छोटे शहर की मानसिकता और वहां की स्थानीय भाषा के पुट के साथ फिल्मकार सचिन गुप्ता ने एक हास्य फिल्म बनाने का असफल प्रयास किया है. कमजोर पटकथा के चलते एक जानी पहचानी कहानी भी असर नही छोड़ती.

हास्य फिल्म ‘‘मनसुख चतुर्वेदी की आत्मकथा’’ की कहानी  उत्तर प्रदेश के इटावा शहर की है. जहां एक पंडित (सिकंदर खान) के घर जन्में मनसुख चतुर्वेदी (संदीप सिंह) अपने आपको सिनेमा जगत का सुपर स्टार समझते हैं. वह अब तक मुंबई यानी कि बौलीवुड पहुंचे भी नहीं हैं, मगर ईटावा वालों के बीच वह काफी लोकप्रिय हैं. वह वहां स्थानीय थिएटर के साथ जुड़े हुए हैं. उनकी हरकतों से उनके पिता (सिकंदर खान) भी परेशान रहते हैं.

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