड़े डुप्लीकेट कन्साइनमेंट की जानकारी दी थी, जिस में स्टारबक्स के लोगो वाले मग और टम्बलर समेत कई प्रोडक्ट्स थे. यह कन्साइनमेंट चीन से आ रहा था, जिसे अधिकारियों ने बंदरगाह पर जब्त कर लिया था.

स्टारबक्स के डुप्लीकेट प्रोडक्ट्स के अमेजन पर बेचे जाने पर अमेजन इंडिया के प्रवक्ता का कहना है, “कस्टमर एक्सपीरियंस के मामले में हमारा स्टैण्डर्ड काफी ऊंचा है.  हम नियमों का उल्लंघन करने वाले सेलर्स के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने को ले कर प्रतिबद्ध हैं.  जब इस तरह के मामले को हमारे सामने लाया जाएगा, हम कार्यवाही करेंगे.”

वहीं, फ्लिपकार्ट के प्रवक्ता का कहना है, “फ्लिपकार्ट एक ज़िम्मेदार मार्किटप्लेस है, जो देशभर में मौजूद सेलर्स और कस्टमर्स को एकदूसरे से जोड़ता है.  प्रोडक्ट्स को सेलर्स लिस्ट करते हैं. हरेक सेलर को कड़ी गाइडलाइन्स से हो कर गुज़ारना पड़ता है.” हालांकि, फ्लिपकार्ट को उच्च छूट पर फर्जी उत्पादों को कथित तौर पर बेचने के लिए कोर्ट में खींच लिया गया है.

गौरतलब है कि इंडियन और ग्लोबल कम्पनियां लम्बे समय से देश में जालसाजी और नकली प्रोडक्ट्स की समस्या का सामना कर रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले 5 वर्षों में ई-कौमर्स सेक्टर की तेज ग्रोथ ने इस तरह के डुप्लीकेट प्रोडक्ट को बनाने वालों के लिए हालात उन के अनुकूल बना दिया है, क्योंकि उन का सामान औनलाइन के जरिए तथाकथित सेलर्स द्वारा बिक जाता है.

कई बार आप जब औनलाइन शौपिंग करते हैं, तो आप के पास असली सामान के बजाय नकली सामान पहुंच जाता है. ऐसे मामलों में ज्यादातर कुछ हो नहीं पाता. सो, ग्राहकों को काफी नुकसान झेलना पड़ता है. लेकिन अब भारत सरकार एक व्यवस्था करने जा रही है. अगर आप के साथ ऐसी कोई धोखाधड़ी होती है, तो इस के बूते आप को पूरा पैसा वापस मिलेगा. इस नई व्यवस्था को ‘कैशबैक’ नाम दिया जा सकता है.

फलों के छिलके से चमकाएं अपना घर

खट्टे फल जैसे, नींबू, संतरा, मुसम्मी और अंगूर आदि वजन घटाने में भी लाभदायक होते हैं. इनमें विटामिन, प्रोटीन, न्यूट्रियंट्स होता है. क्या आप जानती हैं, इस फल से  घर के कई सामान को साफ  किया जा सकता हैं. खाने के साथ-साथ घर के किसी समान को साफ करना हो, तो यह स्ट्रिस फ्रूट बड़े ही काम का है. तो आइए जानते हैं, आप इस फल से घर का कौन-कौन सा सामान साफ कर सकती हैं.

सबसे पहले आफ इन फलों का छिलका सूखा लीजिये और उसे मिक्सर में पीस लें और उसमें सिरका मिला दें. फिर इससे टेबल, धातु, शीशा साफ कीजिये. इसके प्रयोग से हल्के कपडों पर पडे हुए दाग भी आसानी से मिटाया जा सकता है. कपडो की अलमारी में कीडे ना लगे इसके लिये उसमें संतरे का छिलका रख दें.

कौपर या ब्रास का शोपीस साफ करने के लिये आप नींबू के छिलके का प्रयोग कर सकती हैं. यही नहीं बल्कि कठोर प्लास्टिक का समान, शीशे के दरवाजे, टपरवेयर, खिडकी और लोहे के दाग आदि को मिटाने के काम आ सकता है. कपडे पर दाग लग गया हो तो नींबू का रस रगड दीजिये और फिर देखिये कमाल. कू़डे के डिब्बे में नींबू का टुकडा डालने से उसमें बदबू नहीं आती है.

क्या आपके बच्चे भी करते हैं घर गंदा?

जैसा कि आप जानती हैं अगर आपके बच्चें 2-4 साल की उम्र के हैं तो आपके लिए घर को साफ रखना काफी मुश्किल होगा. पर बच्चें घर के रौनक होते हैं और घर की साफ-सफाई तो आप स्मार्टली भी कर सकती हैं. तो देर किस बात की, बताते हैं आपको कुछ आसान तरीकें जिससे आप घर को साफ-सुथरा रख सकती हैं.

–  जब भी आपका बच्चा तेल, शैम्पू या कोई भी ऐसी चीज़ ज़मीन पर गिराता है जिसे साफ करना मुश्किल हो, तो साफ करनेवाली जगह पर ढेर सारा बेबी पावडर छिड़के. यह तरल पदार्थ को सोख लेगा जिसके बाद किसी कपड़े या पोंछे से आप इसे साफ कर सकती हैं.

–  अक्सर बच्चे चबाने के बाद गम को यहां-वहां चिपकाने या थूकने का काम करते हैं और कई बार यह च्यूइंग गम बालों और कपड़ों पर भी चिपक जाता है. अगर ऐसा हो तो कपड़े को आधे घंटे के लिए फ़्रीज़र में रखें. जब च्यूइंग गम पूरी तरह से जम जाए तो आप उसे खरोंच या रगड़कर निकाल सकती हैं. अगर च्यूइंग गम बालों में लग गया है तो थोड़ी-सी बर्फ रगड़िए. जब गम कड़क होकर जम जाएगा तो उसे संभालकर बालों से निकाल लें.

–  सोफे पर स्केच पेन के निशान अगर आपकी भी परेशानी यही है तो टूथपेस्ट या नेल पौलिश रिमूवर की मदद से आप इसे साफ कर सकती हैं.

झूठे सपने के पीछे की लीला : जब उस की बेटी पर जमने लगी बाबा की निगाह

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के थाना एमआईजी के थानाप्रभारी तहजीब काजी 15 जुलाई, 2018 को अपने कार्यालय में बैठे डीआईजी हरिनारायण चारी द्वारा आदेशित एक महिला के शिकायती पत्र को पढ़ रहे थे. निर्मला रघुवंशी नाम की उस महिला ने डीआईजी के सामने पेश हो कर तांत्रिक जगदीश पालनपुरे द्वारा शारीरिक शोषण किए जाने और लाखों रुपए ठगने की बात बताई थी.

डीआईजी ने उस का प्रार्थना पत्र उचित काररवाई के लिए थानाप्रभारी तहजीब काजी के पास भेज कर इस मामले में आरोपी तांत्रिक के खिलाफ काररवाई करने के आदेश दिए थे. प्रार्थना पत्र पढ़ने के बाद थानाप्रभारी ने निर्मला रघुवंशी से फोन पर बात की और अगले दिन उसे थाने बुला लिया.

निर्मला रघुवंशी निर्धारित समय पर एमआईजी थाने पहुंच गई. उस ने थानाप्रभारी को आपबीती सुनाई. उस से बात कर के तहजीब काजी समझ गए कि जगदीश पालनपुरे ने तंत्रमंत्र के नाम पर निर्मला की न केवल इज्जत लूटी, बल्कि पैसे हड़पने के लिए उसे अपना मकान भी बेचने के लिए मजबूर किया और फिर उस का सारा पैसा हड़प गया. उन्होंने निर्मला रघुवंशी को महिला कांस्टेबल के साथ मैडिकल जांच के लिए अस्पताल भेज दिया.

इस के बाद पुलिस ने निर्मला की रिपोर्ट पर जगदीश पालनपुरे के खिलाफ बलात्कार और धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया. रिपोर्ट दर्ज होने की भनक मिलने पर जगदीश कानून की गिरफ्त से बचने के लिए कहीं दूर भाग सकता था. यह बात ध्यान में रख कर थानाप्रभारी ने उसी समय जांच की जिम्मेदारी एसआई नितिन पटेल को सौंप कर एक पुलिस टीम जगदीश की तलाश में महेश्वर रवाना कर दी.

आरोपी जगदीश घर पर ही मिल गया. पुलिस उसे हिरासत में ले कर थाने लौट आई. खुद को पहुंचा हुआ तांत्रिक समझने वाले जगदीश को यह उम्मीद नहीं थी कि पुलिस उस पर हाथ डाल सकती है. उस ने पहले तो थानाप्रभारी तहजीब काजी पर अपने तांत्रिक होने और मक्का सरकार का शागिर्द होने का रुआब दिखाने की कोशिश की.

इस के बाद उस ने तंत्रमंत्र की ताकत भी दिखानी चाही, लेकिन जब थानाप्रभारी ने उसे कानून की थोड़ी सी झलक दिखाई तो वह शांत हो गया. इस के बाद उस ने बिना किसी लागलपेट के अपना जुर्म स्वीकार कर लिया.

आवारागर्द बन गया तांत्रिक

पुलिस ने उसे अदालत में पेश कर के उस 2 दिन की रिमांड पर ले लिया और महेश्वर स्थित उस के घर की तलाशी ली. उस के घर से बड़ी मात्रा में तंत्रमंत्र में उपयोग होने वाली सामग्री और कई अचल संपत्तियों के कागजात मिले, जो पुलिस ने कब्जे में ले लिए.

जैसे ही लोगों के कानों तक जगदीश की गिरफ्तारी की खबर पहुंची तो उस के द्वारा ठगे गए कुछ और लोग थाने पहुंच कर उस की काली करतूतों का पिटारा खोलने लगे, जिस से इस कामुक और शातिर तथाकथित तांत्रिक की कहानी कुछ इस तरह पता चली.

इंदौर के गांव महेश्वर में पैदा हुआ जगदीश पालनपुरे बचपन से ही शातिरदिमाग था. पढ़ाई में उस का मन लगता नहीं था, सो दिन भर घर के पास बनी एक मजार पर बैठ कर आवारागर्दी करता रहता था. मजार का खादिम झाड़फूंक के नाम पर न केवल लोगों को ठगा करता था, बल्कि अपनी शरण में आई युवतियों को बुरी नीयत से छू कर उन का इलाज करने का ढोंग भी करता था.

मजार का खादिम जगदीश को जिन्नात की कहानियां सुनाता रहता था. खादिम के साथ रह कर जगदीश यह बात अच्छी तरह समझ गया था कि तंत्रमंत्र और झाड़फूंक के नाम पर लोगों को आसानी से न केवल बेवकूफ बनाया जा सकता है, बल्कि मोटी कमाई भी की जा सकती है. कमाई के अलावा इस काम में खूब मौजमस्ती भी करने को मिलती है.

इस के बाद उस ने लोगों में यह अफवाह फैला दी कि उसे मक्का सरकार की सवारी आती है. लोगों ने उस की इस बात पर भरोसा करना शुरू कर दिया तो उस ने धीरेधीरे लोगों के मन में यह बात बैठा दी कि वह जिन्नात का बादशाह है. उस के कब्जे में 3 हजार जिन्नात हैं, जो उस की आज्ञा पर किसी को भी पलभर में रंक से राजा बना सकते हैं.

सीधेसादे लोग अमूमन ऐसी बातों पर आसानी से भरोसा कर लेते हैं. इस का नतीजा यह हुआ कि जगदीश की आसपास के इलाके में एक तांत्रिक के रूप में पहचान हो गई और महेश्वर में उस की अच्छीखासी दुकान जम गई. लेकिन जगदीश इस से खुश नहीं था.

वह चाहता था कि उस के हजारों मुरीद हों, जो उस के एक इशारे पर सब कुछ लुटाने को तैयार हो जाएं. परेशानी यह थी कि वह जिस छोटे से कस्बे में रहता था, वहां उस के भक्तों की संख्या सीमित थी. वह अपनी दुकानदारी और बढ़ाना चाहता था, इसलिए उस ने इंदौर में अपनी गद्दी जमाने का विचार बनाया.

इंदौर के नेहरू नगर में संतोष महाराज नाम का उस का एक खास चेला रहता था. संतोष से बात करने के बाद जगदीश ने संतोष महाराज के घर पर अपनी गद्दी लगा दी. यहां आ कर उस ने अखबारों में बड़ेबड़े विज्ञापन दे कर हर समस्या को हल करने की गारंटी दी तो जल्द ही इंदौर में संतोष महाराज के घर उस के चाहने वालों की भीड़ लगनी शुरू हो गई.

निर्मला रघुवंशी पर बाबा हुआ लट्टू

नेहरू नगर में संतोष महाराज के घर के सामने निर्मला रघुवंशी अपने पति और 5 साल की बेटी के साथ रहती थी. निर्मला रघुवंशी का पति रमेश थोड़ा मंदबुद्धि था. वह लोगों के घरों में काम कर के किसी तरह परिवार का गुजारा कर रही थी. निर्मला रघुवंशी भले ही सांवली थी, लेकिन उस के नैननक्श और शरीर आकर्षक था.

अपने काम से काम रखने वाली निर्मला को तांत्रिक जगदीश के बारे में उस रोज पता चला जब एक रात उस के पति ने उसे बताया कि तांत्रिक जगदीश ने तुम्हारी किस्मत में राजयोग बताया है. कह रहे थे कि तुम्हारी पत्नी लोगों के घरों में काम करने के लिए पैदा नहीं हुई. वह रानी है उस के तो चारों तरफ दासदासियों की भीड़ लगी होनी चाहिए.

निर्मला ने पति से पूछा तो रमेश ने बताया कि जगदीश तांत्रिक संतोष महाराज के यहां आते हैं और बहुत पहुंचे हुए हैं. हजारों जिन्नात उन के गुलाम हैं. वह अपने मुंह से 1000 और 500 के नोट निकाल कर यूं ही लोगों को बांट देते हैं.

‘‘तो 2-4 हजार रुपए तुम ही ले आते. कुछ तो काम चलता.’’ वह बोली.

‘‘अरे तू 2-4 हजार की बात कर रही है, वो तो कह रहे थे कि तेरी पत्नी 2 जहान की मलिका है, बस उस का सोया भाग्य जगाना पड़ेगा. फिर देखना धनवैभव उस के कदमों में पड़ा रहेगा.’’ रमेश बोला.

रात भर निर्मला के दिमाग में पति द्वारा बताई गई बात घूमती रही. मन कहता कि बाबा सही कहता है, मैं रानी जैसी ही सुंदर तो हूं. जबकि मन यह भी कहता कि यह सब झूठ है. वह नौकरानी है और नौकरीचाकरी करतेकरते ही मर जाएगी.

लेकिन रमेश और निर्मला रघुवंशी की सोच से अलग सच्चाई कुछ और ही थी. कुछ दिन पहले आतेजाते तांत्रिक जगदीश की नजर निर्मला रघुवंशी पर पड़ गई थी. उसे देख कर जगदीश का मन डोल गया था.

तांत्रिक क्रिया के बहाने वह कई स्त्रियों के संग संबंध बना चुका था. लेकिन उन सब की सुंदरता को एक साथ जोड़ देता तो भी वे अकेली निर्मला की सुंदरता का मुकाबला नहीं कर सकती थीं, इसलिए वह निर्मला रघुवंशी को पाने के उपाय सोचने लगा था.

निर्मला गरीबी में जीवन बिता रही थी. पति भी बेहद ही सीधा था, सो बाबा ने पति को निशाना बना कर निर्मला रघुवंशी पर तीर चलाने के लिए यह पूरी कहानी रची थी. सीधासादा रमेश उस की कहानी में फंस गया था. उस ने जगदीश की बात पर भरोसा कर लिया. इतना ही नहीं, वह पत्नी पर बारबार बाबा के पास जा कर मिलने का दबाव बनाने लगा. जब पति ने ज्यादा ही जबरदस्ती की तो निर्मला एक दिन शाम के समय तांत्रिक जगदीश पालनपुरे के दरबार में पहुंच गई.

निर्मला फंस गई जाल में

बाबा तो पहले से ही निर्मला रघुवंशी के आने का इंतजार कर रहा था, इसलिए उसे आया देख बाबा खुश हो गया. उस ने पहले तो जानबूझ कर निर्मला रघुवंशी को नजरअंदाज किया. उस के बाद जब कुछ अंधेरा घिर आया, तब उस ने निर्मला को अपने सामने बैठा कर उस की किस्मत में लिखे राजयोग के बारे में बताया.

कुछ देर बाद जब निर्मला वहां से उठ कर जाने लगी तो जगदीश बाबा ने अंधेरे का फायदा उठा कर हाथ की सफाई से अपने मुंह से 5-5 सौ के 4 नए नोट निकाल कर उस के हाथ पर रखते हुए कहा, ‘‘जा, जिन्न तुझ पर प्रसन्न है. यह प्रसाद लेती जा.’’

इस करिश्मे से निर्मला की आंखें फटी रह गईं. बाबा के मुंह से नोटों की बरसात होते देख वह उस के चरणों में गिर गई तो जगदीश काफी देर तक उस की पीठ पर हाथ फेरता रहा. फिर उस ने निर्मला को बाद में आने को कह कर घर भेज दिया. निर्मला पहले ऐसे बाबाओं पर भरोसा नहीं करती थी, पर वह जगदीश बाबा की मुरीद हो गई.

बाबा ने उसे अपनी लच्छेदार बातों की जो घुट्टी पिलाई थी, उस की एक खुराक से  वह खुद को रानी समझने लगी थी. वैसे भी गरीब को पैसे का लालच कम नहीं होता. बाबा के गुलाम जिन्न ने उसे 2 हजार रुपए दिए थे, जो उस जैसी गरीब औरत के लिए 50 हजार के बराबर हैसियत रखते थे. उस दिन के बाद वह अकसर जगदीश बाबा की चौकी पर जाने लगी, जहां बाबा उस से ढेर सारी बातें करता और विदा होते समय मुंह से कभी 1000 तो कभी 500 रुपए की बरसात कर के उस के हाथ पर रख देता था.

पति रमेश तो पहले से ही बाबा का भक्त था. निर्मला भी उस की मुरीद हो गई. उस के घर में जगदीश बाबा के नाम की माला जपी जाने लगी. दूसरी ओर जब जगदीश बाबा ने देखा कि निर्मला रघुवंशी उस के कब्जे में आ चुकी है तो उस ने एक दिन निर्मला से कहा, ‘‘तुम रानी हो. 2 जहान की मलिका चल कर मेरे पास आए, यह शोभा नहीं देता. इसलिए आगे से मैं खुद ही तुम्हारे घर आ जाया करूंगा.’’

यह सुन कर निर्मला गर्व से फूली नहीं समाई. उसे सब से बड़ी खुशी तो इस बात की थी कि बाबा के कदम उस के घर पर पड़ेंगे. इसलिए वह घर की साफसफाई कर के बाबा के आने का इंतजार करने लगी.

निर्मला के घर को बना लिया अड्डा

4 दिन बाद बाबा उस के घर आया. फिर वह अकसर आने लगा और फिर एक समय ऐसा भी आया कि उस ने संतोष का घर छोड़ कर निर्मला के घर में ही अपनी गद्दी जमा ली. इस के बाद उस के दूसरे भक्त भी बाबा से मिलने निर्मला रघुवंशी के घर आने लगे. यहां बाबा जिस बिस्तर पर सोता था, सुबह उस के तकिए के नीचे कभी 1000 का तो कभी 500 का नोट रखा मिलता था.

निर्मला इस के बारे में बाबा से पूछती तो वह कहता कोई जिन्न रख गया होगा, तू रख ले. बाबा ने उसे बताया कि उसे मक्का सरकार की सवारी आती है. तमाम जिन्नात उस के गुलाम हैं, जिन की मदद से वह उसे 2 जहान की मलिका बना देगा.

बाबा के पास दूसरे शहरों से भी कुछ भक्त आते थे. उन सब के सामने बाबा करोड़ों रुपए की बातें करता था. निर्मला को अपनी संपत्ति के कागजात भी दिखाता था. इस तरह कुछ ही महीनों में बाबा ने निर्मला रघुवंशी और उस के पति को पूरी तरह अपने प्रभाव में ले लिया था.

एक दिन बाबा ने अचानक निर्मला से 16 लाख रुपए की मांग की. उस ने कहा कि हालफिलहाल वह उसे 16 लाख रुपए दे दे, यह कर्ज वह जल्द ही उसे 2 जहान की मलिका बना कर उतार देगा.

निर्मला रघुवंशी बाबा पर आंख बंद कर के भरोसा करने लगी थी, इसलिए उस ने अपने जेवर बेच कर बाबा को 80 हजार रुपए दे दिए. लेकिन इतने पर भी बात नहीं बनी तो निर्मला ने साढ़े 13 लाख में अपना मकान बेच कर सारा पैसा बाबा को दे दिया और खुद किराए के मकान में रहने लगी.

2 जहान की रानी बनने जा रही निर्मला रघुवंशी अब खुद के मकान से निकल कर किराए के मकान में आ गई थी. लेकिन बाबा के ऊपर न तो उस का भरोसा कम हुआ था और न उस के पति का.

जब निर्मला किराए के मकान में रहने लगी तो बाबा भी उस के इसी मकान में चौकी लगाने लगा. इस तरह बाबा ने साल भर में ही निर्मला का सारा धन लूट लिया था. निर्मला के पास अब ऐसा कुछ नहीं बचा था, जिसे बेच कर वह बाबा की तिजोरी भर देती. यह बात जगदीश भी जानता था, इसलिए अब उस ने अपना पूरा ध्यान निर्मला का तन लूटने पर लगा दिया, जिस के लिए वह साल भर से अपने मन में खयाली पुलाव पका रहा था.

जब कुछ नहीं बचा तो पूजा के बहाने किया रेप

निर्मला ने पुलिस को बताया, ‘‘4 साल पहले रात के समय बाबा ने मेरे घर में एक पूजा की, जिस के बाद मंत्र पढ़ कर एक पुडि़या में कुछ बांध कर मेरे पति को दिया और उस पुडि़या को उसी समय शिप्रा नदी में विसर्जित करने को कहा. आधी रात हो चुकी थी, पति कुछ सकुचाया तो बाबा ने कहा कि डरो मत, मेरे दूसरे चेले भी तुम्हारे साथ जाएंगे. बाद में बाबा के चेले मेरे पति को ले कर चले गए.

‘‘आधी रात हो चुकी थी. घर पर मैं और बाबा ही थे. बेटी दूसरे कमरे में सो रही थी. बाबा ने फिर पूजा करने का ढोंग किया और मुझे चंदन घुले पानी से नहलाने के बाद बोला रानी यहां आओ, मेरी गोद में बैठ जाओ. आज से 2 जहान की मल्लिका बनने की तुम्हारी यात्रा शुरू हो रही है. आज तुम बाबा की गोद में बैठो, फिर जल्द ही तुम रानी बन कर राजगद्दी पर बैठोगी.

‘‘मैं सकुचाई, लेकिन उस के कहने पर उस की गोद में बैठ गई. जिस के बाद वह धीरेधीरे अपने हाथों की हरकतें बढ़ाते हुए मेरे कपड़े खोलने लगा. मैं ने ऐसा करने से मना किया तो उस ने कहा कि यह तो जिन्न सरकार की इच्छा है.

‘‘रानी बनने से पहले वह तुम्हारा शरीर शुद्ध करेंगे. ऐसा करने से पाप नहीं लगेगा, बल्कि तुम्हारी किस्मत का बंद दरवाजा खुल जाएगा. मैं बाबा का विरोध भी कर रही थी, मगर उस की इच्छा पूरी न करने पर जिन्न के नाराज हो जाने का भी डर सता रहा था.

‘‘सुबह 4 बजे जब पति लौट कर घर आया, तब तक बाबा मेरे साथ कई बार रेप कर चुका था. इस के बाद तो यह रोज का काम हो गया. बाबा पूजा करता, फिर पूजा के बहाने पति को बाहर भेजने के बाद अपनी हसरतें पूरी करता.’’

निर्मला रघुवंशी ने बताया कि इस दौरान बाबा यही कहता था कि संबंध तो उस के अंदर आया जिन्न बनाता है, इसलिए जिन्न की मरजी पूरी करने के लिए वह उस के साथ तरहतरह से अप्राकृतिक मैथुन करता. वह पिछले 4 साल से जगदीश बाबा के पाप को अपने शरीर पर ढो रही थी.

अब निर्मला को बाबा की बातों की चाल समझ आने में लगी थी. लेकिन वह अपना सब कुछ गंवा चुकी थी. उस के पास खोने के लिए कुछ और नहीं था. फिर भी वह कभीकभी सोचती थी कि शायद कोई चमत्कार हो जाए.

बेटी पर निगाह जमी तो खुलीं आंखें

बाबा की लूट अभी पूरी नहीं हुई थी. निर्मला की बेटी जो अपनी मां की तरह ही खूबसूरत थी, 10 साल की हो चुकी थी, इसलिए बाबा की नजर अब बेटी पर जम चुकी थी. यह बात निर्मला को तब समझ में आई, जब उस ने एक दिन बाबा को अपनी बेटी की पीठ पर बेशरमी से हाथ फेरते देख लिया.

उस ने बाबा की इस हरकत का विरोध किया तो जगदीश बेशरमी से बोला, ‘‘अरे तुम तो नाहक परेशान हो. तुम रानी बनोगी तो आखिर इसे भी तो राजकुमारी बनना पड़ेगा न. जिन्न के साथ सोने से तुम्हारी बेटी भी पवित्र हो जाएगी.’’

बस यहीं से बाबा जगदीश पालनपुरे के बुरे दिन शुरू हो गए. क्योंकि निर्मला किसी भी कीमत पर अपनी बेटी की इज्जत खराब नहीं करवाना चाहती थी. इन 5 सालों में उसे इतना तो समझ आ ही गया था कि बाबा केवल बातों का बाबा है.

निर्मला को यह भी जानकारी मिल चुकी थी कि बाबा कई दूसरी औरतों के साथ भी ऐसा कर चुका है. इसलिए अपनी बेटी को बचाने के लिए उस ने बाबा से दूरी बनाने की कोशिश की. अपने पति को भी इस बारे में बताया, लेकिन पति ने ध्यान नहीं दिया तो निर्मला खुद ही पुलिस के पास पहुंच गई. जिस के बाद एमआईजी थानाप्रभारी तहजीब काजी ने 24 घंटे के अंदर ही इस बलात्कारी तांत्रिक को गिरफ्तार कर लिया.

तथाकथित तांत्रिक जगदीश पालनपुरे को फिर से न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. ?

यकीन मानिए, ब्रेकअप के बाद आप बेहतर इंसान बन जाते हैं

कभीकभी वे चीजें जो हमें बेहद प्रिय होती हैं, हम से छीन ली जाती हैं, हम से दूर हो जाती हैं. हम उन्हें अपने पास रखने का भरपूर प्रयास करते हैं पर वे हमारे हाथ से फिसल ही जाती हैं, जिस से हमें दुख होता है. जब हम किसी के साथ पूरा जीवन बिताने की सोच रहे होते हैं, और वह अचानक दूर हो जाता है तो ऐसी परिस्थिति में हमें समझ ही नहीं आता कि कहां जाएं, क्या करें पर धीरेधीरे समय बीतता है तो हम जीने के तरीके सीखते जाते हैं.

खालीपन तो काफी समय तक रहता ही है पर जब एक बार हमारा दिल उसे भूलने लगता है या फिर उसे क्षमा करने लगता है तो हमें महसूस होता है कि इस ब्रेकअप ने हम में कितना सकारात्मक परिवर्तन किया है. आप को बता दें कि ब्रेकअप के बाद आप बेहतर इंसान बन जाते हैं यदि आप इन बातों पर विचार करें :

दूसरे की तकलीफ समझते हैं : आप जान जाते हैं कि कैसा लगता है जब विश्वास टूटता है, और जिस के प्रति आप समर्पित हों और जब वह आप का नाजायज फायदा उठाए तो क्या होता है. जो इस परिस्थिति से गुजरता है वही जानता है कि कितनी तकलीफ होती है. इसी पल आप निश्चित कर लेते हैं कि आप किसी के साथ ऐसा नहीं करेंगे, क्योंकि आप खुद उस दौर से गुजर जो चुके होते हैं.

खुद को मजबूत बनाएं : बे्रकअप से आप को यह सीख मिल जाती है कि अपनी खुशी के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं होना है. इस से आप महसूस करते हैं कि प्यार आप के जीवन में किसी की जरूरत का नाम नहीं है, उन के साथ रहने की इच्छा है. ब्रेकअप के बाद आप कभी भी खुद को पूरा करने के लिए किसी का सपोर्ट नहीं चाहेंगे.

भावानात्मक रूप से मजबूत : आप को अपने भीतर की ताकत का अंदाजा होगा. कभी जो आप को अपनी पूरी दुनिया लगता था, अब वह आप के लिए बस एक धुंधली सी याद रहेगा. आप को एहसास होगा कि आप कितनी दूर निकल आए हैं. आप जान जाएंगे कि अब आप को कोई चीज नहीं रोकेगी और आप अपनी उम्मीद से ज्यादा भावनात्मक रूप से मजबूत इंसान हैं, यह एक आश्चर्यजनक अनुभूति होगी.

स्वयं की महत्ता :  जब आप तनमन से किसी रिश्ते को बनाए रखने के लिए अपने आत्मसम्मान की भी चिंता न करें और तब भी रिश्ता न बचे, तब आप स्वयं का ज्यादा सम्मान करना शुरू कर देते हैं. आप अपनी महत्ता स्वीकारने लगते हैं और आप यह सोचना शुरू कर देते हैं कि भविष्य में आप बहुत कुछ पाने लायक हैं और यह खयाल कि आप ने अपनी तरफ से रिश्ता बचाने का हर संभव प्रयास किया था, आप को मूव औन होने के लिए आश्वस्त करता है और आप भविष्य में स्वयं को इस स्थिति से हमेशा सावधान रखते हैं.

सकारात्मक सोचें : जब हमारे सब प्रयास विफल हो जाते हैं, अकसर तब हम विद्रोही हो जाते हैं. पहले सीरियस ब्रेकअप के बाद आप अकसर वे सब चीजें करने लगते हैं जो आप नहीं किया करते थे, आप दुनिया को और नजर से देखते हैं और जान पाते हैं कि अब तक आप लोगों को समझ ही नहीं पा रहे थे. कभीकभी प्यार तब भी अचानक हो सकता है जब हम इस की आशा ही नहीं कर रहे होते हैं.

अच्छेबुरे की पहचान : आप समझने लगते हैं कि लोग हमेशा वैसे ही नहीं होते हैं जैसे वे देखने में लगते हैं. अब आप जानते हैं कि हर चीज जिस का आरंभ अच्छा हो, जरूरी नहीं कि उस का अंत भी अच्छा होगा, इसलिए आप इतने सीधे, मूर्ख भी नहीं रह पाते कि हर किसी पर विश्वास करते रहें. अब आप सचेत रहते हैं.

प्यार की परिभाषा : हम अकसर उन लोगों के पीछे अपना समय बिता देते हैं जिन के बारे में हम सोचते हैं कि हमें उन की जरूरत है पर कभीकभी बाद में कटु सत्य सामने आता है. एक बार आप अपने असफल रिश्ते से बाहर आ जाएं, आप जान जाएंगे कि उस व्यक्ति में जिसे परफैक्ट समझते हैं और उस व्यक्ति में जो आप के लिए सही है, कितना बड़ा अंतर है. किसी भी सफल जोड़े से पूछिए जिन्होंने जीवन की कठिनाइयों को पार किया है, वे आप को बताएंगे कि पहली बार मिलते ही उन्हें प्यार नहीं हो गया होगा. जिन्हें आप परफैक्ट समझते थे जब उन के साथ बात बिगड़ जाती है, आप को समझ आने लगता है कि प्यार के बारे में आप की सोच गलत थी.

सब से महत्त्वपूर्ण चीज, ब्रेकअप आप को स्वयं पर निर्भर रहना सिखा देता है. जब ब्रेकअप होता है, हम स्वयं को अकेला पाते हैं, तब हम स्वयं की ओर ध्यान देते हैं. खुद को पसंद कर के, जैसे भी हम हैं, आगे बढ़ते हैं. इसलिए ब्रेकअप से हौसला न खोएं, आत्मविश्वास बनाए रखें.

कम जगह में कैसे बढ़ाएं प्यार, इसका तरीका हम आपको बताते हैं

परिवार एक एकल इकाई है, जहां पेरैंट्स और बच्चे एकसाथ रहते हैं. इन्हें प्रेम, करुणा, आनंद और शांति का भाव एकसूत्र में बांधता है. यही उन्हें जुड़ाव का एहसास प्रदान करता है. उन्हें मूल्यों की जानकारी बचपन से ही दी जाती है, जिस का पालन उन्हें ताउम्र करना पड़ता है. जो बच्चे संयुक्त परिवार के स्वस्थ और समरसतापूर्ण रिश्ते की अहमियत समझते हैं, वे काफी हद तक एकसाथ रहने में कामयाब हो जाते हैं.

साथ रहने के फायदे

बच्चों के साथ जुड़ाव और बेहतरीन समय बिताने से हंसीठिठोली, लाड़प्यार और मनोरंजक गतिविधियों की संभावना काफी बढ़ जाती है. इस से न सिर्फ सुहानी यादें जन्म लेती हैं बल्कि एक स्वस्थ पारिवारिक विरासत का निर्माण भी होता है.

इस का मतलब यह नहीं है कि हमेशा ही सबकुछ ठीक रहता है. एक से अधिक बच्चों वाले घर में भाईबहनों का प्यार और उन की प्रतिद्वंद्विता स्वाभाविक है. कई बार स्थितियां मातापिता को उलझन में डाल देती हैं और वे अपने स्तर पर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं तथा घर में शांतिपूर्ण स्थिति का माहौल बनाते हैं.

कम जगह में आपसी प्यार बढ़ाने के खास टिप्स बता रही हैं शैमफोर्ड फ्यूचरिस्टिक स्कूल की फाउंडर डायरैक्टर मीनल अरोड़ा :

व्यक्तिगत स्वतंत्रता की व्यवस्था : प्रत्येक बच्चे के लिए एक कमरे में व्यक्तिगत आजादी का प्रबंध करने से उन में व्यक्तिगत जुड़ाव की भावना का संचार होता है. प्रत्येक बच्चे के सामान यानी खिलौनों को उस के नाम से अलग रखें और उस की अनुमति के बिना कोई छू न सके. बच्चों में स्वामित्व की भावना परिवार से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है जिस से अनेक सकारात्मक परिवर्तन होते हैं. कमरे को शेयर करने के विचार को दोनों के बीच आकर्षक बनाएं.

नकारात्मक स्थितियों से बचाएं बच्चों को : भाईबहनों में दृष्टिकोण के अंतर के कारण आपस में झगड़े होते हैं. इस के कारण वे कुंठा को टालने में कठिनाई महसूस करते हैं और किसी भी स्थिति में नियंत्रण स्थापित करने के लिए झगड़ते रहते हैं, आप अपने बच्चों को ऐसे समय इस स्थिति से दूर रहने के लिए गाइड करें.

हमें अपने बच्चों को झगड़े की स्थिति को पहचानने में सहायता करनी चाहिए और इसे शुरू होने के पहले ही समाप्त करने के तरीके बताने चाहिए.

व्यक्तिगत सम्मान की शिक्षा दें : प्रत्येक व्यक्ति का अपना खुद का शारीरिक और भावनात्मक स्थान होता है, जिस की एक सीमा होती है, उस का सभी द्वारा सम्मान किया जाना चाहिए. बच्चों को समर्थन दे कर उन की सीमाओं को मजबूत करें.

उन्हें दूसरे बच्चों की दिनचर्या और जीवनशैली का सम्मान करने की शिक्षा भी दें. यदि दोनों भाईबहन पहले से निर्धारित सीमाओं से संतुष्ट हैं तो उन के बीच पारस्परिक सौहार्द बना रहता है.

क्षतिपूर्ति सुनिश्चित करें : कभी ऐसा भी समय आता है, जब एक बच्चा दूसरे बच्चे की किसी चीज को नुकसान पहुंचा देता है या उस से जबरन ले लेता है. ऐसे में पेरैंट्स को चाहिए कि जिस बच्चे की चीज ली गई है उस बच्चे की भावनाओं का खयाल कर उस के लिए नई वस्तु का प्रबंध करें और गलत काम करने वाले बच्चे को उस की गलती का एहसास करवाएं.

इस से परिवार में अनुशासन और ईमानदारी सुनिश्चित होगी. इस से भाईबहनों को भी यह एहसास होता है कि पेरैंट्स उन का खयाल रखते हैं और घर में न्याय की महत्ता बरकरार है.

चरित्र निर्माण में सहयोग : एकदूसरे के नजदीक रहने से दूसरे के आचारव्यवहार पर निगरानी बनी रहती है. किसी की अवांछनीय गतिविधि पर अंकुश लगा रहता है. यानी कि बच्चा चरित्रवान बना रहता है. किसी समस्या के समय दूसरे उस का साथ देते हैं. दूसरी और, सामूहिक दबाव भी पड़ता है और बच्चा गलत कार्य नहीं कर पाता. अत: मौरल विकास अच्छा होता है.

बच्चे की जागरूकता की प्रशंसा करें : यदि कोई बच्चा समस्या के समाधान की पहल करता है और नकारात्मक स्थिति से बाहर निकलने की कोशिश करता है तो उस की प्रशंसा करें.

समस्या के समाधान के सकारात्मक नजरिए को सम्मान प्रदान करें, क्योंकि इस से उस का बेहतर विकास होगा और वह परिपक्वता की दिशा में आगे बढ़ेगा. प्रोत्साहन मिलने से हम अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित होते हैं.

इस से बच्चों को अपनी उपलब्धियों पर गर्व का एहसास होगा और वे इस स्वभाव को दीर्घकालिक रूप से आगे बढ़ाएंगे. हमेशा बच्चे द्वारा नकारात्मक स्थिति में सकारात्मक समाधान तलाशने के प्रयास की प्रशंसा करें.

याद रखें इन नुस्खों को अपना कर आप अपने बच्चों को संभालने में आसानी महसूस करेंगे. भाईबहन एकदूसरे के पहले मित्र और साझीदार होते हैं, जो एक सुंदर व स्वस्थ समरसता को साझा करते हैं, इस से कम जगह में भी पूरा परिवार खुशीखुशी जीवन व्यतीत कर सकता है.

शूद्र मतदाताओं को योगी ने दिलाई उन की जाति के देवता की याद

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान की एक चुनावी सभा में मतदाताओं को हनुमान की जाति की जानकारी दी तो तूफान सा उठ खड़ा हुआ. जातियों के संगठन कानूनी नोटिस भेज कर माफी की मांग कर रहे हैं. योगी पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का मामला भी दर्ज कराया गया है. विपक्ष उन पर हमलावर हो रहे हैं.

योगी आदित्यनाथ ने राजस्थान के अलवर जिले के मलपुरा की एक जनसभा में कहा था, ‘‘बजरंगबली हनुमान एक ऐसे लोक देवता हैं जो खुद दलित हैं, वंचित हैं, वनवासी हैं. भारतीय समुदाय को उत्तर से ले कर दक्षिण तक और पूर्व से ले कर पश्चिम तक सब को जोड़ने का काम बजरंगबली करते हैं इसलिए बजरंगबली जैसा संकल्प होना चाहिए. हमारा संकल्प होना चाहिए कि जब तक राम का काज नहीं होगा, राष्ट्र का कार्य नहीं होगा तब तक विश्राम नहीं लेंगे.’’

उन के इस बयान की मीडिया में खूब आलोचना हो रही है. मीडिया में उन्हें निशाने पर लिया जा रहा है. राजस्थान सर्व ब्राह्मण महासभा ने योगी को कानूनी नोटिस भेज कर 3 दिन में माफी की मांग की है. संगठन के प्रमुख सुरेश मिश्रा ने नोटिस में कहा है कि योगी आदित्यनाथ ने कई श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. उन पर वोटों के लिए हनुमान की जाति को बीच में लाने का आरोप लगाया गया है.

योगी पर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में भी मामला दायर कराया गया है. त्रिलोकचंद्र दिवाकर नामक व्यक्ति ने उन पर धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया है.

उत्तरप्रदेश कांग्रेस के उपाध्यक्ष और प्रदेश एससी, एसटी अध्यक्ष बलवंत प्रसाद चौधरी कहते हैं कि अगर हनुमान एससी हैं तो योगी को भाजपा के सहयोगी संगठन बजरंग दल का एससी, एसएटी संगठन में विलय कर देना चाहिए.

असल में योगी आदित्यनाथ ने गलत कहां कहा. वह ठीक ही तो कह रहे हैं कि राम के परमभक्त सेवक हनुमान दलित, वंचित जाति के थे. यानी वह सेवक थे, दास थे और वर्णव्यवस्था के अनुसार ऊंची जातियों की सेवा करने वाली शूद्र सेवक, दास जातियों का कर्तव्य अपने मालिक की सेवा करना है.

दरअसल पौराणिक नायकों के जो सेवक, दास थे, उन्हें पिछड़ी जातियों के देवता बना कर उन की पूजापाठ में निचली वंचित जातियों को झोंक दिया गया. हनुमान जैसे सेवकों के जगहजगह मंदिर बनवा दिए गए क्योंकि पिछले दशकों में पिछड़ी जातियों के पास उन की मेहनत के कारण खूब पैसा आया. इस पैसे को धर्म के धंधेबाजों ने पिछड़ों से निकलवा कर अपनी जेबों में भरने के लिए इस तरह के जतन किए.

असल में योगी शूद्र जातियों को यही तो जानकारी देना चाहते हैं. निचली दलित, पिछड़ी वंचित जातियों के मतदाताओं को याद दिलाना चाहते हैं कि तुम दास, सेवक जातियों, देखो, हम तुम्हारी जाति के सेवक हनुमान के मालिक राम का अयोध्या में भव्य मंदिर बनवाना चाह रहे हैं. हम ने तुम लोगों को राम के सेवक हनुमान के रूप में देवता दिया. उन की पूजापाठ करने का अधिकार दिया.

योगी के कहने का निहितार्थ यही है कि जिस तरह हनुमान ने अपने मालिक राम की सेवा की, उसी तरह तुम भी अपने ऊंची जाति के मालिकों के चरणों में ध्यान लगाओ. उन के हर आदेश का पालन करो. उन की सेवा करो और वोट गौ, ब्राह्मणों के कल्याण की सोचने वाली हमारी पार्टी को ही दें. इसी में तुम्हारा कल्याण होगा क्योंकि तुम्हारी जाति के हनुमान ने भी ऐसा ही किया था इसलिए तुम भी ऐसा ही करो.

धर्म के नाम पर पिछड़ों पर देवता थोप दिए गए और अब धर्म और राजनीतिक गठजोड़ मिल कर वोटों के लिए निचली जातियों के वोट हासिल करने के लिए इस हथकंडे को आजमा रहे हैं.

किसान मुक्ति मार्च : अयोध्या नहीं पहले किसानों की सुनो

‘लाठी गोली खाएंगे फिर भी आगे जाएंगे’, ‘मोदी सरकार होश में आओ…’ जैसे सरकार विरोधी नारे लगाते हुए देश की राजधानी दिल्ली में देशभर से आए किसान आंदोलन कर रहे हैं.

इस रैली को ‘किसान मुक्ति मार्च’ का नाम दिया गया है जिस का आयोजन ‘आल इंडिया किसान संघर्ष समिति’ की ओर से किया जा रहा है, जिस में 200 से अधिक किसान संगठन शामिल हैं.

क्या है मांग

किसानों की मांग है कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाए और वहां किसानों के कर्ज और उपज की लागत को ले कर पेश किए गए 2 प्राइवेट बिल पारित करवाए.

किसान मुक्ति मार्च में उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश आदि राज्यों से आए किसानों का मानना है कि देश के किसान इस वक्त बदहाली में जी रहे हैं और उन्हें फसल की लागत का उचित मूल्य भी नहीं मिल पाता.

विपक्षी दलों का समर्थन

सभी विपक्षी दल किसान मुक्ति मार्च का समर्थन कर रही हैं और मोदी सरकार की आलोचना करते हुए देश के किसानों की मांगों को मानने का दबाव डाल रही हैं. विपक्षी दलों का मानना है कि मोदी सरकार किसान विरोधी है.

क्यों हताश हैं किसान

पिछले कुछ महीनों में तीसरी बार देशभर के किसान सरकार को जगाने के लिए दिल्ली का रूख कर रहे हैं तो जाहिर है किसान केंद्र सरकार की नीतियों से सहमत नहीं हैं और उन में घोर निराशा है.

मालूम हो कि इस से पहले भी किसानों ने अपनी मांगें मनवाने के लिए दिल्ली की ओर रूख किया था पर उन्हें दिल्ली बौर्डर पर रोक दिया गया था और उन पर पुलिस द्वारा आंसू गैस के गोले, पानी की बौछारें और लाठियां तक बरसाई गई थीं.

किसानों का यह मानना कि सरकार अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा उठा कर देश को भटका रही है और किसानों को नजरअंदाज कर रही है, कई मायनों में यह सही भी है.

क्योंकि एक सर्वे में यह खुलासा हुआ है कि 1995 से ले कर 2015 के बीच लगभग 3 लाख किसान सरकारी उदासीनता की वजह से कर्ज में डूब कर आत्महत्या तक कर चुके हैं, यह सरकारों के खोखले वादों की परतों को खोलता है कि सरकारें किसानों के प्रति कितनी संवेदनशील रही हैं.

सोशल मीडिया पर अपील

किसान मुक्ति मार्च में सोशल मीडिया के द्वारा भी लोग किसानों का साथ देने की अपील कर रहे हैं कि वे घरों से निकल कर किसानों का साथ दें. डीयू के शिक्षक भी किसानों के समर्थन में हैं.

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक विकास योगी ने एक ट्वीट कर सरकार को आड़े हाथों लिया है. राज ने ट्वीट किया है, “हम हर चीज महंगी खरीदते हैं और सस्ती बेचते हैं. हमारी जान भी सस्ती है. देश के 3 लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं.”

दिल्ली के सीएम भी किसानों के पक्ष में

किसानों के इस मार्च में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल भी शामिल हो सकते हैं, जो शुरू से ही मोदी सरकार पर हमलावर रहे हैं. जेडीयू से अलग हुए शरद पवार ने एक बयान में कहा है कि मोदी सरकार किसान विरोधी है.

केंद्र को चेतावनी

उधर, किसानों ने केंद्र सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि सरकार ने हमारी मांगें नहीं मानी तो 2019 के लोकसभा चुनाव में सरकार को इस की कीमत चुकानी पड़ेगी.

पर शुरू से ही जातिधर्म में बंटी भाजपा सरकार जो कुंभ मेले में करोड़ों खर्च कर रही है, अयोध्या में लाखों दीप जला कर राम नाम और मंदिर का जाप कर रही है, यह देखने वाली बात होगी कि देश की अर्थव्यवस्था में मुख्य भूमिका निभाने वाले किसानों की वह कितनी सुनती है?

विश्लेषक मानते हैं कि यह चुनावी समय है, इसलिए सरकार फूंकफूंक कर कदम रखेगी पर पिछले साढ़े 4 साल में सरकार को किसानों की याद अगर नहीं आई तो यह खतरे की घंटी भी है. फिलहाल तो सरकार पर यह कहावत सटीक बैठती है, ‘का वर्षा जब कृषि सुखाने?’

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